Wednesday, July 8, 2026
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मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया, आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने पुनः आदेश पारित करने का निर्देश दिया – Prayagraj (Allahabad) News




इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना ने कन्नौज की तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा भारती के 20 सितंबर 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने नवाब सिंह यादव व अन्य के खिलाफ पुलिस द्वारा दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। कन्नौज का मामला यह मामला कन्नौज कोतवाली थाने में दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। दरअसल यह घटना एक पॉक्सो मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई थी, जब गवाह डॉ. स्वास्तिका शालिनी को सत्र न्यायालय में गवाही देने के दौरान धमकाया गया और आरोपी के पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाया गया। अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने 31 पन्नों का आदेश लिखते हुए सबूतों की विस्तृत समीक्षा की, मानो कोई “मिनी ट्रायल” चल रहा हो, जबकि संज्ञान लेने के चरण में मजिस्ट्रेट को केवल प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, यह देखना होता है, सबूतों की गुणवत्ता परखना नहीं। हाईकोर्ट ने कमल शिवाजी पोकरनेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य , रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भाड़ा और भगवंत सिंह बनाम पुलिस आयुक्त जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को संज्ञान के चरण पर साक्ष्यों की सत्यता परखने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को सुना, लेकिन पीड़िता को नोटिस दिए बिना ही संज्ञान से इन्कार कर दिया, जो कि विधिक रूप से अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने 20 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामला पुनः मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कन्नौज की अदालत को भेज दिया है, ताकि पुलिस रिपोर्ट पर नए सिरे से, इस फैसले में दी गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, आदेश पारित किया जा सके।



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‘रिलीज से पहले फैसला करो’, ‘सतलुज’ पर छिड़े विवाद के बीच कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान


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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी है. इस बीच फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता कंवलजीत सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म पूरी बन जाती है, उस पर करोड़ों रुपये और कई लोगों की मेहनत लग चुकी होती है, तब उसे रोकना पूरी टीम के साथ अन्याय है.

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दिलजीत की फिल्म को लेकर किए सवाल

नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस विवाद के बीच ही जाने माने एक्टर कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान सामने आया है. उनका कहना है कि रिलीज के बाद फिल्म को रोकना टीम के साथ अन्याय है.

आईएएनएस से बातचीत में कंवलजीत सिंह ने बताया कि ‘सतलुज’ उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक है. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें इतने बेरहम इंसान का किरदार निभाने का मौका मिला. यही वजह थी कि यह रोल उन्हें बेहद दिलचस्प लगा. उन्होंने कहा कि यह कहानी इतिहास से जुड़ी है, लेकिन इस पर पहले कभी ज्यादा बात नहीं हुई थी.

किरदार के लिए की थी पूरी तैयारी

कंवलजीत सिंह ने बताया कि उनका किरदार पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी से प्रेरित था. भूमिका की तैयारी के लिए उन्होंने उस अधिकारी के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पढ़ी, उनके भाषण देखे और उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की. हालांकि निर्देशक ने साफ कहा था कि किसी की नकल नहीं करनी है, बल्कि अपने अभिनय से किरदार को जीवंत बनाना है. उन्होंने कहा कि मेकअप की वजह से कई लोगों को लगा कि वह बिल्कुल उसी अधिकारी जैसे दिख रहे हैं.

रिलीज रुकने के पीछे सिर्फ विवाद नहीं होते

फिल्म की रिलीज में आई दिक्कतों पर कंवलजीत सिंह ने कहा कि हर बार विवाद ही वजह नहीं होता. कई बार आर्थिक, तकनीकी और दूसरे व्यावहारिक कारण भी सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म सालों की मेहनत के बाद भी रिलीज नहीं हो पाती, तो पूरी टीम को दुख होता है. इसकी तुलना उन्होंने उस लेखक से की, जिसकी किताब सालों की मेहनत के बाद भी प्रकाशित नहीं हो पाती.

‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी

कंवलजीत सिंह ने भरोसा जताया कि ‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी. उन्होंने कहा कि इस फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया है. चाहे वह स्पॉट बॉय हो, तकनीशियन हो, अभिनेता हो या निर्देशक. सभी चाहते हैं कि दर्शक उनकी मेहनत को बड़े पर्दे पर देखें.फिल्म से जुड़े विवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला करीब ढाई से तीन साल तक अलग-अलग स्तर पर चलता रहा. इसके बावजूद फिल्म के निर्माता और निर्देशक अपने फैसले पर डटे रहे. उन्होंने किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी बात रखी. कंवलजीत ने बताया कि एक समय फिल्म में बड़े पैमाने पर कट लगाने की बात भी हुई थी और बाद में इसे कनाडा के एक फिल्म फेस्टिवल से भी वापस ले लिया गया था.

बता दें कि कंवलजीत सिंह का कहना है कि अगर किसी फिल्म के विषय को लेकर किसी तरह की आपत्ति या आशंका है, तो उसका समाधान फिल्म बनने से पहले ही कर लेना चाहिए. जरूरी मंजूरियां और चर्चा पहले होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी बनने, पैसा खर्च होने और पूरी टीम की मेहनत लगने के बाद उस पर रोक लगाना या बड़े बदलाव की मांग करना सही नहीं है.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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एआई तकनीक से पता चलेगा आग के बाद इमारत कितनी-सुरक्षित: आईआईटी जोधपुर ने की नई रिसर्च; फायर सेफ्टी सिस्टम किया विकसित – Jodhpur News




भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ता ने अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा तकनीक बनाई है। संस्थान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो लिमिटेड सेंसर डेटा के आधार पर आग लगने के दौरान और आग बुझाने के बाद भी इमारत की बढ़ोतरी का आकलन कर सकता है। देशभर में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों, ऊंची आवासीय इमारतों और औद्योगिक इकाइयों में लगातार भीषण आग लगने की घटनाओं के बीच यह प्रयास किया गया है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने अग्नि प्रतिरोधक क्षमता, निर्माण गुणवत्ता प्रबंधन, स्थायित्व मूल्यांकन (Sustainability Assessment), भवनों और आधारभूत संरचनाओं (Buildings Infrastructure) के बुद्धिमान जीवनचक्र प्रबंधन (Intelligent Lifecycle Management) के लिए उन्नत संगणकीय तकनीकों और ओपन स्रोत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Computational Technologies and Open-Source Digital Platforms) का डवलप किया है। शोध में सामने आया कि कई इमारतों को सबसे ज्यादा संरचनात्मक नुकसान कूलिंग फेज के दौरान होता है। इस तकनीक को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन और डिजास्टर मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी बन सकेंगे। आग लगने के बाद बिल्डिंग की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आईआईटी जोधपुर के सिविल एवं आधारभूत संरचना अभियांत्रिकी विभाग (Department of Civil and Infrastructure Engineering) के सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में चल रहे इस शोध का उद्देश्य भवनों को आग से अधिक सुरक्षित बनाना और आग लगने के बाद उनकी संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। यह रिसर्च पारंपरिक अग्नि सुरक्षा मानकों से आगे बढ़कर यह विश्लेषण करता है कि भीषण आग के दौरान पूरी इमारत किस प्रकार व्यवहार करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार- पारंपरिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली मुख्य रूप से आग का पता लगाने और उसे नियंत्रित करने तक सीमित हैं, जबकि वास्तविक खतरा आग के कारण भवन की संरचना को होने वाली क्षति से पैदा होता है। कई मामलों में आग बुझने के बाद भी इमारत के ढहने का जोखिम बना रहता है। एआई आधारित तकनीक देगी समय रहते चेतावनी आईआईटी जोधपुर की टीम ने ऐसे मॉडल विकसित किए हैं, जो भवन के भीतर आग फैलने की प्रक्रिया का अनुकरण (Simulation) करते हैं, विभिन्न अग्नि परिस्थितियों में संरचनात्मक हिस्सों के व्यवहार का विश्लेषण करते हैं तथा आग के बाद भवन को हुई वास्तविक क्षति का वैज्ञानिक आकलन करने में सक्षम हैं। शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित समाधान भी विकसित किए हैं, जो सीमित सेंसर आंकड़ों के आधार पर भवन की फायर रिपॉन्स का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन्हें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के साथ जोड़ा गया है, जिससे अग्निशमन एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह तकनीक आपदा प्रबंधन एजेंसियों, संरचनात्मक अभियंताओं, बीमा कंपनियों, शहरी योजनाकारों और आपातकालीन राहत दलों के लिए उपयोगी साबित होगी। डिजिटल तकनीकों से होगा भवनों का स्मार्ट प्रबंधन अग्नि अभियांत्रिकी के अलावा आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता भवन सूचना मॉडलिंग, डिजिटल प्रतिरूप, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (स्मार्ट उपकरणों का नेटवर्क) तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए भवनों के स्मार्ट डिजाइन और प्रबंधन पर भी काम कर रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से भवन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी, स्थायित्व मूल्यांकन, जीवनचक्र प्रदर्शन का विश्लेषण, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव तथा आपदा तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ऐसे स्वचालित डिजिटल प्लेफॉर्म भी विकसित किए हैं, जो संरचनात्मक डिजाइन (Structural Engineers ), स्थायित्व मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता प्रबंधन को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करते हैं। आग प्रितिरोधक डिजाइन बनेगी अहम हिस्सा डॉ. पी. रवि प्रकाश ने कहा- हर बड़ी आग की घटना यह याद दिलाती है कि केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है। मानव जीवन की सुरक्षा के लिए यह समझना आवश्यक है कि आग लगने से पहले, आग के दौरान और आग बुझने के बाद भवन किस प्रकार व्यवहार करता है। यह शोध अभियंताओं, नीति-निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को ऐसे उन्नत वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध कराने का प्रयास है, जिनकी सहायता से संरचनात्मक विफलताओं का पूर्वानुमान लगाया जा सके, आग से प्रभावित भवनों का तेजी से वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके तथा भवन निर्माण के शुरुआती चरण से ही अग्नि प्रतिरोधक क्षमता को डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।



