Saturday, July 18, 2026
Home Blog

मसौढ़ी में तेज बारिश, किसानों को मिली राहत: धान रोपनी के कार्य में तेजी आएगी – Patna News




पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र और लखनौर-बिदौली पंचायत में 18 जुलाई को शाम 5:30 बजे से तेज बारिश हो रही है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे बड़ी राहत मिली है, खासकर धान की रोपनी के लिए। बारिश न होने के कारण क्षेत्र में धान की रोपनी जैसे कृषि कार्यों में काफी परेशानी आ रही थी। खेतों में पानी की कमी के चलते किसान बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे। लगातार हो रही बारिश से खेतों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है, जिससे धान की रोपनी का कार्य शुरू हो गया है। किसान अब उत्साहपूर्वक खेती के कार्यों में जुट गए हैं। हालांकि, कुछ ऊंचे इलाकों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में पानी की पूर्ति हो गई है। कुछ स्थानों पर ठनका (बिजली) भी गिरी है, लेकिन किसी खास क्षति की सूचना नहीं है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण भूजल स्तर भी घट गया था। इस बारिश से जमीन के साथ-साथ भूजल स्तर में भी वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। लगातार मोटर पंपों से पानी खींचने के कारण बिजली पर भी दबाव था, जिससे बार-बार बिजली कटौती हो रही थी। अब बिजली की कमी के बावजूद खेती का काम शुरू हो गया है। धान के अलावा मक्का, ज्वार, जिनोरा, बाजरा और सब्जियों की खेती में भी यह बारिश सहायक सिद्ध हो रही है। आज की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है और पेड़-पौधों में भी हरियाली छा गई है, जिससे मौसम खुशनुमा हो गया है।



Source link

गहराया जल संकट, अब दो दिन छोड़कर मिलेगा पानी: मन्दसौर की नगर पालिका ने बदली व्यवस्था, जल स्रोतों का स्तर घटा – Mandsaur News




मंदसौर जिले में पेयजल संकट गहरा गया है। पिछले 10 दिनों से बारिश न होने के कारण जल स्रोतों का स्तर लगातार घट रहा है। इस स्थिति को देखते हुए नगर पालिका के जल कार्य विभाग ने शहर में पेयजल वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। अब शहर के अधिकांश क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर होने वाली जलापूर्ति के बजाय दो दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जाएगी। जल कार्य विभाग की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, नई व्यवस्था 19 जुलाई से लागू होगी। जिन क्षेत्रों में 19 जुलाई को पानी मिलेगा, उन्हें अगली सप्लाई 22 जुलाई को दी जाएगी। इसी प्रकार, 20 जुलाई को पानी प्राप्त करने वाले क्षेत्रों को 23 जुलाई को अगला वितरण मिलेगा। हालांकि, खानपुरा और पुराना शहरी किला क्षेत्र जैसे ऊंचाई पर स्थित इलाकों में पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी। इन क्षेत्रों में पहले की तरह एक दिन छोड़कर 40 मिनट तक पेयजल की सप्लाई की जाएगी। नगर पालिका ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेयजल का अनावश्यक उपयोग न करें और पानी की बर्बादी रोकें। साथ ही, जल वितरण के दौरान विद्युत मोटर का उपयोग न करने की सलाह दी गई है, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से पानी पहुंच सके। जल कार्य विभाग ने यह भी बताया कि शहर में पेयजल उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर स्थिति के अनुसार सप्लाई व्यवस्था में आगे भी बदलाव किया जा सकता है।



