कानपुर देहात में फैक्ट्री कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच, गुरुवार 14 मई 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस गोष्ठी में मंडलायुक्त कानपुर विजयेन्द्र पांडियन और पुलिस उपमहानिरीक्षक कानपुर रेंज हरीश चन्दर उपस्थित रहे। बैठक में जिलाधिकारी कपिल सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय और मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल भी मौजूद थे। जनपद की प्रमुख फैक्टरियों और कंपनियों के प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भी इसमें भाग लिया। देखें, 3 तस्वीरें… गोष्ठी में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन, उनके कल्याण, समय पर वेतन भुगतान और अन्य सेवा संबंधी समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों को गंभीरता से लिया जा रहा है और श्रमिकों के हितों की रक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने फैक्ट्री प्रबंधकों को श्रम कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने, कर्मचारियों को नियमानुसार समय पर वेतन देने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ तत्काल विधिक कार्यवाही की जाएगी। मंडलायुक्त और डीआईजी ने फैक्ट्री मालिकों से कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि औद्योगिक क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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कानपुर देहात: मंडलायुक्त, डीआईजी ने फैक्ट्री मालिकों संग की बैठक: श्रमिकों के प्रदर्शन पर चर्चा, प्रशासन ने दिए श्रम कानून पालन के निर्देश – Kanpur Dehat News
स्टार्स ने बोले 3 डायलॉग, जो स्क्रिप्ट में थे ही नहीं, बॉक्स ऑफिस पर दौड़ पड़ी थीं फिल्में
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कहते हैं कि एक बेहतरीन फिल्म सिर्फ कागज पर लिखी स्क्रिप्ट से नहीं बनती, बल्कि कैमरे के सामने आर्टिस्ट की समझदारी और इम्प्रोवाइजेशन से बनती है. बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं जब एक्टर्स ने किसी सीन की गंभीरता या मस्ती में कुछ ऐसा कह दिया, जो ओरिजिनल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था. लेकिन जब वे शब्द स्क्रीन पर आए, तो उन्होंने न सिर्फ दर्शकों को हंसाया और रुलाया, बल्कि फिल्मों को भी हिट करवाने में भी अपनी भूमिका निभाई. चाहे वह अक्षय कुमार की समझदारी हो, नाना पाटेकर का गुस्सा हो या परेश रावल का अनोखा स्टाइल हो… ये ऐसे डायलॉग हैं जो अचानक से बने, लेकिन अब बॉलीवुड की पहचान बन गए हैं. आइए, जानते हैं ऐसे 3 सुपरहिट डायलॉग्स की कहानी.
नई दिल्ली. सिनेमा एक ऐसा जॉनर है, जहां डिसिप्लिन और क्रिएटिविटी का बैलेंस बहुत जरूरी है. अक्सर डायरेक्टर चाहते हैं कि एक्टर्स वही कहें जो राइटर ने कागज पर लिखा है. लेकिन कभी-कभी, एक्टर के इमोशंस और उनकी ऑन-द-स्पॉट कॉमेडी टाइमिंग राइटर की सोच से भी आगे निकल जाती है. बॉलीवुड के तीन सबसे मशहूर डायलॉग, जिन्हें आज बच्चा-बच्चा जानता है, जो असल में कभी फिल्म की स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं थे. ये शब्द तब बोले गए जब कैमरा चल रहा था और एक्टर अपने किरदारों में इतने डूबे हुए थे कि उन्होंने कुछ बिल्कुल नया बना दिया.

1. अक्षय कुमार की मस्ती: 2006 की फिल्म ‘भागम भाग’ बॉलीवुड की सबसे अच्छी प्रियदर्शन कॉमेडी में से एक मानी जाती है. अक्षय कुमार, गोविंदा और परेश रावल की तिकड़ी ने ऐसी जबरदस्त कॉमेडी की कि लोग आज भी इसे बार-बार देखते हैं. इस फिल्म के एक बहुत मशहूर सीन में अक्षय कुमार अचानक पूछते हैं, ‘क्या रूपा, नहा लिया?’ हैरानी की बात है कि यह लाइन फिल्म की ओरिजिनल स्क्रिप्ट में नहीं थी.

