मुज़फ्फरनगर। MDA ने गुरुवार शाम सहारनपुर रोड स्थित दो बड़े अवैध निर्माण स्थलों पर बुलडोजर चलाकर करीब 12,500 वर्गमीटर क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। यह कार्रवाई जोन-4 क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से बिना स्वीकृति प्लाटिंग और निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। एमडीए की टीम ने सबसे पहले नीरज चौहान द्वारा सहारनपुर रोड पर विकसित की जा रही लगभग 1,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल की अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया। इसके बाद भूषण ठाकुर पुत्र मेहर सिंह, ब्रजमोहन और अन्य लोगों द्वारा करीब 11,000 वर्गमीटर क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। बताया गया कि दोनों मामलों में विकास प्राधिकरण द्वारा पहले नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए सुनवाई की गई और अवैध निर्माणों को हटाने के आदेश भी पारित किए गए थे। बावजूद इसके निर्माण गतिविधियां जारी रहने पर गुरुवार को प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान सहारनपुर रोड क्षेत्र में काफी देर तक हलचल का माहौल रहा। प्राधिकरण अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माणाधीन ढांचों, अवैध रूप से विकसित प्लॉटों और अन्य संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। किसी भी विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि शहर और उसके आसपास अवैध कॉलोनियों तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्यों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों को बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि बिना प्राधिकरण की अनुमति के भूमि विकास और निर्माण कार्य न करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। शहर में बढ़ती अवैध प्लाटिंग पर यह हाल के दिनों की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में चिन्हित अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी जल्द इसी प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।
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MDA का बुलडोजर एक्शन, अवैध कॉलोनी और निर्माण किए ध्वस्त: नोटिस के बावजूद नहीं रुका निर्माण, पुलिस की मौजूदगी में 12,500 वर्गमीटर में चला ध्वस्तीकरण अभियान – Muzaffarnagar News
43 साल पहले आया वो रुहानी सॉन्ग, उतर गया दिल में, फ्लॉप मूवी निकली मैसिव हिट
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Bollywood Timeless Movie : रिश्तों की संवेदनाएं मासूम होती है. संवेदनाओं के हर आगे हर कोई मासूम ही है. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती के स्टारडम के बीच एक ऐसे ही फिल्म रिलीज हुई थी जिसका फ्लॉप होना तय था. रिलीज के शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में इस फिल्म को दर्शक नहीं मिले. डायरेक्टर समेत फिल्म के सभी कलाकार उम्मीदें छोड़ चुके थे. सब कोई मान गया था कि इसे फ्लॉप होने से कोई बचा नहीं सकता. दिन-प्रतिदिन गहरी होती निराशा के बीच चमत्कार हुआ. कुछ ऐसा ही करिश्मा कभी शोले के साथ हुआ था. फिल्म मैसिव हिट निकली. गाने इतने कालजयी कि सुनते ही परेशान दिल को सुकून मिलता है.
कई बार जिंदगी में मासूम से सवालों का जवाब ढूंढना मुश्किल हो जाता है. एक शख्स के अतीत के रिश्ते से एक नाजायज औलाद उसकी शादीशुदा जिंदगी में आ जाती है. उसे अब अतीत पर पछतावा है, पिता की जिम्मेदारी भी निभानी है. अपने टूटते हुए घर को भी बचाना है. अब उसके सामने मासूम सा सवाल है कि वो करे तो क्या करे. उसकी पत्नी यह सब देखकर भरोसा खो चुकी है. गहरे मानसिक संताप से गुजर रही है. वो बच्चे को अपनाना चाहती है लेकिन अपना नहीं पाती. इन सबके वो मासूम बच्चा जो अपनी मां को खो चुका है, नए घर में खुद को कैसे एडजस्ट करे, अपनी जगह कैसे बनाए, उसके सामने भी मासूम सवाल है जिसका जवाब वो ढूंढने की कोशिश करता है. इन सभी मासूम सवालों का जवाब 1983 में आई एक फिल्म खूबसूरती से देती है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की चुनिंदा फिल्मों में शुमार है. फिल्म में स्वीकार्यता और क्षमादान दो ऐसे एलिमेंट है जो सभी सवालों का जवाब बन जाते हैं.

