Thursday, May 14, 2026
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साई पल्लवी की ‘एक दिन’ निकली फुस्स तो ‘रामायण’ मेकर्स ने लिया सबक, उठाया बड़ा कदम!


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साई पल्लवी ने आमिर खान के बेटे जुनैद खान के साथ फिल्म ‘एक दिन’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा. एक्ट्रेस इसी साल दिवाली के मौके पर रामायण में भी नजर आने वाली हैं. नितेश तिवारी की रामायण में साई पल्लवी सीता के रोल में दिखेंगी. फिल्म को लेकर पिछले साल से बज बना हुआ है.

नई दिल्ली. साई पल्लवी इन दिनों अपनी हिंदी फिल्म एक दिन और साथ ही बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर लगातार चर्चा में हैं. रामायण में साई पल्लवी, रणबीर कपूर के अपोजिट माता सीता के रोल में दिखने वाली हैं. लेकिन जुनैद खान की हालिया रिलीज ‘एक दिन’ के फ्लॉप होने का साई पल्लवी की अपकमिंग फिल्म पर भी असर पड़ा है.

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1 मई को साई पल्लवी और जुनैद खान की फिल्म एक दिन रिलीज हुई. फिल्म को न दर्शकों का और न ही क्रिटिक्स का अच्छा रिस्पांस मिला है. एक्टिंग, कहानी के साथ ही फिल्म में साई पल्लवी की हिंदी पर भी सवाल उठ रहे हैं. एक्ट्रेस को अपने उच्चारण की वजह से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है.

Ek Din X reviews out netizens divided Sai Pallavi Junaid film adorned with romance idea not original people said Ye Chalegi Ek Bhi Din

फिल्म से ज्यादा फिल्म में साई पल्लवी की हिंदी की चर्चा हो रही है. उनके उच्चारण ने फिल्म के असर को काफी हद तक कम कर दिया है. सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कहा कि साई पल्लवी की हिंदी में दक्षिण भारतीय लहजा साफ सुनाई देता है.

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कुछ लोगों का मानना है कि सामान्य फिल्मों में यह बड़ी बात नहीं है, लेकिन ‘रामायण’ जैसी पौराणिक फिल्म में संवादों का उच्चारण बेहद स्पष्ट और प्रभावशाली होना चाहिए. इसी बीच एबीपी न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रामायण के मेकर्स ने एक दिन की असफलता से सबक लेकर बड़ा कदम उठाया है.

इसी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि ‘रामायण’ के निर्माता साई पल्लवी के कुछ संवादों को डबिंग आर्टिस्ट से डब कराने पर विचार कर सकते हैं. कहा जा रहा है कि फिल्म की भाषा को अधिक शुद्ध बनाने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है ताकि दर्शकों को रामाय़ण का ओरिजिनल अनुभव कराया जा सके.हालांकि अभी तक न तो निर्माताओं और न ही साई पल्लवी की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है.

सोशल मीडिया पर इसको लेकर प्रतिक्रियाएं भी तेज हैं. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि यदि कलाकार हिंदी में सहज नहीं हैं, तो उन्हें इतने महत्वपूर्ण किरदार के लिए क्यों चुना गया. वहीं कई फैंस ने साई पल्लवी का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी अभिनय क्षमता इतनी मजबूत है कि भाषा की छोटी-मोटी कमियां उनके प्रदर्शन पर भारी नहीं पड़ेंगी.

साई पल्लवी लंबे समय से अपनी नेचुरल एक्टिंग और लुक के लिए जानी जाती हैं. एक दिन से उन्होंने बॉलीवुड डेब्यू किया और अब रामायण उनकी दूसरी हिंदी फिल्म होगी. दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में सीता के किरदार के लिए आलिया भट्ट का नाम सामने आया था, लेकिन डेट्स न मिलने की वजह से फिल्म में साई पल्लवी को कास्ट किया गया.

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गुमशुदा बच्चों को ढूंढने के लिए विशेष अभियान पर जोर: विशेष अभियान चलाने और कानून व्यवस्था मजदूत करने के दिए निर्देश – Bundi News




बूंदी एसपी अवनीश कुमार शर्मा ने जिले के समस्त पुलिस अधिकारियों के साथ एक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस प्राथमिकताओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एसपी शर्मा ने सभी थानाधिकारियों को प्रतिदिन जनसुनवाई करने और आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के विरुद्ध होने वाले अपराधों का समयबद्ध निस्तारण करने तथा गुमशुदा बच्चों की शीघ्र दस्तयाबी के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी जोर दिया। पेंडिंग मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश
बैठक में लंबित प्रकरणों को मुख्यालय के मापदंडों के अनुरूप रखने और सीसीटीएनएस (CCTNS) से नियमित मिलान के निर्देश दिए गए। प्रोएक्टिव पुलिसिंग के तहत संपत्ति संबंधी अपराधों में पूर्व में चालानशुदा आरोपियों से पूछताछ कर कठोर कार्रवाई करने तथा हिस्ट्रीशीटर अपराधियों की नियमित निगरानी और नई हिस्ट्रीशीट खोलने पर भी बल दिया गया। एसपी ने जनसहभागिता बढ़ाने के लिए समानता समिति और सीएलजी (CLG) बैठकों का नियमित आयोजन करने के निर्देश दिए।
इस गोष्ठी में एएसपी संजय सिंह चम्पावत, महिला अपराध अनुसंधान सेल से जसवीर मीणा और त्वरित अनुसंधान सेल से अदिति चौधरी सहित जिले के समस्त वृत्ताधिकारी तथा थानाधिकारी मौजूद रहे।



