आगरा में युवतियों के आइसक्रीम लेने के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार दो अज्ञात युवक उनके पास आए। आरोप है कि पीछे बैठे युवक ने छेड़खानी कर दी। इस पर युवतियों ने पीछा किया तो युवकों ने टक्कर मारकर गिरा दिया। पीड़िता ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पीड़िता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 11 मई को सुबह करीब 10:30 बजे वह अपनी बड़ी बहन के साथ रामनगर पुलिया स्थित डेयरी से दूध लेकर लौट रही थीं। मारुति स्टेट चौराहे पर आइसक्रीम लेने के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार दो अज्ञात युवक उनके पास आए। आरोप है कि पीछे बैठे युवक ने छेड़खानी कर दी। इस पर पीड़िता ने साहस दिखाते हुए अपनी स्कूटी से उनका पीछा किया और मोबाइल से फोटो लेने का प्रयास किया। इस पर आरोपियों ने स्कूटी सामने लाकर टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क पर गिर गई और उन्हें गंभीर चोटें आई। पीड़िता ने आरोपियों की स्कूटी का नंबर बताकर पुलिस से शिकायत की। थाना शाहगंज प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
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बहन के साथ आइसक्रीम खाने आई युवती से छेड़छाड़: पीछा करने पर दोनों को स्कूटी से गिराया, पुलिस ने FIR दर्ज कर शुरू की जांच – Agra News
भोपाल निगम के 114 कर्मचारी होंगे विनियमित: MIC ने प्रस्ताव पास किया; हाउस फॉर ऑल को लेकर भी मंथन – Bhopal News
भोपाल नगर निगम में एमआईसी (मेयर इन कौंसिल) की बुधवार को बैठक हुई। इसमें कुल 19 मुद्दों पर मंथन हुआ। कुछ एमआईसी सदस्य मीटिंग में नहीं पहुंचे। महापौर मालती राय, कमिश्नर संस्कृति जैन की मौजूदगी में मीटिंग हुई। एमआईसी राजेश हिंगोरानी, रविंद्र यती, मनोज राठौर, जगदीश यादव, आरके सिंह बघेल और छाया ठाकुर मीटिंग में शामिल हुए, लेकिन जितेंद्र शुक्ला, सुषमा बावीसा, आनंद अग्रवाल और अशोक वाणी मौजूद नहीं रहे। बैठक के दौरान कुछ मुद्दों पर एमआईसी सदस्यों में नाराजगी भी देखने को मिली। इन प्रस्ताव पर चर्चा नगर निगम भोपाल के विलय से पहले कोलार नगर पालिका में कार्यरत 18 कुशल, 26 अर्धकुशल और 70 अकुशल दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को विनियमित किए जाने पर चर्चा की गई। हाउसिंग फॉर ऑल के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, लेकिन पीएम आवास में कमर्शियल प्रोजेक्ट के हाईराइज भवन की निविदा निरस्त किए जाने वाले प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया गया। कमिश्नर ने जमीन पर बैठकर समीक्षा की स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जल्द ही केंद्रीय दल भोपाल आ सकता है। इसे लेकर कमिश्नर जैन ने निगम के नवीन मुख्यालय भवन में स्वच्छता नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की जमीन पर बैठकर क्लास ली। कमिश्नर ने सख्ती भरे लहजे में चेतावनी दी कि स्वच्छता के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह पहली बार है जब निगम के किसी आयुक्त ने जमीन पर बैठकर अधिकारियो के साथ मीटिंग की। भोपाल के 3.60 लाख मकानों की गिनती पूरी दूसरी ओर, भारत की जनगणना-2027 के अंतर्गत प्रथम चरण में मकान सूचीकरण का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान तक निगम सीमा अंतर्गत 3 लाख 60 हजार से अधिक मकानों की गणना का कार्य किया जा चुका है और 150 जनगणना ब्लाकों में मकान सूचीकरण का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। निष्ठा और लगन से कार्य करते हुए सफलतापूर्वक कार्य पूर्ण करने वाले प्रगणकों का सम्मान महापौर मालती राय ने निगम आयुक्त व प्रमुख नगर जनगणना अधिकारी संस्कृति जैन की उपस्थिति में प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया।
