सवाई माधोपुर के भैरू दरवाजा के पास स्थित लटिया नाले में नगर परिषद ने अवैध कचरा डंपिंग यार्ड बना रखा है। जिसे समय समय पर जलाया जाता है। अब इस मामले में स्थाई लोक अदालत, सवाई माधोपुर ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर परिषद और सफाई निरीक्षक नगरपरिषद को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर बचे हुए शेष कचरे को अधिकतम 15 दिनों के भीतर वहां से हटाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने आबादी और ज्वलनशील पदार्थों के पास कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह था पूरा मामला एडवोकेट अब्दुल हासिब ने बताया कि भैरू दरवाजा स्थित ‘गुप्ता एच.पी. फ्यूल’ पेट्रोल पंप के सहायक मैनेजर रमेश सैनी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (स्थाई लोक अदालत) में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22-बी के तहत एक परिवाद दायर किया था। परिवाद में बताया गया था कि नगर परिषद पिछले कई महीनों से बरसाती लटिया नाला में पूरे शहर का कचरा अवैध रूप से डंप कर रही है।
इस कचरे के कारण न केवल दुर्गंध और महामारी फैलने का खतरा बना हुआ था, बल्कि नगर परिषद के कर्मचारी इस कचरे में आग लगा देते थे. चूंकि इस डंपिंग साइट से मात्र 60-70 फीट की दूरी पर पेट्रोल पंप और घनी आबादी क्षेत्र स्थित है, इसलिए वहां कभी भी बड़े पैमाने पर अग्निकांड और जान-माल के नुकसान की गंभीर आशंका बनी हुई थी. बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित पक्ष ने अदालत की शरण ली.
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित और सदस्य जूली खण्डेलवाल की पीठ ने निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश जारी किए: 15 दिन में कचरा हटने का अल्टीमेटम दिया
नगर परिषद को निर्देश दिया गया है कि फोटोग्राफ्स में दिख रहे स्थान पर बचे हुए बाकी कचरे को हर हाल में अगले 15 दिनों के भीतर वहां से पूरी तरह साफ किया जाए। कचरा केवल उसी स्थान पर एकत्रित किया जाए जो कानूनन इसके लिए पहले से तय और चिन्हित है। किसी भी अनधिकृत या प्रार्थी के पेट्रोल पंप वाले स्थान पर कचरा नहीं डाला जाएगा। कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कचरा किसी भी ऐसे स्थान पर कतई न जलाया जाए, जहां आसपास कोई ज्वलनशील पदार्थ (जैसे पेट्रोल पंप) का भंडारण हो या फिर घनी आबादी क्षेत्र हो।अदालत ने इस मामले को पूरी तरह निस्तारित करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से स्थानीय निवासियों और पेट्रोल पंप पर आने-जाने वाली जनता ने राहत की सांस ली है, क्योंकि लंबे समय से उनके जीवन और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था।
अब्दुल हासिब एडवोकेट के अनुसार पिछले साल शहर में बाढ़ की वजह यह डंपिंग यार्ड से पानी का निकास नहीं होने से भी लोगों के घरों में पानी घुस गया और काफी नुकसान हुआ।
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भैरू दरवाजा नाले से हटेगा अवैध डंपिंग यार्ड: स्थाई लोक अदालत ने कचरा हटाने के आदेश दिए, कचरा जलाने पर रोक लगाई – Sawai Madhopur News
शेखपुरा में नई कचरा नियमावली लागू: कचरा 4 श्रेणियों में बांटा जाएगा, बड़े संस्थानों को करना होगा पंजीकरण, 30 जून तक रिपोर्ट जरूरी – Sheikhpura News
शेखपुरा में गुरुवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 लागू करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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एडीएम विभागीय जांच संजय कुमार की अध्यक्षता में शेखपुरा नगर परिषद ने शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लक्ष्य के साथ मंथन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित किया।
एडीएम संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना और शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
नई नियमावली के अनुसार, अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निस्तारित किया जाएगा।
मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा गीले कचरे में रसोई का कचरा, फल-सब्जी के छिलके और बागवानी अपशिष्ट शामिल होंगे, जिनका उपयोग खाद या बायोगैस बनाने के लिए किया जाएगा। सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री होगी, जिसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
दूषित कचरे जैसे डायपर, सैनिटरी पैड और मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा। वहीं, खतरनाक कचरे जैसे पुरानी बैटरी, ट्यूब लाइट, कीटनाशक के डिब्बे और ई-वेस्ट को सावधानी से अलग रखा जाना चाहिए, क्योंकि इनमें हानिकारक रसायन होते हैं।

30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी नियमावली में बड़े कचरा उत्पादकों जैसे होटल, अस्पताल, स्कूल और बड़े संस्थानों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है,
प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, या पानी की खपत प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक है, तो उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