अक्षय कुमार सेट पर अपनी हाजिरजवाबी और मस्ती के लिए जाने जाते हैं. अक्षय ने खुद एक इंटरव्यू में बताया कि वह शूटिंग के दौरान बस मस्ती कर रहे थे और यह लाइन उन्होंने अपने को-स्टार को चिढ़ाने के लिए कही थी. डायरेक्टर प्रियदर्शन को अक्षय का बेफिक्र रवैया इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे फाइनल कट में रखने का फैसला किया. आज यह डायलॉग सोशल मीडिया पर एक पॉपुलर मीम है और इसे फिल्म के सबसे मजेदार पलों में से एक माना जाता है.
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2. नाना पाटेकर का गुस्सा: 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ ने नाना पाटेकर को इस लेवल पर पहुंचा दिया कि उनकी तुलना लेजेंडरी एक्टर्स से की जाने लगी. फिल्म का क्लाइमैक्स, जहां नाना पाटेकर को फांसी दी जानी है, और काफी भीड़ वहां इकठ्ठा हो रही है…. बॉलीवुड के सबसे दमदार सीन में से एक है.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो इस दौरान जब नाना ने कैमरा फेस किया, तो उनके अंदर का आर्टिस्ट जाग गया और वे बोल पड़े- ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने’, जो स्क्रिप्ट का हिस्सा ही नहीं था. उनके इस डायलॉग ने फिल्म के क्लाइमैक्स में जान ला दी थी.

3. परेश रावल का बाबूराव अवतार: जब भी बॉलीवुड की कल्ट कॉमेडी की बात होती है, तो 2000 में आई फिल्म ‘हेरा फेरी’ याद आती है. बाबूराव गणपतराव आप्टे का रोल कर रहे परेश रावल ने इस फिल्म में एक्टिंग को एक नई पहचान दी. एक आइकॉनिक सीन है, जिसमें बाबूराव अपनी परेशानियों से तंग आकर भगवान से शिकायत करता है-‘ऐ उठा ले रे देवा, उठा ले रे बाबा, मुझ अमीर को नहीं रे, ये 2 गरीबों को उठा ले!’ डायरेक्टर प्रियदर्शन इस बात से इतने खुश हुए कि उन्होंने तुरंत कहा, ‘परेश भाई, यह डायलॉग तो रहेगा ही!’ यह स्क्रिप्टेड नहीं था, लेकिन इसने बाबूराव के कैरेक्टर की मासूमियत और चालाकी को पूरी तरह से दिखाया.

इन अनस्क्रिप्टेड पलों ने तीनों फिल्मों की सफलता में अहम योगदान दिया. ‘भागम भाग’ को सिर्फ एक थ्रिलर-कॉमेडी माना जा रहा था, लेकिन अक्षय की छोटी लाइनों ने इसे कॉमेडी गोल्ड बना दिया. ‘क्रांतिवीर’ में नाना पाटेकर के दमदार भाषण ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड नॉमिनेशन दिलाया और फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया. ‘हेरा फेरी’ के बारे में सभी जानते हैं कि रिलीज के समय इसकी शुरुआत धीमी रही थी, लेकिन बाबूराव के इन वन-लाइनर्स की वर्ड ऑफ माउथ पब्लिसिटी ने इसे एक कल्ट क्लासिक बना दिया.
हरियाणा-महाराष्ट्र समेत 19 राज्य-UT में अब SIR: इनमें शामिल पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल चुनाव; 37 करोड़ वोटर्स का वेरिफिकेशन होगा
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नई दिल्ली3 मिनट पहले
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चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की है। इस फेज के तहत हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन किया जाएगा।
SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। तीनों बचे हुए राज्यों में खराब मौसम और जनगणना के कारण SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी।

करीब 4 लाख BLO, 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट तैनात होंगे
चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। दिल्ली में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी।



SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज के तहत, बिहार में सबसे पहले SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ।
चुनाव आयोग ने बताया कि पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए।

SIR प्रक्रिया, 6 सवाल-जवाब में जानें…
1. SIR क्या है?
यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के नए लोगों को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है।
2. अब तक किन राज्यों में हुआ SIR?
पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स के नाम जारी किए गए। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में वोटरों को वेरिफिकेशन हुआ।

3. कौन करता है?
ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों से फॉर्म भरवाकर जानकारी लेते हैं और उनका वेरिफिकेशन करते हैं।
4. SIR में नागरिक को क्या करना होता है?
SIR के दौरान BLO/BLA नागरिक को फॉर्म देंगे। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा।
5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?
