प्रयागराज के छावनी सामान्य अस्पताल में अब शहर की पहली मेनोपॉज ओपीडी शुरू होने जा रही है। महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह विशेष सुविधा अगले सप्ताह से उपलब्ध होगी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में होने वाली मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं का निदान और मुफ्त इलाज यहां किया जाएगा। ओपीडी में तीन विशेषज्ञ डॉक्टर तैनात होंगे । एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक वरिष्ठ फिजिशियन और एक मनोचिकित्सक। अस्पताल प्रमुख अधीक्षक डॉ. वैशाली सिंह ने बताया कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के व्यवहार में परिवर्तन आता है, जिसे समझना बेहद जरूरी होता है। लेकिन अधिकांश लोग इसके बारे में जानते नहीं हैं, जिससे पारिवारिक और मानसिक समस्याएं बढ़ती हैं। मेनोपॉज ओपीडी सप्ताह में तीन दिन संचालित होगी । सोमवार, बुधवार और बृहस्पतिवार। आने वाली महिलाओं के लिए ब्लड टेस्ट सहित सभी आवश्यक जांचें बिल्कुल मुफ्त होंगी। ओपीडी में काउंसलिंग के साथ दवाइयां भी प्रदान की जाएंगी। साथ ही मरीजों के साथ आए परिजनों और पतियों को भी मेनोपॉज के लक्षण और व्यवहारिक बदलावों के बारे में जागरूक किया जाएगा ताकि घरेलू सहयोग बढ़े और मानसिक तनाव कम हो। मेनोपॉज सामान्यतः 40 से 55 वर्ष की आयु के बीच आता है और तब माना जाता है जब किसी महिला को लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म न आए। इसके प्रमुख लक्षणों में अनियमित पीरियड, अचानक हॉट फ्लैश, रात में ज्यादा पसीना, अनिद्रा, मूड स्विंग और वजन बढ़ना शामिल है।
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प्रयागराज के छावनी अस्पताल में मेनोपॉज OPD जल्द: अगले हफ्ते से जांच-इलाज शुरू, ब्लड टेस्ट से लेकर दवा तक सब फ्री – Prayagraj (Allahabad) News
सिया ने केतन का मर्डर करने राजा रघुवंशी केस पढ़ा: मोबाइल सर्च हिस्ट्री से खुला राज; यह भी पूछा- पुलिस कस्टडी में महिला से मारपीट होती है
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पुणे2 मिनट पहले
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पुणे की वडगांव कोर्ट ने 3 जुलाई को सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुणे के लोहगढ़ में केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में पता चला है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल ने वारदात से पहले इंटरनेट पर इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की जानकारी जुटाई थी।
पुलिस के मुताबिक सिया ने इंटरनेट पर यह भी सर्च किया था कि ‘क्या पुलिस कस्टडी में महिलाओं के साथ मारपीट होती है’। यह पूरी जानकारी सिया के दोनों मोबाइल की सर्च हिस्ट्री से मिली।
पुलिस 2 दिन पहले सिया को उसके घर लेकर गई थी, जहां उसके बेडरूम से दूसरा मोबाइल भी जब्त किया है। घटना वाले दिन के कुछ चश्मदीद भी मिले हैं, जिनके बयान जांच को और मजबूत कर रहे हैं।
18 जून को सिया और चेतन ने केतन को पुणे के लोहगढ़ फोर्ट से 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। फिलहाल दोनों 16 जुलाई तक येरवदा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
हत्या के दूसरे दिन पिता से बोली सिया- हिम्मत रखिए, केतन हमें ऊपर से देख रहा है
पुलिस के अनुसारअगले ही दिन सिया केतन के घर पहुंची और उसके पिता को सांत्वना देते हुए कहा, ‘केतन हमें ऊपर से देख रहा है, हिम्मत रखिए।’ जांच में सामने आया कि 18 से 23 जून तक दोनों आरोपी सामान्य जिंदगी जीते रहे और गिरफ्तारी के बाद भी उनके चेहरे पर पछतावा नहीं दिखा।
पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि केतन की हत्या में साथ देने वाला दूसरा आरोपी चेतन चौधरी एक ही मोबाइल में दो नंबर इस्तेमाल कर सिया से कोड वर्ड में बात करता था।

