Friday, June 19, 2026
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80 बार रिजेक्ट हुई वो कालजयी गाना, समा गया दर्शकों के दिल में, मूवी ने रचा इतिहास


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कुछ फिल्में बस बन जाती है. चाहकर भी ऐसी फिल्में दोबारा नहीं बन सकतीं. इन फिल्मों के गाने-स्टोरी दिल में बस जाती है. जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, मूवी की यादें दिल में गहरी होती जाती हैं. इन फिल्मों के गाने भी दिल में बस जाते हैं. सुनते ही मन यादों में खो जाता है. 26 साल पहले ही ऐसी ही एक कल्ट मूवी आई थी जिसके 11 गाने थे. हर गाना दिल को छू लेने वाला था. डायरेक्टर ने संगीतकार को सिर्फ एक लाइन की स्टोरी सुनाई थी.

2000 का दशक यादगार फिल्मों के लिए जाना जाता है. लाइफ उतनी फास्ट नहीं थी. स्मार्ट फोन हाथ में नहीं आए थे. ऐसे दौर में रोमांटिक गानों को टीवी और रेडियो पर देख-सुनकर ही लोग मनोरंजन करते थे. इसी दौर में एक ऐसी म्यूजिकल रोमांटिक आई जिसके गाने आज भी दिल में बसे हुए हैं. इस फिल्म के गानों को सुनकर आज भी दिल को सुकून मिलता है. इस फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग के समय डायरेक्टर की आंखों में आंसू आ गए थे. हम 13 जुलाई 2001 को रिलीज ‘तुम बिन’ फिल्म की बात कर रहे हैं जिसकी गिनती आज कल्ट मूवी में होती है.

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‘तुम बिन’ में संदली सिन्हा, प्रियांशु चटर्जी, हिमांशु मलिक और राकेश बापट लीड रोल में थे. छोटे से बजट की इस फिल्म ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई. दिल को छू लेने वाला म्यूजिक और नए एक्टर्स की जबरदस्त परफॉर्मेंस मिलकर जादू पैदा किया. 2001 में सनी देओल की ‘गदर’ और आमिर खान की ‘लगान’ की धूम के बीच बहुत ही खूबसूरत फिल्म ‘तुम बिन’ आई थी. टी-सीरीज के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था. बतौर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की यह पहली फिल्म थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ बच्चन की ‘अक्स’ फिल्म के साथ ही ‘तुम बिन’ रिलीज हुई थी. ‘अक्स’ फ्लॉप हो गई थी जबकि ‘तुम बिन’ सरप्राइज हिट निकली.

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‘तुम बिन’ फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले अनुभव सिन्हा ने ही लिखा था. फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसका म्यूजिक था. फिल्म में कुल 11 गाने थे. म्यूजिक निखिल-विनय, टीएस जरनैल और रवि पवार ने कंपोज किया था. मुख्य रूप से गाने संगीतकार निखिल-विनय के ही थे. निखिल-विनय का पूरा नाम निखिल कामत-विनय राम तिवारी है. दोनों ने 90 के दशक में कई फिल्मों में म्यूजिक दिया. ‘तुम बिन’ फिल्म के चार गाने ‘तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे’, ‘कोई फरियाद’, ‘छोटी-छोटी रातें’ और ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ सॉन्ग बहुत पॉप्युलर हुए. ये सभी गाने निखिल-विनय ने कंपोज किए. ‘कोई फरियाद’ गाना जगजीत सिंह ने गाया था. वहीं ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना केएस चित्रा की आवाज में था. दोनों गानों की गिनती कल्ट सॉन्ग में होती है.

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अनुभव सिन्हा ने टी-सीरीज के लिए कई म्यूजिक वीडियो बनाए थे. कई टीवी सीरियल्स का डायरेक्शन किया था. वो भूषण कुमार से अक्सर फिल्म बनाने के लिए कहा करते थे. एक दिन भूषण कुमार के घर पर संगीतकार निखिल-विनय मौजूद थे. अनुभव सिन्हा भी आए हुए थे. भूषण कुमार ने सबके सामने अनाउंस किया वो ‘तुम बिन’ नाम से फिल्म बनान चाहते हैं. उस दिन अनुभव सिन्हा ने फिल्म की कहानी एक लाइन में सुनाई.

