सतना के देउरी गांव में शनिवार रात करीब 7:30 बजे एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बोलेरो सड़क किनारे बने एक मकान की बाड़ी को ढहाते हुए सीधे घर में घुस गई। इस हादसे के वक्त घर में मौजूद एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक बुजुर्ग महिला ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पानी भरने के बाद घर के आंगन में बैठा था परिवार पीड़ित परिवार के सदस्य रविशंकर कोरी ने बताया कि शनिवार शाम को घर के सभी लोग पानी भरने के बाद मकान के अंदर बनी बाड़ी (आंगन) में एक साथ बैठे हुए थे। इसी दौरान मुख्य मार्ग से आ रही एक तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई। रफ्तार इतनी तेज थी कि वाहन सीधे बाड़ी की दीवार और फेंसिंग को तोड़ता हुआ घर के भीतर घुस गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने तुरंत मलबे और वाहन के नीचे दबे घायलों को बाहर निकाला। हादसे के बाद आरोपी बोलेरो चालक मौके पर ही गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। अमरपाटन से सतना रेफर किया, रास्ते में तोड़ा दम हादसे का शिकार हुए सभी लोगों को तुरंत एम्बुलेंस की मदद से मैहर जिले के अमरपाटन सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान प्रेमवती कोरी (61 वर्ष), सीमा कोल (42), माया साकेत (45) और 4 वर्षीय मासूम उदय मान के रूप में हुई है। अमरपाटन अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद प्रेमवती कोरी और सीमा कोल की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन सतना ले जाते समय रास्ते में ही 61 वर्षीय प्रेमवती कोरी की मौत हो गई। पुलिस ने वाहन जब्त कर शुरू की तलाश घटना की सूचना मिलते ही रामपुर बघेलान थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बोलेरो वाहन को कब्जे में ले लिया है और फरार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। बाकी तीन घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।
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सतना में तेज रफ्तार बोलेरो बाड़ी तोड़कर घर में घुसी: बुजुर्ग महिला की मौत, मैहर अस्पताल में तोड़ा दम; मासूम समेत तीन घायल, आरोपी फरार – Maihar News
स्क्रिप्ट सुनते ही अनु मलिक ने तुरंत बना दी धुन, महेश भट्ट संग रहा खास रिश्ता
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फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक स्टेज प्ले ‘वो सुबह हम ही से आएगी’ के लिए एक बार फिर साथ आए हैं. तारीकी हमीद के निर्देशन में बने नाटक का प्रीमियर 5 जुलाई को मुंबई में होगा. यह नाटक खामोशी, प्रेम, डर और अपने सच का सामना करने के नैतिक साहस जैसे विषयों पर बनी है. महेश भट्ट ने अनु मलिक के साथ अपने गहरे जुड़ाव को किस्मत का हिस्सा बताया. अनु मलिक ने महेश भट्ट को अपने लिए पिता समान मानते हुए कहा कि उनका नाम सुनते ही धुनें अपने आप बनने लगती हैं.
अनु मलिक और महेश भट्ट का रिश्ता पुराना है. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: बॉलीवुड के दो दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट और मशहूर संगीतकार अनु मलिक एक बार फिर धमाका करने के लिए साथ आ गए हैं. वे इस बार किसी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि एक नए स्टेज प्ले ‘वो सुबह हम ही से आएगी’ के लिए साथ आए हैं. महेश भट्ट की प्रस्तुति वाले इस नाटक का प्रीमियर 5 जुलाई को मुंबई में होने जा रहा है, जिसका निर्देशन तारीकी हमीद ने किया है और कहानी दिनेश गौतम ने लिखी है. नाटक का खूबसूरत और दिल को छू लेने वाला संगीत खुद अनु मलिक ने तैयार किया है. नाटक की कहानी खामोशी, दबी हुई भावनाओं, प्यार और डर जैसे गहरे एहसासों के इर्द-गिर्द घूमती है. यह दिखाता है कि कैसे इंसान को अपने सच का सामना करने के लिए बहुत बड़े नैतिक साहस की जरूरत होती है.
