लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने अस्तित्व फाउंडेशन के सहयोग से लिम्फेडेमा की रोकथाम और उपचार के लिए मुफ्त विशेष ओपीडी शुरू की है। संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने इसका उद्घाटन किया। पहले ही दिन 30 से अधिक स्तन कैंसर मरीजों का पंजीकरण कर उनका इलाज शुरू किया गया। मरीजों को मिलेंगी मुफ्त सुविधाएं विशेष ओपीडी में मरीजों को नि:शुल्क प्रेशर स्टॉकिंग्स और ब्रेस्ट प्रोस्थेसिस उपलब्ध कराए गए। संस्थान का उद्देश्य स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं से मरीजों को समय पर राहत दिलाना है। क्या है लिम्फेडेमा? निदेशक डॉ.एमएलबी भट्ट ने बताया कि स्तन कैंसर की सर्जरी या रेडियोथेरेपी के बाद लिम्फेडेमा एक सामान्य जटिलता है। इसमें हाथ या शरीर के प्रभावित हिस्से में लिम्फ द्रव जमा होने से सूजन, दर्द, जकड़न और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित होने लगती हैं। समय पर इलाज से मिल सकती है राहत उन्होंने बताया कि नियमित व्यायाम, हाथ को चोट और संक्रमण से बचाना, वजन नियंत्रित रखना, समय-समय पर जांच कराना और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने से लिम्फेडेमा की गंभीरता को काफी हद तक रोका जा सकता है। जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने की पहल चिकित्सा अधीक्षक डॉ.वरुण विजय ने कहा कि यह विशेष ओपीडी मरीजों को बीमारी की पहचान, बचाव और आधुनिक उपचार की जानकारी देकर उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करेगी। कार्यक्रम में डीन डॉ. प्रमोद गुप्ता सहित अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।
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कैंसर संस्थान में लिम्फेडेमा के इलाज के लिए OPD शुरू: स्तन कैंसर मरीजों को निशुल्क प्रेशर स्टॉकिंग्स और ब्रेस्ट प्रोस्थेसिस भी मिलेंगे – Lucknow News
प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में नया मोड़: मुनादी कराने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग लेकर मुख्यमंत्री से मिले छह मंत्री – Bhopal News
नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद में जांच समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले कराई गई मुनादी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामले में मुनादी का आदेश जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प
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मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
मंत्रियों ने सुनवाई पूरी होने से पहले मुनादी कराने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।
दो सप्ताह में आ सकता है फैसला
सूत्रों के अनुसार, जाति प्रमाण-पत्र मामले की जांच कर रही छानबीन समिति ने 6 जुलाई को सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली है। अब समिति अगले दो सप्ताह में अपना निर्णय दे सकती है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
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मंत्री प्रतिमा बोलीं- मैं बागरी..मेरे पास 110 साल के दस्तावेज
मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सुनवाई की। मंत्री प्रतिमा ने वंशावली से संबंधित दस्तावेज समिति को दिए। उन्होंने कहा कि वह बागरी समाज से हैं, जो प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल है। जाति साबित करने के लिए गांव में मुनादी कराई गई। अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।पूरी खबर पढ़ें
दादी-नानी का सीक्रेट! इस तरीके से बनाएं लसोड़े का अचार, सालभर रहेगा स्वाद बरकरार
लसोड़ा (Lasoda), जिसे कई जगह गोंदा (Gunda) या निसोरा भी कहा जाता है, एक जंगली पेड़ पर लगने वाला छोटा हरे रंग का फल है. इसका वैज्ञानिक नाम Cordia dichotoma है. यह मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पाया जाता है. गर्मियों के मौसम में इस फल की अच्छी पैदावार होती है और इसी समय इससे स्वादिष्ट अचार तैयार किया जाता है.
लसोड़े के अचार की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है. इस फल के अंदर हल्का चिपचिपा गूदा होता है, जिसकी वजह से मसाले अच्छी तरह इसमें समा जाते हैं.
