पूर्व PM इंद्र कुमार गुजराल के बेटे से फ्रॉड, ₹78000000 ले उड़े जालसाज
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Former PM Son Fraud Case: सरकार और पुलिस-प्रशासन की तरफ से साइबर फ्रॉड को लेकर लगातार जागरुकता अभियान चलाया जाता है. इसके बावजूद ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं. एक बार फिर से साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व सांसद नरेश कुमार गुजराल के साथ साइबर फ्रॉड किया गया है. (फाइल फोटो/PTI)
Former PM Son Fraud Case: पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व सांसद नरेश कुमार गुजराल ऑनलाइन ठगी का शिकार हो गए हैं. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस के अनुसार, ठगों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का इस्तेमाल कर उनके एक कर्मचारी को व्हाट्सएप पर संदेश भेजा और खुद को गुजराल बताकर बातचीत की. ठग ने कर्मचारी से कहा कि वे एक महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल एक बैंक खाते में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए रकम ट्रांसफर करनी है. भरोसा होने के कारण कर्मचारी ने निर्देशों का पालन किया, जिसके बाद करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात देने के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने ग्लैमर इंडस्ट्री में अपनी दूसरी पारी शुरू की. तब उन्होंने कुछ नियम खुद के लिए बनाए. वह केवल ऐसे रोल्स करना चाहती थीं जो उम्मीद और खुशियों से भरी हों, न कि ऐसी जो उन्हें मानसिक रूप से परेशान या तनाव में डाल दें. हालांकि, अपने इस नियन के बावजूद उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई एक डार्क और डिस्टर्बिंग वेब सीरीज में काम किया, जिसकी चर्चा इस समय हर तरफ हो रही है, जिसका नाम है ‘राख’.
नई दिल्ली. 90 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने कैंसर से जंग जीतने के बाद अपने करियर को लेकर एक खास नियम बना लिया था. स्टेज-4 मेटास्टेटिक कैंसर से उबरने के बाद वह सिर्फ ऐसे किरदार निभाना चाहती थीं, जो उम्मीदों से भरे हों. वह दोबारा ऐसे रोल नहीं करना चाहती थीं जो उन्हें इमोशनल रूप से परेशान करें या पुराने मुश्किल दौर की याद दिलाएं. हालांकि, हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘राख’ के लिए उन्होंने ये नियम तोड़ दिया.
कहते हैं कुछ दिनों को भूलना मुश्किल होता है. हालांकि, वक्त के साथ ये यादें थोड़ी धुंधली जरूर हो जाती हैं. साल 2018 में बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे को ‘स्टेज 4 मेटास्टैटिक कैंसर’ का पता चला था. इस खतरनाक बीमारी से एक लंबी और दर्दनाक लड़ाई उन्होंने लड़ी. उन्होंने साल 2022 में वेब सीरीज ‘द ब्रोकन न्यूज’ से एक्टिंग की दुनिया में शानदार वापसी की. कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से उबरने के बाद सोनाली ने तय किया था कि वह केवल हल्के-फुल्के और पॉजिटिव किरदार ही निभाएंगी. वह किसी भी ऐसे काम का हिस्सा नहीं बनना चाहती थीं, जो उनके पुराने जख्मों या मानसिक तनाव को दोबारा ट्रिगर कर दे. फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 से बातचीत में सोनाली बेंद्रे ने अपनी इस जर्नी, मानसिक स्थिति और सिनेमाई दुनिया में वापसी को लेकर खुलकर बात की. सोनाली ने बताया कि कैंसर से ठीक होने के बाद उनके लिए फिल्मों में काम करने का पैमाना बदल गया था. उन्होंने सैफ अली खान के साथ आई उनकी फिल्म ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’ जैसी कॉमेडी फिल्में थीं. उन्होंने याद किया कि उस फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्होंने और सैफ ने कितना मजा किया था और सेट पर कितनी पॉजिटिव एनर्जी थी. फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
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सोनाली का मानना है कि आज के दौर में ऐसी हल्की-फुल्की और दिल को छू लेने वाली कहानियां बहुत कम लिखी जा रही हैं. वह दोबारा किसी ऐसे डिस्टर्बिंग प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर मानसिक रूप से टूटना नहीं चाहती थीं. सोनाली बेंद्रे की हालिया रिलीज वेब सीरीज ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, उनके इस पैमाने से बिल्कुल उलट थी. फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
यह सीरीज 1978 के दिल्ली के बेहद खौफनाक और चर्चित ‘रंगा-बिल्ला’ हत्याकांड पर आधारित एक डार्क क्राइम थ्रिलर है. सीरीज में सोनाली बेंद्रे ने एक पीड़ित और शोकग्रस्त मां (मोना अरोड़ा) का बेहद गंभीर किरदार निभाया है, जिसके दो बच्चों का बेरहमी से अपहरण और मर्डर कर दिया जाता है.
