देश में मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को नार्को कॉ-ऑर्डिनेशन सेंटर (एन-कॉर्ड) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में अगले तीन वर्षों में राज्यों को ड्रग्स मुक्त बनाने के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध तीन वर्षीय कार्ययोजना का भी विमोचन किया गया। बैठक में तय किया गया कि ड्रग्स तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। तस्करों के नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की जब्ती तथा वित्तीय लेन-देन की गहन जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए कहा कि इसका नेतृत्व ऐसे अधिकारी के हाथ में होना चाहिए, जो पूर्णकालिक रूप से इस जिम्मेदारी का निर्वहन करे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार राज्यों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। बैठक में एनडीपीएस मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए आवश्यकतानुसार विशेष अदालतें स्थापित करने, नशा मुक्ति केंद्रों को सुदृढ़ बनाने तथा स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। साथ ही अफीम और अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती को पूरी तरह समाप्त करने के लिए राज्यों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। अमित शाह ने कहा कि जिला स्तर पर आयोजित होने वाली एन-कॉर्ड बैठकों में केवल औपचारिकता न निभाई जाए, बल्कि ठोस निर्णय लेकर उनकी नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने राजस्थान में ड्रग्स के खिलाफ चलाए गए अभियानों और अवैध एमडी फैक्ट्रियों पर की गई कार्रवाई की सराहना करते हुए सभी राज्यों से समन्वित और परिणाम आधारित अभियान चलाने का आह्वान किया।
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तीन साल में ड्रग्स मुक्त राज्यों का लक्ष्य: अमित शाह ने जारी की राष्ट्रीय-कार्ययोजना, तस्करी रोकने, तस्करों की संपत्ति जब्त करने, विशेष अदालतें स्थापित करने के निर्देश – Jaipur News
फर्जी मेडिकल बिल दिखा कर लाखों के इंश्योरेंस क्लेम लिए: गोरखपुर में गैंग के 2 आरोपी अरेस्ट, एजेंटों से जुटाते थे जानकारी – Gorakhpur News
गोरखपुर में फर्जी क्लेम कर हेल्थ इंश्योरेंस की रकम हड़पने वाले गैंग के दो अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों गैंगेस्टर एक्ट के तहत वांटेड थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह के सरगना एजेंटों के माध्यम से इंश्योरेंस कराने वाले लोगों का डिटेल निकलवाते थे। फिर उनके नाम से हॉस्पिटल में फर्जी एडमिट, मेडिकल रिपोर्ट और फर्जी डिस्चार्ज बिल कंपनियों को दिखा कर लाखों रुपए क्लेम कर लेते थे। यह पूरा गैंग एक संगठित नेटवर्क की तरह चलता था। जिसका संचालन गोरखपुर और बस्ती स्थित डिसेंट हॉस्पिटल से होता था। इस मामले में पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। रामगढ़ ताल थाने की पुलिस अन्य सदस्यों की तलाश और आगे की जांच में जुटी है। जानिए पूरा मामला…
पुलिस के अनुसार गिरोह का सरगना विकास मणि त्रिपाठी उर्फ प्रवीण त्रिपाठी है, जिसने अपने सहयोगियों शमशुल कमर उर्फ सोनू खान, अफजल अंसारी, ताहिर खान, राकेश कुमार ओझा, ऋषभ सिंह, इन्द्रेश यादव, अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा और अमन यादव उर्फ गौरव यादव के साथ मिलकर संगठित नेटवर्क तैयार किया था। जिसका उद्देश्य फर्जी बीमा दावों के जरिए आर्थिक लाभ कमाना था। जांच में सामने आया कि गिरोह हेल्थ इंश्योरेंस एजेंटों के माध्यम से बीमाधारकों की जानकारी जुटाता था। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराए बिना ही इलाज के नाम पर फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड, बिल और डिस्चार्ज पेपर तैयार कर बीमा कंपनियों से क्लेम पास कराया जाता था। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क का संचालन गोरखपुर और बस्ती स्थित डिसेंट हॉस्पिटल के माध्यम से किया जा रहा था। बजाज आलियांज की शिकायत से खुलासा हुआ
