गोपालगंज के उचकागांव थाना क्षेत्र के संत मोड़ के पास मंगलवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। शादी समारोह से लौट रहे दो छात्रों की बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में पलट गई। हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान उचकागांव थाना क्षेत्र के हरपुर बाजार गांव निवासी गौरी शंकर मांझी के 17 वर्षीय बेटे और राजकपूर मांझी के 22 वर्षीय बेटे जिम्मी कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बारात से लौटते समय हुआ हादसा, तेज रफ्तार बनी वजह जानकारी के अनुसार, दोनों युवक एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। रात में शादी समारोह खत्म होने के बाद दोनों एक ही बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान संत मोड़ के पास बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। बताया जा रहा है कि बाइक की रफ्तार काफी तेज थी, जिस कारण चालक अपना संतुलन नहीं संभाल सका। देखते ही देखते बाइक सड़क किनारे स्थित गहरे गड्ढे में जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दोनों युवकों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। रातभर खाई में पड़े रहे शव, सुबह ग्रामीणों को मिली जानकारी घटना देर रात की होने के कारण आसपास के लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। सुनसान रास्ता होने के कारण दोनों युवक काफी देर तक खाई में पड़े रहे। सुबह जब स्थानीय ग्रामीणों की नजर सड़क किनारे गड्ढे में पड़ी क्षतिग्रस्त बाइक पर गई तो उन्होंने पास जाकर देखा। वहां दोनों युवकों के शव पड़े हुए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही उचकागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को बाहर निकलवाया। पुलिस ने शवों की पहचान कर परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों थे पढ़ाई करने वाले छात्र, परिवार में छाया मातम परिजनों के अनुसार, दोनों युवक पढ़ाई कर रहे थे। जिम्मी कुमार बीए पार्ट-1 का छात्र था, जबकि दूसरा युवक 10वीं कक्षा में पढ़ता था। दोनों दो भाइयों में सबसे छोटे बताए जा रहे हैं। कम उम्र में दोनों बेटों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलने के बाद गांव में बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। पुलिस ने शव भेजा पोस्टमॉर्टम के लिए, जांच जारी उचकागांव थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को भी अपने कब्जे में लिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसे की वजह तेज रफ्तार और बाइक का अनियंत्रित होना सामने आ रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना की पूरी जानकारी जुटा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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गोपालगंज में दो छात्रों की बाइक गड्ढे में पलटी, मौत: बारात से लौटते समय हुआ हादसा, सुबह खाई में मिले शव – Gopalganj News
गोहत्या के विरोध में हिंदू संगठनों का चक्काजाम: खंडवा-मूंदी रोड़ पर सिहाड़ा में प्रदर्शन, आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग – Khandwa News
बकरीद के दौरान गोहत्या प्रकरण को लेकर सोमवार को हिंदू संगठनों ने खंडवा-मूंदी रोड स्थित सिहाड़ा गांव में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उनके मकानों को बुलडोजर से तोड़ने की मांग उठाई। करीब दो घंटे तक चले आंदोलन के कारण मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सिहाड़ा गांव में एकत्रित हुए और सड़क पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गोहत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाएं समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, इसलिए प्रशासन को सख्त संदेश देने की आवश्यकता है। दो घंटे तक बाधित रहा यातायात
चक्काजाम के चलते खंडवा से मूंदी, पुनासा और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सड़क के दोनों ओर यातायात प्रभावित होने से यात्रियों, विद्यार्थियों और अन्य राहगीरों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। भारी पुलिस बल रहा तैनात
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मोघट रोड थाना पुलिस के अलावा जिले के अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर मौके पर तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने मांग रखी कि गोहत्या प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के मकानों को ध्वस्त किया जाए तथा उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समझाइश के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
करीब दो घंटे तक चले चक्काजाम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। दोपहर करीब 2 बजे यातायात को पुनः सुचारू कराया गया, जिसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।
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ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा: कहा- पार्टी को नहीं लगता मैं अगला चुनाव जिता सकता हूं; एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं
लंदन2 मिनट पहले
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कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं।
