BSNL ने अपने यूजर्स के लिए खास ऑफर पेश किया है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी ने अपने 365 दिनों की वैलिडिटी वाले दो प्लान सस्ते कर दिए हैं। भारत संचार निगम लिमिटेड ने मदर्स डे के मौके पर इस ऑफर की घोषणा की है। BSNL के 1499 रुपये और 2399 रुपये वाले एनुअल प्लान के साथ इस ऑफर का लाभ लिया जा सकता है। ये दोनों प्लान खास तौर पर कम प्राइस में लंबी वैलिडिटी के साथ आते हैं, जिनमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग, फ्री डेटा जैसे बेनिफिट्स मिलते हैं।
BSNL का ऑफर
बीएसएनएल ने अपने आधिकारिक X हैंडल से घोषणा करते हुए कहा कि मदर्स डे के मौके पर हर कॉल, वीडियो चैट और मोमेंट खास होता है। BSNL यूजर्स को 1499 और 2399 रुपये वाले प्लान में 5% का डिस्काउंट मिलेगा। यानी ये प्लान अब 200 रुपये तक सस्ते में मिलेंगे। हालांकि, यह ऑफर 10 मई से लेकर 17 मई तक ही वैलिड है और कंपनी के आधिकारिक वेबसाइट और सेल्फकेयर ऐप पर ही मिलेगा। थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म से नंबर रिचार्ज कराने पर इस ऑफर का लाभ नहीं मिलेगा।
BSNL का 1499 रुपये वाला प्लान
भारत संचार निगम लिमिटेड का यह लॉन्ग वैलिडिटी वाला प्लान कई बेनिफिट्स के साथ आता है। इसमें यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ मिलता है। इसके अलावा यूजर्स को डेली 100 फ्री SMS और कुल 24GB डेटा का लाभ दिया जाता है। इसमें डेटा के लिए कोई लिमिट सेट नहीं किया गया है। बीएसएनएल के इस प्रीपेड प्लान में यूजर्स को कुल 365 दिनों की वैलिडिटी ऑफर की जाती है।
BSNL का 2399 रुपये वाला प्लान
भारत संचार निगम लिमिटेड का यह रिचार्ज प्लान भी 365 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इस प्रीपेड प्लान में भी यूजर्स को पूरे भारत में फ्री नेशनल रोमिंग और अनलिमिटेड कॉलिंग का लाभ मिलता है। इसके अलावा यूजर्स को डेली 100 फ्री SMS और डेली 2GB हाई स्पीड डेटा का लाभ मिलता है। इस तरह यूजर्स को कुल 730GB डेटा का लाभ मिलता है।
पीलीभीत जनपद के थाना घुंघचाई क्षेत्र में सोमवार सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई, जब केशोपुर गांव के पास एक धान के खेत में एक युवक का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान गांव के ही 35 वर्षीय रामनिवास के रूप में हुई है। घटनास्थल की स्थिति को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं पर गहनता से जांच कर रही है। परिजनों के अनुसार, केशोपुर निवासी रामनिवास (पुत्र काशीराम) रविवार रात अपनी बाइक से किसी काम के लिए घर से निकले थे। जब वे काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई। सोमवार सुबह मैगलगंज हाईवे से केशोपुर जाने वाले मार्ग के मोड़ के पास राहगीरों ने एक शव और दुर्घटनाग्रस्त बाइक देखी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की शिनाख्त रामनिवास के रूप में की। युवक का शव सड़क किनारे स्थित साठा धान के खेत में पड़ा था, जबकि उनकी बाइक पास ही हाईवे किनारे एक गहरी खाई में गिरी हुई पाई गई। घटना की जानकारी मिलते ही थाना अध्यक्ष जय शंकर सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। मृतक के परिवार में चीख-पुकार मची हुई है और गांव में मातम का माहौल है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया। विशेषज्ञों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक सड़क हादसा है या इसके पीछे कोई और साजिश। थाना अध्यक्ष जय शंकर सिंह ने बताया, “शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शुरुआती जांच सड़क हादसे की ओर इशारा कर रही है, लेकिन मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। पुलिस हर संभावित कोण से मामले की जांच कर रही है।”
उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाइवे पर डबोक स्थित शाश्वत धाम में सीमंधर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने मंदिर परिसर के मानस्तम्भ से स्वर्ण छत्र चोरी कर लिया। घटना का एक सीसीटीवी सामने आया जिसमें संदिग्ध चोर दिखाई दिए। इस घटना को लेकर जैन समाज ने रोष जताया। मंदिर के ट्रस्टी एवं मंत्री डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने बताया कि 9 मई 2026 की रात्रि लगभग 1:30 बजे से 2:30 बजे के मध्य दो नकाबपोश व्यक्तियों ने मंदिर परिसर में प्रवेश कर किया। बदमाशों ने मंदिर के मुख्य द्वार को जबरन खोलने का प्रयास करते हुए दरवाजे की सांकल तोड़ दी तथा खिड़की की चुटकली भी क्षतिग्रस्त की और मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। डा. जैन ने बताया कि इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में स्थित मानस्तम्भ पर विराजमान चार प्रतिमाओं में से एक प्रतिमा पर स्थापित लगभग 30 ग्राम वजन का स्वर्ण छत्र चोरी कर लिया गया। मंदिर के प्रबंधक राकेश जैन ने बताया कि घटना की पूरी वारदात मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है, जिसमें दो संदिग्ध व्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। संबंधित CCTV फुटेज पुलिस प्रशासन को उपलब्ध करवाई गई ताकि आरोपियों की शीघ्र पहचान एवं गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि इससे पूर्व भी मंदिर परिसर में दो बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनका पुलिस द्वारा खुलासा किया गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से क्षेत्र में असामाजिक तत्वों के हौसले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं तथा समाज में भय एवं असुरक्षा का वातावरण बन रहा है। मंदिर ट्रस्टी एवं मंत्री डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री तथा प्रबंधक राकेश जैन ने डबोक थाना पुलिस से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल FIR दर्ज कर आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करने, चोरी हुए स्वर्ण छत्र की बरामदगी करवाने तथा क्षेत्र में रात्रिकालीन पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है। जैन समाज ने प्रशासन से धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की अपील की है।
कैमूर में रविवार की सुबह दुर्गावती नदी पुल के नीचे आठ टुकड़ों में 2 अज्ञात शव मिला है। बॉडी के पास 2 निले रंग की ट्रॉली बैग बरामद हुई थी। शव मिलने के लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद भी किसी ने उनकी पहचान के संबंध में पुलिस से संपर्क नहीं किया है। इससे पुलिस को कार्रवाई और शिनाख्त में देरी हो रही है। घटना रामगढ़ थाना क्षेत्र की है। ग्रामीणों की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच के दौरान दोनों शवों के कुल आठ टुकड़े बरामद किए गए। एक सूटकेस से भी शव के कुछ हिस्से मिले हैं। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। पोस्टमॉर्टम के लिए PMCH भेजा गया शव शवों से दुर्गंध आने के कारण कैमूर में कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया। इस हत्याकांड में दोनों शवों के सिर गायब हैं, जिससे पहचान में और भी कठिनाई आ रही है। कैमूर एसपी हरमोहन शुक्ला के अनुसार, जिले के किसी भी थाने में फिलहाल कोई गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं है। शव मिलने के लगभग 24 घंटे बीत जाने के बाद भी किसी ने उनकी पहचान के संबंध में पुलिस से संपर्क नहीं किया है। इससे पुलिस को कार्रवाई और शिनाख्त में देरी हो रही है। पुलिस सोशल मीडिया का सहारा ले रही है और अपने जिले से सटे सभी संबंधित थानों को सूचना भेज दी है, ताकि शवों की पहचान की जा सके। पुल के ऊपर से फेंका गया ट्रॉली बैग प्रथम दृष्टया शवों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि घटना को कहीं और अंजाम दिया गया है और बाद में शवों को इस नदी पुल के पास फेंक दिया गया। मोहनिया और बक्सर मुख्य पथ पर रामगढ़ थाना क्षेत्र के चौरसिया नदी पुल के ऊपर से नीचे फेंकने के दौरान एक ट्रॉली बैग खुल गया, जिससे शव बाहर आ गए, जबकि दूसरे ट्रॉली बैग में शव के कुछ टुकड़े पाए गए थे।
