इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती जिले की नगर पंचायत बभनान बाजार द्वारा 66 दुकानों की नीलामी के लिए 8 मई 2026 को जारी सार्वजनिक सूचना को निरस्त कर दिया है।
साथ ही नगर पंचायत को कानून के अनुरूप नई नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने कृष्ण कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट में पेश की गईं दलीलें याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि नीलामी प्रक्रिया में सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। साथ ही नीलामी के लिए केवल स्थानीय स्थायी निवासियों को आवेदन की अनुमति देकर अन्य पात्र व्यक्तियों को बाहर कर दिया गया। याची वर्ष 2018 से नियमित रूप से किराया जमा कर संबंधित दुकान का संचालन कर रहा है, फिर भी उसे नीलामी प्रक्रिया से वंचित कर दिया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि नीलामी के लिए प्रस्तावित दुकानों का आकार और सटीक स्थान सार्वजनिक सूचना में स्पष्ट नहीं किया गया था, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। सुनवाई के दौरान नगर पंचायत की ओर से अदालत को बताया गया कि वह मौजूदा अधिसूचना वापस लेकर कानून के अनुरूप नई प्रक्रिया शुरू करेगी। इस पर हाईकोर्ट ने 8 मई 2026 की नीलामी सूचना को रद्द करते हुए नगर पंचायत को न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया।
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बभनान बाजार की 66 दुकानों की नीलामी रद्द: गाजीपुर का चर्चित मामला, हाईकोर्ट ने नई प्रक्रिया के दिए निर्देश – Prayagraj (Allahabad) News
सलमान खान का वो दर्दभरा गाना, सुनकर फूट-फूट कर रोने लगी थी सिंगर की पत्नी
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Salman Khan Sad Song : सलमान खान की फिल्म का एक दर्दभरा गाना असल में उनके लिए नहीं बना था. म्यूजिक कंपोजर इस्माइल दरबार ने बताया कि शुरुआत में इसे किसी दूसरे बड़े प्रोजेक्ट के लिए एक टेम्परेरी (स्क्रैच) ट्रैक के रूप में रिकॉर्ड किया जा रहा था. जब डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने यह गाना सुना, तो वे बहुत प्रभावित हुए. दिवंगत गायक केके ने पहले इसे गाने से मना कर दिया था, लेकिन समझाने पर जब उन्होंने इसे रिकॉर्ड किया, तो उनकी पत्नी सुनकर रो पड़ी थीं.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे दर्दभरे गानों की बात होती है, तो फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का गाना ‘तड़प तड़प के’ हर किसी की जुबान पर सबसे पहले आता है. इस आइकॉनिक गाने को लेकर म्यूजिक कंपोजर इस्माइल दरबार ने अब एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है. (फोटो साभार: IMDb/IANS)

इस्माइल दरबार ने बताया कि यह सुपरहिट गाना असल में सलमान खान और ऐश्वर्या राय स्टारर संजय लीला भंसाली की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म के लिए लिखा या बनाया ही नहीं गया था. शुरुआत में इस गाने की कहानी कुछ और ही थी और यह किसी दूसरे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने वाला था. (फोटो साभार: IMDb)

संगीतकार ने अपने पुराने दिनों के स्ट्रगल को याद करते हुए बताया कि यह गाना शुरू में किसी दूसरे बहुत बड़े प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ एक टेम्परेरी यानी ‘स्क्रैच ट्रैक’ के रूप में रिकॉर्ड किया जा रहा था. उस वक्त उनके पास भंसाली की यह बड़ी फिल्म नहीं थी. (फोटो साभार: IMDb)
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गीत आखिरकार फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली तक कैसे पहुंचा, इसकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है. आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, इस्माइल दरबार ने बताया कि करीब 6 महीने तक भंसाली के साथ उनका काम चलता रहा और फिर एक दिन उन्होंने भंसाली को यह गाना सुनाया. (फोटो साभार: IMDb)

