सीकर में अब बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाने पर बाइक सीज होगी। पुलिस इसके लिए अभियान चलाएगी। इतना ही नहीं शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन भी चेक होगा। इसके साथ ही शहर में कई जगह पार्किंग व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। यह बात सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कही। जो आज शाम को सीकर के कोतवाली थाने में सीएलजी सदस्यों की मीटिंग लेने के लिए पहुंचे थे। मीटिंग के दौरान लोगों ने सुझाव दिया कि शहर में मोडिफाइड साइलेंसर और होने लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई हो। इसके साथ ही शहर में कई जगह सड़क के बीच जो टू व्हीलर पार्किंग की जगह बनाई गई है। उसे भी हटाकर बीच में बैरिकेड लगा दिया जाए। इसके अलावा ऑटो स्टैंड भी फिक्स हो। इसके बाद एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कहा कि आज की मीटिंग में सामने आया कि शहर में ट्रैफिक का बड़ा इशू है। इसको लेकर जल्द ही शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक किया जाएगा और उनकी पार्किंग का पॉइंट भी डिसाइड किया जाएगा। इसके अलावा शहर में जो हाथ ठेले लगे हुए हैं उन पर भी प्लान बनाया जाएगा। एसपी ने कहा कि जो लोग शहर में अपनी बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाकर घूमते हैं। उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर बाइक्स को सीज किया जाएगा। एसपी ने कहा की बावड़ी गेट सहित तबेला बाजार के सामने सड़क के बीच जो बाइक की पार्किंग बनाई गई है लोगों ने सुझाव दिया कि उसे हटाकर बेरिकेड्स लगा दिए जाए। इस पर भी विचार करके सॉल्यूशन निकालेंगे।
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मॉडिफाइड साइलेंसर/हॉर्न वाली बाइक्स होगी सीज: ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक होगा,शहर में पार्किंग व्यवस्था में भी हो सकता है बदलाव – Sikar News
क्या है पे ग्रेड को मिलाने की मांग? सबसे बड़े कर्मचारी संगठन ने क्यों भेजी ये सिफारिश
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आठवें वेतन का इंतजार हर केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक कर रहा है. अभी वेतन आयोग भारत भर में घूमकर डाटा जुटा रहा है. इससे पहले 15 जून तक आयोग ने कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए थे. उन सुझावों में एक पे ग्रेड को मर्ज करने की सिफारिश भी थी. उसका मतलब क्या है और वह सुझाव क्यों भेजा गया, आइए इसे समझते हैं.
यह सुझाव केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन की ओर से दिया गया है.
नई दिल्ली. आठवें वेतन आयोग पर मंथन जारी है. आयोग ने कर्मचारी संगठनों से 15 जून तक उनके सुझाव मांगे थे. आयोग अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर भी डाटा जुटा रहा है. इन कर्मचारी संगठनों के सुझावों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर आयोग अपनी सिफारिश केंद्र को देता है. इसी क्रम में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कुछ सिफारिशें आयोग को दी हैं. यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों का सबसे बड़ा प्रतिनिधि संगठन माना जाता है. इसमें रेलवे, रक्षा, डाक, केंद्रीय सचिवालय समेत कई विभागों के कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व होता है.
NC-JCM की ओर से भेजे गए सुझावों में एक अहम सिफारिश यह भी कि पे ग्रेड्स को मर्ज कर दिया जाए. यानी जो पे लेवल एक दूसरे के बहुत करीब हैं उन्हें मिला दिया जाए. NC-JCM का कहना है कि कई लेवल में काम लगभग एक जैसा है और सैलरी का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं है. फिर भी अलग पे लेवल होने से प्रमोशन और करियर ग्रोथ में फर्क पड़ता है. इससे पे स्ट्रक्चर आसान होगा और समान काम करने वाले कर्मचारियों के बीच अंतर कम होगा.
उदाहरण से समझें
NC-JCM की मांग यह है कि
- लेवल 2 और 3 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 4 और 5 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 7 और 8 को एक कर दिया जाए.
