डूंगरपुर जिले के सदर थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना माथुगामडा पाल फला डूंगर में हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। सदर थाने के एएसआई प्रवीण सिंह ने बताया कि माथुगामडा पाल फला डूंगर निवासी लालशंकर कटारा ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार लालशंकर और उनका परिवार एक शादी समारोह में गए हुए थे। इस दौरान उनका 17 वर्षीय बेटा सुमित घर पर अकेला था। जब परिवार के सदस्य घर लौटे, तो उन्होंने देखा कि सुमित का शव घर के अंदर एक साड़ी के फंदे से लटका हुआ था। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी पहुंचाया, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके।
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17 वर्षीय किशोर ने साड़ी से फंदा लगाकर दी जान: परिजन शादी समारोह में बाहर गए हुए थे, घर में अकेला था – Dungarpur News
संभल में ई-रजिस्ट्री संशोधन का विरोध: वकीलों की हड़ताल में स्टांप वेंडर, बोले- हजारों लोग बेरोजगार होंगे – Sambhal News
संभल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ई-रजिस्ट्री में किए गए संशोधनों के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में उनके साथ दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और टाइपिस्ट भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी सरकार पर उनके हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं। संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पर अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। यह धरना सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 05 बजे समाप्त हुआ। अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए तीसरे दिन भी धरना जारी रखने की चेतावनी दी है।
संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार भटनागर ने बताया कि वे दो दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और यह धरना कुल तीन दिन तक चलेगा। उन्होंने इन संशोधनों को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा कि इससे डीड राइटर्स, स्टाम्प वेंडर्स और अधिवक्ता संघ जैसे कई संगठन बेरोजगार हो जाएंगे। भटनागर ने कहा कि यह सरकार की रोजगार देने की मंशा के विपरीत है, क्योंकि ई-रजिस्ट्री का कार्य निजी संगठनों को सौंपने से बड़े पैमाने पर लोग अपनी आजीविका खो देंगे।
राजीव कुमार भटनागर ने लेन-देन की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यदि रजिस्ट्री से संबंधित कार्य वकीलों या कातिबों के चैंबरों पर होते हैं, तो लेन-देन की धनराशि अधिक सुरक्षित रहती है और भुगतान सही तरीके से हो पाता है। उन्होंने यह भी बताया कि खतौनियों में कई त्रुटियां हैं, जिन्हें निजी संस्थाएं ठीक से नहीं संभाल पाएंगी, जिससे लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। एसोसिएशन का धरना आज तीसरे दिन भी जारी है। राजीव कुमार भटनागर ने बताया कि वे कल इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए एक बैठक करेंगे। प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं में प्रदीप गुप्ता, पर्मेंद्र सिंह, शकील अहमद, अरविंद सिंह, रामपाल सिंह, विनेश कुमार, सचिन चौहान, नरेंद्र कुमार, रामरईस यादव, सरफराज हुसैन, रवि कुमार, सुभाष त्यागी और नीतू सैनी जैसे नाम शामिल रहे।
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KGF पुरानी बात, देश में शुरू हुई पहली प्राइवेट गोल्ड माइन! कितना सोना निकलेगा?
KGF पुरानी बात, देश में शुरू हुई पहली प्राइवेट गोल्ड माइन! कितना सोना निकलेगा?
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क्या भारत में सोने की खदानें सिर्फ फिल्मों या इतिहास की किताबों तक सीमित हैं? कर्नाटक की मशहूर केजीएफ (Kolar Gold Fields) बंद होने के सालों बाद, अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन की शुरुआत हो चुकी है. जियोमैसूर और डेक्कन गोल्ड माइंस के इस बड़े प्रोजेक्ट से हर साल टन के हिसाब से सोना निकालने की तैयारी है. जानिए यह प्रोजेक्ट भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे बदलेगा और आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा. क्या आंध्र प्रदेश बनेगा नया सोने का गढ़?
जब भी भारत में सोने की खदान की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले कर्नाटक की मशहूर ‘कोलार गोल्ड फील्ड्स’ (KGF) की तस्वीर उभरती है. फिल्मों और इतिहास के पन्नों में सिमट चुकी इस कहानी के बाद, अब भारत के माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में देश की पहली प्राइवेट सेक्टर की सोने की खदान और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन हो चुका है. यह कदम देश को सोने के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग माना जा रहा है.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्नूल जिले के तुग्गली मंडल में आने वाले जोन्नागिरी में इस प्राइवेट गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है. इस पूरे प्रोजेक्ट को जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड मिलकर संभाल रहे हैं, जिन्होंने इसमें करीब 405 करोड़ रुपये का एक बड़ा निवेश किया है. इस जगह की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पहली यूनिट की औपचारिक शुरुआत के साथ ही दूसरी यूनिट का शिलान्यास भी कर दिया. इस मौके पर उनके साथ राज्य के मंत्री कोल्लू रवींद्र, निम्मला रामानायडू और टीजी भरत भी मौजूद थे. यह पूरा प्रोजेक्ट कुल 1,500 एकड़ के बड़े इलाके में फैला हुआ है, जिसके पहले फेज में फिलहाल 600 एकड़ जमीन पर एक्टिव माइनिंग का काम शुरू किया जा चुका है. इस बड़े प्रोजेक्ट की अहमियत को देखते हुए राज्य कैबिनेट ने इसके होस्ट विलेज यानी जोन्नागिरी का नाम बदलकर सांकेतिक रूप से ‘स्वर्णगिरी’ रख दिया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

