आध्यात्मिक धर्म गुरु संत प्रेमानंद महाराज का एक भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के आधिकारिक यू ट्यूब चैनल पर चल रहे इस संदेश के सामने आने के बाद उनके शिष्य चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि इस वीडियो के वायरल होने के बाद उनका शिष्य,भक्त या फिर आश्रम से जुड़ा कोई भी व्यक्ति इसके मायने बताने के लिए तैयार नहीं है। क्या कहा पहले ये जानिए वायरल हो रहे संदेश में संत प्रेमानंद महाराज कहते हैं बिल्कुल चिंता मत करो,हम मिलें न मिले,बोलें न बोलें हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। यदि प्यार पर तुम्हें विश्वास है तो और सबको चाहते हैं कि श्री जी की कृपा प्राप्त हो और सब श्री जी के चरणों तक पहुंचे। अंतिम बात यह है कि बिल्कुल चिंता नहीं करनी है में मिलूं न मिलूं,बोलूं न बोलूं, आऊं न आऊं। न यह चिंता करनी है कि कैसे कैसे हमारा उत्थान होगा। बिना बोले तुम्हारे दिमाग में हम होंगे देख लेना। तुम वहीं करोगे जो गुरुदेव कहेंगे। सभी बिल्कुल निश्चिंत रहें संत प्रेमानंद महाराज कहते हैं आप सभी निश्चिंत रहिएगा,जो जिस सेवा में है उस सेवा में रहिएगा। खूब नाम जप करो हम रहें न रहें,आएं न आएं,मिलें न मिले तुम्हारा मंगल होगा। तुम्हारे गुरुदेव तुम्हारे दिमाग में बैठे रहेंगे। तुम्हारा भरण पोषण इष्ट के द्वारा होगा किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं। जब लगे कि इस व्यक्ति के द्वारा हो रहा है तो छोड़ देना। इसके बाद संत प्रेमानंद महाराज कहते हैं आप निर्भय,निश्चिंत,निशोक भजन परायण हो। हमारा जब मन होगा तब बोल देंगे,नहीं हम मौन,चुपचाप,शांत एकांतवास कर रहे हैं। वह एकांत आपके लिए ही है हमारे लिए एकांत नहीं है। हमारे लिए भजन नहीं कर रहे हैं,हमारे लिए हमारा मौन नहीं है। हम आपको सही बताएं हमारा जो कुछ होना था वह हो गया है,जो कुछ हो रहा है वह आप सबके लिए हो रहा है। वीडियो के अंत में वह कहते हैं खूब भजन करो,नाम जप करो और सुखी रहो,प्रसन्न रहो। भक्तों को सताई चिंता संत प्रेमानंद महाराज के भावुक संदेश का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनके भक्तों में चिंता है। कमेंट में एक यूजर लिखते हैं गुरुदेव महाराज का यह संदेश सुनकर चिंता हो रही है,लाडली जू कृपा करें। एक अन्य यूजर लिखते हैं आपके इन शब्दों से मन विचलित हो रहा है प्रभु। एक अन्य यूजर ने लिखा है मन विचलित हो रहा है प्रभु,हम आपके बिना नहीं रह सकते,मन बहुत घबरा रहा है। एक और यूजर लिखते हैं आज पहली बार मन घबरा रहा है प्रभु,हे लाडली जू गुरुदेव को स्वस्थ रखना। 17 मई से नहीं कर रहे पदयात्रा संत प्रेमानंद महाराज की रात में होने वाली पदयात्रा इन दिनों स्थगित चल रही है। 17 मई से संत प्रेमानंद महाराज ने पदयात्रा,एकांतिक दर्शन और वार्तालाप स्थगित किया हुआ है। दो दिन पहले संत प्रेमानंद महाराज अपने केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने उनके आश्रम गए थे।
Source link
वीरप्पन का काल, नक्सलियों का बाप! संकटमोचक विजय कुमार से जिन्हें मिला पद्मश्री
Last Updated:
खूंखार चंदन तस्कर वीरप्पन का अंत करने वाले और नक्सलियों के गढ़ में घुसकर उन्हें चुनौती देने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी के. विजय कुमार को साल 2026 के प्रतिष्ठित पद्मश्री (Padma Shri) सम्मान से नवाजा गया है. अपने पांच दशक के शानदार करियर में उन्होंने हमेशा मुश्किलों का सीना तानकर सामना किया. 2010 के दांतेवाड़ा नक्सली हमले के बाद रात के अंधेरे में उसी खूनी जंगल में जवानों के साथ रुकना हो, या श्रीनगर में फिदायीन हमलों को रोकना, विजय कुमार ने हर मोर्चे पर शानदार नेतृत्व किया. आइए जानते हैं उस ‘संकटमोचक’ की कहानी, जिसने आईएएस की कुर्सी ठुकराकर वर्दी चुनी.