अनु मलिक के साथ दोबारा काम करने पर महेश भट्ट काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनके और अनु के बीच सिर्फ काम का रिश्ता नहीं है, बल्कि एक गहरा इमोशनल जुड़ाव है. दोनों ने जिंदगी के कई उतार-चढ़ाव साथ देखे हैं. भट्ट साहब का मानना है कि इस नाटक में जो उम्मीद, संघर्ष और नई शुरुआत की भावना है, उसे अनु का संगीत बहुत ही सहज तरीके से लोगों के दिलों तक पहुंचाता है. उन्होंने बताया कि जैसे ही अनु इस कहानी से जुड़े, उन्हें वही पुरानी वाली जादुई एनर्जी महसूस होने लगी. महेश भट्ट की मानें, तो कुछ रिश्ते पहले से तय नहीं किए जाते, बल्कि वे किस्मत का हिस्सा होते हैं और अनु मलिक के साथ उनका जुड़ाव भी कुछ ऐसा ही है.
अनु मलिक ने महेश भट्ट को बताया पिता समान
अनु मलिक ने भी भट्ट साहब के प्रति अपना सम्मान और प्यार जताने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने दिल से माना कि महेश भट्ट उनके लिए एक पिता की तरह हैं, जिन्होंने न सिर्फ उनके संगीत पर बल्कि एक इंसान के तौर पर भी हमेशा उन पर पूरा भरोसा किया. अनु मलिक ने एक बेहद खूबसूरत बात कही कि भट्ट साहब का नाम सुनते ही उनके दिमाग में अपने आप नई धुनें बनने लगती हैं. यह उनका नहीं बल्कि भट्ट साहब का जादू है. उन्होंने ‘फिर तेरी कहानी याद आई’ से लेकर अपने अब तक के सफर को याद किया. अनु ने लाइव स्टेज के लिए संगीत बनाने का अपना अनुभव बयां किया. वे बोले कि जब इमरान जाहिद ने उन्हें इसकी स्क्रिप्ट और गाने के बोल सुनाए, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए तुरंत ही उसकी धुन तैयार कर दी थी.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
मैदा नहीं, गेहूं के आटे और ताजी मेथी से बनाएं परतदार खस्ता मठरी, जानिए ट्रिक
Wheat Flour Methi Mathri Recipe: हर घर में चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का मन जरूर करता है. बाजार से मिलने वाली मठरी स्वादिष्ट तो होती है, लेकिन उसमें मैदा और ज्यादा तेल होने की वजह से कई लोग उसे खाने से बचते हैं. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अब घर पर गेहूं के आटे और ताजी हरी मेथी से बिल्कुल खस्ता और परतदार मठरी बना सकते हैं. यूट्यूबर वर्षा भावसार ने एक ऐसी आसान रेसिपी शेयर की है, जिसमें मैदे का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता. इसके बावजूद मठरी इतनी कुरकुरी बनती है कि हर कोई उसकी तारीफ करेगा.
इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत साटा तकनीक है, जिसकी वजह से मठरी के अंदर कई परतें बनती हैं और वह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है. अगर आप सफर, बच्चों के टिफिन या शाम की चाय के लिए कोई हेल्दी स्नैक बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर आजमाएं.
क्यों खास है गेहूं और मेथी की यह मठरी
इस मठरी में मैदे की जगह गेहूं का आटा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह ज्यादा पौष्टिक बनती है. ताजी हरी मेथी इसमें खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ाती है. साथ ही सूजी मठरी को अतिरिक्त कुरकुरापन देती है. यही वजह है कि यह स्नैक स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल माना जा सकता है.
