Sunday, June 28, 2026
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संभल के SP बन साइबर ठगी की कोशिश: गोरखपुर के व्यापारी को फेक फेसबुक एकाउंट से भेजी रिक्वेस्ट, 85 हजार मांगे – Gorakhpur News




गोरखपुर में संभल SP KK बिश्नोई बनकर साइबर जालसाजों ने ठगी करने की कोशिश की। उन्होंने शहर के एक व्यापारी को SP के फर्जी फेसबुक एकाउंट से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा। एक्सेप्ट करने पर मैसेज के जरिए खुद को KK विश्नोई बताते हुए अपने किसी रिश्तेदार का गोरखपुर से ट्रांसफर होने की बात कही। और उनके पुराने फर्नीचर को कम दामों में खरीदने के लिए कहा। इसके लिए व्यापारी से 85 हजार रुपए ऑनलाइन भेजने की मांग की। जिससे व्यापारी को शक हुआ और उन्होंने तत्काल SP को काल करके जानकारी ली। तब मामले का खुलासा हुआ। जानिए पूरा मामला…
जानकारी के अनुसार शनिवार को चैंबर आफ टेक्सटाइल्स के अध्यक्ष राजेश नेभानी के फेसबुक अकाउंट पर संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद मैसेंजर पर बातचीत शुरू हुई। सामने वाले ने खुद को एसपी बताते हुए कहा कि गोरखपुर में तैनात सेना के एक अधिकारी उनके दोस्त हैं, जिनका ट्रांसफर हो गया है और वह कम कीमत पर अपना फर्नीचर व घरेलू सामान बेचना चाहते हैं। उनकाे आपका नंबर दे रहा हूं बात कर लिजिए। रूपए मांगने पर शक हुआ कुछ देर बाद राजेश नेभानी के पास दूसरे नंबर से फोन आया। काल करने वाले ने अपना नाम संतोष कुमार और खुद को सेना का अधिकारी बताते हुए कहा कि सामान खरीदने के लिए उनके खाते में 85 हजार रुपये आनलाइन जमा कर दीजिए। व्यापारी ने एसपी संभल केके बिश्नोई से जानकारी ली व्यापारी के पास उसने सोफा व बेड की तस्वीर भेजी। उसने भरोसा दिलाया कि भुगतान के बाद फर्नीचर और अन्य सामान मिल जाएगा। संदेह होने पर व्यापारी ने एसपी संभल कृष्ण कुमार बिश्नोई से संपर्क कर जानकारी ली। एसपी ने बताया कि उनके नाम से बनाई गई फेसबुक आइडी फर्जी है और साइबर अपराधी उसी के जरिए लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं



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‘पुलिस ने खौलता पानी फेंका…’ भास्कर की खबर का असर: 8 दिन बाद हरकत में आई सरकार, पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, आर्थिक सहायता और डेयरी बूथ देने की भी घोषणा – Jaipur News



दैनिक भास्कर में “पुलिस ने खौलता पानी फेंका, युवती की छाती जली: पीड़िता बोलीं- शादी भी नहीं हुई, भविष्य की कल्पना करके रूह कांप जाती है” शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। घटना के आठ दिन बाद सरकार ने मामले मे

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सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 19 जून को जयपुर के रामनगरिया क्षेत्र में मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने से पहले यातायात व्यवस्था के दौरान हुई घटना में रेशु गुप्ता अपने ठेले पर रखे गर्म पानी से झुलस गई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल लाइन हाजिर किया है और निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है।

वहीं, नगर निगम जयपुर ग्रेटर के आयुक्त ओम कसेरा और उपायुक्त नीलम मीना पीड़िता के घर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेशु गुप्ता के उपचार का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा प्रभावित परिवार की आजीविका को दोबारा स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा स्थायी रोजगार के लिए डेयरी बूथ आवंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 19 जून को रामनगरिया थाना क्षेत्र में मोमोज का ठेला लगाने वाली रेशु गुप्ता के पुलिसकर्मियों से विवाद के दौरान गंभीर रूप से झुलसने का मामला सामने आया था। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी द्वारा ठेले को धक्का देने से खौलता पानी उस पर गिर गया। इस मामले में 22 जून को पीड़िता की बहन ने एफआईआर दर्ज कराई थी। भास्कर द्वारा पीड़िता की आपबीती प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और अब सरकार ने राहत और पुनर्वास संबंधी कदम उठाने की घोषणा की है।

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जयपुर-मोमोज बेचने वाली युवती पर पुलिसवाले ने खौलता पानी फेंका:बुरी तरह जली; सीएम काफिले के लिए रोड क्लियर करवा रहे थे, एक-दूसरे पर आरोप