के विजय कुमार को आज मिलेगा पद्म श्री अवॉर्ड.
Padma Shri Award K. Vijayan: कहते हैं कि जब हालात सबसे बुरे हों, तब असली हीरो की पहचान होती है. भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के पूर्व अधिकारी के. विजय कुमार एक ऐसे ही ‘संकटमोचक’ हैं, जो देश पर आए हर संकट में सबसे आगे खड़े नजर आए. मुश्किल जगहों पर जाने की उनकी इसी सहज आदत और अद्भुत बहादुरी को सलाम करते हुए, उन्हें साल 2026 के प्रतिष्ठित ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
के. विजय कुमार को पुलिस की नौकरी का जुनून था. उनके पिता खुद एक पुलिस इंस्पेक्टर थे और हमेशा स्मार्ट यूनिफॉर्म में रहते थे. एक छोटे लड़के के रूप में विजय कुमार के लिए पिता की वह झलक सबसे बड़ी प्रेरणा थी. उन्होंने एमए (MA) की पढ़ाई पूरी की. 1975 में आईपीएस के लिए चुन लिए गए. दिलचस्प बात यह है कि एक साल बाद जब उनका चयन प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए भी हो गया, तो उन्होंने इसे साफ ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें यूनिफॉर्म (वर्दी) से गहरा लगाव था.
खूनी मंजर और डीजी का हौसला
उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण पल अप्रैल 2010 में आया, जब वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के डीजी थे. छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर भीषण हमला किया, जिसमें 75 जवान शहीद हो गए. हालात बेहद तनावपूर्ण और गंभीर थे.
लेकिन एक सच्चे लीडर की तरह, विजय कुमार तुरंत उस खूनी जंगल में पहुंचे और रात भी ठीक उसी जगह बिताई जहां घास लगाकर वह कायराना हमला किया गया था. उनका यह कदम जवानों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश था. इससे पूरी फोर्स का हौसला बढ़ गया. उनकी सीख साफ थी – ‘जिस जगह मुसीबत हो, वहीं जाओ.’
विजय कुमार का पांच दशकों का करियर ऐसे ही साहसिक कारनामों से भरा पड़ा है
- धर्मापुरी में नक्सलवाद पर प्रहार: करियर के शुरुआती दिनों में जब उन्हें धर्मापुरी का एसपी (SP) बनाया गया, जो नक्सलियों का गढ़ था – तब उन्होंने खुद रातों में नाइट पेट्रोलिंग की, लोगों का विश्वास जीता और इलाके की तस्वीर बदल दी.
- कारगिल युद्ध और श्रीनगर: 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, वह श्रीनगर में बीएसएफ (BSF) के आईजी थे. वहां फिदायीन हमलों का जबरदस्त खौफ था, लेकिन उन्होंने अपने सिस्टेमेटिक एप्रोच से श्रीनगर में हालात को पूरी तरह कंट्रोल में कर लिया.
- ऑपरेशन कोकून (वीरप्पन का अंत): अगली और सबसे बड़ी चुनौती चंदन और हाथी दांत के कुख्यात तस्कर वीरप्पन से निपटना था. साल 2004 में तमिलनाडु के घने जंगलों में, विजय कुमार के नेतृत्व में ही ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ (STF) ने वीरप्पन को मार गिराया था.
