अवैध रूप से संचालित और अनधिकृत रूप से मोडिफाई करने वाली स्लीपर/लक्जरी बसों के खिलाफ आज उदयपुर के खेलगांव चौराहा पर कार्रवाई की गई। इसमें 3 लक्ज़री स्लीपर बसें सीज, 9 बसों पर 1 लाख 20 हज़ार का जुर्माना भी लगाया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर एवं परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश गुप्ता के निर्देश पर सुरक्षित परिवहन के नागरिकों के अधिकार की रक्षा करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। सुखेर थाना क्षेत्र में खेलगांव चौराहा पर संयुक्त निरीक्षण में कार्रवाई की गई। इसके तहत 20 बसों की जांच की गई। इनमें से 9 बसों के खिलाफ विभिन्न नियमों के उल्लंघन के तहत चालान बनाए गए और करीब एक लाख बीस हज़ार का जुर्माना ज़रिए चालान लगाया गया। बसों में अनियमितताएं और अनधिकृत बदलाव पाए जाने पर 3 बसों को मौके पर ही सीज कर दिया गया। इस दौरान अपर जिला न्यायाधीश राहुल चौधरी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार जोशी, जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड और आरटीओ इंस्पेक्टर राजेंद्र दन्तसुलिया, तेजपाल, घनश्याम मीणा मौजूद रहे।
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राम बनकर दिल जीतने से पहले रणबीर कपूर ने अयोध्या में करोड़ों का ये काम
नई दिल्ली. बॉलीवुड सितारे सिर्फ फिल्मों से कमाई नहीं करते, बल्कि अपनी दौलत बढ़ाने के लिए अलग अलग जगह निवेश भी करते हैं. कोई स्टार्टअप में पैसा लगाता है तो कोई शेयर बाजार में. वहीं कुछ सितारे रियल एस्टेट को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं. इसी कड़ी में अब रणबीर कपूर का नाम भी तेजी से चर्चा में है. उन्होंने हाल के महीनों में दो बड़े प्रॉपर्टी सौदे किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 20 करोड़ रुपये है. मीडिया रिपोर्ट्स और रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म सीआरई मैट्रिक्स के मुताबिक, रणबीर कपूर ने महाराष्ट्र के पुणे और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जमीन खरीदी है. एक तरफ उन्होंने पुणे में कई बड़े भूखंड खरीदे हैं, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर के बाद तेजी से विकसित हो रहे अयोध्या में भी प्रीमियम प्रोजेक्ट में निवेश किया है.
रणबीर कपूर ने पुणे के मुलशी तालुका के पिंपरी गांव में कुल 4 भूखंड खरीदे हैं. इनकी कुल कीमत 16.42 करोड़ रुपये बताई गई है. इन सभी सौदों की रजिस्ट्री 30 अप्रैल को हुई थी. इन जमीनों के लिए उन्होंने कुल 82.13 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क भी चुकाया. खरीदे गए भूखंडों का आकार 8,900 वर्ग मीटर से लेकर 43,800 वर्ग मीटर तक है. सबसे बड़ा भूखंड 43,800 वर्ग मीटर का है, जिसे 7.07 करोड़ रुपये में खरीदा गया. इस पर 35.40 लाख रुपये का स्टाम्प शुल्क चुकाया गया. वहीं 29,900 वर्ग मीटर का दूसरा बड़ा प्लॉट 4.62 करोड़ रुपये में खरीदा गया, जिस पर 23.13 लाख रुपये स्टाम्प शुल्क दिया गया.
अयोध्या में भी खरीदी प्रीमियम प्रॉपर्टी
रणबीर कपूर ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भी एक प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट में निवेश किया है. उन्होंने ‘द सरयू’ नाम के प्रोजेक्ट में 2,134 वर्ग फुट का प्लॉट खरीदा है. इस सौदे की कीमत करीब 3.31 करोड़ रुपये बताई गई है. यह प्रोजेक्ट सरयू नदी के किनारे करीब 75 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है. इसमें लग्जरी सुविधाओं के साथ हाई एंड रिहायशी प्रॉपर्टी बनाई जा रही है.
