जमुई पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत 26 खोए हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को लौटा दिए। साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई से मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि साइबर थाना पुलिस ने विभिन्न स्थानों से ये 26 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। सभी मोबाइलों की पहचान और सत्यापन के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य लोगों की खोई हुई संपत्ति वापस दिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाना है। एसपी ने लोगों से अपील की कि यदि किसी का मोबाइल खो जाए तो तुरंत संबंधित थाने में इसकी सूचना दें और सीईआईआर (CEIR) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। इससे मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लॉक हो जाता है और यदि उसमें कोई नया सिम लगाकर उपयोग किया जाता है तो पुलिस उसे आसानी से ट्रैक कर बरामद कर सकती है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले उसकी जांच अवश्य करें। इसके लिए संचार साथी पोर्टल पर मोबाइल का आईएमईआई (IMEI) नंबर डालकर यह सुनिश्चित कर लें कि मोबाइल चोरी या गुमशुदगी का तो नहीं है। साइबर थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो दर्जन से अधिक लोगों को उनके मोबाइल सौंपे गए। अपना खोया हुआ मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने जमुई पुलिस का आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में जदयू नेता मुकेश कुमार साह का भी खोया हुआ मोबाइल पुलिस ने बरामद कर उन्हें लौटाया। मोबाइल मिलने पर उन्होंने जमुई पुलिस और एसपी विश्वजीत दयाल का धन्यवाद करते हुए साइबर थाना पुलिस की सराहना की। उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले लखीसराय जाने के दौरान उनका मोबाइल खो गया था, जिससे उन्हें काफी परेशानियां हुई थीं। इस अवसर पर साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार सहित साइबर पुलिस के जवान मौजूद थे।
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ऑपरेशन मुस्कान- जमुई पुलिस ने 26 खोए मोबाइल बरामद किए: एसपी ने CEIR पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की – Jamui News
130 मॉडिफाइड साइलेंसरों पर चला रोड रोलर: रीवा में ‘नो नॉइज पॉल्यूशन’ का संदेश; तेज आवाज करने वाले वाहनों पर कार्रवाई – Rewa News
रीवा में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ यातायात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 130 मॉडिफाइड साइलेंसरों को सरेआम रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस ने इस कार्रवाई के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण रोकने का संदेश दिया। यातायात थाना प्रभारी अनिमा शर्मा और सूबेदार अखिलेश कुशवाह ने बताया कि शहर में लगातार ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिनमें अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए हैं। जांच के दौरान जब्त किए गए करीब 130 साइलेंसरों को शनिवार को रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया गया, ताकि लोगों के बीच यह स्पष्ट संदेश जाए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सूबेदार अखिलेश कुशवाह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल चालानी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि युवाओं को जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि हम आम जनता के बीच ‘नो नॉइज पॉल्यूशन’ का संदेश देना चाहते हैं। युवा अपनी गाड़ियों में अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों से निकलने वाली तेज और पटाखों जैसी आवाजें आम नागरिकों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। लगातार तेज शोर से मानसिक तनाव, सुनने की क्षमता पर असर और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पुलिस ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त करने के साथ वाहन मालिकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की गई है और नियमानुसार जुर्माना वसूला गया है। रीवा पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में किसी भी प्रकार के अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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आलू हरा हो जाए तो क्या करें? खाने के लिए सेफ या सेहत के लिए जहर, जानें सेवन का सही तरीका
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Is It Safe To Eat Potatoes With Green Patches: आलू बहुत ही कॉमन सब्जी है, लेकिन इसे खाने से आप अस्पताल भी पहुंच सकते हैं. दरअसल, इसकी वजह आलू पर नजर आने वाले हरे निशान है, जिन्हें ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. यहां जानिए इसके पीछे का कारण और स्टोर करने का सही तरीका.