ऐसे संस्थानों को गीले कचरे का निपटान परिसर के भीतर ही खाद या बायोगैस के माध्यम से करना होगा। साथ ही, उन्हें हर साल 30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।
नगर परिषद ने पुराने डंपसाइट्स को हटाने के लिए आगामी 31 अक्टूबर की समय सीमा तय की है।
अभिजीत बोले- मोदी के साथ मेरी तस्वीर AI जनरेटेड: आज पुणे से कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत, शिक्षा घोषणापत्र जारी करेगी
पुणे9 मिनट पहले
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CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार सुबह पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी तस्वीर को AI जनरेटेड बताया है। पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके ने कहा- मैं PM से कैसे मिल सकता हूं? मैं अमेरिका में सिर्फ एक स्टूडेंट था। सभी जानते हैं कि PM से मिलने की प्रक्रिया कितनी सख्त होती है।
दरअसल, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया था कि दीपके भारत आने से पहले PM मोदी से मिले थे। उन्होंने कहा- मुझे किसी ने दीपके और मोदी की अमेरिकी में मीटिंग की एक फोटो भेजी है। लोग कह रहे हैं कि मोदी से मिलने के बाद दीपके यहां आए हैं।
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने आज से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन की शुरुआत पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी कैंपस से होगी। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
दीपके के मुताबिक, पार्टी शिक्षा घोषणापत्र भी जारी करेगी। इसमें पेपर लीक रोकने, समय पर रिजल्ट घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

दीपके ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ X पर वीडियो शेयर किया और लिखा- पुणे के लोगों, क्या आप प्रदर्शन के लिए तैयार हैं?
पुणे के बाद जयपुर-लखनऊ और अन्य शहरों में प्रदर्शन
दीपके ने बताया कि आंदोलन संविधान के दायरे में और पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस अभियान में शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।
पुणे के बाद CJP का प्रदर्शन जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु समेत कई शहरों तक जाएगा। इसके बाद 20 जून को प्रदर्शनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेंगे। 6 जून को पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला प्रदर्शन किया था।

CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं।
इस टिप्पणी के अगले दिन, 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने CJP की शुरुआत की और सोशल मीडिया पर पार्टी के अकाउंट बनाए। इसके बाद 22 मई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया।
CJP बनने के महज 26 दिनों में इंस्टाग्राम पर उसके फॉलोअर्स 2.27 करोड़ तक पहुंच गए हैं। यह संख्या भाजपा के 94 लाख और कांग्रेस के 1.37 करोड़ फॉलोअर्स से ज्यादा है। एक्स पर CJP के 2.75 लाख फॉलोअर्स हैं।


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जंतर-मंतर पर ‘मैं भी अन्ना’ की जगह ‘मैं हूं कॉकरोच’: 5 घंटे का प्रोटेस्ट, उम्मीद से कम भीड़; कॉकरोच जनता पार्टी को क्या मिला

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था।
तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी। पढ़ें पूरी खबर…
50 साल बाद भी बरकरार है ‘एंग्री यंग मैन’ का जादू , असली डॉन से जुड़ा है ‘दीवार’ का कनेक्शन
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हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जो सिर्फ हिट नहीं होतीं बल्कि एक दौर की पहचान बन जाती हैं. 1975 में रिलीज हुई ‘दीवार’ ऐसी ही फिल्मों में से एक है. इस फिल्म ने न केवल अमिताभ बच्चन के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि उन्हें बॉलीवुड का ‘एंग्री यंग मैन’ भी बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म दिखा ‘विजय’ का किरदार असली डॉन से जुड़ा है.
नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1975 को एक ‘चमत्कारी साल’ माना जाता है. इसी साल दो ऐसी फिल्में आईं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए. पहली ‘शोले’ और दूसरी यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी ‘दीवार’. आज अपनी रिलीज के 50 से अधिक साल बीत जाने के बाद भी ‘दीवार’ को एक ऐतिहासिक लैंडमार्क माना जाता है. इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में स्थापित कर बॉलीवुड का ‘शहंशाह’ बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा निभाया गया ‘विजय वर्मा’ का आइकॉनिक किरदार महज एक कल्पना नहीं था, बल्कि वह असल जिंदगी के एक मशहूर अंडरवर्ल्ड डॉन से प्रेरित था? (Image: IMDb)

दिग्गज लेखक जोड़ी सलीम-जावेद द्वारा लिखित ‘दीवार’ दो भाइयों की कहानी थी. एक भाई रवि (शशि कपूर) जो कानून के रास्ते पर चलकर ईमानदार पुलिस अफसर बनता है और दूसरा भाई विजय (अमिताभ बच्चन) जो समाज के अन्याय से तंग आकर अपराध और तस्करी की दुनिया का बेताज बादशाह बन जाता है. फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था.

