सिंगरौली जिले के नवानगर मुख्य मार्ग पर गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे एक तेज रफ्तार बस ने सड़क किनारे खड़ी ऑटो को टक्कर मार दी। इस हादसे में ऑटो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि ऑटो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, टॉकीज रोड बैढ़न निवासी ऑटो चालक मनोज कुमार शाह अपनी ऑटो सड़क किनारे खड़ी कर नाश्ता कर रहे थे। इसी दौरान जयंत की ओर से आ रही एक अनियंत्रित बस ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो दो बार पलट गई और उसके परखच्चे उड़ गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायल चालक को ऑटो से बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस चालक घटना के बाद वाहन लेकर मौके से भाग निकला। उसने महाजन मोड़ के पास बस खड़ी की और फिर फरार हो गया। सूचना मिलते ही नवानगर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने क्षतिग्रस्त ऑटो को अपने कब्जे में ले लिया है। नवानगर थाना प्रभारी ने बताया कि सड़क हादसे की सूचना मिली है और पुलिस वैधानिक कार्रवाई में जुटी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि फरार बस चालक की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द ही हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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नवानगर मार्ग पर खड़ी ऑटो को बस ने मारी टक्कर: चालक घायल, बस चालक फरार; पुलिस जांच में जुटी – Singrauli News
पुलवामा हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की हत्या: दावा- बुर्का पहने अज्ञात हमलावरों ने गोली मारी; कश्मीर का रहने वाला, वीजा पर पाकिस्तान गया
पुलवामा आतंकी हमले में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उस पर कई गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। भारत ने 2022 में हमजा बुरहान को UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी था। उसे 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में से एक माना जाता था, इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। भारत से पाकिस्तान गया, फिर आतंकी संगठन से जुड़ा सरकार के मुताबिक, अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर पुलवामा के रत्नीपोरा इलाके का रहने वाला था। 23 साल का हमजा, आतंकी संगठन अल बद्र से जुड़ा हुआ था। अल बद्र को सरकार ने आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है। वह कानूनी तरीके से पाकिस्तान गया था। वहां जाकर वह अल बद्र में शामिल हो गया और बाद में संगठन का सक्रिय आतंकी और कमांडर बन गया। अभी वह पाकिस्तान से ही काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि वह युवाओं को अल बद्र में शामिल होने के लिए उकसाता था और फंडिंग भी करता था। जांच एजेंसियों के अनुसार 2020 में CRPF जवानों पर ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकी संगठन में भर्ती कराने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा। बुरहान वानी का करीबी था हमजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान लंबे समय से पाकिस्तान और PoK में सक्रिय था। बुरहान मुजफ्फराबाद के AIMS कॉलेज के बाहर मारा गया। वह अबू दुजाना, अबू कासिम, बुरहान वानी और जाकिर मूसा का करीबी सहयोगी था। बुरहान वानी 8 जुलाई 2016 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उसकी मौत के बाद कश्मीर में लंबे समय तक हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए थे। बुरहान वानी की मौत के बाद जाकिर मूसा हिजबुल का कमांडर बना था। वह 23 मई 2019 को पुलवामा जिले के त्राल इलाके में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में मारा गया था। पुलवामा अटैक में 40 CRPF जवान शहीद हुए थे 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था। श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर लेथपोरा इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी SUV बसों से टकरा दी थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि दो बसों के परखच्चे उड़ गए और 40 जवान शहीद हो गए। जांच में सामने आया कि हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों को कई इंटेलिजेंस इनपुट मिले थे, लेकिन आतंकी साजिश को रोका नहीं जा सका। बाद में NIA ने अपनी चार्जशीट में जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को हमले का मास्टरमाइंड बताया था। 4 महीने में पाकिस्तान के 4 बड़े आतंकियों की मौत पाकिस्तान में पिछले 4 महीने में 4 बड़े आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। इनके पीछे अज्ञात हमलावर का हाथ बताया जा रहा है, हालांकि इनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 1. लश्कर आतंकी- मोहम्मद कासिम गुज्जर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी मोहम्मद कासिम गुज्जर की फरवरी 2026 में पाकिस्तान के पेशावर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर हमला किया था। