Saturday, May 23, 2026
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मैनपुरी में छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर शुरू: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ब्रज प्रांत ने किया आयोजन – Mainpuri News


मुकेश कुमार | मैनपुरी3 मिनट पहले

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छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर शुरू।

मैनपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), ब्रज प्रांत द्वारा आयोजित ‘छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर 2026’ का शुभारंभ सरस्वती शिशु मंदिर, बंसी गोहरा में हुआ। इस शिविर का उद्देश्य छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मरक्षा और राष्ट्रभावना को सशक्त करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन CO ट्रैफिक दीपशिखा सिंह, प्रांत राष्ट्रीय कला मंच सह संयोजिका श्रद्धा राठौर, जिला कला मंच संयोजिका दिव्या राठौर और अशफा अख्तर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों ने छात्राओं को आत्मनिर्भर, संस्कारित और राष्ट्रहित में सक्रिय बनने के लिए प्रेरित किया।

CO ट्रैफिक दीपशिखा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज की छात्राएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने आत्मरक्षा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को युवतियों को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम बताया। सिंह ने विद्यार्थी परिषद के इस प्रयास को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया।

सुश्री श्रद्धा राठौर ने कहा कि व्यक्तित्व विकास केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, संस्कार, कला और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय है। उन्होंने ऐसे शिविरों को छात्राओं को नई दिशा प्रदान करने वाला बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित परिषद कार्यकर्ताओं और छात्राओं ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। शिविर के दौरान योग, सेल्फ डिफेंस, मेहंदी, नृत्य, करियर काउंसलिंग, साइबर सुरक्षा और महिला स्वास्थ्य जैसे विषयों पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर राखी राजपूत, गौतमी, दुर्गा शर्मा, अमृता, पूजा, साक्षी, एकता शाक्य सहित बड़ी संख्या में छात्राएं, परिषद कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



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मधुबनी में 10 साल के बच्चे की डूबने से मौत: JCB से खोदे गए गड्ढे में नहाते समय गहरे पानी में गया – Madhubani News




मधुबनी जिले के बिस्फी थाना क्षेत्र के नूरचक गांव में शुक्रवार को एक 10 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान नूरचक निवासी मोहम्मद इरफान के पुत्र अमिताभ बच्चन के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, गांव के पास जेसीबी मशीन से मिट्टी कटाई के कारण एक बड़ा गड्ढा बन गया था। बारिश और आसपास का पानी जमा होने से यह गड्ढा तालाब का रूप ले चुका था। भीषण गर्मी के चलते गांव के कुछ बच्चे वहां नहाने गए थे। शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं नहाने के दौरान अमिताभ बच्चन अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसके साथ मौजूद अन्य बच्चों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। बच्चों के शोर मचाने पर ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना बिस्फी थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और पोस्टमार्टम के लिए मधुबनी सदर अस्पताल भेज दिया।



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दतिया में कल 5 घंटे तक बंद रहेगी बिजली सप्लाई: दुरसड़ा, नवोदय, रिछारी समेत कई क्षेत्र प्रभावित होंगे – datia News




दतिया में कल (रविवार) शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती होगी। 33/11 केवी सबस्टेशन और 11 केवी लाइनों के मेंटेनेंस कार्य के कारण अलग-अलग फीडरों से जुड़े क्षेत्रों में 4 से 5 घंटे तक बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी। सबसे अधिक असर 33 केवी डगरई फीडर पर देखा जाएगा, जहां सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इससे डगरई और बीकर उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्र प्रभावित होंगे। शहर के कई हिस्सों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक बिजली कटौती होगी। इसमें सिटी नंबर-1, सिटी नंबर-2 और सिटी नंबर-3 फीडर से जुड़े चिरुला, गंधारी और दुरसड़ा क्षेत्र शामिल हैं। बसस्टैंड, रामसागर, हॉस्पिटल और रिछरा फाटक फीडर पर भी इसी अवधि में सप्लाई बंद रहेगी। इसके अतिरिक्त, सिदवारी, डगरई, नवोदय, कामद, रिछार, गुजर्रा, पिपरआ कला, खोदन, घुगसी, ओरौना, बरगयां, रिछारी और हतलई सहित कई ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में भी सुबह के समय बिजली नहीं रहेगी। आज होने वाला मेंटेनेंस सोमवार को होगा
कुछ ग्रामीण फीडरों पर मेंटेनेंस कार्य शनिवार (22 मई) को होना था, लेकिन किसी वजह से नहीं हो सका। अब यह काम सोमवार (24 मई) को किया जाएगा। सोमवार को बगेदरी, उदगवां, बरधुआ, नयाखेड़ा, लहरा, ठाकुरपुरा, भादोना और सिलोरी फीडर से जुड़े क्षेत्रों में बिजली सप्लाई प्रभावित होगी।