- पेंशनर पहचान पत्र
- किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र
- जन्म प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट
- 10वीं की मार्कशीट
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र
- वन अधिकार प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र
- राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम
- परिवार रजिस्टर में नाम
- जमीन या मकान आवंटन पत्र
- आधार कार्ड
6. SIR का मकसद क्या है?
1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना।
डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।
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TMC 31 सीटों के नतीजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची:कहा- यहां जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम, कोर्ट बोला- नई याचिकाएं लगाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।’ TMC ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। पूरी खबर पढ़ें…
सहरसा नगर आयुक्त साइकिल से पहुंचे समाहरणालय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर मनाया नो व्हीकल डे – Saharsa News
सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा गुरुवार सुबह साइकिल से समाहरणालय पहुंचे। उनके सुरक्षाकर्मी भी साइकिल पर थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद उन्होंने यह पहल की। नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ‘नो व्हीकल डे’ मनाने और साइकिल या पैदल चलने की अपील की थी। एक सरकारी अधिकारी के तौर पर उन्होंने इस अपील का पालन करते हुए गुरुवार को ‘नो व्हीकल डे’ मनाया। साइकिल से ही नगर निगम कार्यालय लौटे सुबह करीब 10 बजे श्री झा साइकिल से सहरसा कलेक्ट्रेट पहुंचे और विभिन्न बैठकों में शामिल हुए। बैठकों के बाद वे साइकिल से ही नगर निगम कार्यालय लौटे। उन्होंने कहा कि ऐसी छोटी पहल से ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। एक दिन साइकिल या पैदल चलने की आदत अपनाने की अपील नगर आयुक्त ने बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल या पैदल चलने की आदत अपनानी चाहिए। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। उन्होंने शहरवासियों से भी अपील की कि वे महीने या सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। नगर आयुक्त की इस पहल की शहर में सराहना हो रही है।
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कटनी में किसानों ने घेरा एसडीएम कार्यालय: गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था, भीषण गर्मी में लंबी कतारें – Katni News
कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील में गेहूं खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण किसान परेशान हैं। सैलो पटोरी खरीदी केंद्र पर 22 केंद्रों को एक साथ संयुक्त कर दिया गया है, जिससे हजारों किसान भीषण गर्मी और लू के बीच अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं। इस प्रशासनिक अनदेखी से नाराज किसानों ने बड़ी संख्या में बहोरीबंद स्थित एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि सैलो केंद्र में भारी अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी किसानों ने कलेक्टर के नाम एक मांग पत्र सौंपा। इसमें चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे चक्काजाम और आमरण अनशन जैसे उग्र कदम उठाने को विवश होंगे। किसानों ने प्रशासन के समक्ष 6 सूत्रीय मांगें रखी हैं। इनमें खरीदी केंद्र कुआं और जुजावल को तुरंत संयुक्त रूप से खोलने, बहोरीबंद और क्योलारी केंद्रों को भी संयुक्त कर संचालित करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, बचैया खरीदी केंद्र में हथियागढ़ केंद्र को संयुक्त करने की मांग की गई है ताकि किसानों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। किसानों ने यह भी मांग की है कि जिन किसानों की स्लॉट बुकिंग हो चुकी थी लेकिन तुलाई नहीं हो पाई, उनकी स्लॉट पुनः बुक की जाए। साथ ही, जिन किसानों ने अभी तक स्लॉट बुक नहीं किए हैं, उनके लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए। केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बारदाने (बोरियों) की उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है, ताकि तुलाई का कार्य बाधित न हो।
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दही-पनीर-घी, सबके बढ़ने वाले हैं दाम, मुंह मीठा कराने के लिए भी खर्च करने होंगे ज्यादा पै
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Dairy Product Cost : अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में 2 रुपये लीटर बढ़ोतरी कर दी है. इसका असर जल्द ही अन्य डेयरी प्रोडक्ट पर भी दिखने लगेगा. दूध के बाद अब दही, घी और पनीर की बारी है. जल्द ही इन प्रोडक्ट के दाम भी बढ़ सकते हैं. इतना ही नहीं, चाय- कॉफी और रेस्तरां के मीनू पर भी दूध की बढ़ी कीमतों पर असर दिखेगा.
अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं.