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अयोध्या में 4011 परिवारों को मिले पक्के मकान: मुख्यमंत्री आवास योजना से 2017 से 2026 तक मिली कच्चे मकानों से मुक्ति – Ayodhya News




अयोध्या में योगी सरकार ने ग्रामीणों को पक्के आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अप्रैल 2017 से मार्च 2026 तक जिले में कुल 4011 लाभार्थियों को पक्के मकान दिए गए हैं। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में से एक है। इस योजना से लाभान्वित हुए ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आया है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार पहले कच्चे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों या किराए के घरों में रहने को मजबूर थे। अब उन्हें स्थायी आवास मिल गया है, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। इस अभियान को जिले में विशेष रूप से प्रभावी बनाया गया है। योजना के पात्रों में कई महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें मकान का स्वामित्व अधिकार मिलने से उनके परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के साथ राज्य सरकार की इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है। मकान निर्माण के दौरान स्थानीय मजदूरों, ठेकेदारों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को रोजगार के अवसर मिले हैं, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। अमानीगंज विकासखंड के एक लाभार्थी सुरेश रावत ने बताया कि पहले बारिश में छत टपकती थी और बच्चे बीमार रहते थे। अब पक्का मकान मिलने से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिला है। सीडीओ अयोध्या कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि जिले में ग्रामीण आवास अभियान विकास की नई दिशा दे रहा है। यह योजना न केवल आवास प्रदान कर रही है, बल्कि गरीबों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि भी ला रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे, जिससे ग्रामीणों को स्थायी छत के साथ आत्मनिर्भरता और सामाजिक प्रतिष्ठा मिल सके।



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चंचलगुडा जेल में सिर्फ 1,000 रुपये देकर पर्यटक जी सकेंगे कैदियों जैसी जिंदगी


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Hyderabad Travel News: हैदराबाद की ऐतिहासिक चंचलगुडा सेंट्रल जेल अब एक अनोखे पर्यटन केंद्र के रूप में चर्चा में है. ‘फील द जेल’ नामक इस विशेष पहल के तहत पर्यटकों को सिर्फ 1,000 रुपये में जेल के अंदर कैदियों जैसी जिंदगी जीने का अनुभव दिया जा रहा है. पर्यटक जेल की बैरकों में समय बिताएंगे, कैदियों जैसा खाना खाएंगे और जेल की दिनचर्या को करीब से महसूस कर सकेंगे. इस पहल का उद्देश्य लोगों को जेल जीवन की कठिनाइयों और अनुशासन को समझाना है, साथ ही पर्यटन को नया आयाम देना भी है. तेलंगाना पर्यटन और जेल प्रशासन की इस अनोखी पहल ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया पर भी यह अनुभव तेजी से वायरल हो रहा है.

प्रशासन ने इस अनुभव को दो श्रेणियों में बांटा है. जो लोग कम समय के लिए जेल के वातावरण को समझना चाहते हैं, उनके लिए 12 घंटे का पैकेज 1,000 रुपये निर्धारित किया गया है. वहीं जो लोग जेल की पूरी रात और भोर की दिनचर्या को गहराई से अनुभव करना चाहते हैं. उनके लिए 24 घंटे का पैकेज 2,000 रुपये रखा गया है.

इस कार्यक्रम और संग्रहालय से होने वाली पूरी आय का उपयोग लोक कल्याणकारी कार्यों में किया जाएगा। जेल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि अर्जित राजस्व को कैदियों के कौशल विकास, स्वास्थ्य और पुनर्वास कार्यक्रमों में खर्च किया जाएगा। इस प्रकार, एक नागरिक का जेल अनुभव किसी अपराधी के जीवन सुधार में प्रत्यक्ष योगदान बनता है।

इस कार्यक्रम और संग्रहालय से होने वाली पूरी आय का उपयोग लोक कल्याणकारी कार्यों में किया जाएगा. जेल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि अर्जित राजस्व को कैदियों के कौशल विकास, स्वास्थ्य और पुनर्वास कार्यक्रमों में खर्च किया जाएगा. इस प्रकार, एक नागरिक का जेल अनुभव किसी अपराधी के जीवन सुधार में प्रत्यक्ष योगदान बनता है.

