Monday, May 25, 2026
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कभी सोचा… कहां से आया मंडे का यह नाम? रोमन देवी से जुड़ी है रोचक कहानी


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मंडे यानी सोमवार… एक ऐसा दिन जिसे भारत में भगवान शिव और चंद्रदेव से जोड़ा जाता है, जबकि पश्चिमी दुनिया में इसका रिश्ता रोमन देवी लूना से रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर सोमवार या मंडे शब्द की शुरुआत कहां से हुई? आइए जानें, अंग्रेजी के मंडे के नाम के पीछे छिपी पूरी ऐतिहासिक, धार्मिक और वैज्ञानिक कहानी.

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सोमवार सप्‍ताह का पहला दिन है या दूसरा, कहां से आया यह नाम, रोमन देवी से क्‍या है इसका कनेक्‍शन, बड़ी रोचक है पूरी कहानी.

Monday Ka Itihas: मंडे यानी सोमवार… भारत में यह दिन भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है. दूसरी तरफ यूरोप की बात करें, तो वहां कभी इस दिन को रोमन देवी ‘लूना’ से जोड़कर देखा जाता है. यूरोप में देवी लूना का मान्‍यता चंद्र देवी की है. वहीं आज की GenZ पीढ़ी की बात करें तो उनके लिए सोमवार का दिन ‘मंडे ब्‍लूज (Monday Blues)’ है. मंडे ब्‍लूज यानी जेंजीज का वह मनहूस दिन, जिस दिन उनकी वीकेंड की मस्‍ती खत्‍म हो गई है और काम का बोझ उनका इंतजार कर रहा है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस एक दिन को लेकर पूरी दुनिया की सोच इतनी अलग होने के बावजूद उसका आधार एक जैसा क्यों है? धर्म अलग, भाषा अलग, परंपराएं अलग… लेकिन मंडे का रिश्ता लगभग हर जगह चंद्रमा से ही जुड़ा हुआ है. भारत में यह ‘सोमवार’ कैसे बना और अंग्रेजी में ‘मंडे’ नाम कहां से आया? क्या यह नाम हमेशा से ऐसा ही था या समय के साथ बदलता गया? दिलचस्प बात यह है कि इस दिन की कहानी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित नहीं है.

इसके पीछे हजारों साल पुराना इतिहास छिपा है. कभी बेबीलोन के खगोलविदों ने ग्रहों और चंद्रमा के हिसाब से दिनों के नाम तय किए थे. फिर रोमन साम्राज्य ने इसे अपनी देवी ‘लूना’ से जोड़ दिया. बाद में जर्मनिक सभ्यताओं ने अपने हिसाब से इसका नाम बदला और धीरे-धीरे ‘मोनांडेग (Monandæg)’ से यह ‘Monday’ बन गया. वहीं भारत में यह दिन सदियों से ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता रहा. आइए अब जानते हैं कि आखिर ‘Monday’ नाम की शुरुआत कैसे हुई और क्यों पूरी दुनिया में इसका रिश्ता चंद्रमा से जुड़ गया.

सोमवार यानी मंडे से जुड़ी 5 खास बातें आपको कर देंगी हैरान

  1. बेबीलोन से आए ये सात दिन: सात दिनों के सप्ताह की अवधारणा सबसे पहले मेसोपोटामिया में बेबीलोनियन खगोलविदों ने विकसित की थी. लगभग 600 ईसा पूर्व में उन्होंने सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि नामक सात ग्रहों के नाम पर सात दिनों के नाम रखे थे. यह पद्धति इतनी वैज्ञानिक थी कि बाद में रोमन और यूनानियों ने इसे अपना लिया और अपने देवताओं से जोड़ दिया. इसमें चंद्रमा को सबसे पहले स्‍थान में रखा गया, लिहाजा सप्‍ताह के पहले दिन का नाम सोमवार यानी मंडे हुआ.
  2. रोमन देवी लूना का दिन: जब रोमन साम्राज्य ने सात दिनों वाले सप्ताह की व्यवस्था को अपनाया, तब उन्होंने सोमवार को अपनी चंद्र देवी ‘लूना’ को समर्पित कर दिया. रोमन मान्यता के अनुसार, लूना रात, शांति और चंद्रमा की शक्ति का प्रतीक थीं. लैटिन भाषा में इस दिन को ‘डाइस लूने (Dies Lunae)’ कहा गया, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘चंद्रमा का दिन’. माना जाता है कि इसी नाम से आगे चलकर अंग्रेजी का शब्द ‘Monday’ बना. रोमन सभ्यता में चंद्रमा को भावनाओं, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता था, इसलिए सोमवार को एक नई शुरुआत के दिन के रूप में भी देखा जाता था.
  3. 321 ईस्वी में कानून तौर पर तय हुआ मंडे नाम: 7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन द ग्रेट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने पूरे रोमन साम्राज्य में सात दिनों का सप्ताह अनिवार्य कर दिया. साथ ही, यह तय किया कि रविवार सप्ताह का पहला दिन होगा, जबकि मंडे उसका दूसरा दिन. यह वह दौर था जब ‘डाइस लूने’ को आधिकारिक मान्यता मिली और बाद में पूरी पश्चिमी दुनिया का कैलेंडर इसी के अनुसार ढल गया.
  4. जर्मनिक देवता ‘मणि’ और ‘मोनांडेग’ का कनेक्‍शन: जब रोमन साम्राज्य का पतन हुआ और जर्मनिक जनजातियों (एंग्लो-सैक्सन) ने ब्रिटेन पर कब्जा किया, तो उन्होंने रोमन कैलेंडर को तो अपना लिया, लेकिन देवताओं को बदल दिया. रोमन लूना की जगह उनके अपने चंद्र देवता ‘मणि’ (Māni) आ गए. इस तरह लैटिन ‘Dies Lunae’ का अनुवाद पुरानी अंग्रेजी में ‘मोनांडेग (Monandæg)’ हुआ, जो आज का ‘मंडे’ है.
  5. भारत में चंद्र देवता और शिव का मिलन: जहां पश्चिम में यह नाम बदलता रहा, वहीं प्राचीन भारत में यह दिन हमेशा ‘सोमवार’ के नाम से जाना जाता था. ‘सोम’ का अर्थ चंद्र देवता से है. हिंदू धर्म में यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, क्योंकि उनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है. हजारों साल पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है. साथ ही, यह साबित करती है कि भारत में दिनों का नामकरण खगोल विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत मिश्रण था.

