Friday, May 15, 2026
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बिना डॉक्टर और वेंटिलेटर के चल रहा था अस्पताल: उपभोक्ता आयोग का आदेश-प्रसूता की मौत पर देना होगा 3.12 लाख रुपए का हर्जाना – Gwalior News




ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इलाज में घोर लापरवाही बरतने के मामले में न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने पाया कि अस्पताल में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर थे और न ही वेंटिलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरण। उचित उपचार के अभाव में एक प्रसूता की मौत को आयोग ने ‘सेवा में गंभीर कमी’ माना है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन पर 3 लाख 12 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। क्या है पूरा मामला?
डी.डी. नगर निवासी उदयभान शर्मा ने पत्नी अर्चना शर्मा को 30 सितंबर 2023 को प्रसव (डिलीवरी) के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया था। हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद अगले दिन सिजेरियन से डिलीवरी हुई, लेकिन उसके बाद अर्चना की तबीयत बिगड़ने लगी। अर्चना का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 80 तक पहुंच गया और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन के बार-बार गिड़गिड़ाने के बावजूद अस्पताल ने न तो ऑक्सीजन दी और न ही समय पर उसे बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। जब स्थिति हाथ से निकल गई, तब मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान अर्चना की मृत्यु हो गई। जांच में खुले अस्पताल के काले कारनामे
आयोग की सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन के कई चौंकाने वाले झूठ पकड़े गए हैं। अस्पताल के बाहर डॉ. रेणू शर्मा के नाम का बोर्ड लगा था, लेकिन जांच में पता चला कि वे वहां मरीजों को देखती ही नहीं थीं। अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहा था। अस्पताल में वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम, ऑपरेशन थिएटर (OT) के उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आयोग का आदेश: ऐसे देना होगा हर्जाना
आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 3 लाख 12 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि तय की है जिसमें तीन लाख रुपए आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए देने होंगे। जबकि 10 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति, 02 हजार रुपए वाद व्यय (कानूनी खर्च) देने होंगे। यह पूरा हर्जाना 45 दिन में देना होगा। यदि समय पर हर्जाना नहीं दिया जाता है तो 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग की तीखी टिप्पणी
आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज की स्थिति बिगड़ते ही उसे तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया जाता, तो शायद महिला की जान बच सकती थी। बिना विशेषज्ञ और बुनियादी सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान से खिलवाड़ है।



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क्या था 1970 का वो ‘ग्रहण’, सिंगापुर PM अब तक खौफ में, फिर लौटेगा वह दौर?


नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Lawrence Wong) का बयान पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. उनका कहना है कि अभी दुनिया ने आर्थिक संकट का सबसे बुरा दौर देखा ही नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है और इसका असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है. ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने लगी है, ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. इसी दौरान उन्होंने 1970 के दशक के उस ऐतिहासिक आर्थिक ग्रहण का जिक्र किया जिसे दुनिया आज भी डर के साथ याद करती है.

लॉरेंस वोंग ने खास तौर पर स्टैगफ्लेशन शब्द का इस्तेमाल किया. यह अर्थशास्त्र का ऐसा शब्द है जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है. सामान्य तौर पर जब महंगाई बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. लेकिन स्टैगफ्लेशन बिल्कुल उल्टा होता है. इसमें अर्थव्यवस्था रुक जाती है, बेरोजगारी बढ़ती जाती है और दूसरी तरफ जरूरी सामानों के दाम तेजी से ऊपर जाते रहते हैं. यानी लोगों की आमदनी घटती है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता रहता है. यही वजह है कि इसे आर्थिक दुनिया का सबसे बड़ा डर माना जाता है.

1970 में कैसे शुरू हुआ था आर्थिक संकट?

1970 के दशक में दुनिया ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्टैगफ्लेशन का सामना किया था. इसकी शुरुआत 1973 के अरब इजरायल युद्ध के बाद हुई. उस समय तेल उत्पादक अरब देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को तेल सप्लाई रोक दी थी क्योंकि वे इजरायल का समर्थन कर रहे थे. देखते ही देखते कच्चे तेल की कीमतें 300 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं. उस दौर में दुनिया की लगभग हर फैक्ट्री, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंडस्ट्री तेल पर निर्भर थी. जैसे ही तेल महंगा हुआ, हर चीज की लागत बढ़ गई. कंपनियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ गया, रोजगार खत्म होने लगे और महंगाई बेकाबू हो गई.

