सीरिया की राजधानी दमिश्क में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दौरे के बीच मंगलवार को धमाका हुआ है। यह ब्लास्ट उस होटल के पास हुआ है, जहां मैक्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय लोगों ने एक साथ कई धमाकों की आवाज सुनी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियोज में इलाके से धुआं भी उठता देखा गया। धमाके के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। फिलहाल किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। अधिकारियों ने धमाके के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मैक्रों, बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद दमिश्क का दौरा करने वाले यूरोपीय संघ (EU) के पहले बड़े नेता हैं। धमाके से जुड़ी 3 फुटेज… तख्तापलट के बाद सीरिया पहुंचने वाले मैक्रों पहले बड़े यूरोपीय नेता मैक्रों सोमवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पहुंचे थे। बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद वह सीरिया का दौरा करने वाले पहले बड़े यूरोपीय नेता बन गए हैं। दमिश्क एयरपोर्ट पर सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मैक्रों ने राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने ऐतिहासिक उमय्यद मस्जिद का भी दौरा किया। मैक्रों के दौरे में सीरिया के पुनर्निर्माण, विदेशी निवेश, सुरक्षा सहयोग और आतंकवाद विरोधी अभियान प्रमुख एजेंडा हैं। दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, वित्त और ऊर्जा क्षेत्र में कई समझौतों पर भी चर्चा हो रही है। खबर लगातार अपडेट हो रही है….
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सीरिया में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के बीच धमाका: जिस होटल में ठहरे थे उसके पास ब्लास्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई
भाजपा विधायक ने पसका-गोंडा रोडवेज बस सेवा शुरू की: छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को जिला मुख्यालय आने में मिली सुविधा – Gonda News
गोंडा जिले के कर्नलगंज विधानसभा क्षेत्र में सीएम ग्राम परिवहन योजना के तहत पसका-गोंडा रोडवेज बस सेवा का आज मंगलवार को शुभारंभ किया गया। भाजपा विधायक अजय कुमार सिंह ने आज मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे पसका पहुंचकर इस बस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सेवा मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के तहत शुरू की गई है। पसका क्षेत्र के लोग लंबे समय से परिवहन विभाग से रोडवेज बस चलाने की मांग कर रहे थे। स्थानीय विधायक अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में कई बार शासन को पत्र लिखा था, जिसके बाद बस सेवा को मंजूरी मिली। इस बस सेवा के शुरू होने से पसका और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों को जिला मुख्यालय आने-जाने में सुविधा मिलेगी। इससे लंबे समय से चली आ रही परिवहन की समस्या का समाधान होगा। पहले लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए किराए के साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। विधायक अजय सिंह ने बताया कि यह सेवा श्रद्धालुओं, मरीजों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। उन्होंने कहा कि पहले मरीजों को इलाज के लिए, बच्चों को शिक्षा के लिए, व्यापारियों को व्यापार के लिए और महिलाओं को बाजार जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। रोडवेज बस सेवा शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने भाजपा विधायक अजय सिंह और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का आभार व्यक्त किया है। विधायक ने कहा कि मेरे द्वारा परिवहन विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा गया था। मेरे पत्र के आधार पर ही रोडवेज बस चलाई जाने की अनुमति मिली थी, जिसका आज मेरे द्वारा हरी झंडी दिखा करके शुभारंभ किया गया। सुबह और शाम दोनों टाइम यहां से रोडवेज बस गोंडा जाएगी और गोंडा से यहां पर आएगी।
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घर पर 3 दिन में कैसे बनाएं बाजार जैसा स्वादिष्ट आम का अचार, जानिए आसान रेसिपी!
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How To Make Mango Pickle: अगर आप सोचते हैं कि स्वादिष्ट आम का अचार बनाने में कई दिन लगते हैं, तो ऐसा नहीं है. सही सामग्री और आसान विधि अपनाकर आप सिर्फ 3 दिन में बाजार जैसा स्वादिष्ट आम का अचार तैयार कर सकते हैं.
How To Make Mango Pickle: गर्मियों के आते ही हर घर की रसोई में कच्चे आम के अचार की खुशबू फैलने लगती है. आम का अचार भारतीय खाने का एक अहम हिस्सा है, जो दाल-चावल या पराठे जैसे सादे खाने का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देता है. अगर आपको लगता है कि आम का अचार बनाने में कई दिन लगते हैं, तो ऐसा नहीं है सही सामग्री और आसान तरीके से आप सिर्फ़ तीन दिनों में बाज़ार जैसा स्वादिष्ट आम का अचार बना सकते हैं. आइए, इस आसान रेसिपी पर एक नज़र डालते हैं…