नई दिल्ली. देश की निगाहें पेट्रोल-डीजल और गैस पर टिकी रहीं, जबकि इनसे पहले ही दूध के दाम बढ़ गए. महंगाई डायन अब हमारे किचन में घुस चुकी है और जल्द ही इसका असर दही, पनीर, घी जैसे जरूरी और रोजमर्रा के उत्पादों पर भी दिखना शुरू हो जाएगा. ईरान युद्ध के असर से सिर्फ पेट्रोलियम उत्पाद ही नहीं, रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम भी बढ़ने शुरू हो गए हैं .अमूल और मदर डेयरी ने गुरुवार यानी 14 मई से ही अपने दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं. जाहिर है कि अब अन्य डेयरी प्रोडक्ट की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है.
अमूल और मदर डेयरी दोनों ही देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनियां हैं. इनका कहना है कि ईरान युद्ध की वजह से पशुओं का चारा, परिवहन की लागत सहित अन्य खर्चे बढ़ गए हैं. यही वजह है कि दूध की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है. हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी सिर्फ दूध तक ही सीमित नहीं रहने वाली है. दूध के दाम बढ़े हैं तो इसका असर दही, घी, पनीर, मिठाई, चाय, कॉफी और रेस्तरां के खाने तक पर जाएगा. लिहाजा आने वाले समय में उपभोक्ताओं को इन सभी प्रोडक्ट के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं.
पहले भी हुआ है ऐसा
दूध के दाम बढ़ने का असर अन्य डेयरी उत्पादों पर दिखता ही है. ऐसा पहले भी हो चुका है. साल 2023 में जब कर्नाटक के डेयरी ब्रांड नंदिनी ने दूध के दाम बढ़ाए थे तो पनीर की कीमत भी 30 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई थी. इतना ही नहीं, 2025 में भी ऐसा ही हुआ जब सरकार ने जीएसटी की दरें घटाईं तो डेयरी कंपनियों ने पनीर, घी और मक्खन सहित अन्य उत्पादों को भी सस्ता कर दिया. ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही दूध की बढ़ी कीमतों का असर अन्य डेयरी प्रोडक्ट पर भी देखने को मिलेगा.
सबसे पहले महंगा होगा पनीर
दूध के दाम बढ़ने के बाद अगर सबसे पहले महंगे होने वाले डेयरी प्रोडक्ट की बात करें तो इसमें पनीर आगे दिखेगा. माना जा रहा है कि इसका पहला असर पनीर की कीमतों पर दिख सकता है. पनीर बनाने के लिए ज्यादा दूध की जरूरत पड़ती है. अगर आपको 1 किलोग्राम पनीर बनानी है तो 8 से 10 किलोग्राम दूध की जरूरत होगी. जाहिर है कि जब डेयरीज किसानों को दूध खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकाएंगी, तो इसका बोझ उपभोक्ताओं पर भी जरूर पड़ेगा.
दही-छाछ और घी पर भी असर
दूध महंगा होने से सिर्फ पनीर ही नहीं, घी और दही-छाछा खाने के लिए भी ज्यादा कीमत चुकानी होगी. त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले इन चीजों के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं पर गंभीर असर पड़ेगा. ऊपर से देश में शादियों का सीजन भी चल रहा है. गर्मी का सीजन चलने की वजह से दही, छाछ और लस्सी खरीदना भी अब महंगा हो सकता है. हालांकि, डेयरी कंपनियों ने इन प्रोडक्ट के दाम अभी नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इन प्रोडक्ट की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
अमेरिका में 10 हजार छात्र जांच के घेरे में: शेल कंपनियों और फर्जी नौकरी से वीसा पाने का खेल; रडार पर भारतीय छात्र
सुनयना चड्ढा. नई दिल्ली28 मिनट पहले
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अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है।
अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए नई चिंता खड़ी हो गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है। जांच के दायरे में करीब 10,000 विदेशी छात्र बताए जा रहे हैं, इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की है।
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि कई छात्रों ने ऐसी शेल कंपनियों या फर्जी कंपनियों के जरिए नौकरी दिखाकर अपना वीसा स्टेटस बचाए रखा, जिनका असली कारोबार लगभग नहीं था। कुछ कंपनियां सिर्फ छात्रों को कानूनी रोजगार दिखाने और वीसा नियमों से बचाने के लिए ही बनाई गई थीं। जांच में कई कंपनियों के पते खाली इमारतों, बंद ऑफिसों या रिहायशी मकानों में मिले। कुछ मामलों में कंपनियों के अमेरिकी ऑफिस की जगह भारत में बैठे एचआर एजेंट छात्रों को मैनेज करते पाए गए।
