ललितपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अंकुर श्रीवास्तव का शासन द्वारा गुरुवार शाम तबादला कर दिया गया। उनका स्थानांतरण मुरादाबाद जिले में किया गया है। वहीं, गाजीपुर में तैनात अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दिनेश कुमार को ललितपुर का नया अपर जिलाधिकारी बनाया गया है। बताया जा रहा है कि अंकुर श्रीवास्तव जुलाई 2023 में ललितपुर में तैनात किए गए थे। उन्होंने जिले में करीब 35 महीने तक अपनी सेवाएं दीं। शासन द्वारा उनका स्थानांतरण एक ही जिले में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के कारण किया गया है।
Source link
ललितपुर के एडीएम अंकुर श्रीवास्तव का तबादला: गाजीपुर में तैनात दिनेश कुमार को एडीएम नियुक्त किया गया – Lalitpur News
गर्मी में राहत और स्टाइल दोनों, पसंद किया जा रहा सूती गमछा, जरूर करें ट्राई
Last Updated:
पूर्वांचल और उत्तर भारत के कई हिस्सों में गमछा लंबे समय से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा है. गाजीपुर, बलिया और बनारस जैसे इलाकों में यह सिर्फ गर्मी से बचाव का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी माना जाता है. अब समय के साथ इसमें नए डिजाइन, पैटर्न और ओडिशा मॉडल जैसी वैरायटी जुड़ने से यह युवाओं के बीच एक फैशन ट्रेंड के रूप में भी उभर रहा है.
गांवों में बुजुर्गों और किसानों की पहचान माना जाने वाला गमछा अब युवाओं के बीच भी फिर से ट्रेंड में लौट रहा है. हल्के सूती कपड़े और ढीली बुनाई की वजह से यह गर्मी में शरीर को हवा देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. इस गमछे का चेकर्ड डिजाइन सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है. इसकी वैफल वीव बुनाई में छोटे-छोटे एयर गैप बनते हैं, जो कपड़े के अंदर हवा के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं. यही वजह है कि गर्मी में यह गमछा ज्यादा आरामदायक महसूस होता है.

गर्मी में गहरे नीले और हरे रंग के प्रिंट आंखों को सुकून देते हैं. अजय बताते हैं कि अब लोग डार्क और लाइट शेड्स का कॉम्बिनेशन ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अगर शर्ट डार्क है, तो लोग ऐसा लाइट बेस वाला गमछा चुन रहे हैं जो चेहरे को आकर्षक दिखाता है. लिनन और कॉटन का मिक्स फैब्रिक हवा को आसानी से आर-पार जाने देता है और डार्क शर्ट पर बेहतरीन कंट्रास्ट भी देता है. टेक्सटाइल विशेषज्ञ मानते हैं कि हल्के सूती और ढीली बुनाई वाले गमछे गर्म इलाकों के लिए ज्यादा आरामदायक होते हैं क्योंकि इनमें हवा का प्रवाह बेहतर रहता है. यही वजह है कि पूर्वांचल की गर्मी में आज भी गमछा ‘देसी एसी’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

गाजीपुर की तपती दुपहरी में जब सूरज आग उगलता है, तब यहाँ के लोगों का सबसे भरोसेमंद साथी बनता है यह गमछा. यह गमछा देखने में काफी अट्रैक्टिव है. कॉटन साइंस के अनुसार जब हवा गमछे के महीन रेशों से होकर गुजरती है, तो वह चेहरे को ठंडी हवा का अहसास कराती है. लू के थपेड़ों से बचने के लिए गाजीपुर के लोग इसे चेहरे पर लपेटना पसंद कर रहे हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सौरभ के मुताबिक, कुर्ते के साथ पहनने के लिए ये फूलदार गमछे आजकल काफी हिट हैं. साइंटिफिक नजरिए से देखा जाए तो हाई-क्वालिटी कॉटन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को कुछ हद तक सोख लेता है. यह फैशन और सेहत दोनों का परफेक्ट कॉम्बिनेशन माना जा रहा है. इस गमछे में पिक स्ट्रिप और मल्टी कलर फ्लोरल डिजाइन इसे दूर से ही आकर्षक बना देते हैं.

पूर्वांचल में गमछा सिर्फ पसीना पोंछने का साधन नहीं रहा, बल्कि यह यहां की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माना जाता है. गाजीपुर, बलिया, बनारस और आसपास के इलाकों में दशकों से किसान, मजदूर और यात्री सूती गमछा इस्तेमाल करते आए हैं क्योंकि इसका कपड़ा गर्मी में हवा पास होने देता है और पसीना जल्दी सोख लेता है. समय के साथ इसकी बुनाई और डिजाइन में बदलाव आया है. अब फूलदार प्रिंट, ओडिशा मॉडल, चेकर्ड पैटर्न और वैफल वीव जैसे नए डिजाइन युवाओं को भी आकर्षित कर रहे हैं.

