मुंबई. ‘पुष्पा 2’ और ‘धुरंधरः द रिवेंज’ ऐसी फिल्में रहीं, जिनके टिकर 3000 रुपए तक बिके. अब क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ के लिए भी टिकट प्राइज काफी हाई है. यह फिल्म 17 जुलाई को भारत में हिंदी समेत कई भाषाओं में रिलीज हो रही है. हाल में टॉम हॉलेड समेत इसके मेकर्स और एक्टर्स फिल्म के प्रमोशन के लिए मुंबई भी आए थे. क्रिस्टोफर नोलन और उनकी फिल्म का क्रेज भारतीय ऑडियंस के सिर चढ़कर बोल रहा है. इसलिए फिल्म के टिकट 3000 से भी ज्यादा कीमत में बिक रहे हैं.
दिल्ली-मुंबई जैसे शहरो में ‘द ओडिसी’ के लिए में एडवांस बुकिंग शुरू हो गई है. टिकट की कीमतों ने सबका ध्यान खींचा है, क्योंकि प्रीमियम IMAX सीटों की कीमत 3000 रुपए से ज़्यादा है. मुंबई के लोअर परेल में फीनिक्स पैलेडियम के PVR ICON में, सुबह 10:00 बजे, दोपहर 1:30 बजे, शाम 5:00 बजे, रात 8:30 बजे और रात 11:59 बजे के शो के लिए रिक्लाइनर सीटें 3100 में मिल रही हैं.
हालांकि, रेगुलर सीटिंग टिकट की कीमत 700 से 1000 रुपए के बीच है. वडाला के मिराज सिनेमाज़ IMAX में, सुबह 9:50 बजे, दोपहर 1:20 बजे, शाम 4:50 बजे, रात 8:20 बजे और रात 11:55 बजे के शो के लिए रिक्लाइनर टिकट 2500 रुपए में मिल रहे हैं. वहीं दिल्ली के PVR IMAX विद लेज़र, प्रिया में शाम 4:45 बजे वाले IMAX शो के लिए ‘द ओडिसी’ के टिकट 2500 रुपए में बिक रहे हैं.
दिल्ली के PVR IMAX विद लेज़र, प्रिया में शाम 4:45 बजे वाले IMAX शो के लिए ‘द ओडिसी’ के रिक्लाइनर टिकट की कीमत ₹2500 पर पर्सन है. सुबह 9:45 बजे, दोपहर 1:15 बजे, रात 8:15 बजे और रात 11:45 बजे वाले शो के लिए रिक्लाइनर सीटें 2100 रुपए में मिल रही हैं, जबकि अन्य सीटिंग ऑप्शन इससे थोड़े सस्ते हैं.
दिल्ली के PVR: सेलेक्ट सिटी वॉक में रिक्लाइनर टिकट की कीमत 2400 रुपए तक है, जबकि रेगुलर सीटों की कीमत शो के समय के आधार पर 900 रुपए से 1100 रुपए के बीच है. वहीं, नोएडा के PVR सुपरप्लेक्स लॉजिक्स में रिक्लाइनर टिकट की कीमत 1850 रुपए और 1800 रुपए है, जबकि अलग-अलग शो में रेगुलर सीटें 800 रुपए से 1100 रुपए के बीच उपलब्ध हैं.
‘द ओडिसी’ शुक्रवार, 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है. इसमें मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, ज़ेंडया, ऐनी हैथवे, रॉबर्ट पैटिनसन, इलियट पेज और चार्लीज़ थेरॉन जैसे कई बड़े कलाकार शामिल हैं. होमर के महाकाव्य पर आधारित इस फ़िल्म का रनटाइम 2 घंटे 52 मिनट है.