घर पर कैसे बनाएं स्वादिष्ट लसोड़े का अचार?
लसोड़े का अचार राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और गुजरात के कई घरों में बड़े चाव से बनाया जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा, तीखा और मसालेदार होता है. अगर इसे सही तरीके से तैयार किया जाए, तो यह कई महीनों तक खराब नहीं होता.
सामग्री
500 ग्राम ताजे लसोड़े
200-250 मिली सरसों का तेल
2 बड़े चम्मच राई (दरदरी पिसी हुई)
1 बड़ा चम्मच मेथी दाना (हल्का भुना और दरदरा कुटा हुआ)
2 बड़े चम्मच सौंफ (दरदरी कुटी हुई)
2 बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
2 बड़े चम्मच नमक (स्वादानुसार)
1 छोटा चम्मच हींग
1 बड़ा चम्मच साबुत कलौंजी (वैकल्पिक)
2 बड़े चम्मच सफेद सिरका या 2-3 बड़े चम्मच नींबू का रस (वैकल्पिक)
स्टेप 1: लसोड़े तैयार करें
सबसे पहले लसोड़ों को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इन्हें 5-7 मिनट तक हल्के नमक वाले पानी में उबाल लें. ज्यादा न उबालें, वरना ये बहुत नरम हो जाएंगे. अब इन्हें छलनी में निकालकर पूरी तरह ठंडा और सूखा होने दें. ध्यान रखें कि इनमें बिल्कुल भी पानी न रहे, क्योंकि नमी अचार को जल्दी खराब कर सकती है.
स्टेप 2: मसाला तैयार करें
एक बाउल में दरदरी राई, मेथी, सौंफ, लाल मिर्च, हल्दी, हींग, कलौंजी और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. यही मसाला अचार का स्वाद तय करता है.
स्टेप 3: सरसों का तेल गर्म करें
सरसों के तेल को कड़ाही में तब तक गर्म करें, जब तक उसका कच्चापन खत्म न हो जाए. इसके बाद गैस बंद कर दें और तेल को पूरी तरह ठंडा होने दें.
स्टेप 4: अचार मिलाएं
अब सूखे लसोड़ों में तैयार मसाला डालें. ऊपर से ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर लसोड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए. चाहें तो इस समय थोड़ा-सा सिरका या नींबू का रस भी मिला सकते हैं.
स्टेप 5: धूप दिखाएं
अचार को साफ और सूखे कांच के जार में भर दें. जार का ढक्कन बंद करके 4-5 दिनों तक रोज 3-4 घंटे धूप में रखें. बीच-बीच में साफ और सूखे चम्मच से अचार को हिलाते रहें. लगभग एक सप्ताह में अचार का स्वाद पूरी तरह विकसित हो जाएगा.
क्या लसोड़ा सेहत के लिए भी फायदेमंद है?
लसोड़ा केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है. इसमें प्राकृतिक फाइबर, विटामिन C और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अचार में नमक और तेल की मात्रा अधिक होती है. इसलिए हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या कम नमक वाला आहार लेने वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.
हर भोजन का स्वाद बढ़ा देता है
लसोड़े का अचार इतना बहुमुखी है कि इसे पराठे, पूरी, दाल-चावल, खिचड़ी, बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी और यहां तक कि सादी रोटी के साथ भी खाया जाता है. कई लोग इसे यात्रा के दौरान भी अपने साथ रखना पसंद करते हैं, क्योंकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना देता है.
वो एवरग्रीन सॉन्ग, डायरेक्टर ने 2 बार किया रिजेक्ट, लता मंगेशकर ने कर दिया अमर
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Lata Mangeshkar Songs : हिंदी सिनेमा की सुपरहिट फिल्मों के बनने की कहानियां-किस्से मूवी से भी ज्यादा रोचक होते हैं. इन किस्सों में ही फिल्म को बनाने के दौरान आई चुनौतियों, रोचक फैसलों की जानकारी छिपी होती है. यह भी सच है कि बॉलीवुड में ऐसा कई बार देखने को मिला है जिस गाने को डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने पहली नजर में रिजेक्ट कर दिया, वही फिल्म की पहचान बन गए. जिस स्क्रिप्ट को कई प्रोड्यूसर ने रिजेक्ट कर दिया, उसी पर बनी मूवी ने इतिहास रच दिया. 60-70 के दशक में दो ऐसी फिल्में रिलीज हुईं जिनके गाने सुनकर डायरेक्टर ने जूता उठा लिया था. जूता उठाने के मायने अलग-अलग जरूर थे. दोनों गाने कालजयी साबित हुए. दोनों फिल्में मैसिव हिट रहीं.
