बिहार की लग्जरी चेपुआ मछली! दिखने में चांदी जैसी, स्वाद के आगे रोहू-कतला फेल
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Bihar Famous Chepua Fish: बिहार में छोटी-बड़ी हर तरह की मछली देखने को मिलती है. बहुत से लोग छोटी मछली खाना पसंद करते हैं. आज हम बिहार की सबसे महंगी छोटी मछली की चर्चा करेंगे. इस मछली का नाम है चेपुआ. ये मछली बेहद स्वादिष्ट होती है और बिल्कुल चांदी की तरह चमकती है. आइए जानते हैं इस मछली से जुड़ी और भी कई खास बातें. आदित्य गौरव/पूर्वी चंपारण
ये है चेपुआ मछली जो कि बिहार की छोटी मछलियों में सबसे महंगी मछली मानी जाती है. नदी से निकलने के बाद ये मछली चांदी की तरह चमकती है. पूर्वी चम्पारण जिले में कई जगहों पर ये मछली 400 रुपए kg तक भी मिलती हैं. आइए जानते हैं इस मछली से जुड़ी और भी कई खास बातें.
चेपुआ मछली पौष्टिक होने के साथ-साथ काफी स्वादिष्ट भी होती है. चंपारण जिले में चेपुआ फ्राई काफी प्रसिद्ध है. इसे मसालों में फ्राई कर देने पर ये कुड़कुड़ा और काफी स्वादिष्ट लगता है. चंपारण में लोग इसे अक्सर भुजे के साथ खाना पसंद करते हैं.
पूर्वी चम्पारण का संग्रामपुर एक ऐसी जगह है जहां चेपुआ मछली काफी अधिक मिलती है. यहां बहुत सी चेपुआ मछली फ्राई की दुकानें हैं. यहां मसालों में लपेटकर चेपुआ मछली रखा जाता है. ग्राहकों के आने पर इसे फ्राई कर के पड़ोस दिया जाता है. यहां आते-जाते राहगीर भी चेपुआ फ्राई खाना पसंद करते हैं.
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तस्वीर में दिख रही नदी गंडक नदी है. इस नदी में चेपुआ मछली बड़ी संख्या में पाई जाती है. इस नदी का कुछ हिस्सा पूर्वी चंपारण तो कुछ पश्चिमी चंपारण में भी पड़ता है. इस विशेष नदी को नारायणी नदी भी कहते हैं.
ये तस्वीर संग्रामपुर मछली बाजार से ली गई है. पूर्वी चम्पारण का संग्रामपुर गंडक नदी के किनारे हीं बसा है. यहां सबसे अधिक चेपुआ मछली मिलती है. अगर आप पूर्वी चंपारण जिले से हैं और चेपुआ मछली का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो आप संग्रामपुर के मछली बाजार आ सकते हैं. यहां चेपुआ मछली अन्य जगहों से सस्ती मिलती है.
