Sunday, May 24, 2026
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बंगाल की खाड़ी से भागती आ रही खुशखबरी, मौसम होगा कूल-कूल, IMD की गुड-न्यूज


IMD Weather Alert: मोटा-मोटा कहें तो गर्मी से पूरे देश का पसीना निकल रहा है. भीषण गर्मी ने दिन क्या रात में भी लोगों को चैन से रहने नहीं दी रही हैं. सूखे उत्तर-पश्चिमी हवाएं लोगों के त्वचा को जला रहे हैं. हालांकि, कुछ हद तक ये सही भी है. जिस हिसाब से सुपर एल नीनो की भविष्यवाणी की जा रही है, उसके हिसाब से ये सही है कि धरती जितनी तपेगी उतनी अधिक बारिश की संभावना है. हालांकि, समेत देश के कई राज्यों के लिए गुड न्यूज है. बिहार, झारखंड, पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बारिश की चेतावनी है. हालांकि, दिल्ली में आज भी राहत मिलने की संभावना नहीं है, मगर धीरे-धीरे पारा गिरने वाला है.
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला है, जिसके चलते अगले शुक्रवार तक दिल्ली का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गोता लगा सकता है.

सबसे बड़ी खुशखबरी मानसून को लेकर है. बंगाल की खाड़ी में बना साउथ-वेस्ट (दक्षिण-पश्चिम) मानसून अब तेजी अरब सागर तक पहुंच रहा है. यानी कि 26 मई तक मानसून के आगमन की ऑफिशियल घोषणा से हो सकता है. आईएमडी के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों के भीतर स्थितियां इसके और आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं. इसी के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी.

रविवार के लिए मौसम विभाग का अलर्ट

साइक्लोनिक सर्कुलेशन इफेक्ट

पहाड़ी इलाकों से लेकर दिल्ली, बिहार, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत में मौसम में बदलाव के पीछे ‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ (चक्रवाती हवाओं का घेरा) का सबसे बड़ा हाथ है. आईएमडी के नक्शे और रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय देश के ऊपर एक या दो नहीं, बल्कि पांच प्रमुख साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं. बिहार से लेकर बंगाल की खाड़ी और मध्य प्रदेश में चक्रवाती हवाएं एक्टिव हैं. पंजाब से लेकर राजस्थान व बिहार से लेकर ओडिशा तक बनी ट्रफ रेखाओं के कारण देश भर के मौसम में यह बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है.

दिल्ली का मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गर्मी का सितम जारी रहेगा. मौसम विभाग ने 29 मई तक लू चलने का अनुमान जताते हुए रविवार और उसके बाद के पांच दिनों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है. शनिवार को दिल्ली के सफदरजंग बेस स्टेशन पर अधिकतम तापमान 41.1 डिग्री और न्यूनतम 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो मौसमी औसत से 1.7 डिग्री अधिक है. हालांकि, शुक्रवार रात और शनिवार सुबह के बीच रिज (0.2 मिमी) और पूसा (2 मिमी) स्टेशनों पर हल्की बूंदाबांदी जरूर दर्ज की गई, लेकिन शहर के अन्य हिस्सों में बारिश नहीं होने और तापमान के लगातार बढ़ने से आने वाले दिनों में दिल्लीवासियों की परेशानी और बढ़ने वाली है.

मानसून का लेटेस्ट अपडेट.

पंजाब-हरियाणा और पश्चिमी यूपी का हाल

पंजाब, हरियाणा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 मई को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है. यहां 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी. वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश हीट वेव को देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है.

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में 25 मई तक मध्यम से तेज बारिश का अलर्ट है. इसके अलावा, 28 मई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिससे 29 मई को भारी ओलावृष्टि हो सकती है.

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत

बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो रही है. असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में 23 से 25 मई के बीच बहुत भारी बारिश और 40-50 किलोमीटर की रफ्तार से हवाएं चलने का कड़ा अनुमान है.

पूर्वी भारत में भी मौसम का मिजाज बदल रहा है. पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कई हिस्सों में आंधी-तूफान के साथ बारिश का अलर्ट है. हालांकि, शुरुआत में कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश के साथ उमस का सामना करना पड़ सकता है.

मौसम विभाग

मध्य और पश्चिम भारत

एक तरफ देश के कई हिस्सों में बारिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान और मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर अब भी जारी है. आईएमडी के अनुसार, पश्चिमी मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में अभी भी हीटवेव की स्थिति बनी रहेगी.

इसके अलावा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी लोगों को लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ेगा. मौसम विभाग ने इन राज्यों के लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सख्त सलाह दी है.

दक्षिण भारत में मानसून का असर

दक्षिण भारत में मानसून की आहट के साथ ही भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है. केरल, माहे और लक्षद्वीप में 23 से 26 मई तक गरज-चमक के साथ व्यापक और भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. यहां मौसम सुहावना बना रहेगा.

इसके साथ ही, तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान की आशंका है. उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और कुछ स्थानों पर भारी ओलावृष्टि भी हो सकती है.

दिल्ली में तापमान गिरने का क्या कारण है और कितनी राहत मिलेगी?
दिल्ली में शनिवार को हुई बूंदाबांदी और 28 मई से सक्रिय हो रहे एक नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में भारी गिरावट आएगी. अगले शुक्रवार तक दिल्ली का पारा 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.

दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने की क्या स्थिति है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी से मन्नार की खाड़ी और श्रीलंका के रास्ते तेजी से आगे बढ़ रहा है. अगले 3 से 4 दिनों में इसके अरब सागर में पूरी तरह प्रवेश करने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिससे मानसून की आधिकारिक घोषणा हो जाएगी.

‘साइक्लोनिक सर्कुलेशन’ देश के किन हिस्सों में सक्रिय है?
आईएमडी के अनुसार, वर्तमान में जम्मू, दक्षिणी बिहार, मध्य असम, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर कुल पांच प्रमुख साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हैं. इन्हीं के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश का माहौल बना हुआ है.

क्या अभी भी देश के कुछ राज्यों में हीटवेव (लू) का अलर्ट है?
जी हां, बारिश के अलर्ट के बावजूद राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड और बिहार के कुछ अलग-थलग हिस्सों में अभी भी हीटवेव (Heat Wave) की स्थिति बनी रहेगी. मौसम विभाग ने यहां लोगों को सतर्क रहने को कहा है.



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50 साल पुराना वो मास्टरपीस, कहलाई भारत की पहली ‘गे लव स्टोरी’, मशहूर नॉवेल पर बनी है फिल्म


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साल 1971 में रिलीज हुई ‘बदनाम बस्ती’ बड़ी अजीब फिल्म है, जो लेखक कमलेश्वर के उपन्यास पर आधारित है. दो पुरुषों और एक महिला के लव ट्रायंगल पर बनी यह फिल्म सीमित रिलीज के बाद भारत से पूरी तरह गायब हो गई थी. साल 2019 में इसका एक भूला-बिसरा 35एमएम प्रिंट अचानक बर्लिन के एक आर्काइव में मिला. डिजिटल रूप से रीस्टोर होने के बाद इस मास्टरपीस को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल (2020) और मुंबई फिल्म फेस्टिवल (MAMI) में दिखाया गया. इस ऐतिहासिक फिल्म ने नई पीढ़ी को भारतीय ‘LGBTQ+’ सिनेमा के शुरुआती दौर से रूबरू कराया.

नई दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि समलैंगिकता पर बनी भारत की पहली फिल्म आज से करीब 55 साल पहले ही बन चुकी थी? साल 1971 में आई इस फिल्म का नाम था ‘बदनाम बस्ती’. प्रेम कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म समाज के हाशिए पर जीने वाले दो पुरुषों और एक महिला के बीच के लव ट्रायंगल को दिखाती है, जिसे हिंदी के मशहूर लेखक कमलेश्वर के पहले उपन्यास ‘एक सड़क सत्तावन गलियां’ पर बनाया गया था.

हैरानी की बात यह है कि अपनी रिलीज के कुछ ही समय बाद यह फिल्म अचानक इतिहास के पन्नों से गायब हो गई. सिनेमाघरों में इसे बहुत कम स्क्रीन्स मिलीं और धीरे-धीरे लोग इसके बारे में भूल गए. यहां तक कि ‘एनसाइक्लोपीडिया ऑफ इंडियन सिनेमा’ में भी इसका कोई जिक्र नहीं मिलता और भारत के राष्ट्रीय फिल्म पुरालेख (NFAI) के पास भी इसका कोई प्रिंट सुरक्षित नहीं बचा था.

कहानी में ट्विस्ट साल 2019 में आया, जब बर्लिन के ‘आर्सेनल इंस्टीट्यूट फॉर फिल्म एंड वीडियो आर्ट’ में इस फिल्म का एक 35एमएम प्रिंट मिला. यह आज भी एक रहस्य है कि यह प्रिंट जर्मनी कैसे पहुंचा. अंदाजा लगाया जाता है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इसे किसी फिल्म फेस्टिवल के लिए वहां भेजा गया होगा और यह कभी वापस नहीं लौट पाया.

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जर्मनी में मिला यह प्रिंट काफी अच्छी स्थिति में था. इसके बाद, फिल्म को डिजिटल रूप से रीस्टोर (सुधारा) किया गया, जिससे इसकी अनोखी और बोल्ड कहानी को आज के दौर के दर्शकों के लिए सहेजने में मदद मिली. यह फिल्म छोटे शहरों में पुरुषों की चाहत, उनके रिश्तों और मर्दानगी के बंधनों को बहुत ही बेबाकी और संजीदगी के साथ पर्दे पर उतारती है.

रीस्टोरेशन के बाद इस फिल्म ने केवल सरकारी दफ्तरों की अलमारियों में जगह नहीं बनाई, बल्कि ग्लोबल लेवल पर अपनी एक नई पहचान बनाई. यह वो दौर था जब पूरी दुनिया में एशियाई क्वीर सिनेमा को लेकर लोगों की दिलचस्पी और समझ काफी बढ़ रही थी और ‘बदनाम बस्ती’ ने इस मंच पर दमदार वापसी की.

दशकों तक इस फिल्म को संभालकर रखने वाले शहर बर्लिन में ही इसका पहला बड़ा मॉडर्न री-डेब्यू हुआ. साल 2020 में आयोजित हुए 70वें बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ‘फोरम सेक्शन’ में इस फिल्म की स्क्रीनिंग की गई, जहां दुनिया भर के सिनेमा प्रेमियों ने भारत की इस ऐतिहासिक फिल्म को खूब सराहा.

