Thursday, June 11, 2026
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DDU के 7 स्टूडेंट्स बने ‘इको नेटवर्क’ के जूनियर एम्बेसडर: बेंगलुरु में लेंगे ट्रेनिंग, मेधा संस्था और यूनिवर्सिटी के सहयोग से मिला मौका – Gorakhpur News




दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के सात स्टूडेंट्स का सिलेक्शन ‘इको नेटवर्क’ के प्रोग्राम SAGE 2026 (सस्टेनेबिलिटी एम्बेसडर्स ग्लोबल एक्सचेंज) में जूनियर एम्बेसडर के रूप में हुआ है। चुने गए सभी स्टूडेंट्स बुधवार को बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे पूरी तरह से फंडेड ट्रेनिंग और वर्कशॉप में हिस्सा लेंगे। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वे समाज के बीच जाकर अपने प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। स्टूडेंट्स को यह बड़ा मौका सामाजिक संस्था ‘मेधा’ और यूनिवर्सिटी के एम्प्लॉयमेंट ब्यूरो, गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल के सहयोग से मिला है। इस प्रोग्राम के लिए पूरे उत्तर प्रदेश से सिर्फ 15 स्टूडेंट्स चुने गए हैं। इनमें लखनऊ से छह, आगरा से दो और सबसे ज्यादा गोरखपुर के डीडीयू से सात स्टूडेंट्स शामिल हैं। इन स्टूडेंट्स का हुआ सिलेक्शन
यूनिवर्सिटी के इन 7 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन कड़े कॉम्पिटिशन, आइडिया टेस्ट और पर्सनल इंटरव्यू के बाद किया गया है। जिनमें अंशिका त्रिपाठी (बीए ऑनर्स, थर्ड ईयर), अविनाश यादव (एमए, सेकेंड ईयर- इंग्लिश), मोहम्मद यूसुफ (बीएससी ऑनर्स, थर्ड ईयर- एग्रीकल्चर), मोहम्मद सादिक (बीकॉम, थर्ड ईयर), निर्मलेंदु (बीएससी एग्रीकल्चर, फोर्थ ईयर), प्रिया यादव (एमए, सेकेंड ईयर- ज्योग्राफी), सृष्टि जायसवाल (एमए, फर्स्ट ईयर- सोशियोलॉजी) शामिल हैं। क्या है इको नेटवर्क और SAGE प्रोग्राम?
इको नेटवर्क एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है, जो साइंस, समाज, सरकारी नीति बनाने वालों, कंपनियों और लोकल लोगों को एक साथ जोड़कर पर्यावरण और समाज से जुड़ी समस्याओं जैसे क्लाइमेट चेंज, खेती-बाड़ी, हेल्थ, पानी की देखरेख और साफ-सुथरे शहरों पर काम करता है। तीन हिस्सों में आयोजित होगा
SAGE इसी नेटवर्क का एक मुख्य प्रोग्राम है जो युवाओं को लीडरशिप सिखाता है। यह प्रोग्राम तीन हिस्सों में होगा। पहला हिस्सा- बुधवार से शुरू हो रहा है, जिसमें भारत और विदेशों के एक्सपर्ट्स स्टूडेंट्स को गहरी ट्रेनिंग देंगे। दूसरे हिस्से में स्टूडेंट्स अपने आइडियाज को जमीन पर उतारने के लिए कम्युनिटी बीच प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे।जबकि तीसरे हिस्से में प्रोजेक्ट के असर की जांच होगी, रिपोर्ट लिखी जाएगी और उसका प्रजेंटेशन दिया जाएगा। स्टूडेंट्स के अंदर लीडरशिप क्वालिटी डेवेलोप होगी
इस प्रोग्राम से स्टूडेंट्स के अंदर लीडरशिप क्वालिटी आएगी। उन्हें काम का असली एक्सपीरिएंस मिलेगा। बड़े एक्सपर्ट्स का मार्गदर्शन मिलेगा और देश-विदेश के लोगों से नेटवर्क बनाने का मौका मिलेगा। साथ ही उनकी बातचीत करने की कला (कम्युनिकेशन स्किल) और पर्सनालिटी भी निखरेगी। यह कामयाबी बच्चों के टैलेंट को दिखाती- वीसी
यूनिवर्सिटी की वीसी प्रो. पूनम टंडन ने स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए कहा कि यह कामयाबी हमारे बच्चों के टैलेंट को दिखाती है। जागरूक और जिम्मेदार युवा ही भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। वहीं, प्लेसमेंट सेल के डायरेक्टर प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने भी स्टूडेंट्स को शुभकामनाएं दी और कहा कि ऐसे मौकों से स्टूडेंट्स का नजरिया बदलता है और वे अपने करियर में बहुत आगे जाते हैं।



