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नीट परीक्षा की नई तारीख का ऐलान जल्द किए जाने की उम्मीद है. (पीटीआई)
नई दिल्ली. नए सिरे से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)- स्नातक आयोजित करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार देर रात यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई.
इस बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी, सचिव (विद्यालय शिक्षा) संजय कुमार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह, सीबीएसई के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के आयुक्तों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
यह बैठक एनटीए द्वारा परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों के बाद तीन मई की परीक्षा को रद्द करने की घोषणा किये जाने के बाद हुई है. बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दोबारा होने वाली NEET परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने की रणनीति तैयार करना था. इसे लेकर एजुकेशनिस्ट और सीनियर ब्यूरोक्रेट्स के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.
इस दौरान उन सभी कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया गया, जहां सुधार कर पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय चाहता है कि इस बार परीक्षा में किसी भी तरह की खामी न रहे. खासतौर पर सुरक्षा व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए हर स्तर पर तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द कर दी थी. राजस्थान विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें अभ्यर्थी और उनके परिजन शामिल हैं.
सीबीआई ने बीते 13 मई को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से तीन जयपुर के हैं. गिरफ्तार आरोपियों में जयपुर के मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल शामिल हैं, जबकि अन्य दो आरोपी गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार हैं. टीम मंगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल के घर पहुंची. विकास बिवाल भी इसी परिवार से हैं. स्थानीय पुलिस सूत्रों ने बताया कि टीम ने परिजनों के बयान दर्ज किए.

रवि सिंह News 18 India में कार्यरत हैं. पिछले 20 वर्षों से इलेक्ट्रानिक मीडिया में सक्रिय हैं. उनकी मुख्य रूप से रेलवे,स्वास्थ्य,शिक्षा मंत्रालय,VHP और राजनीतिक गतिविधियों पर पकड़ है. अयोध्या में मंदिर की कवरेज…और पढ़ें
ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इलाज में घोर लापरवाही बरतने के मामले में न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने पाया कि अस्पताल में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर थे और न ही वेंटिलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरण। उचित उपचार के अभाव में एक प्रसूता की मौत को आयोग ने ‘सेवा में गंभीर कमी’ माना है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन पर 3 लाख 12 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। क्या है पूरा मामला?
डी.डी. नगर निवासी उदयभान शर्मा ने पत्नी अर्चना शर्मा को 30 सितंबर 2023 को प्रसव (डिलीवरी) के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया था। हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद अगले दिन सिजेरियन से डिलीवरी हुई, लेकिन उसके बाद अर्चना की तबीयत बिगड़ने लगी। अर्चना का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 80 तक पहुंच गया और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन के बार-बार गिड़गिड़ाने के बावजूद अस्पताल ने न तो ऑक्सीजन दी और न ही समय पर उसे बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। जब स्थिति हाथ से निकल गई, तब मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान अर्चना की मृत्यु हो गई। जांच में खुले अस्पताल के काले कारनामे
आयोग की सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन के कई चौंकाने वाले झूठ पकड़े गए हैं। अस्पताल के बाहर डॉ. रेणू शर्मा के नाम का बोर्ड लगा था, लेकिन जांच में पता चला कि वे वहां मरीजों को देखती ही नहीं थीं। अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहा था। अस्पताल में वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम, ऑपरेशन थिएटर (OT) के उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आयोग का आदेश: ऐसे देना होगा हर्जाना
आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 3 लाख 12 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि तय की है जिसमें तीन लाख रुपए आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए देने होंगे। जबकि 10 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति, 02 हजार रुपए वाद व्यय (कानूनी खर्च) देने होंगे। यह पूरा हर्जाना 45 दिन में देना होगा। यदि समय पर हर्जाना नहीं दिया जाता है तो 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग की तीखी टिप्पणी
आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज की स्थिति बिगड़ते ही उसे तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया जाता, तो शायद महिला की जान बच सकती थी। बिना विशेषज्ञ और बुनियादी सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
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उदयपुर-गोगुंदा रोड पर शहर से सटे अंबेरी पुलिया पर एक मिनी ट्रक के पीछे एक कार घुस गई। हादसे में दो जनों की दर्दनाक मौत हो गई। पिंडवाड़ा हाईवे पर सुखेर थाना क्षेत्र के अंबेरी पुलिया के पास रात करीब सवा दस बजे 407 मिनी ट्रक के पीछे एक तेज रफ्तार कार घुस गई और भीषण हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी ट्रक में टेंट के सामान थे और बेरियर पर जैसे ही उसने ब्रेक लगाया और पीछे से आ रही कार उसमें घुस गई। सूचना पर सुखेर थानाधिकारी भरत योगी मौके पर पहुंचे और इस बीच 108 एंबुलेंस भी वहां पहुंच गई। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से दोनों शवों को कड़ी मशक्कत से कार के अंदर से बाहर निकाला। पुलिस ने दोनों शवों को जिला अस्पताल की मॉच्युरी में रखवाया और वहीं वहीं गंभीर घायल एक युवक को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। हादसे के वक्त मिनी ट्रक का चालक मौके से फरार हो गया। सुखेर थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि दोनों मृतकों के शव मॉच्युरी में मोर्चरी रखवा दिए है और उनकी शिनाख्त अभी नहीं हुई है। दोनों गाड़िया पुलिस ने जब्त कर ली है। कार सवार लोग झालावाड़ के रहने वाले है। इनपुट : गोपाल लोढ़ा
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नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Lawrence Wong) का बयान पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. उनका कहना है कि अभी दुनिया ने आर्थिक संकट का सबसे बुरा दौर देखा ही नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है और इसका असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है. ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने लगी है, ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. इसी दौरान उन्होंने 1970 के दशक के उस ऐतिहासिक आर्थिक ग्रहण का जिक्र किया जिसे दुनिया आज भी डर के साथ याद करती है.
लॉरेंस वोंग ने खास तौर पर स्टैगफ्लेशन शब्द का इस्तेमाल किया. यह अर्थशास्त्र का ऐसा शब्द है जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है. सामान्य तौर पर जब महंगाई बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. लेकिन स्टैगफ्लेशन बिल्कुल उल्टा होता है. इसमें अर्थव्यवस्था रुक जाती है, बेरोजगारी बढ़ती जाती है और दूसरी तरफ जरूरी सामानों के दाम तेजी से ऊपर जाते रहते हैं. यानी लोगों की आमदनी घटती है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता रहता है. यही वजह है कि इसे आर्थिक दुनिया का सबसे बड़ा डर माना जाता है.
1970 के दशक में दुनिया ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्टैगफ्लेशन का सामना किया था. इसकी शुरुआत 1973 के अरब इजरायल युद्ध के बाद हुई. उस समय तेल उत्पादक अरब देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को तेल सप्लाई रोक दी थी क्योंकि वे इजरायल का समर्थन कर रहे थे. देखते ही देखते कच्चे तेल की कीमतें 300 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं. उस दौर में दुनिया की लगभग हर फैक्ट्री, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंडस्ट्री तेल पर निर्भर थी. जैसे ही तेल महंगा हुआ, हर चीज की लागत बढ़ गई. कंपनियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ गया, रोजगार खत्म होने लगे और महंगाई बेकाबू हो गई.
केवल तेल संकट ही इस आर्थिक तबाही की वजह नहीं था. उसी समय अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लिया जिसने पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को हिला दिया. 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) ने डॉलर का सोने से संबंध खत्म कर दिया. इससे पहले पूरी दुनिया की करेंसी अप्रत्यक्ष रूप से सोने से जुड़ी हुई थी. जैसे ही डॉलर गोल्ड स्टैंडर्ड से अलग हुआ, दुनियाभर की करेंसी में भारी अस्थिरता आ गई. डॉलर कमजोर होने लगा और आयात महंगा होता चला गया. इसके साथ ही कई देशों की सरकारों ने बेरोजगारी कम करने के लिए बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा डाल दिया. नतीजा यह हुआ कि महंगाई और तेज हो गई लेकिन रोजगार नहीं बढ़ा.
उसी दौर में खेती और सप्लाई चेन संकट ने हालात और खराब कर दिए. कई देशों में खराब मौसम और फसल बर्बाद होने की वजह से अनाज की कमी हो गई. खाने पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगे. तेल पहले से महंगा था और अब खाद्य संकट ने आम लोगों की जिंदगी और मुश्किल बना दी. अमेरिका समेत कई देशों में लोग दूध, ब्रेड और पेट्रोल जैसी बेसिक चीजों के लिए परेशान होने लगे थे.
