Friday, July 17, 2026
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NEET-UG का रिजल्ट जारी, टॉप-10 में राजस्थान के 2 स्टूडेंट: उपलक्ष्य की तीसरी और गौरव की 9वीं रैंक; टॉपर पांशुल ने कोटा में पढ़ाई की – Kota News


नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार देर रात नीट यूजी-2026 का रिजल्ट जारी कर दिया। 11.21 लाख उम्मीदवार मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। उम्मीदवार अपना स्कोरकार्ड neet.nta.nic.in पर देख सकते हैं।

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पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया टॉप किया। बिहार के आयुष ने चौथी रैंक हासिल की है। पांशुल और आयुष ने कोटा में रहकर कोचिंग की थी।

राजस्थान के 2 स्टूडेंट भी टॉप-10 में शामिल है। उपलक्ष्य गोयल ने 714 नंबर के साथ तीसरी रैंक और गौरव सिंह ने 712 नंबर के साथ 9वीं रैंक हासिल की है। परीक्षा में सफल स्टूडेंटस में 58% से ज्यादा छात्राएं हैं, जबकि 55.1% छात्र हैं।

बता दें कि 2 दिन पहले रिकोर्डेड रिस्पॉन्स की जारी होने के बाद से स्टूडेंटस को रिजल्ट का इंतजार था। एनटीए ने फाइनल आंसर-की जारी की और उसके कुछ मिनट बाद ही रिजल्ट जारी कर दिया है।

NEET-UG 2026 की परीक्षा 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में आयोजित की गई थी। यह परीक्षा 13 भाषाओं में हुई, जिसमें देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विदेशों के स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया।

इस साल परीक्षा देश और विदेश के 551 शहरों में बने 5,440 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई। राजस्थान के 25 शहरों में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। 577 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा का आयोजन किया गया था।

2027 से कंप्यूटर आधारित होगी NEET परीक्षा

पेपर लीक के बाद सरकार ने NEET परीक्षा में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 2027 से NEET-UG कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में होती है।

नई व्यवस्था में स्टूडेंट्स कंप्यूटर पर सवाल हल करेंगे। हालांकि, सिलेबस, प्रश्नों की संख्या, विषय और मार्किंग स्कीम में कोई बदलाव नहीं होगा। उम्मीदवारों को ऑनलाइन परीक्षा के लिए पहले से मॉक टेस्ट और डेमो की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि वे नए सिस्टम के अनुसार तैयारी कर सकें।

सुधारों के लिए बनी थी समिति

जून 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा सुधारों के लिए पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। समिति को परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।



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बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार: 3.79 लाख मतदाता करेंगे वोट, 422 बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम – Patna News



जिला निर्वाचन पदाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पीसी की।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव-2026 को लेकर जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला निर्वाचन पदाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की स्थिति और आदर्श आचार संहिता के अ

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प्रशासन ने दावा किया कि उपचुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

3.79 लाख से अधिक मतदाता करेंगे वोट

प्रशासन के अनुसार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3 लाख 79 हजार 616 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 2 लाख 60 पुरुष मतदाता, 1 लाख 79 हजार 533 महिला मतदाता तथा 23 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग मतदाताओं से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील कर रहा है।

422 मतदान केंद्रों पर होगी वोटिंग

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान के लिए कुल 422 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 247 मतदान केंद्र सरकारी भवनों में तथा 175 मतदान केंद्र निजी भवनों में स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त मतदाताओं की सुविधा के लिए 29 चलंत (मोबाइल) मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि सभी मतदान केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

नामांकन के बाद 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में

डीएम ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। नामांकन पत्रों की जांच के बाद 26 नामांकन वैध पाए गए। इसके बाद एक उम्मीदवार ने नाम वापस ले लिया, जिसके चलते अब 25 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

वेबकास्टिंग से होगी निगरानी, मोबाइल रखने की भी व्यवस्था

मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी इंतजाम किए गए हैं। मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाएगी।

