बुलंदशहर में खुर्जा नगर पुलिस ने एक चोर को गिरफ्तार किया है, जिसने डाकिया की डाक चोरी की थी। आरोपी के कब्जे से 32 रजिस्टर्ड डाक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। यह गिरफ्तारी 18 जून 2026 की रात को हुई। यह मामला 16 जून 2026 का है, जब मुख्य डाकघर खुर्जा नगर के अर्जुन कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि डाक बांटने गए डाकिया हरकेश की साइकिल और डाक जटिया अस्पताल के सामने से एक अज्ञात चोर ने चुरा ली थी। इस संबंध में थाना खुर्जा नगर में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 18 जून 2026 की रात को किला मेवई मोड़ नाले के पास से आरोपी रवि कुमार को गिरफ्तार किया। उसके पास से चोरी की गई डाक भी बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रवि कुमार पुत्र देवेंद्र सिंह, निवासी ग्राम सैमडा, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर के रूप में हुई है। बरामदगी में कुल 32 रजिस्टर्ड डाक, एसबीएफसी का फटा हुआ पजेशन नोटिस और 04 डिलीवरी मेनिफेस्ट शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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डाकिये की डाक चोरी करने वाला चोर गिरफ्तार: खुर्जा पुलिस ने 32 रजिस्टर्ड डाक सहित दस्तावेज बरामद किए – Bulandshahar News
शेखपुरा में तेज हवा के साथ बारिश,ढाई डिग्री गिरा टेंपरेचर: अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज,घंटों बिजली आपूर्ति बाधित – Sheikhpura News
शेखपुरा में पिछले एक सप्ताह की भीषण गर्मी के बाद शुक्रवार शाम को हुई झमाझम बारिश से मौसम सुहावना हो गया। इस बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। जिले का अधिकतम तापमान ढाई डिग्री सेल्सियस गिरकर 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में मध्यम दर्जे की बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज हवा और गरज-चमक के साथ हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए जनजीवन प्रभावित हुआ। तेज हवा के साथ हुई बारिश से जिले के कई क्षेत्रों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस बारिश से खेती-किसानी से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है, जो मानसून का इंतजार कर रहे थे। बारिश के अभाव में रुके हुए धान के बिचड़े डालने और अरहर व मक्का जैसी शारदीय फसलों की बुवाई के कार्य अब शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आने वाले दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। विभाग ने बारिश के दौरान वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न रहने की सलाह दी है।
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पुणे में 400 फीट गहरी खाई में गिरा युवक: मंगेतर का बर्थडे मनाने गया था, तेज हवा से बैलेंस बिगड़ा; नंवबर में शादी होनी थी
पुणे2 घंटे पहले
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महाराष्ट्र के पुणे में बने लोहगढ़ किले पर घूमने गया युवक फोटो खींचते समय 400 फीट गहरी खाई में गिर गया। चोटों के चलते उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक तेज हवाओं के चलने से वह बैलेंस नहीं बना सका और फिसल गया।
मरने वाले की पहचान केतन विशाल अग्रवाल के रूप में हुई है। वह पुणे के पास गहुंजे का रहने वाला था और रियल एस्टेट कंपनी का डायरेक्टर था।
यह हादसा तब हुआ जब उनकी मंगेतर और दो करीबी दोस्त, केतन की होने वाली पत्नी का जन्मदिन मनाने के लिए किले पर चढ़े थे। उसकी शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी।

पुलिस और शिवदुर्ग मित्र इमरजेंसी रेस्क्यू टीम ने घनी झाड़ियों से 3 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर केतन के शव को बाहर निकाला
शादी के लिए राजस्थान में बुक किया था पैलेस
लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दिनेश तायडे ने बताया कि घटना के समय तेज हवाएं चल रही थीं। अग्रवाल की शादी नवंबर में तय थी और पता चला है कि परिवारों ने शादी के लिए राजस्थान के उदयपुर में एक पैलेस बुक किया था। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एक्सीडेंटल डेथ (दुर्घटना से मौत) की रिपोर्ट दर्ज की गई है और आगे की जांच चल रही है।
यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल है लोहगढ़ फोर्ट

लोहागढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दुर्ग माना जाता है। यह महाराष्ट्र के उन 12 किलों में शामिल है जिन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला हुआ है। मानसून के दौरान यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर्स पहुंचते हैं।
महाराष्ट्र के पुणे से 65 किमी दूर बना एक पहाड़ी किला है। यह समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर (3,389 फीट) की ऊंचाई पर बना है और सह्याद्रि पर्वतमाला का हिस्सा है। माना जाता है कि किले का निर्माण लगभग 11वीं–12वीं शताब्दी में हुआ था।
इस पर विभिन्न राजवंशों का नियंत्रण रहा, जिनमें यादव, बहमनी, निजामशाही, मुगल और मराठा शामिल हैं। शिवाजी महाराज ने 1648 में इस किले पर कब्जा किया था। 1665 की पुरंदर की संधि के बाद यह मुगलों के पास चला गया, लेकिन बाद में मराठों ने इसे फिर हासिल कर लिया।
मराठा शासन के दौरान इसका उपयोग खजाना और महत्वपूर्ण सामान रखने के लिए किया जाता था। विंचू कटा इसकी सबसे प्रसिद्ध संरचना है। यह बिच्छू की पूंछ जैसी लंबी पत्थरीली दीवार है।