Source link

सावन और जन्माष्टमी पर घर में बनाएं मावा और खरबूजे के बीज की शाही बर्फी


Melon Seeds Burfi Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही घरों में पूजा-पाठ, व्रत और स्वादिष्ट पकवानों की रौनक बढ़ जाती है. इसके कुछ समय बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भी आता है, जब घरों में भगवान कृष्ण के लिए खास भोग तैयार किए जाते हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोग बाजार से मिठाई खरीद लेते हैं, लेकिन मिलावट की खबरें सुनकर मन में एक डर बना रहता है, अगर आप भी इस बार अपने परिवार और मेहमानों के लिए घर पर ही शुद्ध, स्वादिष्ट और खास मिठाई बनाना चाहते हैं तो मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी एक शानदार विकल्प है. इस बर्फी की सबसे बड़ी खासियत इसका लाजवाब स्वाद और मुलायम बनावट है. मावा की मलाईदार मिठास और खरबूजे के बीजों का हल्का कुरकुरापन मिलकर ऐसा स्वाद तैयार करता है, जिसे एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी तारीफ करेगा.

इसे बनाना मुश्किल भी नहीं है और बहुत ज्यादा समय भी नहीं लगता. खास बात यह है कि यह मिठाई त्योहारों के साथ-साथ किसी भी खास मौके पर आसानी से बनाई जा सकती है, अगर आप चाहते हैं कि इस बार आपके घर आने वाले मेहमान मिठाई की तारीफ करते न थकें, तो इस आसान रेसिपी को एक बार जरूर आजमाएं.

मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी बनाने के लिए जरूरी सामग्री
1. खरबूजे के बीज (मगज) – 1 कप
2. मावा या खोया – 1.5 कप (करीब 250 ग्राम)
3. चीनी – 1 कप
4. पानी – आधा कप
5. देसी घी – 2 चम्मच
6. हरी इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
7. पिस्ता कतरन – 1 चम्मच

इमेज AI

रेसिपी से जुड़ी जरूरी जानकारी
1. तैयारी का समय: 10 मिनट
2. पकाने का समय: 20 मिनट
3. कुल समय: लगभग 30 मिनट
4. कितने लोगों के लिए: 5 से 6

सबसे पहले खरबूजे के बीज भूनें
एक भारी तले की कढ़ाई को हल्का गर्म करें. इसमें बिना घी डाले खरबूजे के बीज डालें और धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए भूनें. जैसे ही बीज हल्के फूलने लगें और खुशबू आने लगे, उन्हें तुरंत प्लेट में निकाल लें. ध्यान रखें कि ज्यादा भूनने पर उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.

इमेज AI

मावा को सही तरीके से भूनना है जरूरी
उसी कढ़ाई में दो चम्मच देसी घी डालें. अब कद्दूकस किया हुआ मावा डालकर धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भूनें. जब मावा हल्का सुनहरा होने लगे और अच्छी खुशबू आने लगे, तब गैस बंद कर दें. मावा को थोड़ा ठंडा होने दें.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक तार की चाशनी बनाएं
एक अलग बर्तन में चीनी और आधा कप पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं. जब चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए, तब उंगली और अंगूठे के बीच चिपकाकर देखें, अगर एक पतला तार बनता है तो समझिए चाशनी तैयार है.

अब तैयार करें बर्फी का मिश्रण
तैयार चाशनी में भुना हुआ मावा, भुने हुए खरबूजे के बीज और इलायची पाउडर डाल दें. अब लगातार चलाते हुए मिश्रण को पकाएं. जब यह कढ़ाई छोड़ने लगे और गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें.

इमेज AI

बर्फी को सेट करने का सही तरीका
एक थाली या बर्फी ट्रे में हल्का घी लगाकर चिकना कर लें. तैयार मिश्रण उसमें डालें और चम्मच या स्पैटुला की मदद से बराबर फैला दें. ऊपर से पिस्ता कतरन डालकर हल्का दबा दें. अब इसे 1 से 2 घंटे तक सेट होने दें. पूरी तरह जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें.

स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स
1. हमेशा ताजा मावा इस्तेमाल करें.
2. चाशनी एक तार से ज्यादा गाढ़ी न होने दें.
3. बीजों को हल्का ही भूनें.
4. चाहें तो थोड़ा केसर डालकर स्वाद और खुशबू बढ़ा सकते हैं.
5. एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह बर्फी 4 से 5 दिन तक ताजा बनी रहती है.

