उदयपुर के झाड़ोल क्षेत्र में देर रात एक सड़क हादसा हो गया। फलासिया थाना इलाके के नेशनल हाईवे 58-ई पर घोड़ीमारी के पास एक तेज रफ्तार बाइक बेकाबू होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बाइक पर सवार दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घायल युवक पूरी रात खून से लथपथ हालत में सड़क किनारे पड़े तड़पते रहे, लेकिन सुनसान इलाका होने के कारण उन्हें रात में कोई मदद नहीं मिल सकी। यह हादसा उस समय हुआ जब तीनों युवक एक जीप चालक को उसके घर छोड़ने के लिए बाइक पर सवार होकर जा रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक घोड़ीमारी के पास पहुंची, अचानक संतुलन बिगड़ गया और बाइक सीधे हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, बाकी के दो युवक गंभीर चोटों के कारण हिल भी नहीं पाए और रातभर मदद का इंतजार करते रहे। सुबह जब उजाला हुआ और वहां से गुजर रहे स्थानीय लोगों की नजर घायलों पर पड़ी, तो इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत इस बात की सूचना फलासिया थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही फलासिया थाने से पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत पास के अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन इनमें से एक युवक की हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए उदयपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर झाड़ोल उपजिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया है, जहां परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी। फलासिया थाना के एएसआई चंदूलाल ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब हादसे के असली कारणों का पता लगाने में जुटी है कि बाइक की टक्कर किसी अज्ञात वाहन से हुई थी या फिर संतुलन बिगड़ने की वजह से यह हादसा हुआ।
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उदयपुर-झाड़ोल नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: बाइक सवार युवक की मौके पर मौत, दो घायल; पूरी रात सड़क किनारे तड़पते रहे – Udaipur News
एक महिला, 12 महिलाओं को रोजगार! गोंडा की राधा देवी ने पेश की मिसाल
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उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की राधा देवी प्रजापति ने सीमित शिक्षा और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने जड़ी-बूटियों और हर्बल उत्पादों का व्यवसाय शुरू किया, जो आज एक सफल उद्यम का रूप ले चुका है. उनकी मेहनत और लगन न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार और प्रेरणा दे रही है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक महिला ने अपनी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर जिंदगी की पूरी तस्वीर बदल दी है. कभी केवल घरेलू कामकाज और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली राधा देवी प्रजापति आज एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बेहतरीन हर्बल उत्पाद तैयार कर रही हैं. इस बिजनेस से वह सालाना लाखों रुपये की शानदार आय अर्जित कर रही हैं. उनकी इस अनोखी सफलता की कहानी आज पूरे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.

राधा देवी प्रजापति बताती हैं कि उन्होंने सिर्फ कक्षा 5वीं तक ही पढ़ाई की थी, जिसके बाद काफी कम उम्र में उनकी शादी हो गई और वह एक साधारण हाउसवाइफ बन गईं. उनके ससुराल में पहले से पारंपरिक रूप से जड़ी-बूटियों का थोड़ा-बहुत काम होता था. उसी काम को देखकर और समझकर उन्होंने जड़ी-बूटी के क्षेत्र में एक नई शुरुआत करने की ठानी, जो आज एक बड़े और सफल बिजनेस का रूप ले चुका है. राधा देवी ने बताया कि उनके इस ग्रुप का नाम ‘कलम स्वयं सहायता समूह’ है.

राधा देवी बताती हैं कि कुछ साल पहले तक उनके पास आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं था. घर की जिम्मेदारियों के बीच वह हमेशा से परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें कोई सही मौका नहीं मिल पा रहा था. इसी दौरान उन्हें स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला और वह उससे जुड़ गईं. समूह का हिस्सा बनने के बाद उन्हें सरकार की तरफ से कई तरह के जरूरी प्रशिक्षण दिए गए, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया.
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राधा देवी ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें औषधीय पौधों की सही पहचान, उनकी वैज्ञानिक खेती, प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग की बारीकियां सिखाई गईं. इसके बाद उन्होंने अपने घर से ही जड़ी-बूटियों और हर्बल उत्पादों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया. शुरुआत में यह काम बेहद छोटे स्तर पर था, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को उनकी शुद्धता पर भरोसा होता गया, बाजार में उनके प्रोडक्ट की मांग भी तेजी से बढ़ती चली गई.