परिवार मेरी सबसे बड़ी ताकत
आज जब उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से नवाजा गया है, तो वह इसका पूरा श्रेय अपने परिवार और सहकर्मियों को देते हैं. विजय कुमार भावुक होकर कहते हैं, ‘अगर उन्होंने परिवार की पूरी जिम्मेदारी ना संभाली होती, तो मुझे नहीं लगता मैं आज यहां होता. वह मेरी सबसे बड़ी ताकत थीं.’ उनका जीवन फलसफा बेहद सीधा और प्रेरणादायक है, ‘किसी भी काम में, अगर आपको अपना काम पसंद है, तो आप उसमें अच्छा करने लगते हैं, अपना बेस्ट देने लगते हैं और आप अपने आप सबसे ऊपर पहुंच जाते हैं.’
About the Author

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें
भास्कर अपडेट्स: CBSE ने आंसर शीट लेने की लास्ट डेट आज रात तक बढ़ाई
- Hindi News
- National
- Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar
12 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 12वीं के छात्रों के लिए स्कैन की गई आंसर शीट लेने की लास्ट डेट सोमवार 25 मई रात तक बढ़ा दी है। पहले यह तारीख 24 मई थी।
बोर्ड ने यह भी कहा कि जिन छात्रों से तकनीकी गड़बड़ी के कारण ज्यादा फीस कट गई थी, उन्हें पैसे वापस किए जाएंगे। री-इवैल्यूएशन की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
आज की अन्य बड़ी खबरें…
PM मोदी के दौरे से पहले विस्फोटक मिलने पर 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले जिलेटिन स्टिक और टाइमर मिलने के मामले में 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें एक सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और चार कांस्टेबल शामिल हैं।
यह विस्फोटक सामग्री आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के पास मिली थी। मामले की जांच में अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी शामिल हो गई है।
भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होगा: मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन शहर की बस सेवा; स्मार्ट सिटी सीईओ के पास प्रभार – Bhopal News
भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड(बीसीएलएल) राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगमपरिवहन सेवा’ का हिस्सा बन गई है। इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौरऔर एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता था, लेकिन अब कमान पूरी तरह प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी। नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।
सिफारिशें नहीं चलेंगी जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज यानई बसें चलाने में अब पार्षदों या एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे। भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगमपर निर्भरता खत्म होगी। बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने वाली शिकायतों (जैसे चालकों कीमनमानी, समय पर बस न मिलना) कोदूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी। कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी। भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें
योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी। सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडलपर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा। बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।
Source link
जयपुर में कार ने बाइक सवार दंपती को उड़ाया, VIDEO: रोड क्रॉस करते समय मारी टक्कर, 20 फीट दूर उछलकर दूर जा गिरे – Jaipur News
जयपुर में ओवर स्पीड कार के बाइक सवार दंपती को उड़ाने का मामला सामने आया है। रोड क्रॉस करते समय बाइक सवार दंपती को कार ने टक्कर मारी। टक्कर से बाइक सवार दंपती करीब 20 फीट दूर उछलकर गिरने से घायल हो गए। हरमाड़ा थाना पुलिस ने गंभीर घायल हालत में पति-पत्नी को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया है। SHO (हरमाड़ा) उदयभान ने बताया- दोपहर करीब 3 बजे लोहा मंडी के पास एक्सीडेंट हुआ था। बाइक पर सवार तरुपति विहार निवासी पुष्पेंद्र सिंह अपनी पत्नी वंदना कंवर के साथ रोड क्रॉस कर रहे थे। इसी दौरान ओवर स्पीड में आ रही कार ने बाइक सवार दंपती को टक्कर मार दी। बाइक सहित दोनों उछ़लकर करीब 20 फीट दूर जा गिरे। एक्सीडेंट की सूचना पर पहुंची हरमाड़ा थाना पुलिस ने घायल दंपती को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया। डॉक्टर्स ने इलाज के लिए दोनों को एडमिट कर लिया। पुलिस का कहना है कि हादसे के बाद कार को छोड़कर ड्राइवर फरार हो गया। पुलिस की ओर से एक्सीडेंट कार को जब्त कर ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी गई है। बीजेपी कार्यकर्ता गजेंद्र सिंह ने बताया- हादसे के दौरान मेरे पास सूचना आई। घायल पति-पत्नी को सीकेएस हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। उनके कई मल्टीपल फ्रैक्चर आए है। आईसीयू में उनका इलाज चल रहा है।
Source link
कच्चे आम से बनता है ये केरल का ‘कडुमंगा अचार’, बना रहा है लोगों को दीवाना
Last Updated:
केरल का कडुमंगा अचार एक पारंपरिक और बेहद खास स्वाद वाला अचार है जो कच्चे आम और देसी मसालों से तैयार किया जाता है. इसमें नारियल तेल, सरसों और करी पत्ते जैसे साउथ इंडियन फ्लेवर इसे बाकी आम के अचारों से बिल्कुल अलग बना देते हैं. इसका खट्टा-तीखा स्वाद गरम चावल के साथ खाने पर और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगने लगता है.
