Friday, May 15, 2026
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उत्तर भारत में 48° वाली कातिल गर्मी, दक्षिण में तबाही वाला तूफान, IMD का अलर्ट


Today Weather Live: मई का महीना इस बार मौसम का सबसे खतरनाक चेहरा दिखा रहा है. उत्तर भारत राहत भरी बारिश के बाद एक बार फिर सूरज मानो आग उगल रहा है. राजस्थान के बाड़मेर में पारा 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में लू के थपेड़े लोगों की हालत खराब कर रहे हैं. सड़कें दोपहर में सुनसान दिखने लगी हैं. लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं. दूसरी तरफ दक्षिण भारत में हालात बिल्कुल उलट हैं. बंगाल की खाड़ी में बन रहे लो प्रेशर और साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तेज तूफान और भारी बारिश का खतरा बढ़ा दिया है. यानी देश इस वक्त मौसम के डबल अटैक से जूझ रहा है. कहीं आसमान से आग बरस रही है तो कहीं बादल तबाही मचाने की तैयारी में हैं. मौसम विभाग ने अगले 36 घंटे को बेहद अहम बताया है और कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है. तेज हवाएं, ओलावृष्टि, बिजली गिरने और भारी बारिश की चेतावनी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है.

दिल्ली से लेकर बिहार और पंजाब तक मौसम तेजी से करवट बदल रहा है. कई राज्यों में दिन में तेज गर्मी पड़ रही है तो शाम होते-होते आंधी और बारिश राहत दे रही है. मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है. वहीं स्काईमेट के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में सक्रियता बढ़ने से दक्षिण भारत में अगले कुछ दिन बेहद खराब मौसम रह सकता है. तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश का अलर्ट है. उधर महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हीटवेव का असर जारी रहेगा. पूर्वोत्तर भारत में प्री-मानसून एक्टिविटी के चलते मौसम सुहावना बना हुआ है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का यह चरम रूप और खतरनाक हो सकता है. यही वजह है कि लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
दक्षिण भारत में मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक रूप लेता दिख रहा है. (PTI)
  • देश के कई हिस्सों में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों के लिए परेशानी और राहत दोनों लेकर आया है. जहां उत्तर भारत में आंधी और हल्की बारिश के कारण कुछ घंटों की राहत मिल रही है, वहीं तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है. दूसरी तरफ दक्षिण भारत में बारिश और तूफान के कारण जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है. मौसम विभाग लगातार राज्यों को सतर्क रहने की चेतावनी दे रहा है.
  • मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से मौसम की यह चरम स्थिति अब ज्यादा खतरनाक होती जा रही है. पहले जहां मई में सिर्फ गर्मी का असर दिखता था, वहीं अब तूफान, ओलावृष्टि और अचानक भारी बारिश जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं. आने वाले दिनों में लोगों को मौसम से जुड़ी हर चेतावनी पर नजर रखने की जरूरत होगी.

दिल्ली-एनसीआर में गर्मी और बारिश का मिलाजुला असर

दिल्ली-एनसीआर में अगले दो दिनों तक मौसम तेजी से बदल सकता है. दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण तापमान 41 डिग्री तक पहुंच सकता है. हालांकि शाम के समय हल्के बादल और बूंदाबांदी राहत दे सकते हैं. मौसम विभाग ने तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है. दिल्ली की हवा फिलहाल मध्यम श्रेणी में बनी हुई है और AQI करीब 150 दर्ज किया गया है. वीकेंड के बाद बारिश कम होते ही गर्मी और बढ़ सकती है.

यूपी में आंधी-बारिश के बीच बढ़ेगी उमस

उत्तर प्रदेश में अगले दो दिन मौसम कुछ नरम रह सकता है. पूर्वी यूपी में बादलों की आवाजाही और कई जगहों पर बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने और बिजली गिरने की चेतावनी दी है. लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी में तापमान 40 डिग्री के पार जा सकता है. पश्चिमी यूपी में गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाएंगी जबकि पूर्वी हिस्सों में उमस बढ़ सकती है.