सफेद रंग पर नारंगी और पीले फूलों की हल्की छपाई वाला यह गमछा इस समय गाजीपुर के बाजारों में सबसे अलग नजर आ रहा है. सफेद आधार वाले गमछे सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट (परावर्तित) करते हैं, जिससे शरीर ज्यादा गर्म नहीं होता. अजय के अनुसार, अब लोग धूप से बचाव के साथ-साथ यह भी देख रहे हैं कि गमछा उनके पैंट-शर्ट के साथ मैच कर रहा है या नहीं.

हरे और क्रीम रंग के पारंपरिक डिजाइन वाला यह ओडिशा मॉडल गमछा अपनी बारीक बुनाई और कलात्मक पैटर्न की वजह से अलग पहचान बना रहा है. इस तरह के गमछों में सिर्फ धूप से बचाव ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति की झलक भी दिखाई देती है. हल्का सूती कपड़ा गर्मी में आराम देता है, जबकि इसकी पारंपरिक बॉर्डर डिजाइन इसे सामान्य गमछों से अलग बनाती है. दुकानदारों के मुताबिक अब युवा सिर्फ साधारण गमछा नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों के डिजाइन वाले गमछे भी पसंद कर रहे हैं.
भारत में छाप रहे करोड़ों…वो टॉप 11 बॉलीवुड सितारे, जिन्होंने छोड़ दी इंडिया की नागरिकता
Last Updated:
दिलजीत दोसांझ के अमेरिकी नागरिक बनने की खबरों ने सबको चौंका दिया है. हालांकि, वे पहले बॉलीवुड स्टार नहीं हैं जो भारत में रहकर करोड़ों छाप रहे हैं, मगर नागरिकता विदेशी रखते हैं. आलिया भट्ट, कैटरीना कैफ भी बॉलीवुड का बड़ा नाम है. उनकी फिल्में भारतीय बॉक्स ऑफिस से करोड़ों में कमाई करती है, पर वह एमी जैक्सन और सपना पब्बी की तरह ब्रिटिश पासपोर्ट रखती हैं. इन अलावा, कई और सितारे हैं जिनके पास भारतीय नागरिकता नहीं है. भारत में दोहरी नागरिकता का विकल्प न होने के कारण इन सितारों को विदेशी पासपोर्ट अपनाते ही भारतीय नागरिकता छोड़नी पड़ती है, फिर भी ये अपनी कला से करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज कर रहे हैं.
नई दिल्ली: बॉलीवुड की चकाचौंध में हम अक्सर भूल जाते हैं कि पर्दे पर दिखने वाले हमारे पसंदीदा सितारे हमेशा भारतीय नागरिक नहीं होते. हाल में पंजाबी सेंसेशन और ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ को लेकर एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिलजीत अब भारतीय नागरिक नहीं रहे हैं, बल्कि उन्होंने साल 2022 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली है. कहा जा रहा है कि वह सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर ही सफर कर रहे हैं, जबकि उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट 2018 में मुंबई से जारी हुआ था.

दिलजीत अकेले ऐसे स्टार नहीं हैं जिनके पास विदेशी पासपोर्ट है. इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम आलिया भट्ट का भी है. आलिया का जन्म और परवरिश भले ही मुंबई में हुई हो, लेकिन उनके पास ब्रिटिश नागरिकता है. इसकी वजह उनकी मां सोनी राजदान हैं, जो खुद ब्रिटिश मूल की हैं. आलिया भले ही भारत की टॉप एक्ट्रेस हैं, लेकिन तकनीकी रूप से वह एक विदेशी नागरिक हैं और वोटिंग जैसे अधिकारों के लिए उन्हें ओसीआई (OCI) कार्ड का सहारा लेना पड़ता है.

