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America New Tariff Plan: अमेरिका रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर एक बार फिर से सख्त रुख अपना रहा है. अमेरिकी सीनेट में इस बाबत एक विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल-गैस आयात करने वाले टॉप 5 देशों पर 100 फीसद टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है.
अमेरिका के 100 फीसद टैरिफ वाले विधेयक पर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
नई दिल्ली. अमेरिका की ट्रंप सरकार रूस से तेल और गैस खरीदने वाले टॉप 5 देशों पर फिर से टैरिफ का चाबुक चला सकती है. अमेरिकी सीनेट में इसको लेकर पेश विधेयक में ऐसे देशों पर 100 फीसद तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है. संसद से विधेयक के पास होने पर राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा. अमेरिका का मानना है कि तेल और गैस के पैसे से रूस यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रहा है. ऐसे में यदि रूस-यूक्रेन जंग को रोकना है तो पहले मॉस्को की फंडिंग रोकनी होगी. अब इस पूरे प्रकरण पर एक अधिकारी ने बड़ी बात कही है. ‘मनीकंट्रोल’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिकारी का कहना है कि 100 फीसद टैरिफ से भारत-अमेरिका के बीच चल व्यापार वार्ता (Trade Talk) पटरी से नहीं उतरने वाली है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में जुटे हैं और प्रस्तावित विधेयक (100 फीसद टैरिफ) को बातचीत में बाधा नहीं माना जा रहा है. ‘मनीकंट्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ता से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया यह विधेयक भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का हिस्सा नहीं है और इसे बातचीत में किसी ‘स्टिकिंग प्वाइंट’ (गतिरोध का मुद्दा) के रूप में नहीं देखा जा रहा. अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के बीच फरवरी में व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा तय की गई थी और उसके बाद रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटा दिया गया था.
तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही वार्ता
अधिकारी के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है. इस अधिकारी ने बताया कि अमेरिका की ओर से समझौते के पालन को लेकर पूरा भरोसा दिया गया है और दोनों देश इस दिशा में सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं. दरअसल, 14 जुलाई को अमेरिकी सीनेट में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों के एक ग्रुप ने संशोधित विधेयक पेश किया. इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देने का प्रस्ताव है कि वह रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के 5 सबसे बड़े देशों से होने वाले आयात (Import) पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकें. इस सूची में भारत और चीन भी शामिल हैं. इस कदम का उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है.
500 फीसद टैरिफ लगाने की थी बात
हालांकि, यह संशोधित प्रस्ताव पहले के मसौदे की तुलना में काफी नरम माना जा रहा है. शुरुआती प्रस्ताव में रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, जिसे बाद में घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूसी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार है, इसलिए इस विधेयक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है. इसके बावजूद भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यह मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार समझौते की राह में बड़ी बाधा नहीं बनेगा. कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क तैयार है और दोनों पक्ष सहमति बनने के बाद इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ रही है.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है. हालांकि, इसे तभी लागू किया जाएगा जब भारत को वियतनाम, थाईलैंड, फिलीपींस, चीन, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट टैरिफ लाभ सुनिश्चित हो जाएगा. ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर वार्ता फिलहाल सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है.