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3 अलग-अलग फिल्में, ‘सेम’ था विलेन का नाम, एक सुपरहिट-दूसरी ब्लॉकबस्टर, तीसरी रही फ्लॉप


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फिल्म में हीरो को टक्कर देने वाला विलेन जितना खूंखार होता है, मूवी देखने का रोमांच उतना ही बढ़ जाता है.70-80 और 90 के दशक में कुछ फिल्में आई जिनमें आइकॉनिक विलेन थे. ‘शोले’ के ‘गब्बर सिंह’, ‘शान’ मूवी के ‘शाकाल’, ‘मिस्टर इंडिया’ के ‘मोगेंबो’ को भला कौन भूल सकता है. इन खलनायकों के किरदार और इन्हें निभाने वाले एक्टर अमर हो गए. 22 साल के अंतराल में सिनेमाघरों में तीन ऐसी फिल्में आईं जिनके विलेन के नाम करीब-करीब एक जैसे थे. एक मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई तो दूसरी मूवी सुपरहिट रही. एक फ्लॉप होकर भी दिल में बस गई. दो फिल्मों में विनोद खन्ना तो एक फिल्म में राज कुमार नजर आए थे.

यह सच है कि बॉलीवुड फिल्म हो या हॉलीवुड, मूवी में विलेन का होना जरूरी है. जब तक विलेन नहीं होगा, फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा. 70-80 और 90 के दशक में फिल्मों में डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सबसे ज्यादा मेहनत ‘विलेन’ के किरदार, उसके स्क्रीन पर नाम पर करते थे. 70 के दशक में तो कई हीरो ही विलेन का रोल करते थे. शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निगेटिव रोल्स से की. अमजद खान से लेकर अमरीश पुरी तक निगेटिव रोल निभाने वाले एक्टर ने ‘विलेन’ के रूप में खूब नाम कमाया. 22 साल के अंतराल में बॉलीवुड में 3 ऐसी फिल्में भी आईं जिनमें विलेन के नाम लगभग एक जैसे थे. ये फिल्में थीं : मेरा गांव मेरा देश, शोले और इंसानियत के देवता. इन तीनों फिल्मों के विलेन का नाम मिलता-जुलता था.

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सबसे पहले बात करते हैं 13 अगस्त 1971 में रिलीज हुई ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म की जिसका डायरेक्शन राज खोसला ने किया था.
राज खोसला ने स्टोरी डिपार्टमेंट बना रखा था जिसमें कई लेखक स्टोरी लिखते थे. फिल्म की कहानी खोसला एंटरप्राइजेज स्टोरी डिपार्टमेंट ने लिखी थी. राज खोसला के भाई लेखराज खोसला और बोलू खोसला फिल्म के प्रोड्यूसर थे. स्क्रीनप्ले जीआर कामत ने लिखा था. डायलॉग अख्तर रोमानी ने लिखे थे. धर्मेंद्र, आशा पारेख और विनोद खन्ना लीड रोल में थे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि विनोद खन्ना ही फिल्म के विलेन थे. उन्होंने ‘जब्बर सिंह’ डाकू का किरदार निभाया था. फिल्म के क्लाइमैक्स में उनकी फाइट धर्मेंद्र से होती है.

म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. गीतकार आनंद बक्शी थे. फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे. फिल्म के दो गाने ‘हाय शरमाऊं, किस-किस को बताऊं अपनी प्रेम कहानियां, ‘मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए’ तब से लेकर आज तक हिट हैं. दोनों गाने लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में थे. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में धर्मेंद्र ने कॉमेडी, रोमांस और एक्शन हर डिपॉर्टमें में शानदार एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया. फिल्म में गांव की पागल औरत का किरदार पूर्णिमा दास ने निभाया था. उनका असली नाम मेहरबानो था जो कि महेश भट्ट की सगी मौसी थीं. मुन्नी बाई का किरदार लक्ष्मी छाया ने निभाया था. राजस्थान के उदयपुर के एक गांव में फिल्म की शूटिंग हुई थी.

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‘मेरा गांव मेरा देश’ ही वो फिल्म है जिसने धर्मेंद्र को एक्शन हीरो के तौर पर बॉलीवुड में पहचान दी. एक्शन हीरो के तौर पर धर्मेंद्र छा गए थे. आगे चलकर ‘शोले’ और ‘प्रतिज्ञा’ जैसी कई एक्शन फिल्में धर्मेंद्र सुपरस्टार बनकर उभरे. वहीं विनोद खन्ना बहुत ही डोमिनेटिंग रहे. वो जब-जब पर्दे पर आए दर्शक सीटियां बजाने के लिए मजबूर हुए. यह फिल्म जब रिलीज हुई तब कोई नहीं जानता था कि यह मूवी हिंदी सिनेमा के इतिहास की आइकॉनिक फिल्म के लिए प्लॉट तैयार करेगी. जब भी शोले फिल्म का नाम लिया जाता है तो मेरा गांव मेरा देश की भी चर्चा होती है. दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों ही फिल्मों में धर्मेंद्र ने काम किया है. यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. फिल्म में विनोद खन्ना ‘जब्बर सिंह’ के रोल में छाए रहे.