43 साल पहले प्यार, जिम्मेदारी, नैतिकता और स्वीकार्यता का मेल कराती एक बेहतरीन फिल्म आई थी जिसका नाम था : मासूम. फिल्म 21 अक्टूबर 1983 को रिलीज हुई थी. निर्देशन शेखर कपूर ने किया था. नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी स्टारर यह फिल्म ना केवल अपने समय की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है बल्कि इसका प्रभाव हिंदी सिनेमा पर बहुत ज्यादा पड़ा. सईद जाफरी भी अहम भूमिका में थे. फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. फिल्म एरिक सहगल के 1980 के नॉवेल मैन वुमेन एंड चाइल्ड पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले गुलजार ने लिखा था. चंदन दत्त-देवी दत्त ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. चंदन दत्त बॉलीवुड लीजेंड गुरु दत्त के भाई थे. उनके प्रोडक्शन में बनी यह पहली फिल्म थी. बाद में उन्होंने ‘भावना’ फिल्म बनाई थी.

फिल्म की कहानी डीके मल्होत्रा की है जो अपनी पत्नी इंदु और दो बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. इस खुशहाल परिवार को समय की नजर लग जाती है. डीके को पता चलता है कि अतीत के एक रिश्ते से उनका एक बेटा राहुल है. राहुल की मां का निधन हो चुका है, अब वो अकेला है. डीके अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसे घर ले आते हैं. फिल्म की कहानी इस नाजुक स्थिति को बहुत ही सटीकता के साथ दिखाती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे डीके और इंदु जीवन की कड़वी सच्चाई का सामने करते हैं. कैसे अपने रिश्ते को संभालते हैं. कैसे छोटा बच्चा राहुल नए घर में खुद की जगह बना पाता है.
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सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल आई ‘बंधन कच्चे धागों का’ में भी सेम स्टोरी लाइन थी. ‘मासूम’ टाइटल से अब तक तीन फिल्में बन चुकी हैं. 1960, 1983 और 1996 में ‘मासूम’ फिल्म आ चुकी है लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1983 में आई ‘मासूम’ फिल्म को मिली. 1960 में आई ‘मासूम’ फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था. अशोक कुमार लीड रोल में थे. सरोस ईरानी और हनी ईरानी ने बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था. फिल्म मैसिव हिट रही थी. इसी तरह 1996 में भी ‘मासूम’ टाइटल से फिल्म आई. महेश कोठारे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इंदर कुमार, आयशा जुल्का लीड रोल में थे. 1.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म मे करीब 9 करोड़ का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म भी हिट रही थी. ‘मासूम’ 1996 का एक गाना ‘काले लिबास में बदन’ खूब पॉप्युलर हुआ था. इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस फिल्म को ना बनाने की सलाह शेखर कपूर को दी थी. उनका कहना था कि ना तो फिल्म में विलेन है और ना कोई एक्शन है. कहा जाता है कि शेखर कपूर प्रोड्यूसर को किसी और फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने पहुंचे थे. 5 मिनट में प्रोड्यूसर को बोरियत फील होने लगी. शेखर कपूर ने देखा कि प्रोड्यूसर के ऑफिस में ‘मैन वुमेन एंड चाइल्ड’ नॉवेल रखा हुआ है. उन्होंने नॉवेल की स्टोरी सुना दी. प्रोड्यूसर को कहानी बहुत अच्छी लगी और वो फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए.

