Thursday, June 11, 2026
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चील सी रफ्तार और जैमिंग बेअसर, सेना को मिले 106 अग्निवेग सुसाइड ड्रोन


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चील सी रफ्तार और जैमिंग बेअसर, सेना को मिले 106 अग्निवेग सुसाइड ड्रोन

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Agniveg Kamikaze Drone: भारतीय सेना को एसएमपीपी डिफेंस फर्म से 106 स्वदेशी अग्निवेग पीसकीपर टर्बोजेट सुसाइड ड्रोन मिले हैं. यह ड्रोन 450 किमी/घंटा की रफ्तार और 180 किमी रेंज के साथ दुश्मन के कमांड सेंटर्स को तबाह कर सकता है. इसकी मारक सटीकता 5 मीटर से कम है और यह दुश्मन की भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग व स्पूफिंग को भी बेअसर कर देता है. यह आत्मनिर्भर भारत के तहत सेना की ताकत बढ़ाएगा.

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भारतीय सेना की ताकत और बढ़ गई है.

भारतीय सेना को आधुनिक ड्रोन युद्ध में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है. देश की जानी-मानी डिफेंस फर्म एसएमपीपी ने भारतीय सेना को 106 बेहद आधुनिक टर्बोजेट-संचालित ‘अग्निवेग’ (पीसकीपर) कामिकेज़ सुसाइड ड्रोन की डिलीवरी पूरी कर दी है. रक्षा क्षेत्र में इसे एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है क्योंकि ये ड्रोन पारंपरिक तोपखाने और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के बीच के बड़े अंतर को पाटेंगे. ये ड्रोन दुश्मन की सीमा में बेहद अंदर घुसकर उनके कमांड सेंटर्स और रडार ठिकानों को पलक झपकते ही तबाह करने की ताकत रखते हैं.

सबसे खास बात यह है कि इन स्वदेशी सुसाइड ड्रोन्स को भारतीय सेना में ऐसे समय पर शामिल किया गया है, जब यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया है कि आधुनिक लड़ाई का रुख अब मानवरहित और सटीक मार करने वाले ड्रोन सिस्टम ही तय कर रहे हैं. इन ड्रोन्स की आपूर्ति महज 6 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर पूरी की गई है जो भारतीय रक्षा निर्माण उद्योग की बढ़ती रफ्तार को बयां करता है.

अग्निवेग पीसकीपर ड्रोन की 5 सबसे बड़ी और घातक खूबियां

• रफ्तार और मारक क्षमता का बेजोड़ कॉम्बिनेशन: अग्निवेग ड्रोन 450 किलोमीटर प्रति घंटे की अत्यधिक तेज रफ्तार से उड़ान भर सकता है. इसकी आपरेशनल रेंज 180 किलोमीटर तक है जिसका मतलब है कि यह दुश्मन के इलाके में गहरी पैठ बनाकर उनके लॉजिस्टिक हब और महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद कर सकता है.

• सटीकता में नंबर 1: सेना द्वारा किए गए कड़े यूजर ट्रायल्स के दौरान इस ड्रोन ने सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) के तहत 5 मीटर से भी कम का सटीक निशाना प्रदर्शित किया. यानी यह अपने टारगेट से 5 मीटर भी नहीं भटकता और एकदम पिन-पॉइंट स्ट्राइक (सटीक हमला) करता है.

• इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और जैमिंग भी बेअसर: दुश्मन के इलाके में मजबूत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जैमिंग वाले माहौल में भी यह ड्रोन पूरी तरह सुरक्षित रहकर अपना मिशन पूरा कर सकता है. दुश्मन की सेना चाहकर भी इसे हैक, जैम या इसके जीपीएस को स्पूफ (भ्रमित) नहीं कर पाएगी.

• कम लागत में मिसाइल जैसा असर: यह ड्रोन सिस्टम भारतीय सैन्य कमांडरों को बेहद कम लागत में एक बड़ा विकल्प देता है. पारंपरिक और बेहद महंगी मिसाइलों की तुलना में ये कामिकेज ड्रोन एक चौथाई खर्च में दुश्मन को उतना ही भारी और घातक नुकसान पहुंचा सकते हैं.

• भविष्य के लिए और भी एडवांस वेरिएंट तैयार: एसएमपीपी कंपनी ने सेना को वर्तमान ऑर्डर के तहत 100 ऑपरेशनल ड्रोन और 6 ट्रेनिंग ड्रोन सौंप दिए हैं. इसके साथ ही कंपनी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना को इससे भी ज्यादा दूरी तक मार करने वाले (एक्सटेंडेड रेंज) वेरिएंट का प्रस्ताव भी दे दिया है.

रणनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण
पीसकीपर (अग्निवेग) ड्रोन का भारतीय सेना में शामिल होना इस बात का साफ संकेत है कि भारत अब भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है. अप्रैल 2026 में ही भारतीय सेना ने मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) और लोइटरिंग म्यूनिशन्स (सुसाइड ड्रोन) को लेकर अपना एक विस्तृत टेक्नोलॉजी रोडमैप जारी किया था. यह डिलीवरी उसी रणनीति का हिस्सा है. टर्बोजेट इंजन होने की वजह से इन ड्रोन्स की गति सामान्य ड्रोन्स से कहीं ज्यादा है, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को इन्हें ट्रैक करने और मार गिराने के लिए बेहद कम समय मिलेगा.

इसके अलावा अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग वाले माहौल में भी काम करने की इसकी क्षमता इसे भारत की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं (पाकिस्तान और चीन सीमा) के लिए बेहद उपयोगी बनाती है, जहाँ दुश्मन अक्सर जीपीएस जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करता है. यह डिलीवरी रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी मजबूत करती है, क्योंकि अब भारत को ऐसे घातक हथियारों के लिए दूसरे देशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा.

सवाल-जवाब
अग्निवेग (पीसकीपर) ड्रोन की अधिकतम रफ्तार और मारक क्षमता की रेंज कितनी है?
अग्निवेग ड्रोन की अधिकतम रफ्तार 450 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह 180 किलोमीटर की दूरी तक जाकर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है. यह बहुत ही तेज गति से स्वायत्त (ऑटोनॉमस) सटीकता के साथ मिशन को अंजाम देने में सक्षम है.
इस ड्रोन को ‘कामिकेज़’ या सुसाइड ड्रोन क्यों कहा जा रहा है और इसकी सटीकता क्या है?
कामिकेज़ या सुसाइड ड्रोन का मतलब होता है कि यह ड्रोन खुद विस्फोटक बनकर टारगेट से सीधे टकरा जाता है और उसे ब्लास्ट कर देता है. यूजर ट्रायल में इसकी सटीकता (CEP) 5 मीटर से भी कम पाई गई है, जो इसे बेहद अचूक बनाती है.

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें



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इंग्लैंड से मैहर पहुंचे तीन विदेशी श्रद्धालु: मां शारदा के दर्शन किए, कैमा में सुनी हनुमंत कथा – Maihar News




इंग्लैंड से आए विदेशी श्रद्धालुओं के एक दल ने गुरुवार को मैहर पहुंचकर मां शारदा देवी के दर्शन किए। सभी श्रद्धालु पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ माता की पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद लिया। मां शारदा के दर्शन करने के बाद विदेशी मेहमान सतना जिले के सिद्धेश्वर धाम कैमा पहुंचे। यहां चल रही हनुमंत कथा में उन्होंने बड़ी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। इस कथा का वाचन बड़ा अखाड़ा मैहर के प्रसिद्ध संत श्री 1008 वल्लभ शरण जी महाराज कर रहे थे। कथा खत्म होने के बाद श्रद्धालुओं ने संत श्री वल्लभ शरण जी महाराज से आशीर्वाद लिया और भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर बातचीत की। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी अरुण तनय मिश्रा भी विदेशी मेहमानों के साथ मौजूद रहे और उनका सहयोग किया। अब मथुरा-वृंदावन के लिए रवाना जानकारी के मुताबिक, इंग्लैंड से आए ये तीनों श्रद्धालु मैहर और सतना का अपना धार्मिक दौरा पूरा करने के बाद आगे की यात्रा के लिए श्री कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन के लिए रवाना हो गए हैं।



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रोटी-सब्जी से हो गए बोर? रात के खाने में ट्राई करें टेस्टी बेसन पनीर चीला


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Besan Paneer Chilla Recipe: बेसन पनीर चीला उन लोगों के लिए बढ़िया डिनर विकल्प है जो हल्का, जल्दी बनने वाला और स्वादिष्ट खाना चाहते हैं. कम सामग्री और आसान विधि इसे रोजमर्रा के खाने में शामिल करने लायक बनाती है.