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इस कड़ी में दूसरी फिल्म ‘शोले’ है जो हिंदी सिनेमा की सर्वेश्रेष्ठ फिल्मों में शामिल है. सच ही कहा जाता है कि ‘शोले’ जैसी आइकॉनिक फिल्में बस बन जाती हैं. ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म की कहानी को सलीम-जावेद ने नए अंदाज में लिखा. यह भी दिलचस्प है कि जहां ‘मेरा गांव मेरा देश’ 13 अगस्त 1971 में रिलीज हुई वहीं ‘शोले’ फिल्म 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में आई थी. धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार, अमजद खान लीड रल में थे. फिल्म का डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था. प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी थे. जय-वीरू यानी अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की जोड़ी इसी फिल्म में नजर आई थी. हेमा मालिनी ने बसंती का कालजयी किरदार निभाया था.

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यह भी दिलचस्प है कि ‘शोले’ फिल्म में जहां अमजद खान ने गब्बर सिंह डाकू बनकर अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया वहीं ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म में अमजद खान के पिता जयंत ने मेजर जसवंत सिंह का किरदार निभाया था. उनका वास्तविक नाम जकरिया खान था. एक फिल्म में जहां पिता ने किरदार निभाया, वहीं दूसरी फिल्म में बेटे ने शानदार एक्टिंग की. हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसा सुखद संयोग बहुत ही काम देखने को मिलता है. यह भी हैरान करने वाली बात है कि फिल्म में 66 मिनट बाद गब्‍बर सिंह की एंट्री होती है. इतनी देर बाद मिली एंट्री के बाद वो भी छा गए. ‘शोले’ ने अमजद खान को फिल्म इंडस्ट्री में स्‍थापित किया. उन्हें ‘गब्‍बर सिंह’ के तौर पर अमर पहचान दी. उन्होंने ऐसा किरदार गढ़ा, जो बॉलीवुड के विलेन की कसौटी बन गया. अमजद खान ने खास तरह की संवाद अदायगी के चलते इस कैरेक्टर को ‘लार्जर दैन लाइफ’ बना दिया.

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मेरा गांव मेरा देश औ शोले दोनों फिल्मों में कई समानताए हैं. फिल्म में हर किसी का काम असाधारण था. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में अजित बने धर्मेंद्र जहां सिक्का उछालकर कोई बड़ा फैसला लेते हैं, वहीं ‘शोले’ फिल्म में जय (अमिताभ बच्चन) सिक्का उछालते हैं. मजेदार बात यह भी है कि विनोद खन्ना का नाम फिल्म में जब्बर सिंह रहता है, वही शोले फिल्म में हमें ‘गब्बर सिंह’ नाम का डाकू अमजद खान के रूप में दिखाई देता है. मेरा गांव मेरा देश में अजित शराब पीता है. बाद में शराब छोड़ देता है. शोले में वीरू शराब पीता है. बसंती से प्यार का इजहार शराब पीकर ही गांववालों के सामने करता है. मेरा गांव मेरा देश में धर्मेंद्र, आशा पारेख को बंदूक चलाना सिखाते हैं. कुछ इसी तरह का सीन हमें शोले फिल्म में भी दिखाई देता है जहां धर्मेंद्र, बसंती यानी हेमा मालिनी को बंदूक चलाना सिखाते हैं. मेरा गांव मेरा देश में पौने घंटे बाद ‘जब्बर सिंह’ यानी विनोद खन्ना की एंट्री होती है. वहीं शोले में एक घंटे बाद पर्दे पर गब्बर सिंह यानी अमजद खान की एंट्री होती है.

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शोले फिल्म जब रिलीज हुई तो पूरे एक हफ्ते तक नहीं चली थी. प्रोड्यूसर समेत पूरी टीम को यकीन हो गया था कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. फिल्म का क्लाइमैक्स बदलने के लिए अमिताभ बच्चन के घर पर सलीम-जावेद और रमेश सिप्पी की बैठक भी हुई थी. फिर ऐसा चमत्कार हुआ कि फिल्म ने इतिहास रच दिया. यह ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म में शुमार है. हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा टिकट इस फिल्म के बिकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी शोले के नाम है. शोले ने उस समय 50 करोड़ का कलेक्शन किया था.