इस मास्टरपीस को अमेरिका के ‘द ब्लॉक म्यूजियम ऑफ आर्ट’ (नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी) में ‘छिपे हुए इतिहास’ को दिखाने वाले एक खास प्रोग्राम के तहत प्रदर्शित किया गया. ग्लोबल लेवल पर तारीफें बटोरने के बाद फिल्म भारत में भी चर्चा का विषय बन गई और लोग इसके महत्व को समझने लगे.

आखिरकार, मुंबई फिल्म फेस्टिवल के जरिए इस फिल्म की भारत में वापसी हुई. इस स्क्रीनिंग ने भारत की नई पीढ़ी के फिल्ममेकर्स और एक्टिविस्ट्स को यह देखने का मौका दिया कि आज के मॉडर्न LGBTQ+ सिनेमा की नींव हमारे देश में कितनी पहले ही रखी जा चुकी थी.

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लू और गर्मी से तुरंत राहत देगा ये रिच केसर-पिस्ता बादाम शरबत, 5 मिनट में करें तैयार


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Pista Sharbat Recipe: गर्मी में शरीर को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए घर पर बना केसर-पिस्ता बादाम शरबत शानदार ड्रिंक है. पिस्ता, केसर, इलायची और दूध से तैयार यह शरबत स्वाद के साथ शरीर को एनर्जी और ठंडक भी देता है.

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दाम, केसर, पिस्ता ड्रिंक

Pista Sharbat Recipe: गर्मी का मौसम आते ही हर किसी का मन बार-बार कुछ ठंडा पीने का करता है. तेज धूप, पसीना और लू से शरीर जल्दी थक जाता है. ऐसे में लोग बाजार से मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल फ्लेवर वाले शरबत पी लेते हैं, लेकिन कई बार ये सेहत के लिए अच्छे नहीं होते, अगर आप घर पर ही कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वाद में भी शानदार हो और शरीर को ठंडक भी दे, तो केसर-पिस्ता बादाम शरबत एक बेहतरीन ऑप्शन है.

यह ड्रिंक देखने में जितनी रिच लगती है, पीने में उतनी ही रिफ्रेशिंग होती है. खास बात ये है कि इसे बनाने के लिए आपको किसी होटल या महंगे कैफे जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घर की रसोई में मौजूद कुछ खास चीजों से आप मिनटों में ऐसा शरबत तैयार कर सकते हैं जो पूरे परिवार को पसंद आएगा. गर्मी में मेहमानों को सर्व करने के लिए भी यह ड्रिंक शानदार मानी जाती है.

घर पर बनाएं रॉयल केसर-पिस्ता बादाम शरबत
इन दिनों बढ़ती गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है. सुबह से लेकर शाम तक तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर की सारी एनर्जी खींच लेती हैं. ऐसे मौसम में अगर ठंडा और हेल्दी ड्रिंक मिल जाए तो पूरा मूड फ्रेश हो जाता है. आज हम आपको ऐसा खास शरबत बनाने का तरीका बता रहे हैं जिसे लोग बाहर कैफे और रेस्टोरेंट में काफी महंगे दामों में पीते हैं. यह केसर-पिस्ता बादाम शरबत स्वाद के साथ-साथ शरीर को अंदर से ठंडा रखने में भी मदद करता है. इसमें इस्तेमाल होने वाला पिस्ता, केसर और इलायची इसे रिच फ्लेवर देता है. वहीं बादाम गोंद शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करता है.

शरबत बनाने के लिए जरूरी चीजें
-पिस्ता -आधा कप
-केसर -15 से 20 धागे
-दूध -1 लीटर
-हरी इलायची पाउडर -आधा छोटा चम्मच
-बादाम गोंद -2 चम्मच
-मिश्री पाउडर या शहद -स्वाद के हिसाब से
-बर्फ के टुकड़े -जरूरत के हिसाब से

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कैसे तैयार करें स्वादिष्ट शरबत
सबसे पहले पिस्ता को गुनगुने पानी में करीब 2 से 3 घंटे के लिए भिगो दें. जब पिस्ता नरम हो जाए तो उसका छिलका निकाल लें. अब इसे मिक्सी में थोड़ा ठंडा दूध डालकर बारीक पीस लें. कोशिश करें कि पेस्ट एकदम स्मूद बने ताकि शरबत का टेक्सचर रिच लगे. अब गैस पर भारी तले वाला बर्तन रखें और उसमें दूध उबालें. जब दूध में उबाल आ जाए तो आंच हल्की कर दें. इसके बाद पिस्ता का तैयार पेस्ट दूध में डालें और लगातार चलाते रहें. करीब 5 से 7 मिनट तक इसे पकाएं ताकि पिस्ता का फ्लेवर दूध में अच्छे से मिल जाए.

अब इसमें भीगा हुआ केसर डालें. केसर शरबत को शानदार रंग और खुशबू देता है. साथ ही इलायची पाउडर डालें जिससे टेस्ट और भी बढ़ जाता है, अगर आप मिश्री डालना चाहते हैं तो इसी समय मिला दें. शहद या स्टीविया इस्तेमाल कर रहे हैं तो शरबत ठंडा होने के बाद मिलाएं. जब दूध थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो गैस बंद कर दें. इसे पहले कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें और फिर करीब 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें.

