Friday, June 19, 2026
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राष्ट्रपति दौरा, NEET री-एग्जाम एक साथ: जबलपुर में 21 जून को प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती – Jabalpur News


जबलपुर में 21 जून का दिन प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस दिन राष्ट्रपति का दौरा, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और NEET की पुन: परीक्षा एक साथ आयोजित की जाएगी। इस दोहरे वीआईपी कार्यक्रम और संवेदनशील परीक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तर

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परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने स्वयं मोर्चा संभाला है। उन्होंने परीक्षा केंद्रों और प्रमुख मार्गों का बारीकी से निरीक्षण किया।

‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ (महाकौशल कॉलेज) को NEET परीक्षा का केंद्र बनाया है, और यहां स्थित इनडोर स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए ‘बैकअप वेन्यू’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।

यदि 21 जून की सुबह बारिश होती है, तो मुख्य योग कार्यक्रम इसी 300 क्षमता वाले इनडोर स्टेडियम में स्थानांतरित किया जाएगा। कलेक्टर ने यहां पहुंचकर आपातकालीन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। चुनौती यह है कि यदि सुबह योग कार्यक्रम होता है, तो उसके तुरंत बाद दोपहर में इसी परिसर में परीक्षा आयोजित होगी।

पुलिस ने तैयार किया विशेष रूट प्लान

राष्ट्रपति के कार्यक्रम और NEET परीक्षार्थियों के रिपोर्टिंग समय में टकराव नहीं है, फिर भी पुलिस ने यातायात और सुरक्षा के लिए एक विशेष ‘रूट प्लान’ तैयार किया है। जबलपुर के कुल 23 परीक्षा केंद्रों पर 10,426 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

वीआईपी आवाजाही के दौरान विद्यार्थियों को यातायात जाम से बचाने के लिए विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश एडमिट कार्ड दिखाने के बाद ही दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों से दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक परीक्षार्थियों को समय पर पहुंचाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की है।



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मियाजाकी से ब्लैक कस्तूरी तक! 92 किस्मों के आम उगाकर छाए विकास


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Agriculture Tips: मुजफ्फरपुर के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव इन दिनों खासे चर्चा में हैं. जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं. इसमें मियाजाकी से लेकर ब्लैक कस्तूरी सहित 92 देसी-विदेशी किस्म के आम उगाकर मैंगो मैन की पहचान बनाई. देसी जलवायु में विदेशी का आम सफल उत्पादन कर रहे हैं. पौधों की मांग नेपाल तक है. आइए जानते हैं इनसे बागवानी के खास टिप्स.

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मुजफ्फरपुर: आम की बात होते ही लोगों के मन में लंगड़ा, दशहरी या मालदा जैसे पारंपरिक आमों की तस्वीर उभरती है. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के मरवन प्रखंड के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव ने आम की खेती को एक नई पहचान दी है. अपने बगीचे में 92 अलग-अलग किस्मों के आम लगाकर वह आज “मैंगो मैन” के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं. उनके बगीचे में देसी ही नहीं बल्कि जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं.

एक पेड़ में 3 किस्म, मिलेगी ये वैरायटी 
विकास कुमार यादव के बगीचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही पेड़ पर तीन अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं. बगीचे में जापानी मियाजाकी, केन्सिंग्टन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, अल्फांसो, रेड एम्परर, गोल्डन क्वीन और चॉक अनन जैसी विदेशी वैरायटी के आम भी लगाए गए हैं. इन आमों को देखने और इनके स्वाद का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

ऐसे बढ़ी आमों की नर्सरी में दिलचस्पी
विकास बताते हैं कि वह किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-बाड़ी में रुचि रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब पांच वर्षों तक कृषि विकास के क्षेत्र में काम किया. इस दौरान उन्होंने यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के साथ भी कार्य किया. किसानों की समस्याओं को करीब से देखने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने उन्नत किस्म के आमों की नर्सरी और बागवानी पर काम शुरू किया.