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। कासिम गुज्जर उर्फ सलमान/सुलेमान को भारत सरकार ने 2024 में UAPA के तहत घोषित आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय एजेंसियों के अनुसार, वह कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था और जम्मू-कश्मीर में नए आतंकी मॉड्यूल तैयार करने का काम कर रहा था। उस पर आतंकियों को हथियार और फंडिंग पहुंचाने, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भर्ती करने और कई आतंकी हमलों में भूमिका निभाने के आरोप थे। 2. जैश-ए-मोहम्मद कमांडर- सलमान अजहर अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के सीनियर कमांडर सलमान अजहर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, वो एक ‘हिट-एंड-रन’ जैसी घटना का शिकार हुआ। हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स इसे टारगेट किलिंग बताया गया था। इसकी भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। सलमान अजहर को जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर का करीबी सहयोगी माना जाता था। जैश-ए-मोहम्मद वही आतंकी संगठन है जिसे भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। सलमान अजहर संगठन के ऑपरेशनल नेटवर्क और भर्ती अभियान से जुड़ा हुआ था। बहावलपुर को लंबे समय से जैश का प्रमुख ठिकाना माना जाता रहा है। 3. लश्कर कमांडर- शेख यूसुफ अफरीदी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अप्रैल 2026 को अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यूसुफ अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के बड़े नेटवर्क से जुड़ा माना जाता था। वह कथित तौर पर संगठन के लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन सिस्टम को संभालता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसे हाफिज सईद का करीबी भी माना जाता था।
4. हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर- सज्जाद अहमद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मई 2026 में हिजबुल मुजाहिदीन का सीनियर कमांडर सज्जाद अहमद संदिग्ध परिस्थितियों में मारा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से घटना पर ज्यादा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। सज्जाद अहमद मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बारामूला इलाके का रहने वाला था। कहा जाता है कि वह 1990 के दशक के अंत में पाकिस्तान चला गया था, जहां उसने आतंकी ट्रेनिंग ली। बाद में वह हिजबुल मुजाहिदीन के लिए फंडिंग, ट्रेनिंग और नेटवर्किंग जैसे काम संभालने लगा। वह पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी एक्टिविटी के कॉर्डिनेशन में एक्टिव रोल निभा रहा था। हिजबुल मुजाहिदीन लंबे समय तक घाटी में एक्टिव प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल रहा है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में भारतीय दूतावास के सुरक्षाकर्मी की मौत:फर्श पर डेड बॉडी मिली, ड्यूटी करके लौटा था; हरियाणा का रहने वाला थ बांग्लादेश के चिटगांव शहर में स्थित भारतीय दूतावास परिसर के अंदर मंगलवार को एक भारतीय सुरक्षाकर्मी मृत पाया गया। मृतक की पहचान 35 साल के नरेंद्र के तौर पर हुई है। वे हरियाणा के रहने वाले थे और दूतावास में सुरक्षा गार्ड के पद पर तैनात थे। नरेंद्र सोमवार रात अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने कमरे में लौटे थे। मंगलवार सुबह जब वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचे तो उनके साथ वालों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की। कई बार फोन और आवाज लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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घर पर आसानी से उगाएं हरी मिर्च, जानिए गमले में भरपूर मिर्च उगाने का आसान तरीका
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How To Grow Green Chillies: अगर आप घर पर ताजी हरी मिर्च उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए बड़े बगीचे की जरूरत नहीं है. एक छोटा गमला, अच्छी मिट्टी, धूप और थोड़ी देखभाल से आप आसानी से हरी मिर्च का पौधा उगा सकते हैं. सही समय पर पानी देना, पौधे को धूप मिलना और समय-समय पर मिर्च तोड़ना अच्छी पैदावार में मदद करता है. यह तरीका बालकनी, छत या खिड़की के पास भी आसानी से अपनाया जा सकता है. घर की उगाई हरी मिर्च स्वाद के साथ ताजगी का भी मजा देती है.