लखनऊ मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वीआईपी इमरजेंसी कोटे का दुरुपयोग कर टिकटों की दलाली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अरुण कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में अपराध सूचना शाखा (सीआईबी) की टीम ने गोरखपुर-एलटीटी एक्सप्रेस (20104) में छापेमारी कर एक फर्जी यात्री को गिरफ्तार किया। फर्जी आधार कार्ड के सहारे कर रहा था सफर आरपीएफ को सूचना मिली थी कि ट्रेन के एस-2 कोच में एक यात्री फर्जी दस्तावेज के आधार पर यात्रा कर रहा है। जांच के दौरान सीट नंबर 27 पर बैठे सिद्धार्थनगर निवासी सुनील से पूछताछ की गई। उसके पास से जाली आधार कार्ड बरामद हुआ, जिसके आधार पर वह यात्रा कर रहा था। 5 हजार रुपये में खरीदा था वीआईपी कोटे का टिकट पूछताछ में सुनील ने बताया कि उसने मुंबई निवासी टिकट दलाल प्रमोद रूदल तिवारी से 5,000 रुपये देकर टिकट खरीदा था। आरोपी दलाल ने पहले सामान्य वेटिंग टिकट बुक कराया और बाद में रेलवे के वीआईपी इमरजेंसी कोटे का इस्तेमाल कर टिकट कन्फर्म करा दिया। इसके बाद टिकट पर दर्ज नाम के अनुसार फर्जी आधार कार्ड तैयार कर यात्री को सौंप दिया गया। जाली दस्तावेज और मोबाइल चैट जब्त कार्रवाई के दौरान आरपीएफ ने फर्जी आधार कार्ड, कन्फर्म टिकट और मोबाइल चैट समेत कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी की तलाश जारी मामले में आरपीएफ पोस्ट ऐशबाग में रेल अधिनियम की धारा 142 और 143 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। टिकट दलाल प्रमोद रूदल तिवारी को वांछित घोषित कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई में इंस्पेक्टर रणजीत यादव, प्रशांत सिंह यादव और आरपीएफ की रेड टीम की अहम भूमिका रही।
India Passport Citizenship Proof Statement | Randhir Jaiswal Clarification
नई दिल्ली2 घंटे पहले
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केंद्र सरकार ने एक बार फिर से कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के मुताबिक भारत सरकार देश से बाहर यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट जारी करता है।
मंत्रालय ने कहा कि यह एक डॉक्यूमेंट है जो पूरी जांच और वेरिफिकेशन के बाद जारी किया जाता है। इसका संचालन पासपोर्ट अधिनियम, 1967 तथा पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत होता है। जायसवाल ने बताया कि देश के 8% से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट है।
24 जून: सरकार ने पहली बार कहा- पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं
24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। यह बयान चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के सवाल पर दिया गया था। मंत्रालय ने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया था, जिसमें पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना गया था।
अधिकारियों ने यह भी बताया था कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जनहित में जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
कांग्रेस ने पूछा- कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत
विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद विपक्षी कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे किस आधार पर जारी किया जाता है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार उन लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे उसकी राजनीतिक असहमति है।
नागरिकता का असली सबूत क्या है, 8 सवाल-जवाब से पूरे मामले को समझिए…
1. पासपोर्ट क्यो होता है? इसका क्या इस्तेमाल है?
पासपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र है, जिसका मुख्य इस्तेमाल भारत से बाहर किसी भी देश में यात्रा करने के लिए होता है। विदेश जाने के लिए जरूरी ‘वीजा’ इसी पर लगता है।
दूसरे देश में रहने के दौरान यही आपकी पहचान, नाम और पते का सबसे बड़ा सरकारी सबूत बनता है। आसान शब्दों में कहें तो विदेश में कानूनी एंट्री करने और वहां किसी भी मुसीबत में फंसने पर भारत सरकार से मदद पाने के लिए पासपोर्ट ही सबसे जरूरी दस्तावेज है।
2. क्या पासपोर्ट राष्ट्रीयता की पहचान देता है?
हां, पासपोर्ट राष्ट्रीय की पहचान देता है। राष्ट्रीयता बताती है कि आप किस देश से संबंध रखते हैं। जबकि नागरिकता बताती है कि उस देश में आपको कौन-कौन से कानूनी अधिकार मिले हैं। राष्ट्रीयता आपकी पहचान होती है। नागरिकता आपके अधिकार और जिम्मेदारियां तय करती है।
3. सरकार ने पासपोर्ट की संख्या को लेकर क्या कहा है?
मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्र और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। 2025 में शुरू हुए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। आवेदन निपटाने का औसत समय घटकर 5-6 दिन रह गया है। 2019 के 16 देशों के मुकाबले अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं।
4. क्या भारतीय नागरिकता साबित करने वाला कोई एक दस्तावेज है?
नहीं। भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज जारी नहीं करता है जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता इस बात पर तय होती है कि इसे कैसे हासिल किया गया और नागरिकता कानून के तहत कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।
5. पहचान पत्र अपने आप नागरिकता साबित क्यों नहीं करते?
