Sunday, July 12, 2026
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किशनगंज में मद्य निषेध SI परीक्षा आज: 6 केंद्रों पर 3000 अभ्यर्थी होंगे शामिल, रोल नंबर के अनुसार बैठने की व्यवस्था – Kishanganj (Bihar) News



बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा रविवार को अवर निरीक्षक मद्य निषेध लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा छह केंद्रों पर होगी, जिसमें 3000 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा के निष्पक्ष और कदाचारमुक्त संचालन के लिए डीएम नवीन कुमार ने अधिकारियों और केंद

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एसडीएम अनिकेत कुमार ने बताया कि प्रत्येक परीक्षार्थी की पहचान प्रवेश पत्र, आधार कार्ड और फोटो के मिलान, बायोमेट्रिक सत्यापन तथा फ्रिस्किंग प्रक्रिया आयोग के निर्धारित मानकों के अनुरूप की जाएगी। परीक्षा एक पाली में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगी। अभ्यर्थियों का प्रवेश सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे तक ही कराया जाएगा।

रोल नंबर के अनुसार बैठने की व्यवस्था

सभी केंद्राधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि परीक्षा केंद्रों के बाहर माइकिंग के माध्यम से अभ्यर्थियों को आवश्यक दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए। प्रश्नपत्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप अभ्यर्थियों की उपस्थिति में ही खोला जाएगा। रोल नंबर के अनुसार बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए रोल नंबर सूची को परीक्षा केंद्र परिसर के प्रमुख स्थानों पर चस्पा किया जाएगा।

सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी के माध्यम से सतत निगरानी रखी जाएगी। महिला अभ्यर्थियों की तलाशी महिला दंडाधिकारी और महिला पुलिस बल द्वारा, जबकि पुरुष अभ्यर्थियों की तलाशी पुरुष दंडाधिकारी और पुरुष पुलिस बल द्वारा कराई जाएगी। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैलकुलेटर और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।



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छेड़छाड़ के आरोप में युवक की पिटाई, VIDEO: बरगवां में दो युवतियों ने सड़क पर पीटा; थाने में अब तक शिकायत नहीं – Singrauli News




सिंगरौली जिले के बरगवां थाना क्षेत्र में युवक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब एक हफ्ते पहले रेलवे ओवरब्रिज के पास दो युवतियों ने छेड़छाड़ और अभद्र टिप्पणी से नाराज होकर युवक की पिटाई कर दी थी। हालांकि, मामले में अब तक किसी भी पक्ष ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। रेलवे ओवरब्रिज के पास राहगीरों ने बनाया वीडियो जानकारी के मुताबिक, घटना बरगवां थाना क्षेत्र के रेलवे ओवरब्रिज के पास की है। स्थानीय निवासी आंचल तिवारी ने बताया कि सोमवार शाम दो युवतियां एक युवक की पिटाई कर रही थीं। पूछने पर युवतियों ने बताया कि बाजार से गुजरने के दौरान युवक ने उन पर अभद्र टिप्पणी की थी। इससे नाराज होकर उन्होंने युवक की पिटाई कर दी। घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस बोली-शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी दैनिक भास्कर से बातचीत में बरगवां थाना प्रभारी अनिल पटेल ने बताया कि पुलिस को घटना की जानकारी है। सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन किसी भी पक्ष ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई। थाना प्रभारी ने कहा कि यदि किसी भी पक्ष की ओर से शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।



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पहाड़ी रसोई का असली स्वाद है पोटा कलेजी, जानें इसे बनाने का आसान तरीका


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पहाड़ी रसोई का असली स्वाद है पोटा कलेजी, जानें इसे बनाने का आसान तरीका

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उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पहाड़ी मुर्गी का पोटा-कलेजी पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय व्यंजन माना जाता है. जाखिया, जंबू और पहाड़ी लहसुन जैसे स्थानीय मसालों के साथ लोहे की कढ़ाई में तैयार यह डिश स्वाद के साथ पोषण भी देती है. मंडुवे की रोटी या झंगोरे के भात के साथ परोसा जाने वाला यह व्यंजन आज भी पहाड़ी खानपान की खास पहचान बना हुआ है.

उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पहाड़ी मुर्गी का पोटा-कलेजी स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन माना जाता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले पोटा और कलेजी को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद हल्दी, नमक और थोड़ा सा लहसुन-अदरक लगाकर कुछ देर मेरिनेट करें. लोहे की कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें जाखिया या जीरा डालें. फिर प्याज, टमाटर, लहसुन और अदरक को सुनहरा होने तक भूनें. मसालों में हल्दी, धनिया और लाल मिर्च मिलाने के बाद पोटा-कलेजी डालकर अच्छी तरह चलाएं. थोड़ी मात्रा में पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं. जब मसाला अच्छी तरह चढ़ जाए तो ऊपर से हरा धनिया डालें. यह व्यंजन मंडुवे की रोटी या चावल के साथ स्वादिष्ट लगता है.

