Saturday, July 18, 2026
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सोनम वांगचुक पर ‘एक्शन’ से भड़की AAP: केजरीवाल बोले- सत्ता का इतना अहंकार ठीक नहीं; संजय का दावा- सरकार संसद कूच से डरी – New Delhi News




दिल्ली में 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने और युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने सरकार के इस कदम की तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए इसे ‘तानाशाही’ करार दिया है। ‘कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय व्यवस्था सुधारो’ अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “इतना अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी। कॉकरोच आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारो। सोनम वांगचुक के साथ ज़बरदस्ती मोदी सरकार की हार है।” दूसरी तरफ आप’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक अपनी जान दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जो पिछले कुछ समय में हुए 93 पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो चुके हैं। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक के 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च से बुरी तरह डर गई थी। संजय सिंह ने कहा कि 59 साल के सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे और अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे जो 93 पेपर लीक से बर्बाद हो चुके थे। वे युवा बेबस थे और उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। भारत के प्रधानमंत्री ने 21 दिन तक उनसे बात नहीं की और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझा। सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने के लिए नहीं आया कि आखिर वे क्यों अपनी जान देने पर आमादा हैं?

प्रधानमंत्री को पता था कि यह आवाज बहुत बड़ी बनने वाली है, इसलिए उन्होंने दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बदलकर एक ऐसा पुलिस कमिश्नर बिठाया जिससे सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जा सके। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि अभिजीत दिपके को भी डिटेन कर लिया गया है।

सत्ता का यह अहंकार यही नौजवान खत्म करेगा और जिसके ऊपर आज लाठियां बजाई जा रही हैं, वही इस सत्ता को उखाड़ कर फेंकेगा। इसलिए मैं देश के युवाओं से अपील करना चाहता हूं कि सोनम वांगचुक का साथ दीजिए और अपने आंदोलन को कमजोर ना पड़ने दीजिए।



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उज्जैन में PFCMB वाल्व चोरी कर रहे युवक की पिटाई: नर्मदा परियोजना में इजराइल से मंगाए गए थे उपकरण, मारपीट का VIDEO – Ujjain News


उज्जैन जिले के तराना क्षेत्र में शुक्रवार शाम नर्मदा परियोजना से इजराइल से मंगाए गए कीमती उपकरण चोरी करने वाले एक आरोपी को अधिकारियों और ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी।

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घटना का VIDEO भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोपी के पास से इजराइल से मंगाए गए 28 पीएफसीएमबी (PFCMB) वाल्व बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों की लगातार चोरी से क्षेत्र के 55 गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था।

चोरी के वाल्व दिखाता युवक।

वाल्व की मदद से पानी की सप्लाई कंट्रोल होती है

नर्मदा परियोजना में आईआर पद पर पदस्थ अधिकारी रितेश दीक्षित ने बताया कि तराना, शाजापुर, मक्सी और महिदपुर के ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए 1,540 ओएमएस (OMS) बॉक्स लगाए गए हैं। इन बॉक्स में इजराइल से मंगाए गए विशेष पीएफसीएमबी वाल्व लगाए गए हैं, जिनकी भारत में उपलब्धता बेहद मुश्किल है। इन वाल्व की मदद से अधिकारी कंट्रोल रूम या कार्यालय से ही पानी की सप्लाई चालू और बंद कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से ग्राम करंज, नाटाखेड़ी, बघेरा और पल्दुना सहित अन्य क्षेत्रों से इन कीमती वाल्वों की लगातार चोरी हो रही थी। इससे विभाग के सामने जलापूर्ति व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया था। चोरों को पकड़ने के लिए विभाग ने कर्मचारियों को अलर्ट कर नियमित गश्त शुरू कर दी थी।

इसी दौरान नाटाखेड़ी प्रोजेक्ट पर तैनात कर्मचारी बलराम गुर्जर ने एक संदिग्ध युवक को ओएमएस बॉक्स से वाल्व निकालते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम दरबार सिंह पिता चरणसिंह गुर्जर, निवासी भैसाखेड़ी, थाना टोंक खुर्द, जिला देवास बताया। आरोपी के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने उसकी जमकर पिटाई कर दी।