केरल की रसोई में कई ऐसे पारंपरिक स्वाद मिलते हैं जो साधारण होकर भी बेहद खास होते हैं. उन्हीं में से एक है कच्चे आम से बनने वाला “कडुमंगा अचार”. यह अचार देखने में जितना सिंपल है, स्वाद में उतना ही दमदार. खास बात यह है कि यह अचार केरल के लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में जरूर बनाया जाता है और गरम चावल के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. इस अचार की सबसे बड़ी खासियत इसका देसी और ऑथेंटिक फ्लेवर है, जो नारियल तेल और पारंपरिक मसालों से आता है. आइए इसे बनाने का आसान तरीका जानते हैं.
कडुमंगा अचार बनाने की आसान रेसिपी
छोटे कच्चे आम (कडुमंगा) – 5 से 6
सरसों के दाने – 1 छोटा चम्मच
सूखी लाल मिर्च – 4 से 5
हल्दी – 1/2 छोटा चम्मच
हींग – एक चुटकी
करी पत्ता – 8 से 10 पत्ते
नमक – स्वाद अनुसार
नारियल तेल – 3 से 4 बड़े चम्मच
लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच
बनाने की विधि:
सबसे पहले कच्चे आम को अच्छे से धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें
एक पैन में नारियल तेल गर्म करें
उसमें सरसों के दाने डालकर चटकने दें
फिर सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते डालें
अब इसमें हल्दी और हींग डालकर हल्का भून लें
इसके बाद कटे हुए आम डाल दें और अच्छे से मिला दें
नमक और लाल मिर्च पाउडर डालकर धीमी आंच पर 5–7 मिनट पकाएं
जब आम थोड़ा नरम हो जाए और मसाले अच्छे से मिल जाएं, तो गैस बंद कर दें
इसे ठंडा होने दें और फिर किसी साफ जार में भरकर रख दें
स्वाद कैसा होता है?
कडुमंगा अचार का स्वाद एक साथ खट्टा, तीखा और हल्का मसालेदार होता है. जब इसे गरम-गरम चावल के साथ खाया जाता है, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. केरल के ज्यादातर घरों में यह रोज़ के खाने का हिस्सा होता है और लोग इसे बहुत पसंद करते हैं.
