गोरखपुर से सावन मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। पूर्वोत्तर रेलवे ने बढ़नी-देवघर मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। यह स्पेशल ट्रेन कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग के रास्ते 28 जुलाई से 30 अगस्त तक रोजाना चलेगी और कुल 33 ट्रिप लगाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह ट्रेन गोरखपुर होकर गुजरेगी, जिससे यात्रियों को देवघर जाने के लिए बेहतर और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। गोरखपुर होकर मिलेगा सीधा कनेक्शन रेलवे के शेड्यूल के मुताबिक ट्रेन दोपहर 3:20 बजे बढ़नी से रवाना होगी और शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर, आनंदनगर होते हुए गोरखपुर पहुंचेगी। इसके बाद शाम 6:45 बजे कप्तानगंज से आगे रामकोला, पडरौना, तमकुही रोड, थावे, गोपालगंज, छपरा, सोनपुर, बरौनी, सुल्तानगंज और बांका के रास्ते अगले दिन दोपहर 1 बजे देवघर पहुंचेगी। इससे गोरखपुर के श्रद्धालुओं को बार-बार ट्रेन बदलने की परेशानी नहीं होगी। वापसी में भी रोज मिलेगी सुविधा देवघर से यह मेला स्पेशल ट्रेन रोज शाम 6:45 बजे रवाना होगी और उसी रूट से होते हुए अगले दिन गोरखपुर पहुंचकर बढ़नी तक जाएगी। इससे सावन मेले के दौरान आने-जाने वाले यात्रियों को दोनों तरफ आसान, आरामदायक और सुविधाजनक सफर मिलेगा। रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यह फैसला लिया है। इससे बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले हजारों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।
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गोरखपुर से बाबा धाम की यात्रा होगी आसान: 28 जुलाई से देवघर के लिए चलेगी स्पेशल ट्रेन, जानें शेड्यूल – Gorakhpur News
वर्ल्ड अपडेट्स: UNGA से पहले बयान: नेतन्याहू की संभावित यात्रा पर न्यूयॉर्क मेयर और इजराइल आमने-सामने
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1 घंटे पहले
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न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए शहर आने वाले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी की कानूनी संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में शहर के विधि विभाग के साथ बातचीत चल रही है।
ममदानी ने कहा कि वे वही करेंगे, जिसकी कानून इजाजत देगा। उन्होंने दोहराया कि उनके मुताबिक नेतन्याहू का स्थान द हेग में है, जहां अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों पर मुकदमा चलता है।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
ममदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट द इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपी हैं और कई लोग यही मानते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर यहूदी विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममदानी बढ़ते यहूदी विरोध का सामना करने के बजाय इजराइल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
डैनन ने पुष्टि की कि नेतन्याहू 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में संबोधन करेंगे। उन्होंने कहा कि मेयर का रुख इससे कोई फर्क नहीं डालेगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तो वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं।
हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था कि उन्हें ममदानी की गिरफ्तारी संबंधी धमकियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क के मेयर हमास का समर्थन करते हैं और अमेरिका से नफरत करते हैं।
अमेरिका और इजराइल, दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी संघीय कानून राज्य और स्थानीय प्रशासन को ICC के अनुरोधों पर सहयोग करने से रोकता है। पिछले साल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल भी कह चुकी हैं कि मेयर के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है।
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कनाडा के जंगलों में आग से टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन की हवा दुनिया में सबसे खराब

कनाडा में जंगलों में लगी भीषण आग का धुआं अमेरिका तक पहुंच गया है। शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खराब एयर क्वालिटी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को बाहर कम निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कनाडा में इस समय 955 जगहों पर जंगलों में आग लगी हुई है। इनमें से करीब 200 आग केवल ओंटारियो प्रांत में हैं। कई जगह आग अब भी नियंत्रण से बाहर है।
अमेरिका के मिनेसोटा राज्य की उत्तरी सीमा पर भी एक दर्जन से ज्यादा जंगलों में आग लगी है। ये 73 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली है। अधिकारियों ने इसे अभूतपूर्व स्थिति बताते हुए आपातकाल घोषित किया है।
अमेरिका के नेशनल इंटरएजेंसी फायर सेंटर और नेचुरल रिसोर्सेज कनाडा के अनुसार, जून के आखिर में लगातार गर्म मौसम और सामान्य से कम बारिश के कारण आग तेजी से फैली।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा कि हवा धुएं को ओंटारियो से टोरंटो, न्यूयॉर्क राज्य और बोस्टन तक ले गई। एयर क्वालिटी मॉनिटर करने वाली संस्था IQAir के अनुसार शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कनाडा पर जंगलों की आग रोकने में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धुएं से अमेरिका को भारी नुकसान हो रहा है और इसकी भरपाई के लिए कनाडा पर नए टैरिफ लगाने पर विचार किया जा सकता है।
ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने अमेरिकी नेताओं की आलोचना को गलत बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल कैलिफोर्निया में लगी आग बुझाने में टोरंटो ने अमेरिका की मदद की थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की आग के धुएं के लिए सिर्फ कनाडा को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के विशेषज्ञ पैट्रिक जेम्स के मुताबिक, धुआं सीमाएं नहीं मानता। हवा उसे जहां ले जाती है, वह वहीं पहुंच जाता है। पहले भी अमेरिका में लगी बड़ी आग का धुआं कनाडा तक पहुंच चुका है।
ताइवानी राष्ट्रपति बोले- लोकतांत्रिक ताइवान को कभी ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देंगे

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को कहा कि देश को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा और किसी भी कीमत पर ‘लोकतांत्रिक ताइवान’ को ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बीजिंग के “रेड टेरर” का मिलकर मुकाबला करने की अपील की।
DPP के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए लाइ ने कहा कि शांति के समय भी ताइवान को सतर्क रहने की जरूरत है।
लाइ ने कहा कि चीन का नया ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ बीजिंग को अपनी सीमाओं के बाहर रहने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का आधार देता है। ताइवान को आशंका है कि इस कानून का इस्तेमाल उन ताइवानी नागरिकों के खिलाफ किया जा सकता है, जिन्हें चीन अलगाववादी मानता है।
हालांकि, चीन इस कानून को लेकर की गई सभी आलोचनाओं को पहले ही खारिज कर चुका है। ताइवान का कहना है कि चीन की कानूनी व्यवस्था का उसके क्षेत्र पर कोई अधिकार नहीं है।
ताइवानी (होक्कियन) भाषा में भाषण देते हुए लाइ ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे सबसे आगे रहकर समाज पर चीन के “रेड टेरर” के खतरे का मुकाबला करें।
उन्होंने कहा, “हमें अपनी लोकतांत्रिक और स्वतंत्र जीवनशैली की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। किसी भी हालत में लोकतांत्रिक ताइवान को फिर से चीन का ताइवान नहीं बनने देंगे।”
लाइ ने एक बार फिर कहा कि ताइवान पहले से ही एक स्वतंत्र देश है, जिसका संवैधानिक नाम ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के अधीन नहीं है।
लाइ ने कहा कि पिछले एक दशक में DPP सरकार ने चीन के बढ़ते दबाव, दुष्प्रचार, सैन्य धमकियों और कूटनीतिक दबाव के सामने कभी पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।
जमुई के लोहंडा गांव में एक करोड़ के जेवर चोरी: एक रात में 2 घरों को बनाया निशाना, दूसरे मकान से कैश-चांदी के सिक्के गायब – Jamui News
जमुई के सिकंदरा थाना क्षेत्र के लोहंडा गांव में शनिवार देर रात चोरों ने दो घरों को निशाना बनाया। एक घर से खिड़की तोड़कर करीब एक करोड़ रुपए के सोने-चांदी के जेवरात चुरा लिए गए। वहीं, गांव के एक बंद पड़े मकान से नगदी और चांदी के सिक्के चोरी होने की सूचना है। एक ही रात में हुई इन दो चोरियों से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। लोहंडा गांव निवासी महेश्वर प्रसाद सिंह के घर में परिवार के सदस्य सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने खिड़की तोड़कर उस कमरे में प्रवेश किया, जहां महिलाओं के कीमती जेवरात रखे थे। चोर बक्से समेत अन्य सामान लेकर फरार हो गए। रविवार सुबह जब परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी हुई, तो आसपास खोजबीन शुरू की गई। घर से लगभग 500 मीटर दूर एक खेत में चोरी किया गया बक्सा और कुछ कपड़े पड़े मिले। आशंका है कि चोर कीमती सामान निकालने के बाद बाकी सामान वहीं छोड़कर भाग गए। अंदर से बंद मिला कमरे का दरवाजा पीड़िता किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार रात करीब 10:30 बजे पूरा परिवार सो गया था। सुबह जब कमरे का दरवाजा खोलने पहुंचे तो वह अंदर से बंद मिला। ग्रामीणों ने घर के बाहर कपड़े पड़े होने की सूचना दी, जिसके बाद चोरी का पता चला। उन्होंने बताया कि उनके जेठ राकेश सिंह अपनी पत्नी के साथ पटना गए हुए थे। उन्हीं दोनों के कमरे में चोरी हुई है। मेरी जेठानी सरकारी शिक्षिका है। चोर 40 भर से अधिक सोने के जेवरात और एक किलोग्राम से अधिक चांदी के आभूषण ले गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, चोरी गए जेवरात की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। घटना के बाद घर से 100 फीट दूरी पर समान फेंका मिला,फॉरेंसिक जांच टीम पहुंची मौके पर पहुंच गई है।
दूसरे घर से कैश और चांदी के सिक्के गायब इसी रात चोरों ने गांव के अजय सिंह के बंद पड़े मकान को भी निशाना बनाया। बताया गया कि अजय सिंह का परिवार करीब 15 दिनों से बाहर था। चोर वहां से 50 हजार रुपए नगद और 50 चांदी के सिक्के लेकर फरार हो गए। हालांकि, परिवार के लौटने के बाद ही कुल नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। घटना की सूचना पर सिकंदरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से पूछताछ की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वायड टीम की भी मदद ली जा रही है। थानाध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।
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दाल या रसम, सेहत के लिए कौन है ज्यादा फायदेमंद? जानिए दोनों में क्या है अंतर!