बिहार में ठनका और तेज आंधी का खतरा

बिहार में अगले पांच दिन मौसम पूरी तरह बदला हुआ रह सकता है. पटना, गया, बांका, जमुई और किशनगंज समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने ठनका गिरने की भी चेतावनी दी है. हालांकि कुछ जिलों में तापमान अभी भी 41 डिग्री तक पहुंच रहा है. ग्रामीण इलाकों में बिजली और पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है.

राजस्थान में 48 डिग्री वाली जानलेवा लू

राजस्थान इस समय सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहा है. बाड़मेर में तापमान 48 डिग्री के पार पहुंच गया है. जयपुर, बीकानेर, जोधपुर और श्रीगंगानगर में लू जैसे हालात बने हुए हैं. हालांकि कुछ इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से हल्की बारिश हुई है. चुरू में 30 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है.

मध्य प्रदेश में सूरज उगल रहा आग

मध्य प्रदेश में भी गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है. दिन के समय तेज धूप लोगों की परेशानी बढ़ाएगी. हालांकि कुछ हिस्सों में शाम को बादलों की हल्की आवाजाही देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिन हीटवेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है.

राजस्थान इस समय सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहा है.(सांकेतिक फोटो)

पंजाब-हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज

  • हरियाणा में पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ दिखाई दे रहा है. हिसार, जींद, करनाल और कैथल समेत कई जिलों में तेज आंधी और बारिश हुई है. मौसम विभाग ने रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और पंचकूला समेत कई जिलों में 60 किलोमीटर की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट जारी किया है. बिजली गिरने और ओलावृष्टि का भी खतरा बना हुआ है.
  • पंजाब में भी मौसम ने राहत दी है. अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और मोहाली समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी.

उत्तराखंड-हिमाचल में बारिश और बर्फबारी का असर

  • उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में मौसम काफी सुहावना बना हुआ है. उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है. 18 मई तक कई इलाकों में मौसम बदला हुआ रह सकता है. मैदानी हिस्सों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी.
  • हिमाचल प्रदेश में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दे रहा है. शिमला, कुल्लू और मंडी में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है. रोहतांग और बारालाचा दर्रे के आसपास बर्फबारी होने से मौसम काफी ठंडा हो गया है. पर्यटक इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है.

गुजरात-महाराष्ट्र में उमस करेगी परेशान

गुजरात और महाराष्ट्र में गर्मी के साथ उमस लोगों को परेशान करेगी. अहमदाबाद और सूरत में तेज गर्म हवाएं चल सकती हैं. मुंबई और पुणे में नमी बढ़ने से चिपचिपी गर्मी का असर रहेगा. विदर्भ क्षेत्र में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच सकता है. मौसम विभाग ने हीटवेव को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है.

पूर्वोत्तर राज्यों में प्री-मानसून की जोरदार एंट्री

असम, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफान और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. प्री-मानसून गतिविधियों के कारण यहां गर्मी से राहत बनी हुई है. हालांकि कुछ इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है.

दक्षिण भारत में तूफान और भारी बारिश का खतरा

दक्षिण भारत में मौसम सबसे ज्यादा खतरनाक रूप लेता दिख रहा है. बंगाल की खाड़ी में बन रहे लो प्रेशर के कारण केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में तेज तूफान और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. चेन्नई, तंजावुर और नागपट्टिनम समेत कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है. कई जगहों पर बिजली गिरने और तेज हवाओं से नुकसान की आशंका जताई गई है.

उत्तर भारत में सबसे ज्यादा गर्मी कहां पड़ रही है?

राजस्थान इस समय सबसे ज्यादा गर्मी झेल रहा है. बाड़मेर में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जयपुर, बीकानेर और जोधपुर में भी लू जैसे हालात बने हुए हैं. मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है.

