Friday, May 15, 2026
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बरौनी रिफाइनरी और टाउनशिप में निषेधाज्ञा लागू: 1 जून की सुबह 6 बजे तक लागू रहेगा आदेश, आवश्यक कार्रवाई के लिए एसपी को दी सूचना – Begusarai News




बरौनी रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने बड़े कदम उठाए हैं। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने एवं पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सदर एसडीओ अनिल कुमार ने BNSS की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दिया है। यह निषेधाज्ञा आज से 1 जून की सुबह 6:00 बजे तक के लिए लगाया गया है। यह आदेश रिफाइनरी के गेट संख्या-3-D, 4-A एवं 1-B तथा रिफाइनरी टाउनशिप के 500 मीटर की परिधि में प्रभावी रहेगा। निषेधाज्ञा अवधि के दौरान उक्त क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, जुलूस, नारेबाजी अथवा पिकेटिंग की अनुमति नहीं होगी। मान्यता प्राप्त यूनियन को भी कार्यक्रम के लिए एसडीओ अनुमति लेना होगा। डीएम श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि आईओसीएल बरौनी रिफाइनरी के मानव संसाधन महाप्रबंधक ने सूचना दिया है कि विस्तार परियोजना BR-09 के तहत कार्यरत कुछ संविदा श्रमिकों द्वारा रिफाइनरी के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। बरौनी रिफाइनरी एक सार्वजनिक उपयोगिता उद्योग है। इसके संचालन में किसी भी प्रकार का व्यवधान जिला, राज्य एवं राष्ट्र की पेट्रोलियम आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। उक्त परिस्थिति के मद्देनजर एहतियातन यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक कार्रवाई के एसपी को भी सूचना दी गई है।



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प्रभारी मंत्री बोलीं- गांवों में पानी पहुंचाने छोटे प्लान बनाएं: मां शारदा लोक के निर्माण कार्य देखे, माता के दर्शन कर लिया आशीर्वाद – Maihar News




मैहर जिले की प्रभारी मंत्री राधा सिंह शुक्रवार को मैहर पहुंचीं। उन्होंने कलेक्ट्रेट ऑफिस के मीटिंग हॉल में जिले के बड़े अधिकारियों के साथ बैठक की और सरकारी योजनाओं के काम-काज को देखा। बैठक में मंत्री ने सतना-बाणसागर नल-जल योजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि हर गांव तक पीने का पानी पहुंचाने के लिए एक छोटा प्लान (माइक्रो प्लान) बनाया जाए और काम पूरा करने का समय तय किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि 1135 करोड़ रुपए की इस योजना से सतना और मैहर के 980 गांवों को फायदा होगा। मैहर के 560 गांवों में से 136 गांवों में पानी की सप्लाई शुरू हो चुकी है और दिसंबर 2026 तक पूरा काम खत्म करने का लक्ष्य है। मां शारदा लोक के लिए 64 करोड़ के काम प्रभारी मंत्री ने मां शारदा लोक के पहले चरण के कामों की भी जानकारी ली। बताया गया कि पहले फेज में 64 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें परिक्रमा पथ पर टॉयलेट, चार वेटिंग हॉल, दुकानें, रास्ता और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए फेंसिंग जैसे काम होंगे। इन कामों के लिए अभी टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। गर्मी और बीमारियों को लेकर निर्देश मंत्री राधा सिंह ने गर्मी के मौसम में पीने के पानी की व्यवस्था और बीमारियों को रोकने के लिए जरूरी निर्देश दिए। बैठक में विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी और एसपी अवधेश प्रताप सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। बैठक खत्म होने के बाद मंत्री जी ने मां शारदा मंदिर में पूजा-अर्चना की और आल्हा ताल और परिक्रमा पथ का जायजा भी लिया।



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सारा अर्जुन से पहले इस हीरोइन ने 20 साल बड़े हीरो संग किया था रोमांस, हिट की बने थे गारंटी


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‘धुरंधर’ में सारा अर्जुन-रणवीर सिंह की उम्र के फासले पर काफी बवाल हुआ था, हालांकि फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों ने उनकी जोड़ी को खूब सराहा है. मगर उनसे पहले भी एक जोड़ी पर्दे पर छा गई थी, जिनके बीच उम्र का फासला 20 साल था. उनकी गिनती बॉलीवुड की सबसे सफल और पॉपुलर जोड़ियों में होती है. इनके सफर की शुरुआत 2012 की ब्लॉकबस्टर ‘राउडी राठौर’ से हुई, जिसने मसाला फिल्मों में एक नई मिसाल कायम की.

