झारखंड की छिलका रोटी के आगे फीका है डोसा-चीला, जानिए इस खास डिश की आसान रेसिपी
झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों में छिलका रोटी आज भी लोगों की पहली पसंद है. इसकी खासियत यह है कि यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ जल्दी तैयार हो जाती है. छिलका रोटी बनाने के लिए सबसे पहले चावल को रातभर पानी में भिगोया जाता है. अगले दिन इसे पीसकर मुलायम बैटर तैयार किया जाता है. इसके बाद बैटर में बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, धनिया पत्ता, सीम और अन्य मौसमी सब्जियां मिलाई जाती हैं. फिर गर्म तवे पर बैटर को गोल आकार में फैलाकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंका जाता है. तैयार छिलका रोटी को धनिया-पुदीना की चटनी, आलू की सब्जी या गर्म चाय के साथ परोसा जाता है.
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iPhone 18 Pro के कैमरा मॉड्यूल में बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है। एप्पल का यह आईफोन बड़े कैमरा कटआउट के साथ आएगा। हालांकि, फोन के बैक पैनल के डिजाइन में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। पिछले दिनों फोन का एक डमी यूनिट सामने आया था, जिसमें कैमरा डिजाइन iPhone 17 Pro की तरह ही दिखाई दे रहा है।
मिलेगा बड़ा कैमरा
चीनी टिप्स्टर द्वारा रिपोर्ट की गई नई जानकारी के मुताबिक, Apple के अपकमिंग iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में iPhone 17 Pro सीरीज के मुकाबले 2mm बड़ा कैमरा कटआउट देखने को मिल सकता है। सप्लाई चेन से मिली जानकारी के मुताबिक, कैमरा कटआउट की साइज 13.77mm की हो सकती है। कैमरा सेंसर की बात करें तो एप्पल अपकमिंग iPhone 18 Pro सीरीज में 48MP का तीन कैमरा यूज करने वाला है। वहीं, सेल्फी के लिए इसमें भी 18MP का सेंटर स्टेज कैमरा दिया जा सकता है।
कैमरा सेंसर की बात करें तो एप्पल के अपकमिंग फ्लैगशिप आईफोन सीरीज में 1/1.12 इंच का मेन सेंसर मिल सकता है। इसमें कंपनी f/1.78 अपर्चर वाला सेंसर यूज करेगी। एप्पल एनालिस्ट मिंग-ची-कुओ ने भी पिछले दिनों मेंशन किया था कि इस बदलाव की वजह से एप्पल के iPhone 18 सीरीज के लेंस के लिए 50% ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा फोन में DSLR की तरह बोकेह कंट्रोल मिल सकता है।
होगा बड़ा अपग्रेड
iPhone 18 Pro को सितंबर के महीने में लॉन्च किया जा सकता है। फोन के डमी यूनिट्स सामने आ चुके हैं। एप्पल के अपकमिंग आईफोन के बारे में डिजिटल चैट स्टेशन ने हाल ही में कई और जानकारियां शेयर की हैं। iPhone 18 Pro और Pro Max में यूजर्स को बड़ा 6.7 इंच का OLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। यही नहीं, अपकमिंग फोन में 12GB रैम दिया जा सकता है और यह A19 Pro चिपसेट के साथ लॉन्च किया जा सकता है।
एप्पल अपने अपकमिंग आईफोन 18 प्रो सीरीज में कैमरा के अलावा बैटरी में भी अपग्रेड कर सकता है। बड़ी बैटरी के अलावा यूजर्स को फोन के डिस्प्ले में भी बड़ा डायनैमिक आईलैंड देखने को मिल सकता है। साथ ही, इसकी साइज में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना ने 1968 में ‘मन का मीत’ फिल्म से अपना करियर शुरू किया था. सुनील दत्त उन्हें बॉलीवुड में लेकर आए थे. विनोद खन्ना ने शुरुआत की कई फिल्मों में विलेन की भूमिका निभाई. फिर वो बॉलीवुड सुपर स्टार बने. अमिताभ बच्चन को टक्कर दी. अपने करियर के पीक पर उन्होंने मसाला फिल्मों से इतर कई यादगार फिल्म में काम किया. एक फिल्म में तो उनकी एंट्री इंटरवल के बाद हुई, फिर भी मूवी सुपरहिट रही. फिल्म का टाइटल सॉन्ग इंस्टेंट हिट हुआ था.