आलू किचन की बहुत ही कॉमन सब्जी है. सब्जी से लेकर पराठा, टिक्की, स्नैक्स जैसे कई व्यंजनों के रूप में इसका इस्तेमाल लगभग रोज घरों में किया जाता है. लेकिन इसे बनाने से पहले अच्छी तरह से जांच लेना जरूरी है. सिर्फ सड़े-गले या कीड़े लगे हिस्से को काटकर अलग कर देना आलू को खाने के लिए सुरक्षित नहीं बनाता है. यदि इस पर हरे निशान भी दिख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें.
दरअसल, आलू का हरा होना सिर्फ रंग बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके अंदर होने वाले कुछ रासायनिक बदलावों का संकेत भी हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, हरे आलू का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि आलू हरे क्यों होते हैं, इन्हें खाना चाहिए या नहीं और इन्हें सही तरीके से स्टोर कैसे किया जाए.
आलू हरे क्यों हो जाते हैं?
जब आलू लंबे समय तक धूप या तेज रोशनी के संपर्क में रहते हैं, तो उनकी सतह पर क्लोरोफिल बनने लगता है. इसी वजह से आलू का रंग हरा दिखाई देने लगता है. क्लोरोफिल खुद नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि आलू में सोलानिन नामक एक विषैला तत्व भी बढ़ सकता है. इस टॉक्सिन की खासबात ये है कि इसे हीट से खत्म नहीं किया जा सकता है. अगर शरीर में इसकी मात्रा अधिक हो जाए तो ये आपके ब्रेन और नर्वस सिस्टम के सिग्नल्स को ब्लॉक कर सकता है.
क्या हरे आलू खा सकते हैं?
अगर आलू का केवल छोटा हिस्सा हरा हुआ है, तो उसके छिलके और हरे हिस्से को अच्छी तरह काटकर हटाया जा सकता है. इसके बाद बचे हुए हिस्से का इस्तेमाल मैश्ड आलू, फ्राई या अन्य व्यंजनों में किया जा सकता है. हालांकि यूएस की अथॉरिटी नेशनल कैपिटल पॉइजन सेंटर ने वॉर्निंग जारी करी कि आलू ज्यादा हरा हो गया है या उसका स्वाद और गंध असामान्य लग रही है, तो उसे फेंक देना ही सुरक्षित विकल्प है.
आलू को हरा होने से कैसे बचाएं?
आलू को हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखें. इन्हें धूप या तेज रोशनी से दूर रखना चाहिए. स्टोर करते समय ऐसे बैग का इस्तेमाल करें जिसमें हवा का आवागमन हो सके. आलू को फ्रिज में रखने से बचें, क्योंकि ठंडे तापमान में उनका स्टार्च शुगर में बदलने लगता है, जिससे स्वाद और बनावट प्रभावित हो सकती है. साथ ही आलू को प्याज के साथ भी नहीं रखना चाहिए. सही तरीके से स्टोर करने पर आलू लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
जौहर विश्वविद्यालय ध्वस्तीकरण आदेश रोकने की मांग: समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग – Bahraich News
बहराइच में समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। शनिवार दोपहर करीब दो बजे के जिलाध्यक्ष शेख रियाजुद्दीन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय के कई कमरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है। सभा का तर्क है कि यदि भवन निर्माण से संबंधित कोई कानूनी या प्रशासनिक विवाद है, तो उसका समाधान न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। ऐसी कार्रवाई से हजारों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।समाजवादी अल्पसंख्यक सभा ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और उच्च शिक्षा संस्थानों की गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अल्पसंख्यक सभा ने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। उन्होंने विश्वविद्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विवादित आदेश पर रोक लगाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। जिलाध्यक्ष शेख रियाजुद्दीन ने जोर देकर कहा कि शिक्षा संस्थानों का संरक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जौहर विश्वविद्यालय का नाम वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां से जुड़ा होने के कारण सरकार बदले की भावना से काम कर रही है, जो सरासर अन्याय है। इस दौरान सभासद शकील मिर्जा, राष्ट्रीय प्रवक्ता तारिक खान, मोहम्मद शुएब, अल्ताफ मेकरानी, कामरान मुबारक, खुर्शीद अहमद, रिज़वान खां, इरम, नसीम, गौसूल आज़म, सिराजुद्दीन एडवोकेट, तुफैल खान नाना, शुहेल खान, शेख शादाब अहमद, सैयद अकरम आजाद, आदिल खान, इंशा, ताजुद्दीन अंसारी, फहीम उल्ला और चिरू सहित अल्पसंख्यक सभा के कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा: पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू
पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के ‘डेली प्राइसिंग’ यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।
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सोनम वांगचुक पर ‘एक्शन’ से भड़की AAP: केजरीवाल बोले- सत्ता का इतना अहंकार ठीक नहीं; संजय का दावा- सरकार संसद कूच से डरी – New Delhi News
दिल्ली में 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने और युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने सरकार के इस कदम की तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए इसे ‘तानाशाही’ करार दिया है। ‘कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय व्यवस्था सुधारो’ अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “इतना अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी। कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो। सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।” दूसरी तरफ आप’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक अपनी जान दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो पिछले कुछ समय में हुए 93 पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो चुके हैं। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक के 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च से बुरी तरह डर गई थी। संजय सिंह ने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे और अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे जो 93 पेपर लीक से बर्बाद हो चुके थे। वे युवा बेबस थे और उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। भारत के प्रधानमंत्री ने 21 दिन तक उनसे बात नहीं की और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझा। सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने के लिए नहीं आया कि आखिर वे क्यों अपनी जान देने पर आमादा हैं?
प्रधानमंत्री को पता था कि यह आवाज बहुत बड़ी बनने वाली है, इसलिए उन्होंने दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बदलकर एक ऐसा पुलिस कमिश्नर बिठाया जिससे सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जा सके। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि अभिजीत दिपके को भी डिटेन कर लिया गया है।
सत्ता का यह अहंकार यही नौजवान खत्म करेगा और जिसके ऊपर आज लाठियां बजाई जा रही हैं, वही इस सत्ता को उखाड़ कर फेंकेगा। इसलिए मैं देश के युवाओं से अपील करना चाहता हूं कि सोनम वांगचुक का साथ दीजिए और अपने आंदोलन को कमजोर ना पड़ने दीजिए।
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उज्जैन में PFCMB वाल्व चोरी कर रहे युवक की पिटाई: नर्मदा परियोजना में इजराइल से मंगाए गए थे उपकरण, मारपीट का VIDEO – Ujjain News
उज्जैन जिले के तराना क्षेत्र में शुक्रवार शाम नर्मदा परियोजना से इजराइल से मंगाए गए कीमती उपकरण चोरी करने वाले एक आरोपी को अधिकारियों और ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी।
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घटना का VIDEO भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोपी के पास से इजराइल से मंगाए गए 28 पीएफसीएमबी (PFCMB) वाल्व बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों की लगातार चोरी से क्षेत्र के 55 गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था।
चोरी के वाल्व दिखाता युवक।
वाल्व की मदद से पानी की सप्लाई कंट्रोल होती है
नर्मदा परियोजना में आईआर पद पर पदस्थ अधिकारी रितेश दीक्षित ने बताया कि तराना, शाजापुर, मक्सी और महिदपुर के ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए 1,540 ओएमएस (OMS) बॉक्स लगाए गए हैं। इन बॉक्स में इजराइल से मंगाए गए विशेष पीएफसीएमबी वाल्व लगाए गए हैं, जिनकी भारत में उपलब्धता बेहद मुश्किल है। इन वाल्व की मदद से अधिकारी कंट्रोल रूम या कार्यालय से ही पानी की सप्लाई चालू और बंद कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से ग्राम करंज, नाटाखेड़ी, बघेरा और पल्दुना सहित अन्य क्षेत्रों से इन कीमती वाल्वों की लगातार चोरी हो रही थी। इससे विभाग के सामने जलापूर्ति व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया था। चोरों को पकड़ने के लिए विभाग ने कर्मचारियों को अलर्ट कर नियमित गश्त शुरू कर दी थी।