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दोनों सितारों ने साथ में लगभग आधा दर्जन फिल्में की हैं. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

नई दिल्ली: हम जिस जोड़ी की बात कर रहे हैं, उनकी उम्र में 20 साल का फासला है. मगर उनकी जोड़ी बॉलीवुड की उन जोड़ियों में से है, जिन्होंने पर्दे पर मसाला फिल्मों का असली मजा दिया है. सारा अर्जुन-रणवीर सिंह की तरह उन्हें भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला. इन दोनों सितारों ने मिलकर ‘राउडी राठौर’ सहित आधा दर्जन फिल्मों में साथ काम किया है. दोनों की साथ में पहली फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी, जिसने एक्ट्रेस को कमर्शियल सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में ला खड़ा किया. हालांकि, उसी साल आई इनकी ‘जोकर’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई. हम अक्षय कुमार-सोनाक्षी सिन्हा की बात कर रहे हैं. इसके बाद, अक्षय ने ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा’ में विलेन का रोल निभाया और सोनाक्षी उनके साथ नजर आईं. साल 2014 में आई ‘हॉलिडे’ में अक्षय ने एक आर्मी ऑफिसर बनकर सबका दिल जीत लिया, तो वहीं 2019 की ‘मिशन मंगल’ में दोनों ने एक संजीदा कहानी में साथ काम करके अपनी वर्सेटिलिटी दिखाई.

अक्षय-सोनाक्षी की ‘राउडी राठौर’ सबसे यादगार फिल्म है. तमाम रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान काफी बवाल हुआ था. हम्पी जैसे ऐतिहासिक जगह पर गाने की शूटिंग को लेकर विरोध हुआ था, जिसके चलते काम बीच में ही रोकना पड़ा था. अक्षय कुमार ने इस फिल्म में डबल रोल के लिए खास कराटे की तकनीक सीखी थी. वहीं, अक्षय ने यह रोल सिर्फ इसलिए साइन किया था क्योंकि उनके बेटे को उन्हें एक्शन फिल्मों में देखना बहुत पसंद है. मजे की बात यह भी है कि इस फिल्म के सुपरहिट गाने ‘चमक छल्लो छैल छबीली’ के जरिए दिग्गज गायक कुमार सानू ने लंबे समय बाद बॉलीवुड में कमबैक किया था. अक्षय की ही दूसरी फिल्म ‘ओएमजी’ के गाने ‘गो गो गोविंदा’ में भी ‘राउडी’ शब्द का इस्तेमाल करके इस फिल्म को एक ट्रिब्यूट दिया गया था.

दोनों सितारों की पहली फिल्म ‘राउडी राठौर’ ब्लॉकबस्टर रही थी. (फोटो साभार: IMDb)

मेकर्स की भरोसेमंद जोड़ी
दोनों सितारों की फिल्मी सफर की केमिस्ट्री सिर्फ डांस और रोमांस तक सीमित नहीं रही, बल्कि इन्होंने साइंस-फिक्शन और एक्शन थ्रिलर में भी हाथ आजमाया है. हाल ही में 2024 में आई बड़े बजट की फिल्म ‘बड़े मियां छोटे मियां’ में भी सोनाक्षी एक खास भूमिका में नजर आईं, जहां अक्षय और टाइगर श्रॉफ की जोड़ी का जलवा था. भले ही ‘जोकर’ जैसी कुछ फिल्में फ्लॉप रही हों, लेकिन ‘हॉलिडे’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि जब भी ये दोनों साथ आते हैं, तो दर्शकों को भरपूर मनोरंजन की गारंटी मिलती है. अक्षय का जबरदस्त एक्शन और सोनाक्षी का देसी अंदाज हमेशा से ही फैंस के बीच हिट रहा है, यही वजह है कि इनकी जोड़ी को आज भी बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद जोड़ियों में गिना जाता है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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बजट में फिट और स्वाद में हिट! फिश लवर के लिए खास है देहरादून की यह दुकान


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बजट में फिट और स्वाद में हिट! फिश लवर के लिए खास है देहरादून की यह दुकान

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Dehradun Best Nonveg Shop: अगर आप नॉनवेज लवर हैं और मछली खाना पसंद करते हैं, तो देहरादून के राजपुर रोड पर ‘काला मच्छी वाला’ बेहद ही लजीज फिश फ्राई बनाते हैं. इसमें न चर्बी होती है और न ही काटें होते हैं. यहां शाम 4 बजते ही इनकी कार्ट शुरू हो जाती है. आइए इस दुकान की खासियत के बारे में जानते हैं.

देहरादून: इन दिनों देहरादून का मौसम खुशनुमा बना हुआ है, जिसके चलते यहां पर्यटक घूमने के लिए पहुंच रहे हैं. अगर आप भी उन लोगों में से हैं तो आपको देहरादून में कई तरह के लजीज पकवान खाने के लिए मिल जाएंगे. अगर आप नॉनवेज लवर हैं और मछली खाना पसंद करते हैं, तो देहरादून के राजपुर रोड पर ‘काला मच्छी वाला’ बेहद ही लजीज फिश फ्राई बनाते हैं. इसमें न चर्बी होती है और न ही काटें होते हैं. यहां शाम 4 बजते ही इनकी कार्ट शुरू हो जाती है.