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मुखिया हो तो ऐसी! जेब से 15 लाख खर्च बना दी ‘फाइव स्टार’ लाइब्रेरी


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Jamui Dabill Panchayat Library: जमुई जिले की एक महिला मुखिया ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों के लिए मिसाल बन गया है. दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने अपने स्तर से 15 लाख रुपये खर्च कर गांव के बच्चों के लिए एक ऐसी हाईटेक एयर कंडीशन लाइब्रेरी बनवा दी है. जो 24 घंटे खुली रहती है. शहरों जैसी सुविधाओं से लैस इस अनूठी लाइब्रेरी में रोजाना आसपास के दर्जनों गांवों से 200 से अधिक छात्र-छात्राएं बैठकर अफसर बनने का सपना बुन रहे हैं. इस लाइब्रेरी की क्या हैं खासियतें, जानिए.

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जमुई: पंचायत में जब विकास की बात होती है तो आमतौर पर गली-नाली, सड़क इत्यादि के निर्माण की बात की जाती है. लेकिन जमुई का एक पंचायत ऐसा भी है जहां के मुखिया ने विकास के लिए कुछ ऐसा कर दिया है, जिसकी अब सराहना हो रही है. इस मुखिया ने करीब 15 लाख रुपए खर्च कर एक ऐसा हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है, जिसमें डेढ़ सौ से भी अधिक की संख्या में बच्चे प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. दाबिल पंचायत के अलावा आसपास के भी दूसरे पंचायत से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. अभी जहां बाहर 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक की गर्मी है, ऐसे में यह बच्चे बिना किसी फीस के अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एयर कंडीशन कमरे में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.

खर्च कर दिए 15 लाख से भी अधिक रुपए 
दरअसल, दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने इस हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है. पुतुल देवी के पति योगेंद्र राम बताते हैं कि इसको बनवाने में करीब 15 लाख से भी अधिक रुपए की लागत आई है. जिसमें कुछ पैसे तो इन्होंने अलग-अलग योजना और मद के जरिए खर्च किए, जिसके जरिए इन्होंने जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके भवन का जीर्णोद्धार करवाया. फिर कुछ ग्रामीण सहयोग से इन्होंने भवन का रंग रोगन करवाया. बाद में करीब 4 लाख से भी अधिक रुपए इन्होंने अपनी जेब से लगाए, और इस पूरे लाइब्रेरी को एयर कंडीशन बनाया. इतना ही नहीं इस लाइब्रेरी की 24 घंटे हाईटेक कैमरे से निगरानी की जाती है. लड़कियों के लिए शौचालय सहित कई तरह की सुविधा यहां पर विकसित की गई है.

पढ़ने आते हैं 200 से भी अधिक बच्चे 
योगेंद्र राम बताते हैं कि उनके इस हाईटेक लाइब्रेरी में दाबिल के अलावा आसपास के कहरडीह, चांगोंडीह, बानपुर, कोल्हुआ, गरसंडा सहित दर्जन भर से भी अधिक गांव से 200 से भी अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. यह लाइब्रेरी 24 घंटे खुला रहता है. इसमें उन्होंने दो मेंटर को भी रखा है, जो तैयारी करने वाले छात्रों को सही रास्ता बताते हैं.