त्योहारों के लिए क्यों है खास?
सावन, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन या किसी भी शुभ मौके पर यह मिठाई शानदार विकल्प बन सकती है. इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग में भी चढ़ाया जा सकता है. घर की बनी होने की वजह से इसमें शुद्धता और ताजगी बनी रहती है. यही कारण है कि यह बाजार की कई मिठाइयों से बेहतर साबित होती है.



Source link

आए कई उतार-चढ़ाव, नहीं हारी हिम्मत! 17 की उम्र में क्रैक की NEET परीक्षा


Last Updated:

Krishna Anand NEET Success Story: सीतामढ़ी के कृष्णा आनंद ने 17 साल की उम्र में NEET परीक्षा में ऑल इंडिया 1500वीं रैंक (ओबीसी में 488वीं) हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया. कोटा में तैयारी कर उन्होंने यह सफलता पाई और अब कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. जानिए जीवन में कई उतार चढ़ाव के बाद भी कैसे सफलता हासिल की.

ख़बरें फटाफट

सीतामढ़ी: सीतामढ़ी जिला के होनहार छात्र कृष्णा आनंद ने महज 17 साल की उम्र में नीट (NEET) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. देश भर के करीब 23 लाख 33 हजार छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था. जिसमें लगभग 11 लाख 21 हजार छात्र उत्तीर्ण हुए हैं. इस कड़े मुकाबले के बीच कृष्णा आनंद ने ऑल इंडिया 1500वीं रैंक और अपनी ओबीसी कैटेगरी में 488वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इस शानदार कामयाबी के बाद उनके पूरे परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल बना हुआ है.

यहां से हुई प्रारंभिक शिक्षा
कृष्णा आनंद ने अपनी इस प्रारंभिक और मुख्य सफलता का सफर कोटा से पूरा किया है. उन्होंने कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कोटा में ही रहकर की और वहीं से नीट परीक्षा के लिए दिन-रात डटकर तैयारी की. कृष्णा ने अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई, माता-पिता और उन सभी शिक्षकों को दिया है जिन्होंने कदम-कमद पर उनका मार्गदर्शन किया. उनके बड़े भाई वर्तमान समय में दिल्ली से कंप्यूटर साइंस (CS) ब्रांच में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं, जो उनकी प्रेरणा के मुख्य स्रोतों में से एक रहे हैं.

बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना
कृष्णा के परिवार में पहले से ही चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद हैं, जिससे उन्हें बचपन से ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली. उनके अंकल डॉ. अमलेंदु कुमार एक प्रतिष्ठित एमडी रेडियोलॉजिस्ट हैं और उनका आनंद डायग्नोस्टिक सेंटर नाम से एक अस्पताल है, जिसकी पूरी देखरेख और मैनेजमेंट कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार संभालते हैं. अपने चाचा को मरीजों की सेवा करते देख कृष्णा के मन में भी देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों में शामिल होने का सपना जागा, जिसे उन्होंने 12वीं कक्षा के साथ ही अपनी कड़ी मेहनत से साकार कर दिखाया.

आए कई उतार-चढ़ाव, नहीं हारी हिम्मत
अपनी संघर्ष की कहानी बयां करते हुए कृष्णा बताते हैं कि 8वीं से 10वीं तक की पढ़ाई तो सामान्य रही, लेकिन असली और मुख्य तैयारी 11वीं और 12वीं कक्षा से शुरू हुई. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वे कोचिंग से मिलने वाले स्टडी मटेरियल और लेक्चर्स पर पूरा ध्यान देते थे. कृष्णा का मानना है कि परीक्षा पास करने के लिए थ्योरी से ज्यादा जरूरी मॉक टेस्ट और सवालों की प्रैक्टिस करना है. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान ज्यादा से ज्यादा सवालों को हल करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया.