आधार, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज खास कामों के लिए जारी किए जाते हैं, जैसे पहचान की जांच, चुनाव में रजिस्ट्रेशन या गाड़ी चलाने की अनुमति। इन्हें नागरिकता तय करने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए इन्हें अपने आप में नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है।
6. विदेश मंत्रालय ने क्यों कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है?
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो विदेश में धारक की राष्ट्रीयता को दर्शाता है। कानूनी रूप से नागरिकता ‘नागरिकता कानून’ के तहत तय होती है, जबकि पासपोर्ट ‘पासपोर्ट कानून’ के तहत जारी होता है और यह हर परिस्थिति में अपने आप में नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं होता है।
7. क्या पासपोर्ट रद्द होने पर नागरिकता खत्म हो जाती है?
नहीं। पासपोर्ट रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की भारतीय नागरिकता खत्म हो गई। पासपोर्ट कई कारणों से रद्द या निलंबित हो सकता है:
गलत जानकारी देकर बनवाना
कानूनी मामलों में कार्रवाई
सुरक्षा कारण
पासपोर्ट अधिनियम के तहत उल्लंघन
लेकिन भारतीय नागरिकता खत्म करने की प्रक्रिया अलग है और यह Citizenship Act, 1955 के तहत होती है।
8. भारत में नागिरकों मिलने वाले प्रमुख दस्तवेज कौन से हैं?
भारत में नागरिकता के मामले में 10 कागजात एक साथ देखे जा सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड शामिल हैं…
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार पहचान का दस्तावेज, नागरिकता का नहीं
बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी सुनवाई के दौरान 8 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह पहचान का दस्तावेज है।
हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग से कहा था कि SIR प्रक्रिया में आधार को पहचान के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग नागरिकता और पात्रता की पुष्टि के लिए अन्य दस्तावेज भी मांग सकता है।
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आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से जवाब मांगा
सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र और राज्यों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि इसके इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि (आइडेंटिटी वेरिफिकेशन) तक ही सीमित रखने के निर्देश दिए जाएं। पूरी खबर पढ़ें…
चटपटे खट्टे-मीठे बेर… बुरहानपुर का मशहूर स्वाद, घर पर 20 मिनट में करें तैयार
Ber Dish Recipe: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में बरसात के मौसम में खट्टे-मीठे बेर सबसे अधिक पसंद किए जाते हैं. एक्सपर्ट महिला फूलाबाई के अनुसार, इसे घर पर बनाना बहुत आसान है. इसे तैयार करने के लिए केवल सूखे बेर, गुड़ और सेंधा नमक की आवश्यकता होती है. सबसे पहले आधा किलो सूखे बेर धोकर कुकर में दो सीटी लगा लें. अब एक कड़ाही में 600 ग्राम गुड़ और एक गिलास पानी डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं. इसमें उबले हुए बेर डालें और 10 मिनट तक पकने दें. ऊपर से सेंधा नमक डालें, आपके मजेदार बेर तैयार हैं. यह डिश मात्र 15 से 20 मिनट में तैयार हो जाती है. आप गुड़ की जगह शक्कर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन्हें फ्रिज में रखने पर यह एक सप्ताह तक खराब नहीं होते. पिकनिक स्पॉट पर जाने वाले लोग इसे खाना बहुत पसंद करते हैं.