आईसीई के कार्यकारी निदेशक टॉड लायंस ने कहा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान शुरू किए गए ओपीटी कार्यक्रम में केवल कुछ हजार लाभार्थियों के प्रशिक्षण प्राप्त करने और फिर घर लौटने की उम्मीद थी। इसके बजाय, ओपीटी के जरिये लाखों विदेशी छात्र अमेरिका में काम कर रहे हैं। कार्यक्रम का आकार बढ़ने के साथ ही धोखाधड़ी भी बढ़ गई है।
हालांकि जांच एजेंसियों ने साफ किया है कि कार्रवाई किसी देश विशेष या सभी भारतीय छात्रों के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल संदिग्ध नेटवर्क और कंपनियों पर केंद्रित है। फिर भी इस कार्रवाई ने अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
ओपीटी प्रोग्राम से पढ़ाई के बाद नौकरी में आसानी
ओपीटी प्रोग्राम अमेरिका में एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी करने की अनुमति देता है। एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) संकाय के छात्रों को इसके जरिये 36 महीने तक काम करने का मौका मिलता है। भारतीय छात्रों के लिए यह प्रोग्राम एच-1बी वीजा और अमेरिका में लंबा करियर बनाने की महत्वपूर्ण सीढ़ी माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार 68,000 भारतीय ओपीटी छात्र हाल के वर्षों में कई अमेरिकी टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं।
तेज गर्मी में राहत चाहिए? घर पर बनाएं बादाम-सौंफ वाली इंस्टेंट हेल्दी ठंडाई
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Thandai Recipe: गर्मी में शरीर को ठंडा और एनर्जेटिक रखने के लिए घर की बनी ठंडाई बेहतरीन विकल्प है. बादाम, सौंफ, खजूर और दूध से तैयार यह ड्रिंक बिना चीनी के हेल्दी स्वाद देती है और कुछ ही मिनटों में बनकर तैयार हो जाती है.
गर्मी में घर पर बनाएं हेल्दी ठंडाई
Thandai Recipe: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों की सबसे बड़ी चिंता होती है शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड कैसे रखा जाए. तेज धूप, उमस और लगातार बढ़ता तापमान शरीर को जल्दी थका देता है. ऐसे में लोग बाजार के कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेज्ड जूस की तरफ भागते हैं, लेकिन इनमें शुगर और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही वजह है कि अब लोग फिर से पारंपरिक और घरेलू ड्रिंक्स की तरफ लौट रहे हैं. उन्हीं में से एक है ठंडाई, जो सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद मानी जाती है. खास बात यह है कि इसे घर में मौजूद कुछ साधारण चीजों से सिर्फ 5 मिनट में तैयार किया जा सकता है और इसमें अलग से चीनी डालने की भी जरूरत नहीं पड़ती. सूखे मेवे, सौंफ, इलायची और खजूर से बनी यह हेल्दी ड्रिंक शरीर को अंदर से ठंडक देती है और दिनभर तरोताजा महसूस कराती है.
घर की चीजों से बनाएं इंस्टेंट ठंडाई
गर्मी में ठंडाई का नाम सुनते ही एक अलग ताजगी महसूस होती है. हालांकि कई लोग सोचते हैं कि इसे बनाना काफी मुश्किल होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर घर में बादाम, सौंफ और दूध मौजूद है तो आप मिनटों में स्वादिष्ट ठंडाई तैयार कर सकते हैं. इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि इसमें चीनी की जगह खजूर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे ड्रिंक की मिठास भी बनी रहती है और यह ज्यादा हेल्दी भी हो जाती है. आजकल फिटनेस को लेकर जागरूक लोग भी ऐसी नेचुरल स्वीटनर वाली ड्रिंक्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
ठंडाई बनाने के लिए जरूरी सामग्री
दो गिलास ठंडा दूध, 8 से 10 बादाम, एक बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, एक छोटा चम्मच सौंफ, 4 से 5 काली मिर्च, 2 इलायची, 4 से 5 खजूर, थोड़ा सा गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े और गार्निशिंग के लिए कटे हुए पिस्ता-बादाम.
5 मिनट में ऐसे करें तैयार
सबसे पहले बादाम, खरबूजे के बीज, सौंफ, काली मिर्च और इलायची को पानी में 10 से 15 मिनट के लिए भिगो दें. अगर जल्दी बनाना हो तो हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें. इससे सभी चीजें जल्दी नरम हो जाएंगी और स्मूद पेस्ट तैयार होगा.
