Monday, July 6, 2026
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मेरठ में गली में दरवाजा खोलने पर विवाद: विरोध करने पर मारपीट, युवक घायल; पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप – Meerut News




मेरठ के देहली गेट थाना क्षेत्र के पूर्वा ताहिर हुसैन में रविवार देर शाम गली में दरवाजा खोलने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। इस दौरान हुई मारपीट में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर कार्रवाई न करने और मिलीभगत का आरोप लगाया है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल है। पूर्वा ताहिर हुसैन निवासी वसीम पुत्र हाजी नफीस के अनुसार, उनकी गली में करीब 10 से 12 परिवार रहते हैं और यह गली वर्षों से केवल स्थानीय लोगों के आने-जाने के लिए इस्तेमाल होती रही है। वसीम का आरोप है कि तीन साल पहले पड़ोसी निजामुद्दीन ने एक मकान और दुकान खरीदी थी। रविवार को उसने पीछे की गली में जबरन एक नया दरवाजा खोल दिया। जब मोहल्ले के लोगों ने इस दरवाजे का विरोध किया, तो निजामुद्दीन अपने परिजनों और अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंच गया। आरोप है कि उसने विरोध करने वालों के साथ मारपीट शुरू कर दी, जिसमें वसीम के भाई के सिर पर गंभीर चोट आई। सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पीड़ित पक्ष ने देहली गेट थाने में निजामुद्दीन, उसके परिजनों और अन्य लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। हालांकि, देर शाम तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है। मोहल्ले के लोगों ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है और चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया तो वे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि उन्हें दोनों पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिली है। मामले की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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हेमा मालिनी डेब्यू से पहले ही बनी ‘ड्रीम गर्ल’, प्रोड्यूसर का ‘मास्टरप्लान’ कर गया काम


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लोग मानते हैं कि हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल नाम उनकी 1977 की फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ से मिला है, लेकिन इस नाम के पीछे किस्सा दूसरा है. असल में हेमा मालिनी को यह नाम पहली फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ की रिलीज से पहले ही मिल गई थी. फिल्म के प्रोड्यूसर बी. आनंदस्वामी ने मार्केटिंग का अनूठा तरीका निकाला था. उन्होंने पोस्टर्स पर उनका नाम लिखने के बजाय ‘ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन’ लिखवाया था. यह आइडिया बेहद सफल रहा. हेमा मालिनी ने फिर आगे चलकर 1977 में ‘ड्रीम गर्ल’ फिल्म में पांच अलग-अलग किरदार भी निभाए.

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हेमा मालिनी ने ‘सपनों का सौदागर’ से डेब्यू किया था.

नई दिल्ली: बॉलीवुड की एवरग्रीन एक्ट्रेस हेमा मालिनी को आज भी हर कोई ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से जानता है. ज्यादातर फैंस को यही लगता है कि साल 1977 में आई उनकी सुपरहिट फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ की वजह से उन्हें यह नाम मिला होगा. लेकिन सच तो यह है कि यह नाम उन्हें बॉलीवुड में कदम रखने से पहले ही मिल गया था. खुद हेमा मालिनी ने सालों बाद इस बात का खुलासा किया. उन्होंने किस्सा सुनाया कि कैसे फिल्म प्रोड्यूसर के अनोखे आइडिया ने उनकी पहचान हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी.

हेमा मालिनी ने ‘द कपिल शर्मा शो’ में इस राज से पर्दा उठाया. जब वे साल 1968 में पहली हिंदी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही थीं, तब फिल्म के प्रोड्यूसर बी. आनंदस्वामी ने प्रमोशन का एक नया तरीका निकाला. उन्होंने फिल्म के पोस्टर्स में हेमा मालिनी का नाम छापने के बजाय हर जगह बड़े-बड़े अक्षरों में लिखना शुरू कर दिया- ‘ड्रीम गर्ल कमिंग टू टाउन’. यह देखकर हेमा खुद हैरान थीं कि पोस्टर्स से उनका असली नाम गायब क्यों है. जब उन्होंने प्रोड्यूसर से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि यही तुम्हारी नई पहचान बनेगी. पहले लोग इस नाम के दीवाने होंगे और बाद में सस्पेंस खोलकर सबको बताया जाएगा कि यह खूबसूरत ‘ड्रीम गर्ल’ आखिर है कौन! प्रोड्यूसर का यह मास्टर प्लान सुपरहिट रहा. फिल्म रिलीज होने से पहले ही हेमा मालिनी हर किसी की ‘ड्रीम गर्ल’ बन चुकी थीं.

हेमा मालिनी की फिल्म ‘ड्रीम गर्ल’ ब्लॉकबस्टर रही थी.