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प्रॉपर्टी डील के बहाने दंपती को बनाया बंधक: 48 लाख रुपए वसूले; पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की – Jaipur News
वैशाली नगर क्षेत्र में रियल एस्टेट डील के नाम पर दंपती को बंधक बनाकर मारपीट करने और करीब 48 लाख रुपए वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़िता विजय लक्ष्मी गुप्ता ने भांकरोटा थाना में मामला दर्ज कराया है। पुलिस को दी रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि उनका बेटा विदेश में रहता है। दंपती ने 4 फरवरी को एक प्रॉपर्टी वेबसाइट पर मकान बिक्री का विज्ञापन डाला था। इसके बाद शिवा अय्यप्पन और अखिल अग्रवाल नामक व्यक्तियों ने उनके पति संजय गुप्ता से संपर्क कर मकान खरीदने की इच्छा जताई। बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सौदा तय हो गया। आरोप है कि 2 मई को आरोपियों ने दंपती को एक विला में बुलाया, जहां पहले से 4-5 लोग मौजूद थे। वहां पहुंचते ही दोनों को कमरे में बंद कर दिया गया और मारपीट शुरू कर दी गई। आरोपियों ने संजय गुप्ता की गर्दन पर चाकू रखकर और बेल्ट और पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने मोबाइल फोन, दस्तावेज, चेकबुक, जेवरात और अन्य सामान छीन लिया। इसके बाद रिश्तेदारों और परिचितों को फोन कराकर रुपए मंगवाए गए। आरोपियों ने करीब 60 लाख रुपए की मांग की और नकद व बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए लगभग 47 लाख 90 हजार रुपए वसूल लिए। बताया गया है कि दंपती को 2 मई से 6 मई तक बंधक बनाकर रखा गया। बाद में आरोपियों ने उन्हें कार से मॉल ऑफ जयपुर तक पहुंचाया और वहां से टैक्सी के जरिए दिल्ली एयरपोर्ट भेज दिया। इसके बाद उन्हें अहमदाबाद का टिकट देकर रवाना कर दिया गया। जयपुर लौटने पर दंपती ने पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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तोतापरी, चौसा और लंगड़ा, कैसे पड़े आम के ये अजीबोगरीब नाम? सुनते ही छूट पड़ती है हंसी
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Mango Different Name: आम को फलों का राजा कहा जाता है और शायद ही ऐसा कोई हो, जिसे आम पसंद नहीं हों. इसका स्वाद बिल्कुल मन को भाने वाला होता है, जो सीधे आत्मा तक पहुंचता है. देश में आम की कई किस्में पाई जाती हैं, जिन्हें लोग बहुत पसंद करते हैं. देश में आम कई नामों से प्रसिद्ध हैं.
मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की खुशबू फैल जाती है. छोटे हों या बड़े, हर किसी की जुबान पर सबसे पहले आम का ही नाम आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में बिकने वाले कुछ आमों के नाम इतने मजेदार और अजीब होते हैं कि सुनते ही लोगों के चेहरे पर हंसी आ जाती है. कई बार लोग नाम सुनकर चौंक जाते हैं और पूछ बैठते हैं कि आखिर ऐसा नाम क्यों रखा गया. आइए जानते हैं आम की ऐसी पांच मजेदार वैरायटी के बारे में.
1. तोतापरी आम
यह नाम सुनते ही लोगों को तोते की याद आ जाती है. दरअसल इस आम का अगला हिस्सा तोते की चोंच जैसा नुकीला होता है, इसलिए इसका नाम तोतापरी पड़ा. इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है. इसे ज्यादातर जूस और सलाद में इस्तेमाल किया जाता है.
2. लंगड़ा आम
नाम सुनकर हर कोई मुस्कुरा देता है कि भला आम भी लंगड़ा होता है क्या? कहते हैं कि वाराणसी के एक किसान के बाग में यह आम पहली बार उगा था और किसान चलने में लंगड़ाते थे, इसलिए इसका नाम लंगड़ा पड़ गया. इसका स्वाद बेहद मीठा और रसीला होता है.