स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था। हाल के महीनों में कई सांसदों और मंत्रियों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। स्थानीय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एंडी बर्नहैम उनके उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी की है और उन्हें लेबर सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन है।

अपने संबोधन के अंत में स्टार्मर ने पत्नी विक को गले लगाया। इसके बाद दोनों साथ में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के भीतर लौट गए।
17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा
स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे।
स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी।
इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है।
अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती।
लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे
ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं।
कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।
मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं।
हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है।
लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है।

एंडी बर्नहैम अगला पीएम बनने के सबसे बड़े दावेदार हैं।
बर्नहैम सबसे आगे, लेकिन 3 बड़े नेता भी दौड़ में
बर्नहैम लेबर पार्टी के अलग-अलग गुटों में स्वीकार्य माने जाते हैं। वे अलग-अलग विचारधाराओं के बीच आसानी से खुद को फिट कर लेते हैं। समर्थक इसे उनकी ताकत मानते हैं, जबकि उनके आलोचकों का कहना है कि बर्नहम अक्सर अपने राजनीतिक रुख बदलते रहे हैं, जिससे यह साफ नहीं हो पाता कि वे किन विचारों पर मजबूती से कायम हैं।
बर्नहम इससे पहले भी दो बार लेबर नेतृत्व चुनाव हार चुके हैं। 2010 में वह एड मिलिबैंड से हार गए थे और 2015 में जेरेमी कॉर्बिन से। हालांकि इस माना जा रहा है कि वे आसानी से लेबर नेतृत्व का चुनाव जीत लेंगे।
एंजेला रेनर, यवेट कूपर और वेस स्ट्रीटिंग जैसे नाम भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं। एंजेला रेनर फिलहाल लेबर पार्टी की उपनेता हैं और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
यवेट कूपर को अनुभवी नेता माना जाता है और उन्होंने कई अहम सरकारी पद संभाले हैं। वहीं वेस स्ट्रीटिंग पार्टी की नई पीढ़ी के नेताओं में शामिल हैं और हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा
स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा।
स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी।

ब्रिटेन को 7 साल में छठा प्रधानमंत्री मिलेगा
स्टार्मर पिछले 10 साल में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले छठे ब्रिटिश प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे।
2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में हार के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बनीं थेरेसा मे संसद से ब्रेक्जिट समझौता पारित नहीं करा सकीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद बोरिस जॉनसन ने कोविड लॉकडाउन के दौरान सरकारी आवास पर हुई पार्टियों और कई राजनीतिक विवादों के बीच 2022 में इस्तीफा दिया।
जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों से बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। वह सिर्फ 49 दिन ही पद पर रह सकीं और अक्टूबर 2022 में इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने, लेकिन बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियों और आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद जुलाई 2024 में उन्होंने भी पद छोड़ दिया।
अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन को सात साल में छठा और 10 साल में सातवां प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों।
अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है।
ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस्तीफा देंगे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि स्टार्मर इमिग्रेशन और ऊर्जा जैसे दो अहम मुद्दों पर विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि स्टार्मर जल्द पद छोड़ देंगे। यह खबर भी पढ़ें…
मां प्रोफेसर-पापा CA, खुद इंजीनियरिंग छोड़ चुनी एक्टिंग की राह
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कृति सेनन इन दिनों अपनी फिल्म ‘कॉकटेल 2′ को लेकर चर्चाओं में हैं. 12 साल बाद आई इस सीक्वल फिल्म में कृति सेनन के लुक की खूब तारीफ हो रही है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत की है और कृति के अभिनय को काफी सराहा जा रहा है.
नई दिल्ली. ‘कॉकटेल 2’ का जिक्र होने से सबसे पहले जहन में कृति सेनन का ही नाम आता है. फिल्म में एक्ट्रेस के कातिलाना लुक्स और अभिनय की जितनी तारीफ की जाए कम है. आज हिंदी फिल्मों पर राज करने वाली कृति सेनन ने अपने करियर की शुरुआत साउथ से की थी और उनकी पहली फिल्म महेश बाबू के साथ थी.

महेश बाबू की एक्ट्रेस ने हीरोपंती से हिंदी फिल्मों का रुख किया था. पहली फिल्म में टाइगर श्रॉफ के साथ नजर आई थीं. दोनों की केमिस्ट्री को पहली फिल्म में काफी पसंद किया गया था. ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म हिट भी रही थी.

नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस कृति सेनन का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. एक सामान्य परिवार में पली-बढ़ी कृति सेनन ने खुद इंजीनियरिंग की है, लेकिन उनका सपना सिल्वर स्क्रीन पर कुछ बड़ा कर दिखाने का थ. एक्ट्रेस की मां गीता सेनन दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं.
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नोएडा के जेपी इंस्टिट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद कृति सेनन ने फिल्मों का रुख किया. एक्ट्रेस ने महेश बाबू के साथ फिल्मों में अपनी पारी का आगाज किया था. कृति ने साल 2014 में तेलुगु फिल्म ‘1: नेनोक्काडिने’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उनके साथ साउथ सुपरस्टार महेश बाबू नजर आए थे. पहली ही फिल्म में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया.

इसी साल उन्होंने बॉलीवुड में टाइगर श्रॉफ के साथ फिल्म ‘हीरोपंती’ से कदम रखा. फिल्म हिट रही और कृति को बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. कृति ने ‘दिलवाले’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘लुका छुपी’, ‘हाउसफुल 4’ और ‘पानीपत’ जैसी फिल्मों में काम करके साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल तक सीमित नहीं हैं. रोमांस, कॉमेडी और गंभीर किरदारों में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई.

बॉक्स ऑफिस पर पकड़ बना चुकीं कृति सेनन के करियर में ‘मिमी’ से अहम मोड़ आया. कोरोना काल के दौरान फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई. साल 2021 में आखिरकार जब फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई तो क्रिटिक्स से लेकर दर्शकर तक हर कोई एक्ट्रेस के शानदार अभिनय का मुरीद हो गया.

मिमी के लिए कृति सेनन को बेस्ट एक्ट्रेस कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिला. ये फिल्म उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस फिल्म में अपने शानदार नॉन ग्लैमरस रोल से कृति सेनन ने साबित कर दिया कि वो हर तरह के किरदार अदा कर सकती हैं. एक्ट्रेस ने इस रोल से अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

अब उनकी नई फिल्म ‘’कॉकटेल 2’’ भी लगातार चर्चा में बनी हुई है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है और दर्शकों को कृति का काम भी पसंद आ रहा है. यही वजह है कि आज वह बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन पर निर्माता आंख बंद करके भरोसा करते हैं. ‘कॉकटेल 2’ ने रिलीज के वीकेंड पर 47 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है.
राम मंदिर का चंदा चोरी, केजरीवाल ने भाजपा को घेरा: CBI-ED की चुप्पी पर उठाए सवाल; बोले- किसे बचाने में जुटी सरकार – New Delhi News
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि मामले में अभी तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और आखिर सरकार किसे बचाने का प्रयास कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल से करोड़ों रुपए के चंदे और चढ़ावे की चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और न ही ईडी अथवा सीबीआई ने कोई कार्रवाई की है। मंदिर से करोड़ों के चंदे की चोरी उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपए के चंदे की चोरी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 200 करोड़ रुपए नकद और हीरे-जवाहरात से जुड़े कई बक्से गायब होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद जांच एजेंसियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं आप संयोजक ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों जगह भाजपा की सरकार है, लेकिन अभी तक न कोई छापेमारी हुई है और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें तुरंत जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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नूडल्स नहीं, मेवात की ‘सीमी’ है अलवर के लोगों की पहली पसंद! नोट कर लें रेसिपी
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Mewat Famous Seemi Recipe: अलवर जिले के मेवात क्षेत्र में बरसात के मौसम और त्योहारों के दौरान पारंपरिक सेवइयां, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘सीमी’ कहा जाता है, बनाने का काम जोर-शोर से चल रहा है. महिलाएं गेहूं का आटा लेकर मशीन के माध्यम से ताजा सेवइयां तैयार करवा रही हैं. तैयार सेवइयों को रस्सियों पर फैलाकर धूप में सुखाया जाता है और बाद में घरों में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है. मेवात की सीमी अपने खास स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इन्हें मीठा, नमकीन और दूध के साथ बनाकर खाया जाता है. यह परंपरा आज भी ग्रामीण संस्कृति का अहम हिस्सा बनी हुई है.
अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में इन दिनों विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं पारंपरिक सेवइयां, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘सीमी’ कहा जाता है, बनाने में व्यस्त हैं. मेवात क्षेत्र की ‘सीमी’ विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो अपने स्वाद के लिए जानी जाती है. बरसात के मौसम में इन सेवइयों को मीठी, नमकीन तथा दूध के साथ बनाकर बड़े चाव से खाया जाता है. महिलाएं देसी तरीके से मशीन के माध्यम से सेवइयों को तैयार कर रही हैं. इस दौरान ‘सीमी’ को रस्सियों पर फैलाकर सुखाने काम किया जा रहा है. महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही है सेवइयां बाजार के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए तैयार करवा रही हैं.
सेवइयां बनाने वाली महिला ने बताया कि रमजान माह से शुरू होकर रक्षाबंधन तक सेवइयां बनाने का पारंपरिक कारोबार चलता है. इस दौरान मशीन पर सेवइयां बनाने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं सेवइयां बनवाने के लिए आती हैं. महिलाएं अपने साथ गेहूं का आटा लेकर पहुंचती हैं, जो सेवइयां बनाने वाले को ₹10 प्रति किलो आटा की मजदूरी देकर ताजा सेवइयां तैयार करवाती हैं. ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घर के लिए सेवइयां तैयार करवा रही हैं. जिन्हें खुले वातावरण में रस्सियों पर सुखाकर पैक किया जा रहा है. वहीं जिन ग्राहकों के पास आटा या मैदा नहीं होता, उन्हें तैयार सेवइयां भी उपलब्ध कराई जाती है. त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों के दौरान इनकी मांग बढ़ जाती है.
5 वर्षो से बना रही हैं अलग-अलग वैरायटी के सेवइयां
सेवइयां बनाने वाली महिलाओ ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से सेवइयां (सीमी) बनाने का काम कर रही हैं. महिलाएं अपने घर से आटा लेकर आती हैं और उनकी मशीन से सेवइयां तैयार करवाती हैं, जिसके बदले निर्धारित शुल्क लिया जाता है. तैयार की गई सेवइयों को पहले धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. एक-दो घंटे तक सूखने के बाद उन्हें पैक कर घर ले जाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि सेवइयों को खाने से पहले मिट्टी के बर्तन में तेज आंच पर अच्छी तरह भूनना पड़ता है. इसके बाद इन्हें मीठा, नमकीन या दूध के साथ बनाकर स्वादपूर्वक खाया जा सकता है.
ऐसे बनाकर खा सकते हैं सेवइयां
ऐसे बना सकते हैं नमकीन सेवइयां
नमकीन सेवइयां बनाने के लिए सबसे पहले मसालों को तेज आंच पर अच्छी तरह भून लिया जाता है. इसके बाद आवश्यकता अनुसार पानी डालकर उसे उबालने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब उसमें सेवइयां डाल दी जाती हैं. कुछ देर पकाने के बाद जैसे ही पानी पूरी तरह सूख जाता है, नमकीन सेवइयां तैयार हो जाती है. इसके बाद इन्हें गरमा-गरम परोसा और स्वाद लेकर खाया जा सकता है.
ऐसे बनाएं दूध वाली मीठी सेवइयां
दूध वाली मीठी सेवइयां बनाने के लिए सबसे पहले दूध को तेज आंच पर अच्छी तरह उबाल लिया जाता है. इसके बाद स्वादानुसार चीनी डालकर उसे पूरी तरह घुलने तक पकाया जाता है. जब दूध और चीनी का मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो जाए, तब उसमें सेवइयां डाल दी जाती हैं. इसके बाद धीमी आंच पर कुछ देर पकाने से सेवइयां दूध में अच्छी तरह गल जाती हैं और स्वादिष्ट मीठी सेवइयां तैयार हो जाती है. महिला ने अस्थाई दुकान में इंजन के साथ सेवइयां बनाने वाली मशीन लगा रखी है. जिसमें आटा को गूंद कर मशीन में डाला जाता है और बारीक बारीक सेवइयां बनकर बाहर निकलते जाती है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
श्री कृष्ण जन्मस्थान के सचिव ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: दिनेश फलाहारी की ओर से लगाए आरोपों की जांच की मांग – Mathura News