Dal Vs Rasam: भारतीय खाने में दाल और रसम दोनों का ही खास महत्व है. जहां दाल ताकत का एक ज़रूरी ज़रिया है और उत्तर भारतीय खाने का अहम हिस्सा है, वहीं रसम अपने स्वाद और पाचन में फ़ायदेमंद होने के कारण दक्षिण भारत में बहुत पसंद की जाती है. हालांकि, लोग अक्सर सोचते हैं कि इन दोनों में से सेहत के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद कौन सी है. इसका जवाब आपकी खास पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं इन दोनों के बीच का अंतर…
दाल क्या है?
दाल कई तरह की फलियों (लेग्यूम्स) से बनती है, जैसे मूंग, मसूर, अरहर, उड़द और चना दाल. इसे प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है. दाल खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और यह संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा है.
रसम क्या है?
रसम दक्षिण भारत का एक पारंपरिक व्यंजन है जिसे इमली, टमाटर, काली मिर्च, जीरा, लहसुन, करी पत्ता और रसम पाउडर जैसे मसालों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है. हालांकि रसम के कुछ प्रकारों में थोड़ी मात्रा में दाल होती है, लेकिन यह दाल की तुलना में काफी पतली होती है. इसे अक्सर चावल के साथ परोसा जाता है या सूप की तरह पिया जाता है.
दाल और रसम में क्या अंतर है?
दाल गाढ़ी होती है और इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. दूसरी ओर, रसम हल्की होती है, और इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में भी मदद कर सकते हैं.
कौन है ज्यादा हेल्दी?
अगर आपका मकसद प्रोटीन और पोषण पाना है, तो दाल बेहतर विकल्प है. वहीं, अगर आप रंग-बिरंगा खाना चाहते हैं या खाने के साथ कोई स्वादिष्ट, गर्म लिक्विड पसंद करते हैं, तो रसम एक अच्छा विकल्प हो सकता है. दोनों के अपने-अपने फायदे हैं और इन्हें अलग-अलग तरह के खान-पान में शामिल किया जा सकता है.
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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.
18 दिन के सूखे इंतजार के बाद रायसेन में बारिश: किसानों की जागी उम्मीदें,20 जुलाई से तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट – Raisen News
रायसेन जिले में 18 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को बारिश ने दस्तक दी। दोपहर और रात में हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। इस बीच मौसम विभाग ने 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक जिले में भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। 18 दिन बाद बदला मौसम का मिजाज शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद रुक-रुककर बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और ठंडी हवाएं चलने लगीं। बारिश भले ही ज्यादा देर तक नहीं हुई, लेकिन इससे मौसम सुहावना हो गया। धान की फसल को मिली राहत लगातार 18 दिनों तक बारिश नहीं होने से धान की फसल मुरझाने लगी थी। कई खेतों में दरारें पड़ गई थीं और बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा था। शनिवार की बारिश के बाद किसानों को राहत मिली है और अच्छी बारिश की नई उम्मीद जगी है। अब तक सिर्फ 60% धान की बुवाई जिले में अब तक करीब 60 प्रतिशत धान की बुवाई हो सकी है, जबकि शेष किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने और अच्छी बारिश के बाद ही धान की पौध की रोपाई करें, ताकि फसल को नुकसान न हो। तीन दिन भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से रायसेन समेत आसपास के जिलों में 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक अच्छी से भारी बारिश होने की संभावना है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों की बारिश खरीफ फसलों के लिए संजीवनी साबित होगी।
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किशनगढ़बास में साइबर ठगी गिरोह के 9 आरोपी गिरफ्तार: मोबाइल-सिम कार्ड से करते थे ठगी, कई राज्यों से जुड़े तार – Khairthal-Tijara News
किशनगढ़बास थाना पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह के 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। प्रशिक्षु आरपीएस नेहा मीना और थानाधिकारी बनवारी लाल मीणा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान यह सफलता मिली। पुलिस ने बताया कि बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है, जिससे साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तार आरोपियों में खानपुर मेवान निवासी नदीम खान, खातीवास निवासी लादेन, इरशाद, इजरायल, खालिद और अजील शामिल हैं। इसके अलावा मायापुर (टपूकड़ा) निवासी सोयल तथा शेखपुर (थाना किशनगढ़बास) निवासी मोहम्मद खान और रहीम अहमद को भी पकड़ा गया है। कई राज्यों में हुई ठगी से जुड़े हो सकते हैं तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास मिले मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। पुलिस इनसे ठगी के तरीकों, नेटवर्क, साथियों और विभिन्न राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द ही आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