आमतौर पर जेलों को समाज से कटा हुआ और रहस्यमयी माना जाता है। चंचलगुडा जेल प्रशासन ने इस धारणा को तोड़ने के लिए फील द जेल नामक एक अनूठा सशुल्क कार्यक्रम शुरू किया है। इसके माध्यम से आम नागरिकों को स्वेच्छा से सलाखों के पीछे कुछ समय बिताने का अवसर दिया जा रहा है। यह पहल सजा के बजाय अनुभव और शिक्षा पर आधारित है जो भारत में अपनी तरह का एक विरल प्रयोग है।

आमतौर पर जेलों को समाज से कटा हुआ और रहस्यमयी माना जाता है. चंचलगुडा जेल प्रशासन ने इस धारणा को तोड़ने के लिए फील द जेल नामक एक अनूठा सशुल्क कार्यक्रम शुरू किया है. इसके माध्यम से आम नागरिकों को स्वेच्छा से सलाखों के पीछे कुछ समय बिताने का अवसर दिया जा रहा है. यह पहल सजा के बजाय अनुभव और शिक्षा पर आधारित है जो भारत में अपनी तरह का एक विरल प्रयोग है.

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जेल अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल रोमांच प्रदान करना नहीं है। इसका वास्तविक मकसद नागरिकों के मन में कैदियों की स्थिति और जेल सुधारों के प्रति सहानुभूति पैदा करना है। जब एक व्यक्ति खुद उन तंग दीवारों के बीच समय बिताता है तो वह जेल जीवन की हकीकत और सुधार की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ पाता है।

जेल अधिकारियों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य केवल रोमांच प्रदान करना नहीं है. इसका वास्तविक मकसद नागरिकों के मन में कैदियों की स्थिति और जेल सुधारों के प्रति सहानुभूति पैदा करना है. जब एक व्यक्ति खुद उन तंग दीवारों के बीच समय बिताता है तो वह जेल जीवन की हकीकत और सुधार की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ पाता है.

इस पहल ने पर्यटकों, समाजशास्त्रियों और छात्रों के बीच काफी उत्सुकता पैदा की है। जानकारों का मानना है कि यह अनुभवात्मक शिक्षा का एक बेहतरीन मॉडल है। चंचलगुडा जेल की यह कोशिश जेलों को केवल दंड गृह के बजाय सुधार गृह और जागरूकता केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

इस पहल ने पर्यटकों, समाजशास्त्रियों और छात्रों के बीच काफी उत्सुकता पैदा की है. जानकारों का मानना है कि यह अनुभवात्मक शिक्षा का एक बेहतरीन मॉडल है. चंचलगुडा जेल की यह कोशिश जेलों को केवल दंड गृह के बजाय सुधार गृह और जागरूकता केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है.

चंचलगुडा जेल में केवल वर्तमान का अनुभव ही नहीं, बल्कि अतीत की झलक भी मौजूद है। यहाँ भारत का पांचवां जेल संग्रहालय स्थापित किया गया है। इस संग्रहालय में औपनिवेशिक काल की हथकड़ियाँ, पुराने सजा उपकरण और ऐतिहासिक जेल रिकॉर्ड प्रदर्शित किए गए हैं। यह प्रदर्शनियां भारत की दंड प्रणाली के क्रमिक विकास की कहानी बयां करती हैं।

चंचलगुडा जेल में केवल वर्तमान का अनुभव ही नहीं, बल्कि अतीत की झलक भी मौजूद है. यहाँ भारत का पांचवां जेल संग्रहालय स्थापित किया गया है. इस संग्रहालय में औपनिवेशिक काल की हथकड़ियाँ, पुराने सजा उपकरण और ऐतिहासिक जेल रिकॉर्ड प्रदर्शित किए गए हैं. यह प्रदर्शनियां भारत की दंड प्रणाली के क्रमिक विकास की कहानी बयां करती हैं.

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तविकता है। विजिटर केवल जेल देखने नहीं जाते, बल्कि वे जेल के नियमों में बंध जाते हैं। उन्हें जेल की बैरकों में रहना पड़ता है कैदियों के लिए निर्धारित मानक भोजन करना होता है और जेल की सख्त दिनचर्या का पालन करना होता है। आवाजाही पर लगे प्रतिबंध उन्हें यह महसूस कराते हैं कि स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य क्या है।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तविकता है. विजिटर केवल जेल देखने नहीं जाते, बल्कि वे जेल के नियमों में बंध जाते हैं. उन्हें जेल की बैरकों में रहना पड़ता है कैदियों के लिए निर्धारित मानक भोजन करना होता है और जेल की सख्त दिनचर्या का पालन करना होता है. आवाजाही पर लगे प्रतिबंध उन्हें यह महसूस कराते हैं कि स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य क्या है.