दक्षिण भारत में मौसम क्यों खराब हो रहा है?

बंगाल की खाड़ी में बन रहे लो प्रेशर एरिया और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से दक्षिण भारत में मौसम खराब हो रहा है. केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में भारी बारिश, तूफान और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है.

दिल्ली-एनसीआर में अगले दो दिन मौसम कैसा रहेगा?

दिल्ली-एनसीआर में दिन में तेज गर्मी रहेगी और तापमान 41 डिग्री तक पहुंच सकता है. हालांकि शाम के समय हल्की बारिश और तेज हवाएं राहत दे सकती हैं. मौसम विभाग ने गरज-चमक की चेतावनी भी दी है.

क्या बिहार और यूपी में बारिश होगी?

हां, बिहार और यूपी के कई हिस्सों में अगले दो दिन तक बारिश और आंधी की संभावना है. मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है. इससे कुछ समय के लिए गर्मी से राहत मिल सकती है.

मौसम विभाग ने लोगों को क्या सलाह दी है?

मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में धूप से बचने, ज्यादा पानी पीने और मौसम की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी है. आंधी और बिजली गिरने के दौरान खुले मैदानों से दूर रहने को कहा गया है.



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मंत्रीजी ने भौकाल दिखाकर शहर जाम किया: राजभर के लिए सारे नेता दो मुंहा सांप; च्युइंग गम के रस में DM साहब – Uttar Pradesh News



लखनऊ5 मिनट पहले

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3 की उम्र में शुरू किया डांस, 9 साल में जीता स्कॉलरशिप, 1 गाने ने बनााया स्टार


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बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस का डांस से रिश्ता महज 3 साल की उम्र में शुरू हो गया था. उन्होंने 9 साल की उम्र में कथक के लिए स्कॉलरशिप जीती और करियर की शुरुआत माइक्रोबायोलॉजिस्ट बनने के इरादे से की थी. 1984 में फिल्म ‘अबोध’ से डेब्यू के बाद उन्हें 1988 की फिल्म ‘तेजाब’ के गाने ने सुपरस्टार बना दिया. 90 के दशक में ‘दिल’, ‘बेटा’ और ‘हम आपके हैं कौन’ जैसी फिल्मों से उन्होंने इंडस्ट्री पर राज किया. उन्होंने शादी के बाद ब्रेक लेने के बावजूद ‘आजा नचले’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों से शानदार वापसी की. आज भी उनकी अदाकारी और डांस का जादू बरकरार है.

नई दिल्ली: जब भी बॉलीवुड की ‘धक धक गर्ल’ का जिक्र होता है, तो आंखों के सामने वही प्यारी सी मुस्कान और शानदार डांसिंग स्टाइल आ जाता है. हम बात कर रहे हैं माधुरी दीक्षित की, जिन्होंने अपनी अदाकारी और डांस से दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि माधुरी के इस हुनर की नींव उनके बचपन में ही पड़ गई थी?

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माधुरी दीक्षित का डांस से नाता तब जुड़ा जब वह महज 3 साल की थीं. छोटी सी उम्र से ही उन्होंने ठुमकना शुरू कर दिया था. उनके भीतर डांस को लेकर इतना जुनून था कि उन्होंने बहुत ही कम उम्र में कथक सीखना शुरू किया. उनकी मेहनत का फल उन्हें तब मिला जब 9 साल की उम्र में उन्हें पहली बार डांस के लिए स्कॉलरशिप मिली.

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15 मई 1967 को मुंबई में जन्मी माधुरी बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ कल्चरल एक्टिविटीज में बहुत आगे रहती थीं. दिलचस्प बात यह है कि वह हमेशा से एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थीं. अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजिस्ट बनने के लिए एडमिशन लिया था, लेकिन शायद किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था.