आज राधा देवी अपने समूह के साथ मिलकर तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी, मकोय का अर्क, गुलाब का अर्क और शुद्ध च्यवनप्राश समेत कई औषधीय पौधों से जुड़े बेहतरीन उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन जड़ी-बूटियों को खेतों से लाने के बाद पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर धूप में सुखाकर और कूट-पीसकर अलग-अलग उत्पाद बनाए जाते हैं. इसके बाद इनकी बढ़िया से पैकेजिंग कर इन्हें बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है. राधा देवी का कहना है कि आज के समय में लोग सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं, इसलिए उनके आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री बहुत अच्छी होती है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत हो गई है.

राधा देवी गर्व से बताती हैं कि आज उनके इस सेंटर पर लगभग 10 से 12 स्थानीय महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं, और सीजन के समय जब काम बढ़ता है, तो यह संख्या और ज्यादा हो जाती है. उन्होंने बताया कि आज जड़ी-बूटी के इसी बिजनेस से उनका पूरा परिवार बेहद सम्मान के साथ चल रहा है. कमाई का मुख्य जरिया यही काम है, जिससे अब उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं और घर के सारे खर्चे आसानी से पूरे हो जाते हैं. उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में खुद को आत्मनिर्भर बना सकती हैं.
UP में बिजली मांग का रिकॉर्ड टूटा: 21 जून की रात 32,348 मेगावाट बिजली सप्लाई की, महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ा – Uttar Pradesh News
उत्तर प्रदेश में बिजली मांग और सप्लाई का पिछला सभी रिकॉर्ड टूट गया। रविवार यानी 21 जून की रात 10:47 बजे बिजली की मांग 32,348 मेगावाट पहुंची, जो अब तक की सर्वाधिक है। उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ दिया है। अब देश में सबसे अधिक बिजली की मां
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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी बिजली की इस अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए बिजली कर्मियों को बधाई दी है। महाराष्ट्र में 13 मई को अधिकतम बिजली की मांग 32,317 मेगावाट पहुंची थी। अब यूपी ने इसे भी पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में 21 जून को कुल 67.7 करोड़ यूनिट बिजली की खपत दर्ज हुई। यह भी देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है।
2 फिल्मों में थी एक जैसी कहानी, एक जैसा गाना, दोनों ने की बंपर कमाई, मेकर्स हुए मालामाल
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जिस गाने को टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया हो, अगर वही गाना आइकॉनिक बन जाए तो इसे चमत्कार ही कहा जाएगा. गाने की खूबी यही थी कि दर्शकों का ध्यान बैकग्राउंड पर गया ही नहीं. डायरेक्टर ने आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए जैसे-तैसे फिल्म बनाई. फिल्म के हीरो-हीरोइन ने फ्री में काम किया. बहुत मुश्किल से फिल्म रिलीज हुई लेकिन दर्शकों का रिस्पांस ही नहीं मिला. सबको लग रहा था कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया गाना आइकॉनिक सॉन्ग बन गया.
जिस स्क्रिप्ट को देवानंद, प्रकाश मेहरा और जीतेंद्र जैसे स्टार अभिनेता ठुकरा चुके हों, जिस गाने को देवानंद की फिल्म से निकाल दिया गया हो, वही फिल्म-गाना इतिहास रच दें तो इसे क्या जाएगा. 48 साल पहले आई एक फिल्म के साथ ऐसा ही हुआ था. रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर प्रोड्यूसर ने रिस्क लिया. फिल्म जब बन रही थी, तब एक हादसे में प्रोड्यूसर का निधन हो गया. डायरेक्टर ने कर्ज लेकर फिल्म को पूरा किया. जब फिल्म रिलीज हुई तो तीन दिन तक थिएटर खाली रहे. फिर कुछ ऐसा हुआ कि यही फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया आइकॉनिक सॉन्ग बन गया. यह मूवी ‘डॉन’ थी जिसके लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

