मधुबनी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुई चोरी की घटना को लेकर प्रदर्शन किया। गुरुवार को हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग की। कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय से शहर के विभिन्न मार्गों तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और चोरी के मामले में पारदर्शिता की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार राम के नाम पर जनता का समर्थन लेकर सत्ता में आई, लेकिन राम मंदिर से करोड़ों रुपये की चोरी के मामले पर मौन है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर प्रकरण पर सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और इसकी पारदर्शी जांच आवश्यक है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, आंदोलन की चेतावनी कांग्रेस नेताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के कथित बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राय ने धमकी दी है कि अगर उन पर उंगली उठी तो वह किसी को नहीं छोड़ेंगे और एक-एक को जेल भेज देंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में किसी भी गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मामले में न्यायिक जांच नहीं कराती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने आवश्यकता पड़ने पर सदन से सड़क तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज करने की बात कही।
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राम मंदिर चोरी पर कांग्रेस का पैदल मार्च: मधुबनी में न्यायिक जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन – Madhubani News
बरसात में सील गए बिस्कुट फेंकने की भूल न करें, 15 मिनट में बनाएं ऐसी मिठाई
Soft Biscuit Pudding Recipe: बरसात का मौसम अपने साथ ठंडी हवा, गरमा-गरम चाय और स्वाद से भरे कई पल लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम की एक आम परेशानी है किचन में रखी खाने की चीजों का सील जाना. खासकर बिस्कुट, जो पैकेट खुलने के कुछ ही दिनों बाद नरम हो जाते हैं. ऐसे बिस्कुट न तो खाने में अच्छे लगते हैं और न ही उन्हें फेंकने का मन करता है. कई लोग इन्हें बेकार समझकर कूड़ेदान में डाल देते हैं, जबकि उनकी एक्सपायरी भी नहीं हुई होती, अगर आपके घर में भी सील गए बिस्कुट रखे हैं तो उन्हें फेंकने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. थोड़ी-सी मेहनत और कुछ आसान सामग्री की मदद से इन्हें एक ऐसी स्वादिष्ट स्वीट डिश में बदला जा सकता है जिसे बच्चे हों या बड़े, हर कोई पसंद करेगा.
खास बात यह है कि इस रेसिपी में अलग से ज्यादा सामान की जरूरत नहीं पड़ती और घर में मौजूद चीजों से ही बढ़िया पुडिंग तैयार हो जाती है. बारिश के मौसम में जब कुछ मीठा खाने का मन करे, तब यह आसान रेसिपी आपके बहुत काम आ सकती है. इससे खाने की बर्बादी भी नहीं होगी और घरवालों को एक नया स्वाद भी मिलेगा.
सील गए बिस्कुट फेंकने की बजाय करें स्मार्ट इस्तेमाल
बरसात में हवा में नमी बढ़ने की वजह से बिस्कुट जल्दी नरम हो जाते हैं, अगर उन्हें एयरटाइट डिब्बे में न रखा जाए तो उनकी कुरकुराहट खत्म हो जाती है. ऐसे बिस्कुट खाने में भले ही अच्छे न लगें, लेकिन उनका इस्तेमाल कई स्वादिष्ट डिश बनाने में किया जा सकता है. घर की रसोई में छोटी-छोटी बचत ही बड़े काम आती है. इसलिए अगर बिस्कुट सिर्फ सील गए हैं और खराब नहीं हुए हैं, तो उनसे पुडिंग बनाना एक शानदार विकल्प हो सकता है.