कुशल गृहिणी किरन पांडे बताती है कि पहाड़ के कई घरों में आज भी लोहे की कढ़ाई में खाना पकाने की परंपरा बनी हुई है. पोटा-कलेजी को लोहे की कढ़ाई में पकाने से इसका स्वाद अधिक गहरा और देसी लगता है. लोहे की कढ़ाई गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे मसाले धीरे-धीरे पकते हैं, उनका स्वाद अच्छी तरह व्यंजन में घुल जाता है. लोहे के बर्तनों में भोजन पकाने से उसमें थोड़ी मात्रा में आयरन भी मिल सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. साथ ही लोहे की कढ़ाई में तैयार पोटा-कलेजी का रंग और खुशबू भी आकर्षक बनती है. सही तरीके से उपयोग और देखभाल करने पर यह कढ़ाई वर्षों तक चल सकती है.

उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों में जाखिया, जंबू और स्थानीय लहसुन का विशेष महत्व है. पोटा-कलेजी बनाते समय जाखिया का तड़का लगाने से उसमें अलग तरह की खुशबू और स्वाद आता है. जंबू को हल्का भूनकर डालने से व्यंजन का जायका और भी बढ़ जाता है. पहाड़ी लहसुन सामान्य लहसुन की तुलना में अधिक सुगंधित माना जाता है, इसलिए इसका उपयोग विशेष रूप से किया जाता है. इन मसालों का उपयोग सदियों से पहाड़ी रसोई में होता आया है. ये मसाले भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ पाचन में भी मदद करते हैं. पोटा-कलेजी जैसे पारंपरिक व्यंजनों में इनका प्रयोग आज भी खूब किया जाता है.

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पोटा और कलेजी को पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी-12 और कई आवश्यक खनिज पाए जाते हैं. कलेजी में आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, इसलिए इसे ऊर्जा देने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है. वहीं प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के विकास और मरम्मत में मदद करता है. विटामिन बी-12 शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और तंत्रिका तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में मेहनत करने वाले लोग इसे ताकत देने वाले भोजन के रूप में भी देखते हैं. हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना चाहिए, ताकि शरीर को आवश्यक पोषण मिल सके.

पोटा-कलेजी पौष्टिक जरूर है, लेकिन इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है. डॉ ऐजल पटेल बताते हैं कि जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल, हृदय संबंधी समस्याएं या कुछ विशेष चिकित्सीय स्थितियां हैं, उन्हें कलेजी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. अधिक मात्रा में किसी भी भोजन का सेवन स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है. इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर खाना बेहतर रहता है. बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों के लिए भी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है. यदि किसी व्यक्ति को विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए. संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ जीवनशैली के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.

लोहे की कढ़ाई का सही रखरखाव उसकी उम्र बढ़ा देता है. पोटा-कलेजी बनाने के बाद कढ़ाई को हल्के गर्म पानी से साफ करें और अच्छी तरह सुखा लें. यदि कढ़ाई में नमी रह जाए तो उस पर जंग लग सकती है. कई ग्रामीण परिवार सफाई के बाद उसमें हल्का सरसों का तेल लगाकर रखते हैं, जिससे कढ़ाई सुरक्षित रहती है. साबुन का अधिक उपयोग करने के बजाय सामान्य सफाई करना बेहतर माना जाता है. समय-समय पर कढ़ाई को गर्म करके तेल लगाने से उसकी सतह मजबूत बनी रहती है. अच्छी तरह रखी गई लोहे की कढ़ाई वर्षों तक उपयोग में लाई जा सकती है, और भोजन को पारंपरिक स्वाद देने में मदद करती है.

उत्तराखंड में पोटा-कलेजी को अक्सर मंडुवे की रोटी, गेहूं की रोटी या झंगोरे के भात के साथ परोसा जाता है. मंडुवा पहाड़ का पारंपरिक अनाज है, जो पौष्टिकता के लिए जाना जाता है. जब गर्मागर्म पोटा-कलेजी को मंडुवे की रोटी के साथ खाया जाता है, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. कई लोग इसके साथ पहाड़ी मूली, हरी मिर्च और भांग की चटनी भी परोसते हैं. यह संयोजन स्थानीय खानपान की पहचान माना जाता है. पर्वतीय क्षेत्रों में पारिवारिक समारोहों और विशेष अवसरों पर भी यह व्यंजन बनाया जाता है. स्थानीय खाद्य परंपराओं को पसंद करने वाले लोगों के बीच यह आज भी लोकप्रिय बना हुआ है.