बॉलीवुड सुपर स्टार की स्क्रीन प्रजेंस जबर्दस्त थी. जब वो पर्दे पर आते थे तो अपने लुक-अपनी संवाद अदायगी से छा जाते थे. हैंडसम तो वो थे ही. 1978 में जब अमिताभ बच्चन करियर के टॉप पर थे, तब विनोद खन्ना ही उन्हें टक्कर दे पाए. विनोद खन्ना ने इसी दौर में अमिताभ से भी ज्यादा फीस वसूली. विनोद खन्ना के स्टारडम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने करियर के पीक पर मसाला फिल्मों से इतर कुछ फिल्मों में काम किया. ये फिल्में भी सुपरहिट रहीं. एक फिल्म में तो उनकी एंट्री इंटरवल के बाद हुई थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई की. यह फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ थी.
‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ फिल्म 4 अगस्त 1978 को रिलीज हुई थी. फिल्म का डायरेक्शन राज खोसला ने किया था. फिल्म चंद्रकांत काकोडकर के मराठी उपन्यास ‘अशी तुझी प्रीत’ पर बेस्ड थी. राज भारती, जीआर कामत और सूरज सनीम ने मिलकर लिखा था. डायलॉग राही मसूम रजा ने लिखे थे. गीतकार आनंद बख्शी थे.
‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में नूतन, आशा पारेख, विनोद खन्ना, देब मुखर्जी, विजय आनंद ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ इंस्टेंट हिट हुआ था. गाना आज भी उतना ही हिट है. गाना फिल्म में कई बार चलता है.
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इसके अलावा फिल्म के कई गाने ‘छाप तिलक सब छीनी’ (आशा भोसले-लता मंगेशकर) और ‘ये खिड़की जो बंद रहती है’ (मोहम्मद रफी) भी बहुत हिट हुए. फिल्म में दो मुजरा सॉन्ग थे. ‘सैंया रूठ गए’ और ‘नथुनिया जो डाली’ गानों ने समा बांध दिया. फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत शानदार था. फिल्म में जब भी ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ गाना बजता है, कहानी दर्शकों पर पकड़ बना लेती है.
आशा पारेख और नूतन ने इस फिल्म से जबर्दस्त वापसी की थी. दोनों के बीच फिल्म में जो संवाद हुआ, वही आइकॉनिक सीन बन गया. फिल्म में आशा पारेख ने तुलसी नाम की तवायफ का किरदार निभाया था. नूतन ने संजुक्ता चौहान का किरदार निभाया जो कि ठाकुर राजनाथ सिंह चौहान (विजय आनंद) की पत्नी है. संजुक्ता अपनी सास के कहने पर तुलसी से मिलने जाती है. यही सीन पूरी फिल्म की जान है. दोनों दिग्गज एक्ट्रेस ने इस सीन में शानदार अभिनय किया है. संजुक्ता तुलसी से कहती है, ‘तू बिन ब्याही सुहागन है, मैं एक कुंआरी ब्याहता.’ नूतन को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.
विजय आनंद और राज खोसला पिछले 20 साल से दोस्ते थे. राज खोसला हमेशा दोपहर बाद ही सेट पर आते थे. वो सेट पर लेट आने के लिए कुख्यात थे. उनकी अनुपस्थिति में विजय आनंद फिल्म को डायरेक्ट करते थे. विजय आनंद ने जब यह फिल्म की थी, तब वो रजनीश के पुणे आश्रम में रहते थे. जब फिल्म रिलीज के लिए तैयार हुई तो विजय आनंद पोस्टर से गायब हो गए. उनका रोल काट दिया गया. फिल्म का ट्रायल बीच में छोड़कर विजय आनंद घर लौट गए थे. फिर उन्होंने कभी राज खोसला के साथ काम नहीं किया. दोनों की 20 साल पुरानी दोस्ती टूट गई.