बिस्कुट पुडिंग बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इन चीजों की पड़ेगी जरूरत
1. सील गए बिस्कुट
2. 2 से 3 अंडे
3. 1 कप गर्म दूध
4. स्वादानुसार चीनी
5. 2 से 3 इलायची
6. थोड़ा पानी
7. बर्तन ग्रीस करने के लिए थोड़ा घी
अगर आप अंडा नहीं खाते हैं तो इसकी जगह कस्टर्ड पाउडर या कॉर्नफ्लोर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
जानिए बिस्कुट पुडिंग बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले एक बड़े बाउल में सील गए बिस्कुट तोड़कर डाल दें. अब इसमें गर्म दूध और अंडे मिलाएं. दूध हल्का गर्म होना चाहिए ताकि बिस्कुट आसानी से नरम होकर अच्छे से मिल जाएं. कुछ मिनट बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह चलाएं. अब इस मिश्रण को मिक्सर जार में डालें. साथ में चीनी और इलायची भी डाल दें. इसे तब तक पीसें जब तक एकदम मुलायम बैटर तैयार न हो जाए, अगर कहीं गांठ रह जाए तो बाद में स्वाद और बनावट दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
कैरामल तैयार करना न भूलें
अब एक नॉनस्टिक पैन में चीनी डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं. जब चीनी सुनहरे रंग की हो जाए तो गैस बंद कर दें. ध्यान रखें कि कैरामल ज्यादा देर तक न पकाएं, वरना उसका स्वाद कड़वा हो सकता है. जिस बर्तन में पुडिंग बनानी है, उसे पहले घी से ग्रीस करें. फिर तैयार कैरामल उसमें फैला दें.
बैटर को छानना क्यों है जरूरी
अब तैयार बैटर को छन्नी से छानकर कैरामल वाले बर्तन में डालें. ऐसा करने से बैटर एकदम स्मूद हो जाता है और पुडिंग की बनावट भी शानदार आती है. इसके बाद बर्तन को एल्युमिनियम फॉयल से अच्छी तरह ढक दें ताकि भाप अंदर बनी रहे और पुडिंग समान रूप से पक सके.
स्टीम में ऐसे पकाएं पुडिंग
एक गहरे पतीले में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर स्टैंड रखें. अब पुडिंग वाला बर्तन स्टैंड पर रख दें. पतीले को ढक्कन से बंद करके करीब 15 से 20 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं. समय पूरा होने पर एक सींक या टूथपिक डालकर जांच लें, अगर सींक साफ बाहर निकल आए तो समझिए पुडिंग पूरी तरह तैयार है. इसे थोड़ा ठंडा होने दें और फिर प्लेट में पलटकर निकाल लें.
बारिश में मीठा खाने का आसान और बजट फ्रेंडली विकल्प
यह पुडिंग न सिर्फ स्वाद में शानदार होती है बल्कि खाने की बर्बादी रोकने का भी बेहतरीन तरीका है. कई परिवार अब बची हुई ब्रेड, केक और बिस्कुट से नई-नई रेसिपी बनाकर फूड वेस्ट कम करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे छोटे बदलाव घर का बजट बचाने के साथ पर्यावरण के लिए भी अच्छे साबित होते हैं. अगर अगली बार आपके घर में बिस्कुट सील जाएं तो उन्हें बेकार समझकर फेंकने की बजाय इस आसान रेसिपी को जरूर आजमाएं. हो सकता है यह डिश आपके परिवार की नई पसंद बन जाए.
CNG की जगह CBG बेचे जाने का मामला: उपभोक्ताओं से ठगी, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश – Jabalpur News
जबलपुर में सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के नाम पर सीबीजी (कंप्रेस्ड बायो गैस) बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस संबंध में कलेक्टर से मुलाकात कर लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मंच ने आरोप लगाया है कि शहर के गैस पंपों पर उपभोक्ताओं को काम्प्रेस्ड नेचुरल गैस की जगह चुपके से काम्प्रेस्ड बायो गैस दी जा रही है। इसे सीधे तौर पर ग्राहकों के साथ विश्वासघात बताया गया है। शिकायत के अनुसार, जबलपुर के गैस पंप संचालक सीएनजी की दर 105 रुपये प्रति किलोग्राम वसूल कर सीबीजी बेच रहे हैं, जबकि सीबीजी की वास्तविक उत्पादन लागत मात्र 60 रुपये है। इस प्रकार उपभोक्ताओं से प्रति किलो 45 