Saturday, June 20, 2026
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अब स्वदेशी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स से लैस होंगे नौसेना के जहाज, 425 करोड़ की डील


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अब स्वदेशी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स से लैस होंगे नौसेना के जहाज, 425 करोड़ की डील

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Indian Navy Gets Indigenous Gas Turbine Generators: रक्षा मंत्रालय ने इंडियन नेवी के कोलकाता क्लास शिप्स के लिए भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ 425 करोड़ रुपये का करार किया है. इसके तहत नेवी को 12 स्वदेशी 1.25 मेगावाट के गैस टर्बाइन जेनरेटर्स मिलेंगे. ये जेनरेटर्स 40 साल से इस्तेमाल हो रही रूसी तकनीक की जगह लेंगे. इससे शिप्स की पावर जेनरेशन क्षमता बढ़ेगी. इस डील से रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी.

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भारत फोर्ज और रक्षा मंत्रालय के बीच हुआ बड़ा करार, नेवी को मिलेंगे 1.25 मेगावाट के पावरफुल जेनरेटर्स. (Photo Made with AI)

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की ताकत और भी ज्यादा बढ़ने वाली है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बेहद अहम कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. यह डील पुणे की मशहूर कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ हुई है. इस करार के तहत नेवी के कोलकाता क्लास शिप्स के लिए 12 नए गैस टर्बाइन जेनरेटर्स खरीदे जाएंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 425 करोड़ रुपये है. इन जेनरेटर्स की क्षमता 1.25 मेगावाट होगी. यह कदम रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बहुत बड़ा है. अभी तक हमारे युद्धपोतों पर बिजली पैदा करने के लिए रूसी जेनरेटर्स पर निर्भर रहना पड़ता था. यह सिलसिला 1980 के दशक से चला आ रहा था. अब स्वदेशी तकनीक से बने ये पावरफुल जेनरेटर्स पुरानी रूसी तकनीक को रिप्लेस करेंगे. इससे नेवी की ऑपरेशनल पावर कई गुना बढ़ जाएगी.

क्या है इस नई डील की सबसे खास बात जो नेवी की ताकत बढ़ाएगी?

इस डील के तहत मिलने वाले सभी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी पुर्जे इस्तेमाल होंगे. भारत फोर्ज लिमिटेड अगले पांच साल के भीतर इस पूरे कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करेगी.

नेवी के हर बड़े युद्धपोत को चलाने और उसके हथियारों को एक्टिव रखने के लिए पावर जेनरेशन की जरूरत होती है. इसके लिए शिप्स में दो से चार मरीन गैस टर्बाइन जेनरेटर्स और डीजल जेनरेटर्स का कॉम्बिनेशन लगा होता है.

नेवी को मिलेंगे 12 नए स्वदेशी गैस टर्बाइन जेनरेटर्स. (Photo Made with AI)

अब नए 1.25 मेगावाट के सिस्टम पुराने और कम क्षमता वाले जेनरेटर्स की जगह लेंगे. इससे आधुनिक रडार और कॉम्बैट सिस्टम को बिना रुके पावर सप्लाई मिलेगी.

नेवी ने क्यों लिया रूस पर अपनी निर्भरता खत्म करने का बड़ा फैसला?

भारतीय शिप्स में लंबे समय से रूसी तकनीक का इस्तेमाल होता रहा है. इनके स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस के लिए हमेशा विदेशी मदद की जरूरत पड़ती थी. पिछले तीन साल से नेवी इस निर्भरता को खत्म करने के लिए काम कर रही थी. इसके लिए BHEL और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों से लगातार बात चल रही थी.

40 साल पुरानी रूसी तकनीक की जगह लेगा नया स्वदेशी सिस्टम. (Photo Made with AI)

रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘यह खरीद अहम स्ट्रैटेजिक तकनीक में समुद्री आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगी’. इसके जरिए नेवी हमेशा ऑपरेशन के लिए रेडी रहेगी. स्वदेशी प्रोडक्शन से सिस्टम का लाइफ साइकिल सपोर्ट भी आसानी से मिल सकेगा.

भारत फोर्ज कैसे करेगी इस पूरे प्रोजेक्ट को हैंडल और आगे का क्या है प्लान?

भारत फोर्ज ने बताया है कि यह डील डिफेंस एक्विजिशन प्रोसिजर 2020 के तहत मिली है. यह कॉन्ट्रैक्ट बाय इंडियन कैटेगरी में साइन हुआ है. इसके साथ ही कंपनी ने मरीन गैस टर्बाइन बिजनेस में अपनी शानदार एंट्री कर ली है. भारत फोर्ज अब गैस टर्बाइन जेनरेटर्स के लिए एक अलग इंटीग्रेशन और टेस्ट फैसिलिटी बनाएगी.