सोमवार के नाम और प्रभाव से जुडे़ कुछ रोचक पहलू

  1. जापान से लेकर जर्मनी तक चंद्रमा है केंद्र: क्या आपने कभी सोचा है कि जापानी या कोरियाई भाषा में सोमवार का क्या अर्थ होता है? जापानी में इसे ‘गेत्सुयोबी (Getsuyōbi)’ कहा जाता है, जिसमें ‘गेत्सु (Getsu)’ का मतलब चंद्रमा होता है. वहीं जर्मन भाषा में Monday को ‘मोंटाग (Montag)’ कहा जाता है, जो प्राचीन जर्मनिक चंद्र देवता ‘मानो (Mano)’ के नाम से जुड़ा माना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं और संस्कृतियों ने इस दिन को चंद्रमा से जोड़कर देखा. भले ही अलग-अलग देशों में देवताओं के नाम और मान्यताएं अलग रहीं, लेकिन सोमवार और चंद्रमा का रिश्ता लगभग हर सभ्यता में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है.
  2. पुर्तगाली और अरबी में कहा गया ‘दूसरा दिन’: सभी संस्कृतियों ने मूर्तिपूजक नामों को स्वीकार नहीं किया. ईसाई धर्म के प्रभाव के चलते पुर्तगाली भाषा में सोमवार को ‘सेगुंडा-फेइरा (Segunda-feira)’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘दूसरा दिन’ यानी रविवार के बाद आने वाला दिन. इसी तरह, अरबी में इसे ‘अल-इथनैन (Al-Ithnayn)’ कहा जाता है, जिसका मतलब भी ‘दूसरा दिन’ ही होता है. यह बदलाव जानबूझकर किया गया था, ताकि प्राचीन मूर्तिपूजक परंपराओं और देवी-देवताओं से जुड़े नामों से दूरी बनाई जा सके. खास तौर पर चंद्र देवी लूना (Luna) जैसी मान्यताओं के प्रभाव को कम करने के लिए कई भाषाओं में दिनों के नाम धार्मिक आधार पर बदले गए.
  3. मंडे ब्लूज सिर्फ एक मिथक नहीं: आज दुनिया में सबसे ज्‍यादा चर्चित शब्दों में से एक है ‘मंडे ब्लूज’. लेकिन क्या यह सिर्फ एक बहाना है? रिसर्च बताती हैं कि सप्ताहांत में अस्त-व्यस्त हुई सर्केडियन रिदम यानी शरीर की जैविक घड़ी के कारण सोमवार सुबह शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर अचानक बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोगों को सोमवार की शुरुआत भारी, थकाऊ और तनावपूर्ण लगती है. विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक और सुसाइड के मामलों में भी मंडे का दिन सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है.
  4. सप्ताह की शुरुआत को लेकर अंतर्राष्ट्रीय विवाद: हैरानी की बात है कि दुनिया इस बात पर आज भी पूरी तरह सहमत नहीं है कि सोमवार सप्ताह का पहला दिन है या दूसरा. अमेरिका और कनाडा में कैलेंडर रविवार यानी संडे से शुरू होता है, जबकि आईएसओ 8601 यानी अंतर्राष्ट्रीय मानक संगठन के अनुसार सोमवार को सप्ताह का पहला दिन माना जाता है. यूरोप, चीन और रूस जैसे कई देशों में भी सप्ताह की शुरुआत सोमवार से ही होती है. वहीं भारत में हिंदू कैलेंडर दोनों परंपराओं को मान्यता देता है, इसलिए यहां अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलती हैं.