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DM-SP ने कामेश्वर नाथ मंदिर का किया इंस्पेक्शन: श्रावणी मेला सुरक्षा में पुलिस को 24 घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश – Sheikhpura News




शेखपुरा में श्रावणी मेला की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार शाम जिला पदाधिकारी शेखर आनंद और एसपी हिमांशु ने गिरिहिन्डा पहाड़ का संयुक्त दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पहाड़ पर स्थित महाभारत कालीन बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर का भ्रमण किया और शिवलिंग के दर्शन किए। जिला पदाधिकारी ने सावन महीने में लगने वाले इस प्रसिद्ध मेले की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। हर साल हजारों श्रद्धालु बाबा कामेश्वर नाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं, जिसके कारण सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस बल 24 घंटे मुस्तैद रहे ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए, एसपी हिमांशु ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान चप्पे-चप्पे पर पर्याप्त पुलिस बल, कैमरे और दंडाधिकारियों की तैनाती की जाए। भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि महिला और पुरुष श्रद्धालु कतारबद्ध होकर सुलभ दर्शन कर सकें। एसपी ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी आपातकालीन या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल 24 घंटे मुस्तैद रहे ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा निरीक्षण के दौरान, जिला पदाधिकारी शेखर आनंद ने नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, साफ-सफाई, लाइटिंग और रास्तों की मरम्मत का काम तुरंत पूरा किया जाए। गिरिहिन्डा पहाड़ पर स्थित बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। सावन के महीने में इस स्थान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, जिसके कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी शिवभक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इस मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कई अन्य वरीय अधिकारी व स्थानीय कर्मी भी उपस्थित थे।



