आयरन-प्रोटीन का पावरहाउस है ये देसी सब्जी, स्वाद ऐसा कि भूल जाएंगे पनीर-मशरूम
Charota Bhaji Dal Sabzi Recipe: अगर आप जिम जाते हैं और कुछ हेल्दी खाना चाहते हैं तो छत्तीसगढ़ की देसी डिश बना सकते हैं. यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना माने जाते हैं. इन्हीं में से एक चरोटा भाजी और दाल की सब्जी है. यह खासतौर पर बरसात के मौसम में बनाई जाती है. चरोटा भाजी खेतो में मिलती है. इसे प्रोटीन से भरपूर अरहर दाल के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है. इस खास रेसिपी में लहसुन, हरी मिर्च, प्याज और टमाटर का देसी तड़का लगाया जाता है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है. इसे चावल या रोटी के साथ खाया जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार चरोटा भाजी में आयरन, फाइबर कूट-कूटकर भरा जाता है, जबकि दाल शरीर को भरपूर प्रोटीन देती है. कम मसालों में तैयार यह डिश बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आती है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने और आमजन को मदद के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जिले में सरकारी योजनाओं की शुरुआत की गई है। सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने बताया- पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को हादसे के बाद शुरुआती 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपए तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। गोल्डन आवर में मिले ट्रीटमेंट इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना के बाद के महत्वपूर्ण समय (गोल्डन ऑवर) में त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देकर मृत्यु दर को कम करना है। इसके लिए जिले के सभी राजकीय और आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जान बचाने से न झिझकें डॉ. जाणी ने बताया कि घायलों की मदद करने वाले नागरिकों के लिए गुड सेमेरिटन’ (नेक व्यक्ति) योजना संचालित है। इसके तहत हादसे का शिकार हुए व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार नागरिक को सरकार द्वारा सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाएगा। सीएमएचओ ने जिले वासियों से अपील की है कि वे दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने में बिल्कुल न झिझकें और घायल को तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाकर जीवन बचाने के इस मानवीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
इटावा पुलिस ने एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने इस मामले में चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से चोरी के वाहन और सामान बेचकर कमाए गए 15 लाख 10 हजार रुपये नकद, दो अवैध तमंचे, चार जिंदा कारतूस, एक स्कॉर्पियो कार और चोरी की गई डीसीएम के कटे हुए पार्ट्स बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपी हरियाणा और राजस्थान के रहने वाले हैं। गिरोह का सरगना याहया पुत्र कासिम निवासी नूंह, हरियाणा बताया गया है, जिसका पहले से आपराधिक इतिहास है।
यह कार्रवाई सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम विचारपुरा में हुई एक वाहन चोरी की घटना से जुड़ी है। 20/21 मई 2026 की रात चोरों ने आयशर कंपनी की डीसीएम गाड़ी (संख्या यूपी 75 बी 4436) चुरा ली थी। इस डीसीएम में रेलवे का सामान और कानपुर जा रहे फोम के गद्दे लदे हुए थे। डीसीएम मालिक विपिन कुमार पुत्र ध्यानदास निवासी विचारपुरा की तहरीर पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश कर रही थी। 