इसी दौरान नाटाखेड़ी प्रोजेक्ट पर तैनात कर्मचारी बलराम गुर्जर ने एक संदिग्ध युवक को ओएमएस बॉक्स से वाल्व निकालते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम दरबार सिंह पिता चरणसिंह गुर्जर, निवासी भैसाखेड़ी, थाना टोंक खुर्द, जिला देवास बताया। आरोपी के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी।
आरोपी के पास मौजूद काले रंग के बैग की तलाशी लेने पर चोरी किए गए 28 पीएफसीएमबी वाल्व बरामद हुए। अधिकारियों के अनुसार एक वाल्व की कीमत करीब ₹2,400 है। इस हिसाब से बरामद सामान की कीमत ₹67,200 से अधिक है। परियोजना में कुल 4,250 वाल्व लगाए गए हैं, जिनमें से कई पहले ही चोरी हो चुके थे।
घटना के बाद अधिकारियों ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि यह किसी संगठित गिरोह की करतूत प्रतीत होती है और मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
दरभंगा में नेपाल की बारिश का असर: कोसी-कमला बलान नदियों का जलस्तर बढ़ा, 20 गांव में घुसा बाढ़ का पानी; मुख्याल से संपर्क कटा – Darbhanga News
नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर दरभंगा में दिख रहा है। लगातार चौथे दिन कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर बढ़ने से कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों के आवागमन, शिक्षा, रोजगार और दैनिक जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंडों में भी बाढ़ का पानी आबादी और खेतों तक पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। तीन प्रखंड में करीब 20 गांव प्रभावित हैं। छह गांव बने टापू, सड़क संपर्क पूरी तरह टूटा कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड की इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियां, बलथरवा और बसबरिया और सूघराईन पंचायत के भरैन टोला चारों ओर से पानी से घिरा है। गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाने से हजारों लोग घरों में फंस गए हैं। अब गांव से बाहर निकलने का एकमात्र सहारा नाव ही बची है। नाव से तय हो रहा स्कूल, बाजार और अस्पताल का सफर ग्रामीणों ने बताया कि बाजार जाने, दवा लाने, बैंक का काम करने या मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी नाव संचालक एक बार आने-जाने के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपए किराया वसूल रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इटहर गांव के रविन्द्र राय, राम जप्पो राय, राजेश राय, जय कुमार पोद्दार, रेणु देवी, रुणा देवी, टुनो सदा और भोला सदा समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी नाव की संख्या पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की है कि अधिक सरकारी नावों की व्यवस्था की जाए और उन पर सरकारी पहचान चिन्ह लगाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। स्कूलों में पठन-पाठन ठप बाढ़ का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मिनियां और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। विद्यालय परिसर में पानी भर जाने के कारण दोनों स्कूलों में पठन-पाठन पूरी तरह बंद है। वहीं, मध्य विद्यालय बर्निया के शिक्षक भी नाव के सहारे विद्यालय पहुंच रहे हैं। अगर जलस्तर में और वृद्धि हुई तो अन्य विद्यालयों में भी शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