- लेवल 9 और 10 को एक कर दिया जाए.
इसके अलावा लेवल 5 के कर्मचारियों को अलग से राहत देने की भी मांग की गई है. NC-JCM का कहना है कि रेलवे, रक्षा, डाक और केंद्रीय सचिवालय के कई कर्मचारी लंबे समय से लेवल 5 में ही अटके हुए हैं. इसलिए उसने मांग की है कि एक बार के लिए सभी मौजूदा लेवल 5 कर्मचारियों को सीधे लेवल 6 में अपग्रेड कर दिया जाए. इससे हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी सैलरी भी बढ़ जाएगी.
अन्य मांगें क्या हैं?
उपरोक्त मांगों के अलावा संगठन ने न्यूनतम सैलरी 18,000 से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग की है. यह बेसिक पे होगी. इसके ऊपर महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और दूसरे भत्ते अलग से मिलेंगे. सालाना इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग है. NC-JCM यह भी चाहता है कि लेवल 13 तक एक आसान और व्यवस्थित पे मैट्रिक्स बनाया जाए, ताकि कर्मचारियों को यह समझने में आसानी हो कि प्रमोशन के बाद उनकी सैलरी कैसे बढ़ेगी. साथ ही पेंशन फॉर्मूला को नई सैलरी के हिसाब से दोबारा तय करने की मांग भी की गई ताकि रिटायर कर्मचारियों को भी वेतन बढ़ने का फायदा मिल सके.
क्या यह सब लागू होगा?
इसका सीधा जवाब है- नहीं. संगठन ने सिर्फ सुझाव दिए हैं जिसे मांग भी समझा सकता है. अब गेंद वेतन आयोग के पाले में है कि वह इनमें से कितने सुझावों को मानता है और कितनों को नकार देता है. वेतन आयोग द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद भी सरकार यह तय करेगी कि उन सुझावों को मानना है या नहीं.
कौन-कौन है टीम में
8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश कर रही हैं. इसके सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं. यह प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं. इनके अलावा पंकज जैन आयोग के सदस्य सचिव हैं. यह एक पूर्व आईएएस अधिकारी हैं.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण का लिया जायजा: डीएम ने तय समय में काम पूरा करने के दिए निर्देश, 912 करोड़ की लागत से हो रहा काम – Darbhanga News
दरभंगा में 912 करोड़ रुपए की लागत से एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का काम चल रहा है। जिलाधिकारी कौशल कुमार रविवार को निर्माण स्थल पर निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के अंदर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। नए टर्मिनल के लिए प्रस्तावित अस्थायी एप्रोच रोड (पहुंच मार्ग) के निर्माण में भी तेजी लाई जाए। निरीक्षण के दौरान डीएम ने टर्मिनल भवन के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया और निर्माण एजेंसी से अब तक की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
एप्रोच रोड सबसे बड़ी चुनौती
दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के निर्माण के साथ-साथ सबसे बड़ी चुनौती एनएच-27 से नए टर्मिनल तक एप्रोच रोड का निर्माण है। इसी मुद्दे को लेकर गत 16 जुलाई को बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत दरभंगा पहुंचे थे। उन्होंने निर्माणाधीन टर्मिनल भवन परिसर में जिला प्रशासन, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग (PWD), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी।
बैठक का मुख्य एजेंडा नए टर्मिनल तक पहुंच मार्ग का निर्माण था। सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि एप्रोच रोड से जुड़ी सभी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने टर्मिनल भवन निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की और कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देने के निर्देश दिए थे।
निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद निरीक्षण के दौरान एयरपोर्ट निदेशक डॉ. दिलीप कुमार, सदर अनुमंडल पदाधिकारी कुमार गौरव, पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी रवि कुमार आर्य सहित संबंधित विभागों के अभियंतागण एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन पूरा होने के बाद मिथिलांचल के लाखों यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। व
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अजय सिंह का कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आह्वान: गुटबाजी छोड़ें, तभी 25 साल का सत्ता वनवास खत्म होगा – Vidisha News