22/23 जून की रात सिविल लाइन पुलिस संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी, तभी उन्हें मुखबिर से सूचना मिली। मुखबिर ने बताया कि चोरी की डीसीएम में शामिल आरोपी एक काले रंग की स्कॉर्पियो कार से आगरा की ओर से आ रहे हैं और सफारी रोड होते हुए मध्य प्रदेश भागने की फिराक में हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस ने लाइन सफारी रोड पर घेराबंदी की और चेकिंग शुरू कर दी। कुछ देर बाद संदिग्ध स्कॉर्पियो कार आती दिखाई दी, जिसे रोककर पुलिस ने उसमें सवार चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपी याहया और इम्तियाज उर्फ इम्मन उर्फ चैनी के पास से तमंचे और कारतूस बरामद हुए। इसके अतिरिक्त, आरोपियों के पास से 15 लाख 10 हजार रुपये नकद भी मिले।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह लोग अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह चलाते हैं और अलग-अलग राज्यों में जाकर डीसीएम व भारी वाहनों को चोरी करते हैं। चोरी किए गए वाहनों को कबाड़ियों के माध्यम से कटवाकर उनके पार्ट्स बेच देते हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि विचारपुरा से चोरी की गई डीसीएम में लदे फोम के गद्दे और रेलवे के सामान को बेचकर मिली रकम ही उनके पास बरामद हुई है।
पुलिस ने चोरी की डीसीएम के कई महत्वपूर्ण पार्ट्स भी बरामद किए हैं, जिनमें आयशर कंपनी का केबिन, इंजन, सीएनजी सिलेंडर, फ्रंट एक्सल, क्राउन ट्यूब और रिम शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई अन्य वारदातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
राजस्थान और हरियाणा पुलिस से भी संपर्क किया गया है।इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली थाना सिविल लाइन पुलिस टीम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इटावा की ओर से उत्साहवर्धन के लिए 20 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
PPO Number : पीएफ खाता है और आप पेंशन भी लेते हैं तो पीपीओ नंबर के बारे में जरूर जानते होंगे. अगर आपका पीपीओ नंबर खो जाए अथवा आप भूल जाएं तो इसे रिकवर करने के बारे में जानते हैं या नहीं. पीपीओ नंबर किस काम के लिए जरूरी होता है, इसकी जानकारी होना भी आपके लिए जरूरी है.
पीपीओ नंबर को रिकवर करने के कई आसान तरीके हैं.
नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ खाते से से पैसे निकालना और इससे जुड़ी समस्याओं का हल खोजना कभी पहाड़ चढ़ने जितना मुश्किल माना जाता था. लेकिन, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से लगातार जारी सुधार के तहत अब पीएफ खाते से जुड़े काम करना काफी आसान हो गया है. हालांकि, पेंशन आदि कई जरूरी काम के लिए पीपीओ नंबर का होना बहुत जरूरी है. अगर आपके पास पीपीओ नंबर नहीं है या फिर आपने खो दिया है तो चिंता करने की बात नहीं. आप आसानी से अपना पीपीओ नंबर रिकवर कर सकते हैं, वह भी बिना दौड़भाग किए.
पीपीओ नंबर का इस्तेमाल पेंशन वेरिफिकेशन, लाइफ सर्टिफिकेट जमा करने, बैंक इश्यू करने, किसी शिकायत के समाधान और रिकॉर्ड को अपडेट करने में किया जाता है. चूंकि, इस नंबर का इस्तेमाल रेगुलर तौर पर नहीं किया जाता है तो कई लोग इसे भूल जाते या फिर उनके पास से यह नंबर खो जाता है. हालांकि, इस दिक्कत के बावजूद खुशखबरी यह है कि पीपीओ नंबर को दोबारा पाने के लिए आपको शुरुआत से कोशिश नहीं करनी होगी. कई मामलों में आप इसे ईपीएफओ रिकॉर्ड से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. यह काम बैंक अथवा ऑनलाइन पेंशन सर्विस के जरिये हो जाता है.
घर बैठे रिकवर कर सकते हैं नंबर
वैसे तो यह पक्का नहीं है, लेकिन कई पेंशनर्स अपने पीपीओ नंबर को अपने ऑरिजनल पेंशन सैंक्शन लेटर से प्राप्त कर सकते हैं. इस लेटर पर पीपीओ नंबर लिखा होता है.
अगर यहां कागज नहीं मिलता है तो आप पीपीओ नंबर को पेंशन पेमेंट ऑर्डर वाले डॉक्यूमेंट से भी प्राप्त कर सकते हैं.
इतना ही नहीं, आप पुराने बैंक पासबुक से भी इसे रिकवर कर सकते हैं, क्योंकि जहां शुरुआत में पेंशन आती है वहां पीपीओ भी रिकॉर्ड में दर्ज होता है.
इतना ही नहीं, कुछ बैंक तो पीपीओ नंबर को पेंशन अकाउंट के स्टेटमेंट पर भी दर्ज करते हैं. ऑनलाइन अपने पीपीओ नंबर को खोजने से पहले इन डॉक्यूमेंट पर देखना ज्यादा आसान होता है.