कंपनी भविष्य में बड़े पावर प्लांट्स और प्रोपल्शन सिस्टम के डिजाइन प्रोग्राम में भी हिस्सा लेगी. इससे भारतीय सशस्त्र बलों की बड़ी जरूरतें देश में ही पूरी हो सकेंगी. जेनरेटर्स के मेंटेनेंस और ओवरहाल ऑपरेशन पर भी अब पूरा कंट्रोल भारत का ही रहेगा.

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा (Deepak Verma) की‍ गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह News18हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें





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मेरठ में लाइट न आने पर हाईवे जाम, पुलिस गायब: मेरठ बार एसाेसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा के परिजनों के साथ बदसलूकी – Meerut News




मेरठ के पल्लवपुरम थाना क्षेत्र स्थित फेस 1 में रात लगभग 9.30 बजे से लाइट न आने से गुस्साए लोगों ने बिजली घर पर हंगामा करने के बाद आक्रोशित लोगों ने विरोध स्वरूप दिल्ली मेरठ हाईवे जाम कर दिया। आरोप है कि काफी देर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची, जिससे जाम और तनाव की स्थिति बनी रही। बिजली घर पर पहुंचे लोगों ने पुलिस के सामने ही कर्मचारियों को लाइट न आने पर हाईवे जाम की चेतावनी दी और वहां से चले गए। इसके बाद उन्होंने हाईवे पर जाम लगा दिया।इसी दौरान मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा भी अपने परिजनों के साथ हरिद्वार की और से वहां पहुंचे जिनकी गाड़ी को लोगों ने आगे खड़े होकर रूकवा दिया। उनके परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो कुछ लोगों ने गाड़ी में मौजूद महिला से बदसलूकी भी की। इस दौरान पुलिस भी वहां नजर नहीं आई। हालांकि लगभग 10 मिनट बाद पुलिस और कुछ अन्य लोगों ने अध्यक्ष की कार को वहां से निकलवा दिया गया। हाईवे जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की सूचना मिलने के बाद पल्लवपुरम थाना प्रभारी भारत सारस्वत मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाया। इस दौरान जाम लगाने वालों और हाईवे से जाने वाले अन्य राहगीरों के बीच भी आपस में खूब कहासुनी हुई। वहीं अनुज शर्मा ने बताया कि वह परिवार के साथ अपने घर लौट रहे थे इसी दौरान कुछ लोगों ने अचानक सामने आकर कार रूकवा दी। साथ में छोटे बच्चे भी थे जिस कारण हमने उनसे जाने के लिए कहा तो कुछ लोगों ने अभद्र व्यहवार किया । वहीं थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल पूरे मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं है विधिवत कार्रवाई की जाएगी



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MP में कैंसर की दवा की 50% बढ़ी कीमतें: एक कीमों का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा; प्लेटिनम बेस्ड दवाएं अब भी मार्केट से ड्राई – Bhopal News