विजय का किरदार उस दौर के दर्शकों के दिलों में सीधे उतर गया था. वह पारंपरिक हीरो नहीं था, बल्कि एक ऐसा शख्स था जो समाज की नाइंसाफी, गरीबी और अपमान से जूझते हुए अपनी राह बनाता है. यही वजह थी कि लाखों लोगों ने खुद को ‘विजय’ के संघर्ष में देखा. फिल्म का असली आकर्षण विजय और उसकी मां (निरूपा रॉय) और भाई रवि के बीच का नैतिक टकराव था. Image: IMDb
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फिल्म इतिहासकारों और सिनेमा विशेषज्ञों की मानें तो विजय का यह किरदार काफी हद तक मुंबई के पहले बड़े अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की शुरुआती जिंदगी पर आधारित था. हालांकि ‘दीवार’ कोई बायोपिक नहीं थी और इसकी कहानी पूरी तरह हाजी मस्तान के जीवन पर आधारित नहीं थी, लेकिन दोनों के जीवन में कई समानताएं देखी गईं. (Image: Instagram/@bollywoodtriviapc)

हाजी मस्तान ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई के डॉकयार्ड (बंदरगाह) पर एक मामूली कुली के रूप में की थी. ठीक इसी तरह, फिल्म ‘दीवार’ में भी अमिताभ बच्चन को शुरुआत में डॉकयार्ड पर कुली का काम करते और बांह पर ‘बिल्ला नंबर 786’ बांधे दिखाया गया है. हाजी मस्तान का नाम उस दौर में तस्करी की दुनिया का बड़ा चेहरा माना जाता था. ऐसे समय में जब भारत में विदेशी सामानों पर कड़े प्रतिबंध थे, उन्होंने तस्करी के जरिए एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया. साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर दौलत, रसूख और लोकप्रियता हासिल करने की उनकी कहानी काफी हद तक विजय वर्मा के सफर से मेल खाती थी. Image: IMDb

फिल्म में विजय का संघर्ष, गरीबी से उठकर ताकतवर बनना और समाज में अपनी पहचान बनाना, कई लोगों को हाजी मस्तान की याद दिलाता है. हालांकि, फिल्म का मूल संदेश अपराध नहीं, बल्कि परिवार, नैतिकता और परिस्थितियों के बीच लिए गए फैसलों पर केंद्रित था. ‘दीवार’ ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार संवाद भी दिए. फिल्म का मशहूर डायलॉग ‘आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, दौलत है’ और उसके जवाब में ‘मेरे पास मां है’ आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित डायलॉग्स में गिने जाते हैं. Image: IMDb

‘दीवार’ पहली फिल्म थी जिसने हाजी मस्तान की जिंदगी के हिस्सों को पर्दे पर उतारा और ब्लॉकबस्टर रही. दिलचस्प बात यह है कि इसके दशकों बाद, साल 2010 में आई मिलन लूथरिया की हिट फिल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ में अजय देवगन द्वारा निभाया गया ‘सुल्तान मिर्जा’ का किरदार भी पूरी तरह से हाजी मस्तान की ही जिंदगी और उनके बाद के दौर पर आधारित था. Image: IMDb
कटनी में ट्रक डिवाइडर तोड़कर रेल पुल से गिरा: पटरियों पर नहीं पहुंचने से हादसा टला, केबिन में फंसे ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाला – Katni News
कटनी के नेशनल हाईवे-43 पर गुरुवार दोपहर को एक तेज रफ्तार ट्रक डिवाइडर को तोड़ता हुआ रेलवे ओवरब्रिज से सीधे नीचे जा गिरा। यह दुर्घटना बड़वारा इलाके के जगतपुर उमरिया गांव के पास हुई। अच्छी बात यह रही कि ट्रक सीधे रेल की पटरियों पर न गिरकर उनके किनारे गिरा, जिससे कटनी-चोपन रेल मार्ग पर एक बहुत बड़ा ट्रेन हादसा होते-होते टल गया। इस हादसे में ड्राइवर को हल्की-फुल्की चोटें आई हैं। तेज रफ्तार के कारण खोया संतुलन जानकारी के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 1:00 बजे एक ट्रक कटनी से उमरिया की तरफ जा रहा था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रक की रफ्तार बहुत तेज थी। जैसे ही ट्रक जगतपुर उमरिया गांव के पास रेलवे पुल पर पहुंचा, ड्राइवर का गाड़ी पर से काबू खो गया। इसके बाद बेकाबू ट्रक डिवाइडर से टकराया और उसे तोड़ते हुए सीधे पुल के नीचे गहरी खाई में गिर गया। गांव वालों ने बचाई ड्राइवर की जान पुल से ट्रक नीचे गिरने की जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके की तरफ दौड़े। ट्रक ऊपर से गिरने के कारण पूरी तरह पिचक चुका था। गांव वालों ने बिना देर किए नीचे उतरकर राहत का काम शुरू किया और भारी मशक्कत के बाद ट्रक के केबिन में फंसे घायल ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी ड्राइवर की जान बच गई और उसे सिर्फ मामूली चोटें आईं, जिसके बाद उसे प्राथमिक इलाज दिया गया। टल गया बड़ा रेल हादसा इस पूरी घटना में सबसे राहत वाली बात यह रही कि ट्रक सीधे रेलवे ट्रैक के ऊपर नहीं गिरा। अगर ट्रक पटरियों पर गिरता और उसी दौरान वहां से कोई ट्रेन गुजरती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था। रेलवे और स्थानीय पुलिस ने साफ किया है कि इस हादसे की वजह से ट्रेनों के आने-जाने पर कोई असर नहीं पड़ा है और रेल यातायात पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है।
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लहसुन का अचार खाने के हैं शौकीन? घर पर इस ट्रिक से करें तैयार