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संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कहानी सीधे पर दिल पर लगी. अनुभव सिन्हा ने फिल्म भी वैसे ही बनाई. दो-तीन गाने जो हमारे बैंक में थे, वो हमने सुनाए. ये गाने थे : छोटी-छोटी रातें, लंबी हो जाती हैं’, तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे. भूषण कुमार ने ये गाने अपने पास रखी डायरी में नोट कर लिए थे.’ दूसरे दिन टी-सीरीज के ऑफिस पर में फिल्म का विधिवत अनाउंसमेंट हुआ. अनुभव सिन्हा ने सबको डिटेल में कहानी सुनाई.

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फिल्म के दो गाने ‘कोई फरियाद’ और ‘तुम बिन जिया जाए’ कैसे कालजयी सॉन्ग माने जाते हैं. इन गानों के बनने का किस्सा भी दिलचस्प है. संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कोई फरियाद गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान संदली सिन्हा समेत सभी एक्टर आते थे. संदली सिन्हा की आवाज सुनकर हम लोगों को ऐसा लगा कि यह वॉइस केएस चित्रा की आवाज है. चित्रा को साउथ की लता मंगेशकर कहा जाता है. हमने इमेजन किया कि संदली सिन्हा तन्हाई में है. वो अपने प्यार को याद कर रही है. एक और गाना ‘तुम बिन जिया जाए’ बनाया.’

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‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना तीन दिन में रिकॉर्ड हुआ था. निखिल-विनय और डायरेक्टर अनुभव सिन्हा फ्लाइट से मद्रास पहुंचे थे. एवीएमजी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग हुई थी. केएस चित्रा ने फोन पर गाना सुना था. 15 मिनट रिहर्सल किया. फिर दो घंटे का ब्रेक लिया. गाना तीन टेक में रिकॉर्ड किया था. गाना कितना पॉप्युलर हुआ, पूरी दुनिया जानती है. डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने गीतकार फैज अनवर को सिचुएशन बता दी थी. फिर कहा कि गजल लिखो. फोन पर वो मुझे शेर सुनाते थे. मैं रिजेक्ट कर देता था. महीनों यह सिलसिला चलता रहा. मुझे वो लम्हा याद है. मैं कहीं शूटिंग में गया था. मेरा फोन बजा. उन्होंने शेर सुनाया. एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर, जिंदगी तेज बहुत तेज चली हो जैसे. मैंने कहा डन. बोले कसम खुदा की. 80वां शेर सुनाया है. फिर गजल लिखी गई.’

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महज पौने 3 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 7.53 करो‌ड़ रुपये का कलेक्शन किया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. ‘तुम बिन’ रिलीज होते ही संदली सिन्हा रातों-रात स्टार बन गईं. प्यारी सी मुस्कान और मासूम चेहरे पर दर्शक फिदा हो गए. हालांकि बॉलीवुड में उन्हें बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली. 2005 में उन्होंने बिजनेसमैन किरण सालस्कर से शादी कर ली.

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स्पेशल कुल्हड़ लस्सी, विरासत को चमका रहे हैं दो भाई, मेवा-रबड़ी से भरपूर


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Agra Mashoor Lassi: उत्तर प्रदेश का आगरा शहर सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब और अनूठे जायके के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. गर्मियों के इस सीजन में आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित 30 साल पुरानी ‘दीपू की लस्सी दुकान’ लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है. दादा और पिता की विरासत को संभाल रहे दो भाई आज भी 30 साल पुराने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के साथ ग्राहकों को लस्सी परोस रहे हैं. यहाँ मात्र 50 रुपये में मिलने वाली स्पेशल रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स से भरपूर कुल्हड़ वाली लस्सी का क्रेज ऐसा है कि लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं.

Lassi News: उत्तर प्रदेश के आगरा शहर को सिर्फ मोहब्बत की निशानी ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि सुबह, दोपहर और शाम के नाश्ते का स्वाद और वैरायटी बिल्कुल अलग-अलग होती है. यही वजह है कि देश-विदेश से आगरा घूमने आने वाले पर्यटक यहां के स्थानीय खान-पान का लुत्फ उठाना कभी नहीं भूलते. इन दिनों गर्मियों के सीजन में आगरा की ‘स्पेशल कुल्हड़ वाली लस्सी’ की डिमांड सातवें आसमान पर है. वैसे तो लस्सी आपको आगरा के हर नुक्कड़ पर मिल जाएगी, लेकिन शहर में एक ऐसी प्राचीन दुकान है जो पिछले तीन दशकों से स्वाद का सम्राज्य चला रही है. इसे आगरा की सबसे भरोसेमंद और पुरानी लस्सी दुकानों में से एक माना जाता है.

आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित इस मशहूर दुकान के वर्तमान संचालक दीपू ने बताया कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से इसी एक स्थान पर लगातार लस्सी बेच रहे हैं. यह उनके लिए सिर्फ एक व्यापार नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत है. शुरुआत में उनके दादा और पिता दोनों मिलकर इस दुकान को चलाते थे. उनके जाने के बाद अब दीपू और उनके भाई ने इस पुश्तैनी दुकान की कमान पूरी निष्ठा के साथ संभाली हुई है.

संचालक दीपू का क्या कहना है-

‘हमारे पास दूर-दराज के इलाकों और दूसरे शहरों से लोग लस्सी पीने आते हैं. इसकी एकमात्र खास वजह यह है कि हम क्वालिटी और शुद्धता से कभी कोई समझौता नहीं करते. जैसा शुद्ध स्वाद हमारे दादाजी के जमाने में 30 साल पहले मिलता था, वही शुद्धता और गाढ़ापन हम आज भी बरकरार रखे हुए हैं. हम लस्सी बनाने के लिए केवल पूरी तरह शुद्ध और एकदम ताज़ा दही का ही इस्तेमाल करते हैं.’

₹50 के गिलास में मिलता है भरपूर माल

दुकानदार दीपू ने अपनी दुकान के सफर को याद करते हुए बताया कि जब उनके दादाजी ने यह कार्य शुरू किया था, तब महकती हुई कुल्हड़ लस्सी महज 2 से 3 रुपये के मामूली दाम में मिला करती थी. धीरे-धीरे समय बदला और महंगाई के साथ आज इसकी कीमत 40 और 50 रुपये हो गई है. यहाँ बिना रबड़ी वाली सादा लस्सी की रेट ₹40 है, जबकि ग्राहकों की पहली पसंद ‘स्पेशल रबड़ी वाली लस्सी’ की कीमत मात्र ₹50 है.

क्या है ₹50 वाली स्पेशल लस्सी का गणित?

दीपू का दावा है कि उनकी एक गिलास स्पेशल लस्सी पीने के बाद इंसान पूरे दिन सूरज की तपती धूप में भी पूरी तरह एनर्जेटिक रहेगा और उसे कमजोरी या थकान का अहसास तक नहीं होगा. इस स्पेशल लस्सी को बेहद अनोखे अंदाज में तैयार किया जाता है-

सबसे पहले शुद्ध ताज़ा दही को मथा जाता है. लस्सी के ऊपर दही की मोटी मलाई और लच्छेदार गाढ़ी रबड़ी डाली जाती है, जो इसका स्वाद दोगुना कर देती है. इसके बाद इसमें प्रचुर मात्रा में काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश और चिरौंजी जैसे बेहतरीन ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं. स्वाद और रंगत को बढ़ाने के लिए ऊपर से लाल चेरी और खुशबूदार रूहअफजा का सिरप डाला जाता है. यहां का स्वाद चखने के बाद ग्राहक इतने खुश होते हैं कि वे न सिर्फ खुद पीते हैं बल्कि अपने परिवार के लिए भी पैक करवा कर ले जाते हैं.

शुगर मरीजों का भी खास ख्याल

आमतौर पर लोग लस्सी को सिर्फ गर्मियों का ड्रिंक मानते हैं, लेकिन बोदला चौराहे की यह 30 साल पुरानी दुकान साल के पूरे 12 महीने ग्राहकों के लिए खुली रहती है. दीपू ने बताया कि उनके कई ऐसे पक्के और शौकीन ग्राहक हैं जो कड़कड़ाती सर्दियों में भी लस्सी पीने के लिए विशेष रूप से आते हैं. हालांकि ठंड के दिनों में सीजन की तुलना में काम थोड़ा हल्का जरूर होता है, लेकिन दुकान कभी बंद नहीं होती.

