Wednesday, June 24, 2026
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प्रयागराज में ANTF का ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान: जागरूकता के लिए जादू शो और गोष्ठी जैसे अनूठे तरीके अपनाए – Prayagraj (Allahabad) News




उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने प्रयागराज में ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। मंगलवार देर शाम प्रयागराज जंक्शन के सामने लीडर रोड पुलिस चौकी के पास एक प्रभावी गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें नशे की लत से समाज को बचाने के उद्देश्य से अनूठे तरीके अपनाए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एएनटीएफ के डिप्टी एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अगस्त 2022 में गठित होने के बाद से ही विभाग नशा तस्करों के खिलाफ सक्रियता से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस का लक्ष्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि उनकी कमर तोड़ना भी है। इसी दिशा में तस्करों की गिरफ्तारी के साथ-साथ अवैध रूप से अर्जित उनकी संपत्तियों को भी चिह्नित कर जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है। इस जागरूकता कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि इसमें केवल भाषणों पर निर्भर न रहकर जादू के शो का भी सहारा लिया गया। डिप्टी एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि समाज में नशे के सेवन को लेकर कई भ्रामक धारणाएं फैली हुई हैं, जैसे ‘नशा करने से ऊर्जा आती है’ या ‘भगवान के दर्शन होते हैं’। जादू के माध्यम से इन अंधविश्वासों और नशे के भ्रामक प्रचारों की पोल खोली गई, ताकि आम जनता, विशेषकर युवाओं को यह समझाया जा सके कि नशा किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं है। डिप्टी एसपी ने जोर देकर कहा कि पुलिस अकेले इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती है। इसके लिए समाज के सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास और परिवारों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करें। नशे की लत में भटके हुए लोगों को चिह्नित कर उन्हें पुलिस या नशा मुक्ति केंद्रों की मदद से सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक-एक परिवार को नशा मुक्त बनाकर ही हम ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को पूरा कर सकते हैं।



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सीवान सदर अस्पताल में 24 घंटे में कार्रवाई: इमरजेंसी वार्ड में 102 एम्बुलेंस सेवा का निर्देश चिपकाया, ठेले पर शव ले जाने पर एक्शन – Siwan News




सीवान के मॉडल सदर अस्पताल में बदइंतजामी को लेकर दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का असर 24 घंटे के भीतर दिखाई दिया है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली खबर के बाद तत्काल कार्रवाई की। संबंधित कर्मियों और चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई सोमवार को दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक खबर के बाद हुई। खबर में बताया गया था कि इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचे एक मरीज के परिजनों को स्ट्रेचर नहीं मिला। मरीज की मौत के बाद शव को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण परिजनों को मजबूरन शव को ठेले पर रखकर ले जाना पड़ा था। इस घटना ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और अन्य प्रमुख स्थानों पर नए निर्देश चस्पा किए गए। एम्बुलेंस सेवा के लिए 102 पर करें कॉल इन निर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शव वाहन और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के लिए मरीज या उनके परिजन सीधे टोल फ्री नंबर 102 पर कॉल करके निःशुल्क सेवा प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। आम लोगों में व्यवस्था को लेकर असंतोष हालांकि, अस्पताल प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद आम लोगों में व्यवस्था को लेकर असंतोष बना हुआ है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में 102 सेवा पर संपर्क करना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार घंटों तक फोन नहीं लगता, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। लोगों ने सुझाव दिया है कि जब अस्पताल परिसर के आसपास एम्बुलेंस चालक और संबंधित कर्मी मौजूद रहते हैं, तो इमरजेंसी वार्ड में उनकी ड्यूटी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद मिली। इसके तुरंत बाद संबंधित कर्मियों और चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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मेहमाननवाजी में जैसलमेर विश्व में 9वें स्थान पर: दुनियाभर में गूंजा ‘पधारो म्हारे देस’; ‘होटल सूर्यगढ़’ बना इस कामयाबी का असली हीरो – Jaisalmer News