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इस लिस्ट में सबसे आखिरी नाम ‘इंसानियत के देवता’ फिल्म का है जो कि 12 फरवरी 1993 में रिलीज हुई थी. डायरेक्शन केसी बोकाड़िया ने किया था. फिल्म में रजनीकांत, विनोद खन्ना, राज कुमार, जया प्रदा, मनीषा कोइराला, वर्षा उसगांवकर और विवेक मुश्रान ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. म्यूजिक आनंद-मिलिंद का था. यह एक एक्शन फिल्म थी. राज कुमार साहब को इस फिल्म के लिए 25 लाख रुपये की फीस दी गई थी. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘कसम मेरे देश की’ था. फिल्म में विलेन रामी रेड्डी के किरदार का नाम ‘जब्बर सिंह’ था. यही नाम विनोद खन्ना का ‘मेरा गांव मेरा देश’ में था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.

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गर्दन में सरिया घुसने से छात्र की मौत: भागलपुर में हॉस्टल रहता था बच्चा, खेलते समय हुई घटना – Pirpainti(Bhagalpur) News




भागलपुर के पीरपैंती थाना क्षेत्र स्थित एक निजी विद्यालय के हॉस्टल में शनिवार को खेल के दौरान हुए हादसे में 9 वर्षीय छात्र आर्यन कुमार की मौत हो गई। आर्यन बाखरपुर पश्चिमी पंचायत निवासी दशरथ मंडल का पुत्र था। घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। 5 साल से हॉस्टल में रहता था जानकारी के अनुसार, आर्यन पिछले पांच वर्षों से इसी निजी विद्यालय के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। शनिवार को विद्यालय प्रबंधन ने आर्यन के परिजनों को फोन पर उसकी मौत की सूचना दी। परिजन तत्काल विद्यालय पहुंचे, जहां उन्हें बच्चे की गर्दन में लोहे की छड़ (सरिया) घुसने के निशान मिले। खेलते समय गरदन में सरिया घुसने से गई जान प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आर्यन अन्य बच्चों के साथ विद्यालय परिसर स्थित दुर्गा मंदिर के पीछे खेल रहा था। इसी दौरान खेल-खेल में लोहे की छड़ से हादसा हो गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही बाखरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी जुटाई। थाना प्रभारी नागेन्द्र कुमार ने बताया कि मृतक के पिता दशरथ मंडल ने थाना में दिए लिखित आवेदन में कहा है कि उनके पुत्र की मृत्यु खेल के दौरान हुए हादसे में हुई है।



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सतना में तेज रफ्तार बोलेरो बाड़ी तोड़कर घर में घुसी: बुजुर्ग महिला की मौत, मैहर अस्पताल में तोड़ा दम; मासूम समेत तीन घायल, आरोपी फरार – Maihar News




सतना के देउरी गांव में शनिवार रात करीब 7:30 बजे एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बोलेरो सड़क किनारे बने एक मकान की बाड़ी को ढहाते हुए सीधे घर में घुस गई। इस हादसे के वक्त घर में मौजूद एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक बुजुर्ग महिला ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया। पानी भरने के बाद घर के आंगन में बैठा था परिवार पीड़ित परिवार के सदस्य रविशंकर कोरी ने बताया कि शनिवार शाम को घर के सभी लोग पानी भरने के बाद मकान के अंदर बनी बाड़ी (आंगन) में एक साथ बैठे हुए थे। इसी दौरान मुख्य मार्ग से आ रही एक तेज रफ्तार बोलेरो अचानक अनियंत्रित हो गई। रफ्तार इतनी तेज थी कि वाहन सीधे बाड़ी की दीवार और फेंसिंग को तोड़ता हुआ घर के भीतर घुस गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने तुरंत मलबे और वाहन के नीचे दबे घायलों को बाहर निकाला। हादसे के बाद आरोपी बोलेरो चालक मौके पर ही गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। अमरपाटन से सतना रेफर किया, रास्ते में तोड़ा दम हादसे का शिकार हुए सभी लोगों को तुरंत एम्बुलेंस की मदद से मैहर जिले के अमरपाटन सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की पहचान प्रेमवती कोरी (61 वर्ष), सीमा कोल (42), माया साकेत (45) और 4 वर्षीय मासूम उदय मान के रूप में हुई है। अमरपाटन अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद प्रेमवती कोरी और सीमा कोल की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन सतना ले जाते समय रास्ते में ही 61 वर्षीय प्रेमवती कोरी की मौत हो गई। पुलिस ने वाहन जब्त कर शुरू की तलाश घटना की सूचना मिलते ही रामपुर बघेलान थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बोलेरो वाहन को कब्जे में ले लिया है और फरार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। बाकी तीन घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।