‘डॉन’ को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है’ डायलॉग सुनते ही अमिताभ बच्चन का चेहरा आंखों के सामने तैरने लगता है. कुछ फिल्में ही ऐसी होती है जो अपने डायलॉग और गीत-संगीत की वजह से अमर हो जाती हैं. ‘डॉन’ मूवी इसी कैटेगरी की फिल्म है जो कि 12 मई 1978 को रिलीज हुई थी. डॉन फिल्म को चंद्रा बरोट ने डायरेक्ट किया था. प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन-जीनत अमान लीड रोल में थे. इसके अलावा, हेलेन, प्राण, ओम शिवपुरी, इफ्तिखार, कमल कपूर अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी ने कंपोज किया था. स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. गीतकार अनजान और इंदीवर थे. गीतकार इंदीवर ने फिल्म का सिर्फ एक आइकॉनिक गाना ‘ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना’ लिखा था. बाकी गाने अनजान ने लिखे थे.

फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी कैमरामैन थे. वो प्रोड्यूसर बने और ‘जिंदगी जिंदगी’ (1972) नाम से एक फिल्म बनाई थी. फिल्म फ्लॉप रही और नरीमन पर 12 लाख का कर्जा हो गया. उन्हीं दिनों वो मनोज कुमार की फिल्म, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में काम कर रहे थे. अमिताभ बच्चन-जीनत अमान-प्राण ने उन्हें एक और फिल्म बनाने का सुझाव दिया. साथ ही फ्री में काम करने का वादा किया.
नरीमन स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी सलीम-जावेद के पास पहुंचे. ‘डॉन’ फिल्म की रेडीमेड स्क्रिप्ट ले आए. इस स्क्रिप्ट को देवानंद, जीतेंद्र और प्रकाश मेहरा ठुकरा चुके थे. स्क्रिप्ट का कोई नाम भी नहीं था. सलीम खान ने उनसे कहा था, ‘हमारे पास एक ब्रेकफास्ट स्क्रिप्ट पड़ी है जो कोई नहीं ले रहा है.’ नरीमन ने कहा चलेगा. इस तरह से ‘डॉन’ फिल्म के बनने का सिलसिला शुरू हुआ.
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चंद्रा बरोट के निर्देशन में फिल्म बन ही रही थी कि नरीमन हादसे का शिकार हो गए. उनका निधन हो गया. चंद्रा बरोट ने अपनी बहन से 40 हजार का कर्जा लेकर जैसे-तैसे फिल्म पूरी की. फिल्म बिना प्रमोशन के रिलीज की गई. पूरे एक हफ्ते तक थिएटर में दर्शक इस फिल्म को देखने नहीं आए. फिर कुछ ऐसा हुआ कि इस मूवी ने इतिहास ही रच दिया. डॉन फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले. किशोर कुमार को ‘खइके पान बनारस वाला’ के लिए जबकि आशा भोसले को ‘ये मेरा दिल प्यार का दीवाना’ गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. अमिताभ बच्चन ने यह अवॉर्ड प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी को फैमिली को दे दिया था.

‘डॉन’ फिल्म का म्यूजिक सुपर-डुपर हिट था. फिल्म का सबसे आइकॉनिक गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ अमिताभ बच्चन की पहचान बन गया. डायरेक्टर चंद्रा बरोट आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. ऐसे में उन्होंने इस गाने को मुंबई के एक तबेले में शूट किया. अनजान ने गाना लिखा था. वैसे यह गाना देवानंद की फिल्म ‘बनारसी बाबू’ (1973) के लिए लिखा गया था. गाने में तबेला-भैंस-गोबर सब नजर आता है. यह अलग बात है कि दर्शकों इस गाने के पीछे को असलियत को नहीं समझ पाए. पूरा गाना 3-4 दिन में शूट हुआ था. करीब 40-0 शॉट्स लिए गए थे. हर शॉट के 3-4 रीटेक थे. अमिताभ बच्चन पान नहीं खाते. गाने के लिए उन्हें कई पान चबाने पड़े. कत्थे और चूने के चलते उनकी जीभ जल गई थी. पूरे एक माह अमिताभ बच्चन को ठीक होने में लगे थे.