मध्य प्रदेश में अब कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे एक कीमो का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा लगेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन के दाम बढ़ा दिए हैं। एक्सपर्ट की माने तो यह दोनों दवाएं ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं। कई मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, ऐसे में पूरे इलाज पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, कंपनियों ने दवाओं का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, लेकिन करीब एक महीने मांग अनुरूप सप्लाई करने में लगेगा। दूसरी ओर, शहर के कैंसर अस्पतालों में कीमो की दवाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। युद्ध के चलते सप्लाई चैन बाधित हुई थी। घाटे के चलते दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया था। 7 प्रकारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हुई
पेट्रोल-डीजल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी खबरें इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत में कैंसर के इलाज को भी मुश्किल बना दिया है। स्थिति ऐसी है कि कैंसर के 7 प्रमुख प्रकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी से हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं। अब डॉक्टरों का इलाज के तरीकों में बदलाव पर फोकस
दवाओं की कीमतें बढ़ने और इनकी कमी की बात विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं। हाल ही में भास्कर से चर्चा में मुंबई स्थित कामा और एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे ने बताया था कि प्लैटिनम-बेस्ड कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी से कैंसर के मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी जरूरी दवाओं की सप्लाई में रुकावट के कारण डॉक्टरों को इलाज के स्टैंडर्ड तरीकों में बदलाव करना पड़ रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर भी इस कमी का असर पड़ा है। हालांकि, प्लैटिनम वाली दवाओं की कमी तो है, लेकिन दूसरी कीमोथेरेपी दवाएं मिल रही हैं। इसलिए, भले ही सभी इलाज पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन इससे कुछ खास मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। घरेलू दवा कंपनियों को भी इन दवाओं की सप्लाई बढ़ानी चाहिए, ताकि कमी खत्म हो और मरीजों के इलाज में आने वाली रुकावटें कम हों। पहले ही दवाओं के दाम में 50% तक वृद्धि की संभावना थी
केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दो महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत बढ़ाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। देशभर में इन दवाओं की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी हो गई। फार्मा कंपनियों की मांग और उत्पादन लागत के आकलन के बाद सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। रिपोर्टों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10% से 50% तक वृद्धि की गई है। ताकि इनकी उपलब्धता बनी रहे और उत्पादन फिर से सामान्य हो सके। दरअसल, युद्ध और सप्लाई बाधाओं के कारण प्लैटिनम-बेस्ड कीमो दवाओं की सप्लाई में लगभग 50% तक कमी आने का अनुमान है। इसका असर सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर देखने को मिल रहा है। 30 साल से सबसे सस्ती और भरोसेमंद दवा है सिस्प्लैटिन
भोपाल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू के अनुसार, रेडियोथेरेपी के साथ इलाज का असर बढ़ाने के लिए सिस्प्लैटिन पिछले 20-30 साल से सबसे भरोसेमंद दवा मानी जाती है। इसका उपयोग लंबे समय से स्थापित इलाज पद्धति का हिस्सा रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सिस्प्लैटिन जैसी दवा जहां हजारों रुपए में इलाज पूरा कर देती है, वहीं इसका विकल्प इम्यूनोथेरेपी लाखों रुपए तक पहुंच जाता है, जो आम मरीजों की पहुंच से बाहर है। इस कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह दवा बेहद अहम मानी जाती है। अब इसके रेट में भी वृद्धि होने जा रही है। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कई प्रमुख कैंसर के इलाज की ‘बैकबोन’
सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन को दुनिया भर में कीमोथेरेपी की सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में माना जाता है। इनका उपयोग फेफड़ों, मुंह, सर्वाइकल, ओवरी, स्तन, अंडकोष, गॉलब्लैडर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। ऑन्कोलॉजिस्ट इन्हें कई कैंसरों की फर्स्ट-लाइन थेरेपी का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। ये दोनों दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) और डीपीसीओ के तहत मूल्य नियंत्रण में हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के बावजूद कंपनियां दवाओं के दाम नहीं बढ़ा पा रही थीं। उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत और निर्धारित बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर आ गया, जिसके कारण कई कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया या बंद कर दिया। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।



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बोचहां प्रमुख-उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा: कोरम के अभाव में बैठक निष्प्रभावी, 18 सदस्य रहे अनुपस्थित – bochaha News




बोचहां प्रखंड प्रमुख साजन कुमार पासवान और उप-प्रमुख के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को कोरम के अभाव में निष्प्रभावी हो गया। प्रखंड मुख्यालय सभागार में बुलाई गई विशेष बैठक में आवश्यक संख्या में पंचायत समिति सदस्य उपस्थित नहीं हुए। बैठक की अध्यक्षता बीडीओ सह कार्यपालक पदाधिकारी प्रिया कुमारी ने की। जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी संजीव कुमार भी इस दौरान मौजूद थे। पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, पंचायत समिति के कुल 28 निर्वाचित सदस्यों में से केवल 10 सदस्य ही बैठक में उपस्थित हुए। 18 सदस्य अनुपस्थित रहे। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 44(3) और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत, अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए कुल निर्वाचित सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है। आवश्यक संख्या पूरी न होने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी और वह स्वतः निष्प्रभावी हो गया। बीडीओ प्रिया कुमारी ने बताया कि निर्धारित समय के बाद भी आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव स्वतः गिर जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक की पूरी कार्यवाही अभिलेख में दर्ज कर ली गई है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह प्रखंड प्रभारी वरीय पदाधिकारी संजीव कुमार ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति न होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रमुख और उप-प्रमुख के समर्थकों द्वारा पटाखे छोड़े जाने की खबरें थीं। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस संबंध में किसी भी जानकारी से इनकार किया। उल्लेखनीय है कि पंचायत समिति के कुछ सदस्यों ने प्रमुख और उप-प्रमुख के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस पर विचार करने के लिए ही यह विशेष बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सदस्यों की आवश्यक संख्या में अनुपस्थिति के कारण यह मामला प्रारंभिक चरण में ही समाप्त हो गया।



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FIFA के मंच से छा गईं नोरा फतेही, परफॉर्मेंस के बाद गूगल पर सबसे ज्यादा हुईं सर्च


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FIFA World Cup 2026 में नोरा फतेही का जादू ऐसा चला कि पूरी दुनिया उन्हें गूगल पर सर्च करने लगी. ओपनिंग सेरेमनी में धमाकेदार परफॉर्मेंस के बाद नोरा ने तो सभी की धज्जियां उड़ा दी.वह सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली बॉलीवुड स्टार बन गई हैं. गूगल ट्रेंड के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने प्रियंका चोपड़ा, आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण जैसी दिग्गज एक्ट्रेसेस को भी पीछे छोड़ दिया है.