इस दुकान की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां हर वर्ग के ग्राहक का ख्याल रखा जाता है. दीपू ने बताया कि आजकल कई लोग डायबिटीज (शुगर) की बीमारी से पीड़ित हैं. ऐसे ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखते हुए वे उन्हें सामान्य चीनी वाली लस्सी नहीं देते, बल्कि उनके लिए बिना चीनी वाली स्पेशल ‘शुगर-फ्री लस्सी’ (Sugar-Free Lassi) तैयार करते हैं. इस खास ख्याल और बेमिसाल स्वाद की वजह से ही पिछले 30 वर्षों से दीपू की लस्सी का जादू पूरे आगरा और आसपास के क्षेत्रों में सिर चढ़कर बोल रहा है.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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डाकिये की डाक चोरी करने वाला चोर गिरफ्तार: खुर्जा पुलिस ने 32 रजिस्टर्ड डाक सहित दस्तावेज बरामद किए – Bulandshahar News




बुलंदशहर में खुर्जा नगर पुलिस ने एक चोर को गिरफ्तार किया है, जिसने डाकिया की डाक चोरी की थी। आरोपी के कब्जे से 32 रजिस्टर्ड डाक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। यह गिरफ्तारी 18 जून 2026 की रात को हुई। यह मामला 16 जून 2026 का है, जब मुख्य डाकघर खुर्जा नगर के अर्जुन कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि डाक बांटने गए डाकिया हरकेश की साइकिल और डाक जटिया अस्पताल के सामने से एक अज्ञात चोर ने चुरा ली थी। इस संबंध में थाना खुर्जा नगर में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 18 जून 2026 की रात को किला मेवई मोड़ नाले के पास से आरोपी रवि कुमार को गिरफ्तार किया। उसके पास से चोरी की गई डाक भी बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रवि कुमार पुत्र देवेंद्र सिंह, निवासी ग्राम सैमडा, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर के रूप में हुई है। बरामदगी में कुल 32 रजिस्टर्ड डाक, एसबीएफसी का फटा हुआ पजेशन नोटिस और 04 डिलीवरी मेनिफेस्ट शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।



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शेखपुरा में तेज हवा के साथ बारिश,ढाई डिग्री गिरा टेंपरेचर: अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज,घंटों बिजली आपूर्ति बाधित – Sheikhpura News




शेखपुरा में पिछले एक सप्ताह की भीषण गर्मी के बाद शुक्रवार शाम को हुई झमाझम बारिश से मौसम सुहावना हो गया। इस बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। जिले का अधिकतम तापमान ढाई डिग्री सेल्सियस गिरकर 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में मध्यम दर्जे की बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज हवा और गरज-चमक के साथ हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए जनजीवन प्रभावित हुआ। तेज हवा के साथ हुई बारिश से जिले के कई क्षेत्रों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस बारिश से खेती-किसानी से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है, जो मानसून का इंतजार कर रहे थे। बारिश के अभाव में रुके हुए धान के बिचड़े डालने और अरहर व मक्का जैसी शारदीय फसलों की बुवाई के कार्य अब शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आने वाले दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। विभाग ने बारिश के दौरान वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न रहने की सलाह दी है।



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पुणे में 400 फीट गहरी खाई में गिरा युवक: मंगेतर का बर्थडे मनाने गया था, तेज हवा से बैलेंस बिगड़ा; नंवबर में शादी होनी थी


पुणे2 घंटे पहले

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महाराष्ट्र के पुणे में बने लोहगढ़ किले पर घूमने गया युवक फोटो खींचते समय 400 फीट गहरी खाई में गिर गया। चोटों के चलते उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक तेज हवाओं के चलने से वह बैलेंस नहीं बना सका और फिसल गया।

मरने वाले की पहचान केतन विशाल अग्रवाल के रूप में हुई है। वह पुणे के पास गहुंजे का रहने वाला था और रियल एस्टेट कंपनी का डायरेक्टर था।

यह हादसा तब हुआ जब उनकी मंगेतर और दो करीबी दोस्त, केतन की होने वाली पत्नी का जन्मदिन मनाने के लिए किले पर चढ़े थे। उसकी शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी।

पुलिस और शिवदुर्ग मित्र इमरजेंसी रेस्क्यू टीम ने घनी झाड़ियों से 3 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर केतन के शव को बाहर निकाला

पुलिस और शिवदुर्ग मित्र इमरजेंसी रेस्क्यू टीम ने घनी झाड़ियों से 3 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर केतन के शव को बाहर निकाला