सिर्फ तेल नहीं, डॉलर संकट ने भी बढ़ाई थी तबाही

केवल तेल संकट ही इस आर्थिक तबाही की वजह नहीं था. उसी समय अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लिया जिसने पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को हिला दिया. 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) ने डॉलर का सोने से संबंध खत्म कर दिया. इससे पहले पूरी दुनिया की करेंसी अप्रत्यक्ष रूप से सोने से जुड़ी हुई थी. जैसे ही डॉलर गोल्ड स्टैंडर्ड से अलग हुआ, दुनियाभर की करेंसी में भारी अस्थिरता आ गई. डॉलर कमजोर होने लगा और आयात महंगा होता चला गया. इसके साथ ही कई देशों की सरकारों ने बेरोजगारी कम करने के लिए बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा डाल दिया. नतीजा यह हुआ कि महंगाई और तेज हो गई लेकिन रोजगार नहीं बढ़ा.

खेती और सप्लाई चेन संकट ने बिगाड़े हालात

उसी दौर में खेती और सप्लाई चेन संकट ने हालात और खराब कर दिए. कई देशों में खराब मौसम और फसल बर्बाद होने की वजह से अनाज की कमी हो गई. खाने पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगे. तेल पहले से महंगा था और अब खाद्य संकट ने आम लोगों की जिंदगी और मुश्किल बना दी. अमेरिका समेत कई देशों में लोग दूध, ब्रेड और पेट्रोल जैसी बेसिक चीजों के लिए परेशान होने लगे थे.

शेयर बाजार से लेकर नौकरियों तक सब पर पड़ा असर

1970 के दशक का आर्थिक संकट केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहा. शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. अमेरिकी शेयर बाजार 1973 से 1974 के बीच लगभग 45 प्रतिशत तक टूट गया था. निवेशकों का भरोसा खत्म होने लगा था. बैंकिंग सिस्टम दबाव में आ गया था और कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने लगी थीं. मध्यम वर्ग की खरीदने की ताकत तेजी से खत्म हो रही थी क्योंकि सैलरी उतनी नहीं बढ़ रही थी जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही थी.

दुनिया को संकट से बाहर आने में लग गए 10 साल

दुनिया को इस संकट से बाहर निकलने में करीब एक दशक लग गया. अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया था. कई जगहों पर ब्याज दरें 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं. इसका असर यह हुआ कि लोन लेना बेहद महंगा हो गया. बिजनेस ठप पड़ने लगे, घर खरीदना मुश्किल हो गया और लाखों लोग बेरोजगार हो गए. 1980 के दशक के मध्य तक जाकर दुनिया धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट पाई.

आज का संकट क्यों ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है?

अब लॉरेंस वोंग का डर इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आज की दुनिया 1970 के मुकाबले कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी हुई है. उस समय सप्लाई चेन सीमित थीं लेकिन आज पूरी दुनिया एक दूसरे पर निर्भर है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो एशिया के देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि चीन, भारत, जापान और सिंगापुर जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. तेल सप्लाई रुकने का मतलब केवल पेट्रोल और डीजल महंगा होना नहीं है बल्कि फैक्ट्री प्रोडक्शन, एयरलाइन, शिपिंग, बिजली उत्पादन और खाद्य सप्लाई तक सब प्रभावित होना है.

अगर फिर आया स्टैगफ्लेशन तो क्या होगा?

अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहते हैं तो दुनिया फिर स्टैगफ्लेशन जैसे दौर में पहुंच सकती है. इसका मतलब होगा कि लोगों की नौकरियां जाएंगी, महंगाई तेजी से बढ़ेगी और जरूरी सामानों की किल्लत शुरू हो सकती है. विकासशील देशों के लिए यह संकट और ज्यादा खतरनाक होगा क्योंकि उन पर पहले से भारी विदेशी कर्ज है. अगर डॉलर मजबूत हुआ और तेल महंगा बना रहा तो कई देशों के विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं. श्रीलंका जैसा आर्थिक संकट दूसरे देशों में भी देखने को मिल सकता है.