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की सक्षम प्राधिकारी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने हाल ही में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में चढ़ावे, दान और आभूषणों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उन्होंने संस्थान के सचिव कपिल शर्मा पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी। फलाहारी ने आरोप लगाया था कि मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने फूल बंगला और 56 भोग जैसी सेवाओं के नाम पर भारी कमीशन वसूले जाने का भी दावा किया था। साथ ही उत्तराखंड में कीमती जमीन खरीदने जैसे आरोप भी लगाए थे। कपिल शर्मा बोले- आरोप पूरी तरह निराधार मीडिया से बातचीत में कपिल शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप मनगढ़ंत, तथ्यहीन और मिथ्या हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि वास्तविकता सामने आ सके। कपिल शर्मा ने कहा कि वे पिछले 27 वर्षों से श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान से जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने कभी वेतन, मानदेय, यात्रा भत्ता या अन्य कोई सुविधा नहीं ली। उन्होंने दावा किया कि संस्थान से जुड़े कार्यों के लिए होने वाला खर्च भी वह अपनी निजी आय से वहन करते हैं। फलाहारी पर भी लगाए गंभीर आरोप कपिल शर्मा ने दिनेश शर्मा फलाहारी पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि फलाहारी पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि फलाहारी के खिलाफ ठगी, चोरी और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। ‘सरकारी सुरक्षा के लिए करते हैं बयानबाजी’ मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कपिल शर्मा ने आरोप लगाया कि दिनेश शर्मा फलाहारी सरकारी सुरक्षा हासिल करने के उद्देश्य से विवादित बयान देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी ऐसे बयान देकर सामाजिक माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि फलाहारी ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम से मिलता-जुलता एक अलग ट्रस्ट बनाकर श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का प्रयास किया है। अब इस पूरे मामले में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां जांच की मांग पर क्या निर्णय लेती हैं।
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फिजिक्स ने निकाला दम, केमिस्ट्री ने चकराया सिर, क्या कठिन था री-नीट का पेपर?
नई दिल्ली (NEET UG 2026 Paper Analysis). कल यानी 21 जून 2026 को नीट यूजी का री-टेस्ट था. 5 हजार से ज्यादा सेंटर्स पर 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने नीट यूजी परीक्षा दी थी. इस बार का पेपर वैसा बिल्कुल नहीं था, जैसा परीक्षार्थियों ने सोचा था या जैसा 3 मई वाले रेगुलर सेशन में आया था. परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिक्स्ड रिएक्शन थे. 3 मई के पेपर में एनसीईआरटी से डायरेक्ट सवाल थे, वहीं री-टेस्ट ने सब्र, स्पीड और कॉन्सेप्ट्स की गहराई का इम्तिहान लिया.
Re-NEET 2026 Analysis: 3 मई से कहीं ज्यादा भारी रहा यह सफर
नबीन कार्की (AESL) के अनुसार, 21 जून को हुआ री-नीट का पेपर 3 मई को हुए शुरुआती सेशन के मुकाबले काफी कठिन और थका देने वाला था. जहां पिछला पेपर सीधा और आसान था, वहीं इस पेपर ने छात्रों के कॉन्सेप्ट्स को गहराई से खंगाला.
फिजिक्स: सबसे लंबा और पसीने छुड़ाने वाला सेक्शन
पूरे पेपर में फिजिक्स का हिस्सा सबसे ज्यादा कठिन और टाइम-कंज्यूमिंग साबित हुआ. पेपर मैकेनिक्स, इलेक्ट्रोडायनामिक्स, मॉडर्न फिजिक्स और थर्मोडायनामिक्स जैसे कोर टॉपिक्स के इर्द-गिर्द घूमता रहा. एप्लिकेशन-बेस्ड और भारी-भरकम न्यूमेरिकल की वजह से छात्रों पर समय का भारी दबाव बन गया और कई बच्चे पूरा सेक्शन समय पर हल भी नहीं कर पाए.
केमिस्ट्री: सिर्फ याद रखने से बात नहीं बनी
केमिस्ट्री का सेक्शन भी 3 मई के पेपर से काफी अलग और मुश्किल था. फिजिकल केमिस्ट्री में काफी लंबे और पेचीदा कैलकुलेशंस थे, जिसमें कई कॉन्सेप्ट्स एक साथ मिक्स थे. वहीं, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में सीधे सवाल पूछने के बजाय रिएक्शन मैकेनिज्म की गहरी समझ की परीक्षा ली गई. जिसने गहराई से नहीं पढ़ा था, उसे ऑप्शंस ने खूब कन्फ्यूज किया.