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सुप्रीम कोर्ट बोला- महिलाओं को होममेकर नहीं नेशन बिल्डर कहें: वे परिवार की नींव मजबूत करती हैं; उनके काम की कीमत हर महीने ₹30000 जितनी


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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा परिवार में एक महिला के योगदान के कारण उनके लिए होममेकर (घर संभालने वाली) के बजाय राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एक दुर्घटना में पत्नी की मौत के बाद उसके पति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, बच्चों की देखभाल और घर संभालना भर नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती हैं। समाज के विकास में अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद महत्वपूर्ण योगदान देती है।

कोर्ट ने एक गृहिणी के घर के काम की वैल्यू निकाली जाए तो उसकी अनुमानित आय 30 हजार रुपए प्रतिमाह बनती है। इसलिए मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को केवल सांकेतिक या कम करके नहीं आंका जा सकता।

इस टिप्पणी और फैसले के मायने क्या…

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यदि किसी सड़क दुर्घटना में गृहिणी घायल हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार को केवल उसकी आय न होने के आधार पर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता।

यानी सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) के तहत दावों में पत्नी की घरेलू देखभाल के नुकसान को मुआवजे के एक अलग मद के रूप में मान्यता दे दी।

बेंच ने मुआवजा तय करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए। अदालत ने कहा कि गृहिणियों की आय का आकलन करते समय उनकी उम्र, एजुकेशन, स्किल, पारवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक हालात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 2024 में दिए गए एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया। यह मामला 2001 में दो जीपों के बीच हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने पीड़ित के परिवार, जिसमें उसके पति और तीन बच्चे शामिल थे, को 8 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

खबरें और भी हैं…



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संजय लीला भंसाली की ‘हीरामंडी’ में काम कर भयानक ट्रोल हुई ये स्टार किड, अब कहां हुई गायब?


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54 हजार करोड़ के बिड़ला खानदान की बहू और संजय लीला भंसाली की इस लाडली एक्ट्रेस के लिए ये सीरीज एक खूबसूरत सपना थी. लेकिन किसे पता था कि सीरीज रिलीज होते ही एक ऐसा मोड़ आएगा, जो उनकी हंसती-खेलती जिंदगी को पूरी तरह बदल देगा. भयंकर ट्रोलिंग के उस एक झटके ने ऐसा क्या जादू किया कि वो रातोंरात चकाचौंध की इस चमकीली दुनिया से हमेशा के लिए गायब हो गईं? आखिर कहां छिपी हैं भंसाली की ये एक्ट्रेस? नीचे पढ़ें पूरी खबर-

बॉलीवुड की दुनिया में हर साल कई नए चेहरे अपनी किस्मत आजमाने आते हैं. कुछ तो पहली ही फिल्म से दर्शकों के चहेते बन जाते हैं, तो कुछ को पहचान बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी एक्ट्रेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाता एक ऐसे परिवार से है जिसके पास 54 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की दौलत है. पर सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अपनी एक बड़ी वेब सीरीज के आने के बाद इस एक्ट्रेस को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा और वह अचानक लाइमलाइट से दूर हो गई, आखिर कहां गायब है ये हसीना? चलिए जानते हैं. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

संजल लीला भंसाली बॉलीवुड के वो डायरेक्टर हैं, जिनकी फिल्म में काम करना हर स्टार का सपना होता है. उन्होंने बॉलीवुड के कई एक्टर और एक्ट्रेसेस को रातोंरात स्टार बनाया है, लेकिन एक एक्ट्रेस ऐसी भी है, जिसने उनकी सीरीज ‘हीरामंडी’ में बड़ी उम्मीद के साथ काम किया था, लेकिन इसी सीरीज की वजह से वो भयानक ट्रोल हो गई. यूं तो हीरामंडी काफी हिट रही थी और इसके सभी कलाकारों के एक्टिंग की जमकर तारीफ भी हुई थी. वहीं इस एक्ट्रेस की उतनी ही ज्यादा आलोचना हो गई (फोटो साभार-instagram@sharminsegal ).