अपनी सुनहरी रेत, ऐतिहासिक किलों और शाही संस्कृति के लिए दुनियाभर में मशहूर ‘स्वर्ण नगरी’ जैसलमेर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। अपनी बेमिसाल मेहमाननवाजी और पर्यटकों के प्रति खास लगाव की बदौलत जैसलमेर को विश्व के सबसे बेहतरीन मेहमाननवाज शहरों में शामिल किया गया है। मशहूर ग्लोबल ट्रेवल पोर्टल ‘बुकिंग डॉट कॉम’ की ओर से जारी दुनिया के टॉप-10 सबसे शानदार मेहमाननवाज शहरों की सूची में जैसलमेर ने 9वीं रैंक हासिल की है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे जैसलमेर के आलीशान होटलों का सबसे बड़ा हाथ है, जिसमें ‘होटल सूर्यगढ़’ असली हीरो बनकर उभरा है। सूर्यगढ़ की बेमिसाल सेवा और अनोखे अंदाज ने जैसलमेर को वैश्विक पटल पर यह मुकाम दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। सैलानियों के दिलों पर राज कर रहा है ‘होटल सूर्यगढ़’ दुनिया के सबसे बड़े ट्रेवल पोर्टल ‘ट्रिप एडवाइजर’ के प्रतिष्ठित ‘ट्रैवलर्स चॉइस अवार्ड्स-2026’ में भी जैसलमेर के पर्यटन उद्योग का सिक्का चमका है। देश के टॉप-25 आलीशान और बेहतरीन होटलों की मुख्य सूची में जैसलमेर के होटलों ने शान से अपनी जगह बनाई है, जिसमें ‘होटल सूर्यगढ़’ शीर्ष पर बना हुआ है। थार रेगिस्तान के बीचोबीच स्थित सूर्यगढ़ सिर्फ एक ठहरने की जगह नहीं है, बल्कि यह राजस्थानी संस्कृति, आधुनिक सुख-सुविधाओं और शाही जीवनशैली का एक अनूठा संगम है। यहाँ आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों ने सूर्यगढ़ की वास्तुकला, यहाँ के स्टाफ के सेवा भाव और यहाँ के खास अनुभवों को दुनिया में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना है। सूर्यगढ़ ने अपनी बेहतरीन सेवाओं, शाही तौर-तरीकों और एकदम अनूठी लोकेशन के दम पर दुनियाभर के सैलानियों का दिल जीता है और जैसलमेर के पर्यटन को एक नए स्तर पर पहुंचाया है। इसके साथ ही, जैसलमेर के ही ‘रिसोर्ट द सराय’ ने भी मुख्य सूची में अपनी जगह बनाई है। वहीं, ट्रिप एडवाइजर की अन्य विशेष श्रेणियों में भी यहाँ के दो और बड़े होटलों ‘मेरियट रिसोर्ट एवं स्पा’ तथा ‘द गढ़ जैसल’ ने बाजी मारकर इस कामयाबी को दोगुना कर दिया है। लेकिन इन सबमें सूर्यगढ़ का जलवा सबसे अलग और खास रहा है। पर्यटकों की पहली पसंद बना सोनार किला, धोरे और सूर्यागढ़ का जादू ट्रेवल पोर्टल्स पर सैलानियों द्वारा दिए गए रिव्यूज और शानदार रेटिंग से यह साफ होता है कि जैसलमेर का जादू अब सूर्यगढ़ जैसी जगहों से और ज्यादा गहरा गया है। इसके अलावा सैलानी यहाँ के इकलौते जीवित किले ‘सोनार किला’ को भी बेहद पसंद करते हैं, जहाँ आज भी शहर की एक बड़ी आबादी निवास करती है। साथ ही पटवा हवेली की बारीक नक्काशी और स्थापत्य कला को देखने के लिए भी लोग खिंचे चले आते हैं। वहीं, सम के मखमली धोरों के बीच स्थित डेजर्ट कैंप्स में रात गुजारना और राजस्थानी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाना अब पर्यटकों का सबसे बड़ा क्रेज बन चुका है। लेकिन इन सबके बीच, होटल सूर्यगढ़ में बिताए गए पल सैलानियों के लिए सबसे यादगार अनुभव साबित हो रहे हैं, जिसकी वजह से वे इंटरनेट पर जैसलमेर को शानदार रेटिंग दे रहे हैं। टूटे पर्यटन के सारे रिकॉर्ड, नए सीजन में बंपर ग्राहकी की उम्मीद इस शानदार मेहमाननवाजी और होटल सूर्यगढ़ जैसे वैश्विक स्तर के आकर्षणों का ही नतीजा है कि बीते साल जैसलमेर में 41 लाख से अधिक देसी-विदेशी सैलानी पहुंचे थे, जो कि पर्यटन के इतिहास में अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। इस नई वैश्विक रैंकिंग और अवार्ड्स के बाद स्थानीय पर्यटन व्यवसायी फूले नहीं समा रहे हैं और उनमें जबर्दस्त उत्साह का माहौल है। जानकारों का मानना है कि होटल सूर्यगढ़ को मिली इस अंतरराष्ट्रीय पहचान और जैसलमेर की 9वीं रैंक के बाद आने वाले आगामी सीजन में पर्यटकों की संख्या में और भारी इजाफा होगा।
इससे स्थानीय हस्तशिल्प, होटल व्यवसाय, ट्रेवल एजेंसी और गाइड सहित हजारों लोगों को रोजगार के नए और बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे पूरे जिले की अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी। शाही शादियों का गवाह सूर्यगढ़ सिर्फ अपनी सेवा ही नहीं, बल्कि आलीशान और शाही शादियों (डेस्टिनेशन वेडिंग) के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। बॉलीवुड के मशहूर सितारे सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी जैसी बड़ी हस्तियों ने इसी होटल के पारंपरिक प्रांगण (बावड़ी) में सात फेरे लेकर अपनी शादी को यादगार बनाया था। यहाँ की भव्य सजावट, मशालों की रोशनी और लोक संगीत के बीच होने वाली शादियाँ किसी सपने जैसी लगती हैं। शाही कमरों का किराया और खास सुविधाएं होटल सूर्यगढ़ में पर्यटकों के लिए बेहद आलीशान कमरे, हेरिटेज सुइट्स और प्राइवेट विला बनाए गए हैं, जो पुराने महलों की याद दिलाते हैं। यहाँ कमरों का शुरुआती किराया सीजन और बुकिंग के समय के अनुसार सामान्यत 12 हजार से 50 हजार रुपए प्रति रात से शुरू होता है, जो यहाँ के आलीशान और बड़े विला के लिए लाखों रुपये तक जाता है। यहाँ ठहरने वाले सैलानियों को स्विमिंग पूल, स्पा, और थार की संस्कृति से जुड़े कस्टमाइज्ड टूर जैसी बेहतरीन और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, जो इस किराए को पूरी तरह वसूल कर देती हैं। इसके साथ ही, जैसलमेर के ही ‘रिसोर्ट द सराय’ ने भी मुख्य सूची में अपनी जगह बनाई है। वहीं, ट्रिप एडवाइजर की अन्य विशेष श्रेणियों में भी यहाँ के दो और बड़े होटलों ‘मेरियट रिसोर्ट एवं स्पा’ तथा ‘द गढ़ जैसल’ ने बाजी मारकर इस कामयाबी को दोगुना कर दिया है। लेकिन इन सबमें सूर्यगढ़ का जलवा सबसे अलग और खास रहा है।