आया 1500 रैंक, भविष्य में बनना है यह
कृष्णा की इस अद्भुत सफलता पर उनके परिवार के साथ-साथ उनके पारिवारिक सदस्य चाचा डॉ. प्रवीण कुमार ने गहरी खुशी व्यक्त की है. उनका कहना है कि इतने लाख छात्रों के बीच 1500 रैंक लाना सीतामढ़ी जिला के लिए एक बेहद सराहनीय और गर्व की बात है. वहीं कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार और आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत उनकी माता रेनू रानी अपने बेटे की लगन और मेहनत को देखकर फूले नहीं समा रहे हैं. कृष्णा का भविष्य में एक बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट (दिल का डॉक्टर) बनने का लक्ष्य है और वे देश के किसी टॉप मेडिकल कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं.

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



Source link

प्रशासनिक लापरवाही पर डीएम की कार्रवाई: एसडीएम के बाद अब तहसीलदार भी हटाए गए, जिला मुख्यालय से जोड़ा – Kanpur Dehat News




कानपुर देहात में जिलाधिकारी कपिल सिंह ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में सिकंदरा तहसील के तहसीलदार राकेश कुमार द्वितीय को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। उन्हें जनपद मुख्यालय के राहत एवं आपदा अनुभाग में संबद्ध किया गया है। जारी आदेश के अनुसार, तहसीलदार राकेश कुमार द्वितीय को तत्काल प्रभाव से जनपद मुख्यालय में योगदान देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई प्रशासनिक आधार पर और जनहित में की गई है। उन्हें बिना किसी देरी के अपनी योगदान आख्या प्रस्तुत करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक, तहसीलदार राकेश कुमार द्वितीय की कार्यशैली और कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इनमें तहसील में लंबित मामलों के निस्तारण में लापरवाही और शिकायतों के समाधान में देरी जैसे मुद्दे शामिल थे। इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने यह कार्रवाई की है। यह उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले जिलाधिकारी कपिल सिंह ने सिकंदरा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को भी हटाया था। लगातार दो दिनों में एसडीएम और तहसीलदार दोनों पर हुई इस कार्रवाई से जिला प्रशासन का सख्त संदेश साफ है कि लापरवाही और ढिलाई को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले के प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा है। माना जा रहा है कि जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जनहित के कार्यों में लापरवाही न बरतने का स्पष्ट संदेश दिया है। अब देखना होगा कि सिकंदरा तहसील में नई प्रशासनिक व्यवस्था कब तक लागू होती है और इसका आम जनता को कितना लाभ मिलता है।



Source link

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे: ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी


2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं।

कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी।

राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा।

तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं।

तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं।

कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया।

मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है।

कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है।

मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है।

14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए।

14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए।

अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम

ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया।

कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए।

राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी

युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा-

QuoteImage

राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।

QuoteImage

राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।

गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर

कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं।

कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है।

संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे।

संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे।

कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज

ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया।

सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया।

नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके।

ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।

ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।

विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा-

QuoteImage

हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।

QuoteImage

हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है।

इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है।

ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है

युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है।

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे।

अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी

CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं।

ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा,

QuoteImage

मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा।

QuoteImage

यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

—————————–

ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें

अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…



Source link

थाणा स्कूल में ‘दहेज मुक्त भारत’ की शपथ: प्रिंसिपल बोलीं- दहेज प्रथा समाज के लिए गंभीर समस्या है; छात्रों-स्टाफ से लिया संकल्प – Salumber News