About the Author
विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें
मधुबनी में करंट लगने से युवक की मौत: गुस्साए परिजनों ने सदर अस्पताल में तोड़फोड़ की, एक हिरासत में – Madhubani News
मधुबनी शहर के सिंघानिया चौक पर रविवार शाम करीब 4 बजे बिजली के करंट की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान सिंघानिया चौक निवासी बुधन मोची के पुत्र विक्की कुमार के रूप में हुई है। हादसे के बाद परिजन उसे आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल मधुबनी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में भड़का आक्रोश, हुई तोड़फोड़ युवक की मौत की खबर मिलते ही सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि 10 से 20 की संख्या में पहुंचे कुछ लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और इमरजेंसी वार्ड में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया सूचना मिलने पर सदर अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद मौके पर पहुंचे और नगर थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मौके से एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मृतक के शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप मृतक के भाई निशु कुमार ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले सिंघानिया चौक इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बिजली का तार टूटकर सड़क किनारे गिरा हुआ था। उन्होंने कहा कि विक्की कुमार ओम प्रकाश नामक दुकानदार की दुकान में मरम्मत का काम कर रहा था, तभी वह टूटे हुए तार की चपेट में आ गया। जांच के आदेश, कार्रवाई का आश्वासन सदर अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने बताया कि अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की लिखित शिकायत अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के माध्यम से नगर थाना को दे दी गई है। वहीं नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं पर कार्रवाई की जाएगी।
Source link
1 नाम से बनीं 3 फिल्में, पहली हुई हिट, दूसरी और तीसरी का बोझ नहीं उठा पाया बॉक्स ऑफिस
Last Updated:
फिल्मों की सफलता और उनके टाइटल का गहरा और जादुई कनेक्शन रहा है. ‘सनम तेरी कसम’ ऐसा ही एक टाइमलेस और वजनदार टाइटल है, जिसने 3 अलग-अलग दशकों में तीन फिल्में बनाईं. लेकिन, इन तीनों से जुड़े बॉक्स ऑफिस डायनामिक्स किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं. जहां 1982 में इसी नाम से रिलीज हुई पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, वहीं 2009 में रिलीज हुई दूसरी फिल्म इस भारी-भरकम टाइटल का वजन नहीं झेल पाई और फ्लॉप हो गई. 2016 में रिलीज हुई तीसरी फिल्म भी अपनी ओरिजिनल रिलीज पर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. हालांकि, जब इसे 2025 में थिएटर में दोबारा रिलीज किया गया, तो टिकट खिड़की पर एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने इतिहास बदल दिया. तो आइए, जानें इस एक नाम की पूरी इनसाइड स्टोरी.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में फिल्म टाइटल की एक अनोखी साइकोलॉजी होती है. कुछ नाम सुनते ही इमोशन जगाते हैं और गानों की यादें ताजा हो जाती हैं. ‘सनम तेरी कसम’ एक और ऐसा रोमांटिक और वजनदार टाइटल है जिसने 3 अलग-अलग जेनरेशन के डायरेक्टर्स को अपनी ओर खींचा है. लेकिन, इस टाइटल से जुड़े बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस ने फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े पंडितों को भी हैरान कर दिया है. पहली फिल्म हिट रही, दूसरी फ्लॉप रही और तीसरी फिल्म ने रिलीज के 9 साल बाद इतना शानदार परफॉर्म किया कि इसने बॉलीवुड में री-रिलीज के पूरे बिजनेस मॉडल को बदल दिया. (तस्वीर एआई की मदद से बनाई गई है.)

1. सनम तेरी कसम (1982): यह ट्रेंड दशकों पहले 1982 में शुरू हुआ था. नरेंद्र बेदी के डायरेक्शन में बनी पहली ‘सनम तेरी कसम’ में साउथ इंडियन सिनेमा के लेजेंडरी और वर्सेटाइल सुपरस्टार कमल हासन और रीना रॉय लीड रोल में थे. कमल हासन ने ठीक एक साल पहले, 1981 में ‘एक दूजे के लिए’ से हिंदी सिनेमा में एंट्री की थी और देश भर के युवाओं के लिए एक बड़े नेशनल आइकॉन बन गए थे.

1982 की फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ पूरी तरह से रोमांटिक-म्यूजिकल ड्रामा थी. फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसका म्यूजिक था, जिसे मशहूर कंपोजर आरडी बर्मन (पंचम दा) ने बनाया था. ‘निशा निशा निशा…’ और ‘शीशा हो या दिल हो…’ जैसे गाने उस समय के रेडियो और चार्टबस्टर्स पर पूरी तरह छाए रहे. कमल हासन के यूनिक डांस मूव्स और रीना रॉय के साथ उनकी कमाल की केमिस्ट्री को ऑडियंस ने खूब पसंद किया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई, जिसने साउथ के सुपरस्टार कमल हासन की हिंदी बेल्ट में रेप्युटेशन को और पक्का कर दिया.