गीत-संगीत के बिना तो बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना भी नहीं की जा सकती. प्यार-दर्द, प्रेम-विरह-वेदना को गीत के जरिये ही प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सकता है. फिल्म में गाने की सिचुएशन बनाने के लिए डायरेक्टर कहानी में ट्विस्ट लाते हैं. फिर सिचुएशन के हिसाब से गीतकार गीत लिखते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जो गाना संगीतकार सुनाते हैं, वो डायरेक्टर को पसंद नहीं आता है. 8 साल के अंतराल में बनीं दो फिल्मों के साथ ऐसा ही हुआ. दोनों फिल्मों में लता मंगेशकर ने दो ऐसे कालजयी गाने गाए जो इन फिल्मों की पहचान बन गए. एक गाना रिजेक्टेड था जबकि दूसरे गाने को सुनकर डायरेक्टर ने खुशी में जूता उठा लिया था. ये फिल्में थीं : वो कौन थी और पाकीजा. वो दो गाने कौन से थे, आइये जानते हैं…

मनोज कुमार-साधना और प्रेम चोपड़ा स्टारर एक फिल्म ‘वो कौन थी’ 1964 में रिलीज हुई थी. यह एक मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म थी जिसका डायरेक्शन राज खोसला ने किया था. स्क्रीनप्ले ध्रुव चटर्जी ने लिखा था. फिल्म विल्की कॉलिन्स के नॉवेल ‘द वुमिन इन व्हाइट’ से इंस्पायर्ड थी. प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी थे. संगीतकार मदन मोहन थे. गीतकार राजा मेहंदी अली खान थे.

फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. इसी फिल्म का एक कालजयी गाना आज भी संगीत प्रेमियों के दिल में बसता है. गाने को लता मंगेशकर ने गाया था जिसके बोल ‘लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो’ हैं. गाना रोमांटिक जरूर है लेकिन दर्दभरा है. करोड़ों लोगों का यह पसंदीदा गाना है लेकिन पहली बार में इस गाने को डायरेक्टर राज खोसला ने रिजेक्ट कर दिया था.
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संगीतकार मदन मोहन ने मनोज कुमार से बात की. शूटिंग में कुछ ही दिन बचे थे और गाना फाइनल नहीं हुआ था. मनोज कुमार ने प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी से बात की. मनोज कुमार ने गाना सुनने का अनुरोध किया. राज खोसला ने दोबारा गाना सुना लेकिन फिर से रिजेक्ट कर दिया. तीसरी बार जब धुन सुनी तो वो लज्जित हुए. उन्हें धुन बेहतरीन लगी. उन्होंने खुद को मारने के लिए जूता तक उठा लिया था. इस किस्सा का जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘राज खोसला: द ऑथराइज्ड बायोग्राफी’ में भी किया.

‘वो कौन थी’ की मेकिंग में मनोज कुमार का बहुत बड़ा हाथ था. साधना की मौजूदगी ने फिल्म में चार चांद लगा दिए. फिल्म का एक और शानदार गाना ‘नैना बरसे रिमझिम’ था. साधना को ‘मिस्ट्री गर्ल’ का नाम इसी फिल्म से मिला. गुरुदत्त की ‘राज’ फिल्म ही आगे चलकर ‘वो कौन थी’ बनी. फिल्म का बजट 45 लाख के करीब था. मूवी ने 90 लाख की कमाई की थी. फिल्म हिट थी. इस फिल्म की सफलता के बाद राज खोसला ने साधना के साथ ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसे दो और सस्पेंस थ्रिलर फिल्में बनाईं.