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मध्यप्रदेश के रायसेन में जमीन विवाद में बड़े भाई ने छोटे भाई की पीठ में चाकू घोंपकर हत्या कर दी। आरोपी ने दो भतीजों पर भी हमला किया। एक के गले और दूसरे के कंधे पर चाकू लगने से दोनों गंभीर घायल हो गए। विवाद बढ़ने पर धारदार हथियारों और चाकू से हमला किया गया। घटना गौहरगंज थाना क्षेत्र के नगरी गांव में मंगलवार सुबह हुई। इसका वीडियो मंगलवार रात सामने आया। मृतक की पहचान विष्णु प्रसाद सेन (61) के रूप में हुई है। उनके दोनों बेटे अखिलेश और अजय सेन गंभीर रूप से घायल हैं। अजय सेन की शिकायत पर गौहरगंज थाना पुलिस ने बीएनएस की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी नारायण सेन (65), उसकी पत्नी शांति बाई (62), बेटी अंजली (38) और दामाद संजू सेन उर्फ अनिल (42) को हिरासत में लिया है। देखें तस्वीरें… खेत की बुआई रोकने पर शुरू हुआ विवाद गौहरगंज पुलिस के अनुसार, चिकलोद निवासी विष्णु प्रसाद सेन अपने बेटों अखिलेश और अजय के साथ ग्राम नगरी स्थित खेत पर पहुंचे थे। वहां उनके बड़े भाई नारायण सेन खेत जोत रहे थे। विष्णु प्रसाद ने बुआई का विरोध किया तो दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद हिंसक हो गया और धारदार हथियारों व चाकुओं से हमला कर दिया गया। पीठ पर रीढ़ के पास चाकू का वार मुख्य आरोपी नारायण सेन ने विष्णु प्रसाद की पीठ पर रीढ़ के पास चाकू से गहरा वार किया। गंभीर हालत में उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से भोपाल एम्स रेफर किया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हमले में अखिलेश के गले और अजय के कंधे पर चाकू से गंभीर चोट आई है। दोनों का इलाज जारी है। VIDEO में खेत में हिंसक झड़प घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसमें खेत में दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प और अफरा-तफरी दिखाई दे रही है। वीडियो में लोग एक-दूसरे से हाथापाई करते नजर आते हैं। मौके पर मौजूद लोग ‘चाकू छोड़…’ कहते हुए सुनाई देते हैं। झड़प के दौरान दो युवक खून से लथपथ दिखाई देते हैं। एक के गले और दूसरे के कंधे पर गंभीर चोट नजर आती है, जबकि आसपास मौजूद लोग बीच-बचाव करते दिख रहे हैं। ढाई महीने पहले भी हुआ था विवाद थाना प्रभारी विजय परमार ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। करीब ढाई महीने पहले भी दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था, जिसकी शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी। वारदात के बाद गांव में तनाव को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह खबर भी पढ़ें युवक बोला- धीरेंद्र शास्त्री के भाई ने पीटा, गोली मारी:वीडियो में हथियार लेकर भागता दिखा सालिग्राम छतरपुर में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई सालिग्राम गर्ग पर एक युवक को गोली मारने का आरोप लगा है। गोली युवक के सीने में लगी और पसलियों में जा फंसी। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर गोली निकाली। युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसने पुलिस को बताया- सालिग्राम गर्ग मेरी जमीन छीनना चाहते हैं। पढ़ें पूरी खबर
सोनम वांगचुक बीते 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. वह कॉकरेज जनता पार्टी के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरने पर हैं. इस बीच उन्हें बॉलीवुड का भी सपोर्ट मिल रहा है. लेकिन अब उनके सपोर्ट में स्वरा भास्कर भी आ गई हैं.
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नई दिल्ली. दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन को अब स्वरा भास्कर का सपोर्ट मिल रहा है. हाल ही में वह जंतर मंतर पहुंचीं और 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से मुलाकात की.साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक का आभार जताया.
पिछले 17 दिनों से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं. सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज और वीडियो वायरल हो रहे हैं.हाल ही में अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने आज यानी मंगलवार को प्रदर्शन स्थल पहुंचकर उनसे मुलाकात की है.
सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरी स्वरा भास्कर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल दो सप्ताह से अधिक समय तक जारी है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर चिंता बढ़ गई है. लेकिन हर तरफ से लोग उन्हें सपोर्ट कर रहे हैं. अब स्वरा भास्कर भी उनके सपोर्ट में आ गई हैं. उन्होंने शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी मुलाकात की और बच्चों के भविष्य के लिए जो कदम उन्होंने उठाया उसके लिए आभार जताते हुए पोस्ट भी शेयर किया है.
वायरल हो रही पोस्ट
पोस्ट शेयर कर जताया आभार
जंतर-मंतर पर मुलाकात करने के बाद स्वरा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई फोटोज शेयर की है, इनमें .एक में वह कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ नजर आ रही हैं और दूसरी फोटो में वह सोनम वांगचुक के साथ नजर आ रही हैं, उन्होंने अपनी इस पोस्ट में लिखा, ‘हमारे सभी बच्चों के भविष्य के लिए लड़ने के लिए आपका धन्यवाद.’