देहरादून के राजपुर रोड पर काला मच्छीवाला के नाम से ठेला संचालित करने वाले आयुष ने बताया कि उनके पिता पिछले 40 सालों से ठेला लगाकर लोगों के पेट भरने का काम कर रहे हैं. वह पहले राजमा-चावल बनाते थे, फिर लगभग 15 साल पहले उन्होंने नॉनवेज का काम शुरू किया. बचपन से वह पिता को इस काम में लगा हुआ देखते थे. उन्होंने भी इस काम का अपना करियर बना लिया.

छोटे से बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं आगे
उन्होंने कहा कि उन्होंने बीए का कोर्स किया और अपने पिता के बिजनेस को बढ़ाने के लिए आगे बढ़ गए. उन्होंने कहा, ‘मैं दूसरे की गुलामी नहीं करना चाहता हूं, बल्कि पिता का नाम और काम आगे बढ़ाना चाहता हूं. आयुष ने कहा कि यह जायका वह लोगों तक हमेशा पहुंचाना चाहते हैं. मुस्कुराते हुए आयुष बोले, ‘अपना मालिक बनना सबसे बेहतर है’. वाकई जहां एक तरफ बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी के लिए भटकते हैं, वहीं आयुष जैसे युवा अपने छोटे से बिजनेस को ही आगे बढ़ाने की सोचते हैं.

मेल्टिंग मोमेंट का एक्सपीरियंस देती फिश फ्राई 
आयुष ने कहा कि पहले वह लोग अंडे फ्राई और चिकन फ्राई तैयार किया करते थे. इसके बाद एक बार उनके पिता ने फिश फ्राई बनाकर कस्टमर्स को खिलाया, तब से अब तक शाम होते ही फिश फ्राई के ग्राहकों की यहां भीड़ लग जाती है. उन्होंने कहा कि वह देहरादून के मछली बाजार से खास तरह की मछली लेते हैं, जिसमें न कांटा होता है और न ही चर्बी होती है. यही वजह है कि लोग यहां मछली खाने से नहीं डरते हैं. वह तड़के ही ताजी मछली लेकर आते हैं. इसके बाद खुद का सीक्रेट मसाला तैयार करके उसे मैरीनेट करके कुछ घंटों के लिए छोड़ देते हैं. इसके बाद वह शाम के समय इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर सरसों के तेल में डीप फ्राई करके देते हैं.

उन्होंने बताया कि यह खास होती है, क्योंकि बाहर का कवर क्रिस्पी और अंदर से मुंह में घुलने वाली होती है. इसका स्वाद बढ़ाने का काम करती इनकी तीखी हरी चटनी. प्याज और चटनी के साथ परोसी जाने वाली फिश फ्राई हर कोई बड़े शौक से खाता है. देहरादून के रहने वाले सोनू ने बताया कि वह कई सालों से इनकी फिश फ्राई खा रहे हैं. उन्होंने और अन्य जगहों पर भी ट्राई किया, पर यहां जैसा जायका उन्हें कहीं भी नहीं मिला.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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केरल कांग्रेस में सियासी बेचैनी, सतीशन की CM ताजपोशी पर कलह, चेन्निथला फैक्टर बना चुनौती


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केरल कांग्रेस में सतीशन की CM ताजपोशी पर कलह, चेन्निथला फैक्टर बना चुनौती

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रमेश चेन्निथला कांग्रेस हाईकमान के फैसले से नाराज हो गए हैं. वह विधायक दल की मीटिंग में शामिल नहीं हुए. चेन्निथला बिना कुछ बोले गुरुवायूर चले गए थे. उन्होंने सिर्फ एक लेटर भेज दिया था. लेटर में सतीशन को सीएम बनाने का सपोर्ट था. हांलांकि, अब उन्होंने अपनी नाराजगी सीधे तौर पर जाहिर कर दी है.

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कांग्रेस ने केरल सीएम के तौर पर वी डी सतीशन का नाम तय किया है. (पीटीआई)

तिरुवनंतपुरम. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा वी. डी. सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री घोषित किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला की कथित नाराजगी की खबरों के बीच पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने के प्रयास में जुटा हुआ है. केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सतीशन, चेन्निथला और कांग्रेस महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल शामिल थे. सतीशन शुक्रवार को चेन्निथला के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात करने के बाद केरल मामलों की प्रभारी कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी भी वरिष्ठ नेता से मिलने उनके घर पहुंचीं. बैठक के बाद दासमुंशी ने संवाददाताओं से कहा कि वह बृहस्पतिवार को चेन्निथला से मुलाकात नहीं कर पाई थीं, इसलिए आज उनके घर आईं.