सोनाली ने स्वीकार किया कि ‘राख’ जैसी डार्क स्क्रिप्ट उनकी बकेट लिस्ट में बिल्कुल नहीं थी और वह इसके लिए तैयार भी नहीं थीं. लेकिन जब निर्देशक प्रोसित रॉय और उनकी टीम ने उन्हें इसकी स्क्रिप्ट सुनाई, तो वह ना नहीं कह सकीं. सोनाली ने कहा, ‘इसकी कहानी और मेरा किरदार इतना दमदार था कि मेरे पास मना करने का कोई रास्ता ही नहीं बचा था. यह अनुभव मेरे लिए बेहद अद्भुत रहा.’ फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
सीरीज में अली फजल और आमिर बशीर जैसे कलाकार भी नजर आ रहे हैं. सोनाली ने माना कि भले वह सीरीज में अपने स्क्रीन टाइम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं. वह चाहती थीं कि पर्दे पर और ज्यादा दिखतीं. हालांकि, उन्हें खुशी है कि उन्होंने यह रिस्क लिया. फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
90 के दशक की फिल्मों और आज के दौर की तुलना करते हुए सोनाली बेंद्रे ने कहा, ‘अगर मैं 90 के दशक में इस उम्र में होती तो मुझे वो किरदार कभी नहीं मिलते जो आज मिल रहे हैं. आज ओटीटी के आने से कहानी कहने के तरीके बदल गए हैं. भले ही मेकर्स आज मुझे लेकर थोड़े असमंजस में रहते हैं कि मुझे कहां फिट किया जाए, लेकिन मैं इस नए दौर और नए किरदारों के लिए बेहद आभारी हूं. फोटो साभार-@iamsonalibendre/Instagram
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मोतिहारी में डिजिनिलैंड मेले के टेंडर को लेकर विवाद गहरा गया है। जन सुराज के नेताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों-नेताओं पर कार्रवाई की मांग की है। जन सुराज के मोतिहारी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी डॉ. अतुल कुमार ने इस संबंध में कई सवाल उठाए हैं। डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि नगर भवन मैदान में लगने वाले डिजिनिलैंड मेले का टेंडर पिछले वर्ष लगभग 1 लाख 75 हजार रुपए प्रतिदिन की दर से 31 दिनों के लिए दिया गया था। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि इस वर्ष यह दर अचानक घटकर मात्र 32 हजार रुपए प्रतिदिन कैसे हो गई। निगम को मिलने वाला राजस्व कम डॉ. कुमार ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राजस्व हानि के पीछे किसका हाथ है और किन दबावों में यह निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, मेले के आयोजन में खर्च लगभग समान है, लेकिन नगर निगम को मिलने वाला राजस्व काफी कम हो गया है। उन्होंने मांग की कि बीच का पैसा किसके पास जा रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए। जन सुराज के प्रवक्ता अजय आजाद ने भी नगर निगम प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने उप मेयर डॉ. लालबाबू गुप्ता पर आरोप लगाया कि जिला स्कूल का खेल मैदान, जिसका उपयोग छात्र अभ्यास के लिए करते हैं, उसे मेले के लिए बेहद कम दर पर दिया गया। 