Wednesday, July 8, 2026
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बारिश आते ही बदल जाता है कर्नाटक का बाजार! यहां मिलते हैं ऐसे स्वाद, लोग सालभर करते इंतजार


Karnataka Monsoon Food: बारिश का मौसम सिर्फ ठंडी हवाओं और हरियाली का ही नहीं, बल्कि नए स्वादों का भी मौसम होता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून अपने साथ कई खास मौसमी व्यंजन लेकर आता है, लेकिन उत्तर कर्नाटक की बात कुछ अलग है. यहां पहली अच्छी बारिश के बाद स्थानीय बाजारों का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाता है. साधारण दिखने वाली गलियां अचानक ऐसे बाजारों में बदल जाती हैं, जहां मिट्टी की खुशबू, ताजे मसालों की महक और पारंपरिक व्यंजनों की भाप हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है. इन बाजारों में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ साल के बाकी महीनों में दिखाई ही नहीं देते.

यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक भी इन मौसमी स्वादों का इंतजार करते हैं, अगर आप खाने के शौकीन हैं और अलग-अलग जगहों की पारंपरिक डिशेज़ चखना पसंद करते हैं, तो उत्तर कर्नाटक के मानसून बाजार आपके लिए किसी फूड फेस्टिवल से कम नहीं हैं.

मानसून के साथ बदल जाती है बाजारों की पहचान
उत्तर कर्नाटक में बारिश शुरू होते ही स्थानीय किसान, जंगलों से जुड़े समुदाय और छोटे व्यापारी अपने-अपने खास उत्पाद लेकर बाजार पहुंचने लगते हैं. सुबह से शाम तक इन बाजारों में लोगों की भीड़ बनी रहती है. यहां मिलने वाले ज्यादातर खाद्य पदार्थ सीधे खेतों, जंगलों और नदियों से आते हैं, इसलिए इनमें ताजगी का अलग ही स्वाद महसूस होता है.

1. जंगली मशरूम की बढ़ जाती है मांग
मानसून के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जंगली मशरूम की होती है. पहली तेज बारिश के कुछ ही दिनों बाद जंगलों की जमीन पर कई तरह के मशरूम उग आते हैं. इन्हें स्थानीय लोग बेहद सावधानी से इकट्ठा करते हैं और बाजार में बेचते हैं. इन मशरूम से बनने वाली कुम्मू पल्य नाम की पारंपरिक करी उत्तर कर्नाटक की पहचान मानी जाती है. ताजे पिसे मसालों और देसी तरीके से पकाई गई यह करी अपने मिट्टी जैसे गहरे स्वाद के लिए जानी जाती है.

2. आलंदी कुम्मु की खास पहचान
जंगली मशरूम की कई किस्मों में आलंदी कुम्मु सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, इसलिए इसकी मांग भी काफी रहती है. स्थानीय परिवार इसे खास अवसरों पर बनाते हैं और इसे मानसून की सबसे अनमोल सौगात मानते हैं.

3. नदियों से बाजार तक पहुंचते ताजे केकड़े
बारिश के दिनों में नदियां और मौसमी नाले पानी से भर जाते हैं. इसी समय बड़ी संख्या में ताजे केकड़े भी मिलने लगते हैं. स्थानीय बाजारों में इनकी अच्छी खासी बिक्री होती है.

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4. मसालेदार केकड़े का स्वाद
सड़क किनारे लगे ठेलों और छोटे भोजनालयों में इन केकड़ों को पारंपरिक मसालों के साथ पकाया जाता है. कहीं इन्हें खुली आंच पर भुना जाता है तो कहीं गाढ़ी ग्रेवी में तैयार किया जाता है. बारिश की ठंडी शाम में यह व्यंजन स्थानीय लोगों की पहली पसंद माना जाता है.

