3 मई को आयोजित हुई NEET 2026 परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा रद्द किए जाने के बाद राजस्थान सहित देशभर के अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। राजस्थान के 27 जिलों के 611 परीक्षा केंद्रों पर करीब 2 लाख विद्यार्थियों ने परीक्
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कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने परीक्षा रद्द होने पर भाजपा सरकार और केंद्र की शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों के टूटने जैसा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से साबित हो गया है कि देश की शिक्षा व्यवस्था “पेपर माफियाओं” के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थियों ने दिन-रात मेहनत की, माता-पिता ने कर्ज लेकर बच्चों को कोचिंग दिलाई, लेकिन लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था ने सब बर्बाद कर दिया।
छात्रों ने जताई नाराजगी
जयपुर की छात्रा भूमिका ने कहा कि लगातार पेपर लीक होने से छात्रों का भरोसा टूट गया है। उन्होंने कहा कि मेहनत करने के बावजूद यह भरोसा नहीं रह गया कि सही तरीके से चयन होगा।
छात्रा स्वाती शर्मा ने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए NEET की तैयारी करना बेहद महंगा और कठिन होता है। लाखों रुपए खर्च करने और कठिन मेहनत के बाद भी यदि पेपर लीक हो जाए तो छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाता है।
छात्रा सुनेना तंवर ने कहा कि परीक्षा रद्द करने की बजाय पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
आर्थिक बोझ और मानसिक दबाव
अलवर की छात्रा साक्षी खटाणा ने बताया कि वह जयपुर में किराये का कमरा लेकर तैयारी कर रही थीं। कोचिंग, किराया और अन्य खर्चों में हर साल लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करना मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से मुश्किल हो गया है।
दौसा निवासी छात्र अमित मीणा ने कहा कि उन्होंने दो साल मेहनत की थी और इस बार चयन की उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई।
धौलपुर के छात्र इशांत शर्मा ने कहा कि पेपर लीक पूरी तरह NTA की विफलता है और इससे छात्रों का मनोबल टूट गया है।

पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई की मांग
खाचरियावास ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने, पेपर लीक माफिया और उनके संरक्षणकर्ताओं की गिरफ्तारी तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
छात्रों का कहना है कि यदि सरकार और एजेंसियां परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित नहीं बना पातीं, तो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य लगातार खतरे में रहेगा।