तस्वीर नवंबर 2025 की है। तब सिया और केतन अग्रवाल की सगाई हुई थी। सिया ने केतन की पहनाई अंगूठी दिखते हुए तस्वीर भी खिंचाई थी।
प्लानिंग से मर्डर तक 19 दिन में घटना को अंजाम दिया
- 31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा: 11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा।
- 5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया: सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ फोर्ट जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया।
- 14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया: सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों लोहगढ़ पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई।
- 18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया: 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया।
दिल्ली के इन 6 जगहों पर मिलेगा हर जायका, फूड कैपिटल वाली पहचान यूं ही नहीं है
दिल्ली: पुरानी दिल्ली की सदियों पुरानी गलियों से लेकर साउथ दिल्ली के मॉडर्न कैफे तक, राजधानी का हर इलाका फूड के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है. कहीं छोले-भटूरे की खुशबू लोगों को खींच लाती है, तो कहीं कबाब और बिरयानी का जायका दिल जीत लेता है. किसी बाजार की पहचान चाट और गोलगप्पों से है, तो कहीं मोमोज, शावरमा और इंटरनेशनल व्यंजन युवाओं की पहली पसंद बने हुए हैं. यही वजह है कि दिल्ली को सिर्फ देश की राजधानी नहीं, बल्कि भारत की फूड कैपिटल भी कहा जाता है. आइए जानते हैं राजधानी के उन मशहूर इलाकों के बारे में, जहां हर गली और हर बाजार अपने स्वाद से लोगों की जुबान पर अलग छाप छोड़ता है.
चांदनी चौक में है पराठे वाली गली
अगर दिल्ली में खाने की बात हो और चांदनी चौक का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. यहां सदियों पुरानी खाने की परंपरा आज भी कायम है. पराठे वाली गली के भरवां पराठे, मसालेदार चाट, दही भल्ले, नागौरी हलवा, जलेबी, रबड़ी और पुराने अंदाज की मिठाइयां लोगों को खूब पसंद आती हैं. वहीं, जामा मस्जिद के आसपास कबाब, निहारी, बिरयानी और मुगलई व्यंजन देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं.
कनॉट प्लेस
दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में हर तरह का खाना मिलता है. यहां लग्जरी रेस्टोरेंट से लेकर पुराने कैफे, बेकरी, स्ट्रीट फूड और इंटरनेशनल क्यूज़ीन तक सब कुछ मौजूद है. यहां नॉर्थ इंडियन, साउथ इंडियन, इटालियन, चाइनीज, जापानी, मैक्सिकन और कॉन्टिनेंटल खाने के अनगिनत विकल्प मिलते हैं. शाम के समय यह इलाका खाने के शौकीनों से गुलजार रहता है.
करोल बाग
करोल बाग लंबे समय से अपने पारंपरिक उत्तर भारतीय स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां के छोले-भटूरे, राजमा-चावल, कचौड़ी, समोसे, लस्सी और मिठाइयां लोगों की पहली पसंद हैं. खरीदारी के साथ स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने के लिए यह इलाका हमेशा भीड़ से भरा रहता है.
राजौरी गार्डन
राजौरी गार्डन पंजाबी खाने के लिए पूरे दिल्ली-एनसीआर में मशहूर है. यहां बटर चिकन, दाल मखनी, अमृतसरी कुलचा, तंदूरी चिकन, सीख कबाब, बारबेक्यू और नॉन-वेज व्यंजनों की भरमार है. इसके अलावा यहां आधुनिक कैफे और फाइन डाइनिंग रेस्टोरेंट भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं. यहां स्वाद के दीवानों की भीड़ लगी रहती है.
तिलक नगर
तिलक नगर को मिनी पंजाब भी कहा जाता है. यहां की मलाई चाप, अफगानी चाप, तंदूरी चाप, सोया चाप, कुलचे और पंजाबी स्नैक्स पूरे शहर में मशहूर हैं.शाम के समय यहां की सड़कें खाने के शौकीनों से भर जाती हैं और लोग दूर-दूर से सिर्फ चाप का स्वाद लेने पहुंचते हैं.