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। इसके अतिरिक्त, नेचुरल गैस की तुलना में सीबीजी की कैलोरिक वैल्यू कम होने के कारण वाहनों का माइलेज 5 से 6 किलोमीटर तक घट गया है, जिससे वाहन चालकों को दोहरा नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बायो गैस में प्राकृतिक रूप से ऑक्सीजन होती है, जो नमी को तेजी से सोखती है। इससे वाहनों के इंजन के अंदरूनी हिस्सों में जंग लगने और खराबी आने की शिकायतें बढ़ रही हैं। मंच ने इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम का घोर उल्लंघन बताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। कलेक्टर जबलपुर ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर को पूरे प्रकरण की सघन जांच कर जल्द से जल्द विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के सख्त आदेश दिए हैं।
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सपा विधायक अतुल ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र: मेरठ में सेंट्रल मार्केट के पीड़ितों को न्याय के लिए उठाई मांग – Meerut News
सेंट्रल मार्केट में अपनी दुकानें और व्यापार गंवाने वाली पीड़ित महिलाएं गुरुवार को सपा विधायक से मिलने पहुंची। महिलाओं ने सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान से उनके घर पर मुलाकात की है। महिलाओं ने अतुल प्रधान से खुद को न्याय दिलाने की मांग की है।
पीड़िताओं की परेशानी सुनने के बाद सपा विधायक ने इस विषय को राष्ट्रपति के सामने रखने की बात कही है। इसके चलते अतुल प्रधान ने गुरुवार को ही एक पत्र तैयार किया है। जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा है। कई महीनों से परेशान हो रही हैं महिलाएं
अतुल प्रधान ने अपने पत्र में सेंट्रल मार्केट की इन पीड़ित महिलाओं के दर्द का भी जिक्र किया है। लिखा विगत कई महीनों से सेंट्रल मार्केट (शास्त्रीनगर सेक्टर – 2 ) के व्यापारी एवं विशेष रूप से बड़ी संख्या में महिलाएँ अपनी आजीविका, रोजगार तथा पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को लेकर आंदोलनरत हैं। प्रभावित परिवार अत्यंत मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं तथा न्याय की आशा में आपकी ओर देख रहे हैं। अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया मुझे एवं सेंट्रल मार्केट (शास्त्रीनगर सेक्टर-2) के प्रभावित प्रतिनिधिमंडल को आपसे भेंट करने हेतु अपनी सुविधानुसार समय प्रदान करने का कष्ट करें, जिससे इस प्रकरण के सभी तथ्य आपके समक्ष प्रस्तुत किए जा सकें तथा पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने हेतु आपका मार्गदर्शन एवं आवश्यक हस्तक्षेप प्राप्त हो सके।
राष्ट्रपति से है न्याय की उम्मीद यह चिट्ठी सपा विधायक की ओर से राष्ट्रपति कार्यालय को भेजकर मुलाकात का समय मांगा है। ताकि वो इन पीड़िताओं के साथ जाकर राष्ट्रपति से मुलाकात करें और महिलाएं अपनी पीड़ा उनके सामने रख सकें। महिलाओं ने कहा कि हमें उम्मीद है कि राष्ट्रपति महोदया से मिलने के बाद वो हमारी परेशानी समझेंगी और इसे दूर भी करेंगी। हमें न्याय दिलाएंगी।
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माथे पर चिपकने वाले Temple डिवाइस की क्या होगी कीमत? हो गया खुलासा!
Zomato के को-फाउंडर दीपेंदर गोयल को कुछ समय पहले एक पॉडकास्ट में Temple डिवाइस पहने देखा गया था। इस डिवाइस को लेकर एक बार फिर से जानकारी सामने आई है। इस टेम्पल डिवाइस की कीमत और लॉन्च से जुड़ी डिटेल्स कंपनी के CEO ने शेयर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, माथे और कान के बीच पहने जाने वाले इस डिवाइस को एक साल के अंदर लॉन्च किया जा सकता है। साथ ही, इसकी कीमत कितनी होगी इसका भी खुलासा किया गया है।
क्या है टेम्पल डिवाइस?