आंध्र प्रदेश सरकार के लिए यह गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट किसी लॉटरी से कम नहीं है और सरकारी अधिकारी इसकी तुलना सीधे कर्नाटक के केजीएफ से कर रहे हैं. इस प्लांट से उत्पादन के पहले साल में ही 400 किलोग्राम सोना निकालने की उम्मीद जताई गई है, जो कि अगले साल बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा. जैसे-जैसे इस प्लांट की प्रोसेसिंग कैपेसिटी को बढ़ाया जाएगा, यहां से हर साल 2 टन यानी 2,000 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य रखा गया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
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यह प्रोजेक्ट सिर्फ सोना ही नहीं उगलेगा, बल्कि इससे लगभग 700 स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. सबसे मजेदार बात यह है कि राज्य सरकार को यहां से निकलने वाले कुल सोने की वैल्यू पर 4 परसेंट की रॉयल्टी मिलेगी. मौजूदा अनुमानों के हिसाब से सरकार को पहले साल के 400 किलोग्राम प्रोडक्शन से लगभग 57 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलेगी, जो अगले साल 900 किलोग्राम प्रोडक्शन होने पर बढ़कर करीब 144 करोड़ रुपये हो जाएगी. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

साल 2001 में जब कर्नाटक की केजीएफ खदान पूरी तरह बंद हो गई, तो भारत में प्राइमरी लेवल पर सोने की माइनिंग का काम सिर्फ सरकारी हुट्टी गोल्ड माइंस तक ही सीमित रह गया था, जो कि कर्नाटक में है. किसी भी ऐसी जगह पर जहां सालों से काम बंद पड़ा हो, दोबारा सोने का डिपॉजिट ढूंढना और वहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करना बेहद लंबा, खर्चीला और हाई-रिस्क वाला काम होता है. इसके लिए सालों की खोजबीन और भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है. स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट आज अगर हकीकत बन पाया है, तो उसकी वजह प्राइवेट कंपनी जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सालों की मेहनत है, जिसने इस इलाके में दशकों तक रिसर्च की और रिसोर्सेज को डेवलप किया. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

