Monday, May 11, 2026
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गैर-ब्राह्मणवाद पर विजय की परीक्षा शुरू, हैरान कर देगा तमिलनाडु का सियासी खेल!


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गैर-ब्राह्मणवाद पर विजय की परीक्षा शुरू, हैरान कर देगा तमिलनाडु का सियासी खेल!

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तमिलनाडु की राजनीति भारत के सबसे अनोखे राजनीतिक इतिहासों में गिनी जाती है. इसकी शुरुआत गैर-ब्राह्मण आंदोलन और जस्टिस पार्टी से हुई, जिसने सामाजिक न्याय और आरक्षण की नींव रखी. बाद में पेरियार के द्रविड़ आंदोलन, डीएमके के उदय, हिंदी विरोधी आंदोलन और एआईएडीएमके के गठन ने राज्य की राजनीति को नई दिशा द. करुणानिधि और जयललिता के दशकों लंबे सत्ता संघर्ष ने तमिलनाडु को द्विध्रुवीय राजनीति का केंद्र बना दिया. अब थलापति विजय की टीवीके पार्टी नई राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है, जिससे राज्य की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है.

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क्‍या तमिलनाडु के नए सीएम थलापति विजय पुरानी द्रविडियन पॉलिटिक्‍स पर आगे बढ़ेंगे या फिर विकास की नई राजनीति को बढ़ावा देंगे?

Tamil Nadu, Anti-Brahmin Dravidian Politics & Thalapathy Vijay: आखिरकार एक लंबे सस्‍पेंस के बाद तमिलनाडु के 13वें मुख्‍यमंत्री के तौर पर अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने शपथ ले ली है. थलापति के शपथ ग्रहण के साथ तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरूआत की बात कही जा रही है. हालांकि, लोगों की जिज्ञासा अभी भी यह जानने को लेकर है कि थलापति का नया युग तमिलनाडु के साथ द्रविडियन पॉलिटिक्‍स को किस दिशा में लेकर जाएगा.

दरअसल यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्‍यों कि बीते कई दशकों से तमिलनाडु में द्रविडियन पॉलिटिक्‍स का बोलबाला रहा है. 1916 में ब्राह्मणों के विरोध से जन्‍मी द्रविडियन पॉलिटिक्‍स की बदलौत डीएमके और एआईएडीएमके ने बीते 1967 के बाद लेकर अब तक तमिलनाडु पर राज किया है. 2026 के विधानसभा चुनाव में जनादेश काफी हद तक डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ रहा. शायद इसी वजह से भी लोगों की निगाह थलापति की तरफ है कि वह फिर जातिगत राजनीति को बढ़ावा देंगे या फिर विकास को प्राथमिकता.

तमिलनाडु का हैरान करने वाला सियासी खेल!

  1. द्रविडियन राजनीति की नींव: तमिलनाडु की राजनीति की असली नींव 20वीं सदी की शुरुआत में रखी गई थी. उस समय भारत में ब्रिटिश शासन का शासन था. मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों में ब्राह्मणों का दबदबा था. भले ही ब्राह्मण आबादी में अल्पसंख्यक थे, लेकिन वे उच्च पदों पर आसीन थे. इसी असंतोष की वजह से गैर-ब्राह्मण आंदोलन ने जन्‍म लिया.
  2. 1916 में हुआ जस्टिस पार्टी का गठन: तमिलनाडु की द्रविडियन पॉलिटिक्‍स की तरफ पहला और अहम कदम जस्टिस पार्टी का गठन था. डॉ टीएम नायर और पी त्यागराज चेट्टी जैसे दिग्गज नेताओं ने सबसे पहले ‘साउथ इंडियन लिबरल फेडरेशन’ (SILF) की स्थापना की, जिसे जनता के बीच ‘जस्टिस पार्टी’ के नाम से लोकप्रियता मिली. आगे चलकर यह पार्टी गैर-ब्राह्मण आंदोलन का प्रतीक बन गई.
  3. गैर-ब्राह्मण आंदोलन की शुरुआत: कहा जाता है कि डॉ टीएम नायर और पी त्यागराज चेट्टी ने जस्टिस पार्टी बनाकर एक तरह का सामाजिक विद्रोह कर दिया था. इस पार्टी ने मद्रास प्रेसीडेंसी में गैर-ब्राह्मणों के लिए नौकरियों, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण की मांग की थी. यही वो बीज था जो बाद में सामाजिक न्‍याय के सिद्धांत के तौर पर विकसित हुआ.
  4. पेरियार ने आंदोलन को दी नई दिशा: उस समय के बड़े नेताओं में एक नेता ईवी रामास्वामी भी थे, जिन्हें सभी पेरियार के नाम से जानते हैं. उनकी गिनती इस आंदोलन के सबसे कट्टर आलोचकों में होती थी. उनका मानना था कि सामाजिक न्याय के आंदोलन को राजनीति से अलग रहना चाहिए. क्योंकि, राजनीति में भ्रष्टाचार मूल विचारधारा को दूषित कर देता है. उनकी यही विचारधारा ने बाद में आंदोलन को जाति-विरोधी दिशा दी.
  5. हिंदी का शुरू हुआ तमिलनाडु में विरोध: आजादी की लड़ाई के समय कांग्रेस हिंदी को देश की भाषा बनाना चाहती थी. लेकिन तमिलनाडु के लोगों ने इसका विरोध किया. उन्हें लगा कि उन पर उत्तर भारत की संस्कृति और भाषा जबरदस्ती थोपी जा रही है. हिंदी विरोधी आंदोलन से गैर-ब्राह्मण आंदोलन को लोगों का ज्यादा समर्थन मिला. इसके बाद यह आंदोलन सिर्फ जाति की बात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तमिल लोगों की पहचान और सम्मान की लड़ाई बन गया.