मजनू का टीला
अगर आपको एशियन खाना पसंद है, तो मजनू का टीला सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है. यहां तिब्बती मोमोज, थुकपा, रामेन, किमची, कोरियन बारबेक्यू और कई पारंपरिक एशियन व्यंजन मिलते हैं. पिछले कुछ वर्षों में यह इलाका फूड लवर्स के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है.
कभी विज्ञापन लिखकर कमाते, कभी करनी पड़ी पार्ट-टाइम नौकरी… फिर बन गए सुपरस्टार
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रणवीर सिंह ने पढ़ाई के दौरान पार्ट-टाइम जॉब और कॉपीराइटर के रूप में काम किया. संघर्ष के बाद यश राज फिल्म्स की ‘बैंड बाजा बारात’ से डेब्यू किया और आज सफल अभिनेता हैं.
आदित्य धर की फिल्म धुरंधर में एक्टर रणवीर सिंह की भूमिका को काफी सराहा गया, लेकिन इस सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है. आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले रणवीर कभी अपनी पढ़ाई के दौरान खर्च चलाने के लिए छोटे-मोटे काम किया करते थे. कॉलेज के दिनों में उन्होंने पार्ट-टाइम नौकरी की, वहीं विज्ञापन एजेंसियों में कॉपीराइटर के रूप में भी काम किया, लेकिन इन सबके बीच उनका सपना सिर्फ एक था बॉलीवुड में अभिनेता बनना. मेहनत के दम पर उन्होंने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई, बल्कि आज वह हिंदी सिनेमा के सबसे सफल और सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले अभिनेताओं में गिने जाते हैं.
रणवीर सिंह का जन्म 6 जुलाई 1985 को मुंबई के एक सिंधी परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्हें फिल्मों और अभिनय में गहरी रुचि थी. स्कूल के समय से ही वे नाटकों और डिबेट्स में हिस्सा लेते थे. वह आगे चलकर अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी ब्लूमिंगटन में पढ़ने गए, जहां उन्होंने टेली-कम्युनिकेशन और थिएटर की पढ़ाई की.
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मेरठ में गली में दरवाजा खोलने पर विवाद: विरोध करने पर मारपीट, युवक घायल; पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप – Meerut News
मेरठ के देहली गेट थाना क्षेत्र के पूर्वा ताहिर हुसैन में रविवार देर शाम गली में दरवाजा खोलने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। इस दौरान हुई मारपीट में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर कार्रवाई न करने और मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल है। पूर्वा ताहिर हुसैन निवासी वसीम पुत्र हाजी नफीस के अनुसार, उनकी गली में करीब 10 से 12 परिवार रहते हैं और यह गली वर्षों से केवल स्थानीय लोगों के आने-जाने के लिए इस्तेमाल होती रही है। वसीम का आरोप है कि तीन साल पहले पड़ोसी निजामुद्दीन ने एक मकान और दुकान खरीदी थी। रविवार को उसने पीछे की गली में जबरन एक नया दरवाजा खोल दिया। जब मोहल्ले के लोगों ने इस दरवाजे का विरोध किया, तो निजामुद्दीन अपने परिजनों और अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंच गया। आरोप है कि उसने विरोध करने वालों के साथ मारपीट शुरू कर दी, जिसमें वसीम के भाई के सिर पर गंभीर चोट आई। सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पीड़ित पक्ष ने देहली गेट थाने में निजामुद्दीन, उसके परिजनों और अन्य लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। हालांकि, देर शाम तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। मोहल्ले के लोगों ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो वे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि उन्हें दोनों पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिली है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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हेमा मालिनी डेब्यू से पहले ही बनी ‘ड्रीम गर्ल’, प्रोड्यूसर का ‘मास्टरप्लान’ कर गया काम
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लोग मानते हैं कि हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल नाम उनकी 1977 की फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ से मिला है, लेकिन इस नाम के पीछे किस्सा दूसरा है. असल में हेमा मालिनी को यह नाम पहली फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ की रिलीज से पहले ही मिल गई थी. फिल्म के प्रोड्यूसर बी. आनंदस्वामी ने मार्केटिंग का अनूठा तरीका निकाला था. उन्होंने पोस्टर्स पर उनका नाम लिखने के बजाय ‘ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन’ लिखवाया था. यह आइडिया बेहद सफल रहा. हेमा मालिनी ने फिर आगे चलकर 1977 में ‘ड्रीम गर्ल’ फिल्म में पांच अलग-अलग किरदार भी निभाए.