आरोपी के पास मौजूद काले रंग के बैग की तलाशी लेने पर चोरी किए गए 28 पीएफसीएमबी वाल्व बरामद हुए। अधिकारियों के अनुसार एक वाल्व की कीमत करीब ₹2,400 है। इस हिसाब से बरामद सामान की कीमत ₹67,200 से अधिक है। परियोजना में कुल 4,250 वाल्व लगाए गए हैं, जिनमें से कई पहले ही चोरी हो चुके थे।

घटना के बाद अधिकारियों ने आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि यह किसी संगठित गिरोह की करतूत प्रतीत होती है और मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।



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दरभंगा में नेपाल की बारिश का असर: कोसी-कमला बलान नदियों का जलस्तर बढ़ा, 20 गांव में घुसा बाढ़ का पानी; मुख्याल से संपर्क कटा – Darbhanga News




नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कोसी बैराज से छोड़े गए पानी का असर दरभंगा में दिख रहा है। लगातार चौथे दिन कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर बढ़ने से कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों के आवागमन, शिक्षा, रोजगार और दैनिक जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंडों में भी बाढ़ का पानी आबादी और खेतों तक पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। तीन प्रखंड में करीब 20 गांव प्रभावित हैं। छह गांव बने टापू, सड़क संपर्क पूरी तरह टूटा कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड की इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियां, बलथरवा और बसबरिया और सूघराईन पंचायत के भरैन टोला चारों ओर से पानी से घिरा है। गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट जाने से हजारों लोग घरों में फंस गए हैं। अब गांव से बाहर निकलने का एकमात्र सहारा नाव ही बची है। नाव से तय हो रहा स्कूल, बाजार और अस्पताल का सफर ग्रामीणों ने बताया कि बाजार जाने, दवा लाने, बैंक का काम करने या मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी नाव संचालक एक बार आने-जाने के लिए प्रति व्यक्ति 40 रुपए किराया वसूल रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इटहर गांव के रविन्द्र राय, राम जप्पो राय, राजेश राय, जय कुमार पोद्दार, रेणु देवी, रुणा देवी, टुनो सदा और भोला सदा समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी नाव की संख्या पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की है कि अधिक सरकारी नावों की व्यवस्था की जाए और उन पर सरकारी पहचान चिन्ह लगाया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। स्कूलों में पठन-पाठन ठप बाढ़ का सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मिनियां और प्राथमिक विद्यालय इटहर पोखर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। विद्यालय परिसर में पानी भर जाने के कारण दोनों स्कूलों में पठन-पाठन पूरी तरह बंद है। वहीं, मध्य विद्यालय बर्निया के शिक्षक भी नाव के सहारे विद्यालय पहुंच रहे हैं। अगर जलस्तर में और वृद्धि हुई तो अन्य विद्यालयों में भी शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
रोजमर्रा की जरूरतें बनी चुनौती बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न, स्वच्छ पेयजल, दवा और पशु चारे की समस्या गहराने लगी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पहले से जमा राशन के सहारे दिन काट रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों के सामने संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्यालय से संपर्क टूटा, अन्य पंचायतों पर भी खतरा बाढ़ के पानी से कुशेश्वरस्थान मुख्यालय से प्रभावित गांवों का सीधा सड़क संपर्क टूट गया है। उसरी, उजुआ, सिमरटोका और तिलकेश्वर पंचायत के निचले इलाकों में भी तेजी से पानी फैल रहा है। अगर जलस्तर में जल्द कमी नहीं आई तो और अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। घनश्यामपुर और किरतपुर में भी बढ़ा खतरा बाढ़ का असर अब घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखंडों में भी दिखने लगा है। पानी खेतों में प्रवेश कर चुका है और कई निचले इलाकों की आबादी प्रभावित होने लगी है। दोनों प्रखंडों में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने के लिए माइकिंग कराई जा रही है। कई विद्यालयों के परिसर में पानी भर जाने से वहां भी पठन-पाठन प्रभावित होने लगा है। राहत की मांग तेज बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त सरकारी नावों की व्यवस्था, राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, पशु चारा और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते पर्याप्त राहत नहीं मिली तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। लोगों के लिए सरकारी नाव उपलब्ध कुशेश्वरस्थान पूर्वी के अंचलाधिकारी राकेश रोशन भारती ने बताया कि फिलहाल प्रखंड में पांच सरकारी नावें संचालित की जा रही हैं। इनमें इटहर पंचायत में तीन और सूघराईन पंचायत के भरैन टोला में दो नाव लगाई गई हैं। जहां भी अतिरिक्त नाव की आवश्यकता होगी, वहां तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।