डीएमके के उदय से बंटवारे तक का सफर

  1. 1944 में बनी द्रविड़ कड़गम (डीके): जस्टिस पार्टी के पतन के बाद, द्रविड़ आंदोलन ने एक नया आकार लेना शुरू किया, जिसने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया. पेरियार ने जस्टिस पार्टी का पुनर्गठन कर ‘द्रविड़ कड़गम’ का गठन किया. यह एक गैर-राजनीतिक संगठन था, जो समाज सुधार पर केंद्रित था. इसकी प्रमुख मांग एक अलग ‘द्रविड़नाडु’ की थी. वह द्रविड़ों के लिए अगल स्‍वतंत्र राष्‍ट्र चाहते थे. उन्हें लगता था कि भारत में द्रविड़ों की उपेक्षा होगी.
  2. 1949 में हुआ डीएमके का जन्म: सीएन अन्‍नादुराई (अन्‍ना) न ही पेरियार के द्रविड़नाडु की मांग का समर्थन करते थे और ना ही वह संसदीय राजनीति को नकारने के रवैये से सहमत नहीं थे. उनका मानना था कि बदलाव सिर्फ़ सड़क पर नहीं, बल्कि विधानसभा के अंदर बैठकर लाना होगा. इस मतभेद के कारण उन्होंने 1949 में ‘द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम’ (डीएमके) की स्थापना की. डीएमके ने अलग द्रविड़नाडु की मांग को छोड़कर ‘संघीय ढांचे में अधिकारों’ की मांग शुरू कर दी.
  3. 1967 की डीएमके को मिली बड़ी जीत: 1960 के दशक में कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर हिंदी को एकमात्र राजभाषा बनाने का प्रयास शुरू कर दिया. इससे पूरे राज्य में विरोध की भयंकर आग लग गई. इन हिंदी विरोधी दंगों की अगुवाई डीएमके ने अन्‍नादुराई कर रहे थे. उनकी मांग थी कि हिंदी थोपो नहीं, अंग्रेजी बनाए रखो. 1967 के चुनावों में इस हिंदी विरोधी आंदोलन का असर दिखा. डीएमके ने भारी जीत हासिल कर कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया.
  4. अन्‍नादुराई बने डीएमके के पहले सीएम: विधानसभा चुनाव में जबरदस्‍त जीत के बाद डीएमके ने सीएन अन्नादुराई डीएमके को अपने पहले मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी पर बैठाया. दुर्भाग्यवश, 1969 में केवल दो साल बाद उनका निधन हो गया. उनके जाने के बाद, पार्टी की कमान एम करुणानिधि के हाथों में आ गई. लेकिन 1960 के दशक के अंत तक डीएमके के भीतर सत्ता, व्यक्तित्व और विचारधारा को लेकर मतभेद पनपने लगे थे. इसी का नतीजा था कि दो टुकड़ों में बंट गई.
  5. करुणानिधि के लिए एमजीआर बने चुनौती: तब के सुपर स्‍टार अभिनेता एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) की गिनती डीएमके के कद्दावर नेताओं में होने लगी थी. उनकी बढ़ती लोकप्रियता करुणानिधि को भी चुनौती देने लगी थी. करुणानिधि को लगता था कि एमजीआर एक फिल्म स्टार के तौर पर पार्टी को गलत दिशा में ले जा रहे हैं. वहीं, एमजीआर को लगा कि पार्टी में परिवारवाद और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है.

जब डीएमके और एआईएडीएमके में बंटी पार्टी

  1. 1972 में इस वजह से बनी एआईएडीएमके: 1972 तक बात एमजीआर के निष्‍कासन तक पहुंच गई. नतीजतन, एमजीआर ने डीएमके पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया. उसी साल उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके-AIADMK)’ का गठन कर दिया. पार्टी के नाम में ‘अन्ना’ को जोड़कर उन्होंने खुद को डीएमके से ज्यादा सीएन अन्नादुराई का सच्चा वारिस बताने की कोशिश की.
  2. सीएम बनने वाले भारत के पहले नेता बने एमजीआर: 1977 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की जनता ने बड़ा बदलाव देखने को मिला. इस चुनाव में एमजीआर ने करुणानिधि को बुरी तरह हराकर मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रच दिया. वे भारत के पहले ऐसे फिल्म अभिनेता थे, जो सूबे के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने 1977 के साथ-साथ 1980 और 1984 में भी उन्‍होंने करुणानिधि की डीएमके को शिकस्‍त दी और लगातार तीन बार मुख्‍यमंत्री का पद संभाला.
  3. एमजीआर के बाद जयललिता के हाथ आई कमान: जब 1987 में एमजीआर के निधन के बाद ऐसा लगा कि एआईएडीएमके का अस्‍तित्‍व खत्‍म होने के कगार पर पहुंच गया है. लेकिन, इसी बीच उनकी को-एक्‍ट्रेस रहीं जयललिता ने पार्टी की कमान संभाली. इसके बाद, डीएमके के करुणानिधि और जयललिता के बीच पैदा हुई कड़वाहट ने तमिलनाडु की राजनीति को अलग ही ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. इसके बाद समीकरण कुछ ऐसे बने कि अगले पांच दशकों तक डीएमके और एआईएडीएमके के बीच लगातार सत्ता बारी-बारी से बदलती रही.