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल भैया’ ने विदिशा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कांग्रेस को 25 साल का सत्ता वनवास खत्म करना है तो नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुटबाजी छोड़नी होगी। रविवार को विदिशा पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में कई स्थानों पर फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा से उनका स्वागत किया। जिला कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। यहां एक संगठनात्मक बैठक में उन्होंने जिले के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आगामी रणनीति पर चर्चा की। शहनाई गार्डन में आयोजित कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम में अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब 25 वर्षों से प्रदेश की सत्ता से बाहर है। उन्होंने जोर दिया कि अब समय आपसी मतभेद भुलाकर जनता के बीच जाने और कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने का है। अजय सिंह ने बताया कि वे पिछले कुछ महीनों से पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और अब तक 40 से अधिक जिलों में कार्यकर्ताओं से संवाद कर चुके हैं। इस दौरान वे ऐसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मिले हैं, जो लंबे समय से संगठन की गतिविधियों से दूर थे। उन्होंने कहा कि कई जिलों में ऐसे कार्यकर्ता दोबारा सक्रिय होकर पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं, जो कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत है। अजय सिंह ने कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत बताया और एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘हम करीब 25 साल से मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर हैं। अगर अब भी हम गुटों में बंटे रहेंगे तो फिर सत्ता से बाहर ही बैठे रहेंगे।’ उन्होंने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत राजनीति छोड़कर संगठन हित में काम करने का आग्रह किया।
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कच्ची दीवार ढही, युवक की मौत: बारिश से बचने के लिए रुका था, मौसी के घर से लौट रहा था – Sonbhadra News
सोनभद्र के राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के पवर गांव में शनिवार की देर शाम बाइक सवार 23 वर्षीय युवक अवधेश की कच्ची दीवार ढहने मौत हो गई। अवधेश अपनी मौसी के घर से वापस अपने गांव डेहरी कला लौट रहे थे, तभी यह घटना हुई। डेहरी कला गांव निवासी अवधेश पुत्र बबलू शनिवार को राबर्ट्सगंज बाजार गए थे। वह धान की नर्सरी में उगी घास को नष्ट करने वाली दवा खरीदने के लिए दुकान पर गए थे। दवा लेने के बाद वह अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने पवर गांव में अपनी मौसी के घर पर कुछ देर के लिए रुकने का फैसला किया।
शाम करीब सात बजे अवधेश मौसी के घर से अपने गांव के लिए निकले। पवर गांव में कुछ ही दूरी आगे बढ़ने पर बरसात होने की वजह से सड़क किनारे स्थित एक कच्ची दीवार के पास जाकर छिप गए, दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। दीवार का मलबा सीधे अवधेश और उनकी बाइक पर आ गिरा, जिससे वह पूरी तरह दब गए। घटना होते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े और तत्काल राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर दीवार का मलबा हटाया और घायल अवस्था में अवधेश को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए। जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर राबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी हाउस भेज दिया। जहां रविवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया रॉबर्ट्सगंज कोतवाली प्रभारी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि मृतक का रविवार को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को शव सौंप दिया गया है, मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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फिश करी से हो गई हैं बोर? ट्राई करें बिहार-बंगाल का मशहूर माछेर झोल
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Machher Jhol Recipe: अगर आप फिश की नई रेसिपी तलाश कर रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए है. यहां आप बिहार और पश्चिम बंगाल की फेमस डिश माछेर झोल बनाने की विधि जान सकते हैं. इसे गरमागरम चावल के साथ खाना होलसम फीलिंग्स होती है.
अगर आप भी एक जैसी फिश करी या फ्राई मछली खाकर बोर हो गए हैं, तो बिहारी-बंगाली स्टाइल माछेर झोल आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. ये एक पारंपरिक डिश है, जो अपने हल्के लेकिन मसालेदार स्वाद के लिए काफी पसंद की जाती है. बिहार और पश्चिम बंगाल में यह रेसिपी घर-घर में बनाई जाती है और खासतौर पर चावल के साथ इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है.