फिल्म में छोटा सा रोल होने के बाद विनोद खन्ना ने हामी भर दी थी. उन्हें राज खोसला के साथ काम पसंद था. विनोद खन्ना की फिल्म में एंट्री इंटरवल के बाद होती है. विनोद खन्ना मुंबई रीजन के डिस्ट्रीब्यूटर थे. वही फिल्म के मेन फेस थे. फिल्म के पोस्टर में सिर्फ विनोद खन्ना छाए हुए थे. फिल्म का बजट 1.25 करोड़ के आसपास था. कलेक्शन 2.75 करोड़ रुपये था. फिल्म सुपरहिट थी.
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डूंगरपुर जिले के सदर थाना क्षेत्र में एक 17 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना माथुगामडा पाल फला डूंगर में हुई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। सदर थाने के एएसआई प्रवीण सिंह ने बताया कि माथुगामडा पाल फला डूंगर निवासी लालशंकर कटारा ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार लालशंकर और उनका परिवार एक शादी समारोह में गए हुए थे। इस दौरान उनका 17 वर्षीय बेटा सुमित घर पर अकेला था। जब परिवार के सदस्य घर लौटे, तो उन्होंने देखा कि सुमित का शव घर के अंदर एक साड़ी के फंदे से लटका हुआ था। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी पहुंचाया, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके।
संभल में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ई-रजिस्ट्री में किए गए संशोधनों के विरोध में अधिवक्ता हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल में उनके साथ दस्तावेज लेखक, स्टांप वेंडर और टाइपिस्ट भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी सरकार पर उनके हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं। संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पर अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। यह धरना सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 05 बजे समाप्त हुआ। अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए तीसरे दिन भी धरना जारी रखने की चेतावनी दी है।
संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार भटनागर ने बताया कि वे दो दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और यह धरना कुल तीन दिन तक चलेगा। उन्होंने इन संशोधनों को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा कि इससे डीड राइटर्स, स्टाम्प वेंडर्स और अधिवक्ता संघ जैसे कई संगठन बेरोजगार हो जाएंगे। भटनागर ने कहा कि यह सरकार की रोजगार देने की मंशा के विपरीत है, क्योंकि ई-रजिस्ट्री का कार्य निजी संगठनों को सौंपने से बड़े पैमाने पर लोग अपनी आजीविका खो देंगे।
राजीव कुमार भटनागर ने लेन-देन की सुरक्षा पर भी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यदि रजिस्ट्री से संबंधित कार्य वकीलों या कातिबों के चैंबरों पर होते हैं, तो लेन-देन की धनराशि अधिक सुरक्षित रहती है और भुगतान सही तरीके से हो पाता है। उन्होंने यह भी बताया कि खतौनियों में कई त्रुटियां हैं, जिन्हें निजी संस्थाएं ठीक से नहीं संभाल पाएंगी, जिससे लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। एसोसिएशन का धरना आज तीसरे दिन भी जारी है। राजीव कुमार भटनागर ने बताया कि वे कल इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए एक बैठक करेंगे। प्रदर्शन करने वाले अधिवक्ताओं में प्रदीप गुप्ता, पर्मेंद्र सिंह, शकील अहमद, अरविंद सिंह, रामपाल सिंह, विनेश कुमार, सचिन चौहान, नरेंद्र कुमार, रामरईस यादव, सरफराज हुसैन, रवि कुमार, सुभाष त्यागी और नीतू सैनी जैसे नाम शामिल रहे।
KGF पुरानी बात, देश में शुरू हुई पहली प्राइवेट गोल्ड माइन! कितना सोना निकलेगा?
