Friday, July 10, 2026
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एसीबी ने रीको के दो अधिकारियों को रिश्वत लेते दबोचा: लीज डीड निष्पादन के बदले मांगी थी 85 हजार रुपए की रिश्वत – Beawar News




भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जयपुर ने राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) के दो अधिकारियों को शुक्रवार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इन अधिकारियों पर ब्यावर में लीज डीड के निष्पादन के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। एसीबी के अनुसार रीको के सीनियर डीजीएम अंजय विश्वकर्मा को 50 हजार रुपए और जूनियर असिस्टेंट कमलेश को 35 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। कुल 85 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की गई है। परिवादी की शिकायत पर एसीबी ने मामले का सत्यापन किया। इसके बाद एक योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसमें दोनों आरोपियों को रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह कार्रवाई एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज गुप्ता और ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में की गई। डीआईजी ओमप्रकाश मीणा ने इसका पर्यवेक्षण किया, जबकि डीजी गोविंद गुप्ता और एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में यह पूरी कार्रवाई संपन्न हुई। ट्रैप कार्रवाई के बाद एसीबी टीम ने ब्यावर स्थित रीको कार्यालय पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की। अधिकारियों ने कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन कर मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू कर दी है। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहनता से जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।



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अस्पताल की मनमानी पर इमोशनल हुए ‘सैराट’ फेम एक्टर, शिकायत के बाद एक्शन में आया प्रशासन


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फिल्म ‘सैराट’ फेम एक्टर अरबाज शेख ने सोलापुर स्थित नोबल हॉस्पिटल पर मनमानी फीस वसूलने का आरोप लगाया. वे पिता के इलाज के खातिर अस्पताल पहुंचे थे, मगर वहां उन्हें खराब अनुभव हुआ. अरबाज शेख ने एक वीडियो के जरिये अपना दर्द बयां किया, जिसके बाद प्रशासन ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की और उसे सील कर दिया. हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को गलत बताया है. अरबाज शेख ने फिर सोशल मीडिया से वीडियो हटा दिया है. एक्टर का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब उनके पिता की सेहत ही उनकी पहली प्राथमिकता है.

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एक्टर ने अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप. (फोटो साभार: Instagram@arbajshaikh15)

नई दिल्ली: अगर आपने मराठी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सैराट’ देखी है, तो आपको ‘सल्या’ का यादगार किरदार निभाने वाले एक्टर अरबाज शेख याद होंगे. वे फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. उनके पिता को अचानक ब्रेन हैमरेज हो गया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सोलापुर के नोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद एक्टर की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गईं. अरबाज शेख ने अस्पताल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई. उनका कहना है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली और साथ ही उन पर इस बात का भारी दबाव बनाया गया कि वे सारी दवाइयां अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टोर से ही खरीदें.

अरबाज शेख ने आपबीती सुनाते हुए एक भावुक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने लोगों से आर्थिक मदद और इंसाफ की गुहार लगाई. देखते ही देखते यह वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल गया. फैंस के साथ-साथ आम लोग भी अरबाज शेख के सपोर्ट में उतर आए. सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से और अरबाज की शिकायत को देखते हुए प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. खबर है कि नोबल अस्पताल को सील कर दिया गया है. अरबाज को मुश्किल घड़ी में वारकरी समुदाय और मराठी फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों का पूरा साथ मिल रहा है.

एक्टर के आरोपों पर अस्पताल का जवाब
नोबल हॉस्पिटल प्रशासन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. अस्पताल का दावा है कि जब मरीज को वहां लाया गया था, तो उनकी हालत बेहद नाजुक थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने न्यूरो से जुड़ी गंभीर समस्या होने की वजह से मरीज के परिवारवालों को इलाज और वेंटिलेटर के खर्च के बारे में पहले ही बता दिया था. अस्पताल के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के दबाव वाले आरोप को भी अस्पताल ने खारिज कर दिया. अस्पताल का कहना था कि अरबाज को वीडियो बनाने के बजाय पहले उनसे बात करनी चाहिए थी.