जोमैटो को-फाउंडर दीपेंदर गोयल ने जो टेम्पल डिवाइस पहना है उसे Continue Research नाम की कंपनी बना रही है। दीपेंदर गोयल ने इस प्रोजेक्ट में करीब 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया है। इस Temple डिवाइस को खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया जा रहा है, जो अपने फिजिकल और मेंटल हेल्थ को गंभीरता से लेते हैं। आसान भाषा में कहा जाए तो इस डिवाइस को एथलिट्स, डॉक्टर, साइंटिस्ट आदि के लिए डेवलप किया जा रहा है।
इस डिवाइस को लेकर जो रिसर्च सामने आई है उसके मुताबिक, इसमें ऐसे हेल्थ मैट्रिक्स को मापने की क्षमता है, तो अन्य कोई भी वियरेबल डिवाइस नहीं माप सकते हैं। यह डिवाइस दिमाग के ब्लड फ्लो को मेजर कर सकता है। इसकी मदद से हेल्थ और एजिंग से जुड़े संकेत समझे जा सकेंगे।
यह डिवाइस माथे के पास आंख और कनपट्टी के बीच टेम्पल स्पेस में पहना जाता है, जिसकी वजह से इसे टेम्पल डिवाइस कहा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेम्प्ल डिवाइस की कीमत 1 लाख रुपये के करीब हो सकती है। पहले इसे केवल 100 लोगों के लिए लॉन्च किया जाएगा। कंपनी इस डिवाइस के लिए खास तौर पर उन लोगों को चुनेगी, जो इसे लेकर अच्छा और जरूरी फीडबैक दे सकते हैं।
रिसर्च में दी जानकारी
जोमैटो को-फाउंडर ने पिछले साल नवंबर में इस डिवाइस के लोकर एक X पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने बताया, ‘मैं इसे इटरनल के सीईओ के रूप में साझा नहीं कर रहा हूं, बल्कि एक इंसान के रूप में, एक अजीब सूत्र का पालन करने के लिए उत्सुक हूं। एक थ्रेड है, जिसे मैं अब अपने पास नहीं रख सकता।’ यह एक ओपन सोर्स रिसर्च है, जिसे विज्ञान ने माना है। ग्रेविटी हाइपोथिसिस के बारे में दीपिंदर गोयल ने आगे कहा कि न्यूटन ने हमें यह शब्द दिया है।
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कांग्रेस का पीएम को लेटर, कहा- सर्वदलीय बैठक बुलाएं: मानसून सत्र में चढ़ावा चोरी का मामला उठाएगी, संशोधन बिल का विरोध करेगी
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नई दिल्ली34 मिनट पहले
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बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर और जयराम रमेश समेत कई नेता शामिल हुए।
कांग्रेस मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का मुद्दा उठाएगी। इसके अलावा, सरकार के संशोधन बिलों का विरोध करेगी।
यह फैसला गुरुवार को कांग्रेस की संसदीय दल की बैठक में लिया गया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक यानी परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर पीएम मोदी को पत्र लिखा। इसमें सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। बैठक सोनिया गांधी के आवास पर हुई। इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर और जयराम रमेश समेत कई नेता शामिल हुए। बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

रमेश ने कहा- महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू करें, तो पूरा समर्थन देंगे
- जयराम रमेश ने कहा, ‘संसद के आगामी मानसून सत्र में सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को लाने की तैयारी कर रही है, उनका पार्टी पुरजोर विरोध करेगी।’
- उन्होंने आगे कहा- ‘कई मुद्दे ऐसे हैं, जिन्हें हम विशेष रूप से उठाएंगे। जैसे चंदे की चोरी और विश्वासघात। प्रभु श्रीराम मंदिर के संबंध में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।’
- ‘हम अयोध्या में भाजपा और RSS के रचे गए घोटाले का मुद्दा जरूर उठाएंगे। NEET और ई20 घोटाला जैसे कई मुद्दे भी हैं, जिसमें कई वरिष्ठ भाजपा नेता और उनके बेटे शामिल हैं।
- हमने 16 और 17 अप्रैल को वर्तमान लोकसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण के संबंध में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में महिलाओं के लिए इस एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान शामिल है।