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महाराष्ट्र में कार 800 फीट गहरी खाई में गिरी: 8 की मौत, मोबाइल से लोकेशन मिली

महाराष्ट्र और कर्नाटक में दो हादसों में 19 लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र के रायगड में पोलादपुर-महाबलेश्वर रोड के अंबेनली घाट इलाके में रविवार सुबह एसयूवी कार 800 फीट गहरी खाई में गिर गई। घटना में 8 लोगों की मौत हुई है। पीड़ित परिवारों की शिकायत पर पुलिस ने मृतकों के मोबाइल की लास्ट लोकेशन ट्रेस की। तब जाकर घटना की जानकरी मिली। पढ़ें पूरी खबर…
राष्ट्रपति दौरा, NEET री-एग्जाम एक साथ: जबलपुर में 21 जून को प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती – Jabalpur News
जबलपुर में 21 जून का दिन प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस दिन राष्ट्रपति का दौरा, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और NEET की पुन: परीक्षा एक साथ आयोजित की जाएगी। इस दोहरे वीआईपी कार्यक्रम और संवेदनशील परीक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तर
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परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने स्वयं मोर्चा संभाला है। उन्होंने परीक्षा केंद्रों और प्रमुख मार्गों का बारीकी से निरीक्षण किया।
‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ (महाकौशल कॉलेज) को NEET परीक्षा का केंद्र बनाया है, और यहां स्थित इनडोर स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए ‘बैकअप वेन्यू’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।
यदि 21 जून की सुबह बारिश होती है, तो मुख्य योग कार्यक्रम इसी 300 क्षमता वाले इनडोर स्टेडियम में स्थानांतरित किया जाएगा। कलेक्टर ने यहां पहुंचकर आपातकालीन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। चुनौती यह है कि यदि सुबह योग कार्यक्रम होता है, तो उसके तुरंत बाद दोपहर में इसी परिसर में परीक्षा आयोजित होगी।
पुलिस ने तैयार किया विशेष रूट प्लान
राष्ट्रपति के कार्यक्रम और NEET परीक्षार्थियों के रिपोर्टिंग समय में टकराव नहीं है, फिर भी पुलिस ने यातायात और सुरक्षा के लिए एक विशेष ‘रूट प्लान’ तैयार किया है। जबलपुर के कुल 23 परीक्षा केंद्रों पर 10,426 परीक्षार्थी शामिल होंगे।
वीआईपी आवाजाही के दौरान विद्यार्थियों को यातायात जाम से बचाने के लिए विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश एडमिट कार्ड दिखाने के बाद ही दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों से दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक परीक्षार्थियों को समय पर पहुंचाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की है।
डेंगू-मलेरिया के खिलाफ एमसीडी की बड़ी मुहिम: 100 ऑटो रिक्शा और 450 कर्मी सड़कों पर उतरे, 250 वार्डों में पहुंचेगा जागरूकता अभियान – New Delhi News
नई दिल्ली। बरसात के मौसम में बढ़ते डेंगू और मलेरिया के खतरे को देखते हुए दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में विशेष जन जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में महापौर प्रवेश वाही ने शुक्रवार को सिविक सेंटर स्थित निगम मुख्यालय से मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ जागरूकता ऑटो रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभियान के तहत 100 ऑटो रिक्शा और 450 कर्मचारी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लोगों को जागरूक करेंगे। रैली में शामिल प्रत्येक ऑटो को फॉगिंग मशीन, बैनर और जागरूकता पर्चों से सुसज्जित किया गया है। ये वाहन निगम के सभी 250 वार्डों में जाकर डेंगू और मलेरिया से बचाव के संदेश प्रसारित करेंगे। यहां देखें फोटो… डेंगू की रोकथाम पर जोर दे रहा नगर निगम : महापौर कार्यक्रम के दौरान महापौर प्रवेश वाही ने फॉगिंग अभियान की भी शुरुआत की। महापौर ने कहा कि निगम केवल उपचार नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी विशेष जोर दे रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपने घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा न होने देने तथा जल भंडारण पात्रों को ढक कर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि, जीतेगी दिल्ली, हारेगा डेंगू-मलेरिया, केवल नारा नहीं, बल्कि दिल्ली नगर निगम का संकल्प है। जनभागीदारी के बिना मच्छर जनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। अभियान के दौरान अतिरिक्त आयुक्त डॉ सतेंद्र सिंह दुर्सावत, निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक रावत, डॉ. लल्लन राम वर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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मियाजाकी से ब्लैक कस्तूरी तक! 92 किस्मों के आम उगाकर छाए विकास
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Agriculture Tips: मुजफ्फरपुर के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव इन दिनों खासे चर्चा में हैं. जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं. इसमें मियाजाकी से लेकर ब्लैक कस्तूरी सहित 92 देसी-विदेशी किस्म के आम उगाकर मैंगो मैन की पहचान बनाई. देसी जलवायु में विदेशी का आम सफल उत्पादन कर रहे हैं. पौधों की मांग नेपाल तक है. आइए जानते हैं इनसे बागवानी के खास टिप्स.