सर्व करने का सही तरीका
जब शरबत पूरी तरह ठंडा हो जाए तो ग्लास में बर्फ के टुकड़े डालें, अगर आप एक्स्ट्रा ठंडक चाहते हैं तो भीगा हुआ बादाम गोंद भी डाल सकते हैं. इसके ऊपर चिल्ड केसर-पिस्ता शरबत डालें और चाहें तो ऊपर से थोड़ा कटा पिस्ता गार्निश कर दें. यह ड्रिंक ना सिर्फ स्वाद में शानदार लगता है बल्कि गर्मी में शरीर को राहत भी देता है. बच्चे हों या बड़े, हर किसी को इसका टेस्ट पसंद आता है.

क्यों खास है ये शरबत
बाजार में मिलने वाले कई ठंडे ड्रिंक्स में ज्यादा चीनी और आर्टिफिशियल फ्लेवर होते हैं. वहीं घर पर बना ये शरबत नेचुरल चीजों से तैयार होता है. पिस्ता और दूध शरीर को एनर्जी देते हैं जबकि केसर और इलायची स्वाद बढ़ाते हैं. गर्मी में अगर आप रोज एक ग्लास यह शरबत पीते हैं तो शरीर काफी फ्रेश महसूस करता है.

इसके अलावा अगर घर में कोई मेहमान आ जाए तो यह ड्रिंक आपकी मेहमाननवाजी में चार चांद लगा सकता है. इसका रॉयल स्वाद हर किसी को इंप्रेस कर देता है.

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Mohit Mohit

मीडिया इंडस्ट्री में 8+ साल का अनुभव, ABP, NDTV, दैनिक जागरण और इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़कर काम किया। लाइफस्टाइल, धर्म और संस्कृति की कहानियों को रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करने का खास हुनर।…और पढ़ें



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मैनपुरी में छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर शुरू: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ब्रज प्रांत ने किया आयोजन – Mainpuri News


मुकेश कुमार | मैनपुरी3 मिनट पहले

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छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर शुरू।

मैनपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), ब्रज प्रांत द्वारा आयोजित ‘छात्र व्यक्तित्व विकास शिविर 2026’ का शुभारंभ सरस्वती शिशु मंदिर, बंसी गोहरा में हुआ। इस शिविर का उद्देश्य छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मरक्षा और राष्ट्रभावना को सशक्त करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन CO ट्रैफिक दीपशिखा सिंह, प्रांत राष्ट्रीय कला मंच सह संयोजिका श्रद्धा राठौर, जिला कला मंच संयोजिका दिव्या राठौर और अशफा अख्तर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर अतिथियों ने छात्राओं को आत्मनिर्भर, संस्कारित और राष्ट्रहित में सक्रिय बनने के लिए प्रेरित किया।

CO ट्रैफिक दीपशिखा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज की छात्राएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने आत्मरक्षा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को युवतियों को सशक्त बनाने के महत्वपूर्ण माध्यम बताया। सिंह ने विद्यार्थी परिषद के इस प्रयास को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला बताया।

सुश्री श्रद्धा राठौर ने कहा कि व्यक्तित्व विकास केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, संस्कार, कला और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय है। उन्होंने ऐसे शिविरों को छात्राओं को नई दिशा प्रदान करने वाला बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित परिषद कार्यकर्ताओं और छात्राओं ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। शिविर के दौरान योग, सेल्फ डिफेंस, मेहंदी, नृत्य, करियर काउंसलिंग, साइबर सुरक्षा और महिला स्वास्थ्य जैसे विषयों पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर राखी राजपूत, गौतमी, दुर्गा शर्मा, अमृता, पूजा, साक्षी, एकता शाक्य सहित बड़ी संख्या में छात्राएं, परिषद कार्यकर्ता और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



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मधुबनी में 10 साल के बच्चे की डूबने से मौत: JCB से खोदे गए गड्ढे में नहाते समय गहरे पानी में गया – Madhubani News




मधुबनी जिले के बिस्फी थाना क्षेत्र के नूरचक गांव में शुक्रवार को एक 10 वर्षीय बच्चे की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान नूरचक निवासी मोहम्मद इरफान के पुत्र अमिताभ बच्चन के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, गांव के पास जेसीबी मशीन से मिट्टी कटाई के कारण एक बड़ा गड्ढा बन गया था। बारिश और आसपास का पानी जमा होने से यह गड्ढा तालाब का रूप ले चुका था। भीषण गर्मी के चलते गांव के कुछ बच्चे वहां नहाने गए थे। शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं नहाने के दौरान अमिताभ बच्चन अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसके साथ मौजूद अन्य बच्चों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। बच्चों के शोर मचाने पर ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना बिस्फी थाना पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और पोस्टमार्टम के लिए मधुबनी सदर अस्पताल भेज दिया।



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दतिया में कल 5 घंटे तक बंद रहेगी बिजली सप्लाई: दुरसड़ा, नवोदय, रिछारी समेत कई क्षेत्र प्रभावित होंगे – datia News