सबसे पहले तैयार करें मेथी
सबसे पहले ताजी हरी मेथी की पत्तियां चुनकर अच्छी तरह धो लें और बारीक काट लें. अब एक पैन में थोड़ा सा घी डालें और धीमी आंच पर मेथी को तीन से चार मिनट तक भून लें. इससे मेथी का कड़वापन कम हो जाता है और उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी भी खत्म हो जाती है. यही वजह है कि मठरी लंबे समय तक खराब नहीं होती.
आटा और मसालों का सही मिश्रण
एक बड़े बर्तन में डेढ़ कप गेहूं का आटा और आधा कप सूजी डालें. अब इसमें नमक, दरदरी काली मिर्च, अजवाइन, सफेद तिल और एक छोटा चम्मच पिसी हुई चीनी मिलाएं. यहां चीनी मिठास के लिए नहीं, बल्कि स्वाद को संतुलित करने और मठरी को सुंदर रंग देने के लिए डाली जाती है. इसके बाद भुनी हुई मेथी, हल्दी, लाल मिर्च और एक चुटकी हींग डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.
मोयन से आएगी असली खस्ता बनावट
मठरी को कुरकुरी बनाने के लिए दो बड़े चम्मच देसी घी का मोयन डालें. घी को आटे में अच्छी तरह रगड़ें. जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तब समझिए कि मोयन सही मिला है. अब बहुत कम पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें और उसे पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें.
साटा तकनीक बनाएगी परतदार मठरी
एक छोटी कटोरी में घी और थोड़ा गेहूं का आटा या कॉर्न फ्लोर मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें. इसे साटा कहा जाता है. अब आटे की बड़ी लोई बेलें और उस पर साटा की पतली परत लगाकर थोड़ा सूखा आटा छिड़क दें. इसके बाद रोटी को दोनों तरफ से मोड़ें, फिर दोबारा साटा लगाकर एक बार फिर मोड़ लें. यही प्रक्रिया मठरी के अंदर कई परतें तैयार करती है.
फोल्डिंग के बाद करें कटिंग
अब तैयार आटे को हल्का बेल लें और चाकू की मदद से अपनी पसंद के आकार में काट लें. चाहें तो चौकोर, लंबी पट्टियां या गोल आकार भी दे सकते हैं. सभी टुकड़ों को हल्का दबा दें ताकि तलते समय उनकी परतें अच्छी तरह खुल सकें.
धीमी आंच पर तलना है सबसे जरूरी
एक कड़ाही में तेल गर्म करें, लेकिन मठरी हमेशा धीमी आंच पर ही तलें. तेज आंच पर तलने से ऊपर की परत जल्दी पक जाती है और अंदर तक कुरकुरापन नहीं आता. धीरे-धीरे तलने से मठरी की हर परत अच्छी तरह पकती है और बाजार जैसी खस्ता बनावट मिलती है.
लंबे समय तक रहेगी कुरकुरी
मठरी पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही एयरटाइट डिब्बे में रखें. इस तरह रखने से यह कई दिनों तक कुरकुरी बनी रहती है. इसे चाय, अचार, हरी चटनी या सॉस के साथ परोसा जा सकता है. सफर और बच्चों के टिफिन के लिए भी यह बेहतरीन स्नैक है.
इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत
अगर आप मैदे से बचना चाहते हैं और घर पर हेल्दी स्नैक बनाना चाहते हैं, तो यह मेथी मठरी एक शानदार विकल्प है. गेहूं का आटा, मेथी और साटा तकनीक का मेल इसे स्वादिष्ट, परतदार और लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखता है. एक बार यह रेसिपी बनाने के बाद आप बाजार की मठरी खरीदना भूल सकते हैं.