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माधुरी का फिल्मी सफर 1984 में राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘अबोध’ से शुरू हुआ. हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा धमाका नहीं कर पाई, लेकिन फिल्म क्रिटिक्स ने माधुरी की एक्टिंग और उनकी सादगी को खूब सराहा. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, पर उस एक बड़ी सफलता का इंतजार खत्म नहीं हो रहा था.

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साल 1988 में आई फिल्म ‘तेजाब’ माधुरी के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस फिल्म के गाने ‘एक दो तीन’ में मोहिनी बनकर उन्होंने जो डांस किया, उसने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. इसके बाद तो जैसे माधुरी की कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा और वह 90 के दशक की सबसे बड़ी फीमेल स्टार बन गईं.

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90 के दशक में माधुरी ने ‘दिल’, ‘बेटा’, ‘हम आपके हैं कौन’ और ‘दिल तो पागल है’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं. इन फिल्मों के लिए उन्हें कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी मिले. चाहे इमोशनल सीन हो या फिर जबरदस्त डांस नंबर, माधुरी हर मामले में अव्वल रहीं. उनके डांस स्टेप्स को लोग आज भी कॉपी करने की कोशिश करते हैं.

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1999 में जब माधुरी ने डॉ. श्रीराम नेने से शादी की, तो उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बना ली और अमेरिका शिफ्ट हो गईं. फैन्स को लगा कि अब शायद ही ‘मोहिनी’ दोबारा पर्दे पर दिखेगी, लेकिन 2007 में उन्होंने फिल्म ‘आजा नचले’ से शानदार वापसी की. इसके बाद ‘देवदास’ में उनके चंद्रमुखी के रोल को तो कभी भुलाया ही नहीं जा सकता.

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आज भी माधुरी दीक्षित उतनी ही एक्टिव हैं. वे न केवल फिल्मों में मजबूत भूमिकाएं निभा रही हैं, बल्कि छोटे पर्दे पर रियलिटी शोज में बतौर जज भी नजर आती हैं. अपनी प्रोडक्शन कंपनी और डिजिटल वर्ल्ड के जरिए वे आज भी अपने फैन्स से जुड़ी हुई हैं. वाकई, उनका यह सफर हर कलाकार के लिए एक प्रेरणा है.

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NTA से CBSE तक सभी एजेंसियां एक्टिव, NEET परीक्षा को लेकर बना नया ब्लूप्रिंट


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NTA से CBSE तक सभी एजेंसियां एक्टिव, NEET परीक्षा को लेकर आधी रात बैठक

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सरकार के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, जल्द से जल्द NEET परीक्षा को दोबारा आयोजित करना और दूसरी, परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाना, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके और परीक्षा निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो.

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नीट परीक्षा की नई तारीख का ऐलान जल्द किए जाने की उम्मीद है. (पीटीआई)

नई दिल्ली. नए सिरे से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)- स्नातक आयोजित करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार देर रात यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई.

इस बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी, सचिव (विद्यालय शिक्षा) संजय कुमार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह, सीबीएसई के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के आयुक्तों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

यह बैठक एनटीए द्वारा परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों के बाद तीन मई की परीक्षा को रद्द करने की घोषणा किये जाने के बाद हुई है. बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दोबारा होने वाली NEET परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने की रणनीति तैयार करना था. इसे लेकर एजुकेशनिस्ट और सीनियर ब्यूरोक्रेट्स के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.

इस दौरान उन सभी कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया गया, जहां सुधार कर पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय चाहता है कि इस बार परीक्षा में किसी भी तरह की खामी न रहे. खासतौर पर सुरक्षा व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए हर स्तर पर तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है.

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द कर दी थी. राजस्थान विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें अभ्यर्थी और उनके परिजन शामिल हैं.