अयोध्या को लेकर क्या बोले रणबीर कपूर?
अयोध्या में निवेश को लेकर रणबीर कपूर ने कहा कि उन्हें लगता है जैसे अयोध्या ने उन्हें खुद बुलाया है. उनके मुताबिक, अयोध्या भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है. उन्होंने कहा कि सरयू नदी के किनारे यह निवेश उनके परिवार की विरासत का हिस्सा बनेगा.
अमिताभ बच्चन भी कर चुके हैं निवेश
रणबीर कपूर से पहले बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी इसी प्रोजेक्ट में निवेश कर चुके हैं. उन्होंने ‘द सरयू’ प्रोजेक्ट में करीब 15,000 वर्ग फुट जमीन खरीदी थी. इस सौदे की कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये बताई गई थी.
क्यों बढ़ रहा है अयोध्या का आकर्षण?
राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में रियल एस्टेट की मांग तेजी से बढ़ी है. होटल, टाउनशिप, लग्जरी हाउसिंग और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में लगातार निवेश हो रहा है. देश के बड़े कारोबारी और कई सेलिब्रिटी भी यहां प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं. ऐसे में रणबीर कपूर का यह निवेश भी इसी बढ़ते ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है.
रियल एस्टेट क्यों बन रहा है पसंदीदा निवेश?
रियल एस्टेट को लंबे समय से ऐसी संपत्ति माना जाता है, जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ने की संभावना रहती है. खासकर उन शहरों और धार्मिक स्थलों में, जहां तेजी से विकास हो रहा हो. यही वजह है कि कई बड़े निवेशक अब शेयर बाजार के साथ साथ जमीन और प्रॉपर्टी में भी पैसा लगा रहे हैं. रणबीर कपूर का ताजा निवेश भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में भी अवधेश नायक शामिल नहीं: राजेन्द्र भारती, महेन्द्र बौद्व, राधेलाल सहित 40 दिग्गज दतिया उपचुनाव के स्टार कैम्पेनर बने – Bhopal News
कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट चुनाव आयोग को लिस्ट भेजी है। कांग्रेस की लिस्ट में दतिया से टिकट के दावेदारों में शामिल अवधेश नायक को जगह नहीं मिली है। जबकि दतिया के पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती और सेंवढ़ा के पूर्व विधायक राध
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कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक ने 13 जुलाई को स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को भेजी है।
कमलनाथ, दिग्विजय, जीतू, उमंग जैसे दिग्गज शामिल
कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की सूची में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं। पार्टी ने ग्वालियर-चंबल सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारने की तैयारी की है।
यादव बंधु और पिता-पुत्र की जोड़ी भी स्टार प्रचारकों में
कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में दो सगे भाई भी शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव और पूर्व कृषि मंत्री व कसरावद विधायक सचिन यादव को स्टार प्रचारक बनाया गया है। वहीं, 40 चुनिंदा नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उनके बेटे, पूर्व मंत्री व विधायक जयवर्धन सिंह की पिता-पुत्र की जोड़ी भी शामिल है।