मामले का खुलासा तब हुआ जब बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के ब्रांच ऑपरेटर और सर्विस मैनेजर अनूप अग्रवाल ने रामगढ़ताल थाने में शिकायत दर्ज कराई। कंपनी की इंटरनल जांच में पाया गया कि बीमा करवाने वाले सत्यवीर के नाम पर एपेक्स हॉस्पिटल और डिसेंट हॉस्पिटल से इलाज का क्लेम लिया गया, जबकि सत्यवीर ने लिखित रूप से बताया कि वह कभी इन अस्पतालों में भर्ती ही नहीं हुए। पता चला कि बीमाधारक के नाम से उसकी जानकारी और सहमति के बिना फर्जी बैंक खाता खोलकर करीब 1.80 लाख रुपये का क्लेम लिया गया। इसके बाद रामगढ़ताल थाने में साल 2025 में धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज किया गया। डॉक्टर की फर्जी सिग्नेचर का इस्तेमाल किया
पुलिस ने जब जांच शुरू किया तो एक और मामला सामने आया, जिसमें डॉ. अजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके नाम और सिग्नेचर का दुरुपयोग कर कई बीमा कंपनियों में फर्जी मेडिकल फाइलें तैयार की गईं। आरोप है कि मरीजों को भर्ती दिखाकर लाखों रुपये का बीमा क्लेम लिया गया, जबकि उन्होंने ऐसे किसी मरीज का उपचार नहीं किया था। इस शिकायत पर भी रामगढ़ताल थाने में अलग FIR दर्ज किया गया। पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
विवेचना के दौरान पुलिस ने साल 2025 और 2026 में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में फाइल किया। इसके बाद पुलिस ने पूरे गिरोह का गैंग चार्ट तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लिया। जिस के बाद 21 जून 2026 को गिरोह के सभी सदस्यों के खिलाफ यूपी गैंगेस्टर और एंटी सोशल एक्टिविटीज एक्ट के तहत FIR दर्ज किया गया। शुक्रवार को इसी मुकदमे में वांटेड राकेश कुमार ओझा और अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की गई।
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बंदूक चलाते हुए गाना, कभी सीरियस लुक से हंसाना! इन 7 किरदारों में खूब जंचे पंकज त्रिपाठी
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पंकज त्रिपाठी ने हिंदी सिनेमा में यूं तो कई किरदार निभाए हैं, जिनमें 7 किरादार के कुछ सबसे यादगार और बेहतरीन किरदारों को रेखांकित करता है. इसमें उनके द्वारा निभाए गए ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के बेरहम सुल्तान कुरैशी और ‘मिर्जापुर’ के शांत मगर डरावने कालीन भैया जैसे विलेन के किरदारों का जिक्र है. वहीं दूसरी तरफ, ‘स्त्री’ के पैरानॉर्मल एक्सपर्ट रुद्र भैया और ‘लूडो’ के सत्तू भैया के रूप में उनकी कमाल की कॉमिक टाइमिंग को दर्शाया गया है. इसके अलावा, ‘क्रिमिनल जस्टिस’ के हाजिर-जवाब वकील, ‘नील बट्टे सन्नाटा’ के भावुक प्रिंसिपल और ‘मेट्रो इन दिनों’ के मोंटी के रूप में उनकी बहुमुखी एक्टिंग प्रतिभा की तारीफ की गई है.
‘मिर्जापुर’ में पंकज त्रिपाठी बेरहम और भाव-शून्य माफिया डॉन कालीन भैया बने हैं. वे एक डरावने क्रिमिनल मास्टरमाइंड का रोल निभाते हैं. उनका गर्दन झटकाने का खास अंदाज लोगों के बीच बड़ा पॉपुलर हुआ. उन्होंने कालीन भैया को पॉप-कल्चर का एक यादगार किरदार बना दिया.