यदि आप स्वादिष्ट पोटा-कलेजी बनाना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. हमेशा ताजा पोटा और कलेजी का उपयोग करें तथा उसे अच्छी तरह साफ करें. मसालों को धीमी आंच पर भूनने से उनका स्वाद बेहतर निकलकर आता है. लोहे की कढ़ाई में पकाने से मसाले और मांस अच्छी तरह गलते हैं. अधिक पानी डालने से स्वाद हल्का हो सकता है, इसलिए जरूरत के अनुसार ही पानी मिलाएं. पकने के बाद ऊपर से हरा धनिया और हरी मिर्च डालने से स्वाद बढ़ जाता है. यदि उपलब्ध हो तो जाखिया और जंबू जैसे स्थानीय मसालों का उपयोग करें. सही सामग्री और धैर्य के साथ पकाया गया पोटा-कलेजी व्यंजन हर किसी को पसंद आ सकता है.

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रिटायरमेंट का फंड सेविंग्स अकाउंट में है? सिर्फ एक गलती भी पड़ेगी भारी


रिटायरमेंट के लिए की गई बचत भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का आधार होती है. ऐसे में अगर आपके पीएफ, एनपीएस या किसी अन्य रिटायरमेंट सेविंग्स अकाउंट में नाम, नॉमिनी, बैंक डिटेल्स या जमा राशि से जुड़ी कोई गलती हो जाए, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. छोटी सी चूक भी बाद में क्लेम या पैसे निकालने के समय परेशानी खड़ी कर सकती है.

अच्छी बात यह है कि ऐसी ज्यादातर गलतियों को ठीक कराने का तरीका मौजूद है. अगर समय रहते सही तरीका अपनाया जाए और जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखे जाएं, तो पैसों से जुड़ी समस्या का समाधान आसान हो सकता है.

सही जानकारी रखें

सबसे पहले यह समझें कि दिक्कत आखिर है क्या. अपने रिटायरमेंट अकाउंट का स्टेटमेंट ध्यान से देखें और जांचें कि हर महीने योगदान (कॉन्ट्रिब्यूशन) सही तरीके से जमा हो रहा है या नहीं. साथ ही नाम, जन्मतिथि, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर, पता और नॉमिनी जैसी जानकारी भी मिलाकर देखें. अगर जमा राशि कम दिख रही है या कई महीनों का योगदान नहीं दिख रहा है, तो सबसे पहले अपने नियोक्ता (कंपनी) या संबंधित संस्था से बात करें. कई बार तकनीकी या रिकॉर्ड से जुड़ी छोटी गलती समय रहते पकड़ ली जाए तो उसे जल्दी ठीक किया जा सकता है. शिकायत करने से पहले स्टेटमेंट, मैसेज, ईमेल या अन्य रिकॉर्ड अपने पास जरूर रखें.

जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार करें

जब भी किसी गलती को ठीक कराने के लिए आवेदन करें, उससे पहले जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार रखें. इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, अकाउंट स्टेटमेंट और जरूरत पड़ने पर कंपनी से मिला संबंधित प्रमाण शामिल हो सकता है. सही दस्तावेज होने से आपकी शिकायत पर कार्रवाई तेज हो सकती है. शिकायत हमेशा संबंधित संस्था के आधिकारिक पोर्टल, मोबाइल ऐप, हेल्पलाइन या ईमेल के जरिए ही करें. उदाहरण के लिए, ईपीएफ से जुड़ी समस्या होने पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है, जहां शिकायत का रजिस्ट्रेशन नंबर भी मिल जाता है. इस नंबर की मदद से बाद में अपने आवेदन की स्थिति आसानी से देखी जा सकती है.

स्टेट्स जरूर चेक करें

शिकायत दर्ज करने के बाद उसका स्टेटस नियमित रूप से चेक करते रहें. अगर संबंधित विभाग की ओर से कोई अतिरिक्त डॉक्यूमेंट या जानकारी मांगी जाए, तो उसे जल्द उपलब्ध कराएं. अगर तय समय के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी या उपलब्ध कस्टमर केयर के माध्यम से मामला आगे बढ़ाया जा सकता है. शिकायत करते समय पहले दर्ज किए गए आवेदन का नंबर और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट साथ रखें.

इसके अलावा, भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचने के लिए अपने रिटायरमेंट अकाउंट की समय-समय पर चेक करते रहें. अगर बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर, पता या नॉमिनी में कोई बदलाव हो, तो उसे जल्द अपडेट कर दें. इससे रिटायरमेंट के समय क्लेम या निकासी का प्रोसेस आसान रहता है.