3 हजार रुपए प्रतिदिन की दर पर दिया गया टेंडर अजय आजाद ने दावा किया कि मैदान का टेंडर मात्र 3 हजार रुपए प्रतिदिन की दर पर दिया गया है, जो गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने एसडीओ और नगर आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों से टेंडर प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी, तो किसी के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। आजाद ने आरोप लगाया कि यह टेंडर प्रक्रिया पहले से ही निर्धारित की गई थी, जिसका उद्देश्य कुछ विशेष लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाना था। जन सुराज ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों के खेलने के मैदान को इस तरह से व्यावसायिक उपयोग में देना गलत है और इससे छात्रों व खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी हुई है।
उमरिया बिजली कंपनी ने बिजली कनेक्शन देने में गंभीर लापरवाही और कंपनी को राजस्व हानि पहुंचाने के आरोप में कार्रवाई की है। करकेली वितरण केंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता (जेई) देवानंद बुनकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधीक्षण अभियंता योगेश उइके की ओर से जारी आदेश के अनुसार, उमरिया संभाग के वितरण केंद्र करकेली में कार्यरत देवानंद बुनकर (कर्मचारी क्रमांक 14560486) ने अपने कार्यक्षेत्र में विद्युत कनेक्शन प्रदान करने में गंभीर अनियमितताएं बरतीं। इन अनियमितताओं के कारण कंपनी को राजस्व का नुकसान हुआ। कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान देवानंद बुनकर का मुख्यालय कार्यालय कार्यपालन अभियंता (एसटीएम/एसटीसी), मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, संभाग उमरिया निर्धारित किया गया है। विभागीय आदेश के अनुसार, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।
Homemade Soyachaap Recipe: बाजार में मिलने वाला सोया चाप गंदगी और मिलावट से तैयार बना हुआ हो सकता है. ऐसे में इसे घर पर बनाना बेहतरीन विकल्प होता है. इस लेख में आप घर पर सोया चाप बनाने के आसान तरीके के बारे में जान सकते हैं.
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सोया चाप शाकाहारी थाली में चिकन-मटन के स्वाद को जोड़ने का काम करता है. हालांकि इसमें किसी तरह का नॉनवेज नहीं मिला होता है, लेकिन इसका टेक्सचर और स्वाद बिल्कुल बोनलेस चिकन की तरह लगता है. सेहत के नजरिए से भी सोया चाप फायदेमंद माना जाता है. सोयाबिन से तैयार किए जाने के कारण इसमें हाई प्रोटीन और फाइबर होता है. इसके अलावा इसमें फैट की मात्रा भी कम होती है, जो इसे जिम जाने वालों के लिए एक बेहतरीन फूड साबित होता है.
हालांकि, सोया चाप आसानी से मार्केट से खरीदे जा सकते हैं, लेकिन मिलावट और गंदगी से बनाने के ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिसे देखने के बाद खा पाना मुश्किल है. इसलिए आज हम आपको यहां बहुत ही आसान तरीके से घर पर सोयाचाप बनाने का तरीका बता रहे हैं.
घर पर सोयाचाप बनाने का तरीका
सामाग्री सोयाबीन दाल- आधा कप सोया चंक्स- 1 कप मैदा-1 कप बाइंडिंग के लिए नमक आइसक्रीम स्टिक्स- 8-10
विधि
सोयाचाप बनाने के लिए एक रात पहले सोयाबीन दाल को पानी में भिगोकर छोड़ दें. सुबह साफ पानी से इसे धोकर मिक्सर में कम पानी के साथ स्मूथ पीस लें.
फिर सोया चंक्स को उबलते पानी में लगभग 5 मिनट तक पकाएं. इसके बाद इन्हें ठंडा होने दें और अच्छी तरह दबाकर सारा पानी निकाल दें. अब सोया चंक्स को मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें.