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खुले पड़े गड्ढा में डूबा 10 साल का बच्चा, मौत: बालाघाट में खेलते समय पैर फिसलने से हादसा, परिवार का छोटा बेटा था – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट में 10 साल का बच्चा खेल-खेल में पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक बच्चे की पहचान लक्ष्य (पिता हंसकुमार बागडे) के रूप में हुई है। लक्ष्य परिवार में सबसे छोटा बेटा था, उसका एक बड़ा भाई भी है। घटना लालबर्रा थाना क्षेत्र के धरपीवाड़ा में मंगलवार शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, धरपीवाड़ा नाले के पास गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत को देखते हुए मकान/भवन निर्माण के काम के लिए जेसीबी मशीन से बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे। पिछले कुछ दिनों से इलाके में हो रही लगातार बारिश की वजह से इन खुले गड्ढों में ऊपर तक पानी भर गया था। मंगलवार शाम को मासूम लक्ष्य इन्हीं गड्ढों के पास खेल रहा था, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में समा गया। खुले गड्ढों को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा हादसे की खबर मिलते ही लालबर्रा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे के शव को गड्ढे से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए लालबर्रा अस्पताल भिजवाया। शव का पोस्टमार्टम बुधवार को किया जाएगा। घटना के बाद से ही गांव के लोगों में निर्माण कार्य करने वालों की लापरवाही और इन खुले गड्ढों को लेकर भारी गुस्सा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त मांग की है कि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए, इसके लिए क्षेत्र में खुले पड़े ऐसे सभी जानलेवा गड्ढों को तुरंत मिट्टी डालकर भरा जाए। लालबर्रा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।



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₹36 लाख की पगार का भ्रम! Form 16 ने खोली CTC और इन हैंड सैलरी में अंतर की पोल


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सोशल मीडिया पर एक सरकारी बैंक मैनेजर का Form 16 तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें सालाना CTC करीब 35.25 लाख रुपये दिखाई गई है, जबकि हाथ में मिलने वाली सैलरी इससे काफी कम है. इसने CTC और इन हैंड सैलरी के अंतर को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आखिर इतनी बड़ी सैलरी के बावजूद बैंक अधिकारी के खाते में हर महीने कितनी रकम आती है और दोनों में इतना फर्क क्यों होता है, आइए समझते हैं.

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हर महीने औसतन 2 लाख रुपये सैलरी इस बैंक मैनेजर के खाते में आती है.

नई दिल्ली. सरकारी बैंकों की नौकरी को हमेशा अच्छी सैलरी और मजबूत जॉब सिक्योरिटी के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक सरकारी बैंक मैनेजर के Form 16 ने लोगों की इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वायरल दस्तावेज के मुताबिक, 8 साल के अनुभव वाले एक SBI मैनेजर की सालाना CTC करीब 35.25 लाख रुपये यानी लगभग 2.94 लाख रुपये प्रति माह दिखाई गई है. पहली नजर में यह सैलरी काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असल कहानी इससे अलग है.

वायरल Form 16 के मुताबिक, दिखाई गई रकम ग्रॉस सैलरी या CTC है. यह वह राशि होती है जिसमें बेसिक सैलरी के अलावा कई तरह के भत्ते और कंपनी की ओर से किए जाने वाले योगदान भी शामिल होते हैं. असल में कर्मचारी के खाते में आने वाली इन हैंड सैलरी इससे काफी कम होती है. इसकी वजह कई तरह की कटौतियां होती हैं, जिनमें प्रोविडेंट फंड (PF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), इनकम टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स और दूसरी वैधानिक कटौतियां शामिल हैं.



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दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पुनर्गठन: ओम प्रकाश व्यास बने अध्यक्ष, 4 सदस्य भी बनाए, CM रेखा के निर्देश पर नियुक्ति – New Delhi News




मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली सरकार ने लगभग 3 वर्षों से रिक्त पड़े दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) का पुनर्गठन कर दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के तहत आयोग में एक अध्यक्ष और 4 सदस्यों की नियुक्ति की गई है। अधिसूचना के अनुसार ओम प्रकाश व्यास को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं राहुल गौतम, कुंदन कंसकार, स्वाति गुप्ता और मोनिका शर्मा को सदस्य बनाया गया है। सभी नियुक्तियां संबंधित पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी। आयु सीमा पूरी होते ही कार्यकाल समाप्त सरकार के अनुसार आयोग का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। हालांकि अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष और सदस्यों के लिए 60 वर्ष निर्धारित की गई है। यदि कार्यकाल के दौरान आयु सीमा पूरी हो जाती है तो उसी दिन उनका कार्यकाल समाप्त माना जाएगा। नियुक्तियां बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग नियम, 2008 और गृह मंत्रालय की अधिसूचना के तहत की गई हैं। बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरपूर बचपन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना दिल्ली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सीएम ने विश्वास जताया कि आयोग का नया नेतृत्व संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए बच्चों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।