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क्या भारत में सोने की खदानें सिर्फ फिल्मों या इतिहास की किताबों तक सीमित हैं? कर्नाटक की मशहूर केजीएफ (Kolar Gold Fields) बंद होने के सालों बाद, अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन की शुरुआत हो चुकी है. जियोमैसूर और डेक्कन गोल्ड माइंस के इस बड़े प्रोजेक्ट से हर साल टन के हिसाब से सोना निकालने की तैयारी है. जानिए यह प्रोजेक्ट भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे बदलेगा और आम लोगों को इससे क्या फायदा होगा. क्या आंध्र प्रदेश बनेगा नया सोने का गढ़?
जब भी भारत में सोने की खदान की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले कर्नाटक की मशहूर ‘कोलार गोल्ड फील्ड्स’ (KGF) की तस्वीर उभरती है. फिल्मों और इतिहास के पन्नों में सिमट चुकी इस कहानी के बाद, अब भारत के माइनिंग सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में देश की पहली प्राइवेट सेक्टर की सोने की खदान और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन हो चुका है. यह कदम देश को सोने के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग माना जा रहा है.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्नूल जिले के तुग्गली मंडल में आने वाले जोन्नागिरी में इस प्राइवेट गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया है. इस पूरे प्रोजेक्ट को जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड मिलकर संभाल रहे हैं, जिन्होंने इसमें करीब 405 करोड़ रुपये का एक बड़ा निवेश किया है. इस जगह की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पहली यूनिट की औपचारिक शुरुआत के साथ ही दूसरी यूनिट का शिलान्यास भी कर दिया. इस मौके पर उनके साथ राज्य के मंत्री कोल्लू रवींद्र, निम्मला रामानायडू और टीजी भरत भी मौजूद थे. यह पूरा प्रोजेक्ट कुल 1,500 एकड़ के बड़े इलाके में फैला हुआ है, जिसके पहले फेज में फिलहाल 600 एकड़ जमीन पर एक्टिव माइनिंग का काम शुरू किया जा चुका है. इस बड़े प्रोजेक्ट की अहमियत को देखते हुए राज्य कैबिनेट ने इसके होस्ट विलेज यानी जोन्नागिरी का नाम बदलकर सांकेतिक रूप से ‘स्वर्णगिरी’ रख दिया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
आंध्र प्रदेश सरकार के लिए यह गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट किसी लॉटरी से कम नहीं है और सरकारी अधिकारी इसकी तुलना सीधे कर्नाटक के केजीएफ से कर रहे हैं. इस प्लांट से उत्पादन के पहले साल में ही 400 किलोग्राम सोना निकालने की उम्मीद जताई गई है, जो कि अगले साल बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा. जैसे-जैसे इस प्लांट की प्रोसेसिंग कैपेसिटी को बढ़ाया जाएगा, यहां से हर साल 2 टन यानी 2,000 किलोग्राम सोना निकालने का लक्ष्य रखा गया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
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यह प्रोजेक्ट सिर्फ सोना ही नहीं उगलेगा, बल्कि इससे लगभग 700 स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे. सबसे मजेदार बात यह है कि राज्य सरकार को यहां से निकलने वाले कुल सोने की वैल्यू पर 4 परसेंट की रॉयल्टी मिलेगी. मौजूदा अनुमानों के हिसाब से सरकार को पहले साल के 400 किलोग्राम प्रोडक्शन से लगभग 57 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलेगी, जो अगले साल 900 किलोग्राम प्रोडक्शन होने पर बढ़कर करीब 144 करोड़ रुपये हो जाएगी. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