इनके तैयार पौधे भारत सहित नेपाल तक मांग 
आज उनके यहां तैयार किए गए पौधों की मांग बिहार के कई जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और नेपाल तक है. किसान सीधे उनसे संपर्क कर पौधे खरीदते हैं. खास बात यह है कि यदि किसी तकनीकी कारण से पौधा नहीं लग पाता है, तो उसे 100 प्रतिशत रिप्लेस भी किया जाता है. यही वजह है कि किसानों का भरोसा लगातार विकास और उसके नर्सरी के प्रति बढ़ रहा है.

देसी जलवायु में विदेशी आम का किया फलन
विकास कुमार यादव बताते हैं कि कई लोगों का मानना था कि विदेशी किस्म के आम मुजफ्फरपुर की जलवायु में सफल नहीं हो सकते, लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित कर दिखाया. उनके बागान में सभी विदेशी किस्मों में फलन हो रहा है. पौधा खरीदने आने वाले किसानों और ग्राहकों को वह पहले उन आमों का स्वाद भी चखाते हैं, ताकि वे गुणवत्ता को समझ सकें. विकास बताते है कि खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनकी यह पहल न सिर्फ आय का बेहतर स्रोत बनी है, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक और विविधतापूर्ण बागवानी की ओर प्रेरित कर रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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‘वो लव स्टोरी नहीं थी’, ‘जब वी मेट’ को लेकर इम्तियाज अली का बड़ा खुलासा, बयान वायरल


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इम्तियाज अली के डायरेक्शन में बनी फिल्में अक्सर प्यार और रिश्तों की गहराइयों को बयां करती हैं, लेकिन खुद इम्तियाज का मानना है कि वह कभी भी प्यार को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं. अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को मिल रही सराहना के बीच निर्देशक ने अपनी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जब वी मेट’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ और अहान पांडे की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. फिल्म ठीक-ठाक कमाई भी कर रही है. इम्तियाज अली के डायरेक्शन में बनी फिल्म को लेकर उनसे सवाल किया गया है. इसके जवाब के साथ उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया है कि उनकी फिल्म जब वी मेट लव स्टोरी नहीं थी.

इडंस्ट्री के जाने माने डायरेक्टर इम्तियाज अली का एक बयान इन दिनों काफी वायरल हो रहा है. उन्होंने अपनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की चर्चा के बीच खुलासा किया है कि उनकी फिल्म जब वी मेट भी कोई लव स्टोरी नहीं थी, बल्कि दो अजनबियों के एक-दूसरे को पूरा करने की कहानी थी.

Main Vaapas Aaunga Teaser

‘मैं वापस आऊंगा’ को मिल रहे प्यार के बीच इम्तियाज अली से हाल ही में फिल्म को लेकर बात की गई. इस दौरान उन्होंने ‘जब वी मेट’, प्यार की अपनी समझ और वेदांग रैना, शरवरी व नसीरुद्दीन शाह की जमकर तारीफ की.

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इम्तियाज ने अपने करियर में कई अहम फिल्में बनाई हैं. इनमें ‘सोचा ना था’ और ‘जब वी मेट’ से लेकर अपनी हालिया रिलीज़ ‘मैं वापस आऊंगा’ तक, उनके निर्देशन को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. इम्तियाज अली ने अपनी फिल्मों में अलग-अलग पीढ़ियों और दौर की प्रेम कहानियों को पर्दे पर उतारा है.

इतना ही नहीं, उफिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं. फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है, लेकिन इम्तियाज अली ने इस दौरान कह दिया है कि वह खुद कभी भी प्यार को लेकर फिल्में नहीं बनाते.अपनी बातचीत के दौरान इम्तियाज ने खुलासा किया कि मैं अपनी फिल्मों को इस तरह नहीं बनाता कि मुझे उसमें दोनों का प्यार दिखाना होता है.