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गंभीर बीमारी झेल रही अलका याग्निक, पद्म भूषण मिलने के बाद शेयर किया इमोशनल पोस्ट


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Alka Yagnik Padma Bhushan: 2 साल से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहीं अलका याग्निक को जब देश का बड़ा सम्मान ‘पद्म भूषण’ मिला, तो वह बेहद भावुक हो गईं. राष्ट्रपति भवन से उनका एक कमजोरी भरा वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसे देख फैंस चिंतित हैं. सिंगर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर अपना दर्द बयां किया है. नीचे पढ़ें क्या है पूरी खबर

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इस गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं अलका याग्निक

Alka Yagnik health update : बॉलीवुड की मशहूर प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक को भारत सरकार की तरफ से देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म भूषण से नवाजा गया है. मंगलवार यानी 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक बेहद भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया. इस बड़े सम्मान को हासिल करने के बाद अलका याग्निक काफी भावुक नजर आईं और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक खास नोट शेयर कर म्यूजिक में अपने योगदान के लिए आभार जताया. इसके साथ ही उन्होंने अपनी इस बेहद मुश्किल हेल्थ अपडेट को लेकर भी बातें बताई, जिससे उनके चाहने वाले काफी दुखी हो गए हैं.

राष्ट्रपति भवन से वायरल हुआ इमोशनल वीडियो

दरअसल बीते दिन अवॉर्ड सेरेमनी से अलका यागनिक का एक वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो रहा है. जिसने वहां मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर फैंस को भी भावुक कर दिया. इस सम्मान को लेने के लिए मंच पर जाते समय 60 साल की सिंगर एक अटेंडेंट की मदद लेते हुए दिखीं. इस दौरान वे शारीरिक रूप से बेहद कमजोर भी लग रही थीं. सोशल मीडिया पर उनकी यह वीडियो काफी वायरल हो रही है, जिसे देखकर उनके लाखों फैंस बेहद परेशान हो गए और कमेंट्स में उनकी सेहत को लेकर अपनी चिंता जता रहे हैं. राष्ट्रपति भवन से सम्मान लेने के बाद अलका याग्निक ने अब अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस ऐतिहासिक पल की तस्वीरें शेयर की हैं. इसके साथ ही उन्होंने एक बेहद इमोशनल नोट भी लिखा है. उन्होंने अपनी बात की शुरुआत करते हुए लिखा, “जिंदगी के सफर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन यह पल मेरे लिए बहुत बड़ा है. ” उन्होंने आगे लिखा कि पिछले 2 साल उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद कठिन रहे हैं और वे एक बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रही हैं. ऐसे समय में देश का यह सर्वोच्च सम्मान मिलना उनके लिए एक बहुत बड़ी ताकत और आशीर्वाद की तरह है.