सरकारों के लिए क्यों मुश्किल होता है इससे लड़ना?

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टैगफ्लेशन से लड़ना किसी भी सरकार के लिए सबसे मुश्किल चुनौती होती है. अगर सरकार महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाती है तो बिजनेस और रोजगार पर दबाव बढ़ जाता है. दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बाजार में ज्यादा पैसा डाला जाए तो महंगाई और बढ़ जाती है. यही वजह है कि 1970 का संकट आर्थिक इतिहास का सबसे जटिल दौर माना जाता है.

लॉरेंस वोंग की चेतावनी का मतलब क्या है?

सिंगापुर के प्रधानमंत्री का यह बयान केवल चेतावनी नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव केवल युद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है. यह धीरे-धीरे वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है. अगर ऊर्जा सप्लाई, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ता रहा तो दुनिया को एक बार फिर उसी आर्थिक अंधेरे का सामना करना पड़ सकता है जिसने 1970 के दशक में पूरी वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया था.



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ललितपुर के एडीएम अंकुर श्रीवास्तव का तबादला: गाजीपुर में तैनात दिनेश कुमार को एडीएम नियुक्त किया गया – Lalitpur News




ललितपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अंकुर श्रीवास्तव का शासन द्वारा गुरुवार शाम तबादला कर दिया गया। उनका स्थानांतरण मुरादाबाद जिले में किया गया है। वहीं, गाजीपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार को ललितपुर का नया अपर जिलाधिकारी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अंकुर श्रीवास्तव जुलाई 2023 में ललितपुर में तैनात किए गए थे। उन्होंने जिले में करीब 35 महीने तक अपनी सेवाएं दीं। शासन द्वारा उनका स्थानांतरण एक ही जिले में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के कारण किया गया है।



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Video: सैंडविच से बोर हो गए बच्चे? तो नाश्ते में बनाकर दें ब्रेड से ये 3 रेसिपी, कम मेहनत में मिलेगा लाजवाब टेस्ट


 

इस वीडियो में मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने ब्रेड की 3 बेहतरीन ब्रेकफास्ट रेसिपी शेयर की है. यदि आपके बच्चे नाश्ते में रोज सैंडविच खाकर बोर हो गए हैं, या आपको अपनी मॉर्निंग शिफ्ट के लिए जल्दी से टिफिन पैक करना है तो ये रेसिपीज आपके परेशानी का हल साबित हो सकते हैं. ये तीनों रेसिपी पेट भरने वाली और बनाने में आसान हैं. इनमें ब्रेड उपमा, ब्रेड कटलेट और चीज़ बर्स्ट ब्रेड पिज़्ज़ा शामिल हैं. आप इनमें से किसी भी रेसिपी को शाम के नाश्ते के रूप में भी बना सकते हैं.

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मंत्री शैलेंद्र साइकिल से जाएंगे दफ्तर: कार्यकर्ताओं से भी की अपील, कहा- हफ्ते में दो दिन साइकिल चलाएं भाजपा नेता-कार्यकर्ता – Munger News




बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से सप्ताह में दो दिन साइकिल का उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने गुरुवार शाम भागलपुर से पटना जाते समय मुंगेर सर्किट हाउस में यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए आवश्यक है। मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अंचल, थाना, प्रखंड या बाजार जाते समय बाइक और कार के साथ-साथ साइकिल का भी उपयोग करें। आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे
कुमार शैलेंद्र ने बताया कि वह स्वयं भी सप्ताह में दो दिन अपने विधायक आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे। उनका उद्देश्य आम लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कम ईंधन खपत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा
इस दौरान मंत्री ने भागलपुर के विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुल पर लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसकी निगरानी इंजीनियरों की टीम कर रही है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अगले 15 दिनों के भीतर इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा। मंत्री ने दावा किया कि यह देश का पहला अत्याधुनिक बेली ब्रिज होगा, जिसकी संरचना 35 वर्षों तक सुरक्षित रहने की गारंटी के साथ बनाई जा रही है। मंत्री ने बिहार में सड़क निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विभाग ने सभी कमिश्नरी में इंजीनियरों की तैनाती की है, जो सड़क परियोजनाओं की पूरी रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि सड़क कब बनेगी, कितनी लागत आएगी और उसकी जीवन अवधि कितनी होगी, इसकी विस्तृत जानकारी विभागीय कार्यालय से उपलब्ध कराई जाएगी।