क्या इस दिन का नाम हमेशा ‘चंद्रमा’ से जुड़ा रहा है?
हां, प्राचीन सुमेरियन और बेबीलोनियन सभ्यता से लेकर रोमन, ग्रीक, जर्मनिक और भारतीय सभ्यता तक सभी ने इस दिन को किसी न किसी रूप में चंद्रमा से जोड़ा. यह खगोलीय घटना इतनी स्पष्ट थी कि कोई भी सभ्यता इसे नजरअंदाज नहीं कर पाई. हालांकि, ईसाई और इस्लामिक परंपराओं में संख्याओं के आधार पर नामकरण करके इससे थोड़ी दूरी बनाई गई, लेकिन जनमानस में चंद्रमा का संबंध आज भी मजबूती से बना हुआ है.

भारत और पश्चिमी देशों में सोमवार के नामकरण में मूल अंतर क्या है?
भारत में नामकरण पूरी तरह से ज्योतिष और वेदों पर आधारित था, जहां ‘सोम’ (चंद्रमा) को एक देवता का दर्जा दिया गया. पश्चिम में, यही प्रक्रिया रोमन और यूनानी देवताओं के माध्यम से हुई. एक बड़ा अंतर यह है कि भारत में सोमवार को भगवान शिव से जोड़कर व्रत और उपासना की परंपरा बनी, जबकि पश्चिम में इस दिन को केवल एक खगोलीय नाम दिया गया और बाद में ईसाई चर्च ने इसे ‘दूसरा दिन’ कहकर संख्यात्मक पहचान देने की कोशिश की.

क्या ‘मंडे ब्‍लूज’ एक मेडिकल कंडीशन है?
मंडे ब्‍लूज को आधिकारिक तौर पर किसी मेडिकल डिक्शनरी में मानसिक बीमारी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया है. हालांकि, यह एक मान्यता प्राप्त सामाजिक और व्यवहारिक घटना है. कई अध्ययनों में पाया गया है कि सोमवार को रक्तचाप और तनाव का स्तर सबसे अधिक होता है. फिनलैंड में हुए एक शोध के अनुसार, रविवार और सोमवार के मुकाबले बुधवार को दिल के दौरे की संभावना 20% कम होती है. इसलिए, इसे पूरी तरह से नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.

आखिर 321 ईस्वी का फैसला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
7 मार्च, 321 ईस्वी को रोमन सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने जो कानून पारित किया, उसने पूरी पश्चिमी दुनिया के कैलेंडर को एक सांचे में ढाल दिया. इससे पहले, कई क्षेत्रों में आठ दिनों या दस दिनों के सप्ताह भी चलते थे. कॉन्सटेंटाइन के इस फैसले ने यह सुनिश्चित किया कि सोमवार को एक निश्चित स्थान मिले और ईसाई दुनिया में रविवार को आराम का दिन घोषित कर दिया गया. यही वह आधार है जिस पर आज हमारा आधुनिक कैलेंडर टिका है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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तुषार कपूर की डेब्यू फिल्म को पूरे हुए 25 साल, सुपरहिट से रखा था कदम, शेयर की पुरानी यादें


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जितेंद्र के बेटे और एकता कपूर के भाई तुषार कपूर ने 25 साल पहले फिल्म ‘मुझे कुछ कहना है’ से एक्टिंग डेब्यू किया था. स्टारकिड की पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी, लेकिन फिर वो इंडस्ट्री में अपनी जगह नहीं बना पाए. एक्टर लीड रोल में खुदको स्थापित नहीं कर पाए. आज डेब्यू फिल्म के 25 साल पूरे होने पर तुषार कपूर ने इमोशनल पोस्ट शेयर किया है.

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तुषार कपूर की डेब्यू फिल्म सुपरहिट रही थी.

 नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर की डेब्यू फिल्म ‘मुझे कुछ कहना है’ को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो गए हैं. इस खास मौके पर एक्टर ने फिल्म से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया, जिसने 2000 के दशक के बॉलीवुड प्रेमियों को फिर से पुरानी यादों में पहुंचा दिया.तुषार कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साल 2001 के पुराने सिनेमा टिकटों का एक खास कोलाज शेयर किया.

इन टिकटों में मुंबई के कई मशहूर सिंगल स्क्रीन थिएटरों के शो शामिल थे, जहां उस दौर में फिल्म देखने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं. उस समय मल्टीप्लेक्स कल्चर इतना आम नहीं था और बड़े पर्दे पर फिल्म देखने का अनुभव दर्शकों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं माना जाता था. तुषार ने इस पोस्ट के साथ लिखा, ‘मुझे कुछ कहना है के 25 साल – 25/5/2001’ और साथ में दिल वाला इमोजी भी लगाया.

