Thursday, May 21, 2026
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उज्जैन में दो अवैध क्लीनिक सील: पंजीयन समाप्त और अमान्य डिग्री पर चल रहा था उपचार; मिलीं गंभीर अनियमितताएं – Ujjain News




उज्जैन में स्वास्थ्य विभाग ने देर रात कार्रवाई करते हुए दो अवैध क्लीनिकों को सील कर दिया। इनमें भेरूगढ़ रोड स्थित श्रीसिद्धि हेल्थ केयर सेंटर और आगर रोड, इंदिरा नगर स्थित निरामय क्लीनिक शामिल हैं। जांच के दौरान दोनों ही स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। श्रीसिद्धि हेल्थ केयर सेंटर में बच्चों सहित कई मरीज भर्ती पाए गए। क्लीनिक में 8 से 10 बिस्तरों पर मरीजों का इलाज चल रहा था और उन्हें ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। जांच टीम को मौके पर कोई बाल रोग विशेषज्ञ या महिला नर्सिंग स्टाफ नहीं मिला, जबकि महिला मरीज भी भर्ती थीं। मुख्य डॉक्टर भी अनुपस्थित थे, और तीन से चार युवक मरीजों की देखभाल करते तथा ड्रिप लगाते हुए पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि क्लीनिक संचालक डॉ. राम राठौर का पंजीयन 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था, फिर भी एलोपैथी उपचार जारी था। मौके से एलोपैथी दवाइयां और उपचार सामग्री जब्त की गई। दूसरी ओर, आगर रोड, इंदिरा नगर स्थित निरामय क्लीनिक की जांच में पाया गया कि इसके संचालक डॉ. पलाश जैन के पास इलेक्ट्रो होम्योपैथिक सिस्टम ऑफ मेडिसिन की डिग्री थी, जिसे मान्यता प्राप्त नहीं है। क्लीनिक के बोर्ड पर घुटनों का दर्द, साइटिका, बदन दर्द, कमर दर्द, नसों में खिंचाव, झुनझुनी, पाइल्स, फिशर, फंगल इन्फेक्शन और बालों का झड़ना जैसे सामान्य रोगों के उपचार का दावा किया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इसे नियम विरुद्ध मानते हुए क्लीनिक को सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिले में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों और बिना अनुमति उपचार करने वालों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।



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शराब से लदे मोटर साइकिल के साथ तस्कर गिरफ्तार: मधुबनी में वाहन चेकिंग के दौरान हुई कार्रवाई – Madhubani News




मधुबनी में गुरुवार शाम चभच्चा चौक पर वाहन जांच के दौरान शराब से लदी एक मोटर साइकिल के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शाम लगभग 7:30 बजे से 8:00 बजे के बीच चभच्चा चौक पर सघन वाहन जांच अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध मोटर साइकिल को रोका गया। तलाशी लेने पर मोटर साइकिल से भारी मात्रा में देसी शराब बरामद हुई, जिसके बाद चालक को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने शराब से लदी मोटर साइकिल भी जब्त कर ली है। इस अचानक हुई कार्रवाई से चभच्चा चौक पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई वाहन चालक जांच की सख्ती को देखते हुए रास्ता बदलते दिखे। स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की और कहा कि ऐसे अभियान अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने में सहायक होंगे। ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार ने गुरुवार रात 8:30 बजे बताया कि गिरफ्तार तस्कर को आगे की कार्रवाई के लिए नगर थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। नगर थाना पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। डीएसपी ने कहा कि पूछताछ के आधार पर शराब तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।



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कैसे केरल में फेल हुआ राहुल गांधी का प्लान और ‘किंगमेकर’ बनकर उभरीं प्रियंका?