How To Grow Green Chillies: अगर आप खाने में तीखा स्वाद पसंद करते हैं, तो हरी मिर्च लगभग हर दिन किचन में इस्तेमाल होती ही है. कई बार छोटी सी चीज के लिए भी बाजार भागना पड़ जाता है, लेकिन सोचिए अगर यही ताजी हरी मिर्च आपके घर की बालकनी या छत पर उग रही हो तो कितना आसान हो जाएगा. अच्छी बात यह है कि हरी मिर्च उगाने के लिए आपको किसी बड़े गार्डन की जरूरत नहीं है. एक साधारण गमला, थोड़ी धूप और सही देखभाल से आप आसानी से मिर्च का पौधा तैयार कर सकते हैं. यह काम सिर्फ गार्डनिंग एक्सपर्ट के लिए नहीं है, बल्कि शुरुआत करने वाला व्यक्ति भी इसे आसानी से कर सकता है. हरी मिर्च का पौधा ज्यादा जगह नहीं लेता, जल्दी बढ़ता है और सही देखभाल मिलने पर लंबे समय तक मिर्च देता रहता है. यही वजह है कि आजकल होम गार्डनिंग पसंद करने वाले लोग इसे सबसे पहले उगाना पसंद करते हैं.

बीज का सही चुनाव कैसे करें: हरी मिर्च उगाने की शुरुआत अच्छे बीज से होती है. आप बाजार से गार्डनिंग वाले बीज खरीद सकते हैं या घर में मौजूद ताजी हरी मिर्च के बीज भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर घर वाली मिर्च के बीज ले रहे हैं, तो उन्हें निकालकर 1 से 2 दिन हल्का सुखा लें ताकि उनमें ज्यादा नमी न रहे. अच्छे और स्वस्थ बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधा भी मजबूत बनता है.

गमला कैसा होना चाहिए: हरी मिर्च के पौधे के लिए बहुत बड़ा गमला जरूरी नहीं है, लेकिन इतना जरूर होना चाहिए कि जड़ें आराम से फैल सकें. मध्यम आकार का गमला सही रहता है. सबसे जरूरी बात यह है कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद होने चाहिए. अगर पानी जमा रहेगा तो जड़ें खराब हो सकती हैं और पौधा कमजोर पड़ सकता है.
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मिट्टी कैसी रखें ताकि पौधा तेजी से बढ़े: हरी मिर्च के लिए हल्की और भुरभुरी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. सिर्फ साधारण मिट्टी भर देना सही तरीका नहीं है. मिट्टी में अच्छी मात्रा में कंपोस्ट या सड़ी हुई खाद मिलाने से पौधे को पोषण मिलता है. ऐसी मिट्टी जड़ों को फैलने में मदद करती है और पौधे की ग्रोथ बेहतर होती है. अगर मिट्टी बहुत सख्त होगी तो पौधा अच्छी तरह नहीं बढ़ पाएगा.

धूप कितनी जरूरी है: हरी मिर्च का पौधा धूप पसंद करता है. इसे रोज कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप मिलनी चाहिए. अगर पौधे को धूप नहीं मिलेगी तो उसकी ग्रोथ धीमी हो सकती है और मिर्च भी कम आ सकती है. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां सुबह या दिन की अच्छी रोशनी आती हो. बालकनी, छत या धूप वाली खिड़की इसके लिए अच्छा विकल्प है.

पानी देने का सही तरीका क्या है: कई लोग पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी दे देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है. हरी मिर्च के पौधे की मिट्टी हल्की नम रहनी चाहिए, लेकिन पानी से भरी नहीं. बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं. मौसम के हिसाब से पानी दें. गर्मियों में थोड़ा ज्यादा और ठंड में कम पानी की जरूरत पड़ सकती है. पानी देने से पहले मिट्टी छूकर देखना अच्छा तरीका है.

मिर्च कब दिखना शुरू होगी: अगर आपने सही तरीके से पौधा लगाया है और धूप, पानी व पोषण का ध्यान रखा है, तो कुछ हफ्तों में पौधा बढ़ने लगेगा और धीरे-धीरे छोटे फूल आने शुरू हो सकते हैं. फूलों के बाद हरी मिर्च दिखने लगेगी. शुरुआत में कम मिर्च आए तो चिंता न करें, पौधा समय के साथ ज्यादा उत्पादन देने लगता है.