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Lahsun Achar Recipe: लहसुन का अचार स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर में आयरन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया का खतरा कम हो सकता है. लहसुन का अचार बनाने के लिए छिले हुए लहसुन की कलियों में नमक, हल्दी, लाल मिर्च, सौंफ, मेथी और सरसों का तेल मिलाया जाता है. इसके बाद इसे कुछ दिनों तक धूप में रखा जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. नियमित मात्रा में इसका सेवन इम्युनिटी मजबूत करने में मदद करता है और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकता है.
लहसुन अपने भीतर कई औषधीय गुण समेटे हुए है. सदियों से इसका उपयोग आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. लहसुन एंटी-बैक्टीरियल, एंटीबायोटिक और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर को कई संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है. इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी मजबूत होती है, हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. यही वजह है कि लहसुन को प्राकृतिक औषधि माना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार दिल की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. नियमित मात्रा में लहसुन के अचार का सेवन रक्त संचार को बेहतर बनाने और धमनियों में ब्लॉकेज के खतरे को कम करने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा, यह ब्लड क्लॉट बनने की संभावना को भी घटा सकता है. इसी वजह से लहसुन को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार शरीर में आयरन के अवशोषण (एब्सॉर्प्शन) को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी तत्व है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. आयरन की कमी से एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस होती है. ऐसे में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ लहसुन का सेवन फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बनाए रखने और बेहतर स्वास्थ्य में सहायक हो सकता है. ( एआई फोटो )
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लहसुन का अचार एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में सहायक माने जाते हैं. नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में लहसुन का अचार खाने से सामान्य सर्दी, जुकाम और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यही कारण है कि इसे स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी माना जाता है. शोधों में पाया गया है कि लहसुन में मौजूद ऑर्गेनो-सल्फर यौगिक शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं. कुछ अध्ययनों में इनके कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने की संभावित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि, लहसुन का अचार किसी बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. ( एआई फोटो )

अगर आप झटपट और स्वादिष्ट लहसुन का अचार बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी ट्राई कर सकते हैं. इसके लिए 1 किलो कच्चा लहसुन, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, भुनी मेथी पाउडर, नमक, नींबू का रस और सरसों का तेल चाहिए. लहसुन को साफ कर मसालों और नींबू के रस के साथ मिलाएं, फिर गर्म करके ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डाल दें. सिर्फ 10 मिनट में आपका स्वादिष्ट और चटपटा लहसुन का अचार तैयार हो जाएगा. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार बनाने के लिए सबसे पहले छिली हुई लहसुन की कलियों को भाप में हल्का पका लें. इन्हें एक बाउल में निकालकर मसाले और नींबू का रस मिलाएं. दूसरी ओर सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म करें और उसमें राई तड़काएं. गैस बंद कर यह तेल लहसुन पर डालकर अच्छी तरह मिला लें. स्वादिष्ट अचार तैयार है. इसे एयरटाइट कांच के जार में भरकर फ्रिज में रखें, जहां यह लगभग 3 महीने तक सुरक्षित रह सकता है. ( एआई फोटो )
रेलवे का बड़ा फैसला! देशभर के स्टेशनों पर होगी फायर सेफ्टी की चेकिंग
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए देशभर के रेलवे स्टेशनों पर फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का फैसला किया है. रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य स्टेशनों पर आग से जुड़ी संभावित रिस्क की पहचान करना और समय रहते जरूरी सुधार सुनिश्चित करना है. हाल के सालों में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ी है, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाना रेलवे की प्राथमिकता बन गई है. इसी दिशा में यह विशेष ऑडिट अभियान शुरू किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक ऑफिशियल जांच नहीं होगी, बल्कि स्टेशनों की सुरक्षा तैयारियों की गहराई से समीक्षा की जाएगी. जहां भी सुरक्षा स्टैंडर्ड में कमी पाई जाएगी, वहां तुरंत सुधार कनरे के लिए कदम उठाए जाएंगे. रेलवे का लक्ष्य है कि देश के सभी प्रमुख और व्यस्त रेलवे स्टेशन फायर सेफ्टी के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित और तैयार रहें.