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दिलीप कुमार की वो फिल्म, जिसका आइडिया चुराकर बनीं 2 ब्लॉकबस्टर मूवी, तीसरी एवरेज


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Dilip Kumar Iconic Movie : बॉलीवुड के लीजेंड एक्टर दिलीप कुमार ने अपने करियर में 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. दिलीप कुमार का मूल नाम मोहम्मद यूसुफ खान था. जन्म 11 दिसंबर 1922 को पेशावर (वर्तमान में पाकिस्तान) के किस्सा ख्वानी बाजार इलाके में हुआ था. उन्हें ‘ट्रेजडी किंग’ के नाम से भी जाना जाता है. सीरियस-इंटेंस रोल के लिए जाने जाते थे. दिलीप कुमार ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक क्लासिक फिल्मों में काम किया. 60 के दशक में उनकी एक ऐसी सुपरहिट फिल्म आई थी जिसकी कहानी की आइडिया चुराकर बॉलीवुड में तीन और फिल्में बनाई गईं. दो फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुईं तो मूवी औसत रही. ये तीनों फिल्में कौन सी है, दिलीप कुमार की वो सुपरहिट मूवी कौन सी थी, आइये जानते हैं………

दिलीप कुमार एक्टिंग की पाठशाला थे. अमिताभ बच्चन भी उन्हें अपना आदर्श मानते थे. राज कपूर भी उनकी एक्टिंग का लोहा मानते थे. 1961 में उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाई जिससे इंस्पायर्ड होकर बॉलीवुड में तीन और मूवी बनाई गईं. तीन फिल्मों में से दो फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं. तीसरी फिल्म औसत जरूर रही लेकिन इसके गाने दिल में बस गए. दिलीप कुमार की यह फिल्म थी ‘गंगा जमुना’ जिसका निर्देशन नितिन घोष ने किया था. वैसे सही मायने में इस फिल्म का निर्देशन-प्रोडक्शन दिलीप कुमार ने किया था. दिलीप कुमार ही प्रोड्यूसर थे. इसी फिल्म की कहानी से मिलती-जुलती तीन और फिल्में बनाई गईं.

‘गंगा जमुना’ फिल्म की स्टोरी दिलीप कुमार ने ही लिखी थी. फिल्म में दिलीप कुमार के सगे भाई नासिर हुसैन ने पर्दे पर छोटे भाई का रोल निभाया था. वैजयंती माला ने भी फिल्म में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. इसके अलावा कन्हैया लाल, अनवर खान और लीला चिटनिस भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. दिलीप कुमार और उनके सगे भाई नासिर हुसैन ने दो फिल्मों में एक साथ काम किया. ये फिल्में ‘गंगा जमुना’ और ‘बैराग’ थीं. ‘बैराग’ 1976 में आई थी. इस फिल्म के रिलीज होने से पहले उनके भाई का निधन हो गया था. गंगा जमुना जहां ब्लॉकबस्टर रही, वहीं बैराग फ्लॉप हो गई थी.

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दिलीप कुमार ने ‘सिटीजन फिल्म्स’ के बैनर तले यह फिल्म प्रोड्यूस की थी. फिल्म के डायलॉग वजाहत मिर्जा ने लिखे थे. संगीतकार नौशाद जबकि गीतकार शकील बदायुनी थे. कहते हैं फिल्म का बहुत बड़ा पोर्शन दिलीप कुमार ने ही डायरेक्ट किया था. इसी फिल्म का गाना ‘इंसाफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चलके’ आज भी देशभक्ति के टॉप गाने में शुमार है. फिल्म के अन्य पॉप्युलर गाने ‘नैन लड़ जइहें तो मनुआ में ठसक होवै करी’, ‘दो हंसों का जोड़ा बिछुड़ गयो रे’ और ‘ढूंढो ढूंढो रे साजना ढूंढो’.