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कोटा में 67-परीक्षा केंद्रों पर सीनियर टीचर भर्ती एग्जाम: लास्ट मिनट पर भागते नजर आए अभ्यर्थी, 1 घंटे पहले बंद हुए गेट – Kota News




राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा को लेकर कोटा में कड़े सुरक्षा इंतजाम देखने को मिले। 67 परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभ्यर्थियों ने परीक्षा दे रहे हैं । परीक्षा शुरू होने से पहले पुलिस और स्कूल प्रशासन ने दोहरी जांच व्यवस्था लागू की, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। आरपीएससी की वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा के तहत कोटा में 67 परीक्षा केंद्रों में 41 सरकारी और 26 निजी विद्यालय शामिल हैं। परीक्षा दो पारियों में हो रही है। पहली पारी सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान (ग्रुप-ए) और दूसरी पारी दोपहर 3 से शाम 5:30 बजे तक सामाजिक विज्ञान विषय की रही। दोनों पारियों में कुल 36 हजार 336 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा शुरू होने से पहले जिला कलेक्ट्रेट से पुलिस सुरक्षा के बीच प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए। उद्योग नगर स्थित इंदिरा गांधी क्षेत्र के परीक्षा केंद्र पर सुबह 9 बजे निर्धारित समय पर मुख्य गेट बंद कर दिए गए। गेट बंद होने से ठीक पहले स्कूल स्टाफ ने आवाज लगाकर बाहर मौजूद अभ्यर्थियों को बुलाया। इसी दौरान दो अभ्यर्थी दौड़ते हुए पहुंचे और समय रहते प्रवेश मिला। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सबसे पहले पुलिसकर्मियों ने मेटल डिटेक्टर से प्रत्येक अभ्यर्थी की सघन जांच की। इसके बाद स्कूल स्टाफ ने प्रवेश पत्र और पहचान पत्र सहित सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच पूरी होने के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया गया। उद्योग नगर थाने के एएसआई गिर्राज मीणा ने बताया कि हर अभ्यर्थी की बारीकी से जांच की जा रही है। किसी भी धातु की वस्तु, गले में पहनी चेन, हाथों के कड़े, चूड़ियां, बिछिया और मेटल वाले सामान को बाहर ही उतरवाया गया। जींस के बड़े मेटल बटन जैसी वस्तुओं पर भी विशेष निगरानी रखी गई। पूरी प्रक्रिया के बाद ही अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया और सुबह 10 बजे निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हुई।



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बलरामपुर में बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या: बच्चों के विवाद में बीच-बचाव करने गए थे, दोनों पक्ष सुबह में पुलिस को दी थी शिकायत – Sri Datt Ganj(Balrampur) News




श्रीदत्तगंज क्षेत्र में शनिवार की शाम में बच्चों के मामूली विवाद में बीच-बचाव करने पहुंचे 65 वर्षीय दयाराम की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शनिवार सुबह दयाराम की नातिन सावित्री गांव के पश्चिम स्थित खेत में भैंस चरा रही थी। इसी दौरान पड़ोसी शेषराम के आठ वर्षीय पोते नीरज से उसकी कहासुनी हो गई। नीरज के रोते हुए घर पहुंचने पर दोनों परिवारों के बीच विवाद शुरू हो गया। मामले की शिकायत लेकर एक पक्ष सुबह ही थाने पहुंचा और तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि शाम करीब साढ़े छह बजे विपक्षी पक्ष के लोग दोबारा दयाराम के घर पहुंच गए और कहासुनी करने लगे। विवाद बढ़ने पर दयाराम बीच-बचाव के लिए पहुंचे। इसी दौरान आरोपियों ने उनकी पिटाई कर दी और गमछे से गला कस दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक के नाती बुधराम ने आरोप लगाया कि यदि सुबह दी गई शिकायत पर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो यह घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने कहा कि दयाराम दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह स्वयं हिंसा का शिकार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं, प्रभारी निरीक्षक अविरल शुक्ल ने बताया कि तहरीर के आधार पर शेषराम, श्यामकला, मनीषा देवी समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।



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दिशा पाटनी ने हॉलीवुड में एंट्री का खोला राज, डायरेक्टर संग काम करने का बताया अनुभव


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बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी जल्द ही फिल्म ‘हॉलीगार्ड्स सागा- द पोर्टल ऑफ फोर्स’ से अपना धमाकेदार हॉलीवुड डेब्यू करने जा रही हैं. खास बात यह है कि इस सुपरनेचुरल एक्शन थ्रिलर फिल्म का डायरेक्शन दिग्गज हॉलीवुड एक्टर-डायरेक्टर केविन स्पेसी कर रहे हैं. इस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को लेकर दिशा काफी एक्साइटेड हैं. उनका मानना है कि हॉलीवुड में काम पाने के लिए केवल भारत में बैठकर बात नहीं बन सकती, बल्कि वहां जाकर खुद को साबित करना पड़ता है. फिल्म में दिशा एक बेहद अहम और दमदार किरदार में नजर आने वाली हैं.