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दतिया उपचुनाव: भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची जारी

दतिया विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए भाजपा के प्रस्तावित स्टार प्राचरकों की सूची सामने आई है। 11 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजी गई सूची सोमवार सुबह सामने आई है। इस सूची में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों से लेकर संगठन के बड़े चेहरों को शामिल किया गया है।पूरी खबर पढ़ें
मोतिहारी में फर्जी शिक्षक बहाली का आरोप: डीएम ने डीईओ को जांच के आदेश दिए, टीम गठित; बोले-नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी – Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी में शिक्षक नियोजन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव के समक्ष फर्जी बहाली की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को जांच का निर्देश दिया है। निष्पक्ष जांच की मांग की-शिकायतकर्ता शिकायतकर्ता प्रियांशु राज ने डीएम को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप है कि रौशन आरा खातून, जो वर्तमान में राजकीय मध्य विद्यालय, टिकैता (पिपराकोठी) में विशिष्ट शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, उनकी नियुक्ति शुरू से ही संदिग्ध रही है। शिकायत के अनुसार, फरवरी 2005 में पंचायत शिक्षक नियोजन के लिए विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। उस समय रौशन आरा खातून की जन्म तिथि 14 अप्रैल 1987 के आधार पर उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष 10 माह थी, जो नियोजन के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा से कम है। रोस्टर में उनका नाम शामिल नहीं था यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने पति इजहार अंसारी और तत्कालीन पंचायत सचिव की मिलीभगत से आवेदन जमा किया था। उस समय तैयार रोस्टर में उनका नाम शामिल नहीं था। मई 2005 में लगभग 22-23 लोगों को शिक्षा मित्र के रूप में नियोजन पत्र जारी किए गए थे, जिनमें उनका नाम नहीं था। इसके बावजूद, कथित तौर पर तत्कालीन मुखिया के फर्जी हस्ताक्षर से बिना पत्रांक और दिनांक के नियोजन पत्र तैयार कर उनका योगदान करा दिया गया। आरोप है कि नियोजन पत्र पर आवश्यक पदाधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं थे। विभागीय स्तर पर संरक्षण मिलता रहा शिकायत में कहा गया है कि इन अनियमितताओं के बावजूद उन्हें वर्षों तक विभागीय स्तर पर संरक्षण मिलता रहा और कभी जांच नहीं हुई। उनकी शैक्षणिक योग्यता और परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने 2009 की दक्षता परीक्षा सामान्य वर्ग में पास की, जबकि 2024 की सक्षमता परीक्षा उर्दू विषय से उत्तीर्ण की, जिसे विभागीय नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। बताया गया है कि सक्षमता परीक्षा के बाद विशिष्ट शिक्षिका के रूप में उनके योगदान को वर्तमान प्रधानाध्यापक ने भी स्वीकृति नहीं दी है। इधर, शिकायत पत्र मिलने के बाद डीएम सौरभ सुमन यादव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीईओ को जांच का आदेश दिया है। इस संबंध में डीईओ राजन गिरी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पब्लिक प्लेस पर पोर्न देखने पर रोक की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार के पास जाएं, यह कानून बनाने वालों का मामला है
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नई दिल्ली26 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर पोर्नोग्राफी देखने पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह कानून का नहीं बल्कि पॉलिसी का मामला है। इस पर फैसला केंद्र सरकार और विषय विशेषज्ञों को करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा निश्चित रूप से अहम है, लेकिन इसमें ऐसा कोई कानूनी प्रश्न नहीं है जिस पर कोर्ट को विचार करना पड़े। यह तकनीकी विकास और विशेषज्ञों की स्टडी से जुड़ा नीतिगत विषय है, जो मुख्य रूप से सूचना मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखने की सलाह दी। साथ ही कहा कि इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप जरूरी नहीं है।
याचिकाकर्ता के 2 दावे…
- इंटरनेट पर हर सेकंड 5,000 पोर्न साइट्स देखी जाती हैं।
- इंटरनेट के जरिए 2 करोड़ से ज्यादा पोर्न वीडियो/क्लिप्स जारी किए जा रहे हैं।
याचिका में दावा- इंटरनेट पर अश्लील सामग्री तक पहुंच आसान
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बीएल जैन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि विशेषकर नाबालिगों के बीच पोर्नोग्राफी की पहुंच को रोका जा सके।
याचिका में दावा किया गया कि इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी कंटेट आसानी से मिल जाता है। और यह लगातार बढ़ रहा है। हर सेकंड हजारों पोर्न वेबसाइट देखी जा रही हैं। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता के कारण इसकी लत बढ़ रही है और इससे यौन अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का हवाला देते हुए कहा गया था कि केंद्र सरकार के पास आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने की शक्ति है।