पति के सपने को मुखिया पत्नी ने किया साकार
योगेंद्र राम बताते हैं कि मैं पहले बीएमपी में हवलदार की नौकरी कर रहा था. मैं अपनी नौकरी छोड़ दी तथा पंचायत का चुनाव लड़ा. जब मेरी पत्नी पंचायत चुनाव जीत कर आई, तब से ही मेरी ख्वाहिश थी कि मैं यहां के युवा, खास कर पढ़ने-लिखने वाले युवाओं के लिए कुछ कर सकूं. इसी कड़ी में इसका निर्माण कराया. मैं पिछले कई सालों से यह करना चाहता था. अब जाकर यह सफल हो सका है. पिछले 1 साल से भी अधिक समय से यह लाइब्रेरी अनवरत रूप से जारी है. यह आसपास के इलाके में नजीर बन गया है. छात्र बताते हैं कि यहां तैयारी करने से उन्हें काफी सुविधा भी होती है. यहां पर पढ़ने का एक बेहतर शैक्षणिक माहौल भी बना हुआ है. दाबिल पंचायत के मुखिया की इस पहल की अब हर जगह सराहना हो रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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FD मैच्योर होने से पहले चाहिए पैसा? जानिए बैंक कितना काट लेगा आपका मुनाफा


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एफडी को लोग सुरक्षित निवेश मानकर सालों के लिए पैसा जमा कर देते हैं, लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर यही एफडी समय से पहले तोड़ना भारी पड़ सकता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि बैंक सिर्फ छोटी-मोटी फीस नहीं काटता, बल्कि पूरे ब्याज का हिसाब ही बदल देता है. 5 साल की एफडी अगर 1 साल में तोड़ी जाए तो बैंक लंबी अवधि वाला फायदा खत्म कर देता है और कम अवधि की ब्याज दर लागू कर देता है. इसके बाद पेनल्टी अलग से काटी जाती है, जिससे आपका मुनाफा उम्मीद से काफी कम हो सकता है. इसलिए एफडी तोड़ने से पहले बैंक के नियम और नुकसान का गणित समझना बेहद जरूरी है.

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FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक कैसे काटता है पेनल्टी?

नई दिल्ली. अक्सर लोग यह सोचकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाते हैं कि मैच्योरिटी से पहले वे इस पैसे को हाथ नहीं लगाएंगे. लेकिन जिंदगी में कभी भी इमरजेंसी आ सकती है. अचानक मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत या किसी बड़े संकट के समय लोगों को अपनी एफडी बीच में ही तोड़नी पड़ जाती है. क्या आप जानते हैं कि अगर आप समय से पहले अपनी एफडी तोड़ते हैं, तो बैंक आप पर कितना जुर्माना लगाता है?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि एफडी बीच में तोड़ने पर बैंक सिर्फ एक तय रकम (जैसे 500 या 1000 रुपये) जुर्माने के तौर पर काटेगा और बाकी पैसा दे देगा. लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक आपके ब्याज का पूरा गणित ही बदल देते हैं.

जुर्माने की मार
मान लीजिए आपने 5 साल के लिए एफडी कराई थी, लेकिन आप इसे 1 साल में ही तोड़ रहे हैं. ऐसे में बैंक आपको 5 साल वाला भारी-भरकम ब्याज नहीं देगा. बैंक देखेगा कि 1 साल की एफडी पर क्या ब्याज दर थी, वह वही दर लागू करेगा. इसके बाद बैंक उस 1 साल की ब्याज दर में से भी 0.5% से 1% तक की कटौती (पेनल्टी) कर लेगा यानी आपको दोहरी मार पड़ती है. एक तो ब्याज दर कम हो जाती है और ऊपर से पेनल्टी भी कटती है. यही वजह है कि हाथ में आने वाला पैसा उम्मीद से काफी कम होता है.

हर बैंक के नियम हैं अलग
एफडी तोड़ने के नियम सभी बैंकों में एक जैसे नहीं होते हैं. कुछ बैंक सीनियर सिटीजन्स को पेनल्टी में छूट देते हैं. कुछ बैंक ‘नो-पेनल्टी एफडी’ भी ऑफर करते हैं, लेकिन इनमें सामान्य एफडी के मुकाबले शुरू से ही ब्याज थोड़ा कम मिलता है.

टैक्स का भी रखें ध्यान
एफडी भले ही आप समय से पहले तोड़ लें, लेकिन जितने दिन भी आपका पैसा बैंक में रहा और उस पर जो भी ब्याज बना, उस पर आपको टैक्स देना होगा. यह टैक्स आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कटेगा, जिससे आपका मुनाफा और कम हो जाएगा.