शादी के लिए राजस्थान में बुक किया था पैलेस

लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दिनेश तायडे ने बताया कि घटना के समय तेज हवाएं चल रही थीं। अग्रवाल की शादी नवंबर में तय थी और पता चला है कि परिवारों ने शादी के लिए राजस्थान के उदयपुर में एक पैलेस बुक किया था। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एक्सीडेंटल डेथ (दुर्घटना से मौत) की रिपोर्ट दर्ज की गई है और आगे की जांच चल रही है।

यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल है लोहगढ़ फोर्ट

लोहागढ़ किला छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दुर्ग माना जाता है। यह महाराष्ट्र के उन 12 किलों में शामिल है जिन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला हुआ है। मानसून के दौरान यहां बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रेकर्स पहुंचते हैं।

महाराष्ट्र के पुणे से 65 किमी दूर बना एक पहाड़ी किला है। यह समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर (3,389 फीट) की ऊंचाई पर बना है और सह्याद्रि पर्वतमाला का हिस्सा है। माना जाता है कि किले का निर्माण लगभग 11वीं–12वीं शताब्दी में हुआ था।

इस पर विभिन्न राजवंशों का नियंत्रण रहा, जिनमें यादव, बहमनी, निजामशाही, मुगल और मराठा शामिल हैं। शिवाजी महाराज ने 1648 में इस किले पर कब्जा किया था। 1665 की पुरंदर की संधि के बाद यह मुगलों के पास चला गया, लेकिन बाद में मराठों ने इसे फिर हासिल कर लिया।

मराठा शासन के दौरान इसका उपयोग खजाना और महत्वपूर्ण सामान रखने के लिए किया जाता था। विंचू कटा इसकी सबसे प्रसिद्ध संरचना है। यह बिच्छू की पूंछ जैसी लंबी पत्थरीली दीवार है।

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महाराष्ट्र में कार 800 फीट गहरी खाई में गिरी: 8 की मौत, मोबाइल से लोकेशन मिली

महाराष्ट्र और कर्नाटक में दो हादसों में 19 लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र के रायगड में पोलादपुर-महाबलेश्वर रोड के अंबेनली घाट इलाके में रविवार सुबह एसयूवी कार 800 फीट गहरी खाई में गिर गई। घटना में 8 लोगों की मौत हुई है। पीड़ित परिवारों की शिकायत पर पुलिस ने मृतकों के मोबाइल की लास्ट लोकेशन ट्रेस की। तब जाकर घटना की जानकरी मिली। पढ़ें पूरी खबर…

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राष्ट्रपति दौरा, NEET री-एग्जाम एक साथ: जबलपुर में 21 जून को प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती – Jabalpur News


जबलपुर में 21 जून का दिन प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। इस दिन राष्ट्रपति का दौरा, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और NEET की पुन: परीक्षा एक साथ आयोजित की जाएगी। इस दोहरे वीआईपी कार्यक्रम और संवेदनशील परीक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तर

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परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय ने स्वयं मोर्चा संभाला है। उन्होंने परीक्षा केंद्रों और प्रमुख मार्गों का बारीकी से निरीक्षण किया।

‘प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ (महाकौशल कॉलेज) को NEET परीक्षा का केंद्र बनाया है, और यहां स्थित इनडोर स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए ‘बैकअप वेन्यू’ के रूप में तैयार किया जा रहा है।

यदि 21 जून की सुबह बारिश होती है, तो मुख्य योग कार्यक्रम इसी 300 क्षमता वाले इनडोर स्टेडियम में स्थानांतरित किया जाएगा। कलेक्टर ने यहां पहुंचकर आपातकालीन व्यवस्थाओं का जायजा लिया। चुनौती यह है कि यदि सुबह योग कार्यक्रम होता है, तो उसके तुरंत बाद दोपहर में इसी परिसर में परीक्षा आयोजित होगी।

पुलिस ने तैयार किया विशेष रूट प्लान

राष्ट्रपति के कार्यक्रम और NEET परीक्षार्थियों के रिपोर्टिंग समय में टकराव नहीं है, फिर भी पुलिस ने यातायात और सुरक्षा के लिए एक विशेष ‘रूट प्लान’ तैयार किया है। जबलपुर के कुल 23 परीक्षा केंद्रों पर 10,426 परीक्षार्थी शामिल होंगे।