सुपरहिट थी तुषार कपूर की डेब्यू फिल्म

साल 2001 में रिलीज हुई इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म से तुषार कपूर ने बॉलीवुड में कदम रखा था, जबकि उनके साथ करीना कपूर मुख्य भूमिका में नजर आई थीं. फिल्म का निर्देशन सतीश कौशिक ने किया था और इसे वाशु भगनानी ने अपने बैनर पूजा एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस किया था. फिल्म में अमरीश पुरी, रिंकी खन्ना, आलोक नाथ और हिमानी शिवपुरी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए थे.

एक्टर ने शेयर किए फिल्म के पुराने टिकट

तुषार कपूर ने शेयर की इंस्टाग्राम स्टोरी

छा गई थी हल्की-फुल्की लव स्टोरी

फिल्म की कहानी एक शर्मीले और साधारण युवक के इर्द-गिर्द घूमती थी, जो अपने प्यार का इजहार करने की हिम्मत जुटाने की कोशिश करता है. उस समय फिल्म की मासूम प्रेम कहानी और हल्का-फुल्का पारिवारिक अंदाज दर्शकों को काफी पसंद आया था. खासतौर पर इसके गाने ‘रब्बा मेरे रब्बा’ और ‘दुपट्टा’ सुपरहिट साबित हुए और आज भी 2000 के दशक के लोकप्रिय रोमांटिक गीतों में गिने जाते हैं.

ऑडियंस ने लुटाया प्यार

‘मुझे कुछ कहना है’ की सफलता के बाद तुषार कपूर और करीना कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया. इस फिल्म की सफलता के बाद मेकर्स ने इस जोड़ी पर दोबारा दांव लगाया था. फिल्म ‘मुझे कुछ कहना है’ के बाद तुषार कपूर और करीना कपूर को ‘जीना सिर्फ मेरे लिए’ में साथ देखा गया था, लेकिन ये फिल्म पहली फिल्म की सफलता को दोहरा नहीं पाई थी. दोनों ने गोलमाल रिटर्न्स में भी स्क्रीन शेयर किया था. करीना ने तुषार की फिल्म क्या लव स्टोरी है के गाने ‘इट्स रॉकिंग’ में स्पेशल अपीयरेंस भी दी थी.

तुषार कपूर दिग्गज अभिनेता जितेंद्र और निर्माता शोभा कपूर के बेटे हैं. हालांकि स्टार परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की. उनके करियर का सबसे सफल दौर गोलमाल सीरीज के साथ आया, जहां उन्होंने ‘लकी’ नाम के बेहद मजेदार किरदार से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया.

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Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें



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उमरिया के डंडी गांव में आंबेडकर प्रतिमा का अपमान: असामाजिक तत्वों पर मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश में पुलिस – Umaria News




उमरिया जिले के मानपुर थाना क्षेत्र के डंडी गांव में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ का मामला सामने आया है। असामाजिक तत्वों द्वारा की गई इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। जानकारी के अनुसार, रविवार रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने गांव में स्थापित बाबा साहब की प्रतिमा के चेहरे को क्षतिग्रस्त कर दिया। सोमवार सुबह जब ग्रामीणों ने प्रतिमा की यह हालत देखी, तो उनमें भारी नाराजगी व्याप्त हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए क्षतिग्रस्त प्रतिमा का सुधार कार्य कराया, जिसके बाद गांव में सामान्य स्थिति बहाल हुई। मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मर्सकोल ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।



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उत्तर कोयल नहर परियोजना की धीमी रफ्तार पर नाराजगी: मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश, जून तक जमीन अधिग्रहण की संभावना – Aurangabad (Bihar) News




बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने उत्तर कोयल नहर परियोजना की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई है। सोमवारा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें औरंगाबाद की जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा, अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उपेंद्र पंडित सहित संबंधित अधिकारी शामिल हुए। परियोजना के विभिन्न पैकेजों के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, भौतिक प्रगति, मशीनरी एवं मानव संसाधन की उपलब्धता, भूमि अधिग्रहण और वितरण प्रणाली से संबंधित लंबित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि परियोजना की कुल प्रगति 51.47 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि भौतिक प्रगति 34.15 प्रतिशत है। पिछले सात दिनों में 1.06 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई। विभिन्न पैकेजों की प्रगति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि पैकेज-3 में 78.43 प्रतिशत, पैकेज-5 में 65.70 प्रतिशत, पैकेज-6 में 70.75 प्रतिशत, पैकेज-8 में 56.32 प्रतिशत, पैकेज-9 में 43.38 प्रतिशत, पैकेज-10 में 45.83 प्रतिशत तथा पैकेज-11 में 61.41 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। 499 स्टाफ कर रहे काम निर्माण एजेंसियों की ओर से उपलब्ध कराई गई मशीनरी एवं मानव संसाधन की भी समीक्षा की गई। प्रतिवेदन के अनुसार 310 मशीनों की आवश्यकता है, लेकिन 164 ही उपलब्ध है। इसके अलावा 1241 लोगों की जगह 499 ही काम कर रहे हैं। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसियों को संसाधनों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य की समीक्षा के दौरान बताया गया कि औरंगाबाद जिले में कुल 41.251 हेक्टेयर भूमि में से 38.5734 हेक्टेयर का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। शेष प्रक्रिया जून 2026 तक पूर्ण होने की संभावना जताई गई। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को जल्द से जल्द सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सके। गयाजी जिले के किसानों को भी मिलेगा लाल पानी अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कोयल नहर जलाशय परियोजना झारखंड के मोहम्मदगंज बराज से प्रारंभ होकर औरंगाबाद जिले के नवीनगर, कुटुंबा, देव, औरंगाबाद तथा मदनपुर प्रखंडों से होते हुए गयाजी तक पहुंचती है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके पूरा होने पर बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, लेकिन बरसों से यह योजना अधूरी पड़ी हुई है। कूटकू डैम में फाटक नहीं लगा है। जिसके कारण उत्तर कोयल बरसाती नर बनकर रह गई है। वर्षा के उपरांत कोयल नहर का पानी बराज में स्टॉक होता है और मेन कैनाल में छोड़ा जाता है। अगर कुटकू में फाटक लग जाए तो पानी का स्टॉक जमा रहेगा। फिलहाल नहर के लाइनिंग का कार्य कराया जा रहा है। अगर इस समय रहते पूरा नहीं किया गया तो बरसात के दिनों में नहर के संचालन में किसानों को परेशानी हो सकती है।



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4 जून को भारत में लॉन्च होगा Motorola का 7000mAh बैटरी, कर्व्ड डिस्प्ले वाला फोन


Motorola Edge 70 सीरीज में एक और दमदार फोन भारतीय बाजार में लॉन्च होने वाला है। इस फोन को ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर लिस्ट किया गया है। साथ ही, कंपनी ने फोन की लॉन्च डेट भी कंफर्म कर दी है। इस फोन में भी 7000mAh की बड़ी दमदार बैटरी दी जा सकती है। मोटोरोला का यह दमदार फोन तीन कलर ऑप्शन- पेनाटोन सैटिन लक्स फिनिश, पेनाटोन ट्विल इंस्पायर्ड और पेनाटोन स्कल्प्टेड वुड फिनिशिंग में आएगा।

4 जून को होगा लॉन्च

Motorola Edge 70 सीरीज में कंपनी पहले ही Motorola Edge 70 Fusion और Motorola Edge 70 Pro को भारतीय बाजार में उतार चुकी है। मोटोरोला अब इस सीरीज का सबसे प्रीमियम फोन Edge 70 Pro+ लॉन्च करने जा रहा है। इसे 4 जून को भारतीय बाजार में लॉन्च किया जाएगा। कंपनी ने कंफर्म किया है कि इसमें 50MP का पेरीस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया जाएगा। इस फोन का कैमरा 50x डिजिटल जूम को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने इसे AI Super Zoom Pro नाम दिया है।

मिलेंगे ये फीचर्स?

मोटोरोला के इस स्मार्टफोन में आपको 16GB रैम और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। इस फोन के बैक में स्क्वायर शेप वाला कैमरा मॉड्यूल मिलेगा, जिसे रियर पैनल के बीच में रखा गया है। इसके अलावा फोन में कर्व्ड डिस्प्ले पैनल दिया जाएगा। इस फोन के लीक हुए फीचर्स की बात करें तो इसमें 6.8 इंच का 1.5K कर्व्ड OLED डिस्प्ले मिल सकता है। फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट दिया जा सकता है।

Motorola Edge 70 Pro+ के बैक में ट्रिपल कैमरा दिया जा सकता है। इसमें 50MP का मेन, 50MP का अल्ट्रा वाइड और 50MP का पेरीस्कोप कैमरा दिया जाएगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इस फोन में 50MP का कैमरा मिलेगा। इस फोन में MediaTek Dimensity 8500 एक्सट्रीम चिपसेट दिया जा सकता है और यह Android 16 पर बेस्ड Hello UI पर काम करेगा। फोन में 7,000mAh बैटरी के साथ 90W फास्ट चार्जिंग फीचर दिए जाने की संभावना है।

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सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछा-पिछली गलती से क्या सीखा: कहा- आपने कोई सबक नहीं लिया, यह दुखद; NEET पेपर लीक पर केंद्र-CBI से जवाब मांगा


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नई दिल्ली25 मिनट पहले

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CBI ने 20 मई को NEET केस में गिरफ्तार 5 आरोपियों को दिल्ली की कोर्ट में पेश किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले में सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- यह दुखद है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि यह मामला पहले भी (2024) सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। तब एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई सिफारिशें दीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि NTA गुरुवार तक हलफनामा दाखिल करके करे और बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने आज फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और मामले से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई की। अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

