Saturday, July 4, 2026
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RTO अधिकारी ने ₹22 में बुक की रैपिडो बाइक, फिर कंपनी के साथ हो गया खेला


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मोटर व्‍हीकल इंस्‍पेक्‍टर विशाल मधुकरराव भोवटे ने खुद अपने मोबाइल में रैपिडो ऐप से रवि भवन से प्रियदर्शिनी कॉलोनी तक जाने के लिए बाइक राइड बुक की. जैसे ही बाइक उन्‍हें लेने आई तो उसे आरटीओ कर्मचारियों ने जब्‍त कर लिया. बाद में पुलिस को शिकायत दी गई जिसके आधार पर रैपिडो के तीनों को-फाउंडर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

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आरटीओ ने बाइक को जब्त कर लिया. (File Photo)

नई दिल्ली. महाराष्ट्र में बिना परमिट और गैर-कानूनी तरीके से चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ परिवहन विभाग ने एक बड़ा और बेहद फिल्मी जाल बुना. नागपुर में खुद आरटीओ (RTO) अधिकारी ने ग्राहक बनकर महज ₹22 की एक राइड बुक की. इसके बाद जो हुआ, उसने रैपिडो कंपनी के होश उड़ा दिए. इस सीक्रेट ऑपरेशन के बाद रैपिडो ऐप का संचालन करने वाली कंपनी के संस्थापकों (Founders) ऋषिकेश एसआर, पवन गुंटुपल्ली और अरविंद सांका के खिलाफ नागपुर के सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है.

आरटीओ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, रैपिडो ऐप चलाने वाली पैरेंट कंपनी रूपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र सरकार या क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) से राज्य में पेट्रोल से चलने वाली बाइक टैक्सी सेवा संचालित करने की कोई अनुमति या लीगल परमिट नहीं मिला है. लेकिन, कंपनी निजी पेट्रोल बाइक का इस्‍तेमाल व्यावसायिक कामों के लिए कर रही है.

₹22 का जाल

यह पूरा मामला 23 जून का है जब नागपुर (शहर) क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने अवैध यात्री परिवहन के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया था. इस अभियान के तहत मोटर वाहन निरीक्षक विशाल मधुकरराव भोवटे ने खुद अपने मोबाइल में रैपिडो ऐप से रवि भवन से प्रियदर्शिनी कॉलोनी तक जाने के लिए बाइक राइड बुक की, जिसका किराया सिर्फ ₹22 था.

कुछ ही देर में निर्धारित पिकअप पॉइंट पर एक बाइक आकर रुकी. आरटीओ अधिकारी जैसे ही बाइक पर बैठे, वैसे ही टीम ने उसे घेर लिया. वाहन को जांच के लिए आरटीओ कार्यालय ले जाया गया. जांच में पता चला कि इस निजी (White Plate) दोपहिया गाड़ी का इस्तेमाल बिना किसी आवश्यक कमर्शियल लाइसेंस और परमिट के टैक्‍सी की तरह किया जा रहा था. आरटीओ ने बाइक को जब्त कर लिया.



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इंदौर के शिल्पकार ने सजाया जोधपुर एयरपोर्ट: 3 माह में गढ़ीं पांच भव्य कलाकृतियां; पीएम मोदी आज करेंगे अनावरण – Indore News