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में सुल्तान कुरैशी के रोल ने पकंज त्रिपाठी को पॉपुलर बना दिया था. वे एक बेरहम कसाई सुल्तान के रोल से दर्शकों को याद रह गए. उन्होंने इसमें जबरदस्त एक्टिंग की. पकंज का शांत मगर डरावना अंदाज, बिना किसी कोशिश के दिखाई क्रूरता ने विलेन के रोल को एक नई परिभाषा दी. उन्होंने एक ऐसा किरदार बनाया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. (इमेज: YouTube/Screengrab)

‘स्त्री’ में पकंज त्रिपाठी ने रुद्र भैया का यादगार रोल निभाया है. उनकी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब भाई. उन्होंने एक अजीबोगरीब, पैरानॉर्मल एक्सपर्ट के रोल में सबका दिल जीत लिया, जो किताबों की दुकान चलाता है. पंकज की गंभीर अंदाज में मजाक करने की कला, मजेदार बॉडी लैंग्वेज और अजीब डायलॉग टाइमिंग ने इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म में सबसे मजेदार पल दिए. (इमेज: YouTube/Screengrab)
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‘मेट्रो इन दिनों’ में पंकज त्रिपाठी ने मोंटी का रोल निभाया था. एक्टर ने मॉडर्न रोमांस में शहरी अपनापन और परिपक्वता का रंग भरा. उनके किरदार ने जटिल रिश्तों को एक जमीनी और दार्शनिक नजरिया दिया.

‘क्रिमिनल जस्टिस’ में माधव मिश्रा के रोल में पंकज त्रिपाठी का अलग ही अंदाज देखने को मिला. उन्होंने सीरीज में एक हाजिर-जवाब लॉयर के रोल में इंप्रेस किया जो लगातार स्किन एलर्जी से जूझता रहता है. पंकज त्रिपाठी ने अपनी परफॉर्मेंस से थ्रिलर सीरीज में जान डाल दी. उन्होंने तेज दिमाग और आम इंसान जैसे मजाकिया अंदाज के बीच बेहतरीन संतुलन बनाया.

‘नील बट्टे सन्नाटा’ के प्रिंसिपल एसएस अहलूवालिया आपको याद हैं? सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के रोल में पंकज त्रिपाठी ने दिल को छू लेने वाला अंदाज दिखाया. एक्टर के अनोखे तौर-तरीके और स्टूडेंट्स के साथ प्यार भरी बातचीत ने छोटी, लेकिन अहम भूमिकाओं में भी गहराई लाने की जबरदस्त काबिलियत को दिखाया.

‘लूडो’ में पंकज त्रिपाठी ने सत्येंद्र ‘सत्तू’ का रोल निभाया है. वे किस्मत के अजीब खेल में फंसे एक बेरहम, पुराने जमाने के गैंगस्टर के रोल में हैं. उन्होंने डार्क क्राइम में अतरंगी किरदार निभाया है. चाहे बंदूक चलाते हुए पुराने गाने गाना हो या चोटों का इलाज करवाना, उनकी बेतरतीब और मनमौजी एक्टिंग बहुत मजेदार थी.
सब्जी बनाने में लगता है ज्यादा समय, झटपट पनाएं पनीर भुर्जी, खाने वाले चाट जाएंगे उंगलियां
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Quick Paneer Bhurji Recipe: अगर सब्जी बनाने के लिए ज्यादा समय नहीं है, तो पनीर भुर्जी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. प्याज, टमाटर, मसालों और ताजे पनीर से तैयार होने वाली यह रेसिपी कुछ ही मिनटों में बन जाती है. इसे रोटी, पराठे, ब्रेड या पाव के साथ परोसकर स्वादिष्ट और पौष्टिक खाने का आनंद लिया जा सकता है.
आप महज कुछ मिनट में टेस्टी पनीर भुर्जी तैयार कर सकते हैं.
Simple Paneer Bhurji Recipe: सब्जी बनाने में टाइम लगता है और इस वजह से कई लोग झटपट तैयार होने वाली डिशेज की तलाश में रहते हैं. रोज-रोज एक जैसी सब्जियां बनाते-बनाते अगर आप बोर हो गए हैं और झटपट कुछ बनाना चाहते हैं, तो पनीर भुर्जी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है और स्वाद में भी किसी रेस्टोरेंट डिश से कम नहीं लगती. नरम पनीर, प्याज, टमाटर और मसालों का शानदार मेल इसे हर उम्र के लोगों की पसंद बना देता है. इसे रोटी, पराठा, ब्रेड या पाव के साथ भी परोसा जा सकता है. इसे बनाने में सिर्फ 10 मिनट का वक्त लगता है.
पनीर भुर्जी बनाने के लिए सामग्री
कद्दूकस या हाथ से मैश किया हुआ 250 ग्राम पनीर, बारीक कटा हुआ 1 बड़ा प्याज, बारीक कटे हुए 2 टमाटर, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, आधा छोटा चम्मच हल्दी, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, स्वादानुसार नमक, 2 बड़े चम्मच तेल या घी और बारीक कटा हरा धनिया. इन सभी चीजों से आप झटपट पनीर भुर्जी तैयार कर सकते हैं.