5. केम्बु सुली भी मानसून की खास पहचान
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ने वाले छोटे अरबी यानी टारो के अंकुरों से बनने वाली केम्बु सुली भी काफी लोकप्रिय है. इसके कोमल डंठलों को काटकर खट्टे और मसालेदार स्वाद वाली करी में पकाया जाता है. यह व्यंजन ग्रामीण इलाकों के घरों में लंबे समय से बनाया जाता रहा है और आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है.

6. हल्दी की पत्तियों में बनता है खुशबूदार कदुबु
मानसून के दौरान हल्दी के पौधे तेजी से बढ़ते हैं. उनकी बड़ी और सुगंधित पत्तियों का इस्तेमाल कदुबु बनाने में किया जाता है.

7. मौसमी भरावन से बढ़ता है स्वाद
कदुबु के अंदर खीरा, कद्दू, कटहल जैसी मौसमी सामग्री भरी जाती है. इसके बाद इसे हल्दी की पत्तियों में लपेटकर भाप में पकाया जाता है. पत्तियों की प्राकृतिक खुशबू इस व्यंजन का स्वाद और भी खास बना देती है. इसे अक्सर मसालेदार चटनी के साथ परोसा जाता है.

8. जोलड़ा रोटी के बिना अधूरा है भोजन
उत्तर कर्नाटक के पारंपरिक भोजन की बात हो और जोलड़ा रोटी का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. ज्वार के आटे से बनने वाली यह पतली रोटी बिना तेल के तैयार की जाती है. गर्मागर्म रोटी को मसालेदार करी, दाल और चटनियों के साथ परोसा जाता है. इसके साथ परोसी जाने वाली बादनकेई एन्नेगई, झुणका और शेंगा चटनी पुड़ी जैसे व्यंजन इस क्षेत्र की समृद्ध पाक परंपरा को दर्शाते हैं. हर व्यंजन में स्थानीय मसालों का ऐसा संतुलन होता है जो स्वाद को लंबे समय तक यादगार बना देता है.



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टटीरी ओवरब्रिज पर रास्ता बंद करने का विरोध: भाकियू ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा – Baghpat News




बागपत की अग्रवाल मंडी टटीरी में निर्माणाधीन ओवरब्रिज को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। भाकियू ने बागपत की ओर ओवरब्रिज समाप्त होने के बाद दीवार और ग्रिल लगाए जाने की योजना का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों और किसानों को भारी परेशानी होगी। यह ज्ञापन भाकियू के जिला प्रवक्ता चौधरी हिम्मत सिंह के नेतृत्व में दिया गया। ज्ञापन में बताया गया है कि जिस मार्ग को बंद करने की आशंका है, वह नौ गांवों की सहकारी समिति के गोदाम और कार्यालय तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है। इसी मार्ग से दुर्गा अतिथि धर्मशाला, डीएवी इंटर कॉलेज और नगर पंचायत कार्यालय भी जुड़े हुए हैं। किसानों के लिए यूरिया खाद ट्रकों द्वारा गोदाम तक लाई जाती है, जिसे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपने खेतों और घरों तक ले जाते हैं। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थान पर दीवार और ग्रिल लगाई जाती है, तो ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य बड़े वाहनों का आवागमन बाधित हो जाएगा। इससे किसानों के साथ-साथ विद्यालय, धर्मशाला और अन्य संस्थानों के दैनिक कार्य भी प्रभावित होंगे। संगठन ने अधिकारियों से मांग की है कि इस मार्ग को पहले की तरह खुला रखा जाए, ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो। भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों और स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो संगठन अपना विरोध जारी रखेगा। किसानों ने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जनहित में उचित निर्णय लेने की अपील की है।



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1971 में अमिताभ बच्चन ने लिया था सबसे बड़ा रिस्क, हीरो छोड़ बन बैठे विलेन


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यूं तो अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हर तरह की जॉनर की फिल्म में काम किया. कभी वह एक्शन करते दिखाई दिए तो कभी रोमांस. लेकिन 1971 में उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया. जिस फिल्म को संजीव कुमार ने ठुकरा दिया था. उन्होंने इसे करने का फैसला लिया.