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बांसवाड़ा में 21 मई को एक सड़क हादसे में घायल 62 वर्षीय वृद्धा की रविवार को अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। मृतका आंबापुरा थाना क्षेत्र के प्रताप नगर डेरी की रहने वाली थी। अस्पताल से इलाज के बाद कमला का घर पर ही इलाज चल रहा था। 19 जून कमला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिस पर शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने रविवार को उदपुर रेफर कर दिया। उदयपुर ले जाते समय रास्ते में ही वृद्धा ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों ने बदमाशों पर टक्कर मारकर नाक की बाली और पैर के कड़े लूटने का आरोप लगाया था। इस संबंध में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। बदमाश गहने लूटकर ले गए थे जानकारी के मुताबिक प्रताप नगर डेरी निवासी कमला (62) पत्नी कमजी गत 21 मई की शाम करीब 8 बजे अपने बेटे और पुत्रवधू के साथ बाइक से जा रही थीं। इसी दौरान डेरी गांव के पेट्रोल पंप के पास बदमाशों ने उनकी बाइक को टक्कर मारकर गिरा दिया। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद कमला देवी गंभीर हालत में सड़क पर पड़ी हुई थीं, इसी का फायदा उठाकर बदमाश उनकी नाक की बाली और पैर के कड़े लूटकर फरार हो गए। हादसे के बाद घायल महिला को उपचार के लिए महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल लाया गया था, जहां उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। इस दुर्घटना में वृद्धा की कमर में गंभीर चोटें आई थीं। लूटपाट की घटना स्पष्ट नहीं ASI रवि थापा ने बताया- घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दुर्घटना में शामिल बाइक को जब्त कर लिया था। इसके साथ ही बाइक सवारों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी की गई थी। हालांकि, शुरुआती पूछताछ और जांच में अभी तक लूटपाट की घटना स्पष्ट नहीं हुई है। मामले में हर पहलू को ध्यान में रखकर अनुसंधान किया जा रहा है। उदयपुर रेफर किया, रास्ते में मौत हुई आंबापुरा थानाधिकारी निर्भयसिंह ने बताया- परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। इसी बीच, 19 जून को वृद्धा कमला देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिस पर उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार सुबह हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया, लेकिन उदयपुर ले जाते समय रास्ते में ही वृद्धा ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
इंटरनेशनल योगा डे (21 जून) के खास मौके पर सरकार ने युवाओं के लिए कमाई का एक शानदार और बिल्कुल अनोखा रास्ता खोल दिया है. अगर आप भी एक बेहतरीन और सम्मानजनक करियर की तलाश में हैं, तो सरकार के स्किल इंडिया मिशन (Skill India Mission) के तहत चल रहे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) का हिस्सा बन सकते हैं. इसके जरिए आप बिना किसी भारी-भरकम फीस के बिल्कुल मुफ्त में प्रोफेशनल योग इंस्ट्रक्टर, योग ट्रेनर या वेलनेस कोच बनने की ट्रेनिंग ले सकते हैं.
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इस फ्री ट्रेनिंग का लाभ उठाने की प्रक्रिया बेहद आसान और पूरी तरह डिजिटल है. (AI)
नई दिल्ली. आज के समय में जब पूरी दुनिया अपनी फिटनेस और मेंटल हेल्थ को लेकर परेशान है, तब भारत का प्राचीन योग विज्ञान दुनिया के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा है. यही वजह है कि अब योग सिर्फ सुबह-शाम पार्क में की जाने वाली एक्सरसाइज नहीं रह गया है, बल्कि दलाल स्ट्रीट और कॉरपोरेट वर्ल्ड की तरह यह भी एक मल्टी-बिलियन डॉलर की बड़ी इंडस्ट्री बन चुका है. भारत सरकार इस बात को अच्छी तरह समझती है, इसीलिए स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल (skillindiadigital.gov.in) के माध्यम से युवाओं को इस बढ़ती डिमांड का फायदा उठाने के लिए तैयार किया जा रहा है.
इस सरकारी पहल के तहत युवाओं को एनएसक्यूएफ लेवल 4 से लेकर लेवल 6 तक के एडवांस कोर्स कराए जा रहे हैं, जिनमें योग इंस्ट्रक्टर, योग ट्रेनर और सीनियर योग ट्रेनर जैसे प्रोफेशन्स शामिल हैं. मात्र 3 से 6 महीने की इस शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग के बाद युवाओं को एनएसडीसी (NSDC), ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टर स्किल काउंसिल और आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट दिया जाता है. यह सर्टिफिकेट इस बात की गारंटी है कि आप देश-विदेश के किसी भी कोने में जाकर एक सर्टिफाइड प्रोफेशनल के रूप में अपना काम शुरू कर सकते हैं.
सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों में भी है भारी डिमांड
एक बार जब आपके हाथ में सरकार का यह मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट आ जाता है, तो देश और दुनिया के बड़े-बड़े सेक्टर्स आपके लिए अपनी नौकरियां खोल देते हैं:
कॉर्पोरेट और प्रीमियम वेलनेस सेंटर्स: आजकल हर बड़ी आईटी और कॉरपोरेट कंपनी अपने कर्मचारियों के स्ट्रेस को कम करने के लिए ‘एम्प्लोयी वेलनेस प्रोग्राम’ चलाती है, जहां इन ट्रेनर्स को बहुत अच्छे पैकेज पर रखा जाता है. इसके अलावा बड़े जिम्स, लग्जरी स्पा, क्रूज शिप्स और रिसॉर्ट्स में भी इनकी भारी डिमांड है.
विदेशों से बंपर सैलरी के ऑफर्स: अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और मिडल ईस्ट (दुबई आदि) में भारतीय योग गुरुओं की साख बहुत ज्यादा है. भारत में जहां एक योग टीचर की शुरुआती सैलरी ₹25,000 से ₹50,000 महीना होती है, वहीं अनुभव बढ़ने पर यह ₹1.5 लाख तक पहुंच जाती है. लेकिन अगर आप विदेश का रुख करते हैं, तो यही सैलरी $2,000 से $5,000 यानी करीब ₹1.6 लाख से ₹4 लाख रुपये प्रति माह से ज्यादा हो सकती है.
कैसे करें अप्लाई और क्या है एक्स्ट्रा बेनिफिट?
इस फ्री ट्रेनिंग का लाभ उठाने की प्रक्रिया बेहद आसान और पूरी तरह डिजिटल है. इच्छुक उम्मीदवारों को सबसे पहले ‘स्किल इंडिया डिजिटल पोर्टल’ पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा, जहां पीएमकेवीवाई (PMKVY) स्कीम के अंतर्गत ‘योग इंस्ट्रक्टर’ कोर्स को सर्च करके अपने नजदीकी सरकारी ट्रेनिंग सेंटर को चुनना होगा.
वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को और मजबूत करने के लिए एक जरूरी सलाह यह भी है कि इस सरकारी सर्टिफिकेट को लेने के बाद युवा वाईसीबी (Yoga Certification Board) का लेवल-1, 2 या 3 का अतिरिक्त एग्जाम भी क्लियर कर सकते हैं. यह अतिरिक्त कदम आपको सीधे इंटरनेशनल मार्केट्स और ग्लोबल फिटनेस ऐप्स के साथ काम करने का मौका देता है, जिससे आपकी कमाई के रास्ते हमेशा के लिए खुल जाते हैं.
मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
आज सुबह से ही जब आप अपना सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे होंगे, तो आपको बस योग डे की तस्वीरों और वीडियो की बाढ़ ही दिखी होगी. बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स ने सुबह-सुबह ही या तो किसी पब्लिक इवेंट में जाकर या फिर अपने घर के शांत कोने में योग करते हुए अपनी तस्वीरें फैंस के साथ शेयर कीं. इन सितारों का साफ कहना है कि आज की इस भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में अगर मानसिक शांति चाहिए, तो योग से बेहतर कुछ नहीं.
दुनियाभर में योगा डे सेलिब्रेट किया जा रहा है. आज सुबह से ही जब आप अपना सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे होंगे, तो आपको बस योगा डे की तस्वीरों और वीडियो की बाढ़ ही दिखी होगी. बॉलीवुड के इन 5 सेलेब्स ने सुबह-सुबह ही या तो किसी पब्लिक इवेंट में जाकर या फिर अपने घर के शांत कोने में योग करते हुए अपनी तस्वीरें फैंस के साथ शेयर कीं.जिसकी फोटोज इंटरनेट पर छाई हुई हैं. चलिए देखते हैं इस लिस्ट में कौन-कौन है.