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कलेक्टर ने रात्रि चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं: निवाड़ी में संबल योजना से 2 लाख की सहायता दी; योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई – Niwari News




निवाड़ी जिले की ग्राम पंचायत चौमो खास में ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला कलेक्टर जमुना भिड़े ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही उनके निराकरण के निर्देश दिए। चौपाल में एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया, जिसमें गांव निवासी लोकेश साहू ने अपनी समस्या बताई। उनकी माता के निधन के बाद कलेक्टर ने उन्हें संबल योजना का लाभ दिलाने के लिए तत्काल दो लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई रात्रि चौपाल का उद्देश्य ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने से बचाना था। चौपाल में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों को लाभ लेने की प्रक्रिया समझाई। कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक खेती और उद्यानिकी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई। किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती करने के तरीकों से अवगत कराया गया। लोगों की समस्याओं का समाधान के निर्देश कलेक्टर जमुना भिड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. राय सिंह नरवरिया, जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना, एसडीएम मनीषा जैन, डिप्टी कलेक्टर स्वाति सिंह, तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। रात्रि चौपाल के माध्यम से प्रशासन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरकार की योजनाएं और सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का मूल उद्देश्य है।



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एयर इंडिया का विमान PAK एयरस्पेस में घुसा: दिल्ली से अमृतसर के लिए उड़ा, तकनीकी खराबी से रास्ता भटका, पाकिस्तान ने चेतावनी देकर लौटाया – Amritsar News


विमान के पाकिस्तान एयरस्पेस में पहुंचने पर उसे वापस दिल्ली लौटाया गया। फोटो एआई जनरेटेड है।

एयर इंडिया की एक फ्लाइट सोमवार रात को रास्ते से भटक कर पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में जा घुसी। इस पैसेंजर फ्लाइट ने दिल्ली से उड़ान भरी थी और इसे अमृतसर में लैंड होना था, लेकिन पाकिस्तान की चले जाने पर इसे पाकिस्तान की एयर ट्रैफिक अथॉरिटी ने चेतावनी दे

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तय समय पर फ्लाइट अमृतसर नहीं पहुंच पाई तो एयरपोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ने के बाद फ्लाइट को वापस दिल्ली जाना पड़ा। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया है कि तकनीकी खराबी के कारण यह फ्लाइट रास्ता भटक गई थी। मामले की जांच की जा रही है।

3 मिनट की देरी से उड़ा था विमान

एयरपोर्ट अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक, एयरबस AI-321 विमान ने सोमवार रात 9 बजकर 18 मिनट पर दिल्ली से उड़ान भरी थी। यह विमान अपने निर्धारित समय से 3 मिनट देरी से उड़ा था। इसके बाद उड़ान के दौरान विमान में तकनीकी खराबी आई।

इस विमान को रात 10 बजकर 30 मिनट पर अमृतसर में लैंड होना था, लेकिन विमान अपने रूट से भटक गया और पाकिस्तान के एयरस्पेस में जा घुसा। इस बात पता पायलट को भी तब लगा, जब पाकिस्तान एयर ट्रैफिक अथॉरिटी से विमान को चेतावनी मिलने लगी।

पायलट ने रास्ता बदला, अमृतसर में जगह नहीं मिली

इस घटना के तुरंत बाद पायलट ने विमान का रास्ता बदला और यू-टर्न मारकर वापस भारत के एयरस्पेस में आया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। समय निकल जाने के बाद विमान अमृतसर की सीमा में पहुंचा, लेकिन ट्रैफिक बढ़ने से विमान को उतरने की जगह नहीं मिली।

एयरपोर्ट कंट्रोल रूम से विमान को वापस दिल्ली जाने के निर्देश मिले। इसके बाद विमान वापस दिल्ली गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई। करीब 2 घंटे बाद दोबारा अनुमति मिलने पर विमान ने अमृतसर के लिए फिर से उड़ान भरी और सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात 2 बजकर 20 मिनट पर अमृतसर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया।

यात्रियों को 4 घंटे की देरी

इस घटना के कारण यात्रियों को करीब 4 घंटे की देरी का सामना करना पड़ा। जिन्हें रात 10 बजकर 30 मिनट तक अमृतसर पहुंचना था, वे देर रात अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बताया- तकनीकी कारणों से विमान लैंड नहीं हुआ