दरअसल बात ये थी कि अमिताभ बच्चन साल 1971 में करियर में बड़ा जोखिम उठाते हुए नेगेटिव रोल को स्वीकार किया. वह फिल्म में विलेन बनने का फैसला लेते हैं. तो चलिए बताते हैं आखिर इस फिल्म को करने का रिस्क बिग बी को कितना महंगा पड़ा था.

हम बात कर रहे हैं साल 1971 में आई अमिताब बच्चन की फिल्म ‘परवाना’ की जिसे एक महिला डायरेक्टर ज्योति स्वरूप ने डायरेक्ट किया था. ज्योति 60-70 के दशक की इकलौती कमान संभालने वाली महिला निर्देशक थीं.

‘परवाना’ फिल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन के अलावा नवीन निश्चल, मिथुन चक्रवर्ती की पत्नी योगिता बाली से लेकर ओम प्रकाश जैसे सितारे थे. वहीं शत्रुघ्न सिन्हा का स्पेशल अपीरियंस भी था.

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‘परवाना’ में अमिताभ बच्चन ने पहली बार नेगेटिव रोल निभाया था. जहां वह एक ऐसे लवर का रोल प्ले करते हैं जो बाद में प्रेमी से हत्यारा बन जाता है. यह फिल्म साल 2007 की जॉनी गद्दार से प्रेरित थी.

फिल्म में अमिताभ बच्चन ने कुमार सेन का तो नवीन निश्चल ने राजेश्वर और योगिता बाली ने आशा का किरदार निभाया था. फिल्म में मदन मोहन ने म्यूजिक दिया था तो कैफी आजमी ने लिरिक्स लिखे थे.

फिल्म की कहानी का बात करें तो कुमार सेन (अमिताभ बच्चन) आशा (योगिता बाली) से बेतहाशा मोहब्बत करता है और शादी करना चाहता है. मगर आशा को अमीर चाय बागान मालिक राजेश्वर से प्यार हो जाता है.

अब प्रेमिका को किसी और का होता कुमार देख नहीं पाता और वह जलन में आशा के चाचा की हत्या कर देता है. कुमार इस हत्या का इल्जाम राजेश्वर पर लगा देता है. इस तरह अमिताभ बच्चन का किरदार प्रेमी से हत्यारा बन जाता है.

‘परवाना’ फिल्म अंत में दर्दनाक मोड़ लेती है. जब कुमार को अपनी गलती का एहसास होता है तो वह सच कबूल करता है और आत्महत्या कर लेता है. परवाना फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.

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क्या है BharatFS AI सिस्टम? 24 घंटे मिलेगा भारी बारिश का अलर्ट, जानें कैसे करता है काम


महाराष्ट्र ने हाल ही में AI बेस्ड BharatFS सिस्टम लागू किया है। यह स्वदेशी सिस्टम 24 घंटे पहले बारिश और खराब मौसम की जानकारी देता है। देश के अन्य राज्यों में भी इस सिस्टम को आने वाले दिनों में अपनाया जा सकता है। इस सिस्टम की मदद से बारिश का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम की वजह से महाराष्ट्र के नासिक में बादल फटने से होने वाली तबाही से बचा जा सका है।

लगा सकता है सटीक अनुमान

BharatFS AI यानी भारत फोरकास्ट सिस्टम को देश के दो सबसे हाई-परफॉर्मेंस सुपर कम्प्यूटर्स Arka-IITM पुणे और अरुणिका (NCMRWF नोएडा) की मदद से चलाया जाता है। यही कारण है कि भारत का यह घरेलू फोरकास्ट सिस्टम बेहद सटीक अनुमान लगा सकता है। इसकी खास बात ये है कि यह रियल टाइम में फोरकास्ट को समय-समय पर अपडेट करता है। एआई फीचर होने की वजह से इस सिस्टम के जरिए कम रेंज में भी बेहतर सटीकता के साथ मौसम का अनुमान लगाया जा सकता है।

क्या है खास?