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यहां मिनी समोसे के साथ परोसी जाती है खास तीसी की चटनी और भुनी हरी मिर्च, लगती है लाइन


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Muzaffarpur Famous Mini Samosa: मुजफ्फरपुर के कलमबाग चौक पर गोलू कुमार समोसे की दुकान लगाते हैं. इनकी यह मिनी समोसे की दुकान करीब 13 साल पुरानी है जहां पहले ढ़ाई रुपये में एक समोसा मिलता था और अब 15 रुपये प्लेट में तीन समोसे मिलते हैं. इनका स्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं.

मुजफ्फरपुर. बढ़ती महंगाई के बीच जहां खाने-पीने की अधिकांश चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं मुजफ्फरपुर के कलमबाग चौक स्थित एक छोटी-सी समोसे की दुकान आज भी अपने स्वाद और किफायती कीमत के कारण लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है. यहां मिलने वाला मिनी समोसा इतना लोकप्रिय है कि शाम होते ही दुकान के बाहर ग्राहकों की लंबी कतार लग जाती है. कई बार लोगों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ता है.

दुकान संचालक गोलू कुमार बताते हैं कि वे पिछले 13 सालों से इस दुकान का संचालन कर रहे हैं. शुरुआत में वे एक समोसा ढाई रुपये में बेचते थे, लेकिन समय के साथ लागत बढ़ने पर अब 15 रुपये में तीन मिनी समोसे की एक प्लेट दी जाती है. इसके बावजूद ग्राहकों की भीड़ में कोई कमी नहीं आई है.

चटनी और भुनी हरी मिर्च का स्वाद
गोलू कुमार के अनुसार, उनकी दुकान की सबसे बड़ी पहचान यहां की विशेष चटनी है, जिसे आलू और तीसी के साथ स्थानीय मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है. यही चटनी मिनी समोसे के स्वाद को अलग पहचान देती है. इसके अलावा यहां बनने वाले समोसे में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे इसे हर वर्ग के लोग पसंद करते हैं. समोसे के साथ परोसी जाने वाली चटनी और भुनी हुई हरी मिर्च का स्वाद ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है.

हर दिन बिकती है 1000 प्लेट
उन्होंने बताया कि दुकान पर सुबह के समय लिट्टी-चना मिलता है, जबकि दोपहर करीब 2 बजे के बाद मिनी समोसे की बिक्री शुरू होती है. शाम होते-होते यहां इतनी भीड़ हो जाती है कि लगातार समोसे तलने पड़ते हैं. हर दिन 500 से 1000 प्लेट तक समोसे बिक जाते हैं.

इस दुकान पर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारी भी शाम के नाश्ते के लिए नियमित रूप से पहुंचते हैं. वहीं, दूसरे जिलों से मुजफ्फरपुर आने वाले लोग भी यहां का मशहूर मिनी समोसा चखने के बाद अपने परिवार और दोस्तों के लिए पैक कराकर भी ले जाते हैं.