न्यायाधीशों को हटाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी बैठक में चर्चा हुई। इस विधेयक की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाई गई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार किया है। कांग्रेस इस विधेयक का भी मजबूती से विरोध करेगी।

बैठक में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी, मुकुल वासनिक, पवन बंसल और यामि याग्निक समेत कई पुराने नेता शामिल हुए।
कांग्रेस एफसीआरए का भी विरोध करेगी- रमेश
यदि सरकार ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ मानसून सत्र में लाती है तो कांग्रेस इसका पूरी तरह विरोध करेगी। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक दोबारा लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी इस विधेयक का विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को इसे वापस लेना पड़ा था। अगर इसे फिर पेश किया गया तो पार्टी दोबारा इसका विरोध करेगी।

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जापान राजवंश में उत्तराधिकारी का संकट: किंग नारुहितो को बेटा नहीं, बेटी को हक नहीं; सरकार नए सम्राट की तलाश में जुटी
जापान में सानाए ताकाइची ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रचा है, लेकिन दुनिया के सबसे पुराने जापान के राजवंश में राजगद्दी महिला को सौंपने पर रोक है। करीब 2600 साल पुराना यह राजवंश अब उत्तराधिकारी के संकट से जूझ रहा है। मौजूदा कानून के अनुसार, केवल सम्राट का बेटा ही सम्राट बन सकता है। इस समय पूरे राजवंश में केवल चार पुरुष बचे हैं। इनमें सम्राट नारुहितो (66), उनके छोटे भाई आकिशिनो (60) और चाचा हिताची (90) हैं। आकिशिनो का एक बेटा 19 वर्षीय हिसाहितो हैं। 40 वर्षों में राजवंश में वयस्क होने वाले वे पहले पुरुष हैं। सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी 24 वर्षीय प्रिंसेस आइको हैं। हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश जापानी आइको को ‘साम्राज्ञी’ के रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन इसमें 1889 का ‘इंपीरियल हाउस लॉ’ बाधक है। इस कानून में महिलाओं के राजगद्दी संभालने पर रोक है। साथ ही अगर कोई राजकुमारी किसी आम नागरिक से शादी करती है, तो उसे राजपरिवार छोड़ना होता है। रूढ़िवादी जापानी इस कानून के प्रबल समर्थक हैं। वहीं, राजवंश में उत्तराधिकार संकट से निपटने के लिए ताकाइची सरकार ने संसद में बिल पेश किया है। इसके तहत 1947 में राजवंश परिवार से अलग की गई शाखाओं के अविवाहित पुरुषों को गोद लेकर उत्तराधिकारियों का दायरा बढ़ाया जाएगा। लेकिन इस बिल में राजकुमारी आइको या उनके होने वाले बच्चों के लिए कोई जगह नहीं है। चुओ यूनिवर्सिटी में शाही वंशावली के विशेषज्ञ प्रो. माकोटो ओकावा के अनुसार, ‘इतिहास में जापान में आठ महिला सम्राट (1889 से पहले) रह चुकी हैं। इसलिए महिलाओं को बाहर रखना कोई ऐतिहासिक परंपरा नहीं, बल्कि एक सोच है। जब तक महिलाओं को उत्तराधिकार से बाहर रखा जाएगा, तब तक राजपरिवार में स्थिरता लाना संभव नहीं होगा।’ 1947 में राजपरिवार का दायरा घटाने से समस्या
जापान में 592 से 1771 तक 8 महिलाओं ने सम्राट के रूप में शासन किया था, पर 1889 के कानून ने इस सिलसिले को रोक दिया। अगर भविष्य में नारुहितो की कोई संतान नहीं होती या केवल बेटियां होती हैं, तो इस राजवंश का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। बता दें कि 1947 में जापान के संविधान में संशोधन किया गया, जिससे 11 राजकुमारों को अपने पद से हटना पड़ा और वे आम नागरिक बन गए।
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100% टैरिफ से बेपटरी हो जाएगी भारत-USA व्यापार वार्ता? सामने आई गुड न्यूज
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America New Tariff Plan: अमेरिका रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर एक बार फिर से सख्त रुख अपना रहा है. अमेरिकी सीनेट में इस बाबत एक विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल-गैस आयात करने वाले टॉप 5 देशों पर 100 फीसद टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है.