श्रीलंकन ब्यूटी जैकलीन फर्नांडिस ने भी बॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बनाई है. जैकलीन मूल रूप से श्रीलंका की रहने वाली हैं और वहीं की नागरिकता रखती हैं. उन्होंने मिस श्रीलंका का खिताब जीतने के बाद भारत का रुख किया था. हालांकि, भारत में इतने साल बिताने और बड़ी फिल्में करने के बावजूद उन्होंने अपनी श्रीलंकन नागरिकता को बरकरार रखा है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

बॉलीवुड की ‘बार्बी डॉल’ कही जाने वाली कैटरीना कैफ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. कैटरीना का जन्म हॉन्गकॉन्ग में हुआ था और उनके पास भी ब्रिटिश नागरिकता है. उनके पिता कश्मीरी और मां ब्रिटिश मूल की थीं. कैटरीना ने भारत आने से पहले कई देशों में वक्त बिताया, लेकिन अपनी पहचान उन्होंने बॉलीवुड से बनाई. आज भी वह ब्रिटिश पासपोर्ट पर ही ट्रेवल करती हैं और भारत में काम करने के लिए उन्हें वर्क परमिट की जरूरत होती है.

फेहरिस्त में आमिर खान के भांजे इमरान खान और नरगिस फाखरी का नाम भी शामिल है. इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है. वहीं नरगिस फाखरी भी अमेरिकी नागरिक हैं, जिनके पिता पाकिस्तानी और मां चेक मूल की थीं. इन सितारों ने अपनी जड़ें विदेश में होने के बावजूद हिंदी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई है.

डांस क्वीन नोरा फतेही की बात करें तो उनके पास कनाडा की नागरिकता है. नोरा का जन्म कनाडा में मोरक्कन माता-पिता के घर हुआ था. वह सिर्फ एक सपने के साथ भारत आई थीं और आज वह इंडस्ट्री की सबसे बड़ी परफॉर्मर बन चुकी हैं. वहीं सनी लियोनी के पास तो कनाडा और अमेरिका दोनों की दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) है, जबकि वह एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती हैं.

फेहरिस्त में आमिर खान के भांजे इमरान खान और नरगिस फाखरी का नाम भी शामिल है. इमरान खान का जन्म अमेरिका में हुआ था, इसलिए उनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है. वहीं नरगिस फाखरी भी अमेरिकी नागरिक हैं, जिनके पिता पाकिस्तानी और मां चेक मूल की थीं. इन सितारों ने अपनी जड़ें विदेश में होने के बावजूद हिंदी सिनेमा में अपनी एक खास पहचान बनाई है.

एमी जैक्सन और सपना पब्बी जैसी एक्ट्रेसेस के पास भी ब्रिटिश नागरिकता है. एमी ने तो साउथ से लेकर बॉलीवुड तक बड़े स्टार्स के साथ काम किया है, लेकिन वह मूल रूप से यूके की ही रहने वाली हैं. इसी तरह एवलिन शर्मा के पास जर्मन नागरिकता है क्योंकि उनकी मां जर्मन थीं. ये सभी सितारे भारत को अपना कर्मक्षेत्र मानते हैं, भले ही इनके पासपोर्ट पर किसी और देश की मुहर लगी हो.

नागरिकता का मुद्दा इन सितारों की लोकप्रियता में कभी आड़े नहीं आया. चाहे वह दिलजीत दोसांझ का कैलिफोर्निया वाला बंगला हो या आलिया भट्ट का ब्रिटिश पासपोर्ट, फैंस को इनके काम से मतलब है.
अहमदाबाद प्लेन क्रैश के पीड़ित परिवारों का दर्द: 11 महीने बाद भी मुआवजा नहीं मिला, नौकरी का वादा था, लेकिन अब जवाब नहीं देते – Gujarat News
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही बोइंग 787-8 फ्लाइट टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड बाद क्रैश हो गई थी।
अहमदाबाद में 12 जून, 2025 को हुए एआई 171 विमान हादसे को एक साल पूरा होने में एक महीने से भी कम समय बचा है। जबकि,मृतकों के पीड़ित परिवार न्याय के लिए अब तक संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला है। यहां
.
पीड़ितों के कुछ परिवारों ने अहमदाबाद के सोला भगवत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने मुआवजे, दुर्घटनास्थल पर एक वर्ष के भीतर भूमि शुद्धिकरण और विभिन्न धर्मों के लोगों को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति देने की मांग की।
इसके अलावा, मृतकों के परिवारों समेत कई लोग अभी भी दुर्घटना के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि सरकार ने एक महीने के भीतर रिपोर्ट जारी करने की बात कही है, लेकिन पीड़ितों के परिवार ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग कर रहे हैं।
हेतल प्रजापति की पति महेश जीरावाला के साथ। (फाइल फोटो)
हादसे में जान गंवाने वाले फिल्म निर्माता महेश जीरावाला की पत्नी हेतलबेन प्रजापति ने कहा- टाटा समूह के कुछ लोगों ने मुझे मेरी एजुकेशन के आधार पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। नौकरी का आश्वासन दिए हुए 11 महीने बीत चुके हैं। हमने कई बार ईमेल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब एयरलाइन और टाटा समूह किसी भी तरह से सहयोग नहीं कर रहे हैं।
वहीं, घटना के समय पुलिस ने कोई सहयोग नहीं दिया। जब हमने जांच की तो पता चला कि डीएनए मिलान हो गया है और मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद एयरलाइन और टाटा समूह के कुछ लोग हमसे मिलने हमारे घर आए। उन्होंने भविष्य में किसी भी तरह की समस्या आने पर मदद का आश्वासन दिया था।

टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया विमान दुर्घटना में अपने बेटे को खोने वाले मोहम्मद रफीकभाई ने कहा- विमान दुर्घटना में मेरे बेटे की मृत्यु हो गई। लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। साथ ही, कोई जवाब भी नहीं मिल रहा है।
यहां तक कि ईमेल करने पर भी हमें कोई उचित जवाब नहीं मिल रहा है। हमारा फोन भी अब नहीं उठाया जा रहा है। हम मांग करते हैं कि मुझे न्याय मिले और उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, हमें इस घटना के बारे में भी स्पष्ट जानकारी दी जाए कि यह कैसे हुई।
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कविराज ने कहा कि 12 जून 2026 को हुए विमान हादसे को एक साल पूरा हो जाएगा। अब एक महीने से भी कम समय बचा है। इसलिए पीड़ितों के परिवार दुर्घटनास्थल की भूमि को शुद्ध करना चाहते हैं और धार्मिक कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई बार ब्लैक बॉक्स का डेटा उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

जून में प्लेन क्रैश की फाइनल रिपोर्ट आने की संभावना
गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी लेकिन टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 270 लोगों की मौत हुई थी।
पीड़ित परिवारों ने लेटर की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी हैं। इस मामले में एअर इंडिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। फाइनल रिपोर्ट इस साल जून में, यानी हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की संभावना है।
——————
अहमदाबाद प्लेन हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