अब जब बात योग की हो, तो बॉलीवुड की ‘फिटनेस क्वीन’ शिल्पा शेट्टी कुंद्रा को कैसे भूला जा सकता है! उनके लिए योग सिर्फ कोई कसरत नहीं, बल्कि जीने का एक तरीका है. इस बार योग दिवस पर शिल्पा हरियाणा के गुरुग्राम में एक बहुत बड़े प्रोग्राम का हिस्सा बनीं. उन्होंने स्टेज पर हजारों लोगों के सामने बेहद मुश्किल आसन करके दिखाए और फैंस को समझाया कि लाइफ में अगर कुछ बड़ा करना है, तो लगातार कोशिश और अनुशासन बहुत जरूरी है.
इंडस्ट्री के सबसे फिट और एक्टिव एक्टर्स में से एक अक्षय कुमार हमेशा से नेचुरल फिटनेस और योग के बड़े फैन रहे हैं. आज योग दिवस के खास मौके पर अक्षय दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर पहुंचे. वहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया और हजारों आम लोगों के साथ चटाई पर बैठकर योग के कई कठिन आसन किए. अक्षय ने फैंस को प्यारा सा मैसेज दिया कि अगर लंबी और हेल्दी लाइफ जीनी है, तो योग को अपनी रोज की आदत बना लो.
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शाहिद कपूर भी फिटनेस के मामले में बड़े-बड़ों को टक्कर देते हैं. शाहिद ने योग दिवस पर अपनी एक रिलैक्सिंग तस्वीर शेयर करते हुए फैंस को इस दिन की बधाई दी. शाहिद का मानना है कि जिम में जाकर पसीना बहाना बॉडी के लिए अच्छा है, लेकिन मन को शांत रखने और रोज के स्ट्रेस को दूर भगाने के लिए योग का कोई मुकाबला नहीं है. वह खुद भी ध्यान को बहुत मानते हैं.
रणबीर कपूर की बहन और मशहूर ज्वैलरी डिजाइनर रिद्धिमा कपूर साहनी योग को लेकर कितनी सीरियस हैं, यह तो उनके इंस्टाग्राम से साफ पता चलता है. आज योग दिवस पर रिद्धिमा ने एक बेहद मुश्किल और एडवांस्ड योगासन करते हुए अपनी फोटो पोस्ट की, जिसे देख फैंस हैरान रह गए. रिद्धिमा ने लिखा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, अगर आप अपनी बॉडी को फ्लेक्सिबल और फुर्तीला रखना चाहते हैं, तो योग ही सबसे बेस्ट ऑप्शन है.
उर्मिला मातोंडकर ने भी योग करते हुए अपना एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में वो लोगों को योग के लिए जागरूक करते हुए नजर आ रही हैं. उन्होंने बताया कि मां की डांट के बाद उन्होंने योग करना शुरू किया था, जिसके बाद ये उनकी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन गया.
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देवरिया जिले के रुद्रपुर में मोहर्रम पर्व से पहले नगर के संवेदनशील पुराना चौक (पक्का चौक) पर रविवार को मरम्मत कार्य को लेकर विवाद हो गया। चौक पर चल रहे कार्य का कुछ लोगों ने विरोध किया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची तथा तत्काल कार्य रुकवा दिया गया। पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में दो लोगों का चालान भी किया है। नगर का पुराना चौक वर्षों से मोहर्रम और दुर्गा पूजा के दौरान संवेदनशील स्थल माना जाता है। सड़क के बीच स्थित इस चबूतरे को लेकर अतिक्रमण और निर्माण संबंधी विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। रविवार सुबह एक पक्ष द्वारा चबूतरे पर मरम्मत कार्य शुरू किए जाने की सूचना मिलते ही दूसरे पक्ष के लोगों ने आपत्ति जताई और विरोध शुरू कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर उपजिलाधिकारी अवधेश निगम, क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र राय, थाना प्रभारी कल्याण सिंह सागर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। एहतियात के तौर पर मरम्मत कार्य तत्काल रोक दिया गया। अपर पुलिस अधीक्षक आनंद पांडेय ने बताया कि स्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है और बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस ने मौके से रुद्रपुर निवासी मोइन शाह पुत्र मोहम्मद ईशु तथा मोहम्मद वालिद पुत्र मोहम्मद लतीफ को हिरासत में लेकर पूछताछ की। बाद में शांति भंग की आशंका में दोनों का चालान कर दिया गया। घटना की सूचना पर कुछ अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिससे कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा। हालांकि, प्रशासन की तत्परता और पुलिस की सतर्कता के चलते स्थिति नियंत्रण में रही। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने नगरवासियों से शांति, सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