सूलंबर के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, थाणा में ‘दहेज मुक्त भारत’ अभियान के तहत एक शपथ ग्रहण समारोह हुआ। राज्य सरकार के निर्देश पर हुए इस कार्यक्रम में सैकड़ों छात्र-छात्राओं, अध्यापकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ ने दहेज प्रथा समाप्त करने का संकल्प लिया। स्कूल की प्रधानाचार्य भावना गुप्ता ने उपस्थित सभी को जीवन में कभी दहेज न लेने और न देने की प्रतिज्ञा दिलाई। उन्होंने इस अवसर पर छात्रों और स्टाफ को संबोधित किया। प्रधानाचार्य गुप्ता ने कहा- दहेज प्रथा समाज के लिए एक गंभीर समस्या है, जो कई परिवारों को प्रभावित करती है। उन्होंने इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि देश की हर मां और बेटी खुशहाल और सुरक्षित जीवन जी सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि युवा पीढ़ी दहेज मुक्त भारत का निर्माण करने में सफल रहती है, तो देश की आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और सशक्त होंगी। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं में इस अभियान को लेकर उत्साह देखा गया। छात्रों ने न केवल स्वयं दहेज प्रथा से दूर रहने का संकल्प लिया, बल्कि अपने आस-पड़ोस और समाज में भी लोगों को इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूक करने की बात कही। स्कूल स्टाफ ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही ऐसे महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव लाए जा सकते हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सामूहिक रूप से समाज को एक नई और स्वस्थ दिशा देने का संकल्प दोहराया।



Source link

बिहार में किराना दुकानदार के 3 बच्चों ने एक साथ क्रैक किया नीट, बेटी और दो बेटे बनेंगे डॉक्टर


बिहार के सहरसा में दुकानदार के तीन बच्चों ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और कड़ी मेहनत से आर्थिक तंगी को दूर किया जा सकता है। एक साधारण परिवार के तीन भाई-बहनों ने, जो कोटा या दिल्ली में महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे, एक साथ नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पास किया है। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।

तीनों बच्चों को मिले अच्छे नंबर

सहरसा के गांव तुलसियाही के रहने वाले किराना दुकानदार के बड़े बेटे रजनीश कुमार ने नीट परीक्षा में 633 अंक प्राप्त किया। बहन साक्षी कुमारी को 601 अंक मिले जबकि छोटे बेटे प्रह्लाद कुमार ने 565 अंक प्राप्त किए हैं। रजनीश कुमार, प्रह्लाद कुमार और उनकी बहन साक्षी ने अपने गृहनगर सहरसा में ही तैयारी करके यह उपलब्धि हासिल की। ​​उनकी शानदार सफलता पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है और देश भर के हजारों NEET उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

पिता चलाते हैं छोटी सी किराना की दुकान

रजनीश और प्रह्लाद ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, वहीं साक्षी ने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड से पढ़ाई की। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद, तीनों का डॉक्टर बनने का सपना एक ही था। उनके पिता रोहित आनंद किराने की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। इससे परिवार का गुजारा चलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण, बच्चों को कोटा या दिल्ली जैसे कोचिंग हब में भेजना परिवार की क्षमता से बाहर था।

Image Source : REPORTERदुकानदार के 3 बच्चों ने एक साथ क्रैक किया नीट

रोहित आनंद और उनकी पत्नी पूनम देवी ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से बता दिया था कि वे उन्हें कोचिंग के लिए जिले से बाहर भेजने का खर्च नहीं उठा सकते। हालांकि, उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनकी शिक्षा में मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद भाई-बहनों ने सहरसा के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया।

कोटा जाने के बजाय सहरसा में तैयारी की

तीनों भाई-बहनों ने कोटा या दिल्ली जाने की बजाय अपने गृहनगर में ही तैयारी करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित पढ़ाई, समय के सही प्रबंधन और लगातार कड़ी मेहनत को दिया। भाई-बहनों ने बताया कि वे नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ कठिन विषयों पर चर्चा करते थे और एक-दूसरे के संदेह दूर करते थे, जिससे उनकी समझ मजबूत हुई और तैयारी के दौरान वे प्रेरित रहे।

माता-पिता प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत थे


भाई-बहनों ने अपनी सफलता में माता-पिता के सबसे बड़े योगदान को माना। उन्होंने कहा कि तैयारी के तनावपूर्ण दौर में उनके माता-पिता ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें याद दिलाया कि सच्ची कोशिश कभी बेकार नहीं जाती। उनका अटूट समर्थन और भरोसा परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन गया। बता दें कि 16 जुलाई को नीट यूजी परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया। 11 लाख से ज्यादा छात्रों ने काउंसलिंग के लिए क्वालिफाई किया है। 