ज्यादा मिर्च पाने के लिए ये छोटी ट्रिक अपनाएं: हरी मिर्च को समय-समय पर तोड़ते रहना अच्छा माना जाता है. इससे पौधा नई मिर्च देने के लिए प्रेरित होता है. सूखी पत्तियां हटाते रहें और अगर पौधा कमजोर लगे तो थोड़ी जैविक खाद दे सकते हैं. कीड़े दिखें तो हल्के घरेलू उपाय अपनाएं ताकि पौधा सुरक्षित रहे.

घर की गार्डनिंग का आसान और मजेदार तरीका: अगर आप गार्डनिंग शुरू करना चाहते हैं, तो हरी मिर्च सबसे आसान पौधों में से एक है. यह कम जगह में आसानी से उग जाती है और रोजमर्रा की जरूरत भी पूरी करती है. थोड़ी सी मेहनत से आप अपने घर में ताजी, साफ और केमिकल फ्री हरी मिर्च का मजा ले सकते हैं.
लंबी छुट्टी पर जाने से पहले इन्वर्टर को किस मोड पर रखें कि बैटरी खराब न हो
इन्वर्टर हमारे घर का जरूरी अप्लायंस बन गया है। इन्वर्टर पावर कट के दौरान घर में बिजली की सप्लाई करता है, जिससे घर के जरूरी अप्लायंसेज जैसे कि पंखा, ट्यूबलाइट, टीवी आदि चलते हैं। इन्वर्टर के साथ बैटरी की जरूरत होती है, जो बिजली को स्टोर करती है और पावर कट के दौरान उस बिजली को घर में सप्लाई करती है। अगर, आप लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं तो क्या इन्वर्टर को बंद कर देना चाहिए? इन दिनों आने वाले इन्वर्टर में कई मोड्स दिए जाते हैं, इनमें से कौन सा मोड चुनें ताकि बैटरी प्रभावित न हो?
किस मोड पर रखें इन्वर्टर?
आम तौर पर अगर आप लंबी छुट्टी पर बाहर जा रहे हैं तो इन्वर्टर को नॉर्मल मोड पर ही रखें। साथ ही, मेन स्वीच वाले सॉकेट को भी ऑन रखें। कई इन्वर्टर में बैटरी के हिसाब से मोड दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप ट्यूबलर बैटरी यूज कर रहे हैं तो इसी मोड का चुनाव करें। लेड-एसिड बैटरी यूज कर रहे हैं तो उस मोड का चुनाव करें। यह पूरी तरह से आपके इन्वर्टर पर निर्भर करता है।
हालांकि, अगर आप लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं और घर के मेन पावर स्प्लाई को बंद कर रहे हैं, तो इन्वर्टर को भी आपको स्वीच ऑफ करना चाहिए। इसके प्लग को स्विच से निकाल दें और बैटरी के कनेक्शन को भी कट कर लें। ऐसा करने से बैटरी के टर्मिनल्स साफ रहेंगे और बैटरी खराब नहीं होगी।
बैटरी कर लें फुल चार्ज
इस बात का ध्यान रखें कि छुट्टी पर जाने से पहले इन्वर्टर की बैटरी को फुल चार्ज कर लें, ताकि आन के बाद जब इसे दोबारा इन्वर्टर से कनेक्ट करें तो यह पावर सप्लाई देने के लिए तैयार रहे। 1 से 2 महीन तक बैटरी चार्ज रह सकती है। इसके बाद यह डीप डिस्चार्ज हो जाती है। बैटरी को दोबारा इन्वर्टर से कनेक्ट करने से पहले टर्मिनल को अच्छी तरह से साफ कर लें। इसके अलावा बैटरी के वाटर लेवल को भी चेक करें।
वहीं, अगर आप मेन स्विच ऑन करके छुट्टी पर बाहर जा रहे हैं तो आपको घर के सभी अप्लायंसेज के प्लग को सॉकेट से निकाल देना चाहिए। साथ ही, सभी लाइट्स, पंखे आदि को स्वीच ऑफ कर देना चाहिए। इन्वर्टर के प्लग को केवल लगाए रखें ताकि बैटरी चार्ज होती रहे। ऐसा करने से बैटरी खराब नहीं होगी।
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बक्सर में 202 करोड़ की योजना फेल: सिमरी की महादलित बस्तियों तक नहीं पहुंचा शुद्ध पानी, 40 लाख लीटर 3 प्री-सेटलिंग टैंक बनाए गए – Buxar News