साल 2001 में जब कर्नाटक की केजीएफ खदान पूरी तरह बंद हो गई, तो भारत में प्राइमरी लेवल पर सोने की माइनिंग का काम सिर्फ सरकारी हुट्टी गोल्ड माइंस तक ही सीमित रह गया था, जो कि कर्नाटक में है. किसी भी ऐसी जगह पर जहां सालों से काम बंद पड़ा हो, दोबारा सोने का डिपॉजिट ढूंढना और वहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करना बेहद लंबा, खर्चीला और हाई-रिस्क वाला काम होता है. इसके लिए सालों की खोजबीन और भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है. स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट आज अगर हकीकत बन पाया है, तो उसकी वजह प्राइवेट कंपनी जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सालों की मेहनत है, जिसने इस इलाके में दशकों तक रिसर्च की और रिसोर्सेज को डेवलप किया. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
तमिलनाडु की त्रिवेणी अर्थमूवर्स के बैकअप और डेक्कन गोल्ड माइंस के सपोर्ट के साथ इस कंपनी ने सबसे पहले 1990 के दशक में यहां खोजबीन के राइट्स हासिल किए थे. इसके बाद साल 2006 में माइनिंग लीज के लिए अप्लाई किया गया और अब जाकर करीब 405 करोड़ रुपये का निवेश करने के बाद यहां कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो पाया है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने में सरकार की पॉलिसी और माइनिंग रिफॉर्म्स ने भी एक बहुत बड़ा रोल निभाया है. साल 2015 में सरकार ने नियमों में कुछ बदलाव किए थे, जिसके तहत मिनरल ब्लॉक्स के लिए ट्रांसपेरेंट ऑक्शन यानी पारदर्शी नीलामी को जरूरी बना दिया गया था. इसके बाद साल 2021 में एक और बड़ा अमेंडमेंट किया गया, जिसने प्राइवेट कंपनियों का रास्ता और आसान कर दिया. इस नए नियम के मुताबिक, अगर कोई प्राइवेट कंपनी किसी मिनरल डिपॉजिट को खोज निकालती है, तो माइनिंग के राइट्स उसी के पास सुरक्षित रहेंगे और वह वहां से निकाले गए रिसोर्सेज को कमर्शियल तौर पर बाजार में बेच भी सकती है. स्वर्णगिरी भारत के उन पहले बड़े गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिसे इस नए कानूनी ढांचे का सीधा फायदा मिला है, और यह दिखाता है कि भारत के माइनिंग सेक्टर में अब प्राइवेट निवेश की भूमिका कितनी तेजी से बढ़ रही है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
अगर हम इतिहास पर नजर डालें तो केजीएफ ने लगभग 120 सालों के दौरान देश को अनुमानित 800 से 900 टन सोना दिया था. उस खदान की गहराई 3.2 किलोमीटर तक नीचे चली गई थी, जो इसे दुनिया की सबसे गहरी खदानों में से एक बनाती थी, लेकिन धीरे-धीरे वहां सोने का अयस्क कम होता गया और आखिरकार सरकार को उसे बंद करना पड़ा. इसके मुकाबले स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट भारत की गोल्ड माइनिंग के सफर में एक बिल्कुल नया चैप्टर है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
डेक्कन गोल्ड माइंस के एक ऑडिट के मुताबिक, इस साइट पर करीब 82 लाख टन ओर मौजूद है, जिसमें प्रति टन औसतन 1.49 ग्राम सोना मिल सकता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस खदान में करीब 12 टन शुद्ध सोना मौजूद है. इसके मेन माइनिंग पिट की ऑपरेशनल लाइफ की अवधि करीब आठ से नौ साल की होने की उम्मीद है. हालांकि, आंध्र प्रदेश सरकार का यह भी कहना है कि अगर इस पूरे बड़े रीजन को देखा जाए, तो यहां 42.5 टन तक सोना मिल सकता है, लेकिन ये अनुमान अभी सिर्फ शुरुआती खोज पर आधारित हैं और इनका पूरी तरह से वैरिफिकेशन होना अभी बाकी है. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी माइनिंग टेक्नोलॉजी है, जो इसे पुराने केजीएफ से बिल्कुल अलग बनाती है. जहां केजीएफ में जमीन के अंदर मीलों गहरे जाकर अंडरग्राउंड माइनिंग करनी पड़ती थी, जो बेहद खतरनाक और मुश्किल काम था, वहीं स्वर्णगिरी को एक ओपन-पिट माइन के रूप में डेवलप किया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि यह एक खुली खदान होगी, जहां बड़ी-बड़ी मशीनों के जरिए सीधे जमीन की ऊपरी सतह की खुदाई करके सोना निकालने वाले ओर को बाहर निकाला जाएगा. यह तरीका न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि इसमें समय और लागत भी काफी कम आती है, जिससे भारत में सोने का उत्पादन अब और भी ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा. (सांकेतिक तस्वीर- स्रोत : कैनवा)
