कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति अब एक नए ट्रैक पर चल पड़ी है. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि उनकी राजनीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलती है. सुर्खियों में बने रहना और विरोधियों को लगातार उकसाना उनका मुख्य हथियार बन गया है. वह हर समय चर्चा का केंद्र बने रहना चाहते हैं. इसके लिए वह क्रेडिबिलिटी दांव पर लगाने को भी तैयार दिखते हैं. सालों पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से एक सवाल पूछा गया था. उनसे उनकी विवादास्पद बयानबाजी का कारण पूछा गया था. तब उन्होंने हंसते हुए कहा था कि ‘छपते रहो’. अब राहुल गांधी ने भी अपने पूर्व राजनीतिक गुरु की इस बात को पूरी तरह अपना लिया है. वह लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे बीजेपी को कई प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ती हैं.
क्या राहुल गांधी जानबूझकर डोनाल्ड ट्रंप की स्टाइल को कॉपी कर रहे हैं?
ट्रंप पर कितने भी आरोप लगें लेकिन वह हमेशा चर्चा में बने रहते हैं. राहुल गांधी भी भारत में यही गेम प्लान चला रहे हैं. वह जानते हैं कि चर्चा में बने रहने से उनकी लीडरशिप मजबूत दिखती है. उनके समर्थक इसे एक सोची-समझी रणनीति मानते हैं. उनका कहना है कि राहुल गांधी उन मुद्दों को उठा रहे हैं जिन पर बाकी लोग चुप रहते हैं.
राहुल गांधी क्यों अपना रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जैसी आक्रामक राजनीति, क्या है कांग्रेस का नया गेम प्लान? (AI Generated Image)
राफेल से लेकर संसद में गले मिलने तक कैसे बदला राहुल गांधी का अंदाज?
राहुल गांधी के राजनीतिक सफर में कई ऐसे मोड़ आए हैं जिसने सबको चौंका दिया. कुछ साल पहले उन्होंने राफेल डील को लेकर पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के नाम पर एक बड़ा दावा किया था. मनोहर पर्रिकर ने उस दावे का तुरंत खंडन किया था. इसके बावजूद राहुल गांधी अपने स्टैंड पर अड़े रहे. उन्होंने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा दिया जो चुनाव में भले नहीं चला लेकिन बीजेपी को डिफेंसिव होना पड़ा.
संसद में पीएम नरेंद्र मोदी को अचानक गले लगाना और फिर आंख मारना भी इसी रणनीति का हिस्सा था. इस घटना ने सोशल मीडिया पर भारी अटेंशन बटोरी. राहुल गांधी कई बार दावा कर चुके हैं कि आईबी और दूसरी एजेंसियों के अफसर उन्हें सीक्रेट इनफॉर्मेशन देते हैं. वह इन दावों के जरिए हमेशा खुद को खबरों के टॉप पर बनाए रखते हैं.
क्या बिना सबूत के बड़े आरोप लगाने से राहुल गांधी की इमेज को नुकसान हो रहा है?
इस आक्रामक राजनीति के साथ एक बहुत बड़ा रिस्क भी जुड़ा हुआ है. लगातार विवादास्पद बयान देने से नेता की गंभीरता कम होने का खतरा रहता है.
- डोनाल्ड ट्रंप भी अमेरिका में कई बार मीम्स और जोक्स का शिकार बनते हैं. राहुल गांधी के विरोधी उन पर ‘शूट एंड स्कूट’ यानी आरोप लगाकर भाग जाने का आरोप लगाते हैं.
- आलोचकों का कहना है कि राहुल गांधी जो भी दावे करते हैं उनके पक्ष में फैक्ट्स और एविडेंस नहीं देते हैं. लीडर ऑफ अपोजिशन एक संवैधानिक पद है और इसके गरिमा की अपनी मांग होती है.
- संसद की सीढ़ियों पर चाय में बिस्कुट डुबोने जैसी घटनाओं से सोशल मीडिया पर रील्स तो बन जाती हैं लेकिन इससे पद की गंभीरता कम होती है.
बीजेपी को परेशान करने के लिए कांग्रेस ने कौन सा नया चक्रव्यूह तैयार किया है?
राजनीति के जानकार इसे नैरेटिव सेट करने का खेल कहते हैं. राहुल गांधी अब सीधे सीधे हमला करने की पॉलिसी पर काम कर रहे हैं. वह सोशल मीडिया की ताकत को पहचान चुके हैं. इसलिए उनके बयान छोटे वीडियो और रील्स के लिए बिल्कुल परफेक्ट होते हैं.
इस आक्रामक राजनीति का भविष्य क्या है और राहुल गांधी को इससे क्या मिलेगा?
आने वाले समय में भारतीय राजनीति और भी ज्यादा आक्रामक होने वाली है. राहुल गांधी का यह ट्रंप कार्ड कितना कामयाब होगा यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे. लेकिन एक बात साफ है कि अब उन्हें कोई इग्नोर नहीं कर सकता है. क्रेडिबिलिटी का संकट अपनी जगह है लेकिन विजिबिलिटी के मामले में वह सबसे आगे चल रहे हैं. उनके इस अंदाज ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर दिया है.
अब वह सिर्फ छोर पर रहकर मैच नहीं देखते बल्कि सीधे काउंटर अटैक करते हैं. देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ट्रंप स्टाइल पॉलिटिक्स उन्हें देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा पाएगी या फिर वह सिर्फ हेडलाइंस तक ही सीमित रह जाएंगे.
क्या राहुल गांधी देश में आर्थिक मंदी का झूठा डर फैला रहे हैं?
बीजेपी ने अपने दावों को साबित करने के लिए कई आर्थिक डाटा पेश किए हैं. अप्रैल और मई 2026 में ई-वे बिल जनरेशन में 11 प्रतिशत से ज्यादा की भारी तेजी आई है. मई में विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 56.6 हो गया है और सर्विस पीएमआई भी 58.9 पर बेहद मजबूत स्थिति में है. इसके साथ ही अप्रैल में रिटेल महंगाई दर सिर्फ 3.48 प्रतिशत रही है जो रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के टारगेट से भी कम है.
बीजेपी के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में देश का ग्रॉस एफडीआई 94.5 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. देश के पास विदेशी मुद्रा का बड़ा रिजर्व है जो ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से इकोनॉमी की रक्षा करता है. अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार के समय रुपया 36 प्रतिशत तक गिर गया था. उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी कि वह देश में झूठा डर फैलाना बंद करें क्योंकि भारतीय इकोनॉमी आज हर मोर्चे पर बेहद सुरक्षित और मजबूत है.