‘ड्रीम गर्ल’ में निभाए थे 4 किरदार
महेश कौल के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ में हेमा मालिनी के साथ शोमैन राज कपूर लीड रोल में थे. इसके गाने शंकर-जयकिशन ने कंपोज किए थे. इस फिल्म से शुरुआत करने के बाद हेमा मालिनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. दिलचस्प बात यह रही कि इसके करीब नौ साल बाद 1977 में उन्होंने सचमुच ‘ड्रीम गर्ल’ नाम की एक फिल्म में काम किया. इसे प्रमोद चक्रवर्ती ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में धर्मेंद्र और अशोक कुमार जैसे बड़े स्टार्स थे. हेमा मालिनी ने एक अनाथालय चलाने के लिए सपना, पद्मा, चंपाबाई और राजकुमारी जैसे पांच अलग-अलग रूप बदले थे. इस रोल को दर्शकों ने खूब प्यार दिया. जो नाम एक प्रमोशन स्टंट की तरह शुरू हुआ था, उसने उन्हें हमेशा के लिए बॉलीवुड की इकलौती ‘ड्रीम गर्ल’ बना दिया.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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खैरथल-तिजारा में चिटफंड धोखाधड़ी मामला, ईडी ने मांगे सबूत: सभी पीड़ितों को समन जारी, एफआईआर और बैंक डिटेल्स जमा करानी होगी – Khairthal-Tijara News




खैरथल-तिजारा के गांव मातौर में नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड चिटफंड धोखाधड़ी मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो गई है। भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय, ईडी जयपुर ने मामले की जांच के तहत परिवादी सत्यवीर चौधरी, राजकुमार, धर्मेंद्र चौधरी सहित कई पीड़ित जमाकर्ताओं को समन जारी किए हैं। सभी को महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ताओं से मांगे सबूत
शिकायतकर्ताओं के वकील प्रताप सैन ने बताया- ईडी ने समन में पीड़ितों से पैन कार्ड और आधार कार्ड सहित पहचान एवं पते के प्रमाण, नवअंश ग्रुप एवं उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज शिकायत या एफआईआर की प्रति, स्वयं एवं परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित सभी बैंक खातों का विवरण तथा नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड और सिंदुरिया माइक्रोफाइनेंस फाउंडेशन के निदेशकों एवं एजेंटों के माध्यम से खुलवाए गए एफडी, बचत खाते, ऋण खाते सहित अन्य बैंक खातों की जानकारी मांगी है। करोड़ों के गबन का लगा आरोप
दरअसल, मामला 29 सितंबर 2025 का है। खैरथल थाने में दर्ज इस मामले में नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के संचालकों पर आम जनता से करोड़ों रुपए जमा कराकर गबन करने और फरार होने का आरोप है। पुलिस जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए थे। इसके बाद पीड़ितों ने खैरथल थाने में मामला दर्ज कराया और लगातार सरकार, प्रशासन तथा जांच एजेंसियों से कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत की जमा पूंजी फंस गई है, जिससे अनेक परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। 10 लोगों को आरोपी बनाया, एक की हुई मौत
मामले में पुलिस की जांच के दौरान 10 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें एजेंट दिनेश कुमार की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। इनमें उमराव, दाताराम, सतपाल और पुरण फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जयपाल, नरेश, जिलेसिंह, वेंकटेश्वर प्रसाद और प्रेम कुमार जमानत पर रिहा हो चुके हैं। पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रताप सैन न्यायालय में पैरवी कर रहे हैं। सक्षम प्राधिकारी की कार्यशैली पर उठे सवाल
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, जयपुर एवं रजिस्ट्रार कंपनियां, जयपुर द्वारा सब रजिस्ट्रार सहकारी समिति, खैरथल को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए जाने के बावजूद दावों के निस्तारण की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। कई लोगों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए और सुनवाई भी समय पर नहीं हुई। उनका कहना है कि बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले हैं। ये भी पढ़ें- मामा-भांजे ने फाइनेंस कंपनी बनाई, करोड़ों रुपए लेकर फरार:गुस्साए पीड़ितों ने घर में तोड़फोड़ की, बाइक फूंकी; बोले-मेहनत कर एक-एक पैसा जोड़ा था साल 2010… खैरथल-तिजारा का मातौर गांव मामा-भांजे ने नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के नाम से फाइनेंस कंपनी बनाई। खुद का ऑफिस खोला और लोगों को रकम पर साल का 24% तक ब्याज देने का झांसा दिया। बॉन्ड, पासबुक और रसीदें भी छपवाईं। पहले कुछ साल ब्याज के साथ रुपए लौटाकर विश्वास जीता। इसके बाद लोग झांसे में आकर मेहनत से कमाई हुई मोटी रकम FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) और RD (रिकरिंग डिपॉजिट) में जमा कराने लगे। 15 साल में निवेश के नाम पर जमा किए गए करोड़ों रुपए लेकर मामा-भांजा फरार हो गए। (पढ़ें पूरी खबर)



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सड़क नहीं होने पर खाट से 2 किमी लाए: रीवा में अस्पताल पहुंचने से पहले महिला की मौत; ग्रामीण बोले- स्वीकृत के बाद भी नहीं बनी रोड – Rewa News




रीवा के मनगवां विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) में सड़क नहीं होने के कारण एक आदिवासी महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। आकाशीय बिजली गिरने के बाद परिजनों ने उन्हें करीब दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना रविवार शाम की है। इसका वीडियो भी सामने आया है। मृतका की पहचान रामकली रावत, पत्नी स्वर्गीय राम स्वयंवर रावत, निवासी ग्राम पंचायत नदना (डिहिया) के रूप में हुई है। सामने आए वीडियो में ग्रामीण महिला को खाट पर उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाते दिखाई दे रहे हैं। सड़क नहीं होने पर उठे सवाल घटना के बाद गांव की सड़क व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि ग्राम पंचायत में सड़क निर्माण के लिए विधायक निधि से 5 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अब तक सड़क नहीं बन सकी। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। ग्रामीणों ने जांच की मांग की ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। अब महिला की मौत के बाद ग्रामीण पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, इस मामले में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है।