मुजफ्फरपुर: आम की बात होते ही लोगों के मन में लंगड़ा, दशहरी या मालदा जैसे पारंपरिक आमों की तस्वीर उभरती है. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के मरवन प्रखंड के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव ने आम की खेती को एक नई पहचान दी है. अपने बगीचे में 92 अलग-अलग किस्मों के आम लगाकर वह आज “मैंगो मैन” के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं. उनके बगीचे में देसी ही नहीं बल्कि जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं.
एक पेड़ में 3 किस्म, मिलेगी ये वैरायटी
विकास कुमार यादव के बगीचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही पेड़ पर तीन अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं. बगीचे में जापानी मियाजाकी, केन्सिंग्टन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, अल्फांसो, रेड एम्परर, गोल्डन क्वीन और चॉक अनन जैसी विदेशी वैरायटी के आम भी लगाए गए हैं. इन आमों को देखने और इनके स्वाद का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.
ऐसे बढ़ी आमों की नर्सरी में दिलचस्पी
विकास बताते हैं कि वह किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-बाड़ी में रुचि रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब पांच वर्षों तक कृषि विकास के क्षेत्र में काम किया. इस दौरान उन्होंने यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के साथ भी कार्य किया. किसानों की समस्याओं को करीब से देखने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने उन्नत किस्म के आमों की नर्सरी और बागवानी पर काम शुरू किया.
इनके तैयार पौधे भारत सहित नेपाल तक मांग
आज उनके यहां तैयार किए गए पौधों की मांग बिहार के कई जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और नेपाल तक है. किसान सीधे उनसे संपर्क कर पौधे खरीदते हैं. खास बात यह है कि यदि किसी तकनीकी कारण से पौधा नहीं लग पाता है, तो उसे 100 प्रतिशत रिप्लेस भी किया जाता है. यही वजह है कि किसानों का भरोसा लगातार विकास और उसके नर्सरी के प्रति बढ़ रहा है.
देसी जलवायु में विदेशी आम का किया फलन
विकास कुमार यादव बताते हैं कि कई लोगों का मानना था कि विदेशी किस्म के आम मुजफ्फरपुर की जलवायु में सफल नहीं हो सकते, लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित कर दिखाया. उनके बागान में सभी विदेशी किस्मों में फलन हो रहा है. पौधा खरीदने आने वाले किसानों और ग्राहकों को वह पहले उन आमों का स्वाद भी चखाते हैं, ताकि वे गुणवत्ता को समझ सकें. विकास बताते है कि खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनकी यह पहल न सिर्फ आय का बेहतर स्रोत बनी है, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक और विविधतापूर्ण बागवानी की ओर प्रेरित कर रही है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब: ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते
वॉशिंगटन डीसी57 मिनट पहले
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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है।
एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।
सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ
अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती।
रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी।
इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।
RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद
इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

भरतपुर की इन देसी मिठाइयों का स्वाद है बेमिसाल,हर निवाले में घुलती है मिठास
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Famous Sweets Of Bharatpur: भरतपुर की गलियों में बसती है ऐसी मिठास, जिसका स्वाद एक बार चखने के बाद लंबे समय तक ज़ुबान पर बना रहता है. बिस्तर बंद की अनोखी मिठास हो, बयाना के मशहूर कलाकंद का मलाईदार स्वाद या फिर साल में एक बार मिलने वाले खजले की कुरकुरी लज़्ज़त, हर मिठाई अपनी अलग कहानी कहती है. यही वजह है कि भरतपुर की ये पारंपरिक मिठाइयां सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और विरासत की मीठी पहचान हैं.