दस दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केरलम की जनता को अपना खेवनहार मिल गया है. कांग्रेस नेतृत्व ने अंदरूनी तौर पर हुई भारी मशक्कत के पश्चात वी.डी. सतीशन को राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुना है. सतीशन का मुख्यमंत्री के रूप में चयन केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पार्टी के लिए एक अहम सियासी सबक है. सबक यह कि मुख्यमंत्री जैसे उच्च पद के लिए किसी व्यक्ति का चयन करते वक्त क्या देखा जाना चाहिए. हो सकता है किसी शख्स पर पार्टी नेतृत्व मेहरबान हो या संगठन के भीतर का गणित किसी के पक्ष में हो, लेकिन अंतत: मोहर उसी पर लगनी चाहिए जो जमीनी तौर पर लगातार सक्रिय हो और जिसकी जनता के बीच विश्वसनीयता व कार्यकर्ताओं के मध्य स्वीकार्यता हो. सतीशन के मामले में यही हुआ.

पिछले पांच साल के दौरान उन्होंने जमीन पर जो भारी मेहनत की थी, उन्हें उसका ईनाम मिला है. हाईकमान को उन लोगों की राय के आगे झुकना पड़ा, जो केरलम की सियासी नब्ज को समझते हैं. इसलिए यह केवल सतीशन की जीत नहीं है, के.सी. वेणुगोपाल की हार भी है.

वेणुगोपाल कोई साधारण दावेदार नहीं थे. वे एआईसीसी में संगठन महासचिव हैं, जो स्वाभाविक तौर पर सबसे ताकतवर पद समझा जाता है. फिर उन्हें राहुल गांधी की पसंद भी माना जा रहा था. खबरों की मानें तो कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों का एक बड़ा खेमा उनके समर्थन में था. 63 में से 47 विधायक उनके साथ थे. इसके बावजूद वे अंतिम मंजिल तक नहीं पहुंच सके.

माना जाता है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनवाने में दिग्विजय सिंह ने तो राजस्थान में अशोक गहलोत को सत्ता की चौखट पर पहुंचाने में अहमद पटेल ने अहम भूमिकाएं निभाईं. छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल कथित ढाई-ढाई साल के सत्ता-साझेदारी समझौते के आगे झुकने को तैयार नहीं हुए. कर्नाटक में सिद्धारमैया भी नेतृत्व परिवर्तन के दबावों का लगातार सामना करते हुए टिके हुए हैं. अतीत के इन अनुभवों की पृष्ठभूमि में केरलम का मामला इन सबसे अलग दिखाई देता है. इन उक्त राज्यों में राहुल गांधी अपनी मनवाने में सफल रहे थे, जबकि केरलम में ऐसा नहीं कर सके. अपने पसंदीदा शख्स यानी वेणुगोपाल के सिर पर मुख्यमंत्री का ताज रखवाने में कामयाब नहीं हो पाए.

कैसे केरलम ने दिल्ली को पीछे हटने पर मजबूर किया?

यूडीएफ की जोरदार जीत (140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटें, जिसमें कांग्रेस को 63 सीटें मिलीं) के बाद पार्टी को तेजी से सरकार गठन की ओर बढ़ना चाहिए था. लेकिन इसके बजाय राज्य में नेतृत्व के सवाल पर सहमति बनाने में उसे 10 दिन लग गए. मौका राजनीतिक मजबूती दिखाने का था, लेकिन दुविधा सिर उठाती नजर आई. किंतु इस देरी ने दो प्रमुख दावेदारों के बीच के अंतर को और स्पष्ट कर दिया.

जहां वेणुगोपाल के पास संगठनात्मक ताकत, दिल्ली तक पहुंच और विधायकों का समर्थन था, वहीं सतीशन के पक्ष में था केवल जनादेश. वे बतौर नेता प्रतिपक्ष वाममोर्चा की पिनराई विजयन सरकार पर लगातार हमले करके एलडीएफ विरोधी नैरेटिव को धार देते रहे. इसलिए सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच ही नहीं, सहयोगी दलों की नजरों में भी यूडीएफ की जीत का मतलब सतीशन के राजनीतिक परिश्रम की जीत से था.

फैसले में देरी होने पर यूडीएफ के सबसे अहम सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता भी खुलकर उनके समर्थन में उतर आए. वायनाड और कोझिकोड में तो ऐसे पोस्टर भी चस्पां हो गए थे, जिनमें राहुल और प्रियंका गांधी को राज्य पर वेणुगोपाल को थोपने के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी दी गई थी.

प्रियंका की जीत, राहुल के लिए झटका!