बांदा में देसी शराब ठेके के पास मिला अज्ञात शव: डॉक्टर ने मृत घोषित किया, पुलिस जांच में जुटी – Banda News
बांदा जनपद के तिंदवारी थाना क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब 4 बजे एक देसी शराब के ठेके के पास अज्ञात युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना तिंदवारी थाना क्षेत्र की सब्जी मंडी स्थित देसी शराब के ठेके से लगभग 100 मीटर की दूरी पर हुई। राहगीरों ने शव को देखकर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद तत्काल पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने एंबुलेंस की सहायता से युवक को अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और युवक की मौत के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
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श्रीनाथजी को ज्येष्ठाभिषेक के बाद लगेगा सवा-लाख आमों का भोग: स्नान उत्सव की तैयारियां शुरू, बावड़ी से भरा पवित्र जल – rajsamand (kankroli) News
पुष्टिमार्ग की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होने वाले ज्येष्ठाभिषेक स्नान उत्सव की तैयारियांं शुरू हो गई हैं। ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर परंपरानुसार ज्येष्ठाभिषेक के लिए पवित्र जल भरने की सेवा विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। मंदिर के तिलकायत की आज्ञा से विशाल बावा और लाल बावा ने वल्लभकुल परिवार, श्रीजी व श्री नवनीतप्रियाजी के निज सेवकों के साथ मिलकर भीतर की बावड़ी से प्रभु के ज्येष्ठाभिषेक के लिए जल भरा। श्रृंगार दर्शन के बाद स्वर्ण एवं रजत कलशों में भरे गए इस जल का आरती दर्शन के समय विशेष अधिवासन किया गया। परंपरा के अनुसार अधिवासन के दौरान जल में अष्टगंध सामग्री का मिश्रण किया गया, जिसमें सुगंधित द्रव्य, चंदन, केसर, गुलाब जल, बरास, अरगजा सहित अन्य पवित्र सामग्रियां शामिल थीं। इस जल से ग्रीष्म ऋतु में प्रभु श्रीनाथजी को शीतलता प्रदान करने का भाव जुड़ा हुआ है। पुष्टिमार्गीय मान्यता के अनुसार यह सेवा श्री यमुना जी द्वारा अपने प्रियतम प्रभु को सुगंधित जल से स्नान कराने के भाव को दर्शाती है। ज्येष्ठाभिषेक के बाद प्रभु श्रीनाथजी को सवा लाख आमों का भोग धराया जाएगा। इस विशेष मनोरथ को लेकर वैष्णव समाज में उत्साह का माहौल है। हवेली के मोती महल चैक में वैष्णवजन आम की सामग्री को सिद्ध करवाने में जुटे हुए हैं। जल भरने और अधिवासन के इस आयोजन में मंदिर के मुखिया चंद्रवदन गिरनारा सहित मंदिर अधिकारी, सेवक और कई गणमान्य वैष्णवजन मौजूद रहे। मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक भारत भूषण व्यास, सीईओ जितेंद्र कुमार पंड्या, तिलकायत के मुख्य सलाहकार अंजन शाह सहित अधिकारियों ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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पूरा PF निकालने की सोच रहे हैं? पहले जान लें नियम, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
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कई कर्मचारी यह मानते हैं कि उनके PF खाते में जमा पूरा पैसा कभी भी निकाला जा सकता है. लेकिन हकीकत इससे अलग है. EPFO ने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PF निकासी के लिए कुछ तय नियम बनाए हैं. ऐसे में अगर आप भी अपना पूरा PF बैलेंस निकालने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन नियमों को समझना बेहद जरूरी है.
नौकरी करते हुए पूरा PF नहीं निकाल सकते! जानिए कब मिलती है 100% निकासी की अनुमति. (Representative Image: AI)
नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना का मुख्य उद्देश्य नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना है. हर महीने कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से इसमें योगदान जमा किया जाता है, जिस पर EPFO समय-समय पर ब्याज भी देता है. पिछले कुछ वर्षों में EPFO ने सदस्यों की सुविधा के लिए कई डिजिटल सेवाएं शुरू की हैं और अब EPFO 3.0 की भी चर्चा हो रही है. इससे PF से जुड़े काम पहले से ज्यादा आसान और तेज होने की उम्मीद है. हालांकि, इस डिजिटल बदलाव का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सदस्य अपनी इच्छा से किसी भी समय पूरा PF बैलेंस निकाल सकेंगे. EPFO के मौजूदा नियम अब भी पूरी निकासी पर कुछ स्पष्ट शर्तें लागू करते हैं.