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पूर्णिया में सड़क दुर्घटना, एक व्यक्ति की मौत: श्रीनगर को-ऑपरेटिव बाजार के पास हुआ हादसा – Purnia News




पूर्णिया जिले के केनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत श्रीनगर को-ऑपरेटिव बाजार के पास एक सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की पहचान सत्यनारायण यादव (45) के रूप में हुई है। उन्हें इलाज के लिए पूर्णिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सत्यनारायण यादव कोऑपरेटिव बाजार के निवासी थे। मृतक सत्यनारायण यादव के बेटे ने बताया कि उनके पिता की मौत श्रीनगर चौक पर हुए सड़क हादसे में हुई है। दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें पूर्णिया के जीएमसीएच अस्पताल लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक का इलाज कर रहे डॉक्टर गौरव कुमार ने जानकारी दी कि मरीज को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। प्राथमिक जांच में उन्हें मृत पाया गया। मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।



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साबूदाना भिगोने का सही तरीका, खिले-खिले रहेंगे दाने, खिचड़ी बनेगी बिल्कुल परफेक्ट


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Tricks To Make Non Sticky Sabudana: यदि आप हर बार स्वादिष्ट, दानेदार और बिल्कुल नॉन-स्टिकी साबूदाना खिचड़ी बनाना चाहते हैं लेकिन बार-बार दाने चिपचिपे हो जाते हैं? तो यहां इस लेख में जानें खिला-खिला साबूदाना खिचड़ी बनाने का सबसे आसान तरीका.

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साबूदाना खिचड़ी व्रत के दौरान सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डिश में से एक है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी मदद करती है. हालांकि, कई लोगों की शिकायत होती है कि खिचड़ी बनाते समय साबूदाना चिपक जाता है या फिर बहुत ज्यादा गीला हो जाता है. ऐसे में खिचड़ी का स्वाद और टेक्सचर दोनों खराब हो जाते हैं. अगर आप भी हर बार खिला-खिला और दानेदार साबूदाना खिचड़ी बनाना चाहते हैं, तो कुछ आसान कुकिंग टिप्स आपके बहुत काम आ सकते हैं.

सही साबूदाना चुनना है जरूरी
अच्छी खिचड़ी बनाने के लिए सही साबूदाना चुनना सबसे जरूरी कदम है. बाजार में कई तरह के साबूदाने मिलते हैं, लेकिन मध्यम आकार वाला गोल साबूदाना खिचड़ी के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. यह आसानी से पकता है और चिपचिपा भी नहीं होता.

भिगोने का सही तरीका अपनाएं
साबूदाना बनाने से पहले उसे 2-3 बार साफ पानी से धो लें ताकि एक्स्ट्रा स्टार्च निकल जाए. इसके बाद 1 कप साबूदाना में लगभग 3/4 कप पानी डालकर भिगो दें. ध्यान रखें कि ज्यादा पानी डालने से साबूदाना गीला और चिपचिपा हो सकता है. इसे लगभग 2 से ढाई घंटे के लिए ढककर छोड़ दें.

ऐसे पहचानें कि साबूदाना तैयार है
जब साबूदाना अच्छी तरह भीग जाए, तो उसके दाने आपस में चिपके नहीं होने चाहिए. दाने को हाथ से दबाने पर वह आसानी से टूट जाए और उसमें हल्की नमी महसूस हो, लेकिन वह ज्यादा गीला न लगे. यह संकेत है कि साबूदाना खिचड़ी बनाने के लिए तैयार है.

खिचड़ी बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान
सबसे पहले कढ़ाई में थोड़ा घी गर्म करें. फिर जीरा, अदरक और हरी मिर्च डालकर भून लें. इसके बाद उबले हुए आलू और भुनी हुई मूंगफली डालें. अब भीगा हुआ साबूदाना, सेंधा नमक और काली मिर्च मिलाएं. हमेशा धीमी आंच पर पकाएं और लगातार हल्के हाथों से चलाते रहें.

मूंगफली पाउडर है सीक्रेट ट्रिक
खिला-खिला साबूदाना खिचड़ी बनाने का सबसे आसान तरीका है मूंगफली पाउडर का इस्तेमाल. ये इंग्रीडिएंट नमी को सोख लेता है और साबूदाने के दानों को अलग-अलग रखने में मदद करता है. इसी वजह से खिचड़ी चिपकती नहीं है. अंत में जब खिचड़ी तैयार हो जाए तो ऊपर से नींबू का रस और हरा धनिया डालें. फिर 1-2 मिनट के लिए ढककर रखें ताकि सभी फ्लेवर अच्छी तरह मिल जाएं.इसे दही, व्रत की चटनी या भुनी मूंगफली के साथ परोसकर स्वाद को और बढ़ाया जा सकता है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