BharatFS AI सिस्टम को IITM पुणे ने डेवलप किया है। इस सिस्टम में मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए एआई बेस्ड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और सुपर कम्प्यूटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम 6 किलोमीटर के एरिया में होने वाले मौसम में बदलाव को बारीकी को समझ सकता है। यही नहीं, बहुत कम एरिया में होने वाली घटनाओं को बारीकी से समझ सकता है। इसकी मदद से खराब मौसम की वजह से होने वाली घटनाओं जैसे कि कलाउड ब्रस्ट, फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइट आदि का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

BharatFS AI सिस्टम को महाराष्ट्र ने मई में अपनाया था। इसे राज्य आपदा प्रबंधन सिस्टम में शामिल किया गया है। जुलाई में हुई भारी बारिश को लेकर इस सिस्टम ने अपनी उपयोगिता साबित की, जिसकी वजह से नासिक में बादल फटने का अलर्ट 24 घंटे पहले मिल गया। आपदा विभाग ने इसकी वजह से पहले ही लोगों को अलर्ट कर दिया। इसकी वजह से प्रशासन को इसे लेकर तैयारी करने का मौका मिल गया। केरल के वायनाड में हुए भयंकर लैंडस्लाइड को भी इस सिस्टम की मदद से रोका जा सकता था। हालांकि, अन्य राज्यों में भी इस सिस्टम को जल्द लगाया जा सकता है।

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भारत में टीचर्स की संख्या अब 1 करोड़ के हुई पार, वहीं छात्रों के Dropout रेट में भी आई कमी, सरकार ने जारी किए आंकड़े


अब देश भर के लगभग 14.66 लाख (14,66,682) स्कूलों में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके साथ देश में लगभग 24.72 करोड़ स्टूडेंट हैं। वहीं बात अगर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों यानी Dropout की करें तो उनका दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत था जो घटकर अब यानी 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की UDISE रिपोर्ट में दी गई है।

जारी रिपोर्ट में और क्या बताया है?

शिक्षा मंत्रालय की तरफ  से जारी रिपोर्ट की मानें तो देश भर के सभी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों की संख्या 2022-23 में 94.8 लाख थी जो 2023-24 में बढ़कर 98 लाख हो गई और 2024-25 में 1.01 करोड़ के साथ एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। अगर 2025-26 की बात करें तो इस वर्ष में शिक्षकों की यह संख्या 1.02 करोड़ हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इसे ‘भारत में स्कूली शिक्षा के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि’ बताया है और इस उपलब्धि का श्रेय समग्र शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 जैसी योजनाओं को दिया है।

स्कूल छोड़ने वालों की दर में आई कमी

उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘प्रिपरेटरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत थी जो घटकर 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गई। वहीं सेकेंडरी लेवल पर यह 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो गई।’

स्कूलों में एडमिशन भी बढ़े

ड्रापआउट कम होने के साथ ही साथ स्कूलों में कुल दाखिले भी बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 24.6 लाख से बढ़कर 24.72 लाख हो गए हैं, हालांकि सरकारी संस्थानों में दाखिले 26.8 लाख कम हुए हैं, जो 2024-25 में 12.1 करोड़ से घटकर इस साल 11.8 करोड़ हो गए। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में दाखिले में लगभग 30 लाख छात्रों की बढ़ोतरी देखी गई।

इसके अलावा, अलग-अलग स्तरों पर दाखिले के पैटर्न में भी बदलाव आया है। 2023-24 और 2025-26 के बीच सेकेंडरी स्कूल में दाखिले लगभग 31.5 लाख बढ़े, जबकि प्रीपरेटरी स्तर पर दाखिले 42 लाख कम हुए। सेकेंडरी स्तर पर GRE 2023-24 में 68.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 71.7 प्रतिशत हो गया।