क्या भारत में पोर्न देखना अपराध है?
भारतीय कानून में वयस्क व्यक्ति द्वारा निजी स्थान पर पोर्न देखना अपने-आप में अलग से अपराध घोषित नहीं किया गया है। लेकिन ये कार्य अपराध हो सकते हैं, जब कोई पोर्न बनाता है या बेचता है। सार्वजनिक रूप से अश्लील सामग्री दिखाना, बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना, देखना या शेयर करना भी अपराध के दायरे में आता है।
इसके अलावा बिना सहमति किसी का निजी वीडियो फैलाना, अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण करना भी कानूनन अपराध माना जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने POCSO के दुूरुपयोग पर चिंता जताई: कहा- लड़का-लड़की को भागने से सरकार कैसे रोकेगी, यह नई चीजें आजमाने की उम्र

सुप्रीम कोर्ट ने किशोर-किशोरियों के बीच सहमति से बने संबंधों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। अदालत ने सोमवार को कहा कि जब किसी लड़के और लड़की के बीच संबंध हो और वे साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता।पढ़ें पूरी खबर…
इसमें आलू नहीं पड़ता…क्या आपने कभी खाया दूध और मखाने वाला बलिया का समोसा?
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Potato-free samosa recipe : बलिया अब केवल अपने बागी इतिहास तक सीमित नहीं, बल्कि एक नए और अनोखे स्वाद की खुशबू से लुभा रहा है. यहां ऐसा समोसा बन रहा है, जिसमें आलू नहीं, बल्कि दूध, काजू और मखाने का प्रयोग किया जाता है. यही अनोखेपन ने इसे लोगों की पहली पसंद बना दिया है. दुकानदार संजय कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि जब सीक्रेट मसाले को समोसे की कुरकुरी परत में भरकर तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है.
बलिया में तैयार होने वाला यह समोसा पारंपरिक समोसे से बिल्कुल अलग है. जहां अधिकांश समोसों की जान आलू होता है, इसमें आलू का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया जाता है. इसकी जगह दूध, मखाना और खास मसालों से मिश्रण तैयार कर समोसे में भरा जाता है. इसी के कारण पहली बार इसे खाने वाला हर व्यक्ति इसके स्वाद और बनावट की तारीफ करता है.

इस अनोखे और स्पेशल समोसे की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है. प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलो ताजा दूध बड़े भगोनों में उबाला जाता है. लगभग दो किलो मखाना दूध में डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. जब मखाना पूरी तरह दूध में घुल-मिल जाए, तब इससे एक विशेष प्रकार का पनीर तैयार किया जाता है, जो इस समोसे की बड़ी खासियत है.

दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक, पनीर बनने के बाद उसमें इस्तेमाल किए जा रहे खास मसालों का मिश्रण गोपनीय रखा गया है, ताकि कोई इसका नकल न कर सके. इसमें स्वाद को बेहतर बनाने के लिए बारीक कटे काजू भी डाले जाते हैं. यह मिश्रण जब समोसे की कुरकुरी परत में भरकर सुनहरा तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है.
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अपने खासियत के चलते ही यह समोसा सुर्खियां बटोर रहा है. जनपद बलिया शहर और आसपास के कई इलाकों से लोग केवल इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं. बलिया रेलवे स्टेशन के पास दुकान होने से बाहर से आने वाले यात्री भी यहां रुककर इस खास समोसे का आनंद लेते हैं और कई लोग पैक कराकर अपने घर भी ले जाते हैं. इस समोसे के स्वाद का जलवा दूर-दूर तक फैल चुका है.