दतिया में कल (रविवार) शहर और ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती होगी। 33/11 केवी सबस्टेशन और 11 केवी लाइनों के मेंटेनेंस कार्य के कारण अलग-अलग फीडरों से जुड़े क्षेत्रों में 4 से 5 घंटे तक बिजली सप्लाई प्रभावित रहेगी। सबसे अधिक असर 33 केवी डगरई फीडर पर देखा जाएगा, जहां सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इससे डगरई और बीकर उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्र प्रभावित होंगे। शहर के कई हिस्सों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक बिजली कटौती होगी। इसमें सिटी नंबर-1, सिटी नंबर-2 और सिटी नंबर-3 फीडर से जुड़े चिरुला, गंधारी और दुरसड़ा क्षेत्र शामिल हैं। बसस्टैंड, रामसागर, हॉस्पिटल और रिछरा फाटक फीडर पर भी इसी अवधि में सप्लाई बंद रहेगी। इसके अतिरिक्त, सिदवारी, डगरई, नवोदय, कामद, रिछार, गुजर्रा, पिपरआ कला, खोदन, घुगसी, ओरौना, बरगयां, रिछारी और हतलई सहित कई ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में भी सुबह के समय बिजली नहीं रहेगी। आज होने वाला मेंटेनेंस सोमवार को होगा
कुछ ग्रामीण फीडरों पर मेंटेनेंस कार्य शनिवार (22 मई) को होना था, लेकिन किसी वजह से नहीं हो सका। अब यह काम सोमवार (24 मई) को किया जाएगा। सोमवार को बगेदरी, उदगवां, बरधुआ, नयाखेड़ा, लहरा, ठाकुरपुरा, भादोना और सिलोरी फीडर से जुड़े क्षेत्रों में बिजली सप्लाई प्रभावित होगी।



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मुखिया हो तो ऐसी! जेब से 15 लाख खर्च बना दी ‘फाइव स्टार’ लाइब्रेरी


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Jamui Dabill Panchayat Library: जमुई जिले की एक महिला मुखिया ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों के लिए मिसाल बन गया है. दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने अपने स्तर से 15 लाख रुपये खर्च कर गांव के बच्चों के लिए एक ऐसी हाईटेक एयर कंडीशन लाइब्रेरी बनवा दी है. जो 24 घंटे खुली रहती है. शहरों जैसी सुविधाओं से लैस इस अनूठी लाइब्रेरी में रोजाना आसपास के दर्जनों गांवों से 200 से अधिक छात्र-छात्राएं बैठकर अफसर बनने का सपना बुन रहे हैं. इस लाइब्रेरी की क्या हैं खासियतें, जानिए.

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जमुई: पंचायत में जब विकास की बात होती है तो आमतौर पर गली-नाली, सड़क इत्यादि के निर्माण की बात की जाती है. लेकिन जमुई का एक पंचायत ऐसा भी है जहां के मुखिया ने विकास के लिए कुछ ऐसा कर दिया है, जिसकी अब सराहना हो रही है. इस मुखिया ने करीब 15 लाख रुपए खर्च कर एक ऐसा हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है, जिसमें डेढ़ सौ से भी अधिक की संख्या में बच्चे प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. दाबिल पंचायत के अलावा आसपास के भी दूसरे पंचायत से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां प्रतिदिन पढ़ने आते हैं. अभी जहां बाहर 40 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक की गर्मी है, ऐसे में यह बच्चे बिना किसी फीस के अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ एयर कंडीशन कमरे में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं.

खर्च कर दिए 15 लाख से भी अधिक रुपए 
दरअसल, दाबिल पंचायत की मुखिया पुतुल देवी ने इस हाईटेक लाइब्रेरी का निर्माण कराया है. पुतुल देवी के पति योगेंद्र राम बताते हैं कि इसको बनवाने में करीब 15 लाख से भी अधिक रुपए की लागत आई है. जिसमें कुछ पैसे तो इन्होंने अलग-अलग योजना और मद के जरिए खर्च किए, जिसके जरिए इन्होंने जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके भवन का जीर्णोद्धार करवाया. फिर कुछ ग्रामीण सहयोग से इन्होंने भवन का रंग रोगन करवाया. बाद में करीब 4 लाख से भी अधिक रुपए इन्होंने अपनी जेब से लगाए, और इस पूरे लाइब्रेरी को एयर कंडीशन बनाया. इतना ही नहीं इस लाइब्रेरी की 24 घंटे हाईटेक कैमरे से निगरानी की जाती है. लड़कियों के लिए शौचालय सहित कई तरह की सुविधा यहां पर विकसित की गई है.

पढ़ने आते हैं 200 से भी अधिक बच्चे 
योगेंद्र राम बताते हैं कि उनके इस हाईटेक लाइब्रेरी में दाबिल के अलावा आसपास के कहरडीह, चांगोंडीह, बानपुर, कोल्हुआ, गरसंडा सहित दर्जन भर से भी अधिक गांव से 200 से भी अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं. यह लाइब्रेरी 24 घंटे खुला रहता है. इसमें उन्होंने दो मेंटर को भी रखा है, जो तैयारी करने वाले छात्रों को सही रास्ता बताते हैं.