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‘गंगा जमुना’ दो भाइयों की कहानी थी. गंगा का किरदार दिलीप कुमार ने जबकि जमुना की भूमिका उनके सगे छोटे भाई नासिर ने निभाई थी. फिल्म की सबसे खास बात इसकी अवधी भाषा थी. यह रुटीन फिल्मों से अलग थी. साउथ की एक्ट्रेस वैजयंती माला ने अवधी भाषा के डायलॉग बोले थे. यह कमाल उन्होंने दिलीप कुमार की मदद से किया था. दिलीप कुमार ने डायलॉग अवधी में रिकॉर्ड करके वैजयंती माला के पास भेज दिए थे.

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वैजयंती माला ने बार-बार डायलॉग सुने और फिर हूबहू बोल दिए. उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म को रिलीज होने में छह माह लगे थे. फिल्म सेंसर बोर्ड में अ‍टक गई थी. सेंसर बोर्ड ने 200 कट लगाने का निर्देश दिया था. फिर दिलीप कुमार इंदिरा गांधी की मदद से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिले. तब जाकर फिल्म रिलीज हो पाई थी.

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फिल्म रिलीज होते ही सिनेमाघरों में छा गई. गंगा जमुना 1960 के दशक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है. गंगा जमुना का भारतीय सिनेमा में एक खास स्थान है. अमिताभ बच्चन ने भी अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने सही मायने में एक्टिंग ‘गंगा जमुना’ को देखकर सीखी. कहानी का बेसिक प्लॉट था : एक भाई सच के साथ है तो दूसरा भाई गलत रास्ता अपनाता है. फिल्म का नेट कलेक्शन उस समय 3.5 करोड़ रुपये था. यह कलेक्शन आज के समय में 1000 करोड़ के आसपास है.

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गंगा जमुना से इंस्पायर्ड होकर ही सलीम-जावेद ने ‘दीवार’ फिल्म की कहानी लिखी थी. गंगा-जमुना में बोली गई अवधी-खड़ी भाषा का इस्तेमाल ‘शोले’ में गब्बर सिंह ने किया. 24 जनवरी 1975 को रिलीज ‘दीवार’ फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. फिल्म की कहानी का बेसिक प्लॉट दो भाइयों का था. एक भाई विजय (अमिताभ बच्चन) जुर्म की दुनिया में नाम कमाता है तो दूसरा भाई रवि वर्मा (शशि कपूर) पुलिस इंस्पेक्टर बनता है. फिल्म के लास्ट सीन में सगे भाई को गोली मारता है. ‘दीवार’ फिल्म की गिनती हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में होती है. 100 हफ्तों तक चलने वाली इस फिल्म ने 4.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में यह चौथे नंबर पर थी.

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‘गंगा-जमुना’ से ही मिलती-जुलती एक और फिल्म 1986 में रिलीज हुई थी. संजय दत्त-कुमार गौरव स्टारर यह फिल्म ‘नाम’ थी जिसका निर्देशन महेश भट्ट ने किया था. रिहैब सेंटर से वापस लौटने के बाद संजय दत्त ने ‘नाम’ फिल्म में ड्रग तस्कर की भूमिका निभाई. 12 सितंबर 1986 को रिलीज हुई इस फिल्म में कुमार गौरव ने संजय दत्त के बड़े भाई की भूमिका निभाई थी. असल जिंदगी में वो संजय दत्त के बहनोई हैं. कुमार गौरव ही फिल्म के प्रोड्यूसर थे. जावेद अख्तर से अलग होने के बाद सलीम खान की यह पहली फिल्म थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. इसी फिल्म में कालजयी गजल ‘चिट्ठी आई है’ सुनाई दी थी. इस फिल्म में भी दो भाइयों की कहानी थी. एक मां का प्यार, सच्चा इंसान जबकि दूसरा ड्र्ग तस्कर. करीब 2 करोड़ रुपये का रखा गया था. फिल्म ने इंडिया में 4 करोड़ जबकि वर्ल्ड वाइड 7 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 1986 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट यह मूवी चौथे नंबर पर थी.