बनाने के लिए सामग्री : 1 किलो कच्चा आम, 100 ग्राम सरसों का तेल, 2 बड़े चम्मच नमक, 2 बड़े चम्मच सौंफ, 2 बड़े चम्मच सरसों के दाने, 1 बड़ा चम्मच मेथी दाना, 1 बड़ा चम्मच हल्दी पाउडर, 2 बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर, चुटकी भर हींग.

स्टेप 1: सबसे पहले, कच्चे आमों को अच्छी तरह धो लें और उन्हें एक साफ़ कपड़े से पूरी तरह सुखा लें. उन्हें छोटे टुकड़ों में काट लें और गुठलियां हटा दें. ध्यान रखें कि आमों पर बिल्कुल भी नमी न रहे.
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स्टेप 2: एक पैन में मेथी दाने को हल्का भून लें. फिर, उन्हें सौंफ़ और राई (सरसों के दाने) के साथ दरदरा पीस लें. अचार का मसाला बनाने के लिए इसमें हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, नमक और हींग मिलाएं.

स्टेप 3: सरसों के तेल को अच्छी तरह गरम करें. जब तेल से धुआं निकलने लगे, तो आंच बंद कर दें और इसे पूरी तरह ठंडा होने दें.

स्टेप 4: कटे हुए आम के टुकड़ों में तैयार मसाला मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स करें. इसके बाद, ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालें और सब कुछ अच्छी तरह मिला लें.

स्टेप 5: अचार को पूरी तरह साफ़ और सूखे कांच के जार में डालें. ध्यान रखें कि जार के अंदर बिल्कुल भी नमी न हो.

स्टेप 6: 3 अचार के जार को लगातार तीन दिनों तक रोज़ाना 3-4 घंटे धूप में रखें. बीच-बीच में, साफ़ और सूखे चम्मच से अचार को धीरे-धीरे चलाएं ताकि मसाले और तेल अच्छी तरह मिल जाएं.

अगर आप घर पर जल्दी से स्वादिष्ट और चटपटा आम का अचार बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी आपके लिए एकदम सही है. इस 3-दिन वाले तरीके से बना अचार लंबे समय तक अपना स्वाद बनाए रखता है और हर खाने का मज़ा दोगुना कर देता है.
iQOO 16 भारत में नहीं होगा लॉन्च, कंपोनेंट की बढ़ती कीमत बनी वजह
iQOO 16 के बारे में बड़ी खबर सामने आ रही है। टिप्स्टर ने दावा किया है कि आईकू का यह फ्लगैशिप फोन भारतीय बाजार में लॉन्च नहीं किया जाएगा। कंपनी इसे केवल चीन और चुनिंदा मार्केट में पेश करेगी। वहीं, iQOO Z11 की भारत में लॉन्चिंग कंफर्म हो गई है। यह मिड बजट फोन जल्द भारतीय बाजार में पेश किया जाएगा। Vivo के सब ब्रांड ने इस साल iQOO 15 लॉन्च किया है, जो Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट पर काम करता है।
iQOO 16 भारत में नहीं होगा लॉन्च
टिप्स्टर योगेश बरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया है कि iQOO 16 इस साल भारत में लॉन्च नहीं होगा। कंपोनेंट के प्राइस में इजाफा होने की वजह से इस फोन की कीमत 85,000 रुपये तक पहुंच सकती है। ऐसे में भारतीय बाजार में फोन की प्लेसिंग मुश्किल लग रही है। वहीं, कंपनी भारत में केवल Z सीरीज के फोन लॉन्च करने वाली है। अन्य किसी भी सीरीज को पेश करने का इरादा नहीं है।
बता दें कि iQOO 15 को भारत में 72,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। कंपनी अब भारत में केवल Z सीरीज का फोन पेश करेगी। इस सीरीज के अपकमिंग फोन iQOO Z11 को कंपनी ने टीज करना शुरू कर दिया है। इस सीरीज को जल्द भारतीय बाजार में पेश किया जाएगा।
iQOO Z11 सीरीज की लॉन्चिंग कंफर्म
iQOO इंडिया के CEO निपुण मार्या ने अपने X हैंडल से एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें Z11 Series के स्मार्टफोन होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, निपुण मार्या ने फोन का नाम और मॉडल रिवील नहीं किया है। बता दें iQOO Z11 को पिछले दिनों ही चीनी मार्केट में लॉन्च किया गया है। यह फोन MediaTek Dimensity 8500 चिपसेट के साथ आता है। वहीं, मलेशिया में फोन को Qualcomm Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट के साथ पेश किया गया है।
iQOO का यह फोन 6.83 इंच के AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। फोन के डिस्प्ले का रेजलूशन 1.5K है और इसमें 9020mAh की बैटरी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, iQOO के इस फोन को भारत में इसी महीने लॉन्च किया जा सकता है। फोन की कीमत 30,000 रुपये की रेंज में होगी। इसमें 12GB रैम और 256GB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा।
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राजेश खन्ना-अमिताभ बच्चन सहित, 70-80s में बॉलीवुड को 4 सुपरस्टार देने वाले 5 डायरेक्टर
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1970 और 1980 का दशक बॉलीवुड का एक जादुई दौर था, जिसने फिल्म इंडस्ट्री की परिभाषा ही बदल दी. यह वह समय था जब थिएटर के बाहर मीलों तक लाइनें लगी रहती थीं और जैसे ही कोई फिल्म स्टार स्क्रीन पर आता था, सिक्कों की बारिश होने लगती थी. लेकिन, राजेश खन्ना की रोमांटिक मुस्कान और अमिताभ बच्चन की दमदार आवाज वाले ‘एंग्री यंग मैन’ पर्सनैलिटी के पीछे, कुछ दूर की सोचने वाले लोग थे जिन्हें सिनेमा का असली आर्किटेक्ट माना जाता है. ऋषिकेश मुखर्जी, प्रकाश मेहरा, यश चोपड़ा, रमेश सिप्पी और शक्ति सामंत जैसे डायरेक्टर्स ने न सिर्फ बेहतरीन फिल्में बनाईं, बल्कि बॉलीवुड को 5 अनमोल सुपरस्टार भी दिए, जिसमें मुख्य रूप से राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और ऋषि कपूर के नाम शामिल हैं, जिन्होंने दशकों तक दर्शकों पर राज किया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में जब भी कामयाबी और स्टारडम की बात होती है, तो अक्सर सबसे पहले एक्टर्स का नाम दिमाग में आता है. लेकिन, असलियत यह है कि पत्थर को तराशकर मूर्ति बनाने का काम हमेशा कैमरे के पीछे से डायरेक्टर्स ने ही किया है. 1970 और 1980 के दशक की शुरुआत में जब देश में सामाजिक और आर्थिक बदलाव हो रहे थे, तो सिल्वर स्क्रीन पर एक नई क्रांति की जरूरत थी. उस जमाने के कुछ चुनिंदा डायरेक्टर्स ने इस जरूरत को पहचाना. उन्होंने न सिर्फ कहानियां बुनीं, बल्कि ऐसे कैरेक्टर स्ट्रक्चर भी बनाए जिन्होंने आम एक्टर्स को हमेशा आगे बढ़ने वाले सुपरस्टार्स में बदल दिया. तो आइए, उन 5 महान डायरेक्टर्स पर करीब से नजर डालते हैं जिन्होंने बॉलीवुड को उसके सदाबहार सुपरस्टार्स दिए.

1. ऋषिकेश मुखर्जी: ऋषिकेश मुखर्जी बॉलीवुड में एक ऐसे डायरेक्टर के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने इंसानी भावनाओं को बिना किसी दिखावे के बहुत सादगी से दिखाया. उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन दोनों के करियर को इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचाया कि वे अमर हो गए. 1971 की फिल्म ‘आनंद’ ने राजेश खन्ना के स्टारडम को एक नई गंभीरता दी. ‘जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं’ जैसे डायलॉग ने काका को घर-घर में मशहूर कर दिया. वहीं, अमिताभ बच्चन को उनके अंदर के गंभीर एक्टर को दुनिया के सामने लाया. इसके बाद ‘अभिमान’, ‘मिली’ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों के जरिए, उन्होंने अमिताभ बच्चन को एक सेंसिटिव और कॉमिक एक्टर के तौर पर स्थापित किया, जो उनकी एंग्री यंग मैन की इमेज से अलग था. उन्होंने धर्मेंद्र को भी ‘चुपके चुपके’ से ब्रेकथ्रू दिलाया, जिसे उनके करियर की सबसे अच्छी कॉमेडी माना जाता है.