 

रिपोर्टः संजीव कुमार 

ये भी पढ़ेंः देश के टॉप मेडिकल कॉलेज में कितना रहता है कट-ऑफ रैंक, NEET पास करने वाले छात्र जरूर जान लें

 





Source link

ऑपरेशन मुस्कान- जमुई पुलिस ने 26 खोए मोबाइल बरामद किए: एसपी ने CEIR पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की – Jamui News




जमुई पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत 26 खोए हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को लौटा दिए। साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई से मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि साइबर थाना पुलिस ने विभिन्न स्थानों से ये 26 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। सभी मोबाइलों की पहचान और सत्यापन के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य लोगों की खोई हुई संपत्ति वापस दिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाना है। एसपी ने लोगों से अपील की कि यदि किसी का मोबाइल खो जाए तो तुरंत संबंधित थाने में इसकी सूचना दें और सीईआईआर (CEIR) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। इससे मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लॉक हो जाता है और यदि उसमें कोई नया सिम लगाकर उपयोग किया जाता है तो पुलिस उसे आसानी से ट्रैक कर बरामद कर सकती है। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदने से पहले उसकी जांच अवश्य करें। इसके लिए संचार साथी पोर्टल पर मोबाइल का आईएमईआई (IMEI) नंबर डालकर यह सुनिश्चित कर लें कि मोबाइल चोरी या गुमशुदगी का तो नहीं है। साइबर थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो दर्जन से अधिक लोगों को उनके मोबाइल सौंपे गए। अपना खोया हुआ मोबाइल वापस मिलने पर लोगों ने जमुई पुलिस का आभार व्यक्त किया। इसी क्रम में जदयू नेता मुकेश कुमार साह का भी खोया हुआ मोबाइल पुलिस ने बरामद कर उन्हें लौटाया। मोबाइल मिलने पर उन्होंने जमुई पुलिस और एसपी विश्वजीत दयाल का धन्यवाद करते हुए साइबर थाना पुलिस की सराहना की। उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले लखीसराय जाने के दौरान उनका मोबाइल खो गया था, जिससे उन्हें काफी परेशानियां हुई थीं। इस अवसर पर साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार सहित साइबर पुलिस के जवान मौजूद थे।



Source link

130 मॉडिफाइड साइलेंसरों पर चला रोड रोलर: रीवा में ‘नो नॉइज पॉल्यूशन’ का संदेश; तेज आवाज करने वाले वाहनों पर कार्रवाई – Rewa News




रीवा में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ यातायात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 130 मॉडिफाइड साइलेंसरों को सरेआम रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। पुलिस ने इस कार्रवाई के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण रोकने का संदेश दिया। यातायात थाना प्रभारी अनिमा शर्मा और सूबेदार अखिलेश कुशवाह ने बताया कि शहर में लगातार ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिनमें अवैध रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए हैं। जांच के दौरान जब्त किए गए करीब 130 साइलेंसरों को शनिवार को रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया गया, ताकि लोगों के बीच यह स्पष्ट संदेश जाए कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सूबेदार अखिलेश कुशवाह ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल चालानी कार्रवाई करना नहीं, बल्कि युवाओं को जागरूक करना भी है। उन्होंने कहा कि हम आम जनता के बीच ‘नो नॉइज पॉल्यूशन’ का संदेश देना चाहते हैं। युवा अपनी गाड़ियों में अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों से निकलने वाली तेज और पटाखों जैसी आवाजें आम नागरिकों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। लगातार तेज शोर से मानसिक तनाव, सुनने की क्षमता पर असर और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पुलिस ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर जब्त करने के साथ वाहन मालिकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की गई है और नियमानुसार जुर्माना वसूला गया है। रीवा पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में किसी भी प्रकार के अवैध मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



Source link