‘मासूम’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 4 गाने थे. ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं’ गाने के दो वर्जन था. पहला वर्जन अनूप घोषाल और दूसरा वर्जन लता मंगेशकर ने गाया था. ‘दो नैना और एक कहानी’ आरती मुखर्जी ने गाया था. गाना असाधारण है. लीक से हटकर है. उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. फिल्म का एक और यादगार गाना ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ आज भी कितना हिट है, आप सभी जानते हैं. सभी गाने गुलजार ने लिखे थे. गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. लो बजट फिल्म के लिए पंचम दा ने अपने करियर का बेस्ट म्यूजिक तैयार किया उन्हें बेस्ड म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाने से जुड़ा किस्सा दिलचस्प है. दरअसल गीतकार गुलजार अपनी बेटी मेघना गुलजार के लिए हर साल एक फनी कविता लिखा करते थे. ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाना उसी किताब से लिया गया था. गाने के शुरुआती लाइनें संगीतकार उत्तम सिंह की बेटी गुरुप्रीत कौर ने गाई थीं. वो उस समय सिर्फ चार साल की थीं.

‘मासूम’ मूवी शेखर कपूर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी. शेखर कपूर के मामा देवानंद थे. उनकी मां शीलाकांता एक्ट्रेस-पत्रकार थीं. शेखर कपूर लंदन से सीए की पढ़ाई करके भारत आए. पहले हीरो बनने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. फिर निर्देशन में हाथ आजमाया. निर्देशन की दुनिया में उन्होंने बड़ा नाम कमाया. ‘मासूम’ के बाद ‘मिस्टर इंडिया’ से उन्होंने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था. शेखर कपूर ने सतीश कौशिक से दोस्ती निभाई. उन्हें ‘मासूम’ में भी छोटा सा रोल दिया और ‘मिस्टर इंडिया’ में कैलेंडर का रोल दिया. मिस्टर इंडिया से सतीश कौशिक का करियर चमक गया.

नसीरुद्दीन शाह को ‘मासूम’ के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. यह उनका तीसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड था. इससे पहले उहें पांच बेस्ट एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. नसीरुद्दीन शाह इस फिल्म में सुप्रिया पाठक के अपोजिट नजर आए थे. वो रिश्ते में उनकी साली साहिबा हैं. नसीरुद्दीन साहब को प्रोड्यूसर ने पेमेंट नहीं दिया था, वो बहुत नाराज हुए. उन्होंने ‘भावना’ फिल्म के सेट पर खूब हंगामा किया था जहां पर प्रोड्यूसर देवी दत्त मौजूद थीं. शबाना आजमी सहित पूरी यूनिट यह सब देखकर सन्न रह गई थी.

बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट जुगल हंसराज की यह डेब्यू फिल्म थी. उर्मिला मांतोडकर और आराधना श्रीवास्तव ने भी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया. जुगल हंसराज-उर्मिला मांतोडकर की 1994 में ‘आ गले लग जा’ में बतौर लीड एक्टर काम किया. मासूम मूवी के बजट की सटीक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी. उस साल की 14वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
कम लागत में 45 दिनो में तैयार होती है आगरा की फेमस तोरई, यूपी के दर्जनों जिलों में सप्लाई
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आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है.
आगरा: आगरा में बड़े पैमाने पर तरोई की पैदावार होती है. किसान बताते है कि कम लागत से इस फसल में उन्हें अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है. किसानों ने बताया कि आगरा की तोरई आगरा ही नहीं बल्कि यूपी के कई अलग अलग जिलों तक जाती है.इसके अलावा दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों तक सप्लाई होती है. आगरा में कई क्षेत्रों में तोरई की फ़सल तैयार की जाती है. किसान इसे जैविक खेती से तैयार करते है कोई केमिकल या कितनाशक दवा ना होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है. आगरा की तोरई लंबी और चमकदार पतली होती है जिसे देख कर ही पहचान लिया जाता है कि यह आगरा की तोरई है.
45 दिन में तैयार हो जाता है तोरई
आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है. इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी तोरई की खेती बड़े स्तर पर की जाती है. किसान ने कहा कि इस फ़सल में कम लागत आती है और अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि वह आगरा कि बड़ी बड़ी मंडियो में तोरई पंहुचाते है जिसके बाद व्यापारी अलग अलग जिलों और राज्यों मे आगरा की तोरई सप्लाई करते है.
यूपी के दर्जनो जिले में होती है सप्लाई
आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई बहुत ज्यादा मशहूर है. उन्होंने कहा कि यह लखनऊ, इलाहबाद, शहँजाबाद सहित अन्य कई जिलों तक जाती है. इसके अतिरिक्त राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में इनकी सप्लाई होती है. किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई जैविक खेती में उगाई जाती है इसमें कोई केमिकल या इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है. जिससे यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो और यही कारण है कि शुद्धता के कारण यह आस पास बेहद मशहूर है. यह देखने में एक दम लंबी और चमकदार हरी हरी होती है और शुद्ध तोरई की यही पहचान होती है. तोरई की खेती से उन्हें अच्छा पैसा मिलता है इसलिए वह कई सालों से इसकी खेती कर रहे हैं.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
भैरू दरवाजा नाले से हटेगा अवैध डंपिंग यार्ड: स्थाई लोक अदालत ने कचरा हटाने के आदेश दिए, कचरा जलाने पर रोक लगाई – Sawai Madhopur News
सवाई माधोपुर के भैरू दरवाजा के पास स्थित लटिया नाले में नगर परिषद ने अवैध कचरा डंपिंग यार्ड बना रखा है। जिसे समय समय पर जलाया जाता है। अब इस मामले में स्थाई लोक अदालत, सवाई माधोपुर ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर परिषद और सफाई निरीक्षक नगरपरिषद को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर बचे हुए शेष कचरे को अधिकतम 15 दिनों के भीतर वहां से हटाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने आबादी और ज्वलनशील पदार्थों के पास कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह था पूरा मामला एडवोकेट अब्दुल हासिब ने बताया कि भैरू दरवाजा स्थित ‘गुप्ता एच.पी. फ्यूल’ पेट्रोल पंप के सहायक मैनेजर रमेश सैनी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (स्थाई लोक अदालत) में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22-बी के तहत एक परिवाद दायर किया था। परिवाद में बताया गया था कि नगर परिषद पिछले कई महीनों से बरसाती लटिया नाला में पूरे शहर का कचरा अवैध रूप से डंप कर रही है।
इस कचरे के कारण न केवल दुर्गंध और महामारी फैलने का खतरा बना हुआ था, बल्कि नगर परिषद के कर्मचारी इस कचरे में आग लगा देते थे. चूंकि इस डंपिंग साइट से मात्र 60-70 फीट की दूरी पर पेट्रोल पंप और घनी आबादी क्षेत्र स्थित है, इसलिए वहां कभी भी बड़े पैमाने पर अग्निकांड और जान-माल के नुकसान की गंभीर आशंका बनी हुई थी. बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित पक्ष ने अदालत की शरण ली.
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित और सदस्य जूली खण्डेलवाल की पीठ ने निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश जारी किए: 15 दिन में कचरा हटने का अल्टीमेटम दिया
नगर परिषद को निर्देश दिया गया है कि फोटोग्राफ्स में दिख रहे स्थान पर बचे हुए बाकी कचरे को हर हाल में अगले 15 दिनों के भीतर वहां से पूरी तरह साफ किया जाए। कचरा केवल उसी स्थान पर एकत्रित किया जाए जो कानूनन इसके लिए पहले से तय और चिन्हित है। किसी भी अनधिकृत या प्रार्थी के पेट्रोल पंप वाले स्थान पर कचरा नहीं डाला जाएगा। कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कचरा किसी भी ऐसे स्थान पर कतई न जलाया जाए, जहां आसपास कोई ज्वलनशील पदार्थ (जैसे पेट्रोल पंप) का भंडारण हो या फिर घनी आबादी क्षेत्र हो।अदालत ने इस मामले को पूरी तरह निस्तारित करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से स्थानीय निवासियों और पेट्रोल पंप पर आने-जाने वाली जनता ने राहत की सांस ली है, क्योंकि लंबे समय से उनके जीवन और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था।
अब्दुल हासिब एडवोकेट के अनुसार पिछले साल शहर में बाढ़ की वजह यह डंपिंग यार्ड से पानी का निकास नहीं होने से भी लोगों के घरों में पानी घुस गया और काफी नुकसान हुआ।
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शेखपुरा में नई कचरा नियमावली लागू: कचरा 4 श्रेणियों में बांटा जाएगा, बड़े संस्थानों को करना होगा पंजीकरण, 30 जून तक रिपोर्ट जरूरी – Sheikhpura News
शेखपुरा में गुरुवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 लागू करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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एडीएम विभागीय जांच संजय कुमार की अध्यक्षता में शेखपुरा नगर परिषद ने शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लक्ष्य के साथ मंथन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित किया।
एडीएम संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना और शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।
नई नियमावली के अनुसार, अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निस्तारित किया जाएगा।
मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा गीले कचरे में रसोई का कचरा, फल-सब्जी के छिलके और बागवानी अपशिष्ट शामिल होंगे, जिनका उपयोग खाद या बायोगैस बनाने के लिए किया जाएगा। सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री होगी, जिसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।
दूषित कचरे जैसे डायपर, सैनिटरी पैड और मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा। वहीं, खतरनाक कचरे जैसे पुरानी बैटरी, ट्यूब लाइट, कीटनाशक के डिब्बे और ई-वेस्ट को सावधानी से अलग रखा जाना चाहिए, क्योंकि इनमें हानिकारक रसायन होते हैं।

