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Guru Dutt Birthday: 9 जुलाई भारतीय सिनेमा के उस महान कलाकार की जयंती है, जिसने फिल्मों को सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें समाज और इंसानी भावनाओं का आईना बना दिया. गुरु दत्त का नाम आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे संवेदनशील निर्देशक, अभिनेता और निर्माता के तौर पर लिया जाता है. उनकी बनाई फिल्में दशकों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं.
गुरुदत्त ने कई कालजयी रचना की है.
नई दिल्ली. 9 जुलाई 1925 को जन्मे गुरु दत्त बचपन से ही कला और क्रिएटिविटी की ओर अट्रेक्ट होते थे.आगे चलकर उन्होंने अभिनय, निर्देशन और फिल्म निर्माण में ऐसी पहचान बनाई, जिसका सपना हर कलाकार देखता है. उनकी फिल्मों में इंसानी दर्द, अकेलापन, संघर्ष और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया.
गुरु दत्त ने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में दीं, जिन्हें आज भारतीय सिनेमा की धरोहर माना जाता है. ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’, ‘चौदहवीं का चांद’ और ‘साहब बीवी और गुलाम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया. उनकी फिल्मों की खासियत सिर्फ उनकी कहानी नहीं थी, बल्कि उनमें छिपी जिंदगी की गहरी सच्चाइयां थीं. उनके किरदार अक्सर समाज से लड़ते, अकेलेपन से जूझते और अपनी पहचान की तलाश करते नजर आते थे.
अलग तरह के फिल्ममेकर
गुरु दत्त ने हिंदी सिनेमा को एक नया नजरिया दिया. उनकी फिल्मों में शानदार निर्देशन, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी, यादगार संगीत और भावनाओं की गहराई का अनोखा मेल देखने को मिलता है. उन्होंने ऐसे विषयों पर फिल्में बनाईं, जिन पर उस दौर में खुलकर बात नहीं होती थी. यही वजह है कि उन्हें अपने समय से काफी आगे का फिल्मकार माना जाता है.
फ्लॉप फिल्में भी बनी कल्ट
देखा जाए तो, इतनी बड़ी सफलता के बाद भी गुरु दत्त की राह आसान नहीं थी. उनकी कुछ फिल्मों को रिलीज के वक्त वह प्यार और सम्मान नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी. खासकर ‘कागज के फूल’ बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. लेकिन वक्त के साथ यही फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन क्लासिक फिल्मों में गिनी जाने लगी.जहां पर्दे पर उनकी कहानियां लोगों के दिल जीत रही थीं, वहीं निजी जिंदगी में वह लगातार मुश्किलों से जूझ रहे थे. रिश्तों में आई दूरियां, मानसिक तनाव और अकेलेपन ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया. कहा जाता है कि वह अपने दर्द को अक्सर अपनी फिल्मों के जरिए ही बयां करते थे.
बता दें कि देखते ही देखते वह शराब की लत के शिकार हो गए, जिसका असर उनकी सेहत और निजी जिंदगी दोनों पर पड़ा. 10 अक्टूबर 1964 को गुरु दत्त अपने घर में मृत पाए गए. माना जाता है कि उनकी मौत शराब और नींद की गोलियों के असर से हुई थी. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 39 साल थी. उनका यूं अचानक चले जाना भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका था.गुरु दत्त के निधन का सबसे गहरा असर उनकी पत्नी और मशहूर गायिका गीता दत्त पर पड़ा. पति की मौत के बाद वह गहरे सदमे में चली गईं. बाद के वर्षों में उनकी सेहत लगातार बिगड़ती रही और आखिरकार 1972 में लीवर सिरोसिस की वजह से उनका निधन हो गया.
गुरु दत्त भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है. जिन फिल्मों को उनके जीवनकाल में उतनी पहचान नहीं मिली, वही बाद में भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शामिल हो गईं. आज भी फिल्म प्रेमी और नए फिल्मकार उनकी फिल्मों से प्रेरणा लेते हैं, और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें