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UBT के दो सांसद बुधवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे।
शिवसेना (UBT) को संसद भवन में अपना मौजूदा ऑफिस खाली करना पड़ सकता है। संसद भवन के नियमों के मुताबिक, सिर्फ 5 या उससे ज्यादा सांसदों वाली पार्टी को संसद भवन में ऑफिस मिल सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष जैसे ही छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दे देते हैं। UBT के पास सिर्फ 4 सांसद (3 लोकसभा और 1 राज्यसभा) रह जाएंगे। ऐसे में संसद भवन में उन्हें अपना मौजूदा ऑफिस (128A ) खाली करना पड़ सकता है।
पार्टी के दो लोकसभा सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत बुधवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में उनसे मुलाकात करेंगे।
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में 22 जून को बगावत हो गई थी। लोकसभा के कुल 9 में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे।
शिवसेना में 4 साल में दूसरी टूट
शिंदे के साथ सभी 6 सांसदों ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टूट का ऐलान किया। शिंदे ने कहा, ‘जब 2022 में हमने पार्टी और धनुष-बाण बचाने के लिए विद्रोह किया था, तब 40 विधायक थे और अब हमने छक्का लगाया है।’
उन्होंने कहा, ‘ हमारी लड़ाई बालासाहेब के विचारों को बचाने के लिए है, इसीलिए आज ये 6 सांसद बालासाहेब की असली शिवसेना में शामिल हुए।’ उद्धव के शिवसेना का मुखिया रहते पार्टी में 4 साल में यह दूसरी बड़ी बगावत है।
8 दिन में 6 सांसद बागी हुए
14 जून को उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में संसदीय दल की बैठक बुलाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 4 सांसद नहीं पहुंचे थे। इसके बाद से पार्टी में टूट की अटकलें लगाई जानी लगी थीं।
शिवसेना से पहले AAP-TMC के 27 सांसद बागी हुए
पिछले 3 महीने के दौरान विपक्षी गुट के 27 सांसदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा या NDA को समर्थन दिया है। इनमें 7 AAP के राज्यसभा सांसद और 20 TMC के लोकसभा सांसद हैं।
शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलों के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) चीफ और यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और पार्टी के कई नेता BJP में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
सपा चीफ अखिलेश यादव ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि सपा मजबूत और एकजुट है। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के अपने विधायक पाला बदलने वाले हैं।
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उद्धव की पार्टी टूटी, राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में गाली दी, 9 में से 6 सांसद बागी
महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। पूरी खबर पढ़ें…
जमुई में सांसद अरुण भारती ने भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला जांच का विषय है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सांसद भारती ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में की जा रही है। साथ ही, कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर सरकार आवश्यक और उचित कार्रवाई करेगी। ”सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पास व्यापक अनुभव” सीबीआई जांच और कार्यरत न्यायाधीश से जांच कराने की मांग पर सांसद ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पास व्यापक अनुभव होता है और वे