करुणानिधि-जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में किस तरह का बदलावा आया?
21वीं सदी के दूसरे दशक में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया. 2016 के चुनाव में जीतने के बाद साल 2016 के अंत में जयललिता का अचानक निधन हो गया. इसके ठीक एक साल बाद, 2017 में नवंबर महीने में करुणानिधि ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. भले ही वे 2016 में चुनाव हार गए थे, लेकिन उनकी विरासत बरकरार थी. इन दोनों राजनेताओं के जाने के बाद राज्य की राजनीति में नेतृत्व का एक भयंकर संकट पैदा हो गया. एआईएडीएमके टुकड़ों में बंट गई और डीएमके को एमके स्टालिन के नेतृत्व में नई जान मिली, लेकिन जनता के मन में एक शून्य जरूर पैदा हो गया था.

क्‍या टीवीके और विजय थलापति पुरानी द्रव‍िडियन पॉलिटिक्‍स फॉलो करेंगे या नई शुरूआत करेंगे?
इस शून्य को भरते हुए फिल्म अभिनेता थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखा. तमिलनाडु में फिल्म सितारों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं थी, लेकिन विजय का तरीका थोड़ा अलग था. उन्होंने सालों तक फैन क्लबों के जरिये सोशल वर्क कर लोगों को खुद से जोड़ा था. थलापति विजय ने 2024 की शुरुआत में अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके)’ की घोषणा की. उन्होंने कहा कि राजनीति कोई सेकेंड हैंड व्यवसाय नहीं है. उनकी यह पार्टी पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से थोड़ी अलग दिख रही थी. वह कट्टर अलगाववादी न होकर एक प्रगतिशील, सामाजिक न्याय और विकास का एजेंडा लेकर चलने की बात कर रहे थे.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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कला की दुनिया का चमकता सितारा, क्लासिकल डांस में फूंक दी थी जान


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मृणालिनी साराभाई डांस की एक महान हस्ती थीं, जिन्होंने भरतनाट्यम और कथकली को ग्लोबल स्टेज पर मशहूर बनाया. केरल में जन्मीं मृणालिनी ने बचपन में स्विट्जरलैंड में वेस्टर्न डांस की ‘डालक्रोज’ तकनीक सीखी, जिसने उनके डांस को एक अनोखी लय और ऊर्जा दी. उन्होंने शांतिनिकेतन में पढ़ाई की और मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई से विवाह किया. उन्होंने अहमदाबाद में ‘दर्पण एकेडमी’ की स्थापना करके 18000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी. पद्मभूषण से सम्मानित मृणालिनी न सिर्फ एक बेहतरीन डांसर थीं, बल्कि एक संवेदनशील लेखिका और समाजसेवी भी थीं.

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मृणालिनी साराभाई एक लेखिका और समाज सेविका भी थीं.

नई दिल्ली: भारतीय क्लासिकल डांस की दुनिया में मृणालिनी साराभाई एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने परंपरा और मॉडर्निटी का ऐसा मेल बैठाया कि दुनिया देखती रह गई. 11 मई 1918 को केरल के एक रसूखदार परिवार में जन्मीं मृणालिनी का बचपन स्विट्जरलैंड में बीता, जहां उन्होंने वेस्टर्न डांस की दुर्लभ ‘डालक्रोज’ तकनीक सीखी. यह तकनीक शरीर की लय और संगीत को गहराई से समझने का एक खास जरिया थी, जिसने उनके आगे के डांस सफर में जान फूंक दी. उन्होंने भले ही विदेशों में रहकर पढ़ाई की और वेस्टर्न आर्ट को समझा, लेकिन उनकी रूह हमेशा भारतीय शास्त्रीय नृत्य में ही बसी रही. उन्होंने भारत लौटने के बाद शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की देखरेख में अपनी कला को निखारा और फिर भरतनाट्यम और कथकली जैसे मुश्किल डांस में महारत हासिल की.

मृणालिनी की निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प थी. उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई से शादी की, जिसे कला और विज्ञान का एक अनोखा संगम माना जाता है. उन्होंने केवल अपनी कला का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का बीड़ा भी उठाया. साल 1948 में उन्होंने अहमदाबाद में ‘दर्पण एकेडमी’ की शुरुआत की, जहां उन्होंने करीब 18,000 छात्रों को डांस और संगीत की बारीकियों से रूबरू कराया. उन्होंने 300 से ज्यादा डांस ड्रामा तैयार किए और भारतीय कल्चर को ग्लोबल मंच पर एक नई पहचान और सम्मान दिलाया. उनकी बेटी मल्लिका साराभाई ने भी इसी विरासत को आगे बढ़ाया और आज साराभाई परिवार का नाम डांस जगत में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है.