‘खइके पान बनारस वाला’ गाना 2006 में आई शाहरुख खान की ‘डॉन’ फिल्म में भी रखा गया था. इस गाने को उदित नारायण ने गाया था. मशहूर गीतकार-स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने इस फिल्म का ‘डॉन’ का रीमेक बनाया था. फरहान ने 2001 में ‘दिल चाहता है’ से बतौर डायरेक्टर अपने करियर की शुरुआत की थी. प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी-फरहान अख्तर थे. 2006 में आई डॉन में शाहरुख खान के अलावा, प्रियंका चोपड़ा, अर्जुन रामपाल, ईशा कोप्पिकर, बोमन ईरानी, पवन मल्होत्रा, राजेश खट्टर, करीना कपूर और ओम पुरी नजर आए थे. म्यूजिक शंकर-अहसान-लॉय का था. फिल्म का एक गाना ‘आज की रात’ बहुत फेमस हुआ था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.

डॉन फिल्म की की शूटिंग 1974 में शुरू हुई थी. 1978 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. मजेदार बात यह है कि डॉन फिल्म की कहानी 1962 में आई फिल्म ‘चाइना टाउन’ से इंस्पायर्ड थी. डॉन फिल्म ने 7.2 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहित मूवी साबित हुई थी.
गोपालगंज में दो छात्रों की बाइक गड्ढे में पलटी, मौत: बारात से लौटते समय हुआ हादसा, सुबह खाई में मिले शव – Gopalganj News
गोपालगंज के उचकागांव थाना क्षेत्र के संत मोड़ के पास मंगलवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। शादी समारोह से लौट रहे दो छात्रों की बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में पलट गई। हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान उचकागांव थाना क्षेत्र के हरपुर बाजार गांव निवासी गौरी शंकर मांझी के 17 वर्षीय बेटे और राजकपूर मांझी के 22 वर्षीय बेटे जिम्मी कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बारात से लौटते समय हुआ हादसा, तेज रफ्तार बनी वजह जानकारी के अनुसार, दोनों युवक एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। रात में शादी समारोह खत्म होने के बाद दोनों एक ही बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान संत मोड़ के पास बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। बताया जा रहा है कि बाइक की रफ्तार काफी तेज थी, जिस कारण चालक अपना संतुलन नहीं संभाल सका। देखते ही देखते बाइक सड़क किनारे स्थित गहरे गड्ढे में जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दोनों युवकों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। रातभर खाई में पड़े रहे शव, सुबह ग्रामीणों को मिली जानकारी घटना देर रात की होने के कारण आसपास के लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। सुनसान रास्ता होने के कारण दोनों युवक काफी देर तक खाई में पड़े रहे। सुबह जब स्थानीय ग्रामीणों की नजर सड़क किनारे गड्ढे में पड़ी क्षतिग्रस्त बाइक पर गई तो उन्होंने पास जाकर देखा। वहां दोनों युवकों के शव पड़े हुए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही उचकागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को बाहर निकलवाया। पुलिस ने शवों की पहचान कर परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों थे पढ़ाई करने वाले छात्र, परिवार में छाया मातम परिजनों के अनुसार, दोनों युवक पढ़ाई कर रहे थे। जिम्मी कुमार बीए पार्ट-1 का छात्र था, जबकि दूसरा युवक 10वीं कक्षा में पढ़ता था। दोनों दो भाइयों में सबसे छोटे बताए जा रहे हैं। कम उम्र में दोनों बेटों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलने के बाद गांव में बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। पुलिस ने शव भेजा पोस्टमॉर्टम के लिए, जांच जारी उचकागांव थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को भी अपने कब्जे में लिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसे की वजह तेज रफ्तार और बाइक का अनियंत्रित होना सामने आ रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना की पूरी जानकारी जुटा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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गोहत्या के विरोध में हिंदू संगठनों का चक्काजाम: खंडवा-मूंदी रोड़ पर सिहाड़ा में प्रदर्शन, आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग – Khandwa News
बकरीद के दौरान गोहत्या प्रकरण को लेकर सोमवार को हिंदू संगठनों ने खंडवा-मूंदी रोड स्थित सिहाड़ा गांव में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उनके मकानों को बुलडोजर से तोड़ने की मांग उठाई। करीब दो घंटे तक चले आंदोलन के कारण मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सिहाड़ा गांव में एकत्रित हुए और सड़क पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गोहत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाएं समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, इसलिए प्रशासन को सख्त संदेश देने की आवश्यकता है। दो घंटे तक बाधित रहा यातायात
चक्काजाम के चलते खंडवा से मूंदी, पुनासा और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सड़क के दोनों ओर यातायात प्रभावित होने से यात्रियों, विद्यार्थियों और अन्य राहगीरों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। भारी पुलिस बल रहा तैनात
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मोघट रोड थाना पुलिस के अलावा जिले के अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर मौके पर तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने मांग रखी कि गोहत्या प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के मकानों को ध्वस्त किया जाए तथा उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समझाइश के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
करीब दो घंटे तक चले चक्काजाम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। दोपहर करीब 2 बजे यातायात को पुनः सुचारू कराया गया, जिसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।
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ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा: कहा- पार्टी को नहीं लगता मैं अगला चुनाव जिता सकता हूं; एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं
लंदन2 मिनट पहले
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कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं।
स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था। हाल के महीनों में कई सांसदों और मंत्रियों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। स्थानीय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एंडी बर्नहैम उनके उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी की है और उन्हें लेबर सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन है।