खगड़िया के तीन अभ्यर्थियों ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में सफलता हासिल की है। इनमें वैभव वात्सल को अनुमंडल पदाधिकारी (SDM), रागिनी कुमारी को ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) और राजू कुमार को पुलिस उपाधीक्षक (DSP) का पद मिला है। वैभव वात्सल को परीक्षा में 37वीं रैंक अलौली, परबत्ता और खगड़िया शहर से जुड़े इन अभ्यर्थियों ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह उपलब्धि हासिल की है। किसी ने नौकरी के साथ तैयारी कर SDM का पद प्राप्त किया, तो किसी ने दरोगा और शिक्षिका की नौकरी के बाद RDO का पद हासिल किया। एक पूर्व सैनिक ने DSP बनकर देश सेवा का अपना जुनून जारी रखा। अलौली प्रखंड के आनंदपुर परास गांव निवासी वैभव वात्सल ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 37वीं रैंक प्राप्त कर SDM का पद हासिल किया है। ऑडिट ऑफिसर के पद पर थे कार्यरत वैभव मध्य विद्यालय अलौली के प्रधानाध्यापक आशुतोष कुमार और मध्य विद्यालय सुखासन की प्रधानाध्यापिका अस्मिता कुमारी के पुत्र हैं। वर्तमान में वे भुवनेश्वर स्थित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। व्यस्त सरकारी नौकरी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और निरंतर अध्ययन जारी रखा। वैभव ने दसवीं की पढ़ाई डीएवी पब्लिक स्कूल, खगड़िया से, इंटरमीडिएट मुजफ्फरपुर से तथा बीटेक की डिग्री आईआईटी पटना से प्राप्त की है। दरोगा और शिक्षिका के रूप में सेवा देने के बाद रागिनी कुमारी ने ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) का पद प्राप्त किया है। वायु सेना की सेवा के बाद अब DSP भारतीय वायु सेना में दो दशक तक देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिक राजू कुमार ने DSP बनकर वर्दी पहनने का अपना सपना फिर से साकार किया है। परबत्ता प्रखंड के लगार गांव निवासी तथा मध्य विद्यालय शेर के प्रधानाध्यापक हर्ष देव राय की पत्नी रागिनी कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) का पद प्राप्त किया है। उनकी सफलता से मायके सलारपुर और ससुराल लगार दोनों जगह जश्न का माहौल है। रागिनी बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं
रागिनी बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही हैं। उन्होंने पहले बिहार पुलिस में दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) के पद पर सफलता प्राप्त की, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने की इच्छा से उन्होंने उस पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बीपीएससी शिक्षिका परीक्षा उत्तीर्ण कर प्लस-टू विद्यालय में शिक्षिका के रूप में योगदान दिया। हालांकि उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। उन्होंने लगातार तैयारी जारी रखी और आखिरकार 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी बन गईं।
उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। क्षेत्र के लोगों ने कहा कि रागिनी की उपलब्धि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
20 वर्षों तक वायु सेना में देश सेवा, अब DSP बन जनता की करेंगे सेवा। राजू कुमार को परीक्षा में 440वीं रैंक मिली
राजेंद्र नगर, खगड़िया निवासी राजाराम साहु के पुत्र राजू कुमार ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 440वीं रैंक प्राप्त कर पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद पर चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है। वे बलुआही निवासी दिवंगत शिक्षक अमिय कुमार साह के दामाद तथा शिक्षक प्रदुम्न कुमार प्रसून के छोटे बहनोई हैं।