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हर तरफ नोरा का जलवा

नई दिल्ली. FIFA विश्व कप के मंच पर अपनी शानदार परफॉर्मेंस के बाद नोरा फतेही एक नया रिकॉर्ड बना दिया है. दुनियाभर के दर्शकों का दिल जीतने के बाद बॉलीवुड की डांसिंग क्वीन नोरा फतेही सबसे ज्यादा सर्च की गई बॉलीवुड एक्ट्रेस बन गई हैं. इस तरह उन्होंने अपने नाम एक बड़ी उपलब्धि कर ली है.

FIFA के मंच से नोरा का जादू कुछ ऐसा चला कि उन्होंने लोकप्रियता के मामले में बाकी सभी दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है. ओपनिंग सेरेमनी में धमाकेदार परफॉर्मेंस देने के बाद नोरा फतेही सबसे ज्यादा सर्च की गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोरा अब दुनिया भर में सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली बॉलीवुड स्टार बन चुकी हैं.

नोरा बनी सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली एक्ट्रेस

नोरा ने 12 जून 2026 को FIFA World Cup के ओपनिंग इवेंट में धमाकेदार परफॉर्मेंस दी थी.उनकी ओपनिंग सेरेमनी वाली परफॉर्मेंस के वीडियो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहे थे.इसके बाद से ही वह चर्चा में आ गई थीं. लेकिन देखते ही देखते दुनियाभर के लोग उनके बारे में सर्च करने लगे और उनका नाम ट्रेंड करने लगा.गूगल ट्रेंड आंकड़ों के अनुसार, FIFA World Cup 2026 में परफॉर्म करने के बाद नोरा फतेही ने इतिहास रच दिया. उनकी पॉपुलैरिटी में आए अचानक इस बदलाव से हर कोई हैरान हैं.

पोस्ट शेयर कर जाहिर की खुशी

इस बड़ी एचीवमेंट के बाद नोरा ने सोशल मीडिया पर भी अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर फैंस को थैक्स कहा है. इसके साथ ही उन्होंने कुछ अलग फोटोज भी शेयर की है, जिनमें उनकी मां, भाई, बहन और स्कूल टीचर नजर आए. नोरा की मानें तो ये पल उनके लिए बेहद खास है. एक्ट्रेस ने बताया कि ऐसा बहुत कम होता है कि उनका पूरा परिवार और करीबी एक साथ किसी खास मौके पर मौजूद हों.

बता दें कि ये पहली बार नहीं कि फीफा के मंच पर नोरा ने अपना जलवा दिखाया है. इससे पहले साल 2022 में भी उन्होंने FIFA World Cup में अपने डांस से तहलका मचाया था. उनका गाना ‘Siir Siir’ भी जबरदस्त चर्चा में है.FIFA में नोरा की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी फैन फॉलोइंग दुनियाभर में हैं.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव हुआ ITR 3 फॉर्म, जानिए किसे फाइल करना जरूरी


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ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपने ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-3 फॉर्म को लाइव कर दिया है. यह फॉर्म उन लोगों और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) के लिए है, जिनकी कमाई बिजनेस या प्रोफेशन से होती है.

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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जारी किया ITR-3 फॉर्म

ITR Filing 2026: अगर आप बिजनेस करते हैं या शेयर बाजार में ट्रेडिंग से आपकी कमाई होती है, तो यह खबर आपके काम की है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर 3 फॉर्म की ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी की सुविधा को चालू कर दिया गया है. इससे पहले डिपार्टमेंट ITR-1, ITR-2 और ITR-4 फॉर्म पहले ही जारी कर चुका है.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा है कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-3 की ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी अब ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध है.