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ओटीटी पर रश्मिका मंदाना का जलवा! हिंदी में देखें ‘नेशनल क्रश’ की ये 5 बेहतरीन फिल्में


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Rashmika Mandanna South Movies Dubbed in Hindi on OTT: रश्मिका मंदाना गुजरते वक्त के साथ पॉपुलर होती जा रही हैं, जिसकी वजह उनकी शानदार शख्सियत और फिल्में हैं. वे साउथ सिनेमा के अलावा हिंदी भाषी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं, जिसकी वजह उनकी कुछ बेहतरीन फिल्में हैं जिन्हें आप हिंदी में ओटीटी पर देख सकते हैं. इनमें दुलकर सलमान के साथ उनकी रोमांटिक ड्रामा ‘सीता रामम’ है. अल्लू अर्जुन के साथ उनकी ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ है. आइए, ओटीटी पर मौजूद उनकी 5 बेहतरीन फिल्मों के बारे में जानते हैं.

नई दिल्ली: नेशनल क्रश रश्मिका मंदाना ने अपनी कमाल की एक्टिंग और दिलकश अदाओं से आज खुद को स्टार बना लिया है. बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक, उनकी हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाती है. अगर आप भी रश्मिका के बड़े फैन हैं और उनकी सबसे बेहतरीन साउथ इंडियन फिल्मों का मजा हिंदी में लेना चाहते हैं, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. उनके फैंस के लिए उनकी पांच सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी डब में मौजूद हैं.

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फिल्म ‘सीता रामम’ रश्मिका के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है. यह एक खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली रोमांटिक ड्रामा है. फिल्म में दुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर लीड रोल में हैं, जबकि रश्मिका ने एक बहुत ही अहम और इमोशनल किरदार निभाया है जो पूरी कहानी को मोड़ देता है. अगर आप इस शानदार लव स्टोरी को हिंदी में देखना चाहते हैं, तो यह अमेजन प्राइम वीडियो पर देखने के लिए मौजूद है.

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फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ ने रश्मिका मंदाना को रातों-रात पूरे देश में एक नई पहचान दे दी. अल्लू अर्जुन स्टारर इस जबरदस्त पैन-इंडियन एक्शन ब्लॉकबस्टर फिल्म में रश्मिका ने ‘श्रीवल्ली’ का किरदार निभाया था, जो दर्शकों को बेहद पसंद आया. फिल्म का गाना ‘सामी सामी’ तो आज भी हर शादी-पार्टी की जान है. लाल चंदन की तस्करी पर बनी इस दमदार फिल्म का हिंदी डब वर्जन आप प्राइम वीडियो या अमेजन मिनीटीवी पर देख सकते हैं.

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रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘गीता गोविंदम’ में रश्मिका ने एक गुस्से वाली, लेकिन दिल की साफ लड़की ‘गीता’ का रोल प्ले किया है, जिसके अपोजिट विजय देवरकोंडा नजर आए थे. फिल्म में विजय और रश्मिका की नोक-झोंक और कमाल की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया था. यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. यह जी5 ऐप पर मौजूद है.

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थलापति विजय स्टारर ‘वारिसु’ फैमिली एंटरटेनर फिल्म है. इस एक्शन-ड्रामा में पारिवारिक ड्रामा, इमोशन्स और थलापति विजय का सिग्नेचर एक्शन स्टाइल देखने को मिलता है, जिसमें रश्मिका ने अपनी अदाओं का तड़का लगाया है. रश्मिका और विजय की जोड़ी को बड़े पर्दे पर काफी पसंद किया गया था. अच्छी बात यह है कि इस धमाकेदार और इमोशनल फिल्म का हिंदी डब वर्जन आप अमेजन एमएक्स प्लेयर पर देख सकते हैं.

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फिल्म है ‘चलो’ एक बहुत ही दिलचस्प और मजेदार कैंपस लव स्टोरी है. रश्मिका के फैंस के लिए यह फिल्म बेहद खास है क्योंकि इसी फिल्म से उन्होंने तेलुगु सिनेमा में अपना शानदार डेब्यू किया था.

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फिल्म ‘चलो’ की कहानी एक ऐसे अनोखे गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जो तमिल और तेलुगु लोगों की आपसी दुश्मनी की वजह से दो हिस्सों में बंटा हुआ है. रोमांस, कॉमेडी और सस्पेंस से भरपूर सुपरहिट फिल्म का मजा भी आप अमेजन एमएक्स प्लेयर पर जाकर ले सकते हैं.