3. दशहरी आम
इस नाम को सुनकर लोग सोचते हैं कि क्या इसका दशहरे से कोई रिश्ता है. लेकिन असल में उत्तर प्रदेश के दशहरी गांव में इसकी पैदावार शुरू हुई थी, इसलिए इसका नाम दशहरी पड़ा. यह आम खुशबूदार और बेहद मीठा होता है.
4. सफेदा आम
यह नाम सुनते ही लोग सोचते हैं कि क्या यह सफेद रंग का होता होगा. जबकि इसका गूदा हल्का पीला और बेहद मुलायम होता है. इसका नाम इसकी चिकनी और साफ दिखने वाली बाहरी सतह की वजह से पड़ा. स्वाद इतना मीठा कि एक बार खाने के बाद बार-बार खाने का मन करे.
5. चौसा आम
नाम सुनते ही लगता है जैसे किसी गांव या कस्बे का नाम हो. सच भी यही है. बिहार के चौसा इलाके में इसकी शुरुआत हुई थी. यह आम बेहद रसदार होता है और चूसकर खाने में मजा आता है, इसलिए लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं.
इन आमों के नाम भले ही अजीब लगते हों, लेकिन स्वाद के मामले में ये किसी से कम नहीं हैं. चंबल क्षेत्र के बाजारों में इन दिनों ये सभी वैरायटी खूब बिक रही हैं. लोग नाम सुनकर हंसते जरूर हैं, लेकिन एक बार स्वाद चख लें तो बार-बार खरीदने पहुंच जाते हैं. यही वजह है कि आम को फलों का राजा कहा जाता है.
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गोविन्द सिंह जनवरी 2026 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर Senior Sub Editor कार्यरत हैं, जहां वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्टेट टीम का हिस्सा हैं. किस्सागोई के अंदाज में खबरें पेश कर…और पढ़ें
15 मई को रिलीज होगी सनी हिंदुजा की वेब सीरीज ‘विमल खन्ना’, पूरा हुआ प्रोड्यूसर का सपना
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हिंदी पल्प फिक्शन के दिग्गज लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का मशहूर किरदार ‘विमल’ अब डिजिटल पर्दे पर उतरने के लिए तैयार है. निर्माता पीयूष दिनेश गुप्ता द्वारा निर्मित वेब सीरीज ‘विमल खन्ना’ 15 मई को अमेजन एमएक्स प्लेयर पर रिलीज होगी. यह सीरीज पाठक के उपन्यास ‘मौत का खेल’ पर बनी है. इसमें सनी हिंदुजा अहम भूमिका में हैं और ईशा तलवार एक मजबूत किरदार निभा रही हैं. मुंबई की वास्तविक लोकेशंस पर शूट की गई यह सीरीज अपनी ‘रॉ’ और रीयल पटकथा के लिए चर्चा में है. पीयूष के लिए यह उनके बचपन के सपने का साकार होना है.
सीरीज 15 मई को अमेजन एमएक्स प्लेयर पर दस्तक देगी.
नई दिल्ली: हिंदी पल्प फिक्शन की दुनिया के बेताज बादशाह सुरेन्द्र मोहन पाठक के चाहने वालों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है. सुरेन्द्र मोहन पाठक का सबसे मशहूर किरदार ‘विमल’ अब स्क्रीन पर तहलका मचाने आ रहा है. मेकर पीयूष दिनेश गुप्ता अपनी नई वेब सीरीज ‘विमल खन्ना’ लेकर आ रहे हैं, जो 15 मई को अमेजन एमएक्स प्लेयर पर दस्तक देगी. यह सीरीज सुरेन्द्र मोहन पाठक के बेहद पॉपुलर उपन्यास ‘मौत का खेल’ पर बनी है. पीयूष के लिए यह प्रोजेक्ट महज एक काम नहीं, बल्कि उनके बचपन के सपने का सच होना है. वे खुद बचपन से ही पाठक जी के उपन्यासों के दीवाने रहे हैं और उनके लिए यह बेहद गर्व की बात है कि खुद लेखक ने उन पर भरोसा जताते हुए अपनी इस महान विरासत को डिजिटल पर्दे पर उतारने की इजाजत दी. पीयूष बताते हैं कि पाठक जी उनके लिए अब एक पिता समान और मार्गदर्शक बन चुके हैं.