ऑडिट में किन चीजों की होगी जांच?
फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान रेलवे स्टेशनों की कई अहम व्यवस्थाओं की डिटेल जांच की जाएगी. इसमें स्टेशन भवनों की संरचना, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग, एयर कंडीशनिंग (AC) और वेंटिलेशन सिस्टम की सुरक्षा का आकलन किया जाएगा. इसके अलावा फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, पंपिंग सिस्टम और आग बुझाने के लिए मौजूद पानी की व्यवस्था की भी जांच होगी.
ऑडिट टीम यह भी देखेगी कि इमरजेंसी की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बनाए गए इमरजेंसी एग्जिट सही स्थिति में हैं या नहीं. कई स्टेशनों पर भीड़भाड़ को देखते हुए एक्जिट गेट की प्रभावशीलता की चेंकिंग भी की जाएगी. जरूरत पड़ने पर राज्य फायर विभाग और विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद ली जाएगी, ताकि सुरक्षा स्टैंडर्ड का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके.
जहां कमी मिलेगी, वहां होगा तुरंत सुधार
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऑडिट के दौरान सामने आने वाली किसी भी खामी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. जिन स्टेशनों पर सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएंगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे. रेलवे का मानना है कि केवल समस्याओं की पहचान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करना भी उतना ही जरूरी है.
इसके तहत पुराने डिवाइस को बदला जा सकता है, अतिरिक्त फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए जा सकते हैं और कर्मचारियों को परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है. रेलवे स्टेशनों पर नियमित सुरक्षा अभ्यास (मॉक ड्रिल) आयोजित करने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत प्रोसेस को सुनिश्चित की जा सके.
यात्री करेंगे सुरक्षित सफर
देशभर में करोड़ों लोग हर दिन रेलवे सर्विसेस का उपयोग करते हैं. ऐसे में स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है. फायर सेफ्टी ऑडिट के जरिए यात्रियों को डबल फायदा होगा. पहला है कि इससे संभावित रिस्क की पहले से पहचान हो सकेगी और दूसरा फायदा है कि दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
रेलवे का मानना है कि यह पहल न केवल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि रेलवे परिसंपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी. बेहतर सुरक्षा व्यवस्था से यात्रियों का भरोसा मजबूत होगा और उन्हें अधिक सुरक्षित यात्रा अनुभव मिलेगा. रेलवे का यह कदम सुरक्षा मानकों को नई ऊंचाई पर ले जाने और भविष्य की चुनौतियों के लिए रेलवे नेटवर्क को बेहतर तरीके से तैयार करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है.