केरलम के इस सियासी फैसले ने गांधी परिवार के भीतर भी शक्ति-संतुलन की नई इबारत लिख दी है. राहुल गांधी जहां वेणुगोपाल के साथ खड़े थे, वहीं सोनिया की सहानुभूति अनुभवी चेन्निथला के प्रति थी. जबकि प्रियंका केरल के जनादेश को समझ रही थीं और उसके अनुरूप सतीशत के पक्ष में डटी रहीं. इस त्रिकोणीय शक्ति संघर्ष में अंततः प्रियंका की राजनीतिक समझदारी भारी पड़ी.

इससे पहले वायनाड की जीत से प्रियंका को संसदीय पहचान मिली थी, लेकिन अब लगता है कि केरल में मुख्यमंत्री के चयन में उनकी भूमिका ने संगठन के भीतर उन्हें ‘किंगमेकर’ वाली जगह पर पहुंचा दिया है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब कांग्रेस में प्रियंका की ताकत राहुल गांधी से अधिक हो रही है? अगर पार्टी के नेतागण उन्हें राज्यों की नब्ज को समझने में राहुल से बेहतर मानने लगे तो भविष्य में बड़ी भूमिका के लिए उनके दावे और मजबूत होंगे.

क्या केरलम से आगे जाएगा सतीशन मॉडल?

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के पद पर सतीशन के चयन को अब केरलम के बाहर भी एक राजनीतिक मॉडल या उदाहरण के रूप में देखा जाएगा. ‘सतीशन मॉडल’ बताता है कि अगर किसी नेता के पीछे जनता की ताकत, सहयोगी दलों का भरोसा और मजबूत जमीनी विश्वसनीयता हो तो वह हाईकमान की नापसंद के बावजूद टिका रह सकता है. यह भी दिखाता है कि क्षेत्रीय नेता और गठबंधन सहयोगी लगातार दबाव बनाकर उन फैसलों को भी बदल सकते हैं, जो दिल्ली में पहले से ही तय माने जा रहे हों.

इससे यह संकेत भी मिलते हैं कि भविष्य में कांग्रेस राहुल गांधी की मौजूदा ‘कमान-एंड-कंट्रोल’ वाली शैली से बाहर निकल सकती है. लेकिन यह दुधारी तलवार भी साबित हो सकती है. इससे एक तरफ पार्टी में अंदरूनी लोकतंत्र तो मजबूत हो सकता है, लेकिन वहीं दूसरी ओर अराजकता भी बढ़ सकती है.

मगर इस पूरे प्रसंग का लब्ब-ओ-लुबाब यही निकलता है कि राजनीति में कृत्रिम तरीके से जुटाए गए आंकड़े और समर्थन भले ही पार्टी नेतृत्व को प्रभावित कर दें, लेकिन अंततः इतिहास वही शख्स लिखता है, जिसे वास्तव में जनता का आशीर्वाद मिलता है. सबसे बड़ा संदेश है – जनता के बीच जाइए. जनादेश हमेशा उसी नेता के पीछे चलता है, जो जनता का होकर रहता है.



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खिलाड़ी-अनाड़ी की जोड़ी के बेमिसाल 30 साल! ‘ये दिल्लगी’ से शुरू हुआ सफर पहुंचा ‘हैवान’ तक


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Saif Ali Khan and Akshay Kumar movies: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी पिछले तीन दशकों से बॉलीवुड की सबसे सफल और लोकप्रिय जोड़ियों में से एक रही है. इन दोनों ने मिलकर एक्शन, रोमांस और कॉमेडी जॉनर की सात फिल्मों में साथ काम किया है. इनके सफर की शुरुआत 1994 में ‘ये दिल्लगी’ और सुपरहिट ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ से हुई थी. इसके बाद दोनों ने ‘तू चोर मैं सिपाही’, ‘कीमत’, ‘आरजू’ और 2008 की ‘टशन’ में अपनी बेहतरीन ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दिखाई. जल्द ही यह जोड़ी मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ के हिंदी रीमेक ‘हैवान’ में एक बार फिर साथ नजर आएंगे. इसमें मोहनलाल का स्पेशनल कैमियो भी है.