मेरी पहली फिल्म ‘सोचा ना था’ में मेरी अपनी उलझन थी. फिल्म में जिस तरह विरेन उलझन में था, वह दरअसल मेरी अपनी उलझन थी, जिसे मैंने पर्दे पर उकेरा.कई बार आपको खुद से एक ऐसा जवाब नहीं मिलता और आप उधेड़बुन में लगे रहते हो. इस सही जवाब के लिए मैंने उस पर एक फिल्म बना दी.

करीना कपूर और शाहिद कपूर की फिल्म ‘जब वी मेट’ भी कोई लव स्टोरी नहीं थी, बल्कि कल्ट फिल्म ‘जब वी मेट’ को लेकर भी मेरा नजरिया काफी अलग था. मेरे लिए वो कभी भी लव स्टोरी नहीं थी , यह दो ऐसे लोगों की कहानी है जो अजनबियों की तरह मिलते हैं और धीरे-धीरे एक-दूसरे जैसे बन जाते हैं.

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वे एक-दूसरे को पूरा करते हैं. साथ ही वो मिलकर एक दूसरे को ये एहसास कराते हैं कि हम एक दूजे के लिए है, मैंन उस वक्त भी वो फिल्म प्यार को लेकर नहीं बनाई थी. न ही मैं प्यार के बारे में कुछ जानने या समझने की स्थिति में था. इसी तरह ‘मैं वापस आऊंगा’ के दौरान जब मैंने विभाजन (पार्टिशन) के दौर से गुजरे लोगों से बात की, तो मुझे एहसास हुआ कि इतनी पीड़ा और दुख के बीच उन्हें जिंदा रखने वाली चीज पर भी फिल्म बनाई जा सकती है.

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ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब: ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते


वॉशिंगटन डीसी57 मिनट पहले

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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है।

एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती।

रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी।

इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।

RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद

इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

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भरतपुर की इन देसी मिठाइयों का स्वाद है बेमिसाल,हर निवाले में घुलती है मिठास


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Famous Sweets Of Bharatpur: भरतपुर की गलियों में बसती है ऐसी मिठास, जिसका स्वाद एक बार चखने के बाद लंबे समय तक ज़ुबान पर बना रहता है. बिस्तर बंद की अनोखी मिठास हो, बयाना के मशहूर कलाकंद का मलाईदार स्वाद या फिर साल में एक बार मिलने वाले खजले की कुरकुरी लज़्ज़त, हर मिठाई अपनी अलग कहानी कहती है. यही वजह है कि भरतपुर की ये पारंपरिक मिठाइयां सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और विरासत की मीठी पहचान हैं.

भरतपुर जिला न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर और संस्कृति के लिए जाना जाता है. बल्कि यहां की पारंपरिक मिठाइयां भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं. स्थानीय स्वाद और देसी अंदाज़ में बनी ये मिठाइयां न सिर्फ भरतपुर बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी मशहूर हैं. हर मिठाई की अपनी अलग पहचान और स्वाद है, जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं और खास मौकों पर जरूर शामिल करते हैं.

भरतपुर की एक और खास मिठाई खजला है जो साल में केवल एक बार विशेष अवसर पर बनाई जाती है. यह मिठाई खासतौर पर त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में तैयार की जाती है. इसके अलावा मेला में देखने के लिए मिलती है. खजला का कुरकुरा और मीठा स्वाद इसे बाकी मिठाइयों से अलग बनाता है और लोग सालभर इसके बनने का इंतजार करते हैं.

रूपवास क्षेत्र की नानखटाई भी भरतपुर की पहचान बन चुकी है. यह पारंपरिक बिस्किट जैसी मिठाई घी और मैदा से तैयार की जाती है जिसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है. चाय के साथ इसका आनंद लेना लोगों को बेहद पसंद है और रूपवास की नानखटाई की मांग हमेशा बनी रहती है.