SC ने FAIMA की याचिका पर नोटिस जारी किया

SC ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) की याचिका पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सभी याचिकाओं को एक साथ सुना जाएगा। अगली सुनवाई 29 मई को होगी।

FAIMA की याचिका में मांगें

  • NEET-UG कराने के लिए NTA की जगह एक मजबूत और स्वायत्त व्यवस्था बनाई जाए या फिर इसकी पूरी संरचना बदली जाए। क्योंकि बार-बार पेपर लीक होने से 22.7 लाख से ज्यादा छात्रों के मौलिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है।
  • नई संस्था बनने तक एक हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, जो दोबारा परीक्षा की निगरानी करे। इसमें रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज को चेयरमैन बनाया जाए, साथ ही साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फॉरेंसिक साइंटिस्ट को शामिल किया जाए, ताकि पेपर लीक से रोका जाए।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की मांग

  • NTA को मौजूदा व्यवस्था को भंग किया जाए।
  • नई राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी बनाई जाए।

अब जानिए NEET पेपर लीक केस क्या है

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।

12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया।

मनीषा संजय हवलदार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

मनीषा संजय हवलदार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया।

मामले में 25, 24 और 23 मई को क्या हुआ

25 मई: दिल्ली कोर्ट में मनीषा हवलदार की पेशी

NEET UG पेपर लीक मामला में आरोपी मनीषा संजय हवलदार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया है। उन्हें महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर एग्जाम से पहले फिजिक्स पेपर लीक करने का आरोप है।

24 मई : आरोपी शुभम खैरनार 6 जून तक न्यायिक हिरासत में

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी शुभम खैरनार को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 20 मई को खैरनार की CBI हिरासत 5 दिन और बढ़ाई गई थी। इससे पहले 14 मई को अदालत ने खैरनार समेत पांच आरोपियों को 7 दिन की CBI हिरासत में भेजा था। एजेंसी ने कहा था कि NEET-UG 2026 पेपर खरीदने वाले अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए उससे आगे पूछताछ जरूरी है।

23 मई: फिजिक्स लेक्चरर मनीषा संजय हवलदार बर्खास्त

महाराष्ट्र के स्कूल सेठ हीरालाल सरस्वती प्रशाला ने सीनियर फिजिक्स लेक्चरर मनीषा संजय हवलदार को NEET पेपर लीक में शामिल होने के आरोप में सस्पेंड किया गया। स्कूल सेक्रेटरी डॉ. सतीश गावड़े ने बताया था कि मनीषा1992 से संस्थान में फिजिक्स की लेक्चरर थीं। उनके पास MSc, B.Ed की डिग्री है। 30 जून को उनका रिटायरमेंट था।

पेपर लीक मामले में अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार

NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।

इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं।

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कर्नाटक में NEET छात्रा ने आत्महत्या की: 12 दिनों में 5 स्टूडेंट्स ने जान दी; राहुल बोले- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक चैन से नहीं बैठेंगे

कर्नाटक के कलबुर्गी में 18 साल की NEET छात्रा ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा की पहचान भाग्यश्री के रूप में हुई है। उसने NEET-UG की परीक्षा दी थी। छात्रा के पिता राजशेखर ने बताया कि परिवार में किसी तरह की परेशानी नहीं थी और बेटी पढ़ाई में काफी अच्छी थी। भाग्यश्री ने हाल ही में 12वीं परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और NEET परीक्षा भी अच्छी गई थी। पूरी खबर पढ़ें…

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मैदे का नहीं, छेने का गाजा है यहां की पहचान, कीमत 12 रुपये पीस, रोज ढाई क्विंटल दूध की खपत


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Purvi Champaran Famous Chhena Gaja: आपने मैदा का गाजा तो आजतक कई बार खाया होगा पर पूर्वी चंपारण में छेने का गाजा मिलता है, जिसका स्वाद बेमिसाल होता है. 300 रुपये किलो और 12 रुपये पीस मिलने वाली इस मिठाई का स्वाद लेने के लिए आपको इस दुकान पर आना पड़ेगा.

ख़बरें फटाफट

पूर्वी चंपारण/आदित्य गौरव: बिहार में कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं और बहुत से लोग मिठाई खाने के शौकीन भी होते हैं. आज हम बात करेंगे पूर्वी चंपारण की एक अनोखी मिठाई छेना के गाजा की, जो अरेराज के अलावा कहीं और आसानी से नहीं मिलती. आपने अक्सर शादी-विवाह जैसे मौकों पर पारंपरिक मिठाइयों को बनते देखा होगा, जिनमें गाजा भी शामिल है. यह मिठाई बेहद स्वादिष्ट होती है और बहुत से लोग इसे पसंद करते हैं. आमतौर पर गाजा मैदा से बनाया जाता है, लेकिन छेना का गाजा अपने आप में खास माना जाता है.