गाना सुनते ही संजय लीला भंसाली बेहद भावुक और इम्प्रेस हो गए. उन्होंने इस्माइल दरबार से कहा, ‘आज मुझे पता चल गया कि मेरी फिल्म का इंटरवल कहां होगा और फिल्म का अंत कहां होगा. आज मैंने अपनी फिल्म पूरी कर ली है.’ (फोटो साभार: IMDb)

इस्माइल दरबार इंडियन आइडल के आने वाले एपिसोड में एक कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को देखकर इस गाने की पुरानी यादों में खो गए. उन्होंने दिवंगत और बेहद लोकप्रिय गायक केके (कृष्णकुमार कुन्नाथ) के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी शेयर किया. (फोटो साभार: IMDb)

इस्माइल दबार ने बताया कि बांद्रा के एक स्टूडियो में जब वे इस गाने का स्क्रैच रिकॉर्ड कर रहे थे, तब केके से उनकी पहली मुलाकात हुई. जब उन्होंने केके को यह गाना सुनाया, तो केके ने तुरंत कहा, ‘इस्माइल भाई, यह मेरी स्टाइल का गाना नहीं है, मैं इसे नहीं गा पाऊंगा.’ (फोटो साभार: IMDb)

हालांकि, इस्माइल दरबार को केके की वोकल रेंज और उनकी काबिलियत पर पूरा भरोसा था. उन्होंने केके को समझाया कि लो से लेकर हाई नोट्स तक उनकी आवाज बिल्कुल परफेक्ट है और उनसे गाना गवाना उनका काम है, जिसके बाद केके हंसते हुए गाने के लिए तैयार हो गए. जब गाना रिकॉर्ड हुआ, तो केके की पत्नी इसे सुनकर रो पड़ी थीं. (फोटो साभार: IMDb)
डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव को मिली धमकी: पार्सल बुकिंग का झांसा दिया, अपशब्दों का इस्तेमाल किया; साइबर थाने में शिकायत दर्ज – Patna News
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर अपशब्द कहे। धमकी भी दी है। कॉल करने वाले ने पार्सल बुकिंग का झांसा देकर संपर्क किया और बाद में लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए परेशान किया। मामला 5 जून का है। आप्त सचिव ने दर्ज कराई शिकायत इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री के आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने 5 जून को पटना साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर फ्रॉड गिरोह की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह मामला साइबर फ्रॉड और ठगी गिरोह से जुड़ा लग रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह पार्सल बुकिंग के नाम पर लोगों को डराने-धमकाने और फंसाने की कोशिश करता है। पुलिस जांच तेज, नंबर ट्रेस करने में जुटी टीम साइबर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू कर दी है। कॉल डिटेल और नंबर की ट्रेसिंग की जा रही है ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। पुलिस जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का दावा कर रही है।
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7 आरोपियों के कब्जे से 30 मोटरसाइकिल बरामद: चोरी की वारदात का 24 घंटे में खुलासा कर 5 को किया गिरफ्तार, पढ़ें क्राइम की प्रमुख खबरें – Jodhpur News
कमिश्ररेट के जिला वेस्ट में मोटरसाइकिल चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने और चोरी की घटनाओं में शामिल अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों एवं सक्रिय वाहन चोर गिरोहों की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर सूचना संकलन के साथ ही घटनास्थलों एवं आस-पास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया गया। मुखबिर तंत्र की सक्रियता और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीमों द्वारा शातिर मोटरसाइकिल चोरों की सघन तलाश एवं दबिश की कार्रवाई की गई। इनमें कुल 33 मोटरसाइकिल अब तक बरामद की जा चुकी है। आरोपियों से और बरामदगी के प्रयास जारी है। पुलिस थाना बासनी द्वारा 2 आरोपियो को गिरफ्तार कर 14 मोटरसाइकिल बरामद, पुलिस थाना सरदारपुरा द्वारा 3 मुलजिम गिरफ्तार कर 18 मोटरसाइकिल बरामद और पुलिस थाना बोरानाडा द्वारा 1 मुलजिम गिरफ्तार कर 1 मोटरसाइकिल बरामद की गई। पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेवरात व नगदी की बरामद सूरसागर थाना पुलिस ने चोरी की वारदार का 24 घंटे में ही खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वारदात में शामिल आरोपियों के कब्जे से जेवरात और नकदी भी बरामद की है। सूरसागर थानाधिकारी