गोलू कुमार कहते हैं कि उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि ग्राहकों को शुद्ध, ताजा और घर जैसा स्वाद मिले. शायद यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस छोटी-सी दुकान की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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व्यवस्था में रहने के लिए समझौता क्यों करूं: SDM पद से हटाए जाने के बाद IAS रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया पर लिखी मन की बात – Jalaun News




जालौन तहसील से एसडीएम में पद से हटाए जाने के बाद आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा किए हैं। उनके इन पोस्टों में प्रशासनिक व्यवस्था, व्यक्तिगत सिद्धांतों, सुशासन और सेवा के दौरान मिलने वाले अवसरों को लेकर गंभीर विचार व्यक्त किए गए हैं। उनके संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपने एक पोस्ट में IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने लिखा कि जब वह स्वयं की तुलना उन लोगों से करते हैं जो व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो उन्हें आत्मग्लानि महसूस होती है। उन्होंने कहा कि केवल व्यवस्था में अपनी जगह बनाए रखने के लिए स्वयं को धोखा देना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि सभी लोग समझौता कर लें तो बदलाव संभव नहीं होगा, इसलिए कम से कम कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिन्हें देखकर अन्य लोग तुलना कर सकें और यह न कहें कि “सब एक जैसे हैं।” उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद देते हुए लिखा कि उनकी प्रतिक्रियाओं ने उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया। इसके बाद उन्होंने बताया कि व्यवस्था को जागृत करने के उद्देश्य से उन्होंने एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि जनपद जालौन में उन्हें उपजिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात किए जाने की परिस्थितियों में उनसे कोई त्रुटि हुई हो तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि दंड प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह किसी तहसील, यथासंभव तहसील जालौन, में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाए, ताकि उन्हें पर्याप्त फील्ड एक्सपोजर और प्रशासनिक क्षमता विकसित करने का अवसर मिल सके। राही ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि यदि जालौन में ऐसी तैनाती संभव न हो तो उत्तर प्रदेश के किसी भी ऐसे जनपद में उन्हें उपजिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए,
जहां लिखित व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप सुशासन (Basic Governance) लागू करने में किसी प्रकार की प्रशासनिक या राजनीतिक बाधा न हो। यदि यह भी संभव न हो तो उन्होंने अपने कैडर परिवर्तन की अनुमति और संस्तुति देने का अनुरोध किया है।

उन्होंने पोस्ट के माध्यम से कहा कि अंतिम निर्णय होने तक वह 22 जुलाई 2026 से अपने कार्य के अनुरूप आधा वेतन लेने का निर्णय कर रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि इस निर्णय को अनुशासनहीनता न माना जाए बल्कि सद्भावपूर्वक स्वीकार किया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगले सप्ताह “Leadership, Ethics and Organisational Effectiveness” विषय पर होने वाले प्रशिक्षण के बाद उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिल सकता है, इसलिए आधा वेतन लेने की तिथि प्रशिक्षण के बाद से निर्धारित की गई है।

15 जुलाई की अपनी पोस्ट में रिंकू सिंह राही ने लिखा कि उनके मन में हमेशा यह द्वंद्व रहता है कि यदि आमजन का भला करना है तो पद पर बने रहना आवश्यक है, लेकिन पद पर बने रहने के लिए कई बार सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता है। उन्होंने आगे लिखा कि उन्हें यह बात याद आती है कि “सदमार्ग में मात्रा से अधिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है, जीवन लंबा नहीं बल्कि महान होना चाहिए।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास कर रहे विद्यार्थियों और आम लोगों को देखकर उन्हें स्वयं पर शर्म आती है, क्योंकि लोग अपना समय निकालकर व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे लोगों का समर्पण उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

रिंकू सिंह राही की इन पोस्टों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन पोस्टों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल उनके विचार और मांगें सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।



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फर्जीवाड़े का नया पैंतरा है बॉस स्कैम, सेबी ने बताया इससे बचने का तरीका


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Boss Scam Alert : बाजार नियामक सेबी ने बॉस स्कैम को लेकर अलर्ट जारी किया है. सेबी ने कहा है कि ठगी करने वालों ने नया पैंतरा निकाला है बॉस स्कैम और इसकी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. ठगी के इस नए पैंतरे में स्कैमर्स कर्मचारियों को बॉस बनकर कॉल करते हैं और उन पर पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं.

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सेबी ने सभी कर्मचारियों को बॉस स्कैम के प्रति आगाह किया है.