लेखिका और समाजसेवी भी थीं मृणालिनी
डांस के अलावा मृणालिनी एक बेहतरीन लेखिका और समाजसेवी भी थीं. उन्होंने बच्चों के लिए कहानियां और कविताएं लिखकर साहित्य की दुनिया में भी अपना योगदान दिया. कला के क्षेत्र में उनकी इसी अटूट साधना के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे बड़े नागरिक सम्मानों से नवाजा. उन्होंने 21 जनवरी 2016 को 97 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी ‘दर्पण एकेडमी’ और उनके हजारों शिष्य आज भी उनकी कला की खुशबू को पूरी दुनिया में फैला रहे हैं. वे एक ऐसी कलाकार थीं जिन्होंने साबित किया कि अगर आपकी जड़ें मजबूत हों, तो आप पूरी दुनिया के आसमान को अपनी कला से छू सकते हैं.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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राज्यपाल-सीएम विजिट पर वाराणसी की सड़कें डायवर्ट: मैदागिन नहीं जाएंगे वाहन, गोदौलिया तक नो-व्हीकल जोन; CCTV-ड्रोन से निगरानी – Varanasi News




राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सुबह बनारस पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम में ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ कार्यक्रम में शामिल होकर दोनों लोग लौट जाएंगे। सीएम और राज्यपाल लगभग साढ़े तीन घंटे तक यहां रहेंगे। सीएम और राज्यपाल के आगमन को लेकर लगभग 5 घंटे का डायवर्जन एडवाइजरी और रूट प्लान जारी किया गया है। आगमन, भ्रमण एवं प्रस्थान के दौरान मैदागिन और काशी विश्वनाथ मार्ग पर कड़े सुरक्षा इंतजाम रहेंगे। मैदागिन से गोदौलिया मार्ग नो व्हीकल जोन रहेगा। उन्हें सड़क मार्ग से विश्वनाथ धाम जाना है इसलिए 9 बजे से ही रूट डायवर्ट कर दिए जाएंगे। संपूर्णानंद से 3 घंटे पहले ही टेम्पो ट्रेवलर, आर्मेनिया बसें, क्रूजर आदि लहुराबीर, मैदागिन की तरफ नही जाएंगे। इन वाहनो को लकड़ीमण्डी की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा। विशेश्वरगंज तिराहा से 1 घंटे पहले वाहन रोक दिए जाएंगे। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने रविवार रात राज्यपाल और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। ब्रीफिंग के दौरान वीआईपी मूवमेंट पर रूट डायवर्जन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, निर्बाध यातायात व्यवस्था एवं जाम की स्थिति रोकने की बात कही। कार्यक्रम स्थल एवं वीआईपी मार्ग पर सघन चेकिंग, फ्रिस्किंग एवं प्रत्येक व्यक्ति तथा वाहन की कड़ी जांच सुनिश्चित करने को कहा गया। भीड़ नियंत्रण के दौरान नो टच पॉलिसी के पालन, महिला प्रबंधन महिला पुलिसकर्मियोंकी तैनाती, अस्थायी पार्किंग व्यवस्था का निर्देश दिया। रूफटॉप ड्यूटी, सीसीटीवी एवं ड्रोन कैमरों से निगरानी तथा नो फ्लाई जोन के सख्ती से अनुपालन की गाइडलाइन दोहराई। साथ ही सभी पुलिसकर्मियों को अच्छे टर्न-आउट, सतर्कता, अनुशासन एवं आमजन के साथ विनम्र एवं संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने हेतु निर्देशित किया गया। इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त अपराध आलोक प्रियदर्शी, डीसीपी काशी, डीसीपी वरुणा और डीसीपी गोमती, सभी एडीसीपी और एसीपी समेत राजपत्रित अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारीगण उपस्थित रहे। वाराणसी में इस ट्रैफिक प्लान को देखकर घर से निकलें – संपूर्णांनंद गेट से 3 घंटे पहले टेम्पो ट्रेवलर, आर्मेनिया बसें, क्रूजर आदि वाहन मैदागिन नही जाएंगे। – विशेश्वरगंज तिराहा से चार पहिया वाहन मैदागिन नही जाएंगे, इन्हें गोलगड्‌डा तिराहा भेजा जाएगा। – गोदौलिया चौराहा से कोई वाहन मैदागिन चौराहा की तरफ नही जाने दिया जायेगा। – मरीमाई तिराहा से तेलियाबाग तिराहा की तरफ वाहन नहीं जाने दिया जायेगा, इन्हें अन्ध्रापुल चौराहा/ मलदहिया चौराहा की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। – मलदहिया चौराहा से वाहन को लहुराबीर चौराहा की तरफ नही जायेगा, मरीमाई तिराहा/साजन तिराहा/इंग्लिशिया लाइन तिराहे डायवर्ट किया जायेगा। – पिशाचमोचन तिराहा से वाहन को लहुराबीर चौराहा नहीं भेजकर मलदहिया चौराहा की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा। – थाना चेतगंज से वाहन को लहुराबीर चौराहा की तरफ नही जाने दिया जायेगा, बेनिया तिराहा डायवर्ट कर दिया जायेगा। – सोनारपुरा तिराहा से चार पहिया वाहन एवं जंगमबाड़ी से दो पहिया वाहन को गोदौलिया चौराहा की तरफ नहीं जाएंगे। – गिलट बाजार से वाहन को भोजूबीर सब्जी मंडी तिराहा नहीं जाएंगे, इन्हें शिवपुर चुंगी तिराहा की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा।