2. प्रकाश मेहरा: 1970 के दशक की शुरुआत में, जब लोग राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से ऊब चुके थे, देश के युवाओं में एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ गुस्सा पनप रहा था. डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने इस नब्ज को समझा. प्रकाश मेहरा ने ‘जंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय के रोल के लिए अमिताभ बच्चन को चुना, जबकि उस समय अमिताभ की कई फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं. इस एक फिल्म ने बॉलीवुड को उसका सबसे बड़ा सुपरस्टार ‘एंग्री यंग मैन’ दिया. मेहरा-बच्चन की जोड़ी ने बाद में ‘हेरा फेरी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’ और ‘शराबी’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं. प्रकाश मेहरा की फिल्मों ने विनोद खन्ना को एक दमदार एंटी-हीरो और बागी को-स्टार के तौर पर भी स्थापित किया, जिससे वह उस समय अमिताभ बच्चन को टक्कर देने वाले अकेले स्टार बन गए.
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3. यश चोपड़ा: यश चोपड़ा एक अनोखे डायरेक्टर थे, जो कोयला खदानों में काम करने वालों का दर्द और दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड की घाटियों में शिफॉन साड़ी पहनी एक्ट्रेस के रोमांस को दिखा सकते थे. 1975 की ‘दीवार’ और उसके बाद आई ‘त्रिशूल’ में यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के गुस्से को एक सामाजिक और पारिवारिक संदर्भ दिया. ‘दीवार’ का विजय आज भी सिनेमा के इतिहास के सबसे आइकॉनिक किरदारों में से एक माना जाता है. दूसरी ओर, यश चोपड़ा ही थे जिन्होंने ‘कभी कभी’ और बाद में ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों से रोमांटिक जॉनर को जिंदा रखा. उन्होंने ऋषि कपूर की चॉकलेट बॉय इमेज का इतना फायदा उठाया कि वे 70 और 80 के दशक के सबसे पसंदीदा रोमांटिक स्टार बन गए.

4. रमेश सिप्पी: जब हम रमेश सिप्पी के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले ‘शोले’ (1975) का नाम आता है, जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर में से एक बन गई. लेकिन, सिप्पी का योगदान सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं था. सिप्पी ने धर्मेंद्र को ‘सीता और गीता’ और ‘शोले’ से एक्शन-कॉमेडी की दुनिया में सबसे ऊपर पहुंचाया. जय और वीरू की जोड़ी ने धर्मेंद्र और अमिताभ दोनों के स्टारडम को अमर कर दिया. रमेश सिप्पी ने ‘शक्ति’ (1982) में अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया, जिससे यह साबित हुआ कि अमिताभ बच्चन सिर्फ एक कमर्शियल हीरो नहीं थे, बल्कि एक्टिंग के सच्चे मास्टर थे. उनकी सूझबूझ भरी नजर ने समय-समय पर विनोद खन्ना और ऋषि कपूर जैसे स्टार्स के करियर को भी रास्ता दिखाया.