हरीश चन्द्र सोलंकी ने बताया कि बुधवार को ऊंटो की घाटी सूरसागर निवासी शाहबाज बेलिम पुत्र इकबाल ने थाने में चोरी की रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के अनुसार 10 जून सुबह लगभग 3.00 बजे से 3.30 बजे के बीच उनके मकान में चोर घुस गये व घर में रखे सोने चांदी के आभूषण व रुपये चोरी कर ले गये। केस दर्ज होने के बाद थानाधिकारी हरीशचन्द्र सोलंकी के नेतृत्व मे एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने सूचना और सीसीटीवी कैमरे चेक कर आरोपियों साजिद, मुकेश उर्फ दुबा, सैफअली उर्फ सेफ, पृथ्वीराज उर्फ पियुष व संजय को पकड़ा। पुछताछ के बाद आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गहने और रुपये बरामद किये गये। अ जिला पश्चिम डीएसटी भंग डीसीपी कमल शेखावत ने आदेश जारी कर जिला जोधपुर पश्चिम की जिला विशेष टीम (डीएसटी)को भंग कर दिया। डीएसटी में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों अपनी उपस्थिति, तैनाती संबंधित थाना और पुलिसलाइन में देने के निर्देश दिए गए।
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चील सी रफ्तार और जैमिंग बेअसर, सेना को मिले 106 अग्निवेग सुसाइड ड्रोन
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Agniveg Kamikaze Drone: भारतीय सेना को एसएमपीपी डिफेंस फर्म से 106 स्वदेशी अग्निवेग पीसकीपर टर्बोजेट सुसाइड ड्रोन मिले हैं. यह ड्रोन 450 किमी/घंटा की रफ्तार और 180 किमी रेंज के साथ दुश्मन के कमांड सेंटर्स को तबाह कर सकता है. इसकी मारक सटीकता 5 मीटर से कम है और यह दुश्मन की भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग व स्पूफिंग को भी बेअसर कर देता है. यह आत्मनिर्भर भारत के तहत सेना की ताकत बढ़ाएगा.
भारतीय सेना की ताकत और बढ़ गई है.
भारतीय सेना को आधुनिक ड्रोन युद्ध में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है. देश की जानी-मानी डिफेंस फर्म एसएमपीपी ने भारतीय सेना को 106 बेहद आधुनिक टर्बोजेट-संचालित ‘अग्निवेग’ (पीसकीपर) कामिकेज़ सुसाइड ड्रोन की डिलीवरी पूरी कर दी है. रक्षा क्षेत्र में इसे एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है क्योंकि ये ड्रोन पारंपरिक तोपखाने और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के बीच के बड़े अंतर को पाटेंगे. ये ड्रोन दुश्मन की सीमा में बेहद अंदर घुसकर उनके कमांड सेंटर्स और रडार ठिकानों को पलक झपकते ही तबाह करने की ताकत रखते हैं.
सबसे खास बात यह है कि इन स्वदेशी सुसाइड ड्रोन्स को भारतीय सेना में ऐसे समय पर शामिल किया गया है, जब यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया है कि आधुनिक लड़ाई का रुख अब मानवरहित और सटीक मार करने वाले ड्रोन सिस्टम ही तय कर रहे हैं. इन ड्रोन्स की आपूर्ति महज 6 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर पूरी की गई है जो भारतीय रक्षा निर्माण उद्योग की बढ़ती रफ्तार को बयां करता है.
अग्निवेग पीसकीपर ड्रोन की 5 सबसे बड़ी और घातक खूबियां
• रफ्तार और मारक क्षमता का बेजोड़ कॉम्बिनेशन: अग्निवेग ड्रोन 450 किलोमीटर प्रति घंटे की अत्यधिक तेज रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसकी आपरेशनल रेंज 180 किलोमीटर तक है जिसका मतलब है कि यह दुश्मन के इलाके में गहरी पैठ बनाकर उनके लॉजिस्टिक हब और महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर सकता है.
• सटीकता में नंबर 1: सेना द्वारा किए गए कड़े यूजर ट्रायल्स के दौरान इस ड्रोन ने सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) के तहत 5 मीटर से भी कम का सटीक निशाना प्रदर्शित किया. यानी यह अपने टारगेट से 5 मीटर भी नहीं भटकता और एकदम पिन-पॉइंट स्ट्राइक (सटीक हमला) करता है.
• इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और जैमिंग भी बेअसर: दुश्मन के इलाके में मजबूत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जैमिंग वाले माहौल में भी यह ड्रोन पूरी तरह सुरक्षित रहकर अपना मिशन पूरा कर सकता है. दुश्मन की सेना चाहकर भी इसे हैक, जैम या इसके जीपीएस को स्पूफ (भ्रमित) नहीं कर पाएगी.
• कम लागत में मिसाइल जैसा असर: यह ड्रोन सिस्टम भारतीय सैन्य कमांडरों को बेहद कम लागत में एक बड़ा विकल्प देता है. पारंपरिक और बेहद महंगी मिसाइलों की तुलना में ये कामिकेज ड्रोन एक चौथाई खर्च में दुश्मन को उतना ही भारी और घातक नुकसान पहुंचा सकते हैं.
• भविष्य के लिए और भी एडवांस वेरिएंट तैयार: एसएमपीपी कंपनी ने सेना को वर्तमान ऑर्डर के तहत 100 ऑपरेशनल ड्रोन और 6 ट्रेनिंग ड्रोन सौंप दिए हैं. इसके साथ ही कंपनी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना को इससे भी ज्यादा दूरी तक मार करने वाले (एक्सटेंडेड रेंज) वेरिएंट का प्रस्ताव भी दे दिया है.
रणनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण
पीसकीपर (अग्निवेग) ड्रोन का भारतीय सेना में शामिल होना इस बात का साफ संकेत है कि भारत अब भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है. अप्रैल 2026 में ही भारतीय सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) और लोइटरिंग म्यूनिशन्स (सुसाइड ड्रोन) को लेकर अपना एक विस्तृत टेक्नोलॉजी रोडमैप जारी किया था. यह डिलीवरी उसी रणनीति का हिस्सा है. टर्बोजेट इंजन होने की वजह से इन ड्रोन्स की गति सामान्य ड्रोन्स से कहीं ज्यादा है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को इन्हें ट्रैक करने और मार गिराने के लिए बेहद कम समय मिलेगा.
इसके अलावा अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग वाले माहौल में भी काम करने की इसकी क्षमता इसे भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं (पाकिस्तान और चीन सीमा) के लिए बेहद उपयोगी बनाती है, जहाँ दुश्मन अक्सर जीपीएस जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करता है. यह डिलीवरी रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूत करती है, क्योंकि अब भारत को ऐसे घातक हथियारों के लिए दूसरे देशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा.
सवाल-जवाब
अग्निवेग (पीसकीपर) ड्रोन की अधिकतम रफ्तार और मारक क्षमता की रेंज कितनी है?
अग्निवेग ड्रोन की अधिकतम रफ्तार 450 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह 180 किलोमीटर की दूरी तक जाकर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है. यह बहुत ही तेज गति से स्वायत्त (ऑटोनॉमस) सटीकता के साथ मिशन को अंजाम देने में सक्षम है.
इस ड्रोन को ‘कामिकेज़’ या सुसाइड ड्रोन क्यों कहा जा रहा है और इसकी सटीकता क्या है?
कामिकेज़ या सुसाइड ड्रोन का मतलब होता है कि यह ड्रोन खुद विस्फोटक बनकर टारगेट से सीधे टकरा जाता है और उसे ब्लास्ट कर देता है. यूजर ट्रायल में इसकी सटीकता (CEP) 5 मीटर से भी कम पाई गई है, जो इसे बेहद अचूक बनाती है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें
इंग्लैंड से मैहर पहुंचे तीन विदेशी श्रद्धालु: मां शारदा के दर्शन किए, कैमा में सुनी हनुमंत कथा – Maihar News
इंग्लैंड से आए विदेशी श्रद्धालुओं के एक दल ने गुरुवार को मैहर पहुंचकर मां शारदा देवी के दर्शन किए। सभी श्रद्धालु पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ माता की पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद लिया। मां शारदा के दर्शन करने के बाद विदेशी मेहमान सतना जिले के सिद्धेश्वर धाम कैमा पहुंचे। यहां चल रही हनुमंत कथा में उन्होंने बड़ी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। इस कथा का वाचन बड़ा अखाड़ा मैहर के प्रसिद्ध संत श्री 1008 वल्लभ शरण जी महाराज कर रहे थे। कथा खत्म होने के बाद श्रद्धालुओं ने संत श्री वल्लभ शरण जी महाराज से आशीर्वाद लिया और भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर बातचीत की। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी अरुण तनय मिश्रा भी विदेशी मेहमानों के साथ मौजूद रहे और उनका सहयोग किया। अब मथुरा-वृंदावन के लिए रवाना जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड से आए ये तीनों श्रद्धालु मैहर और सतना का अपना धार्मिक दौरा पूरा करने के बाद आगे की यात्रा के लिए श्री कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन के लिए रवाना हो गए हैं।
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रोटी-सब्जी से हो गए बोर? रात के खाने में ट्राई करें टेस्टी बेसन पनीर चीला
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Besan Paneer Chilla Recipe: बेसन पनीर चीला उन लोगों के लिए बढ़िया डिनर विकल्प है जो हल्का, जल्दी बनने वाला और स्वादिष्ट खाना चाहते हैं. कम सामग्री और आसान विधि इसे रोजमर्रा के खाने में शामिल करने लायक बनाती है.