वीआईपी आवाजाही के दौरान विद्यार्थियों को यातायात जाम से बचाने के लिए विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश एडमिट कार्ड दिखाने के बाद ही दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों से दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक परीक्षार्थियों को समय पर पहुंचाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था भी की है।



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डेंगू-मलेरिया के खिलाफ एमसीडी की बड़ी मुहिम: 100 ऑटो रिक्शा और 450 कर्मी सड़कों पर उतरे, 250 वार्डों में पहुंचेगा जागरूकता अभियान – New Delhi News




नई दिल्ली। बरसात के मौसम में बढ़ते डेंगू और मलेरिया के खतरे को देखते हुए दिल्ली नगर निगम ने राजधानी में विशेष जन जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसी क्रम में महापौर प्रवेश वाही ने शुक्रवार को सिविक सेंटर स्थित निगम मुख्यालय से मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ जागरूकता ऑटो रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अभियान के तहत 100 ऑटो रिक्शा और 450 कर्मचारी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में लोगों को जागरूक करेंगे। रैली में शामिल प्रत्येक ऑटो को फॉगिंग मशीन, बैनर और जागरूकता पर्चों से सुसज्जित किया गया है। ये वाहन निगम के सभी 250 वार्डों में जाकर डेंगू और मलेरिया से बचाव के संदेश प्रसारित करेंगे। यहां देखें फोटो… डेंगू की रोकथाम पर जोर दे रहा नगर निगम : महापौर कार्यक्रम के दौरान महापौर प्रवेश वाही ने फॉगिंग अभियान की भी शुरुआत की। महापौर ने कहा कि निगम केवल उपचार नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी विशेष जोर दे रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपने घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा न होने देने तथा जल भंडारण पात्रों को ढक कर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि, जीतेगी दिल्ली, हारेगा डेंगू-मलेरिया, केवल नारा नहीं, बल्कि दिल्ली नगर निगम का संकल्प है। जनभागीदारी के बिना मच्छर जनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। अभियान के दौरान अतिरिक्त आयुक्त डॉ सतेंद्र सिंह दुर्सावत, निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक रावत, डॉ. लल्लन राम वर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।



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मियाजाकी से ब्लैक कस्तूरी तक! 92 किस्मों के आम उगाकर छाए विकास


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Agriculture Tips: मुजफ्फरपुर के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव इन दिनों खासे चर्चा में हैं. जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं. इसमें मियाजाकी से लेकर ब्लैक कस्तूरी सहित 92 देसी-विदेशी किस्म के आम उगाकर मैंगो मैन की पहचान बनाई. देसी जलवायु में विदेशी का आम सफल उत्पादन कर रहे हैं. पौधों की मांग नेपाल तक है. आइए जानते हैं इनसे बागवानी के खास टिप्स.

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मुजफ्फरपुर: आम की बात होते ही लोगों के मन में लंगड़ा, दशहरी या मालदा जैसे पारंपरिक आमों की तस्वीर उभरती है. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के मरवन प्रखंड के रक्सा गांव के किसान विकास कुमार यादव ने आम की खेती को एक नई पहचान दी है. अपने बगीचे में 92 अलग-अलग किस्मों के आम लगाकर वह आज “मैंगो मैन” के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं. उनके बगीचे में देसी ही नहीं बल्कि जापान, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत कई विदेशों की दुर्लभ आम की किस्में भी मौजूद हैं.

एक पेड़ में 3 किस्म, मिलेगी ये वैरायटी 
विकास कुमार यादव के बगीचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही पेड़ पर तीन अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं. बगीचे में जापानी मियाजाकी, केन्सिंग्टन प्राइड, अनवर रटोल, अटाउल्फो, आर2ई2, अल्फांसो, रेड एम्परर, गोल्डन क्वीन और चॉक अनन जैसी विदेशी वैरायटी के आम भी लगाए गए हैं. इन आमों को देखने और इनके स्वाद का अनुभव लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.

ऐसे बढ़ी आमों की नर्सरी में दिलचस्पी
विकास बताते हैं कि वह किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-बाड़ी में रुचि रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब पांच वर्षों तक कृषि विकास के क्षेत्र में काम किया. इस दौरान उन्होंने यूनिसेफ और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के साथ भी कार्य किया. किसानों की समस्याओं को करीब से देखने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने उन्नत किस्म के आमों की नर्सरी और बागवानी पर काम शुरू किया.