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बेसन पनीर चीला बनाने की आसान रेसिपी

Besan Paneer Chilla Recipe: अगर रोज रात को यही सवाल रहता है कि आज डिनर में क्या नया बनाया जाए, तो इसका जवाब आपकी किचन में पहले से मौजूद हो सकता है. कई घरों में रात के खाने का मेन्यू रोटी, सब्जी या पराठों तक सीमित रह जाता है और धीरे-धीरे वही स्वाद उबाऊ लगने लगता है. ऐसे में अगर आप कुछ ऐसा चाहते हैं जो जल्दी बन जाए, ज्यादा भारी न लगे और खाने में भी मजेदार हो, तो बेसन पनीर चीला एक शानदार विकल्प हो सकता है. यह डिश स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन देती है.

खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा तैयारी या लंबे समय की जरूरत नहीं होती. बच्चों से लेकर बड़े तक इसे आसानी से पसंद कर लेते हैं और यह डिनर को थोड़ा अलग और दिलचस्प बना देता है.

क्यों बन रहा है बेसन पनीर चीला लोगों की पसंद?
आजकल लोग ऐसे डिनर विकल्प तलाश रहे हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ हल्के और जल्दी बनने वाले भी हों. बेसन पनीर चीला इसी वजह से धीरे-धीरे घरों में लोकप्रिय हो रहा है. बेसन में मौजूद प्रोटीन और पनीर की अच्छी मात्रा इसे पेट भरने वाला बनाती है, जबकि यह ज्यादा तला-भुना भी नहीं होता. कई लोग देर रात भारी खाना खाने से बचते हैं. ऐसे में यह रेसिपी उन लोगों के लिए भी अच्छी मानी जाती है जो हल्का लेकिन संतुष्ट करने वाला डिनर चाहते हैं. साथ में हरी चटनी या दही हो तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है.

बेसन पनीर चीला बनाने के लिए जरूरी सामग्री
1. 1 कप बेसन
2. 100 ग्राम कद्दूकस किया हुआ पनीर
3. 1 छोटा प्याज बारीक कटा हुआ
4. 1 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
5. 2 बड़े चम्मच हरा धनिया
6. आधा छोटा चम्मच अजवाइन
7. एक चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
8. आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
9. स्वादानुसार नमक
10. लगभग तीन चौथाई कप पानी
11. 1 से 2 छोटे चम्मच तेल या घी

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

बेसन का घोल कैसे तैयार करें?
स्मूद बैटर ही देगा अच्छा स्वाद
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में बेसन लें और उसमें हल्दी, लाल मिर्च, अजवाइन और नमक मिला दें. अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए ऐसा घोल तैयार करें जिसमें गांठें न रहें. घोल बहुत पतला भी न हो और बहुत गाढ़ा भी नहीं. घोल तैयार होने के बाद उसे 5 से 10 मिनट के लिए ढककर रख दें. इससे बेसन थोड़ा सेट हो जाता है और चीला ज्यादा मुलायम बनता है.

पनीर की स्टफिंग तैयार करने का आसान तरीका
एक अलग बाउल में कद्दूकस किया हुआ पनीर लें. उसमें प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. अगर आपको थोड़ा अलग स्वाद पसंद है तो हल्का चाट मसाला या काली मिर्च भी डाल सकते हैं. इससे स्टफिंग ज्यादा फ्लेवरफुल बन जाती है.

ऐसे बनाएं होटल जैसा बेसन पनीर चीला
तवा गर्म करें और उस पर हल्का तेल लगाएं. अब एक करछी बेसन का घोल डालकर गोल आकार में फैला दें. जब चीला थोड़ा पकने लगे तो उसके ऊपर तैयार पनीर स्टफिंग फैलाएं. इसके बाद ऊपर से थोड़ा सा बेसन घोल डालें ताकि स्टफिंग अच्छी तरह सेट हो जाए. किनारों पर थोड़ा तेल या घी डालें और मध्यम आंच पर पकाएं. जब नीचे की तरफ सुनहरा रंग आने लगे तो चीले को पलट दें और दूसरी तरफ से भी सेंक लें. कुछ मिनट बाद आपका बेसन पनीर चीला तैयार होगा.

डिनर को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो ऐसे सर्व करें
इसे हरी चटनी, दही या हल्के सलाद के साथ परोसें. कई घरों में लोग इसके साथ पुदीना चटनी या मसाला दही भी पसंद करते हैं. इससे डिनर ज्यादा बैलेंस्ड और स्वादिष्ट महसूस होता है. अगर आप रोज-रोज एक जैसा डिनर खाकर बोर हो चुके हैं और कम समय में बनने वाली नई रेसिपी तलाश रहे हैं, तो बेसन पनीर चीला एक आसान और स्वाद से भरपूर विकल्प हो सकता है. यह ऐसा खाना है जो जल्दी तैयार होता है और खाने के बाद भारीपन भी नहीं देता.