प्रशासन का अस्पताल के खिलाफ एक्शन
अरबाज ने हंगामे के बीच अचानक इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर करके सबको चौंका दिया. एक्टर ने बताया कि उन्होंने वीडियो डिलीट कर दिया है. अरबाज ने लिखा कि वीडियो पोस्ट करने के बाद उनके पास अनगिनत कॉल्स और मैसेजेस आने लगे थे, जिससे वे परेशान हो गए थे. उन्होंने साफ कहा कि इस समय उनके पिता की जान और उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. चूंकि प्रशासन ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, इसलिए वे मामले को यहीं खत्म मान रहे हैं. घटना ने एक बार फिर मेडिकल फील्ड में होने वाली मनमानी, इलाज के खर्चों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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गोपालगंज मॉडल अस्पताल में क्रिएटिनिन जांच डेढ़ महीने से ठप: किडनी मरीजों को निजी लैब में कराने पड़ रहे महंगे टेस्ट – Gopalganj News




गोपालगंज के मॉडल अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में पिछले डेढ़ महीने से क्रिएटिनिन की जांच बंद है। इससे किडनी के सैकड़ों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया है। ओपीडी से बिना जांच लौट रहे मरीज अस्पताल में रोजाना गोपालगंज और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें कई ऐसे मरीज होते हैं, जिन्हें डॉक्टर किडनी की स्थिति जानने के लिए क्रिएटिनिन टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। जांच बंद होने के कारण अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों और ओपीडी में आने वाले रोगियों को बिना जांच के लौटना पड़ रहा है। निजी लैब 400 से 500 रुपए तक वसूल रहे सरकारी अस्पताल में यह जांच मुफ्त होती है। व्यवस्था ठप होने के कारण मरीजों को मजबूरन निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। निजी लैब में एक क्रिएटिनिन जांच के लिए 400 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, जिससे गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई मरीज पैसे के अभाव में बिना जांच कराए ही घर लौटने को मजबूर हैं। क्रिएटिनिन रिपोर्ट डॉक्टरों के लिए मरीजों के इलाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होती है। जांच के अभाव में मरीजों के परिजनों को बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। डेढ़ महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रशासन द्वारा इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है।इस संदर्भ में ऑफ कैमरा लैब के इंचार्ज विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि एक डेढ़ माह से क्रिएटिनिन रि एजेंट (केमिकल) खत्म होने के कारण जांच नहीं हों पा रही है। सिविल सर्जन बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं हम लोगों ने लिखित सूचना अस्पताल प्रशासन को दे दिए है। सबसे बदतर स्थिति अस्पताल के वार्डों में भर्ती लेकिन अभी तक केमिकल उपलब्ध नहीं हुआ है जिसके कारण जांच प्रभावित हो रही है। इस संदर्भ में सिविल सर्जन डॉ मो इशराइल अहमद ने बताया कि इस मामले में मुझे कोई जानकारी नहीं है नहीं मुझे इसकी किसी ने जानकारी दी है। मामले की जांच की जाएगी कि आखिर इतने दिनों से क्रिएटिनिन की जांच क्यों नहीं हो रही है।



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भैंसदेही में कुंभकर्ण बनाकर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन: पट्टा वितरण, सड़क मरम्मत सहित कई मांगें उठाईं, सीएमओ ने पंद्रह दिन का आश्वासन दिया – Betul News




बैतूल जिले के भैंसदेही में शुक्रवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद प्रशासन पर जनसमस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए एक कार्यकर्ता को ‘कुंभकर्ण’ का रूप देकर ठेले पर लिटाया और मरही माता चौक से नगर परिषद कार्यालय तक रैली निकाली। प्रदर्शन के बाद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के.एस. उईके को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व विधायक धर्मु सिंह, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रानू ठाकुर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष नरेश मोरे ने किया। सीएमओ ने ज्ञापन लेने के बाद 15 दिनों के भीतर समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया। देखिए दो तस्वीरें… भू-अधिकार पट्टों के वितरण में देरी का लगाया आरोप कांग्रेस ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में करीब 95 हितग्राहियों को स्वीकृत मुख्यमंत्री भू-अधिकार पट्टों का अब तक वितरण नहीं किया गया। इसके कारण पात्र हितग्राही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ज्ञापन में पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत नहीं होने, बरसात में कीचड़ और दुर्घटना की आशंका, शनिवार बाजार में पार्किंग व्यवस्था के बावजूद कथित अवैध वसूली, खुले पाइपलाइन चैंबरों से दूषित पानी की आपूर्ति, नियमित सफाई और पेयजल व्यवस्था में कमी जैसे मुद्दे उठाए गए। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने में पक्षपात, नियम विरुद्ध नियुक्तियों और प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की दूसरी किस्त जल्द जारी करने की मांग भी की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के विरोध में नगर परिषद प्रशासन को जगाने के लिए ‘कुंभकर्ण’ का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। सीएमओ के.एस. उईके ने सभी मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।