1970 के दशक का आर्थिक संकट केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहा. शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. अमेरिकी शेयर बाजार 1973 से 1974 के बीच लगभग 45 प्रतिशत तक टूट गया था. निवेशकों का भरोसा खत्म होने लगा था. बैंकिंग सिस्टम दबाव में आ गया था और कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने लगी थीं. मध्यम वर्ग की खरीदने की ताकत तेजी से खत्म हो रही थी क्योंकि सैलरी उतनी नहीं बढ़ रही थी जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही थी.
दुनिया को इस संकट से बाहर निकलने में करीब एक दशक लग गया. अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया था. कई जगहों पर ब्याज दरें 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं. इसका असर यह हुआ कि लोन लेना बेहद महंगा हो गया. बिजनेस ठप पड़ने लगे, घर खरीदना मुश्किल हो गया और लाखों लोग बेरोजगार हो गए. 1980 के दशक के मध्य तक जाकर दुनिया धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट पाई.
अब लॉरेंस वोंग का डर इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आज की दुनिया 1970 के मुकाबले कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी हुई है. उस समय सप्लाई चेन सीमित थीं लेकिन आज पूरी दुनिया एक दूसरे पर निर्भर है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो एशिया के देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि चीन, भारत, जापान और सिंगापुर जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. तेल सप्लाई रुकने का मतलब केवल पेट्रोल और डीजल महंगा होना नहीं है बल्कि फैक्ट्री प्रोडक्शन, एयरलाइन, शिपिंग, बिजली उत्पादन और खाद्य सप्लाई तक सब प्रभावित होना है.
अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहते हैं तो दुनिया फिर स्टैगफ्लेशन जैसे दौर में पहुंच सकती है. इसका मतलब होगा कि लोगों की नौकरियां जाएंगी, महंगाई तेजी से बढ़ेगी और जरूरी सामानों की किल्लत शुरू हो सकती है. विकासशील देशों के लिए यह संकट और ज्यादा खतरनाक होगा क्योंकि उन पर पहले से भारी विदेशी कर्ज है. अगर डॉलर मजबूत हुआ और तेल महंगा बना रहा तो कई देशों के विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं. श्रीलंका जैसा आर्थिक संकट दूसरे देशों में भी देखने को मिल सकता है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टैगफ्लेशन से लड़ना किसी भी सरकार के लिए सबसे मुश्किल चुनौती होती है. अगर सरकार महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाती है तो बिजनेस और रोजगार पर दबाव बढ़ जाता है. दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बाजार में ज्यादा पैसा डाला जाए तो महंगाई और बढ़ जाती है. यही वजह है कि 1970 का संकट आर्थिक इतिहास का सबसे जटिल दौर माना जाता है.
सिंगापुर के प्रधानमंत्री का यह बयान केवल चेतावनी नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव केवल युद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है. यह धीरे-धीरे वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है. अगर ऊर्जा सप्लाई, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ता रहा तो दुनिया को एक बार फिर उसी आर्थिक अंधेरे का सामना करना पड़ सकता है जिसने 1970 के दशक में पूरी वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया था.
ललितपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अंकुर श्रीवास्तव का शासन द्वारा गुरुवार शाम तबादला कर दिया गया। उनका स्थानांतरण मुरादाबाद जिले में किया गया है। वहीं, गाजीपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार को ललितपुर का नया अपर जिलाधिकारी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अंकुर श्रीवास्तव जुलाई 2023 में ललितपुर में तैनात किए गए थे। उन्होंने जिले में करीब 35 महीने तक अपनी सेवाएं दीं। शासन द्वारा उनका स्थानांतरण एक ही जिले में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के कारण किया गया है।
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इस वीडियो में मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने ब्रेड की 3 बेहतरीन ब्रेकफास्ट रेसिपी शेयर की है. यदि आपके बच्चे नाश्ते में रोज सैंडविच खाकर बोर हो गए हैं, या आपको अपनी मॉर्निंग शिफ्ट के लिए जल्दी से टिफिन पैक करना है तो ये रेसिपीज आपके परेशानी का हल साबित हो सकते हैं. ये तीनों रेसिपी पेट भरने वाली और बनाने में आसान हैं. इनमें ब्रेड उपमा, ब्रेड कटलेट और चीज़ बर्स्ट ब्रेड पिज़्ज़ा शामिल हैं. आप इनमें से किसी भी रेसिपी को शाम के नाश्ते के रूप में भी बना सकते हैं.
बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से सप्ताह में दो दिन साइकिल का उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने गुरुवार शाम भागलपुर से पटना जाते समय मुंगेर सर्किट हाउस में यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए आवश्यक है। मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अंचल, थाना, प्रखंड या बाजार जाते समय बाइक और कार के साथ-साथ साइकिल का भी उपयोग करें। आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे
कुमार शैलेंद्र ने बताया कि वह स्वयं भी सप्ताह में दो दिन अपने विधायक आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे। उनका उद्देश्य आम लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कम ईंधन खपत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा
इस दौरान मंत्री ने भागलपुर के विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुल पर लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसकी निगरानी इंजीनियरों की टीम कर रही है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अगले 15 दिनों के भीतर इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा। मंत्री ने दावा किया कि यह देश का पहला अत्याधुनिक बेली ब्रिज होगा, जिसकी संरचना 35 वर्षों तक सुरक्षित रहने की गारंटी के साथ बनाई जा रही है। मंत्री ने बिहार में सड़क निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विभाग ने सभी कमिश्नरी में इंजीनियरों की तैनाती की है, जो सड़क परियोजनाओं की पूरी रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि सड़क कब बनेगी, कितनी लागत आएगी और उसकी जीवन अवधि कितनी होगी, इसकी विस्तृत जानकारी विभागीय कार्यालय से उपलब्ध कराई जाएगी।
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रणबीर कपूर ने ‘रामायण’ की रिलीज से पहले बड़ा कदम उठाया है.
नई दिल्ली: रणबीर कपूर इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘रामायण’ को लेकर हर तरफ छाए हुए हैं, लेकिन इस बार चर्चा फिल्म की शूटिंग से ज्यादा उनकी एक खास इनवेस्टमेंट को लेकर हो रही है. खबर है कि सिल्वर स्क्रीन पर भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे रणबीर ने असल जिंदगी में भी राम नगरी अयोध्या से नाता जोड़ लिया है. उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे बसे एक बेहद आलीशान प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में करीब 3.31 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है. 2,134 वर्ग फीट का यह प्लॉट उनके परिवार के लिए एक खास विरासत की तरह होगा. रणबीर का कहना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और उन्होंने बस उस पुकार का सम्मान किया है. यह जमीन ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के उस भव्य प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो सरयू के किनारे 75 एकड़ में फैला हुआ है और जहां लग्जरी सुविधाओं के साथ-साथ एक बड़ा शाकाहारी होटल भी बन रहा है.
देखा जाए तो अयोध्या अब बॉलीवुड सितारों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है. रणबीर कपूर से पहले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी यहां भारी-भरकम निवेश कर चुके हैं. बिग बी ने तो अलग-अलग मौकों पर अयोध्या में करोड़ों की जमीन खरीदी है, जिससे साफ पता चलता है कि फिल्मी गलियारों में इस ऐतिहासिक शहर का महत्व कितना बढ़ गया है. रणबीर के लिए यह प्लॉट खरीदना न सिर्फ एक प्रॉपर्टी डील है, बल्कि एक इमोशनल फैसला भी है क्योंकि वह अयोध्या को भारतीय संस्कृति और इतिहास का सबसे अहम हिस्सा मानते हैं. यह प्रोजेक्ट न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि यहां रहने वालों को मॉडर्न सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी मिलेगा, जो रणबीर के इस फैसले को और भी खास बनाता है.
अयोध्या की मिट्टी से हुआ जुड़ाव
दूसरी ओर, रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर है. नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस मेगा बजट फिल्म में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी. फिल्म की स्टार कास्ट काफी तगड़ी है, जिसमें रावण के रूप में यश, हनुमान के रोल में सनी देओल और लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे जैसे सितारे अपनी कला का जौहर दिखाएंगे. म्यूजिक की कमान एआर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज हंस जिमर के हाथों में है. ऐसे में रणबीर का फिल्म की रिलीज से पहले अयोध्या में घर बसाने की तैयारी करना उनके फैन्स के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है. अुयोध्या की मिट्टी से जुड़ने का यह कदम उनके फिल्मी किरदार और असल जिंदगी, दोनों के लिहाज से एक नया चैप्टर शुरू करने जैसा है.