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दिल्ली के कोचिंग सेंटरों को एक महीने का अल्टीमेटम: सीएम रेखा गुप्ता बोलीं- सुरक्षा उपकरण न होने पर किए जाएंगे सील – New Delhi News




नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पढ़ रहे लाखों छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक वीडियो संदेश जारी कर दिल्ली के सभी कोचिंग संस्थानों को सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के लिए एक महीने का कड़ा समय दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि दिल्ली में चल रहे कोचिंग सेंटरों की संख्या चाहे 900 हो या 1000, सरकार को इस नंबर से मतलब नहीं है, बल्कि सबसे ज्यादा सरोकार बच्चों की जान और उनकी सुरक्षा से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कोचिंग संस्थानों के पास फ़ायर ऑडिट नहीं है, आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं हैं या जिनकी बिल्डिंग में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, उन्हें नियमों का पालन न करने की स्थिति में तुरंत सील कर दिया जाएगा। हाईकोर्ट की सिफारिश पर लाया जाएगा सख्त कानून मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली हाईकोर्ट की समिति की सिफारिशों के आधार पर कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून लाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरी मुहिम में विद्यार्थियों से भी सहयोग की अपील की है। मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा है कि यदि उन्हें लगता है कि उनका कोचिंग संस्थान किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं है, तो वे इसकी सूचना संदेश, ईमेल या फोन कॉल के माध्यम से सीधे सरकार तक पहुँचाएँ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों से मिली जानकारी पर प्रशासन द्वारा सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा ताकि दिल्ली में पढ़ रहे लाखों बच्चों की जिंदगियों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।



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आयरन-कैल्शियम से भरपूर, जानें टेस्टी और हेल्दी रागी इडली की रेसिपी


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Ragi Idli Recipe: आमतौर पर इडली बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यदि टेस्ट के साथ हेल्दी इडली आप खाना चाहते हैं, तो राइस की जगह रागी यूज करें. यहां आप रागी इडली बनाने की विधि और फायदों के बारे में जान सकते हैं.

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हेल्दी खाना खाना आसान नहीं रह गया है. ऐसे में रागी एक ऐसा सुपरफूड है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखता है. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ऐसे में ये वजन कम करने में मदद करता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है. अगर आप पौष्टिक और हल्का नाश्ता चाहते हैं, तो रागी इडली और गर्मागर्म सांभर बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो सकता है.

रागी प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होती है, इसलिए यह पाचन के लिए अच्छी मानी जाती है. इसमें दूध से भी अधिक कैल्शियम पाया जाता है, जो बच्चों और बुजुर्गों की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके अलावा रागी में मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ब्लड शुगर भी तेजी से नहीं बढ़ता. यही वजह है कि रागी इडली हेल्दी नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है.

रागी इडली बनाने की आसान विधि

सामाग्री
– 1 कप रागी का आटा
– 1 कप इडली चावल
– आधा कप उड़द दाल
– आधा चम्मच मेथी दाना
– स्वादानुसार नमक लें.

विधि

  • सबसे पहले उड़द दाल और मेथी दाने को एक बर्तन में तथा चावल को अलग बर्तन में 4 से 5 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद दाल को मुलायम पीस लें और चावल को थोड़ा दरदरा पीसें. अब दोनों मिश्रण में रागी का आटा और नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें.
  • इस बैटर को ढककर 8 से 10 घंटे या पूरी रात गर्म जगह पर रखें ताकि यह अच्छी तरह फूल जाए. इसके बाद इडली स्टैंड में हल्का तेल लगाकर बैटर भरें और 10 से 12 मिनट तक भाप में पकाएं. नरम और स्वादिष्ट रागी इडली तैयार है.

सांभर की रेसिपी
सामाग्री
सांभर के लिए आधा कप अरहर दाल, सहजन, कद्दू, गाजर, बैंगन और प्याज जैसी सब्जियां लें. साथ ही इमली का गूदा, सांभर मसाला, राई, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च और हींग की जरूरत होगी.