निष्पक्षता से जांच कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाज और आम लोगों के मन में जो भी शंकाएं हैं, उनका समाधान किया जाएगा। अरुण भारती ने यह भी कहा कि सरकार केवल भरत तिवारी मामले पर ही नहीं, बल्कि नालंदा में हुई दो युवकों की हत्याओं पर भी गंभीरता से कार्रवाई कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी घटना को जातीय या व्यक्तिगत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि हर पीड़ित को समान न्याय मिलना चाहिए। ”अपराध पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता” बिहार में अपराध नियंत्रण और पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक सवाल पर सांसद ने कहा कि अपराध पर नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता है। हालांकि, भरत तिवारी मामले में पुलिस की कार्रवाई उचित थी या नहीं, इसका निर्णय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। उन्होंने लोगों से संयम बरतने और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने की अपील की। सांसद अरुण भारती ने ये बातें जमुई में दिग्विजय सिंह की श्रद्धांजलि सभा में भाग लेने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं।
मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत बुधवार को सिद्धिविनायक मैरिज गार्डन में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में लापरवाही सामने आई। गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आयोजित इस सरकारी कार्यक्रम में कई जोड़ों को तय वेशभूषा (दूल्हे के लिए कुर्ता-पायजामा और दुल्हन के लिए साड़ी) तक नहीं दी गई। इसके चलते कई दूल्हे जींस-टीशर्ट और दुल्हनें सलवार-सूट में ही शादी की रस्में निभाते नजर आए। 20 से ज्यादा जोड़ों को नहीं मिले कपड़े समारोह में कुल 43 जोड़ों का विवाह होना था, लेकिन इनमें से 20 से अधिक जोड़ों को शासन की तरफ से मिलने वाले कपड़े और सामान नहीं दिए गए। मजबूरन कई जोड़ों ने अपने पैसों से कपड़े खरीदकर शादी की रस्में पूरी कीं। चौफाल निवासी दूल्हे सीताराम बैगा ने बताया कि उन्हें प्रशासन की तरफ से केवल एक पगड़ी दी गई, बाकी कोई सामान या कपड़ा नहीं मिला। भीषण गर्मी में सिर्फ एक वाटर कूलर समारोह स्थल पर आए मेहमानों और जोड़ों के लिए व्यवस्थाएं बेहद खराब रहीं। कड़कड़ाती गर्मी के बीच करीब 200 लोगों के लिए सिर्फ एक वाटर कूलर और नौ पंखे लगाए गए थे। इसके उलट, वहां मौजूद अधिकारियों और नेताओं के लिए अलग से दो वाटर कूलर की व्यवस्था थी। इसके अलावा 43 जोड़ों की शादी कराने के लिए सिर्फ दो पंडित बुलाए गए थे। सुबह 10 बजे से आए जोड़ों को दोपहर 2 बजे तक शादी शुरू होने का इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों ने कही जांच की बात इस अव्यवस्था पर जनपद पंचायत सीईओ चंदूलाल पनिका ने कहा कि उनका काम सिर्फ आयोजन संभालना था और सभी जोड़ों को घर से ही तैयार होकर आना था, इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। वहीं, गोपद बनास एसडीएम प्रिया पाठक ने बताया कि सभी को पहले से तैयार होकर आने के निर्देश थे, फिर भी अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन पर लगने वाले टैरिफ को लेकर एक मीटिंग में अपने ही अधिकारियों पर भड़क गए थे। एक नई किताब के मुताबिक, ट्रम्प को लगता था कि भारत अमेरिकी सामानों पर सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा टैक्स (टैरिफ) लगाता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब ‘रिजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रम्प’ में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक से कहा था कि उन्हें भारत और चीन के टैरिफ को लेकर सही जानकारी नहीं दी जा रही।