5. शक्ति सामंत: अगर 1970 के दशक की शुरुआत में ‘राजेश खन्ना’ का क्रेज पूरे देश में छाया था, तो इसका मुख्य कारण डायरेक्टर शक्ति सामंत थे. शक्ति सामंत ने राजेश खन्ना में वह चार्म पहचाना जिससे लड़कियां उनसे प्यार करने लगीं. ‘आराधना’ और ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्मों ने राजेश खन्ना को लगातार 17 गोल्डन जुबली और हिट फिल्में देने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने में मदद की, जो आज तक कायम है. सामंत जानते थे कि एक एक्टर को अमर बनाने के लिए बेहतरीन म्यूजिक कितना जरूरी है. उन्होंने आरडी बर्मन और किशोर कुमार के साथ मिलकर राजेश खन्ना के लिए जो गाने बनाए, उन्होंने खन्ना को बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार बना दिया.
पश्चिम मध्य रेलवे में मेडिकल क्लेम घोटाला: 10 हजार में शून्य बढ़ाकर किया 1 लाख, दो लिपिक निलंबित; 40 लाख की गड़बड़ी की आशंका – Jabalpur News
पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर जोन में मेडिकल क्लेम के नाम पर लाखों रुपए के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। रेलवे कर्मचारियों पर इलाज के बिलों में हेराफेरी कर सरकारी राशि का गबन करने का आरोप है। शुरुआती जांच में करीब 40 लाख रुपए के घोटाले की आशंका जताई गई है। मामले में दो लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कई अन्य कर्मचारी और अधिकारी जांच के दायरे में हैं। बिलों में शून्य जोड़कर बढ़ा दी क्लेम राशि रेलवे अधिकारियों के अनुसार कुछ कर्मचारियों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराने के बाद कार्मिक विभाग के लिपिकों से मिलीभगत कर मेडिकल क्लेम में हेराफेरी की। आरोप है कि 10 हजार रुपए के बिल को एक लाख रुपए तक दर्शाने के लिए रकम के आगे अतिरिक्त शून्य जोड़ दिए गए और उसी आधार पर भुगतान भी कराया गया। दो लिपिक सस्पेंड, विजिलेंस ने संभाली जांच प्रारंभिक जांच में कार्मिक विभाग के मयंक श्रीवास्तव और अतुल कुमार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर दोनों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे विजिलेंस ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है। कटनी मंडल तक पहुंची जांच जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जीवाड़ा केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है। कटनी मंडल के कुछ कर्मचारियों के मेडिकल बिल भी संदिग्ध पाए गए हैं। इसके अलावा कार्मिक और लेखा विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने अनियमितता के चलते दो कर्मचारियों के निलंबन की पुष्टि की है। जांच में अब तक सामने आए तथ्य कार्मिक और लेखा विभाग की भूमिका पर सवाल जांच में कार्मिक और लेखा विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। विभागीय परीक्षण के बाद ही मेडिकल क्लेम भुगतान के प्रस्ताव भेजे जाते हैं, ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार फर्जी भुगतान के बदले राशि के बंटवारे की भी आशंका है। मामले में एक अन्य कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी किया गया है। विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी कार्रवाई हो सकती है।
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नौकरी दिलाने के नाम पर 24.37 लाख की ठगी, गिरफ्तार: फर्जी नियुक्ति-पत्र बांटे; जमानत पर बाहर आते ही पुलिस ने फिर पकड़ा – Jalore News
जालोर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 24.37 लाख रुपए की ठगी करने के आरोप में शिवगंज (सिरोही) पुलिस ने तखतगढ़ निवासी राकेश जीनगर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने डीएलबी की 2018 की एलडीसी भर्ती में पुराने रिकॉर्ड के आधार पर स्थायी नौकरी दिलाने का झांसा देकर सितंबर 2024 से जून 2025 के बीच अलग-अलग किस्तों में शिकायतकर्ता से 24.37 लाख रुपए वसूल लिए। इसके बाद 11 मार्च 2025 को जालोर नगर परिषद ले जाकर फर्जी नियुक्ति पत्र दिया और फर्जी जॉइनिंग का नाटक भी कराया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने जांच शुरू की, आरोपी को गिरफ्तार कर जालोर नगर परिषद में दस्तावेजों की जांच कराई, जहां नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी पाए गए। पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम 1. नौकरी दिलाने के नाम पर 24.37 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार
नगर निकायों में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए ठगने के मामले में शिवगंज (सिरोही) पुलिस ने तखतगढ़ (पाली) निवासी राकेश जीनगर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ 3 जनवरी 2026 को शिवगंज थाने में 24 लाख 37 हजार 583 रुपए की ठगी का मामला दर्ज हुआ था। आरोपी को इससे पहले जालोर पुलिस भी गिरफ्तार कर चुकी है। 2. पुराने रिकॉर्ड का झांसा देकर रुपए लिए, फर्जी जॉइनिंग भी कराई
शिवगंज निवासी निर्मल कुमार ने पुलिस को बताया – राकेश जीनगर ने अपने साथियों के साथ मिलकर डीएलबी की 2018 की एलडीसी भर्ती के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर स्थायी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसने जयपुर के अधिकारियों से पहचान और विभाग में सीधी पहुंच होने का दावा कर भरोसा जीता। इसके बाद दस्तावेज लेकर रिकॉर्ड तैयार करने, फाइल आगे बढ़ाने और नियुक्ति पत्र जारी कराने के नाम पर सितंबर 2024 से जून 2025 के बीच नकद, बैंक ट्रांसफर और फोन-पे के जरिए कुल 24.37 लाख रुपए ले लिए। 11 मार्च 2025 को वह शिकायतकर्ता को जालोर नगर परिषद लेकर गया, वहां ढाई लाख रुपए नकद लेने के बाद एक नियुक्ति पत्र दिया और शहरी आजीविका मिशन कार्यालय में रजिस्टर पर हस्ताक्षर करवाकर फर्जी जॉइनिंग तक करा दी, ताकि उसे नौकरी लगने का विश्वास हो जाए। 3. नौकरी नहीं मिली तो खुला राज, जांच में नियुक्ति पत्र फर्जी निकले
जब काफी समय बाद भी नौकरी की पुष्टि नहीं हुई तो शिकायतकर्ता ने अपने रुपए वापस मांगे। आरोप है कि राकेश जीनगर टालमटोल करता रहा और धमकियां देने लगा। इसके बाद मामला दर्ज कराया गया। जांच के दौरान सोमवार (6 जुलाई) को शिवगंज पुलिस आरोपी को जालोर नगर परिषद लेकर पहुंची और उसके दिए गए नियुक्ति पत्रों की जांच कराई। नगर परिषद के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि नियुक्ति पत्र विभाग की ओर से जारी नहीं किए गए थे और पूरी तरह फर्जी हैं। 4. जमानत पर बाहर आने के बाद फिर पकड़ा गया आरोपी
जालोर पुलिस की गिरफ्तारी के बाद आरोपी 3 जुलाई को जमानत पर बाहर आया था। इसके बाद शिवगंज पुलिस ने इस मामले में जांच तेज की और शनिवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस उसे नगर परिषद ले गई, जहां दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित पीड़ितों की भी जांच कर रही है। 5. कई और युवकों से भी ठगी, किसी ने प्लॉट बेचा तो किसी ने गहने गिरवी रखे