पति के सपने को मुखिया पत्नी ने किया साकार
योगेंद्र राम बताते हैं कि मैं पहले बीएमपी में हवलदार की नौकरी कर रहा था. मैं अपनी नौकरी छोड़ दी तथा पंचायत का चुनाव लड़ा. जब मेरी पत्नी पंचायत चुनाव जीत कर आई, तब से ही मेरी ख्वाहिश थी कि मैं यहां के युवा, खास कर पढ़ने-लिखने वाले युवाओं के लिए कुछ कर सकूं. इसी कड़ी में इसका निर्माण कराया. मैं पिछले कई सालों से यह करना चाहता था. अब जाकर यह सफल हो सका है. पिछले 1 साल से भी अधिक समय से यह लाइब्रेरी अनवरत रूप से जारी है. यह आसपास के इलाके में नजीर बन गया है. छात्र बताते हैं कि यहां तैयारी करने से उन्हें काफी सुविधा भी होती है. यहां पर पढ़ने का एक बेहतर शैक्षणिक माहौल भी बना हुआ है. दाबिल पंचायत के मुखिया की इस पहल की अब हर जगह सराहना हो रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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FD मैच्योर होने से पहले चाहिए पैसा? जानिए बैंक कितना काट लेगा आपका मुनाफा


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एफडी को लोग सुरक्षित निवेश मानकर सालों के लिए पैसा जमा कर देते हैं, लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर यही एफडी समय से पहले तोड़ना भारी पड़ सकता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि बैंक सिर्फ छोटी-मोटी फीस नहीं काटता, बल्कि पूरे ब्याज का हिसाब ही बदल देता है. 5 साल की एफडी अगर 1 साल में तोड़ी जाए तो बैंक लंबी अवधि वाला फायदा खत्म कर देता है और कम अवधि की ब्याज दर लागू कर देता है. इसके बाद पेनल्टी अलग से काटी जाती है, जिससे आपका मुनाफा उम्मीद से काफी कम हो सकता है. इसलिए एफडी तोड़ने से पहले बैंक के नियम और नुकसान का गणित समझना बेहद जरूरी है.

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FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक कैसे काटता है पेनल्टी?

नई दिल्ली. अक्सर लोग यह सोचकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाते हैं कि मैच्योरिटी से पहले वे इस पैसे को हाथ नहीं लगाएंगे. लेकिन जिंदगी में कभी भी इमरजेंसी आ सकती है. अचानक मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत या किसी बड़े संकट के समय लोगों को अपनी एफडी बीच में ही तोड़नी पड़ जाती है. क्या आप जानते हैं कि अगर आप समय से पहले अपनी एफडी तोड़ते हैं, तो बैंक आप पर कितना जुर्माना लगाता है?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि एफडी बीच में तोड़ने पर बैंक सिर्फ एक तय रकम (जैसे 500 या 1000 रुपये) जुर्माने के तौर पर काटेगा और बाकी पैसा दे देगा. लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक आपके ब्याज का पूरा गणित ही बदल देते हैं.

जुर्माने की मार
मान लीजिए आपने 5 साल के लिए एफडी कराई थी, लेकिन आप इसे 1 साल में ही तोड़ रहे हैं. ऐसे में बैंक आपको 5 साल वाला भारी-भरकम ब्याज नहीं देगा. बैंक देखेगा कि 1 साल की एफडी पर क्या ब्याज दर थी, वह वही दर लागू करेगा. इसके बाद बैंक उस 1 साल की ब्याज दर में से भी 0.5% से 1% तक की कटौती (पेनल्टी) कर लेगा यानी आपको दोहरी मार पड़ती है. एक तो ब्याज दर कम हो जाती है और ऊपर से पेनल्टी भी कटती है. यही वजह है कि हाथ में आने वाला पैसा उम्मीद से काफी कम होता है.

हर बैंक के नियम हैं अलग
एफडी तोड़ने के नियम सभी बैंकों में एक जैसे नहीं होते हैं. कुछ बैंक सीनियर सिटीजन्स को पेनल्टी में छूट देते हैं. कुछ बैंक ‘नो-पेनल्टी एफडी’ भी ऑफर करते हैं, लेकिन इनमें सामान्य एफडी के मुकाबले शुरू से ही ब्याज थोड़ा कम मिलता है.

टैक्स का भी रखें ध्यान
एफडी भले ही आप समय से पहले तोड़ लें, लेकिन जितने दिन भी आपका पैसा बैंक में रहा और उस पर जो भी ब्याज बना, उस पर आपको टैक्स देना होगा. यह टैक्स आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कटेगा, जिससे आपका मुनाफा और कम हो जाएगा.