इस मामले में अमृतसर एयरपोर्ट अथॉरिटी के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी विमान की लैंडिंग से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की ओर से अंतिम अनुमति दी जाती है। कई बार रनवे की उपलब्धता, एयर ट्रैफिक या अन्य तकनीकी कारणों से विमान को कुछ समय तक हवा में ही होल्डिंग पैटर्न में इंतजार करना पड़ता है।

अधिकारी के अनुसार, संबंधित विमान के मामले में लैंडिंग में देरी होने पर एयरपोर्ट पर ट्रैफिक बढ़ गया था, जिससे इस विमान के लैंड होने की जगह नहीं थी। बाद में सूचना मिली कि तकनीकी कारणों के चलते विमान भटक गया था। इसके बाद उसे वापस दिल्ली ले जाने को कहा गया।

अधिकारी ने बताया कि विमान बाद में सुरक्षित रूप से वापस चला गया था। हालांकि, यात्रियों को कुछ देरी का सामना करना पड़ा, लेकिन एयरपोर्ट प्रशासन के पास किसी बड़े हंगामे या दुर्व्यवहार की कोई जानकारी नहीं है। यात्रियों को हुई असुविधा के बावजूद स्थिति सामान्य रही।

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चंडीगढ़ से दिल्ली जा रही फ्लाइट में हंगामा:लैंडिंग के समय यात्री पैनिक हुआ, मुक्के मारकर शीशा तोड़ा; क्रू मेंबर्स के साथ बदसलूकी

चंडीगढ़ से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट (AI-1879) में बीते रविवार को एक पैसेंजर ने बीच हवा में हंगामा शुरू कर दिया। यात्री ने फ्लाइट की विंडो का शीशा भी तोड़ दिया। उसने फ्लाइट क्रू के साथ बदतमीजी की। पढ़ें पूरी खबर…



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अमेरिकी सीनेट में ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास: ट्रम्प से सैन्य कार्रवाई रोकने को कहा; पीस डील पर UAE को मनाने पहुंचे रूबियो




अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है। 50-48 वोटों से मंजूर हुए इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कहा गया है। इससे पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। 1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी कार्रवाई खत्म करने की मांग की है। वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे ट्रम्प की पार्टी के भीतर बढ़ती बागवत भी सामने आई। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो UAE, बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है। इन देशों को आशंका है कि समझौते से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट शर्त नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित फंड पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इसमें खाड़ी देशों से आर्थिक सहयोग मांगा जा सकता है। ऐसे में वॉशिंगटन अपने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर चर्चा हुई। 2. भारत से जुड़े 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया: अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। 3. होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 4. इजराइल अपने हथियार खुद बनाएगा: इजराइली PM ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करनी होगी और खुद हथियार बनाना सीखना होगा। 5. ट्रम्प ने ईरान को फिर से धमकी दी: ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….



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अमरीश पुरी के साथ था पहला सीन, ‘गदर’ के सेट पर कांपने लगी थीं अमीषा पटेल


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सनी देओल की फिल्म ‘गदर’ की रिलीज के 25 साल पूरे होने पर अमीषा पटेल ने शूटिंग के दिनों का किस्सा शेयर किया. अमीषा ने बताया कि फिल्म पहले दिन ही इंटरवल के बाद वाले एक हाई-वोल्टेज इमोशनल सीन में उन्हें अमरीश पुरी के साथ शूट करना था. उस वक्त इंडस्ट्री में वह बिल्कुल नई थीं और इतने बड़े स्टार के सामने डर के मारे थर-थर कांप रही थीं. हालांकि, अमरीश पुरी ने उन्हें फिल्म के सेट पर तुरंत सहज महसूस करवाया था.

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ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गदर’ की रिलीज को हुए 25 साल.

नई दिल्ली. सनी देओल और अमीषा पटेल की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ ने हाल ही में अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर लिए हैं. इस खास मौके पर फिल्म की अमीषा पटेल ने शूटिंग के पुराने दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि फिल्म के एक इमोशनल सीन की शूटिंग के दौरान वह कितनी ज्यादा डरी हुई थीं. दरअसल, वो सीन उन्हें अमरीश पुरी के साथ शूट करना था और उनके सामने परफॉर्म करने को लेकर वह बहुत नर्वस थीं.