डायरेक्टर की ओर से जूता उठाने का एक और दिलचस्प किस्सा लता मंगेशकर के एक और सदाबहार गाने से जुड़ा हुआ है. गाना 1972 में ‘पाकीजा’ फिल्म में था जिसके बोल ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’ थे. ‘पाकीजा’ का निर्देशन-प्रोडक्शन कमाल अमरोही ने किया था. कहानी भी कमाल अमरोही ने ही लिखी थी. इस फिल्म को बनाने में 16 साल का लंबा वक्त लगा था. लंबी जद्दोजहद के बाद यह मूवी 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी.

पाकीजा एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसमें मीना कुमारी-राज कुमार लीड रोल में नजर आए थे. कहानी लखनऊ की तवायफ साहिबजान की कहानी को पर्दे पर दिखाती है. म्यूजिक गुलाम मोहम्मद-नौशाद ने कंपोज किया था. इस फिल्म का हर गाना सुपरहिट था. कहते हैं कि ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’ गाने को सुनकर कमाल अमरोही ने जूता उठा लिया था और कहा था कि यह गाना बहुत पसंद है. कोई इस गाने की बुराई नहीं करेगा.

फिल्म का एक और गाना ‘मौसम है आशिकाना’ भी खूब मकबूल हुआ. आज भी लोकप्रिय है. गाना यमन कल्याण राग पर बेस्ड है. पाकीजा फिल्म की शूटिंग 1958 से शुरू हुई थी. कमाल अमरोही ने बड़ी मेहनत से फिल्म बनाई थी लेकिन दर्शकों को मूवी पसंद नहीं आ रही थी.

31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की मौत हो गई. मीना कुमारी की मौत का फिल्म पर बहुत असर पड़ा. दर्शकों को लगा कि मीना कुमारी की वो फिर नहीं देख पाएंगे. फिल्म के प्रति लोगों का नजरिया बदला और सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी. नतीजतन यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई.
15 अगस्त तक अभियान बसेरा का लक्ष्य पूरा करें: राजस्व विभाग के सचिव के सख्त निर्देश, 38 जिलों के अपर समाहर्ताओं के साथ की समीक्षा – Patna News
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने आज राज्य के सभी 38 जिलों के अपर समाहर्ताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्व विभाग की विभिन्न योजनाओं और लंबित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता वाले सभी राजस्व कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनावश्यक विलंब या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। 15 अगस्त तक वासविहीन परिवारों को मिले जमीन बैठक में सचिव जय सिंह ने अभियान बसेरा के तहत चल रहे कार्यों की जिला-वार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 15 अगस्त 2026 तक सभी पात्र वासविहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए। इसके लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान, भूमि अभिलेखों का सत्यापन, बंदोबस्ती की प्रक्रिया और प्रमाण-पत्र वितरण जैसे सभी कार्य समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। राजस्व महा-अभियान के लंबित मामलों का जल्द करें निष्पादन समीक्षा बैठक में राजस्व महा-अभियान के तहत प्राप्त लंबित आवेदनों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोगों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और लंबित मामलों को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों को 9 जुलाई तक नई जगह योगदान देना होगा बैठक में हाल ही में स्थानांतरित अंचल अधिकारियों और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों के विरमण और योगदान की भी समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिया कि सभी स्थानांतरित अधिकारी 9 जुलाई तक हर हाल में अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुलाई महीने का वेतन नए पदस्थापन वाले स्थान से ही देय होगा। साथ ही कहा कि स्थानांतरण की प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। आरसीएमएस पर ऑनलाइन सुनवाई की तैयारी जल्द पूरी करें राजस्व सचिव ने आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन सुनवाई की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि आवश्यक तकनीकी संसाधन, उपकरण और अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था शीघ्र पूरी की जाए, ताकि ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था समय पर शुरू की जा सके और आम लोगों को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा मिल सके। नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होगी बैठक के अंत में सचिव जय सिंह ने सभी अपर समाहर्ताओं को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ कार्यों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया।उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्य करने की अपेक्षा जताई, ताकि आम लोगों को राजस्व सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।
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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मांस से भरा कंटेनर जब्त: गोरक्षकों की सूचना पर रैणी थाना पुलिस की कार्रवाई; जांच के लिए भेजे सैंपल – Alwar News