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किशनगंज में आज शाम होगा ब्लैकआउट: 3 स्थानों पर मॉक ड्रिल की तैयारी पूरी, लोगों को जागरूक करना उद्देश्य – Kishanganj (Bihar) News




किशनगंज में आज, 14 मई को ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग करने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। शहर के तीन प्रमुख स्थानों गांधी चौक, बस स्टैंड और डीएम कार्यालय परिसर में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इन स्थानों पर सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया जाएगा और आपदा या आपात स्थिति में बचाव का अभ्यास कराया जाएगा। सायरन की आवाज लगभग तीन से पांच किलोमीटर तक सुनाई देगी, जिससे आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी मिल सकेगी। बिजली आपूर्ति पूरी तरह रहेगी बंद जिला प्रशासन के निर्देशानुसार, शाम के समय जिले में ब्लैकआउट भी किया जाएगा। इस दौरान कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद रहेगी और पूरे जिले में अंधेरा रहेगा। ब्लैकआउट का उद्देश्य किसी आपात स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों का परीक्षण करना है, ताकि आपदा के समय विभिन्न विभागों के समन्वय का आकलन किया जा सके। मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें अलर्ट मोड में रहेंगी। अधिकारियों और कर्मियों को किसी भी संभावित स्थिति से तुरंत निपटने के लिए विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अभ्यास के दौरान आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। लोगों को जागरूक करना उद्देश्य जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट के दौरान घबराएं नहीं। यह केवल एक सुरक्षा अभ्यास है, जिसका उद्देश्य लोगों को जागरूक और तैयार करना है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी साझा नहीं करने का भी आग्रह किया है। अधिकारियों ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान लोगों को यह भी समझाया जाएगा कि आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर कैसे पहुंचना है, बिजली बंद होने पर किन सावधानियों का पालन करना चाहिए तथा प्रशासनिक निर्देशों का पालन क्यों जरूरी है। जिला प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार के अभ्यास से भविष्य में किसी भी आपदा या संकट की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।



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‘मैं अली हूं..’ पहचान छिपाकर 12 साल तक शोषण: रसूखदार कॉलोनाइजर कोर्ट में बोला- पत्नी नहीं ‘रखैल’ है; जज ने लगाया 1 लाख का जुर्माना – Madhya Pradesh News




माता-पिता के रिश्ते की वैधता पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन बच्चों को सड़क पर लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। इंदौर फैमिली कोर्ट ने उस रसूखदार कॉलोनाइजर के खिलाफ यह टिप्पणी की, जिसने एक दशक से ज्यादा समय तक झूठ की बुनियाद पर रिश्ता चलाया और जिम्मेदारी आने पर मुकर गया। न्यायाधीश एके गोयल ने आरोपी पिता को दो बच्चों के भरण-पोषण के लिए 1 लाख रुपए प्रतिमाह देने का आदेश दिया। कोर्ट ने 25 लाख रुपए का पिछला बकाया चुकाने का भी आदेश दिया। कॉलोनाइजर ने पहचान छिपाकर मुस्लिम महिला से शादी की थी। बरसों तक लिव-इन में रहने के बाद उसने पत्नी को छोड़ दिया। इसके बाद महिला ने बच्चों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और कोर्ट से इंसाफ मिला। फरेब की बुनियाद: ‘अतुल’ से ‘अली’ बनने का सफर इस कहानी की शुरुआत 2011 में उज्जैन की एक किराना दुकान से हुई थी। वहां 33 वर्षीय समरीन मंसूरी (परिवर्तित नाम) की मुलाकात अतुल पंवार से हुई। उज्जैन के सेठी नगर निवासी अतुल ने अपनी असल पहचान छिपाकर खुद को ‘अली’ और मुस्लिम बताया। मोबाइल नंबरों के आदान-प्रदान से शुरू हुआ सिलसिला जल्द प्रेम संबंध में बदल गया। अतुल ने समरीन को शादी का झांसा दिया। जब परिवार ने कहीं और रिश्ता ढूंढना शुरू किया तो उसने निकाह का भरोसा देकर समरीन को रोक लिया। इंदौर में ‘लिव-इन’ और तीन अबॉर्शन का दंश अतुल समरीन को लेकर इंदौर आ गया, जहां वे विजय नगर के एक फ्लैट में पति-पत्नी की तरह रहने लगे। करीब 12 साल के रिश्ते में समरीन ने दो बच्चों को जन्म दिया- एक 6 साल की बेटी और एक 3 साल का बेटा। इस दौरान उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी। एडवोकेट केपी माहेश्वरी के मुताबिक, अतुल ने समरीन का तीन बार अबॉर्शन कराया। मेडिकल दस्तावेजों पर उसने खुद को ‘पति’ बताते हुए हस्ताक्षर किए थे। बार-बार गर्भपात से समरीन का स्वास्थ्य बिगड़ गया। बाद में अतुल उसे और बच्चों को छोड़कर चला गया। कोर्ट में ‘ओछी’ दलील: पत्नी नहीं ‘रखैल’ है मामला कोर्ट पहुंचने पर अतुल पंवार के रसूख और असलियत की परतें खुलीं। वह ‘अतुल इंफ्रास्ट्रक्चर’ का मालिक है और ‘स्वस्तिक विहार’ जैसी बड़ी कॉलोनियां विकसित करता है। खुद को बचाने के लिए दिए गए उसके तर्कों को न्यायाधीश ने ‘अशोभनीय’ करार दिया। अतुल ने दलील दी कि वह हिंदू है और उसकी पहली पत्नी व बच्चे जीवित हैं, इसलिए हिंदू कानून के तहत समरीन को पत्नी का दर्जा नहीं मिल सकता। उसने समरीन को ‘रखैल’ तक कहा। इस दलील पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की। हाई कोर्ट में ‘कबूलनामा’, फैमिली कोर्ट में ‘धोखा’ इस मामले में अतुल का दोहरा चेहरा तब सामने आया, जब पता चला कि समरीन ने विजय नगर थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म (धारा 376) की एफआईआर दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए अतुल ने हाई कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई और स्वीकार किया था कि समरीन उसकी पत्नी है और दोनों बच्चे उसके हैं। इसी स्वीकारोक्ति के आधार पर उसे जमानत मिली थी। लेकिन फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की बात आते ही वह अपने बयान से पलट गया। करोड़ों का साम्राज्य और विदेश में पढ़ाई कोर्ट ने अतुल की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया तो उसकी विलासिता की पोल खुल गई। पीड़ित महिलाओं के लिए ‘मील का पत्थर’ एडवोकेट केपी माहेश्वरी के मुताबिक, यह फैसला उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण रसूखदारों के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पातीं। करीब पांच साल पहले बेसहारा छोड़ी गई समरीन ने हार नहीं मानी और आखिरकार बच्चों का हक हासिल किया।