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हॉलीवुड डेब्यू के लिए तैयार हैं दिशा पाटनी.

नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी अब ग्लोबल लेवल पर अपने हुनर का जलवा बिखेरने के लिए तैयार हैं. वह जल्द ही ‘हॉलीगार्ड्स सागा-द पोर्टल ऑफ फोर्स’ से हॉलीवुड डेब्यू करने वाली हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का डायरेक्शन कोई और नहीं बल्कि केविन स्पेसी कर रहे हैं और यह उनका पांचवां प्रोजेक्ट है. इस फिल्म में दिशा एक बेहद अहम किरदार में नजर आने वाली हैं.

वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में दिशा पाटनी ने केविन स्पेसी के साथ काम करने का अनुभव शेयर किया. उन्होंने कहा, ‘वह वाकई कमाल के हैं. खुद एक एक्टर होने की वजह से वह अपने कलाकारों को बहुत अच्छे से समझते हैं. वह दुनिया के सबसे बेहतरीन एक्टर्स में से एक हैं. वह अपने एक्टर्स को खुलकर काम करने और नए एक्सपेरिमेंट करने का मौका देते हैं. वह हमसे हमेशा कहते हैं कि हमें सीन को अपने पर्सनल एक्सपीरिएंस से जोड़कर देखना चाहिए.’

दिशा पाटनी ने काम करने का बताया अनुभव

दिशा पाटनी ने आगे कहा, ‘वह हमें इस तरह सोचने के लिए मोटिवेट करते थे कि अगर आप ऐसी सिचुएशन में होते, तो कैसे रिएक्ट करते, क्या आप रोते, आपको कैसा महसूस होता. आप अपने इमोशन्स कैसे दिखाते. हर सुबह वह हमारे साथ बैठते थे और पूरे सीन को डिटेल में समझाते थे. मेरे लिए यह अनुभव बेहद खास था. मुझे नहीं लगता कि इससे पहले मैंने किसी भी डायरेक्टर के साथ इस तरह काम किया है. इससे आपको भी अपने कैरेक्टर को गहराई से समझने और उसे स्क्रीन पर बेहतर तरीके से उतारने की जिम्मेदारी का अहसास होता है.’

हॉलीवुड में ऑडिशन पर दिया जाता है ज्यादा जोर

इसके अलावा दिशा ने हॉलीवुड में एंट्री करने के अपने सफर पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा, ‘बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी वहां तक पहुंच कैसी है. हॉलीवुड में ऑडिशन पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाता है. आपको हर रोल के लिए ऑडिशन देना ही पड़ता है. किस्मत का भी इसमें बड़ा हाथ होता है, कभी-कभी वो बस आपका पुराना काम देखते हैं और खुद आपको प्रोजेक्ट्स या ऑडिशन ऑफर कर देते हैं.

भारत में रहकर हॉलीवुड में काम नहीं पा सकते

उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा वीजा और बाकी भाग-दौड़ जैसी टेक्निकल चीजें भी होती हैं, क्योंकि आखिर वह एक दूसरा देश है. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि आपको वहां खुद मौजूद रहना होगा. आप यहां (भारत में) बैठकर वहां के रोल हासिल नहीं कर सकते. आप यहां से ऑडिशन की क्लिप तो भेज सकते हैं, लेकिन बेहतर यही होगा कि आप वहां जाएं, कुछ समय रुकें और उसपर काम करें. हर देश के लिए यही नियम लागू होता है.’

सुपरनेचुरल थ्रिलर फिल्म है ‘हॉलीगार्ड्स सागा’

बताते चलें कि ‘हॉलीगार्ड्स सागा- द पोर्टल ऑफ फोर्स’ एक सुपरनेचुरल एक्शन थ्रिलर फिल्म है. इसे केविन स्पेसी ने डायरेक्ट किया है, जबकि इसकी कहानी सर्गेई टॉर्चिलिन और लाडो ओखोत्निकोव ने लिखी है. फिल्म में हॉलीवुड के कई बड़े चेहरे नजर आने वाले हैं, जिनमें खुद केविन स्पेसी के साथ डॉल्फ लुंडग्रेन, टायरेस गिब्सन, ब्रायना हिल्डेब्रांड, दिशा पाटनी और एरिक रॉबर्ट्स शामिल हैं. इस साल फरवरी में बर्लिन में फिल्म का एक प्राइवेट प्रीमियर रखा गया था, लेकिन इसकी वर्ल्डवाइड रिलीज डेट का ऐलान होना अभी बाकी है.