ज़ीरो एनरोलमेंट और सिंगल टीचर वाले स्कूल

यह रिपोर्ट ज़ीरो एनरोलमेंट (बिना दाखिले वाले) स्कूलों और सिंगल टीचर (एक शिक्षक) वाले स्कूलों की संख्या में कमी को भी दिखाती है। पिछले सालों की तुलना में इस साल सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 3% की कमी आई है। इसी तरह, ज़ीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या में भी लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है।

बेहतर ट्रांज़िशन रेट भी दिखा

जारी रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा एकेडमिक ईयर में शिक्षा के अलग-अलग चरणों के बीच ट्रांज़िशन रेट (एक चरण से दूसरे चरण में जाने की दर) में भी सुधार देखा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह सुधार शिक्षा प्रणाली में छात्रों की बेहतर प्रगति को दर्शाता है और यह भी बताता है कि ज्यादा छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़े बिना अपनी पढ़ाई जारी रखी। वहीं फाउंडेशनल से प्रीपरेटरी लेवल तक ट्रांज़िशन रेट 2024-25 में 98.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 99.2 प्रतिशत हो गया।

शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी डेटा से यह भी पता चलता है कि मिडिल और सेकेंडरी चरणों में भी ट्रांज़िशन रेट बढ़ा है। प्रीपरेटरी से मिडिल लेवल में 92.2 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत और मिडिल से सेकेंडरी चरण में 2024-25 में 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 88.3 प्रतिशत हो गया है।

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‘स्टिंग’ एनर्जी ड्रिंक की 92 हजार बोतलें और केन सीज: अलवर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई; पैकिंग पर भ्रामक जानकारी की शिकायत – Alwar News



अलवर के एमआईए में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की 92 हजार बोतल व केन सीज की हैं।

अलवर जिले में ‘स्टिंग’ (Sting) एनर्जी ड्रिंक की करीब 92 हजार बोतलें और केन सीज की गईं। सीएमएचओ अलवर की फूड सेफ्टी टीम ने मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (MIA) स्थित पेप्सी बनाने वाली कंपनी ‘वरुण बेवरेजेस लिमिटेड’ के गोदाम (प्लॉट नंबर 208) पर छापा मारा। गोदाम

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अलवर में पहली बार किसी एनर्जी ड्रिंक ब्रांड पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। टीम ने मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवाए हैं। इसकी रिपोर्ट 14 दिनों में आएगी।

विभाग के अनुसार- एनर्जी ड्रिंक पर लिखी जानकारी भ्रामक है।

डिब्बे और बोतल पर लिखी जानकारी गुमराह करने वाली

फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता ने बताया- विभाग को शिकायत मिली थी कि इस एनर्जी ड्रिंक की पैकिंग पर केफेनेटेड बेवरेज स्टिंग एनर्जी लिखा है। इस पर स्टीमूलेट्स माइंड, एर्नजाइजेस बॉडी, सेम ग्रेट टेस्ट आदि भ्रामक सूचनाओं की शिकायत है। इसी शिकायत के आधार पर तुरंत एक्शन लेते हुए गोदाम में मौजूद स्टॉक को सीज किया गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

मेवात क्षेत्र में सबसे ज्यादा खपत, रोजाना हजारों की बिक्री

अलवर जिले और खासकर मेवात क्षेत्र में इन दिनों एनर्जी ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ी है। युवाओं के बीच इसके बढ़ते क्रेज के कारण रोजाना हजारों की संख्या में इसकी खपत हो रही है। बाजार में कई कंपनियों की एनर्जी ड्रिंक धड़ल्ले से बिक रही हैं। इसके चलते अब विभाग अलर्ट मोड पर है।

कार्रवाई में यह टीम रही शामिल

इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता, जयसिंह यादव और अशोक लखेरा सहित विभाग के अन्य सदस्य मौजूद थे। टीम ने कहा- मिलावटखोरों और भ्रामक जानकारी देकर सामान बेचने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।