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‘गंगा जमुना’ और ‘दीवार’ जैसी आइकॉनिक फिल्म की कहानी 90 के दशक में एक बार और रिपीट की गई. संजय दत्त-गोविंदा की फिल्म ‘आंदोलन’ का बेसिक प्लॉट भी कुछ इसी तरह था. 3 मार्च 1995 को रिलीज ‘आंदोलन’ फिल्म का डायरेक्शन अजीज सेजवाल ने किया था. अनीस बज्मी ने स्टोरी लिखी थी. संजय दत्त, गोविंदा, ममता कुलकर्णी और सोमी अली लीड रोल में थे. म्यूजिक नदीम श्रवण का था. गीतकार समीर थे. फिल्म के म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में दो भाइयों की कहानी थी. संजय दत्त जुर्म की दुनिया में रहता है जबकि गोविंदा सीधा सादा सच्चा और ईमानदार इंसान. पढ़-लिखकर इंजीनियर बनता है. 3.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 10 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक एवरेज फिल्म साबित हुई थी.

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कांग्रेस ने श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर निकाली ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’: बलरामपुर में सत्य सामने लाने के लिए उच्चस्तरीय जांच की मांग – Balrampur News




बलरामपुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मंगलवार शाम 6:30 बजे ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’ निकाली। यह यात्रा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित की गई थी। पदयात्रा का नेतृत्व जिलाध्यक्ष शिवलाल कोरी ने किया। यह अंबेडकर तिराहा से शुरू होकर वीर विनय चौराहा होते हुए झारखंडी मंदिर पहुंची। यहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवान श्रीराम के समक्ष सत्य की विजय, जनआस्था की रक्षा और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष शिवलाल कोरी ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित चढ़ावा प्रकरण में केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की ताकि सच्चाई सामने आ सके। एआईसीसी सदस्य एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजबहादुर यादव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शी और स्वतंत्र जांच चाहती है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच से कथित अनियमितताओं में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी। मारकंडे मिश्र, अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी, सियाराम प्रधान, डॉ. पंकज गुप्ता और अफरोज खान सहित अन्य वक्ताओं ने भी आस्था से जुड़े मामलों में आधी-अधूरी कार्रवाई को अनुचित बताया। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। इस पदयात्रा में डॉ. प्रतीक मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, अबरार खान, डॉ. खलीलुल्लाह, धर्मेंद्र मिश्रा, सुशील शुक्ला, अख्तर खान, केदारनाथ पाण्डेय, दिलशाद हुसैन, लाल साहब श्रीवास्तव, शकील अहमद, भीष्म सिंह, परवेज खान, राजेश पाण्डेय, राहुल दुबे, देवेंद्र पाण्डेय और जिला मीडिया प्रभारी बृजेश चौहान सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे।



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दूध उबालने का स्मार्ट तरीका, न जलेगा दूध न आएगी बदबू, जानिए तरीका


Milk Boiling Tips: रोज की रसोई में दूध उबालना एक छोटा सा काम लगता है, लेकिन कई बार यही काम सबसे ज्यादा परेशानी खड़ी कर देता है. जरा सा ध्यान इधर-उधर हुआ नहीं कि दूध उफनकर गैस पर फैल जाता है या फिर बर्तन की तली में चिपककर जल जाता है. इसके बाद पूरे दूध में ऐसी महक आ जाती है कि चाय, कॉफी, खीर या कोई भी दूसरी चीज बनाने का मन नहीं करता. कई लोग इस परेशानी से बचने के लिए दूध को बार-बार चलाते रहते हैं, लेकिन हर समय गैस के सामने खड़े रहना भी आसान नहीं होता.

ऐसे में अगर कोई आसान और देसी तरीका मिल जाए, जिससे दूध आसानी से उबल जाए और तली में चिपके भी नहीं, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है. आज हम आपको ऐसा ही एक पुराना घरेलू नुस्खा बता रहे हैं, जिसे कई घरों में सालों से अपनाया जाता है. यह तरीका बेहद आसान है और अगर सही तरह से अपनाया जाए तो दूध जलने की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है.