अपने संबोधन के अंत में स्टार्मर ने पत्नी विक को गले लगाया। इसके बाद दोनों साथ में 10 डाउनिंग स्ट्रीट के भीतर लौट गए।
17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा
स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे।
स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी।
इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी।
ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है।
अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती।
लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे
ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं।
कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी।
मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं।
हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है।
लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है।

एंडी बर्नहैम अगला पीएम बनने के सबसे बड़े दावेदार हैं।
बर्नहैम सबसे आगे, लेकिन 3 बड़े नेता भी दौड़ में
बर्नहैम लेबर पार्टी के अलग-अलग गुटों में स्वीकार्य माने जाते हैं। वे अलग-अलग विचारधाराओं के बीच आसानी से खुद को फिट कर लेते हैं। समर्थक इसे उनकी ताकत मानते हैं, जबकि उनके आलोचकों का कहना है कि बर्नहम अक्सर अपने राजनीतिक रुख बदलते रहे हैं, जिससे यह साफ नहीं हो पाता कि वे किन विचारों पर मजबूती से कायम हैं।
बर्नहम इससे पहले भी दो बार लेबर नेतृत्व चुनाव हार चुके हैं। 2010 में वह एड मिलिबैंड से हार गए थे और 2015 में जेरेमी कॉर्बिन से। हालांकि इस माना जा रहा है कि वे आसानी से लेबर नेतृत्व का चुनाव जीत लेंगे।
एंजेला रेनर, यवेट कूपर और वेस स्ट्रीटिंग जैसे नाम भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं। एंजेला रेनर फिलहाल लेबर पार्टी की उपनेता हैं और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
यवेट कूपर को अनुभवी नेता माना जाता है और उन्होंने कई अहम सरकारी पद संभाले हैं। वहीं वेस स्ट्रीटिंग पार्टी की नई पीढ़ी के नेताओं में शामिल हैं और हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा
स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा।
स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी।

ब्रिटेन को 7 साल में छठा प्रधानमंत्री मिलेगा
स्टार्मर पिछले 10 साल में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले छठे ब्रिटिश प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे।
2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में हार के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बनीं थेरेसा मे संसद से ब्रेक्जिट समझौता पारित नहीं करा सकीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद बोरिस जॉनसन ने कोविड लॉकडाउन के दौरान सरकारी आवास पर हुई पार्टियों और कई राजनीतिक विवादों के बीच 2022 में इस्तीफा दिया।
जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों से बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। वह सिर्फ 49 दिन ही पद पर रह सकीं और अक्टूबर 2022 में इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने, लेकिन बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियों और आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद जुलाई 2024 में उन्होंने भी पद छोड़ दिया।
अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन को सात साल में छठा और 10 साल में सातवां प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों।
अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है।
ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस्तीफा देंगे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि स्टार्मर इमिग्रेशन और ऊर्जा जैसे दो अहम मुद्दों पर विफल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि स्टार्मर जल्द पद छोड़ देंगे। यह खबर भी पढ़ें…
मां प्रोफेसर-पापा CA, खुद इंजीनियरिंग छोड़ चुनी एक्टिंग की राह
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कृति सेनन इन दिनों अपनी फिल्म ‘कॉकटेल 2′ को लेकर चर्चाओं में हैं. 12 साल बाद आई इस सीक्वल फिल्म में कृति सेनन के लुक की खूब तारीफ हो रही है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत की है और कृति के अभिनय को काफी सराहा जा रहा है.
नई दिल्ली. ‘कॉकटेल 2’ का जिक्र होने से सबसे पहले जहन में कृति सेनन का ही नाम आता है. फिल्म में एक्ट्रेस के कातिलाना लुक्स और अभिनय की जितनी तारीफ की जाए कम है. आज हिंदी फिल्मों पर राज करने वाली कृति सेनन ने अपने करियर की शुरुआत साउथ से की थी और उनकी पहली फिल्म महेश बाबू के साथ थी.