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राजुला-खांभा में 12 इंच बारिश से बाढ़ के हालात: अमरेली में नदियां उफान पर आईं, हाईवे बंद होने से 20 गांवों का संपर्क टूटा – Gujarat News


गुजरात में अमरेली जिले के राजुला और खम्भा पंथक में बारिश ने भयंकर रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों में खांभा ग्रामीण और राजुला पंथक में 12 इंच से अधिक भारी बारिश हुई है, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया है। धत्रावाडी और रायडी बांधों के ओवरफ्लो होने के बा

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खांभा के ग्रामीण इलाकों में 8 इंच और पंथक में कुल 12 इंच बारिश के कारण नागेश्री नेशनल हाईवे पूरी तरह से ठप हो गया है। चोटिला-खम्भा से नागेश्री जाने वाला नेशनल हाईवे भी अवरुद्ध हो गया है। रानीगापारा गांव के पास कोजीखान के नजदीक बने अस्थायी पुल का मार्ग बाढ़ के तेज पानी में बह गया है।

शहर और जिले में लगातार दो दिन तक भारी बारिश के चलते तापी नदी में 51 हजार क्यूसेक पानी की भारी आवक होने से सीजन में पहली बार वियर-कम-कॉजवे ओवरफ्लो हो गया है। जलस्तर खतरे के निशान को पार कर 6.80 मीटर तक पहुंच गया। इस बीच यहां बने मनमोहक दृश्यों को कैमरे में कैद करने के लिए कॉजवे के पास लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

अमरेली जिले में बाढ़ की 5 तस्वीरें…

राजुला तालुका की धातरवाडी-2 डैम के गेट खोले जाने से रायडी नदी उफान पर आ गई।

राजुला तालुका के भेराई गांव के पास पानी घुस गया, 50 से अधिक लोग फंस गए,जिन्हें बचाया गया।

राजुला तालुका के भेराई गांव के पास पानी घुस गया, 50 से अधिक लोग फंस गए,जिन्हें बचाया गया।

अमरेली-पिपावाव सड़क डूब गई है। खतरा उठाकर सड़क पार कर रहे वाहनों को रोका जा रहा है।

अमरेली-पिपावाव सड़क डूब गई है। खतरा उठाकर सड़क पार कर रहे वाहनों को रोका जा रहा है।

राजुला-सावरकुंडला राजमार्ग पर बाढ़ से सड़क बह गई। इससे दोनों तरफ का यातायात ठप हो गया।

राजुला-सावरकुंडला राजमार्ग पर बाढ़ से सड़क बह गई। इससे दोनों तरफ का यातायात ठप हो गया।

सावरकुंडला में दीवार गिरने से खाना पका रही महिला मलबे में दब कर गंभीर रूप से घायल हो गई।

सावरकुंडला में दीवार गिरने से खाना पका रही महिला मलबे में दब कर गंभीर रूप से घायल हो गई।

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महाराष्ट्र में वाटरफॉल में फंसे 100 टूरिस्ट:रस्सी के सहारे रेस्क्यू; वसई में 20 कारें डूबीं; बिहार की कोसी नदी में समाए 6 घर

देश के कई राज्यों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जेनिथ वाटरफॉल में अचानक पानी का लेवल बढ़ गया, जिसमें 100 टूरिस्ट फंस गए। उन्हें रस्सी की मदद से निकाला गया। नालासोपारा में सड़क पर पानी भरने से 20 कारें उसमें डूब गईं। पूरी खबर पढ़ें…



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VHP अध्यक्ष के पत्र पर संजय सिंह का पलटवार: राम मंदिर चढ़ावा विवाद; बोले- आलोक कुमार चोरों को बचा रहे – New Delhi News




आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के पत्र पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आलोक कुमार राम मंदिर के चढ़ावा चोरों को बचा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो उनके पत्र में राजनीति नहीं होती है। उन्होंने अपने पत्र में भाजपा, आरएसएस और वीएचपी के उन लोगों का नाम नहीं लिखा है, जिन्होंने अपनी आंखों से चोरी होते देखा है। मंदिर निर्माण का कार्य देख रहे नृपेंद्र मिश्रा ने तो कई बार कहा कि मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, डकैती हुई है, लेकिन पत्र में उनका भी नाम नहीं है। 5 साल तक अनजान बने रहे संजय सिंह ने कहा कि इन सब के बाद भी आलोक कुमार के पत्र का स्वागत है। मैं जांच में शामिल होने को तैयार हूं। मैं अपने साथ उन्हें भी लेकर जाऊंगा, जो दान में दिए पदुकाएं, हार, राम चरित मानस चोरी होने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2021 में ही मैं अयोध्या कोतवाली में तहरीर देकर जमीन खरीद घोटाले की जांच की मांग की थी, लेकिन 5 साल तक आलोक कुमार अनजान बने रहे। ऐसे में जांच अधिकारी को आलोक कुमार से भी पूछताछ करनी चाहिए कि सार्वजनिक बयान देने वालों के नाम पत्र में क्यों नहीं दिए? अब सोमवार को मैं जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा और राम मंदिर ट्रस्ट में केंद्र के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से पूछताछ करने की मांग करूंगा। पूर्व गृह सचिव को नहीं मिली रसीद संजय सिंह ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या में चंदा चोरी मामले की जांच कर रहे डीएसपी व जांच अधिकारी को एक चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और अन्य नेताओं से पूछताछ की जाए। उन्होंने कहा कि वहां चोरी कई प्रकार की हुई है। धन की चोरी, जमीन के नाम पर चोरी, आभूषणों की चोरी और मंदिर निर्माण में 40-40 फीसद कमीशन खाने की बात है। इसके अलावा प्रभु श्री राम की पादुका, हार और शिलाएं तक चोरी हो गई हैं। एक पूर्व गृह सचिव का भी बयान आया कि एक किलो सोने से लिखी गई पवित्र राम चरित मानस भी चोरी हो गई है और उसका भी कुछ पता नहीं है। पूर्व गृह सचिव बार-बार अनुरोध करते रहे, लेकिन अब तक उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं मिली। जमीन माफिया गैंग में सदस्य और मेयर शामिल संजय सिंह ने कहा कि इतने सब कुछ के बावजूद खुद को दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू संगठन कहने वाले विश्व हिंदू परिषद और उसके अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार इन सारे मामलों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं और उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे आज डीएसपी को पत्र लिख रहे हैं, जबकि मैंने तो वर्ष 2021 में ही अयोध्या की कोतवाली में बाकायदा तहरीर दी थी कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से 2 करोड़ रुपए की जमीन महज 5 मिनट के अंदर 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी थी। इस जमीन माफिया गैंग में ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय भी शामिल थे। मैंने ये सारे कागजात सौंपे थे, लेकिन आलोक कुमार 5 साल तक उन कागजातों से अनजान बने रहे। संपूर्ण प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया संजय सिंह ने कहा कि आलोक कुमार इस बात से भी अनभिज्ञ हैं कि 9 और 12 जून को आम आदमी पार्टी ने नहीं, बल्कि भाजपा के ही नेता और पूर्व मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को काफी विवरण के साथ चिट्ठियां लिखी थीं। संजय सिंह ने कमल के निशान वाला पत्र दिखाते हुए बताया कि भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री से मांग की थी कि इस पूरे प्रकरण की ईडी और सीबीआई से जांच कराई जाए। साथ ही दान राशि के संग्रहण, गणना, परिवहन और बैंक में जमा करने की संपूर्ण प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया जाए। वेबसाइड बनाकर सार्वजनिक किया जाए अभिलेख डॉ. रजनीश सिंह ने अपने पत्र में लिखा था कि यदि किसी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की थी कि यह मामला एक दिन का नहीं है, इसलिए शुरुआत से ही जमीन की खरीद-फरोख्त, मंदिर निर्माण के प्रशासनिक व्यय और अन्य मदों में खर्च की गई राशि की मदवार जांच कराई जाए। साथ ही सभी ऑडिट रिपोर्ट, लेखा परीक्षण और वित्तीय निरीक्षण संबंधी अभिलेखों को वेबसाइट बनाकर ऑनलाइन और सार्वजनिक किया जाए। संजय सिंह ने आलोक कुमार से कहा कि यह सारा पत्र मैंने नहीं, बल्कि खुद भाजपा नेता ने लिखा था, लेकिन आलोक कुमार को इसकी भी कोई जानकारी नहीं है। वर्तमान में एसआईटी जांच चल रही संजय सिंह ने बताया कि भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह के पत्र पर प्रधानमंत्री मोदी ने संज्ञान लिया और प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के जिलाधिकारी को पत्र लिखा। इसके जवाब में अयोध्या के एडीएम इंद्रकांत द्विवेदी ने लिखा कि डॉ. रजनीश सिंह द्वारा 12 जून को प्रधानमंत्री को दी गई ऑनलाइन शिकायत के संदर्भ में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव से वांछित सूचना मांगी गई थी। ट्रस्ट की ओर से अवगत कराया गया कि वर्तमान समय में एसआईटी जांच चल रही है और सभी सूचनाएं उनके द्वारा संकलित की जानी हैं, इसलिए इस स्तर पर ट्रस्ट से कोई भी सूचना मिल पाना संभव नहीं है। पीएम कार्यालय को जानकारी देने से इनकार संजय सिंह ने आलोक कुमार से पूछा कि क्या उन्हें इस बात की भी जानकारी नहीं है कि जब जिलाधिकारी कार्यालय ने बताया कि प्रधानमंत्री ने डॉ. रजनीश सिंह के पत्र पर जानकारी चाही, तो ट्रस्ट ने यह कहते हुए जानकारी देने से साफ मना कर दिया कि एसआईटी जांच चल रही है। ट्रस्ट ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय को कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, डकैती हुई संजय सिंह ने कहा कि आलोक कुमार ने पत्र लिखने में भी बेईमानी कर दी। उन्हें अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और प्रो. रामगोपाल यादव का नाम तो याद रहा, लेकिन