बेसन पनीर चीला बनाने की आसान रेसिपी
Besan Paneer Chilla Recipe: अगर रोज रात को यही सवाल रहता है कि आज डिनर में क्या नया बनाया जाए, तो इसका जवाब आपकी किचन में पहले से मौजूद हो सकता है. कई घरों में रात के खाने का मेन्यू रोटी, सब्जी या पराठों तक सीमित रह जाता है और धीरे-धीरे वही स्वाद उबाऊ लगने लगता है. ऐसे में अगर आप कुछ ऐसा चाहते हैं जो जल्दी बन जाए, ज्यादा भारी न लगे और खाने में भी मजेदार हो, तो बेसन पनीर चीला एक शानदार विकल्प हो सकता है. यह डिश स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन देती है.
खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा तैयारी या लंबे समय की जरूरत नहीं होती. बच्चों से लेकर बड़े तक इसे आसानी से पसंद कर लेते हैं और यह डिनर को थोड़ा अलग और दिलचस्प बना देता है.
क्यों बन रहा है बेसन पनीर चीला लोगों की पसंद?
आजकल लोग ऐसे डिनर विकल्प तलाश रहे हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ हल्के और जल्दी बनने वाले भी हों. बेसन पनीर चीला इसी वजह से धीरे-धीरे घरों में लोकप्रिय हो रहा है. बेसन में मौजूद प्रोटीन और पनीर की अच्छी मात्रा इसे पेट भरने वाला बनाती है, जबकि यह ज्यादा तला-भुना भी नहीं होता. कई लोग देर रात भारी खाना खाने से बचते हैं. ऐसे में यह रेसिपी उन लोगों के लिए भी अच्छी मानी जाती है जो हल्का लेकिन संतुष्ट करने वाला डिनर चाहते हैं. साथ में हरी चटनी या दही हो तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है.
बेसन पनीर चीला बनाने के लिए जरूरी सामग्री
1. 1 कप बेसन
2. 100 ग्राम कद्दूकस किया हुआ पनीर
3. 1 छोटा प्याज बारीक कटा हुआ
4. 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
5. 2 बड़े चम्मच हरा धनिया
6. आधा छोटा चम्मच अजवाइन
7. एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
8. आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
9. स्वादानुसार नमक
10. लगभग तीन चौथाई कप पानी
11. 1 से 2 छोटे चम्मच तेल या घी
बेसन का घोल कैसे तैयार करें?
स्मूद बैटर ही देगा अच्छा स्वाद
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बेसन लें और उसमें हल्दी, लाल मिर्च, अजवाइन और नमक मिला दें. अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए ऐसा घोल तैयार करें जिसमें गांठें न रहें. घोल बहुत पतला भी न हो और बहुत गाढ़ा भी नहीं. घोल तैयार होने के बाद उसे 5 से 10 मिनट के लिए ढककर रख दें. इससे बेसन थोड़ा सेट हो जाता है और चीला ज्यादा मुलायम बनता है.
पनीर की स्टफिंग तैयार करने का आसान तरीका
एक अलग बाउल में कद्दूकस किया हुआ पनीर लें. उसमें प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. अगर आपको थोड़ा अलग स्वाद पसंद है तो हल्का चाट मसाला या काली मिर्च भी डाल सकते हैं. इससे स्टफिंग ज्यादा फ्लेवरफुल बन जाती है.