आखिर दूध तली में क्यों चिपक जाता है?
दूध में फैट, प्रोटीन और दूसरे ठोस तत्व मौजूद होते हैं. जब दूध को तेज आंच पर लंबे समय तक बिना हिलाए गर्म किया जाता है, तो ये तत्व धीरे-धीरे बर्तन की तली में जमा होने लगते हैं. लगातार गर्मी मिलने की वजह से यही हिस्सा पहले जलता है. जैसे ही दूध नीचे से जलता है, उसकी महक पूरे दूध में फैल जाती है और उसका स्वाद खराब हो जाता है. अगर दूध स्टील या मोटी तली वाले बर्तन में उबाला जाए और बीच-बीच में हल्का सा चलाया जाए, तो यह परेशानी काफी कम हो सकती है.

मिट्टी का छोटा दीया कर सकता है मदद
दूध को तली में चिपकने से बचाने के लिए मिट्टी का छोटा दीया इस्तेमाल करने की ट्रिक काफी पुरानी मानी जाती है. इस तरीके में उबालते समय बर्तन के अंदर साफ किया हुआ छोटा मिट्टी का दीया डाल दिया जाता है. कहा जाता है कि दूध उबलने के दौरान दीया हल्का-हल्का हिलता रहता है. इससे दूध के अंदर लगातार हल्की मूवमेंट बनी रहती है और दूध एक जगह टिककर तली में जमने की संभावना कम हो जाती है. इसी वजह से दूध के जलने का खतरा भी कम हो सकता है. हालांकि, यह एक घरेलू नुस्खा है. इसका असर बर्तन, आंच और दूध की मात्रा के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है.

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इस ट्रिक को सही तरीके से कैसे अपनाएं?
अगर आप इस देसी तरीके को आजमाना चाहते हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान जरूर रखें.
1. सबसे पहले मिट्टी का छोटा दीया बिल्कुल साफ होना चाहिए.
2. इस्तेमाल करने से पहले उसे 10 से 15 मिनट तक साफ पानी में भिगो दें.
3. इससे मिट्टी की धूल या छोटे कण निकल जाएंगे.
4. अब दूध वाले बर्तन में गीला दीया डाल दें.
5. इसके बाद दूध को धीमी या मीडियम आंच पर उबलने दें.
6. बीच-बीच में एक-दो बार चम्मच से दूध चला भी सकते हैं.

दूध उबालते समय इन गलतियों से बचें
अगर आप चाहते हैं कि दूध न जले और उसका स्वाद भी बना रहे, तो इन बातों का ध्यान रखें.

1. तेज आंच पर दूध न उबालें
बहुत तेज आंच पर दूध जल्दी गर्म जरूर होता है, लेकिन उसके तली में चिपकने का खतरा बढ़ जाता है.

2. मोटी तली वाला बर्तन चुनें
पतले बर्तन जल्दी गर्म हो जाते हैं, जिससे दूध नीचे से जल सकता है. मोटी तली वाला बर्तन बेहतर रहता है.

3. दूध को पूरी तरह अकेला न छोड़ें
भले ही आपने दीया डाल दिया हो, लेकिन दूध को लंबे समय तक बिना देखे छोड़ना ठीक नहीं है.

बर्तन को पहले धो लें
दूध उबालने से पहले बर्तन साफ होना चाहिए, अगर उसमें पहले से कोई जला हुआ हिस्सा या मसाले का अंश रह गया हो, तो उसका असर दूध के स्वाद पर पड़ सकता है.

क्या यह तरीका हर बार काम करेगा?
यह एक घरेलू उपाय है, जिसे कई लोग अपने अनुभव के आधार पर अपनाते हैं. हालांकि हर रसोई, हर बर्तन और हर गैस की आंच अलग होती है. इसलिए इसे अपनाने के साथ-साथ दूध पर हल्का ध्यान रखना भी जरूरी है, अगर सही बर्तन, सही आंच और थोड़ी सावधानी रखी जाए, तो दूध जलने की परेशानी काफी कम हो सकती है.

दूध का तली में चिपकना और जल जाना एक आम समस्या है, लेकिन थोड़ी सी समझदारी और एक आसान देसी ट्रिक इसे काफी हद तक कम कर सकती है. साफ मिट्टी का छोटा दीया इस्तेमाल करने के साथ अगर आप धीमी आंच, साफ बर्तन और बीच-बीच में दूध चलाने जैसी आदतें अपनाते हैं, तो दूध का स्वाद भी बना रहेगा और जलने की बदबू से भी बच सकते हैं.



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