इनके तैयार पौधे भारत सहित नेपाल तक मांग 
आज उनके यहां तैयार किए गए पौधों की मांग बिहार के कई जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों और नेपाल तक है. किसान सीधे उनसे संपर्क कर पौधे खरीदते हैं. खास बात यह है कि यदि किसी तकनीकी कारण से पौधा नहीं लग पाता है, तो उसे 100 प्रतिशत रिप्लेस भी किया जाता है. यही वजह है कि किसानों का भरोसा लगातार विकास और उसके नर्सरी के प्रति बढ़ रहा है.

देसी जलवायु में विदेशी आम का किया फलन
विकास कुमार यादव बताते हैं कि कई लोगों का मानना था कि विदेशी किस्म के आम मुजफ्फरपुर की जलवायु में सफल नहीं हो सकते, लेकिन उन्होंने इसे गलत साबित कर दिखाया. उनके बागान में सभी विदेशी किस्मों में फलन हो रहा है. पौधा खरीदने आने वाले किसानों और ग्राहकों को वह पहले उन आमों का स्वाद भी चखाते हैं, ताकि वे गुणवत्ता को समझ सकें. विकास बताते है कि खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. उनकी यह पहल न सिर्फ आय का बेहतर स्रोत बनी है, बल्कि अन्य किसानों को भी आधुनिक और विविधतापूर्ण बागवानी की ओर प्रेरित कर रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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‘वो लव स्टोरी नहीं थी’, ‘जब वी मेट’ को लेकर इम्तियाज अली का बड़ा खुलासा, बयान वायरल


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इम्तियाज अली के डायरेक्शन में बनी फिल्में अक्सर प्यार और रिश्तों की गहराइयों को बयां करती हैं, लेकिन खुद इम्तियाज का मानना है कि वह कभी भी प्यार को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं. अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को मिल रही सराहना के बीच निर्देशक ने अपनी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘जब वी मेट’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है.

नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ और अहान पांडे की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. फिल्म ठीक-ठाक कमाई भी कर रही है. इम्तियाज अली के डायरेक्शन में बनी फिल्म को लेकर उनसे सवाल किया गया है. इसके जवाब के साथ उन्होंने एक बड़ा खुलासा किया है कि उनकी फिल्म जब वी मेट लव स्टोरी नहीं थी.

इडंस्ट्री के जाने माने डायरेक्टर इम्तियाज अली का एक बयान इन दिनों काफी वायरल हो रहा है. उन्होंने अपनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की चर्चा के बीच खुलासा किया है कि उनकी फिल्म जब वी मेट भी कोई लव स्टोरी नहीं थी, बल्कि दो अजनबियों के एक-दूसरे को पूरा करने की कहानी थी.

Main Vaapas Aaunga Teaser

‘मैं वापस आऊंगा’ को मिल रहे प्यार के बीच इम्तियाज अली से हाल ही में फिल्म को लेकर बात की गई. इस दौरान उन्होंने ‘जब वी मेट’, प्यार की अपनी समझ और वेदांग रैना, शरवरी व नसीरुद्दीन शाह की जमकर तारीफ की.

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इम्तियाज ने अपने करियर में कई अहम फिल्में बनाई हैं. इनमें ‘सोचा ना था’ और ‘जब वी मेट’ से लेकर अपनी हालिया रिलीज़ ‘मैं वापस आऊंगा’ तक, उनके निर्देशन को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. इम्तियाज अली ने अपनी फिल्मों में अलग-अलग पीढ़ियों और दौर की प्रेम कहानियों को पर्दे पर उतारा है.

इतना ही नहीं, उफिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को भी लोग काफी पसंद कर रहे हैं. फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है, लेकिन इम्तियाज अली ने इस दौरान कह दिया है कि वह खुद कभी भी प्यार को लेकर फिल्में नहीं बनाते.अपनी बातचीत के दौरान इम्तियाज ने खुलासा किया कि मैं अपनी फिल्मों को इस तरह नहीं बनाता कि मुझे उसमें दोनों का प्यार दिखाना होता है.