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दिशा पाटनी के रूमर्ड BF तलविंदर ने पाकिस्तानी सिंगर को कहा भाई, भड़के लोग


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दिशा पाटनी के रूमर्ड बॉयफ्रेंड और पॉपुलर पंजाबी पॉपस्टार तलविंदर ने टोरंटो में हुए पाक सिंगर हसन रहीम के कॉन्सर्ट के क्लिप्स शेयर किए थे. इन क्लिप्स में वो दोनों एक दूसरे को भाई कहकर गले लगाते दिख रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को दोनों की ये दोस्ती और भाईचारा कुछ खास रास नहीं आय़ा है. अपना गुस्सा और नाराजगी जाहिर करते हुए नेटिजेंस ने तलविंदर को गद्दार तक कह डाला है. लोगों ने पंजाबी सिंगर को याद दिलाया कि ये वही हसन रहीम हैं जिन्होंने पिछले साल पहलगाम हमले में पाकिस्तान के शामिल होने का सुबूत मांगते हुए ऑपरेशन सिंदूर की खुलेआम आलोचना की थी.

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तलविंदर पर भड़के भारतीय फैंस

नई दिल्ली. दिशा पाटनी के रूमर्ड बॉयफ्रेंड तलविंदर पिछले साल सुर्खियों में थे. नुपूर सेनन की शादी में वो एक्ट्रेस संग पहली बार बिना मास्क के दिखे थे. इन दिनों 28 साल के पंजाबी सिंगर एक बार फिर खबरों में हैं, लेकिन इस बार वो अपने किसी गाने या गर्लफ्रेंड की वजह से नहीं बल्कि किसी और वजह से सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं. हाल ही में तलविंदर ने कनाडा के टोरंटो में पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के कॉन्सर्ट में एंट्री की थी. जैसे ही इस कॉन्सर्ट के वीडियोज सोशल मीडिया पर सामने आए लोग तलविंदर की आलोचना करने लगे.

टोरंटो में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान तलविंदर ने पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के साथ स्टेज शेयर किया और उन्हें अपना भाई कहा. वायरल वीडियो में हसन और तलविंदर एक-दूसरे की तारीफ करते हुए उन्हें भाई कहकर एक दूसरे को गले लगा रहे हैं. तलविंदर ने कहा कि दोनों में बहुत प्यार है लेकिन वो पहली बार मिल रहे हैं.

हसन रहीम ने की थी भारत विरोधी टिप्पणी

अब जैसे ही सोशल मीडिया पर दिशा पाटनी के बॉयफ्रेंड का ये वीडियो सामने आया लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया. कुछ लोगों ने पंजाबी सिंगर को याद दिलाया कि हसन रहीम वही पाकिस्तानी सिंगर हैं जिन्होंने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर की आलोचना की थी. उन्होंने अपने पोस्ट में पहलगाम हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सुबूत मांगते हुए कहा था कि भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर अमानवीय है.