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छपरा की फेमस मिठाई है कलाकंद, दूसरी पीढ़ी संभाल रही दुकान, दुबई तक फैला है स्वाद


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छपरा की फेमस मिठाई है कलाकंद, दूसरी पीढ़ी संभाल रही दुकान, दुबई तक फैला स्वाद

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Chapra Famous Kalakand Shop: छपरा शहर में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र के बाजार में भी एक काफी स्वादिष्ट और मशहूर मिठाई मिलती है, जिसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. आज हम जिले के एक ऐसे मशहूर कलाकंद के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से कलाकंद खरीदकर दुबई में रहने वाले लोग भी ले जाते हैं. शुद्ध दूध से इसको तैयार किया जाता है. दूसरी पीढ़ी के लोग इस दुकान को संभाल रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि जो स्वाद पहले मिलता था, वही स्वाद मिठाई में आज भी मिलता है. इसका कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्र से आसानी से दूध मिल जाता है.

कोयले की आग पर लोगों के सामने खोवा निकालकर कलाकंद तैयार किया जाता है. यह मशहूर कलाकंद जिले के गरखा प्रखंड अंतर्गत बसंत बाजार में तैयार होता है, जहां दूसरी पीढ़ी के रूप में बबलू प्रसाद और उनके पुत्र मिलकर कलाकंद तैयार करते हैं.

इस दुकान की शुरुआत उनके पिताजी ने की थी. लगभग 50 वर्ष से अधिक पुरानी यह दुकान बताई जा रही है. जो स्वाद 50 वर्ष पहले मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. जिसकी वजह से यहां मिठाई खाने वाले पुराने से पुराने ग्राहक भी आते हैं.

लोकल 18 से ग्राहक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि ‘यह काफी पुरानी यह दुकान है. मैं जब छोटा था, तो अपने पिताजी के साथ यहीं पर कलाकंद खाने के लिए आता था और आज भी मैं यहीं का कलाकंद खाता हूं. जो पहले स्वाद मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. पहले बबलू प्रसाद के पिताजी शंभू प्रसाद जी यहां पर मिठाई बनाते थे.

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अब बबलू प्रसाद और उनके पुत्र के द्वारा कलाकंद तैयार किया जा रहा है. यह आज भी काफी स्वादिष्ट लगता है. शंभू मिष्ठान भंडार के नाम से यह दुकान पूरे जिले में मशहूर है. यहां के कलाकंद बहुत मशहूर हैं. दूर-दूर के लोग यहां के कलाकंद खाने आते हैं. यहां की मिठाई में आज भी शुद्धता बरकरार है.’

दुकानदार बबलू प्रसाद ने बताया कि ‘ग्रामीण क्षेत्र से शुद्ध दूध लाकर कोयले की आग पर खोवा निकाला जाता है, जिसमें इलायची, किशमिश, काजू सहित कई सामग्री स्वाद बढ़ाने के लिए डाली जाती है. शुद्धता में कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि लगभग 50 वर्ष से इस बाजार में दुकान संचालित हो रही है.

मेरे पिता शंभू प्रसाद ने इस दुकान की शुरुआत की थी. अब हम और मेरे पुत्र इसे संभाल रहे हैं. जिले के कोने-कोने से लोग मिठाई खाने के लिए आते हैं.यहां से दुबई में रहने वाले लोग भी मिठाई खरीदकर ले जाते हैं. कल ही यहां से 3 किलो कलाकंद खरीदकर लोग दुबई ले गए हैं.

यहां सफाई और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही वजह है कि आज भी स्वाद बरकरार है. जिसकी वजह से ग्राहकों का मेरी दुकान की मिठाई पर विश्वास है. छोटी दुकान है, लेकिन बड़े-बड़े दुकानों में भी इस तरह की स्वादिष्ट और शुद्ध मिठाई नहीं मिलती है. यही वजह है कि लोग मेरी मिठाई पर विश्वास करते हैं.’