नुकसान से बचने के दो जादुई तरीके
अगर आप चाहते हैं कि इमरजेंसी में आपकी जेब पर डाका न पड़े, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ये दो तरीके अपनाने की सलाह देते हैं:

  • लैडरिंग तरीका: एक बड़ी एफडी (जैसे 5 लाख रुपये) कराने के बजाय 1-1 लाख रुपये की 5 अलग-अलग एफडी कराएं. इससे अगर जरूरत पड़ी, तो आप सिर्फ एक एफडी तोड़ेंगे और बाकी 4 सुरक्षित रहेंगी।
  • स्वीप-इन सुविधा: अपनी एफडी को सेविंग्स अकाउंट से लिंक कराएं. जरूरत पड़ने पर बैंक सिर्फ उतनी ही रकम एफडी से निकालेगा जितनी आपको चाहिए, बाकी रकम पर ब्याज मिलता रहेगा.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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SMS हॉस्पिटल में ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी: नाक, मुंह से ऑक्सीजन फेफड़े तक पहुंचाने वाली दांयी ब्रोंकस हो चुकी थी ब्लॉक; डॉक्टरों का दावा, प्रदेश में ये पहली सर्जरी – Jaipur News




जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी की गई। ये ऑपरेशन सवाई माधोपुर के रहने वाले 16 साल के मरीज के किया। इस सर्जरी से पहले मरीज को सांस लेने में काफी तकलीफ थी और उसकी लगातार हालात खराब हो रही थी। डॉक्टरों का दावा है कि राजस्थान में पहले ऐसी सर्जरी किसी भी हॉस्पिटल में नहीं हुई। कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. संजीव देवगढ़ा ने बताया- मरीज कालूराम पुत्र नवल सिंह का पिछले महीने 4 अप्रैल को रोड एक्सीडेंट हुआ। इस एक्सीडेंट में उसके दाहिने फेफड़े में गंभीर चोट आने के बाद से उसे सांस लेने में लगातार परेशानी होने लगी। कई बार उसको ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रखा गया। परिजनों ने मरीज को कई हॉस्पिटलों में दिखाया, लेकिन बीमारी का सही कारण पता नहीं चल सका और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। 15 अप्रैल एसएमएस हॉस्पिटल की ओपीडी में सीटीवीएस विभाग में परामर्श लेने के बाद 16 अप्रैल को भर्ती कराया गया। भर्ती के बाद मरीज जांचें की, जिसमें सीटी स्कैन, छाती का एक्स-रे और वर्चुअल ब्रॉन्कोस्कोपी शामिल थी। जांचों में पाया कि मरीज के दाएं मुख्य ब्रोंकस की सांस की नली पूरी तरह बंद हो चुकी थी, जिसके कारण उसका दायां फेफड़ा सिकुड़ गया और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। 4 घंटे लगे सर्जरी में तमाम जांच करने और मरीज के फिट होने के बाद उसका 29 अप्रैल को ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी की गई। इस सर्जरी में करीब चार घंटे का समय लगा। ऑपरेशन के दौरान सिकुड़े और बंद हो चुके दाएं ब्रोंकस के हिस्से को काटकर अलग किया और शेष रही सही ब्रोंकस को वापस मुख्य श्वास नली से जोड़ा गया। इस ब्रोंकस को काटना सबसे कठिन था, क्योंकि ये आसपास के ट्यूश (ऊतकों) से चिपके हुए थे। सर्जरी के बाद मरीज का सिकुड़ा हुआ फेफड़ा वापस काम सामान्य तौर पर काम करने लगा। इससे मरीज की सांस लेने की दिक्कत दूर हो गई। इस सर्जरी में डॉ. संजीव देवगढ़ा के साथ प्रोफेसर डॉ. अनुला सिसोदिया, डॉ. के.के. मावर, डॉ. ध्रुव शर्मा, डॉ. उत्सव नंदवाना, डॉ. मोहित सिंघल, डॉ. स्वप्निल पंचाल और एनेस्थीसिया टीम डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. दीपिका गहलोत का सहयोग रहा।



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‘दत्त साहब होते तो’ बुलडोजर एक्शन के बाद सुनील दत्त की याद में इमोशनल हुए लोग