ऐसे बनाएं होटल जैसा बेसन पनीर चीला
तवा गर्म करें और उस पर हल्का तेल लगाएं. अब एक करछी बेसन का घोल डालकर गोल आकार में फैला दें. जब चीला थोड़ा पकने लगे तो उसके ऊपर तैयार पनीर स्टफिंग फैलाएं. इसके बाद ऊपर से थोड़ा सा बेसन घोल डालें ताकि स्टफिंग अच्छी तरह सेट हो जाए. किनारों पर थोड़ा तेल या घी डालें और मध्यम आंच पर पकाएं. जब नीचे की तरफ सुनहरा रंग आने लगे तो चीले को पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेंक लें. कुछ मिनट बाद आपका बेसन पनीर चीला तैयार होगा.
डिनर को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो ऐसे सर्व करें
इसे हरी चटनी, दही या हल्के सलाद के साथ परोसें. कई घरों में लोग इसके साथ पुदीना चटनी या मसाला दही भी पसंद करते हैं. इससे डिनर ज्यादा बैलेंस्ड और स्वादिष्ट महसूस होता है. अगर आप रोज-रोज एक जैसा डिनर खाकर बोर हो चुके हैं और कम समय में बनने वाली नई रेसिपी तलाश रहे हैं, तो बेसन पनीर चीला एक आसान और स्वाद से भरपूर विकल्प हो सकता है. यह ऐसा खाना है जो जल्दी तैयार होता है और खाने के बाद भारीपन भी नहीं देता.
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मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें
दिल्ली में 39 जन कल्याण शिविरों की तैयारी: 18 से 20 जून तक लगेंगे, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश – New Delhi News
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 18 से 20 जून तक दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में 39 जन कल्याण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा। इन जन कल्याण शिविरों की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुधवार को दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा बैठक की अध्यक्षता दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने की। बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, एमसीडी, बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान शिविरों के सफल आयोजन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा नागरिकों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का उद्देश्य इन शिविरों के माध्यम से पात्र नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाना भी है।
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MDA का बुलडोजर एक्शन, अवैध कॉलोनी और निर्माण किए ध्वस्त: नोटिस के बावजूद नहीं रुका निर्माण, पुलिस की मौजूदगी में 12,500 वर्गमीटर में चला ध्वस्तीकरण अभियान – Muzaffarnagar News
मुज़फ्फरनगर। MDA ने गुरुवार शाम सहारनपुर रोड स्थित दो बड़े अवैध निर्माण स्थलों पर बुलडोजर चलाकर करीब 12,500 वर्गमीटर क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। यह कार्रवाई जोन-4 क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से बिना स्वीकृति प्लाटिंग और निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। एमडीए की टीम ने सबसे पहले नीरज चौहान द्वारा सहारनपुर रोड पर विकसित की जा रही लगभग 1,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल की अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया। इसके बाद भूषण ठाकुर पुत्र मेहर सिंह, ब्रजमोहन और अन्य लोगों द्वारा करीब 11,000 वर्गमीटर क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। बताया गया कि दोनों मामलों में विकास प्राधिकरण द्वारा पहले नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए सुनवाई की गई और अवैध निर्माणों को हटाने के आदेश भी पारित किए गए थे। बावजूद इसके निर्माण गतिविधियां जारी रहने पर गुरुवार को प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान सहारनपुर रोड क्षेत्र में काफी देर तक हलचल का माहौल रहा। प्राधिकरण अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माणाधीन ढांचों, अवैध रूप से विकसित प्लॉटों और अन्य संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। किसी भी विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि शहर और उसके आसपास अवैध कॉलोनियों तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्यों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों को बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि बिना प्राधिकरण की अनुमति के भूमि विकास और निर्माण कार्य न करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। शहर में बढ़ती अवैध प्लाटिंग पर यह हाल के दिनों की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में चिन्हित अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी जल्द इसी प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।
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43 साल पहले आया वो रुहानी सॉन्ग, उतर गया दिल में, फ्लॉप मूवी निकली मैसिव हिट
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Bollywood Timeless Movie : रिश्तों की संवेदनाएं मासूम होती है. संवेदनाओं के हर आगे हर कोई मासूम ही है. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती के स्टारडम के बीच एक ऐसे ही फिल्म रिलीज हुई थी जिसका फ्लॉप होना तय था. रिलीज के शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में इस फिल्म को दर्शक नहीं मिले. डायरेक्टर समेत फिल्म के सभी कलाकार उम्मीदें छोड़ चुके थे. सब कोई मान गया था कि इसे फ्लॉप होने से कोई बचा नहीं सकता. दिन-प्रतिदिन गहरी होती निराशा के बीच चमत्कार हुआ. कुछ ऐसा ही करिश्मा कभी शोले के साथ हुआ था. फिल्म मैसिव हिट निकली. गाने इतने कालजयी कि सुनते ही परेशान दिल को सुकून मिलता है.