सीबीआई ने बीते 13 मई को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से तीन जयपुर के हैं. गिरफ्तार आरोपियों में जयपुर के मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल शामिल हैं, जबकि अन्य दो आरोपी गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार हैं. टीम मंगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल के घर पहुंची. विकास बिवाल भी इसी परिवार से हैं. स्थानीय पुलिस सूत्रों ने बताया कि टीम ने परिजनों के बयान दर्ज किए.

About the Author

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रवि सिंह Special Correspondent

रवि सिंह News 18 India में कार्यरत हैं. पिछले 20 वर्षों से इलेक्ट्रानिक मीडिया में सक्रिय हैं. उनकी मुख्य रूप से रेलवे,स्वास्थ्य,शिक्षा मंत्रालय,VHP और राजनीतिक गतिविधियों पर पकड़ है. अयोध्या में मंदिर की कवरेज…और पढ़ें



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बिना डॉक्टर और वेंटिलेटर के चल रहा था अस्पताल: उपभोक्ता आयोग का आदेश-प्रसूता की मौत पर देना होगा 3.12 लाख रुपए का हर्जाना – Gwalior News




ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इलाज में घोर लापरवाही बरतने के मामले में न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल पर भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने पाया कि अस्पताल में न तो विशेषज्ञ डॉक्टर थे और न ही वेंटिलेटर जैसे जीवन रक्षक उपकरण। उचित उपचार के अभाव में एक प्रसूता की मौत को आयोग ने ‘सेवा में गंभीर कमी’ माना है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन पर 3 लाख 12 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। क्या है पूरा मामला?
डी.डी. नगर निवासी उदयभान शर्मा ने पत्नी अर्चना शर्मा को 30 सितंबर 2023 को प्रसव (डिलीवरी) के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया था। हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद अगले दिन सिजेरियन से डिलीवरी हुई, लेकिन उसके बाद अर्चना की तबीयत बिगड़ने लगी। अर्चना का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 80 तक पहुंच गया और उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगी। परिजन के बार-बार गिड़गिड़ाने के बावजूद अस्पताल ने न तो ऑक्सीजन दी और न ही समय पर उसे बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। जब स्थिति हाथ से निकल गई, तब मरीज को कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान अर्चना की मृत्यु हो गई। जांच में खुले अस्पताल के काले कारनामे
आयोग की सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन के कई चौंकाने वाले झूठ पकड़े गए हैं। अस्पताल के बाहर डॉ. रेणू शर्मा के नाम का बोर्ड लगा था, लेकिन जांच में पता चला कि वे वहां मरीजों को देखती ही नहीं थीं। अस्पताल बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहा था। अस्पताल में वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम, ऑपरेशन थिएटर (OT) के उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आयोग का आदेश: ऐसे देना होगा हर्जाना
आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कुल 3 लाख 12 हजार रुपए की क्षतिपूर्ति राशि तय की है जिसमें तीन लाख रुपए आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए देने होंगे। जबकि 10 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति, 02 हजार रुपए वाद व्यय (कानूनी खर्च) देने होंगे। यह पूरा हर्जाना 45 दिन में देना होगा। यदि समय पर हर्जाना नहीं दिया जाता है तो 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग की तीखी टिप्पणी
आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि मरीज की स्थिति बिगड़ते ही उसे तुरंत उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर कर दिया जाता, तो शायद महिला की जान बच सकती थी। बिना विशेषज्ञ और बुनियादी सुविधाओं के अस्पताल चलाना मरीजों की जान से खिलवाड़ है।



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उदयपुर में कार मिनी ट्रक में घुसी, दो की मौत: अंबेरी पुलिया के पास रात को हुआ हादसा, मृतक झालावाड़ के – Udaipur News