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आरपीएससी में प्रो.संतोष आनंद और डॉ. दीपक शर्मा मेंबर नियुक्त: अध्यक्ष यूआर साहू रिटायर, केसरी सिंह को RPSC के कार्यवाहक चेयरमैन का जिम्मा – Jaipur News


राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो मेंबर की नियुक्ति की गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ.दीपक कुमार शर्मा को RPSC सदस्य पद पर शुक्रवार देर रात नियुक्ति के आदेश जारी किए। दोनों सदस्यों का कार्यकाल पद संभालने से 6 साल की अवधि या

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RPSC अध्यक्ष यूआर साहू 19 जून को रिटायर हुए। नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीनियर मेंबर लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) केसरी सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। केसरी सिंह की कांग्रेस सरकार के वक्त 2023 में आरपीएससी मेंबर के पद पर नियुक्ति दी गई थी।

उत्कल रंजन साहू।

आरपीएससी अध्यक्ष यूआर साहू हुए रिटायर

राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का शुक्रवार को कार्यकाल पूरा हो गया। वहीं आयोग के एक अन्य सदस्य का भी कार्यकाल अगले महीने पूरा होगा। भाजपा सरकार ने 12 जून 2025 को उत्कल रंजन साहू को अध्यक्ष बनाया था।

24 सितंबर 2025 को अजमेर के प्रो. सुशील बिस्सू सहित तीन सदस्य नियुक्त किए थे। इनमें डॉ. अशोक कलवार और हेमंत प्रियदर्शी भी शामिल हैं। डॉ. कलवार का कार्यकाल 31 जुलाई को पूरा होगा।



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कांकाणी की रोटी, रोहट की कचोरी और पाली का गुलाब हलवा, हर स्टॉप पर स्वाद का धमाका!


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Famous Foods Of Marwar: जोधपुर से पाली के बीच का यह सफर सिर्फ दूरी तय करने का नहीं, बल्कि स्वादों की एक पूरी यात्रा है. कांकाणी के देसी ढाबों की सादी लेकिन दिल जीत लेने वाली रोटी-चटनी से लेकर रोहट की मशहूर कचोरी की कुरकुरी परतों तक, हर पड़ाव अपने आप में एक कहानी कहता है. आगे बढ़ते ही बुलेट बाबा धाम की रबड़ी आस्था और स्वाद दोनों का अनोखा मेल पेश करती है, जबकि पाली पहुंचते ही गुलाब हलवे की मिठास इस पूरे सफर को यादगार बना देती है. यह रास्ता हर मुसाफिर के लिए सिर्फ हाईवे नहीं, बल्कि मारवाड़ी जायकों का खुला खजाना है.


जोधपुर से रवाना होकर जब आप पाली की तरफ बढ़ते हैं, तो सफर की पहली परफेक्ट चॉइस बनती है कांकाणी. यदि आप दोपहर या रात के भोजन के समय इस रूट से गुजर रहे हैं, तो कांकाणी में रुककर शुद्ध देसी मारवाड़ी खाने का लुत्फ जरूर उठाएं. यहां के ढाबों और होटलों पर मिलने वाली हाथ की सिकी गरमा-गरम बाजरे की रोटी, देसी घी, लहसुन की तीखी चटनी और कढ़ी-साग का स्वाद आपके सफर की थकान को पल भर में दूर कर देगा. हाईवे पर मारवाड़ी संस्कृति और देसी ठाठ का यह पहला और सबसे मजबूत पड़ाव है.

सफर में थोड़ा और आगे बढ़ने पर आता है ऐतिहासिक कस्बा रोहट, जो अपने खास नाश्ते के लिए पूरे हाईवे पर मशहूर है. अगर आप रोहट से गुजर रहे हैं और यहां की प्रसिद्ध मांगीलाल प्रजापत की कचोरी नहीं खाई, तो आपका सफर अधूरा ही माना जाएगा. कड़क और खस्ता मैदे के आवरण के अंदर मूंग दाल और सीक्रेट मसालों की स्टफिंग से तैयार यह कचोरी जब गरम-गरम कढ़ी या चटनी के साथ परोसी जाती है, तो कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता. शाम की चाय के साथ रोहट की कचोरी का कॉम्बिनेशन इस रूट के मुसाफिरों की पहली पसंद है.

बुलेट बाबा के नाम से प्रसिद्ध चोटिला का वह धाम जहां पर देश विदेश से पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते है. बुलेट बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लेने के साथ-साथ यहां की एक और चीज बेहद प्रसिद्ध है और वो है यहां मिलने वाली केसरिया मलाईदार रबड़ी. दूध को घंटों कढ़ाकर पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली यह गाढ़ी रबड़ी स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि दूर-दूर से लोग सिर्फ इसे खाने यहां आते हैं. आस्था के इस पावन स्थल पर प्रसाद के रूप में और सफर के स्वाद के रूप में यह रबड़ी हर दिल को जीत लेती है.