अहमदाबाद प्लेन क्रैश- विमान में पहले से खराबी थी:अमेरिकी रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल फेलियर की आशंका
अहमदाबाद में 12 जून 2025 को क्रैश हुए एअर इंडिया के बोइंग 787 विमान में पहले से कई गंभीर तकनीकी दिक्कतें थीं। चार साल पहले प्लेन में आग भी लगी थी। अमेरिका स्थित फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने दावा किया है कि विमान में इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से एक के बाद एक कई सिस्टम बंद हुए। पूरी खबर पढ़ें…
मॉनसून से पहले शेखपुरा प्रशासन अलर्ट: बाढ़ की आशंका पर घाटकुसुम्भा के निचले इलाकों का DM ने किया दौरा – Sheikhpura News
शेखपुरा में आगामी मॉनसून से पहले बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को जिलाधिकारी (डीएम) शेखर आनंद के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने जिले के संवेदनशील घाटकुसुम्भा प्रखंड के निचले इलाकों का सघन दौरा किया। इस दौरान जिला प्रशासन की पूरी टीम उनके साथ मौजूद थी। यह दौरा मॉनसून के दौरान संभावित बाढ़ की विभीषिका से निपटने और निचले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के उद्देश्य से किया गया। ज्ञात हो कि प्रतिवर्ष मॉनसून के समय घाटकुसुम्भा क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा और हरोहर नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण भीषण जल जमाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आवागमन से लेकर खेती-बारी तक सब ठप यह क्षेत्र चारों ओर से पानी से घिर जाता है, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।दौरे के क्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने डीएम के समक्ष अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ग्रामीणों का कहना था कि जलजमाव के कारण आवागमन से लेकर खेती-बारी तक सब ठप हो जाता है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से डीएम से अपील की कि इस क्षेत्र की विकट भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे बाढ़ग्रस्त घोषित किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं और आपदा राहत का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। संवेदनशील क्षेत्रों की घेराबंदी और मरम्मत के निर्देश दिए निरीक्षण के दौरान डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ आने का इंतजार न करें, बल्कि ‘प्री-डिजास्टर मैनेजमेंट’ के तहत अपनी सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर लें। उन्होंने तटबंधों की मजबूती, नदी के किनारे वाले संवेदनशील क्षेत्रों की घेराबंदी और मरम्मत के निर्देश दिए। डीएम ने ऊंचे स्थानों पर शरण स्थली और सामुदायिक रसोई के लिए स्थलों का चयन करने, नावों की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और पशु चारे का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि हमारी प्राथमिकता जान-माल की सुरक्षा है और आपदा के समय रिस्पॉन्स टाइम कम से कम हो, इसके लिए सभी पदाधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। जिले के आला अधिकारियों की टीम मौजूद रही क्षेत्र भ्रमण के दौरान डीएम के साथ जिले के आला अधिकारियों की टीम मौजूद रही, जिसमें मुख्य रूप से एडीएम लखींद्र पासवान, डीसी संजय कुमार, एसडीओ प्रियंका कुमारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता मृत्युंजय कुमार, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ एवं बाढ़ नियंत्रण के अभियंतागण शामिल थे।
Source link
महिला के पेट से साढ़े चार किलो का ट्यूमर निकाला: बालाघाट में सफल ऑपरेशन, सालों के असहनीय दर्द से मिली मुक्ति – Balaghat (Madhya Pradesh) News
मंडला जिले के बिछिया क्षेत्र की 42 वर्षीय आदिवासी महिला देवंती धुर्वे को सालों से झेल रहे पेट दर्द से आखिरकार मुक्ति मिल गई है। बालाघाट के निजी अस्पताल में हुए एक जटिल ऑपरेशन के बाद उनके पेट से सवा चार किलो का ट्यूमर निकाला गया। महिला के स्वास्थ्य में अब सुधार है। देवंती धुर्वे पिछले कई वर्षों से इस समस्या से जूझ रही थीं। उन्हें कमर और पेट में लगातार दर्द रहता था। नसबंदी के कुछ वर्षों बाद यह शिकायत शुरू हुई थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई और पेट में एक गांठ का रूप ले लिया। दर्द इतना असहनीय हो गया था कि उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो चुका था। आर्थिक तंगी और बड़े शहरों में महंगे इलाज की चिंता के बीच बालाघाट के मोती नगर स्थित निजी हॉस्पिटल ने उन्हें राहत प्रदान की। डॉक्टरों की टीम ने लगभग तीन घंटे तक चले इस ऑपरेशन में महिला के पेट से सवा चार किलो वजनी फाइब्रॉइड लियोमायमा (गोला) को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। जल्द मिलेगी अस्पताल से छुट्टी ऑपरेशन करने वाले डॉ. मोहम्मद भारमल ने बताया कि महिला की बच्चेदानी में एक विशाल फाइब्रॉइड विकसित हो चुका था, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव और लगातार दर्द हो रहा था। उन्होंने इसे बालाघाट जिले का संभवतः पहला और बेहद जटिल ऑपरेशन बताया। हॉस्पिटल में केवल दो सर्जनों ने हिस्टेरेक्टॉमी प्रक्रिया के माध्यम से यह कठिन ऑपरेशन किया। महिला को जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। दो साल से परेशान थे देवंती की ननद पिंकी मरावी ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे इलाज के लिए भटक रहे थे। मंडला अस्पताल से उन्हें जबलपुर रेफर किया गया था, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वहां इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा था। किसी परिचित से बालाघाट के यहां की जानकारी मिलने के बाद वे यहां पहुंचे।
Source link
सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल: जब सरकार को ही फैसला लेना है, फिर कमेटी में नेता विपक्ष को रखने का दिखावा क्यों
- Hindi News
- National
- SC Questions Centre On Election Commissioner Appointments | Opposition Leader Role
नई दिल्ली2 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में नेता विपक्ष (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है।
कोर्ट ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
इस कानून के मुताबिक, CEC और EC की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री वाली समिति करेगी। पहले सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था में इसमें भारत के CJI को भी शामिल किया था।

याचिकाकर्ताओं का दावा- 2023 का कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है
याचिकाओं में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। इसमें चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया है।
दरअसल, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले में कहा था कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की समिति करेगी।
बाद में केंद्र सरकार नया कानून लेकर आई, जिसमें CJI को समिति से बाहर कर दिया गया। इसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने कहा- नेता विपक्ष दिखावटी हो जाते हैं
कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से पूछा, “अगर प्रधानमंत्री एक नाम चुनते हैं और विपक्ष का नेता दूसरा नाम चुनता है, और दोनों में मतभेद होता है, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?”
इस पर अटॉर्नी जनरल ने माना कि शायद ऐसा नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने कहा- तो फिर सब कुछ कार्यपालिका ही कंट्रोल कर रही है। ऐसे में विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वे सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं।
6 मई: SC ने पूछा था- क्या हमारे पास कानून बनवाने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को मामले की सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। पूरी खबर पढ़ें…