सीरीज की सबसे खास बात इसकी ‘रॉ और रीयल’ स्टाइल है. इसे असली जैसा दिखाने के लिए मुंबई की असली और तंग गलियों में शूट किया गया है ताकि दर्शकों को वही माहौल महसूस हो सके जो वे किताबों में पढ़ते आए हैं. पीयूष का कहना है कि ‘विमल खन्ना’ की पटकथा आम सस्पेंस कहानियों जैसी नहीं है, जहाँ राज खुलते ही मजा खत्म हो जाता है; बल्कि यहां असली रोमांच तो रहस्य गहराने के साथ शुरू होता है. स्टार कास्ट की बात करें तो सनी हिंदुजा मुख्य भूमिका यानी ‘विमल खन्ना’ के किरदार में अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरेंगे, वहीं ईशा तलवार ‘अमृता दास’ के एक पावरफुल रोल में नजर आएंगी. इनके अलावा अक्षय आनंद और नीलू जी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने इस सीरीज को और भी दमदार बना दिया है.
मेकर पीयूष दिनेश गुप्ता अपनी नई वेब सीरीज ‘विमल खन्ना’ लेकर आ रहे हैं.
सुरेन्द्र मोहन को मनाना आसान नहीं था
पीयूष ने यह भी बताया कि दिग्गज लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक को इस प्रोजेक्ट के लिए मनाना कोई आसान काम नहीं था. शुरुआत में पाठक जी थोड़े हिचकिचा रहे थे, लेकिन पीयूष की मेहनत और काम के प्रति उनकी ईमानदारी ने आखिरकार लेखक का दिल जीत लिया. पीयूष को पूरा भरोसा है कि यह सीरीज न केवल उन करोड़ों पाठकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी जिन्होंने विमल को पढ़कर अपनी कल्पनाओं में बसाया है, बल्कि ओटीटी की दुनिया में भी सस्पेंस और थ्रिलर के नए रिकॉर्ड बनाएगी. तो बस, तैयार हो जाइए 15 मई को सस्पेंस और एक्शन के एक ऐसे सफर पर निकलने के लिए, जिसका इंतजार पाठक जी के फैंस सालों से कर रहे थे.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
मारुति ने रेलवे के साथ मिलकर ऐसा क्या किया, रिकॉर्ड ही बन गया!
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मारुति सुजुकी ने भारतीय रेलवे के जरिए 30 लाख से ज्यादा वाहनों की डिलीवरी करके बड़ा रिकॉर्ड बना लिया है. कंपनी ने बताया कि 2014 के बाद रेल आधारित वाहन ढुलाई में करीब 9 गुना की बढ़ोतरी हुई है. अब कंपनी के कुल वाहन डिस्पैच में रेलवे की हिस्सेदारी 26.5 फीसदी तक पहुंच चुकी है. कंपनी आने वाले वर्षों में रेलवे के जरिए वाहन परिवहन को और बढ़ाने की तैयारी में है. मारुति सुजुकी का लक्ष्य 2030-31 तक रेल आधारित डिस्पैच को 35 फीसदी तक पहुंचाना है. इसके लिए कंपनी ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और नई रेलवे साइडिंग्स पर बड़ा निवेश कर रही है.