हम यहां बात कर रहे हैं संजय लीला भंसाली की भांजी शर्मिन सहगल की. शर्मिन सहगल ने कुछ समय पहले आई नेटफ्लिक्स की बहुत बड़ी वेब सीरीज हीरामंडी से खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इस सीरीज के आने से पहले हर किसी को लगा था कि भंसाली की भांजी होने के नाते शर्मिन इस सीरीज से रातोंरात बड़ी स्टार बन जाएंगी. उनके पास इंडस्ट्री का सबसे बड़ा नाम और सपोर्ट था, लेकिन सीरीज के रिलीज होते ही पासा पूरी तरह पलट गया. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

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संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी सीरीज हीरामंडी में शर्मिन सहगल ने आलमज़ेब का एक बहुत ही मुख्य किरदार निभाया था. यह सीरीज एक बहुत बड़े स्तर पर बनाई गई थी और दर्शकों को इससे बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं. लेकिन जैसे ही यह सीरीज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई, सोशल मीडिया पर शर्मिन सहगल की एक्टिंग को लेकर बवाल खड़ा हो गया. लोगों ने उनकी एक्टिंग को लेकर उन्हें बुरी तरह से आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

सीरीज में उनके चेहरे के हाव-भाव और एक्टिंग को लेकर दर्शकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. लोगों का कहना था कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में उन्हें सिर्फ भंसाली की रिश्तेदार होने की वजह से इतना बड़ा रोल मिला, जबकि वह इसके लायक नहीं थीं. इस चौतरफा विरोध और भारी ट्रोलिंग का सीधा असर शर्मिन सहगल पर पड़ा. सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मीम्स और निगेटिव कमेंट्स की बाढ़ आ गई, जिससे वह पूरी तरह परेशान हो गईं. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

शर्मिन सहगल के लिए यह झटका बहुत बड़ा था क्योंकि उन्होंने इस सीरीज के लिए बहुत मेहनत की थी. लोगों का गुस्सा इस कदर बढ़ गया था कि शर्मिन को सोशल मीडिया पर अपने कमेंट सेक्शन तक बंद करने पड़े थे. इसके बाद कई सह-कलाकारों ने उनके सपोर्ट में बातें भी कीं और लोगों से शांत होने की अपील की, लेकिन इंटरनेट पर चल रही उस भयंकर निगेटिविटी ने शर्मिन के मन पर गहरा असर छोड़ दिया. इस पूरी घटना के बाद शर्मिन ने खुद को मीडिया की नजरों से बिल्कुल दूर कर लिया. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पूरे विवाद के बाद शर्मिन सहगल लाइमलाइट से कोसों दूर हो गई हैं. जहां आज के दौर की बाकी एक्ट्रेस अपनी फिल्मों के बाद सोशल मीडिया और पार्टियों में खूब नजर आती हैं, वहीं शर्मिन इन सब चीजों से बचती दिखाई देती हैं. वह न तो किसी फिल्मी पार्टी में दिखती हैं और न ही पैपराजी के कैमरों के सामने आती हैं. सीरीज के इस विवाद ने उन्हें लोगों के सामने आने से बचने पर मजबूर कर दिया. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

अगर बात शर्मिन सहगल के पारिवारिक और पर्सनल बैकग्राउंड की करें, तो वह भारत के सबसे अमीर परिवारों में से एक की बहू हैं. शर्मिन के पति अमन मेहता देश के सबसे बड़े बिजनेसमैन कुमार मंगलम बिड़ला के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं. बिड़ला परिवार की कुल संपत्ति 54 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. इतने रईस और बड़े खानदान की बहू होने के बावजूद शर्मिन को अपनी खराब एक्टिंग की वजह से जनता के तीखे बयानों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. (फोटो साभार-instagram@sharminsegal )

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रीना सर्राफ बनीं सनातन बोर्ड की मधुबनी जिला कोऑर्डिनेटर: धार्मिक- सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार का लिया संकल्प, बोलीं- महिलाओं को सनातन मूल्यों से जोड़ना प्राथमिकता होगी – Madhubani News