शहर में गर्मी का असर एक बार फिर तेज होने लगा है। रविवार को हल्की राहत मिलने के बाद सोमवार को तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की संभावना जताई है। इसके चलते लोगों को उमस और तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। सोमवार सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। सुबह 8:30 बजे तक तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। रविवार को भी दिनभर चिलचिलाती धूप रही और गर्म हवाएं चलीं। हालांकि शाम के समय तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन हवा में नमी अधिक होने से लोगों को राहत महसूस नहीं हुई। अधिक नमी के कारण उमस बनी रही मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री कम रहा। वहीं सोमवार का न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 0.7 डिग्री कम था। इसके बावजूद वातावरण में मौजूद अधिक नमी के कारण उमस बनी रही। सोमवार सुबह हवा में नमी का स्तर 54 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सामान्य से करीब 23 प्रतिशत अधिक था। शाम के समय भी आर्द्रता 39 प्रतिशत दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अधिक नमी होने से पसीना जल्दी नहीं सूखता, जिससे उमस और बेचैनी बढ़ जाती है। शुष्क हवाओं का असर बढ़ेगा मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे ने बताया कि अगले दो दिनों में हवा में नमी कम होगी और शुष्क हवाओं का असर बढ़ेगा। इसके कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों को फिर से तेज गर्मी और लू जैसे हालात का सामना करना पड़ सकता है।
Chaulai Saag Recipe: झारखंड के गांवों में पारंपरिक चौलाई साग आज भी बेहद पसंद किया जाता है. जब लोग दिनभर की थकान के बाद घर लौटते हैं तो गर्म-गर्म भात के साथ सिंपल चौलाई का साग, कच्चा प्याज और हरी मिर्च का कॉम्बो ऐसा स्वाद देता है कि थकान तो दूर होती ही है, खाना खाकर भी आनंद आ जाता है.
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जमशेदपुर. झारखंड के गांवों की रसोई में आज भी कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन बनते हैं, जिनका स्वाद सीधे मिट्टी और प्रकृति से जुड़ा होता है. उन्हीं में से एक है चौलाई साग. यह साग सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. खासकर गर्मी और बरसात के मौसम में गांवों के खेतों और बाड़ी में उगने वाला यह साग ग्रामीण परिवारों की थाली का अहम हिस्सा बन जाता है.
बनाना बेहद आसान झारखंड के गांवों में दोपहर के समय जब लोग खेतों से काम कर घर लौटते हैं, तब गर्म भात और चौलाई साग का स्वाद पूरे दिन की थकान दूर कर देता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाना बेहद आसान होता है और कम मसालों में भी इसका स्वाद शानदार लगता है.
धीमी आंच पर पकाएं साग चौलाई साग बनाने के लिए सबसे पहले साग को अच्छी तरह साफ पानी से धो लिया जाता है. इसके बाद उसे बारीक काट लिया जाता है. फिर पतले-पतले प्याज काटे जाते हैं. कड़ाही में सरसों तेल गर्म कर उसमें दो सूखी लाल मिर्च डाली जाती है. जब मिर्च की खुशबू आने लगती है, तब उसमें प्याज डालकर हल्का भून लिया जाता है. इसके बाद कटे हुए चौलाई साग को कड़ाही में डाल दिया जाता है. ऊपर से स्वाद अनुसार नमक मिलाया जाता है और फिर धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट तक अच्छी तरह पकाया जाता है.