शहर के मूर्तिकार व कलाकार महेंद्र कोडवानी की कला को एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान मिली है। राजस्थान के जोधपुर एयरपोर्ट के लिए तैयार की गई उनकी भव्य कलाकृतियों का 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों अनावरण किया जाएगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जोधपुर एयरपोर्ट के सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक पहचान को उभारने की जिम्मेदारी विशेष रूप से महेंद्र कोडवानी को सौंपी गई थी। महेंद्र कोडवानी और उनकी टीम ने महज तीन माह में 20 से अधिक कलाकारों के सहयोग से जोधपुर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाने वाली पांच प्रमुख कलाकृतियां तैयार की हैं। इनमें “जोधपुर की आत्मा को समर्पित एक कलात्मक यात्रा”, “पीकॉक टेल्स : रंग, संस्कृति और मारवाड़ की आत्मा का उत्सव”, “विमान पर विराजमान भगवान शिव : कैलाश से लोककल्याण की दिव्य यात्रा”, “खेजड़ली : प्रकृति रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा” तथा “वीर दुर्गादास राठौड़ : साहस, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा” शामिल हैं। कलाकृतियों में मारवाड़ की लोक संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आस्था कलाकृतियों में फाइबर, मोजेक, कैनवास, टाइल्स, लकड़ी, कपड़ा और पारंपरिक शिल्प तकनीकों का उपयोग किया गया है। इन रचनाओं के माध्यम से जोधपुर और मारवाड़ की लोक संस्कृति, स्थापत्य कला, ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। राजस्थान की आत्मा को प्रत्येक यात्री से परिचित कराना उद्देश्य महेंद्र कोडवानी ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल सजावटी कलाकृतियां बनाना नहीं था, बल्कि जोधपुर आने वाले प्रत्येक यात्री को राजस्थान की आत्मा, उसके रंगों, उत्सवों और लोकजीवन से परिचित कराना था। एयरपोर्ट पर स्थापित ये कलाकृतियां यात्रियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रथम परिचय देंगी। पहले भी मिल चुका है राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान कोडवानी इससे पहले भी देश के कई प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट्स में अपनी कला का योगदान दे चुके हैं। वाराणसी में संत रविदास की 25 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर चुके हैं। इसके अलावा प्रयागराज कुंभ, उज्जैन, चित्रकूट सहित देश के अनेक शहरों में उनकी बनाई प्रतिमाएं और कलाकृतियां स्थापित हैं। बड़ौदा, हुबली, तिरुवनंतपुरम और तिरुपति एयरपोर्ट के लिए भी वे कलात्मक कार्य कर चुके हैं।



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पाली सिटी डिस्पेंसरी को मिले नए प्रभारी: डॉक्टर रॉयमोन जोसेफ ने संभाला कार्यभार – Pali (Marwar) News




पाली के नाडी मोहल्ला सिटी डिस्पेंसरी में डॉ. रॉयमोन जोसेफ ने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी के रूप में कार्यभार शुक्रवार को ग्रहण किया। डॉ. जोसेफ के कार्यभार ग्रहण करने पर डिस्पेंसरी के स्टाफ और स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत करते हुए सफल एवं जनसेवापूर्ण कार्यकाल की शुभकामनाएं दी। उनके आने से मरीजों को चिकित्सा सेवाओं का और बेहतर लाभ मिलेगा। कार्यभार संभालने के बाद डॉ. जोसेफ ने कहा कि डिस्पेंसरी में आने वाले प्रत्येक मरीज को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। बता दे कि डिस्पेंसरी में नियमित डॉक्टर लगाने की मांगवको लेकर पहले भी स्थानीय लोगों में विरोध प्रदर्शन किया था। तब तय किया गया था कि वीक के सभी दिन अलग अलग डॉक्टर अपनी सेवाएं यहां डिस्पेंसरी ने देंगे।



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अमेरिका 408 किलो का टाइम कैप्सूल जमीन में दफन करेगा: इसमें व्हेल की हड्डी से AI की भविष्यवाणी तक; 250 साल बाद खोला जाएगा


वॉशिंगटन डीसी34 मिनट पहले

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अमेरिकाज टाइम कैप्सूल में 50 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से भेजी गई खास चीजें रखी गई हैं।

4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा।

इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें।

इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।

टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।

कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें

टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले।

इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके।

यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।

टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया?

कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा।

कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है।

कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।

250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी।

यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी।

इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा,

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अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी।

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दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल

  • दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में सबसे पहला नाम क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन का आता है। इसे 6,000 साल तक बंद रखने के लिए बनाया गया है।
  • इसे अमेरिका के अटलांटा राज्य के ओगलेथॉर्प यूनिवर्सिटी के परिसर में जमीन के नीचे बनाया गया था और उसी दिन स्टेनलेस स्टील का दरवाजा वेल्ड करके हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
  • इसमें उस दौर किताबें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, घरेलू सामान, अखबार, वैज्ञानिक उपकरण और रोजमर्रा की वस्तुएं रखी गई हैं। इसे साल 8113 में खोला जाएगा।
  • इसी तरह न्यूयॉर्क में वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल को 1939 में दफनाया गया था। इसमें भी उस दौर के रोजमर्रा की चीजें रखी गई हैं। इसे साल 6939 में खोलने की योजना है।
  • भारत में भी टाइम कैप्सूल दफन किए गए हैं। सबसे चर्चित उदाहरण 1973 का है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास एक टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इसका नाम ‘कलपात्र’ रखा गया था।
  • इसमें स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत से जुड़े दस्तावेज रखे गए थे। हालांकि 1977 में सरकार बदलने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया। बाद में इसकी सामग्री को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ।

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ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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बंटवारे के बाद तंगी से जूझ रहा था एक्टर, 1 मूवी ने चमकाई किस्मत, अचानक छोड़ी एक्टिंग


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साल 1964 में आई फिल्म ‘दोस्ती’ ने एक्टर सुशील कु्मार को स्टार बना दिया था. फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और इसने नेशनल अवार्ड समेत कई फिल्मफेयर पुरस्कार जीते. उन्होंने फिल्म में बैसाखी के सहारे चलने वाले ‘रामनाथ’ का किरदार निभाया था. बंटवारे के बाद उनका परिवार तंगी से जूझ रहा था. उन्हें मुसीबत से छुटकारा तब मिला, जब राजश्री प्रोडक्शंस ने उन्हें 300 रुपये महीने की सैलरी पर 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट के लिए साइन किया. सुशील कुमार ने बाद में एयर इंडिया में नौकरी की और साल 2003 में रिटायर हुए.

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फिल्म ‘दोस्ती’ से स्टार बने थे एक्टर

नई दिल्ली: फिल्म ‘दोस्ती’ की कहानी दिल को झकझोर देने वाली है. फिल्म लोगों को खूब पसंद आई थी. इसने साल 1964 में सिनेमाघरों में राज किया था. आज भी यह लोगों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है. इसमें एक्टर सुशील कुमार ‘रामनाथ’ का किरदार निभाकर लोकप्रिय हुए थे. वे 4 जुलाई 1945 को कराची में जन्मे थे. बंटवारे के बाद उनका सिंधी परिवार सबकुछ छोड़कर भारत आ गया. सुशील को बचपन से ही डांस और एक्टिंग का बड़ा शौक था. घर के खराब हालातों को सुधारने के लिए उनकी मां ने उन्हें फिल्मों में काम करने की इजाजत दे दी. उन्होंने 1958 में एक सिंधी फिल्म से शुरुआत की और फिर कई फिल्मों में बतौर बाल कलाकार अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.

सुशील कुमार की किस्मत तब पलटी, जब राजश्री प्रोडक्शंस के मालिक ताराचंद बड़जात्या फिल्म ‘दोस्ती’ के लिए नए चेहरों की तलाश कर रहे थे. दरअसल, ताराचंद बड़जात्या की बेटी ने सुशील को एक फिल्म में एक्टिंग करते देखा था. उन्होंने अपने पिता को सुशील का नाम सुझाया, जिसके बाद राजश्री प्रोडक्शंस ने सुशील कुमार के साथ पूरे तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिया. उन्हें हर महीने 300 रुपये की सैलरी मिलती थी, जो आज के जमाने में भले ही बहुत कम लगे, लेकिन उस वक्त एक नए एक्टर और उनके परिवार के लिए यह बहुत बड़ा सहारा थी.