किन परिस्थितियों में 100 प्रतिशत PF निकासी की अनुमति?
EPFO के नियमों के अनुसार, पूरा PF बैलेंस निकालने की अनुमति केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही दी जाती है. सबसे सामान्य स्थिति रिटायरमेंट की होती है. जब सदस्य 58 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तब वह अपने EPF खाते का अंतिम निपटान (Final Settlement) कराकर पूरी राशि निकाल सकता है. इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है और लगातार बेरोजगार रहता है, तब भी उसे चरणबद्ध तरीके से पूरी राशि निकालने का अधिकार मिलता है. मौजूदा नियमों के अनुसार, नौकरी छूटने के एक महीने बाद सदस्य अपने PF का 75 प्रतिशत तक निकाल सकता है. यदि दो महीने तक नई नौकरी नहीं मिलती, तो वह शेष 25 प्रतिशत राशि निकालने के लिए भी आवेदन कर सकता है. यह व्यवस्था बेरोजगारी के दौरान आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से बनाई गई है.
नई नौकरी मिलने पर PF निकालना सही फैसला नहीं माना जाता
कई कर्मचारी नई कंपनी में जॉइन करने से पहले अपना पूरा PF निकाल लेते हैं. लेकिन EPFO ऐसा करने की सलाह नहीं देता. यदि आप नौकरी बदल रहे हैं, तो बेहतर विकल्प यह है कि अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से पुराने PF खाते को नई कंपनी से जोड़ दें. इससे आपका पुराना बैलेंस सुरक्षित रहता है, उस पर ब्याज मिलता रहता है और आपकी नौकरी का रिकॉर्ड भी लगातार बना रहता है. बार-बार PF निकालने से आपकी रिटायरमेंट की बचत कम हो सकती है. कुछ मामलों में समय से पहले निकासी करने पर टैक्स संबंधी प्रभाव भी पड़ सकते हैं. इसलिए विशेषज्ञ भी नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर को ही सबसे बेहतर विकल्प मानते हैं.
नौकरी के दौरान भी मिल सकती है PF की रकम, लेकिन पूरी नहीं
हालांकि नौकरी करते समय पूरा PF निकालना संभव नहीं है, लेकिन EPFO कई जरूरी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी यानी एडवांस की सुविधा देता है. सदस्य उच्च शिक्षा, शादी, घर खरीदने, मकान बनाने, होम लोन चुकाने, गंभीर बीमारी के इलाज और कुछ अन्य विशेष परिस्थितियों में अपने PF खाते से तय सीमा तक राशि निकाल सकते हैं. हर उद्देश्य के लिए अलग-अलग पात्रता शर्तें और निकासी की सीमा तय होती है. कई मामलों में कर्मचारी की नौकरी की अवधि भी महत्वपूर्ण होती है. यानी जरूरत पड़ने पर सदस्य अपनी बचत का एक हिस्सा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन पूरा फंड निकालने की अनुमति सामान्य परिस्थितियों में नहीं होती.