नई दिल्ली. सुरक्षा एजेंसियां, सरकार और आम आदमी जालसाजों और फर्जीवाड़ा करने वालों से बचने के जितने तरीके खोजते हैं, उससे एक कदम आगे ठग रहते हैं. अब ठगों ने आम आदमी की जेब से पैसे उगाहने का नया तरीका अपनाया है, बॉस स्कैम. बाजार नियामक सेबी ने भी इस बारे में चेतावनी दी है और कहा है कि इस तरह के स्कैम का सीधा निशाना कर्मचारी बन सकते हैं. आखिर यह बॉस स्कैम है क्या और कैसे काम करता है. इससे कैसे बचा जा सकता है, इसकी पूरी जानकारी होना जरूरी है.

बॉस स्कैम इतना गंभीर मसला है कि खुद भारतीय बाजार नियामक सेबी ने इस साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ चेतावनी जारी की है. सेबी ने बताया है कि इस तरह की धोखाधड़ी में स्कैमर्स कंपनियों के सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के रूप में कर्मचारियों को कॉल करते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं. सेबी ने इस चालबाजी को ‘बॉस स्कैम’ का नाम दिया है और कहा है कि इस बारे में चेतावनी भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर से ऐसे अपराध बढ़ने की जानकारी मिलने के बाद जारी की गई है.

कैसे करते हैं बॉस स्कैम
सेबी ने बताया है कि धोखेबाज ईमेल, व्हाट्सऐप, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जिरये वित्त अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं. फर्जीवाड़ा करने के लिए ठक संबंधित कंपनी के सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कॉल करते हैं और अपने खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं. कर्मचारी पहले से ही बॉस का नाम सुनकर प्रभाव में आ जाता है और उससे पैसे ऐंठना आसान हो जाता है.

मैलवेयर फाइल भेजकर धोखाधड़ी
सेबी ने बताया है कि धोखाधड़ी करने का एक और तरीका काफी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें कर्मचारियों को मैलवेयर फाइलें भेजकर डाटा हैक किया जाता है. इस मैलवेयर के जरिये कर्मचारियों की डिटेल हैक हो जाती है और उसका डाटा स्कैमर्स के पास चला जाता है. इसके बाद संबंधित कर्मचारी का वॉट्सऐप खोलकर अन्य लोगों तक पहुंच बनाना आसान हो जाता है. ठग जिस कर्मचारी का वॉट्सऐप हैक करते हैं, उसके अकाउंट से अन्य लोगों को संपर्क करके पैसे मांगते हैं.

सेबी ने बताया बचने का तरीका
सेबी ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि ऐसे ठगों से बचने का एक ही तरीका है कि सोशल मीडिया से आने वाले किसी भी संदेश पर तत्काल प्रतिक्रया नहीं करनी चाहिए. अगर ऐसे किसी माध्यम से कोई आपसे पैसे डालने के लिए कहता है तो निश्चत रूप से यह स्कैम हो सकता है. अगर कोई आपके किसी परिचित के नाम से कॉल करता है और पैसे मांगने की कोशिश करता है तो पहले अपने परिचित से संपर्क करके इस बारे में पुष्टि जरूर करें.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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फलोदी क्षेत्र में दो दिन में तीसरा लेपर्ड रेस्क्यू: कई दिनों से चल रही थी निगरानी, ग्रामीणों को मिली राहत – Sawai Madhopur News