12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं
राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई।
उन्होंने बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता।
प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया। पूरी खबर पढ़ें…
———————————–
ये खबर भी पढ़ें…
राहुल ने चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर की नियुक्ति पर सवाल उठाए, पूछा- ST, OBC से कितने उम्मीदवार

चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति के लिए चयनित उम्मीदवारों की जातियों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति जताई। राहुल ने कहा कि चयनित उम्मीदवारों में अनुसूचित जाति/जनजाति, OBC, EBC और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम शामिल नहीं हैं। पूरी खबर पढ़ें…
हॉर्मुज स्ट्रेट में गुजरात का एक और जहाज डूबा: जहाज से ड्रोन या मिसाइल टकराई, 14 क्रू मेंबर्स को ओमान कोस्टगार्ड ने बचाया – Gujarat News
बुधवार सुबह करीब 3.30 बजे ओमान के समुद्री तट पर हादसे का शिकार हुआ जहाज।
ईरान और अमेरिका के बीच हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी जंग की चपेट में आकर गुजरात का एक और मालवाहक जहाज डूब गया। ‘हाजी अली’ नाम का मालवाहक जहाज 13 मई की सुबह ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था। इसी दौरान जहाज से कोई ड्रोन या मिसाइल जैसा हथियार जहाज से ट
.
गुजरात के द्वारका में रहने वाले जहाज के मालिक सुलतान अहमद अंसार ने बताया कि MSV HAJI ALI शिप बेरबेरा पोर्ट से शारजाह जा रहा था। इसी दौरान सुबह करीब 3.30 बजे ओमान के समुद्री तट पर हादसे का शिकार हो गया। क्रू मेंबर ने जहाज से कुछ विस्फोटक टकराने की आवाज सुनी थी। इसके बाद जहाज में आग लग गई। सभी 14 क्रू मेंबर्स ने लाइफ बोट से जान बचाई। इसके बाद ओमान के कोस्टगार्ड ने इनका रेस्क्यू किया।
7 मई को भी डूबा था एक जहाज इससे पहले गुजरात के द्वारका का ही एक और मालवाहक जहाज हमले का शिकार होकर डूब गया था। मालवाहक जहाज MSV AL फैज नूरे सुलेमानी-I दुबई से कार्गो लेकर यमन के मुकाला बंदरगाह जा रहा था। जहाज पर एक गनमैन समेत कुल 17 क्रू सवार थे।
मालवाहक जहाज MSV AL फैज नूरे सुलेमानी।
फायरिंग से जहाज में पानी भर गया था यह जहाज 7 मई की सुबह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहा था। इसी दौरान ईरान और अमेरिकी नेवी के बीच आमने-सामने फायरिंग शुरू हो गई। क्रॉस फायरिंग में गुजरात का यह जहाज भी चपेट में आ गया।
फायरिंग से जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और उसमें पानी भरने लगा। इससे जहाज डूबने लगा। इसी दौरान इंजन रूम में मौजूद अल्ताफ तालब केर गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
जहाज डूबने के बाद क्रू ने खुद को बचाने की कोशिश शुरू की। उसी समय पास से गुजर रहे दूसरे जहाज MSV प्रेम सागर-I ने मदद की। इस जहाज ने 17 क्रू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बचाए गए सभी क्रू 8 मई की देर शाम सुरक्षित दुबई पोर्ट पहुंच गए। आदम भाई ने इन क्रू का वीडियो भी भास्कर को दिया है। घटना की खबर सलाया पहुंचते ही इलाके और मछुआरा समाज में शोक फैल गया।
——————–
ये खबर भी पढ़ें…
अमेरिका-ईरान के हमले में गुजरात का जहाज डूबा:एक भारतीय की मौत, 17 क्रू मेंबर्स को बचाया; दुबई से यमन जा रहा था