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सफर के आखिरी पड़ाव पर जैसे ही आप पाली शहर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो यहां आपका स्वागत मरुधरा की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई करती है, जिसे दुनिया ‘गुलाब हलवा’ के नाम से जानती है. मावे को एक विशेष तकनीक से भूनकर तैयार किया जाने वाला यह दानेदार गुलाब हलवा पाली की सबसे बड़ी पहचान है. शुद्ध दूध की मलाई और अपनी खास बनावट के कारण इसका स्वाद देश-विदेश तक मशहूर है. पाली पहुंचते ही इस फेमस गुलाब हलवे का स्वाद चखना और परिवार के लिए पैक करवाना कोई भी मुसाफिर नहीं भूलता.

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80 बार रिजेक्ट हुई वो कालजयी गाना, समा गया दर्शकों के दिल में, मूवी ने रचा इतिहास


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कुछ फिल्में बस बन जाती है. चाहकर भी ऐसी फिल्में दोबारा नहीं बन सकतीं. इन फिल्मों के गाने-स्टोरी दिल में बस जाती है. जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, मूवी की यादें दिल में गहरी होती जाती हैं. इन फिल्मों के गाने भी दिल में बस जाते हैं. सुनते ही मन यादों में खो जाता है. 26 साल पहले ही ऐसी ही एक कल्ट मूवी आई थी जिसके 11 गाने थे. हर गाना दिल को छू लेने वाला था. डायरेक्टर ने संगीतकार को सिर्फ एक लाइन की स्टोरी सुनाई थी.

2000 का दशक यादगार फिल्मों के लिए जाना जाता है. लाइफ उतनी फास्ट नहीं थी. स्मार्ट फोन हाथ में नहीं आए थे. ऐसे दौर में रोमांटिक गानों को टीवी और रेडियो पर देख-सुनकर ही लोग मनोरंजन करते थे. इसी दौर में एक ऐसी म्यूजिकल रोमांटिक आई जिसके गाने आज भी दिल में बसे हुए हैं. इस फिल्म के गानों को सुनकर आज भी दिल को सुकून मिलता है. इस फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग के समय डायरेक्टर की आंखों में आंसू आ गए थे. हम 13 जुलाई 2001 को रिलीज ‘तुम बिन’ फिल्म की बात कर रहे हैं जिसकी गिनती आज कल्ट मूवी में होती है.

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‘तुम बिन’ में संदली सिन्हा, प्रियांशु चटर्जी, हिमांशु मलिक और राकेश बापट लीड रोल में थे. छोटे से बजट की इस फिल्म ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई. दिल को छू लेने वाला म्यूजिक और नए एक्टर्स की जबरदस्त परफॉर्मेंस मिलकर जादू पैदा किया. 2001 में सनी देओल की ‘गदर’ और आमिर खान की ‘लगान’ की धूम के बीच बहुत ही खूबसूरत फिल्म ‘तुम बिन’ आई थी. टी-सीरीज के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था. बतौर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की यह पहली फिल्म थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ बच्चन की ‘अक्स’ फिल्म के साथ ही ‘तुम बिन’ रिलीज हुई थी. ‘अक्स’ फ्लॉप हो गई थी जबकि ‘तुम बिन’ सरप्राइज हिट निकली.

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‘तुम बिन’ फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले अनुभव सिन्हा ने ही लिखा था. फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसका म्यूजिक था. फिल्म में कुल 11 गाने थे. म्यूजिक निखिल-विनय, टीएस जरनैल और रवि पवार ने कंपोज किया था. मुख्य रूप से गाने संगीतकार निखिल-विनय के ही थे. निखिल-विनय का पूरा नाम निखिल कामत-विनय राम तिवारी है. दोनों ने 90 के दशक में कई फिल्मों में म्यूजिक दिया. ‘तुम बिन’ फिल्म के चार गाने ‘तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे’, ‘कोई फरियाद’, ‘छोटी-छोटी रातें’ और ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ सॉन्ग बहुत पॉप्युलर हुए. ये सभी गाने निखिल-विनय ने कंपोज किए. ‘कोई फरियाद’ गाना जगजीत सिंह ने गाया था. वहीं ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना केएस चित्रा की आवाज में था. दोनों गानों की गिनती कल्ट सॉन्ग में होती है.

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अनुभव सिन्हा ने टी-सीरीज के लिए कई म्यूजिक वीडियो बनाए थे. कई टीवी सीरियल्स का डायरेक्शन किया था. वो भूषण कुमार से अक्सर फिल्म बनाने के लिए कहा करते थे. एक दिन भूषण कुमार के घर पर संगीतकार निखिल-विनय मौजूद थे. अनुभव सिन्हा भी आए हुए थे. भूषण कुमार ने सबके सामने अनाउंस किया वो ‘तुम बिन’ नाम से फिल्म बनान चाहते हैं. उस दिन अनुभव सिन्हा ने फिल्म की कहानी एक लाइन में सुनाई.