पार्टी द्वारा बृहस्पतिवार को सतीशन को मुख्यमंत्री घोषित किए जाने के बाद चेन्निथला बिना किसी से बात किए गुरुवायूर चले गए थे और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे. उन्होंने हालांकि सतीशन को सीएलपी नेता चुने जाने के समर्थन में एक पत्र सौंप दिया था. दासमुंशी ने कहा कि वह सभी वरिष्ठ नेताओं के घर जाकर उनसे मुलाकात कर रही हैं. दासमुंशी ने कहा, “मैं यहां इसलिए आई क्योंकि मैं कल उनसे नहीं मिल पाई थी, क्योंकि वह गुरुवायूर गए हुए थे. अब वह लौट आए हैं, इसलिए उनसे मिलना मेरा कर्तव्य था.”

इस दौरान मुस्कुराते हुए चेन्निथला अपने समर्थकों के साथ पीछे खड़े दिखाई दिए. जब दासमुंशी से पूछा गया कि क्या चेन्निथला राज्य मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे, तो उन्होंने कहा, “रमेशजी यहां खड़े हैं. वह जो कहना चाहेंगे, स्वयं कहेंगे.” कांग्रेस ने 14 मई को सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री घोषित किया था, जिससे पार्टी नेतृत्व के फैसले को लेकर कई दिनों से जारी अटकलों पर विराम लग गया. कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने केरल विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया, लेकिन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विभिन्न गुटों की जोरदार पैरवी और जमीनी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते पार्टी को फैसला लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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CID ने 25 हजार का इनामी मोस्ट वांटेड बदमाश पकड़ा: उत्तर प्रदेश में खोल रही थी क्लिनिक, झोलाछाप डॉक्टर बनकर काट रहा था फरारी – Jaipur News




राजस्थान पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम ने 14 सालों से फरार 25 हजार रुपए के इनामी बदमाश को अरेस्ट किया है। उत्तर प्रदेश में क्लिनिक खोलकर वह झोलाछाप डॉक्टर बनकर फरारी काट रहा था। फरारी के दौरान फर्जी झोलाछाप डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज कर रहा था और ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था। CID टीम की ओर से मोस्ट वांटेड बदमाश से पूछताछ की जा रही है। ADG (क्राइम ब्रांच) बिपिन कुमार पाण्डेय ने बताया- आरोपी दुलाल बक्सी पुत्र चितरंजन निवासी विवेकानन्द पल्ली बनगांव पश्चिम बंगाल को अरेस्ट किया गया है। बाड़मेर जिले के बायतु थाने में साल-2012 में उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में ठिकाने बदलता रहा था। उसकी गिरफ्तारी को लेकर 25 हजार रुपए का इनाम रखा गया। पिछले 14 सालों से फरारी काटने के दौरान CID टीम को सूचना मिली कि मोस्ट वांटेड बदमाश दुलाल बक्सी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के कासिमाबाद क्षेत्र के एक गांव में फर्जी डॉक्टर बनकर क्लिनिक चला रहा है। CID टीम की ओर सूचना पर कार्रवाई करने पहुंची। शुरुआत में बचने के लिए आरोपी ने खुद का नाम पूछने पर दीपक बताया था। क्लिनिक में रखे औजारों से पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। झोलाछाप डॉक्टर बनकर फरारी काट रहे आरोपी दुलाल बक्सी को धर-दबोचा। गलत इंजेक्शन से हुई महिला की मौत
साल-2012 में आरोपी ने बाड़मेर के बायतु बस स्टैंड के पास मां क्लीनिक नाम से दुकान खोल रखी थी। वह खुद को नामी डॉक्टर बताता था। इसी दौरान काकड़ों की ढाणी निवासी महिला मगीदेवी को बुखार होने पर उसने गलत इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ा दिया। महिला की हालत बिगड़ते देख आरोपी परिजनों को दूसरी दवाई लाने का बहाना कर वहां से फरार हो गया। अस्पताल ले जाते समय महिला की मौत हो गई।



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कॉल गर्ल ने लिखीं 5 फिल्में, पांचों में थे एवरग्रीन ब्लॉकबस्टर गाने, हर मूवी रही सुपरहिट


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Shagufta Rafique Movies : ये दास्ता उस कॉलगर्ल की है जिसने प्यार के दर्द को महसूस किया. बचपन गरीबी में बीता. मां को भीख मांगते देखा तो पैसे कमाने की ठानी. यहां तक कि जिस्मफरोशी का पेशा शुरू किया. दुबई-यूएई के होटलों में डांस किया. किसी तरह परिवार को पाला. फिर किस्मत ने पलटा खाया. प्यार-दर्द और धोखे के जाल में बुनी ऐसी कहानियां लिखीं कि पूरा बॉलीवुड उसका दीवाना हो गया. पूरे बॉलीवुड को प्यार का मतलब सिखाया. अपनी पर्सनल लाइफ की कहनी को पर्दे पर उतारा. आइये जानते हैं इस 7वीं फेल कॉलगर्ल की निजी जिंदगी के बारे में जिसने कई सुपरहिट फिल्में लिखीं…………

‘हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते, तेरे बिना क्या वजूद मेरा’ और ‘सैया रे तू तो बदला नहीं है’ जैसे मेलोडियस गाने आपने भी जरूर सुने होंगे. ये गाने दर्द और प्यार का अहसास कराते हैं लेकिन इन फिल्मों को लिखने वाली स्क्रीन राइटर शगुफ्ता रफीक की पर्सनल लाइफ की कहानी कहीं ज्यादा दर्दनाक है. शगुफ्ता ने ‘वो लम्हे’, ‘आवारापन’, ‘धोखा’, राज 2, मर्डर 2, जन्नत 2, आशिकी 2 और सैयारा जैसी फिल्मों की कहानी लिखी है. इन फिल्मों की कहानी दर्शकों के दिल को छू गई. इन फिल्मों के गाने भी खूब पॉप्युलर हुए. हीरो-हीरोइन, डायरेक्टर-सिंगर का नाम सबको पता है लेकिन इन फिल्मों की कहानी लिखने वाली शगुफ्ता रफीक के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. शगुफ्ता कभी जिस्मफरोशी के धंधे में भी थीं.

Saiyaara aashiqui 2 writer shagufta rafique worked as call girl Prostitute bar dancer gave her heart to one who spent money wrote blockbuster movies

राइटर शगुफ्ता रफीक को एक्ट्रेस अनवरी बेगम ने गोद लिया था. यानी वो एडॉप्टेड चाइल्ड थीं, इसलिए बचपन से ही घरवालों के ताने सुनने को मिले. उनके असली मां-बाप कौन है, किसी को जानकारी नहीं है. अनवरी बेगम की बेटी सईदा खान 60-70 के दशक की एक्ट्रेस रही हैं. उन्होंने बृज सदाना से शादी की थी. इस तरह से शगुफ्ता का संबंध बॉलीवुड एक्टर कमल सदाना से है. शुगफ्ता का बचपन बेहद गरीबी में बीता. अनवरी बेगम के पति की मौत चुकी थी. गरीबी के चलते वो भीग मांगकर गुजारा करती थीं. तन ढंकने के लिए पैसे नहीं थे.

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ऐसे में होश संभालते ही श्गुफ्ता ने अपनी मां की मदद करने की ठानी. पढ़ाई में बहुत ज्यादा मन नहीं लगा. शगुफ्ता रफीक ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘जब मैं मुंबई की अंधेरी गलियों में थी, तकलीफ में थी, मेरी मां चाहती थी कि मैं एक्ट्रेस बनूं. फिर मैंने लिखना शुरू किया. ज्यादा पढ़ी-लिखी ना होने के बावजूद राइटर कैसे बन गईं? इस सवाल के जवाब में शगुफ्ता कहती हैं, ‘जब मैं छोटी थी तो झूठी कहानियां खूब बनाती थी. मां की डांट से बचने के लिए. मैंने सिर्फ सातवीं तक पढ़ाई की है. मुझे स्कूल से नफरत थी. मैंने 10वीं में 3 बार फेल हुई.’

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बचपन से लेकर जवानी तक शगुफ्ता ने सिर्फ संघर्ष देखा. शगुफ्ता ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कई साल तक भुखमरी झेली. घर में रखा सामान बेच दिया. घर के हालात बहुत खराब थे. ऐसे में 17 साल की उम्र में मैं कॉल गर्ल बन गई. मैंने पेशा करना शुरू कर दिया. कई साल तक यही क्रम चलता रहा. तब मेरी एक दोस्त थी. वो डांस बार में काम करती थी. वो बोली कि वेश्यावृत्ति कब तक करोगी. इससे तो बेहतर है कि तुम डांस करो.’

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शगुफ्ता बताती हैं कि जब से उन्होंने होश संभाला खुद को जिस्मफरोशी के धंधे में पाया लेकिन जिंदगी बदलने की चाहत में वो बार डांसर बनीं. और फिर सिंगर बनीं लेकिन डांस बार बंद होने से सालभर पहले एक शख्स ने जिंदगी बदल दी. जिंदगी बदलने की घटना ही आशिकी 2 फिल्म का बड़ा हिस्सा है. शगुफ्ता बताती हैं, ‘आशिकी 2 पिक्चर में मेरी जिंदगी का 30-40 प्रतिशत हिस्सा दिखाया गया है.’

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कॉल गर्ल, दुबई में मुजरे और जिस्मफरोशी में रहने वाली शगुफ्ता इस दलदल से कैसे निकलीं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैंने तय कर लिया था कि पूरी जिंदगी यह काम नहीं करूंगी, मेरी जिंदगी का वो एक फेज था, जिसने सबकुछ करवाया. मैंने किया भी इसलिए क्योंकि मेरी जो मां थी, मैं एडॉप्टेड बच्ची थी, उन्होंने मुझे एक जिंदगी दी. मैं हमेशा सोचती थी कि अगर उन्होंने मुझे एडॉप्ट नहीं किया होता तो मेरा क्या होता. वो मां जिसके पास हीरे-जवाहरात थे, उनका एक समय ऐसा आया जब वो गरीबी में फंस गईं. मुझे अपनी मां को सबकुछ वापस करना था. मैंने मां को भीख मांगते देखा तो जिस्मफरोशी शुरू की. उन्होंने मुझे बहुत डांटा लेकिन मैंने नहीं सुनी. मैंने दुबई-यूएई में डांस शुरू किए. वहां के होटले में नाचने के लिए आउटलेट बने होते हैं. मैंने इससे बहुत पैसे कमाए.’