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इसके अलावा मिश्री मावे के लड्डू भी भरतपुर की खास मिठाइयों में शामिल हैं. यह लड्डू मावे और मिश्री के मिश्रण से बनाए जाते हैं जो स्वाद में बेहद मीठे और पौष्टिक होते हैं. शादी-ब्याह और खास अवसरों पर इनका विशेष महत्व होता है. कुल मिलाकर भरतपुर की ये सभी मिठाइयां न केवल स्वाद में बेहतरीन हैं. बल्कि यहां की संस्कृति और परंपरा की झलक भी पेश करती हैं.

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AI सेक्टर में Jio का बड़ा दांव, जामनगर में बनाएगा डेटा सेंटर, कई एआई टूल्स हुए पेश


Reliance के 49वें AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत में AI की नई क्रांति की घोषणा की है। देश के करोड़ों लोगों को सस्ते में AI उपलब्ध कराने के लिए गुजरात के जामनगर में कंपनी देश का सोवर्जन AI बैकबोन बनाने जा रही है। इस एआई डेटासेंटर में कंपनी क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल करने वाली है। इसे रिलायंस के कच्छ स्थित सोलर ग्रिड के जरिए बिजली दी जाएगी। कंपनी ने घोषणा की है कि यह 120 मेगावाट वाला सोलर ग्रिड साल के आखिर तक कमीशन कर  लिया जाएगा।

इस एआई डेटा सेंटर में 75,000 H100 NVIDIA GB300 GPU का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले 120 मेगावाट के कमीशन होने के बाद इसमें दो लाख से ज्यादा H100 GPU लगाए जाने की तैयारी है। इतनी क्षमता के साथ यह दुनिया के लीडिंग AI डेटा सेंटर में अपनी जगह बना लेगा।

हर सेक्टर में AI का बोलबाला

डेटा सेंटर के अलावा कंपनी लोगों के लिए अफोर्डेबल AI सर्विसेस लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने मल्टीलिंगुअल AI सर्विस की घोषणा की है, जिसे 22 भारतीय भाषाओं के सपोर्ट के साथ डिजाइन किया गया है। कंपनी ने JioBharatIQ, AI Vyapar, JioHealthIQ, JioLearnIQ और JioKrishiIQ की घोषणा की है, जो करोड़ों भारतीयों की मदद करेगा।

  • Jio BharatIQ को देश के हर नागरिक का AI साथी के तौर पर लॉन्च किया गया है।
  • Jio AI Vyapar को छोटे व्यापारियों और बिजनेस के लिए डेवलप किया गया है। यह एआई टूल छोटे बिजनेस की प्रोडेक्टिविटी बढ़ाने और ग्राहकों क मदद के लिए डिजाइन किया है।
  • Jio HealthIQ को हेल्थकेयर सेक्टर के लिए डेवलप किया गया है। यह एजेंटिक एआई हर परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं में मदद करेगा।
  • Jio LearnIQ को हर छात्र को अपनी भाषा में सीखने के लिए डेवलप किया गया है। वो एक ही जगह हर जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
  • Jio KrishIQ को खास तौर पर किसानों के लिए डिजाइन किया गया है। यह एजेंटिक एआई किसानों को खेती से संबंधित हर छोटी जानकारी उपलब्ध कराएगा।

AGM में अपने कीनोट के दौरान कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि हम AI रिसर्चर्स और इंजीनियर्स की वर्ल्ड क्लास टीम तैयार कर रहे हैं। भारत में एआई स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में कंपनी बड़ा निवेश करने जा रही है। इसके लिए रिलायंस देश के कई बड़े यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ साझेदारी की है।

India AI Mission

49वें AGM में जियो की ये घोषणाएं आने वाले समय में भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने का काम करेगा। यह केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी परियोजना India AI Mission के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

यह भी पढ़ें – 49वें AGM में AI का बोलबाला, Jio ने लॉन्च किया TeleFrame, घर को बनाएगा स्मार्ट होम





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फोटो-बदलकर अन्नपूर्णा रसोई में बनाए नए लाभार्थी, 4 रसोइयां सीज: पकड़े जाने पर संचालक बोले- कच्ची बस्तियों के लोगों के पास कपड़े कम होते हैं – Jhunjhunu News