कच्चा प्याज, हरी मिर्च बढ़ाए स्वाद धीरे-धीरे पकने के बाद चौलाई साग का रंग और खुशबू दोनों ही मन मोह लेते हैं. गांवों में लोग इसे गर्म चावल या भात के साथ बड़े चाव से खाते हैं. कई जगहों पर इसके साथ हरी मिर्च और प्याज भी परोसा जाता है, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देता है.
आज के समय में जहां लोग फास्ट फूड की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं झारखंड का यह पारंपरिक चौलाई साग लोगों को देसी स्वाद और पौष्टिक भोजन की याद दिलाता है. यही कारण है कि गांवों की यह साधारण सी डिश अब शहरों में भी लोगों की पसंद बनती जा रही है.
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
LPG सिलेंडर से लेकर दवाई तक सब महंगा! जिनका बजट पहले से बिगड़ा, वो मिस न करें
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई को हिलाकर रख दिया है. एलपीजी गैस, पेट्रोल, डीजल और खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में 300% तक के उछाल ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी महंगा कर दिया है. फिलहाल दिक्कत ये है कि न तो अमेरिका ही मान रहा है और न ही ईरान. दोनों के बीच चल रही ये लड़ाई न जाने कब रुकेगी. तो ऐसे में क्या आम आदमी की थाली से दाल और सब्जी कम होने वाली है? क्या पेट्रोकैमिकल प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतें आपके बजट को पूरी तरह बिगाड़ देंगी? चलिए समझते हैं कि अब तक क्या-क्या महंगा हुआ है और आगे क्या होने वाला है.
पश्चिम एशिया में गहराता तनाव अब केवल समाचारों की सुर्खी नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे आपकी रसोई और बटुए पर हमला कर रहा है. जब भी दुनिया के उस हिस्से में हलचल होती है, तो भारत जैसे देश में उसकी गूंज पेट्रोल पंप से लेकर सब्जी मंडी तक सुनाई देती है. वर्तमान संकट ने सप्लाई चेन के लिए ऐसा व्यावधान खड़ा किया है कि आम आदमी के लिए अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण रास्तों के बंद होने से आयात-निर्यात का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर अब हमारी डेली लाइफ की चीजों के दाम पर दिखने लगा है. (Image – AI)
सबसे तगड़ा और पहला झटका रसोई गैस के रूप में लगा है. भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी (LPG) बाहर से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा उसी समुद्री रास्ते से आता है जो अभी तनाव की वजह से बंद है. इसकी वजह से साप्ताहिक आयात में भारी कमी आई है और घरेलू सिलेंडर के दाम ₹60 तक बढ़ गए हैं. कमर्शियल सिलेंडर की हालत तो और भी खराब है, जहां 1 मई 2026 से ₹993 की भारी बढ़ोतरी देखी गई है. दिल्ली में अब यह ₹3,071 और कोलकाता में ₹3,355 तक जा पहुंचा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप बाहर खाना खाने के शौकीन हैं, तो रेस्तरां और ढाबों के बढ़े हुए बिल आपकी जेब ढीली करने के लिए तैयार हैं.
घर में खाने-पीने की थाली भी इस महंगाई से अछूती नहीं रही. दालों और खाद्य तेल की कीमतें मार्च के महीने से ही ऊपर चढ़ना शुरू हो गई हैं. अरहर और मूंग जैसी जरूरी दालों के भाव बढ़ रहे हैं, वहीं पाम ऑयल भी करीब 5% महंगा हो गया है. समझने वाली बात ये है कि कभी-कभी कंपनियां दाम नहीं बढ़ातीं, बल्कि पैकेट का वजन कम कर देती हैं. जैसे पार्ले-जी का ₹5 वाला पैकेट अब 50 ग्राम के बजाय 45 ग्राम का रह गया है. इसके अलावा, क्रूड ऑयल महंगा होने से चीनी की कीमतों में भी उछाल आया है क्योंकि अब गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में ज्यादा हो रहा है. (Image – AI)
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ईंधन की बात करें तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का काला साया मंडरा रहा है. भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 190-210 मिलियन डॉलर बढ़ चुका है. जब डीजल महंगा होता है, तो सामान ढोने वाले ट्रक अपना किराया बढ़ा देते हैं, जिससे मंडी में आने वाली हर सब्जी और फल महंगा हो जाता है. जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में औसत महंगाई दर 4.8% तक जा सकती है, जो पहले के अनुमान से लगभग दोगुनी है.