पहले यह दुकान जिले के सिकंदरपुर में थी, जो सिकंदरपुर वाले मशहूर हो गई, बढ़ती मांग को देखते हुए यह स्वाद अब बलिया शहर तक पहुंच गया है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है, जो मुख्य शहर में स्थित है. इससे शहर के लोगों को अब सिकंदरपुर तक जाने की जरूरत नहीं है.

बगैर आलू के इस समोसे की खासियत न केवल इसका अलग भरावन से है, बल्कि इसकी गुणवत्ता बेहतर है. ताजा दूध, मखाना, पनीर, काजू और चुने हुए मसालों का संतुलित मिश्रण ही इसको शाही स्वाद प्रदान करता है. इसी के चलते ग्राहक एक बार इसे चखता है, तो वह दोबारा आने को मजबूर हो जाता हैं. इसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों लाजवाब है.

बलिया की पहचान अब न केवल ऐतिहासिक तक सीमित है, बल्कि यहां के स्थानीय व्यंजन भी नई पहचान बना रहे हैं. स्वाद का आनंद ले रही सिमरन बताती हैं कि दूध और मखाने से तैयार यह समोसा स्थानीय उद्यम और नवाचार का बेहतरीन उदाहरण है. पारंपरिक व्यंजन में नए प्रयोग ने इसे अलग ही पहचान दे दिया है और यह जिले में आकर्षण बनता जा रहा है.

अगर आप भी बलिया आने का प्लान बना रहे हैं और कुछ ऐसा चखना चाह रहे हैं, जो आम समोसे से बिल्कुल अलग हो, तो यह दूध-मखाना समोसा जरूर ट्राई करें. यकीन मानिए, इसका अनोखा स्वाद, खास बनाने की विधि और देसी अंदाज हर निवाले को यादगार बना देता है. इसी के कारण यह समोसा आज बलिया में नई स्वाद बनकर दूर-दूर तक अपनी खुशबू फैला रहा है.
बस्ती में अज्ञात वाहन की टक्कर से मजदूर की मौत: काम कर लौट रहे साथी गंभीर घायल, पुलिस जांच में जुटी – Basti News
बस्ती के कलवारी थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक सड़क हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। अज्ञात वाहन ने मजदूरी कर लौट रहे दो मजदूरों की बाइक को टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार 13 जुलाई 2026 को शाम करीब 7:20 बजे हुई। कलवारी चौराहे से रामजानकी मार्ग पर अगौना की ओर लगभग 200 मीटर आगे एक अज्ञात वाहन ने पीछे से बाइक में टक्कर मारी। दोनों श्रमिक छावनी क्षेत्र से मजदूरी कर अपने घर चकबंजारीजोत, कलवारी लौट रहे थे। हादसे में पंकज (32) पुत्र अजीत और सुभाष चंद्र (39) पुत्र रामदीन गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही कलवारी पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस से दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कलवारी भेजा। वहां चिकित्सकों ने पंकज को मृत घोषित कर दिया, जबकि सुभाष चंद्र की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल बस्ती रेफर किया गया। घटना के बाद मृतक पंकज के परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अज्ञात वाहन और उसके चालक की तलाश कर रही है।
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‘मैं 14 साल तक सुपरस्टार रहा’, रूपा’ से बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे गोविंदा
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करीब पांच साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे बॉलीवुड स्टार गोविंदा अपनी नई फिल्म ‘रूपा’ को लेकर काफी उत्साहित हैं. फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने करियर के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और लकी नंबर 14 से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं. अभिनेता ने कहा कि हर मुश्किल ने उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत बनाया और अब वह एक नई शुरुआत के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
नई दिल्ली. 90 के दशक के सुपरस्टार गोविंदा लंबे समय बाद एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहे हैं. उनकी नई फिल्म ‘रूपा’ जल्द रिलीज होगी. फिल्म के प्रमोशन के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोविंदा ने अपने करियर, संघर्ष और लकी नंबर 14 से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए.