एक्टिंग छोड़ एयर इंडिया में पकड़ी नौकरी
जब फिल्म ‘दोस्ती’ रिलीज हुई, तो इसने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. सुशील कुमार और सुधीर कुमार की सादगी भरी जोड़ी ने दर्शकों को खूब रुलाया. मोहम्मद रफी के गाए गाने और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत ने फिल्म को अमर बना दिया, जिसे नेशनल अवार्ड और कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले. ब्लॉकबस्टर कामयाबी के बाद सुशील को कई ऑफर मिले, पर बात नहीं बन पाई. उन्होंने बाद में फिल्मों को अलविदा कहकर अपनी पढ़ाई पूरी की और एयर इंडिया में नौकरी कर ली. मजेदार बात यह है कि फिल्म ‘हीरा पन्ना’ की शूटिंग जब फ्लाइट में हो रही थी, तब सुशील कुमार फ्लाइट पर्सर के रूप में कैमरे के सामने नजर आए थे. वे साल 2003 में अपनी नौकरी से रिटायर होकर एक शांत जीवन जी रहे हैं.

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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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मुरादाबाद में करंट की चपेट में आने से 3 झुलसे: बिजली भागने पर छत पर सोने गया था परिवार, ऊपर से गुजर रही HT लाइन में फाल्ट हुआ – Moradabad News



मुरादाबाद में हाईटेंशन लाइन में हुए फाल्ट के बाद करेंट की चपेट में आने से एक ही परिवार के 3 लोग झुलस गए। झुलसने वालों में पति पत्नी और 7 साल का एक बच्चा शामिल है।

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घटना मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र में एकता नगर कॉलोनी की है। ओमपाल सिंह यहां अपने परिवार के साथ रहते हैं। ओमपाल सिंह के बड़े बेटे सतीश ने बताया की शुक्रवार रात करीब 12:30 पर बिजली भागने पर पूरा परिवार सोने के लिए छत पर चला गया था। कुछ देर बाद बिजली आई तो ओमपाल सिंह की पत्नी बबीता ने पति से पंखे के तार लगाने के लिए कहा। ओमपाल सिंह ने जैसे ही पंख का प्लग लगाकर स्विच ऑन किया इसी दौरान घर के ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन में अचानक फाल्ट हुआ। सतीश का कहना है कि इसके बाद उनके पूरे घर की वायरिंग में आग लग गई और करंट दौड़ने लगा। करंट की चपेट में आने से ओमपाल सिंह; उनकी पत्नी बबीता और 7 साल का बेटा हर्षित गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद पीड़ित परिवार की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को तुरंत जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सदर और को सिविल लाइंस ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से घटना के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही चिकित्सकों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार का समुचित इलाज किया जाए।

महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है।



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नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाला में 4.64 करोड़ की हेराफेरी: ED की जांच तेज, सहकारी समिति की जमीन बेचकर फंड गबन का आरोप – Indore News




इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी में करोड़ों रुपए के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने आरोपी श्रीकांत घंटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायालय, इंदौर में चालान पेश किया है। मामले में कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलुओं की जांच प्रारंभ की थी। जमीन बेचकर सोसायटी फंड में सेंध लगाने का आरोप ईडी की जांच में सामने आया है कि सोसायटी के तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों ने नियोजित तरीके से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग किया। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और पक्षों को बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि का हिसाब-किताब छिपाकर फंड का गबन किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सोसायटी के सदस्यों को धोखे में रखा गया और जमीन बिक्री से जुड़े कई रिकॉर्ड भी नष्ट कर दिए गए, ताकि वित्तीय लेन-देन की वास्तविक जानकारी सामने न आ सके। ईडी के अनुसार, घोटाले से प्राप्त धन को विभिन्न स्तरों पर खपाया गया और बाद में उससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई राशि को वैध दिखाने के लिए कई वित्तीय लेन-देन किए गए, जिन्हें धनशोधन की श्रेणी में माना गया है। 64 लाख की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 12 फरवरी को पीएमएलए-2002 के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर दी थीं। एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी भी जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।