बक्सर के सिमरी प्रखंड में 202 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से बना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हजारों लोगों की प्यास बुझाने में विफल रहा है। भीषण गर्मी के बीच यहां के लोग आज भी शुद्ध पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। सरकारी दावों में इस परियोजना को ‘आर्सेनिक मुक्त जल क्रांति’ बताया गया था। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत है, जहां महादलित बस्तियों के लोग आज भी जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। बच्चों में चर्म रोग के निशान देखे जा रहे हैं, और महिलाएं दूषित पानी को छानकर पीने को विवश हैं। यह महत्वाकांक्षी योजना बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड की 15 और बक्सर सदर प्रखंड की 5 पंचायतों के कुल 51 गांवों के 214 वार्डों में रहने वाले लगभग 36 हजार परिवारों को आर्सेनिक युक्त पानी से मुक्ति दिलाने के लिए बनाई गई थी। इसका उद्देश्य गंगा नदी के पानी को शुद्ध कर पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पहुंचाना था। परियोजना का उद्घाटन 15 फरवरी 2025 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। उस समय यह दावा किया गया था कि सभी परिवारों को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन, यह दावा सरकारी फाइलों तक ही सीमित होकर रह गया। गांवों में की गई पड़ताल में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। सिमरी प्रखंड के केशोपुर और पांडेयपुर जैसे गांवों में लोग पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर पानी की समस्या पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते मिले। कई घरों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है, लेकिन नल सूखे पड़े हैं। जिन घरों में अभी तक कनेक्शन नहीं पहुंचा है, वहां के लोग आज भी हैंडपंप के जहरीले पानी पर निर्भर हैं। 16 साल में पूरी हुई योजना, फिर भी अधूरी राहत इस परियोजना की कहानी भी विवादों से भरी रही है। वर्ष 2009 में तत्कालीन पीएचईडी मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 112 करोड़ 57 लाख रुपए की लागत से इसका शिलान्यास किया था। हैदराबाद की एक कंपनी को करीब 100 करोड़ रुपए में काम दिया गया, लेकिन आरोप है कि कंपनी बिना काम पूरा किए पैसा लेकर फरार हो गई। इसके बाद दोबारा टेंडर हुआ और करीब 16 साल की देरी के बाद परियोजना 202 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई। दावा किया गया कि गंगा जल को शुद्ध कर 36 हजार 760 परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह दावा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया। तीन प्री-सेटलिंग टैंक बनाए गए
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में तैनात केमिस्ट रियाजुद्दीन अंसारी का कहना है कि प्लांट से नियमित रूप से सुबह तीन घंटे और शाम तीन घंटे पानी सप्लाई किया जा रहा है। उनके अनुसार, पानी चार स्तर की फिल्टर प्रक्रिया और टीडीएस जांच के बाद गांवों में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि तीन प्री-सेटलिंग टैंक बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 40 लाख लीटर है। उनका दावा है कि इस परियोजना से आर्सेनिक प्रभावित लोगों को राहत मिली है।
हालांकि, गांवों में रहने वाले लोग इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं।
“अपने पैसे से पाइप खरीदो, तब मिलेगा पानी”