पनीर भुर्जी बनाने की आसान विधि
सबसे पहले एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें. इसमें बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भून लें. अब अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालकर एक मिनट तक पकाएं. इसके बाद कटे हुए टमाटर डालें और उन्हें अच्छी तरह गलने दें. अब हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक डालकर मसालों को 2 से 3 मिनट तक भूनें.
जब मसाला अच्छी तरह तैयार हो जाए, तब उसमें मैश किया हुआ पनीर डालें और अच्छी तरह मिला दें. धीमी आंच पर 3 से 4 मिनट तक पकाएं. आखिर में गरम मसाला और हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें. अगर आप रेस्टोरेंट जैसा स्वाद चाहते हैं, तो आखिर में थोड़ा-सा मक्खन डाल सकते हैं. इसके अलावा आधा छोटा चम्मच कसूरी मेथी हथेलियों के बीच मसलकर डालने से पनीर भुर्जी की खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं.
गरमा-गरम पनीर भुर्जी को रोटी, पराठा, नान, ब्रेड, पाव या टोस्ट के साथ परोसा जा सकता है. इसे सैंडविच या रैप की फिलिंग के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. पनीर भुर्जी कम समय में बनने वाली ऐसी रेसिपी है, जो स्वाद और पोषण दोनों का अच्छा मेल है. पनीर प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, इसलिए यह डिश बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है.
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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
2 बाइक की भिड़ंत में युवक की मौत: सीतामढ़ी में मुहर्रम पर ताजिया देखने जा रहा था – Sitamarhi News
सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड के बेतहा पंचायत क्षेत्र में मुहर्रम के अवसर पर एक सड़क हादसा हुआ। नसार बाजार के पास सिसवा गांव स्थित पत्थर मशीन के समीप दो बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक की पहचान परिहार थाना क्षेत्र के बेटा गांव निवासी मोहम्मद मस्लाउद्दीन के 20 वर्षीय पुत्र वाजिद अली के रूप में हुई है। वाजिद अली के साथ बाइक पर सवार 20 वर्षीय मोहम्मद हुसैन भी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए सीतामढ़ी सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायलों का इलाज जारी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूसरी बाइक पर सवार लोग भी इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वाजिद अली अपने पांच भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। इस घटना से परिवार में मातम छा गया है और पूरे गांव में शोक का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सीतामढ़ी सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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राजेश खन्ना की वो फिल्म, रिलीज हुई सिर्फ 9 सिनेमाघरों में, मगर निकली सुपरहिट
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जिस साल अमिताभ बच्चन की जंजीर फिल्म आई, वो बॉलीवुड के नए सुपरस्टार बने, उसी साल यश चोपड़ा के निर्देशन-प्रोडक्शन की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी. फिल्म में राजेश खन्ना लीड रोल में थी. बतौर प्रोड्यूसर यश चोपड़ा की यह पहली फिल्म थी. इस फिल्म का मुहुर्त क्लैप दिलीप कुमार ने दिया था. मूवी शुरुआत में सिर्फ 9 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था, फिर भी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने फिर कभी यश चोपड़ा के साथ काम नहीं किया. यह यादगार फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं.
दिलीप कुमार की एक फिल्म ‘दाग’ 1952 में आई थी. सेम टाइटल से 1973 में एक और फिल्म यश चोपड़ा ने बनाई थी. डॉग फिल्म में राजेश खन्ना राखी गुलजार और शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. डायरेक्शन यश चोपड़ा का था. स्टोरी गुलशन नंदा की थी. डायलॉग अख्तर उल-ईमान ने लिखे थे. फिल्म की बेसिक स्टोरी थॉमस हार्डी के 1886 के उपन्यास ‘द मेयर ऑफ कैस्टर ब्रिज’ से इंस्पायर्ड थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे.

बड़े भाई बीआर चोपड़ा को छोड़ने के बाद यश चोपड़ा ने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘यशराज फिल्म्स’ के नाम से शुरू किया था. राखी से लेकर राजेश खन्ना ने उन्हें फिल्म के लिए सपोर्ट किया और कहा कि वो मार्केट प्राइस नहीं लेंगे. गीतकार साहिर लुधियानवी ने कहा था कि जब फिल्म हिट हो जाए तब पैसे दे देना. फिल्म प्रोड्यूसर-डिस्ट्रीब्यूटर्स गुलशन राय ने 2 लाख रुपये का चेक दिया था.