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‘अयोध्या ने मुझे चुना है’ राम नगरी में प्लॉट खरीदकर इमोशनल हुए रणबीर कपूर


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फिल्म स्टार रणबीर कपूर ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 3.31 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है. उन्होंने ‘द सरयू’ नाम के लग्जरी प्रोजेक्ट में 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट लिया है, जिसे वे अपने परिवार की विरासत मानते हैं. रणबीर कपूर के अनुसार, यह फैसला अयोध्या की सांस्कृतिक पुकार का जवाब है. दिलचस्प बात यह है कि रणबीर से पहले अमिताभ बच्चन भी अयोध्या में भारी निवेश कर चुके हैं. नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ फिल्म में रणबीर के साथ साई पल्लवी, यश और सनी देओल जैसे दिग्गज कलाकार नजर आएंगे.

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रणबीर कपूर ने ‘रामायण’ की रिलीज से पहले बड़ा कदम उठाया है.

नई दिल्ली: रणबीर कपूर इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘रामायण’ को लेकर हर तरफ छाए हुए हैं, लेकिन इस बार चर्चा फिल्म की शूटिंग से ज्यादा उनकी एक खास इनवेस्टमेंट को लेकर हो रही है. खबर है कि सिल्वर स्क्रीन पर भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे रणबीर ने असल जिंदगी में भी राम नगरी अयोध्या से नाता जोड़ लिया है. उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे बसे एक बेहद आलीशान प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में करीब 3.31 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है. 2,134 वर्ग फीट का यह प्लॉट उनके परिवार के लिए एक खास विरासत की तरह होगा. रणबीर का कहना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और उन्होंने बस उस पुकार का सम्मान किया है. यह जमीन ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के उस भव्य प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो सरयू के किनारे 75 एकड़ में फैला हुआ है और जहां लग्जरी सुविधाओं के साथ-साथ एक बड़ा शाकाहारी होटल भी बन रहा है.

देखा जाए तो अयोध्या अब बॉलीवुड सितारों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है. रणबीर कपूर से पहले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी यहां भारी-भरकम निवेश कर चुके हैं. बिग बी ने तो अलग-अलग मौकों पर अयोध्या में करोड़ों की जमीन खरीदी है, जिससे साफ पता चलता है कि फिल्मी गलियारों में इस ऐतिहासिक शहर का महत्व कितना बढ़ गया है. रणबीर के लिए यह प्लॉट खरीदना न सिर्फ एक प्रॉपर्टी डील है, बल्कि एक इमोशनल फैसला भी है क्योंकि वह अयोध्या को भारतीय संस्कृति और इतिहास का सबसे अहम हिस्सा मानते हैं. यह प्रोजेक्ट न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि यहां रहने वालों को मॉडर्न सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी मिलेगा, जो रणबीर के इस फैसले को और भी खास बनाता है.

अयोध्या की मिट्टी से हुआ जुड़ाव
दूसरी ओर, रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर है. नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस मेगा बजट फिल्म में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी. फिल्म की स्टार कास्ट काफी तगड़ी है, जिसमें रावण के रूप में यश, हनुमान के रोल में सनी देओल और लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे जैसे सितारे अपनी कला का जौहर दिखाएंगे. म्यूजिक की कमान एआर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज हंस जिमर के हाथों में है. ऐसे में रणबीर का फिल्म की रिलीज से पहले अयोध्या में घर बसाने की तैयारी करना उनके फैन्स के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है. अुयोध्या की मिट्टी से जुड़ने का यह कदम उनके फिल्मी किरदार और असल जिंदगी, दोनों के लिहाज से एक नया चैप्टर शुरू करने जैसा है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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गर्मी में राहत और स्टाइल दोनों, पसंद किया जा रहा सूती गमछा, जरूर करें ट्राई


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गर्मी में राहत और स्टाइल दोनों, पसंद किया जा रहा सूती गमछा, जरूर करें ट्राई

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पूर्वांचल और उत्तर भारत के कई हिस्सों में गमछा लंबे समय से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है. गाजीपुर, बलिया और बनारस जैसे इलाकों में यह सिर्फ गर्मी से बचाव का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी माना जाता है. अब समय के साथ इसमें नए डिजाइन, पैटर्न और ओडिशा मॉडल जैसी वैरायटी जुड़ने से यह युवाओं के बीच एक फैशन ट्रेंड के रूप में भी उभर रहा है.