अलवर जिले के रैणी थाना क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मांस से भरे एक कंटेनर को पुलिस ने कब्जे में लिया है। गोरक्षकों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और कंटेनर को रैणी थाने ले आई। गोरक्षकों ने कंटेनर में रखे मांस के प्रतिबंधित होने की आशंका जताते हुए इसकी पशु चिकित्सा विभाग से जाँच कराने की माँग की। इसके बाद पुलिस ने पशु चिकित्सा अधिकारी को थाने बुलाकर मांस के नमूने लिए और जांच के लिए भेज दिए। रैणी थाना प्रभारी बने सिंह ने बताया- पुलिस को सूचना मिली थी कि हाईवे पर एक संदिग्ध कंटेनर को गोरक्षकों ने रुकवा रखा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और कंटेनर को थाने लाकर कार्रवाई शुरू की। कंटेनर चालक ने पुलिस को परिवहन संबंधी दस्तावेज और बिल प्रस्तुत किए, जिनमें कंटेनर में भैंस का मांस (बफेलो मीट) होना दर्शाया गया है। प्रारंभिक जांच में दस्तावेज सही मिले हैं, लेकिन पुलिस ने एहतियात के तौर पर मांस के सैंपल लैब भिजवा दिए हैं। थाना प्रभारी ने बताया – फॉरेंसिक और पशु चिकित्सा विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कंटेनर में रखा मांस किस पशु का है। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी हुई है।
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बड़नगर मोहर्रम जुलूस ब्लास्ट मामला हाईकोर्ट पहुंचा: एनआईए जांच और धार्मिक जुलूसों के लिए एसओपी बनाने की मांग; राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब – Ujjain News
उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से करीब 40 फीट ऊंचाई पर टाटा मैजिक वैन लटकाकर उसमें विस्फोटक पटाखे फोड़ने के मामले में अब इंदौर हाईकोर्ट में बुधवार को जनहित याचिका दायर की गई है।
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याचिका में पूरे घटनाक्रम की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या सीबीआई से कराने और भविष्य में धार्मिक जुलूसों के दौरान ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश प्राप्त कर जवाब पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
मोहर्रम जुलूस के दौरान हुआ था विस्फोट
23-24 जून की दरमियानी रात बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले मोहर्रम जुलूस के दौरान जय स्तंभ चौक पर क्रेन की मदद से एक कबाड़ टाटा मैजिक वैन को हवा में लटकाया गया था। वैन के ऊपर चढ़े जाहिद और तस्लीम लाल झंडे लहरा रहे थे।
इसी दौरान वाहन के भीतर रखे बड़ी मात्रा में रॉकेट और सुतली बमों में आग लगा दी गई, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद कांच और लोहे के टुकड़े नीचे मौजूद हजारों लोगों के बीच गिरे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
इस तरह क्रेन से लटकाया गया था मैजिक वैन को।
तीन आरोपियों पर रासुका
घटना के बाद पुलिस ने शोएब उर्फ गब्बू खान, जाहिद खान और तपसील उर्फ तस्लीम, सभी निवासी अडान मोहल्ला, को गिरफ्तार किया। बाद में तीनों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें कड़ी सुरक्षा में केंद्रीय जेल भेरूगढ़ (उज्जैन) भेज दिया गया।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका
सामाजिक कार्यकर्ता एवं हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने पैरवी की। याचिका में घटना की जांच एनआईए अथवा सीबीआई से कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा धार्मिक जुलूसों के लिए व्यापक एसओपी तैयार करने की मांग की गई है।

एनआईए जांच की दलील
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने तर्क दिया कि यदि इस मामले में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध बनता है, तो यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) की श्रेणी में आएगा। ऐसी स्थिति में मामले की जांच एनआईए द्वारा कराई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता सुमित हार्डिया ने यह मांग भी उठाई कि यह भी जांच का विषय है कि कहीं यह घटना किसी तरह की ‘ब्लास्ट मॉक ड्रिल’ तो नहीं थी।
एक सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य शासन से निर्देश प्राप्त कर जवाब प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी सप्ताह निर्धारित की गई है।
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मुहर्रम के जुलूस में हमले का प्रदर्शन, VIDEO

उज्जैन के पास बड़नगर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक वैन (टाटा मैजिक) में किए गए विस्फोट का वीडियो सामने आया है। घटना 23 जून की रात की बताई जा रही है। बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। जुलूस में एक वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया।पूरी खबर पढ़ें
IMF ने भारत को लेकर कही 2 तरह की बातें, क्या है इसका मतलब?