इसके अलावा मतदान केंद्रों पर आने वाले मतदाताओं के लिए मोबाइल जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए मतदाता पहचान पत्र के अलावा 12 वैकल्पिक फोटो पहचान पत्रों को भी मान्य किया है।

आचार संहिता के दौरान बड़ी कार्रवाई

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद प्रशासन और पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक की कार्रवाई में—

2 अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। 16 कारतूस जब्त किए गए हैं। 2.785 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। 2652 लीटर शराब जब्त की गई है। इसके अलावा अन्य प्रतिबंधित सामग्री भी जब्त की गई है।

मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना पटना के एएन कॉलेज स्थित कला भवन में कराई जाएगी। मतगणना स्थल पर भी सुरक्षा और पारदर्शिता के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।

निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए पूरी तैयारी

डीएम और एसएसपी ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। सुरक्षा बलों की तैनाती, मतदान केंद्रों की निगरानी, वेबकास्टिंग, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर और आदर्श आचार संहिता के सख्ती से पालन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रशासन ने मतदाताओं से निर्भीक होकर मतदान करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।



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NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी, 11.21 लाख स्टूडेंट्स पास: इनमें 58% से ज्यादा छात्राएं; आठ राज्यों के 17 टॉपर्स को 700 से ज्यादा अंक


नई दिल्ली2 मिनट पहले

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने गुरुवार को NEET-UG 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस साल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी। इनमें से 11.21 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य स्नातक मेडिकल कोर्स के लिए क्वालिफाई हुए हैं।

सफल उम्मीदवारों में 58% से ज्यादा छात्राएं हैं। 8 राज्यों के 17 स्टेट टॉपर्स ने 720 में से 705 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 1.7 लाख से अधिक स्टूडेंट्स सफल हुए, जबकि लक्षद्वीप से सबसे कम 43 स्टूडेंट्स क्वालिफाई कर सके।

138 उम्मीदवारों ने 720 में से 690 से ज्यादा अंक हासिल किए। इनमें 93% से ज्यादा स्टूडेंट्स ने पहली बार NEET परीक्षा दी थी। 99% टॉप रैंकर्स की उम्र 17 से 19 साल के बीच है। इस साल 3 मई को NEET परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के कारण NTA ने 11 जून को दोबारा परीक्षा कराई थी।

NEET-UG 2026 की परीक्षा 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में आयोजित की गई थी। यह परीक्षा 13 भाषाओं में हुई, जिसमें देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विदेशों के स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया। इस साल परीक्षा देश और विदेश के 551 शहरों में बने 5,440 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई।

2027 से कंप्यूटर आधारित होगी NEET परीक्षा

पेपर लीक के बाद सरकार ने NEET परीक्षा में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 2027 से NEET-UG कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में होती है।

नई व्यवस्था में स्टूडेंट्स कंप्यूटर पर सवाल हल करेंगे। हालांकि, सिलेबस, प्रश्नों की संख्या, विषय और मार्किंग स्कीम में कोई बदलाव नहीं होगा। उम्मीदवारों को ऑनलाइन परीक्षा के लिए पहले से मॉक टेस्ट और डेमो की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि वे नए सिस्टम के अनुसार तैयारी कर सकें।

सुधारों के लिए बनी थी समिति

जून 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा सुधारों के लिए पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी। समिति को परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।



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पार्वती नदी में डूबने से दो युवकों की मौत: राजगढ़ में पुल पर बाइक, कपड़े और मोबाइल मिले; 27 घंटे बाद SDERF ने दोनों शव निकाले – rajgarh (MP) News




राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़-बैरसिया मार्ग स्थित पार्वती नदी में डूबे दोनों युवकों के शव गुरुवार को बरामद कर लिए गए। बुधवार शाम से चल रहे रेस्क्यू अभियान में एसडीईआरएफ की टीम ने करीब 27 घंटे तक बोट से तलाश की। गुरुवार सुबह एक युवक का शव मिला, जबकि दूसरे का शव शाम करीब 7:15 बजे नदी से निकाला गया। जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले के नजीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम मेगरा नवीन निवासी सोनू अहिरवार (26) और गोलू अहिरवार (23) बुधवार शाम करीब 4:30 बजे पार्वती नदी में नहाने गए थे। काफी देर तक दोनों वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। पुल पर बाइक खड़ी मिलीं तलाशी के दौरान नदी पर बने अस्थायी पुल पर दोनों की बाइक खड़ी मिली। पुल के किनारे उनके कपड़े और मोबाइल भी रखे थे। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने नदी में डूबने की आशंका जताते हुए एसडीईआरएफ की टीम को बुलाया। बुधवार देर रात तक रेस्क्यू अभियान चला, लेकिन दोनों का पता नहीं चल सका। गुरुवार सुबह एसडीईआरएफ ने बोट से दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुबह सोनू का शव बरामद हुआ। इसके बाद पूरे दिन तलाश जारी रही। शाम करीब 7:15 बजे गोलू का शव भी नदी से निकाल लिया गया। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए बैरसिया अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।



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संभल के पूर्व डीआईओएस को हाईकोर्ट से राहत: 53.80 लाख की वसूली और कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगी – Sambhal News




संभल के पूर्व डीआईओएस श्यामा कुमार (वर्तमान डीपीएमओ) को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट ने 53.80 लाख रुपये की वसूली और दंडात्मक कार्रवाई के लिए जारी शासनादेश पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार समेत अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह मामला न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ में गुरुवार को सुना गया। अधिवक्ता जयंत प्रकाश सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन ने 20 मार्च 2026 को श्यामा कुमार से 53,98,908 रुपये की वसूली और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने भी जिलाधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। श्यामा कुमार ने अधिवक्ता जयंत प्रकाश सिंह के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि श्यामा कुमार 31 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। नियमानुसार, सेवानिवृत्ति के बाद उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने से पहले राज्यपाल की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या 20 मार्च 2026 का आदेश जारी करने से पहले राज्यपाल से आवश्यक पूर्व अनुमति ली गई थी। अधिवक्ता के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से ऐसी कोई अनुमति न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकी। इस पर न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को वेतन विसंगति से संबंधित मानते हुए शासनादेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन और अन्य संबंधित पक्षों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में निर्धारित तिथि पर होगी। पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा नवंबर 2025 में जारी एक पत्र के अनुसार, श्यामा कुमार ने प्रधानाचार्य पद पर रहते हुए अपनी मूल सेवा पंजिका में स्वयं गलत वेतन निर्धारण की प्रविष्टियाँ दर्ज की थीं। शाहजहाँपुर के सहायक लेखाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) ने भी इस त्रुटिपूर्ण वेतन निर्धारण को अनुमोदित कर दिया था।



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सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन में लीक हो गई गैस तो कैसे चलेगा पता, ये है इंतजाम


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देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है. 17 जुलाई को पीएम मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे. सबसे पहले इसे हरियाणा में जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ाया जाएगा. इस ट्रेन में 3200 हॉर्स पावर का इंजन लगा है जो 10 डिब्बों की ट्रेन को खींचेगा. यह दुनिया में कहीं भी चलाई जा रही हाइड्रोजन ट्रेन की तुलना में सबसे अधिक लंबी है. इसका इंजन भी बाकी हाइड्रोजन इंजन से स्ट्रॉन्ग है.

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17 जुलाई को पीएम मोदी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे.

नई दिल्ली. भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कल से यानी 17 जुलाई से पटरियों पर दौड़ने के लिए तैयार है. इसे दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन कहा जा रहा है. अब तक रेलगाड़ी या तो कोयले के इंजन से खींची जाती थी या ओवरहेड वायर के जरिए बिजली देकर उसे दौड़ाया जाता था. लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन खुद अपनी बिजली बनाएगी. इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि इसके इंजन से कोयले का धुआं नहीं केवल पानी की भाप निकलेगी.