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मां के लिव-इन-पार्टनर की बेटे ने की हत्या, VIDEO: मृतक चिल्लाता रहा- मैंने कुछ नहीं किया, गुजरात के राजकोट की घटना




गुजरात के राजकोट जिले के जेतपुर शहर में मां के 12 साल पुराने लिव-इन रिश्ते से नाराज बेटे ने बीच सड़क पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर व्यक्ति की हत्या कर दी। आरोपी ने दौड़ाकर मृतक के शरीर पर चाकू के 6 वार किए। इस दौरान मृतक मदद की गुहार लगाकर चिल्लाता रहा कि मैंने कुछ नहीं किया है, लेकिन आरोपी उस पर चाकुओं के वार करता गया। आरोपी उसे घायल हालत में छोड़कर फरार हो गया था, जिसे मंगलवार की देर रात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। CCTV में वारदात की 3 तस्वीरें… मजदूरी करता था मृतक पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक कमलेश वाघेला पेशे से मजदूर था और इसी इलाके में रहता था। वह आरोपी की मां के साथ पिछले 12 सालों से लिव-इन रिलेशन में था। वायरल CCTV फुटेज के ऑडियो में सुनाई देता है कि घायल कमलेश वाघेला आसपास मौजूद लोगों से अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहा है. साथ ही वह आरोपी जयंत वाघेला से भी रहम की अपील करता दिखाई देता है। कमलेश कहता है-मैंने किसी का कुछ नहीं किया है। वहीं, जवाब में जयंत कहता है- मैंने तुम्हें मना किया था कि नहीं। CCTV फुटेज में जयंत के साथ एक अन्य व्यक्ति भी दिखाई दे रहा है। वह व्यक्ति कौन है, इसे लेकर भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। मां के साथ रहना पसंद नहीं था पुलिस की पूछताछ में जयन वाघेला ने बताया कि उसे कमलेशभाई वाघेला का उसकी मां के साथ रहना पसंद नहीं था। वह पहले भी कई बार उसे समझाइश दे चुका था कि वह उसकी मां से मिलने घर न आया करे। लेकिन वाघेला इसके बाद भी हर कभी उसके घर आ जाया करता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कमलेश और आरोपी की मां नीता पिछले 12 साल से लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रह रहे थे। इस दौरान मृतक कमलेश वाघेला ने नीता की बेटी की भी शादी करवाई थी। वहीं, नीता के अन्य दो बेटे राजकोट के कोठारिया इलाके में रहते हैं। इन्हीं में से एक जयंत ने कमलेश की हत्या की। —————– ये खबर भी पढ़ें… एक पति, दो लिव इन पार्टनर, फिर मर्डर:भाई को फोन पर कहा था- वो धमकी दे रहा है 11 साल पहले सात फेरे लेकर नई जिंदगी शुरू की। दो बच्चों की मां बनी, लेकिन वक्त के साथ रिश्ते बदलते चले गए। पति से अलग होकर उसी के दोस्त से शादी कर ली। वहां भी रिश्ता नहीं टिक पाया तो दूसरे पति के रिश्तेदार के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगी। पूरी खबर पढ़ें…



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नरसिंहपुर में रेल ट्रैक पर फंसी ट्रैक्टर-ट्राली: ढलान पर मलबा भरते समय पटरियों पर लुढ़की; ड्राइवर पर रेल अधिनियम में केस – Narsinghpur News