अब मिक्सर जार में भीगी हुई सामग्री डालें. इसमें खजूर और थोड़ा सा दूध मिलाकर अच्छी तरह ब्लेंड करें. जब स्मूद पेस्ट तैयार हो जाए तो बचा हुआ ठंडा दूध और गुलाब जल डालकर दोबारा ब्लेंड करें. इसके बाद गिलास में ठंडाई निकालें, ऊपर से बर्फ और ड्राई फ्रूट्स डालें. कुछ ही मिनटों में आपकी हेल्दी और ठंडी ठंडाई तैयार हो जाएगी.
क्यों फायदेमंद है ये देसी ड्रिंक?
गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए काफी पानी निकल जाता है. ऐसे में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ने लगती है. ठंडाई में मौजूद सौंफ और गुलाब जल शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. वहीं बादाम और खरबूजे के बीज शरीर को एनर्जी देते हैं. खजूर से मिलने वाली नैचुरल मिठास इसे बाकी शुगर ड्रिंक्स से अलग बनाती है. यही कारण है कि यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए बेहतर विकल्प मानी जा रही है.
वजन कम करने वाले लोग ऐसे पिएं
अगर आप वेट लॉस डाइट फॉलो कर रहे हैं तो फुल क्रीम दूध की जगह लो फैट या टोंड दूध इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं जिन्हें ज्यादा ठंडा पसंद नहीं है, वे इसमें बर्फ डालने से बच सकते हैं. आजकल सोशल मीडिया पर भी घर की बनी हेल्दी ड्रिंक्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में यह आसान ठंडाई रेसिपी गर्मियों में आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन साबित हो सकती है.
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Google Pixel 10 की कीमत में भारी कटौती, Amazon-Flipkart नहीं, यहां मिलेगा सस्ता
Google Pixel 10 की कीमत में भारी कटौती की गई है। गूगल का यह फ्लैगशिप फोन लॉन्च प्राइस से 10,000 रुपये तक सस्ते में खरीद सकते हैं। इसके अलावा फोन की खरीद पर एक्सचेंज ऑफर का भी लाभ लिया जा सकता है। गूगल पिक्सल 10 पर यह डिस्काउंट अमेजन या फ्लिपकार्ट पर चल रहे समर सेल में नहीं मिलेगा। गूगल पिक्सल 10 की कीमत में बड़ी कटौती Croma पर चल रहे सेल में दिया जा रहा है।
Google Pixel 10 की कीमत में कटौती
गूगल ने अपने इस फोन को भारत में एक ही स्टोरेज वेरिएंट- 12GB RAM + 256GB में लॉन्च किया था। इसकी कीमत 79,999 रुपये है। क्रोमा पर इस फोन को 5,000 रुपये सस्ते में लिस्ट किया गया है। इसके अलवा HDFC बैंक कार्ड पर 5,000 रुपये का एक्स्ट्रा इंस्टैंट डिस्काउंट मिलेगा। इस तरह से फोन की खरीद पर 10,000 रुपये तक का डिस्काउंट मिलेगा। ऑफर के बाद गूगल के इस फोन को 69,999 रुपये की कीमत में खरीदा जा सकेगा।
Google Pixel 10 के फीचर्स
Google Pixel 10 में 6.3 इंच का Acuta OLED डिस्प्ले दिया गया है। इस फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर को सपोर्ट करता है। गूगल ने फोन के डिस्प्ले की प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 2 इस्तेमाल किया है। इस स्मार्टफोन के डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक की है। यह फोन Google Tensor G5 प्रोसेसर पर काम करता है और इसके साथ 12GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज दिया गया है।
| Google Pixel 10 | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.3 इंच, OLED, 120Hz |
| प्रोसेसर | Tensor G5 |
| स्टोरेज | 12GB, 256GB |
| बैटरी | 4970mAh, 30W |
| कैमरा | 48MP, 13MP, 10.8MP, फ्रंट 10.5MP |
| OS | Android 16 |
इस फोन में 4,970mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 30W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। यह फोन डुअल सिम कार्ड के साथ आता है, जिसमें एक फिजिकल और एक eSIM दिया गया है। इस फोन में IP68 वाटर और डस्ट प्रूफ प्रोटेक्शन दिया गया है।
Google Pixel 10 के बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है। फोन में 48MP का मेन वाइड एंगल कैमरा मिलेगा। इसके साथ 13MP का अल्ट्रा वाइड और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 10.5MP का कैमरा मिलता है। यह Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।
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Opinion: मुस्लिम मोह ही विपक्ष को डूबा रहा? ममता बनर्जी ने भी वही गलती की जो तेजस्वी ने की