गोविंदा ने कहा कि शायद उनकी किस्मत में कई बार लोगों का उन्हें नजरअंदाज करना ही लिखा था, ताकि वह हर बार पहले से ज्यादा मजबूत होकर लौट सकें. उन्होंने कहा, “लोग कहते थे कि अब गोविंदा फिल्मों में नहीं दिखेगा, लेकिन मैंने हमेशा नई शुरुआत की है.

अपनी बात रखते गोविंदा ने कहा कि मुझे भरोसा है कि ‘रूपा’ के जरिए जो सपना मैंने देखा है, वह पूरा होगा. यह फिल्म खास तौर पर युवाओं के लिए है और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देगी.
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गोविंदा ने बताया कि उन्हें अंक ज्योतिष यानी न्यूमरोलॉजी पर काफी भरोसा है और 14 उनका सबसे लकी नंबर है. उन्होंने कहा, ‘मेरा नाम भी न्यूमरोलॉजी के हिसाब से रखा गया था. मैं सिर्फ 14 साल का था, तभी से इस पर यकीन करने लगा था.’

अपनी बात आगे रखते हुए गोविंदा ने कहा, ‘एक समय ऐसा आया जब मैंने सिर्फ एक हफ्ते में 14 फिल्में साइन की थीं. उसके बाद करीब 14 साल तक सुपरस्टार रहा. फिर 14वीं लोकसभा का सांसद बना.

इतना ही नहीं अपनी बातचीत में गोविंदा ने कहा कि अब 14 साल संघर्ष करने के बाद वह फिल्मों में वापसी कर रहे हैं. इस बार मैं पांच साल से ज्यादा इंतजार नहीं कर सका. अब मुझे लगता है कि मेरी नई शुरुआत यहीं से हो रही है.

गोविंदा ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह गांव में कहते थे कि एक दिन हीरो बनेंगे, तो लोग उनका मजाक उड़ाते थे. लोग कहते थे, ‘तुम न सिगरेट पीते हो, न शराब पीते हो, न नॉनवेज खाते हो और न ही लहसुन-प्याज. ऐसे में हीरो कैसे बनोगे.’