ईरान और अमेरिका की नेवी के बीच बीती रात हॉर्मुज स्ट्रेट में हुई फायरिंग की चपेट में गुजरात का एक मालवाहक जहाज डूब गया। यह जहाज गुजरात के द्वारका जिले के सलाया का था। हादसे में जहाज के इंजन रूम में काम कर रहे अल्ताफ तालब केर नाम के भारतीय क्रू की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें..
जयपुर में जुटेंगे देशभर से 250 से अधिक डॉक्टर्स: कैंसर के खिलाफ जागरूकता का देंगे संदेश, 17 मई को जलेब चौक में होगी वॉकथॉन – Jaipur News
वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर इस वर्ष दुनियाभर के विभिन्न शहरों में कैंसर जागरूकता को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसी कड़ी में जयपुर में 17 मई को मल्टीसिटी वॉक और 19 मई को प्रिवेंटिव जीआई ऑन्कोलॉजी पर विशेष पैनल डिस्कशन का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को एब्डोमिनल कैंसर के प्रति जागरूक करना, शुरुआती जांच के महत्व को समझाना और समय रहते उपचार के लिए प्रेरित करना है। यह आयोजन एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट की ओर से फोर्टिस हॉस्पिटल और इंस्टीट्यूट ऑफ इवेंट मैनेजमेंट एंड रिसर्च (आईआईईएमआर) के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत गुरुवार को कैंसर जागरूकता से जुड़ी टी-शर्ट और बिब का भी अनावरण किया गया। इस अवसर पर संस्कृति युवा संस्थान के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा, एब्डोमिनल कैंसर ट्रस्ट के फाउंडर एवं वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के संस्थापक डॉ. संदीप जैन, फोर्टिस हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. मनीष अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, जयपुर रनर्स क्लब के कार्यकारी अध्यक्ष दीपक शर्मा, एडवोकेट कमलेश शर्मा, प्रो. एस.एस. शर्मा और आईआईईएमआर के निदेशक मुकेश मिश्रा सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। दुनियाभर के शहरों में एक साथ होगी मल्टीसिटी वॉक 17 मई को जयपुर के जलेब चौक सहित दुनिया के विभिन्न शहरों में एक साथ मल्टीसिटी वॉक आयोजित की जाएगी। इस वॉक का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने का संदेश देना है। जयपुर में जलेब चौक से सुबह छह बजे यह वॉकथॉन आयोजित होगी। आयोजकों के अनुसार, इस वैश्विक पहल के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि कैंसर से लड़ाई केवल इलाज से नहीं, बल्कि जागरूकता, समय पर जांच और सही जीवनशैली से भी जीती जा सकती है। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार : डॉ. संदीप जैन एब्डोमिनल कैंसर डे के संस्थापक डॉ. संदीप जैन ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। उन्होंने कहा कि एब्डोमिनल कैंसर अक्सर शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आता, जिसके कारण कई बार मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोग समय रहते जांच करवाएं और शरीर में दिखाई देने वाले संकेतों को गंभीरता से लें, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उनका कहना था कि एब्डोमिनल कैंसर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती है, जिससे लड़ने के लिए समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है। 19 मई को विशेषज्ञों का बड़ा मंथन वर्ल्ड एब्डोमिनल कैंसर डे के अवसर पर 19 मई को होटल हॉलिडे इन में प्रिवेंटिव जीआई ऑन्कोलॉजी पर विशेष पैनल डिस्कशन आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के प्रमुख गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, सर्जन, ऑन्कोलॉजिस्ट और चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे। वैज्ञानिक सत्रों में आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एंडोस्कोपी, शुरुआती पहचान और कैंसर की रोकथाम पर विशेष चर्चा होगी। प्रमुख विषयों लुमिनल GI कैंसर की शुरुआती पहचान में AI एंडोस्कोपी की भूमिका, मरीजों में जांच और इलाज में देरी के कारण बढ़ते GI कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर की रोकथाम और प्रोफाइलेक्टिक कलेक्टोमी, कोलोरेक्टल कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग और कोलोनोस्कोपी, शराब से संबंधित लिवर सिरोसिस, HCC और इसकी रोकथाम शामिल है। इन विषयों पर डॉ. एस.एस. शर्मा, डॉ. आर.के. जेनॉ, डॉ. जीतेन्द्र चावला, डॉ. सुधीर महाऋषि, प्रो. वी.