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दोनों सितारों में साथ में कई फिल्मों में काम किया है. (फोटो साभार: IMDb)

नई दिल्ली: बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी पिछले तीन दशकों से दर्शकों को एंटरटेनमेंट करती आ रही है. इन दोनों ने मिलकर अब तक सात फिल्मों में साथ काम किया है, जिसमें एक्शन, रोमांस और कमाल की कॉमेडी का जबरदस्त तड़का देखने को मिला है. इस सुपरहिट जोड़ी की शुरुआत साल 1994 में आई रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘ये दिल्लगी’ से हुई थी, जिसमें काजोल भी अहम भूमिका में थीं. इसी साल दोनों की एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ आई, जिसने बड़े पर्दे पर एक पुलिसवाले और एक एक्टर की अनोखी ‘बडी-कॉप’ केमिस्ट्री को हमेशा के लिए अमर कर दिया. साल 1996 में आई ‘तू चोर मैं सिपाही’ में सैफ ने चोर और अक्षय ने पुलिसवाले का रोल निभाकर फैंस को खूब गुदगुदाया था. जबकि 1998 में आई ‘कीमत’ में दोनों का एक्शन अवतार और 1999 की ‘आरजू’ में माधुरी दीक्षित के साथ उनका लव-ट्रायंगल दर्शकों को बेहद पसंद आया था.

लंबे समय तक स्क्रीन शेयर करने के बाद साल 2008 में यह जोड़ी यशराज फिल्म्स की स्टाइलिश एक्शन-कॉमेडी ‘टशन’ में दोबारा साथ नजर आई, जिसमें करीना कपूर और अनिल कपूर भी शामिल थे. हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन अक्षय और सैफ की ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग एक बार फिर महफिल लूटने को तैयार है. इस लंबे सफर को आगे बढ़ाते हुए यह जोड़ी फिल्म ‘हैवान’ (2026) के जरिए एक बार फिर दर्शकों के सामने आने को तैयार है. फिल्म इसी साल अक्टूबर में रिलीज हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट फिल्म सुपरहिट मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ की हिंदी एडाप्टेशन है, जिसमें साउथ के दिग्गज सुपरस्टार मोहनलाल ने भी एक बेहद खास और धमाकेदार कैमियो किया है. इतने सालों बाद दोनों को इस नए अवतार में एक-साथ देखना फैंस के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है.

दोस्ताना आज भी कायम
अक्षय कुमार और सैफ अली खान की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि दोनों की टाइमिंग और केमिस्ट्री पर्दे पर एकदम नेचुरल लगती है. जहां अक्षय कुमार अपनी जबरदस्त फुर्ती और बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते हैं, वहीं सैफ अपने नवाबों वाले चार्म और सटल कॉमेडी से फिल्म में चार चांद लगा देते हैं. 90 के दशक से शुरू हुआ इनका यह दोस्ताना आज के दौर में भी उतना ही नया और मजेदार लगता है, यही वजह है कि फैंस आज भी इन्हें स्क्रीन पर साथ देखने के लिए हमेशा बेताब रहते हैं. चाहे पुराना एक्शन हो या नया सस्पेंस ड्रामा, इन दोनों ‘खिलाड़ियों’ की जुगलबंदी बॉलीवुड के इतिहास में हमेशा यादगार रहेगी.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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12 साल तक एक्टिंग करने वाला गुजराती हत्यारा निकला: उम्रकैद की सजा में पैरोल तोड़कर भाग निकला था, अमिताभ-आमिर के साथ भी काम कर चुका


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अहमदाबाद18 मिनट पहले

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अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की हिरासत में त उर्फ नागिंदास परशोत्तमदास मोदी।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 12 साल से फरार चल रहे हत्या के दोषी एक एक्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि आरोपी पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार हो गया था और इस दौरान उसने फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय करियर बना लिया था। उसने कई हिंदी फिल्मों, वेब सीरीज और सीरियल्स में शॉर्ट रोल किया।

पुलिस के मुताबिक 53 वर्षीय हेमंत उर्फ नागिंदास परशोत्तमदास मोदी 2005 में अहमदाबाद के नरोदा इलाके में हुए हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 302, 324, 147, 148, 149, 120(B) और बीपी एक्ट की धारा 135(1) के तहत मामला दर्ज था।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर पीएम ढाखरा ने बताया कि आरोपी 2014 में पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन वापस जेल नहीं लौटा। इसके बाद वह लगातार 12 साल तक फरार रहा।