अमेरिका के 100 फीसद टैरिफ वाले विधेयक पर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
नई दिल्ली. अमेरिका की ट्रंप सरकार रूस से तेल और गैस खरीदने वाले टॉप 5 देशों पर फिर से टैरिफ का चाबुक चला सकती है. अमेरिकी सीनेट में इसको लेकर पेश विधेयक में ऐसे देशों पर 100 फीसद तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है. संसद से विधेयक के पास होने पर राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. अमेरिका का मानना है कि तेल और गैस के पैसे से रूस यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहा है. ऐसे में यदि रूस-यूक्रेन जंग को रोकना है तो पहले मॉस्को की फंडिंग रोकनी होगी. अब इस पूरे प्रकरण पर एक अधिकारी ने बड़ी बात कही है. ‘मनीकंट्रोल’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिकारी का कहना है कि 100 फीसद टैरिफ से भारत-अमेरिका के बीच चल व्यापार वार्ता (Trade Talk) पटरी से नहीं उतरने वाली है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटे हैं और प्रस्तावित विधेयक (100 फीसद टैरिफ) को बातचीत में बाधा नहीं माना जा रहा है. ‘मनीकंट्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ता से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया यह विधेयक भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का हिस्सा नहीं है और इसे बातचीत में किसी ‘स्टिकिंग प्वाइंट’ (गतिरोध का मुद्दा) के रूप में नहीं देखा जा रहा. अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच फरवरी में व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तय की गई थी और उसके बाद रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटा दिया गया था.
तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही वार्ता
अधिकारी के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है. इस अधिकारी ने बताया कि अमेरिका की ओर से समझौते के पालन को लेकर पूरा भरोसा दिया गया है और दोनों देश इस दिशा में सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. दरअसल, 14 जुलाई को अमेरिकी सीनेट में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक ग्रुप ने संशोधित विधेयक पेश किया. इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों से होने वाले आयात (Import) पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें. इस सूची में भारत और चीन भी शामिल हैं. इस कदम का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है.
500 फीसद टैरिफ लगाने की थी बात
हालांकि, यह संशोधित प्रस्ताव पहले के मसौदे की तुलना में काफी नरम माना जा रहा है. शुरुआती प्रस्ताव में रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, जिसे बाद में घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूसी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार है, इसलिए इस विधेयक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है. इसके बावजूद भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यह मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार समझौते की राह में बड़ी बाधा नहीं बनेगा. कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क तैयार है और दोनों पक्ष सहमति बनने के बाद इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ रही है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है. हालांकि, इसे तभी लागू किया जाएगा जब भारत को वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट टैरिफ लाभ सुनिश्चित हो जाएगा. ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता फिलहाल सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है.
मुख्यमंत्री सम्राट आज शुरू करेंगे ‘बिहार स्कूल लाइव क्लासेस’: पटना के 150 सरकारी स्कूलों से शुरूआत, स्टडी मैटेरियल-लेक्चर ऑनलाइन मिलेंगे; JEE-NEET-CUET की भी कराएंगे तैयारी – Patna News
बिहार सरकार ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के 150 सरकारी स्कूलों में बिहार स्कूल लाइव क्लासेज कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के छात्रों को भी निजी स्कूलों जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से छात्रों को लाइव ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल कंटेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का लाभ मिलेगा। कक्षा 9 से 12 के छात्रों को मिलेगी डिजिटल शिक्षा इस योजना के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए लाइव और इंटरैक्टिव क्लासेज आयोजित की जाएंगी। छात्र विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे ऑनलाइन जुड़कर पढ़ाई कर सकेंगे और अपनी शंकाओं का समाधान भी कर पाएंगे। इसके अलावा डिजिटल स्टडी मैटेरियल, नोट्स, रिकॉर्डेड लेक्चर और नियमित मॉक टेस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों की पढ़ाई अधिक आसान और प्रभावी होगी। JEE, NEET और CUET की तैयारी भी स्कूल से होगी बिहार स्कूल लाइव क्लासेज के जरिए केवल बोर्ड परीक्षा ही नहीं, बल्कि JEE, NEET और CUET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कराई जाएगी। विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम, अभ्यास प्रश्न और टेस्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग, मेडिकल और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने में सफल हों। गरीब और ग्रामीण छात्रों को मिलेगी मुफ्त कोचिंग सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के लिए भी बड़ी घोषणा की है। पटना के 10 मॉडल स्कूलों में JEE और NEET की पूरी तरह निःशुल्क कोचिंग शुरू की जा रही है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में इस सुविधा का विस्तार राज्य के 146 मॉडल स्कूलों तक किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक गरीब छात्रों को इसका लाभ मिल सके। पटना के 150 सरकारी स्कूलों से शुरूआत वहीं, बिहार स्कूल लाइव क्लासेज योजना का पहला चरण फिलहाल पटना के 150 सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया है। सरकार का लक्ष्य जुलाई के अंत तक इसे पटना के सभी 422 हाई स्कूलों तक पहुंचाना है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इस मॉडल को पूरे बिहार में लागू करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का समान अवसर मिलेगा।
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वेज, पनीर, चिकन भूल जाइए, चखिए फिश मोमो, भेटकी मछली की स्टफिंग, ₹100 में यहां लें स्वाद
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Jamshedpur Famous Fish Momo: पनीर, चिकन मोमो के बाद अब जमशेदपुर में फिश मोमो ने धूम मचायी है. डायमंड फूड पार्क में लगने वाले कोलकाता डिलाइट नाम के स्टॉल पर आप 100 रुपये प्लेट में इसका स्वाद ले सकते हैं. भेटकी मछली की स्टफिंग और चटनी का यह कॉम्बो काफी जोरदार लगता है.