ए. सारस्वत, डॉ. सौरभ कालिया, डॉ. जया माहेश्वरी, डॉ. दिनेश अग्रवाल सहित देश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी : डॉ. मनीष अग्रवाल डॉ. मनीष अग्रवाल ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल बीमारी की जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के कारण आज कई प्रकार के कैंसर की शुरुआती पहचान संभव हो चुकी है। यदि मरीज समय पर डॉक्टर से संपर्क करें तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। क्या होता है एब्डोमिनल कैंसर? एब्डोमिनल कैंसर में वे कैंसर शामिल होते हैं जो पेट (एब्डोमेन) के भीतर मौजूद विभिन्न अंगों को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर कैंसर (गैस्ट्रिक), लिवर, पैंक्रियाटिक, कोलन और रेक्टल, गॉल ब्लैडर, ओवेरियन, पेरिटोनियल, किडनी और छोटी आंत के कैंसर एब्डोमिनल कैंसर की श्रेणी में आते हैं। हर प्रकार के कैंसर के लक्षण, निदान और उपचार अलग-अलग होते हैं। जागरूकता, समय पर पहचान और नियमित जांच से न केवल इन कैंसर का जल्दी पता लगाया जा सकता है, बल्कि प्रभावी उपचार के माध्यम से इनसे निजात भी पाया जा सकता है।
Source link
गर्मी में ताजगी का सुपर डोस देगा अमरूद का जूस, मिनटों में मिलेगी एनर्जी
Guava Juice Recipe: गर्मी की दोपहर जब सिर पर आग बरस रही हो और शरीर थका-सा लगे, तब कुछ ठंडा और नेचुरल मिल जाए तो बात ही अलग होती है. ऐसे में लोग अक्सर बाजार के कोल्ड ड्रिंक या पैकेज्ड जूस की तरफ भागते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर पर ही एक ऐसा हेल्दी ड्रिंक तैयार किया जा सकता है जो न सिर्फ ठंडक दे बल्कि शरीर को ताकत भी दे? अमरूद का जूस ऐसा ही एक आसान और शानदार ऑप्शन है. इसमें भरपूर विटामिन C होता है, स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा और शरीर के लिए काफी फायदेमंद. खास बात ये है कि इसे बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती और घर की किचन में मौजूद चीजों से ही तैयार हो जाता है.
क्यों खास है अमरूद का जूस?
अमरूद को अक्सर लोग हल्के में लेते हैं, लेकिन ये फल पोषण के मामले में किसी सुपरफूड से कम नहीं. इसमें विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं. गर्मियों में जब शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है, तब अमरूद का जूस एक नैचुरल हाइड्रेशन ड्रिंक की तरह काम करता है.
शरीर को क्या फायदा मिलता है?
अमरूद का जूस पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है, अगर आप अक्सर थकान या कमजोरी महसूस करते हैं, तो ये जूस तुरंत एनर्जी देने में मदद करता है. इसके अलावा ये पेट के लिए भी हल्का होता है, जिससे डाइजेशन सही रहता है. कई लोग इसे वेट लॉस डाइट में भी शामिल करते हैं क्योंकि ये लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है.
घर पर कैसे बनाएं अमरूद का जूस
अक्सर लोग सोचते हैं कि जूस बनाना झंझट वाला काम है, लेकिन ये रेसिपी बेहद आसान है. बस कुछ मिनट और आपका ठंडा-ठंडा जूस तैयार.
सामग्री
-2 पके हुए अमरूद (कटे हुए)
-2 कप ठंडा पानी
-1 बड़ा चम्मच शहद या चीनी
-1 छोटा चम्मच नींबू का रस
-बर्फ के टुकड़े जरूरत के अनुसार
बनाने का तरीका
-सबसे पहले अमरूद को अच्छे से धो लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें, अगर आपको बीज पसंद नहीं हैं, तो सख्त हिस्सा हटा सकते हैं. अब इन टुकड़ों को ब्लेंडर में डालें और साथ में एक कप ठंडा पानी मिलाएं. इसे अच्छी तरह ब्लेंड करें ताकि स्मूद पल्प बन जाए.
-अब इस मिश्रण को छलनी से छान लें, जिससे जूस हल्का और स्मूद हो जाए. इसके बाद इसमें बाकी का ठंडा पानी डालें और साथ में शहद या चीनी मिलाएं. अब नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. आखिर में बर्फ के टुकड़े डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें.
स्वाद बढ़ाने के छोटे टिप्स
अगर आप जूस में थोड़ा ट्विस्ट चाहते हैं, तो इसमें पुदीने की कुछ पत्तियां डाल सकते हैं. इससे फ्लेवर और भी फ्रेश लगेगा. कुछ लोग इसमें चुटकी भर काला नमक भी डालते हैं, जिससे स्वाद और बढ़ जाता है.
कब पिएं ये जूस?
गर्मी के दिनों में दोपहर के वक्त ये जूस सबसे ज्यादा राहत देता है, अगर आप बाहर से आए हैं या बहुत थकान महसूस हो रही है, तो एक गिलास अमरूद का जूस आपको तुरंत तरोताजा कर सकता है.
बाजार के ड्रिंक्स से क्यों बेहतर?
आजकल बाजार में मिलने वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक्स में प्रिजर्वेटिव और ज्यादा शुगर होती है. ये स्वाद में भले अच्छे लगें, लेकिन हेल्थ के लिए सही नहीं होते. इसके मुकाबले घर पर बना अमरूद का जूस पूरी तरह फ्रेश और केमिकल-फ्री होता है.