पांडेयपुर गांव के निवासी त्रिवेणी दुबे बताते हैं कि गांव वालों ने सैकड़ों आवेदन दिए, नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन पानी नहीं मिला। अब लोगों से कहा जा रहा है कि खुद पाइप खरीदो और लगाने का खर्च दो, तभी पानी पहुंचेगा। गांव की महादलित बस्ती की हालत और भी खराब है। यहां के लोगों का कहना है कि एक हैंडपंप के सहारे दर्जनों परिवार गुजर-बसर कर रहे हैं। भुवर मुसहर बताते हैं कि उनके घर तक पाइपलाइन पहुंची जरूर, लेकिन नल में कभी पानी नहीं आया। मजबूरी में वही जहरीला पानी पीना पड़ता है, जिससे चर्म रोग और अन्य बीमारियां हो रही हैं।
वहीं नट समाज की महिला सुगवंती देवी कहती हैं कि बस्ती का हैंडपंप ही एकमात्र सहारा है। उसी पानी से खाना बनता है और वही छानकर पीना पड़ता है। हैंडपंप के पास की जमीन लाल पड़ चुकी है और बर्तनों पर जंग जैसी परत जम जाती है, जो पानी में आर्सेनिक की भयावहता को दिखाती है। “उद्घाटन प्लांट बनकर रह गया” केशोपुर पंचायत के बीडीसी प्रमोद मिश्रा का कहना है कि यह परियोजना “उद्घाटन प्लांट” बनकर रह गई है। प्लांट के सबसे नजदीक होने के बावजूद पंचायत के करीब 10 प्रतिशत घरों तक आज भी कनेक्शन नहीं पहुंचा।
उन्होंने कहा कि सिमरी विश्व के सबसे अधिक आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में यदि समय पर सभी घरों तक शुद्ध पानी नहीं पहुंचा, तो यह परियोजना अपने मूल उद्देश्य में असफल मानी जाएगी।
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आ गया UPSC का कैलेंडर, जानें सिविल सर्विस समेत 27 परीक्षाओं का कब होगा एग्जाम
नए एसपी का कोतवाली थाने में औचक निरीक्षण: सिविल ड्रेस में पहुंचे, पहचान नहीं सका हेड कॉन्स्टेबल; टीआई भी मिले नदारद – Morena News
नवागत एसपी धर्मराज मीणा ने बुधवार देर रात सिविल ड्रेस में शहर कोतवाली थाने का औचक निरीक्षण किया। सादे कपड़ों में होने के कारण थाने में मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें पहचान नहीं सके। निरीक्षण के दौरान थाना प्रभारी नदारद मिले, जिन्हें एसपी ने तुरंत तलब किया। वहीं, थाने में गंदगी और टूटी कुर्सियां देखकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं। देर शाम करीब 8 बजे जब एसपी धर्मराज मीणा अचानक थाने पहुंचे, तो वहां तैनात हेड कॉन्स्टेबल वृंदावन उन्हें पहचान नहीं सका। हालांकि, एसपी ने सादगी दिखाते हुए इस बात पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। इसके बाद हेड कॉन्स्टेबल ही उन्हें थाने के अंदर ले गया। इसी बीच अचानक थाने की बिजली गुल हो गई। बाद में मौके पर मौजूद एसआई पवन भदौरिया ने एसपी को पूरे थाने का भ्रमण करवाया। निरीक्षण के दौरान नदारद मिले थाना प्रभारी
एसपी जब औचक निरीक्षण कर रहे थे, तब सिटी कोतवाली थाना प्रभारी अमित भदौरिया थाने पर मौजूद नहीं थे। स्टाफ ने अधिकारियों को बताया कि टीआई साहब अपने बंगले पर हैं। इसके बाद एसपी के निर्देश पर टीआई को तुरंत कॉल कर थाने बुलाया गया। टूटी कुर्सियां और गंदगी देख जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान एसपी ने स्टाफ और आमजन के लिए रखी टूटी कुर्सियां और थाना परिसर में गंदगी देखी, जिस पर उन्होंने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने तुरंत टूटी कुर्सियां हटाने और भविष्य में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। एसपी ने सीसीटीएनएस (CCTNS) रूम, चालू हालात में कंप्यूटर-प्रिंटर और महिला डेस्क का भी जायजा लिया। सीएम हेल्पलाइन के निराकरण पर दी शाबाशी
कड़ी हिदायतों के बीच, एसपी धर्मराज मीणा ने सीएम हेल्पलाइन और अन्य लंबित प्रकरणों में अच्छा काम करने के लिए कोतवाली टीम की पीठ भी थपथपाई। उन्होंने स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि अच्छे काम का यह क्रम आगे भी इसी तरह जारी रहना चाहिए। ’15 दिन के भीतर हो अपराधी की गिरफ्तारी’