नरसिंहपुर शहर के पुराने बरगी रेलफाटक के पास मंगलवार शाम एक ट्रैक्टर-ट्राली बेकाबू होकर इटारसी-जबलपुर डाउन रेल ट्रैक पर जा फंसी। ढलान पर मलबा लोड करते समय वजन बढ़ने के कारण यह हादसा हुआ। घटना के वक्त पटरियों पर कोई ट्रेन नहीं थी, जिससे एक बड़ा रेल हादसा टल गया। सूचना मिलते ही आरपीएफ और कोतवाली पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। बुधवार को घटना का एक वीडियो सामने आया है। जेसीबी की मदद से हटाया ट्रैक्टर रेल पुलिस अधिकारी पुष्पेंद्र कुमार नामदेव ने बताया कि यह घटना मंगलवार शाम करीब 4 बजकर 52 मिनट पर हुई। इटारसी-जबलपुर डाउन ट्रैक के बीच ट्रैक्टर-ट्राली फंसने की खबर मिलते ही आरपीएफ टीम तुरंत मौके पर पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए तत्काल स्टेशन अधीक्षक को सूचना दी गई, ताकि उस रूट पर आने वाली ट्रेनों को समय रहते रोका जा सके। इसके बाद टीम ने जेसीबी मशीन बुलवाकर ट्रैक्टर-ट्राली को सुरक्षित रूप से ट्रैक से बाहर खींचा। इस दौरान ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं हुआ। आधा घंटा पहले ही गुजरी थी संघमित्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर के पटरियों पर गिरने से करीब आधा घंटा पहले, शाम 4 बजकर 12 मिनट पर संघमित्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस इसी डाउन ट्रैक से गुजरी थी। यदि ट्रेन के आवागमन के दौरान यह ट्रैक्टर रेल ट्रैक पर लुढ़क जाता, तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। घटना का एक वीडियो भी बुधवार दोपहर सोशल मीडिया पर सामने आया है। लापरवाही पर रेल अधिनियम के तहत केस दर्ज, ट्रैक्टर जब्त पूछताछ में ट्रैक्टर के मालिक और चालक बेनीप्रसाद प्रजापति ने बताया कि वह रेल लाइन के किनारे एक निजी व्यक्ति का मलबा भर रहा था। उसने सुरक्षा के लिए ट्रैक्टर के पहियों के नीचे पत्थर भी लगाए थे, लेकिन ट्राली में वजन ज्यादा होने के कारण वह ढलान पर रुक नहीं पाया और सीधे पटरियों पर जा गिरा। आरपीएफ ने चालक की इस गंभीर लापरवाही पर उसके खिलाफ रेल अधिनियम की धारा 154 के तहत मामला दर्ज कर ट्रैक्टर को जब्त कर लिया है।



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जख्मी दो युवक को BJP MLA ने पहुंचाया हॉस्पिटल: भागलपुर में सड़क दुर्घटना के बाद NH किनारे पड़े थे, विधायक बोले- जनसेवा मेरा दायित्व – Bhagalpur News




भागलपुर के पीरपैंती के भाजपा विधायक मुरारी पासवान ने सड़क दुर्घटना में घायल दो युवकों को बारिश के बीच हॉस्पिटल पहुंचाया। बुधवार को मिर्जाचौकी क्षेत्र से लौटने के दौरान कटुआ पहाड़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर उन्हें बसंतपुर गांव के दो युवक सड़क किनारे गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े मिले। दुर्घटना में एक युवक के सिर में गंभीर चोट लगी थी और वह बेहोश था, जबकि दूसरा भी घायल था। विधायक ने तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना देने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं होने पर उन्होंनेएसएसपी को घटना की जानकारी दी। इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई और एंबुलेंस के पहुंचने में देरी होता देख उन्होंने समय गंवाना उचित नहीं समझा। अपने सहयोगियों की मदद से दोनों घायलों को निजी गाड़ी में बैठाकर पीरपैंती ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों से मिलकर उनका तत्काल इलाज शुरू कराया। विधायक ने अस्पताल में दोनों युवकों का हालचाल भी जाना और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। फिलहाल, दोनों घायलों का इलाज जारी है। विधायक मुरारी पासवान ने कहा कि वे एक भाजपा कार्यकर्ता के अंतिम दर्शन कर लौट रहे थे, तभी कटुआ पहाड़ के पास सड़क दुर्घटना में घायल दो युवक दिखाई दिए। एक युवक बेहोश था और उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। विधायक बोले- जनसेवा मेरा सबसे बड़ा दायित्व पहले पुलिस को सूचना देने का प्रयास किया गया, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिलने और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए उन्होंने स्वयं घायलों को अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। विधायक ने कहा, “जनसेवा मेरा सबसे बड़ा दायित्व है। ऐसी स्थिति में किसी घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी मानव सेवा है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहिया गाड़ी चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें, शराब पीकर वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ सकती है। विधायक ने आगे बताया कि दरोगा को फोन करने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाद में एसएसपी प्रमोद कुमार यादव को फोन करने पर उन्होंने फोन उठाया।