अब ईपीएफओ पोर्टल से निकालने की बारी ईपीएफओ पेंशनर्स को अगर ये सारे डॉक्यूमेंट खंगालने के बाद भी पीपीओ नंबर नहीं मिलता है तो ऑनलाइन जाकर ईपीएफओ लिंक्ड पेंशन सर्विस के पोर्टल से पता चल सकता है. अगर आपका पेंशन अकाउंट आधार, बैंक रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर से लिंक है तो पेंशन स्टेटस सर्विस अथवा डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सिस्टम के रिकॉर्ड से भी आप अपना पीपीओ नंबर प्राप्त कर सकते हैं. पेंशनर्स के लिए यह काम अब आसान हो गया है, क्योंकि ईपीएफओ अब ज्यादातर पेंशन सिस्टम को ऑनलाइन जोड़ रहा है.
बैंक से भी मिल सकती है मदद अगर आपका पीपीओ नंबर अभी तक नहीं मिला है तो अपने पेंशन खाते वाले बैंक जाकर भी इस जानकारी को प्राप्त किया जा सकता है. बैंक भी पेंशन को प्रोसेस करने के लिए इन जानकारियों की मदद लेते हैं और उनके रिकॉर्ड में आपका पीपीओ नंबर जरूर रहता है. आप उस ब्रांच में जाएं जो आपकी पेंशन को हैंडल करता है, वहां बेसिक वेरिफिकेशन के बाद बैंक अधिकारी पीपीओ नंबर उपलब्ध करा सकते हैं. यह तरीका उन पेंशनर्स के लिए ज्यादा आसान होता है, जो ऑनलाइन जानकारियां लेने में असमर्थ होते हैं.
क्यों जरूरी है पीपीओ नंबर अगर पेंशनर्स के तौर पर आपको यह लगता है कि पीपीओ नंबर का इस्तेमाल सिर्फ पेंशन के अप्रूवल में ही होता है तो आप इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं. आपका पीपीओ नंबर लाइफ सर्टिफिकेट के लिए भी बहुत जरूरी होता है. इसके अलावा पेंशन संबंधी शिकायतों के निपटारे के लिए भी इसकी जरूरत पड़ती है. इसके अलावा बैंक ट्रांसफर, डिजिटल पेंशन सर्विस, रिवीजन और वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. लिहाजा पीपीओ नंबर को रिकवर करना और उसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखना कई परेशानियों को दूर कर सकता है.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
इन दिनों लोग अपने घरों, दफ्तरों आदि में सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक लॉक लगवा रहे हैं। हालांकि, कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें आग लगने की वजह से ये बायोमेट्रिक लॉक काम नहीं करते हैं। ऐसा ही ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आई है, जहां एक गेमिंग जोन और लाइब्रेरी में आग लगने की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि वहां बायोमेट्रिक या स्मार्ट लॉक लगा था, जो आग लगने के बाद काम नहीं कर रहा था। अंदर दम घुटने की वजह से लोगों की मौत हो गई।
आग लगने पर क्यों काम नहीं करते बायोमेट्रिक लॉक?
बायोमेट्रिक या स्मार्ट लॉक में दरवाजे को बंद करने और खोलने के लिए पासवर्ड की जरूरत होती है। इसे ओपन और क्लोज करने के लिए इसमें एक मोटर लगी होती है, जो सही पासवर्ड एंटर करने पर दरवाजे को खोल देती है। इसमें सेंसर समेत कई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट होते हैं, जो बिजली पर काम करते हैं। इनमें आम तौर पर बैटरी भी लगी होती है, जो बिजली नहीं होने पर भी इस लॉक को एक्टिव रखते हैं।
आग लगने पर इस लॉक के सर्किट जल सकते हैं, जिसकी वजह से दरवाजे लॉक हो जाते हैं। वहीं, बैटरी में भी आग लग सकती है, जो सर्किट को बंद कर देती है। हालांकि, मैनुअल बटन और चाभी से दरवाजे को खोला जा सकता है। हालांकि, आग लगने की जहां भी घटनाएं हुई हैं, वहां मैनुअली दरवाजे खोलने का विकल्प शायद नहीं रहा होगा, जिसकी वजह से दरवाजे खोले नहीं जा सके।
क्या स्मार्ट लॉक लगाना है सेफ?
जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, इसके बाद लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या बायोमेट्रिक लॉक लगाना सुरक्षित है? अगर, कहीं कोई इमरजेंसी की सिचुएशन होती है, तो ये क्या काम करना बंद कर देंगे? हालांकि, इस तरह के मामले सामने आना बहुत ही दुखद है, लेकिन सभी स्मार्ट लॉक या बायोमेट्रिक लॉक के साथ ऐसा नहीं होता है। इन्हें खोलने के लिए मैनुअल बटन या चाभी दी जाती है। कई कंपनियां इन लॉक के साथ बैटरी बैकअप भी देते हैं, जो आग लगने की वजह से बिजली गुल होने पर भी दरवाजे को खोलने में मदद करते हैं।
स्मार्ट डोर लॉक लगवाते समय क्या रखें ध्यान?
अगर, आप भी अपने घर में स्मार्ट या बायोमेट्रिक लॉक लगवाना चाहते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान दें कि इनमें मैनुअल या चाबी से खोलने का ऑप्शन मिले। साथ ही, ये बैटरी ऑपरेटेड हो, जिसकी वजह से बिजली गुल होने पर भी दरवाजे को खोला जा सके। इसलिए मार्केट से ऐसे ही स्मार्ट या बायोमेट्रिक लॉक खरीदें, जिनमें मैनुअल डोर खोलने का ऑप्शन मौजूद हो। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में दरवाजे को खोलने में दिक्कत न हो।
वैशाली जिले के पातेपुर स्थित भरोखरा हाट में संचालित ‘रागनी स्टूडियो’ में तड़के सुबह करीब तीन बजे अचानक आग लग गई। इस हादसे में स्टूडियो में रखा लाखों रुपये का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान जलकर राख हो गया। दुकान मालिक ने करीब 25 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है।
कैमरे, ड्रोन और लैपटॉप जलकर खाक दुकान मालिक शम्मी कुमार के अनुसार आग लगने से स्टूडियो में रखा लैपटॉप, चार प्रोफेशनल कैमरे, ड्रोन कैमरा, कंप्यूटर और अन्य कीमती उपकरण पूरी तरह जल गए। उन्होंने बताया कि दुकान में रखे करीब 30 हजार रुपये नकद भी आग की भेंट चढ़ गए। स्थानीय लोगों ने बुझाई आग आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक स्टूडियो का अधिकांश सामान जल चुका था और भारी नुकसान हो गया।
दुकान मालिक ने जताई साजिश की आशंका शम्मी कुमार ने घटना को संदिग्ध बताते हुए साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने बताया कि वे रात करीब दो बजे तक दुकान में काम कर रहे थे। घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद उन्हें आग लगने की सूचना मिली। उनका कहना है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि किसी की सुनियोजित साजिश हो सकती है। पुलिस कर रही मामले की जांच घटना की सूचना मिलते ही हरलोचनपुर सुक्की पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लिखित शिकायत मिलने के बाद मामले की गहन जांच की जाएगी। यदि साजिश या किसी की संलिप्तता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा से AAP के विधायक हैं चैतर वसावा।
गुजरात में नर्मदा जिले की एक कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी और 7 अन्य को 7-7 साल जेल की सजा सुनाई है। इन पर वन-विभाग के अधिकारियों से मारपीट और वसूली का आरोप था।
सजा के अलावा विधायक की पत्नी और अन्य पर 96 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कुल 9 आरोपियों में 4 महिलाएं शामिल हैं।
मामला 30 अक्टूबर 2023 का है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों ने जंगल की जमीन पर हुए अतिक्रमण हटा दिए थे। इस पर वसावा ने पांच अधिकारियों को अपने घर बुलाया था।
प्राथमिकी के मुताबिक, चैतर वसावा और उनके साथियों ने अधिकारियों के साथ मारपीट की और उनसे प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देने के नाम पर वसूली की थी।
चैतर वसावा गुजरात AAP के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं।
आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चैतर वसावा ने इस दौरान हवाई फायरिंग भी की थी। आरोप है कि जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, उसके लिए उनके पास वैध लाइसेंस नहीं था। इसके चलते उन पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