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने कई अन्य युवकों से भी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रुपए लिए। शिकायतकर्ता निर्मल कुमार ने 24.37 लाख रुपए जुटाने के लिए अपना प्लॉट बेच दिया, बाद में केसीसी और गोल्ड लोन भी लेना पड़ा। आहोर थाना क्षेत्र के रणछोड़ और मुकेश ने जमीन गिरवी रखकर 3-3 लाख रुपए दिए। तखतगढ़ के पारसमल ने दादी के गहने गिरवी रखकर 5.5 लाख रुपए दिए, जबकि लालाराम ने जमीन बेचकर लाखों रुपए दिए। पारसमल और लालाराम ने तखतगढ़ थाने में अलग-अलग मामले दर्ज कराए हैं, जिनमें आरोपी की गिरफ्तारी अभी बाकी है। — यह खबर भी पढ़े… लाखों में सरकारी नौकरी बांटने वाला ठग कोर्ट में पेश:हंसते हुए आया, 3 दिन के रिमांड पर भेजा; पैसे लेकर दिए थे फर्जी नियुक्ति पत्र जालोर में 4 साल से बांट रहा था फर्जी नौकरियां:अब तक 30 पीड़ितों को ठगा, 200 लोगों से करोड़ों रुपए वसूले फर्जी सरकारी नौकरियां बांटने वाला पकड़ा:जयपुर नगर निगम की फर्जी मेल से भेजता था जॉइनिंग लेटर
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बंद शुगर मिल की जमीन बिक्री पर फैली अफवाह: मोतिहारी में एडीएम ने भ्रामक खबरों का खंडन किया, हाईकोर्ट के आदेश पर हटी थी रोक – Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी में बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल की जमीन को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं। खासकर खाता संख्या 109 की जमीन के बेचे जाने की खबरों ने बाजार और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह से निराधार और भ्रामक बताया है। अपर समाहर्ता (एडीएम) मुकेश कुमार सिन्हा ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 के बाद से खाता संख्या 109 की एक इंच जमीन की भी खरीद-बिक्री नहीं हुई है। एडीएम मुकेश सिन्हा ने कहा कि कुछ मीडिया हाउस और पत्रकारों द्वारा बिना तथ्यों की पुष्टि किए खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिससे जनता में भ्रम फैल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रशासनिक पदाधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने और गलत मंशा से इस तरह की बातें उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला अवर निबंधक द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में यह साफ किया जा चुका है कि 2023 के बाद से उक्त खाता संख्या की किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हुई है। संख्या 109 की जमीन को प्रोहिबिशन लिस्ट से हटाया उन्होंने आगे बताया कि हनुमान शुगर मिल से संबंधित खाता संख्या 109 की जमीन को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में रोक सूची (प्रोहिबिशन लिस्ट) से हटाया गया है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि जमीन की बिक्री शुरू हो गई है। रोक सूची से हटाना और जमीन की खरीद-बिक्री होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसके बावजूद कुछ लोग इन दोनों प्रक्रियाओं को मिलाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। एडीएम ने परिमार्जन (म्यूटेशन) और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका आधार केवल रोक सूची से हटाया जाना नहीं हो सकता। परिमार्जन या दाखिल-खारिज के लिए राजस्व संबंधी वैध दस्तावेज जैसे जमाबंदी पंजी, खतियान आदि आवश्यक होते हैं।
रोक सूची के आधार पर किया था परिमार्जन उन्होंने बताया कि एक राजस्व कर्मचारी द्वारा केवल रोक सूची के आधार पर परिमार्जन कर दिया गया था, जो नियमों के विरुद्ध था। इस गलती को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जमाबंदी रद्दीकरण से जुड़े सवालों पर एडीएम ने कहा कि यह मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में लंबित (सब-ज्यूडिस) है, जहां एलपीए (लेटर्स पेटेंट अपील) के तहत सुनवाई चल रही है। ऐसे में बिना न्यायालय के अंतिम निर्णय और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले ही संबंधित लोगों को स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी, इसके बावजूद गलत तथ्यों को प्रचारित किया जा रहा है। अधूरे दस्तावेजों के आधार पर न खरीदे जमीन एडीएम मुकेश सिन्हा ने जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अफवाहों और अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें। उन्होंने आगाह किया कि गलत या अधूरे दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री करने से भविष्य में कानूनी और आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें समाज में असमंजस और अविश्वास का माहौल बनाती हैं, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े किसी भी लेन-देन से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना जरूरी है। साथ ही, लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल प्रमाणित और वैध स्रोतों पर ही भरोसा करें। प्रशासन का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। एडीएम ने कहा की हाई कोर्ट के आदेश पर रोक सूची से मुक्त किया गया था, अब हम लोग इस आदेश के विरोध के अपील में जाने की तैयार में है।
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2 फीट लंबा, आधा किलो भारी… अकेले नहीं खा पाएंगे बीकानेर का यह परांठा
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Bikaner Famous Moong Dal Paratha: बीकानेर का प्रसिद्ध मूंग दाल परांठा अपने विशाल आकार और पारंपरिक स्वाद के कारण पर्यटकों के बीच खास पहचान बना चुका है. बड़ा बाजार स्थित ‘परांठा ही परांठा’ दुकान पर तैयार होने वाला यह परांठा करीब डेढ़ से दो फुट चौड़ा और लगभग 500 ग्राम वजनी होता है. इसे बनाने में करीब 15 मिनट का समय लगता है. मूंग दाल, हींग, कसूरी मेथी, लाल मिर्च और अन्य देसी मसालों की खास भरावन के साथ इसे बड़े लोहे के तवे पर धीमी आंच में सेंका जाता है. महज 70 रुपये की कीमत में मिलने वाला यह परांठा दो से तीन लोगों के लिए पर्याप्त होता है. मसालेदार सब्जी, अचार और मक्खन के साथ परोसा जाने वाला यह व्यंजन बीकानेर आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन चुका है.
बीकानेर के बड़ा बाजार स्थित ‘परांठा ही परांठा’ दुकान पर संचालक रामकुमार पुरोहित विशाल मूंग दाल का परांठा तैयार करते हैं. यह परांठा करीब डेढ़ से दो फुट तक बड़ा होता है और इसका वजन लगभग आधा किलो होता है. पारंपरिक तकनीक और वर्षों के अनुभव से तैयार होने वाला यह परांठा अपने बेहतरीन स्वाद और बड़े आकार के कारण बीकानेर की खास पहचान बन चुका है. विशाल लोहे के तवे पर धीमी आंच में सिकने वाला यह प्रसिद्ध मूंग दाल का परांठा तैयार होने में करीब 15 मिनट का समय लेता है. सबसे पहले मूंग दाल में विशेष मसालों का मिश्रण तैयार कर भरावन बनाई जाती है. इसके बाद परांठे को बड़े आकार में बेलकर तवे पर 5 से 7 मिनट तक दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेंका जाता है. इसकी लाजवाब खुशबू दूर से ही लोगों को दुकान तक खींच लाती है. यही पारंपरिक तरीका और खास स्वाद इस परांठे को आम परांठों से अलग पहचान दिलाता है.