विधि
सबसे पहले दाल को हल्दी और नमक के साथ प्रेशर कुकर में अच्छी तरह पका लें. दूसरी तरफ सब्जियों को थोड़ा पानी और नमक डालकर नरम होने तक पकाएं. अब इसमें पकी हुई दाल, इमली का गूदा और सांभर मसाला डालकर 5 से 7 मिनट तक उबालें. आखिर में राई, हींग, करी पत्ता और लाल मिर्च का तड़का लगाकर सांभर तैयार करें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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स्क्रिप्ट सुनते ही अनु मलिक ने तुरंत बना दी धुन, महेश भट्ट संग रहा खास रिश्ता


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फिल्ममेकर महेश भट्ट और संगीतकार अनु मलिक स्टेज प्ले ‘वो सुबह हम ही से आएगी’ के लिए एक बार फिर साथ आए हैं. तारीकी हमीद के निर्देशन में बने नाटक का प्रीमियर 5 जुलाई को मुंबई में होगा. यह नाटक खामोशी, प्रेम, डर और अपने सच का सामना करने के नैतिक साहस जैसे विषयों पर बनी है. महेश भट्ट ने अनु मलिक के साथ अपने गहरे जुड़ाव को किस्मत का हिस्सा बताया. अनु मलिक ने महेश भट्ट को अपने लिए पिता समान मानते हुए कहा कि उनका नाम सुनते ही धुनें अपने आप बनने लगती हैं.

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अनु मलिक और महेश भट्ट का रिश्ता पुराना है. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दो दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट और मशहूर संगीतकार अनु मलिक एक बार फिर धमाका करने के लिए साथ आ गए हैं. वे इस बार किसी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि एक नए स्टेज प्ले ‘वो सुबह हम ही से आएगी’ के लिए साथ आए हैं. महेश भट्ट की प्रस्तुति वाले इस नाटक का प्रीमियर 5 जुलाई को मुंबई में होने जा रहा है, जिसका निर्देशन तारीकी हमीद ने किया है और कहानी दिनेश गौतम ने लिखी है. नाटक का खूबसूरत और दिल को छू लेने वाला संगीत खुद अनु मलिक ने तैयार किया है. नाटक की कहानी खामोशी, दबी हुई भावनाओं, प्यार और डर जैसे गहरे एहसासों के इर्द-गिर्द घूमती है. यह दिखाता है कि कैसे इंसान को अपने सच का सामना करने के लिए बहुत बड़े नैतिक साहस की जरूरत होती है.

अनु मलिक के साथ दोबारा काम करने पर महेश भट्ट काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि उनके और अनु के बीच सिर्फ काम का रिश्ता नहीं है, बल्कि एक गहरा इमोशनल जुड़ाव है. दोनों ने जिंदगी के कई उतार-चढ़ाव साथ देखे हैं. भट्ट साहब का मानना है कि इस नाटक में जो उम्मीद, संघर्ष और नई शुरुआत की भावना है, उसे अनु का संगीत बहुत ही सहज तरीके से लोगों के दिलों तक पहुंचाता है. उन्होंने बताया कि जैसे ही अनु इस कहानी से जुड़े, उन्हें वही पुरानी वाली जादुई एनर्जी महसूस होने लगी. महेश भट्ट की मानें, तो कुछ रिश्ते पहले से तय नहीं किए जाते, बल्कि वे किस्मत का हिस्सा होते हैं और अनु मलिक के साथ उनका जुड़ाव भी कुछ ऐसा ही है.

अनु मलिक ने महेश भट्ट को बताया पिता समान
अनु मलिक ने भी भट्ट साहब के प्रति अपना सम्मान और प्यार जताने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने दिल से माना कि महेश भट्ट उनके लिए एक पिता की तरह हैं, जिन्होंने न सिर्फ उनके संगीत पर बल्कि एक इंसान के तौर पर भी हमेशा उन पर पूरा भरोसा किया. अनु मलिक ने एक बेहद खूबसूरत बात कही कि भट्ट साहब का नाम सुनते ही उनके दिमाग में अपने आप नई धुनें बनने लगती हैं. यह उनका नहीं बल्कि भट्ट साहब का जादू है. उन्होंने ‘फिर तेरी कहानी याद आई’ से लेकर अपने अब तक के सफर को याद किया. अनु ने लाइव स्टेज के लिए संगीत बनाने का अपना अनुभव बयां किया. वे बोले कि जब इमरान जाहिद ने उन्हें इसकी स्क्रिप्ट और गाने के बोल सुनाए, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए तुरंत ही उसकी धुन तैयार कर दी थी.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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मैदा नहीं, गेहूं के आटे और ताजी मेथी से बनाएं परतदार खस्ता मठरी, जानिए ट्रिक


Wheat Flour Methi Mathri Recipe: हर घर में चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का मन जरूर करता है. बाजार से मिलने वाली मठरी स्वादिष्ट तो होती है, लेकिन उसमें मैदा और ज्यादा तेल होने की वजह से कई लोग उसे खाने से बचते हैं. अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अब घर पर गेहूं के आटे और ताजी हरी मेथी से बिल्कुल खस्ता और परतदार मठरी बना सकते हैं. यूट्यूबर वर्षा भावसार ने एक ऐसी आसान रेसिपी शेयर की है, जिसमें मैदे का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता. इसके बावजूद मठरी इतनी कुरकुरी बनती है कि हर कोई उसकी तारीफ करेगा.

इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत साटा तकनीक है, जिसकी वजह से मठरी के अंदर कई परतें बनती हैं और वह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है. अगर आप सफर, बच्चों के टिफिन या शाम की चाय के लिए कोई हेल्दी स्नैक बनाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर आजमाएं.

क्यों खास है गेहूं और मेथी की यह मठरी
इस मठरी में मैदे की जगह गेहूं का आटा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह ज्यादा पौष्टिक बनती है. ताजी हरी मेथी इसमें खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ाती है. साथ ही सूजी मठरी को अतिरिक्त कुरकुरापन देती है. यही वजह है कि यह स्नैक स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल माना जा सकता है.

सबसे पहले तैयार करें मेथी
सबसे पहले ताजी हरी मेथी की पत्तियां चुनकर अच्छी तरह धो लें और बारीक काट लें. अब एक पैन में थोड़ा सा घी डालें और धीमी आंच पर मेथी को तीन से चार मिनट तक भून लें. इससे मेथी का कड़वापन कम हो जाता है और उसमें मौजूद अतिरिक्त नमी भी खत्म हो जाती है. यही वजह है कि मठरी लंबे समय तक खराब नहीं होती.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

आटा और मसालों का सही मिश्रण
एक बड़े बर्तन में डेढ़ कप गेहूं का आटा और आधा कप सूजी डालें. अब इसमें नमक, दरदरी काली मिर्च, अजवाइन, सफेद तिल और एक छोटा चम्मच पिसी हुई चीनी मिलाएं. यहां चीनी मिठास के लिए नहीं, बल्कि स्वाद को संतुलित करने और मठरी को सुंदर रंग देने के लिए डाली जाती है. इसके बाद भुनी हुई मेथी, हल्दी, लाल मिर्च और एक चुटकी हींग डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें.

मोयन से आएगी असली खस्ता बनावट
मठरी को कुरकुरी बनाने के लिए दो बड़े चम्मच देसी घी का मोयन डालें. घी को आटे में अच्छी तरह रगड़ें. जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तब समझिए कि मोयन सही मिला है. अब बहुत कम पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें और उसे पंद्रह मिनट के लिए ढककर रख दें.

साटा तकनीक बनाएगी परतदार मठरी
एक छोटी कटोरी में घी और थोड़ा गेहूं का आटा या कॉर्न फ्लोर मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार करें. इसे साटा कहा जाता है. अब आटे की बड़ी लोई बेलें और उस पर साटा की पतली परत लगाकर थोड़ा सूखा आटा छिड़क दें. इसके बाद रोटी को दोनों तरफ से मोड़ें, फिर दोबारा साटा लगाकर एक बार फिर मोड़ लें. यही प्रक्रिया मठरी के अंदर कई परतें तैयार करती है.

फोल्डिंग के बाद करें कटिंग
अब तैयार आटे को हल्का बेल लें और चाकू की मदद से अपनी पसंद के आकार में काट लें. चाहें तो चौकोर, लंबी पट्टियां या गोल आकार भी दे सकते हैं. सभी टुकड़ों को हल्का दबा दें ताकि तलते समय उनकी परतें अच्छी तरह खुल सकें.

धीमी आंच पर तलना है सबसे जरूरी
एक कड़ाही में तेल गर्म करें, लेकिन मठरी हमेशा धीमी आंच पर ही तलें. तेज आंच पर तलने से ऊपर की परत जल्दी पक जाती है और अंदर तक कुरकुरापन नहीं आता. धीरे-धीरे तलने से मठरी की हर परत अच्छी तरह पकती है और बाजार जैसी खस्ता बनावट मिलती है.

लंबे समय तक रहेगी कुरकुरी
मठरी पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही एयरटाइट डिब्बे में रखें. इस तरह रखने से यह कई दिनों तक कुरकुरी बनी रहती है. इसे चाय, अचार, हरी चटनी या सॉस के साथ परोसा जा सकता है. सफर और बच्चों के टिफिन के लिए भी यह बेहतरीन स्नैक है.

इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत
अगर आप मैदे से बचना चाहते हैं और घर पर हेल्दी स्नैक बनाना चाहते हैं, तो यह मेथी मठरी एक शानदार विकल्प है. गेहूं का आटा, मेथी और साटा तकनीक का मेल इसे स्वादिष्ट, परतदार और लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखता है. एक बार यह रेसिपी बनाने के बाद आप बाजार की मठरी खरीदना भूल सकते हैं.



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