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शगुफ्ता पर जिस शख्स ने बेशुमार पैसे लुटाए, उसी को वो दिल दे बैठी थीं. इस दिलचस्प लव स्टोरी के बारे में उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था. ‘सैयारा’ फिल्म की राइटर ने कहा था, ‘ मैं जब पहली बार दुबई गई तो मेरी उम्र 27 साल थी. मैं बहुत डरी हुई थी. ठीक से नाच भी नहीं पा रही थी. वहां पर मेरी मुलाकात एक पाकिस्तानी शख्स से हुई जिसकी उम्र करीब 45 साल थी. उसने मुझे बहुत पैसे दिए. होटल अथॉरिटी ने मुझे उससे मिलने की इजाजत दी. हमारी दोस्ती हो गई. एक हफ्ते में उसने मुझे शादी के लिए प्रपोज किया. हालांकि हमारे बीच 20 साल का फासला था, फिर मैं उससे शादी के लिए तैयार हो गई. ‘आशिकी 2 में आरोही की जिंदगी का किरदार मेरा ही है. राहुल जयकार का किरदार इस तरह के लोगों से इंस्पायर्ड है.’

साल 2002 में शगुफ्ता की मुलाकात महेश भट्ट से हुई. उन्हें शगुफ्त को किस्सागोई करने का मौका दिया. 2006 में मोहित सूरी की ‘कलयुग’ फिल्म के कुछ सीन्स शगुफ्ता ने लिखे थे. 2005 में डांस बार बंद होने के बाद शगुफ्ता की पहली फिल्म 2006 में आई. वो थी : वो लम्हे. शगुफ्ता बताती हैं, ‘जिस दिन मैंने पिक्चर साइन की, उसके दो दिन पहले मैं बार में डांस कर रही थी. मुझे भट्ट साहब का फोन आया. वो बोले कि मोहित सूरी तुमझे ‘वो लम्हे’ लिखवाना चाहता है. मैंने कहा कि मैं जॉब नहीं छोड़ सकती. ये सीन आशिकी 2 में भी है. भट्ट साहब ने मुझसे कहा था कि जब तुम्हें तसल्ली हो जाए, तब जॉब छोड़ देना.’

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महेश भट्ट के साथ संबंधों पर शगुफ्ता रफीक ने कहा, ‘भट्ट साहब और मैं सोलमेट हैं. कोई भी हमारे रिश्ते को गलत समझ सकता है. उनकी और मेरी पिछली जिंदगी एक जैसी है. जन्मतिथि भी सेम है. मेरी मां की शादी मेरे पिता से नहीं हुई थी. उनकी मां की शादी भी उनके डैड से नहीं हुई थी. या हुई तो छिपाया गया. नाजायज संतान माना गया.’

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यश ने 2025 में भी 5 लोगों को NEET पास कराया, CBI जांच में हैरान करने वाले खुलासे


नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। अभी भी कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ जारी है और गिरफ्तारी का आंकड़ा बढ़ सकता है। अब तक गिरफ्तार किए गए सात लोगों में तीन (मांगीलाल, दिनेश और विकास) जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके के हैं। 

यश यादव गुरुग्राम का रहने वाला है और पेपर लीक में यह बेहद अहम कड़ी है। इसके अलावा नासिक के शुभम, अहिल्या नगर के धनंजय और पुणे की मनीषा वाघमारे को भी गिरफ्तार किया गया है। पेपर लीक की ट्रेल मनीषा तक पहुंची है। अब तक यह नहीं पता चला है कि मनीषा के पास पेपर कैसे पहुंचा था। सातों आरोपियों को पहले राजस्थान की एसओजी और स्टेट पुलिस ने हिरासत में लिया था। सीबीआई ने जब इस मामले में एफआईआर दर्ज की इसी के आधार पर अब तक इन सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुणे की मनीषा ने लीक किया पेपर

अभी तक की जांच में सामने आया पुणे की मनीषा वाघमारे ने पेपर अहिल्या नगर के धनंजय को दिया। धनंजय ने पेपर नासिक के शुभम को दिया। शुभम ने पेपर गुरुग्राम के यश यादव को दिया। यश यादव ने पेपर जयपुर के जमवा रामगढ़ में रहने वाले मांगीराम और दिनेश को दिया। मांगीराम और दिनेश ने पेपर अपने बेटे विकास को दिया। विकास सीकर में पढ़ रहा है। उसने अपने भाई ऋषि को दिया और उसके दोस्तों को बेचा।