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Keerti Rajpoot

मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें



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MDA का बुलडोजर एक्शन, अवैध कॉलोनी और निर्माण किए ध्वस्त: नोटिस के बावजूद नहीं रुका निर्माण, पुलिस की मौजूदगी में 12,500 वर्गमीटर में चला ध्वस्तीकरण अभियान – Muzaffarnagar News




मुज़फ्फरनगर। MDA ने गुरुवार शाम सहारनपुर रोड स्थित दो बड़े अवैध निर्माण स्थलों पर बुलडोजर चलाकर करीब 12,500 वर्गमीटर क्षेत्र में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। यह कार्रवाई जोन-4 क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से बिना स्वीकृति प्लाटिंग और निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं। एमडीए की टीम ने सबसे पहले नीरज चौहान द्वारा सहारनपुर रोड पर विकसित की जा रही लगभग 1,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल की अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया। इसके बाद भूषण ठाकुर पुत्र मेहर सिंह, ब्रजमोहन और अन्य लोगों द्वारा करीब 11,000 वर्गमीटर क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई। बताया गया कि दोनों मामलों में विकास प्राधिकरण द्वारा पहले नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए सुनवाई की गई और अवैध निर्माणों को हटाने के आदेश भी पारित किए गए थे। बावजूद इसके निर्माण गतिविधियां जारी रहने पर गुरुवार को प्राधिकरण ने मौके पर पहुंचकर बुलडोजर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान सहारनपुर रोड क्षेत्र में काफी देर तक हलचल का माहौल रहा। प्राधिकरण अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माणाधीन ढांचों, अवैध रूप से विकसित प्लॉटों और अन्य संरचनाओं को ध्वस्त किया गया। किसी भी विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। एमडीए अधिकारियों का कहना है कि शहर और उसके आसपास अवैध कॉलोनियों तथा बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्यों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों को बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि बिना प्राधिकरण की अनुमति के भूमि विकास और निर्माण कार्य न करें, अन्यथा कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। शहर में बढ़ती अवैध प्लाटिंग पर यह हाल के दिनों की बड़ी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में चिन्हित अन्य अवैध निर्माणों के खिलाफ भी जल्द इसी प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।



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43 साल पहले आया वो रुहानी सॉन्ग, उतर गया दिल में, फ्लॉप मूवी निकली मैसिव हिट


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Bollywood Timeless Movie : रिश्तों की संवेदनाएं मासूम होती है. संवेदनाओं के हर आगे हर कोई मासूम ही है. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती के स्टारडम के बीच एक ऐसे ही फिल्म रिलीज हुई थी जिसका फ्लॉप होना तय था. रिलीज के शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में इस फिल्म को दर्शक नहीं मिले. डायरेक्टर समेत फिल्म के सभी कलाकार उम्मीदें छोड़ चुके थे. सब कोई मान गया था कि इसे फ्लॉप होने से कोई बचा नहीं सकता. दिन-प्रतिदिन गहरी होती निराशा के बीच चमत्कार हुआ. कुछ ऐसा ही करिश्मा कभी शोले के साथ हुआ था. फिल्म मैसिव हिट निकली. गाने इतने कालजयी कि सुनते ही परेशान दिल को सुकून मिलता है.

कई बार जिंदगी में मासूम से सवालों का जवाब ढूंढना मुश्किल हो जाता है. एक शख्स के अतीत के रिश्ते से एक नाजायज औलाद उसकी शादीशुदा जिंदगी में आ जाती है. उसे अब अतीत पर पछतावा है, पिता की जिम्मेदारी भी निभानी है. अपने टूटते हुए घर को भी बचाना है. अब उसके सामने मासूम सा सवाल है कि वो करे तो क्या करे. उसकी पत्नी यह सब देखकर भरोसा खो चुकी है. गहरे मानसिक संताप से गुजर रही है. वो बच्चे को अपनाना चाहती है लेकिन अपना नहीं पाती. इन सबके वो मासूम बच्चा जो अपनी मां को खो चुका है, नए घर में खुद को कैसे एडजस्ट करे, अपनी जगह कैसे बनाए, उसके सामने भी मासूम सवाल है जिसका जवाब वो ढूंढने की कोशिश करता है. इन सभी मासूम सवालों का जवाब 1983 में आई एक फिल्म खूबसूरती से देती है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की चुनिंदा फिल्मों में शुमार है. फिल्म में स्वीकार्यता और क्षमादान दो ऐसे एलिमेंट है जो सभी सवालों का जवाब बन जाते हैं.