30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी नियमावली में बड़े कचरा उत्पादकों जैसे होटल, अस्पताल, स्कूल और बड़े संस्थानों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है,
प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, या पानी की खपत प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक है, तो उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
ऐसे संस्थानों को गीले कचरे का निपटान परिसर के भीतर ही खाद या बायोगैस के माध्यम से करना होगा। साथ ही, उन्हें हर साल 30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।
नगर परिषद ने पुराने डंपसाइट्स को हटाने के लिए आगामी 31 अक्टूबर की समय सीमा तय की है।
अभिजीत बोले- मोदी के साथ मेरी तस्वीर AI जनरेटेड: आज पुणे से कॉकरोच जनता पार्टी के देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत, शिक्षा घोषणापत्र जारी करेगी
पुणे9 मिनट पहले
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CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार सुबह पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी तस्वीर को AI जनरेटेड बताया है। पुणे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके ने कहा- मैं PM से कैसे मिल सकता हूं? मैं अमेरिका में सिर्फ एक स्टूडेंट था। सभी जानते हैं कि PM से मिलने की प्रक्रिया कितनी सख्त होती है।
दरअसल, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने दावा किया था कि दीपके भारत आने से पहले PM मोदी से मिले थे। उन्होंने कहा- मुझे किसी ने दीपके और मोदी की अमेरिकी में मीटिंग की एक फोटो भेजी है। लोग कह रहे हैं कि मोदी से मिलने के बाद दीपके यहां आए हैं।
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने आज से देशव्यापी प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन की शुरुआत पुणे स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी कैंपस से होगी। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
दीपके के मुताबिक, पार्टी शिक्षा घोषणापत्र भी जारी करेगी। इसमें पेपर लीक रोकने, समय पर रिजल्ट घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

दीपके ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ X पर वीडियो शेयर किया और लिखा- पुणे के लोगों, क्या आप प्रदर्शन के लिए तैयार हैं?
पुणे के बाद जयपुर-लखनऊ और अन्य शहरों में प्रदर्शन
दीपके ने बताया कि आंदोलन संविधान के दायरे में और पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इस अभियान में शामिल होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा।
पुणे के बाद CJP का प्रदर्शन जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु समेत कई शहरों तक जाएगा। इसके बाद 20 जून को प्रदर्शनकारी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेंगे। 6 जून को पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला प्रदर्शन किया था।

CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं।
इस टिप्पणी के अगले दिन, 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने CJP की शुरुआत की और सोशल मीडिया पर पार्टी के अकाउंट बनाए। इसके बाद 22 मई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया।
CJP बनने के महज 26 दिनों में इंस्टाग्राम पर उसके फॉलोअर्स 2.27 करोड़ तक पहुंच गए हैं। यह संख्या भाजपा के 94 लाख और कांग्रेस के 1.37 करोड़ फॉलोअर्स से ज्यादा है। एक्स पर CJP के 2.75 लाख फॉलोअर्स हैं।