मधुबनी भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की जिलामंत्री रीना सर्राफ को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उन्हें सनातन बोर्ड का मधुबनी जिला कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। उन्होंने गुरुवार सुबह 9:00 बजे मधुबनी शहर के बड़ा बाजार स्थित अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रीना सर्राफ ने कहा कि सनातन धर्म की सेवा और उसके मूल्यों के संरक्षण के लिए मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने एक सनातनी होने के नाते इस दायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में जिले भर में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं को सनातन धर्म के सिद्धांतों, परंपराओं और संस्कारों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा। समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने के लिए जनसंपर्क अभियान भी चलाया जाएगा। इसके साथ ही, अधिक से अधिक लोगों को सनातन बोर्ड से जोड़कर संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास किया जाएगा। रीना सर्राफ ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक श्रेष्ठ पद्धति है, जो मानवता, सेवा, करुणा और सद्भाव का संदेश देती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा।



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तेल के लिए अंडमान के बाद यहां होगी ड्रिलिंग, समंदर में उतरी OIL, पताल लोक में छिपा है खजान


Oil India Ultra Deepwater Drilling: देश में तेल की कमी दूर करने के लिए अब देसी संसाधनों पर फोकस किया जा रहा है. इस दिशा में देसी कंपनियां कमर कसकर उतर चुकी हैं. इसमें सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है. दरअसल, समंदर की गहराइयों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की तलाश तेज कर दी गई है. अंडमान सागर में चल रहे खोज अभियानों के बीच अब ऑयल इंडिया की नजर देश के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ऑयल इंडिया 2027 से इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोजी ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

2027 से शुरू होगी नई खोज

ऑयल इंडिया को ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP)-IX के तहत चार अपतटीय ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. इनमें महानदी बेसिन के दो और कृष्णा-गोदावरी बेसिन के दो अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक शामिल हैं. कंपनी फरवरी 2027 से इन ब्लॉकों में खोजी ड्रिलिंग शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक महानदी बेसिन में पहला स्ट्रेटिग्राफिक कुआं अप्रैल 2027 के आसपास ड्रिल किया जा सकता है. इस तरह की ड्रिलिंग का उद्देश्य सीधे उत्पादन शुरू करना नहीं होता, बल्कि समुद्र के नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करना और तेल-गैस की संभावनाओं का आकलन करना होता है.

अंडमान बेसिन में पहले से जारी है अभियान

पूर्वी तट पर विस्तार की तैयारी के साथ-साथ ऑयल इंडिया अंडमान और निकोबार क्षेत्र में भी अपने खोज अभियान को आगे बढ़ा रही है. कंपनी वर्तमान में अंडमान सागर के दो अपतटीय ब्लॉकों में काम कर रही है. दस्तावेजों के अनुसार, यहां अब तक तीन खोजी कुओं की ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि दो और कुएं ड्रिल करने की तैयारी चल रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन भारत के लिए भविष्य का बड़ा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र साबित हो सकता है.

दरअसल, इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन इलाकों से काफी मिलती-जुलती है, जहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं. यदि यहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस की खोज सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है.

क्यों महत्वपूर्ण हैं कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन?

भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले भी देश को कई बड़े गैस भंडार दे चुका है. इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण अपतटीय ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. वहीं, इसके उत्तर में स्थित महानदी बेसिन अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी बेसिन में बड़े ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है. ऐसे में ऑयल इंडिया का आगामी अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

समुद्र के बीच संचालन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा

अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग आसान काम नहीं है. ड्रिलिंग यूनिट्स अक्सर तट से सैकड़ों समुद्री मील दूर स्थित होती हैं. ऐसे में कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऑयल इंडिया ने समर्पित हेलीकॉप्टर सेवाएं लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय बेस और समुद्र में मौजूद ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म के बीच कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए किया जाएगा.

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

ऑयल इंडिया की यह दोहरी रणनीति- एक ओर अंडमान सागर में फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन और दूसरी ओर पूर्वी तट के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में नई खोज कंपनी के इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार अभियानों में से एक मानी जा रही है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में घरेलू भंडारों की खोज और उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. यदि अंडमान, कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन में ऑयल इंडिया को सफलता मिलती है, तो इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. समुद्र की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की यह खोज आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के और करीब ले जा सकती है.