गांवों में बुजुर्गों और किसानों की पहचान माना जाने वाला गमछा अब युवाओं के बीच भी फिर से ट्रेंड में लौट रहा है. हल्के सूती कपड़े और ढीली बुनाई की वजह से यह गर्मी में शरीर को हवा देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. इस गमछे का चेकर्ड डिजाइन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है. इसकी वैफल वीव बुनाई में छोटे-छोटे एयर गैप बनते हैं, जो कपड़े के अंदर हवा के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं. यही वजह है कि गर्मी में यह गमछा ज्यादा आरामदायक महसूस होता है.

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गर्मी में गहरे नीले और हरे रंग के प्रिंट आंखों को सुकून देते हैं. अजय बताते हैं कि अब लोग डार्क और लाइट शेड्स का कॉम्बिनेशन ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अगर शर्ट डार्क है, तो लोग ऐसा लाइट बेस वाला गमछा चुन रहे हैं जो चेहरे को आकर्षक दिखाता है. लिनन और कॉटन का मिक्स फैब्रिक हवा को आसानी से आर-पार जाने देता है और डार्क शर्ट पर बेहतरीन कंट्रास्ट भी देता है. टेक्सटाइल विशेषज्ञ मानते हैं कि हल्के सूती और ढीली बुनाई वाले गमछे गर्म इलाकों के लिए ज्यादा आरामदायक होते हैं क्योंकि इनमें हवा का प्रवाह बेहतर रहता है. यही वजह है कि पूर्वांचल की गर्मी में आज भी गमछा ‘देसी एसी’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

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गाजीपुर की तपती दुपहरी में जब सूरज आग उगलता है, तब यहाँ के लोगों का सबसे भरोसेमंद साथी बनता है यह गमछा. यह गमछा देखने में काफी अट्रैक्टिव है. कॉटन साइंस के अनुसार जब हवा गमछे के महीन रेशों से होकर गुजरती है, तो वह चेहरे को ठंडी हवा का अहसास कराती है. लू के थपेड़ों से बचने के लिए गाजीपुर के लोग इसे चेहरे पर लपेटना पसंद कर रहे हैं.

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सौरभ के मुताबिक, कुर्ते के साथ पहनने के लिए ये फूलदार गमछे आजकल काफी हिट हैं. साइंटिफिक नजरिए से देखा जाए तो हाई-क्वालिटी कॉटन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को कुछ हद तक सोख लेता है. यह फैशन और सेहत दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन माना जा रहा है. इस गमछे में पिक स्ट्रिप और मल्टी कलर फ्लोरल डिजाइन इसे दूर से ही आकर्षक बना देते हैं.

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पूर्वांचल में गमछा सिर्फ पसीना पोंछने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है. गाजीपुर, बलिया, बनारस और आसपास के इलाकों में दशकों से किसान, मजदूर और यात्री सूती गमछा इस्तेमाल करते आए हैं क्योंकि इसका कपड़ा गर्मी में हवा पास होने देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. समय के साथ इसकी बुनाई और डिजाइन में बदलाव आया है. अब फूलदार प्रिंट, ओडिशा मॉडल, चेकर्ड पैटर्न और वैफल वीव जैसे नए डिजाइन युवाओं को भी आकर्षित कर रहे हैं.

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सफेद रंग पर नारंगी और पीले फूलों की हल्की छपाई वाला यह गमछा इस समय गाजीपुर के बाजारों में सबसे अलग नजर आ रहा है. सफेद आधार वाले गमछे सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट (परावर्तित) करते हैं, जिससे शरीर ज्यादा गर्म नहीं होता. अजय के अनुसार, अब लोग धूप से बचाव के साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि गमछा उनके पैंट-शर्ट के साथ मैच कर रहा है या नहीं.