राजू कुमार ने भारतीय वायु सेना में करीब 20 वर्षों तक देश की सेवा की। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 63वीं बीपीएससी परीक्षा में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तथा 64वीं बीपीएससी परीक्षा में राजस्व अधिकारी के पद पर सफलता हासिल की थी। लेकिन उनका सपना हमेशा वर्दी पहनकर जनता की सेवा करना था। इसी उद्देश्य से उन्होंने तैयारी जारी रखी और 70वीं बीपीएससी में डीएसपी पद पर चयनित होकर अपना सपना साकार कर लिया।
उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। उनके साले एवं शिक्षक नवनीत कुमार सहित अनेक लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि राजू कुमार का संघर्ष, अनुशासन और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने तीनों अभ्यर्थी
70वीं बीपीएससी में जिले के इन तीन प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों की सफलता ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता निश्चित मिलती है। नौकरी के साथ तैयारी कर एसडीएम बनने वाले वैभव वात्सल, कई पड़ाव पार कर आरडीओ बनने वाली रागिनी कुमारी और वायु सेना में 20 वर्ष की सेवा के बाद डीएसपी बनने वाले राजू कुमार आज खगड़िया के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। जिले के विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों ने तीनों सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
शाजापुर जिले में इस वर्ष मानसून की आमद लगभग 15 दिन देरी से होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। जिले में तीन लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होती है, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण अब तक बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। खेत तैयार, बारिश का इंतजार कर रहे किसान किसानों ने खेतों की जुताई, खाद और बीज की तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन मिट्टी में नमी पर्याप्त न होने के कारण बुवाई रुकी हुई है। किसानों को अब मानसून की सक्रिय बारिश का इंतजार है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. डी.के. तिवारी ने किसानों को सलाह दी है कि वे कम से कम चार इंच बारिश होने के बाद ही सोयाबीन की बुवाई करें। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर 25 से 30 जून का समय सोयाबीन बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि यदि मानसून में और देरी होती है तो दो से तीन इंच बारिश के बाद ही मिट्टी में पर्याप्त नमी सुनिश्चित कर बुवाई करनी चाहिए। जल्दबाजी में बुवाई से नुकसान का खतरा डॉ. तिवारी ने चेतावनी दी कि कम बारिश में बुवाई करने पर यदि 10 से 15 दिनों तक सूखा पड़ता है तो बीज अंकुरित नहीं हो पाएंगे। इससे फसल खराब होने की आशंका रहती है और किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि जुलाई के बाद बुवाई में देरी होने पर सोयाबीन की पैदावार पर असर पड़ सकता है। देर से बोई गई फसल में पौधों की वृद्धि कम होती है और कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। 22 से 25 जून के बीच मानसून सक्रिय होने की संभावना भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य समय से पीछे चल रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने शाजापुर जिले में मानसून की सक्रिय आमद 22 से 25 जून के बीच होने की संभावना जताई है। इसके बाद जिले में व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की उम्मीद है, जिससे खरीफ फसलों, विशेषकर सोयाबीन की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।
BPSC के इंटरव्यू में इस सवाल का जवाब देकर सचिन बन गए SDM, मिली 102वीं रैंक
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BPSC Success Story: 70वीं बीपीएससी में जमुई के सचिन ने सफलता पाई है. इसमें उन्हें 104 रैंक मिला है. अब वह एसडीएम बन गए हैं. सचिन जमुई जिले के खैरा प्रखंड के रहने वाले हैं. उन्होंने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की है. उन्होंने इंटरव्यू में कुछ मजेदार सवाल भी बताएं. जानिए इनकी सक्सेस स्टोरी.