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सुल्तानपुर में किसान यूनियन ने किया प्रदर्शन: राष्ट्रपति को भेजे मांग पत्र में MSP, कर्ज माफी और मुफ्त शिक्षा-चिकित्सा की मांगें – Sultanpur News




सुल्तानपुर में भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) ने किसानों की समस्याओं और विभिन्न राष्ट्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन ने शुक्रवार दोपहर 3 बजे जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को एक पांच सूत्रीय ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। यह प्रदर्शन जिलाध्यक्ष बालेंद्र बौद्ध के नेतृत्व में तिकोनिया पार्क में हुआ। ज्ञापन शाम 3 बजे अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा गया, जो राष्ट्रपति को संबोधित था। ज्ञापन में किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की मांग की गई है, ताकि उन्हें फसलों का उचित दाम मिल सके। इसके साथ ही, पूरे भारत के नागरिकों के लिए शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह से निशुल्क करने की भी मांग की गई है। यूनियन ने देश के सभी किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करने, भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापारिक समझौते को वापस लेने तथा बुजुर्गों के लिए वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति माह करने की भी मांग की है। यूनियन के जिलाध्यक्ष बालेंद्र बौद्ध, जो लंभुआ क्षेत्र के चांदा (कसईपुर पोस्ट, भुआ पठखौली) निवासी हैं, ने 10 जुलाई को यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा। किसानों का कहना है कि जब तक अन्नदाताओं और आम नागरिकों को उनकी बुनियादी सुविधाएं और फसलों का उचित हक नहीं मिलेगा, तब तक देश की प्रगति अधूरी है। अब देखना होगा कि इस ज्ञापन पर केंद्र सरकार क्या संज्ञान लेती है।



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सुप्रीम कोर्ट में वकील ने CJI को अपशब्द कहे: जज को आदेश देने लगा, फाइल फेंकी; सिक्योरिटी ने कोर्ट रूम से बाहर निकाला


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नई दिल्ली17 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जिस वकील ने हंगामा किया, उसका नाम प्रबल प्रताप है।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक वकील ने सुनवाई के दौरान अभद्र व्यवहार किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान उसने सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहे और फाइल फेकी।

चुनौती दैनै वाली याचिका की पैरवी यही वकील कर रहा था। सीजैआई इस याचिका की सुनवाई नहीं कर रहे थे। इस मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच कर रही थी।

याचिकाकर्ता वकील के अभद्र व्यवहार से कोर्ट रूम में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। तुरंत ही सिक्योरिटी ने उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।

कोर्ट रूम में हुए हंगामे की 2 तस्वीरें…

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

हंगामे के बाद जज बोले- हमें वकील से सहानुभूति

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता वकील ने कहा, “न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें। इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, आप मुझे आदेश दे रहे हैं?

इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है।” इसके बाद उसने केस की फाइल हवा में फेंक दी और गाली-गलौज करने लगा।

हंगामे के बाद जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा- “वह बहुत परेशान है, यह सब हताशा है। हमें उसके लिए केवल सहानुभूति है। हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। जहां तक मामले की बात है, हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला।”

कोर्ट ने नहीं लिया एक्शन, लेकिन बार काउंसिल कर सकता है कार्रवाई

  • इस वकील के खिलाफ बार काउंसिल भी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, अगर कोई वकील अपने पेशे के नियमों का पालन नहीं करता या गलत आचरण करता है, तो उसके खिलाफ एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
  • पहले शुरुआती जांच होती है, अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उसे बार काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के पास भेजा जाएगा।
  • वकील दोषी मिला तो उसे चेतावनी दी जा सकती है, कुछ समय के लिए वकालत करने से रोका जा सकता है। गंभीर मामलों में उसका नाम बार काउंसिल की सूची से हटाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता के मामले

सुप्रीम कोर्ट में कभी-कभार किसी वकील द्वारा बहस के दौरान ऊंची आवाज, तीखी बहस या अनुचित टिप्पणी के मामले सामने आए हैं, लेकिन CJI पर शारीरिक हमला या कोर्ट रूम के अंदर गंभीर अभद्रता जैसी घटनाएं सार्वजनिक रिकॉर्ड में मिलती ही नहीं हैं। CJI से अभद्रता की अबतक केवल 2 घटनाओं का जिक्र मिलता है…

1999 – CJI एएस आनंद पर एडवोकेट नंदलाल बलवानी ने जूता फेंका

तत्कालीन CJI एएस आनंद की बेंच के सामने एक वकील ने नारेबाजी की और कोर्ट रूम में जूता फेंका। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर आपराधिक अवमानना माना और उन्हें 4 महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई।

6 अक्टूबर 2025 – CJI बीआर गवई के कोर्ट रूम में जूता फेंकने की घटना

एक वकील ने सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई की ओर जूता फेंका और नारे लगाए। जूता CJI को नहीं लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद बार काउंसिल ने भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। बाहर जाते वक्त वकील ने नारा लगाया- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

घटना के बाद CJI ने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक:ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे, इससे न्याय व्यवस्था को नुकसान; NCLT का फैसला रद्द