वे नृपेंद्र मिश्रा का नाम भूल गए। नृपेंद्र मिश्रा जो ट्रस्ट में प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण का कार्य देखते हैं, उन्होंने एक नहीं बल्कि कई इंटरव्यू में स्पष्ट कहा है कि राम मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं हुई है, डकैती हुई है। आलोक कुमार ने उनका नाम क्यों नहीं लिखा और नृपेंद्र मिश्रा से पूछताछ क्यों नहीं होनी चाहिए? वे तो ट्रस्ट के एक सम्मानित और निर्माण कार्य देखने वाले व्यक्ति हैं। जब वे खुद कह रहे हैं कि डकैती हो रही है, तो उनका नाम पत्र में क्यों नहीं लिखा गया। मंदिर बनवाने में 40 फीसद कमीशन संजय सिंह ने कहा कि पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार कह रहे हैं कि वहां चोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन उनका नाम भी आलोक कुमार ने नहीं लिखा कि उनसे पूछताछ होनी चाहिए। मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे रहे महंत धर्मदास ने भी वहां चोरी और भ्रष्टाचार होने की बात कही है, लेकिन उनका नाम भी पत्र में नहीं है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने भी कहा कि वहां चोरी और भ्रष्टाचार हो रहा है, लेकिन उनका नाम भी पत्र से गायब है। इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा मंदिर बनवाने में 40 फीसद कमीशन खाते थे, लेकिन उनका नाम भी पूछताछ के लिए नहीं लिखा गया। चोरों को बचाने का काम कर रहे आलोक संजय सिंह ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस के ही व्यक्ति महिपाल सिंह ने सार्वजनिक बयान दिया था कि वर्ष 2020-21 में ही उन्होंने बता दिया था कि मंदिर के चढ़ावे में चोरी हो रही है। उन्होंने इसकी जानकारी गोपाल राव को दी, गोपाल राव ने चंपत राय को बताया और फिर चंपत राय ने उल्टा महिपाल सिंह को ही निकालकर बाहर कर दिया। संजय सिंह ने आलोक कुमार से पूछा कि महिपाल सिंह का नाम पत्र में क्यों नहीं लिखा गया। इसका सीधा मतलब यह है कि आलोक कुमार चोरों को बचाने का काम कर रहे हैं। पूछताछ तो खुद आलोक कुमार से होनी चाहिए कि उन्होंने सार्वजनिक बयान देने वाले इन प्रत्यक्षदर्शियों के नाम जांच अधिकारी को क्यों नहीं दिए ताकि इन्हें बुलाकर पूछताछ की जा सके। श्री राम की पादुकाएं और हार चोरी संजय सिंह ने कहा कि इसके बावजूद मैं आलोक कुमार के पत्र का स्वागत करता हूं और अयोध्या के जांच कर रहे डीएसपी से कहना चाहता हूं कि वे मुझे बुलाएं। मेरी सुबह से बहुत सारे लोगों से बातचीत हो चुकी है और मैं सभी से संपर्क करके उन सबको अपने साथ ले जाऊंगा। मैं उन लोगों को भी ले जाऊंगा जो कह रहे हैं कि उनकी 60 किलो और 200 किलो चांदी चोरी हो गई है। जो कह रहे हैं कि प्रभु श्री राम की पादुकाएं और हार चोरी हो गए हैं। मैं पूर्व गृह सचिव को भी ले जाने का प्रयास करूंगा, जो कह रहे हैं कि एक किलो सोने से जड़ी पवित्र राम चरित मानस चोरी हो गई है। मैं संतोष दुबे से भी बातचीत करके उन्हें ले जाऊंगा, जो कह रहे हैं कि चांदी की प्राण-प्रतिष्ठित राम शिलाएं और मॉरीशस से आई एक बहुमूल्य राम शिला भी चोरी हो गई है। पत्र में बेईमानी साफ तौर पर दिख रही संजय सिंह ने आलोक कुमार से कहा कि उन्होंने पत्र लिखकर अच्छा किया, लेकिन उनके पत्र में बेईमानी और उनके मन का चोर साफ तौर पर दिख रहा है। उन्होंने उन लोगों के नाम जानबूझकर नहीं लिखे जो वास्तव में मंदिर की व्यवस्था में शामिल थे, जो अपनी आंखों से देख रहे थे कि वहां रोजाना चोरी का कार्य चल रहा है और जिनके पास इसके पुख्ता साक्ष्य और प्रमाण मौजूद हो सकते हैं। 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में खरीदी संजय सिंह ने बताया कि लोगों को लग रहा था कि यह मजाक है, लेकिन जैसे ही एसआईटी ने मुझे बुलाया, मैं 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज वहां देकर आ चुका हूं। मेरे पास और भी नए दस्तावेज आ गए हैं, जिनका मैं जल्द ही खुलासा करूंगा। इसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पूरे देश को पता चल जाएगा कि 2 करोड़ रुपए की जमीन 18.5 करोड़ में, 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में और नजूल की जमीन 24 करोड़ में खरीदने वाले चंपत राय अभी भी जेल से बाहर कैसे हैं। 92 लाख की जमीन को 5 करोड़ 60 लाख में खरीदा। तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण से 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में खरीदी गई और जो जमीन दीप नारायण को मुफ्त में मिली थी, उसे 1 करोड़ में खरीदा गया। चंपत राय का केवल महासचिव पद से इस्तीफा संजय सिंह ने कहा कि ये तमाम कागजात एसआईटी को देने के बावजूद बड़े अफसोस की बात है कि अभी भी लीपापोती चल रही है। कहा जा रहा है कि चंपत राय ने केवल महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, अभी ट्रस्ट से इस्तीफा नहीं दिया है। भारत के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरी चंदा चोर पार्टी भाजपा इस पूरे चंदा चोरी प्रकरण में मजबूती के साथ चोरों के बचाव में खड़ी है। जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा संजय सिंह ने एलान किया कि मैं भी सोमवार को जांच अधिकारी को एक पत्र लिखूंगा और मांग करूंगा कि चार साल तक ट्रस्ट के सदस्य के रूप में केंद्र सरकार और मोदी जी के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से भी पूछताछ होनी चाहिए, क्योंकि ये सारी खरीद-फरोख्त उनकी पूरी जानकारी में हुई है। मैं पत्र में उन सभी लोगों के नाम लिखूंगा, जिन्हें आलोक कुमार अपनी चिट्ठी में भूल गए हैं या जिनके बारे में वे गजनी मोड में चले गए हैं। मैं तहरीर देकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जिक्र भी करूंगा। आनन-फानन में राम फकीर मंदिर तुड़वाया संजय सिंह ने बताया कि अभी यह जानकारी सामने आ रही है कि चंपत राय ने आनन-फानन में राम फकीर मंदिर ही पूरा तुड़वा दिया है। मैं इसकी गहनता से जानकारी जुटाकर इस विषय को भी मजबूती से सामने रखूंगा। उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली यह धमकी और पत्र लिखकर बंदर घुड़की देने का प्रयास आम आदमी पार्टी के साथ बिल्कुल नहीं चलेगा।