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जमुई: 70वीं बीपीएससी का रिजल्ट 20 जून को जारी कर दिया गया. इसमें कई लोगों ने बाजी मारी. जमुई के सचिन ने भी एसडीएम बने हैं. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए कई यादे साझा की. बताया कि इंटरव्यू में कई बार ऐसे मजेदार सवाल पूछे जाता हैं. जिसका जबाव देने के अभ्यर्थी के पसीने छूट जाते हैं. ऐसा ही जमुई के सचिन के साथ हुआ. उनके एक ऐसा सवाल पूछा गया जिसे सुनकर उन्हें पहले तो मुश्किल हुई. लेकिन इसका जवाब देकर सचिन एसडीएम बन गए हैं. दरअसल 70वीं बीपीएससी में जमुई के सचिन ने सफलता पाई है. इसमें उन्हें 104 रैंक मिला है. अब वह एसडीएम बन गए हैं. सचिन जमुई जिले के खैरा प्रखंड के रहने वाले हैं. उन्होंने चौथे प्रयास में यह सफलता हासिल की है. इस से पहले वह बेगूसराय में राजस्व अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे.
चौथे प्रयास में सचिन को मिली यह सफलता सचिन ने बताया कि उन्होंने चौथे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की है. उन्होंने बताया कि पहले दो प्रयास में सचिन ने प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सके थे. तीसरी बार उन्होंने बीपीएससी उत्तीर्ण किया और उन्हें राजस्व अधिकारी का पद मिला. वर्तमान में सचिन बेगूसराय जिले के बखरी में राजस्व अधिकारी के रूप में पदस्थापित थे. इसके बाद उन्होंने इस बार फिर से बीपीएससी पास किया है. सचिन ने इस से पहले लोको पायलट सहित तीन और अलग नौकरी हासिल की, लेकिन सबको छोड़कर उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में हिस्सा लिया.
इंटरव्यू में पूछा गया था यह मजेदार सवाल सचिन ने बताया कि बीपीएससी के इंटरव्यू में उनसे बड़ा ही मजेदार सवाल पूछा गया था. उन्होंने कहा कि चूंकि मैं राजस्व अधिकारी के रूप में काम कर रहा था. इसलिए इंटरव्यूअर ने मुझसे पूछा कि अंचल कार्यालय को भ्रष्टाचार का स्वर्ग क्यों कहा जाता है. सचिन ने बताया कि इस सवाल को सुनकर मैं हैरान रह गया. जवाब में मैंने कहा कि अभी मुझे केवल छह महीने ही हुए हैं और मैं अभी खुद ट्रेनिंग कर रहा हूं, इसलिए मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. सचिन ने बताया कि वो यूपीएससी की परीक्षा पास करना चाहते हैं, तथा टीना डाबी को देखकर उन्हें प्रेरणा मिली.
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
कीर स्टार्मर 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के पीएम बने थे।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। साथ ही वे अपने पद छोड़ने का रोडमैप भी बता सकते हैं। यह दावा ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ की रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों और ट्रेड यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद तय किया है कि उनका पद पर बने रहना अब मुश्किल है। हालांकि, रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि स्टार्मर अभी भी प्रधानमंत्री के तौर पर अपने काम करने पर ध्यान दे रहे हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक स्टार्मर की लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए या अपने पद छोड़ने की समयसीमा घोषित करनी चाहिए। स्टार्मर के खिलाफ हुए सांसद, हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी के कुल सांसदों का करीब एक चौथाई हैं।
अगर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं, तो ब्रिटेन के 10 साल के इतिहास में वे छठे ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जिन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक अपना कार्यकाल खत्म करने से पहले ही पीएम पद छोड़ चुके हैं।
ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ और ‘द संडे टेलिग्राफ’ ने रविवार को प्रधानमंत्री स्टार्मर के इस्तीफे के बारे में छापा।
स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा
स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा।
स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी।
ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह
एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों।
अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है।
ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।
2011 में स्थिरता के लिए ‘फिक्स्ड टर्म कानून’ लाया गया था
2011 में फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट्स एक्ट’ लाया गया था। इसका मकसद संसद का कार्यकाल तय रखना और सरकारों को समय से पहले गिरने से बचाना था। लेकिन बाद में इस कानून को खत्म कर दिया गया।
आलोचकों का कहना है कि इसके बाद पुराने नियम फिर लागू हो गए, जिससे प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के समर्थन और अचानक पैदा होने वाले राजनीतिक संकटों के ज्यादा भरोसे हो गए। ऐसे में पार्टी का समर्थन कम होते ही प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है, जिससे नेताओं का कार्यकाल छोटा और अनिश्चित होता जा रहा है।
ब्रेग्जिट के बाद कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016 में ब्रेग्जिट पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। लोग अब सिर्फ पार्टी देखकर वोट नहीं देते, बल्कि महंगाई, टैक्स, सरकारी सेवाओं और बेहतर जीवन स्तर जैसे मुद्दों पर जल्दी नतीजे चाहते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी वजह से नेताओं पर कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव बढ़ गया है। अगर सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही विरोध शुरू हो जाता है और नेता बदलने की मांग उठने लगती है।
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शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं:कश्मीर मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में
अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।
इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
एक्ट्रेस मधु ने साल 1993 में आई अपनी सुपरहिट फिल्म ‘पहचान’ को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि सुनील शेट्टी और सैफ अली खान स्टारर इस एक्शन-ड्रामा फिल्म के लिए वह मेकर्स की पहली पसंद नहीं थीं. उनसे पहले करिश्मा कपूर सहित उस दौर की 2-3 बड़ी हीरोइनों को यह रोल ऑफर हुआ था, लेकिन सबने इसे ठुकरा दिया. मधु ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि टॉप एक्ट्रेसेस इस रोल को मना कर चुकी हैं, तो उनका उत्साह और बढ़ गया और उन्होंने तुरंत फिल्म साइन कर ली.
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करिश्मा कपूर ने रिजेक्ट की थी पहचान फिल्म.
नई दिल्ली. 90 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस मधु आज भी सिनेमाप्रेमियों के दिलों पर राज करती हैं. अपनी बेहतरीन एक्टिंग से पहचान बनाने वाली मधु ने हाल ही में साल 1993 में आई अपनी सुपरहिट एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘पहचान’ को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उनका जो रोल था, वो उनसे पहले इंडस्ट्री की कई टॉप एक्ट्रेसेस को ऑफर हुआ था. मधु के मुताबिक, करिश्मा कपूर सहित उस दौर की कई बड़ी हीरोइनों ने इस रोल को करने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह फिल्म उनकी झोली में आ गिरी.
आईएएनएस से बातचीत के दौरान मधु ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि कई लीड एक्ट्रेसेस इस भूमिका को ठुकरा चुकी हैं, तो उनका इस किरदार को निभाने का उत्साह और बढ़ गया. उन्होंने बताया कि वह शायद इस रोल के लिए पहली पसंद नहीं थीं. फिल्म निर्माताओं ने उस समय कई हीरोइनों से संपर्क किया था, लेकिन सभी ने मना कर दिया. इसके बाद यह भूमिका उनके पास आई.
करिश्मा कपूर ने ठुकराई थी फिल्म
मधु ने कहा, ‘जितना मुझे बताया गया कि कई बड़ी एक्ट्रेस ने इस रोल को ठुकराया है, उतना ही मेरा विश्वास बढ़ता गया कि मुझे यह फिल्म करनी चाहिए. मुझे इस फिल्म का हिस्सा बनने पर गर्व है.’ जब उनसे पूछा गया कि किन हीरोइनों ने यह रोल ठुकराया था, तो उन्होंने बताया कि जिन नामों की जानकारी उन्हें मिली थी, उनमें करिश्मा कपूर का नाम शामिल था. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बाकी एक्ट्रेसेस के नामों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन 2-3 एक्ट्रेसेस ने इस भूमिका को करने से मना कर दिया था.