किताब के अनुसार, जब लुटनिक ने आधिकारिक आंकड़े दिखाए, तो ट्रम्प ने उन्हें भी खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह आंकड़े बकवास हैं। भारत अमेरिकी सामानों पर कम से कम 175% टैरिफ लगाता है।
रिजीम चेंज किताब के लेखक मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान है।
भारत का औसत टैरिफ 16%
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का औसत ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ टैरिफ 15.8% था। यानी कि अगर भारत 100 तरह के सामान आयात करता है, तो उन सभी पर लगने वाले टैरिफ का औसत लगभग 16% बैठता है।
वहीं 2023 में व्यापार-भारित औसत टैरिफ करीब 12% रहा। इसमें उन सामानों को ज्यादा महत्व दिया जाता है जिनका व्यापार अधिक होता है। यानी वास्तविक व्यापार में भारत पर आने वाला औसत टैरिफ लगभग 12% के आसपास पड़ता है।
यही वजह है कि WTO और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की रिपोर्टों में भारत को उच्च टैरिफ वाला देश तो कहा जाता है, लेकिन कभी पूरे भारतीय टैरिफ इन्फ्रा के लिए 175% का आंकड़ा नहीं दिया गया है।
हावर्ड लुटनिक, जो ट्रम्प की टैरिफ नीति के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं, उन्होंने जनवरी 2025 में सीनेट में अपनी पुष्टि सुनवाई के दौरान भी भारत और चीन का उदाहरण दिया था। उनका तर्क था कि ऊंचे टैरिफ का मतलब हमेशा महंगाई नहीं होता, क्योंकि भारत और चीन में टैरिफ ज्यादा होने के बावजूद महंगाई नियंत्रित रही है।
किताब के मुताबिक, बाद में लुटनिक ऐसी स्थिति में फंस गए जहां एक तरफ ट्रम्प राजनीतिक रूप से टैरिफ के बड़े दावे कर रहे थे और दूसरी तरफ सरकारी आंकड़े उन दावों से मेल नहीं खा रहे थे।
ट्रम्प ने यूक्रेन जंग को लेकर कहा था- भारत नहीं मानेगा
किताब में भारत का जिक्र केवल व्यापार विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें एक और दिलचस्प दावा किया गया है कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ दिनों बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर हुई एक बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत का नाम संभावित शांति सेना भेजने वाले देशों में शामिल किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जनवरी 2025 को ओवल ऑफिस में हुई बैठक में ट्रम्प के रूस-यूक्रेन दूत कीथ केलॉग ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने का एक प्रस्ताव पेश किया था। इस दौरान अमेरिका में यूक्रेन में शांति सैनिक भेजने को लेकर एक बैठक चल रही थी।
बैठक में जब फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे नाटो (NATO) देशों के सैनिक भेजने का प्रस्ताव आया, तो जेडी वेंस ने इस पर चिंता जताई। वेंस का मानना था कि नाटो सैनिकों को यूक्रेन भेजने से रूस नाराज हो सकता है और अमेरिका भी सीधे युद्ध में फंस सकता है।
इसके बाद जेडी वेंस ने सुझाव दिया कि क्यों न गैर-यूरोपीय देशों से मदद ली जाए। वेंस ने इस काम के लिए सऊदी अरब और भारत का नाम आगे बढ़ाया।
किताब में दावा किया गया है कि वेंस का सुझाव सुनते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हंस पड़े थे। उन्होंने कहा, ‘भारतीय ऐसा कभी नहीं करेंगे। वो इस तरह की किसी चीज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करेंगे।’
मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब रिजीम चेंज।
ट्रम्प ने कहा था- मोदी मुझे बहुत पसंद करते हैं
किताब में यह भी दावा किया गया कि ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था कि वे उन्हें बहुत पसंद करते हैं। और उनसे मिलने अमेरिका आना चाहते हैं। ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर भी निशाना साधा।
उन्होंने जेलेंस्की को एक ‘खराब वार्ताकार’ बताया। उन्होंने कहा कि जेलेंस्की ने सही ढंग से बातचीत न करके अपने पूरे देश को बर्बाद कर दिया, लेकिन वो बाइडन सरकार से चीजें हासिल करने में बहुत अच्छे थे।