उदयपुर-गोगुंदा रोड पर शहर से सटे अंबेरी पुलिया पर एक मिनी ट्रक के पीछे एक कार घुस गई। हादसे में दो जनों की दर्दनाक मौत हो गई। पिंडवाड़ा हाईवे पर सुखेर थाना क्षेत्र के अंबेरी पुलिया के पास रात करीब सवा दस बजे 407 मिनी ट्रक के पीछे एक तेज रफ्तार कार घुस गई और भीषण हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी ट्रक में टेंट के सामान थे और बेरियर पर जैसे ही उसने ​ब्रेक लगाया और पीछे से आ रही कार उसमें घुस गई। सूचना पर सुखेर थानाधिकारी भरत योगी मौके पर पहुंचे और इस बीच 108 एंबुलेंस भी वहां पहुंच गई। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से दोनों शवों को कड़ी मशक्कत से कार के अंदर से बाहर निकाला। पुलिस ने दोनों शवों को जिला अस्पताल की मॉच्युरी में रखवाया और वहीं वहीं गंभीर घायल एक युवक को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। हादसे के वक्त मिनी ट्रक का चालक मौके से फरार हो गया। सुखेर थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि दोनों मृतकों के शव मॉच्युरी में मोर्चरी रखवा दिए है और उनकी शिनाख्त अभी नहीं हुई है। दोनों गाड़िया पुलिस ने जब्त कर ली है। कार सवार लोग झालावाड़ के रहने वाले है। इनपुट : गोपाल लोढ़ा



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क्या था 1970 का वो ‘ग्रहण’, सिंगापुर PM अब तक खौफ में, फिर लौटेगा वह दौर?


नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Lawrence Wong) का बयान पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. उनका कहना है कि अभी दुनिया ने आर्थिक संकट का सबसे बुरा दौर देखा ही नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है और इसका असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है. ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने लगी है, ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. इसी दौरान उन्होंने 1970 के दशक के उस ऐतिहासिक आर्थिक ग्रहण का जिक्र किया जिसे दुनिया आज भी डर के साथ याद करती है.

लॉरेंस वोंग ने खास तौर पर स्टैगफ्लेशन शब्द का इस्तेमाल किया. यह अर्थशास्त्र का ऐसा शब्द है जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है. सामान्य तौर पर जब महंगाई बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. लेकिन स्टैगफ्लेशन बिल्कुल उल्टा होता है. इसमें अर्थव्यवस्था रुक जाती है, बेरोजगारी बढ़ती जाती है और दूसरी तरफ जरूरी सामानों के दाम तेजी से ऊपर जाते रहते हैं. यानी लोगों की आमदनी घटती है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता रहता है. यही वजह है कि इसे आर्थिक दुनिया का सबसे बड़ा डर माना जाता है.

1970 में कैसे शुरू हुआ था आर्थिक संकट?

1970 के दशक में दुनिया ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्टैगफ्लेशन का सामना किया था. इसकी शुरुआत 1973 के अरब इजरायल युद्ध के बाद हुई. उस समय तेल उत्पादक अरब देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को तेल सप्लाई रोक दी थी क्योंकि वे इजरायल का समर्थन कर रहे थे. देखते ही देखते कच्चे तेल की कीमतें 300 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं. उस दौर में दुनिया की लगभग हर फैक्ट्री, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंडस्ट्री तेल पर निर्भर थी. जैसे ही तेल महंगा हुआ, हर चीज की लागत बढ़ गई. कंपनियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ गया, रोजगार खत्म होने लगे और महंगाई बेकाबू हो गई.

सिर्फ तेल नहीं, डॉलर संकट ने भी बढ़ाई थी तबाही

केवल तेल संकट ही इस आर्थिक तबाही की वजह नहीं था. उसी समय अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लिया जिसने पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को हिला दिया. 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) ने डॉलर का सोने से संबंध खत्म कर दिया. इससे पहले पूरी दुनिया की करेंसी अप्रत्यक्ष रूप से सोने से जुड़ी हुई थी. जैसे ही डॉलर गोल्ड स्टैंडर्ड से अलग हुआ, दुनियाभर की करेंसी में भारी अस्थिरता आ गई. डॉलर कमजोर होने लगा और आयात महंगा होता चला गया. इसके साथ ही कई देशों की सरकारों ने बेरोजगारी कम करने के लिए बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा डाल दिया. नतीजा यह हुआ कि महंगाई और तेज हो गई लेकिन रोजगार नहीं बढ़ा.