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जंतर-मंतर पर ‘मैं भी अन्ना’ की जगह ‘मैं हूं कॉकरोच’: 5 घंटे का प्रोटेस्ट, उम्मीद से कम भीड़; कॉकरोच जनता पार्टी को क्या मिला

कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। 2011 इसी जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट अन्ना हजारे ने आमरण अनशन से करप्शन के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था।
तब नारे लगे थे- मैं भी अन्ना। इस बार आंदोलन का मकसद एजुकेशन सिस्टम में बदलाव है। नारा है- मैं हूं कॉकरोच। पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स हैं। जंतर-मंतर पर उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं आई, लेकिन पहली बार पार्टी जमीन पर दिखाई दी। पढ़ें पूरी खबर…
50 साल बाद भी बरकरार है ‘एंग्री यंग मैन’ का जादू , असली डॉन से जुड़ा है ‘दीवार’ का कनेक्शन
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हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जो सिर्फ हिट नहीं होतीं बल्कि एक दौर की पहचान बन जाती हैं. 1975 में रिलीज हुई ‘दीवार’ ऐसी ही फिल्मों में से एक है. इस फिल्म ने न केवल अमिताभ बच्चन के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि उन्हें बॉलीवुड का ‘एंग्री यंग मैन’ भी बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म दिखा ‘विजय’ का किरदार असली डॉन से जुड़ा है.
नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1975 को एक ‘चमत्कारी साल’ माना जाता है. इसी साल दो ऐसी फिल्में आईं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए. पहली ‘शोले’ और दूसरी यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी ‘दीवार’. आज अपनी रिलीज के 50 से अधिक साल बीत जाने के बाद भी ‘दीवार’ को एक ऐतिहासिक लैंडमार्क माना जाता है. इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में स्थापित कर बॉलीवुड का ‘शहंशाह’ बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा निभाया गया ‘विजय वर्मा’ का आइकॉनिक किरदार महज एक कल्पना नहीं था, बल्कि वह असल जिंदगी के एक मशहूर अंडरवर्ल्ड डॉन से प्रेरित था? (Image: IMDb)

दिग्गज लेखक जोड़ी सलीम-जावेद द्वारा लिखित ‘दीवार’ दो भाइयों की कहानी थी. एक भाई रवि (शशि कपूर) जो कानून के रास्ते पर चलकर ईमानदार पुलिस अफसर बनता है और दूसरा भाई विजय (अमिताभ बच्चन) जो समाज के अन्याय से तंग आकर अपराध और तस्करी की दुनिया का बेताज बादशाह बन जाता है. फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था.

विजय का किरदार उस दौर के दर्शकों के दिलों में सीधे उतर गया था. वह पारंपरिक हीरो नहीं था, बल्कि एक ऐसा शख्स था जो समाज की नाइंसाफी, गरीबी और अपमान से जूझते हुए अपनी राह बनाता है. यही वजह थी कि लाखों लोगों ने खुद को ‘विजय’ के संघर्ष में देखा. फिल्म का असली आकर्षण विजय और उसकी मां (निरूपा रॉय) और भाई रवि के बीच का नैतिक टकराव था. Image: IMDb
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फिल्म इतिहासकारों और सिनेमा विशेषज्ञों की मानें तो विजय का यह किरदार काफी हद तक मुंबई के पहले बड़े अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की शुरुआती जिंदगी पर आधारित था. हालांकि ‘दीवार’ कोई बायोपिक नहीं थी और इसकी कहानी पूरी तरह हाजी मस्तान के जीवन पर आधारित नहीं थी, लेकिन दोनों के जीवन में कई समानताएं देखी गईं. (Image: Instagram/@bollywoodtriviapc)