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संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कहानी सीधे पर दिल पर लगी. अनुभव सिन्हा ने फिल्म भी वैसे ही बनाई. दो-तीन गाने जो हमारे बैंक में थे, वो हमने सुनाए. ये गाने थे : छोटी-छोटी रातें, लंबी हो जाती हैं’, तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे. भूषण कुमार ने ये गाने अपने पास रखी डायरी में नोट कर लिए थे.’ दूसरे दिन टी-सीरीज के ऑफिस पर में फिल्म का विधिवत अनाउंसमेंट हुआ. अनुभव सिन्हा ने सबको डिटेल में कहानी सुनाई.

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फिल्म के दो गाने ‘कोई फरियाद’ और ‘तुम बिन जिया जाए’ कैसे कालजयी सॉन्ग माने जाते हैं. इन गानों के बनने का किस्सा भी दिलचस्प है. संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कोई फरियाद गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान संदली सिन्हा समेत सभी एक्टर आते थे. संदली सिन्हा की आवाज सुनकर हम लोगों को ऐसा लगा कि यह वॉइस केएस चित्रा की आवाज है. चित्रा को साउथ की लता मंगेशकर कहा जाता है. हमने इमेजन किया कि संदली सिन्हा तन्हाई में है. वो अपने प्यार को याद कर रही है. एक और गाना ‘तुम बिन जिया जाए’ बनाया.’

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‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना तीन दिन में रिकॉर्ड हुआ था. निखिल-विनय और डायरेक्टर अनुभव सिन्हा फ्लाइट से मद्रास पहुंचे थे. एवीएमजी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग हुई थी. केएस चित्रा ने फोन पर गाना सुना था. 15 मिनट रिहर्सल किया. फिर दो घंटे का ब्रेक लिया. गाना तीन टेक में रिकॉर्ड किया था. गाना कितना पॉप्युलर हुआ, पूरी दुनिया जानती है. डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने गीतकार फैज अनवर को सिचुएशन बता दी थी. फिर कहा कि गजल लिखो. फोन पर वो मुझे शेर सुनाते थे. मैं रिजेक्ट कर देता था. महीनों यह सिलसिला चलता रहा. मुझे वो लम्हा याद है. मैं कहीं शूटिंग में गया था. मेरा फोन बजा. उन्होंने शेर सुनाया. एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर, जिंदगी तेज बहुत तेज चली हो जैसे. मैंने कहा डन. बोले कसम खुदा की. 80वां शेर सुनाया है. फिर गजल लिखी गई.’

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महज पौने 3 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 7.53 करो‌ड़ रुपये का कलेक्शन किया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. ‘तुम बिन’ रिलीज होते ही संदली सिन्हा रातों-रात स्टार बन गईं. प्यारी सी मुस्कान और मासूम चेहरे पर दर्शक फिदा हो गए. हालांकि बॉलीवुड में उन्हें बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली. 2005 में उन्होंने बिजनेसमैन किरण सालस्कर से शादी कर ली.

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स्पेशल कुल्हड़ लस्सी, विरासत को चमका रहे हैं दो भाई, मेवा-रबड़ी से भरपूर


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Agra Mashoor Lassi: उत्तर प्रदेश का आगरा शहर सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब और अनूठे जायके के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. गर्मियों के इस सीजन में आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित 30 साल पुरानी ‘दीपू की लस्सी दुकान’ लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है. दादा और पिता की विरासत को संभाल रहे दो भाई आज भी 30 साल पुराने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के साथ ग्राहकों को लस्सी परोस रहे हैं. यहाँ मात्र 50 रुपये में मिलने वाली स्पेशल रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स से भरपूर कुल्हड़ वाली लस्सी का क्रेज ऐसा है कि लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं.

Lassi News: उत्तर प्रदेश के आगरा शहर को सिर्फ मोहब्बत की निशानी ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि सुबह, दोपहर और शाम के नाश्ते का स्वाद और वैरायटी बिल्कुल अलग-अलग होती है. यही वजह है कि देश-विदेश से आगरा घूमने आने वाले पर्यटक यहां के स्थानीय खान-पान का लुत्फ उठाना कभी नहीं भूलते. इन दिनों गर्मियों के सीजन में आगरा की ‘स्पेशल कुल्हड़ वाली लस्सी’ की डिमांड सातवें आसमान पर है. वैसे तो लस्सी आपको आगरा के हर नुक्कड़ पर मिल जाएगी, लेकिन शहर में एक ऐसी प्राचीन दुकान है जो पिछले तीन दशकों से स्वाद का सम्राज्य चला रही है. इसे आगरा की सबसे भरोसेमंद और पुरानी लस्सी दुकानों में से एक माना जाता है.

आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित इस मशहूर दुकान के वर्तमान संचालक दीपू ने बताया कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से इसी एक स्थान पर लगातार लस्सी बेच रहे हैं. यह उनके लिए सिर्फ एक व्यापार नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत है. शुरुआत में उनके दादा और पिता दोनों मिलकर इस दुकान को चलाते थे. उनके जाने के बाद अब दीपू और उनके भाई ने इस पुश्तैनी दुकान की कमान पूरी निष्ठा के साथ संभाली हुई है.

संचालक दीपू का क्या कहना है-

‘हमारे पास दूर-दराज के इलाकों और दूसरे शहरों से लोग लस्सी पीने आते हैं. इसकी एकमात्र खास वजह यह है कि हम क्वालिटी और शुद्धता से कभी कोई समझौता नहीं करते. जैसा शुद्ध स्वाद हमारे दादाजी के जमाने में 30 साल पहले मिलता था, वही शुद्धता और गाढ़ापन हम आज भी बरकरार रखे हुए हैं. हम लस्सी बनाने के लिए केवल पूरी तरह शुद्ध और एकदम ताज़ा दही का ही इस्तेमाल करते हैं.’

₹50 के गिलास में मिलता है भरपूर माल

दुकानदार दीपू ने अपनी दुकान के सफर को याद करते हुए बताया कि जब उनके दादाजी ने यह कार्य शुरू किया था, तब महकती हुई कुल्हड़ लस्सी महज 2 से 3 रुपये के मामूली दाम में मिला करती थी. धीरे-धीरे समय बदला और महंगाई के साथ आज इसकी कीमत 40 और 50 रुपये हो गई है. यहाँ बिना रबड़ी वाली सादा लस्सी की रेट ₹40 है, जबकि ग्राहकों की पहली पसंद ‘स्पेशल रबड़ी वाली लस्सी’ की कीमत मात्र ₹50 है.

क्या है ₹50 वाली स्पेशल लस्सी का गणित?

दीपू का दावा है कि उनकी एक गिलास स्पेशल लस्सी पीने के बाद इंसान पूरे दिन सूरज की तपती धूप में भी पूरी तरह एनर्जेटिक रहेगा और उसे कमजोरी या थकान का अहसास तक नहीं होगा. इस स्पेशल लस्सी को बेहद अनोखे अंदाज में तैयार किया जाता है-

सबसे पहले शुद्ध ताज़ा दही को मथा जाता है. लस्सी के ऊपर दही की मोटी मलाई और लच्छेदार गाढ़ी रबड़ी डाली जाती है, जो इसका स्वाद दोगुना कर देती है. इसके बाद इसमें प्रचुर मात्रा में काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश और चिरौंजी जैसे बेहतरीन ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं. स्वाद और रंगत को बढ़ाने के लिए ऊपर से लाल चेरी और खुशबूदार रूहअफजा का सिरप डाला जाता है. यहां का स्वाद चखने के बाद ग्राहक इतने खुश होते हैं कि वे न सिर्फ खुद पीते हैं बल्कि अपने परिवार के लिए भी पैक करवा कर ले जाते हैं.

शुगर मरीजों का भी खास ख्याल

आमतौर पर लोग लस्सी को सिर्फ गर्मियों का ड्रिंक मानते हैं, लेकिन बोदला चौराहे की यह 30 साल पुरानी दुकान साल के पूरे 12 महीने ग्राहकों के लिए खुली रहती है. दीपू ने बताया कि उनके कई ऐसे पक्के और शौकीन ग्राहक हैं जो कड़कड़ाती सर्दियों में भी लस्सी पीने के लिए विशेष रूप से आते हैं. हालांकि ठंड के दिनों में सीजन की तुलना में काम थोड़ा हल्का जरूर होता है, लेकिन दुकान कभी बंद नहीं होती.

इस दुकान की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां हर वर्ग के ग्राहक का ख्याल रखा जाता है. दीपू ने बताया कि आजकल कई लोग डायबिटीज (शुगर) की बीमारी से पीड़ित हैं. ऐसे ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखते हुए वे उन्हें सामान्य चीनी वाली लस्सी नहीं देते, बल्कि उनके लिए बिना चीनी वाली स्पेशल ‘शुगर-फ्री लस्सी’ (Sugar-Free Lassi) तैयार करते हैं. इस खास ख्याल और बेमिसाल स्वाद की वजह से ही पिछले 30 वर्षों से दीपू की लस्सी का जादू पूरे आगरा और आसपास के क्षेत्रों में सिर चढ़कर बोल रहा है.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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