मांगीलाल ने बेटे के लिए मांगा था पेपर

सीबीआई जांच में सामने आया कि जयपुर के मांगीलाल ने अपने छोटे बेटे के लिए लीक नीट का पेपर दिलाने की मांग की थी। इसके लिए 10 से 12 लाख रुपए की डील तय की गई थी। जयपुर के मांगीलाल और गुरुग्राम के यश यादव की बातचीत व्हाट्सएप के जरिए हुई। यश यादव ने नासिक के शुभम से पैसे के बदले लीक पेपर उपलब्ध कराने को कहा। 29 अप्रैल को नासिक के शुभम ने गुरुग्राम के यश यादव से दसवीं बारहवीं की ओरिजिनल मार्कशीट, रोल नंबर और एक चेक सिक्योरिटी के तौर पर मांगा। गुरुग्राम के यश यादव ने अपने दोस्त यश कक्कड़ को जयपुर मांगीलाल के दस्तावेज और चेक लेने भेजा।

यश ने किया पेपर लीक का दावा

नासिक के शुभम ने दावा किया कि वह फिजिक्स केमिस्ट्री और बायोलॉजी के करीब 500 से 600 सवाल देगा, जिससे अच्छे नंबर आ सकते हैं और बड़े मेडिकल कॉलेज में एडमिशन भी मिल सकता है। 29 अप्रैल को यश यादव को टेलीग्राम पर पीडीएफ फाइल के जरिए लीक प्रश्न पेपर मिला। यश यादव ने लीक पेपर जयपुर के मांगीलाल को दिया। मांगीलाल को 29 अप्रैल को टेलीग्राम पर पेपर मिला। मांगीलाल ने लीक पेपर की प्रिंट कॉपी अपने बेटे अमन, रिश्तेदार ऋषि और गुंजन को दे दी, जो नीट के उम्मीदवार थे। मांगीलाल ने अपने बेटे विकास के दोस्तों को भी लीक पेपर बांटे। जांच पर यह भी सामने आया कि आंसर शीट के साथ लीक पेपर दिए गए और बदले में पैसे लिए गए। सीबीआई को मांगीलाल के मोबाइल फोन से इससे जुड़े अहम सबूत भी मिले हैं। 

2025 में भी बेचा था पेपर

मांगीलाल के बेटे विकास से पूछताछ में पता चला सीकर में कोचिंग के दौरान उसकी मुलाकात यश यादव से हुई थी। जांच में सामने आया कि गुरुग्राम के यश ने 2025 में विकास को 25 लाख रुपये में पेपर बेचा था। आरोप है कि इसी पेपर लीक की मदद से बिवाल परिवार के 5 भाई-बहनों का चयन हुआ। विकास, प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक — सभी ने परीक्षा पास कर सरकारी कॉलेज में एडमिशन लिया। जानकारी के मुताबिक, 2024 की परीक्षा में इन भाई-बहनों के नंबर सामान्य थे और कोई खास प्रदर्शन नहीं था, लेकिन 2025 में कथित तौर पर पेपर मिलने के बाद सभी के लगभग 98% तक अंक आए। जांच में यह भी सामने आया कि परिवार के ज्यादातर बच्चों ने किसी बड़ी कोचिंग के बिना ही अचानक बहुत अच्छे नंबर हासिल किए। 

ग्रेस से पास हुआ ऋषि बनने वाला था डॉक्टर

इस बार विकास के चचेरे भाई ऋषि को भी पेपर दिए जाने की तैयारी थी। ऋषि 12वीं में ग्रेस मार्क्स से पास हुआ था और उसके करीब 50% अंक थे। 10वीं में भी ऋषि के केवल 43% नंबर आए थे। एजेंसियों को शक है कि अगर पेपर लीक का मामला सामने नहीं आता, तो ऋषि की भी अच्छी रैंक आ सकती थी और उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल सकता था। एसओजी ने सीबीआई को राजस्थान के करीब 150 छात्रों की जानकारी दी है। आरोप है कि इन छात्रों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मांगीलाल, दिनेश और विकास से पेपर लिया था।

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केडीसी रेड ने 61 रनों से जीता फाइनल: बहराइच में साफवान खान बने टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी – Bahraich News