बता दें कि सोनम वांगचुक के सपोर्ट में स्वरा से पहले भी कई बड़ी और चर्चित हस्तियां आ चुकी हैं. इनमें दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी भूख हड़ताल पर चिंता जताई थी. उन्होंने सरकार से अपील की थी कि वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर बातचीत शुरू की जाए.’3 इडियट्स’ में चतुर रामालिंगम का किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने भी इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर लोगों से इस अनशन पर आवाज उठाने की अपील की थी. वहीं अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह समेत कई लेखकों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने भी जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे प्रदर्शनकारियों से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की.
न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें
बिहार में खेल के विकास के लिए IIT चेन्नई और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के बीच समझौता होगा। आज पाटलिपुत्र खेल परिसर में IIT चेन्नई के डॉ बापजी श्रीनिवासन ने तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा आधारित विश्लेषण के माध्यम से खिलाड़ियों को साइंटिफिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन हुआ इस बात की जानकारी देते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि मई महीने में IIT चेन्नई के दौरे के दौरान डॉ. महेश और डॉ. बापजी श्रीनिवासन से बिहार में खेल और खिलाड़ियों के विकास पर विस्तृत चर्चा के साथ आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क, विभिन्न विभाग, विभिन्न रिसर्च लैब एवं इंक्यूबेशन सेंटर का दौरा किया गया, जहां खेल और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी से जुड़े विभिन्न स्टार्टअप्स के कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिला। इसी सिलसिले में आज उन्होंने पटना में तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया। खिलाड़ी की आंखों की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करेंगे इस आई ट्रैकिंग सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर श्रीनिवासन ने कहा कि हमारी प्रमुख तकनीकों में से एक आई-ट्रैकिंग सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से तीरंदाजों और निशानेबाज़ों के लिए विकसित किया गया है। इस सिस्टम में दो कैमरे खिलाड़ी की आंखों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं, जबकि एक बाहरी कैमरा लक्ष्य पर नज़र रखता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि खिलाड़ी का ध्यान किस प्रकार केंद्रित है। अनुभवी खिलाड़ी की नज़र लक्ष्य पर अधिक स्थिर रहती है, जबकि शुरुआती खिलाड़ियों की दृष्टि अपेक्षाकृत अधिक भटकती है। यह तकनीक खिलाड़ियों के फोकस का वैज्ञानिक विश्लेषण कर उनके प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करती है। स्मार्ट इनसोल सिस्टम खिलाड़ी के जूते के अंदर लगाया जाता हमने एक स्मार्ट इनसोल सिस्टम भी विकसित किया है, जिसे खिलाड़ी के जूते के अंदर लगाया जाता है। यह पैरों पर पड़ने वाले दबाव और शरीर के संतुलन को मापता है। तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेलों में यह बताता है कि खिलाड़ी का भार दोनों पैरों पर समान रूप से है या नहीं, वह आगे या पीछे कितना झुक रहा है और उसकी मुद्रा कितनी संतुलित है। यही तकनीक एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में भी उपयोगी है, जहां यह बल वितरण और मूवमेंट का सटीक विश्लेषण करती है।
मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने भिंड दौरे के दूसरे दिन प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने आयोग में जिले से जुड़ी 42 शिकायतें लंबित होने पर नाराजगी जताई। अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े मामलों में अब लापरवाही और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. जाटव ने जिला प्रशासन, पंचायत, नगरीय निकाय और पुलिस अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के लिए संचालित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे, यह अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही 18 प्रतिशत बजट का सही उपयोग सुनिश्चित करने और स्वीकृत कार्यों का फोटो सहित सत्यापन कराने को कहा। राजस्व मामलों में दिए सख्त निर्देश आयोग अध्यक्ष ने नामांतरण के मामलों को 15 दिन के भीतर निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने अवैध रजिस्ट्रियों की जांच कराने और पट्टाधारकों को बिना नोटिस बेदखल नहीं करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति वर्ग के अधिकारों का हनन करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने के निर्देश शिक्षा और छात्रावासों की समीक्षा के दौरान उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और अन्य सुविधाओं पर चिंता जताई। छात्रावासों में गार्ड तैनात करने, जाली लगाने, रंगाई-पुताई कराने और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए। एससी-एसटी एक्ट के मामलों की समीक्षा पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित बैठक में डॉ. जाटव ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों की समीक्षा की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का जल्द निराकरण करने, संवेदनशील मामलों में तत्परता दिखाने और कमजोर वर्गों को समय पर न्याय दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही कानून-व्यवस्था मजबूत रखने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया। बैठक में दिए प्रमुख निर्देश जिले से आयोग में लंबित 42 शिकायतों का जल्द निराकरण करें। दलित बस्तियों में सड़क, नाली, पेयजल और बिजली के काम तेज किए जाएं। छात्रावासों में सुरक्षा और मूलभूत सुविधाएं बेहतर की जाएं। एससी-एसटी एक्ट के लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाए। नामांतरण के मामलों का 15 दिन में निराकरण हो। भेदभाव की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए। योजनाओं के लाभार्थियों का अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
मशहूर यूट्यूबर सौरभ जोशी ने अपनी मर्सिडीज की कम माइलेज को E20 पेट्रोल से जोड़ते हुए वीडियो बनाया था. वीडियो वायरल होने के बाद कंपनी ने कहा कि उसकी BS6 पेट्रोल गाड़ियां E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह तैयार हैं. जांच के बाद सौरभ जोशी ने माना कि समस्या पेट्रोल की नहीं, बल्कि इंजन की थी और उन्होंने माफी मांग ली.