हिंदी फिल्म जयेशभाई जोरदार में मेंटल का रोल किया था।

हिंदी फिल्म जयेशभाई जोरदार में मेंटल का रोल किया था।

पंकज त्रिपाठी की बहुचर्चित शॉर्ट फिल्म ‘लाली’ के एक शॉट में हेमंत।

पंकज त्रिपाठी की बहुचर्चित शॉर्ट फिल्म ‘लाली’ के एक शॉट में हेमंत।

मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रहता था

क्राइम ब्रांच ने बुधवार को अहमदाबाद के घीकांटा मेट्रो स्टेशन के पास से आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस को उसके शहर में आने की सूचना स्थानीय मुखबिरों से मिली थी।

जांच में सामने आया कि आरोपी शुरुआत में अहमदाबाद से दूर पाटण और आसपास के इलाकों में रहा, बाद में मुंबई चला गया। पहचान छिपाने के लिए वह मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखता था। अहमदाबाद पुलिस ने आरोपी को दोबारा मेहसाणा जेल भेज दिया है, जहां वह अपनी बाकी सजा पूरी करेगा।

सजा के दौरान पत्नी को तलाक दे चुका था

हेमंत नागिंदास मोदी ने 2005 में नरोदा इलाके में हत्या की थी। मुकदमे के बाद अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें मेहसाणा जेल भेज दिया गया। जेल में सजा काटते हुए हेमंत ने यह कहकर पत्नी को तलाक दे दिया था कि अब मेरा पूरा जीवन जेल में ही बीतेगा। लेकिन, 2014 में पैरोल पर रिहा होने के बाद जेल वापस जाने के बजाय वह फरार हो गया था।

फरार होने के बाद हेमंत मुंबई वापस आ गया। वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर फिल्म और थिएटर जगत में काम करना शुरू कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि सालों से फिल्मों, धारावाहिकों और नाटकों में अभिनय करने के बावजूद पुलिस भी उसे पहचान नहीं पाई।

हेमंत ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नाम बदल लिया था।

हेमंत ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नाम बदल लिया था।

हिंदी और गुजराती फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियल में भी काम किया

हेमंत ने अपनी पहचान छिपाने के लिए नाम बदल लिया और फिल्म इंडस्ट्री में सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर काम करने लगा था। इस दौरान उसने हिंदी और गुजराती फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियल और थिएटर में काम किया।

पुलिस के मुताबिक फरारी के दौरान आरोपी ने ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’, ‘जयेशभाई जोरदार’, ‘लाहौर 1947’, ‘मेट्रो इन दिनों’ और साउथ फिल्म ‘L2: एम्पुरान’ जैसी फिल्मों में काम किया। इसके अलावा वह ‘वागले की दुनिया’ और ‘मेरे साईं’ जैसे टीवी शो में भी नजर आया। अहमदाबाद पुलिस ने आरोपी को दोबारा मेहसाणा जेल भेज दिया है, जहां वह अपनी बाकी सजा पूरी करेगा।

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गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

अहमदाबाद में 1.66 करोड़ की ज्वेलरी चुराने वाली सेल्सगर्ल अरेस्ट:ब्वॉयफ्रेंड संग रहने के लिए की थी चोरी, होटल से वही गहने लेकर भाग निकला

अहमदाबाद में निकोल इलाके की एक ज्वैलरी शोरूम की सेल्स गर्ल हर्षिदा शेट्टी 10 दिनों बाद पुलिस की गिरफ्त में आ गई। हर्षिदा 11 मई 2026 को शोरूम से 1.66 करोड़ रुपए की ज्वेलरी चुराकर फरार हो गई थी। हर्षिदा ने ब्वॉयफ्रेंड मयूर माली के साथ मिलकर चोरी का ये प्लान बनाया था। पूरी खबर पढ़ें…

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भीषण गर्मी में भी खराब नहीं होती झारखंड की खास डिश ओकोपोको, जानिए इसे बनाने का आसान विधि