Add News18 as
Preferred Source on Google

2. सनम तेरी कसम (2009): पहली फिल्म की जबरदस्त सफलता के ठीक 27 साल बाद, 2009 में उसी टाइटल का दोबारा इस्तेमाल किया गया. इस बार लीड रोल छोटे नवाब सैफ अली खान ने निभाया था और उनके अपोजिट पूजा भट्ट थीं. लेकिन, इस दूसरी फिल्म का हश्र पहली जैसी नहीं रहा. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म का प्रोडक्शन 90 के दशक के बीच में शुरू हुआ था, लेकिन कई अंदरूनी झगड़ों, भारी बजट की कमी और प्रोडक्शन में देरी की वजह से इसे कई सालों तक रोक दिया गया.

जब इसे 2009 में बिना किसी बड़े प्रमोशन, हाइप और बहुत कूल अप्रोच के सीधे थिएटर में रिलीज किया गया, तो दर्शकों को इसका कंटेंट और प्रोडक्शन का तरीका काफी पुराना लगा. 2009 तक, सैफ अली खान स्पीड और स्टाइल के नए सिंबल बन गए थे और ‘रेस’ और ‘लव आज कल’ जैसी फिल्मों के साथ, वह एक बहुत ही मॉडर्न, अर्बन और कूल स्टार बन गए थे. इस सालों पुरानी और रुकी हुई फिल्म को दर्शकों ने पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया. यह एक बहुत बड़ी बॉक्स ऑफिस डिजास्टर साबित हुई.

3. सनम तेरी कसम (2016): इस टाइटल के इतिहास का तीसरा और सबसे अनोखा चैप्टर 2016 में लिखा गया था. डायरेक्टर जोड़ी राधिका राव और विनय सप्रू ने नए चेहरों और एक गहरी इमोशनल कहानी के साथ टाइटल को फिर से बनाने की कोशिश की. फिल्म में हैंडसम एक्टर हर्षवर्धन राणे और खूबसूरत पाकिस्तानी एक्ट्रेस मावरा होकेन लीड रोल में हैं. हिमेश रेशमिया के म्यूजिक और अरिजीत सिंह की शानदार आवाज के साथ, इसके गाने- जैसे ‘तेरा चेहरा’ और टाइटल ट्रैक रिलीज होते ही घर-घर में मशहूर हो गए.

फिल्म एक सीधी-सादी लड़की सरू और एक रफ-एंड-टफ लड़के इंदर के बीच गहरे और दर्दनाक प्यार के इर्द-गिर्द घूमती है. एक्टर्स की परफॉर्मेंस शानदार थी और गाने दिल को छू लेने वाले थे. हालांकि, जब फिल्म 2016 में थिएटर में रिलीज हुई, तो उस समय की बड़े स्टार्स की मसाला फिल्मों की धूम के बीच दर्शक इस धीमी, दुखद प्रेम कहानी को नहीं देख पाए. डिस्ट्रीब्यूटर्स और ट्रेड एनालिस्ट्स ने इसे फ्लॉप घोषित कर दिया. यह इस नाम की लगातार दूसरी फिल्म थी जो बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह से फेल हो गई थी.

लेकिन असली ट्विस्ट अभी बाकी था. थिएटर में रिलीज होने के बाद, फिल्म ने टेलीविजन, यूट्यूब और OTT प्लेटफॉर्म पर कल्ट स्टेटस हासिल कर लिया. पूरी नई पीढ़ी इस फिल्म की दीवानी हो गई और इसके गानों और क्लाइमैक्स के वीडियो क्लिप सालों तक सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे. साल 2024 और 2025 में बॉलीवुड में पुरानी कल्ट फिल्मों को फिर से रिलीज किया गया. जहां ‘लैला मजनू’ जैसी फिल्मों को फिर से रिलीज होने के बाद जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला, वहीं ‘सनम तेरी कसम’ के मेकर्स ने भी इसे 2025 में देश भर के थिएटर्स में फिर से रिलीज करके एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया. इस बार जो सीन देखने को मिला, वह पहले कभी नहीं हुआ. थिएटर्स के बाहर युवाओं की लंबी लाइनें लग गईं और मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन पर शो भरने लगे. 2025 में हुई इस फिर से रिलीज ने अपनी ओरिजिनल 2016 की रिलीज के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया. इस बार, फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ‘फ्लॉप’ नहीं, बल्कि एक गर्व और इज्जतदार ‘सुपरहिट’ का लेबल दिया गया.
कांग्रेस नेता ने ऐसा क्या कहा, बीजेपी ने नाप दिया सोनिया गांधी का बंगला
Sonia Gandhi House is Bigger than PM Modi Residence: दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित आलीशान सरकारी बंगलों को लेकर सियासत का गरमाया हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के विस्तार पर रविवार को कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सवाल खड़े किए. हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जैसे ही उनके सवाल पर पलटवार किया, कांग्रेस खुद के सवालों में उलझ कर रह गई. भाजपा ने एक आरटीआई के हवाला दे कर डेटा वॉर छेड़ दिया है. इस डेटा से निशाने पर आ गया 10, जनपथ पर स्थित सोनिया गांधी का बंगला. भाजपा ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि सोनिया गांधी का बंगला क्षेत्रफल के मामले में देश के प्रधानमंत्री के घर से काफी बड़ा है.
बीजेपी ने आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी का बंगला देश के प्रधानमंत्री के रहने की जगह से बड़ा है. आखिर, क्या है पूरा माजरा? क्या सच में कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी के बंगले का क्षेत्रफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास से ज्यादा है? अगर, ज्यादा है तो कितना? क्या है भाजपा के दावे का सच?
पीएम मोदी का अवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है.
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत से विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद को हवा दी कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत के एक बयान ने. राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब के हिस्से को खाली कराने के मुद्दे पर सरकार को घेरा. सुरेंद्र राजपूत ने सवालिया लहजे में कहा, ‘प्रधानमंत्री को रहने के लिए आखिर कितनी जगह चाहिए? बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री का निवास पहले से ही इतने बड़े परिसर में स्थित है. अब, आप जिमखाना क्लब का हवाला देकर उसे भी खाली कराना चाहते हैं.’ राजपूत का सीधा इशारा लुटियंस दिल्ली में पीएम आवास परिसर के कथित विस्तार और उसके लिए आसपास की प्रतिष्ठित जगहों के इस्तेमाल की ओर था.
सोनिया गांधी का आवास पीएम मोदी के आवास से आकार में बड़ा है.
अमित मालवीय ने ‘नाप’ दिया बंगला
कांग्रेस के इस हमले पर बीजेपी ने ज्यादा देर नहीं लगाई. मोर्चा संभाला बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने. मालवीय ने सीधे तौर पर आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय, सीधे तौर पर क्षेत्रफल का डेटा सामने रख दिया. भाजपा के निशाने आया सोनिया गांधी गांधी का 10, जनपथ का बांगला. अमित मालवीय ने सुरेंद्र राजपूत के बयान का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘शायद सोनिया गांधी ने सुरेंद्र राजपूत को एक नोट भेजा है. सोनिया गांधी, जो 10 जनपथ में रहती हैं, वह 15,181 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. यह 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) से बड़ा है, जो 14,101 वर्ग मीटर में है.’
प्रधानमंत्री आवास परिसर में पूजा करते पीएम मोदी.
आपको पता है 10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग की लंबाई-चौड़ाई?
अब आते हैं उस सवाल पर, जिसे अब देश की जनता जानना चाहती है. क्या वाकई सोनिया गांधी का घर पीएम मोदी के घर से बड़ा है? सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आई जानकारी के आधार पर अमित मालवीय का दावा सही प्रतीत हो रहा है.