अधिकारियों ने ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे
इस घटना के अगले ही दिन, चैतर वासावा के पीए और अन्य लोगों ने दो अधिकारियों से 30-30 हजार रुपए की फिरौती मांगी थी। चूंकि वन कर्मचारियों के पास पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया और दो अधिकारियों ने 60 हजार रुपए ऑनलाइन पीए और अन्य आरोपियों के खातों में ट्रांसफर किए थे। कोर्ट में इसे सबूत के तौर पर पेश किया गया था।
मामले में PA और 6 गांववाले भी थे आरोपी
इस मामले में चैतर वसावा के अलावा उनकी पत्नी शकुंतला वसावा, निजी सहायक (PA) जितेंद्र वसावा और 6 ग्रामीणों को आरोपी बनाया गया था। शकुंतला वसावा उस समय नर्मदा जिला पंचायत की सदस्य थीं। घटना के बाद कुछ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था।
हालांकि, चैतर वसावा कई दिनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। उन्होंने 14 दिसंबर 2023 को सरेंडर किया था। बाद में 2024 के लोकसभा चुनाव में भरूच सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।
नर्मदा जिले के आदिवासी इलाके में मजबूत पकड़ रखते हैं वसावा।
2022 के विधानसभा चुनाव में जीत से चर्चा में आए थे
चैतर वसावा AAP के टिकट पर साल 2022 के विधानसभा चुनाव में डेडियापाड़ा सीट से जीतकर चर्चा में आए थे। उनकी जीत ने दक्षिण गुजरात के आदिवासी इलाके में AAP को मजबूत आधार दिया था।
चैतर वसावा ने खुद को आदिवासी भूमि अधिकारों के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, अब अदालत के फैसले ने उनकी राजनीतिक राह मुश्किल कर दी है।
————-
गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
वडोदरा में चॉकलेट केबिन चलाने वाली गीता बनीं मेयर: गुजरात की 15 महानगरपालिकाओं के मेयर और डिप्टी मेयर के नाम का ऐलान
गुजरात में निकाय चुनाव परिणामों के लगभग एक महीने बाद अहमदाबाद, नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, जामनगर, पोरबंदर, नडियाद और महेसाणा समेत 8 महानगरपालिकाओं में पदाधिकारियों की घोषणा की गई। इसके बाद 28 मई को सूरत, वडोदरा, सुरेंद्रनगर, भावनगर, वापी, आणंद-करमसद और राजकोट के पदाधिकारियों के नाम का ऐलान किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
बॉलीवुड के इतिहास में 23 जून को बॉक्स ऑफिस पर दो बिल्कुल उलटी और हैरान करने वाली घटनाएं हुईं. एक जमाने में यह तारीख सिनेमा के लिए वरदान साबित हुई, तो दूसरे जमाने में यह अभिशाप साबित हुई. हम बात कर रहे हैं ऋतिक रोशन की सुपरहीरो ब्लॉकबस्टर ‘कृष’ की, जो 23 जून 2006 को रिलीज हुई थी और सलमान खान की ‘ट्यूबलाइट’ की, जो ठीक 11 साल बाद उसी तारीख 23 जून 2017 को रिलीज हुई थी. जहां ऋतिक के जादू ने मेकर्स को पैसों की बारिश से मालामाल कर दिया, वहीं ईद के बड़े मौके पर रिलीज हुई सलमान की फिल्म को थिएटर्स में दर्शकों की कमी खल रही थी.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में किसी बड़ी फिल्म की रिलीज डेट तय करना एक मुश्किल प्रोसेस है. फिल्म बनाने वाले अक्सर बॉक्स ऑफिस प्रॉफिट को ज्यादा से ज्यादा करने के लिए त्योहार, छुट्टियां या दूसरी ‘लकी डेट्स’ चुनते हैं. हालांकि, 23 जून बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसी तारीख के तौर पर दर्ज है जिसने दो अलग-अलग दशकों में दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स को बिल्कुल अलग अनुभव दिए. ठीक 20 साल पहले, 2006 में इसी तारीख ने बॉलीवुड को अपना पहला ग्लोबल सुपरहीरो देकर बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. ठीक 9 साल पहले, 2017 में इसी तारीख ने सबसे बड़े ईद वीकेंड के दौरान सिनेमाघरों में इतनी खामोशी ला दी थी कि डिस्ट्रीब्यूटर्स की आंखों में आंसू आ गए थे.