माछेर झोल की सबसे बड़ी खासियत इसका सरसों के तेल और मसालों से तैयार होने वाला स्वादिष्ट ग्रेवी बेस है. इसमें ज्यादा भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, फिर भी इसका स्वाद बहुत लाजवाब होता है. ताजी मछली, सरसों, लहसुन और जीरे का मेल इस डिश को खास बनाता है. अगर आप घर पर कुछ नया और स्वादिष्ट बनाना चाहती हैं, तो इस आसान रेसिपी को जरूर आजमाएं.
- माछेर झोल बनाने के लिए सबसे पहले मछली के टुकड़ों को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद उन पर नमक, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर लगाकर लगभग 20 से 25 मिनट के लिए रख दें, ताकि मसाले अच्छी तरह मछली में समा जाएं.
- अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर मछली के टुकड़ों को सुनहरा होने तक हल्का फ्राई कर लें और फिर उन्हें अलग निकालकर रख दें. इसके बाद मिक्सर में पीली सरसों, लहसुन और जीरा डालकर बारीक पेस्ट तैयार कर लें.
- उसी कड़ाही में थोड़ा तेल बचाकर मेथी दाना, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ता डालकर तड़का लगाएं. फिर इसमें तैयार किया हुआ सरसों का पेस्ट डालें. साथ ही हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च डालकर धीमी आंच पर मसालों को अच्छी तरह भून लें.
- जब मसाले अच्छी तरह पक जाएं, तब इसमें कटे हुए टमाटर और स्वादानुसार नमक डालें. टमाटर के नरम होने तक पकाएं. इसके बाद अपनी जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें और एक-दो उबाल आने दें.
- अब इसमें तली हुई मछली डालकर 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि मछली में ग्रेवी का स्वाद अच्छी तरह समा जाए. आखिर में ऊपर से कटा हुआ हरा धनिया डालें और गैस बंद कर दें.
- स्वादिष्ट बिहारी-बंगाली स्टाइल माछेर झोल तैयार है. इसे गरमागरम चावल या रोटी के साथ परोसें और पारंपरिक स्वाद का आनंद लें.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
जंतर-मंतर पर गरजे AAP नेता मनीष सिसोदिया: बोले-प्रधानमंत्री जी, ‘सफेद चादर’ वाले सिपाही जंतर-मंतर तो भेज दिए, शिक्षा मंत्रालय में उन्हें कब भेजेंगे – New Delhi News
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में पहुंचे आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोला है। सिसोदिया ने आरोप लगाया कि 20 दिनों तक सोनम वांगचुक के आंदोलन को नजरअंदाज करने के बाद, जब सरकार ने देखा कि आंदोलन में युवाओं और लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, तो प्रधानमंत्री ने कल एक ‘जादूगर’ की तरह खेल दिखाया। “सफेद चादर वाले गुंडे भेजकर किया गायब” मनीष सिसोदिया ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा- “कल प्रधानमंत्री जी ने उसी स्टेट (धरना स्थल) पर अपने गुंडे भेजकर सफेद चादर वाला जादू दिखाया। जैसे हम बचपन में जादूगर का खेल देखते थे ना… कि जादूगर आता था, चादर दिखाता था और उसके पीछे से बंदा गायब हो जाता था! कल प्रधानमंत्री जी ने वही किया। सफेद चादर वाले गुंडे भेजे और जादू दिखाकर सोनम वांगचुक जी को वहां से गायब कर दिया, उन्हें छूमंतर करके अस्पताल भेज दिया।” शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर भी तंज मनीष सिसोदिया ने देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और हालिया विवादों को लेकर भी प्रधानमंत्री पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह वीडियो देखते हुए बस यही सोच रहे थे कि, “नरेंद्र मोदी जी, काश यह सफेद चादर वाला जादू आप देश के शिक्षा मंत्री की कुर्सी के सामने दिखा देते! ताकि उस कुर्सी से भी वो बंदा (शिक्षा मंत्री) गायब हो जाता।” मनीष सिसोदिया के इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद भीड़ ने जोरदार नारेबाजी की। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सरकार लद्दाख की आवाज को दबाने के लिए पुलिस और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है।