तमिलनाडु की त्रिवेणी अर्थमूवर्स के बैकअप और डेक्कन गोल्ड माइंस के सपोर्ट के साथ इस कंपनी ने सबसे पहले 1990 के दशक में यहां खोजबीन के राइट्स हासिल किए थे. इसके बाद साल 2006 में माइनिंग लीज के लिए अप्लाई किया गया और अब जाकर करीब 405 करोड़ रुपये का निवेश करने के बाद यहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो पाया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने में सरकार की पॉलिसी और माइनिंग रिफॉर्म्स ने भी एक बहुत बड़ा रोल निभाया है. साल 2015 में सरकार ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसके तहत मिनरल ब्लॉक्स के लिए ट्रांसपेरेंट ऑक्शन यानी पारदर्शी नीलामी को जरूरी बना दिया गया था. इसके बाद साल 2021 में एक और बड़ा अमेंडमेंट किया गया, जिसने प्राइवेट कंपनियों का रास्ता और आसान कर दिया. इस नए नियम के मुताबिक, अगर कोई प्राइवेट कंपनी किसी मिनरल डिपॉजिट को खोज निकालती है, तो माइनिंग के राइट्स उसी के पास सुरक्षित रहेंगे और वह वहां से निकाले गए रिसोर्सेज को कमर्शियल तौर पर बाजार में बेच भी सकती है. स्वर्णगिरी भारत के उन पहले बड़े गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे इस नए कानूनी ढांचे का सीधा फायदा मिला है, और यह दिखाता है कि भारत के माइनिंग सेक्टर में अब प्राइवेट निवेश की भूमिका कितनी तेजी से बढ़ रही है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो केजीएफ ने लगभग 120 सालों के दौरान देश को अनुमानित 800 से 900 टन सोना दिया था. उस खदान की गहराई 3.2 किलोमीटर तक नीचे चली गई थी, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी खदानों में से एक बनाती थी, लेकिन धीरे-धीरे वहां सोने का अयस्क कम होता गया और आखिरकार सरकार को उसे बंद करना पड़ा. इसके मुकाबले स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट भारत की गोल्ड माइनिंग के सफर में एक बिल्कुल नया चैप्टर है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

डेक्कन गोल्ड माइंस के एक ऑडिट के मुताबिक, इस साइट पर करीब 82 लाख टन ओर मौजूद है, जिसमें प्रति टन औसतन 1.49 ग्राम सोना मिल सकता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस खदान में करीब 12 टन शुद्ध सोना मौजूद है. इसके मेन माइनिंग पिट की ऑपरेशनल लाइफ की अवधि करीब आठ से नौ साल की होने की उम्मीद है. हालांकि, आंध्र प्रदेश सरकार का यह भी कहना है कि अगर इस पूरे बड़े रीजन को देखा जाए, तो यहां 42.5 टन तक सोना मिल सकता है, लेकिन ये अनुमान अभी सिर्फ शुरुआती खोज पर आधारित हैं और इनका पूरी तरह से वैरिफिकेशन होना अभी बाकी है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)

स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी माइनिंग टेक्नोलॉजी है, जो इसे पुराने केजीएफ से बिल्कुल अलग बनाती है. जहां केजीएफ में जमीन के अंदर मीलों गहरे जाकर अंडरग्राउंड माइनिंग करनी पड़ती थी, जो बेहद खतरनाक और मुश्किल काम था, वहीं स्वर्णगिरी को एक ओपन-पिट माइन के रूप में डेवलप किया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि यह एक खुली खदान होगी, जहां बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए सीधे जमीन की ऊपरी सतह की खुदाई करके सोना निकालने वाले ओर को बाहर निकाला जाएगा. यह तरीका न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि इसमें समय और लागत भी काफी कम आती है, जिससे भारत में सोने का उत्पादन अब और भी ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
शिवसेना उद्धव गुट को संसद में ऑफिस खाली करना होगा: टूट के बाद सांसदों की संख्या 5 से कम हुई; 2 सांसद लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे
मुंबई/नई दिल्ली2 मिनट पहले
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UBT के दो सांसद बुधवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे।
शिवसेना (UBT) को संसद भवन में अपना मौजूदा ऑफिस खाली करना पड़ सकता है। संसद भवन के नियमों के मुताबिक, सिर्फ 5 या उससे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी को संसद भवन में ऑफिस मिल सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष जैसे ही छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दे देते हैं। UBT के पास सिर्फ 4 सांसद (3 लोकसभा और 1 राज्यसभा) रह जाएंगे। ऐसे में संसद भवन में उन्हें अपना मौजूदा ऑफिस (128A ) खाली करना पड़ सकता है।
पार्टी के दो लोकसभा सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत बुधवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में उनसे मुलाकात करेंगे।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में 22 जून को बगावत हो गई थी। लोकसभा के कुल 9 में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे।

शिवसेना में 4 साल में दूसरी टूट
शिंदे के साथ सभी 6 सांसदों ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टूट का ऐलान किया। शिंदे ने कहा, ‘जब 2022 में हमने पार्टी और धनुष-बाण बचाने के लिए विद्रोह किया था, तब 40 विधायक थे और अब हमने छक्का लगाया है।’
उन्होंने कहा, ‘ हमारी लड़ाई बालासाहेब के विचारों को बचाने के लिए है, इसीलिए आज ये 6 सांसद बालासाहेब की असली शिवसेना में शामिल हुए।’ उद्धव के शिवसेना का मुखिया रहते पार्टी में 4 साल में यह दूसरी बड़ी बगावत है।