खेती और सप्लाई चेन संकट ने बिगाड़े हालात

उसी दौर में खेती और सप्लाई चेन संकट ने हालात और खराब कर दिए. कई देशों में खराब मौसम और फसल बर्बाद होने की वजह से अनाज की कमी हो गई. खाने पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगे. तेल पहले से महंगा था और अब खाद्य संकट ने आम लोगों की जिंदगी और मुश्किल बना दी. अमेरिका समेत कई देशों में लोग दूध, ब्रेड और पेट्रोल जैसी बेसिक चीजों के लिए परेशान होने लगे थे.

शेयर बाजार से लेकर नौकरियों तक सब पर पड़ा असर

1970 के दशक का आर्थिक संकट केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहा. शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. अमेरिकी शेयर बाजार 1973 से 1974 के बीच लगभग 45 प्रतिशत तक टूट गया था. निवेशकों का भरोसा खत्म होने लगा था. बैंकिंग सिस्टम दबाव में आ गया था और कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने लगी थीं. मध्यम वर्ग की खरीदने की ताकत तेजी से खत्म हो रही थी क्योंकि सैलरी उतनी नहीं बढ़ रही थी जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही थी.

दुनिया को संकट से बाहर आने में लग गए 10 साल

दुनिया को इस संकट से बाहर निकलने में करीब एक दशक लग गया. अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया था. कई जगहों पर ब्याज दरें 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं. इसका असर यह हुआ कि लोन लेना बेहद महंगा हो गया. बिजनेस ठप पड़ने लगे, घर खरीदना मुश्किल हो गया और लाखों लोग बेरोजगार हो गए. 1980 के दशक के मध्य तक जाकर दुनिया धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट पाई.

आज का संकट क्यों ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है?

अब लॉरेंस वोंग का डर इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आज की दुनिया 1970 के मुकाबले कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी हुई है. उस समय सप्लाई चेन सीमित थीं लेकिन आज पूरी दुनिया एक दूसरे पर निर्भर है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो एशिया के देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि चीन, भारत, जापान और सिंगापुर जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. तेल सप्लाई रुकने का मतलब केवल पेट्रोल और डीजल महंगा होना नहीं है बल्कि फैक्ट्री प्रोडक्शन, एयरलाइन, शिपिंग, बिजली उत्पादन और खाद्य सप्लाई तक सब प्रभावित होना है.

अगर फिर आया स्टैगफ्लेशन तो क्या होगा?

अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहते हैं तो दुनिया फिर स्टैगफ्लेशन जैसे दौर में पहुंच सकती है. इसका मतलब होगा कि लोगों की नौकरियां जाएंगी, महंगाई तेजी से बढ़ेगी और जरूरी सामानों की किल्लत शुरू हो सकती है. विकासशील देशों के लिए यह संकट और ज्यादा खतरनाक होगा क्योंकि उन पर पहले से भारी विदेशी कर्ज है. अगर डॉलर मजबूत हुआ और तेल महंगा बना रहा तो कई देशों के विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं. श्रीलंका जैसा आर्थिक संकट दूसरे देशों में भी देखने को मिल सकता है.

सरकारों के लिए क्यों मुश्किल होता है इससे लड़ना?

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टैगफ्लेशन से लड़ना किसी भी सरकार के लिए सबसे मुश्किल चुनौती होती है. अगर सरकार महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाती है तो बिजनेस और रोजगार पर दबाव बढ़ जाता है. दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बाजार में ज्यादा पैसा डाला जाए तो महंगाई और बढ़ जाती है. यही वजह है कि 1970 का संकट आर्थिक इतिहास का सबसे जटिल दौर माना जाता है.