भरतपुर जिला न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के लिए जाना जाता है. बल्कि यहां की पारंपरिक मिठाइयां भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं. स्थानीय स्वाद और देसी अंदाज़ में बनी ये मिठाइयां न सिर्फ भरतपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी मशहूर हैं. हर मिठाई की अपनी अलग पहचान और स्वाद है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं और खास मौकों पर जरूर शामिल करते हैं.

भरतपुर की एक और खास मिठाई खजला है जो साल में केवल एक बार विशेष अवसर पर बनाई जाती है. यह मिठाई खासतौर पर त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में तैयार की जाती है. इसके अलावा मेला में देखने के लिए मिलती है. खजला का कुरकुरा और मीठा स्वाद इसे बाकी मिठाइयों से अलग बनाता है और लोग सालभर इसके बनने का इंतजार करते हैं.

रूपवास क्षेत्र की नानखटाई भी भरतपुर की पहचान बन चुकी है. यह पारंपरिक बिस्किट जैसी मिठाई घी और मैदा से तैयार की जाती है जिसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है. चाय के साथ इसका आनंद लेना लोगों को बेहद पसंद है और रूपवास की नानखटाई की मांग हमेशा बनी रहती है.
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इसके अलावा मिश्री मावे के लड्डू भी भरतपुर की खास मिठाइयों में शामिल हैं. यह लड्डू मावे और मिश्री के मिश्रण से बनाए जाते हैं जो स्वाद में बेहद मीठे और पौष्टिक होते हैं. शादी-ब्याह और खास अवसरों पर इनका विशेष महत्व होता है. कुल मिलाकर भरतपुर की ये सभी मिठाइयां न केवल स्वाद में बेहतरीन हैं. बल्कि यहां की संस्कृति और परंपरा की झलक भी पेश करती हैं.
AI सेक्टर में Jio का बड़ा दांव, जामनगर में बनाएगा डेटा सेंटर, कई एआई टूल्स हुए पेश
Reliance के 49वें AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत में AI की नई क्रांति की घोषणा की है। देश के करोड़ों लोगों को सस्ते में AI उपलब्ध कराने के लिए गुजरात के जामनगर में कंपनी देश का सोवर्जन AI बैकबोन बनाने जा रही है। इस एआई डेटासेंटर में कंपनी क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल करने वाली है। इसे रिलायंस के कच्छ स्थित सोलर ग्रिड के जरिए बिजली दी जाएगी। कंपनी ने घोषणा की है कि यह 120 मेगावाट वाला सोलर ग्रिड साल के आखिर तक कमीशन कर लिया जाएगा।
इस एआई डेटा सेंटर में 75,000 H100 NVIDIA GB300 GPU का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले 120 मेगावाट के कमीशन होने के बाद इसमें दो लाख से ज्यादा H100 GPU लगाए जाने की तैयारी है। इतनी क्षमता के साथ यह दुनिया के लीडिंग AI डेटा सेंटर में अपनी जगह बना लेगा।
हर सेक्टर में AI का बोलबाला
डेटा सेंटर के अलावा कंपनी लोगों के लिए अफोर्डेबल AI सर्विसेस लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने मल्टीलिंगुअल AI सर्विस की घोषणा की है, जिसे 22 भारतीय भाषाओं के सपोर्ट के साथ डिजाइन किया गया है। कंपनी ने JioBharatIQ, AI Vyapar, JioHealthIQ, JioLearnIQ और JioKrishiIQ की घोषणा की है, जो करोड़ों भारतीयों की मदद करेगा।
- Jio BharatIQ को देश के हर नागरिक का AI साथी के तौर पर लॉन्च किया गया है।
- Jio AI Vyapar को छोटे व्यापारियों और बिजनेस के लिए डेवलप किया गया है। यह एआई टूल छोटे बिजनेस की प्रोडेक्टिविटी बढ़ाने और ग्राहकों क मदद के लिए डिजाइन किया है।
- Jio HealthIQ को हेल्थकेयर सेक्टर के लिए डेवलप किया गया है। यह एजेंटिक एआई हर परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में मदद करेगा।
- Jio LearnIQ को हर छात्र को अपनी भाषा में सीखने के लिए डेवलप किया गया है। वो एक ही जगह हर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
- Jio KrishIQ को खास तौर पर किसानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह एजेंटिक एआई किसानों को खेती से संबंधित हर छोटी जानकारी उपलब्ध कराएगा।
AGM में अपने कीनोट के दौरान कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि हम AI रिसर्चर्स और इंजीनियर्स की वर्ल्ड क्लास टीम तैयार कर रहे हैं। भारत में एआई स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में कंपनी बड़ा निवेश करने जा रही है। इसके लिए रिलायंस देश के कई बड़े यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ साझेदारी की है।
India AI Mission
49वें AGM में जियो की ये घोषणाएं आने वाले समय में भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने का काम करेगा। यह केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी परियोजना India AI Mission के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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