About the Author

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Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें





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अमेरिका ने ईरान में 140 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की: होर्मुज में जहाज पर अटैक के जवाब में कार्रवाई; ईरान ने कुवैत, बहरीन को निशाना बनाया




अमेरिका ने शनिवार देर रात ईरान पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। CENTCOM के मुताबिक यह हमला होर्मुज में साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में किया गया। हमले में जहाज में आग लग गई, इंजन को भारी नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य लापता है। एयरस्ट्राइक के कुछ ही देर बाद ईरान ने पलटवार का दावा किया। ईरानी सरकारी टीवी IRIB के मुताबिक, ईरानी सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। ईरान का दावा है कि कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद डिपो और रडार साइट, जबकि बहरीन में अमेरिकी कम्युनिकेशन सिस्टम और रडार साइट को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन हमलों की अमेरिका, कुवैत या बहरीन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लाग से गुजर जाइए…



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धुरंधर फेम सिंगर ने परफॉर्मेंस रोक सगाई का ऐलान किया: मंगेतर को स्टेज पर बुलाकर बोली- दिस इज माय मैन, दौड़कर गले लगीं – Ludhiana News


स्टेज दौड़कर गले लगीं जैस्मीन सैंडलस, फिर मंगेतर ने बाहों में उठाया।

पंजाबी सिंगर जैस्मीन सैंडलस के ‘द ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ के पहले कॉन्सर्ट के दौरान एक ऐसा पल सामने आया, जिसने हजारों फैंस को हैरान कर दिया। लाइव परफॉर्मेंस के बीच जैस्मिन ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक करते हुए स्टेज पर एक शख्स को बुलाया और बताया कि वही

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कॉन्सर्ट अपने पूरे रंग में था और फैंस जैस्मिन के गानों पर झूम रहे थे। इसी दौरान अचानक म्यूजिक धीमा हो गया। जैस्मिन ने एक शख्स का हाथ पकड़कर उन्हें स्टेज पर बुलाया और कहा- आई हैव अ लिटिल सीक्रेट… आई हैव अ लिटिल, मैसिव सीक्रेट। यानी मेरे पास एक छोटा सा राज है… मेरे पास एक बहुत बड़ा राज है।

इसके बाद उन्होंने फैंस से उत्साह के साथ कहा- कैन यू से शेखर? कैन यू से शेखर? कैन यू से चौधरी साहब?” इस दौरान पूरा स्टेडियम तालियों और हूटिंग से गूंज उठा।

इसके बाद जैस्मिन ने अपने रिश्ते का खुलासा करते हुए कहा- मैं बुला लिया स्टेज पे… दिस इज अ मैन हू पुट अ रिंग ऑन इट। दिस इज माय मैन, एवरीबडी। यानी ये वही शख्स हैं जिन्होंने मुझे अंगूठी पहनाई है। आप सभी जान लीजिए, यही मेरे जीवनसाथी हैं।

जैस्मिन की यह घोषणा सुनते ही स्टेडियम में मौजूद हजारों फैंस खुशी से झूम उठे। इसके बाद जैस्मिन दौड़कर शेखर के गले लग गईं। शेखर ने उन्हें प्यार से अपनी बाहों में उठाया। दोनों ने बैकग्राउंड में बज रहे रोमांटिक पंजाबी गाने पर साथ में डांस भी किया। स्टेज पर चल रही स्पार्कलर्स की आतिशबाजी ने इस खास पल को और भी यादगार बना दिया।

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शनिवार रात आयोजित कॉन्सर्ट का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस जैस्मिन सैंडलस को नई शुरुआत के लिए बधाई दे रहे हैं।

जैस्मीन के कॉन्सर्ट के PHOTOS देखिए….

अपने मंगेतर को जैस्मिन स्टेज पर लेकर आते हुए।

स्टेज पर फैंस को इंगेजमेंट की रिंग दिखाते हुए।

स्टेज पर फैंस को इंगेजमेंट की रिंग दिखाते हुए।

अपने साथी की उंगली पड़कर घूमते हुए जैस्मिन!

अपने साथी की उंगली पड़कर घूमते हुए जैस्मिन!