एक बड़े बाउल में पिसी हुई सोया दाल, दरदरे सोया चंक्स, मैदा और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. बिना पानी या जरूरत हो तो सिर्फ कुछ बूंद पानी डालकर इसे सख्त आटे की तरह गूंध लें. आटे को 10 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए.
अब आटे की एक बड़ी लोई बनाकर पतली रोटी बेल लें. रोटी को चाकू से लंबी और पतली स्ट्रिप्स में काट लें. एक आइसक्रीम स्टिक लें और एक-एक स्ट्रिप को स्टिक पर घुमाते हुए लपेट दें.
दूसरी तरफ एक गहरे बर्तन में पानी उबालें. जब पानी अच्छे से उबलने लगे, तब तैयार स्टिक्स को उसमें डाल दें. इन्हें 10-12 मिनट तक तेज आंच पर पकाएं. पकने के बाद सोया चाप पानी की सतह पर तैरने लगेगी. इन्हें तुरंत निकालकर बर्फ वाले ठंडे पानी में डाल दें, जिससे चाप मुलायम, स्पंजी और जूसी बनेगी.
ऐसे करें स्टोर ठंडा होने पर चाप को सुखाकर जिपलॉक बैग में भरें और फ्रीजर में रख दें. ऐसे चाप को 2-3 महीने तक स्टोर करके खाया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर निकालें, काटें और अपनी पसंदीदा ग्रेवी में बनाकर स्वादिष्ट सोया चाप का आनंद लें.
शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया।
इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है।
डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।
ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए।
पॉइंट-1: सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा
अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है।
अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है।
पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा।
पॉइंट-2: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे
अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे।
समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा।
दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है।
फ्रांस में ट्रम्प के पीस डील पर साइन करने के बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दस्तखत किए। दस्तावेज पर नीचे की ओर पजशकियान और ट्रम्प, दोनों के हस्ताक्षर नजर आ रहे हैं।
पॉइंट-3: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट
अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं।
हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है।
पॉइंट-4: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा
ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा।
यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी।
पॉइंट-5: होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा
ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है।
युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है।
पॉइंट-6: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना
अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है।
हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं।
पॉइंट-7: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे
अमेरिका ने अंतिम समझौता होने पर ईरान पर लगे सभी तरह के प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना शायद वह सबसे बड़ा कदम है, जिसके बदले अमेरिका ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं स्वीकार करने के लिए राजी कर सकता है।
यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी।
हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं।
अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि दोनों देश इस बात पर सहमत कैसे होते हैं कि कौन-कौन से प्रतिबंध हटाए जाएंगे और उन्हें किस समय हटाया जाएगा। साथ ही यह भी तय करना होगा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के कौन-कौन से कदम कब उठाएगा।
पॉइंट-8: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा
समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा।
दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी।
फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है।
हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा कर चुका था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके।
इन 11 टन सामग्री में करीब 970 पाउंड ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है।
लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है।
हालांकि 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं।
जैसे कि
क्या ईरान अपने पास संवर्धित यूरेनियम का भंडार रख पाएगा?
क्या उसे अपनी प्रमुख परमाणु सुविधाएं बंद करनी होंगी?
क्या उसे नया यूरेनियम संवर्धित करने की अनुमति मिलेगी?
या उसे 13 से 20 साल तक संवर्धन गतिविधियां रोकनी पड़ेंगी?
