Last Updated:
BSNL Earning : टेलीकॉम सेक्टर की एकमात्र सरकारी कंपनी बीएसएनएल ने महज 2 साल के भीतर अपनी कमाई का आंकड़ा 25 हजार करोड़ रुपये पहुंचा दिया. एक समय डूबने की कगार पर पहुंच चुकी यह कंपनी आज 4जी सर्विस के विस्तार की वजह से ताबड़तोड़ पैसे छाप रही है.
बीएसएनएल ने 4जी सर्विस के जरिये अपने ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ाई है.
नई दिल्ली. एक सरकारी कंपनी है या यूं कहें कि टेलीकॉम सेक्टर की इकलौती बड़ी सरकारी कंपनी है, बीएसएनएल. नाम तो आप भी जानते होंगे. कुछ समय पहले तक यह कंपनी बंद होने की कगार पर थी. लाखों करोड़ का कर्ज और घाटा, ऊपर से कर्मचारी भी इसमें अपना भविष्य न देखते हुए धड़ाधड़ स्वैच्छिक रिटायरमेंट यानी वीआरएस ले रहे थे. तब मोदी सरकार ने इस डूबती जहाज को पार लगाने का प्लान बनाया और आज इस कंपनी की सालाना कमाई 25 हजार करोड़ रुपये पहुंच गई है. आलम ये है कि आज यह कंपनी टेलीकॉम सेक्टर की तमाम प्राइवेट कंपनियों को भी टक्कर दे रही है.
दूरसंचार राज्यमंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने बताया कि कंपनी के बुनियादी ढांचे में सुधार की वजह से इसका राजस्व 2 साल में करीब 19 फीसदी बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये पहुंच गया. बीएसएनएल के बदलाव के लिए व्यापक और योजनाबद्ध दृष्टिकोण अपनाये जाने से इसके वित्तीय प्रदर्शन में सुधार हुआ है. पेम्मासानी ने कहा कि कंपनी का वित्तीय सुधार सराहनीय है. बीएसएनएल का राजस्व दो वर्षों में 21,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 25,000 करोड़ रुपये हो गया है. यह 20 से 25 फीसदी की अच्छी ग्रोथ है.
टैक्स पूर्व कमाई ने तो बना दिया रिकॉर्ड
टेलीकॉम राज्यमंत्री ने बताया कि सबसे अहम बात ये है कि कंपनी की टैक्स पूर्व कमाई यानी EBITDA में भारी उछाल आया है. इसका आंकड़ा 50 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 7,000 करोड़ रुपये हो पहुंच गया है, जो कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता में सुधार को दिखाता है. बीएसएनएल ने वित्तवर्ष 2024-25 में 23,427 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023-24 में 21,302 करोड़ रुपये की कुल कमाई की थी.
कंपनी ने कैसे किया चमत्कार
सरकार ने कंपनी के कामकाज से लेकर खर्च और कमाई तक विस्तृत समीक्षा की और समस्याओं के समाधान व सर्विस बढ़ाने पर जोर दिया. आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में टॉवर का संचालन समय केवल 75 फीसदी, जिसे बढ़ाकर 95 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया. यहां 50,000 टॉवर में नई बैटरियां बदलीं, बिजली संयंत्रों को उन्नत बनाया और पुराने केबल को बदला. इसके बाद प्रत्येक सर्किल और राज्य स्तर पर उद्यम व्यवसाय और नए मोबाइल कनेक्शन के लिए व्यवस्थित लक्ष्य निर्धारित किए गए. इन कदमों ने कंपनी का कायाकल्प कर दिया.
सस्टे टैरिफ ने वापस दिलाया बाजार
पेम्मासानी ने कहा कि बीएसएनएल के शुल्क निजी कंपनियों की तुलना में काफी सस्ते हैं. कंपनी ने भारतीय डाक कार्यालयों के माध्यम से एक रुपये के सिम कार्ड बांटे, ताकि लोग सेवा का अनुभव कर सकें. ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने के लिए भारतीय डाक के साथ भी काम किया जा रहा है. डाक कर्मचारी बीएसएनएल की बेहतर सेवाओं के बारे में सक्रिय रूप से जानकारी दे रहे हैं. जिन गांवों में बीएसएनएल ही एकमात्र विश्वसनीय विकल्प है, वहां लोगों को निश्चित रूप से इसे लेना चाहिए.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
