रोजमर्रा की जरूरतें बनी चुनौती बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न, स्वच्छ पेयजल, दवा और पशु चारे की समस्या गहराने लगी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पहले से जमा राशन के सहारे दिन काट रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों के सामने संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्यालय से संपर्क टूटा, अन्य पंचायतों पर भी खतरा बाढ़ के पानी से कुशेश्वरस्थान मुख्यालय से प्रभावित गांवों का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। उसरी, उजुआ, सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायत के निचले इलाकों में भी तेजी से पानी फैल रहा है। अगर जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो और अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। घनश्यामपुर और किरतपुर में भी बढ़ा खतरा बाढ़ का असर अब घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंडों में भी दिखने लगा है। पानी खेतों में प्रवेश कर चुका है और कई निचले इलाकों की आबादी प्रभावित होने लगी है। दोनों प्रखंडों में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने के लिए माइकिंग कराई जा रही है। कई विद्यालयों के परिसर में पानी भर जाने से वहां भी पठन-पाठन प्रभावित होने लगा है। राहत की मांग तेज बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त सरकारी नावों की व्यवस्था, राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, पशु चारा और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते पर्याप्त राहत नहीं मिली तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कुशेश्वरस्थान पूर्वी के अंचलाधिकारी राकेश रोशन भारती ने बताया कि फिलहाल प्रखंड में पांच सरकारी नावें संचालित की जा रही हैं। इनमें इटहर पंचायत में तीन और सूघराईन पंचायत के भरैन टोला में दो नाव लगाई गई हैं। जहां भी अतिरिक्त नाव की आवश्यकता होगी, वहां तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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यहां मिनी समोसे के साथ परोसी जाती है खास तीसी की चटनी और भुनी हरी मिर्च, लगती है लाइन
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Muzaffarpur Famous Mini Samosa: मुजफ्फरपुर के कलमबाग चौक पर गोलू कुमार समोसे की दुकान लगाते हैं. इनकी यह मिनी समोसे की दुकान करीब 13 साल पुरानी है जहां पहले ढ़ाई रुपये में एक समोसा मिलता था और अब 15 रुपये प्लेट में तीन समोसे मिलते हैं. इनका स्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं.
मुजफ्फरपुर. बढ़ती महंगाई के बीच जहां खाने-पीने की अधिकांश चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के कलमबाग चौक स्थित एक छोटी-सी समोसे की दुकान आज भी अपने स्वाद और किफायती कीमत के कारण लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है. यहां मिलने वाला मिनी समोसा इतना लोकप्रिय है कि शाम होते ही दुकान के बाहर ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है. कई बार लोगों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ता है.
दुकान संचालक गोलू कुमार बताते हैं कि वे पिछले 13 सालों से इस दुकान का संचालन कर रहे हैं. शुरुआत में वे एक समोसा ढाई रुपये में बेचते थे, लेकिन समय के साथ लागत बढ़ने पर अब 15 रुपये में तीन मिनी समोसे की एक प्लेट दी जाती है. इसके बावजूद ग्राहकों की भीड़ में कोई कमी नहीं आई है.
चटनी और भुनी हरी मिर्च का स्वाद
गोलू कुमार के अनुसार, उनकी दुकान की सबसे बड़ी पहचान यहां की विशेष चटनी है, जिसे आलू और तीसी के साथ स्थानीय मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. यही चटनी मिनी समोसे के स्वाद को अलग पहचान देती है. इसके अलावा यहां बनने वाले समोसे में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे इसे हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं. समोसे के साथ परोसी जाने वाली चटनी और भुनी हुई हरी मिर्च का स्वाद ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है.
हर दिन बिकती है 1000 प्लेट
उन्होंने बताया कि दुकान पर सुबह के समय लिट्टी-चना मिलता है, जबकि दोपहर करीब 2 बजे के बाद मिनी समोसे की बिक्री शुरू होती है. शाम होते-होते यहां इतनी भीड़ हो जाती है कि लगातार समोसे तलने पड़ते हैं. हर दिन 500 से 1000 प्लेट तक समोसे बिक जाते हैं.
इस दुकान पर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी भी शाम के नाश्ते के लिए नियमित रूप से पहुंचते हैं. वहीं, दूसरे जिलों से मुजफ्फरपुर आने वाले लोग भी यहां का मशहूर मिनी समोसा चखने के बाद अपने परिवार और दोस्तों के लिए पैक कराकर भी ले जाते हैं.