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हरे और क्रीम रंग के पारंपरिक डिजाइन वाला यह ओडिशा मॉडल गमछा अपनी बारीक बुनाई और कलात्मक पैटर्न की वजह से अलग पहचान बना रहा है. इस तरह के गमछों में सिर्फ धूप से बचाव ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है. हल्का सूती कपड़ा गर्मी में आराम देता है, जबकि इसकी पारंपरिक बॉर्डर डिजाइन इसे सामान्य गमछों से अलग बनाती है. दुकानदारों के मुताबिक अब युवा सिर्फ साधारण गमछा नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों के डिजाइन वाले गमछे भी पसंद कर रहे हैं.

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भारत में छाप रहे करोड़ों…वो टॉप 11 बॉलीवुड सितारे, जिन्होंने छोड़ दी इंडिया की नागरिकता


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दिलजीत दोसांझ के अमेरिकी नागरिक बनने की खबरों ने सबको चौंका दिया है. हालांकि, वे पहले बॉलीवुड स्टार नहीं हैं जो भारत में रहकर करोड़ों छाप रहे हैं, मगर नागरिकता विदेशी रखते हैं. आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ भी बॉलीवुड का बड़ा नाम है. उनकी फिल्में भारतीय बॉक्स ऑफिस से करोड़ों में कमाई करती है, पर वह एमी जैक्सन और सपना पब्बी की तरह ब्रिटिश पासपोर्ट रखती हैं. इन अलावा, कई और सितारे हैं जिनके पास भारतीय नागरिकता नहीं है. भारत में दोहरी नागरिकता का विकल्प न होने के कारण इन सितारों को विदेशी पासपोर्ट अपनाते ही भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ती है, फिर भी ये अपनी कला से करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज कर रहे हैं.

नई दिल्ली: बॉलीवुड की चकाचौंध में हम अक्सर भूल जाते हैं कि पर्दे पर दिखने वाले हमारे पसंदीदा सितारे हमेशा भारतीय नागरिक नहीं होते. हाल में पंजाबी सेंसेशन और ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ को लेकर एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिलजीत अब भारतीय नागरिक नहीं रहे हैं, बल्कि उन्होंने साल 2022 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली है. कहा जा रहा है कि वह सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर ही सफर कर रहे हैं, जबकि उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई से जारी हुआ था.

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दिलजीत अकेले ऐसे स्टार नहीं हैं जिनके पास विदेशी पासपोर्ट है. इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम आलिया भट्ट का भी है. आलिया का जन्म और परवरिश भले ही मुंबई में हुई हो, लेकिन उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है. इसकी वजह उनकी मां सोनी राजदान हैं, जो खुद ब्रिटिश मूल की हैं. आलिया भले ही भारत की टॉप एक्ट्रेस हैं, लेकिन तकनीकी रूप से वह एक विदेशी नागरिक हैं और वोटिंग जैसे अधिकारों के लिए उन्हें ओसीआई (OCI) कार्ड का सहारा लेना पड़ता है.

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श्रीलंकन ब्यूटी जैकलीन फर्नांडिस ने भी बॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बनाई है. जैकलीन मूल रूप से श्रीलंका की रहने वाली हैं और वहीं की नागरिकता रखती हैं. उन्होंने मिस श्रीलंका का खिताब जीतने के बाद भारत का रुख किया था. हालांकि, भारत में इतने साल बिताने और बड़ी फिल्में करने के बावजूद उन्होंने अपनी श्रीलंकन नागरिकता को बरकरार रखा है.

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बॉलीवुड की ‘बार्बी डॉल’ कही जाने वाली कैटरीना कैफ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. कैटरीना का जन्म हॉन्गकॉन्ग में हुआ था और उनके पास भी ब्रिटिश नागरिकता है. उनके पिता कश्मीरी और मां ब्रिटिश मूल की थीं. कैटरीना ने भारत आने से पहले कई देशों में वक्त बिताया, लेकिन अपनी पहचान उन्होंने बॉलीवुड से बनाई. आज भी वह ब्रिटिश पासपोर्ट पर ही ट्रेवल करती हैं और भारत में काम करने के लिए उन्हें वर्क परमिट की जरूरत होती है.

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फेहरिस्त में आमिर खान के भांजे इमरान खान और नरगिस फाखरी का नाम भी शामिल है. इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है. वहीं नरगिस फाखरी भी अमेरिकी नागरिक हैं, जिनके पिता पाकिस्तानी और मां चेक मूल की थीं. इन सितारों ने अपनी जड़ें विदेश में होने के बावजूद हिंदी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई है.