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6.60 करोड़ की बेशकीमती जमीन महज 6 लाख में बिकी: SDM, BMO और तहसीलदार के रिश्तेदारों ने ई-केवाईसी के नाम पर किया ‘खेला’ – Chhindwara News




छिंदवाड़ा जिले के तामिया स्थित चौरा पठार और पातालकोट व्यू पॉइंट की करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन सरकारी अधिकारियों और उनके परिजनों को महज 6 लाख रुपए में बेच दी गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिसकी जमीन थी, उसे पता ही नहीं चला कि जमीन किसी और को बेची जा चुकी है। दरअसल, पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि तत्कालीन पटवारी लेखराम नदवंशी ने ई-केवाईसी के नाम पर उनसे कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए, जिसके बाद उनका वहां से स्थानांतरण भी हो गया। उन्हीं हस्ताक्षरों का उपयोग कर जमीन अधिकारियों के परिजनों को बेच दी गई। आदिवासी परिवार की जमीन की इस तरह से हुई खरीद-फरोख्त में प्रशासनिक अधिकारियों, राजस्व अमले और अन्य लोगों की भूमिका सवालों के घेरे में है। मामले में जुन्नारदेव एसडीएम के पिता, तामिया में पदस्थ बीएमओ और तामिया के तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार उमराज वालरे का नाम सामने आया है। इन्हीं के नाम पर जमीन खरीदी गई। दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अब सिलसिलेवार तरीके से पूरी कहानी समझें
जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह तामिया रेस्ट हाउस और प्रसिद्ध पातालकोट व्यू पॉइंट के आसपास स्थित है, जहां से पातालकोट की खूबसूरत वादियां दिखती हैं। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्षेत्र की करीब 11 एकड़ जमीन को मात्र 6 लाख रुपए में रजिस्टर्ड कराने का आरोप है। दरअसल, यह जमीन नान्हो और सिमीना नाम की दो बहनों के परिवार की पुश्तैनी संपत्ति थी। परिवार के पास कुल 22 एकड़ जमीन थी। दोनों बहनों की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति उनके बेटों (दोनों मौसियों के परिवारों) के पास गई। जमीन का बंटवारा विप्पा भारती और अन्य वारिसों के बीच होना था। लंबे समय से परिवार के भीतर सीमांकन और बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि आम आदमी वर्षों तक तहसीलों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटता रहता है, लेकिन उसका सीमांकन और बंटवारा समय पर नहीं हो पाता। यहां भी यही स्थिति थी और मामला लंबित था, लेकिन अचानक एक महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी कर दी गई। कीमती हिस्सों को अलग किया
आरोप है कि राजस्व अमले ने सुनियोजित तरीके से जमीन के सबसे कीमती हिस्से को अलग करवाया। पातालकोट व्यू पॉइंट और मुख्य सड़क से लगा हुआ हिस्सा, जिसकी बाजार कीमत सबसे ज्यादा मानी जा रही थी, उसे कागजों में रामदास भारती के हिस्से में दर्ज कर दिया गया। इसके बाद उसी हिस्से की 11 एकड़ जमीन को तीन अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्टर्ड करा दिया गया। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन की कीमत को लेकर खड़ा हो रहा है। जिस जमीन की बाजार कीमत 60 लाख रुपए प्रति एकड़ से ज्यादा बताई जा रही है (इस हिसाब से 11 एकड़ जमीन 6 करोड़ 60 लाख रुपए की हुई) और जिसका शासकीय मूल्य (गाइडलाइन वैल्यू) 27 लाख रुपए है, उसे मात्र 6 लाख रुपए में रजिस्टर्ड कराया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जमीन की खरीदी-बिक्री में रजिस्ट्री मूल्य सामान्यतः गाइडलाइन वैल्यू से कम नहीं होता। ऐसे में करोड़ों की संभावित व्यावसायिक जमीन को सिर्फ 6 लाख रुपए में रजिस्टर्ड किया जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। महीने भर में प्रक्रिया पूरी रजिस्ट्री दस्तावेजों के अनुसार, ई-केवाईसी का झांसा देकर अंगूठा लगवाने का आरोप पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि राजस्व अमले ने उन्हें सरकारी प्रक्रिया और ई-केवाईसी का झांसा देकर कोरे कागजों पर अंगूठे और हस्ताक्षर करवा लिए। परिवार के सदस्य बिसन लाल भारती का कहना है कि पटवारी लेखराम नदवंशी और कोटवार उनके घर पहुंचे थे। बिसन, विप्पा भारती के पोते हैं। विप्पा के तीन बेटे थे, जिनमें से सबसे बड़े बेटे का निधन हो चुका है और बिसन उन्हीं के बेटे हैं, जबकि अन्य दो भाई जीवित हैं। बिसन ने बताया कि पटवारी ने उनसे कहा था कि सरकारी योजना और दस्तावेजों के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं। परिवार पढ़ा-लिखा नहीं था, इसलिए उन्होंने भरोसा कर दस्तखत कर दिए। बाद में पता चला कि उन्हीं कोरे कागजों का इस्तेमाल जमीन के बंटवारे और रजिस्ट्री में कर लिया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक यह जानकारी ही नहीं थी कि उनकी पुश्तैनी जमीन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किसी और के नाम हो चुका है। व्यक्ति बोला- एसडीएम मैडम खुद जमीन मांगने आई थीं