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43 साल पहले प्यार, जिम्मेदारी, नैतिकता और स्वीकार्यता का मेल कराती एक बेहतरीन फिल्म आई थी जिसका नाम था : मासूम. फिल्म 21 अक्टूबर 1983 को रिलीज हुई थी. निर्देशन शेखर कपूर ने किया था. नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी स्टारर यह फिल्म ना केवल अपने समय की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है बल्कि इसका प्रभाव हिंदी सिनेमा पर बहुत ज्यादा पड़ा. सईद जाफरी भी अहम भूमिका में थे. फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. फिल्म एरिक सहगल के 1980 के नॉवेल मैन वुमेन एंड चाइल्ड पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले गुलजार ने लिखा था. चंदन दत्त-देवी दत्त ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. चंदन दत्त बॉलीवुड लीजेंड गुरु दत्त के भाई थे. उनके प्रोडक्शन में बनी यह पहली फिल्म थी. बाद में उन्होंने ‘भावना’ फिल्म बनाई थी.

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फिल्म की कहानी डीके मल्होत्रा की है जो अपनी पत्नी इंदु और दो बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. इस खुशहाल परिवार को समय की नजर लग जाती है. डीके को पता चलता है कि अतीत के एक रिश्ते से उनका एक बेटा राहुल है. राहुल की मां का निधन हो चुका है, अब वो अकेला है. डीके अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसे घर ले आते हैं. फिल्म की कहानी इस नाजुक स्थिति को बहुत ही सटीकता के साथ दिखाती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे डीके और इंदु जीवन की कड़वी सच्चाई का सामने करते हैं. कैसे अपने रिश्ते को संभालते हैं. कैसे छोटा बच्चा राहुल नए घर में खुद की जगह बना पाता है.

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सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल आई ‘बंधन कच्चे धागों का’ में भी सेम स्टोरी लाइन थी. ‘मासूम’ टाइटल से अब तक तीन फिल्में बन चुकी हैं. 1960, 1983 और 1996 में ‘मासूम’ फिल्म आ चुकी है लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1983 में आई ‘मासूम’ फिल्म को मिली. 1960 में आई ‘मासूम’ फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था. अशोक कुमार लीड रोल में थे. सरोस ईरानी और हनी ईरानी ने बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था. फिल्म मैसिव हिट रही थी. इसी तरह 1996 में भी ‘मासूम’ टाइटल से फिल्म आई. महेश कोठारे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इंदर कुमार, आयशा जुल्का लीड रोल में थे. 1.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म मे करीब 9 करोड़ का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म भी हिट रही थी. ‘मासूम’ 1996 का एक गाना ‘काले लिबास में बदन’ खूब पॉप्युलर हुआ था. इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस फिल्म को ना बनाने की सलाह शेखर कपूर को दी थी. उनका कहना था कि ना तो फिल्म में विलेन है और ना कोई एक्शन है. कहा जाता है कि शेखर कपूर प्रोड्यूसर को किसी और फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने पहुंचे थे. 5 मिनट में प्रोड्यूसर को बोरियत फील होने लगी. शेखर कपूर ने देखा कि प्रोड्यूसर के ऑफिस में ‘मैन वुमेन एंड चाइल्ड’ नॉवेल रखा हुआ है. उन्होंने नॉवेल की स्टोरी सुना दी. प्रोड्यूसर को कहानी बहुत अच्छी लगी और वो फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए.

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‘मासूम’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 4 गाने थे. ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं’ गाने के दो वर्जन था. पहला वर्जन अनूप घोषाल और दूसरा वर्जन लता मंगेशकर ने गाया था. ‘दो नैना और एक कहानी’ आरती मुखर्जी ने गाया था. गाना असाधारण है. लीक से हटकर है. उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. फिल्म का एक और यादगार गाना ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ आज भी कितना हिट है, आप सभी जानते हैं. सभी गाने गुलजार ने लिखे थे. गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. लो बजट फिल्म के लिए पंचम दा ने अपने करियर का बेस्ट म्यूजिक तैयार किया उन्हें बेस्ड म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

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‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाने से जुड़ा किस्सा दिलचस्प है. दरअसल गीतकार गुलजार अपनी बेटी मेघना गुलजार के लिए हर साल एक फनी कविता लिखा करते थे. ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाना उसी किताब से लिया गया था. गाने के शुरुआती लाइनें संगीतकार उत्तम सिंह की बेटी गुरुप्रीत कौर ने गाई थीं. वो उस समय सिर्फ चार साल की थीं.