लॉरेंस वोंग की चेतावनी का मतलब क्या है?

सिंगापुर के प्रधानमंत्री का यह बयान केवल चेतावनी नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव केवल युद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है. यह धीरे-धीरे वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है. अगर ऊर्जा सप्लाई, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ता रहा तो दुनिया को एक बार फिर उसी आर्थिक अंधेरे का सामना करना पड़ सकता है जिसने 1970 के दशक में पूरी वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया था.



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ललितपुर के एडीएम अंकुर श्रीवास्तव का तबादला: गाजीपुर में तैनात दिनेश कुमार को एडीएम नियुक्त किया गया – Lalitpur News




ललितपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अंकुर श्रीवास्तव का शासन द्वारा गुरुवार शाम तबादला कर दिया गया। उनका स्थानांतरण मुरादाबाद जिले में किया गया है। वहीं, गाजीपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार को ललितपुर का नया अपर जिलाधिकारी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अंकुर श्रीवास्तव जुलाई 2023 में ललितपुर में तैनात किए गए थे। उन्होंने जिले में करीब 35 महीने तक अपनी सेवाएं दीं। शासन द्वारा उनका स्थानांतरण एक ही जिले में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के कारण किया गया है।



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Video: सैंडविच से बोर हो गए बच्चे? तो नाश्ते में बनाकर दें ब्रेड से ये 3 रेसिपी, कम मेहनत में मिलेगा लाजवाब टेस्ट


 

इस वीडियो में मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने ब्रेड की 3 बेहतरीन ब्रेकफास्ट रेसिपी शेयर की है. यदि आपके बच्चे नाश्ते में रोज सैंडविच खाकर बोर हो गए हैं, या आपको अपनी मॉर्निंग शिफ्ट के लिए जल्दी से टिफिन पैक करना है तो ये रेसिपीज आपके परेशानी का हल साबित हो सकते हैं. ये तीनों रेसिपी पेट भरने वाली और बनाने में आसान हैं. इनमें ब्रेड उपमा, ब्रेड कटलेट और चीज़ बर्स्ट ब्रेड पिज़्ज़ा शामिल हैं. आप इनमें से किसी भी रेसिपी को शाम के नाश्ते के रूप में भी बना सकते हैं.

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मंत्री शैलेंद्र साइकिल से जाएंगे दफ्तर: कार्यकर्ताओं से भी की अपील, कहा- हफ्ते में दो दिन साइकिल चलाएं भाजपा नेता-कार्यकर्ता – Munger News




बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से सप्ताह में दो दिन साइकिल का उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने गुरुवार शाम भागलपुर से पटना जाते समय मुंगेर सर्किट हाउस में यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए आवश्यक है। मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अंचल, थाना, प्रखंड या बाजार जाते समय बाइक और कार के साथ-साथ साइकिल का भी उपयोग करें। आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे
कुमार शैलेंद्र ने बताया कि वह स्वयं भी सप्ताह में दो दिन अपने विधायक आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे। उनका उद्देश्य आम लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कम ईंधन खपत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा
इस दौरान मंत्री ने भागलपुर के विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुल पर लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसकी निगरानी इंजीनियरों की टीम कर रही है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अगले 15 दिनों के भीतर इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा। मंत्री ने दावा किया कि यह देश का पहला अत्याधुनिक बेली ब्रिज होगा, जिसकी संरचना 35 वर्षों तक सुरक्षित रहने की गारंटी के साथ बनाई जा रही है। मंत्री ने बिहार में सड़क निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विभाग ने सभी कमिश्नरी में इंजीनियरों की तैनाती की है, जो सड़क परियोजनाओं की पूरी रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि सड़क कब बनेगी, कितनी लागत आएगी और उसकी जीवन अवधि कितनी होगी, इसकी विस्तृत जानकारी विभागीय कार्यालय से उपलब्ध कराई जाएगी।



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