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Lata Mangeshkar Songs : हिंदी सिनेमा की सुपरहिट फिल्मों के बनने की कहानियां-किस्से मूवी से भी ज्यादा रोचक होते हैं. इन किस्सों में ही फिल्म को बनाने के दौरान आई चुनौतियों, रोचक फैसलों की जानकारी छिपी होती है. यह भी सच है कि बॉलीवुड में ऐसा कई बार देखने को मिला है जिस गाने को डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने पहली नजर में रिजेक्ट कर दिया, वही फिल्म की पहचान बन गए. जिस स्क्रिप्ट को कई प्रोड्यूसर ने रिजेक्ट कर दिया, उसी पर बनी मूवी ने इतिहास रच दिया. 60-70 के दशक में दो ऐसी फिल्में रिलीज हुईं जिनके गाने सुनकर डायरेक्टर ने जूता उठा लिया था. जूता उठाने के मायने अलग-अलग जरूर थे. दोनों गाने कालजयी साबित हुए. दोनों फिल्में मैसिव हिट रहीं.
गीत-संगीत के बिना तो बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना भी नहीं की जा सकती. प्यार-दर्द, प्रेम-विरह-वेदना को गीत के जरिये ही प्रभावी ढंग से व्यक्त किया जा सकता है. फिल्म में गाने की सिचुएशन बनाने के लिए डायरेक्टर कहानी में ट्विस्ट लाते हैं. फिर सिचुएशन के हिसाब से गीतकार गीत लिखते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जो गाना संगीतकार सुनाते हैं, वो डायरेक्टर को पसंद नहीं आता है. 8 साल के अंतराल में बनीं दो फिल्मों के साथ ऐसा ही हुआ. दोनों फिल्मों में लता मंगेशकर ने दो ऐसे कालजयी गाने गाए जो इन फिल्मों की पहचान बन गए. एक गाना रिजेक्टेड था जबकि दूसरे गाने को सुनकर डायरेक्टर ने खुशी में जूता उठा लिया था. ये फिल्में थीं : वो कौन थी और पाकीजा. वो दो गाने कौन से थे, आइये जानते हैं…

मनोज कुमार-साधना और प्रेम चोपड़ा स्टारर एक फिल्म ‘वो कौन थी’ 1964 में रिलीज हुई थी. यह एक मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म थी जिसका डायरेक्शन राज खोसला ने किया था. स्क्रीनप्ले ध्रुव चटर्जी ने लिखा था. फिल्म विल्की कॉलिन्स के नॉवेल ‘द वुमिन इन व्हाइट’ से इंस्पायर्ड थी. प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी थे. संगीतकार मदन मोहन थे. गीतकार राजा मेहंदी अली खान थे.

फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. इसी फिल्म का एक कालजयी गाना आज भी संगीत प्रेमियों के दिल में बसता है. गाने को लता मंगेशकर ने गाया था जिसके बोल ‘लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो’ हैं. गाना रोमांटिक जरूर है लेकिन दर्दभरा है. करोड़ों लोगों का यह पसंदीदा गाना है लेकिन पहली बार में इस गाने को डायरेक्टर राज खोसला ने रिजेक्ट कर दिया था.
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संगीतकार मदन मोहन ने मनोज कुमार से बात की. शूटिंग में कुछ ही दिन बचे थे और गाना फाइनल नहीं हुआ था. मनोज कुमार ने प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी से बात की. मनोज कुमार ने गाना सुनने का अनुरोध किया. राज खोसला ने दोबारा गाना सुना लेकिन फिर से रिजेक्ट कर दिया. तीसरी बार जब धुन सुनी तो वो लज्जित हुए. उन्हें धुन बेहतरीन लगी. उन्होंने खुद को मारने के लिए जूता तक उठा लिया था. इस किस्सा का जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘राज खोसला: द ऑथराइज्ड बायोग्राफी’ में भी किया.

‘वो कौन थी’ की मेकिंग में मनोज कुमार का बहुत बड़ा हाथ था. साधना की मौजूदगी ने फिल्म में चार चांद लगा दिए. फिल्म का एक और शानदार गाना ‘नैना बरसे रिमझिम’ था. साधना को ‘मिस्ट्री गर्ल’ का नाम इसी फिल्म से मिला. गुरुदत्त की ‘राज’ फिल्म ही आगे चलकर ‘वो कौन थी’ बनी. फिल्म का बजट 45 लाख के करीब था. मूवी ने 90 लाख की कमाई की थी. फिल्म हिट थी. इस फिल्म की सफलता के बाद राज खोसला ने साधना के साथ ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसे दो और सस्पेंस थ्रिलर फिल्में बनाईं.

डायरेक्टर की ओर से जूता उठाने का एक और दिलचस्प किस्सा लता मंगेशकर के एक और सदाबहार गाने से जुड़ा हुआ है. गाना 1972 में ‘पाकीजा’ फिल्म में था जिसके बोल ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’ थे. ‘पाकीजा’ का निर्देशन-प्रोडक्शन कमाल अमरोही ने किया था. कहानी भी कमाल अमरोही ने ही लिखी थी. इस फिल्म को बनाने में 16 साल का लंबा वक्त लगा था. लंबी जद्दोजहद के बाद यह मूवी 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी.

पाकीजा एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसमें मीना कुमारी-राज कुमार लीड रोल में नजर आए थे. कहानी लखनऊ की तवायफ साहिबजान की कहानी को पर्दे पर दिखाती है. म्यूजिक गुलाम मोहम्मद-नौशाद ने कंपोज किया था. इस फिल्म का हर गाना सुपरहिट था. कहते हैं कि ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’ गाने को सुनकर कमाल अमरोही ने जूता उठा लिया था और कहा था कि यह गाना बहुत पसंद है. कोई इस गाने की बुराई नहीं करेगा.

फिल्म का एक और गाना ‘मौसम है आशिकाना’ भी खूब मकबूल हुआ. आज भी लोकप्रिय है. गाना यमन कल्याण राग पर बेस्ड है. पाकीजा फिल्म की शूटिंग 1958 से शुरू हुई थी. कमाल अमरोही ने बड़ी मेहनत से फिल्म बनाई थी लेकिन दर्शकों को मूवी पसंद नहीं आ रही थी.

31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की मौत हो गई. मीना कुमारी की मौत का फिल्म पर बहुत असर पड़ा. दर्शकों को लगा कि मीना कुमारी की वो फिर नहीं देख पाएंगे. फिल्म के प्रति लोगों का नजरिया बदला और सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी. नतीजतन यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई.