‘दाग’ एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. यशराज चोपड़ा पहली बार प्रोड्यूसर बने थे. यशराज फिल्म्स के बैनर तले इस फिल्म का निर्माण किया था. फिल्म में मदन पुरी, कादर खान, प्रेम चोपड़ा और एके हंगल अहम भूमिकाओं में थे. कादर खान के साथ यश चोपड़ा की यह इकलौती फिल्म है. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और यश चोपड़ा की यह इकलौती फिल्म है.
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फिल्म का म्यूजिक ट्रैक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म के सदाबहार रोमांटिक गाने साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. सभी वर्जन मिलाकर 7 गाने थे. फिल्म में राजेश खन्ना ने कुछ लाइनें बोली थीं जिनमें जिंदगी का दर्द था. उनके गिरते स्टारडम का दर्द था. तड़प थी. ये लाइनें थीं : मैं तो कुछ भी नहीं, जिन्हें साहिर लुधियानवी ने लिखा था. ये लाइनें राजेश खन्ना के स्टारडम को बताती हैं.

फिल्म के अन्य पॉपुलर गानों में ‘मेरे दिल में आज क्या है तू कहे तो मैं बता दूं’ ‘आप चाहे मां रूठे या बाबा’, ‘तुम और हम’ और ‘जब भी जी चाहे दुनिया बसा लेते हैं लोग’ थे. लता मंगेशकर के दो सोलो सॉन्ग थे. दो किशोर कुमार के साथ ड्यूएट सॉन्ग थे. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म के गानों ने स्टोरी को बहुत सपोर्ट किया. फिल्म बहुत अच्छी बनी थी. राजेश खन्ना ने इस फिल्म में बहुत कम फीस में काम किया था. उन्हें एक हिट फिल्म की दरकार थी. दाग ने वह कमी पूरी की.

फिल्म जब बनकर तैयार हुई तो गुलशन राय ने क्लाइमैक्स बदलने की सलाह दी थी. उनका कहना था कि फिल्म का क्लाइमैक्स दुनिया स्वीकार नहीं करेगी कि एक आदमी दो पत्नियों के साथ रहे. यश चोपड़ा ने कहा था कि फिल्म की खासियत ही यही है. मैं इसे नहीं बदलना चाहूंगा. यश चोपड़ा को इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का जबकि राखी गुलजार को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

गुलशन राय ने फिल्म को आर्ट फिल्म के तौर पर ट्रीट किया. मुंबई के सिर्फ 9 सिनेमाघरों में फिल्म को रिलीज किया. एक हफ्ता पूरा होने से पहले ही सिनेमाघर बढ़ते चले गए. सिनेमाघरों में दर्शकों को खींचकर लाने का काम इसके म्यूजिक ने किया. फिल्म का म्यूजिक मूवी रिलीज होने से पहले ही बाजार में छा गया था. म्यूजिक इंस्टेंट हिट था. फिल्म का बजट कम था ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर गुलशन राय ने फिल्म को सिनेमाघरों में टिकाए रखा. फिल्म के गाने अगर एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नहीं होते तो यह फिल्म सफल नहीं होती. फिल्म का बजट 85 लाख था. फिल्म ने 3 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक मैसिव हिट फिल्म साबित हुई थी.