महेश बाबू की एक्ट्रेस ने हीरोपंती से हिंदी फिल्मों का रुख किया था. पहली फिल्म में टाइगर श्रॉफ के साथ नजर आई थीं. दोनों की केमिस्ट्री को पहली फिल्म में काफी पसंद किया गया था. ये रोमांटिक कॉमेडी फिल्म हिट भी रही थी.

नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस कृति सेनन का यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. एक सामान्य परिवार में पली-बढ़ी कृति सेनन ने खुद इंजीनियरिंग की है, लेकिन उनका सपना सिल्वर स्क्रीन पर कुछ बड़ा कर दिखाने का थ. एक्ट्रेस की मां गीता सेनन दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और पिता चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं.
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नोएडा के जेपी इंस्टिट्यूट से इंजीनियरिंग करने के बाद कृति सेनन ने फिल्मों का रुख किया. एक्ट्रेस ने महेश बाबू के साथ फिल्मों में अपनी पारी का आगाज किया था. कृति ने साल 2014 में तेलुगु फिल्म ‘1: नेनोक्काडिने’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उनके साथ साउथ सुपरस्टार महेश बाबू नजर आए थे. पहली ही फिल्म में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया.

इसी साल उन्होंने बॉलीवुड में टाइगर श्रॉफ के साथ फिल्म ‘हीरोपंती’ से कदम रखा. फिल्म हिट रही और कृति को बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. कृति ने ‘दिलवाले’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘लुका छुपी’, ‘हाउसफुल 4’ और ‘पानीपत’ जैसी फिल्मों में काम करके साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमरस रोल तक सीमित नहीं हैं. रोमांस, कॉमेडी और गंभीर किरदारों में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई.

बॉक्स ऑफिस पर पकड़ बना चुकीं कृति सेनन के करियर में ‘मिमी’ से अहम मोड़ आया. कोरोना काल के दौरान फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई. साल 2021 में आखिरकार जब फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई तो क्रिटिक्स से लेकर दर्शकर तक हर कोई एक्ट्रेस के शानदार अभिनय का मुरीद हो गया.

मिमी के लिए कृति सेनन को बेस्ट एक्ट्रेस कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड मिला. ये फिल्म उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस फिल्म में अपने शानदार नॉन ग्लैमरस रोल से कृति सेनन ने साबित कर दिया कि वो हर तरह के किरदार अदा कर सकती हैं. एक्ट्रेस ने इस रोल से अपने अभिनय का लोहा मनवाया.

अब उनकी नई फिल्म ‘’कॉकटेल 2’’ भी लगातार चर्चा में बनी हुई है. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर रही है और दर्शकों को कृति का काम भी पसंद आ रहा है. यही वजह है कि आज वह बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन पर निर्माता आंख बंद करके भरोसा करते हैं. ‘कॉकटेल 2’ ने रिलीज के वीकेंड पर 47 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है.
राम मंदिर का चंदा चोरी, केजरीवाल ने भाजपा को घेरा: CBI-ED की चुप्पी पर उठाए सवाल; बोले- किसे बचाने में जुटी सरकार – New Delhi News
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि मामले में अभी तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और आखिर सरकार किसे बचाने का प्रयास कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल से करोड़ों रुपए के चंदे और चढ़ावे की चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और न ही ईडी अथवा सीबीआई ने कोई कार्रवाई की है। मंदिर से करोड़ों के चंदे की चोरी उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपए के चंदे की चोरी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 200 करोड़ रुपए नकद और हीरे-जवाहरात से जुड़े कई बक्से गायब होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद जांच एजेंसियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं आप संयोजक ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों जगह भाजपा की सरकार है, लेकिन अभी तक न कोई छापेमारी हुई है और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें तुरंत जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
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