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सुनील दत्त जब तक जिंदा रहे, तब तक गरीबों के मसीहा बनकर रहे. उन्होंने मुंबई के बांद्रा के गरीब नगर को मिटने नहीं दिया, मगर अब उस पर बुलडोजर चला, तो पुराने बाशिंदों को सुनील दत्त जैसी शख्सियत की कमी महसूस हुई. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में गरीबों के हक और झुग्गियों की सुरक्षा के लिए कई बार कानूनी और सामाजिक लड़ाइयां लड़ी थीं. ताजा कार्रवाई में बेघर हो रहे लोगों का मानना है कि यदि सुनील दत्त आज जीवित होते, तो वे ढाल बनकर खड़े रहते. हालांकि, उन पर अतिक्रमण को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे, जिससे मिडिल क्लास उनसे नाराज हुए. आज जब बुलडोजर चल रहे हैं, तो लोग खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं.

नई दिल्ली: मुंबई के बांद्रा में मौजूद झुग्गी बस्ती पर बुलडोजर कार्रवाई ने सुनील दत्त की यादें ताजा कर दी हैं. बांद्रा ईस्ट के गरीब नगर में रेलवे की जमीन पर बनी झुग्गियों को ढहाया गया, तो लोगों को किसी मौजूदा नेता की नहीं, बल्कि सुनील दत्त की याद आई. दत्त साहब को गुजरे लगभग दो दशक हो चुके हैं, लेकिन बांद्रा के गरीबों के लिए वह आज भी एक मसीहा के रूप में जिंदा हैं. उनकी कमी आज उन लोगों को सबसे ज्यादा खल रही है, जो मुंबई में प्रशासन की कार्रवाई से बेघर हो रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@bombaybasanti)

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सुनील दत्त की इमेज केवल एक फिल्मी सितारे की नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसे राजनेता थे जो मुंबई के सबसे कमजोर तबके के लिए ढाल बनकर खड़े रहते थे. हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘न्यूज19 इंग्लिश’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुनील दत्त ने साल 1984 में राजनीति में कदम रखा था, जिसके बाद वे पांच बार सांसद बने. उन्होंने हमेशा झुग्गीवासियों के हक की लड़ाई लड़ी, भले ही इसके लिए उन्हें मिडिल क्लास और टैक्स भरने वाले नागरिकों की नाराजगी झेलनी पड़ी. उनके समय में झुग्गी सुरक्षा की कट-ऑफ डेट बढ़वाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है, जिससे लाखों लोगों को छत की कानूनी गारंटी मिली थी.
(फोटो साभार: Instagram@vintage.bollywood.x)

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सुनील दत्त की संवेदनशीलता की सबसे बड़ी मिसाल ‘नरगिस दत्त नगर’ है. उन्होंने साल 1981 में अपनी पत्नी के निधन के बाद बांद्रा रिक्लेमेशन के पास एक झुग्गी बस्ती का नाम उनके नाम पर रख दिया था. शुरू में यह एक छोटा सा इलाका था, लेकिन धीरे-धीरे यह मुंबई के सबसे बड़े और संवेदनशील वोट बैंक में तब्दील हो गया. हालांकि, यह इलाका विवादों से भी घिरा रहा. आलोचकों का कहना था कि भावनाओं के नाम पर यहां अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा मिला, जिससे शहर की सरकारी जमीनें कम होती गईं. (फोटो साभार: Instagram@vintage.bollywood.x)

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सुनील दत्त को राजनीति में अपनी इसी ‘गरीबों के मसीहा’ इमेज के कारण नुकसान भी उठाना पड़ा. साल 2004 के चुनाव में उनकी जीत का अंतर काफी घट गया था. बांद्रा और खार के जागरूक नागरिकों का मानना था कि दत्त साहब ने सिर्फ झुग्गीवासियों पर ध्यान दिया और टैक्स भरने वाले लोगों की समस्याओं जैसे फुटपाथ पर कब्जा और ट्रैफिक को नजरअंदाज किया. लोकल रेजिडेंट्स एसोसिएशनों का आरोप था कि उनके कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से अवैध निर्माण बढ़ रहे थे, जिसने बांद्रा की सूरत बिगाड़ दी थी.
(फोटो साभार: IMDb)