8 दिन में 6 सांसद बागी हुए
14 जून को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में संसदीय दल की बैठक बुलाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 4 सांसद नहीं पहुंचे थे। इसके बाद से पार्टी में टूट की अटकलें लगाई जानी लगी थीं।

शिवसेना से पहले AAP-TMC के 27 सांसद बागी हुए
पिछले 3 महीने के दौरान विपक्षी गुट के 27 सांसदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा या NDA को समर्थन दिया है। इनमें 7 AAP के राज्यसभा सांसद और 20 TMC के लोकसभा सांसद हैं।
शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) चीफ और यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और पार्टी के कई नेता BJP में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
सपा चीफ अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सपा मजबूत और एकजुट है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के अपने विधायक पाला बदलने वाले हैं।

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ये खबर भी पढ़ें…
उद्धव की पार्टी टूटी, राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में गाली दी, 9 में से 6 सांसद बागी

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। पूरी खबर पढ़ें…
‘भरत तिवारी एनकाउंटर की जांच जारी’: सांसद अरुण भारती बोले- हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की मॉनिटरिंग में इन्वेस्टीगेशन – Jamui News
जमुई में सांसद अरुण भारती ने भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला जांच का विषय है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सांसद भारती ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जा रही है। साथ ही, कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर सरकार आवश्यक और उचित कार्रवाई करेगी। ”सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पास व्यापक अनुभव” सीबीआई जांच और कार्यरत न्यायाधीश से जांच कराने की मांग पर सांसद ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पास व्यापक अनुभव होता है और वे निष्पक्षता से जांच कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाज और आम लोगों के मन में जो भी शंकाएं हैं, उनका समाधान किया जाएगा। अरुण भारती ने यह भी कहा कि सरकार केवल भरत तिवारी मामले पर ही नहीं, बल्कि नालंदा में हुई दो युवकों की हत्याओं पर भी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी घटना को जातीय या व्यक्तिगत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि हर पीड़ित को समान न्याय मिलना चाहिए। ”अपराध पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता” बिहार में अपराध नियंत्रण और पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक सवाल पर सांसद ने कहा कि अपराध पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, भरत तिवारी मामले में पुलिस की कार्रवाई उचित थी या नहीं, इसका निर्णय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने की अपील की। सांसद अरुण भारती ने ये बातें जमुई में दिग्विजय सिंह की श्रद्धांजलि सभा में भाग लेने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं।
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सीधी में सामूहिक विवाह समाराेह में अव्यवस्था: दूल्हे जींस तो दुल्हनें सलवार-सूट में दिखीं; 43 में से 20 जोड़ों को नहीं मिले कपड़े – Sidhi News
मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत बुधवार को सिद्धिविनायक मैरिज गार्डन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में लापरवाही सामने आई। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम में कई जोड़ों को तय वेशभूषा (दूल्हे के लिए कुर्ता-पायजामा और दुल्हन के लिए साड़ी) तक नहीं दी गई। इसके चलते कई दूल्हे जींस-टीशर्ट और दुल्हनें सलवार-सूट में ही शादी की रस्में निभाते नजर आए। 20 से ज्यादा जोड़ों को नहीं मिले कपड़े समारोह में कुल 43 जोड़ों का विवाह होना था, लेकिन इनमें से 20 से अधिक जोड़ों को शासन की तरफ से मिलने वाले कपड़े और सामान नहीं दिए गए। मजबूरन कई जोड़ों ने अपने पैसों से कपड़े खरीदकर शादी की रस्में पूरी कीं। चौफाल निवासी दूल्हे सीताराम बैगा ने बताया कि उन्हें प्रशासन की तरफ से केवल एक पगड़ी दी गई, बाकी कोई सामान या कपड़ा नहीं मिला। भीषण गर्मी में सिर्फ एक वाटर कूलर समारोह स्थल पर आए मेहमानों और जोड़ों के लिए व्यवस्थाएं बेहद खराब रहीं। कड़कड़ाती गर्मी के बीच करीब 200 लोगों के लिए सिर्फ एक वाटर कूलर और नौ पंखे लगाए गए थे। इसके उलट, वहां मौजूद अधिकारियों और नेताओं के लिए अलग से दो वाटर कूलर की व्यवस्था थी। इसके अलावा 43 जोड़ों की शादी कराने के लिए सिर्फ दो पंडित बुलाए गए थे। सुबह 10 बजे से आए जोड़ों को दोपहर 2 बजे तक शादी शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों ने कही जांच की बात इस अव्यवस्था पर जनपद पंचायत सीईओ चंदूलाल पनिका ने कहा कि उनका काम सिर्फ आयोजन संभालना था और सभी जोड़ों को घर से ही तैयार होकर आना था, इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। वहीं, गोपद बनास एसडीएम प्रिया पाठक ने बताया कि सभी को पहले से तैयार होकर आने के निर्देश थे, फिर भी अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
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दावा- ट्रम्प टैरिफ को लेकर कॉमर्स मिनिस्टर पर भड़के थे: कहा- भारत अमेरिकी सामान पर 175% टैरिफ लगाता है, तुम्हारे आंकड़े बकवास हैं
वॉशिंगटन डीसी7 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन पर लगने वाले टैरिफ को लेकर एक मीटिंग में अपने ही अधिकारियों पर भड़क गए थे। एक नई किताब के मुताबिक, ट्रम्प को लगता था कि भारत अमेरिकी सामानों पर सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा टैक्स (टैरिफ) लगाता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब ‘रिजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रम्प’ में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक से कहा था कि उन्हें भारत और चीन के टैरिफ को लेकर सही जानकारी नहीं दी जा रही।
किताब के अनुसार, जब लुटनिक ने आधिकारिक आंकड़े दिखाए, तो ट्रम्प ने उन्हें भी खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह आंकड़े बकवास हैं। भारत अमेरिकी सामानों पर कम से कम 175% टैरिफ लगाता है।