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कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा को कला जगत ने किया याद: परंपरा और आधुनिकता पर हुआ सार्थक संवाद, पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें – Jaipur News
कलावृत्त एवं राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व प्राचार्य, प्रख्यात चित्रकार एवं कलावृत्त संस्था के संस्थापक कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की कला यात्रा, व्यक्तित्व और उनके रचनात्मक योगदान पर आधारित विशेष व्याख्यान का आयोजन राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के मीटिंग हॉल में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकारों, कला समीक्षकों, शिक्षाविदों, पूर्व विद्यार्थियों और युवा कलाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर डॉ. सुमहेन्द्र के कला-संसार और उनके व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र ने राजस्थानी लघु चित्रकला और आधुनिक कला के बीच एक अद्भुत सेतु का निर्माण किया। उनकी कला विशुद्ध राजस्थानी परंपराओं से जुड़ी होने के बावजूद आधुनिक संवेदनाओं से समृद्ध थी, जिसने उन्हें समकालीन भारतीय कला में विशिष्ट पहचान दिलाई। वरिष्ठ पारंपरिक चित्रकार समदर सिंह खंगारोत ‘सागर’ ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र केवल एक महान चित्रकार ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ शिल्पी, कुशल प्रशासक और प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रत्येक कृति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी और उनका सान्निध्य हर कलाकार के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि डॉ. सुमहेन्द्र ने लघु चित्रकला को परंपरागत सीमाओं से बाहर निकालकर समकालीन अभिव्यक्ति प्रदान की। वरिष्ठ चित्रकार प्रो. भवानी शंकर शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार की सृजनात्मकता समय के साथ विकसित होती है और यही विकास भविष्य की नई परंपरा बनता है। उन्होंने डॉ. सुमहेन्द्र को इस विचारधारा का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके चित्रों में भारतीय परंपरा का आधुनिक रूप स्पष्ट दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों से प्रकृति, संस्कृति और समकालीन विषयों को अपनी कला में स्थान देने का आह्वान किया। चित्रकार एवं कवि अमित कल्ला ने कहा कि कलाकार केवल चित्र बनाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि समाज को नई दृष्टि देने वाला संवेदनशील नेतृत्वकर्ता होता है। उन्होंने भारतीय कला दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रंग, रेखा और रूप केवल दृश्य तत्व नहीं, बल्कि चेतना, भाव और ऊर्जा के प्रतीक हैं। डॉ. सुमहेन्द्र की कला इसी भारतीय दर्शन की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति थी। कलावृत्त के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने युवा कलाकारों से अपने चित्रों में समसामयिक विषयों को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी है। उन्होंने कहा कि युवा कलाकारों को तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपनी रचनाओं में स्थान देना चाहिए। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व छात्र एवं मूर्तिकार महावीर भारती ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से चित्रकला के विद्यार्थी थे, लेकिन वर्ष 1996-97 में कलावृत्त द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मूर्तिकला शिविर में डॉ. सुमहेन्द्र की प्रेरणा से उन्होंने पहली बार पत्थर पर काम किया। उन्होंने कहा कि आज वे दो दशकों से मूर्तिकला के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और इसका सबसे बड़ा श्रेय अपने गुरु डॉ. सुमहेन्द्र को देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी सुमन शर्मा, उनके भाई ओमदत्त शर्मा, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ कलाकार, शिक्षक, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में वर्तमान विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह के अंत में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य अनिल खंडेलवाल ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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पटना मेट्रो रुकनपुरा स्टेशन पर काम में लायी गयी तेजी: अंडरग्राउंड साइट पर ग्रिड 15-16 हो रहा मजबूत, विकास भवन स्टेशन पर गाइड वॉल की कंक्रीटिंग – Patna News