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मम्मी के 5 मसालों का कमाल! अंकित की चाय ने रांची वालों को बना दिया दीवाना


रांची: अभी गर्मी का मौसम चल रहा है, लेकिन इस मौसम में भी चाय की दीवानगी रांची में लोगों के सर चढ़कर बोल रही है, लेकिन हर जगह की चाय की नहीं, बल्कि एक खास स्टॉल द लोकल चाय पर आपको हमेशा भीड़ देखने को मिलेगी. क्योंकि यहां चाय का टेस्ट ऐसा है कि आप एक बार अगर पी लिए तो आप 15 किलोमीटर खुद गाड़ी ड्राइव करके इस चाय को पीने के लिए दुबारा आएंगे. आइये जानते हैं इस चाय की खासियत के बारे में.

आखिर क्या है इस चाय का सीक्रेट

रांची के अंकित इस चाय को अपने हाथों से बनाने का काम करते हैं. जो कि एमबीए किए हुए हैं और एमबीए की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर चाय बनाने का काम कर रहे हैं. अंकित बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही चाय बनाने का हमेशा से शौक था. घर में चाहे कुछ भी हो जाए मैं मम्मी को बोलता था, मम्मी हटो मैं चाय बनाऊंगा और ऐसा बनाता था कि सारे लोग इंप्रेस हो जाते थे. बड़े होकर इसी को उन्होंने अपना बिजनेस बना लिया.

रांची की मशहूर इस चाय में खास तरह के 5 तरह के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. अंकित ने बताया कि सबसे पहले तो मिक्स मसाला होता है. जो कि वह अपने घर से बनाकर लाते हैं. यह उनकी मम्मी द्वारा गया है. जिसमें कई सारे मसाले मिले होते हैं. इसके अलावा इलायची पाउडर अलग से होता है. थोड़ा सा दूध पाउडर, तेज पत्ता और बड़ी इलायची और दालचीनी का अलग मसाला होता है.

चाय बनाने का तरीका ही है अलग

उन्होंने बताया कि मसाले डालने का तरीका भी अलग होता है. जैसे पहले दूध खौलता है और फिर इसमें एक चम्मच दूध पाउडर डालते हैं, अच्छे से जब मिला लिया तो फिर आपको मिक्स मसाला, बड़ी इलायची, तेजपत्ता, सूखा हुआ अदरक का मसाला. यह सब डालकर एक बार फिर से दूध को खौला लेते हैं. इसके बाद इसमें चायपत्ती डालकर फिर 2 मिनट के लिए खौलाते हैं और फिर चीनी डालकर नीचे उतार लेते हैं.

इसके बाद जब वह कुल्हड़ में या कप में चाय देते हैं तो उसमें भी पहले इलायची पाउडर डाल देते हैं. जी हां! इलायची पाउडर ऊपर नहीं डाला जाता है. बल्कि, कप में जब आप चाय को छानते हैं तो कप में हीं थोड़ा सा डाल देना है और इसके बाद चाय को छान लेते हैं.  इसके बाद चाय को जरा टेस्ट कीजिए. लोग दौड़े ना चले आएं केवल सुगंध से तो कहिएगा.

200 कप चाय डेली लोग कर जाते हैं चट

अंकित बताते हैं कि 150- 200 कप तो यहां पर एकदम नॉर्मल है. अगर बारिश हो गई या मौसम बढ़िया हो गया तो यह 300 कप तक पहुंच जाती है. एक कप चाय की कीमत ₹20 है और वह इंडक्शन चूल्हे पर चाय को बनाते हैं. वह हमेशा इसी पर बनाया करते हैं. आप लकड़ी के चूल्हे में बनाएं या कोयला या इंडक्शन में. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. अगर आपका मसाला, आपके दूध की गुणवत्ता क्या है, अगर प्रोडक्ट की क्वालिटी सही है तो निश्चित तौर पर स्वाद जरूर आएगा.

ऐसे में अगर आपको भी इस चाय का लुफ्त लेना है तो आ जाइए रांची के कांके रोड स्थित जावेद हबीब ब्यूटी सैलून पर. इस सैलून के नीचे ही आपको स्टॉल ‘द लोकल चाय’ दिख जाएगा. आप गूगल में भी द लोकल चाय सर्च करेंगे, तो आप लोकेशन पर आ सकते हैं.



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ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे: ₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे




अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दुनिया की नजर अमेरिका-चीन रिश्तों, व्यापार और टेक्नोलॉजी को लेकर चल रही तनातनी पर टिकी हुई है। इस दौरे की सबसे बड़ी चर्चा बोइंग विमान डील को लेकर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन अमेरिकी कंपनी बोइंग से करीब 9 लाख करोड रुपए के विमानों की खरीद का बड़ा समझौता कर सकता है। अगर यह डील होती है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में शामिल हो सकती है। बैठक में व्यापार, टैरिफ, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ताइवान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होगी। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा है, इसलिए इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रम्प के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें टेक और फाइनेंस सेक्टर की बड़ी कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। शी जिनपिंग इन उद्योगपतियों के साथ अलग से बैठक करेंगे। इस दौरान निवेश, बाजार पहुंच और टेक्नोलॉजी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। ट्रम्प 8 साल बाद चीन पहुंचे ट्रम्प बुधवार को 8 साल बाद चीन दौरे पर पहुंचे। उनका विमान बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया, जहां चीनी उपराष्ट्रपति हान जेंग ने उन्हें रिसीव किया। हान जेंग को शी जिनपिंग का भरोसेमंद माना जाता है और वे पिछले साल ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे। ट्रम्प के एयर फोर्स वन से उतरते समय करीब 300 बच्चे नीले और सफेद रंग की यूनिफॉर्म में एयरपोर्ट पर मौजूद थे। ये अमेरिका और चीन के झंडे लहरा रहे थे। ट्रम्प के साथ उनके बेटे एरिक ट्रम्प और बहू लारा ट्रम्प भी मौजूद थे। ट्रम्प के साथ इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक और बोइंग CEO समेत 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी भी गए हैं। हालांकि चिप कंपनी एनवीडिया के CEO जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं होंगे ट्रम्प के चीन पहुंचने की 4 तस्वीरें…. चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ट्रम्प को स्टेट डिनर देंगे व्हाइट हाउस के मुताबिक चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर आयोजित करेंगे। चीन में इस तरह के स्टेट डिनर को बड़े कूटनीतिक सम्मान के तौर पर देखा जाता है। ऐसे कार्यक्रम आमतौर पर बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित किए जाते हैं, जहां चीन का शीर्ष नेतृत्व विदेशी मेहमानों का स्वागत करता है। इसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और खास मेहमान शामिल होते हैं। डिप्लोमैटिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन किसी विदेशी नेता को जितना बड़ा औपचारिक स्वागत देता है, उसे रिश्तों की अहमियत का संकेत माना जाता है। स्टेट डिनर के जरिए चीन यह संदेश देने की कोशिश करता है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को रणनीतिक स्तर पर महत्व दे रहा है। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 के चीन दौरे के दौरान भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनके सम्मान में विशेष स्वागत कार्यक्रम रखा था। ट्रम्प-जिनपिंग के बीच 4 अहम मुद्दों पर बातचीत संभव 1. ट्रेड टैरिफ विवाद अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर अब भी बड़ा मुद्दा है। ट्रम्प पहले चीनी सामान पर भारी टैरिफ की चेतावनी दे चुके हैं। दोनों देश अब व्यापारिक तनाव कम करने पर बातचीत कर सकते हैं। 2. ताइवान और हथियार बिक्री ताइवान को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा है कि वह शी जिनपिंग से 11 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियार पैकेज पर बात करेंगे। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियार बिक्री का लगातार विरोध करता रहा है। 3. रेयर अर्थ मिनरल्स और AI रेयर अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रिक व्हीकल, चिप्स और डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम हैं। चीन दुनिया का सबसे बड़ा सप्लायर है, जबकि अमेरिका उसकी निर्भरता कम करना चाहता है। AI और सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को लेकर भी दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। 4. सोयाबीन और कृषि व्यापार चीन अमेरिकी किसानों के लिए बड़ा बाजार है। ट्रेड वॉर के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाई थी। अब ट्रम्प प्रशासन कृषि निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। ईरानी तेल खरीदने पर चीन का अमेरिका से विवाद ईरान से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ है। ट्रम्प प्रशासन का आरोप है कि चीन बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदकर तेहरान को आर्थिक सहारा दे रहा है, जबकि चीन इसे अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा मामला बता रहा है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद चीन लंबे समय से ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदता रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है। ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद उसे अपना तेल डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है। चीन की कई निजी रिफाइनरियां इसी रियायती तेल को खरीदती हैं। इससे चीन को सस्ती ऊर्जा मिलती है, जबकि ईरान को विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा रास्ता मिलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के वर्षों में ईरान के कुल तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन जाता रहा है। कई बार यह कारोबार सीधे ईरान के नाम से नहीं, बल्कि दूसरे देशों के जरिए या ब्लेंडेड ऑयल के रूप में किया जाता है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके। चीन पर ईरानी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा अमेरिका अमेरिका चाहता है कि चीन ईरानी तेल की खरीद कम करे, ताकि तेहरान की कमाई घटे और उस पर दबाव बढ़े। अगर चीन खरीद कम करता है तो ईरान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल निर्यात उसकी सबसे बड़ी आय का स्रोत है। हालांकि चीन पहले भी साफ कर चुका है कि वह अपने ऊर्जा हितों के आधार पर फैसले लेता है और बाहरी दबाव में नीति नहीं बदलता। बीजिंग का कहना है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता है। इसी वजह से ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में यह मुद्दा अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका व्यापार और टैरिफ विवाद के साथ ईरानी तेल को लेकर भी चीन से सहयोग मांग सकता है। अमेरिकी किसानों को ट्रेड डील की उम्मीद ट्रम्प की चीन यात्रा पर अमेरिकी किसानों की नजर है। ट्रेड वॉर, महंगाई और घटते सोयाबीन निर्यात से परेशान किसान चाहते हैं कि चीन के साथ मजबूत ट्रेड डील हो। NPR की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद घटाकर ब्राजील से खरीद बढ़ा दी थी। इससे कई अमेरिकी किसानों को फसल स्टोर करनी पड़ी। हालांकि पिछले साल के आखिर में चीन ने फिर अमेरिकी सोयाबीन खरीद शुरू की। व्हाइट हाउस का दावा है कि इस साल चीन 2.5 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीद सकता है, लेकिन किसान लिखित समझौते की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में चीन ने अमेरिका से 3 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदी थी, जबकि ट्रम्प के पहले कार्यकाल से पहले यह आंकड़ा 3.6 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गया था।