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इस हफ्ते बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास ‘गरीब नगर’ में वेस्टर्न रेलवे ने कोर्ट के आदेश पर बड़ी तोड़फोड़ शुरू की है. यह जमीन सांताक्रूज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर की नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए बेहद जरूरी है. इस प्रोजेक्ट से मुंबई में 50 नई ट्रेनें शुरू होने की उम्मीद है. प्रशासन का कहना है कि वे केवल उन्हीं लोगों को हटा रहे हैं जो सर्वे में ‘अवैध’ पाए गए हैं, जबकि योग्य परिवारों को घर दिए जा रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@golden_bollywood_days)

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गरीब नगर के निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर भारी गुस्सा है. सालों से यहां रह रहे लोगों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं, तो नेता वोट मांगने के लिए इन्हीं झुग्गियों के चक्कर काटते हैं. उस समय उनके आधार कार्ड और वोटर आईडी उन्हें ‘वैध’ नागरिक बना देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे अचानक ‘अवैध’ हो जाते हैं. निवासियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी सही सर्वे के निकाला जा रहा है और उनके पास अब सिर छिपाने की जगह नहीं बची है. (फोटो साभार: Instagram@golden_bollywood_days)

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सुनील दत्त के दौर में हालात अलग थे. लोग याद करते हैं कि कैसे उन्होंने सोनिया गांधी के जरिए तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख तक को बुलडोजर रुकवाने के लिए मना लिया था. जब कभी एयरपोर्ट के पास की झुग्गियों पर संकट आता, तो दत्त साहब खुद सड़कों पर मार्च निकालते थे. आज के निवासियों को मलाल है कि मौजूदा विधायक और नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखते हैं, लेकिन जब सच में घर टूट रहे हैं, तो कोई भी उनकी ढाल बनने को तैयार नहीं है. (फोटो साभार: IMDb)

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सुनील दत्त की विरासत आज भी बांद्रा में दो हिस्सों में बंटी है. एक वर्ग उन्हें अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाला मानता है, तो दूसरा उन्हें अपना एकमात्र संरक्षक. लेकिन हकीकत यही है कि उनके निधन के 20 साल बाद भी बांद्रा की सियासत और वहां के भूगोल में उनका असर साफ दिखता है. गरीब नगर में मलबे के बीच खड़ा हर शख्स आज बस यही कह रहा है कि अगर ‘दत्त साहब’ होते, तो शायद बुलडोजर की हिम्मत नहीं होती. (फोटो साभार: Instagram@kishore.pandey.5)

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दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 113 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है। केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 22 मई को क्लब सेक्रेटरी को लेटर भेजकर यह आदेश जारी किया।

इसमें कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए चाहिए। आदेश के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से जमीन लीज खत्म कर दी गई है।

क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लब से किसी सुरक्षा खतरे जैसी स्थिति नहीं है और आदेश में किए गए दावों पर पुनर्विचार होना चाहिए।

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। 1913 में यह इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब नाम से शुरू हुआ था। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। मौजूदा भवन 1930 के दशक में बनाए गए थे।

यह क्लब की मेन बिल्डिंग है। यहीं से अंदर जाने का मेन गेट भी है।

यह क्लब की मेन बिल्डिंग है। यहीं से अंदर जाने का मेन गेट भी है।

PM आवास के पास है क्लब, ब्रिटिश आर्किटेक्ट ने बनाया

दिल्ली जिमखाना क्लब को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था। उन्होंने ही कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन भी डिजाइन किए थे। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास है, जिसके कारण यह इलाका हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है।

क्लब में बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट सहित कई सुविधाएं

पिछले 113 सालों से यह क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक रहा है। क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट हैं, जो देश के किसी भी क्लब में सबसे ज्यादा बताए जाते हैं। इसके अलावा स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, तीन लाउंज बार और 43 कॉटेज भी हैं।

यह क्लब लंबे समय से नौकरशाहों, सेना प्रमुखों, जजों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और पुराने कारोबारी परिवारों का पसंदीदा अड्डा रहा है। यहां की सदस्यता को किसी बड़े सरकारी पद जितना प्रतिष्ठित माना जाता है।

हर साल सिर्फ 100 लोगों को मिलती है मेंबरशिप

करीब 1200 सदस्यों वाले इस क्लब में एंट्री पाना बेहद मुश्किल माना जाता है। सदस्यता के लिए 20 से 30 साल तक इंतजार करना पड़ता था। हर साल सिर्फ करीब 100 नए लोग ही मेंबरशिप ले पाते हैं।