मामले में सबसे सनसनीखेज आरोप जुन्नारदेव एसडीएम कामिनी ठाकुर को लेकर लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार के सदस्य बिसन लाल भारती का कहना है कि कुछ समय पहले एसडीएम कामिनी ठाकुर स्वयं उनके घर पहुंची थीं और जमीन बेचने की बात कह रही थीं। परिवार ने साफ मना कर दिया था, क्योंकि यही जमीन उनके जीवनयापन और खेती का मुख्य साधन थी। परिवार का आरोप है कि जमीन बेचने से इनकार करने के बाद पूरी साजिश रची गई और बाद में प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जमीन का बंटवारा और रजिस्ट्री करवा दी गई। हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूरे मामले में उठ रहे गंभीर सवाल
यह मामला सामने आने के बाद कई बड़े सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारियों और उनके परिजनों ने जमीन खरीदी से पहले शासन से अनुमति ली थी? नियमों के मुताबिक कोई भी अधिकारी अपने पदस्थ क्षेत्र में सीधे या परोक्ष रूप से जमीन खरीदने से पहले शासन को जानकारी देने और अनुमति लेने के लिए बाध्य होता है। इसके अलावा यह भी सवाल उठ रहा है कि अलग-अलग स्थानों से जुड़े तीन लोगों ने एक साथ एक ही जमीन खरीदने में इतनी रुचि क्यों दिखाई? परिवार का यह भी आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर परासिया तहसीलदार के पास पहुंचे, तो उन्होंने सुनवाई से ही इनकार कर दिया। एक अन्य बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन ने जांच तो शुरू की, लेकिन जांच का दायरा केवल रजिस्ट्री तक सीमित रखा गया, जबकि परिवार का दावा है कि असली फर्जीवाड़ा बंटवारे और सीमांकन की प्रक्रिया में हुआ है। प्रशासन की जांच में क्या सामने आया?
मामला कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया। छिंदवाड़ा एडीएम एवं जांच अधिकारी धीरेंद्र सिंह को मामले की जांच सौंपी गई। धीरेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि प्रारंभिक जांच में बीएमओ जितेंद्र शाह और तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। उन्होंने बताया कि दोनों को शासकीय अनुमति से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, एसडीएम को नोटिस नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जमीन उनके पिता के नाम खरीदी गई है, इसलिए सीधे तौर पर नोटिस जारी नहीं किया गया। लेकिन यदि जांच में प्रभाव या भूमिका सामने आती है तो आगे कार्रवाई संभव है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी हुआ सक्रिय
यह मामला अब जिला स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। दैनिक भास्कर द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार प्रकाश उइके ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के एक सदस्य को बुलाया गया है, जिनकी बाइट (प्रतिक्रिया) भी रिपोर्ट में शामिल की गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण सीधे तौर पर आदिवासी समाज के शोषण और प्रशासनिक प्रभाव के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। आयोग जल्द ही इस मामले पर उच्च स्तरीय चर्चा कर जांच के आदेश जारी कर सकता है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि यदि आरोप सही पाए गए तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जब जमीन खरीदने वाले दिलीप सिंह की बेटी और वर्तमान एसडीएम जुन्नारदेव से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। वहीं, ग्वालियर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जितेंद्र शाह से संपर्क नहीं हो सका। इधर प्रियंका वालरे के पति और प्रभारी तहसीलदार उमराज वालरे का कहना है कि जमीन खरीदने की पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और वैधानिक तरीके से की गई थी। न्याय की आस में आदिवासी परिवार
फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। परिवार ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और जिला प्रशासन को शिकायत भेजी है। परिवार का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन छल और दबाव के जरिए उनसे छीनी गई है और उन्हें अब भी उम्मीद है कि प्रशासन उन्हें न्याय दिलाएगा।