जमशेदपुर. जमशेदपुर में मोमो प्रेमियों के लिए एक नया और अनोखा स्वाद चर्चा का विषय बना हुआ है. अब तक लोगों ने वेज, पनीर और चिकन मोमो का स्वाद खूब लिया है, लेकिन शहर में पहली बार फिश मोमो लोगों को आकर्षित कर रहा है. अपने अलग स्वाद और खास फिलिंग की वजह से यह मोमो तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. जो लोग एक बार इसे चख रहे हैं, वे इसके स्वाद की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. खास बात यह है कि यह मोमो साधारण मछली से नहीं, बल्कि स्वादिष्ट और प्रीमियम मानी जाने वाली भेटकी मछली से तैयार किया जा रहा है.
पहले शंका थी की पसंद आएगा या नहीं
इस अनोखे फिश मोमो को शहर के युवा उद्यमी पवित्र महतो लेकर आए हैं. उन्होंने बताया कि बाजार में पहले से ही कई तरह के मोमो उपलब्ध हैं, इसलिए वह ग्राहकों को कुछ नया और अलग अनुभव देना चाहते थे. इसी सोच के साथ उन्होंने फिश मोमो बनाने का प्रयोग किया. शुरुआत में लोगों की प्रतिक्रिया को लेकर थोड़ी आशंका थी, लेकिन जैसे ही ग्राहकों ने इसका स्वाद चखा, यह तेजी से लोकप्रिय हो गया. आज कई ग्राहक खास तौर पर फिश मोमो खाने के लिए उनके स्टॉल तक पहुंच रहे हैं.
चिकन मोमो से भी ज्यादा टेस्टी
पवित्र महतो बताते हैं कि फिश मोमो बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली भेटकी मछली का उपयोग किया जाता है. मछली को विशेष मसालों और ताजी सामग्री के साथ तैयार किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. मोमो की बाहरी परत नरम और अंदर की फिलिंग बेहद जूसी होती है. जब इसे मसालेदार चटनी और मेयोनीज के साथ परोसा जाता है, तो इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. यही वजह है कि फिश मोमो खाने वाले कई ग्राहक इसे चिकन मोमो से भी ज्यादा स्वादिष्ट बता रहे हैं.
कीमत की बात करें तो फिश मोमो की एक प्लेट में 8 पीस दिए जाते हैं, जिसकी कीमत 100 रुपये रखी गई है. प्रीमियम क्वालिटी की भेटकी मछली का उपयोग होने के बावजूद कीमत को ग्राहकों की पहुंच में रखा गया है. शाम के समय स्टॉल पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. युवा, कॉलेज छात्र और फूड लवर्स खास तौर पर इस नए स्वाद को आजमाने पहुंच रहे हैं.
टाइमिंग और लोकेशन
अगर आप भी कुछ नया और हटकर खाने के शौकीन हैं, तो जमशेदपुर के डायमंड फूड पार्क में स्थित कोलकाता डिलाइट आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह स्टॉल रोजाना शाम 6 बजे से शुरू होता है. पवित्र महतो का कहना है कि उनका उद्देश्य शहर के लोगों को ऐसा स्वाद देना था, जो अब तक यहां उपलब्ध नहीं था. उनकी यह सोच सफल होती नजर आ रही है और फिश मोमो आज शहर के फूड लवर्स के बीच एक नई पहचान बना चुका है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें