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डांस क्वीन नोरा फतेही की बात करें तो उनके पास कनाडा की नागरिकता है. नोरा का जन्म कनाडा में मोरक्कन माता-पिता के घर हुआ था. वह सिर्फ एक सपने के साथ भारत आई थीं और आज वह इंडस्ट्री की सबसे बड़ी परफॉर्मर बन चुकी हैं. वहीं सनी लियोनी के पास तो कनाडा और अमेरिका दोनों की दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) है, जबकि वह एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

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फेहरिस्त में आमिर खान के भांजे इमरान खान और नरगिस फाखरी का नाम भी शामिल है. इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है. वहीं नरगिस फाखरी भी अमेरिकी नागरिक हैं, जिनके पिता पाकिस्तानी और मां चेक मूल की थीं. इन सितारों ने अपनी जड़ें विदेश में होने के बावजूद हिंदी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई है.

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एमी जैक्सन और सपना पब्बी जैसी एक्ट्रेसेस के पास भी ब्रिटिश नागरिकता है. एमी ने तो साउथ से लेकर बॉलीवुड तक बड़े स्टार्स के साथ काम किया है, लेकिन वह मूल रूप से यूके की ही रहने वाली हैं. इसी तरह एवलिन शर्मा के पास जर्मन नागरिकता है क्योंकि उनकी मां जर्मन थीं. ये सभी सितारे भारत को अपना कर्मक्षेत्र मानते हैं, भले ही इनके पासपोर्ट पर किसी और देश की मुहर लगी हो.

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नागरिकता का मुद्दा इन सितारों की लोकप्रियता में कभी आड़े नहीं आया. चाहे वह दिलजीत दोसांझ का कैलिफोर्निया वाला बंगला हो या आलिया भट्ट का ब्रिटिश पासपोर्ट, फैंस को इनके काम से मतलब है.

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अहमदाबाद प्लेन क्रैश के पीड़ित परिवारों का दर्द: 11 महीने बाद भी मुआवजा नहीं मिला, नौकरी का वादा था, लेकिन अब जवाब नहीं देते – Gujarat News


12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही बोइंग 787-8 फ्लाइट टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड बाद क्रैश हो गई थी।

अहमदाबाद में 12 जून, 2025 को हुए एआई 171 विमान हादसे को एक साल पूरा होने में एक महीने से भी कम समय बचा है। जबकि,मृतकों के पीड़ित परिवार न्याय के लिए अब तक संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला है। यहां

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पीड़ितों के कुछ परिवारों ने अहमदाबाद के सोला भगवत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने मुआवजे, दुर्घटनास्थल पर एक वर्ष के भीतर भूमि शुद्धिकरण और विभिन्न धर्मों के लोगों को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति देने की मांग की।

इसके अलावा, मृतकों के परिवारों समेत कई लोग अभी भी दुर्घटना के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि सरकार ने एक महीने के भीतर रिपोर्ट जारी करने की बात कही है, लेकिन पीड़ितों के परिवार ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग कर रहे हैं।

हेतल प्रजापति की पति महेश जीरावाला के साथ। (फाइल फोटो)

हादसे में जान गंवाने वाले फिल्म निर्माता महेश जीरावाला की पत्नी हेतलबेन प्रजापति ने कहा- टाटा समूह के कुछ लोगों ने मुझे मेरी एजुकेशन के आधार पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। नौकरी का आश्वासन दिए हुए 11 महीने बीत चुके हैं। हमने कई बार ईमेल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब एयरलाइन और टाटा समूह किसी भी तरह से सहयोग नहीं कर रहे हैं।

वहीं, घटना के समय पुलिस ने कोई सहयोग नहीं दिया। जब हमने जांच की तो पता चला कि डीएनए मिलान हो गया है और मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद एयरलाइन और टाटा समूह के कुछ लोग हमसे मिलने हमारे घर आए। उन्होंने भविष्य में किसी भी तरह की समस्या आने पर मदद का आश्वासन दिया था।

टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया विमान दुर्घटना में अपने बेटे को खोने वाले मोहम्मद रफीकभाई ने कहा- विमान दुर्घटना में मेरे बेटे की मृत्यु हो गई। लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। साथ ही, कोई जवाब भी नहीं मिल रहा है।