नुकसान से बचने के दो जादुई तरीके
अगर आप चाहते हैं कि इमरजेंसी में आपकी जेब पर डाका न पड़े, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ये दो तरीके अपनाने की सलाह देते हैं:

  • लैडरिंग तरीका: एक बड़ी एफडी (जैसे 5 लाख रुपये) कराने के बजाय 1-1 लाख रुपये की 5 अलग-अलग एफडी कराएं. इससे अगर जरूरत पड़ी, तो आप सिर्फ एक एफडी तोड़ेंगे और बाकी 4 सुरक्षित रहेंगी।
  • स्वीप-इन सुविधा: अपनी एफडी को सेविंग्स अकाउंट से लिंक कराएं. जरूरत पड़ने पर बैंक सिर्फ उतनी ही रकम एफडी से निकालेगा जितनी आपको चाहिए, बाकी रकम पर ब्याज मिलता रहेगा.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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SMS हॉस्पिटल में ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी: नाक, मुंह से ऑक्सीजन फेफड़े तक पहुंचाने वाली दांयी ब्रोंकस हो चुकी थी ब्लॉक; डॉक्टरों का दावा, प्रदेश में ये पहली सर्जरी – Jaipur News




जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी की गई। ये ऑपरेशन सवाई माधोपुर के रहने वाले 16 साल के मरीज के किया। इस सर्जरी से पहले मरीज को सांस लेने में काफी तकलीफ थी और उसकी लगातार हालात खराब हो रही थी। डॉक्टरों का दावा है कि राजस्थान में पहले ऐसी सर्जरी किसी भी हॉस्पिटल में नहीं हुई। कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. संजीव देवगढ़ा ने बताया- मरीज कालूराम पुत्र नवल सिंह का पिछले महीने 4 अप्रैल को रोड एक्सीडेंट हुआ। इस एक्सीडेंट में उसके दाहिने फेफड़े में गंभीर चोट आने के बाद से उसे सांस लेने में लगातार परेशानी होने लगी। कई बार उसको ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी रखा गया। परिजनों ने मरीज को कई हॉस्पिटलों में दिखाया, लेकिन बीमारी का सही कारण पता नहीं चल सका और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। 15 अप्रैल एसएमएस हॉस्पिटल की ओपीडी में सीटीवीएस विभाग में परामर्श लेने के बाद 16 अप्रैल को भर्ती कराया गया। भर्ती के बाद मरीज जांचें की, जिसमें सीटी स्कैन, छाती का एक्स-रे और वर्चुअल ब्रॉन्कोस्कोपी शामिल थी। जांचों में पाया कि मरीज के दाएं मुख्य ब्रोंकस की सांस की नली पूरी तरह बंद हो चुकी थी, जिसके कारण उसका दायां फेफड़ा सिकुड़ गया और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। 4 घंटे लगे सर्जरी में तमाम जांच करने और मरीज के फिट होने के बाद उसका 29 अप्रैल को ब्रॉन्कोप्लास्टी सर्जरी की गई। इस सर्जरी में करीब चार घंटे का समय लगा। ऑपरेशन के दौरान सिकुड़े और बंद हो चुके दाएं ब्रोंकस के हिस्से को काटकर अलग किया और शेष रही सही ब्रोंकस को वापस मुख्य श्वास नली से जोड़ा गया। इस ब्रोंकस को काटना सबसे कठिन था, क्योंकि ये आसपास के ट्यूश (ऊतकों) से चिपके हुए थे। सर्जरी के बाद मरीज का सिकुड़ा हुआ फेफड़ा वापस काम सामान्य तौर पर काम करने लगा। इससे मरीज की सांस लेने की दिक्कत दूर हो गई। इस सर्जरी में डॉ. संजीव देवगढ़ा के साथ प्रोफेसर डॉ. अनुला सिसोदिया, डॉ. के.के. मावर, डॉ. ध्रुव शर्मा, डॉ. उत्सव नंदवाना, डॉ. मोहित सिंघल, डॉ. स्वप्निल पंचाल और एनेस्थीसिया टीम डॉ. अंशुल गुप्ता, डॉ. दीपिका गहलोत का सहयोग रहा।



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‘दत्त साहब होते तो’ बुलडोजर एक्शन के बाद सुनील दत्त की याद में इमोशनल हुए लोग


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सुनील दत्त जब तक जिंदा रहे, तब तक गरीबों के मसीहा बनकर रहे. उन्होंने मुंबई के बांद्रा के गरीब नगर को मिटने नहीं दिया, मगर अब उस पर बुलडोजर चला, तो पुराने बाशिंदों को सुनील दत्त जैसी शख्सियत की कमी महसूस हुई. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में गरीबों के हक और झुग्गियों की सुरक्षा के लिए कई बार कानूनी और सामाजिक लड़ाइयां लड़ी थीं. ताजा कार्रवाई में बेघर हो रहे लोगों का मानना है कि यदि सुनील दत्त आज जीवित होते, तो वे ढाल बनकर खड़े रहते. हालांकि, उन पर अतिक्रमण को बढ़ावा देने के आरोप भी लगे, जिससे मिडिल क्लास उनसे नाराज हुए. आज जब बुलडोजर चल रहे हैं, तो लोग खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं.