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ऐश्वर्या राय को ट्रोल करने वालों पर बरसीं रवीना टंडन, कहा- ये गलत चलन बंद होना चाहिए


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रवीना टंडन ने ऐश्वर्या राय बच्चन को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने की आलोचना करते हुए इसे बेहद गलत और अफसोसजनक बताया. उन्होंने एक्ट्रेस को सपोर्ट करते हुए प्रतिक्रिया दी.

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बॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस रवीना टंडन ने एक इंटरनेशनल रेड कार्पेट समारोह में एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने की आलोचना करते हुए इसे ‘‘बिल्कुल गलत और निराशाजनक’’ बताया. इस वर्ष मई में कान फिल्म फेस्टिवल में अपनी उपस्थिति के दौरान ऐश्वर्या ने अमित अग्रवाल द्वारा डिजाइन किए गए नीले रंग के गाउन में रेड कार्पेट पर शिरकत की थी, जिसने सबका ध्यान खींचा था.

हालांकि, महोत्सव की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद उन्हें ‘ऑनलाइन ट्रोलिंग’ का सामना करना पड़ा. रवीना ने कहा कि महिलाओं के रूप-रंग को लेकर लगातार की जाने वाली टिप्पणियां सोशल मीडिया के दौर की ‘‘गलत रवैए’’ को दर्शाती हैं.

ऐश्वर्या राय की ट्रोलिंग पर क्या बोलीं रवीना टंडन
उन्होंने ऐश्वर्या राय के सपोर्ट में कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अफसोस करने वाला है. किसी महिला की बढ़ती उम्र, उसके वजन या उसके पहनावे को लेकर इस तरह लगातार ट्रोल करना हमारी ऑनलाइन कल्चर का गलत ट्रेंड है.’’

ऐश्वर्या का किया सपोर्ट
रवीना टंडन ने ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘‘वैश्विक पहचान रखने वाली हस्ती’’ बताते हुए कहा कि उन्हें केवल इस तरह के आकलनों तक सीमित कर देना उनके योगदान और कद को कमतर आंकने जैसा है.

ऐश्वर्या हमारे लिए शान-मान हैं
उन्होंने कहा, ‘‘ऐश्वर्या एक ऐसी वैश्विक हस्ती हैं, जिन्होंने दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गरिमा और शालीनता के साथ हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया है. उनके कद, उपलब्धियों और बुद्धिमत्ता वाली महिला को केवल किसी खराब कैमरा एंगल या किसी प्रयोगात्मक परिधान के आधार पर आंकना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.’’

क्यों उम्र और रंग-रूप पर कोसना?
रवीना ने कहा कि यह प्रतिक्रिया इस व्यापक सामाजिक दोहरे मापदंड को भी उजागर करती है कि पुरुष और महिला कलाकारों को अलग-अलग नजरिये से देखा जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे समाज में रोजमर्रा के दोहरे मापदंड को दर्शाता है. हम अपनी महिला अभिनेत्रियों से उम्मीद करते हैं कि वे हमेशा वैसी ही दिखें जैसी वे बीस वर्ष पहले दिखती थीं, जबकि पुरुष कलाकारों को उम्र बढ़ने, बदलने और आगे बढ़ने की पूरी छूट होती है.’’ रवीना टंडन की हालिया फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है.