अहमदाबाद प्लेन हादसे का एक साल: प्लेन में बैठने से डरते हैं मरने वालों के परिवार; कुछ अब भी काउसिंलिंग करवा रहे
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अहमदाबाद39 मिनट पहले
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अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हादसे की भयावह यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
12 जून 2025 को लंदन जाने वाली AI-171 फ्लाइट मेघानीनगर में BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकराकर क्रैश हो गई, जिसमें विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई। सिर्फ एक यात्री जिंदा बचा था।
भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के एक साल बाद भी BJ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में उस त्रासदी के निशान पूरी तरह मिट नहीं पाए हैं। जहां विमान का मलबा गिरा था, लोगों के शव मिले थे, वहां आज भी खून के धब्बे दिखाई देते हैं।
इधर हादसे में मरने वालों के परिवार आज भी सदम में हैं। कुछ लोग अभी भी उड़ान भरने से डरते हैं, जबकि कुछ लोग इस गहरे सदमे से उबरने के लिए काउंसलिंग ले रहे हैं।
हादसे के एक साल बाद कॉलेज के हॉस्टल की 4 तस्वीरें…

जिस हॉस्टल पर प्लेन का हिस्सा गिरा था, वहां कई कमरे बंद पड़े हैं। कई हिस्सों में मरम्मत का काम हुआ है, लेकिन हादसे के निशान अब भी मौजूद हैं।

हादसे के दौरान हुए विस्फोट और आग ने इमारत को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया था।


प्लेन हादसे का एक साल पूरा होने पर रेस्क्यू से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव शेयर किए हैं। पढ़िए किसने क्या बताया…
1. गुजरात DGP ज्ञानेंद्र सिंह मलिक- करियर का सबसे दर्दनाक अध्याय
ज्ञानेंद्र बताते हैं कि यह उनके करियर का सबसे दर्दनाक अध्याय है। उनके जेहर में मलबे से निकाली गई जली हुई लाशों की डरावनी तस्वीरें अभी भी बसी हुई हैं। मलिक ने बताया कि उन्होंने 30 मिनट के भीतर 500 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को हादसे वाली जगह पर तैनात किया था।
मलिक उस समय अहमदाबाद के कमिश्नर थे। वे हादसे के 15-20 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि जमीन पर जले हुए शवों को देखना बहुत दर्दनाक था।
DNA मैचिंग के बाद सौंपे गए शवों में से पहला शव दुर्घटना के 50 घंटे से भी कम समय में, 14 जून को दोपहर 3:19 बजे सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद सौंपा गया।
2. फोरेंसिक साइंटिस्ट एचपी संघवी- कटे हुए हाथ को भुला नहीं पा रहा
गुजरात डायरेक्टरेट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज के डायरेक्टर संघवी और उनकी 38 सदस्यों की टीम की जिम्मेदारी थी कि वे मारे गए लोगों की पहचान करने के लिए बायोलॉजिकल सैंपल की बारीकी से जांच करें और राख से निकाले गए टूटे-फूटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच करके उनसे जो भी जानकारी मिल सके, उसे हासिल करें।
संघवी के लिए, कटे हुए हाथ की वह तस्वीर ऐसी है जिसे वे भुला नहीं पा रहे हैं। संघवी ने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे वह मदद की गुहार लगा रही हो। एक साल बाद भी, हम उसके आखिरी पलों के खौफ की सिर्फ कल्पना ही कर सकते हैं। पहला सैंपल आधी रात के बाद आया और हमारी टीमों ने पहले 100 घंटों में ही 100 DNA प्रोफाइल तैयार कर लिए।
प्लेन हादसे के पीड़ितों के 3 किस्से
- बेटा खोया, प्लेन की आवाज से भी डरते हैं रफीक: दीव के रहने वाले रफीक अरब ने पिछले साल 12 जून को अपने 25 साल के बेटे फैजान को खोने के बाद से कभी हवाई यात्रा नहीं की है। वे अब भी गहरे डर के साथ जी रहे हैं। रफीक बताते हैं- ऊपर से गुजरते विमान की आवाज भी हमें बेचैन कर देती है।
- माता-पिता की मौत के बाद नौकरी छोड़ी, मुक्ति ने महीनों काउसिंलिंग करवाई: सूरत की रहने वाली मुक्ति वंसदिया के माता-पिता दिव्या और अर्जुनसिंह हादसे में मारे गए थे। हादसे के बाद मुक्ति डिप्रेशन से जूझने लगीं। उन्होंने ट्रैवल एजेंसी की अपनी नौकरी छोड़ दी और महीनों तक काउंसलिंग लीं।
- माली का काम छूटा, पत्नी छोड़ गई, हादसे के चश्मदीद थे अजय परमार: घर से लौटते समय हादसे की चपेट में आए अजय का 2 महीने इलाज चला था। डॉक्टरों ने सीधी धूप में काम करने से मना किया। रंग-रूप बदलने और काम छूटने के कारण शादी के एक महीने बाद ही उनकी पत्नी भी छोड़कर चली गई।
Tecno ने लॉन्च किया 8000mAh बैटरी वाला धांसू गेमिंग फोन, जानें कीमत
Tecno ने भारत में 8000mAh बैटरी वाला एक और गेमिंग फोन लॉन्च कर दिया है। टेक्नो का यह गेमिंग फोन एक्टिव मैट्रिक्स डिस्प्ले के साथ आता है, जैसा नथिंग के फोन में देखने को मिलता है। यह फोन पिछले साल लॉन्च हुए Pova 7 का अपग्रेड है। भारत में कंपनी ने इस फोन को तीन कलर ऑप्शन 16 बिट व्हाइट, प्लाज्मा ऑरेंज और टर्मिनल ग्रीन कलर ऑप्शन में पेश किया है। इस फोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट से खरीदा जा सकता है।
