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आठवें वेतन का इंतजार हर केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक कर रहा है. अभी वेतन आयोग भारत भर में घूमकर डाटा जुटा रहा है. इससे पहले 15 जून तक आयोग ने कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए थे. उन सुझावों में एक पे ग्रेड को मर्ज करने की सिफारिश भी थी. उसका मतलब क्या है और वह सुझाव क्यों भेजा गया, आइए इसे समझते हैं.
यह सुझाव केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन की ओर से दिया गया है.
नई दिल्ली. आठवें वेतन आयोग पर मंथन जारी है. आयोग ने कर्मचारी संगठनों से 15 जून तक उनके सुझाव मांगे थे. आयोग अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर भी डाटा जुटा रहा है. इन कर्मचारी संगठनों के सुझावों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर आयोग अपनी सिफारिश केंद्र को देता है. इसी क्रम में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कुछ सिफारिशें आयोग को दी हैं. यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों का सबसे बड़ा प्रतिनिधि संगठन माना जाता है. इसमें रेलवे, रक्षा, डाक, केंद्रीय सचिवालय समेत कई विभागों के कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व होता है.
NC-JCM की ओर से भेजे गए सुझावों में एक अहम सिफारिश यह भी कि पे ग्रेड्स को मर्ज कर दिया जाए. यानी जो पे लेवल एक दूसरे के बहुत करीब हैं उन्हें मिला दिया जाए. NC-JCM का कहना है कि कई लेवल में काम लगभग एक जैसा है और सैलरी का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं है. फिर भी अलग पे लेवल होने से प्रमोशन और करियर ग्रोथ में फर्क पड़ता है. इससे पे स्ट्रक्चर आसान होगा और समान काम करने वाले कर्मचारियों के बीच अंतर कम होगा.
उदाहरण से समझें
NC-JCM की मांग यह है कि
- लेवल 2 और 3 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 4 और 5 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 7 और 8 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 9 और 10 को एक कर दिया जाए.
इसके अलावा लेवल 5 के कर्मचारियों को अलग से राहत देने की भी मांग की गई है. NC-JCM का कहना है कि रेलवे, रक्षा, डाक और केंद्रीय सचिवालय के कई कर्मचारी लंबे समय से लेवल 5 में ही अटके हुए हैं. इसलिए उसने मांग की है कि एक बार के लिए सभी मौजूदा लेवल 5 कर्मचारियों को सीधे लेवल 6 में अपग्रेड कर दिया जाए. इससे हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी सैलरी भी बढ़ जाएगी.
अन्य मांगें क्या हैं?
उपरोक्त मांगों के अलावा संगठन ने न्यूनतम सैलरी 18,000 से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग की है. यह बेसिक पे होगी. इसके ऊपर महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और दूसरे भत्ते अलग से मिलेंगे. सालाना इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग है. NC-JCM यह भी चाहता है कि लेवल 13 तक एक आसान और व्यवस्थित पे मैट्रिक्स बनाया जाए, ताकि कर्मचारियों को यह समझने में आसानी हो कि प्रमोशन के बाद उनकी सैलरी कैसे बढ़ेगी. साथ ही पेंशन फॉर्मूला को नई सैलरी के हिसाब से दोबारा तय करने की मांग भी की गई ताकि रिटायर कर्मचारियों को भी वेतन बढ़ने का फायदा मिल सके.
क्या यह सब लागू होगा?
इसका सीधा जवाब है- नहीं. संगठन ने सिर्फ सुझाव दिए हैं जिसे मांग भी समझा सकता है. अब गेंद वेतन आयोग के पाले में है कि वह इनमें से कितने सुझावों को मानता है और कितनों को नकार देता है. वेतन आयोग द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद भी सरकार यह तय करेगी कि उन सुझावों को मानना है या नहीं.
कौन-कौन है टीम में
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश कर रही हैं. इसके सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं. यह प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं. इनके अलावा पंकज जैन आयोग के सदस्य सचिव हैं. यह एक पूर्व आईएएस अधिकारी हैं.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें