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क्या आपने खाया है आम का पराठा? स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगे


धौलपुर. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार छा जाती है. आम को फलों का राजा कहा जाता है और इससे बनने वाली विभिन्न रेसिपियां लोगों को खूब पसंद आती हैं. आम का जूस, मैंगो शेक, आमरस, आइसक्रीम और कई तरह की मिठाइयां लगभग हर घर में तैयार की जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी आम का पराठा खाया है? सुनने में यह रेसिपी थोड़ी अनोखी लग सकती है, मगर स्वाद के मामले में यह किसी भी पारंपरिक पराठे से कम नहीं है. आम की प्राकृतिक मिठास, हल्का खट्टापन और मसालों का बेहतरीन संतुलन इसे एक खास स्वाद देता है.

यही कारण है कि जो लोग एक बार इसे चख लेते हैं, वे इसे दोबारा जरूर बनाना चाहते हैं. खास बात यह है कि इस पराठे को बनाने के लिए किसी महंगी या मुश्किल से मिलने वाली सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. रसोई में मौजूद सामान्य मसालों और पके हुए आम की मदद से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. गर्मियों में नाश्ते के लिए यह एक स्वादिष्ट और अलग विकल्प माना जाता है, जिसे बच्चे और बड़े दोनों ही चाव से खाते हैं. धौलपुर की गृहिणी प्रभा शर्मा ने आम का पराठा बनाने की आसान विधि और इसके खास स्वाद के बारे में जानकारी दी.

कम लोग ही बनाते हैं आम का पराठा 

गृहिणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि आलू, मेथी, गोभी और बथुआ के पराठे तो लगभग हर घर में बनाए जाते हैं, लेकिन आम का पराठा अभी भी बहुत कम लोगों की रसोई तक पहुंच पाया है. जबकि यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है. आम के गूदे से तैयार होने वाला यह पराठा गर्मियों में नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसके स्वाद में मिठास और मसालों का अनोखा मेल इसे अन्य पराठों से अलग बनाता है.

ऐसे तैयार करें आम का पराठा

आम का पराठा बनाने के लिए सबसे पहले एक प्याज और हरी मिर्च को बारीक काट लें. इसके बाद अच्छी तरह पके हुए आम का छिलका हटाकर उसका गूदा निकाल लें और उसे मैश कर लें. अब गेहूं के आटे को छानकर उसमें लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक मिला दें.

इसके बाद आटे को पानी की बजाय आम के रस और मैश किए हुए गूदे की मदद से गूंधें. साथ ही इसमें बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी मिला दें. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर सामान्य आटे की तरह मुलायम गूंध लें. आटा तैयार होने के बाद उसे लगभग पांच मिनट तक ढककर रख दें, ताकि सभी स्वाद अच्छी तरह मिल जाएं.

कुछ ही मिनटों में तैयार होगा स्वादिष्ट नाश्ता

अब आटे की लोइयां बनाकर उन्हें पराठे की तरह बेल लें. गर्म तवे पर पराठा डालें और दोनों तरफ घी लगाकर सुनहरा होने तक सेंकें. कुछ ही मिनटों में स्वादिष्ट और सुगंधित आम का पराठा तैयार हो जाएगा. इसे दही, आम के अचार, नींबू के अचार या अपनी पसंद की किसी भी सब्जी के साथ परोसा जा सकता है. गर्मियों में यह पराठा स्वाद के साथ-साथ पोषण भी प्रदान करता है. यदि आप रोजाना के नाश्ते में कुछ नया और अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो आम का पराठा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. घर आने वाले मेहमानों को भी इसका अनोखा स्वाद खूब पसंद आता है.



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बूंदी में ‘शहरी सेवा शिविर अभियान’ कल से: नगर निकाय क्षेत्रों में समस्याओं का वार्डवार होगा त्वरित निस्तारण – Bundi News