सवाई माधोपुर के समीपवर्ती फलोदी क्षेत्र में रणथंभौर टाइगर रिजर्व की वन टीम ने शुक्रवार रात एक और लेपर्ड का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। पिछले दो दिनों में यह तीसरा लेपर्ड है, जिसे वन विभाग ने पकड़ा है। क्षेत्र में लेपर्ड की लगातार गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग कई दिनों से विशेष निगरानी और रेस्क्यू अभियान चला रहा था। दो दिन में तीसरा लेपर्ड पकड़ा रणथंभौर टाइगर रिजर्व के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि फलोदी क्षेत्र में लेपर्ड की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग की टीम विशेष रेस्क्यू और निगरानी अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत शुक्रवार रात एक और लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इससे पहले भी टीम दो लेपर्ड को पकड़ चुकी है, जिन्हें बाद में जंगल में छोड़ दिया गया। कई दिनों से चल रही थी निगरानी डीएफओ ने बताया कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग पिछले कई दिनों से क्षेत्र में 24 घंटे विशेष निगरानी और सघन गश्त कर रहा था। वन विभाग की टीम ने वैज्ञानिक रणनीति, सतर्कता और धैर्य के साथ अभियान चलाकर लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू किया। ग्रामीणों को मिली राहत वन विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई से फलोदी क्षेत्र के लोगों को राहत मिली है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका कम हुई है। इन अधिकारियों ने संभाली जिम्मेदारी पूरे अभियान के दौरान सहायक वन संरक्षक (ACF) अजय, रेंज अधिकारी फलोदी राज बहादुर, नाका प्रभारी सुमन, जसकरण और रणथंभौर टाइगर रिजर्व की वन टीम ने लगातार क्षेत्र में निगरानी, ट्रैकिंग और रेस्क्यू अभियान चलाया।



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दावा-होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों में विस्फोट: US का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला; ईरान बोला-जमीनी हमले हुए तो कुवैत-बहरीन में घुस जाएंगे




ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों में विस्फोट हो गया। IRGC ने बताया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की गलत जानकारी के कारण दोनों टैंकर समुद्र में बिछी माइंस से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को झूठा बताया। वहीं, CENTCOM ने कहा कि उसने लगातार सातवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों, हथियार भंडार और समुद्री सैन्य क्षमताओं पर हमले किए। अल जजीरा के मुताबिक, इन हमलों में सीरिक, बुशेहर, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और यज्द को निशाना बनाया गया। उधर, ईरानी सांसद अहमद बख्शायेश अर्देस्तानी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया, तो ईरान कुवैत और बहरीन में घुस जाएगा और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तबाह कर देगा। CENTCOM ने ईरान पर हमलों का यह वीडियो जारी किया… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…



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सुप्रीम कोर्ट बोला- यात्रियों को सेकेंड क्लास कहना गलत: यह शब्द रेलवे कोच के लिए; ट्रेन हादसे के पीड़ित ​को 10 साल बाद ₹8 लाख मुआवजा


नई दिल्ली/भोपाल10 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी यात्री की श्रेणी उसके खर्च से तय नहीं होनी चाहिए। रेलवे के नियमों में इस्तेमाल होने वाले ‘सेकेंड क्लास पैसेंजर’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि ‘सेकेंड क्लास’ का संबंध कोच से होना चाहिए, यात्री से नहीं।

कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल का फैसला पलटते हुए ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार को 8 लाख रुपए मुअवाजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मृत यात्री के पास टिकट नहीं मिलने भर से उसके परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।

जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर मुअवाजा राशि जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। देरी होने पर दावा दायर करने की तारीख से 8% सालाना ब्याज भी देना होगा।

10 साल पहले ट्रेन से गिरकर हुई थी मौत

मामला नवंबर 2015 का है। मध्य प्रदेश के चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। यात्रा के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद उनका बैग भी गायब हो गया, जिसमें टिकट होने की बात कही गई थी।

टिकट बरामद नहीं होने पर रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और बाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें बोना फाइड यात्री नहीं माना और मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब दोनों फैसलों को पलट दिया और मृतक चंद्रकांत ठक्कर की पत्नी लता ठक्कर को मुआवजा देने का आदेश दिया।

वैध यात्री का दर्जा सिर्फ टिकट नहीं मिलने से खत्म नहीं होता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए इसकी संकीर्ण नहीं, बल्कि उदार व्याख्या होनी चाहिए। सिर्फ टिकट बरामद नहीं होने से किसी व्यक्ति का वैध यात्री (बोना फाइड पैसेंजर) होना समाप्त नहीं हो जाता। दावेदार शपथपत्र और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना प्रारंभिक दावा साबित कर सकता है। इसके बाद दावे को गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे की होगी।

रेलवे और यात्रियों, दोनों की जिम्मेदारी

कोर्ट ने कहा कि ट्रेन हादसों की पूरी जिम्मेदारी केवल रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना होगा। चलती ट्रेन पकड़ना, दरवाजे पर लटककर सफर करना और अनावश्यक जोखिम उठाना खतरनाक है। हालांकि कई बार यात्रियों के सामने व्यावहारिक मजबूरियां होती हैं, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए सावधानी जरूरी है।