लोकसभा चुनाव 2024 में झटका खाने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीतियों में बड़ा बदलाव किया है. अब भाजपा का थ्री लेयर नेतृत्व है. एक संरक्षक मंडल का नेतृत्व है तो दूसरा नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिह वाला. तीसरा और प्रभावी नेतृत्व नितिन नबीन, जेपी नड्डा, देवेंद्र फणनवीस, हिमंत विस्व सरमा, सम्राट चौधरी और शुभेंदु अधकारी का बन या है. यह दूसरे दलों से भाजपा को अलग करता है. भाजपा में बदलाव की पूरी जानकारी तो सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन लगातार राज्यों में भाजपा की जीत यह संकेत करती है कि पैटर्न बदलने के सकारात्मक नतीजों से भाजपा उत्साहित है. हरियाणा, दिल्ली, बिहार, असम और बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा बड़ी ताकत बन कर उभरी है. उसकी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बंगाल में 15 साल का ममता राज छीना तो महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी अपना सीएम बनाने में आखिरकार सफलता पा ली. विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाए राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव की उम्मीदों पर तो ऐसा पानी फिरा कि राजनीति से उनका मन ही उचट गया लगता है. ऐसा क्यों है कि भाजपा लगातार बढ़ती जा रही है और विपक्षी पार्टियां अपना अस्त्तित्व बचाने के लिए जूझ रही हैं.
भाजपा की बहुसंख्यक राजनीति
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को बहुमत न मिलने के बावजूद उसके बाद के राज्य चुनावों में पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और उल्लेखनीय सफलता हासिल की. हरियाणा, दिल्ली, बिहार, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा या एनडीए की जीत ने यह संकेत दिया कि विपक्षी दलों की कुछ पुरानी रणनीतियां अब कम प्रभावी हो रही हैं. बंगाल में 15 वर्षीय ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस शासन को समाप्त कर भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि बिहार में महागठबंधन की उम्मीदों पर पानी फिर गया. राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को भी व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका लगा, जिससे विपक्षी खेमे में निराशा छाई हुई है. यह सब इसलिए हुआ कि भाजपा ने बहुसंख्यक की राजनीति करने का जहां दृढ़ निश्चय किया है, वहीं विपक्ष अब भी अल्पसंख्यकों के जरिए सफलता की उम्मीद पाले हुए है.
विपक्ष मुस्लिम मोह में पागल
विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और क्षेत्रीय पार्टियां, लंबे समय से मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर रही हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर इंडिया गठबंधन का साथ दिया, जिससे कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों की सीटें बढ़ीं. हालांकि, विपक्ष ने मुस्लिम समुदाय को आश्वासन देने की रणनीति पर अत्यधिक जोर दिया, जिससे बहुसंख्यक समुदाय से दूरी बढ़ी. राज्यों के हालिया चुनावों में विपक्ष का यह पैटर्न जारी रहा. बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में विपक्ष ने अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को प्राथमिकता दी. लेकिन भाजपा ने विकास, सुरक्षा, सांस्कृतिक जैसे फौरी और स्थानीय मुद्दों के अलावा हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद पर फोकस किया. परिणामस्वरूप विपक्ष को लगातार झटके लगे. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में मजबूत रही, लेकिन दक्षिण बंगाल और अन्य हिस्सों में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में गया. इसी तरह बिहार में तेजस्वी यादव के महागठबंधन को 2025 विधानसभा चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ा, जहां एनडीए ने भारी बहुमत हासिल किया. विपक्ष का यह मुस्लिम मोह ऐतिहासिक है. कई मौकों पर अल्पसंख्यक अपील ने उन्हें बहुसंख्यक वर्ग से अलग-थलग कर दिया. नतीजा यह कि मुस्लिम वोटों पर निर्भरता बढ़ने के बावजूद चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहा.