2003 की ‘कोई… मिल गया’ की जबरदस्त सफलता के बाद, डायरेक्टर राकेश रोशन बॉलीवुड में एक ऐसा एक्सपेरिमेंट कर रहे थे, जिस पर पूरी इंडस्ट्री शक कर रही थी. पहले इंडिया में ‘सुपरहीरो’ जॉनर को बच्चों का खेल या कम बजट वाला पैरेलल सिनेमा माना जाता था. लेकिन 23 जून 2006 को जब ऋतिक रोशन काले कोट, फेस मास्क और आसमानी छलांग लगाकर बड़े पर्दे पर उतरे, तो सारे शक तुरंत दूर हो गए.
‘कृष’ के रूप में ऋतिक रोशन ने पर्दे पर जो जादुई आकर्षण दिखाया, उसने बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को मोहित कर लिया. फिल्म के वीएफएक्स, हांगकांग के एक्शन डायरेक्टर टोनी चिंग के डिजाइन किए गए शानदार स्टंट और प्रियंका चोपड़ा के साथ ऋतिक की केमिस्ट्री ने सिनेमाघरों को त्योहार में बदल दिया. सिंगल स्क्रीन से लेकर मल्टीप्लेक्स तक, फिल्म के शो 24 घंटे पूरे चलते थे.
Add News18 as Preferred Source on Google
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग ₹40 करोड़ के उस समय के भारी बजट पर बनी इस फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ते हुए ₹126 करोड़ से ज्यादा की कमाई की. यह उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिससे मेकर्स रातोंरात अमीर हो गए. यह तारीख 23 जून 2006 बॉलीवुड के लिए एक ऐसे ‘वरदान’ के तौर पर इतिहास में अमर हो गई, जो पहले कभी नहीं हुआ.
ठीक 11 साल बाद, 2017 में पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सलमान खान के फैंस को भरोसा था कि इतिहास खुद को दोहराएगा. ईद पर फिल्में रिलीज करने का सलमान खान का ट्रैक रिकॉर्ड (बजरंगी भाईजान, सुल्तान, किक) ऐसा था कि डिस्ट्रीब्यूटर आंख मूंदकर करोड़ों रुपये दांव पर लगा रहे थे. डायरेक्टर कबीर खान और सलमान खान की ब्लॉकबस्टर जोड़ी 1962 के भारत-चीन युद्ध के बैकग्राउंड पर बनी एक बहुत ही सेंसिटिव और इमोशनल ड्रामा लेकर आई, जिसका नाम था ‘ट्यूबलाइट.’
लेकिन जैसे ही 23 जून 2017 को थिएटर के दरवाजे खुले, मेकर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को एक बड़ा झटका लगा. फिल्म में सलमान खान ने ‘लक्ष्मण सिंह बिष्ट’ नाम के एक मेंटली चैलेंज्ड और सीधे-सादे लड़के का रोल किया था. ईद पर सलमान के मेलोड्रामैटिक, आंसू भरे और बेबस रोल से ऑडियंस बिल्कुल भी इम्प्रेस नहीं हुई. दर्शक ‘दबंग’ स्टार भाईजान का एक्शन और स्वैग देखने के लिए थिएटर में आए, लेकिन उन्हें बहुत धीमी और खराब स्क्रिप्ट वाली फिल्म मिली.