रेलवे से कहा- भीड़भाड़ रोकें, स्टाफ बढ़ाएं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भीड़भाड़ वाली ट्रेनों से गिरने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। रेलवे ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए नियम बनाए हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन जरूरी है। अदालत ने रेलवे में पर्याप्त स्टाफ बढ़ाने की भी सलाह दी, ताकि टिकट जांच, भीड़ नियंत्रण और आपात स्थिति में त्वरित सहायता जैसी व्यवस्थाएं बेहतर हो सकें। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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लखनऊ के विभिन्न इलाकों में हुई बिजली कटौती: दुबग्गा में ट्रांसफार्मर में लगी आग , कटौती से नाराज लोगों ने उपेंद्र घेरा, नाला निर्माण में अंडरग्राउंड केबल कटी – Lucknow News




लखनऊ में शुक्रवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली गुल हुई। खराब मौसम के कारण बिजली कटौती और बाधा उपभोक्ताओं को झेलना पड़ा। LDA की लापरवाही बिजली सप्लाई ध्वस्त हो गई। कबीर नगर में नाला निर्माण के दौरान अंडरग्राउंड केबल कटने से एक दर्जन कॉलोनियों में देर रात तक अंधेरा रहा। बत्ती गुल होने के बाद स्थानीय लोगों को पानी की भी परेशानी उठानी पड़ी। कबीर नगर उपकेंद्र पर शुक्रवार शाम करीब 5.30 बजे बत्ती गुल हो गई । चुन्नूखेड़ा तिराहे के पास परसादी खेड़ा रोड पर एलडीए द्वारा नाले का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस दौरान सड़क की खुदाई करते समय की अंडरग्राउंड केबल कट गई। केबल कटने से पंडितखेड़ा, काशीराम कॉलोनी सदरौना, शुभम सिटी, गोल्ड सिटी, कृष्ण विहार कॉलोनी, रामदास खेड़ा, बजरंग सिटी, परसादी खेड़ा, आर्यपुरम और राधेबाग कॉलोनी समेत एक दर्जन से अधिक वीआईपी और घनी आबादी वाले इलाकों की बिजली ठप हो गई। बिजली कटौती से लगभग 30 हजार आबादी परेशान हो गई। उपभोक्ताओं ने उपकेंद्र से लेकर टोल-फ्री नंबर 1912 पर कई बार शिकायत किया। सूचना पर जूनियर इंजीनियर और विभागीय कर्मचारी फाल्ट ठीक करने मौके पर पहुंचे, लेकिन केबल बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण देर रात तक आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी थी। नगराम के 50 गांवों में ठप रही सप्लाई दुबग्गा के मछली मंडी इलाके में एक ट्रांसफार्मर में भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई। स्थानीय निवासियों ने तत्काल इसकी जानकारी देने के लिए उपकेंद्र से लेकर संबंधित एक्सईएन तक के मोबाइल पर फोन मिलाए। स्थानीयों के आरोप हैं किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया । नाराज नागरिकों और भारतीय किसान यूनियन (हिन्दुस्तान) के पदाधिकारियों ने उपकेंद्र घेराव करके नारेबाजी और प्रदर्शन किया। चौक में गुल रही बत्ती पुराने लखनऊ के चौक घंटाघर उपकेंद्र के दुर्गा मार्ग फीडर में केबल फाल्ट होने से लगभग 4 घंटे तक बिजली गुल रही। फैजुल्लागंज के गायत्री नगर और हरिओम नगर में भी लोग बिजली कटौती से परेशान रहे । वहीं, सरोसा उपकेंद्र के शिवग्राम पंचायत में दिनभर बिजली की आंख-मिचौली चलती रही, जबकि अलीगंज के चंद्रलोक फीडर के तहत दिन में एक घंटे की अघोषित कटौती की गई। अचानक बिजली कटौती से लोगों ने काफी नाराजगी जताई।



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