राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) शाखा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के बड़े फंडिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए औरंगाबाद के रफ़ीक चांद शेख को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद सरहदी जिले जैसलमेर के निवासी झबरा राम से जुड़े जासूसी नेटवर्क के कई चौंकाने वाले राज सामने आए हैं। पुलिस जांच में यह साफ हो चुका है कि जासूसी के आरोप में जनवरी में पकड़े जा चुके झबरा राम को पैसे पहुंचाने का मुख्य काम यही रफ़ीक चांद करता था। रफ़ीक पिछले 4 साल से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था और फर्जी बैंक खातों के जरिए झबरा राम तक देश विरोधी गतिविधियों के लिए मोटी रकम ट्रांसफर कर रहा था। खुफिया एजेंसियां अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को आपस में जोड़कर झबरा राम के स्थानीय संपर्कों को खंगाल रही हैं। सरहद पार से मिल रहे थे निर्देश, रफ़ीक था मुख्य मोहरा खुफिया सूत्रों के मुताबिक, जैसलमेर का रहने वाला झबरा राम सीधे तौर पर पाकिस्तानी जासूसी हैंडलर्स के संपर्क में आ गया था। उसे भारतीय सेना की रणनीतिक और गोपनीय जानकारियों को सरहद पार भेजने का काम सौंपा गया था। हालांकि, इस जासूसी के बदले मिलने वाले पैसों को सीधे तौर पर भेजना जोखिम भरा था। इसके लिए आईएसआई ने औरंगाबाद के रफ़ीक चांद शेख का इस्तेमाल किया। रफ़ीक ने अपने और अपने करीबियों के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। जब भी झबरा राम कोई गोपनीय दस्तावेज या सूचना पाकिस्तान भेजता, उसके बदले रफ़ीक के खातों में रकम आती और रफ़ीक उसे विभिन्न माध्यमों से जैसलमेर में बैठे झबरा राम तक पहुंचा देता था। कौन है झबराराम सुरक्षा एजेंसियों और जांच रिपोर्टों के आधार पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए काम करने वाले आरोपी झबरा राम की जैसलमेर के नेडान गांव में ईमित्र की दूकान है। उसका पूरा नाम झबरा राम मेघवाल (पुत्र भाना राम) उम्र लगभग 28 वर्ष मूल निवास, नेडान गांव, सांकड़ा थाना क्षेत्र, पोकरण (जिला- जैसलमेर, राजस्थान) है। जनवरी 2026 से वो शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (Official Secrets Act, 1923) में जेल में बंद है। वायुसेना कर्मी सुमित से भी जुड़े हैं तार जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क का दायरा सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। झबरा राम के साथ-साथ असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) सुमित कुमार को भी जनवरी में गिरफ्तार किया गया था। झबरा राम और सुमित कुमार दोनों ही रफ़ीक चांद शेख द्वारा संचालित इसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़े हुए थे। झबरा राम को जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में सेना की गतिविधियों, वाहनों के मूवमेंट और कैंपों की तस्वीरें व अन्य डेटा जुटाने की जिम्मेदारी मिली हुई थी, जिसे वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान भेज रहा था। बरामद बैंक खातों से खुलेंगे कई बड़े राज सीआईडी इंटेलिजेंस अब रफ़ीक के पास से मिले फर्जी बैंक खातों और झबरा राम के बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर रही है। पुलिस को अंदेशा है कि झबरा राम ने जासूसी के इस पैसे का इस्तेमाल पश्चिमी राजस्थान में अपने नेटवर्क को मजबूत करने और कुछ अन्य स्थानीय लोगों को लालच देकर अपने साथ मिलाने में किया हो सकता है। फिलहाल दोनों आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ की तैयारी चल रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि झबरा राम ने अब तक कौन-कौन सी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान के साथ साझा की हैं। झबरा राम का काम करने का तरीका सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों से झबरा राम के बारे में निम्नलिखित बड़े खुलासे हुए हैं: फंडिंग और रफ़ीक चांद शेख से कनेक्शन झबरा राम को हर टास्क (जैसे किसी खास सैन्य ठिकाने की फोटो भेजना) पूरा करने के एवज में पाकिस्तान से ‘मोटी रकम’ मिलती थी। हाल ही में (जून 2026 के अंत में) औरंगाबाद (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार हुए रफ़ीक चांद शेख की जांच में यह साफ हुआ है कि झबरा राम के खातों में जो पैसा आ रहा था, वह रफ़ीक ही ट्रांसफर कर रहा था। रफ़ीक ने कई फर्जी बैंक खाते खुलवा रखे थे, जिनमें आईएसआई से पैसा आता था और रफ़ीक उस पैसे को कमीशन काटकर जैसलमेर में बैठे झबरा राम तक पहुंचाता था। झबरा राम जनवरी 2026 से ही जेल में है। रफ़ीक चांद की गिरफ्तारी के बाद अब खुफिया एजेंसियां इन दोनों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस नेटवर्क में राजस्थान के कुछ और स्थानीय लोग भी शामिल हैं।
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