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पढ़ें पूरी खबर…

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शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी: कोर्ट में सरेंडर करूंगी, हत्या हो जाए तो भी मंजूर, देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं




बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश देश लौटेंगी और कोर्ट में सरेंडर करेंगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी बांग्लादेश लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे। हसीना ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। उनके मुताबिक, लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने वापसी की सटीक तारीख नहीं बताई। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, हसीना 2024 में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई। वह इन आरोपों से इनकार करती रही हैं। हसीना बोलीं- सरकार से वापसी पर कोई बातचीत नहीं शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे बातचीत नहीं हो सकती। हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। उन्होंने कहा, “मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद ही लौटूंगी।” हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भारत ने भी फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की। इससे पहले अप्रैल में भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हसीना बोलीं- अगर गलती की है तो फैसला जनता करे शेख हसीना ने कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है, क्योंकि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में लंबे समय तक रहने वाली किसी भी सरकार से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उसका फैसला अदालत नहीं, जनता को करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमारी सरकार से गलतियां हुई हैं, तो जनता फैसला करेगी।” रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में 2024 के छात्र आंदोलन पर कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। इसी मामले में शेख हसीना को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अदालत की सुनवाई शुरू होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। चार दिन पहले हसीना विरोधी रैली में धमाका राजधानी ढाका के पास सावर में चार दिन पहले सोमवार को शेख हसीना विरोधी रैली के दौरान बम धमाका हुआ था। इस हमले में 3 लोग घायल हुए, जबकि मंच पर छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल नाहिद इस्लाम समेत नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। धमाका सोमवार रात करीब 9:45 बजे उस समय हुआ, जब पार्टी की एक नेता सभा को संबोधित कर रही थीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह रैली जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन की दूसरी बरसी के मौके पर निकाली गई थी। इसी आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। फिलहाल धमाके की वजह साफ नहीं हो सकी है और मामले की जांच जारी है।
सरकार बोली- शेख हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी बांग्लादेश सरकार के मुताबिक हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी है। विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने मंगलवार को बताया था कि हसीना को अदालत के सामने पेश करने के लिए सरकार राजनयिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है और इस प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हसीना को वापस लाने की प्रक्रिया अंतरिम सरकार के समय शुरू हुई थी और मौजूदा सरकार भी इसे आगे बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, प्रत्यर्पण अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होता है, इसलिए इसमें समय लगना स्वाभाविक है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया।



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भारत में बच्चों के लिए बैन हो सकता है सोशल मीडिया?


पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया को लेकर बनाए गए नए कानून की सराहना की है और कहा कि भारत को भी इससे कुछ सीखना चाहिए। पीएम मोदी की ये बात भारत में भी सोशल मीडिया को लेकर कानून में बदलाव की तरफ ईशारा है। भारत के कुछ राज्य सरकारों ने भी पिछले दिनों 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने को लेकर घोषणाएं की हैं। सोशल मीडिया की वजह से बच्चों पर मानसिक प्रभाव पड़ता है। इसे लेकर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जाहिर की है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलिया के मेनलबर्न में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और बाकी देशों ने ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया नियमों से काफी कुछ सीखा है। इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के IT और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में हुए बदलाव की सराहना की है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया आईटी और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में बदलाव कर रहा है, वह समाज की सुरक्षा के लिए प्रेरणादायक है।

क्या भारत में भी बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए की गई ऑस्ट्रेलिया की कोशिशों से भारत भी बहुत कुछ सीख रहा है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बना है, जिसने 16 साल से कम उम्रे के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है।

ऑस्ट्रेलिया ने यह कानून पिछले साल दिसंबर 2025 में लागू किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिक-टॉक, स्नैपचैट आदि पर बड़ी संख्यां में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट पर रोक लगा दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया की सरकार की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे कम उम्र के यूजर्स की सख्ती से जांच करें।

ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले के बाद भारत के भी कई राज्य सरकारों ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने को लेकर घोषणाएं की हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक समेत कई राज्य सरकारों ने इसे लेकर जल्द कानून की घोषणा की है। यही नहीं, पिछले दिनों ब्रिटेन ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने और गेमिंग लाइव-स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की घोषणा की है।

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धर्मेंद्र थे हेमा मालिनी की सबसे बड़ी ताकत, आगे बढ़ते रहने की हमेशा देते थे सीख