पूरी निकासी से पहले सोच-समझकर लें फैसला
PF सिर्फ एक बचत खाता नहीं, बल्कि लंबे समय की वित्तीय सुरक्षा का मजबूत आधार माना जाता है. इसमें कर्मचारी के योगदान के साथ नियोक्ता का हिस्सा और हर साल मिलने वाला ब्याज भी जुड़ता रहता है, जिससे समय के साथ बड़ी राशि तैयार होती है. यदि बिना किसी जरूरी कारण के पूरा PF निकाल लिया जाता है, तो रिटायरमेंट के समय आर्थिक सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है. इसलिए यदि आप केवल नौकरी बदल रहे हैं या तत्काल पैसों की जरूरत नहीं है, तो PF को खाते में ही रहने देना अधिक फायदेमंद माना जाता है. EPFO का उद्देश्य भी यही है कि कर्मचारी अपनी भविष्य निधि को लंबे समय तक सुरक्षित रखें और जरूरत पड़ने पर तय नियमों के तहत ही उसका उपयोग करें. इसलिए पूरा PF निकालने का फैसला लेने से पहले नियमों को अच्छी तरह समझना और अपनी भविष्य की वित्तीय जरूरतों का आकलन करना बेहद जरूरी है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
नवादा में वजन और गुणवत्ता में कमी, मिड-डे मील घोटाला: 3 सदस्यीय टीम के पहुंचने पर हड़कंप,चावल की बोरियों के वजन की जांच – Nawada News
नवादा के हिसुआ प्रखंड अंतर्गत तुंगी पंचायत के चकपर गांव में मध्याह्न भोजन योजना के चावल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायत और वीडियो साक्ष्य के आधार पर विधायक ने डीएम नवादा से लेकर अपर सचिव स्तर तक अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजी, जिसके बाद पूरे खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। मिड-डे मील के लिए भेजे गए चावल की बोरियों का वजन जांचा गया तो ज्यादातर बैगों में 30 से 45 किलो अनाज ही मिला। निर्धारित 51 किलो के बजाय भारी कटौती पाई गई। साथ ही चावल की गुणवत्ता भी बेहद खराब थी। स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया। विधायक अनिल सिंह ने इस मामले को उच्च स्तर पर उठाया, जिसके बाद अपर सचिव रैंक के अधिकारियों वाली तीन सदस्यीय टीम तुरंत नवादा पहुंची। टीम ने स्थानीय गोदामों का निरीक्षण किया और विधायक अनिल सिंह को भी जांच कमेटी में शामिल किया गया। दोनों स्थानों — गांव और हिसुआ के गोदाम पर जांच के दौरान बड़ी अनियमितताएं सामने आईं। गोदाम में रखे अनाज की बोरियों में लगातार वजन कम पाया गया। इससे साफ संकेत मिलता है कि एक बड़े पैमाने पर गरीबों और स्कूली बच्चों का राशन निकाला जा रहा था। घटिया किस्म का अनाज आपूर्ति किए जाने से पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। जांच टीम ने सैंपलिंग भी की है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और सप्लायर्स पर सख्त विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। इस मामले में डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, हिसुआ के एजीएम, सप्लायर और ट्रांसपोर्टर समेत कई लोगों पर सवालिया निशान लग गया है। विधायक अनिल सिंह ने कहा कि किसी भी सूरत में हम गरीबों का निवाला छीनने वालों को बख्शेंगे नहीं। गरीबों को उनका हर हक मिलना चाहिए। जो लोग उनके हक में कटौती करेंगे, उनके खिलाफ हम हर मंच पर लड़ाई लड़ेंगे। विधायक के इस सक्रिय रुख की स्थानीय लोगों ने खूब सराहना की है। उन्होंने कहा कि अनिल सिंह जैसे जनप्रतिनिधि ही आम आदमी की आवाज बनकर खड़े होते हैं। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में मिड-डे मील और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में चल रही गड़बड़ियों को उजागर कर दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट शीघ्र ही उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस पूरे प्रकरण ने सिस्टम में सुधार की मांग को और मजबूत कर दिया है।
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करंट की चपेट में आने से दुधारू गाय की मौत: किसानों में गुस्सा, बोले- पोल की अर्थिंग ठीक नहीं थी, शिकायत पर सुधार कार्य नहीं किया – Mauganj News