RTO ई-चालान, 18 बैंक की फर्जी फाइलों से करोड़ों ठगे: जामताड़ा गैंग के 3 गिरफ्तार, सूरत से 2 और मुख्य आरोपी बंगाल में ट्रेन से पकड़ाया – Gujarat News
आरटीओ ई-चालान तथा 18 बैंकों की फर्जी एपीके फाइलें बनाकर देशभर में लाखों लोगों से करोड़ों रुपए ठगने वाले जामताड़ा गैंग के 3 सदस्यों को अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने गिरफ्तार किया है। इनमें से एक एपीके फाइल बनाने वाला 10वीं फेल डेवलपर है, जबकि 5वीं और 8वीं फेल 2 आरोपी एपीके फाइलों की मार्केटिंग कर कमीशन पर बेचते थे। 10 महीनों से चल रहे इस घोटाले में आरोपी हर महीने 400 एपीके फाइलें बनाकर बेचने पर ₹40-50 लाख कमाता था। एपीके फाइल डेवलपर की गिरफ्तारी का यह अहमदाबाद का पहला मामला है। साबरमती गैस लि. के फर्जी बिल से ₹6.68 लाख उड़ाए हांसोट निवासी नरेश सेनानी को ‘साबरमती गैस का बिल अपडेट’ एपीके फाइल भेजकर ₹6.68 लाख ठगे। आरोपियों ने सूरत के एटीएम से पैसे निकाले, इसकी जानकारी पर साइबर क्राइम टीम ने सूरत से विकास दास (33 वर्ष) और सीताराम मंडल (26 वर्ष) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला कि वे ~3000 कमीशन लेकर एपीके फाइलें बेचते थे, जो जामताड़ा का पूर्णानंद तिवारी (28 वर्ष) बनाकर बेचने को देता था। पुलिस ने पूर्णानंद को पश्चिम बंगाल के किशनगढ़ में चलती ट्रेन से गिरफ्तार किया। APK डेवलपर गिरफ्तारी का अहमदाबाद में पहला मामला एपीके फाइल डाउनलोड करते ही पूरा मोबाइल फोन हैक हो जाता है और उसका एक्सेस साइबर ठगों के पास पहुंच जाता है। इसके बाद फोन के कॉन्टैक्ट्स, मैसेंजर, व्हाट्सऐप, गैलरी और सभी ऐप्स का एक्सेस हैकर के पास पहुंच जाता है। फिर वे फोन में मौजूद बैंकिंग जानकारी के आधार पर कुछ ही मिनटों में खाते को खाली कर देते हैं।
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दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर दान घोटाले पर उठाए सवाल: देवास में बोले- केवल इस्तीफे से नहीं, दोषियों पर FIR हो – Dewas News
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर ट्रस्ट प्रबंधन को घेरा है। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान और निर्माण कार्यों में घोटाले के आरोप बेहद गंभीर हैं। सिंह ने मांग की कि केवल इस्तीफों से बात नहीं बनेगी, बल्कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। दिग्विजय सिंह शुक्रवार शाम को देवास पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं और हाल ही में एक ट्रस्टी के इस्तीफे के मुद्दे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आजादी के पहले और बाद के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी सरकार के शासनकाल में मंदिर के पैसों में भी घोटाले के आरोप लग रहे हैं। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान वर्ष 1992 के बाद जो चंदा एकत्र किया गया था, उसका भी आज तक पूरा हिसाब जनता के सामने नहीं आया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद भी उसकी व्यवस्थाएं विश्व हिंदू परिषद (VHP) के हाथों में हैं। उन्होंने देशभर के अनेक मंदिरों और मठों का उदाहरण दिया, जिनकी व्यवस्थाएं संत-महात्माओं के पास रहती हैं और वहां इस प्रकार के विवाद या घोटाले सामने नहीं आते। दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि केवल किसी ट्रस्टी के इस्तीफा देने से मामला खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने ट्रस्ट की व्यवस्था की जिम्मेदारी चंपत राय पर डालते हुए कहा कि उन्हें पूरे मामले की जवाबदेही लेनी चाहिए। सिंह ने आरोप लगाया कि कथित अनियमितताएं उनके भरोसेमंद लोगों द्वारा ही की गई हैं और दोषियों के खिलाफ विस्तृत जांच कर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
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दादा के हाथ से पोते को खींच ले गई शेरनी: दादा की उंगली पकड़कर दूध लेने जा रहा था बच्चा, 1 किमी दूर मिला शव – Gujarat News