क्लब में दशकों तक 40-40-20 नियम लागू रहा। 40% सदस्यता सिविल सर्विस, 40% रक्षा सेवाओं और बाकी 20% अन्य लोगों को मिलती थी। पहले से क्लब के मेंबर्स के बच्चों को भी प्राथमिकता दी जाती थी। इससे बाहरी लोगों के लिए सदस्य बनना और मुश्किल हो जाता था।

सदस्यता से पहले ‘एट होम’ नाम की प्रक्रिया भी होती थी, जहां मौजूदा सदस्य यह तय करते थे कि नया व्यक्ति उनके स्टेटस का है या नहीं। इसी हाई-सोसायटी स्टेटस कल्चर को लेकर क्लब विवादों में भी रहा।

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प्रधानमंत्री कार्यालय की नई इमारत ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन:PM बोले- नॉर्थ-साउथ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत का प्रतीक; गुलामी की मानसिकता से निकलना जरूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को नए पीएम ऑफिस सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1 व 2 का उद्घाटन किया। पीएम ऑफिस अब तक साउथ ब्लॉक में था। पीएम मोदी ने कहा कि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की इमारतें ब्रिटिश शासन की हुकूमत की प्रतीक थीं। ये भवन ब्रिटेन के महाराज की सोच को गुलाम भारत की जमीन पर उतारने का माध्यम था। हमें गुलामी की इस मानसिकता से बाहर निकलना जरूरी था। पूरी खबर पढ़ें…

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महाराष्ट्र स्टाइल पावभाजी दुनियाभर में क्यों खास मानी जाती है? जानें इसे बनाने का तरीका


महाराष्ट्र, खासकर मुंबई, अपनी स्ट्रीट फूड कल्चर के लिए जाना जाता है और उन्हीं में से एक सबसे लोकप्रिय डिश है पावभाजी. यह डिश सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पसंद की जाती है. इसका मसालेदार स्वाद, बटर की खुशबू और सॉफ्ट पाव इसे बेहद खास बनाते हैं.

पावभाजी फेमस क्यों है?
1. जबरदस्त मसालेदार स्वाद
महाराष्ट्रा स्टाइल पावभाजी का स्वाद अलग होता है क्योंकि इसमें खास पावभाजी मसाला इस्तेमाल किया जाता है. यह मसाला सब्जियों को तीखा, चटपटा और खुशबूदार बनाता है.

2. बटर का भरपूर इस्तेमाल
मुंबई की पावभाजी में बटर खुलकर डाला जाता है, जिससे इसका टेस्ट और भी रिच और लाजवाब हो जाता है.

3. हेल्दी + टेस्टी कॉम्बिनेशन
इसमें कई सब्जियां जैसे आलू, टमाटर, फूलगोभी, मटर और शिमला मिर्च मिलती हैं, जो इसे पोषक भी बनाती हैं.

4. स्ट्रीट फूड का आकर्षण
मुंबई की सड़कों पर बड़े तवे पर बनती पावभाजी का तरीका ही इसे यूनिक बनाता है, तेज आंच, लगातार मैशिंग और ताजगी इसका स्वाद बढ़ाते हैं.

पावभाजी बनाने की सामग्री
आलू – 3 उबले हुए
फूलगोभी – 1 कप
मटर – 1/2 कप
टमाटर – 3 बारीक कटे
प्याज – 1 बारीक कटा
शिमला मिर्च – 1 बारीक कटी
अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 चम्मच
पावभाजी मसाला – 2 चम्मच
हल्दी – 1/2 चम्मच
लाल मिर्च पाउडर – 1 चम्मच
नमक – स्वादानुसार
बटर – 3–4 बड़े चम्मच
हरा धनिया – सजाने के लिए
नींबू – 1

बनाने की विधि
1. सब्जियां उबालें
आलू, फूलगोभी और मटर को कुकर में उबाल लें. फिर इन्हें अच्छे से मैश कर लें.

2. मसाला तैयार करें
एक कढ़ाई या तवे पर बटर गर्म करें. उसमें प्याज डालकर हल्का ब्राउन करें.
अब अदरक-लहसुन पेस्ट डालकर भूनें.