हाजी मस्तान ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई के डॉकयार्ड (बंदरगाह) पर एक मामूली कुली के रूप में की थी. ठीक इसी तरह, फिल्म ‘दीवार’ में भी अमिताभ बच्चन को शुरुआत में डॉकयार्ड पर कुली का काम करते और बांह पर ‘बिल्ला नंबर 786’ बांधे दिखाया गया है. हाजी मस्तान का नाम उस दौर में तस्करी की दुनिया का बड़ा चेहरा माना जाता था. ऐसे समय में जब भारत में विदेशी सामानों पर कड़े प्रतिबंध थे, उन्होंने तस्करी के जरिए एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया. साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर दौलत, रसूख और लोकप्रियता हासिल करने की उनकी कहानी काफी हद तक विजय वर्मा के सफर से मेल खाती थी. Image: IMDb

फिल्म में विजय का संघर्ष, गरीबी से उठकर ताकतवर बनना और समाज में अपनी पहचान बनाना, कई लोगों को हाजी मस्तान की याद दिलाता है. हालांकि, फिल्म का मूल संदेश अपराध नहीं, बल्कि परिवार, नैतिकता और परिस्थितियों के बीच लिए गए फैसलों पर केंद्रित था. ‘दीवार’ ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार संवाद भी दिए. फिल्म का मशहूर डायलॉग ‘आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, दौलत है’ और उसके जवाब में ‘मेरे पास मां है’ आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित डायलॉग्स में गिने जाते हैं. Image: IMDb