Tenco Pova 8 की कीमत
टेक्नो की पोवा सीरीज खास तौर पर गेमिंग यूजर्स के लिए लॉन्च की जाती है। इस सीरीज के लेटेस्ट फोन Pova 8 5G को भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 6GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 128GB में पेश किया गया है। यह फोन 29,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आता है। वहीं, इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 31,999 रुपये है।
- 6GB RAM + 128GB – 29,999 रुपये
- 8GB RAM + 128GB – 31,999 रुपये
Tecno Pova 8 के फीचर्स
टेक्नो का यह फोन 6.76 इंच के FHD+ डिस्प्ले के साथ आता है। फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसकी पीक ब्राइटनेस 950 निट्स तक की है। यह फोन MediaTek Dimensity 7100 चिपसेट पर काम करता है। इसके साथ 8GB रैम और 128GB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है। टेक्नो ने अपने इस फोन में डेडिकेटेड G1 और SE1 सिग्नल चिपसेट दिया है।
| Tecno Pova 8 5G | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.76 इंच, 144Hz |
| प्रोसेसर | MediaTek Dimensity 7100 |
| स्टोरेज | 8GB, 128GB |
| बैटरी | 8000mAh, 45W |
| कैमरा | 50MP, 13MP |
| OS | Android 16 |
इस स्मार्टफोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MP का Sony LYT 600 प्राइमरी कैमरा मिलता है। इसके साथ एक लाइट सेंसर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 13MP का कैमरा दिया गया है। यह फोन AI कैमरा के साथ आता है।
इस फोन में 8000mAh की दमदार बैटरी दी गई है। इसके साथ 45W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। यह Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। साथ ही, इसमें ड्यूरेबिलिटी के लिए MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन मिलता है। यह IP64 डस्ट और वाटरप्रूफ रेटिंग को सपोर्ट करता है।
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खूंटा उखड़ने से पहले एक्शन मोड में राहुल-अखिलेश, UP में नहीं दोहराएंगे यह भूल!
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UP Assembly Elections 2027 : यूपी चुनाव से पहले राहुल गांधी और अखिलेश यादव अपनी-अपनी रस्सी और खूंटा मजबूत करने में लग गए हैं. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने ‘मिशन 2027’ के लिए हाथ मिला लिया है. इस बार न तो चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार किया जाएगा और न ही बिहार की तरह फ्रेंडली फाइट के नाम पर वोट कटेंगे. अखिलेश यादव ने समय से पहले 200 जिताऊ चेहरे छांट लिए हैं. जानिए इस बार यूपी के ‘दो लड़के’ बीजेपी के ‘चाणक्य’ और ‘बुलडोजर बाबा’ के गर्जना का सामना कैसे करेंगे.
राहुल-अखिलेश इस बार यूपी में कौन सी गलती नहीं दोहराएंगे?
लखनऊ. बंगाल चुनाव में कांग्रेस को लगे झटके के बाद राहुल गांधी ने यूपी चुनाव 2027 में इज्जत बचाने के लिए अपने आपको अखिलेश यादव के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. अब पूरी तरह से साफ हो गया है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस यूपी विधानसभा का चुनाव मिलकर ही लड़ेगी. ऐसे में राहुल गांधी और अखिलेश यादव बिहार वाली वह गलती नहीं दोहराना चाहते हैं, जिससे आरजेडी और कांग्रेस की दुर्गति हुई थी. सपा ने इस बार यूपी में चुनाव लड़ने का फॉर्मूला बदल दिया है. सपा इस बार चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार नहीं करेगी. नोटिफिकेशन से पहले ही दोनों पार्टियां अपने कैंडिडेट का ऐलान कर देगी, जिससे क्षेत्र में जनता के बीच काम करने का मौका मिल जाए. दोनों के बीच टिकट बंटवारे का फार्मूला भी तय हो गया है. सपा ने सर्वे के आधार पर करीब 200 सीटों पर प्रत्याशियों का नाम भी तय कर लिया है. कहा जा रहा है कि सबसे पहले नामों का ऐलान भी सपा ही कर देगी.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय जो खिचड़ी पक रही है, उसकी खुशबू दिल्ली तक आने लगी है. लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग से लेकर दिल्ली के लुटियंस जोन तक एक बात बिल्कुल साफ हो चुकी है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से मिलकर लड़ने जा रहे हैं. लेकिन इस बार का यह गठबंधन साल 2017 की तरह सिर्फ ‘यूपी के लड़कों’ का पोस्टर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बार अखिलेश यादव ने अपनी पूरी रणनीति ही बदल दी है. ग्राउंड जीरो पर काम कर रहे सपा और कांग्रेस के नेताओं से जब न्यूज-18 हिंदी ने बात की, तो एक बहुत दिलचस्प बात सामने आई. समाजवादी पार्टी इस बार ‘बैकसीट’ पर बैठकर चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार करने के मूड में कतई नहीं है.