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भीषण गर्मी में भी खराब नहीं होती झारखंड की खास डिश ओकोपोको, जानें रेसिपी

 

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झारखंड की पारंपरिक खानपान संस्कृति में कई खास व्यंजन शामिल हैं. इन्हीं में से एक प्रसिद्ध पकवान है ‘ओकोपोको’.इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि भीषण गर्मी में भी यह महीनों तक खराब नहीं होता. ओकोपोको बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. इसे मुख्य रूप से गेहूं का आटा, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है. सबसे पहले आटे में गुड़ मिलाया जाता है. इसमें पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि गुड़ की नमी और घी से ही मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके बाद छोटे-छोटे गोले बनाकर धीमी आंच पर घी या तेल में तला जाता है. धीरे-धीरे पकने पर इसका रंग सुनहरा भूरा हो जाता है और इसकी खुशबू लोगों को आकर्षित करती है. ठंडा होने के बाद इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

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हर शेयर पर ₹57 कमाने का मौका, क्या आपका भी इस कंपनी में लगा है पैसा? जानें रिकॉर्ड डेट


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Dividend Stock: अगर आप ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के शेयरधारक हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. दरअसल, कंपनी शेयरहोल्डर्स को 57 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड देने जा रही है. इसके लिए रिकॉर्ड डेट 29 मई तय कर दी गई है.

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हर शेयर पर ₹57 डिविडेंड देगी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स (फोटो- एआई)

Dividend Stock: शेयर बाजार में निवेशकों को प्रॉफिट सिर्फ शेयरों की कीमत बढ़ने से ही नहीं, बल्कि कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले डिविडेंड से भी अच्छी कमाई होती है. अगर आप भी डिविडेंड देने वाले शेयर से मिनाफा कमाना चाहते हैं तो आपके लिए एक सुनहरा मौका है. इसी बीच, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 57 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है.

इसके लिए रिकॉर्ड डेट 29 मई तय कर दी गई है. इसका मतलब हुआ कि 29 मई तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे. इस डिविडेंड पर 30 जून को सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी. मंजूरी मिलने पर पेमेंट 1 जुलाई को या उसके बाद किया जाएगा.

ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मा ने पिछले साल भी दिए थे डिविडेंड
फाइनल डिविडेंड की घोषणा 13 मई को हुई थी. इससे पहले कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 12 रुपये का अंतरिम​ और 42 रुपये का फाइनल डिविडेंड दिया था.

चौथी तिमाही में 5.7% बढ़ा कंपनी का मुनाफा
ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड का जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में नेट कंसोलिडेटेड प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.7 फीसदी बढ़कर 277.86 करोड़ रुपये रहा. ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 2 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी के साथ 995.3 करोड़ रुपये हो गया.

39,314 करोड़ रुपये है कंपनी का मार्केट कैप
ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के शेयर बीएसई पर गुरुवार (21 मई) को 1.14 फीसदी गिरावट के साथ 2320.75 रुपये पर बंद हुए. कंपनी का मार्केट कैप 39,314 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है. इस शेयर का 52 वीक हाई 3,515.95 रुपये और 52 वीक लो 2,218.00 रुपये है.

कंपनी के शेयरों का हाल
ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के शेयरों का प्रदर्शन देखें तो बीते एक हफ्ते में 4.01 फीसदी की गिरावट आई है. इसने बीते एक महीने में 4.38 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है. बीते 3 महीने में 10.74 फीसदी गिरावट आई है. इस साल अब तक 6.08 फीसदी कमजोरी आई है. पिछले एक साल में यह 22.24 फीसदी फिसल गया है. इन शेयरों ने 3 साल में 80.10 फीसदी रिटर्न दिया है.