अब पढ़िए जैस्मिन का सिंगर बनने का पूरा सफर…

  • 1985 में पंजाब के जालंधर में जन्म: जालंधर में 1985 में जन्मी जैस्मिन को स्कूल की पढ़ाई से ज्यादा संगीत की क्लास पसंद थी। आज ग्लोबल पंजाबी पॉप स्टार बन चुकीं जैस्मिन को फैंस ने गुलाबी क्वीन का टैग दिया है। उनके जीवन की कहानी सिर्फ हिट गानों की नहीं है, बल्कि यह कहानी दूसरे देश में किए संघर्ष की है। फिल्म धुरंधर की हालिया ब्लॉकबस्टर सफलता और जैस्मिन के गीत ने फिर साबित कर दिया है कि उनका जादू बरकरार है।
  • 6 साल की उम्र में शुरू कर दिया था गाना: जैस्मिन सैंडलस बताती हैं कि स्कूल में उन्हें मैथ या साइंस की क्लास बोरिंग लगती थी। उनका मन हमेशा म्यूजिक क्लास में रमता था। 6 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। उनकी मां ने हमेशा उनके इस जुनून को समझा और उन्हें प्रोत्साहित किया।
  • 13 साल की उम्र में परिवार जालंधर से कैलिफोर्निया गया: जब जैस्मिन 13 साल की थी तब उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उनका परिवार स्टॉकटन, कैलिफोर्निया (अमेरिका) शिफ्ट हो गया। एक नए देश में बिना किसी दोस्त और बिना किसी जान-पहचान के जैस्मिन ने अपनी पहचान बनाई। इस मुश्किल दौर में संगीत ही उनका एकमात्र सहारा बना। उन्होंने कविताएं लिखने शुरू कीं और धीरे-धीरे उन्हें धुनों में ढालने लगीं। यहीं पर उन्होंने अपनी पंजाबी जड़ों के संगीत को वेस्ट कोस्ट हिप-हॉप के साथ मिलाकर अलग स्टाइल बनाया।
  • 20 रुपए की सीडी बेचने के लिए क्लबों के बाहर खड़ी रहीं: एक इंटरव्यू में जैस्मिन ने बताया कि सक्सेस रातों-रात नहीं मिली। इसके लिए अपने गीतों की सीडी बनाकर और उसे 20 रुपए में बेचने के लिए घर से निकलती थीं। वह अमेरिका के क्लबों के बाहर घंटों खड़ी रहती थीं। आने-जाने वाले लोगों को अपनी सीडी थमाती थीं। इस उम्मीद में कि कोई एक बार उनका संगीत सुन ले। उनके पास कोई गॉडफादर नहीं था।
जैस्मिन ने हाथ ऊपर करके दिल बनाकर फ्रेंड्स को दिखाया।

जैस्मिन ने हाथ ऊपर करके दिल बनाकर फ्रेंड्स को दिखाया।

गुलाबी एल्बम से मिली पहचान, बॉलीवुड तक पहुंचीं

जैस्मिन का 2008 में पहला गाना मुस्कान हिट हुआ। लेकिन असली पहचान उन्हें 2012 में एल्बम गुलाबी से मिली, जिसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया। 2014 में बॉलीवुड ने उनकी आवाज को पहचाना। सलमान खान की फिल्म किक के लिए यो यो हनी सिंह के साथ गाए गाने यार ना मिले को लोगों ने खूब पसंद किया। इस एक गाने ने जैस्मिन को रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद गैरी संधू के साथ इलीगल वेपन जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में फेमस कर दिया।

सबसे मोटी फीस और करोड़ों की नेटवर्थ

संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक जैस्मिन की फीस में जमीन-आसमान का अंतर आया है। अब जैस्मिन बॉलीवुड या फिल्म के गानों के लिए 30 लाख से 35 लाख प्रति गाना चार्ज करती हैं। उनके एक लाइव कॉन्सर्ट की फीस भी लगभग 10 लाख से 25 लाख के बीच बताई जाती है। उनकी अनुमानित नेटवर्थ लगभग 60 करोड़ रुपए है।

इंडिया टूर का शानदार आगाज

आपको बता दें कि ‘द ड्रीम गर्ल इंडिया टूर’ 11 जुलाई को दिल्ली से शुरू हुआ है। इसके बाद यह कारवां 18 जुलाई को मुंबई, 25 जुलाई को बेंगलुरु और 29 अगस्त को चंडीगढ़ पहुंचेगा। दिल्ली में हुए इस शानदार वाकये के बाद,अब फैंस को उनके अगले शोज का बेसब्री से इंतजार है।

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सिंगर जैस्मिन सैंडलस को फैंस ने रियल लाइफ धुरंधर बताया: लड़कियां छेड़ने पर परफॉर्मेंस रोकी; बोलीं- पहले इन लड़कों को बाहर निकालो

पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलस ने दिल्ली में चल रहे लाइव शो में लड़कियों से की गई छेड़छ़ाड़ का मंच से विरोध किया और उन लड़कों को शो से बाहर करवा दिया। जैस्मिन सैंडलस का वीडियो वायरल हुआ तो उनके फेंस ने उन्हें रियल लाइफ धुरंधर बोलना शुरू कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)



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फिल्म स्टार ने ठुकरा दिया प्यार, ताउम्र कुंवारी रही हीरोइन, दर्दभरी लव स्टोरी