हवाई सफर करने वालों के लिए भी बुरी खबर है. जेट फ्यूल (ATF) की कीमतें 80 से बढ़कर 190 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. एयर इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां अपनी रोजाना की उड़ानों में कटौती कर रही हैं. खासकर खाड़ी देशों (Gulf countries) में काम करने वाले लाखों भारतीय मजदूरों के लिए अपने घर आना-जाना अब एक सपना जैसा होता जा रहा है क्योंकि उड़ानों की कमी और भारी किराए ने उनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है.
बीमारी के वक्त काम आने वाली दवाइयां भी अब महंगी हो रही हैं. दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल यानी API और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें महज दो हफ्तों में 200% से 300% तक बढ़ गई हैं. पेरासिटामोल का कच्चा माल जो पहले ₹250 में मिलता था, अब ₹450 प्रति किलो हो गया है. हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार अब जरूरी दवाओं की कीमतों में कुछ रियायत देने पर विचार कर रही है ताकि फैक्ट्रियां दवाओं का उत्पादन बंद न कर दें. आम आदमी के लिए अस्पताल का खर्च और दवाओं का बिल अब बजट बिगाड़ने वाला साबित हो रहा है.
रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे साबुन, शैम्पू और डिटर्जेंट भी इस संकट की चपेट में हैं. इन चीजों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का सीधा संबंध कच्चे तेल (Crude Oil) से होता है. पैकेजिंग की लागत बढ़ने और कच्चे माल की कमी की वजह से कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम 8% से 15% तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं, प्लास्टिक से बनी चीजें जैसे बाल्टी, मग, खिलौने और यहां तक कि मेडिकल में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज और आईवी बैग की कीमतें भी बढ़ सकती हैं क्योंकि प्लास्टिक बनाने वाला नेफ्था और पॉलिमर अब लगभग ₹1,51,200 प्रति टन के पार जा चुका है. (Image – AI)
कपड़ा उद्योग और खेती पर भी इस संकट की दोहरी मार पड़ी है. कपड़े बनाने के लिए जरूरी धागा और फाइबर सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से आता है, जहां से सप्लाई रुक गई है. वहीं किसानों के लिए यूरिया की वैश्विक कीमत 500 से बढ़कर 700 डॉलर (लगभग ₹42,000 से ₹58,800) प्रति टन हो गई है. हालांकि सरकार सब्सिडी देकर किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर खाद की कमी हुई तो आने वाले समय में अनाज की कीमतें आसमान छू सकती हैं. इसके साथ ही घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए स्टील और सरिया महंगा होने से कंस्ट्रक्शन की लागत भी काफी बढ़ गई है.
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कांग्रेस से डील में गजब झुके थलापति विजय, 5 विधायकों वाली पार्टी के 2 मंत्री
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TVK-Congress Alliance: तमिलनाडु में तमाम तरह की कानूनी और संवैधानिक अड़चनों के बाद एक्टर से पॉलिटिशयन बने थलापति विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. अब कैबिनेट में मंत्री पद के बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है. दशकों के बाद कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता में हिस्सेदारी हो सकती है.
तमिलनाडु की थलापति विजय सरकार की कैबिनेट में कांग्रेस के दो कैबिनेट मंत्री हो सकते हैं. (राहुल गांधी के X अकाउंट से साभार)
TVK-Congress Alliance: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेट्टी कझगम (टीवीके) सरकार के गठन के बाद कांग्रेस पार्टी 55 वर्षों से अधिक समय बाद तमिलनाडु सरकार में वापसी करने के लिए तैयार है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु जनादेश के बाद सत्ता में साझेदारी को लेकर हुए समझौते के तहत TVK ने कांग्रेस को दो कैबिनेट मंत्री पद आवंटित करने का फैसला किया है. चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान थलापति विजय की अगुआई में नई सरकार ने शपथ ली, जहां विजय ने तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया.