इंडिया टुडे के साथ बातचीत में अमीषा पटेल ने बताया, ‘सच कहूं तो मैं अमरीश जी को बहुत ज्यादा मिस करती हूं. शूटिंग के वक्त जो डर मुझे लग रहा था, वो उनकी वजह से बिल्कुल नहीं था, वह तो असल जिंदगी में एक बेहद प्यारे इंसान थे. उनका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का था और वह काफी मजाकिया थे. मोगेम्बो और अशरफ अली जैसे उनके खतरनाक ऑनस्क्रीन किरदारों को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि वह असल में कितने जिंदादिल इंसान थे.’

अमरीश पुरी के साथ शूट हुआ था पहला सीन

‘गदर’ से पहले अमीषा पटेल ने सिर्फ एक ही मूवी (कहो ना प्यार है) में काम किया था. ऐसे में जब वह फिल्म के सेट पर पहुंचीं, तो पहला ही सीन उनके लिए अग्निपरीक्षा जैसा था. उन्हें आते ही इंटरवल के बाद का एक हाई-वोल्टेज इमोशनल सीन शूट करने को कह दिया गया, जिसमें उन्हें अपने ऑनस्क्रीन पिता (अमरीश पुरी) का सामना करना था.

डर के मारे कांपने लगी थीं अमीषा पटेल

उस सीन की शूटिंग के वक्त अपनी घबराहट को याद करते हुए अमीषा ने कहा, ‘वो टकराव वाला सीन गदर के लिए मेरा पहला ही सीन था, वो भी अमरीश जी के सामने. डर के मारे मेरी तो हालत ही खराब थी, मैं सचमुच कांप रही थी. लेकिन उनके साथ काम करने का अनुभव बेहद शानदार रहा. उन्होंने मेरे लिए सब कुछ इतना आसान बना दिया कि मुझे कभी लगा ही नहीं कि वह इतने बड़े कलाकार हैं और मैं महज एक नौसिखिया लड़की हूं. उस वक्त तक तो मेरी पहली फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ भी रिलीज नहीं हुई थी, उसकी शूटिंग चल ही रही थी और कोई मुझे जानता तक नहीं था.’

क्या है ‘गदर’ फिल्म की कहानी?

‘गदर’ की कहानी साल 1947 में हुए भारत-पाकिस्तान बंटवारे के उस दर्दनाक दौर पर आधारित है, जिसने लाखों जिंदगियां बदल दीं. फिल्म में दिखाया गया कि तारा सिंह एक सिख ट्रक ड्राइवर है जो रसूखदार मुस्लिम परिवार की बेटी सकीना को बंटवारे के दंगों के बीच अपनी जान पर खेलकर बचाता है. इसके बाद बाद दोनों भारत में अपनी एक नई और खूबसूरत दुनिया बसा लेते हैं. लेकिन उनकी यह खुशियां ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पातीं, जब सकीना का परिवार उसे जबरन पाकिस्तान ले जाता है. इसके बाद तारा सिंह अपनी पत्नी और बेटे को वापस लाने के लिए सरहद पार जाता है और पाकिस्तान में तहलका मचा देता है.

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Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें





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लखनऊ अग्निकांड- जहां 15 लाशें मिलीं, वहां पहुंचे भास्कर रिपोर्टर: दो मंजिला बिल्डिंग में खिड़की-एग्जॉस्ट तक नहीं; दरवाजा डबल लॉक था – Lucknow News