‘दीवार’ पहली फिल्म थी जिसने हाजी मस्तान की जिंदगी के हिस्सों को पर्दे पर उतारा और ब्लॉकबस्टर रही. दिलचस्प बात यह है कि इसके दशकों बाद, साल 2010 में आई मिलन लूथरिया की हिट फिल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ में अजय देवगन द्वारा निभाया गया ‘सुल्तान मिर्जा’ का किरदार भी पूरी तरह से हाजी मस्तान की ही जिंदगी और उनके बाद के दौर पर आधारित था. Image: IMDb
कटनी में ट्रक डिवाइडर तोड़कर रेल पुल से गिरा: पटरियों पर नहीं पहुंचने से हादसा टला, केबिन में फंसे ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाला – Katni News
कटनी के नेशनल हाईवे-43 पर गुरुवार दोपहर को एक तेज रफ्तार ट्रक डिवाइडर को तोड़ता हुआ रेलवे ओवरब्रिज से सीधे नीचे जा गिरा। यह दुर्घटना बड़वारा इलाके के जगतपुर उमरिया गांव के पास हुई। अच्छी बात यह रही कि ट्रक सीधे रेल की पटरियों पर न गिरकर उनके किनारे गिरा, जिससे कटनी-चोपन रेल मार्ग पर एक बहुत बड़ा ट्रेन हादसा होते-होते टल गया। इस हादसे में ड्राइवर को हल्की-फुल्की चोटें आई हैं। तेज रफ्तार के कारण खोया संतुलन जानकारी के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब 1:00 बजे एक ट्रक कटनी से उमरिया की तरफ जा रहा था। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रक की रफ्तार बहुत तेज थी। जैसे ही ट्रक जगतपुर उमरिया गांव के पास रेलवे पुल पर पहुंचा, ड्राइवर का गाड़ी पर से काबू खो गया। इसके बाद बेकाबू ट्रक डिवाइडर से टकराया और उसे तोड़ते हुए सीधे पुल के नीचे गहरी खाई में गिर गया। गांव वालों ने बचाई ड्राइवर की जान पुल से ट्रक नीचे गिरने की जोरदार आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके की तरफ दौड़े। ट्रक ऊपर से गिरने के कारण पूरी तरह पिचक चुका था। गांव वालों ने बिना देर किए नीचे उतरकर राहत का काम शुरू किया और भारी मशक्कत के बाद ट्रक के केबिन में फंसे घायल ड्राइवर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी ड्राइवर की जान बच गई और उसे सिर्फ मामूली चोटें आईं, जिसके बाद उसे प्राथमिक इलाज दिया गया। टल गया बड़ा रेल हादसा इस पूरी घटना में सबसे राहत वाली बात यह रही कि ट्रक सीधे रेलवे ट्रैक के ऊपर नहीं गिरा। अगर ट्रक पटरियों पर गिरता और उसी दौरान वहां से कोई ट्रेन गुजरती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था। रेलवे और स्थानीय पुलिस ने साफ किया है कि इस हादसे की वजह से ट्रेनों के आने-जाने पर कोई असर नहीं पड़ा है और रेल यातायात पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है।
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लहसुन का अचार खाने के हैं शौकीन? घर पर इस ट्रिक से करें तैयार
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Lahsun Achar Recipe: लहसुन का अचार स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर में आयरन के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे हीमोग्लोबिन की कमी और एनीमिया का खतरा कम हो सकता है. लहसुन का अचार बनाने के लिए छिले हुए लहसुन की कलियों में नमक, हल्दी, लाल मिर्च, सौंफ, मेथी और सरसों का तेल मिलाया जाता है. इसके बाद इसे कुछ दिनों तक धूप में रखा जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. नियमित मात्रा में इसका सेवन इम्युनिटी मजबूत करने में मदद करता है और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकता है.
लहसुन अपने भीतर कई औषधीय गुण समेटे हुए है. सदियों से इसका उपयोग आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. लहसुन एंटी-बैक्टीरियल, एंटीबायोटिक और एंटी-वायरल गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर को कई संक्रमणों और बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है. इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी मजबूत होती है, हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. यही वजह है कि लहसुन को प्राकृतिक औषधि माना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार दिल की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. नियमित मात्रा में लहसुन के अचार का सेवन रक्त संचार को बेहतर बनाने और धमनियों में ब्लॉकेज के खतरे को कम करने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा, यह ब्लड क्लॉट बनने की संभावना को भी घटा सकता है. इसी वजह से लहसुन को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार शरीर में आयरन के अवशोषण (एब्सॉर्प्शन) को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी तत्व है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है. आयरन की कमी से एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस होती है. ऐसे में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ लहसुन का सेवन फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बनाए रखने और बेहतर स्वास्थ्य में सहायक हो सकता है. ( एआई फोटो )
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लहसुन का अचार एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में सहायक माने जाते हैं. नियमित रूप से थोड़ी मात्रा में लहसुन का अचार खाने से सामान्य सर्दी, जुकाम और फ्लू जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यही कारण है कि इसे स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी माना जाता है. शोधों में पाया गया है कि लहसुन में मौजूद ऑर्गेनो-सल्फर यौगिक शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं. कुछ अध्ययनों में इनके कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने की संभावित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. हालांकि, लहसुन का अचार किसी बीमारी का इलाज नहीं है, लेकिन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. ( एआई फोटो )

अगर आप झटपट और स्वादिष्ट लहसुन का अचार बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी ट्राई कर सकते हैं. इसके लिए 1 किलो कच्चा लहसुन, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, भुनी मेथी पाउडर, नमक, नींबू का रस और सरसों का तेल चाहिए. लहसुन को साफ कर मसालों और नींबू के रस के साथ मिलाएं, फिर गर्म करके ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डाल दें. सिर्फ 10 मिनट में आपका स्वादिष्ट और चटपटा लहसुन का अचार तैयार हो जाएगा. ( एआई फोटो )

लहसुन का अचार बनाने के लिए सबसे पहले छिली हुई लहसुन की कलियों को भाप में हल्का पका लें. इन्हें एक बाउल में निकालकर मसाले और नींबू का रस मिलाएं. दूसरी ओर सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म करें और उसमें राई तड़काएं. गैस बंद कर यह तेल लहसुन पर डालकर अच्छी तरह मिला लें. स्वादिष्ट अचार तैयार है. इसे एयरटाइट कांच के जार में भरकर फ्रिज में रखें, जहां यह लगभग 3 महीने तक सुरक्षित रह सकता है. ( एआई फोटो )