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30 अप्रैल से परीक्षा के दिन तक चलती रही सौदेबाजी: सीकर कोचिंग हब का काला सच…पेपर आने से पहले ही बच्चों ने 10-10 लाख में सौदा किया – Jaipur News




नीट पेपर लीक प्रकरण में सीकर कोचिंग हब का काला सच सामने आया है। यहां छात्र गिरोह की तरह पेपर आने से पहले ही उसे बेचने के लिए साथी छात्रों का ग्रुप बनाने में जुटे थे। इसी कोशिश में वे काउंसलर के पास पहुंचे और पेपर वायरल हो गया। इसमें जमवारामगढ़ निवासी परिवार का छात्र भी शामिल था। इससे भी सीबीआई पूछताछ कर रही है। सीबीआई पेपर वायरल वाली चेन के साथ मनी ट्रेल की भी पड़ताल करेगी। हालांकि सीबीआई ने पेपर वायरल के आरोप में किसी छात्र को गिरफ्तार नहीं किया है। सीकर में 3 मई की रात को थाने पहुंचे कोचिंग सेंटर के टीचर और पीजी संचालक के पास वायरल गेस पेपर था। इसमें मूल पेपर के 180 सवाल में से 125 सवाल हूबहू थे। पड़ताल में सबसे पहले जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी छात्र का नाम सामने आया। इसने पहले ही अपने साथियों को बोल दिया था कि पेपर आएगा। इसके साथ ही उसके साथी छात्रों ने पेपर बेचने के लिए ग्राहक तलाशना शुरू कर दिेए। शुरुआत में उन्होंने दस लाख रुपए में पेपर देने का वादा किया था। सोशल मीडिया ग्रुप में जुड़े हुए हैं सभी छात्र पेपर चाहने वाले छात्र सोशल मीडिया पर सम्पर्क में थे। उन्होंने पेपर खरीद की बात करने के बाद ग्रुप भी बना लिए थे। उनका भांडा उस समय फूटा जब पेपर पाने वाले छात्रों ने उसे किसी और ग्रुप में डाल दिया। जमवारामगढ़ निवासी छात्र के अलावा काउंसलर राकेश कुमार भी पेपर बेच रहा था। बताते हैं कि उसे भी छात्रों ने ही तलाशा था। रुपए जुटाने के लिए उससे मिले। उसके ग्रुप में बड़ी संख्या में छात्र जुड़े हुए हैं। दो या दो से अधिक वर्ष से तैयारी कर रहे छात्र ज्यादा यह भी बात सामने आई है कि पेपर खरीदने के लिए तैयार होने वालों में उन छात्रों की संख्या ज्यादा जो दो या इससे अधिक वर्ष से सीकर के कोचिंग सेंटर्स में पढ़ाई कर रहे हैं। सीबीआई उन छात्रों की पहचान में जुटी है, जिन्होंने पेपर के बदले रकम स्वीकार की है। छात्रों का सवाल… कुछ लोगों की गलती की सजा सभी 23 लाख अभ्यर्थियों को क्यों CBT, हाइब्रिड मॉडल से परीक्षा पर विचार… सूत्रों के मुताबिक एनटीए अब कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) और हाइब्रिड मॉडल पर चर्चा कर रही है, ताकि पेपर प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्ट के दौरान लीक की आशंका न रहे। {सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में भी ‘डिजिटल लॉकिंग सिस्टम’ की मांग की गई है। इसमें प्रश्नपत्र अंत तक एन्क्रिप्टेड फॉर्म में रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट से गुहार- NTA से भरोसा उठा, परीक्षा कोर्ट की निगरानी में हो एनटीए दफ्तर से जब्त किए दस्तावेज नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि एनटीए पर छात्रों का भरोसा खत्म हो चुका है, इसलिए दोबारा परीक्षा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। याचिका में एनटीए को भंग करने या पूरी तरह पुनर्गठित कर उसकी जगह तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम और स्वायत्त एजेंसी बनाने की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया कि टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर घूम रहे ‘गेस पेपर’ के 100 से ज्यादा सवाल असली पेपर से मैच हुए हैं। राजस्थान एसओजी ने बताया है कि वायरल पेपर में 125 से ज्यादा सवाल थे। केमिस्ट्री के 35 और बायोलॉजी के 90 सवाल थे। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाने की मांग की है, जिसमें साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी हों।



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