समझते हैं पूरा गणित
सोनिया गांधी का आवास (10, जनपथ): सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लुटियंस दिल्ली स्थित यह बंगला लगभग 15,181 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. सोनिया गांधी दशकों से इसी पते पर रह रही हैं. वहीं, प्रधानमंत्री का आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है. इसे पहले 7 रेसकोर्स रोड कहा जाता था, क्षेत्रफल के मामले में 10 जनपथ से छोटा है. इसका क्षेत्रफल लगभग 14,101 वर्ग मीटर है. दोनों की क्षेत्रफल की तुलना की जाए जिसे ‘आधिकारिक निवास’ के रूप में चिन्हित किया गया है, तो सोनिया गांधी का 10, जनपथ बंगला पीएम मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित निवास से बड़ा है.
‘परिसर’ बनाम ‘आवास’
लेकिन, इस आंकड़ों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू भी है. जहां एक ओर प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में छोटा हो सकता है, वहीं प्रधानमंत्री निवास परिसर एक विशाल क्षेत्र है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 7, लोक कल्याण मार्ग केवल एक बंगला नहीं है, बल्कि यह 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) के विशाल परिसर में फैला हुआ है. लेकिन, आधिकारिक आवास को निवास परिसर मत जोड़ दीजिएगा. प्रधानमंत्री निवास परिसर में तमाम तरह के सरकारी दफ्तर हैं.
प्रधानमंत्री निवास परिसर में क्या-क्या है?
प्रधानमंत्री के रहने की जगह के अलावा, इस 12 एकड़ के परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री का कार्यालय (Office).
- सुरक्षा व्यवस्था के लिए विस्तृत बुनियादी ढांचा (SPG के लिए जगह).
- अतिथियों के लिए अलग बंगले.
- हेलीपैड और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं.
सवाल उठा कर कांग्रेस खुद फंस गई
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इसी 12 एकड़ के ‘विशाल परिसर’ और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत हो रहे नए निर्माणों की ओर इशारा किया था. वहीं, अमित मालवीय ने तुलना के लिए केवल उस विशिष्ट बंगले के क्षेत्रफल को चुना जहां पीएम रहते हैं. जब कांग्रेस पीएम के ‘विशाल परिसर’ पर सवाल उठाती है, तो वह जनता के पैसे और फिजूलखर्ची का मुद्दा बनाने की कोशिश करती है. इसके विपरीत, जब बीजेपी सोनिया गांधी के 10 जनपथ के 15,181 वर्ग मीटर का नाप बताती है, तो वह कांग्रेस पर हिपोक्रेसी का आरोप लगाती है.
किस कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री आवास के क्षेत्रफल पर सवाल उठाए थे?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब को खाली कराने के मुद्दे पर सवाल उठाए थे.
अमित मालवीय ने आवास के क्षेत्रफल के बारे में क्या दावा किया?
अमित मालवीय ने दावा किया कि सोनिया गांधी का 10 जनपथ आवास 15,181 वर्ग मीटर में है, जो प्रधानमंत्री मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास (14,101 वर्ग मीटर) से क्षेत्रफल में बड़ा है.
आरटीआई (RTI) के आंकड़ों के अनुसार, किसका आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में बड़ा है?
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी का 10, जनपथ आवास क्षेत्रफल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास से बड़ा है.
प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर (Complex) कुल कितने क्षेत्र में फैला है?
मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे टाइम्स ऑफ इंडिया) के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर लगभग 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) में फैला है, जिसमें कार्यालय, सुरक्षा बुनियादी ढांचा और अतिथि बंगले शामिल हैं.
10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग के क्षेत्रफल में तकनीकी अंतर क्या है?
10, जनपथ और 7 LKM की तुलना उनके Designated आधिकारिक निवास स्थान के क्षेत्रफल (वर्ग मीटर) के आधार पर की गई है. हालांकि, पीएम जिस संपूर्ण परिसर का उपयोग करते हैं वह सेंट्रल विस्टा की योजनाओं के कारण बहुत विशाल है.