पटना मेट्रो के मलाही पकड़ी स्टेशन तक शुरू होने के बाद अब आगे के स्टेशन के कामों में तेजी लाई जा रही है। रुकनपुरा के अंडरग्राउंड साइट पर ग्रिड 15 और 16 के बीच गाइड वॉल को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं, पास में स्थित विकास भवन स्टेशन पर गाइड वॉल की कंक्रीटिंग की जा रही है, ताकि स्टेशन की संरचना और एलाइनमेंट को मजबूत किया जा सके। दूसरी ओर, एलिवेटेड सेक्शन में प्री- इंजीनियर बिल्डिंग (PEB) रूफ के पर्लिन लगाने का काम जारी है। बेली रोड पर नवंबर से अंडरग्राउंड टनल बनेगी दूसरी ओर बेली रोड पर नवंबर से मेट्रो टनल की खुदाई होगी। इसके लिए अभी चिड़ियाघर के पास लॉन्चिंग शॉफ्ट बन रहा है, जिसका काम अगले तीन महीने में पूरा होगा। इसके बाद यहीं से जमीन के भीतर टनल बोरिंग मशीन को उतारा जाएगा। खुदाई का काम दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में चिड़ियाघर के पास से दो टीबीएम पश्चिम की तरफ बढ़ेंगी, जो राजा बाजार और रुकनपुरा तक टनल का निर्माण करेंगी। दूसरे चरण में चिड़ियाघर से ही दो अन्य टीबीएम पूरब की दिशा में चलेंगी, जो विकास भवन और विद्युत भवन तक टनल की खुदाई करेंगी। रुकनपुरा से आगे एक रैंप को पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन से जोड़ा जाएगा कॉरिडोर-1 के तहत मीठापुर से पाटलिपुत्र जंक्शन तक 10.54 किमी लंबी अंडरग्राउंड टनल बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक, मीठापुर में मेट्रो का एलिवेटेड स्टेशन बनेगा। यहां से एक रैंप बनाकर लाइन को अंडरग्राउंड किया जाएगा, जो आगे चलकर रेलवे लाइन को पार करते हुए पटना जंक्शन पहुंचेगी। पटना जंक्शन से यह बेली रोड स्थित विद्युत भवन, विकास भवन, चिड़ियाघर, राजाबाजार और रुकनपुरा तक जाएगी। रुकनपुरा से आगे फिर एक रैंप बनाकर इसे पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन से जोड़ दिया जाएगा। बेली रोड पर एक ही लेन से दोनों ओर की गाड़ियां गुजरेंगी बेली रोड पर पांच अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे। इनमें विद्युत भवन, विकास भवन, पटना जू, राजा बाजार और रुकनपुरा है। जमीन के अंदर लगभग 16 मीटर गहरा गड्डा होगा। निर्माण के दौरान बेली रोड की एक ही लेन से दोनों ओर की निजी गाड़ियां गुजरेंगी। दोनों ओर की गाड़ियों को वाहनों को 15 मीटर का ही रास्ता मिलेगा। व्यावसायिक गाड़ियां डायवर्ट होंगी। बेली रोड पश्चिमी पटना और मध्य पटना को जोड़ने वाली सबसे प्रमुख सड़क है। पीक ऑवर्स के दौरान इस पर प्रति घंटे 12-13 हजार पैसेंजर कार यूनिट का भारी दबाव रहता है। इस ट्रैफिक के लिए सामान्य दिनों में छह लेन की सड़क भी छोटी पड़ जाती है। अब इसके आधे में ही गाड़ियां चलेंगी।
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बारिश आते ही बदल गया मारवाड़ का स्वाद! ताजी सब्जियां हुईं कम, दाल-बाटी और कढ़ी
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Jalore News: मानसून के मौसम में राजस्थान, खासकर मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों की रसोई का स्वाद बदल जाता है. खेतों में ताजी सब्जियों की उपलब्धता कम होने पर लोग फिर से पारंपरिक देसी व्यंजनों की ओर लौटते हैं. दाल-बाटी, राजस्थानी कढ़ी, गट्टे की सब्जी, बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी और अन्य पारंपरिक पकवान इस मौसम में खास पसंद किए जाते हैं. ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि मौसम के अनुरूप पौष्टिक और ऊर्जा देने वाले भी माने जाते हैं. मानसून के दौरान ग्रामीण रसोई में लौटता यह पारंपरिक जायका राजस्थान की समृद्ध खानपान संस्कृति और लोकजीवन की अनूठी पहचान को दर्शाता है.