रिजीम चेंज किताब के लेखक मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान है।
भारत का औसत टैरिफ 16%
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का औसत ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ टैरिफ 15.8% था। यानी कि अगर भारत 100 तरह के सामान आयात करता है, तो उन सभी पर लगने वाले टैरिफ का औसत लगभग 16% बैठता है।
वहीं 2023 में व्यापार-भारित औसत टैरिफ करीब 12% रहा। इसमें उन सामानों को ज्यादा महत्व दिया जाता है जिनका व्यापार अधिक होता है। यानी वास्तविक व्यापार में भारत पर आने वाला औसत टैरिफ लगभग 12% के आसपास पड़ता है।
यही वजह है कि WTO और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की रिपोर्टों में भारत को उच्च टैरिफ वाला देश तो कहा जाता है, लेकिन कभी पूरे भारतीय टैरिफ इन्फ्रा के लिए 175% का आंकड़ा नहीं दिया गया है।
हावर्ड लुटनिक, जो ट्रम्प की टैरिफ नीति के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं, उन्होंने जनवरी 2025 में सीनेट में अपनी पुष्टि सुनवाई के दौरान भी भारत और चीन का उदाहरण दिया था। उनका तर्क था कि ऊंचे टैरिफ का मतलब हमेशा महंगाई नहीं होता, क्योंकि भारत और चीन में टैरिफ ज्यादा होने के बावजूद महंगाई नियंत्रित रही है।
किताब के मुताबिक, बाद में लुटनिक ऐसी स्थिति में फंस गए जहां एक तरफ ट्रम्प राजनीतिक रूप से टैरिफ के बड़े दावे कर रहे थे और दूसरी तरफ सरकारी आंकड़े उन दावों से मेल नहीं खा रहे थे।
ट्रम्प ने यूक्रेन जंग को लेकर कहा था- भारत नहीं मानेगा
किताब में भारत का जिक्र केवल व्यापार विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें एक और दिलचस्प दावा किया गया है कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ दिनों बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर हुई एक बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत का नाम संभावित शांति सेना भेजने वाले देशों में शामिल किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जनवरी 2025 को ओवल ऑफिस में हुई बैठक में ट्रम्प के रूस-यूक्रेन दूत कीथ केलॉग ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने का एक प्रस्ताव पेश किया था। इस दौरान अमेरिका में यूक्रेन में शांति सैनिक भेजने को लेकर एक बैठक चल रही थी।
बैठक में जब फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे नाटो (NATO) देशों के सैनिक भेजने का प्रस्ताव आया, तो जेडी वेंस ने इस पर चिंता जताई। वेंस का मानना था कि नाटो सैनिकों को यूक्रेन भेजने से रूस नाराज हो सकता है और अमेरिका भी सीधे युद्ध में फंस सकता है।
इसके बाद जेडी वेंस ने सुझाव दिया कि क्यों न गैर-यूरोपीय देशों से मदद ली जाए। वेंस ने इस काम के लिए सऊदी अरब और भारत का नाम आगे बढ़ाया।
किताब में दावा किया गया है कि वेंस का सुझाव सुनते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हंस पड़े थे। उन्होंने कहा, ‘भारतीय ऐसा कभी नहीं करेंगे। वो इस तरह की किसी चीज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करेंगे।’

मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब रिजीम चेंज।
ट्रम्प ने कहा था- मोदी मुझे बहुत पसंद करते हैं
किताब में यह भी दावा किया गया कि ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था कि वे उन्हें बहुत पसंद करते हैं। और उनसे मिलने अमेरिका आना चाहते हैं। ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर भी निशाना साधा।
उन्होंने जेलेंस्की को एक ‘खराब वार्ताकार’ बताया। उन्होंने कहा कि जेलेंस्की ने सही ढंग से बातचीत न करके अपने पूरे देश को बर्बाद कर दिया, लेकिन वो बाइडन सरकार से चीजें हासिल करने में बहुत अच्छे थे।
1 ही कहानी पर बनीं 2 फिल्में, पहली मूवी रही मैसिव हिट दूसरी फ्लॉप, गानों ने तड़पाए दिल
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बॉलीवुड हो या हॉलीवुड, हिट फिल्मों की कहानी में थोड़ी बहुत बदलाव के साथ दूसरी फिल्में बनाई जाती रही हैं. एक ही कहानी पर बनी फिल्में कई बार बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा देती हैं तो कई बार दोनों फिल्में सफल हो जाती हैं. 44 साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में बनी जिनकी कहानी सेम-सेम बट डिफरेंट वाली जैसी थी. दोनों फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन अलग-अलग रहा. दोनों फिल्मों के गाने खूब पॉप्युलर हुए. एक फिल्म के गाने तो इतने पॉप्युलर हैं कि आज भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा रील्स इन पर बनती हैं.
‘तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई और’ और ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’ जैसे गाने सुनते ही दिल में अरमान जगते हैं. कहा जाता है कि
प्यार एक खूबसूरत अहसास है. अपने दिलवर के सामने दिल की बात जुबान पर लाना आसान नहीं होता. प्यार का इजहार करने के लिए शब्द ही सहारा बनते हैं. दिल की बात अगर गानों में झलके तो फिर क्या कहना. 1982 में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसके गानों पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा रील्स बनाई जाती हैं. इसी फिल्म का रीमेक भी बनाया गया लेकिन फिल्म नहीं चली. हम ‘कामचोर’ और ‘राजा जी’ फिल्म की बात कर रहे हैं.

सबसे पहले बात करते हैं 24 दिसंबर 1982 को रिलीज फिल्म ‘कामचोर’ की जिसका डायरेक्शन के. विश्वनाथ ने किया था. फिल्म में राकेश रोशन-जया प्रदा लीड रोल में थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले के. विश्वनाथ ने ही लिखा था. डायलॉग जैनेंद्र जैन ने लिखे थे. प्रोड्यूसर राकेश रोशन ही थे. फिल्म में म्यूजिक राजेश रोशन ने दिया था. फिल्म के यादगार गाने गीतकार इंदीवर ने लिखे थे.