हेमा मालिनी ने ‘सपनों का सौदागर’ से डेब्यू किया था.
नई दिल्ली: बॉलीवुड की एवरग्रीन एक्ट्रेस हेमा मालिनी को आज भी हर कोई ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से जानता है. ज्यादातर फैंस को यही लगता है कि साल 1977 में आई उनकी सुपरहिट फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ की वजह से उन्हें यह नाम मिला होगा. लेकिन सच तो यह है कि यह नाम उन्हें बॉलीवुड में कदम रखने से पहले ही मिल गया था. खुद हेमा मालिनी ने सालों बाद इस बात का खुलासा किया. उन्होंने किस्सा सुनाया कि कैसे फिल्म प्रोड्यूसर के अनोखे आइडिया ने उनकी पहचान हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी.
हेमा मालिनी ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में इस राज से पर्दा उठाया. जब वे साल 1968 में पहली हिंदी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही थीं, तब फिल्म के प्रोड्यूसर बी. आनंदस्वामी ने प्रमोशन का एक नया तरीका निकाला. उन्होंने फिल्म के पोस्टर्स में हेमा मालिनी का नाम छापने के बजाय हर जगह बड़े-बड़े अक्षरों में लिखना शुरू कर दिया- ‘ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन’. यह देखकर हेमा खुद हैरान थीं कि पोस्टर्स से उनका असली नाम गायब क्यों है. जब उन्होंने प्रोड्यूसर से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि यही तुम्हारी नई पहचान बनेगी. पहले लोग इस नाम के दीवाने होंगे और बाद में सस्पेंस खोलकर सबको बताया जाएगा कि यह खूबसूरत ‘ड्रीम गर्ल’ आखिर है कौन! प्रोड्यूसर का यह मास्टर प्लान सुपरहिट रहा. फिल्म रिलीज होने से पहले ही हेमा मालिनी हर किसी की ‘ड्रीम गर्ल’ बन चुकी थीं.
हेमा मालिनी की फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ ब्लॉकबस्टर रही थी.
‘ड्रीम गर्ल’ में निभाए थे 4 किरदार
महेश कौल के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में हेमा मालिनी के साथ शोमैन राज कपूर लीड रोल में थे. इसके गाने शंकर-जयकिशन ने कंपोज किए थे. इस फिल्म से शुरुआत करने के बाद हेमा मालिनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. दिलचस्प बात यह रही कि इसके करीब नौ साल बाद 1977 में उन्होंने सचमुच ‘ड्रीम गर्ल’ नाम की एक फिल्म में काम किया. इसे प्रमोद चक्रवर्ती ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में धर्मेंद्र और अशोक कुमार जैसे बड़े स्टार्स थे. हेमा मालिनी ने एक अनाथालय चलाने के लिए सपना, पद्मा, चंपाबाई और राजकुमारी जैसे पांच अलग-अलग रूप बदले थे. इस रोल को दर्शकों ने खूब प्यार दिया. जो नाम एक प्रमोशन स्टंट की तरह शुरू हुआ था, उसने उन्हें हमेशा के लिए बॉलीवुड की इकलौती ‘ड्रीम गर्ल’ बना दिया.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
खैरथल-तिजारा में चिटफंड धोखाधड़ी मामला, ईडी ने मांगे सबूत: सभी पीड़ितों को समन जारी, एफआईआर और बैंक डिटेल्स जमा करानी होगी – Khairthal-Tijara News
खैरथल-तिजारा के गांव मातौर में नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड चिटफंड धोखाधड़ी मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो गई है। भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय, ईडी जयपुर ने मामले की जांच के तहत परिवादी सत्यवीर चौधरी, राजकुमार, धर्मेंद्र चौधरी सहित कई पीड़ित जमाकर्ताओं को समन जारी किए हैं। सभी को महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ताओं से मांगे सबूत
शिकायतकर्ताओं के वकील प्रताप सैन ने बताया- ईडी ने समन में पीड़ितों से पैन कार्ड और आधार कार्ड सहित पहचान एवं पते के प्रमाण, नवअंश ग्रुप एवं उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज शिकायत या एफआईआर की प्रति, स्वयं एवं परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित सभी बैंक खातों का विवरण तथा नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड और सिंदुरिया माइक्रोफाइनेंस फाउंडेशन के निदेशकों एवं एजेंटों के माध्यम से खुलवाए गए एफडी, बचत खाते, ऋण खाते सहित अन्य बैंक खातों की जानकारी मांगी है। करोड़ों के गबन का लगा आरोप
दरअसल, मामला 29 सितंबर 2025 का है। खैरथल थाने में दर्ज इस मामले में नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के संचालकों पर आम जनता से करोड़ों रुपए जमा कराकर गबन करने और फरार होने का आरोप है। पुलिस जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए थे। इसके बाद पीड़ितों ने खैरथल थाने में मामला दर्ज कराया और लगातार सरकार, प्रशासन तथा जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत की जमा पूंजी फंस गई है, जिससे अनेक परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। 10 लोगों को आरोपी बनाया, एक की हुई मौत