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आईपीएल ऑनलाइन सट्टेबाजी करते 6 गिरफ्तार: जूम एप्लीकेशन के माध्यम से लगवा रहे थे सट्टा; यहां पढ़े जयपुर क्राइम की खबरें – Jaipur News




पुलिस थाना करणी विहार और डीएसटी टीम जयपुर वेस्ट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आईपीएल टी-20 क्रिकेट मैच पर चल रहे ऑनलाइन सट्टे का भंडाफोड़ कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 4 लैपटॉप, 21 मोबाइल फोन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं सट्टे से संबंधित सामग्री बरामद की है। डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि आईपीएल-2026 के दौरान क्रिकेट मैचों पर सट्टेबाजी की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच पुलिस को सूचना मिली थी कि धावास स्थित श्री बालाजी हाईट्स मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 105 में अवैध रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित की जा रही है। सूचना पर पुलिस टीम ने सर्च वारंट प्राप्त कर दबिश दी। मौके पर आरोपी राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच चल रहे आईपीएल टी-20 मैच पर ऑनलाइन सट्टा खिलवाते पाए गए। पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल फोन और जूम एप्लीकेशन के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क कर अंकों के जरिए रुपए दांव पर लगवा रहे थे। मौके से लाखों रुपए के हिसाब-किताब से संबंधित 7 नोटबुक भी बरामद की गईं। गिरफ्तार आरोपियों में हेमन्त आचार्य (40), नवीन आचार्य (41), पवन आसवानी (35), सन्नी खटवानी (32), हीरासिंह(32) और संजय शेरा(33) शामिल हैं। सभी आरोपी जोधपुर के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड प्राप्त कर आगे की जांच की जा रही है।



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ग्वालियर में हाईवे से दंपती से गहने लूटे: शादी में जा रहे थे, बदमाशों ने पति पर अड़ाया कट्‌टा, पत्नी से लूटा मंगलसूत्र-झुमके – Gwalior News




ग्वालियर के बिजौली थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने लूट की एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रविवार रात एक दंपति को कट्टा (अधिया) अड़ाकर बाइक सवार चार बदमाशों ने मंगलसूत्र और कान की झुमकी लूट ले गए। दंपति शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। बाइक सवारों ने पहले ओवरटेक कर रोका फिर कट्‌टा अड़ाकर कैश निकालने के लिए कहा। इसी समय सामने से कुछ वाहन आते देखे तो बदमाश झपट्‌टा मारकर मंगलसूत्र लूटकर भाग गए। घटना की शिकायत की गई है। पुलिस ने जांच के बाद रविवार रात को लूट का मामला दर्ज कर लिया है। सीने पर रखी अधिया और बोले-‘जो है निकाल दो’
शहर के थाटीपुर स्थित न्यू आनंद नगर कॉलोनी में रहने वाले 42 वर्षीय भूपेंद्र सिंह सोनवार अपनी पत्नी अर्चना के साथ स्कूटी से कृपालपुर में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने जा रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे तोरिया मोड़ के पास पहुंचे, तभी पीछे से आई एक बाइक ने उनका रास्ता रोक लिया। बाइक पर चार युवक सवार थे। एक बदमाश ने उतरते ही भूपेंद्र के सीने पर ‘अधिया’ (315 बोर का कट्टा) अड़ा दी और गोली मारने की धमकी देकर बोला, जो भी है निकाल दो। वाहन आता देख जेवर झपटकर भाग गए
बदमाश जब लूटपाट कर रहे थे, तभी सामने से एक अन्य वाहन की लाइट दिखाई दी। पकड़े जाने के डर से बदमाशों ने जल्दबाजी में अर्चना के गले से सोने का मंगलसूत्र और कानों की झुमकी झपट लीं। झपट्टा इतना तेज था कि अर्चना के कानों में चोट भी आई है। वारदात के बाद बदमाश सुपावली गांव की तरफ फरार हो गए। दहशत में रहा दंपति दूसरे गांव पहुंचकर रोकी स्कूटी
हथियारबंद बदमाशों के हमले से दंपति इस कदर डर गए कि उन्होंने बीच रास्ते में रुकने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने अपनी स्कूटी दौड़ाई और काफी दूर दूसरे गांव पहुंचने के बाद ही अपनी जान सुरक्षित समझी और पुलिस को फोन किया। लूटे गए जेवर का वजन करीब सवा तोला बताया जा रहा है। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही बिजौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने हुलिए के आधार पर घेराबंदी की है और रास्ते के CCTV कैमरों की जांच की जा रही है। पीड़ितों ने बताया कि एक आरोपी मोटा और एक लंबा था, जिसके बाल एक तरफ से छोटे-बड़े कटे हुए थे। थाना प्रभारी बिजौली मिर्जा आसिफ बेग का कहना
“दंपति की शिकायत पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना की गई हैं। जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”



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लाइफस्टाइल में आएगा बदलाव! बिछड़े प्यार से होगी मुलाकात,धनु वाले ऐसा रहेगा दिन


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Aaj ka Dhanu Rashifal 11 may 2026: धनु राशि के जातकों की सेहत आज अच्छी रहने वाली है. आज आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि आज सोमवार है, ऐसे में आज के दिन आपको भगवान महादेव की पूजा करनी चाहिए. 