पॉइंट-9: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे
समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे।
इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। वह नए बड़े कदम नहीं उठाएगा और न ही अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करेगा।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह प्रावधान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे बातचीत के लिए एक स्पष्ट शुरुआती स्थिति तय हो जाती है। इसका मकसद यह है कि अंतिम समझौता होने तक अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर अतिरिक्त दबाव डालकर नई रियायतें हासिल करने की कोशिश न करें।
यानी बातचीत के दौरान न तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगा और न ही अमेरिका नए प्रतिबंध लगाएगा या क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य ताकत भेजेगा।
पॉइंट-10: ईरानी सामानों के निर्यात पर छूट
समझौते के मुताबिक, MoU पर दस्तखत होते ही अमेरिका ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े अन्य सामान के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा।
इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके।
यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं।
यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था।
पॉइंट-11: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां जारी होंगी
समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के उन धन और संपत्तियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा, जो अभी तक विभिन्न प्रतिबंधों के कारण फ्रीज्ड हैं या जिन पर रोक लगी हुई है।
हालांकि यह पैसा कब और किस प्रक्रिया के तहत जारी होगा, इसका तरीका अमेरिका और ईरान आपसी बातचीत के जरिए तय करेंगे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है।
पॉइंट-12: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे
अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं।
यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि:
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वादों का पालन कर रहा है या नहीं।
अमेरिका प्रतिबंधों में राहत और अन्य आर्थिक व राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है या नहीं।
दोनों पक्ष समझौते की समयसीमा और शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके।
यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिका चाहता है कि यह साबित भी किया जा सके कि ईरान वास्तव में अपने परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम के भंडार और अन्य प्रतिबद्धताओं से जुड़े समझौते का पालन कर रहा है।
पॉइंट 13: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी
सबसे पहले दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आने वाले दौर की बातचीत का सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, निरीक्षण व्यवस्था कैसी होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं।
पॉइंट 14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी
जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी।
यदि सुरक्षा परिषद इस समझौते को मंजूरी देती है, तो इसके प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की ताकत मिल जाएगी और दुनिया के अन्य देशों को भी उसका सम्मान करना होगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं।
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अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें
Uddhav Thackery Shiv Sena Crisis LIVE: उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक और टूट के कगार पर पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि 9 में से 6-7 सांसद पार्टी से अलग हो सकते हैं. इन सभी के एकनाथ शिंदे के खेमे में जाने की संभावन…और पढ़ें
उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक और टूट के कगार पर है, वहीं पार्टी के टॉप लीडर ने बड़ा दावा किया है. (फाइल फोटो/Reuters)
Uddhav Thackery Shiv Sena Crisis LIVE: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट और सांसदों के दल-बदल की अटकलों के बीच पार्टी के लोकसभा सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह से पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ ही बने रहेंगे. वाजे ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है. मैंने पार्टी की बैठक में भी अपना रुख साफ कर दिया है कि मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं और हमेशा रहूंगा.’ वहीं, पार्टी के एक और सांसद अरविंद सावंत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को खारिज करते हुए दावा किया कि 14 जून को उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में पार्टी के सभी सांसद शामिल हुए थे.
राजाभाऊ वाजे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसदों में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और वे सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं. इस बीच, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि भाजपा का शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों या विधायकों के संभावित दल-बदल से कोई संबंध नहीं है. बावनकुले ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे को यह समझना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक उनसे क्यों दूर जा रहे हैं. यदि वे एकनाथ शिंदे के साथ जा रहे हैं तो यह उनका आंतरिक मामला है. भाजपा या उसके किसी नेता का इससे कोई लेना-देना नहीं है.’ उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय राउत के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें दावा किया गया था कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है. बावनकुले ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और यह सांसदों एवं विधायकों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है.
अरविंद सावंत का बड़ा दावा
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के एक और सीनियर सांसद अरविंद सावंत ने भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं को मीडिया द्वारा पैदा किया गया माहौल बताया. उन्होंने कहा कि 14 जून को उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे, जिनमें कुछ सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे. सावंत ने दो टूक कहा कि पार्टी बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर चल रही है और जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, उसे पहले इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए. उधर, संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की. राउत ने किसी भी संभावित बगावत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी अभी तक किसी आधिकारिक टूट की पुष्टि नहीं करती है. गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े राजनीतिक विद्रोह ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था. अब ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, हालांकि उद्धव ठाकरे गुट के नेता लगातार एकजुटता का दावा कर रहे हैं.
Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: उद्धव को अब सताने लगा विधायकों के टूटने का डर
उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अब पार्टी नेतृत्व की नजरें महाराष्ट्र विधानसभा में अपने विधायकों पर टिक गई हैं. सूत्रों के अनुसार, सांसदों से जुड़े घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे को अपने 20 विधायकों की एकजुटता बनाए रखने की चिंता सताने लगी है. इसी को देखते हुए ठाकरे खुद विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साध रहे हैं और उन्हें फोन कर पार्टी के साथ बने रहने का संदेश दे रहे हैं. उद्धव गुट के पास फिलहाल आदित्य ठाकरे समेत कुल 20 विधायक हैं. राजनीतिक हलकों में जारी अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व संगठन और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशों में जुट गया है. हालांकि, अब तक किसी विधायक के पार्टी छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: 14 जून को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए – अरविंद सावंत
उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने पार्टी में संभावित टूट और कथित ऑपरेशन टाइगर की अटकलों को खारिज करते हुए इसे मीडिया द्वारा पैदा किया गया प्रचार बताया है. सावंत ने कहा कि यह सवाल ही गलत है कि टाइगर कौन है? देश के महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर अनावश्यक राजनीतिक चर्चाओं को तूल दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 14 जून को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे. सावंत के अनुसार, चार सांसद बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि अन्य सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे. उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह से बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध है. सावंत ने ईवीएम से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े गंभीर सवालों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए.
Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: शिवसेना-यूबीटी की आज अहम बैठक
उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाई है. सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट अगले दो दिनों में स्थिति की समीक्षा कर यह तय करेगा कि शिवसेना (यूबीटी) की ओर से उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर उसका क्या रुख रहेगा. बताया जा रहा है कि शिंदे गुट कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर रहा है और विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व जल्द ही अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकता है.
Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: शिवसेना-यूबीटी में टूट की खबरें गलत – संजय राउत
उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पार्टी के छह सांसदों के टूटकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने कहा कि कुछ सांसद प्रयास कर सकते हैं, लेकिन उनकी संख्या छह नहीं है, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है. राउत ने स्पष्ट किया कि लोकसभा सचिवालय की ओर से भी शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के दूसरी शिवसेना में शामिल होने संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि आज पार्टी की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद आगे की रणनीति और निर्णय पर विचार किया जाएगा. राउत ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.
Cocktail 2 Advance Booking: शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर ‘कॉकटेल 2’ रिलीज से पहले बॉक्स ऑफिस पर अच्छी पकड़ बनाती नजर आ रही है. 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म की एडवांस बुकिंग में बड़ा उछाल देखने को मिला है. फिल्म रिलीज से पहले ही करोड़ों कमा चुकी है. किसी बड़ी बॉलीवुड फिल्म से टक्कर न होने का फायदा भी ‘कॉकटेल 2’ को और भी फायदा मिल सकता है.
नई दिल्ली. शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर ‘कॉकटेल 2’ की रिलीज को अब 24 घंटे से भी कम का समय बचा है. फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है . मेकर्स और स्टार कास्ट लगातार फिल्म का प्रमोशन भी कर रहे हैं. इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी रिलीज से पहले ही जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है. शुरुआती दिनों में टिकट बिक्री की रफ्तार भले ही धीमी रही हो, लेकिन रिलीज डेट नजदीक आते-आते फिल्म ने जोरदार पकड़ बना ली है. एडवांस बुकिंग में बंपर उछाल देख मेकर्स भी काफी खुश हैं.
ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कॉकटेल 2’ ने ओपनिंग डे के लिए 57,000 से ज्यादा टिकटों की बिक्री कर ली है. बिना ब्लॉक सीट्स के फिल्म की एडवांस बुकिंग से करीब 1.97 करोड़ रुपये की कमाई हुई है. वहीं, ब्लॉक सीट्स को शामिल करने पर यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 3.67 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.