कामचोर फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा. फिल्म की सफलता का क्रेडिट भी जया प्रदा और गानों को मिला. फिल्म में वैसे तो 5 गाने थे. फिल्म के दो गाने बेहद पॉप्युलर हुए. ये गाने थे : तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई और, जुबां पर आज दिल की बात आ गई और तुझ संग प्रीत लगाई सजना. दोनों गाने किशोर कुमार की आवाज में थे. ‘तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई’ किशोर कुमार-अलका याज्ञनिक ड्यूएट और सोलो सॉन्ग था.
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इसके अलावा, फिल्म में सुरेश ओबेरॉय, सुजीत कुमार, श्रीराम लागू और तनूजा अहम भूमिकाओं में थे. सुरेश ओबेरॉय अपने रोल से खुश नहीं थे. उन्होंने फिर राकेश रोशन के साथ काम नहीं किया. फिल्म में नजर आईं नीता मेहता ने भी मूवी रिलीज होने के बाद राकेश रोशन को बुरा-भला कहा था. उन्होंने फिल्म से कई सीन हटाने का आरोप लगाया था.

‘कामचोर’ डायरेक्टर के. विश्वनाथ की 1980 की एक तेलुगू फिल्म का रीमेक थी. फिल्म का म्यूजिक राकेश रोशन के बड़े भाई राजेश रोशन ने कंपोज किया था. फिल्म में राकेश रोशन के भतीजे का किरदार सोनू निगम ने निभाया था. बाद में वो मशहूर प्लेबैक सिंगर बने. ‘कामचोर’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मैसिव हिट रही थी.

आगे चलकर 17 साल बाद ‘कामचोर’ फिल्म का रीमेक ‘राजा जी’ नाम से बनाया गया. यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी. प्रोड्यूसर-डायरेक्टर विमल कुमार थे. फिल्म में गोविंदा और रवीना टंडन की जोड़ी लीड रोल में थी.

‘राजा जी’ फिल्म 21 मई 1999 को रिलीज हुई थी. म्यूजिक आनंद-मिलिंद और विश्वजीत मुखर्जी ने कंपोज किया था. गीतकार समीर थे. 41:07 मिनट के कुल 8 गाने थे. म्यूजिक हिट था. फिल्म के कुछ गाने ‘राजा चलो अकेले में’, ‘सासू जी थारो लल्ला मचाए यार हल्ला’ पॉप्युलर हुए थे.

‘राजा जी’ फिल्म कामचोर से बहुत जयदा इंस्पायर्ड थी. दर्शक फिल्म की कहानी से नहीं जुड़ पाए. फिल्म का बजट करीब 4.75 करोड़ रुपये था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 7.57 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. यह एक फ्लॉप फिल्म साबित हुई थी.
Google Pixel 10 की कीमत में बंपर कटौती, हजारों रुपये सस्ता मिल रहा फ्लैगशिप फोन
Google Pixel 10 की कीमत में एक बार फिर से भारी कटौती की गई है। ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर यह फोन लॉन्च प्राइस से 22,000 रुपये कम कीमत में लिस्ट किया गया है। गूगल का यह फ्लैगशिप फोन दमदार कैमरे और जबरदस्त फीचर्स से लैस है। फोन में Google Gemini AI का सपोर्ट मिलेगा। साथ ही, फोन के साथ कंपनी 7 साल तक Android OS का अपडेट ऑफर कर रही है।
मिल रहा तगड़ा ऑफर
गूगल ने अपने इस फ्लैगशिप फोन को भारत में एक ही स्टोरेज वेरिएंट 12GB RAM + 256GB में लॉन्च किया था। फोन की कीमत 79,999 रुपये है। ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर यह फोन 57,999 रुपये की कीमत में मिल रहा है। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर फोन की खरीद पर 7,000 रुपये का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा नो-कॉस्ट EMI और एक्सचेंज ऑफर का भी लाभ दिया जा रहा है।
Google Pixel 10 के फीचर्स
गूगल के इस फ्लैगशिप फोन में 6.3 इंच का Actua OLED डिस्प्ले मिलता है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसके प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 2 का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलेगा। डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3,000 निट्स तक की है।
Google Pixel 10 में Tensor G5 दिया गया है। यह गूगल का अब तक का सबसे लेटेस्ट चिपसेट है। साथ ही, फोन में 12GB रैम और 256GB तक इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट दिया गया है। इस स्मार्टफोन में कंपनी ने 4,970mAh की बैटरी दी है, जिसके साथ 30W वायर्ड और 10W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट मिलेगा।
| Google Pixel 10 | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.3 इंच, OLED, 120Hz |
| प्रोसेसर | Tensor G5 |
| स्टोरेज | 12GB, 256GB |
| बैटरी | 4970mAh, 30W |
| कैमरा | 48MP, 13MP, 10.8MP, फ्रंट 10.5MP |
| OS | Android 16 |
इस फोन के बैक में कंपनी ने ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया है। फोन में 48MP का मेन OIS कैमरा मिलेगा। इसके साथ 13MP का सेकेंडरी और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 10.5MP का कैमरा मिलेगा। यह स्मार्टफोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। साथ ही, यह IP68 रेटिंग से लैस है, जिसकी वजह से पानी में भींगने और धूल-मिट्टी में यह खराब नहीं होगा।
यह भी पढ़ें – 4 जुलाई से Flipkart पर नई सेल, आधी कीमत में मिलेंगे Motorola, Realme के स्मार्टफोन
(डिसक्लेमर – सेल में मिलने वाले ऑफर में उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में फाइनल प्राइस ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ही चेक करें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
बैंगनी रंग, जबरदस्त टेस्ट! इस जामुन मोजितो के आगे फीके पड़ जाएंगे बाकी ड्रिंक्
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Jamun Mojito Recipe: गर्मी के मौसम में लोग ऐसे पेय की तलाश करते हैं जो स्वाद के साथ ताजगी भी दे. गाजीपुर की रुचि पांडे ने जामुन से तैयार एक खास मोजितो बनाया है, जो इन दिनों लोगों को खूब पसंद आ रहा है. जामुन, नींबू, पुदीना और बर्फ से तैयार यह ड्रिंक न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार माना जाता है.
गाजीपुर की रुचि पांडे की ओर से तैयार किया गया यह जामुन मोजितो गर्मी के मौसम का एक खास ड्रिंक है. जामुन भारत में सदियों से खाया जाने वाला मौसमी फल है, जिसे आयुर्वेद में भी महत्व दिया गया है. जामुन में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और कई आवश्यक खनिज पाए जाते हैं. नींबू, पुदीना और बर्फ के साथ तैयार यह ड्रिंक न केवल आकर्षक दिखता है, बल्कि गर्मी में ताजगी का एहसास भी कराता है. इसकी गहरी बैंगनी रंगत इसे और खास बनाती है.