यहां तक ​​कि ईमेल करने पर भी हमें कोई उचित जवाब नहीं मिल रहा है। हमारा फोन भी अब नहीं उठाया जा रहा है। हम मांग करते हैं कि मुझे न्याय मिले और उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, हमें इस घटना के बारे में भी स्पष्ट जानकारी दी जाए कि यह कैसे हुई।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कविराज ने कहा कि 12 जून 2026 को हुए विमान हादसे को एक साल पूरा हो जाएगा। अब एक महीने से भी कम समय बचा है। इसलिए पीड़ितों के परिवार दुर्घटनास्थल की भूमि को शुद्ध करना चाहते हैं और धार्मिक कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई बार ब्लैक बॉक्स का डेटा उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

जून में प्लेन क्रैश की फाइनल रिपोर्ट आने की संभावना

गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी लेकिन टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 270 लोगों की मौत हुई थी।

पीड़ित परिवारों ने लेटर की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी हैं। इस मामले में एअर इंडिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। फाइनल रिपोर्ट इस साल जून में, यानी हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की संभावना है।

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अहमदाबाद प्लेन हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

अहमदाबाद प्लेन क्रैश- विमान में पहले से खराबी थी:अमेरिकी रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल फेलियर की आशंका

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को क्रैश हुए एअर इंडिया के बोइंग 787 विमान में पहले से कई गंभीर तकनीकी दिक्कतें थीं। चार साल पहले प्लेन में आग भी लगी थी। अमेरिका स्थित फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने दावा किया है कि विमान में इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से एक के बाद एक कई सिस्टम बंद हुए। पूरी खबर पढ़ें…



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मॉनसून से पहले शेखपुरा प्रशासन अलर्ट: बाढ़ की आशंका पर घाटकुसुम्भा के निचले इलाकों का DM ने किया दौरा – Sheikhpura News




शेखपुरा में आगामी मॉनसून से पहले बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को जिलाधिकारी (डीएम) शेखर आनंद के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने जिले के संवेदनशील घाटकुसुम्भा प्रखंड के निचले इलाकों का सघन दौरा किया। इस दौरान जिला प्रशासन की पूरी टीम उनके साथ मौजूद थी। यह दौरा मॉनसून के दौरान संभावित बाढ़ की विभीषिका से निपटने और निचले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के उद्देश्य से किया गया। ज्ञात हो कि प्रतिवर्ष मॉनसून के समय घाटकुसुम्भा क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा और हरोहर नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण भीषण जल जमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आवागमन से लेकर खेती-बारी तक सब ठप यह क्षेत्र चारों ओर से पानी से घिर जाता है, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।दौरे के क्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने डीएम के समक्ष अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना था कि जलजमाव के कारण आवागमन से लेकर खेती-बारी तक सब ठप हो जाता है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से डीएम से अपील की कि इस क्षेत्र की विकट भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे बाढ़ग्रस्त घोषित किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं और आपदा राहत का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। संवेदनशील क्षेत्रों की घेराबंदी और मरम्मत के निर्देश दिए निरीक्षण के दौरान डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ आने का इंतजार न करें, बल्कि ‘प्री-डिजास्टर मैनेजमेंट’ के तहत अपनी सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर लें। उन्होंने तटबंधों की मजबूती, नदी के किनारे वाले संवेदनशील क्षेत्रों की घेराबंदी और मरम्मत के निर्देश दिए। डीएम ने ऊंचे स्थानों पर शरण स्थली और सामुदायिक रसोई के लिए स्थलों का चयन करने, नावों की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और पशु चारे का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि हमारी प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा है और आपदा के समय रिस्पॉन्स टाइम कम से कम हो, इसके लिए सभी पदाधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। जिले के आला अधिकारियों की टीम मौजूद रही क्षेत्र भ्रमण के दौरान डीएम के साथ जिले के आला अधिकारियों की टीम मौजूद रही, जिसमें मुख्य रूप से एडीएम लखींद्र पासवान, डीसी संजय कुमार, एसडीओ प्रियंका कुमारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता मृत्युंजय कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ एवं बाढ़ नियंत्रण के अभियंतागण शामिल थे।



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