रिलीज से पहले अभी एक दिन का समय बाकी है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि फिल्म की एडवांस बुकिंग में और इजाफा देखने को मिल सकता है. फिल्म की एडवांस बुकिंग रविवार को शुरू हुई थी. शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया कुछ खास नहीं रही. मेकर्स भी ये देख हैरान थे लेकिन जैसे-जैसे रिलीज का दिन करीब आने लगे, टिकट बिक्री में तेजी देखने को मिली.
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हालांकि, यह साल की सबसे बड़ी प्री-सेल फिल्मों में शामिल नहीं है, लेकिन मौजूदा आंकड़े इसे एक मजबूत शुरुआत की ओर इशारा करते हैं. अब इंडस्ट्री की नजर इस बात पर रहेगी कि एडवांस बुकिंग का यह एक्साइटमेंट पहले दिन की कमाई में कितना बदल पाता है.
फिल्म के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि 19 जून को बॉक्स ऑफिस पर इसके सामने कोई भी बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं हो रही है. पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्में ‘मैं वापस आऊंगा’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ बॉक्स ऑफिस पर शांत पड़ चुकी हैं. इससे ‘कॉक्टेल 2’ को दर्शकों को आकर्षित करने का पूरा मौका मिलेगा.
वहीं, दूसरे हफ्ते में चल रही हॉरर फिल्म ‘हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई है, जिसका सीधा फायदा शाहिद कपूर की फिल्म को मिलेगा.
फिल्म की चर्चा को बनाए रखने के लिए मेकर्स ने हाल ही में इसका नया गाना ‘बंधु 2.0’ रिलीज किया है. यह गाना साल 2012 में आई मूल फिल्म ‘कॉकटेल’ के सुपरहिट ट्रैक ‘तुम्ही हो बंधु’ का रीक्रिएटेड वर्जन है. प्रीतम के संगीत, कविता सेठ और नीरज श्रीधर की आवाज और इरशाद कामिल के लिखे इस गाने को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है. कुछ लोग पुरानी यादों के ताजा होने से बेहद खुश हैं तो कुछ इसकी तुलना ओरिजिनल गाने से कर रहे हैं.
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देवरिया के मईल थाना क्षेत्र में खेत बंटवारे को लेकर हुए हमले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में अन्य नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है। मईल गांव निवासी कृष्ण बुझारत चौधरी और राकेश चौधरी के बीच कृषि भूमि के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। 14 जून को थाना परिसर में समाधान दिवस के दौरान पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था। समझौते के बाद पीड़ित पक्ष अपनी भूमि की जुताई करने पहुंचा था। आरोप है कि जुताई के बाद चेतन चौधरी अपने पिता कृष्ण बुझारत चौधरी और माता के साथ मईल चौराहे के पास एक दुकान पर बैठे थे। तभी राकेश चौधरी, विजय बहादुर चौधरी, सुनील सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक पांडेय सहित अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने धारदार हथियार, ईंट और डंडों से कृष्ण बुझारत चौधरी को घायल कर दिया। बीच-बचाव करने आए चेतन चौधरी और उनकी माता को भी चोटें आईं। घायलों को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मईल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी राकेश चौधरी पुत्र बागेश्वरी चौधरी, निवासी मईल को गिरफ्तार किया। चिकित्सीय परीक्षण के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस ने शेष आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है। पीड़ित पक्ष ने सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी नौकरी पाने के लिए रिकॉर्ड में रिश्ते बदल दिए गए। नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति दिनांक के नाम पर ऐसा ही फर्जीवाड़ा हुआ है। देवानंद बरैया को मृत कर्मचारी नारायण सिंह बरैया का बेटा बताकर नौकरी दी गई, वह वास्तव में उनका पोता है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी कर रिश्तों को बदला गया और नियमों को दरकिनार कर सरकारी नौकरी दिला दी गई। 