लखनऊ की बिल्डिंग में लगी आग में 15 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई। सभी ने बाहर निकलने की जद्दोजहद की, लेकिन धुंआ और गेट लॉक होने की वजह से बाहर नहीं निकल सके। जिस हेड हॉपर स्टूडियो से 15 लाशें निकाली गईं, भास्कर रिपोर्टर्स ने उसके अंदर जाकर पड़ताल की। हमारी पड़ताल में अंदर के हालात भयावह दिखे। 185 वर्गमीटर जमीन पर बनी 2 मंजिल इमारत में खिड़की और एग्जॉस्ट तक नहीं लगे थे। इसी वजह से जब आग लगी, तो पूरी बिल्डिंग में धुआं भर गया। सेकेंड फ्लोर पर स्थित कोचिंग के बॉयोमेट्रिक डबल लॉक वाले गेट जाम हो गए। उसमें फंसे लोग खुद को बचाने के लिए वॉशरूम में घुस गए। वहां भी धुआं भर गया। कुछ देर बाद आग से स्टूडियो की लकड़ियां जल गईं, तो शीशे टूट-टूटकर नीचे गिर गए। इसके बावजूद बिल्डिंग से धुआं नहीं निकल सका। फायर बिग्रेड के अफसर-कर्मचारी बिल्डिंग के पीछे की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचे, तो शव एक-दूसरे के ऊपर पड़े थे। टीम ने एक-एक करके 15 शव बाहर निकाले। पहले मौके की 3 तस्वीरें देखिए… बेसमेंट के AC में शार्ट सर्किट से उठी थी चिंगारी जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत बिल्डिंग के बेसमेंट से हुई थी। यहां लगे AC के आउटडोर यूनिट में शॉर्ट सर्किट के बाद आग भड़की। फिर देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग धुएं और आग की लपटों से भर गई। बेसमेंट को पेट शॉप के गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। यहां बड़ी मात्रा में सामान रखा था। इसके अलावा पालतू जानवर भी मौजूद थे। AC की आउटडोर यूनिट के साथ 3 मोटरसाइकिलें भी खड़ी थीं। इन सब वजहों से आग तेजी से फैलती चली गई। वेंटिलेशन नहीं होने से सभी फ्लोर पर धुआं भरा था जांच में सामने आया है कि हादसे के समय पूरी बिल्डिंग में कुल 23 लोग मौजूद थे। आग और धुएं के बीच 7 लोग किसी तरह से तार के सहारे बाहर निकलने में सफल रहे। एक युवक ऊपर से नीचे कूद गया। उसका इलाज चल रहा है। 15 लोग अंदर ही फंस गए और उनकी मौत हो गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, बिल्डिंग में वेंटिलेशन नहीं होने से सभी फ्लोर पर धुआं भर गया। इससे आग में फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए। ज्यादातर मौतें आग की लपटों से नहीं, जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुईं। दूसरी मंजिल में फंसे लोग बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते रहे जांच में पता चला है कि बिल्डिंग की अलग-अलग मंजिलों पर अलग-अलग गतिविधियां चल रही थीं। बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक थी। सेकेंड फ्लोर पर लर्निंग स्पेस नाम की लाइब्रेरी और हेड हॉपर स्टूडियो है। स्टूडियो में 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था। इस फ्लोर पर किचन, केबिन, शौचालय और बड़ी संख्या में कंप्यूटर लगे थे। आग फैलने के बाद इस फ्लोर के लोग ही बाहर निकलने के लिए जूझते रहे। बायोमेट्रिक गेट लॉक, छत की सीढ़ियों पर ताला लगा था जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि छत तक जाने वाली सीढ़ियों के रास्ते पर लोहे का चैनल गेट लगा था। लेकिन, उसमें ताला बंद था। इस वजह से धुआं ऊपर नहीं निकल पाया। इसके अलावा स्टूडियो का मेन गेट बायोमेट्रिक था। वह लॉक हो गया था। माना जा रहा है कि अगर छत का रास्ता खुला होता, तो कई लोग बाहर निकल सकते थे। फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियों ने 8 घंटे चलाया रेस्क्यू बिल्डिंग में एक ही रास्ता और वेंटिलेशन नहीं होने से रेस्क्यू टीमों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 20 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को 8 घंटे तक लगातार ऑपरेशन चलाना पड़ा। आग पर काबू पाने के दौरान पूरी बिल्डिंग में पानी भर गया था, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ। बिल्डिंग की पीछे की दीवार तोड़कर टीमें अंदर पहुंची। इसके बाद अंदर से शव निकाले गए। SIT और फोरेंसिक टीम जांच के लिए पहुंची मामले की जांच के लिए 2 सदस्यीय SIT बनाई गई। SIT में शामिल प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार 23 जून (मंगलवार) को मौके पर पहुंचे। इसके अलावा फोरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। एडीजी प्रवीण कुमार ने बताया कि साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों, भवन संचालकों और पीड़ित परिवारों से पूछताछ की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों के बारे में जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण की ओर से बनी जांच समिति भी भवन निर्माण, मानचित्र स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा मानकों और निकास व्यवस्था की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की बात सामने आ रही है।



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3 साल की तपस्या लाई रंग, BARC में वैज्ञानिक अधिकारी बनीं खैरथल की ख्याति


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Khyati Khandelwal BARC Scientific Officer: राजस्थान के खैरथल की रहने वाली ख्याति खंडेलवाल ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर चयनित होकर इतिहास रच दिया है. दिल्ली विश्वविद्यालय से फिजिक्स में एमएससी करने वाली ख्याति ने घर पर रहकर 3 साल तक कड़ी तैयारी की और नेट व गेट परीक्षा भी पास की. डीड राइटर की बेटी ख्याति की इस बड़ी सफलता से पूरे जिले में खुशी की लहर है. अगस्त से उनकी 1 साल की ट्रेनिंग मुंबई में शुरू होगी. ख्याति ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और पूरे परिवार के सहयोग को दिया है.