(Disclaimer: शेयर बाजार में किया गया निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. अगर आप इसमें पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्‍टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह की लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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NEET पेपर लीक केस: परीक्षा शुल्क कैसे वापस मिलेगा, NTA ने क्या नियम बनाए हैं, जानें पूरा प्रोसेस


राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) गुरुवार को NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए रिफंड पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। यह परीक्षा 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा के बाद निर्धारित की गई थी, जिसे कथित तौर पर पेपर लीक की आशंकाओं के कारण रद्द कर दिया गया था। NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई, जिसके बाद देशव्यापी आक्रोश फैल गया था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा औपचारिक जांच शुरू की गई थी। हालांकि, एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि रिफंड राशि में पेमेंट गेटवे या बैंक शुल्क शामिल नहीं होंगे।

कैसे मिलेगा रिफंड

उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे रिफंड की सुचारू प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए खाताधारक का नाम, खाता संख्या, IFSC कोड और बैंक का नाम सहित अपने बैंक विवरण सावधानीपूर्वक भरें।

कितना रिफंड मिलेगा

Careers360 की रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 1,700 रुपये का रिफंड मिलेगा, जबकि ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को 1,600 रुपये मिलेंगे।

जानें पूरी डिटेल्स

  • एनईटी (यूजी) 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून, 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी, जिसमें औपचारिकताओं का समय भी शामिल है। पुनर्परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।


     

  • छात्र आधिकारिक एनटीए हेल्पडेस्क ईमेल: neetug2026@nta.ac.in के माध्यम से भी शिकायतें या प्रश्न प्रस्तुत कर सकते हैं।

     
  • एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों को 1,000 रुपये का रिफंड मिलेगा, जबकि एनआरआई उम्मीदवारों को 9,500 रुपये मिलेंगे।

     
  •  एनटीए ने कहा है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान चुने गए परीक्षा माध्यम को बदलने की अनुमति उम्मीदवारों को नहीं दी जाएगी।





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5000 रुपये महंगा हो गया OnePlus का नया लॉन्च हुआ 5G फोन, इन दो डिवाइस की भी बढ़ी कीमत


OnePlus ने अपने नए लॉन्च हुए तीन फोन की कीमत में बड़ा इजाफा कर दिया है। वनप्लस के इन फोन की कीमत में 5,000 रुपये तक इजाफा हुआ है। OnePlus Nord सीरीज का ये फोन हाल ही में पेश किए गए हैं। इससे पहले भी OnePlus ने इस साल लॉन्च हुए मिड बजट फोन OnePlus 15R की कीमत में भी पिछले दिनों इजाफा किया है। इसकी कीमत 7,000 रुपये तक बढ़ गई है।

OnePlus Nord 6

वनप्लस का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 256GB और 12GB RAM + 256GB में आता है। इसे भारत में 38,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया है। इसके अलावा फोन का दूसरा वेरिएंट 12GB RAM + 256GB में आता है। प्राइस हाइक के बाद यह फोन 41,999 रुपये की शुरुआती कीमत में मिलेगा। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 46,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आएगा।






OnePlus Nord 6 लॉन्च प्राइस नई कीमत
8GB RAM + 256GB 38,999 रुपये 41,999 रुपये
12GB RAM + 256GB 41,999 रुपये 46,999 रुपये

OnePlus Nord CE 6

इस फोन को भी भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 256GB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत 29,999 रुपये है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 32,999 रुपये में आता है। इस फोन की कीमत में 2,000 रुपये का इजाफा किया गया है। प्राइस हाइक के बाद यह फोन 31,999 रुपये में आता है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 34,999 रुपये में आएगा।






OnePlus Nord CE 6 लॉन्च प्राइस नई कीमत
8GB RAM + 128GB 29,999 रुपये 31,999 रुपये
12GB RAM + 256GB 32,999 रुपये 34,999 रुपये

OnePlus Nord CE 6 Lite

इस बजट फ्रेंडली फोन को 20,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। यह फोन तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 6GB RAM + 128GB, 8GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 256GB में आता है। इस फोन की कीमत में 3,000 रुपये तक का इजाफा किया गया है। इसका बेस वेरिएंट अब 22,999 रुपये में आता है। वहीं, इसके अन्य दोनों वेरिएंट्स क्रमशः 25,999 रुपये और 28,999 रुपये में आएंगे। इन दोनों वेरिएंट्स को क्रमशः 22,999 रुपये और 25,999 रुपये में लॉन्च किए गए थे।