नई दिल्ली. जब कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताए और उसी समय उसकी विकास दर का अनुमान भी घटा दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर दोनों बातें एक साथ कैसे सही हो सकती हैं. भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ है. IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.5 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. हालांकि, इसके बावजूद संस्था का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी बढ़त बनाए रखेगा. यानी ग्रोथ रेट में मामूली कमी का मतलब यह नहीं है कि भारत की रफ्तार दूसरे बड़े देशों से कम हो गई है.
IMF का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ ऐसे जोखिम हैं, जो आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं. सबसे बड़ा जोखिम मानसून को लेकर है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है, तो खरीफ फसल पर असर पड़ सकता है. इससे ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर होने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे हालात का असर अर्थव्यवस्था की कुल वृद्धि पर भी पड़ सकता है.
दुनिया की सुस्ती का भी पड़ेगा असर
भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर काफी हद तक निर्भर है, लेकिन निर्यात भी अहम भूमिका निभाता है. IMF का कहना है कि अमेरिका, चीन और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती का असर भारत के निर्यात पर पड़ सकता है. अगर वैश्विक मांग कमजोर रहती है, तो भारतीय कंपनियों के ऑर्डर और उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है. यही वजह है कि संस्था ने वैश्विक हालात को भी ग्रोथ अनुमान में कटौती का एक कारण माना है.
घरेलू चुनौतियां भी बनी हुई हैं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश में अभी उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई है. इसके अलावा उपभोक्ता मांग में भी कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती बरकरार है.
अच्छी खबर भी दी IMF ने
जहां FY27 के लिए अनुमान थोड़ा घटाया गया है, वहीं IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है. यानी मौजूदा वित्त वर्ष के प्रदर्शन को लेकर संस्था पहले से ज्यादा आशावादी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबी अवधि में भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की मजबूत संभावना है. इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और लगातार किए जा रहे संरचनात्मक सुधारों को अहम वजह माना गया है.
सरकार और IMF के अनुमान में कितना अंतर?
भारत सरकार ने FY27 के लिए 6.5 से 7 फीसदी के बीच आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है. इसके मुकाबले IMF का 6.4 फीसदी का अनुमान थोड़ा कम है. हालांकि, दोनों अनुमानों के बीच बड़ा अंतर नहीं है और दोनों ही मानते हैं कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाले देशों में शामिल रहेगा.
IMF ने क्या सलाह दी?
रिपोर्ट में IMF ने सुझाव दिया है कि अगर मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य आपूर्ति बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निजी निवेश बढ़ाने के लिए सुधारों की रफ्तार बनाए रखने की भी सलाह दी गई है. कुल मिलाकर, IMF की रिपोर्ट भारत की विकास कहानी पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह बताती है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद के बावजूद कुछ अल्पकालिक चुनौतियां मौजूद हैं. इन्हीं जोखिमों को देखते हुए FY27 के ग्रोथ अनुमान में मामूली कटौती की गई है, जबकि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को लेकर संस्था अब भी सकारात्मक बनी हुई है.