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‘मासूम’ मूवी शेखर कपूर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी. शेखर कपूर के मामा देवानंद थे. उनकी मां शीलाकांता एक्ट्रेस-पत्रकार थीं. शेखर कपूर लंदन से सीए की पढ़ाई करके भारत आए. पहले हीरो बनने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. फिर निर्देशन में हाथ आजमाया. निर्देशन की दुनिया में उन्होंने बड़ा नाम कमाया. ‘मासूम’ के बाद ‘मिस्टर इंडिया’ से उन्होंने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था. शेखर कपूर ने सतीश कौशिक से दोस्ती निभाई. उन्हें ‘मासूम’ में भी छोटा सा रोल दिया और ‘मिस्टर इंडिया’ में कैलेंडर का रोल दिया. मिस्टर इंडिया से सतीश कौशिक का करियर चमक गया.

नसीरुद्दीन शाह को ‘मासूम’ के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. यह उनका तीसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड था. इससे पहले उहें पांच बेस्ट एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. नसीरुद्दीन शाह इस फिल्म में सुप्रिया पाठक के अपोजिट नजर आए थे. वो रिश्ते में उनकी साली साहिबा हैं. नसीरुद्दीन साहब को प्रोड्यूसर ने पेमेंट नहीं दिया था, वो बहुत नाराज हुए. उन्होंने ‘भावना’ फिल्म के सेट पर खूब हंगामा किया था जहां पर प्रोड्यूसर देवी दत्त मौजूद थीं. शबाना आजमी सहित पूरी यूनिट यह सब देखकर सन्न रह गई थी.

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बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट जुगल हंसराज की यह डेब्यू फिल्म थी. उर्मिला मांतोडकर और आराधना श्रीवास्तव ने भी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया. जुगल हंसराज-उर्मिला मांतोडकर की 1994 में ‘आ गले लग जा’ में बतौर लीड एक्टर काम किया. मासूम मूवी के बजट की सटीक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी. उस साल की 14वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

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Amazon की नई सेल, 11499 रुपये में मिल रहा Realme का स्मार्टफोन


Amazon पर कल यानी 12 जून से नई सेल शुरू हो रही है। इस सेल में Realme के फोन 11,499 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीदे जा सकते हैं। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर शुरू होने वाली इस Realme Days Sale में चीनी ब्रांड के इस साल लॉन्च हुए कई फोन को सस्ते में खरीदा जा सकता है। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर बैंक डिस्काउंट के साथ-साथ एक्सचेंज ऑफर का भी लाभ मिलेगा। साथ ही, कई फोन की खरीद पर कूपन डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है।

Realme Days Sale में ऑफर

ई-कॉमर्स वेबसाइट पर आयोजित होने वाली इस सेल में Realme Narzo Power, Realme Narzo 90x, Realme Narzo N100 Lite और Realme Narzo 80 Lite की खरीद पर अच्छा डिस्काउंट दिया जा रहा है।

Realme Narzo Power

Realme Narzo Power को इस सेल में 25,999 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकता है। रियलमी का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 128GB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत 27,999 रुपये है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 8GB RAM + 256GB में आता है, जिसकी कीमत 29,999 रुपये है। अमेजन पर शुरू होने वाली सेल में इसकी खरीद पर 2,000 रुपये का एक्सचेंज ऑफर दिया जा रहा है।

Realme Narzo 90x

Realme Narzo 90x को 17,999 रुपये की शुरुआती कीमत में घर लाया जा सकता है। इस फोन को 19,499 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया है। यह फोन 6GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 128GB में आता है। इसके बेस वेरिएंट की खरीद पर 1,500 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 21,499 रुपये में आता है। रियलमी डेज सेल में यह फोन 1,000 रुपये सस्ता यानी 20,499 रुपये में मिलेगा।

Realme Narzo N100 Lite

Realme Narzo N100 Lite की खरीद पर 1,250 रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इस फोन को 14,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया है। सेल में यह फोन 500 रुपये सस्ता यानी 14,499 रुपये की शुरुआती कीमत में मिलेगा। वहीं, इसका 4GB RAM + 128GB वाला वेरिएंट 16,499 रुपये में आता है। इसे 15,249 रुपये की कीमत में खरीदा जा सकता है। वहीं, इसका 6GB RAM + 128GB वाला वेरिएंट 17,999 रुपये में मिलेगा। इसकी कीमत 18,499 रुपये है।

Realme Narzo 80 Lite

Realme Narzo 80 Lite को 11,499 रुपये की शुरुआती कीमत में घर ला सकते हैं। यह फोन 11,999 रुपये की कीमत में आता है। फोन की खरीद पर 500 रुपये का कूपन डिस्काउंट मिलेगा। यह फोन 4GB RAM + 64GB में आता है।

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कम लागत में 45 दिनो में तैयार होती है आगरा की फेमस तोरई, यूपी के दर्जनों जिलों में सप्लाई


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आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है.