कंपनी ने रेलवे नेटवर्क के जरिए 30 लाख से अधिक वाहनों की डिलीवरी पूरी कर ली है. (IANS)
नई दिल्ली. देश की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल कंपनी मारुति सुजुकी ने भारतीय रेलवे के साथ मिलकर एक बड़ा रिकॉर्ड बना लिया है. कंपनी ने रेलवे नेटवर्क के जरिए 30 लाख से अधिक वाहनों की डिलीवरी पूरी कर ली है. यह उपलब्धि सिर्फ बिक्री या सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ते ग्रीन लॉजिस्टिक्स मॉडल की भी बड़ी मिसाल मानी जा रही है. कंपनी के मुताबिक पिछले एक दशक में रेलवे के जरिए वाहन भेजने की रफ्तार में जबरदस्त तेजी आई है. वित्त वर्ष 2014-15 में कंपनी के कुल वाहन डिस्पैच में रेलवे की हिस्सेदारी सिर्फ 5 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 2025-26 में 26.5 फीसदी तक पहुंच गई है. यानी 2014 के बाद रेल आधारित माल ढुलाई में लगभग 9 गुना की बढ़ोतरी हुई है.
मारुति सुजुकी ने बताया कि 20 लाख से 30 लाख वाहनों की रेल डिलीवरी का सफर केवल 21 महीनों में पूरा हुआ. कंपनी के इतिहास में यह पहली बार है जब रेलवे के जरिए 10 लाख अतिरिक्त वाहनों की ढुलाई इतनी तेजी से हुई है. कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा कि यह उपलब्धि मारुति सुजुकी की ग्रीन लॉजिस्टिक्स रणनीति का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि रेलवे आधारित ट्रांसपोर्ट से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, ईंधन की बचत होती है और सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी घटता है.
पीएम गति शक्ति योजना से मिला बड़ा फायदा
मारुति सुजुकी ने केंद्र सरकार की पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान की भी तारीफ की. कंपनी का कहना है कि इस योजना ने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है. इससे उद्योगों के लिए रेलवे आधारित माल ढुलाई को अपनाना आसान हुआ है. कंपनी ने ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 13,720 मिलियन रुपये से ज्यादा निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है. इसके अलावा हरियाणा के खरखोदा में बनने वाली नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में इन-प्लांट रेलवे साइडिंग भी तैयार की जाएगी.
दो प्लांट्स में पहले से रेलवे साइडिंग
मारुति सुजुकी फिलहाल देश की पहली और एकमात्र पैसेंजर व्हीकल कंपनी है, जिसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में रेलवे साइडिंग सुविधा मौजूद है. इनमें गुजरात का हंसलपुर प्लांट और हरियाणा का मानेसर प्लांट शामिल हैं. इन दोनों सुविधाओं की संयुक्त वार्षिक डिस्पैच क्षमता 7.5 लाख वाहनों की है. कंपनी का रेल नेटवर्क फिलहाल 22 हब्स के जरिए देश के 600 से अधिक शहरों तक वाहन पहुंचा रहा है.
2030 तक बड़ा लक्ष्य
मारुति सुजुकी अब रेलवे आधारित वाहन डिस्पैच को और तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि वित्त वर्ष 2030-31 तक कुल वाहन परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी 35 फीसदी तक पहुंचाई जाएगी. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनी की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
जाले में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का ‘अजब’ नमूना: 560 मीटर लंबी सड़क के बीच खड़े हैं बिजली के खंभे, 54 लाख खर्च के बाद भी गांव में घुस नहीं सकती चारपहिया – Singhwara News