इस दुकान ने की छेना के गाजा की शुरुआत
बता दें कि पूर्वी चंपारण जिले में मौजूदा समय में बहुत से लोग छेना का गाजा बड़े चाव से खाते हैं. जब भी लोग अरेराज में सोमेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तो छेना का गाजा जरूर खाते हैं और अपने परिवार के लिए भी लेकर जाते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि पहले के समय में छेना का गाजा प्रचलन में नहीं था, लेकिन एक खास दुकान से इसकी शुरुआत हुई और लोग इसे बेहद पसंद कर रहे हैं.

1980 से बन रहा है
इस खास मिठाई की दुकान का नाम मां जगदम्बा मिष्ठान भंडार है, जो अरेराज के गोविंदपुर चौक पर स्थित है. होटल के मालिक से बातचीत में छेना के गाजा से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आईं. उन्होंने बताया कि उनकी मिठाई की दुकान काफी पुरानी है और उनके दादा नथुनी शाह ने 1980 में छेना का गाजा बनाना शुरू किया था.

इतनी है कीमत
दुकान संचालक सोनू कुमार ने बताया कि उनके दादा के समय गाजा को लोग काफी पसंद करते थे और एक-दूसरे के यहां लेकर जाते थे. उन्हें चिंता रहती थी कि कहीं छेना की मिठाइयों के बढ़ते प्रभाव में पारंपरिक गाजा का बाजार खराब न हो जाए. इसी वजह से उन्होंने छेना का गाजा बनाना शुरू किया और उनका यह प्रयोग सफल हो गया.

सोनू कुमार बताते हैं कि चंपारण में छेना का गाजा 300 रुपये किलो और 12 रुपये पीस मिलता है. उनके यहां इसकी मांग इतनी ज्यादा है कि रोजाना दो से ढाई क्विंटल दूध की जरूरत पड़ती है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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मैदे का नहीं, छेने का गाजा है यहां की पहचान, कीमत 12 रुपये पीस, रोज ढाई क्विंटल दूध की खपत


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Purvi Champaran Famous Chhena Gaja: आपने मैदा का गाजा तो आजतक कई बार खाया होगा पर पूर्वी चंपारण में छेने का गाजा मिलता है, जिसका स्वाद बेमिसाल होता है. 300 रुपये किलो और 12 रुपये पीस मिलने वाली इस मिठाई का स्वाद लेने के लिए आपको इस दुकान पर आना पड़ेगा.

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पूर्वी चंपारण/आदित्य गौरव: बिहार में कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं और बहुत से लोग मिठाई खाने के शौकीन भी होते हैं. आज हम बात करेंगे पूर्वी चंपारण की एक अनोखी मिठाई छेना के गाजा की, जो अरेराज के अलावा कहीं और आसानी से नहीं मिलती. आपने अक्सर शादी-विवाह जैसे मौकों पर पारंपरिक मिठाइयों को बनते देखा होगा, जिनमें गाजा भी शामिल है. यह मिठाई बेहद स्वादिष्ट होती है और बहुत से लोग इसे पसंद करते हैं. आमतौर पर गाजा मैदा से बनाया जाता है, लेकिन छेना का गाजा अपने आप में खास माना जाता है.

इस दुकान ने की छेना के गाजा की शुरुआत
बता दें कि पूर्वी चंपारण जिले में मौजूदा समय में बहुत से लोग छेना का गाजा बड़े चाव से खाते हैं. जब भी लोग अरेराज में सोमेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, तो छेना का गाजा जरूर खाते हैं और अपने परिवार के लिए भी लेकर जाते हैं. ग्रामीण बताते हैं कि पहले के समय में छेना का गाजा प्रचलन में नहीं था, लेकिन एक खास दुकान से इसकी शुरुआत हुई और लोग इसे बेहद पसंद कर रहे हैं.

1980 से बन रहा है
इस खास मिठाई की दुकान का नाम मां जगदम्बा मिष्ठान भंडार है, जो अरेराज के गोविंदपुर चौक पर स्थित है. होटल के मालिक से बातचीत में छेना के गाजा से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आईं. उन्होंने बताया कि उनकी मिठाई की दुकान काफी पुरानी है और उनके दादा नथुनी शाह ने 1980 में छेना का गाजा बनाना शुरू किया था.

इतनी है कीमत
दुकान संचालक सोनू कुमार ने बताया कि उनके दादा के समय गाजा को लोग काफी पसंद करते थे और एक-दूसरे के यहां लेकर जाते थे. उन्हें चिंता रहती थी कि कहीं छेना की मिठाइयों के बढ़ते प्रभाव में पारंपरिक गाजा का बाजार खराब न हो जाए. इसी वजह से उन्होंने छेना का गाजा बनाना शुरू किया और उनका यह प्रयोग सफल हो गया.