आगरा: आगरा में बड़े पैमाने पर तरोई की पैदावार होती है. किसान बताते है कि कम लागत से इस फसल में उन्हें अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है. किसानों ने बताया कि आगरा की तोरई आगरा ही नहीं बल्कि यूपी के कई अलग अलग जिलों तक जाती है.इसके अलावा दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों तक सप्लाई होती है. आगरा में कई क्षेत्रों में तोरई की फ़सल तैयार की जाती है. किसान इसे जैविक खेती से तैयार करते है कोई केमिकल या कितनाशक दवा ना होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है. आगरा की तोरई लंबी और चमकदार पतली होती है जिसे देख कर ही पहचान लिया जाता है कि यह आगरा की तोरई है.

45 दिन में तैयार हो जाता है तोरई

आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है. इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी तोरई की खेती बड़े स्तर पर की जाती है. किसान ने कहा कि इस फ़सल में कम लागत आती है और अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि वह आगरा कि बड़ी बड़ी मंडियो में तोरई पंहुचाते है जिसके बाद व्यापारी अलग अलग जिलों और राज्यों मे आगरा की तोरई सप्लाई करते है.

यूपी के दर्जनो जिले में होती है सप्लाई

आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई बहुत ज्यादा मशहूर है. उन्होंने कहा कि यह लखनऊ, इलाहबाद, शहँजाबाद सहित अन्य कई जिलों तक जाती है. इसके अतिरिक्त राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में इनकी सप्लाई होती है. किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई जैविक खेती में उगाई जाती है इसमें कोई केमिकल या इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है. जिससे यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो और यही कारण है कि शुद्धता के कारण यह आस पास बेहद मशहूर है. यह देखने में एक दम लंबी और चमकदार हरी हरी होती है और शुद्ध तोरई की यही पहचान होती है. तोरई की खेती से उन्हें अच्छा पैसा मिलता है इसलिए वह कई सालों से इसकी खेती कर रहे हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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दिल्ली में समाजसेवी सुभाष गुप्ता को सम्मान: पंजाबी बाग के पार्क का हुआ नामकरण; मेयर बोले-महापुरुषों के नाम से प्रेरणा लेती है नई पीढ़ी – New Delhi News




दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने पंजाबी बाग के भगवान दास नगर में एक पार्क का नामकरण प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय सुभाष गुप्ता की स्मृति में किया। इस गरिमामय समारोह में सांसद बांसुरी स्वराज और विधायक हरीश खुराना समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। स्वर्गीय सुभाष गुप्ता को श्रद्धांजलि देते हुए मेयर प्रवेश वाही ने कहा, महान व्यक्तित्वों के नाम पर सार्वजनिक स्थानों का नामकरण केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति समर्पण और सेवा के लिए प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। स्वर्गीय गुप्ता का शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान अनुकरणीय है। समाज की अमूल्य धरोहर थे गुप्ता- सांसद सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि सुभाष गुप्ता समाज की अमूल्य धरोहर थे। उनके जनसेवा के कार्य हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। कार्यक्रम में निगम पार्षद राकेश जोशी ने इसे क्षेत्रवासियों के लिए गर्व का विषय बताया। इस पहल का उद्देश्य स्वर्गीय गुप्ता के परोपकारी जीवन और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को चिरस्थायी बनाना हैए ताकि स्थानीय नागरिक उनके आदर्शों से जुड़ सकें।



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भैरू दरवाजा नाले से हटेगा अवैध डंपिंग यार्ड: स्थाई लोक अदालत ने कचरा हटाने के आदेश दिए, कचरा जलाने पर रोक लगाई – Sawai Madhopur News