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Varsha

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहीं वर्षा का डिजिटल मीडिया में 8 सालों का अनुभव है। एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है। वर्षा ने जामिया मिल्…और पढ़ें



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हाइट- 4 मंजिल, वजन- 500 हाथियों के समान, बुलेट ट्रेन के काम में लगी पहाड़ जैसी मशीन


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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने देश की पहली हाई-स्पीड रेल के निर्माण में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है. मुंबई के विक्रोली में भारत की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन ने अपना काम शुरू कर दिया है. यह इस पूरी परियोजना का सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा है. यह टनल मुंबई के सबसे व्यस्त इलाकों, ऊंची इमारतों और मीठी नदी के नीचे से होकर गुजरेगी, जिसके लिए अत्याधुनिक जापानी तकनीक और सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

भारत की सबसे बड़ी रेल सुरंग निर्माण मशीन ने शुरू किया काम: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत विक्रोली से देश की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन ने भूमिगत सुरंग की खुदाई का काम शुरू कर दिया है. यह इस पूरी हाई-स्पीड रेल परियोजना का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है. इस मशीन के जरिए मुंबई के घने इलाकों के नीचे से सुरक्षित रास्ता तैयार किया जाएगा.

चार मंजिला इमारत जितनी ऊंची है यह विशालकाय मशीन: सुरंग की खुदाई में जुटी इस मशीन का डायामीटर (व्यास) 13.6 मीटर है, जो लगभग एक चार मंजिला इमारत जितनी ऊंची दिखाई देती है. इतनी बड़ी मशीन का इस्तेमाल भारत में रेल सुरंग निर्माण के इतिहास में पहली बार किया जा रहा है. इसकी विशालता को देखकर ही इस परियोजना की भव्यता और आधुनिक तकनीक का अंदाजा लगाया जा सकता है.

500 हाथियों जितना वजन और फुटबॉल मैदान जैसी लंबाई: तकनीक के इस अजूबे का कुल वजन करीब 3,100 टन है, जो लगभग 500 एशियाई हाथियों के बराबर बैठता है. इसके साथ ही इसकी 96 मीटर की लंबाई एक पूरे फुटबॉल मैदान जितनी बड़ी है. इस भीमकाय मशीन को सुचारू रूप से चलाने के लिए जमीन के ऊपर एक पूरा आधुनिक सिस्टम तैयार किया गया है.

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21 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल का सफर: बुलेट ट्रेन के लिए मुंबई और अहमदाबाद के बीच कुल 21 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड टनल बनाई जा रही है. इसमें से 16 किलोमीटर का हिस्सा इसी विशाल मशीन से खोदकर तैयार किया जाएगा. बाकी बचे 5 किलोमीटर का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक से पहले ही पूरा किया जा चुका है.

खुदाई और मजबूती का काम एक साथ: विक्रोली से शुरू हुई यह मशीन एक ऐसी सिंगल-ट्यूब सुरंग तैयार करेगी, जिसमें बुलेट ट्रेन के आने और जाने के दोनों ट्रैक एक साथ होंगे. यह मशीन आगे बढ़ते हुए खुदाई करने के साथ ही कंक्रीट की लाइनिंग भी तुरंत करती जाती है. इस डबल एक्शन से सुरंग का निर्माण तेजी से होता है और वह साथ-साथ मजबूत होती चलती है.

घने इलाकों और मीठी नदी के नीचे से सुरक्षित रास्ता: यह सुरंग मुंबई के सबसे व्यस्त रिहायशी इलाकों, ऊंची इमारतों, सड़कों और मीठी नदी के ठीक नीचे से गुजरेगी. इसके लिए विशेष मिक्सशील्ड तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ज्यादा भूजल वाले इलाकों के लिए बेस्ट है. यह आधुनिक तकनीक जमीन धंसने के खतरे को पूरी तरह खत्म कर देती है जिससे ऊपर की संरचनाएं सुरक्षित रहती हैं.

20 मंजिला इमारत जितना गहरा शाफ्ट: इस विशालकाय मशीन को जमीन के नीचे उतारने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा एक विशाल शाफ्ट बनाया गया है. यह गहराई लगभग एक 20 मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर बैठती है. इसी जगह पर मशीन के संचालन के लिए पानी शोधन संयंत्र, बिजली सब-स्टेशन और बैकअप जनरेटर जैसी आधुनिक सुविधाएं तैयार की गई हैं.

सेंसर और सीस्मोग्राफ से रियल-टाइम निगरानी: खुदाई के दौरान ऊपर बनी इमारतों और जमीन पर कोई असर न पड़े, इसके लिए सतह पर विशेष सेंसर, टिल्ट मीटर और सीस्मोग्राफ लगाए गए हैं. ये आधुनिक उपकरण जमीन के नीचे होने वाली हर छोटी गतिविधि पर नजर रखते हैं. यह सारा डेटा कंट्रोल रूम को लाइव भेजा जाता है ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो.

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100 टन की कंक्रीट रिंग से पूरी तरह वॉटरप्रूफ टनल: ठाणे के महापे कास्टिंग यार्ड में सुरंग को मजबूती देने के लिए 100-100 टन की 7,700 कंक्रीट रिंग तैयार की जा रही हैं. पानी के रिसाव को रोकने के लिए इस सुरंग में डबल-लेयर रबर सील और आधुनिक वॉटरप्रूफ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे भविष्य में टनल के अंदर पानी के रिसाव का खतरा शून्य हो जाएगा. (AI)

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