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें डरपोक तक कहा और साधु बनने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. गोविंदा के मुताबिक, उन्होंने हमेशा अपनी मां के सपनों को पूरा करने की कोशिश की. उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘रूपा’ जैसी फिल्में बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगी और ऐसी फिल्मों का बनना जरूरी है.
BSNL का 365 दिन चलने वाला एनुअल प्लान, अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ मिलेंगे कई बेनिफिट्स
BSNL के 365 दिन वैलिडिटी वाले खास प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग, डेटा समेत कई बेनिफिट्स ऑफर किए जा रहे हैं। भारत संचार निगम लिमिटेड ने पिछले कुछ महीनों में कई नए रिचार्ज प्लान पेश किए हैं, जिनमें यूजर्स को कम खर्च में कॉलिंग, डेटा समेत कई बेनिफिट्स ऑफर किए जाते हैं। सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर के ये प्लान निजी कंपनियों के मुकाबले सस्ते होते हैं और इनमें ज्यादा बेनिफिट्स ऑफर किए जाते हैं।
BSNL का 365 दिन वाला प्लान
भारत संचार निगम लिमिटेड ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इस प्रीपेड प्लान के बारे में जानकारी शेयर की है। बीएसएनएल का यह प्लान 2799 रुपये में आता है, जिसमें 365 दिनों की वैलिडिटी ऑफर की जाती है। इस प्लान में मिलने वाले बेनिफिट्स की बात करें तो यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ मिलता है।
BSNL का यह प्रीपेड प्लान डेली 3GB हाई स्पीड डेटा और 100 फ्री SMS के साथ आता है। इस तरह से यूजर्स को भारत संचार निगम लिमिटेड के इस प्लान में कुल 1,095GB डेटा का लाभ मिलता है।
BSNL का सैटेलाइट फोन
भारत संचार निगम लिमिटेड ने हाल ही में सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है, जिसमें यूजर्स को बिना मोबाइल नेटवर्क में भी कॉलिंग की सुविधा मिलेगी। इस सैटेलाइट फोन की कीमत 1,34,166 रुपये हैं। हालांकि, इस फोन को हर कोई नहीं खरीद सकता है। इसके लिए दूरसंचार विभाग यानी DoT से खास परमिशन की जरूरत होती है। बिना दूरसंचार विभाग के ऑथोराइजेशन के इस फोन को नहीं यूज किया जा सकेगा।
BSNL ने अपने आधिकारिक X हैंडल से इस सैटेलाइट फोन की जानकारी शेयर की है। यह फोन चैलेंजिंग वातावरण में भी काम करता है। इसे खास तौर पर डिफेंस, मेरीटाइम, डिजास्टर रिस्पॉन्स, माइनिंग, रिमोट ऑपरेशन और एडवेंचर ट्रेवल के लिए डिजाइन किया गया है।
फ्रीडम ऑफर किया एक्सटेंड
भारत संचार निगम लिमिटेड ने नए यूजर्स के लिए अपने 51 रुपये वाले फ्रीडम ऑफर को 31 अगस्त तक एक्सटेंड कर दिया है। इस ऑफर को कंपनी ने मई में लॉन्च किया था। भारत संचार का यह ऑफर पहले 30 जून 2026 तक के लिए था, लेकिन कंपनी ने इसमें एक्सटेंशन करने का फैसला किया है। भारत संचार निगम अपने इस ऑफर में यूजर्स को महज 51 रुपये में 28 दिनों की वैलिडिटी दे रहा है। यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग, डेटा समेत कई बेनिफिट्स मिलेंगे।
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जब सनी देओल-संजय दत्त की महा-जुगलबंदी को दर्शकों ने थिएटर्स में किया था रिजेक्ट
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जब भी बॉलीवुड के दो बड़े एक्शन स्टार्स एक साथ आते हैं, तो आमतौर पर ब्लॉकबस्टर की उम्मीद की जाती है. लेकिन, सनी देओल और संजय दत्त की जोड़ी का इतिहास कुछ और ही कहानी कहता है. जब भी सनी देओल और संजय दत्त बड़े पर्दे पर एक साथ दिखे, बॉक्स ऑफिस हमेशा खाली रहा! जी हां, अपने जबरदस्त स्टारडम के बावजूद, इन दोनों हीरो की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने में नाकाम रही. हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर अपनी बड़ी असफलताओं के बावजूद, ये फिल्में टीवी और वीसीआर पर दर्शकों के बीच इतनी पॉपुलर हुईं कि अब इन्हें कल्ट क्लासिक्स माना जाता है.
नई दिल्ली. 90 के दशक में सनी देओल की ‘ढाई किलो का हाथ’ और संजय दत्त का ‘खलनायक’ अवतार सिंगल स्क्रीन पर आग लगाने के लिए काफी थे. कहा जाता है कि उस दौर में ट्रेड पंडितों और डिस्ट्रीब्यूटरों का मानना था कि अगर इन दो जबरदस्त एक्शन स्टार्स को एक ही फ्रेम में एक साथ लाया जाए, तो थिएटर कैश से भर जाएंगे, सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे. इस फॉर्मूले को भुनाने के लिए प्रोड्यूसर्स ने करोड़ों रुपये खर्च किए और दोनों हीरो को एक साथ कैमरे के सामने लाया.लेकिन, बॉक्स ऑफिस का हिसाब हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं होता. हैरानी की बात है कि जब भी ये दोनों सुपरस्टार बड़े पर्दे पर एक साथ दिखे, टिकट खिड़की पर बहुत बुरा हाल था. बड़े बजट और जबरदस्त हाइप के बावजूद, ये फिल्में अपनी थिएटर की लागत भी नहीं निकाल पाईं. हालांकि, समय का पहिया ऐसा घूमा कि थिएटर में फ्लॉप होने के बावजूद, ये फिल्में टीवी और वीसीआर पर इतनी देखी गईं कि अब ये कल्ट क्लासिक बन गई हैं. तो आइए, ऐसी ही 3 फिल्मों पर एक नजर डालते हैं…