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संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले: 85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर
अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।
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30 साल बाद घर लौटेगा जवान का शव: माउंट एवरेस्ट पर तूफान में फंसे थे लद्दाख के दोरजे, 26 हजार फीट ऊपर गुफा में शरीर
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लेह5 घंटे पहलेलेखक: शेवांग रिंगजिन
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1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था।
माउंट एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर 26,247 फीट ऊंचे ‘डेथ जोन’ में पिछले 30 सालों से एक पर्वतारोही का शरीर बर्फ में जमा है। पैरों में हरे जूते होने के कारण दुनिया उसे ‘ग्रीन बूट्स’ के नाम से जानती रही।
सालों तक इसे आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल शेवांग पाल्जोर का शव माना गया, लेकिन हाल में हुए डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि यह लांस नायक दोरजे मोरुप का पार्थिव शरीर है। अब 30 साल इंतजार के बाद इस साल अक्टूबर तक लद्दाख में दोरजे के परिवार को उनका शव सौंपा जाएगा।
दोरजे मोरुप, शेवांग पाल्जोर और सूबेदार शेवांग समनला 1996 में तिब्बत के उत्तरी मार्ग से एवरेस्ट फतह करने निकली पहली भारतीय तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। 10 मई 1996 को शिखर के पास तीनों भीषण बर्फीले तूफान में फंस गए थे। यह अभियान बाद में ‘1996 माउंट एवरेस्ट डिजास्टर’ के नाम से जाना गया, जिसमें उस सीजन में 12 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी।

75 वर्षीय पत्नी बोलीं- उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी
भास्कर ने दोरजे के घर पहुंचकर उनकी पत्नी कोनचोक यांगस्किट से मुलाकात की। 75 वर्षीय कोनचोक अब सुन नहीं सकतीं। वह पति की पेंशन पर गुजर-बसर करती हैं। जब से बेटे फुंतसोग दोरजे ने पिता का शव लाने वाले मिशन की सूचना दी, तब से वह रो रही हैं।
उन्होंने बेटे को कागज पर लिखकर दिया है कि उनकी आखिरी इच्छा एक बार पति को देखने की है। उन्होंने लिखा, “उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी।” दोरजे के बेटे फुंतसोग भारतीय सेना में हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी से उन्हें अब तक मिशन की पूरी जानकारी नहीं मिली है। मां ने पिता के इंतजार में पूरी जिंदगी रो-रोकर बिता दी। अब उनकी आंखों में उम्मीद नजर आ रही है।
एवरेस्ट चढ़ने वालों के लिए लैंडमार्क बन गया था ग्रीन बूट्स
1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार बर्फ में फंसे दोरजे मोरुप के शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था। बाद में यह फुटेज ‘समिट फीवर’ डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई गई। पैरों में पहने हरे रंग के जूतों के कारण इस शव को ‘ग्रीन बूट्स’ नाम दिया गया।।
यह शव एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर एक छोटी गुफा में पड़ा था जो ‘ग्रीन बूट्स गुफा’ नाम से मशहूर हुआ। शिखर पर जाने वाले लगभग सभी पर्वतारोही इसी रास्ते से होकर गुजरते थे। उनके लिए यह रास्ते की पहचान (लैंडमार्क) बन गया था।

दोरजे मोरुप का शव एवरेस्ट पर एक छोटी चट्टानी गुफा में पड़ा था।
30 साल तक शव क्यों नहीं निकाला जा सका
दोरजे का शव जिस जगह है, वह 8 हजार मीटर (करीब 26,247 फीट) से ऊपर का ‘डेथ जोन’ है। यहां समुद्र तल की तुलना में सिर्फ करीब 33% ऑक्सीजन होती है। इतनी ऊंचाई पर शरीर तेजी से जवाब देने लगता है। कोशिकाएं मरने लगती हैं।
यहां हेलिकॉप्टर भी नहीं पहुंच सकते। इसलिए यहां से शव वापस लाना दुनिया के सबसे मुश्किल अभियानों में गिना जाता है। यही वजह है कि एवरेस्ट पर मारे गए 340 से ज्यादा पर्वतारोहियों में से अधिकांश के शव आज भी वहीं पड़े हैं।
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भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। पूरी खबर पढ़ें…