नई दिल्ली: मुंबई के बांद्रा में मौजूद झुग्गी बस्ती पर बुलडोजर कार्रवाई ने सुनील दत्त की यादें ताजा कर दी हैं. बांद्रा ईस्ट के गरीब नगर में रेलवे की जमीन पर बनी झुग्गियों को ढहाया गया, तो लोगों को किसी मौजूदा नेता की नहीं, बल्कि सुनील दत्त की याद आई. दत्त साहब को गुजरे लगभग दो दशक हो चुके हैं, लेकिन बांद्रा के गरीबों के लिए वह आज भी एक मसीहा के रूप में जिंदा हैं. उनकी कमी आज उन लोगों को सबसे ज्यादा खल रही है, जो मुंबई में प्रशासन की कार्रवाई से बेघर हो रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@bombaybasanti)

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सुनील दत्त की इमेज केवल एक फिल्मी सितारे की नहीं थी, बल्कि वह एक ऐसे राजनेता थे जो मुंबई के सबसे कमजोर तबके के लिए ढाल बनकर खड़े रहते थे. हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘न्यूज19 इंग्लिश’ की रिपोर्ट के अनुसार, सुनील दत्त ने साल 1984 में राजनीति में कदम रखा था, जिसके बाद वे पांच बार सांसद बने. उन्होंने हमेशा झुग्गीवासियों के हक की लड़ाई लड़ी, भले ही इसके लिए उन्हें मिडिल क्लास और टैक्स भरने वाले नागरिकों की नाराजगी झेलनी पड़ी. उनके समय में झुग्गी सुरक्षा की कट-ऑफ डेट बढ़वाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है, जिससे लाखों लोगों को छत की कानूनी गारंटी मिली थी.
(फोटो साभार: Instagram@vintage.bollywood.x)

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सुनील दत्त की संवेदनशीलता की सबसे बड़ी मिसाल ‘नरगिस दत्त नगर’ है. उन्होंने साल 1981 में अपनी पत्नी के निधन के बाद बांद्रा रिक्लेमेशन के पास एक झुग्गी बस्ती का नाम उनके नाम पर रख दिया था. शुरू में यह एक छोटा सा इलाका था, लेकिन धीरे-धीरे यह मुंबई के सबसे बड़े और संवेदनशील वोट बैंक में तब्दील हो गया. हालांकि, यह इलाका विवादों से भी घिरा रहा. आलोचकों का कहना था कि भावनाओं के नाम पर यहां अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा मिला, जिससे शहर की सरकारी जमीनें कम होती गईं. (फोटो साभार: Instagram@vintage.bollywood.x)

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सुनील दत्त को राजनीति में अपनी इसी ‘गरीबों के मसीहा’ इमेज के कारण नुकसान भी उठाना पड़ा. साल 2004 के चुनाव में उनकी जीत का अंतर काफी घट गया था. बांद्रा और खार के जागरूक नागरिकों का मानना था कि दत्त साहब ने सिर्फ झुग्गीवासियों पर ध्यान दिया और टैक्स भरने वाले लोगों की समस्याओं जैसे फुटपाथ पर कब्जा और ट्रैफिक को नजरअंदाज किया. लोकल रेजिडेंट्स एसोसिएशनों का आरोप था कि उनके कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से अवैध निर्माण बढ़ रहे थे, जिसने बांद्रा की सूरत बिगाड़ दी थी.
(फोटो साभार: IMDb)

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इस हफ्ते बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास ‘गरीब नगर’ में वेस्टर्न रेलवे ने कोर्ट के आदेश पर बड़ी तोड़फोड़ शुरू की है. यह जमीन सांताक्रूज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर की नई रेलवे लाइन बिछाने के लिए बेहद जरूरी है. इस प्रोजेक्ट से मुंबई में 50 नई ट्रेनें शुरू होने की उम्मीद है. प्रशासन का कहना है कि वे केवल उन्हीं लोगों को हटा रहे हैं जो सर्वे में ‘अवैध’ पाए गए हैं, जबकि योग्य परिवारों को घर दिए जा रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@golden_bollywood_days)

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गरीब नगर के निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर भारी गुस्सा है. सालों से यहां रह रहे लोगों का कहना है कि जब चुनाव आते हैं, तो नेता वोट मांगने के लिए इन्हीं झुग्गियों के चक्कर काटते हैं. उस समय उनके आधार कार्ड और वोटर आईडी उन्हें ‘वैध’ नागरिक बना देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे अचानक ‘अवैध’ हो जाते हैं. निवासियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी सही सर्वे के निकाला जा रहा है और उनके पास अब सिर छिपाने की जगह नहीं बची है. (फोटो साभार: Instagram@golden_bollywood_days)

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सुनील दत्त के दौर में हालात अलग थे. लोग याद करते हैं कि कैसे उन्होंने सोनिया गांधी के जरिए तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख तक को बुलडोजर रुकवाने के लिए मना लिया था. जब कभी एयरपोर्ट के पास की झुग्गियों पर संकट आता, तो दत्त साहब खुद सड़कों पर मार्च निकालते थे. आज के निवासियों को मलाल है कि मौजूदा विधायक और नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर दिखते हैं, लेकिन जब सच में घर टूट रहे हैं, तो कोई भी उनकी ढाल बनने को तैयार नहीं है. (फोटो साभार: IMDb)

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सुनील दत्त की विरासत आज भी बांद्रा में दो हिस्सों में बंटी है. एक वर्ग उन्हें अतिक्रमण को बढ़ावा देने वाला मानता है, तो दूसरा उन्हें अपना एकमात्र संरक्षक. लेकिन हकीकत यही है कि उनके निधन के 20 साल बाद भी बांद्रा की सियासत और वहां के भूगोल में उनका असर साफ दिखता है. गरीब नगर में मलबे के बीच खड़ा हर शख्स आज बस यही कह रहा है कि अगर ‘दत्त साहब’ होते, तो शायद बुलडोजर की हिम्मत नहीं होती. (फोटो साभार: Instagram@kishore.pandey.5)

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