5 नवंबर 2007 को मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने देवानंद सहित तत्कालीन निगमायुक्त, अपर आयुक्त और कार्यालय अधीक्षक पर एफआईआर के निर्देश दिए हैं। आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति: जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। ऑडिट विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मृत कर्मचारी नारायण सिंह को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया था। उनके निधन के बाद आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। यानी जिस सेवा रिकॉर्ड के आधार पर बाद में अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया गया, उस रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े हो चुके थे। भास्कर के पास सबूत… जानें पोते देवानंद ने किन-किन दस्तावेज में दादा से रिश्ता बदला शादी कार्ड: सुप्रौत्र नारायण सिंह थे, सुपुत्र लालता प्रसाद
आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2000 का विवाह कार्ड में देवानंद बरैया को लालता प्रसाद का सुपुत्र और नारायण सिंह का सुप्रौत्र बताया था। रजिस्टर्ड वसीयत में भी पोता बताया गया है। यहीं से सवाल खड़ा हुआ कि देवानंद पोता था तो फिर वह अनुकंपा नियुक्ति का पात्र कैसे बन गया? 1996 की दो मार्कशीट: एक में पिता नारायण, दूसरी में लालता
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त पांचवीं की अंकसूची में देवानंद के पिता लालता प्रसाद दर्ज है। लेकिन नौकरी के लिए प्रस्तुत मार्कशीट में पिता का नाम बदलकर नारायण सिंह कर दिया। दोनों में जन्मतिथि में भी बदलाव पाया गया। जांच में दोनों मार्कशीट में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। रजिस्टर्ड वसीयत: देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया
जांच में मिली रजिस्टर्ड वसीयत में भी देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया गया है। इससे यह दावा और मजबूत हो गया कि वह नारायण सिंह का बेटा नहीं, बल्कि पोता था। रजिस्ट्री में पिता लालता प्रसाद और मां काशी बाई
28 दिसंबर 2012 को हुए एक विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) में देवानंद उर्फ देव आनंद ने अपनी मां काशी बाई के साथ संपत्ति बेची थी। इस दस्तावेज में देवानंद के पिता का नाम स्व. लालता प्रसाद बरैया दर्ज है। वहीं काशी बाई को भी स्व. लालता प्रसाद की पत्नी बताया गया। वोटर लिस्ट में भी पिता का नाम नारायण सिंह दर्ज
2024 की मतदाता सूची में बड़ा विरोधाभास सामने आया। इसमें काशी बाई के पति का नाम लालता प्रसाद दर्ज है, जबकि उसी परिवार में देवानंद के पिता का नाम नारायण सिंह लिखा गया है। एक ही परिवार के सरकारी रिकॉर्ड में अंतर है। ऐसे समझें पूरा मामला कमलसिंह का बाग निवासी देवानंद बरैया के दादा 17 फरवरी 1999 में निगम कर्मचारी नारायण सिंह ने 60 वर्ष की आयु पूरी की। नारायण सिंह को नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया। नारायण का निधन 31 मार्च 2001 को हुआ। 2007 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर देवानंद को अनुकंपा नियुक्ति मिली। अटक गई जांच नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने वालों पर FIR कराने नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय भोपाल तक शिकायत पहुंची। भोपाल से 6 मार्च 2026 को जारी आदेश में 10 दिन में जांच कर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन अमल नहीं हुआ। देवानंद बरैया सहित तत्कालीन निगमायुक्त पवन शर्मा, तत्कालीन अपर आयुक्त राजेश बाथम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ये बोले जिम्मेदार देवानंद की अंकसूची की जांच के लिए डीईओ को लिखा पत्र
देवानंद की अनुकंपा नियुक्ति मामले की शिकायत पहले भी हुई थी, जिसकी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अब नई शिकायत मिलने पर फिर से जांच शुरू की गई है। देवानंद की अंकसूची का सत्यापन कराने के लिए डीईओ को पत्र भेजा है। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि ग्वालियर