यूपी में कांग्रेस और एसपी की तैयारी शुरू.
राहुल-अखिलेश कर रहे हैं खूंटा मजबूत
अमूमन देखा जाता है कि जब तक चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान नहीं करता, तब तक पार्टियों में टिकट को लेकर सिर-फुटौव्वल चलती रहती है. ऐन वक्त पर टिकट बंटने से उम्मीदवार को अपने क्षेत्र में जाने और जनता के बीच पैठ बनाने का समय ही नहीं मिल पाता. लेकिन सपा सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव ने अंदरूनी सर्वे और लोकल फीडबैक के आधार पर करीब 200 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हैं. अब इस नई रणनीति के तहत, दोनों पार्टियां औपचारिक अधिसूचना जारी होने से काफी पहले ही अपने-अपने उम्मीदवारों की लिस्ट धीरे-धीरे जारी करना शुरू कर देंगी. इससे कैंडिडेट को जमीन पर जाकर कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने और वोटरों के बीच सत्ता विरोधी लहर का माहौल बनाने के लिए पूरा 4-5 महीने का वक्त मिल जाएगा.
बिहार वाली गलती यूपी में नहीं दोहराई जाएगी
यूपी के इस गठबंधन में इस बार सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि किसी भी कीमत पर बिहार वाली गलती नहीं दोहरानी है. पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच कई सीटों पर पेंच फंसा रह गया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि कई महत्वपूर्ण सीटों पर दोनों दलों के बीच फ्रेंडली फाइट देखने को मिला, जिसमें एनडीए ने बाजी मार ली.
नोटिफिकेशन से पहले ही एक्शन में सपा-कांग्रेस
यूपी की राजनीति को करीब से जानने वाले संजीव पांडेय कहते हैं, ‘राजनीति में फ्रेंडली फाइट जैसा कोई शब्द नहीं होता. जब दो सहयोगी दल एक ही सीट पर आमने-सामने लड़ते हैं, तो उनका कैडर आपस में ही भिड़ जाता है. इसका सीधा फायदा तीसरी पार्टी उठा ले जाती है. लेकिन अखिलेश यादव ने बिहार वाली भूल को शायद इस बार यूपी में न दोहराएं. लेकिन जब एक टेबल पर सीटों के बंटवारे का खाका तैयार किया जाता है, तो स्थिति बदल जाती है. कैडर वोट और कार्यकर्ताओं के प्रेशर के सामने बड़े नेताओं को झुकना पड़ता है, जिसका नतीजा बिहार में लोग देख चुके हैं. इसलिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने काफी सोच समझकर यह पैसला लिया है. ‘
यूपी चुनाव 2027 में अखिलेश यादव कांग्रेस नेता के किस बयान को रखेंगे याद?
इस नई जुगलबंदी से सपा-कांग्रेस को कितना फायदा?
वोटों का बिखराव रुकेगा:मुस्लिम और दलित-पिछड़ा (PDA) वर्ग का वोटर जो अक्सर इस असमंजस में रहता था कि सपा को दें या कांग्रेस को, उसके सामने अब तस्वीर बिल्कुल साफ होगी.
बीजेपी के ‘सरप्राइज एलिमेंट’ की काट: बीजेपी हमेशा आखिरी वक्त पर चौंकाने वाले फैसले लेती है. अगर सपा-कांग्रेस के उम्मीदवार पहले से मैदान में डटे होंगे, तो उन्हें घेरना सत्ता पक्ष के लिए आसान नहीं होगा.
भीतरघात की गुंजाइश खत्म: समय रहते टिकट तय होने से जो बागी या असंतुष्ट नेता होंगे, उन्हें मनाने या शांत करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा, जिससे ऐन चुनाव के दिन भीतरघात का खतरा न्यूनतम हो जाएगा.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का अब एक ही नारा है-“सवाल सीटों का नहीं, सवाल जीत का है.” यही वजह है कि कांग्रेस भी इस बार ज्यादा नखरे दिखाने के मूड में नहीं है और व्यावहारिक होकर सीटों की मांग कर रही है. ग्राउंड की हकीकत यही कहती है कि अगर यह फॉर्मूला जमीन पर शत-प्रतिशत उतर गया, तो यूपी की चुनावी लड़ाई बेहद दिलचस्प और कांटे की होने वाली है.