बायोलॉजी: आसान रही राह, पर जूलॉजी में रहा थोड़ा पेंच
बायोलॉजी का सेक्शन हमेशा की तरह सबसे बड़ा सहारा और सबसे ज्यादा स्कोरिंग जोन रहा. पेपर कोर एनसीईआरटी सिलेबस से मैच कर रहा था. इसमें जेनेटिक्स, फिजियोलॉजी, रिप्रोडक्शन और इकोलॉजी जैसे चैप्टर्स का दबदबा रहा. हालांकि, जूलॉजी के कुछ ऑप्शंस काफी घुमावदार और विवादास्पद थे, जहां एक से ज्यादा सही विकल्प होने की वजह से छात्रों में कन्फ्यूजन दिखा.
नीट यूजी एक्सपेक्टेड कट-ऑफ: 600 के नीचे जाने के आसार
डॉक्टर बनने के लिए कांसेप्ट ही किंग है
री-नीट परीक्षा ने साबित कर दिया है कि अगर आपको टॉप रैंक चाहिए तो सिर्फ रट्टा मारने से काम नहीं चलेगा. बायोलॉजी में रटकर नंबर लाए जा सकते हैं, लेकिन सरकारी कॉलेज की सीट पक्की करने के लिए फिजिक्स और केमिस्ट्री में न्यूमेरिकल सॉल्व करने का स्टैमिना और कॉन्सेप्ट्स का क्लियर होना ही असली गेम-चेंजर साबित होता है.
BSNL के दो सस्ते प्लान में मिलेगा एक्स्ट्रा डेटा, कंपनी का खास ऑफर
BSNL ने फादर्स डे के मौके पर धांसू ऑफर पेश किया है। अपने दो रिचार्ज प्लान में बदलाव करने का फैसला किया है। इन दो प्लान में यूजर्स को अब एक्स्ट्रा डेटा ऑफर किया जा रहा है। ये दोनों रिचार्ज प्लान 330 दिनों तक की वैलिडिटी के साथ आते हैं। भारत संचार निगम लिमिटेड अपने इन दोनों प्लान में अनलिमिटेड कॉलिंग समेत कई बेनिफिट्स दे रहा है।
BSNL का ऑफर
भारत संचार निगम लिमिटेड ने अपने 997 रुपये और 1999 रुपये वाले प्लान में एक्स्ट्रा डेटा ऑफर करने की घोषणा है। इसमें खास तौर पर यूजर्स को 10GB तक बोनस डेटा ऑफर किया जा रहा है। इन दोनों प्लान में 330 दिनों तक की वैलिडिटी मिलती है। बीएसएनएल का यह ऑफर 21 जून से लेकर 30 जून के बीच मिल रहा है। इस दौरान यूजर्स अपने नंबर को इन दोनों प्लान के साथ रिचार्ज कराते हैं तो एक्स्ट्रा डेटा का लाभ ऑफर किया जाएगा। यूजर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और Self Care ऐप से अपने नंबर को रिचार्ज करा सकते हैं।
997 रुपये वाला प्लान
भारत संचार निगम लिमिटेड का यह सस्ता रिचार्ज प्लान 150 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इस प्रीपेड रिचार्ज प्लान में यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ मिलता है। यूजर्स पूरे भारत में किसी भी नंबर पर फ्री कॉलिंग कर सकते हैं। इसके अलावा यूजर्स को डेली 2GB हाई स्पीड डेटा का लाभ मिलता है। वहीं, यूजर्स को डेली 100 फ्री SMS भी दिया जाता है। इस प्लान में फादर्स डे के मौके पर यूजर्स को 5GB बोनस डेटा ऑफर किया जाता है।
1999 रुपये वाला प्लान
भारत संचार निगम लिमिटेड का यह सस्ता रिचार्ज प्लान 330 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। BSNL के इस प्रीपेड प्लान में भी यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ दिया जाता है। साथ ही, यूजर्स को इस प्लान में डेली 1.5GB हाई स्पीड डेटा मिलता है। साथ ही इसमें यूजर्स को डेली 100 फ्री SMS का लाभ भी मिलता है। भारत संचार निगम लिमिटेड अपने इस प्लान के साथ 10GB बोनस डेटा ऑफर कर रहा है। यह ऑफर भी 30 जून तक ही वैलिड है।
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