कई बार जिंदगी में मासूम से सवालों का जवाब ढूंढना मुश्किल हो जाता है. एक शख्स के अतीत के रिश्ते से एक नाजायज औलाद उसकी शादीशुदा जिंदगी में आ जाती है. उसे अब अतीत पर पछतावा है, पिता की जिम्मेदारी भी निभानी है. अपने टूटते हुए घर को भी बचाना है. अब उसके सामने मासूम सा सवाल है कि वो करे तो क्या करे. उसकी पत्नी यह सब देखकर भरोसा खो चुकी है. गहरे मानसिक संताप से गुजर रही है. वो बच्चे को अपनाना चाहती है लेकिन अपना नहीं पाती. इन सबके वो मासूम बच्चा जो अपनी मां को खो चुका है, नए घर में खुद को कैसे एडजस्ट करे, अपनी जगह कैसे बनाए, उसके सामने भी मासूम सवाल है जिसका जवाब वो ढूंढने की कोशिश करता है. इन सभी मासूम सवालों का जवाब 1983 में आई एक फिल्म खूबसूरती से देती है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की चुनिंदा फिल्मों में शुमार है. फिल्म में स्वीकार्यता और क्षमादान दो ऐसे एलिमेंट है जो सभी सवालों का जवाब बन जाते हैं.

43 साल पहले प्यार, जिम्मेदारी, नैतिकता और स्वीकार्यता का मेल कराती एक बेहतरीन फिल्म आई थी जिसका नाम था : मासूम. फिल्म 21 अक्टूबर 1983 को रिलीज हुई थी. निर्देशन शेखर कपूर ने किया था. नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी स्टारर यह फिल्म ना केवल अपने समय की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है बल्कि इसका प्रभाव हिंदी सिनेमा पर बहुत ज्यादा पड़ा. सईद जाफरी भी अहम भूमिका में थे. फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. फिल्म एरिक सहगल के 1980 के नॉवेल मैन वुमेन एंड चाइल्ड पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले गुलजार ने लिखा था. चंदन दत्त-देवी दत्त ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. चंदन दत्त बॉलीवुड लीजेंड गुरु दत्त के भाई थे. उनके प्रोडक्शन में बनी यह पहली फिल्म थी. बाद में उन्होंने ‘भावना’ फिल्म बनाई थी.

फिल्म की कहानी डीके मल्होत्रा की है जो अपनी पत्नी इंदु और दो बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. इस खुशहाल परिवार को समय की नजर लग जाती है. डीके को पता चलता है कि अतीत के एक रिश्ते से उनका एक बेटा राहुल है. राहुल की मां का निधन हो चुका है, अब वो अकेला है. डीके अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसे घर ले आते हैं. फिल्म की कहानी इस नाजुक स्थिति को बहुत ही सटीकता के साथ दिखाती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे डीके और इंदु जीवन की कड़वी सच्चाई का सामने करते हैं. कैसे अपने रिश्ते को संभालते हैं. कैसे छोटा बच्चा राहुल नए घर में खुद की जगह बना पाता है.