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मर्सिडीज ने कहा है कि उसकी BS6 पेट्रोल गाड़ियां E20 पेट्रोल के साथ पूरी तरह काम करने के लिए बनाई गई हैं
नई दिल्ली. यूट्यूबर सौरभ जोशी का E20 पेट्रोल को लेकर किया गया दावा सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा. उन्होंने 12 जुलाई 2026 को अपने व्लॉग में अपनी Mercedes-Benz GLC SUV की माइलेज को लेकर चिंता जताई थी. सौरभ जोशी ने बताया था कि उनकी गाड़ी पहले 16-17 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, लेकिन E20 पेट्रोल भरवाने के बाद माइलेज घटकर करीब 5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया. उन्होंने यह भी चिंता जताई थी कि कहीं इसका असर गाड़ी के इंजन पर न पड़े.
सौरभ जोशी का यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया. वीडियो को करोड़ों व्यूज मिले और इसके बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या E20 पेट्रोल से गाड़ियों की माइलेज और इंजन पर असर पड़ सकता है. इसी बीच कंपनी ने भी इस मामले पर अपना बयान जारी किया.
E20 पेट्रोल के लिए तैयार हैं गाड़ियां
Mercedes-Benz India ने कहा कि उसकी सभी BS6 पेट्रोल गाड़ियां E20 पेट्रोल के साथ पूरी तरह काम करने के लिए बनाई गई हैं. कंपनी ने बताया कि भारत में अप्रैल 2023 से E20 पेट्रोल को मानक बनाया गया है और नई पेट्रोल गाड़ियों को इसी को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है.
We visited the Mercedes service center, and they found that there was an issue with the engine, which was causing the low mileage. I apologize for the misunderstanding regarding E20 petrol. My intention was never to spread incorrect information or hurt anyone’s sentiments. I have…
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा- कानूनी तौर पर गोद लिया गया बेटा (दत्तक पुत्र) भी अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का हकदार है। साथ ही कोर्ट ने बिना किसी ठोस कारण के याचिकाकर्ता के दावे को खारिज करने पर सरकार और पुलिस विभाग पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत ने यह आदेश टोंक निवासी अश्विनी गुर्जर की याचिका को मंजूर करते हुए दिया। कोर्ट ने सरकार को कहा- वह जुर्माना राशि 60 दिन में याचिकाकर्ता को भुगतान करें। अदालत ने माना कि पिता की मौत के बाद याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के कारण कठिनाई झेलनी पड़ी। वहीं पुलिस विभाग ने प्रार्थी का दावा खारिज करने का कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया। ऐसे में अधिकारियों पर जुर्माना लगाना उचित होगा। अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर फिर से विचार करें याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के पिता पुलिस विभाग में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत थे। नौकरी के दौरान 27 जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई थी। याचिकाकर्ता मृतक का विधिक रूप से गोद लिया हुआ बेटा है। उसने पिता की जगह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन पुलिस विभाग ने 2 मार्च 2023 को बिना कोई ठोस कारण बताए उसका दावा खारिज कर दिया। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रार्थी के अनुकम्पा नियुक्ति दावे पर फिर से विचार करें। साथ ही यदि वह सभी जरूरी शर्तें पूरी करे तो उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।