बीकानेर की चायपट्टी स्थित दुकान पर एक ओर विशाल तवे पर मूंग दाल का परांठा सिकता नजर आता है, तो दूसरी ओर ग्राहकों के लिए गर्मागर्म नाश्ता तैयार किया जाता है. यहां रोजाना करीब 100 से 150 लोग इस मशहूर परांठे का स्वाद लेने पहुंचते हैं. लगभग आधा किलो वजनी इस परांठे को अकेले खाना आसान नहीं माना जाता, इसलिए अधिकांश लोग इसे परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खाते हैं. यही वजह है कि यह दुकान आज बीकानेर के लोकप्रिय फूड डेस्टिनेशन में अपनी खास पहचान बना चुकी है.

बीकानेर का प्रसिद्ध मूंग दाल परांठा मसालेदार सब्जी, अचार और मक्खन के साथ परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और भी खास बना देता है. बाहर से सुनहरा और कुरकुरा, जबकि अंदर से मसालेदार मूंग दाल की भरावन से भरपूर यह परांठा हर निवाले में देसी जायके का अलग अनुभव देता है. इसकी पहचान सिर्फ इसके विशाल आकार से नहीं, बल्कि पारंपरिक मसालों के संतुलित स्वाद और खास बनाने की विधि से भी है. यही वजह है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग दोबारा यहां आना नहीं भूलते.
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विशाल तवे पर फैला करीब डेढ़ से दो फुट चौड़ा मूंग दाल का परांठा आज बीकानेर की खास पहचान बन चुका है. लगभग 500 ग्राम वजनी इस परांठे को पारंपरिक तकनीक और विशेष मसालों के साथ तैयार किया जाता है. बड़े आकार के कारण इसे अकेले खत्म करना आसान नहीं होता, इसलिए ज्यादातर लोग इसे परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर खाते हैं. सुनहरी कुरकुरी परत और मसालेदार भरावन इसे स्वाद में भी खास बनाते हैं. यही अनोखा आकार और लाजवाब स्वाद पर्यटकों व स्थानीय लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है.