थलापति विजय साथ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने 9 मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. विजय के नेतृत्व में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही TVK पार्टी 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, पार्टी बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गई, जिसके चलते विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों का समर्थन मांगना पड़ा. डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) के तहत 28 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को केवल पांच सीटें ही मिल सकीं. सीटों की कम संख्या के बावजूद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नेतृत्व द्वारा आयोजित कई विचार-विमर्शों के बाद टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया.
कांग्रेस के ये नेता बन सकते हैं मंत्री
तमिलनाडु के लिए एआईसीसी के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक गिरीश चोडंकर ने पुष्टि की कि कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर चर्चा अभी जारी है. उन्होंने कहा कि हम इस बात पर जोर नहीं दे रहे हैं कि कांग्रेस के मंत्री तुरंत शपथ लें. मंत्रिमंडल में किन विधायकों को शामिल किया जाएगा, इस पर चर्चा चल रही है. अंतिम निर्णय दिल्ली में नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, मेलूर विधायक पी. विश्वनाथन और किल्लियूर विधायक एस. राजेश कुमार मंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं.
दशकों के बाद सत्ता में होगी कांग्रेस
कांग्रेस दशकों बाद तमिलनाडु सरकार में शामिल हो सकती है. बताया जा रहा है कि विजय कैबिनेट में कांग्रेस के दो मंत्री हो सकते हैं. डीएमके ने कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की मांग ठुकरा दी थी. चेन्नई में सीएम विजय ने राहुल गांधी को सत्ता की हिस्सेदारी का ऑफर दिया था, जिसपर राहुल ने सकारात्मक रुख अपनाने की बात कही थी. बता दें कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने विजय सरकार को अपना समर्थन दिया है. इनमें से दो मंत्री बन सकते हैं.
TVK सरकार में कौन-कौन पार्टी?
टीवीके सरकार को सीपीआई, सीपीआई (एम), आईयूएमएल और वीसीके का भी समर्थन प्राप्त हुआ, जिससे विजय आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सरकार बनाने का दावा कर सके. तमिलनाडु में कांग्रेस का मंत्रिमंडल में प्रवेश राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण क्षण है, जहां कई सरकारों में डीएमके की लंबे समय से सहयोगी होने के बावजूद पार्टी दशकों तक मंत्री पद से वंचित रही. साल 2006 में जब डीएमके ने कांग्रेस और पीएमके के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई, तो कांग्रेस को 34 सीटें जीतने के बावजूद राज्य मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
Rahul Gandhi Vs PM Narendra Modi Seven Appeals; Economic Failure | West Asia Crisis
नई दिल्ली14 मिनट पहले
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राहुल गांधी ने सोमवार को पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से निपटने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की हालिया ‘सात अपीलों’ पर पलटवार किया। उन्होंने इसे नाकामी करार दिया। कहा कि अब देश चलाना प्रधानमंत्री के बस में नहीं रह गया है।
X पर एक पोस्ट में राहुल ने लिखा, ‘कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल का उपयोग घटाओ, मेट्रो से चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं हैं। ये विफलता हैं।’
उन्होंने कहा, ’12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है। क्या खरीदें, क्या नहीं। कहां जाए, कहां नहीं।’ दरअसल, रविवार को सिकंदराबाद में एक जनसभा में पीएम मोदी ने आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
पीएम ने कहा था- भारत में तेल के कुएं नहीं, पेट्रोल कम यूज करें
पीएम मोदी रविवार को कहा था, ‘आज के समय में पेट्रोल, गैस और डीजल का इस्तेमाल कम करना होगा। पड़ोस में चल रहे युद्ध के असर से दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ गए हैं। भारत पर इस वैश्विक संकट का असर ज्यादा है, हमारे पास तेल के बड़े कुएं नहीं हैं।’
पेट्रोल, गैस और डीजल बचाने के लिए हमें वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों की जरूरत है।
अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें। मेट्रो में सफर और कारपूलिंग करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसमें बैठाकर ले जाएं।
हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल थोड़ा कम करे तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी।
देश को रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करने का लक्ष्य रखना चाहिए और तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
शादियों, छुट्टियों और अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में होगा।
सोने के आयात में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। देशहित में लोगों को एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचना चाहिए।
भारतीय घरों में दुनिया के टॉप-10 बैंकों से ज्यादा सोना
भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…
1. सोने में सालाना 6 लाख करोड़ खर्च: भारत में हर साल सोने के आयात पर लाखों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 2024-26 में यह आंकड़ा 4.89 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 6.40 लाख करोड़ रुपए रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से भी ज्यादा है।
2. विदेश यात्रा- 3 लाख करोड़ उड़ा रहे: 2023-24 में विदेश यात्राओं में भारतीयों का कुल खर्च 2.72 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 3.65 लाख करोड़ रुपए हो गया। यानी भारतीयों ने विदेशों में खर्च बढ़ा दिया है।
3. फर्टिलाइजर- 1.50 लाख करोड़ आयात: इस साल भारत ने विदेशों से 1.50 लाख करोड़ रुपए का फर्टिलाइजर खरीदा है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 76% ज्यादा है। हम सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर कतर से आयात करते हैं, जो ईरान के हमलों की चपेट में है। इसलिए फर्टिलाइजर के दाम चढ़े हुए हैं।
4. कच्चा तेल- इस साल 10 लाख करोड़ रु. का तेल आयात करना पड़ा: भारत जरूरत का 70% तेल आयात करता है। इस पर 2024-25 में 11.66 लाख करोड़ खर्च हुए। क्रूड के भाव घटने से 2025-26 में खर्च 10.35 लाख करोड़ रुपए था। पिछले दो महीने के युद्ध में क्रूड 50% महंगा हुआ है। ऐसे में खर्च 17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
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बॉलीवुड में कॉमेडी के नाम पर कई बार ऐसी फिल्में परोसी गई हैं, जिन्हें देख दर्शकों ने अपना सिर पकड़ लिया. बड़े सितारों की मौजूदगी और करोड़ों के बजट के बावजूद ये फिल्में अपनी कमजोर कहानी और घटिया जोक्स की वजह से सिनेमाघरों में पानी मांगती नजर आईं. हंसाने के चक्कर में मेकर्स ने जब लॉजिक को किनारे कर दिया, तो जनता का गुस्सा बॉक्स ऑफिस पर साफ दिखा और ये मूवीज बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गईं.
नई दिल्ली. सिनेमा की दुनिया में कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जिसे अगर सही तरीके से न परोसा जाए, तो वो मजाक नहीं बल्कि मजाक बन जाता है. अक्सर बड़े सितारे और भारी-भरकम बजट भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा पाते, अगर स्क्रिप्ट में दम न हो. दर्शकों को हंसाने के नाम पर जब फूहड़ता, बिना सिर-पैर का लॉजिक और ओवर-एक्टिंग परोसी गई, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा. ऐसी कई फिल्में आईं जिनका ह्यूमर दर्शकों के सिर के ऊपर से निकल गया और ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरीं.
पागलपंती: अनीस बज्मी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनिल कपूर, जॉन अब्राहम, अरशद वारसी और इलियाना डिक्रूज जैसे बड़े नाम शामिल थे. इतनी बड़ी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म की कहानी इतनी कमजोर थी कि दर्शकों को हंसी की जगह झुंझलाहट हुई. बॉक्स ऑफिस पर यह बुरी तरह फ्लॉप हुई क्योंकि इसमें कॉमेडी के नाम पर सिर्फ शोर-शराबा था. दर्शकों ने फिल्म के फीके जोक्स और बिना किसी तुक वाली स्क्रिप्ट को सिरे से नकार दिया. (फोटो साभार: IMDb)
हिम्मतवाला: साजिद खान की इस फिल्म में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया लीड किरदारों में थे. 80 के दशक की सुपरहिट फिल्म का रीमेक बनाने के चक्कर में मेकर्स ने एक ऐसी फिल्म पेश की, जिसमें न तो ओरिजिनल का जादू था और न ही कोई मॉडर्न अपील. अजय देवगन जैसे दमदार स्टार का लाउड कॉमेडी करना फैंस को रास नहीं आया. फिल्म का निर्देशन इतना खराब था कि यह फिल्म डिजास्टर साबित हुई. (फोटो साभार: IMDb)
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सर्कस: रोहित शेट्टी और रणवीर सिंह की जोड़ी से दर्शकों को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन ‘सर्कस’ ने सबको निराश किया. फिल्म में वरुण शर्मा, जैकलीन फर्नांडिस और पूजा हेगड़े भी थे. संजय मिश्रा और जॉनी लीवर जैसे दिग्गजों के बावजूद फिल्म का जादू नहीं चला. 60 के दशक के बैकड्रॉप पर बनी इस फिल्म का ह्यूमर काफी पुराना और फीका लगा. रोहित शेट्टी के सिग्नेचर एक्शन और कॉमेडी की कमी के कारण दर्शकों ने इसे पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया और यह बड़े बजट की फिल्म फ्लॉप रही. (फोटो साभार: IMDb)
हमशकल्स: सैफ अली खान, रितेश देशमुख और राम कपूर के ट्रिपल रोल वाली यह फिल्म साजिद खान की सबसे बड़ी नाकामियों में से एक है. फिल्म में लॉजिक नाम की कोई चीज नहीं थी और जोक्स इतने बचकाने थे कि खुद एक्टर्स ने बाद में इस फिल्म का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी जताई. दर्शकों के लिए तीन-तीन हमशकल को झेलना नामुमकिन हो गया, जिसके चलते यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई. (फोटो साभार: IMDb)
ग्रेट ग्रैंड मस्ती: रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदासानी की इस एडल्ट कॉमेडी ने अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी थीं. हालांकि, फिल्म ने शुरुआती बिजनेस किया था, लेकिन क्रिटिक्स और एक बड़े वर्ग के दर्शकों ने इसे फूहड़ करार दिया. फिल्म की कहानी सिर्फ डबल मीनिंग जोक्स पर आधारित थी, जिसमें कोई नयापन नहीं था. लंबे समय में यह फिल्म अपनी घटिया क्वालिटी की वजह से मजाक बनकर रह गई. इस मूवी को आप परिवार के साथ देख नहीं सकते हैं. (फोटो साभार: IMDb)
क्या कूल हैं हम 3: तुषार कपूर और आफताब शिवदासानी स्टारर इस फिल्म को भारत की पहली पॉर्न-कॉम के रूप में प्रमोट किया गया था. फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी बकवास थी कि इसमें कॉमेडी के नाम पर सिर्फ वल्गर सीन भरे हुए थे. दर्शकों को फिल्म में न तो कहानी दिखी और न ही हंसी. कमजोर अभिनय और खराब स्क्रीनप्ले की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर अपना प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रही. ये मूवी भी फैमिली के साथ देखने लायक नहीं है. (फोटो साभार: IMDb)
तीस मार खां: अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की इस फिल्म का निर्देशन फराह खान ने किया था. शीला की जवानी गाना सुपरहिट होने के बावजूद फिल्म का प्लॉट बहुत ही बचकाना था. अक्षय कुमार की ओवर-द-टॉप एक्टिंग दर्शकों को पसंद नहीं आई. फिल्म में जिस तरह की स्लैपस्टिक कॉमेडी की कोशिश की गई, उसने लोगों को हंसाने के बजाय निराश किया, जिसके कारण यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. (फोटो साभार: IMDb)
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