एसपी ने थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर में अपराधियों द्वारा की जाने वाली फायरिंग की घटनाएं तुरंत रुकनी चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “अपराधियों पर ठोस कार्रवाई करें। घटना के 15 दिन के भीतर केस का निराकरण और आरोपी की गिरफ्तारी हर हाल में होनी चाहिए।” एसपी ने जोर देकर कहा कि कोई भी काम पेंडिंग न रहे और शहर में पुलिस का इकबाल बुलंद होना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि थाने में किसी भी सामग्री की आवश्यकता हो तो उन्हें बताएं, वह तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी।
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दिल्ली की गर्मी में मिल गया छुपा हुआ गांव, यहां पहुंचते ही भूल जाएंगे AC की ठंडी हवा
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दिल्ली की भागदौड़, ट्रैफिक और भीषण गर्मी के बीच अगर आप कुछ देर सुकून और गांव जैसा शांत माहौल महसूस करना चाहते हैं, तो प्रगति मैदान के पास स्थित क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए बेहतरीन जगह साबित हो सकती है. यहां मिट्टी के घर, देसी गलियां, पारंपरिक कला और शांत वातावरण लोगों को शहर के शोर से दूर एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं. खास बात यह है कि यह जगह न सिर्फ संस्कृति प्रेमियों बल्कि सोशल मीडिया और aesthetic तस्वीरों के शौकीनों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.टूर
दिल्ली की गर्मी इन दिनों लोगों का हाल बेहाल कर रही है. ऐसे में अगर आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहां कुछ देर सुकून मिले, ठहराव महसूस हो और शहर की भागदौड़ से अलग माहौल दिखे, तो दिल्ली का क्राफ्ट म्यूजियम आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है. यहां पहुंचते ही ऐसा एहसास होता है जैसे अचानक किसी गांव की गलियों में आ गए हों. मिट्टी के घर, देसी कला, शांत माहौल और हर तरफ भारतीय संस्कृति की झलक इस जगह को खास बना देती है.

दिल्ली की ट्रैफिक, शोर और धूप से निकलकर जैसे ही आप क्राफ्ट म्यूजियम के अंदर कदम रखते हैं, माहौल पूरी तरह बदल जाता है. यहां मिट्टी से बने घर, लकड़ी के दरवाजे और देसी अंदाज में बनी छोटी-छोटी गलियां गांव जैसा एहसास कराती हैं. ऐसा लगता है जैसे शहर से दूर किसी शांत जगह पर पहुंच गए हों.

अगर आप इंस्टाग्राम या सोशल मीडिया पर अलग और aesthetic तस्वीरें डालना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट है. मिट्टी की दीवारें, रंगीन सजावट और देसी बैकग्राउंड आपकी तस्वीरों को बिल्कुल अलग लुक दे सकते हैं.वैसे यहां पहुचना भी असान है क्राफ्ट म्यूजियम प्रगति मैदान के पास स्थित है. मेट्रो से जाना सबसे आसान रहता है.
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अगर आपको हैंडमेड चीजें पसंद हैं, तो यह जगह और भी खास लग सकती है. यहां कई बार कलाकार अपने हाथों से मिट्टी के बर्तन बनाते, पेंटिंग करते या पारंपरिक चीजें तैयार करते दिख जाते हैं. इसे देखकर समझ आता है कि हमारी पुरानी कला कितनी खूबसूरत और मेहनत भरी है.

यहां अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक झोपड़ियां और संस्कृति को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है. कहीं राजस्थान का देसी टच दिखेगा, तो कहीं उत्तर-पूर्व और गुजरात की झलक नजर आएगी. हर कोना आपको भारत की अलग-अलग परंपराओं से जोड़ता है.