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हरियाणा से होगी. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे. सबसे पहले यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत तक चलाई जाएगी. इस ट्रेन में 10 कोच हैं और एक बार में 2600 यात्री इससे यात्रा कर सकेंगे.

3200 हॉर्स पावर, 110 की स्पीड

इस ट्रेन के इंजन को सबसे ताकत हाइड्रोजन इंजन माना जा रहा है जिसकी ताकत 3200 हॉर्स पावर है. इसे 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने के लिए डिजाइन किया गया है. हालांकि, इसकी ऑपरेटिंग स्पीड 75 किलोमीटर प्रति घंटा ही रखी गई है.

कैसे चलती है ट्रेन

ट्रेन में हाइड्रोजन गैस और हवा में मौजूद ऑक्सीजन मिलकर बिजली बनाते हैं. इसी बिजली से ट्रेन के पहिए चलते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में धुआं नहीं निकलता, सिर्फ पानी की भाप बनती है. रेलवे का कहना है कि सुरक्षा के लिए कई स्तर की व्यवस्था की गई है. हाइड्रोजन लीक होने पर तुरंत पता लगाने वाले सेंसर लगाए गए हैं. आग, धुआं और ज्यादा गर्मी का पता लगाने वाली आधुनिक तकनीक मौजूद है. किसी भी खतरे की स्थिति में हाइड्रोजन सप्लाई अपने आप बंद हो जाएगी. ट्रेन में लगातार वेंटिलेशन की व्यवस्था है, ताकि गैस जमा न हो सके. लोको पायलट के केबिन में पूरे सिस्टम की लाइव निगरानी की सुविधा दी गई है.

जींद में पहला हाइड्रोजन स्टेशन

ट्रेन में हाइड्रोजन भरने के लिए हरियाणा के जींद में देश का पहला रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है. यहां पानी से हाइड्रोजन तैयार की जाएगी, फिर उसे स्टोर और हाई प्रेशर पर ट्रेन में भरा जाएगा. स्टेशन में करीब 3,000 किलो हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता है.

पूरी तरह स्वदेशी तकनीक

ट्रेन का डिजाइन, इंजीनियरिंग और इंटीग्रेशन भारत में ही किया गया है. RDSO, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और मेधा सर्वो ड्राइव्स ने मिलकर इस परियोजना को तैयार किया है. अभी तक जर्मनी, फ्रांस, इटली, चीन और जापान जैसे कुछ देशों में ही सीमित स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं. लेकिन ज्यादातर देशों की ट्रेनें 2 से 4 कोच की हैं. भारत ने सीधे 10 कोच और 2,600 यात्रियों वाली ट्रेन तैयार कर दुनिया के सामने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई है. भारतीय रेलवे भविष्य में कालका-शिमला हेरिटेज रूट समेत दूसरे रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है. यह परियोजना नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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एग्जॉटिक लगने वाला स्ट्रॉबेरी सबसे गंदे फलों में से एक, जानें धोने का तरीका


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स्ट्रॉबेरी दिखने में जितना एग्जॉटिक होता है, उतनी ही इस पर गंदगी जमी होती है. यही कारण है कि इसे सबसे ज्यादा गंदे फलों में से एक भी माना जाता है. ऐसे में यदि आप स्ट्रॉबेरी खाना पसंद करते हैं, तो पहले इसे अच्छी तरह से जरूर धो लें. ध्यान रखें कई बार इसे सिर्फ साफ पानी से धोना काफी नहीं होता है. इस लेख में आप स्ट्रॉबेरी को साफ करने का सही और असरदार तरीका जान सकते हैं.

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स्ट्रॉबेरी पोषक तत्वों से भरपूर फल मानी जाती है. इसका इस्तेमाल स्मूदी, डेजर्ट, फ्रूट सलाद और कई तरह की रेसिपीज में किया जाता है. हालांकि बाजार से लाई गई स्ट्रॉबेरी को बिना धोए खाना सही नहीं माना जाता. खेती, पैकिंग और परिवहन के दौरान इन पर मिट्टी, धूल, कीटनाशकों के अवशेष और छोटे कीड़े-मकोड़े चिपक सकते हैं. देखने में साफ लगने वाली स्ट्रॉबेरी भी कई बार दूषित हो सकती है.

इसलिए इसे खाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. सही तरीके से सफाई करने से न केवल गंदगी और कीटनाशक कम हो सकते हैं. इसके अलावा साफ की गई स्ट्रॉबेरी का स्वाद बेहतर रहता है और यह लंबे समय तक ताजा भी रह सकती है. आइए जानते हैं स्ट्रॉबेरी को साफ करने के कुछ आसान तरीके.

स्ट्रॉबेरी साफ करने का सही तरीका

स्ट्रॉबेरी को साफ करने का सबसे आसान तरीका ठंडे पानी से धोना है. इसके लिए स्ट्रॉबेरी को एक छलनी में रखें और बहते ठंडे पानी के नीचे अच्छी तरह धो लें. इससे ऊपर जमी धूल और गंदगी हट जाती है.

अगर आप गहराई से सफाई करना चाहते हैं, तो सिरके का इस्तेमाल कर सकते हैं. एक बड़े बर्तन में तीन भाग पानी और एक भाग सफेद सिरका मिलाएं. स्ट्रॉबेरी को इसमें लगभग एक मिनट तक रखें और हल्के हाथों से घुमाएं. इसके बाद ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सिरके का स्वाद न रहे.

बेकिंग सोडा भी स्ट्रॉबेरी साफ करने का एक विकल्प है. इसके लिए चार कप पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं. स्ट्रॉबेरी को इस मिश्रण में पांच मिनट तक रखें और फिर साफ पानी से धो लें.

धोने के बाद स्ट्रॉबेरी को एक साफ किचन टॉवल पर कुछ मिनट के लिए फैलाकर रखें ताकि अतिरिक्त नमी सूख जाए. इससे फल जल्दी खराब होने से बच सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान
स्ट्रॉबेरी को फ्रिज में रखने से पहले न धोएं. जब खाने या इस्तेमाल करने का समय हो, तभी साफ करें. इसके साथ ही फलों को धोने के लिए साबुन का इस्तेमाल न करें और सुखाने के लिए हमेशा साफ कपड़े का ही उपयोग करें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



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TrueCaller जैसे ऐप्स के डेटा शेयरिंग को लेकर TRAI की सख्ती, नियमों में होगा बदलाव


TRAI जल्द ही TrueCaller जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के डेटा शेयरिंग को लेकर सख्ती दिखा सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटर TCCCPR यानी टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रिफरेंस रेगुलेशन में बदलाव की तैयारी में है। इस नियम में अमेंडमेंट की पेशकश की गई है, जिसमें प्रोविजन है कि कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को यूजर द्वारा रिपोर्ट किए गए स्पैम की जानकारी रेगुलेटर के साथ शेयर करनी होगी।

दूरसंचार नियामक ने पिछले दिनों कॉल मैनेजमेंट ऐप्स द्वारा 1600 और 140 नंबरों से शुरू होने वाले कॉल्स को स्पैम बताकर ब्लॉक किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण भी जारी की है। इसके लिए रेगुलेटर ने पिछले दिनों MeitY से कॉल मैनेजमेंट ऐप्स Truecaller, Hiya और Whoscall के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की थी।

कॉल मैनेजमेंट ऐप्स पर सख्ती की तैयारी

TRAI के इस फैसले पर TrueCaller के सीईओ रिशित झुनझुनवाला ने आलोचना भी की थी। अब ट्राई ने इसे लेकर स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। नियामक ने कमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए बनाए गए रेगुलेशन TCCCPR में बदलाव की तैयारी की है। इस अमेंडमेंट को जल्द ही सरकार फाइनलाइज कर सकती है। इसे लेकर पहले स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लिया जा रहा है।