दाल-बाटी मारवाड़ की रसोई में दाल-बाटी का खास स्थान है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में मानसून के दिनों में इसका स्वाद और बढ़ जाता है. यहां दाल-बाटी कई अंदाज में बनाई जाती है,साधारण बाटी,खे वाली बाटी जिसे चूल्हे या छान व ओवन में सेंककर तैयार किया जाता है, बाफला बाटी, जिसमें बाटी को पहले उबालकर फिर घी में सेंका जाता है, और इंदौरी बाटे, जो अब मारवाड़ के कई घरों में पसंद किए जाने लगे हैं. पंचमेल दाल और देसी घी के साथ परोसी जाने वाली ये बाटियां स्वाद के साथ पारंपरिक पहचान भी हैं.
ढोकली मारवाड़ की रसोई में ढोकली मानसून के दिनों का खास पारंपरिक व्यंजन है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में इसे आमतौर पर मूंग दाल और चने की दाल को मिलाकर तैयार किया जाता है, जिसमें आटे की ढोकली डालकर पकाई जाती है. इसके अलावा यहां ग्वार फली की ढोकली और कुल्थ की ढोकली भी बनाई जाती है, जो देसी स्वाद और स्थानीय सामग्री से जुड़ी खास पहचान रखती हैं. गर्मागर्म ढोकली बारिश के मौसम में स्वाद के साथ शरीर को गर्माहट भी देती है.
ढोकला मारवाड़ की रसोई में मानसून के मौसम में ढोकला भी खूब पसंद किया जाता है. राजस्थान में ढोकले की कई देसी वैरायटी देखने को मिलती हैं. जालोर के ग्रामीण इलाकों में गेहूं के आटे के ढोकले, मक्की के आटे के ढोकले, बाजरे के ढोकले और मैदे के ढोकले भी बनाए जाते हैं. अलग-अलग अनाज से तैयार होने वाले ये ढोकले स्वाद के साथ स्थानीय खान-पान और मौसम के अनुसार बदलती ग्रामीण रसोई की परंपरा को बताते हैं.
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घेरिया मारवाड़ की पारंपरिक रसोई में घेरिया मानसून के मौसम का खास व्यंजन माना जाता है. यह गेहूं के आटे से तैयार होने वाला ऐसा स्वादिष्ट पकवान है, जिसे कम समय और कम सामग्री में आसानी से बनाया जा सकता है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दिनों में घेरिया को बड़े चाव से खाया जाता है. देसी घी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है और यह पारंपरिक देसी खान-पान की एक खास पहचान है.
कढ़ी मारवाड़ की रसोई में कढ़ी एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है, जिसे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से खाया जाता है. जालोर में भी मानसून के मौसम में कढ़ी की मांग बढ़ जाती है. इसे खासतौर पर चावल, ढोकला और बाजरे की रोटी के साथ पसंद किया जाता है. कढ़ी की भी कई वैरायटी बनाई जाती हैं,कहीं पकौड़े वाली कढ़ी, तो कहीं प्याज वाली कढ़ी और कुमटिया कढ़ी अलग-अलग मसालों के साथ तैयार की गई देसी कढ़ियां. दही और बेसन से बनने वाली यह कढ़ी स्वाद के साथ मानसून के मौसम का खास जायका बन जाती है.