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‘परदेसी-परदेसी’ से रातों-रात बनीं स्टार, शादीशुदा मर्द के इश्क में हुई बर्बाद


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हम जिस हीरोइन की बात कर रहे हैं, वह ‘राजा हिंदुस्तानी’ के सुपरहिट गाने ‘परदेसी परदेसी’ से रातों-रात स्टार बनी थीं. वे दिग्गज एक्ट्रेस माला सिन्हा की बेटी प्रतिभा सिन्हा हैं. उन्होंने अपना फिल्मी करियर एक विवादित रिश्ते की वजह से तबाह हो गया. शादीशुदा संगीतकार नदीम सैफी संग उनके अफेयर के मां माला सिन्हा खिलाफ थीं. साल 1997 के गुलशन कुमार हत्याकांड में नदीम का नाम आने से प्रतिभा का करियर पूरी तरह खत्म हो गया. प्रतिभा अब चकाचौंध से दूर अपनी मां के साथ मुंबई में शांति से जीवन जी रही हैं.

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प्रतिभा सिन्हा, माला सिन्हा की बेटी हैं. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

नई दिल्ली: साल 1996 में आई फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ का वो सदाबहार गाना ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ तो आप सबको याद ही होगा. इस गाने में करिश्मा कपूर और आमिर खान के बीच एक बंजारन डांसर ने अपनी अदाओं से सबका ध्यान खींचा था. वो डांसर कोई और नहीं, बल्कि गुजरे जमाने की दिग्गज एक्ट्रेस माला सिन्हा की बेटी प्रतिभा सिन्हा थीं. महज 7 मिनट के इस गाने ने प्रतिभा को रातों-रात स्टार बना दिया था. मगर किस्मत का खेल देखिए, जिस संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण के गाने ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचाया, उसी जोड़ी के नदीम सैफी संगर अफेयर ने प्रतिभा के फिल्मी करियर को बर्बाद कर दिया.

प्रतिभा का जन्म 4 जुलाई 1969 को बड़े फिल्मी परिवार में हुआ था. उन्हें एक्टिंग विरासत में मिली थी. उनकी मां माला सिन्हा बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस थीं और पिता चिदंबर प्रसाद लोहानी नेपाल के मशहूर एक्टर और जमींदार थे. प्रतिभा ने साल 1992 में फिल्म ‘महबूब मेरे महबूब’ से बॉलीवुड में कदम रखा था. हालांकि फिल्म फ्लॉप रही, लेकिन प्रतिभा की सादगी ने मेकर्स का दिल जीत लिया. उन्होंने ‘कल की आवाज’, ‘दिल है बेताब’ और ‘तू चोर मैं सिपाही’ जैसी फिल्मों में काम किया. फिर ‘परदेसी परदेसी’ गाने से उन्हें जो कामयाबी मिली, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. साल 2000 में आई ‘ले चल अपने संग’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई.


माला सिन्हा ने बाल ठाकरे से मांगी थी मदद
प्रतिभा की जिंदगी का सबसे विवादित मोड़ तब आया, जब फिल्मों के दौरान उनकी नजदीकियां शादीशुदा संगीतकार नदीम सैफी से बढ़ीं. दोनों अलग धर्म के थे, इसलिए माला सिन्हा इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं. बेटी को नदीम से दूर रखने के लिए माला सिन्हा ने उन्हें चेन्नई में नजरबंद तक कर दिया था. फिर भी दोनों कोड वर्ड में एक-दूसरे से बात करते रहे. जब दोनों के भागने की अफवाहें उड़ीं, तो माला सिन्हा ने बाल ठाकरे से मदद मांगी. प्रतिभा को मुंबई वापस लाकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कराई गई, जहां उन्होंने भारी दबाव में नदीम पर किडनैपिंग और शोषण के आरोप लगाए. हालांकि, नदीम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया था.