3. टमाटर और मसाले डालें
अब कटे टमाटर डालें और उन्हें अच्छी तरह गलने दें. फिर हल्दी, लाल मिर्च, नमक और पावभाजी मसाला डालकर मिलाएं.

4. सब्जियां मिलाएं
अब मैश की हुई सब्जियां इसमें डालें और अच्छे से मिलाएं. थोड़ा पानी डालकर 10–15 मिनट तक मध्यम आंच पर पकाएं. बीच-बीच में मैश करते रहें.

5. फाइनल टच
ऊपर से बटर डालें और हरे धनिये से सजाएं. आपकी भाजी तैयार है.

पाव तैयार करें
एक तवे पर थोड़ा बटर गर्म करें और पाव को बीच से काटकर सेक लें जब तक वे हल्के क्रिस्पी न हो जाएं.

परोसने का तरीका
गरमा-गरम भाजी को प्लेट में निकालें, ऊपर से बटर डालें, साथ में पाव, प्याज और नींबू के टुकड़े रखें.



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टीवी, एसी, पंखे आदि के लिए घर में लगाना चाहिए कितने एम्पियर का सॉकेट?


घर में इलेक्ट्रिकल वायरिंग कराते समय अगर इलेक्ट्रिशियन अप्लायंसेज के लिए गलत सॉकेट लगा देता है, तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे शॉर्ट-सर्किट हो सकता है और पूरे घर की वायरिंग जल भी सकती है। आजकल लगभग हर घर में एसी, टीवी, फ्रिज, सेट-टॉप बॉक्स जैसे अप्लायंसेज होते हैं। इन सब को बिजली से कनेक्ट करने के लिए घर में लगे सॉकेट का इस्तेमाल किया जाता है। घर मे लगने वाले हर अप्लायंसेज के लिए अलग-अलग एम्पियर के सॉकेट लगते हैं। किस अप्लायंस के लिए कितने एम्पियर का सॉकेट लगवाना चाहिए, आइए जानते हैं…

6 AMP  (एम्पियर) वाला सॉकेट

आम तौर पर ज्यादातर होम अप्लायंसेज इस 6 amp वाले सॉकेट पर काम करते हैं। लाइटिंग, पंखे, टीवी, सेट-टॉप बॉक्स आदि के लिए इस सॉकेट का यूज होता है। यह सॉकेट कम लोड वाले अप्लायंसेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

16 AMP वाला सॉकेट

यह सॉकेट हैवी लोड वाले अप्लायंसेज के लिए यूज किया जाता है। इस सॉकेट को आप घर में रखे अप्लायंसेज जैसे कि फ्रिज, मिक्सर, ग्राइंडर, वॉशिंग मशीन, गीजर, एसी, आयरन, माइक्रोवेव, मोटर आदि के लिए यूज किया जाता है। आपके घर में अगर इलेक्ट्रिक वायरिंग होती है, तो आप उन जगहों पर 16 एम्पियर का ही सॉकेट लगवाएं, जहां ये हैवी लोड वाले अप्लायंसेज इस्तेमाल करना हो।

20/25 AMP वाला सॉकेट

यह सॉकेट आम तौर पर बहुत ज्यादा लोड जैसे कि इंडक्शन कुकटॉप, इन्वर्टर और हैवी अप्लायंसेज के लिए यूज होता है। हालांकि, ये सब अप्लायंसेज 16 amp वाले सॉकेट पर भी काम करते हैं, लेकिन अगर अप्लायंसेज का पावर कंजम्पशन ज्यादा है, तो इसके पिघलने का खतरा रहता है। ऐसे में शॉर्ट-सर्किट हो सकता है।

भूलकर भी न करें ये काम

इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई के लिए सॉकेट एक कनेक्टर का काम करता है, जहां से इलेक्ट्रिसिटी को अप्लायंसेज में सप्लाई किया जाता है। 6 amp वाले सॉकेट में अगर आप हैवी लोड वाले अप्लायंसेज कनेक्ट करेंगे तो यह गर्म होकर पिछल सकता है। ऐसे में शॉर्ट-सर्किट लगने का खतरा रहेगा। इसलिए घर में इस्तेमाल किए जाने वाले हैवी लोड वाले अप्लायंसेज को आप पावर सॉकेट में ही यूज करें।

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