बहराइच के किसान डिग्री कॉलेज मैदान में केडीसी क्रिकेट अकादमी द्वारा आयोजित अंडर-16 समर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला केडीसी रेड और केडीसी ग्रीन टीम के बीच खेला गया। टॉस जीतकर केडीसी रेड के कप्तान किशन वर्मा ने पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया। निर्धारित 50 ओवर के इस मैच में केडीसी रेड ने 34 ओवर में 207 रन बनाकर ऑल आउट हो गई। अली खान ने सर्वाधिक 71 रन और नीरज निषाद ने 41 रनों का योगदान दिया। केडीसी ग्रीन की ओर से युवराज सिंह ने 3 विकेट लिए। 208 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए केडीसी ग्रीन की टीम 146 रनों पर सिमट गई। सोहेल खान ने 28, कबीर खान ने 26 और अभय ने 25 रन बनाए, लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका। केडीसी रेड की तरफ से अफजल शाह और अभिजोत त्रिपाठी ने 3-3 विकेट लिए, जबकि अब्दुल गनी को 2 सफलताएं मिलीं। इस तरह केडीसी रेड ने फाइनल मुकाबला 61 रनों से जीत लिया। शानदार प्रदर्शन के लिए अफजल शाह को फाइनल मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। टूर्नामेंट में उपमन्यु बाजपेई सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज, अभिजोत त्रिपाठी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज और साफवान खान सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए। फाइनल मैच में केडीसी प्रबंध समिति के सचिव मेजर डॉ. एसपी सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इफ्तिकार अली और पूर्व प्रधान अंकित शुक्ला विशिष्ट अतिथि थे। अतिथियों ने विजेता और उपविजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। मैच में आशुतोष कैराती और सत्यम पाठक ने अंपायरिंग की, प्रदीप गुप्ता स्कोरर रहे और तुषार ने आंखों देखा हाल सुनाया। इस अवसर पर अटल सिंह, तरुण वाजपेयी, सूरज तिवारी, तुषार सोनी, आयुष चित्रांश, अरुण राजपूत, सुएब अब्बासी, अरुण कुमार सहित कई लोग मौजूद थे।



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राजकोट में रातों-रात हनुमानजी समेत 12 मंदिर गिराए: लोग सड़कों पर उतरे, कहा- भाजपा हिंदुओं के दम पर, सत्ता जाने में ज्यादा देर नहीं लगेगी – Gujarat News




राजकोट में 14 मई की देर रात, लगभग 12 मंदिरों को एक साथ बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान, मावाड़ी मेन रोड पर स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। स्थानीय लोगों ने भाजपा की नीति पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर वोट मांगकर आई है। हिंदुओं ने भाजपा को भारी संख्या में वोट दिया। पार्षदों को वोट मिल गए हैं, इसलिए वे आज चैन से सो रहे हैं। भाजपा हिंदुओं के दम पर ही सत्ता में आई है। हिंदुओ को नाराज करक उसे सत्ता खोने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। विवाद से बचने देर रात शुरू हुई थी कार्रवाई राजकोट नगर निगम ने स्थानीय लोगों से झड़प से बचने के लिए सड़कों पर स्थित छोटे मंदिरों को गिराने का काम रात 1:30 बजे शुरू किया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुबह 5 बजे तक जारी रही। इसके लिए अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड, पीजीवीसीएल, सतर्कता विभाग और स्थानीय पुलिस की भी मदद ली। मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के पास एक हनुमान मंदिर को भी गिराने का नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और युवा बड़ी संख्या में मंदिर के बाहर जमा हो गए और सड़क पर रामधुन के नारे लगाने लगे। मंदिर के बाहर लगातार चार घंटे तक धरने पर बैठने के बाद विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया कि वे 48 घंटों के भीतर मंदिर का आकार छोटा कर देंगे। पार्षद चैन से सो रहे हैं: हितेशभाई स्थानीय हितेशभाई डाभी ने कहा- आज सत्ता में बैठे पार्षद चैन से सो रहे हैं। उन्हें जनता की कोई परवाह नहीं है। मैंने खुद पार्षदों और भानुबेन बाबरिया को फोन किया था, लेकिन अब उन्हें वोट मिल गए हैं, इसलिए वे चैन से सो रही हैं। हम दिन-रात मेहनत करते हैं और अचानक रात 1 बजे हमें बताया जाता है कि मंदिर ढहाया जाना है। मंदिर गिराकर आप क्या साबित करना चाहते हैं? मंदिर जनता की आस्था का केंद्र है। भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट मांगे थे। आज प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, सभी हिंदुत्व और सनातन के नाम पर सत्ता में आए हैं। अगर काम करना है तो राजकोट में और भी कई अच्छे काम हैं, उन पर ध्यान दीजिए। मंदिरों पर समय बर्बाद मत कीजिए। अगर आज 5 लोग जाग रहे हैं तो कल 5 हजार भी जागेंगे। इसलिए याद रखिए, आज आपके पास सत्ता है, लेकिन अगर जनता सोच ले तो इसे उखाड़ फेंकने में देर नहीं लगेगी। 35-40 साल पुराना मंदिर और जनता का समर्थन हमारा मंदिर मौदी मेन रोड पर ज्योति लाइट बिल के पास स्थित है। यह मंदिर 35-40 साल पुराना है। मंदिर के खंभे पर तारीख भी लिखी है, जाकर पढ़ लीजिए कि यह कितना पुराना है। अगर किसी को इस मंदिर से परेशानी होती तो जनता खुद शिकायत करती। यहां बड़ी-बड़ी दुकानें चलाने वाले दुकानदार भी कहते हैं कि ये हमारा ‘दादा’ है। अगर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है तो सरकार को क्यों है?



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