नतीजा यह हुआ कि ईद की बड़ी नेशनल छुट्टी होने के बावजूद, थिएटर में दर्शकों की कमी रही. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्रैश हो गई. लगभग ₹135 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म घरेलू मार्केट में अपनी लागत भी नहीं निकाल पाई. डिस्ट्रीब्यूटर्स को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि सलमान खान को खुद अपनी जेब से पैसे देकर उनका नुकसान पूरा करना पड़ा. इस तरह 23 जून साल 2017 के लिए एक बड़ा ‘अभिशाप’ बन गया.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में दूसरे चरण के पद्म पुरस्कार देंगी। इस समारोह में देश की 65 हस्तियां सम्मानित होंगी। समारोह में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज केटी थॉमस को जनसेवा और मलयालम पत्रकार पी नारायणन को साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा।
इनके अलावा क्रिकेटर रोहित शर्मा, सिंगर अलका याग्निक, एक्टर ममूटी, अमेरिका में कार्यरत प्रख्यात ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दत्तात्रेयुडु नोरी और भारतीय टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज भी सम्मानित होंगे।
राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में शाम 5 बजे होने वाले समारोह में 2 पद्म विभूषण, 7 पद्म भूषण और 56 पद्म श्री अवॉर्ड दिए जाएंगे। इनमें से कुछ पुरस्कार संयुक्त रूप से भी दिए जा रहे हैं।
2026 में कुल 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इससे पहले 25 को पहले फेज में महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत, एक्टर धर्मेंद्र समेत 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया था।
2026 के पद्म अवॉर्ड्स…
5 हस्तियों को पद्म विभूषण: दिवंगत एक्टर धर्मेंद्र, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केटी थॉमस, कम्युनिस्ट नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन समेत 5 हस्तियों को पद्म विभूषण अवॉर्ड की घोषणा की गई है।
अलका याग्निक समेत 13 हस्तियों को पद्म भूषण: मशहूर सिंगर अल्का याग्निक, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी समेत 13 हस्तियों को पद्म भूषण सम्मान दिया जाएगा।
रोहित शर्मा समेत 113 हस्तियों को पद्मश्री: एक्टर आर माधवन (माधवन रंगनाथन), क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हॉकी प्लेयर सविता पूनिया समेत 113 हस्तियों को पद्मश्री के लिए चुना गया है।
देखें 2026 के पद्म अवॉर्ड विजेताओं की पूरी लिस्ट…
पहले चरण के पद्म अवॉर्ड्स से जुड़ी खबर पढ़ें…
धर्मेन्द्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण, हेमा मालिनी ने रिसीव किया: मार्शल आर्ट गुरु पजनीवेल ने पीएम मोदी को लेटकर प्रणाम किया
25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया। सबसे पहले दिवंगत फिल्म स्टार धर्मेन्द्र को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी एक्ट्रेस–सांसद हेमा मालिनी ने यह सम्मान लिया। महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी लीडरशिप में इसी साल टीम ने वनडे वर्ल्डकप जीता था। पढ़ें पूरी खबर…
इंदौर की डायमंड कॉलोनी में बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने रविवार को नया मोड़ ले लिया। विवाद की सूचना पर मौके पर पहुंचे कनाड़िया थाने के दो पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजा गया। हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से मारपीट की बात से इनकार किया है। घटना के बाद पुलिस विभाग में नाराजगी दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर भी पुलिसकर्मियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर गुस्सा सामने आया। बताया जा रहा है कि मौके पर पहुंचे सिपाहियों ने घटना के कुछ वीडियो बनाए थे, जिन्हें उनके मोबाइल से डिलीट करवाने की बात भी सामने आई है। जमीन कब्जे को लेकर चल रहा विवाद मामला डायमंड कॉलोनी का है, जहां मोहसीन खान की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। रविवार को मोहसीन अपने साथ कुछ लोगों को लेकर जमीन से कब्जा हटवाने पहुंचा था। इस दौरान झोपड़ियां और शेड हटाए जाने लगे, तभी दूसरे पक्ष के लोगों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। झगड़े की सूचना डायल-112 पर मिलने के बाद कनाड़िया थाने से सिपाही आशीष शर्मा और विजय सिकरवार मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया। आरोप है कि इसी दौरान एक पक्ष के कुछ युवकों ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट कर उन्हें घायल कर दिया। टीआई भी पहुंचे मौके पर घटना की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम को देने के बाद कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजा गया। मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों ने भी जानकारी ली। दूसरे दिन भी जारी रही कार्रवाई सूत्रों के अनुसार सोमवार और मंगलवार को भी पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन से कब्जे हटाने की कार्रवाई जारी रही। बताया जा रहा है कि इस बेशकीमती जमीन विवाद में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।