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सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल आई ‘बंधन कच्चे धागों का’ में भी सेम स्टोरी लाइन थी. ‘मासूम’ टाइटल से अब तक तीन फिल्में बन चुकी हैं. 1960, 1983 और 1996 में ‘मासूम’ फिल्म आ चुकी है लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1983 में आई ‘मासूम’ फिल्म को मिली. 1960 में आई ‘मासूम’ फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था. अशोक कुमार लीड रोल में थे. सरोस ईरानी और हनी ईरानी ने बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था. फिल्म मैसिव हिट रही थी. इसी तरह 1996 में भी ‘मासूम’ टाइटल से फिल्म आई. महेश कोठारे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इंदर कुमार, आयशा जुल्का लीड रोल में थे. 1.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म मे करीब 9 करोड़ का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म भी हिट रही थी. ‘मासूम’ 1996 का एक गाना ‘काले लिबास में बदन’ खूब पॉप्युलर हुआ था. इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस फिल्म को ना बनाने की सलाह शेखर कपूर को दी थी. उनका कहना था कि ना तो फिल्म में विलेन है और ना कोई एक्शन है. कहा जाता है कि शेखर कपूर प्रोड्यूसर को किसी और फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने पहुंचे थे. 5 मिनट में प्रोड्यूसर को बोरियत फील होने लगी. शेखर कपूर ने देखा कि प्रोड्यूसर के ऑफिस में ‘मैन वुमेन एंड चाइल्ड’ नॉवेल रखा हुआ है. उन्होंने नॉवेल की स्टोरी सुना दी. प्रोड्यूसर को कहानी बहुत अच्छी लगी और वो फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए.

‘मासूम’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 4 गाने थे. ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं’ गाने के दो वर्जन था. पहला वर्जन अनूप घोषाल और दूसरा वर्जन लता मंगेशकर ने गाया था. ‘दो नैना और एक कहानी’ आरती मुखर्जी ने गाया था. गाना असाधारण है. लीक से हटकर है. उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. फिल्म का एक और यादगार गाना ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ आज भी कितना हिट है, आप सभी जानते हैं. सभी गाने गुलजार ने लिखे थे. गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. लो बजट फिल्म के लिए पंचम दा ने अपने करियर का बेस्ट म्यूजिक तैयार किया उन्हें बेस्ड म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाने से जुड़ा किस्सा दिलचस्प है. दरअसल गीतकार गुलजार अपनी बेटी मेघना गुलजार के लिए हर साल एक फनी कविता लिखा करते थे. ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाना उसी किताब से लिया गया था. गाने के शुरुआती लाइनें संगीतकार उत्तम सिंह की बेटी गुरुप्रीत कौर ने गाई थीं. वो उस समय सिर्फ चार साल की थीं.

‘मासूम’ मूवी शेखर कपूर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी. शेखर कपूर के मामा देवानंद थे. उनकी मां शीलाकांता एक्ट्रेस-पत्रकार थीं. शेखर कपूर लंदन से सीए की पढ़ाई करके भारत आए. पहले हीरो बनने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. फिर निर्देशन में हाथ आजमाया. निर्देशन की दुनिया में उन्होंने बड़ा नाम कमाया. ‘मासूम’ के बाद ‘मिस्टर इंडिया’ से उन्होंने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था. शेखर कपूर ने सतीश कौशिक से दोस्ती निभाई. उन्हें ‘मासूम’ में भी छोटा सा रोल दिया और ‘मिस्टर इंडिया’ में कैलेंडर का रोल दिया. मिस्टर इंडिया से सतीश कौशिक का करियर चमक गया.

नसीरुद्दीन शाह को ‘मासूम’ के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. यह उनका तीसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड था. इससे पहले उहें पांच बेस्ट एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. नसीरुद्दीन शाह इस फिल्म में सुप्रिया पाठक के अपोजिट नजर आए थे. वो रिश्ते में उनकी साली साहिबा हैं. नसीरुद्दीन साहब को प्रोड्यूसर ने पेमेंट नहीं दिया था, वो बहुत नाराज हुए. उन्होंने ‘भावना’ फिल्म के सेट पर खूब हंगामा किया था जहां पर प्रोड्यूसर देवी दत्त मौजूद थीं. शबाना आजमी सहित पूरी यूनिट यह सब देखकर सन्न रह गई थी.

बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट जुगल हंसराज की यह डेब्यू फिल्म थी. उर्मिला मांतोडकर और आराधना श्रीवास्तव ने भी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया. जुगल हंसराज-उर्मिला मांतोडकर की 1994 में ‘आ गले लग जा’ में बतौर लीड एक्टर काम किया. मासूम मूवी के बजट की सटीक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी. उस साल की 14वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