सोनू कुमार बताते हैं कि चंपारण में छेना का गाजा 300 रुपये किलो और 12 रुपये पीस मिलता है. उनके यहां इसकी मांग इतनी ज्यादा है कि रोजाना दो से ढाई क्विंटल दूध की जरूरत पड़ती है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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गोकशी गिरोह के दो बदमाश पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार: लखीमपुर-खीरी में एक के पैर में लगी गोली, तमंचा और हथियार बरामद – Lakhimpur-Kheri News




लखीमपुर खीरी। गोला पुलिस ने गोकशी के मामले में वांछित दो शातिर अपराधियों को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान एक आरोपी के पैर में गोली लगी, जिसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध तमंचा, कारतूस, मोटरसाइकिल और गोकशी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग के निर्देश पर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत गोला पुलिस को सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार, गोकशी के मामले में वांछित आरोपी अलीगंज-गोला रोड से होकर गुजरने वाले थे। इस सूचना पर प्रभारी निरीक्षक अंबर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सिद्धनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग पर घेराबंदी की।पुलिस के मुताबिक, जब आरोपियों को रोकने का प्रयास किया गया, तो वे मोटरसाइकिल से भागने लगे। हालांकि, उनकी बाइक फिसलकर गिर गई। इसी दौरान आरोपी नदीम ने पुलिस टीम पर देशी तमंचे से फायरिंग कर दी।
जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली नदीम के पैर में लगी, जिसके बाद उसे पकड़ लिया गया। दूसरा आरोपी शीबू भी मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नदीम पुत्र रफीउल्ला और शीबू पुत्र रफीउल्ला के रूप में हुई है, जो ग्राम भुडवारा, थाना गोला के निवासी हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से एक देशी तमंचा, जिंदा कारतूस, खोखा कारतूस और एक होंडा शाइन मोटरसाइकिल बरामद की है। इसके अतिरिक्त, गोकशी में इस्तेमाल होने वाले गंडासा, बांका, चाकू, कुल्हाड़ी, रस्सी, तराजू और अन्य सामान भी बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी थाना गोला में दर्ज गोवध निवारण अधिनियम के मुकदमे में वांछित चल रहे थे। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इनके खिलाफ पूर्व में हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट और गोवध अधिनियम सहित कई मुकदमे दर्ज हैं।गोला पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।



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APK ऐप के बहाने सीनियर सिटीजन का मोबाइल हैक: साइबर ठगों ने उड़ाए 5 लाख रुपए, पुलिस ने बचाए 3 लाख – Beawar News




ब्यावर शहर में साइबर ठगों ने एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर करीब 5 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर ली। हालांकि, साइबर थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 3.15 लाख रुपए से अधिक की राशि बचा ली गई। ठगों ने मोबाइल हैक कर बैंक खाते से रकम ट्रांसफर की थी। फोन कॉल से शुरू हुई ठगी की साजिश साइबर थाना प्रभारी भवानी सिंह ने बताया कि अजमेर रोड निवासी राजेंद्र प्रसाद मित्तल के पास 17 मई को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने उनसे एपीके (APK) ऐप के उपयोग के बारे में पूछा। मित्तल ने ऐप का उपयोग नहीं करने की बात कही, लेकिन जिज्ञासावश उससे जानकारी लेने लगे। इसी दौरान साइबर अपराधी ने बातचीत के बहाने कुछ निजी जानकारियां हासिल कर उनके मोबाइल फोन को हैक कर लिया। इसके बाद अपराधी ने व्हाट्सएप सहित अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना ली। दो ट्रांजेक्शन के बाद भी नहीं लगी भनक 17 मई को मित्तल के बैंक खाते से दो बार 9,500-9,500 रुपए निकाले गए। मोबाइल हैक होने के कारण उन्हें इन लेन-देन के संदेश प्राप्त नहीं हुए। अगले दिन 18 मई को अपराधियों ने एक ही ट्रांजेक्शन में 5 लाख रुपए पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी दिनेश रॉय के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस बार मोबाइल पर संदेश मिलने पर मित्तल को ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बची लाखों की रकम शिकायत मिलते ही साइबर थाना पुलिस ने संबंधित बैंकों और एजेंसियों से संपर्क कर धोखाधड़ी से जुड़े खातों को फ्रीज करवाया। इस कार्रवाई में करीब 1.33 लाख रुपए की शेष राशि तुरंत रोक ली गई। लगातार प्रयासों के बाद विभिन्न खातों में जमा हुई लगभग 2.25 लाख रुपए की राशि भी वापस प्राप्त कर ली गई। इस प्रकार पुलिस कुल 3.15 लाख रुपए से अधिक की रकम बचाने में सफल रही। आमजन के लिए पुलिस की अपील थाना प्रभारी भवानी सिंह ने लोगों से अपील की है कि किसी भी परिचित या अपरिचित व्यक्ति को फोन पर ओटीपी, बैंक खाते, एटीएम या इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा न करें। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या लुभावने विज्ञापन के झांसे में आने से बचें। किसी प्रकार की शंका होने पर तुरंत अपनी बैंक शाखा या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।



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