मेरी पहली फिल्म ‘सोचा ना था’ में मेरी अपनी उलझन थी. फिल्म में जिस तरह विरेन उलझन में था, वह दरअसल मेरी अपनी उलझन थी, जिसे मैंने पर्दे पर उकेरा.कई बार आपको खुद से एक ऐसा जवाब नहीं मिलता और आप उधेड़बुन में लगे रहते हो. इस सही जवाब के लिए मैंने उस पर एक फिल्म बना दी.

करीना कपूर और शाहिद कपूर की फिल्म ‘जब वी मेट’ भी कोई लव स्टोरी नहीं थी, बल्कि कल्ट फिल्म ‘जब वी मेट’ को लेकर भी मेरा नजरिया काफी अलग था. मेरे लिए वो कभी भी लव स्टोरी नहीं थी , यह दो ऐसे लोगों की कहानी है जो अजनबियों की तरह मिलते हैं और धीरे-धीरे एक-दूसरे जैसे बन जाते हैं.

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वे एक-दूसरे को पूरा करते हैं. साथ ही वो मिलकर एक दूसरे को ये एहसास कराते हैं कि हम एक दूजे के लिए है, मैंन उस वक्त भी वो फिल्म प्यार को लेकर नहीं बनाई थी. न ही मैं प्यार के बारे में कुछ जानने या समझने की स्थिति में था. इसी तरह ‘मैं वापस आऊंगा’ के दौरान जब मैंने विभाजन (पार्टिशन) के दौर से गुजरे लोगों से बात की, तो मुझे एहसास हुआ कि इतनी पीड़ा और दुख के बीच उन्हें जिंदा रखने वाली चीज पर भी फिल्म बनाई जा सकती है.

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ईरान जंग में दुनिया से 115 करोड़ बैरल तेल गायब: ऑयल रिजर्व 36 साल में सबसे कम; ट्रम्प बोले- 4 हफ्ते में भंडार खत्म हो जाते


वॉशिंगटन डीसी57 मिनट पहले

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ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इस हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है। हालांकि दुनिया अभी भी तेल संकट से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है।

एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के करीब चार महीनों में वैश्विक बाजार से 115 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई गायब हो चुकी है। इसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई लगभग बंद रही। इस वजह से दुनिया के स्ट्रेटजिक और कॉमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकल चुका है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के निचले स्तर पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर जंग खत्म नहीं करते तो हमारे रिजर्व करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

ट्रम्प ने 18 जून को ईरान से समझौते पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खुलता तो दुनिया आर्थिक तबाही का सामना कर सकती थी।

सीजफायर के बाद तेल सस्ता हुआ

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर से तेल बाजार ने राहत की सांस ली। युद्ध के दौरान 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर से नीचे आ गया है। लेकिन कीमतों में यह गिरावट पूरी कहानी नहीं बताती।

रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं होगी। पहले समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी।

इसके बाद खाली टैंकरों की वापसी, तेल उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा। तेल उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी व्यवस्था को सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। तब तक दुनिया को मौजूदा तेल भंडार के सहारे ही काम चलाना होगा।

RBC कैपिटल मार्केट्स की हेलिमा क्रॉफ्ट ने कहा कि बाजार जरूरत से ज्यादा उत्साहित है। उनके मुताबिक, संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल की सप्लाई को सामान्य स्तर पर लाने में अभी बड़ी चुनौतियां बाकी हैं।

कई एक्सपर्ट्स को अभी भी राहत की उम्मीद

इंफ्रास्ट्रक्चर केपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि नकदी संकट से जूझ रहे OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी ने कहा कि जंग शुरू होने से पहले दुनिया के पास तेल का अच्छा-खासा स्टॉक था। इसी वजह से इतनी बड़ी सप्लाई रुकने के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं हिला।

उन्होंने कहा कि अमेरिका में डीजल और पेट्रोल का भंडार जरूर कम हुआ है, लेकिन हालात अभी काबू में हैं। संकट के दौरान रिफाइनरियों को तेल खरीदने के लिए कई जगह फोन करने पड़ रहे थे, लेकिन आने वाले हफ्तों में तस्वीर बदल सकती है। तब तेल बेचने वाले खुद खरीदारों के पास पहुंचेंगे।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। अगर दुनिया रोजाना मांग से 50 लाख बैरल ज्यादा तेल भी पैदा करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा।

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