दुनिया में 7 अजूबे हैं, लेकिन अगर आपको आठवां अजूबा देखाना है तो दरभंगा जिले के जाले नगर परिषद के बार्ड नंबर दो का रूख करिए। यहां आपको बिहार सरकार द्वारा बनाया गया अदभुद मुजस्सिमा देखने को मिलेगा। यहां मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाए गए सड़क के बीच में ही बिजली के खंभे लगे हुए हैं। शायद इस बात का ध्यान रखा गया कि स्थानीय लोगों को दिक्कत हो तो हो लेकिन बिजली विभाग को अतिरिक्त काम ना करना पड़े। आलम भी यहीं है। जाले नगर परिषद के वार्ड दो स्थित खेसर में नवनिर्मित सड़क के बीचों-बीच बिजली के खंभे खड़े होने से स्थानीय लोगों के भारी परेशानी हो रही है। गांव में करीब तीन-चार महीने से यानि जबसे ये सड़क बनी है तब से चारपहिया वाहनों का आवागमन बाधित है। ये आलम तब है जब मुख्यमंत्री ग्रामीण विकास योजना के तहत बनी ये सड़क 560 मीटर लंबी और 12 फीट चौड़ी है। इसको बनाने में 54.877 लाख रुपए की लागत भी लगी है। लेकिन शायद उद्देश्य यही होगा की पैसा लगे तो लगे बस चारपहिया गांव में ना घुसे। वहीं बेचारे दो पहिया वाहन वाले भी रफ्तार में गाड़ी नहीं चला पा रहे हैं। ठेकेदार ने एक नहीं सुनी, बीच सड़क में खंभे रहने दिए स्थानीय निवासी और वार्ड पार्षद प्रतिनिधि अर्जुन सदा ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान ही ठेकेदार से बीच सड़क में खंभे होने की शिकायत कई बार की गई थी। हालांकि, इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई और निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो बिजली के खंभे हटाए गए हैं और न ही किसी अधिकारी ने स्थल का निरीक्षण किया है। खेती करने में किसानों को हो रही दिक्कत वार्डवासियों के अनुसार, सड़क के बीच खंभे होने से किसानों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। खेती से जुड़े सामान और फसल के परिवहन में भारी दिक्कतें आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बावजूद अगर वाहन नहीं चल पा रहे हैं, तो विकास कार्य किए जाने का फायदा ही क्या है? विधायक के नगर विकास एवं आवास विभाग मंत्री रहते बना अजूबा दरभंगा में यह आठवां अजूबा तब बना जब जाले विधानसभा क्षेत्र के विधायक जीवेश कुमार बिहार सरकार में नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री थे। इस सड़क का निर्माण संवेदक सतीश कुमार ठाकुर द्वारा कराया गया है, जिसकी कार्यकारी एजेंसी कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल दरभंगा-2 है। सड़क की लंबाई 0.560 किलोमीटर है और यह आरडीसी रोड खेसर से साहूजी तक बनी है। इसके पांच वर्षीय अनुरक्षण के लिए 4.0746 लाख रुपए का प्रावधान भी किया गया है। बिजली विभाग के जेई बोले – हमें जानकारी नहीं इस संबंध में जब जाले बिजली विभाग के जेई कुमार गौरव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, जाले नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सुंदरम सानंद ने मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि उन्हें सड़क पर बिजली के खंभे होने की जानकारी मिली है, लेकिन यह सड़क नगर परिषद के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है। हालांकि उन्होंने जल्द समाधान की उम्मीद जताई और कहा कि यह सड़क आरडब्ल्यूडी (ग्रामीण कार्य विभाग) के अंतर्गत आती है और संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है। संवेदक सतीश कुमार ठाकुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या पहले जैसी ही बनी हुई है। सड़क बनने के बावजूद चारपहिया वाहन नहीं चल पा रहे हैं और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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कोई 10वीं, कोई है 12 वीं फेल, ये बॉलीवुड एक्ट्रेस तो कभी गई ही नहीं स्कूल
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एक्टिंग की दुनिया के कई ऐसे सितारे हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई अधूरी ही छोड़ दी थी. लेकिन फिर भी ये सेलेब्स इंडस्ट्री में छाए हुए हैं. इनमें कुछ तो ऐसे है, जो करोड़ों कमाते हैं. अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर आज वह इंडस्ट्री में बड़ा नाम कमाकर इडंस्ट्री पर राज करते हैं.
नई दिल्ली. अर्जुन कपूर, कंगना रनौत और रणबीर कपूर समेत कई ऐसे स्टार हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. 12वीं बोर्ड के नतीजे जारी होने के बाद फिर से इन सितारों की चर्चा होने लगी हैं.