अमरेली जिले में खांभा तालुका के चतुरी गांव में रात को शेरनी ने 5 साल के बच्चे को दादा के हाथों से झपटकर मौत के घाट उतार दिया। अमरेली में एक महीने में शेर के हमले की तीसरी घटना हुई। 5 वर्षीय जियान देवकुंभाई सीधा रात में दादा की उंगली पकड़कर दूध लेने जा रहा था, तभी अंधेरे में अचानक शेरनी ने हमला किया। दादा कुछ समझते इससे पहले शेरनी बच्चे को खींचकर जंगल में ले भागी। दादा की चीखें और बच्चे की पुकार से ग्रामीण लाठियां लेकर दौड़े और खोजबीन की। मृतक के मामा के अनुसार, 2-3 युवकों ने बच्चे को शेरनी के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। करीब 1 किमी दूर पोते का लहूलुहान शव मिला। वन विभाग ने सुबह तक मेगा ऑपरेशन चलाया तो शेर की उल्टी में बच्चे के अवशेष मिले, जो जांच के लिए भेजे हैं। 9 घंटे ऑपरेशनः 5 शेर पिंजरे में वन विभाग ने 9 घंटे मेगा ऑपरेशन में 1 शेरनी को ट्रैंक्विलाइज करके कुल 5 शेरों को वन विभाग की टीमों ने रेस्क्यू कर पिंजरे में बंद किया। 10 दिन पहले युवक को शेर ने खा लिया था 10 दिन पहले अमरेली में उत्तराखंड के एक युवक को गुजरात में शेर ने अपना शिकार बना लिया था। स्थानीय लोगों और वन विभाग को मौके से आधा खाया हुआ सिर और पसलियों के टुकड़े मिले थे, जिनके आधार पर युवक की पहचान की गई। युवक पिथौरागढ़ का रहने वाला था और गुजरात के अमरेली जिले में एक होटल में काम करता था। देर रात प्रकाश चंद्र अपने घर जाने के लिए होटल से निकला था। इसी दौरान कोवाया गांव के पास अंधेरे में घात लगाए बैठे शेर ने उस पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया और उसे घसीटकर झाड़ियों में ले गया। शेर ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और शरीर को बुरी तरह नोच डाला था। ————————— ये खबर भी पढ़ें… युवक के शिकार के बाद का वीडियो: रिकॉर्ड करने वाले को नहीं पता था कि शेर ने इंसान का शिकार किया अमरेली में 15 जून की रात एक शेर ने उत्तराखंड के एक युवक को अपना शिकार बना लिया था। वीडियो में शिकार के बाद शेर उसे खाता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, वीडियो बनाने और सोशल मीडिया में अपलोड करने वाले शख्स को यह नहीं पता था कि शेर ने किसी जानवर का नहीं बल्कि एक इंसान का शिकार किया है। पूरी खबर पढ़ें…
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दिल्ली में महान वायुसेना अधिकारी को दी श्रद्धांजलि: एलजी संधू बोले- पद नहीं-कर्तव्य सबसे बड़ा; अर्जन सिंह की विरासत हर लोकसेवक के लिए प्रेरणा – New Delhi News
दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने शुक्रवार को आयोजित मार्शल ऑफ द एयर फोर्स मेमोरियल लेक्चर में भारत के महान वायुसेना अधिकारी और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जिस पद को अर्जन सिंह जैसे महान व्यक्तित्व ने सुशोभित किया हो, उसी पद पर सेवा करना सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। संधू ने कहा कि अर्जन सिंह का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उनके आदर्श आज भी हर लोकसेवक और सैन्य अधिकारी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों में अर्जन सिंह की भूमिका निर्णायक रही। विशेष रूप से 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने अपनी क्षमता और साहस का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उपराज्यपाल ने बताया कि अर्जन सिंह की असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें पहले पद्म विभूषण और बाद में देश के इतिहास में पहली बार मार्शल ऑफ द एयर फोर्स की सर्वोच्च सैन्य रैंक से सम्मानित किया गया। सैन्य नेतृत्व से प्रशासन तक निभाई राष्ट्रसेवा की जिम्मेदारी संधू ने कहा कि सैन्य सेवा के बाद अर्जन सिंह ने राजनयिक, प्रशासक और वर्ष 1989-90 में दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में भी देश की सेवा की। उनका सैन्य नेतृत्व से सार्वजनिक प्रशासन तक का सफर इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्रसेवा किसी एक पद या संस्था तक सीमित नहीं होती। उन्होंने हर जिम्मेदारी को ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण के साथ निभाया। सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य सेवा और कर्तव्य उपराज्यपाल ने कहा कि मार्शल अर्जन सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि कर्तव्य का निर्वहन और लोगों की निस्वार्थ सेवा करना है। उन्होंने कहा कि अर्जन सिंह के आदर्शों को अपने आचरण और संस्थागत कार्यसंस्कृति में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देखें फोटो…
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