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लाख मनाने पर भी नहीं माना गीतकार, फीस पर अटकी बात, मायूस डायरेक्टर ने खुद लिख डाला सुपरहिट


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फिल्म ‘हवस’ के गाने ‘तेरी गलियों में न रखेंगे कदम’ का दिलचस्प किस्सा. सावन कुमार टाक ने मजरूह सुल्तानपुरी से फीस कम करने को कहा, पर उन्होंने मना कर दिया.

साल 1974 में एक फिल्म आई थी ‘हवस’, जिसमे अनिल धवन, नीतू सिंह, बिंदु और विनोद मेहरा जैसे कलाकारों ने काम किया था. फिल्म में रेखा का भी स्पेशल रोल था.इस फिल्म के मशहूर डायरेक्टर सावन कुमार टाक ने बनाया था. जिन्होंने बॉलीवुड में साजन बिना सुहागन, सौतन, सनम बेवफा, से लेकर सौतन जैसी कई हिट फिल्में बनाईं.

इस फिल्म का दिलचस्प किस्सा है इसके एक हिट गाने का. वो गाना जिसे लिखवाने के लिए डायरेक्टर ने खूब पापड़ बेले. लिरिसिस्ट ने मुंह मांगे पैसे मांगे तो निर्देशक मुंह लटकाकर अपने घर आ गए. इसी दर्द के बीच ‘तेरी गलियों में न रखेंगे कदम’ का जन्म हुआ.

जब सावन कुमार ‘हवस’ फिल्म बना रहे थे तब उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. इससे पहले आई उनकी ‘गौमती के पार’ कतई फ्लॉप हो गई थी और उनकी हालत ठीक नहीं थी. अब जब वह ‘हवस’ बना रहे थे तो वह फिल्म के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते थे. ऐसे में उन्होंने कम बजट में सबकुछ बेस्ट करने का सोचा.

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हुआ ये था कि सावन कुमार गाने लिखवाने के लिए मशहूर लिरिसिस्ट मजरूह सुल्तानपुरी के पास पहुंचे थे. दोनों ने लंबी मीटिंग की. सावन ने मजरूह सुल्तानपुरी के घर पर ही ये मीटिंग की थी. दोनों ने फिल्म और गाने की बातचीत के साथ डिनर भी किया. फिर बात आई फीस पर.

मजरूह सुल्तानपुरी ने साफ साफ कहा कि वह फिल्म के गाने लिखने के लिए 25 हजार लेंगे. सावन कुमार ने उन्हें बताया कि बजट थोड़ा कम है. ऐसे में वह सिर्फ एक ही गाना लिखवाना चाहते हैं.

तो थोड़ी फीस कम कर लें. मगर मजरूह सुल्तानपुरी ने साफ कह दिया था कि वह फिल्म के चार गाने लिखवाएं या एक वह पैसे पूरे ही लेंगे.

सावन कुमार बुरी तरह निराश हो गए. वह मुंह लटाकर उनके घर से निकल गए. जब वह लौट रहे थे तो उनके मन में एक ही लाइन आई ‘अब इनकी गलियों में कदम नहीं रखूंगा’.

बस यही बात हवस के गाने की अहम लाइन बनी. उन्होंने फिर खुद ही म्यूजिक कंपोजर ऊषा खन्ना के साथ गाने तैयार किए. हवस के गाने खुद फिल्म के डायरेक्टर ने ही तैयार किए थे.

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