इनमें पहले हैं, रणबीर कपूर, जिन्होंने 10वीं के बाद ही अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. उन्होंने इस बात का जिक्र कई बार अपने इंटरव्यू में भी किया है. उन्होंने मुंबई के बॉम्बे स्कॉटिश कॉलेज से पढ़ाई की है. लेकिन उन्हें शुरू से ही एक्टर ही बनना था. इसलिए उन्होंने एक्टिंग को करियर के लिए चुना और आज वह इंडस्ट्री के बड़े सुपरस्टार हैं.

दूसरे हैं फिल्म ‘इश्कजादे’ से डेब्यू करने वाले अर्जुन कपूर. जो कि 12वीं फेल हैं. एक्टर ने मुंबई के आर्य विद्या मंदिर से पढ़ाई की है.12वीं में फेल होने के बाद उन्होंने बीच में पढ़ाई छोड़ दी और एक्टिंग करियर शुरू कर दिया.
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तीसरी हैं कंगना रनौत. कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली कंगना रनौत आज एक्टिंग और राजनीति दोनों जगह सक्रिय हैं. लेकिन कंगना ने 12वीं में सफलता न मिलने के बाद घर से भागकर एक्ट्रेस बनने का सपना देखा.

कपूर खानदान की लाडली करिश्मा ने भी बहुत कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी.बताया जाता है कि उन्होंने शुरुआती पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान एक्टिंग में होने लगा था. यही वजह थी कि वह एक्टिंग में आ गईं. 90 में तो इंडस्ट्री में उनका सिक्का जमा था.

अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने भी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं की. उन्होंने एक्टिंग में ही करियर बनाने का फैसला किया. फ्लॉप डेब्यू के बाद भी वह करियर में कई हिट दे चुकी हैं. इंडस्ट्री में वह अपने फैशन सेंस के लिए भी जानी जाती हैं.

आमिर खान ने भी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. उन्होंने मुंबई के नरसी कॉलेज से 12वीं पास की है. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ थिएटर कंपनी में काम करना शुरू किया. फिल्म कयामत से कयामत तक फिल्म से उन्होंने अपना करियर शुरू किया और आज वह सुपरस्टार हैं.

वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ के लिए तो बताया जाता है कि वो कभी भी स्कूल ही नहीं गईं. हालांकि, वो फिल्मी दुनिया की टॉप एक्ट्रेस में गिनी जाती हैं. उन्होंने अपने एक्टिंग के जरिए काफी लोगों के दिल जीते हैं.उन्होंने होमस्कूलिंग के जरिए पढ़ाई की और कम उम्र में मॉडलिंग शुरू कर दी.
लखीमपुर में ओले गिरे, मकान गिरने से एक की मौत: पेड़ गिरने से कई लोग घायल, आंधी-बारिश से फसलें तबाह; बिजली कटी – Lakhimpur-Kheri News
लखीमपुर खीरी में मंगलवार दोपहर बाद आए तेज आंधी-तूफान, बारिश और ओलावृष्टि ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। इस प्राकृतिक आपदा में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। जिले में दर्जनों पेड़ उखड़ गए और बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। दोपहर बाद अचानक घने काले बादल छा गए और तेज धूल भरी आंधी ने दिन में ही रात जैसा माहौल बना दिया। इसके बाद कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश और ओलावृष्टि हुई। निघासन, गोला, मैगलगंज और ईसानगर क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। वहीं, पसगवां और मितौली ब्लॉक के कई हिस्सों में ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवाओं के कारण दर्जनों पेड़ जड़ से उखड़ गए और कई मकानों व दुकानों की टीनशेड उड़ गईं। मैगलगंज क्षेत्र के जमुनिया कढ़ीले गांव में एक मकान गिरने से रतिराम मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। हैरामखेड़ा गांव में पेड़ गिरने से गुड्डी देवी और सुधीर गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अतिरिक्त, इच्छनापुर निवासी पूरन सिंह के घर पर पेड़ गिरने से एक मवेशी की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल हो गया। आंधी के कारण कई स्थानों पर पेड़ सड़कों पर गिर गए, जिससे नेशनल हाईवे-30 पर घंटों यातायात बाधित रहा। कई बिजली के खंभे और तार टूटने से सैकड़ों गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
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