बूंदी जिले के शहरी क्षेत्रों के निवासियों की समस्याओं के त्वरित समाधान और जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाने के उद्देश्य से ‘शहरी सेवा शिविर अभियान 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान 12 जून से शुरू होकर 15 जुलाई तक संचालित होगा। जिला कलेक्टर हरफूल सिंह यादव ने बताया कि शिविरों का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। अभियान के दौरान भूमि संबंधी कार्यों, जैसे पट्टे जारी करना, उपविभाजन, भू-उपयोग परिवर्तन, लीज होल्ड से फ्री होल्ड, नामान्तरण, भवन निर्माण स्वीकृति और ब्याज में छूट जैसे मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा जन्म-मृत्यु, विवाह पंजीयन, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस और EWS प्रमाण पत्र जारी करने जैसे कार्य भी इन शिविरों में किए जाएंगे। कई समस्याओं का होगा समाधान
अभियान के तहत शहरों में व्यापक स्तर पर सफाई व्यवस्था, नाली व सीवर लाइन की मरम्मत, सड़कों पर पेंच वर्क और स्ट्रीट लाइट दुरुस्त करने का कार्य किया जाएगा। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों, पार्कों, रैन बसेरों व सामुदायिक केंद्रों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा और निराश्रित पशुओं को पकड़ने की कार्रवाई भी की जाएगी। योजनाओं के आवेदन लेकर दिया जाएगा लाभ
कलेक्टर ने बताया कि शिविरों में विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं के तहत आवेदन प्राप्त कर मौके पर स्वीकृति जारी की जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना, अटल पेंशन योजना, वृद्धावस्था, विधवा व विकलांग पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के आवेदन लेकर पात्र लोगों को लाभान्वित किया जाएगा। यू.डी. टैक्स जमा करने की सुगम व्यवस्था भी शिविर स्थल पर उपलब्ध रहेगी। निर्धारित कार्यक्रमानुसार 12 जून को नगर परिषद बूंदी के वार्ड संख्या 1, 2, 3 के लिए नगर परिषद कार्यालय में शिविर आयोजित होंगे। इसी तरह 12 जून को नगर पालिका लाखेरी के वार्ड संख्या एक के लिए नगरपालिका सभाभवन, हिंडोली नगर पालिका के वार्ड संख्या एक के लिए नगरपालिका कार्यालय हिंडोली और केशवरायपाटन नगरपालिका के वार्ड संख्या एक के लिए नगरपालिका कार्यालय में शिविर लगेंगे।



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वर्ल्ड अपडेट्स: अल्बानिया में ट्रम्प के दामाद के रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरे




अल्बानिया की राजधानी तिराना में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर के लग्जरी रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। करीब 55 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का विरोध पर्यावरण की चिंता की वजह से हो रहा है। दरअसल, यह रिसॉर्ट एक संरक्षित तटीय इलाके के पास बनाया जाना है। यह क्षेत्र फ्लेमिंगो, सील और समुद्री कछुओं जैसे वन्यजीवों का आवास माना जाता है। प्रदर्शनकारियों ने ‘अल्बानिया बिकाऊ नहीं है’ जैसे पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई और विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री एडी रामा ने कहा है कि प्रोजेक्ट तय योजना के अनुसार आगे बढ़ेगा और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… चीन में जोरदार धमाका; 7 लोगों की मौत, 17 घायल चीन के गुआनशी क्षेत्र में हुए एक जोरदार धमाके में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 17 अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और घायलों की हालत खतरे से बाहर है। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गैस पाइपलाइन को हादसे की वजह मानने से इनकार किया है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि धमाका किस वजह से हुआ। फिलहाल धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। घटना के बाद इलाके में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।



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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौहत्या पर सख्त कानून मांगा: कासगंज में ‘गविष्ठि गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ के दौरान की मांग, पूर्व सांसद ने किया स्वागत – Kasganj News




कासगंज में बुधवार को उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का आगमन हुआ। वे अपनी 81 दिवसीय ‘गविष्ठि गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ के तहत पहली बार जनपद कासगंज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए कठोर कानून बनाने और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की। शंकराचार्य का स्वागत उर्मिला कोल्ड स्टोर परिसर में पूर्व सांसद देवेंद्र सिंह यादव सहित सैकड़ों गौभक्तों, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने किया। इस अवसर पर पुष्पवर्षा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य आयोजन हुआ।
यात्रा का मूल मंत्र ‘अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ’ है, जिसका अर्थ है ‘मैं गौ के लिए वृत्र का नाश करता हूँ’। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र और संस्कृति की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने जोर दिया कि गौमाता की सुरक्षा के बिना सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं रह सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धर्मयुद्ध किसी प्रकार की हिंसा का नहीं, बल्कि कानून, जनजागरण और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से गौहत्या पर रोक लगाने का अभियान है। शंकराचार्य ने केंद्र और राज्य सरकारों से गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने हेतु कठोर कानून बनाने की मांग दोहराई और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘गौमाता की जय’ के जयघोषों से गूंज उठा। 81 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा देशभर में गौ-रक्षा के प्रति जागरूकता फैलाएगी। कासगंज में शंकराचार्य का यह प्रथम आगमन जनपद के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया।



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