गरीब और जरूरतमंद लोगों को 8 रुपए में भोजन उपलब्ध कराने वाली अन्नपूर्णा रसोई योजना में AI की मदद से फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

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जांच में खुलासा हुआ कि अन्नपूर्णा रसोई संचालक पुराने लाभार्थियों की फोटो में बदलाव कर उन्हें नया बताकर पोर्टल पर अपलोड कर रहे थे। इसके बाद उन्हीं के आधार पर फर्जी कूपन जनरेट कर रहे थे।

मामले में 4 अन्नपूर्णा रसोइयों को सीज किया गया है और प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। अब जिले की सभी 38 रसोइयों के पिछले 5 महीने के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। हालांकि पकड़े गए संचालकों का दावा है कि कच्ची बस्तियों के लोगों के पास कपड़े कम होते हैं, ऐसे में उनकी फोटो एक ही दिखाई दे रही है।

झुंझुनू में संचालित अन्नपूर्णा रसोई (फाइल फोटो)

कैसे करते थे यह खेल, AI से फोटो बदलकर बनाए जा रहे थे नए लाभार्थी

​भ्रष्टाचार के इस डिजिटल मॉडल को समझने के लिए शुक्रवार को दैनिक भास्कर टीम ने जब आईटी एक्सपर्ट्स और जानकारों से बात की, तो जांच में सामने आया कि कुछ अन्नपूर्णा रसोई संचालक पुराने लाभार्थियों की फोटो को AI टूल की मदद से बदल रहे थे। फोटो में चेहरा, बैकग्राउंड, पिक्सल और कपड़ों के रंग में मामूली बदलाव कर उसे नए लाभार्थी की तरह पोर्टल पर अपलोड किया जाता था।

इसके बाद एक ही व्यक्ति की फोटो का अलग-अलग तारीखों में उपयोग कर कई कूपन जनरेट किए जा रहे थे। मौके पर कम लोग भोजन कर रहे थे, लेकिन रिकॉर्ड में ज्यादा भोजन परोसा हुआ दिखाया जा रहा था।

डायरेक्टर अनिता कुमारी फर्जीवाड़े की जानकारी देते हुए।

डायरेक्टर अनिता कुमारी फर्जीवाड़े की जानकारी देते हुए।

ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

अनिता कुमारी, जॉइंट डायरेक्टर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन, आईटी सेल विभाग ने बताया- डीएलबी की आईटी टीम ने ऑनलाइन कूपन डेटा और लाभार्थियों की फोटो की जांच की। जांच में कई फोटो में एक जैसे चेहरे, कपड़े और पैटर्न बार-बार दिखाई दिए।

कुछ रसोइयों में रिकॉर्ड के अनुसार रोज 190 से 200 कूपन कट रहे थे, जबकि मौके पर केवल 19 से 20 लोग ही भोजन करते मिले। डेटा, फोटो और मौके की स्थिति का मिलान करने पर गड़बड़ी सामने आ गई।

इसके बाद 4 रसोइयों को सीज कर प्रत्येक पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।

योजना के तहत 8 रुपए में पौष्टिक थाली उपलब्ध कराई जाती है।

योजना के तहत 8 रुपए में पौष्टिक थाली उपलब्ध कराई जाती है।

जरूरतमंदों को सस्ता भोजन देना था उद्देश्य

सरकार ने गरीब, मजदूर, प्रवासी और जरूरतमंद लोगों को सस्ते में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अन्नपूर्णा रसोई योजना शुरू की थी। योजना का उद्देश्य था कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए।

योजना के तहत 8 रुपए में 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 300 ग्राम चपाती और 100 ग्राम चावल या मिलेट्स की खिचड़ी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए सरकार संचालकों को अनुदान भी देती है।