गोलू कुमार कहते हैं कि उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि ग्राहकों को शुद्ध, ताजा और घर जैसा स्वाद मिले. शायद यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस छोटी-सी दुकान की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
व्यवस्था में रहने के लिए समझौता क्यों करूं: SDM पद से हटाए जाने के बाद IAS रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया पर लिखी मन की बात – Jalaun News
जालौन तहसील से एसडीएम में पद से हटाए जाने के बाद आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा किए हैं। उनके इन पोस्टों में प्रशासनिक व्यवस्था, व्यक्तिगत सिद्धांतों, सुशासन और सेवा के दौरान मिलने वाले अवसरों को लेकर गंभीर विचार व्यक्त किए गए हैं। उनके संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपने एक पोस्ट में IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने लिखा कि जब वह स्वयं की तुलना उन लोगों से करते हैं जो व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो उन्हें आत्मग्लानि महसूस होती है। उन्होंने कहा कि केवल व्यवस्था में अपनी जगह बनाए रखने के लिए स्वयं को धोखा देना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि सभी लोग समझौता कर लें तो बदलाव संभव नहीं होगा, इसलिए कम से कम कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिन्हें देखकर अन्य लोग तुलना कर सकें और यह न कहें कि “सब एक जैसे हैं।” उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद देते हुए लिखा कि उनकी प्रतिक्रियाओं ने उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया। इसके बाद उन्होंने बताया कि व्यवस्था को जागृत करने के उद्देश्य से उन्होंने एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि जनपद जालौन में उन्हें उपजिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात किए जाने की परिस्थितियों में उनसे कोई त्रुटि हुई हो तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि दंड प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह किसी तहसील, यथासंभव तहसील जालौन, में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाए, ताकि उन्हें पर्याप्त फील्ड एक्सपोजर और प्रशासनिक क्षमता विकसित करने का अवसर मिल सके। राही ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि यदि जालौन में ऐसी तैनाती संभव न हो तो उत्तर प्रदेश के किसी भी ऐसे जनपद में उन्हें उपजिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए,
जहां लिखित व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप सुशासन (Basic Governance) लागू करने में किसी प्रकार की प्रशासनिक या राजनीतिक बाधा न हो। यदि यह भी संभव न हो तो उन्होंने अपने कैडर परिवर्तन की अनुमति और संस्तुति देने का अनुरोध किया है।
उन्होंने पोस्ट के माध्यम से कहा कि अंतिम निर्णय होने तक वह 22 जुलाई 2026 से अपने कार्य के अनुरूप आधा वेतन लेने का निर्णय कर रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि इस निर्णय को अनुशासनहीनता न माना जाए बल्कि सद्भावपूर्वक स्वीकार किया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगले सप्ताह “Leadership, Ethics and Organisational Effectiveness” विषय पर होने वाले प्रशिक्षण के बाद उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिल सकता है, इसलिए आधा वेतन लेने की तिथि प्रशिक्षण के बाद से निर्धारित की गई है।
15 जुलाई की अपनी पोस्ट में रिंकू सिंह राही ने लिखा कि उनके मन में हमेशा यह द्वंद्व रहता है कि यदि आमजन का भला करना है तो पद पर बने रहना आवश्यक है, लेकिन पद पर बने रहने के लिए कई बार सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता है। उन्होंने आगे लिखा कि उन्हें यह बात याद आती है कि “सदमार्ग में मात्रा से अधिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है, जीवन लंबा नहीं बल्कि महान होना चाहिए।”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास कर रहे विद्यार्थियों और आम लोगों को देखकर उन्हें स्वयं पर शर्म आती है, क्योंकि लोग अपना समय निकालकर व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे लोगों का समर्पण उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।
रिंकू सिंह राही की इन पोस्टों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन पोस्टों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल उनके विचार और मांगें सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।
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