धीमी आंच पर सुनहरे रंग में सिककर तैयार होने वाला बीकानेर का प्रसिद्ध मूंग दाल परांठा अपने पारंपरिक स्वाद के लिए जाना जाता है. इसे गेहूं के आटे, मूंग दाल, हींग, कसूरी मेथी, लाल मिर्च और अन्य देसी मसालों के खास मिश्रण से बनाया जाता है. बड़े लोहे के तवे पर सावधानी से सेंका गया यह परांठा बाहर से कुरकुरा और अंदर से स्वादिष्ट भरावन से भरपूर होता है. पारंपरिक विधि और संतुलित मसालों का यही मेल इसके स्वाद को लंबे समय तक लोगों की जुबान पर बनाए रखता है.

थाली से भी बड़ा नजर आने वाला बीकानेर का यह आधा किलो वजनी मूंग दाल परांठा अपने विशाल आकार और बेहतरीन स्वाद के लिए मशहूर है. आमतौर पर इसे दो से तीन लोग मिलकर आराम से खा लेते हैं. महज 70 रुपये की कीमत में मिलने वाला यह परांठा भरपूर मात्रा और लाजवाब स्वाद का शानदार मेल है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से मसालेदार भरावन वाला यह व्यंजन बीकानेर आने वाले पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन चुका है और स्थानीय लोगों की भी पहली पसंद माना जाता है.

विशाल मूंग दाल परांठे के लिए कारीगर सावधानी से मसालेदार भरावन और आटे का मिश्रण तैयार करते हैं. स्वादिष्ट परांठे की असली शुरुआत इसी प्रक्रिया से होती है. मूंग दाल में हींग, कसूरी मेथी, लाल मिर्च और अन्य देसी मसालों का संतुलित मिश्रण मिलाया जाता है, जो इसे खास स्वाद और अलग पहचान देता है. इसके बाद आटे में भरावन भरकर बड़े आकार में बेलने की प्रक्रिया शुरू होती है. वर्षों से चली आ रही पारंपरिक विधि, अनुभवी हाथों की मेहनत और मसालों का अनोखा मेल ही इस परांठे को आज बीकानेर के सबसे चर्चित और लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल करता है.