फिलहाल कॉल मैनेजमेंट ऐप्स पर यूजर्स द्वारा स्पैम फ्लैग किए जाने वाले नंबरों का डेटा दूरसंचार नियामक के साथ शेयर नहीं किया जाता है। TCCCPR में इस नए अमेंडमेंट के बाद TrueCaller जैसे ऐप्स को यह डेटा TRAI के साथ शेयर करना पड़ेगा। इस डेटा में ऐप्स पर यूजर्स द्वारा फ्लैग किए गए नंबरों, रिसीव करने वाले यूजर्स और कॉल किए जाने के समय की भी डिटेल ट्राई के साथ शेयर करनी पड़ेगी।

TRAI का स्पष्टीकरण

TRAI ने पिछले दिनों अपने लेटेस्ट गाइडलाइन्स में स्पष्ट किया है कि 1600 सीरीज वाले फोन नंबर केवल बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी (SEBI) और इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDA द्वारा अधिकृत किए गए हैं। इस नंबर सीरीज को सरकार से सिटीजन के बीच कम्युनिकेशन के लिए रिजर्व किया गया है। ऐसे में इससे शुरू होने वाले नंबर को किसी भी प्लेटफॉर्म या ऐप द्वारा TCCCPR के तहत ब्लॉक नहीं किया जा सकता है।

इसमें यह भी कहा गया है कि 1600 से शुरू होने वाले नंबर को न तो फिल्टर किया जा सकता है और न हीं स्पैम कॉल में टैग किया जा सकता है। केवल 140 सीरीज से आने वाले कॉल्स को TRAI DND ऐप के जरिए ही ब्लॉक किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें – OnePlus के फोन में अब नहीं मिलेगा OxygenOS, कंपनी ने की बड़ी घोषणा





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बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका: ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा




म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।



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बारां में 172 स्वास्थ्य संस्थानों का सघन निरीक्षण: इंटेंसिव आरसीएच ड्राइव के तहत मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जांच – Baran News




बारां जिले में इंटेंसिव आरसीएच (प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य) ड्राइव के तहत 172 स्वास्थ्य संस्थानों का सघन निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान 279 महिलाओं का 12 सप्ताह से पहले एएनसी पंजीकरण हुआ, 61 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें 12 एनीमिया से पीड़ित मिलीं। निरीक्षण में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखी गई और जहां कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। जिलेभर में चला व्यापक निरीक्षण अभियान जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जगदीश कुशवाह के निर्देशन में जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और उप स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 172 चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण किया गया। अभियान का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (आरसीएच) सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। जिला और ब्लॉक स्तर की टीम रही सक्रिय निरीक्षण में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सीताराम वर्मा, डॉ. निशांत सैनी, डीपीएम दिलीप शर्मा, डॉ. अशोक मीणा, डीपीसी आशा कॉर्डिनेटर धर्मेन्द्र निर्विकार, डीपीसी आईईसी नीतू शर्मा, दक्षता मेंटर ब्रह्मदेव शर्मा, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, बीसीएमओ, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, बीपीएम, बीएचएस, पीएचएस और सीएचओ ने भाग लिया। इन सेवाओं का किया गया गहन मूल्यांकन अधिकारियों ने उच्च जोखिम गर्भवती (एचआरपी) महिलाओं की पहचान और फॉलोअप, प्रसव सेवाएं, नियमित टीकाकरण, एएनसी सेवाएं, संस्थागत प्रसव, दवा एवं जांच सुविधाएं, रिकॉर्ड संधारण, साफ-सफाई, स्टाफ की उपस्थिति तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का विस्तृत मूल्यांकन किया। स्वास्थ्यकर्मियों को सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने और सभी आरसीएच गतिविधियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण में सामने आए प्रमुख आंकड़े मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जगदीश कुशवाह ने बताया कि अभियान के दौरान 12 सप्ताह से पहले 279 एएनसी रजिस्ट्रेशन हुए। 61 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई, जिनमें 12 एनीमिया से ग्रसित थीं। इसी अवधि में जिले में 12 प्रसव हुए, जिनमें 4 सिजेरियन (ऑपरेशन) के माध्यम से कराए गए। जहां भी कमियां मिलीं, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।



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