गाजीपुर की रुचि पांडे सबसे पहले ताज़े और पके हुए जामुन चुनती हैं. जामुन में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. मोजितो का स्वाद और रंग दोनों जामुन की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं. अच्छी तरह धोए गए जामुन इस समर ड्रिंक की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सामग्री हैं.

रुचि पांडे जामुन को पारंपरिक खरल-मूसल में कूटकर उसका गूदा तैयार करती हैं. इस तरीके से जामुन का प्राकृतिक स्वाद और सुगंध बेहतर बनी रहती है. कई फूड एक्सपर्ट मानते हैं कि हाथ से कूटे गए फलों में टेक्सचर और फ्लेवर अधिक प्रामाणिक रहता है. यही प्रक्रिया मोजितो को अलग पहचान देती है.
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जामुन के पल्प में स्वादानुसार काला नमक, साधारण नमक, नींबू का रस, पुदीने की पत्तियां और थोड़ी चीनी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके बाद इसमें बर्फ और ठंडा पानी मिलाया जाता है. ग्लास के किनारे नमक की परत ड्रिंक को एक अलग फ्लेवर देती है. जामुन, नींबू और पुदीने का यह मेल स्वाद के साथ ताजगी भी देता है. रुचि पांडे बताती हैं कि यह जामुन मोजितो घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और गर्मियों में शरीर को तरोताजा रखने का अच्छा विकल्प है.

जामुन के पल्प में स्वादानुसार नमक और अन्य सामग्री मिलाने के बाद मिश्रण तैयार किया जाता है. ग्लास के किनारे नमक और लाल मिर्च की परत ड्रिंक को एक नया फ्लेवर देती है. गर्मियों में यह पेय शरीर को तरोताजा रखने के साथ स्वाद का अलग अनुभव भी देता है. रुचि पांडे इसे घर पर आसानी से बनाने योग्य बताती हैं.

जामुन ड्रिंक कम कैलोरी वाला, ताज़गी देने वाला और पोषक पेय है. एक गिलास में लगभग 35-60 कैलोरी, 8-14 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 1-2 ग्राम फाइबर और विटामिन C मिलता है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं. यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है और गर्मियों के लिए एक अच्छा विकल्प है.