1. क्रोध- 1990: शशिलाल के. नायर की डायरेक्ट की हुई ‘क्रोध’ के मेकर्स को इस फिल्म से बहुत उम्मीदें थीं. सनी देओल और संजय दत्त के एग्रेसिव अवतार को भुनाने के लिए फिल्म में तीखे डायलॉग और जबरदस्त एक्शन का तड़का लगाया गया था. कहानी दो भाइयों के बीच झगड़े और एक फैमिली झगड़े के इर्द-गिर्द घूमती है.

जब फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, तो ऑडियंस को इसकी कहानी बहुत डार्क, वायलेंट और भारी लगी. फिल्म की धीमी स्पीड की वजह से ऑडियंस थिएटर जाने से बचने लगी और यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. थिएटर में फ्लॉप होने के बाद, जब फिल्म वीडियो कैसेट के जरिए घरों तक पहुंची, तो यंग लोगों को सनी और संजू का रफ-टफ स्टाइल बहुत पसंद आया. फिल्म के एक्शन सीन और दोनों की केमिस्ट्री को बाद में बहुत तारीफ मिली.
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2. योद्धा- 1991: फिल्म ‘योद्धा’ में सनी देओल ने एक बहादुर और ईमानदार वकील (भारत चौहान) का रोल किया था, जबकि संजय दत्त एक सीधे-सादे आदमी से क्राइम के बेताज बादशाह (सूरज सिंह) बन गए थे. अलग-अलग सोच वाले दो किरदारों का टकराव और फिर अन्याय के खिलाफ उनका एक होना, कागज पर एक परफेक्ट स्क्रिप्ट थी.

दीपक आनंद के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म थिएटर में रिलीज होते ही फ्लॉप हो गई. स्क्रीनप्ले, जिसे अपने समय के हिसाब से अलग माना गया था, दर्शकों को पसंद नहीं आया और खराब डिस्ट्रीब्यूशन की वजह से बॉक्स ऑफिस पर भारी नुकसान हुआ. समय के साथ, जब फिल्म टीवी चैनलों पर आने लगी तो लोगों को इसके गाने, खासकर सनी और संजू की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री बहुत पसंद आने लगी. आज फिल्म के क्लिप और डायलॉग सोशल मीडिया पर कल्ट फिगर माने जाते हैं.

3. क्षत्रिय- 1993: डायरेक्टर जेपी दत्ता की यह फिल्म एक ग्रैंड और हाई-बजट मल्टी-स्टारर फिल्म थी. दो शाही राजपूत परिवारों के बीच खानदानी झगड़े पर आधारित इस फिल्म में धर्मेंद्र, सुनील दत्त और विनोद खन्ना जैसे बड़े कलाकार थे, लेकिन फिल्म का मेन फोकस सनी देओल और संजय दत्त के बीच हुई जबरदस्त टक्कर थी.

अपनी शानदार लोकेशन, तलवारबाजी और शानदार कास्ट के बावजूद, फिल्म की ज्यादा लंबाई (लगभग साढ़े तीन घंटे) जानलेवा साबित हुई. थिएटर के दर्शक इतना लंबा और जबरदस्त ड्रामा नहीं देख पाए. अपने बड़े बजट की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी डिजास्टर साबित हुई, जिससे मेकर्स को काफी नुकसान हुआ. आज ‘क्षत्रिय’ उन दर्शकों के लिए एक कल्ट मास्टरपीस है जो राजपूत गर्व और तलवारबाजी को पसंद करते हैं. जब भी यह फिल्म टीवी पर आती है, लोग इसकी शान और सनी और संजू के बीच की मशहूर टक्कर देखना नहीं भूलते.