OnePlus Nord CE 6 Lite लॉन्च प्राइस नई कीमत
6GB RAM + 128GB 20,999 रुपये 22,999 रुपये
8GB RAM + 128GB 22,999 रुपये 25,999 रुपये
8GB RAM + 256GB 25,999 रुपये 28,999 रुपये

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तंदूर का खास चूना पत्थर बना ब्रांड, विदेशों में बढ़ रही सप्लाई और डिमांड


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तंदूर का खास चूना पत्थर बना ब्रांड, विदेशों में बढ़ रही सप्लाई और डिमांड

Last Updated:

Tandur Blue Limestone Market: काराबाद जिले का तंदूर इलाका अब ग्लोबल स्टोन मार्केट में अपनी खास पहचान बना चुका है. यहां की खदानों से निकलने वाला तंदूर ब्लू लाइमसटोन अपनी मजबूती, कम पानी सोखने की क्षमता और प्राकृतिक खूबसूरती के कारण दुनिया भर में पसंद किया जा रहा है. अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के बड़े प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इको-फ्रेंडली और कम मेंटेनेंस वाला यह पत्थर आज ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स की पहली पसंद बन गया है.

ख़बरें फटाफट

हैदराबाद. सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली कंस्ट्रक्शन के आधुनिक दौर में तेलंगाना के विकाराबाद जिले का तंदूर इलाका ग्लोबल स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना चुका है. यहां की खदानों से निकलने वाला खास नीले-ग्रे और हरे रंग का प्राकृतिक चूना पत्थर Tandur Blue Limestone आज दुनिया भर के बड़े-बड़े आर्किटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनर्स की पहली पसंद बन गया है. अपनी बेहतरीन मजबूती और बेजोड़ प्राकृतिक खूबसूरती के कारण इस पत्थर का घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बिजनेस रिकॉर्ड तेजी से बढ़ रहा है.

तंदूर का यह चूना पत्थर अपनी बेहद सघन बनावट और कम पानी सोखने की क्षमता के लिए जाना जाता है. इसकी यही खूबी इसे हर तरह के मौसम के अनुकूल बनाती है. देश के मेट्रो शहरों से लेकर अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के आलीशान बंगलों, हेरिटेज होटलों और बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में इस पत्थर का इस्तेमाल तेजी से हो रहा है.

बड़े एक्सपोर्ट हब में बदल चुका है तंदूर का स्टोन मार्केट

आर्किटेक्ट्स इसे इनडोर फ्लोरिंग, बाहरी रास्तों की पेविंग, स्विमिंग पूल डेक्स और दीवारों की क्लैडिंग के लिए एक बेहतरीन नेचुरल और टिकाऊ विकल्प मान रहे हैं. यह पत्थर न सिर्फ दिखने में बेहद आधुनिक और खूबसूरत लुक देता है बल्कि इस पर पैर फिसलने का खतरा भी बहुत कम होता है. व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो तंदूर का स्टोन मार्केट आज एक बड़े एक्सपोर्ट हब में बदल चुका है. खदानों से कच्चे ब्लॉक निकालने के बाद आधुनिक फैक्ट्रियों में इनकी कटाई और पॉलिशिंग की जाती है. ग्लोबल मार्केट की मांग के अनुसार इसे नेचुरल क्लेफ्ट, होन्ड, पॉलिश्ड और टंबल्ड जैसे कई आकर्षक फिनिश में तैयार करके विदेशों में सप्लाई किया जाता है.

सालाना कराड़ों में है टर्नओवर

पर्यावरण के अनुकूल और पूरी तरह रिसाइकिल होने के कारण ग्रीन बिल्डिंग प्रोजेक्ट्स में भी इसकी मांग सबसे ज्यादा है. सालाना करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाला यह अनूठा पत्थर उद्योग आज न केवल तेलंगाना बल्कि पूरे देश के प्राकृतिक पत्थर निर्यात क्षेत्र को एक नई मजबूती दे रहा है. पारंपरिक फ्लोरिंग के मुकाबले इसकी कम मेंटेनेंस लागत और लंबे समय तक नए जैसा बने रहने की क्षमता ने इसे ग्लोबल स्तर पर एक प्रीमियम और भरोसेमंद ब्रांड बना दिया है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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