ख़बरें फटाफट

जमुई: 11 मई 2026 के दिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है. आज के दिन अदाल तथा विडाल योग का शुभ संयोग बनने वाला है. इतना ही नहीं आज के दिन शतभिषा नक्षत्र और इंद्र योग का भी संयोग बनेगा. जिसका असर विभिन्न राशि के जातकों पर पड़ेगा. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज के दिन चंद्रमा का गोचर होने वाला है जिससे आज कई राशि के जातकों की आमदनी बढ़ने वाली है. उनकी आर्थिक आय में इजाफा होगा और उनके जीवन शैली में परिवर्तन आने वाला है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों पर भी आज के दिन बनने वाले इन सभी संयोग का असर देखने को मिलेगा.

लाइफस्टाइल में आएगा बदलाव 
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि आज के दिन धनु राशि के जातकों की लाइफ स्टाइल में बदलाव आएगा. आज परिवार में आपको अपने परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा. उन्होंने बताया कि आज आपको किसी बात को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है. संपत्ति से जुड़े किसी मामले में आपको टेंशन हो सकता है. हालांकि आज आपका दिन अच्छा गुजरेगा. आज के दिन आपकी मुलाकात किसी पुराने दोस्त से हो सकती है, जिससे को खुशियां मिलने वाली है. अगर आप व्यापार करते हैं, तो आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है. आज पार्टनरशिप पर व्यापार शुरू करने से आपको फायदा हो सकता है. निवेश करने के लिए भी आज का दिन काफी अच्छा रहने वाला है.

सेहत के मामले में आज करें यह काम 
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धनु राशि के जातकों की सेहत आज अच्छी रहने वाली है. आज आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि आज सोमवार है, ऐसे में आज के दिन आपको भगवान महादेव की पूजा करनी चाहिए. उनका अभिषेक करना चाहिए और भगवान महादेव को बेलपत्र इत्यादि चढ़ाने से आपके जीवन में शुभता आएगी. उन्होंने बताया कि प्यार के मामले में आज का दिन अच्छा रहने वाला है. आज आपकी मुलाकात आपके बिछड़े हुए प्यार से होने वाली है. धनु राशि के जातकों के लिए आज के दिन का शुभ अंक 7 रहने वाला है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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₹20 में ‘बालू का आलू पराठा’, बाप-बेटे की मेहनत से चंबल में छोटा सा ढाबा बना लोगों की पसंद


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शिवपुरी के गुना बायपास स्थित “बालू पराठा” का नाम जरूर लिया जाता है. इंडस्ट्रियल एरिया के पास एक साधारण से ढाबे में बनने वाला यह आलू का पराठा आज पूरे इलाके में अपनी अलग पहचान बना चुका है. इसकी खासियत सिर्फ इसका स्वाद नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी संघर्ष, मेहनत और पारिवारिक एकता की कहानी भी है

मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में अगर सस्ते और स्वादिष्ट खाने की बात होती है तो शिवपुरी के गुना बायपास स्थित ‘बालू पराठा’ का नाम जरूर लिया जाता है. इंडस्ट्रियल एरिया के पास एक साधारण से ढाबे में बनता यह आलू का पराठा आज पूरे इलाके में पहचान बना चुका है. इसकी सबसे खास बात सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि इसके पीछे खड़ी पिता-पुत्रों की मेहनत की कहानी है.करीब 15 साल पहले बालकृष्ण प्रजापति, जिन्हें लोग प्यार से ‘बालू’ कहते हैं, ने एक छोटे से ठिये पर आलू के पराठे बनाना शुरू किया था. उस समय पराठे की कीमत सिर्फ 10 रुपये थी। मकसद साफ था—कम दाम में लोगों को भरपेट और अच्छा खाना देना। शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित साधन थे, लेकिन मेहनत और स्वाद पर भरोसा था.

धीरे-धीरे लोगों को बालू के हाथ का स्वाद पसंद आने लगा.ट्रक ड्राइवर, मजदूर और आसपास काम करने वाले लोग यहां रुकने लगे. फिर यह स्वाद लोगों की जुबान से होते हुए पूरे शिवपुरी में फैल गया. आज यहां सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि शहर की नामचीन हस्तियां भी पराठे का स्वाद लेने पहुंचती हैं.समय बदला, महंगाई बढ़ी, लेकिन बालू ने अपने ग्राहकों का भरोसा नहीं टूटने दिया. 10 रुपये का पराठा आज 20 रुपये का जरूर हो गया, लेकिन इसके साथ मिलने वाली थाली अब भी भरपूर है. एक आलू का गरमागरम पराठा, दो सब्जियां, दाल, अचार, सलाद और तली हुई हरी मिर्च. इतनी कम कीमत में इतना कुछ मिलना आज के दौर में किसी हैरानी से कम नहीं है.