गुलशन कुमार की हत्या में शामिल होने का लगा आरोप
ड्रामा शांत भी नहीं हुआ था कि अगस्त 1997 में टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार की सरेआम हत्या कर दी गई. इस मर्डर केस में साजिशकर्ता के रूप में नदीम सैफी का नाम सामने आया. नदीम अपनी जान बचाकर लंदन भाग गए. कोर्ट ने भले ही नदीम को बेगुनाह माना, लेकिन इस पूरे मामले ने प्रतिभा सिन्हा के बचे-खुचे करियर पर फुल स्टॉप लगा दिया. आज प्रतिभा सिन्हा फिल्मी दुनिया की चकाचौंध को भूलकर मुंबई में अपनी मां के साथ सुकून भरी जिंदगी जी रही हैं.

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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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बाजार जैसी अंगूरी रसमलाई घर पर बनाएं, मेहमान भी पूछेंगे कहां से लाए, नोट कर लें रेसिपी


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Angoori Rasmalai Recipe: अंगूरी रसमलाई का नाम सुनते ही मिठाई लवर्स के मुंह में पानी आ जाता है. आमतौर पर लोग इसे बाजार से खरीदकर खाना पसंद करते हैं, लेकिन अब आप इसे घर पर भी बना सकते हैं वो भी बिल्कुल हलवाई जैसी स्वादिष्ट और मुलायम. अंगूरी रसमलाई थोड़ी मेहनत और सही तरीके से बनाई जाए तो यह किसी भी खास मौके को और भी खास बना सकती है. देश के कई बड़े होटल्स में काम कर चुकी शेफ स्पर्श नरूला बताती हैं कि सॉफ्ट और स्पंजी अंगूरी रसमलाई बनाने के लिए दूध से छेना बनाने, छेना को छानने या फिर उसको मसलते समय कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं. अक्सर लोग इसमें एक गलती कर देते हैं, इस वजह से रसमलाई मनचाही रंगत नहीं ला पाती है.

अंगूरी रसमलाई बनाने के लिए सबसे पहले छेना तैयार करने के लिए 1 लीटर फुल क्रीम दूध, 2 से 3 बड़े चम्मच सिरका, आधा कप पानी, 1 छोटा चम्मच कॉर्नफ्लोर और एक चुटकी बेकिंग सोडा की जरूरत होगी. वहीं स्वादिष्ट रबड़ी बनाने के लिए 1 लीटर फुल क्रीम दूध, स्वादानुसार चीनी, कुछ केसर और आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर लें. अपने हिसाब से कोई भी ड्राई फ्रूट्स ले सकते हैं. इसके अलावा चाशनी तैयार करने के लिए डेढ़ कप चीनी और 4 कप पानी की जरूरत पड़ेगी. थोड़ी बर्फ भी रेडी रखें, आगे काम आएगी.

सबसे पहले एक लीटर दूध को किसी बड़े बर्तन में डालकर उसे उबाल लें. उबाल आने के बाद गैस बंद कर दें और दूध को थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद 3 चम्मच सिरके को आधा कप पानी में मिलाकर धीरे-धीरे दूध में डालें और लगातार चलाते रहें. दूध पूरी तरह फट जाए तो इसे कॉटन के कपड़े में छान लें. छेना को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सिरके का स्वाद निकल जाए. फिर कपड़े को करीब एक घंटे के लिए टांग दें ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए.

शेफ टिप्स की बात करें तो यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दूध में उबाल आने के बाद उसे तुरंत न फाड़ें. पहले उसे 5 से 7 मिनट तक हल्का ठंडा होने दें. इसके बाद ही फाड़ने वाला आइटम डालें. ऐसा करने से छेना मुलायम और चिकना बनता है. वहीं अगर उबलते हुए दूध में सीधे सिरका डाल दिया जाए, तो छेना सख्त होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे रसमलाई उतनी स्पंजी और नरम नहीं बन पाती.