मऊगंज जिले के नईगढ़ी थाना क्षेत्र के ग्राम पुरैनी में शनिवार दोपहर करंट लगने से एक दुधारू गाय की मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों और किसानों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है। किसान मनमोहन प्रसाद पांडेय के परिवार के सदस्य मवेशियों को चराने ले जा रहे थे। इसी दौरान गांव में लगे एक विद्युत पोल के पास पहुंचते ही दुधारू गाय करंट की चपेट में आ गई। करंट इतना तेज था कि गाय ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। शिकायत के बाद भी विभाग ने नहीं दिया ध्यान ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विद्युत पोल में लंबे समय से करंट उतर रहा था। पोल की अर्थिंग और रखरखाव ठीक नहीं होने के कारण आसपास की जमीन में करंट फैल रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत कई बार बिजली कंपनी से की गई थी, लेकिन विभाग ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि यदि समय पर मरम्मत कराई जाती तो इस हादसे को टाला जा सकता था। मुआवजे की मांग, न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी पीड़ित किसान मनमोहन प्रसाद पांडेय ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने शासन के नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाने की भी अपील की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने गांव के सभी जर्जर पोलों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है और चेतावनी दी है कि सुधार और मुआवजा न मिलने पर वे आंदोलन करेंगे।
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क्या NEET 2026 की पुनर्परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ? NTA ने वायरल दावों का किया खंडन, जानिए क्या कहा
सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) स्नातक (2026 की पुनः परीक्षा) के प्रश्नपत्र लीक होने की अफवाहों के बीच, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है और इसे आपराधिक अपराध करार दिया है। NTA ने एक पोस्ट में कहा, “कृपया अफवाहें न फैलाएं। तस्वीर में आईडी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है और हम उस छात्र की पहचान करेंगे जिसे 21 जून को परीक्षा के दौरान यह प्रश्नपत्र जारी किया गया था। टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर इस तरह के फर्जी वीडियो बनाना आपराधिक अपराध है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
एक्स पर शेयर की गई थी पोस्ट
NEET परीक्षा के पेपर लीक होने के सबूत होने का दावा करने वाले एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, “मेरे पास वीडियो सबूत हैं जो स्पष्ट अनियमितताओं को दर्शाते हैं और पूरी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं। NTA को इस पर तुरंत जवाब देना होगा। लाखों छात्रों को न्याय मिलना चाहिए। नीचे देखें।”
इस बीच, बिहार के लखीसराय जिले में NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा के दौरान कथित परीक्षा धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 21 जून को आयोजित NEET पुनर्परीक्षा में सामने आए ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ घोटाले की जांच के लिए 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। सूत्रों के अनुसार, जांच की कमान एक डीआईजी रैंक के अधिकारी को सौंपी गई है। एसआईटी में एक एसपी, पांच डीएसपी और पांच इंस्पेक्टर शामिल हैं।
‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ घोटाला क्या है?
अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किए गए कई व्यक्तियों ने दावा किया कि वे मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि उनमें से कुछ कथित तौर पर पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच), अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एएनएमएमसीएच), गया और दिल्ली सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों के छात्र हैं। NEET पुनर्परीक्षा में ‘मुन्ना भाई’ (नकली) उम्मीदवारों को दिया गया कोड नंबर ‘220’ था। असली उम्मीदवार की बायोमेट्रिक जांच परीक्षा केंद्र से लगभग 100 मीटर दूर खड़ी गाड़ी में की जाती थी, जबकि नकली उम्मीदवार को केंद्र के अंदर मौजूद बायोमेट्रिक स्टाफ को यह कोड बताना होता था। जैसे ही कोड ‘220’ का ज़िक्र होता, बायोमेट्रिक जांच करने वाला कर्मचारी तुरंत समझ जाता कि असली परीक्षार्थी की बायोमेट्रिक जांच पहले ही बाहर हो चुकी है, और उसके सामने खड़ा व्यक्ति नकली उम्मीदवार या ‘जांचकर्ता’ है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना में शामिल कर्मचारी संदेह पैदा होने या सवाल उठने से बचने के लिए लैपटॉप का इस्तेमाल करके नकली उम्मीदवार की बायोमेट्रिक जांच का सिर्फ दिखावा करता और फिर उसे अंदर जाने देता।
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