वेरिफिकेशन सिस्टम में AI से किया घोटाला

जानकारी के अनुसार सरकारी पोर्टल का वेरिफिकेशन सिस्टम चेहरे के मुख्य फीचर्स को पहचानता है। आरोप है कि AI की मदद से फोटो के पिक्सल, कपड़ों के रंग और बैकग्राउंड में बदलाव कर सिस्टम को भ्रमित किया गया।

इस तरीके से एक ही व्यक्ति को अलग-अलग लाभार्थी दिखाकर फर्जी कूपन बनाए गए।

नोडल अधिकारी अरुण कुमार जाखड़ ने पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी दी।

नोडल अधिकारी अरुण कुमार जाखड़ ने पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी दी।

एक जैसे कपड़ों पर संचालक बोले-

आईटी टीम की जांच में कई लाभार्थी लगातार एक जैसे कपड़ों में दिखाई दिए। कई महीनों तक एक जैसे कपड़ों वाली फोटो सामने आने पर संचालकों से जवाब मांगा गया।

इस पर संचालकों ने कहा कि कच्ची बस्तियों के लोगों के पास कपड़े कम होते हैं, इसलिए वे रोज एक जैसे कपड़े पहनकर भोजन करने आते हैं।

मामला सामने आने के बाद स्वायत्त शासन विभाग (DLB) और स्थानीय प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

जिले की सभी 38 अन्नपूर्णा रसोइयों के 1 जनवरी 2026 से 31 मई 2026 तक के ऑनलाइन कूपन डेटा, आवंटन और उपयोग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

कई जगह भोजन और कूपन के आंकड़ों में अंतर

जांच में यह भी सामने आया कि असली काउंटर पर भले ही कम लोग भोजन कर रहे थे, लेकिन बैकएंड में कंप्यूटर ऑपरेटर AI से तैयार फोटो के जरिए लगातार कूपन जनरेट कर रहे थे।

कई जगह 20 लोगों के आने के बावजूद रिकॉर्ड में 190 से 200 कूपन तक काटे जाने का मामला सामने आया। जांच में भोजन क्षमता और उपयोग के आंकड़ों में भी अंतर मिला है।

मंड्रेला की एक रसोई की कुल क्षमता 57,800 भोजन की थी, जबकि रिकॉर्ड में 36,986 भोजन दर्ज किए गए। उपयोग प्रतिशत 63.99 रहा।

झुंझुनूं शहर की 6 रसोइयों में कुल क्षमता 58,200 भोजन की थी, जबकि रिकॉर्ड में 42,661 भोजन दर्ज किए गए। यहां उपयोग प्रतिशत 73.30 रहा।

मुकुंदगढ़ की 2 रसोइयों में 72.12 प्रतिशत और मंडावा की 2 रसोइयों में 86 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया।

बिसाऊ में सबसे ज्यादा गड़बड़ी का शक

बिसाऊ की 2 रसोइयों में रिकॉर्ड के अनुसार 44,606 भोजन और 74.59 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया।

लेकिन मौके की जांच में सामने आया कि वहां रोजाना केवल 19 से 20 लोग भोजन कर रहे थे, जबकि 190 से 195 कूपन प्रतिदिन काटे जा रहे थे। इससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया।

वहीं सुल्ताना में 95.51 प्रतिशत और सिंघाना में 95.19 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों की भी दोबारा जांच की जा रही है।

सुलताना और सिंघाना में 95% से ज्यादा उपयोग

रिकॉर्ड के मुताबिक सुलताना में 95.51% और सिंघाना में 95.19% उपयोग दर्ज किया गया है। ये आंकड़े 100% के काफी करीब हैं। इसलिए इन रसोइयों के रिकॉर्ड की भी AI टूल की मदद से दोबारा जांच की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये आंकड़े सही हैं या फिर कूपन बढ़ाकर दिखाए गए हैं।

गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

नोडल अधिकारी अरुण जाखड़ ने बताया कि जिले में वर्तमान में 38 रसोइयां संचालित हैं।

उन्होंने कहा कि जिन 4 रसोइयों पर कार्रवाई हुई है, उनसे जुर्माने की राशि बकाया बिलों से वसूल की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि बाकी 34 रसोइयों के रिकॉर्ड की भी जांच चल रही है। यदि किसी संस्था द्वारा कूपन बढ़ाने या AI के जरिए पुरानी फोटो का उपयोग कर फर्जी लाभार्थी बनाने की पुष्टि होती है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Jio IPO : आकाश, ईशा और अनंत संभालेंगे जियो आईपीओ की जिम्‍मेदारी


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JIO IPO : आरआईएल के सीएमडी मुकेश अंबानी ने जियो के आईपीओ पर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने कहा कि आईपीओ की जिम्‍मेदारी आकाश, ईशा और अनंत अंबानी निभाएंगे और इसका DRHP आज ही जमा करा दिया जाएगा.

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रिलायंस की 49वी एजीएम 19 जून को हो रही है.

नई दिल्‍ली. रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन और एमडी मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को रिलायांस की 49वीं सालाना महासभा में जियो के आईपीओ पर सबसे बड़ा अपडेट दिया. उन्‍होंने बताया कि आकाश, ईशा और अनंत मिलकर जियो के आईपीओ की जिम्‍मेदारी संभालेंगे. इसका DRHP आज सेबी के पास जमा करा दिया जाएगा. मुकेश अंबानी ने कहा कि 10 साल पहले जियो की शुरुआत ऐसे माहौल में हुई थी, जब डाटा महंगा था और इंटरनेट की स्‍पीड काफी खराब. आज डाटा तो सस्‍ता हुआ ही है, स्‍पीड भी दुनिया के अन्‍य देशों को टक्‍कर दे रही है.

मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो प्‍लेटफॉर्म के आईपीओ को बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है और इसका DRHP बाजार नियामक सेबी के पास 19 जून को ही जमा भी कर दिया जाएगा. उन्‍होंने कहा कि जियो को आईपीओ रिलायंस की मूल्‍य वृद्धि के लिहाज से इस साल का सबसे बड़ा कदम होगा. यह रिलायंस के शेयरधारकों के लिए भी काफी महत्‍वपूर्ण साबित होने वाला है, जो हमारे निवेशकों को बेहतरीन निवेशक का अवसर दिलाएगा.

दुनिया के लिए नजीर होगा आईपीओ
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो का आईपीओ दुनिया के लिए नजीर साबित होगा. यह दुनिया को दिखा देगा कि भारत विश्‍व स्‍तरीय और वैश्विक क्षमता वाली तकनीक कंपनी बनाने में सक्षम है. इस आईपीओ की अगुवाई आकाश, ईशा और अनंत अंबानी करेंगे, जबकि तीनों ही नेक्‍स जेनरेशन के तौर पर कंपनी को आगे बढ़ाने का भी काम करेंगे.

(डिस्क्लेमर- नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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पत्नी से झगड़े के बाद ऑटो चालक ने खाया जहर: कन्नौज में इलाज के दौरान मौत, पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा – Kannauj News


विकास अवस्थी | कन्नौजकुछ ही क्षण पहले

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कन्नौज जिले में पत्नी से झगड़े के बाद एक ऑटो चालक ने जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

यह घटना सदर कोतवाली क्षेत्र की मानीमऊ चौकी के सैय्यदपुर सकरी गांव की है। मृतक की पहचान सुधीर कुशवाहा (40) पुत्र कुशल मिस्त्री के रूप में हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, सुधीर सुबह करीब दस बजे शराब के नशे में घर पहुंचा था।

घर पहुंचने के बाद सुधीर का अपनी पत्नी से झगड़ा हो गया। झगड़े के बाद वह घर के पीछे चला गया और वहां सल्फास की चार पुड़िया खा लीं। जहरीला पदार्थ खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

परिजनों ने तुरंत सुधीर को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसे भर्ती कर डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। हालांकि, इलाज के दौरान सुधीर ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।

सुधीर कुशवाहा ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके दो बेटे और दो बेटियां हैं, और वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।



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