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जब तक छेना से बचा हुआ पानी निकल रहा है, तब तक रबड़ी बना लेते हैं. इसके लिए एक लीटर दूध को बड़े बर्तन में डालकर आधा होने तक पकाएं. फिर इसमें कूटे हुए पिस्ता, बादाम, कूटी हुई इलायची, केसर और अपने अनुसार कोई भी ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद चीनी मिलाकर करीब 10 मिनट तक पकाएं. फिर गैस बंद कर ठंडा होने के लिए रख दें. यही रबड़ी अंगूरी रसमलाई का स्वाद बढ़ाएगी.

अब तैयार छेना को निकालकर करीब 8 मिनट तक अच्छी तरह मसलें. ध्यान रहे, छेने को मसलते हुए उसे इतना नहीं मसलना है कि उसका घी अलग होने लगे. बस इसे सॉफ्ट होने तक मसलना है. इसके बाद कॉर्नफ्लोर और बेकिंग सोडा मिलाकर दो मिनट और गूंथें. फिर कपड़े से ढककर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. इसके बाद छेना से कपड़ा हटाएं और उसे छोटे-छोटे अंगूर जैसे साइज के छोटे-छोटे बॉल्स बना लें.

एक चौड़े बर्तन में डेढ़ कप चीनी और चार कप पानी डालकर उबालें. जब चाशनी अच्छे से उबलने लगे तो उसमें छेना के बॉल्स डालें. बर्तन को ढककर लगभग 15 मिनट तक पकाएं. पकने के बाद इन्हें तुरंत बर्फ वाले ठंडे पानी में डाल दें और 5 मिनट तक रहने दें. इसके बाद बॉल्स को ठंडे पानी से निकालकर हल्के से हाथों से निचोड़कर इसको अलग बर्तन में बारी-बारी से रखें.

फिर उसमें रबड़ी को डाल दें. इसके ऊपर से आप पिस्ता, बादाम, इलायची पाउडर, केसर या फिर अपने हिसाब से कोई भी ड्राई फ्रूट्स डालकर कम से कम 5 से 6 घंटे या पूरी रात फ्रिज में रखें. जैसे ही आप फ्रिज खोलकर उसको निकालेंगे, तो रसमलाई अपनी रंगत में दिखाई देने लगेगी. सर्व करने से पहले बादाम, पिस्ता, केसर और सूखी गुलाब की पंखुड़ियों से इसको गार्निश कर सकते हैं. इस तरह ठंडी-ठंडी अंगूरी रसमलाई तैयार है. इसका स्वाद ऐसा होगा कि घर के लोग भी पूछ बैठेंगे कि मिठाई घर में बनी है या किसी मशहूर हलवाई की दुकान से लाई गई है.

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जाट महापंचायत विवाद पर 30 दिन में फैसला करना होगा: हाईकोर्ट ने कहा- एक महीने में कारण सहित आदेश जारी करेंगे; जोधपुर कलेक्टर को दिए निर्देश – Jodhpur News




राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रस्तावित जाट महापंचायत और तेजा गायन कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद में जोधपुर कलेक्टर को निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को सभी पक्षों की सुनवाई कर 30 दिनों में कारण सहित आदेश जारी करने को कहा है। यह मामला महाराजा सूरजमल संगठन (भारत) द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में बताया गया था कि पीपाड़ क्षेत्र में प्रस्तावित जाट महापंचायत और तेजा गायन कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने आवेदन को रद्द कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता हनुमान राम सिरोही ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम फैसला जिला प्रशासन को ही लेना होगा जस्टिस समीर जैन की बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह मामला कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक निर्णय से संबंधित है। इस पर अंतिम फैसला जिला प्रशासन को ही लेना होगा। हाईकोर्ट ने कहा- याचिकाकर्ता को जिला कलेक्टर के समक्ष नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगी। यदि किसी अन्य पक्ष को इस कार्यक्रम पर आपत्ति है तो उसे भी व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिवक्ता के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद जिला कलेक्टर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति और सरकारी नीति को ध्यान में रखते हुए 30 दिनों में एक ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ (कारण सहित आदेश) पारित करेंगे। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस आदेश का मामले के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और कलेक्टर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र व निष्पक्ष निर्णय लेने के लिए अधिकृत होंगे।



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