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Khyati Khandelwal BARC Scientific Officer: “प्रतिभा किसी पहचान या संसाधन की मोहताज नहीं होती” इस पुरानी कहावत को अक्षरशः साकार कर दिखाया है राजस्थान के खैरथल जिले की होनहार बेटी ख्याति खंडेलवाल ने. ख्याति ने देश के सबसे प्रतिष्ठित और शीर्ष संस्थान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Bhabha Atomic Research Centre – BARC) में वैज्ञानिक अधिकारी (Scientific Officer) के पद पर चयनित होकर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम देशभर में रोशन कर दिया है. जैसे ही भाभा सेंटर द्वारा जारी आधिकारिक चयन सूची में ख्याति का नाम सामने आया, वैसे ही पूरे खैरथल शहर और उनके निवास स्थान पर जश्न का माहौल छा गया. इस बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद से ही उनके घर पर बधाई देने वाले शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों का तांता लगा हुआ है.

ख्याति खंडेलवाल की यह असाधारण सफलता उनकी वर्षों की लगन और कड़ी मेहनत का परिणाम है. ख्याति ने बताया कि उनकी प्रारंभिक और स्कूली शिक्षा खैरथल शहर के ही एक निजी विद्यालय में संपन्न हुई थी. वह बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी थीं. उन्होंने दसवीं कक्षा में 91.17 प्रतिशत तथा बारहवीं कक्षा में 89.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की ओर रुख किया और भौतिक विज्ञान (Physics) विषय में स्नातक (B.Sc) और स्नातकोत्तर (M.Sc) की पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से पूरी की. उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने अपनी योग्यता को साबित करते हुए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) और ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) जैसी कठिन परीक्षाओं को भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण किया.

3 साल की कड़ी तपस्या और मुंबई का टिकट
परमाणु भौतिकी (Nuclear Physics) में गहरी रुचि होने के कारण ख्याति ने भारत के प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक अधिकारी के पद के लिए आवेदन किया था. इस बेहद प्रतिष्ठित पद के लिए होने वाले कठिन इंटरव्यू को उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता और विषय पर मजबूत पकड़ के दम पर पहले ही प्रयास में क्लियर कर लिया. ख्याति ने साझा किया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक बनने का उनका सपना था, जिसके लिए उन्होंने घर पर रहकर ही करीब 3 साल तक प्रतिदिन कई घंटों की कड़ी मेहनत और एकाग्रता के साथ तैयारी की थी. उनकी इस सफलता ने पूरे खैरथल जिले को गौरवान्वित किया है.

साधारण परिवार, असाधारण उपलब्धि
ख्याति के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पिता इंद्र खंडेलवाल एक डीड राइटर (दस्तावेज लेखक) हैं, जबकि उनकी माता सुषमा खंडेलवाल एक कुशल गृहणी हैं. ख्याति का एक भाई यश खंडेलवाल है जो चिकित्सा क्षेत्र में है और डॉक्टर है. ख्याति ने बताया कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में अपनी नियमित सेवाएं शुरू करने से पहले उन्हें 1 साल की कठिन ट्रेनिंग से गुजरना होगा. यह विशेष वैज्ञानिक ट्रेनिंग मुंबई में आयोजित की जाएगी, जो आगामी अगस्त महीने से शुरू होने जा रही है.

सफलता का श्रेय और माता-पिता का गर्व
ख्याति ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार के अटूट सहयोग, विश्वास और सही मार्गदर्शन को दिया है. उन्होंने कहा कि उनके दादाजी गुलाबचंद, दादीजी, नाना-नानी, माता-पिता और भाई डॉ. यश का लगातार मिला मानसिक और भावनात्मक समर्थन उनके लिए हमेशा प्रेरणादायक रहा. पिता इंद्र खंडेलवाल ने बेहद भावुक होकर बताया कि बेटी का वैज्ञानिक के पद पर चयन होना पूरे परिवार के लिए एक सपने के सच होने जैसा है.

माता सुषमा खंडेलवाल ने भी बेटी के सिलेक्शन पर अत्यधिक खुशी जाहिर करते हुए बताया कि घर के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाने के साथ-साथ ख्याति ने अपनी पढ़ाई पर हमेशा पूरा फोकस रखा. दिन-रात की गई उसकी इस निस्वार्थ मेहनत के परिणाम ने आज पूरे परिवार और समाज को झूमने का अवसर दिया है. ख्याति की यह अद्भुत उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर मन में सच्ची लगन, अटूट मेहनत और लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट हो, तो छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर भी देश के सबसे ऊंचे और प्रतिष्ठित मुकामों को हासिल किया जा सकता है.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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