सवाई माधोपुर के भैरू दरवाजा के पास स्थित लटिया नाले में नगर परिषद ने अवैध कचरा डंपिंग यार्ड बना रखा है। जिसे समय समय पर जलाया जाता है। अब इस मामले में स्थाई लोक अदालत, सवाई माधोपुर ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर परिषद और सफाई निरीक्षक नगरपरिषद को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मौके पर बचे हुए शेष कचरे को अधिकतम 15 दिनों के भीतर वहां से हटाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने आबादी और ज्वलनशील पदार्थों के पास कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह था पूरा मामला एडवोकेट अब्दुल हासिब ने बताया कि भैरू दरवाजा स्थित ‘गुप्ता एच.पी. फ्यूल’ पेट्रोल पंप के सहायक मैनेजर रमेश सैनी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (स्थाई लोक अदालत) में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22-बी के तहत एक परिवाद दायर किया था। परिवाद में बताया गया था कि नगर परिषद पिछले कई महीनों से बरसाती लटिया नाला में पूरे शहर का कचरा अवैध रूप से डंप कर रही है।
इस कचरे के कारण न केवल दुर्गंध और महामारी फैलने का खतरा बना हुआ था, बल्कि नगर परिषद के कर्मचारी इस कचरे में आग लगा देते थे. चूंकि इस डंपिंग साइट से मात्र 60-70 फीट की दूरी पर पेट्रोल पंप और घनी आबादी क्षेत्र स्थित है, इसलिए वहां कभी भी बड़े पैमाने पर अग्निकांड और जान-माल के नुकसान की गंभीर आशंका बनी हुई थी. बार-बार लिखित शिकायतों के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित पक्ष ने अदालत की शरण ली.
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित और सदस्य जूली खण्डेलवाल की पीठ ने निम्नलिखित ऐतिहासिक आदेश जारी किए: 15 दिन में कचरा हटने का अल्टीमेटम दिया
नगर परिषद को निर्देश दिया गया है कि फोटोग्राफ्स में दिख रहे स्थान पर बचे हुए बाकी कचरे को हर हाल में अगले 15 दिनों के भीतर वहां से पूरी तरह साफ किया जाए। कचरा केवल उसी स्थान पर एकत्रित किया जाए जो कानूनन इसके लिए पहले से तय और चिन्हित है। किसी भी अनधिकृत या प्रार्थी के पेट्रोल पंप वाले स्थान पर कचरा नहीं डाला जाएगा। कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि कचरा किसी भी ऐसे स्थान पर कतई न जलाया जाए, जहां आसपास कोई ज्वलनशील पदार्थ (जैसे पेट्रोल पंप) का भंडारण हो या फिर घनी आबादी क्षेत्र हो।अदालत ने इस मामले को पूरी तरह निस्तारित करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले से स्थानीय निवासियों और पेट्रोल पंप पर आने-जाने वाली जनता ने राहत की सांस ली है, क्योंकि लंबे समय से उनके जीवन और सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा था।
अब्दुल हासिब एडवोकेट के अनुसार पिछले साल शहर में बाढ़ की वजह यह डंपिंग यार्ड से पानी का निकास नहीं होने से भी लोगों के घरों में पानी घुस गया और काफी नुकसान हुआ।



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शेखपुरा में नई कचरा नियमावली लागू: कचरा 4 श्रेणियों में बांटा जाएगा, बड़े संस्थानों को करना होगा पंजीकरण, 30 जून तक रिपोर्ट जरूरी – Sheikhpura News


शेखपुरा में गुरुवार को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2026 लागू करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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एडीएम विभागीय जांच संजय कुमार की अध्यक्षता में शेखपुरा नगर परिषद ने शहर को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और सुंदर बनाने के लक्ष्य के साथ मंथन सभागार में यह कार्यक्रम आयोजित किया।

एडीएम संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना और शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है।

नई नियमावली के अनुसार, अब कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर निस्तारित किया जाएगा।

मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा गीले कचरे में रसोई का कचरा, फल-सब्जी के छिलके और बागवानी अपशिष्ट शामिल होंगे, जिनका उपयोग खाद या बायोगैस बनाने के लिए किया जाएगा। सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री होगी, जिसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।

दूषित कचरे जैसे डायपर, सैनिटरी पैड और मास्क को कागज में लपेटकर फेंकना अनिवार्य होगा। वहीं, खतरनाक कचरे जैसे पुरानी बैटरी, ट्यूब लाइट, कीटनाशक के डिब्बे और ई-वेस्ट को सावधानी से अलग रखा जाना चाहिए, क्योंकि इनमें हानिकारक रसायन होते हैं।

30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी नियमावली में बड़े कचरा उत्पादकों जैसे होटल, अस्पताल, स्कूल और बड़े संस्थानों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी संस्थान का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है,

प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा निकलता है, या पानी की खपत प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक है, तो उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

ऐसे संस्थानों को गीले कचरे का निपटान परिसर के भीतर ही खाद या बायोगैस के माध्यम से करना होगा। साथ ही, उन्हें हर साल 30 जून तक वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी।

नगर परिषद ने पुराने डंपसाइट्स को हटाने के लिए आगामी 31 अक्टूबर की समय सीमा तय की है।



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