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सुलक्षणा पंडित हिंदी सिनेमा की खूबसूरत और कुशल प्लेबैक सिंगर थीं. उन्होंने 70 और 80 के दशक में कई सुपरस्टार्स के साथ काम किया. उन्होंने महज 9 साल की उम्र में सिंगिंग करियर शुरू किया और ‘संकल्प’ फिल्म से फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता. हालांकि, एक्ट्रेस की निजी जिंदगी दुखद रही. फिल्म ‘उलझन’ के दौरान उन्हें एक्टर संजीव कुमार से प्यार हुआ, लेकिन शादी का ऑफर ठुकराए जाने से उनका दिल टूट गया. उन्हें बाद में मां के निधन ने गहरा सदमा दिया. आखिरकार, 6 नवंबर 2025 को संजीव कुमार की पुण्यतिथि के ही दिन दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.

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एक्ट्रेस का उसी दिन निधन हुआ, जिस दिन संजीव कुमार ने दुनिया को अलविदा कहा था.

नई दिल्ली: सिनेमा की दुनिया में कई हीरोइनें आईं, जिन्होंने अपनी कला के दम पर सिनेमा में अलग मुकाम पाया. इन्हीं में से एक थीं- सुलक्षणा पंडित.उन्होंने न सिर्फ अपनी दमदार एक्टिंग बल्कि अपनी सुरीली आवाज से भी लाखों दिलों पर राज किया. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 12 जुलाई 1954 को जन्मी सुलक्षणा पंडित एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थीं जहां नस-नस में संगीत बसा था. उनके पिता और चाचा क्लासिकल सिंगर थे, वहीं 90 के दशक में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्मों में सुपरहिट गाने देने वाली जतिन-ललित की जोड़ी उनके सगे भाई हैं. सुलक्षणा पंडित ने 70-80 के दशक में अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, जितेंद्र और विनोद खन्ना जैसे सुपरस्टार्स के साथ काम किया.

घर में संगीतमय माहौल होने की वजह से सुलक्षणा बचपन से ही बहुत अच्छा गाती थीं. उन्होंने महज नौ साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था. साल 1967 में आई फिल्म ‘तकदीर’ में लता मंगेशकर के साथ ‘सात समुंदर पार से’ प्लेबैक सिंगिंग में कदम रखा. उन्होंने अपने पूरे करियर में 70 से ज्यादा फिल्मों में अपनी आवाज दी, जिसमें ‘मौसम मौसम लवली मौसम’ और ‘जब आती होगी याद मेरी’ जैसे यादगार नगमे शामिल हैं. साल 1975 में आई फिल्म ‘संकल्प’ के गाने के लिए तो उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. उन्होंने इसी साल संजीव कुमार के साथ फिल्म ‘उलझन’ से एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा, जिसके बाद उन्होंने ‘हेराफेरी’, ‘अपनापन’ और ‘वक्त की दीवार’ जैसी कई हिट फिल्मों में लीड रोल प्ले किए.

सदमे ने सुलक्षणा पंडित को अंदर से तोड़ दिया
सिनेमा की इस चमकदार दुनिया के पीछे सुलक्षणा की निजी जिंदगी दुखों से भरी रही. उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘उलझन’ की शूटिंग के दौरान को-स्टार संजीव कुमार से प्यार हो गया था. सुलक्षणा ने अपने दिल की बात बताते हुए संजीव कुमार के सामने शादी का प्रपोजल भी रखा, लेकिन संजीव कुमार ने इसे ठुकरा दिया. इससे सुलक्षणा का दिल बुरी तरह टूट गया. किस्मत का खेल देखिए कि 6 नवंबर 1985 को सिर्फ 47 साल की उम्र में संजीव कुमार का हार्ट अटैक से निधन हो गया. इस बड़े झटके के तुरंत बाद सुलक्षणा की मां भी दुनिया से चल बसीं. जिंदगी में एक के बाद एक लगे दो बड़े सदमों ने सुलक्षणा को अंदर से तोड़ दिया. वे डिप्रेशन में चली गईं. उन्होंने कभी शादी न करने का फैसला किया. उन्होंने हमेशा के लिए फिल्मी दुनिया से भी दूरी बना ली.

एक ही तारीख को सुलक्षणा-संजीव का हुआ निधन
अधूरी मोहब्बत की दास्तान का अंत भी अजीब रहा. जिस तारीख यानी 6 नवंबर को उनके प्यार संजीव कुमार ने दम तोड़ा था, ठीक उसी तारीख को उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. सुलक्षणा पंडित का 6 नवंबर 2025 को 71 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. भले ही आज वह हमारे बीच नहीं हैं और उनकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गुमनामी और तन्हाई में बीता.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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