चंबल में मशहूर बालू का आलू पराठा
बालू बताते हैं कि उनके पराठे का असली स्वाद देसी चूल्हे की धीमी आंच में छिपा है. आज भी पराठे गैस पर नहीं, बल्कि चूल्हे पर ही सेंके जाते हैं. यही वजह है कि हर पराठे में मिट्टी की सौंधी खुशबू और देसी स्वाद महसूस होता है.इस सफर में अब बालू अकेले नहीं हैं. उनके दोनों बेटे आकाश प्रजापति और विशाल प्रजापति भी इस काम में पूरी जिम्मेदारी से साथ खड़े हैं. दोनों सुबह से तैयारी में जुट जाते हैं. आटा गूंथने से लेकर पराठे तैयार करने तक की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि बालू खुद तवे पर धीमी आंच में उन्हें सेंकते हैं.तीनों की यह जोड़ी ढाबे की असली ताकत है. पिता का अनुभव और बेटों की मेहनत ने इस छोटे से ढाबे को बड़ी पहचान दिलाई है. चंबल में ‘बालू पराठा’ सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि उस मेहनत, लगन और पारिवारिक एकता की मिसाल है, जिसने एक छोटे सपने को बड़ी पहचान में बदल दिया.



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पहचाना क्या? मां की गोद में बैठा ये बच्चा आज है सबसे बड़ा सुपरस्टार, दरियादिली की है मिसाल


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सोशल मीडिया पर इस मासूम बच्चे की फोटो तेजी से वायरल हो रही है. इस फोटो में ये बच्चा बिना कपड़ों के किसी की गोद में बैठा नजर आ रहा है. वायरल हो रही फोटो में बच्चे की क्यूटनेस देख हर कोई उसकी तारीफ करता नहीं थक रहा है. ये बच्चा आज सुपरस्टार है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड सेलेब्स के बचपन की फोटोज का क्रेज इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. फैंस भी अपने फेवरेट सितारों की बचपन की फोटो को देखना पसंद करते हैं. इसी बीच एक बच्चे की फोटो वायरल हो रही है. इस फोटो में नजर आ रहा है ये बच्चा बड़ा सुपरस्टार है.

Salman khan Phir milenge

फोटो में नजर आ रहा ये बच्चा कोई और नहीं सलमान खान हैं. सलमान अक्सर अपनी फिल्मों के साथ-साथ फैमिली बॉन्डिंग को लेकर भी चर्चा में रहते हैं. अपने परिवार के काफी करीब माने जाने वाले सलमान ने मदर्स डे के मौके पर सोशल मीडिया पर एक बेहद खास पोस्ट शेयर किया.

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सलमान खान ने अपनी मां सलमा खान और हेलेन के साथ कुछ प्यारी तस्वीरें पोस्ट कीं. इन तस्वीरों में परिवार के बीच का प्यार और अपनापन साफ नजर आ रहा है.

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पोस्ट में एक पुरानी तस्वीर भी शामिल थी, जिसमें छोटे सलमान अपनी मां सलमा खान के साथ दिखाई दे रहे हैं. यह फोटो फैंस को काफी पसंद आ रही है. इसके अलावा एक दूसरी तस्वीर में सलमान अपनी मां के साथ सोफे पर बैठे नजर आए.

वहीं एक और फोटो में सलमान, सलमा खान और हेलेन एक साथ दिखे. इस तस्वीर ने फैंस का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा. तीनों के बीच की केमिस्ट्री और बॉन्ड तस्वीर में साफ नजर आया.

इन तस्वीरों को शेयर करते हुए सलमान ने बेहद छोटा लेकिन दिल छू लेने वाला कैप्शन लिखा, ‘हैप्पी मदर्स डे.’ सलमान का यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा. फैंस भी कमेंट सेक्शन में सलमान और उनके परिवार पर खूब प्यार लुटा रहे हैं.

Salman khan Phir milenge

सलमान खान का नाम आज हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में लिया जाता है. उन्होंने साल 1988 में फिल्म बीवी हो तो ऐसी से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. हालांकि उन्हें असली पहचान 1989 में आई फिल्म मैंने प्यार किया से मिली.

Salman khan Aishwarya

वर्कफ्रंट की बात करें तो सलमान इन दिनों अपनी अगली फिल्म मातृभूमि को लेकर बिजी हैं. इस फिल्म को सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले बनाया जा रहा है.फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि फिल्म में बहादुरी, बलिदान और जज्बे की कहानी देखने को मिलेगी.फिल्म में चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी. ऐसे में फैंस सलमान की इस नई फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

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पटना में मदर्स-डे पर 24 मांओं का सम्मान: 14 सुपर-10 सिंगल मॉम्स को अवॉर्ड मिला, जानिए उनके संघर्ष की कहानी – Patna News




पटना में मदर्स डे के अवसर पर रविवार को एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जन भारत शिक्षा स्माइल फाउंडेशन और जेबी एचआर इनोवेशन्स सर्विसेज द्वारा सैफायर हॉल में सिंगल मदर्स और सुपर मॉम्स को सम्मानित किया गया। इन माताओं को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया गया। यह सम्मान उन सिंगल मदर्स को दिया गया, जिन्होंने अपने साहस, संघर्ष और आत्मबल से परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने अपने निस्वार्थ प्रेम से समाज में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अवसर पर उनके त्याग और संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा को याद किया गया। जन भारत शिक्षा स्माइल फाउंडेशन की निदेशक डॉ. जूली बनर्जी ने बताया कि समारोह में कुल 24 सुपर मॉम्स और सिंगल मदर्स को सम्मानित किया गया। जिनमें 14 सुपर मॉस्स और 10 सिंगल मॉस्स को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा, मांएं केवल परिवार ही नहीं बनाती, बल्कि वो भावनात्मक संस्कृति भी गढ़ती हैं। बच्चे जो मूल्य लेकर दुनिया में जाते हैं उसकी शुरुआत घर से ही होती है। जूली बनर्जी ने बताया कि इस अवॉर्ड के लिए सिंगल मॉम्स ने खुद आगे बढ़कर अपना नॉमिनेशन किया। उन्होंने कहा कि, अब सिंगल मॉम्स भी अपनी पहचा छिपाने के बजाए वो अपना लाइफइस्टाल बता रही हैं। अपने बारे में उन्होंने बताया कि, एक मां के रूप में उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका एक बेटा मुंबई में रहता है। दूसरा बेटा पटना में उनके साथ ही रहता है। उनके पति कंसल्टेंट सर्जन हैं। और वो खुद भी मलेसिया के लिंकन यूनिवर्सिटी मलेसिया की सुपरवाइजर है। इन सब बिजी शेड्युल के बीच भी वो अपने परिवार का देखभाल कर रही हैं। उन्हें उनके उत्कृष्ट योगदान, समर्पण और उपलब्धियों के लिए मंच पर पहचान मिली। इन माताओं ने विपरीत परिस्थितियों में भी बच्चों की देखभाल कर उन्हें सही राह दिखाई। बिहार स्टेट मिल्क कोपरेटिव एसोसिएशन की मेंबर वंदना सिंह ने बताया जॉब के साथ-साथ घर में बच्चों की देखभाल करना एक बड़ा चैलेंज होता है। लेकिन, उनका ध्यान रखना मेरी जिम्मेदारी है। हर मां की यह जिम्मेदारी होती है कि, वो अपने बच्चों के साथ-साथ परिवार का भी ध्यान रखे। मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने की पूरी कोशिश करती हूं। मैं चाहती थी मेरी बेटी मुझे एक पूर्ण इंसान के रूप में देखें। जिसकी अपनी महत्वकांक्षाएं हों, जिम्मेदारियां हों दोस्त हों विचार हों और ऐसा काम हो जिसकी उसे परवाह हो। मां बनने ने मुझे बेहतर पेशेवर बनाया और पेशवर जीवन ने मुझे बेहतर मां बनाया। कार्यक्रम में मेयर सीता साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनके साथ दो विशिष्ट अतिथि भी समारोह में शामिल हुए। मेयर सीता साहू ने महिलाओं के बेहतर कार्यों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। सम्मान समारोह के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न मनोरंजन कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। उपस्थित लोगों ने इन कार्यक्रमों का आनंद लिया।



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पूर्व सांसद स्व. शफीकुर्रहमान बर्क की बरसी, खिराजे अकीदत पेश: संभल में हजारों लोग जुटे, सांसद बर्क बोले- लोगों के दिलों में दादा की मोहब्बत जिंदा – Sambhal News




संभल और मुरादाबाद के पूर्व सांसद तथा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क की दूसरी बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सांसद, विधायक सहित हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने डॉ. बर्क के जनसेवा के कार्यों को याद किया और कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। उक्त कार्यक्रम रविवार शाम 6 बजे संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के महमूद खां सराय स्थित एक बैंक्वेट हॉल में हुआ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे डॉ. बर्क के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें गरीबों और वंचितों का सच्चा नेता बताया गया। इस दौरान उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। 4 तस्वीरें देखिए… संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद और डॉ. बर्क के पोते जियाउर्रहमान बर्क ने अपने संबोधन में कहा कि उनके दादा डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के प्रति लोगों का प्यार आज भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि डॉ. बर्क की यादें और उनका राजनीतिक सफर लोगों के दिलों में जीवित है। सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि उनके दादा ने हमेशा आम लोगों की आवाज उठाई, चाहे वह जमीन पर हो, विधानसभा में या संसद में। उन्होंने हर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और कभी समझौता नहीं किया। जियाउर्रहमान बर्क ने आगे कहा कि जनता का स्नेह और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने संकल्प लिया कि वह हमेशा क्षेत्र की जनता के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करते रहेंगे। इस अवसर पर रामपुर के सपा सांसद मोहिबुल्लाह, सपा विधायक कमाल अख्तर, सपा विधायक फहीम इरफान, सपा विधायक इकबाल महमूद के पुत्र सुहैल इकबाल, सपा जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी, पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज खान, जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट, हाजी अनीस, मौलाना कलीम अशरफ, मौलाना फाजिल, मौलाना शरीफ और मौलाना फैजान अशरफ सहित हजारों लोग मौजूद थे।



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