मामले में पुलिस की जांच के दौरान 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें एजेंट दिनेश कुमार की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। इनमें उमराव, दाताराम, सतपाल और पुरण फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जयपाल, नरेश, जिलेसिंह, वेंकटेश्वर प्रसाद और प्रेम कुमार जमानत पर रिहा हो चुके हैं। पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रताप सैन न्यायालय में पैरवी कर रहे हैं। सक्षम प्राधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, जयपुर एवं रजिस्ट्रार कंपनियां, जयपुर द्वारा सब रजिस्ट्रार सहकारी समिति, खैरथल को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए जाने के बावजूद दावों के निस्तारण की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। कई लोगों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए और सुनवाई भी समय पर नहीं हुई। उनका कहना है कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं। ये भी पढ़ें- मामा-भांजे ने फाइनेंस कंपनी बनाई, करोड़ों रुपए लेकर फरार:गुस्साए पीड़ितों ने घर में तोड़फोड़ की, बाइक फूंकी; बोले-मेहनत कर एक-एक पैसा जोड़ा था साल 2010… खैरथल-तिजारा का मातौर गांव मामा-भांजे ने नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के नाम से फाइनेंस कंपनी बनाई। खुद का ऑफिस खोला और लोगों को रकम पर साल का 24% तक ब्याज देने का झांसा दिया। बॉन्ड, पासबुक और रसीदें भी छपवाईं। पहले कुछ साल ब्याज के साथ रुपए लौटाकर विश्वास जीता। इसके बाद लोग झांसे में आकर मेहनत से कमाई हुई मोटी रकम FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) और RD (रिकरिंग डिपॉजिट) में जमा कराने लगे। 15 साल में निवेश के नाम पर जमा किए गए करोड़ों रुपए लेकर मामा-भांजा फरार हो गए। (पढ़ें पूरी खबर)
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सड़क नहीं होने पर खाट से 2 किमी लाए: रीवा में अस्पताल पहुंचने से पहले महिला की मौत; ग्रामीण बोले- स्वीकृत के बाद भी नहीं बनी रोड – Rewa News
रीवा के मनगवां विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) में सड़क नहीं होने के कारण एक आदिवासी महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। आकाशीय बिजली गिरने के बाद परिजनों ने उन्हें करीब दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना रविवार शाम की है। इसका वीडियो भी सामने आया है। मृतका की पहचान रामकली रावत, पत्नी स्वर्गीय राम स्वयंवर रावत, निवासी ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) के रूप में हुई है। सामने आए वीडियो में ग्रामीण महिला को खाट पर उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाते दिखाई दे रहे हैं। सड़क नहीं होने पर उठे सवाल घटना के बाद गांव की सड़क व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण के लिए विधायक निधि से 5 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अब तक सड़क नहीं बन सकी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने जांच की मांग की ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अब महिला की मौत के बाद ग्रामीण पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, इस मामले में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।
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पूर्णिया में सड़क दुर्घटना, एक व्यक्ति की मौत: श्रीनगर को-ऑपरेटिव बाजार के पास हुआ हादसा – Purnia News
पूर्णिया जिले के केनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत श्रीनगर को-ऑपरेटिव बाजार के पास एक सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान सत्यनारायण यादव (45) के रूप में हुई है। उन्हें इलाज के लिए पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सत्यनारायण यादव कोऑपरेटिव बाजार के निवासी थे। मृतक सत्यनारायण यादव के बेटे ने बताया कि उनके पिता की मौत श्रीनगर चौक पर हुए सड़क हादसे में हुई है। दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें पूर्णिया के जीएमसीएच अस्पताल लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक का इलाज कर रहे डॉक्टर गौरव कुमार ने जानकारी दी कि मरीज को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। प्राथमिक जांच में उन्हें मृत पाया गया। मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।
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साबूदाना भिगोने का सही तरीका, खिले-खिले रहेंगे दाने, खिचड़ी बनेगी बिल्कुल परफेक्ट
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Tricks To Make Non Sticky Sabudana: यदि आप हर बार स्वादिष्ट, दानेदार और बिल्कुल नॉन-स्टिकी साबूदाना खिचड़ी बनाना चाहते हैं लेकिन बार-बार दाने चिपचिपे हो जाते हैं? तो यहां इस लेख में जानें खिला-खिला साबूदाना खिचड़ी बनाने का सबसे आसान तरीका.