भाजपा का बड़ा हथियार राष्ट्रवाद
भाजपा ने राष्ट्रवाद को अपना प्रमुख हथियार बनाया. 2024 के बाद पार्टी ने संगठनात्मक बदलाव किए, उम्मीदवार चयन को सख्त बनाया और विकास के साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को जोड़ा. असम, बंगाल और अन्य राज्यों में भाजपा ने अवैध घुसपैठ, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर जोर दिया. असम में हिमंता बिस्वा सरमा की नेतृत्व वाली सरकार ने सीमा सुरक्षा और स्थानीय हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी. बंगाल में भाजपा ने ममता शासन में मुस्लिम तुष्टीकरण और गुंडागर्दी के खिलाफ अभियान चलाया. हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा की जीत का आधार बना. दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसी जीतों ने भी दिखाया कि भाजपा का राष्ट्रवादी एजेंडा– विकास, सुरक्षा और गर्व– व्यापक समर्थन हासिल कर रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में झटके के बाद पार्टी ने पैटर्न बदला. अधिक लोकल मुद्दों पर फोकस, बेहतर गठबंधन और ग्रासरूट संगठन के परिणाम सकारात्मक रहे.
राष्ट्रवाद ने भाजपा को क्षेत्रीय बाधाओं को पार करने में मदद की. बंगाल में पहली बार सत्ता हासिल कर पार्टी ने अपना विस्तार साबित किया. जान-समझ कर कांग्रेस या यों कहें कि पूरे विपक्ष ने राह नहीं बदली. कांग्रेस बार-बार अपनी रणनीति पर सवाल उठने के बावजूद मुस्लिम अपील वाली छवि से मुक्त नहीं हो पाई. 2014 की हार के बाद एके. एंटोनी समिति ने रिपोर्ट दी थी कि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की छवि ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. फिर भी, कांग्रेस ने राह नहीं बदली. 2024 में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं, मुख्य रूप से मुस्लिम वोटों के सहारे. लेकिन समग्र राष्ट्रीय प्रभाव सीमित रहा. राज्य चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा. बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में गठबंधन सहयोगी मुख्य भूमिका में थे, लेकिन कांग्रेस की स्वतंत्र पहचान अल्पसंख्यक-केंद्रित बनी रही. आलोचक कहते हैं कि जान-बूझकर यह रणनीति अपनाई जा रही है, जो लंबे समय में पार्टी को बहुसंख्यक वर्ग से दूर कर रही है.
शाहबानो मामले में कांग्रेस का रुख
1985 का शाहबानो मामला कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति का क्लासिक उदाहरण माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाहबानो को गुजारा भत्ता देने का फैसला दिया, लेकिन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 1986 लाकर फैसले को पलट दिया. इससे महिला अधिकारों पर सवाल उठे और पार्टी पर अल्पसंख्यक वोट बैंक बचाने का आरोप लगा. यह घटना आज भी कांग्रेस की आलोचना का विषय है. भाजपा इसे बार-बार उठाती है कि कांग्रेस ने संवैधानिक मूल्यों से ऊपर वोट बैंक को रखा. ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर भी कांग्रेस का रुख इसी पैटर्न का हिस्सा रहा. इसने पार्टी की सेकुलर छवि को तुष्टीकरण के रूप में स्थापित किया. इसका असर चुनावी राजनीति पर पड़ा.
एंटनी ने हार की असल वजह बताई
2014 की भारी हार के बाद कांग्रेस की जांच समिति के प्रमुख एके एंटनी ने स्वीकार किया कि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की छवि ने बहुसंख्यक समुदाय से पार्टी को अलग कर दिया. उन्होंने सलाह दी कि कांग्रेस को हिंदू और अल्पसंख्यक दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए. फिर भी पार्टी ने इस सलाह पर ध्यान नहीं दिया. 2022-23 में भी एंटोनी ने यही बात दोहराई कि फासीवाद के विरोध के नाम पर बहुसंख्यक समुदाय को साथ लेना जरूरी है. कांग्रेस की निरंतर हार या सीमित सफलता का एक कारण यही माना जाता है कि वह बहुसंख्यक भारत की आकांक्षाओं को पूरी तरह समझने और प्रतिबिंबित करने में असफल रही. यही वजह रही कि 2024 के बाद भाजपा की राज्य स्तर पर सफलताएं अधिक दिख रही हैं. बंगाल में ममता का अंत और बिहार में तेजस्वी को झटका यह दर्शाती हैं कि मतदाता अब विकास, राष्ट्रवाद और समावेशी अपील को प्राथमिकता दे रहे हैं. विपक्ष अगर मुस्लिम मोह से ऊपर नहीं उठा तो आगे भी चुनौतियां न सिर्फ बनी रहेंगी, बल्कि इनके और गंभीर होने का खतरा बढ़ेगा.