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
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गांवों में बुजुर्गों और किसानों की पहचान माना जाने वाला गमछा अब युवाओं के बीच भी फिर से ट्रेंड में लौट रहा है. हल्के सूती कपड़े और ढीली बुनाई की वजह से यह गर्मी में शरीर को हवा देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. इस गमछे का चेकर्ड डिजाइन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है. इसकी वैफल वीव बुनाई में छोटे-छोटे एयर गैप बनते हैं, जो कपड़े के अंदर हवा के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं. यही वजह है कि गर्मी में यह गमछा ज्यादा आरामदायक महसूस होता है.

गर्मी में गहरे नीले और हरे रंग के प्रिंट आंखों को सुकून देते हैं. अजय बताते हैं कि अब लोग डार्क और लाइट शेड्स का कॉम्बिनेशन ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अगर शर्ट डार्क है, तो लोग ऐसा लाइट बेस वाला गमछा चुन रहे हैं जो चेहरे को आकर्षक दिखाता है. लिनन और कॉटन का मिक्स फैब्रिक हवा को आसानी से आर-पार जाने देता है और डार्क शर्ट पर बेहतरीन कंट्रास्ट भी देता है. टेक्सटाइल विशेषज्ञ मानते हैं कि हल्के सूती और ढीली बुनाई वाले गमछे गर्म इलाकों के लिए ज्यादा आरामदायक होते हैं क्योंकि इनमें हवा का प्रवाह बेहतर रहता है. यही वजह है कि पूर्वांचल की गर्मी में आज भी गमछा ‘देसी एसी’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

गाजीपुर की तपती दुपहरी में जब सूरज आग उगलता है, तब यहाँ के लोगों का सबसे भरोसेमंद साथी बनता है यह गमछा. यह गमछा देखने में काफी अट्रैक्टिव है. कॉटन साइंस के अनुसार जब हवा गमछे के महीन रेशों से होकर गुजरती है, तो वह चेहरे को ठंडी हवा का अहसास कराती है. लू के थपेड़ों से बचने के लिए गाजीपुर के लोग इसे चेहरे पर लपेटना पसंद कर रहे हैं.
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सौरभ के मुताबिक, कुर्ते के साथ पहनने के लिए ये फूलदार गमछे आजकल काफी हिट हैं. साइंटिफिक नजरिए से देखा जाए तो हाई-क्वालिटी कॉटन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को कुछ हद तक सोख लेता है. यह फैशन और सेहत दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन माना जा रहा है. इस गमछे में पिक स्ट्रिप और मल्टी कलर फ्लोरल डिजाइन इसे दूर से ही आकर्षक बना देते हैं.

पूर्वांचल में गमछा सिर्फ पसीना पोंछने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है. गाजीपुर, बलिया, बनारस और आसपास के इलाकों में दशकों से किसान, मजदूर और यात्री सूती गमछा इस्तेमाल करते आए हैं क्योंकि इसका कपड़ा गर्मी में हवा पास होने देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. समय के साथ इसकी बुनाई और डिजाइन में बदलाव आया है. अब फूलदार प्रिंट, ओडिशा मॉडल, चेकर्ड पैटर्न और वैफल वीव जैसे नए डिजाइन युवाओं को भी आकर्षित कर रहे हैं.

सफेद रंग पर नारंगी और पीले फूलों की हल्की छपाई वाला यह गमछा इस समय गाजीपुर के बाजारों में सबसे अलग नजर आ रहा है. सफेद आधार वाले गमछे सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट (परावर्तित) करते हैं, जिससे शरीर ज्यादा गर्म नहीं होता. अजय के अनुसार, अब लोग धूप से बचाव के साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि गमछा उनके पैंट-शर्ट के साथ मैच कर रहा है या नहीं.

हरे और क्रीम रंग के पारंपरिक डिजाइन वाला यह ओडिशा मॉडल गमछा अपनी बारीक बुनाई और कलात्मक पैटर्न की वजह से अलग पहचान बना रहा है. इस तरह के गमछों में सिर्फ धूप से बचाव ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है. हल्का सूती कपड़ा गर्मी में आराम देता है, जबकि इसकी पारंपरिक बॉर्डर डिजाइन इसे सामान्य गमछों से अलग बनाती है. दुकानदारों के मुताबिक अब युवा सिर्फ साधारण गमछा नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों के डिजाइन वाले गमछे भी पसंद कर रहे हैं.