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हिंदी सिनेमा की सदाबहार एक्ट्रेस हेमा मालिनी ने हाल ही में अपने जीवन की सबसे बड़ी ताकत यानी धर्मेंद्र को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि मुश्किल दौर में भी धर्मेंद्र ने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया और हमेशा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी. दोनों की जोड़ी ने न सिर्फ पर्दे पर बल्कि असल जिंदगी में भी दर्शकों का दिल जीता. धर्मेंद्र के जाने के बाद भी उनकी सिखाई बातें और यादें आज भी हेमा मालिनी के साथ हैं, जो उन्हें लगातार प्रेरित कर रही हैं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की जोड़ी सिर्फ रुपहले पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी हमेशा मिसाल बनी रही. इस सदाबहार जोड़ी ने एक साथ कई सुपरहिट फिल्में देकर दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया. हेमा मालिनी आज भी दिवंगत पति से जुड़े अनसुने किस्सों और अपनी खूबसूरत यादों को अक्सर फैंस के साथ साझा करती रहती हैं. धर्मेंद्र के जाने के बाद भी दोनों के प्यार का यह खूबसूरत सफर लोगों के दिलों में जिंदा है.

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अब अपने फिल्मी करियर के 60 साल पूरे होने के मौके पर हेमा मालिनी ने एक बार फिर अपने जीवनसाथी को याद करते हुए बताया कि धर्मेंद्र ने हर मुश्किल दौर में उनका मनोबल बढ़ाया और कभी भी उन्हें अपनी क्षमताओं पर शक नहीं करने दिया. हेमा मालिनी ने का कहना है कि धर्मेंद्र उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे.

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आईएएनएस को दिए खास इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने अपने 6 दशक लंबे फिल्मी सफर, बदलती जिंदगी और धर्मेंद्र के साथ मिले अटूट सहयोग पर खुलकर बात की. यह बातचीत उनके खास कार्यक्रम ‘हेमा मालिनी: लाइव इन कॉन्सर्ट’ से पहले हुई, जो उनके 60 साल के शानदार सिनेमाई सफर का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है.

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हेमा मालिनी ने कहा, ‘मेरे जीवन में हमेशा वही हुआ, जो समय के अनुसार होना था. 70 और 80 का दशक मेरे लिए काफी व्यस्त दौर था. मैंने लगातार कई फिल्मों में काम किया. इसके बाद कुछ समय का ब्रेक आया, फिर मैंने ‘बागबान’ और कुछ अन्य फिल्मों में काम किया. हालांकि, मैं कभी खाली नहीं रही. डांस शो, बैले और कई दूसरी चीजों में लगातार व्यस्त रही.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘बाद में जब मैं सांसद बनी, तो मेरी जिंदगी में एक नया मोड़ आया. आज भी मैं लोगों के बीच रहती हूं और खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे जनता की सेवा करने का मौका मिला. पहले मैं फिल्मों, डांस और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए लोगों का मनोरंजन करती थी, अब मथुरा की जनता की सेवा करना मेरे जीवन का अहम हिस्सा है.’

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हेमा मालिनी बताती हैं कि आज भी जब लोग मुझे देखते हैं तो उन्हें सबसे पहले मेरा लोकप्रिय किरदार ‘बसंती’ याद आता है. मथुरा में मेरे क्षेत्र के लोग अक्सर मुझसे कहते हैं कि बसंती का कोई डायलॉग बोलिए. इतने साल बीत जाने के बाद भी लोगों के दिलों में वह किरदार आज भी जिंदा है. यह मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात है.

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इंटरव्यू के दौरान हेमा मालिनी ने धर्मेंद्र के उस साथ का भी जिक्र किया, जिसने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. उन्होंने कहा, ‘धर्म जी हमेशा मुझसे कहते थे कि कभी यह मत सोचना कि फिल्में कम कर रही हो, इसलिए सब खत्म हो गया है. तुम अपने डांस शो कर रही हो, दूसरी कई चीजों में हिस्सा ले रही हो.’

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हेमा मालिनी ने आगे कहा, ‘धर्म जी कहते थे कि रुकना मत, बस इसी तरह आगे बढ़ती रहो. उन्हें हमेशा यह देखकर खुशी होती थी कि मैं किसी न किसी काम में व्यस्त रहती हूं. वह मेरी हर कोशिश की सराहना करते थे और हमेशा कहते थे कि जो कर रही हो, उसे कभी मत छोड़ना.’ उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र का यह भरोसा और प्रोत्साहन ही था, जिसने उन्हें हर दौर में सक्रिय बनाए रखा.

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