साबूदाना खिचड़ी व्रत के दौरान सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश में से एक है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी मदद करती है. हालांकि, कई लोगों की शिकायत होती है कि खिचड़ी बनाते समय साबूदाना चिपक जाता है या फिर बहुत ज्यादा गीला हो जाता है. ऐसे में खिचड़ी का स्वाद और टेक्सचर दोनों खराब हो जाते हैं. अगर आप भी हर बार खिला-खिला और दानेदार साबूदाना खिचड़ी बनाना चाहते हैं, तो कुछ आसान कुकिंग टिप्स आपके बहुत काम आ सकते हैं.
सही साबूदाना चुनना है जरूरी
अच्छी खिचड़ी बनाने के लिए सही साबूदाना चुनना सबसे जरूरी कदम है. बाजार में कई तरह के साबूदाने मिलते हैं, लेकिन मध्यम आकार वाला गोल साबूदाना खिचड़ी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. यह आसानी से पकता है और चिपचिपा भी नहीं होता.
भिगोने का सही तरीका अपनाएं
साबूदाना बनाने से पहले उसे 2-3 बार साफ पानी से धो लें ताकि एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाए. इसके बाद 1 कप साबूदाना में लगभग 3/4 कप पानी डालकर भिगो दें. ध्यान रखें कि ज्यादा पानी डालने से साबूदाना गीला और चिपचिपा हो सकता है. इसे लगभग 2 से ढाई घंटे के लिए ढककर छोड़ दें.
ऐसे पहचानें कि साबूदाना तैयार है
जब साबूदाना अच्छी तरह भीग जाए, तो उसके दाने आपस में चिपके नहीं होने चाहिए. दाने को हाथ से दबाने पर वह आसानी से टूट जाए और उसमें हल्की नमी महसूस हो, लेकिन वह ज्यादा गीला न लगे. यह संकेत है कि साबूदाना खिचड़ी बनाने के लिए तैयार है.
खिचड़ी बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान
सबसे पहले कढ़ाई में थोड़ा घी गर्म करें. फिर जीरा, अदरक और हरी मिर्च डालकर भून लें. इसके बाद उबले हुए आलू और भुनी हुई मूंगफली डालें. अब भीगा हुआ साबूदाना, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं. हमेशा धीमी आंच पर पकाएं और लगातार हल्के हाथों से चलाते रहें.
मूंगफली पाउडर है सीक्रेट ट्रिक
खिला-खिला साबूदाना खिचड़ी बनाने का सबसे आसान तरीका है मूंगफली पाउडर का इस्तेमाल. ये इंग्रीडिएंट नमी को सोख लेता है और साबूदाने के दानों को अलग-अलग रखने में मदद करता है. इसी वजह से खिचड़ी चिपकती नहीं है. अंत में जब खिचड़ी तैयार हो जाए तो ऊपर से नींबू का रस और हरा धनिया डालें. फिर 1-2 मिनट के लिए ढककर रखें ताकि सभी फ्लेवर अच्छी तरह मिल जाएं.इसे दही, व्रत की चटनी या भुनी मूंगफली के साथ परोसकर स्वाद को और बढ़ाया जा सकता है.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें


