Tuesday, July 7, 2026
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व्हाट्सएप पर चेयरमैन की डीपी लगाकर 5.30 करोड़ की साइबर-ठगी: बॉस बनकर अकाउंटेंट को भेजे मैसेज, दो खातों में ट्रांसफर करवाए करोड़ों रुपए, दिहाड़ी मजदूर निकला बैंक खाते सप्लाई करने वाला आरोपी – Jaipur News



आरोपी राहुल पेशे से दिहाड़ी मजदूर है। उसने पुणे निवासी अमित सिंह के कहने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म रजिस्टर करवाई थी।

राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम शाखा ने कॉर्पोरेट कंपनियों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए महाराष्ट्र के पुणे से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। साइबर ठगों ने एक नामी कंपनी के चेयरमैन

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अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

1930 हेल्पलाइन पर दर्ज हुई थी शिकायत

एडीजी विजय कुमार सिंह ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गैलेक्सी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से परिवादी दीपेंद्र सिंह ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि साइबर ठगों ने कंपनी के मालिक दीपेंद्र सिंह राठौड़ के नाम और फोटो का इस्तेमाल करते हुए एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से कंपनी के अकाउंटेंट को संदेश भेजा।

खुद को कंपनी का मालिक बताते हुए ठगों ने दो बैंक खातों की जानकारी भेजी और अत्यंत जरूरी भुगतान का हवाला देकर अकाउंटेंट से ऑनलाइन माध्यम से 5.30 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए।

व्हाट्सएप पर बॉस की डीपी देखकर कर्मचारी हुआ गुमराह

जांच में सामने आया कि अपराधियों ने पहले कंपनी के चेयरमैन की प्रोफाइल फोटो और अन्य जानकारी जुटाई। इसके बाद उसी फोटो को नए व्हाट्सएप नंबर पर लगाकर कंपनी के अकाउंटेंट से संपर्क किया। बॉस का नाम और फोटो देखकर कर्मचारी को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और उसने बताए गए खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए।

तकनीकी जांच के बाद पुणे से गिरफ्तारी

पुलिस टीम ने ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का गहन तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान आरोपी राहुल अशोक (32) निवासी पुणे (महाराष्ट्र) की पहचान हुई। राजस्थान पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से आरोपी को पुणे से गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लेकर आई।

दिहाड़ी मजदूर निकला बैंक खाते सप्लाई करने वाला

पूछताछ में आरोपी राहुल ने स्वीकार किया कि वह मुख्य साइबर अपराधियों को मोटे कमीशन के बदले फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराता था और अवैध धनराशि के लेनदेन में उनकी मदद करता था।

जांच में सामने आया कि राहुल पेशे से दिहाड़ी मजदूर है। उसने पुणे निवासी अमित सिंह के कहने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक फर्जी फर्म रजिस्टर करवाई थी।

50 करोड़ की लिमिट वाला फर्जी करंट अकाउंट खुलवाया

पुलिस के अनुसार फर्जी फर्म के नाम पर खोले गए करंट बैंक खाते की क्रेडिट लिमिट मिलीभगत कर 50 करोड़ रुपए तक बढ़वाई गई थी। इसी खाते का इस्तेमाल मार्च 2026 में हुई 5.30 करोड़ रुपए की साइबर ठगी में किया गया।

आरोपी ने गिरोह के लिए तीन अन्य बैंक खाते भी खुलवा रखे थे। ठगी की रकम खाते में आते ही उसे तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर लेयरिंग की जाती थी, ताकि पैसों का स्रोत छिपाया जा सके।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

राजस्थान पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी फर्म के नाम पर खाते खोलने और 50 करोड़ रुपये की लिमिट स्वीकृत कराने में संबंधित बैंक कर्मचारियों की कोई भूमिका रही या नहीं। यदि किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस ने बताया कि मामले में इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी अमित सिंह सहित पूरे साइबर गिरोह की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर की विशेष टीम गठित की गई।

इस कार्रवाई को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जयपुर के थानाधिकारी एवं उपाधीक्षक पुलिस गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने अंजाम दिया। टीम में पुलिस निरीक्षक मुकेश, कांस्टेबल अमित कुमार और कांस्टेबल जयसिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



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जेल में बंदियों के विवाद की गोपनीय जांच शुरु: एसएसपी की तरफ से किया गया टीम का गठन, रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई – Meerut News




चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंदियों के दो गुटों में टकराव के बाद एसएसपी अविनाश पांडेय ने गोपनीय जांच बैठा दी है। उन्होंने एक टीम का गठन कर दिया है जो पूरे मामले की तह तक जाकर हकीकत को उजागर करेगी ताकि आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके। फिलहाल रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। विगत शुक्रवार को जिला कारागार में बंदियों के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। बंदियों के बीच जमकर कट्टन चलीं, जिसके चलते बंदी मौजा को गंभीर चोट आई और उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ गया। बताया जाता है कि अधिक खून बहने के कारण मौजा की हालत चिंताजनक बनी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जेल प्रशासन पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठा हुआ है। चार दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं
यह स्पष्ट हो चुका है कि बंदियों के दो गुटों में विवाद हुआ और एक बंदी को गंभीर चोटें आई। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने किसी के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। चौकाने वाली बात तो यह है कि उच्चाधिकारियों को भी जेल प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट देना गवारा नहीं समझा। यही वजह है कि चार दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। जेल में टकराव की संभावना बढ़ी
बंदी मौजा के बाद जेल के भीतर टकराव के हालात और बढ़ गए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही इसी तरह के एक विवाद के चलते चार बंदियों को प्रदेश की अलग अलग जेलों में शिफ्ट करदिया गया था लेकिन इस मामले में जेल प्रशासन कोई एक्शन लेने को तैयार नहीं है। आरोप तो यहां तक है कि मामले को मैनेज करने का प्रयास किया जा रहा है। गोपनीय टीम ने जांच शुरु की
इस विवाद को लेकर एसएसपी मेरठ अविनांश पांडेय गंभीर हैं। उन्होंने जेल प्रशासन की लापरवाही उजागर होने के बाद अपने स्तर से एक टीम का गठन कर दिया है। यह टीम पूरी तरह गोपनीय तरीके से जांच कर अपनी रिपोर्ट एसएसपी को देगी। रिपोर्ट के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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12 साल के हेम के 2 हत्यारों को उम्रकैद: गर्लफ्रेंड की शादी कहीं और होने से बौखलाकर की थी उसके भाई की हत्या – Gwalior News




ग्वालियर सेशन कोर्ट ने सोमवार को 12 वर्षीय मासूम हेमसिंह राजपूत की निर्मम और रूह कंपा देने वाली हत्या के दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार की अदालत ने मुख्य आरोपी शिवम उर्फ तोता कुशवाह (23 वर्ष) और उसके साथी अमन गोस्वामी उर्फ योगी (21 वर्ष) को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया। दोनों पर भारी अर्थदंड भी लगाया। कोर्ट ने इस हत्याकांड को बेहद क्रूर माना। महज 19 महीने के भीतर डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी साबित किया गया। शादी से इनकार किया तो भाई को मार डाला
अदालत के समक्ष पेश अभियोजन और पुलिस के साक्ष्यों के अनुसार, यह पूरी खौफनाक कहानी प्रतिशोध की आग से जुड़ी थी। मुख्य आरोपी शिवम कुशवाह का मृतक हेम की बड़ी बहन नंदनी के साथ प्रेम-प्रसंग था। दोनों के परिवार पहले शादी के लिए राजी थे, लेकिन नंदनी के सौतेले पिता विजय सेन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। बाद में परिजनों ने नंदनी की शादी शेरू नाम के युवक से कर दी। अपनी प्रेमिका की दूसरी जगह शादी होने से बौखलाए शिवम ने नंदनी के सौतेले पिता को सबक सिखाने और बदला लेने के लिए उसके छोटे भाई हेम की हत्या की साजिश रच डाली। मेला दिखाने के बहाने बुलाया, फिर पत्थरों से तोड़ा जबड़ा
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 29 जुलाई 2024 को हेम की मां कमलेश ने बेटे को गुप्तेश्वर महादेव का मेला देखने के लिए घर से ऑटो में बैठाकर रवाना किया था। रास्ते में आरोपी शिवम ने हेम को फोन किया और मेला दिखाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने पास बुला लिया। इसके बाद वह अपने साथी अमन गोस्वामी के साथ उसका अपहरण कर देव खो रोड (तिघरा थाना क्षेत्र) स्थित सुनसान जंगल की झाड़ियों में ले गया। वहां आरोपियों ने पहले शराब पी और फिर हेम पर भारी पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में बच्चे का जबड़ा पूरी तरह टूट गया और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को भारी पत्थरों के नीचे दबा दिया। डिजिटल सबूतों ने खोला राज, ऐसे पकड़े गए कातिल
वारदात के अगले दिन 30 जुलाई 2024 को तिलकुंडा नरिया के पास जंगल में एक चरवाहे ने पत्थरों के बीच मक्खियां भिनभिनाते देखीं। पास जाकर देखा तो बच्चे की उंगलियां बाहर निकली हुई थीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और साइबर टीम ने आधुनिक तकनीक की मदद से इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाई। कोर्ट की टिप्पणी- मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला अपराध कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि ‘मासूम और बेकसूर बच्चे की इस प्रकार पत्थरों से कुचलकर हत्या करना मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला कृत्य है। प्रेम-प्रसंग या पारिवारिक असहमति का बदला 12 वर्षीय बच्चे की जान लेकर पूरा करना समाज में किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे अपराधियों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाता है।’



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शहजाद भट्टी को मुखौटा बनाकर नेटवर्क फैलाना चाहती है पाकिस्तानी-इंटेलिजेंस: एडीजी दिनेश एमएन बोले- सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने, जासूसी और हथियार सप्लाई कराने की साजिश – Jaipur News




राजस्थान आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क और विदेशी गैंगस्टर्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एटीएस के एडीजी (ऑपरेशंस) दिनेश एमएन ने सोमवार को बताया कि पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी को पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ऑफिसर (पीआईओ) एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रभाव में लेकर उनसे जासूसी करवाना, संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाना और हथियारों की सप्लाई कराना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए शहजाद भट्टी को आगे रखकर काम करती है। हालांकि राजस्थान एटीएस, आईबी और अन्य एजेंसियों की सतर्कता के चलते अब तक इस नेटवर्क का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। भट्टी का नेटवर्क सक्रिय होने के मिले थे इनपुट दिनेश एमएन ने बताया कि पिछले कुछ समय से शहजाद भट्टी के नेटवर्क के सक्रिय होने की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑफिसर सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने, उन्हें पैसों और अन्य प्रलोभनों का लालच देने और संवेदनशील स्थानों के फोटो और वीडियो मंगवाने की कोशिश की जाती है। साथ ही सीमापार से हथियार भेजने के भी प्रयास किए जाते हैं। तकनीकी निगरानी से हर बार नाकाम हुई साजिश एडीजी ने दावा किया कि शहजाद भट्टी और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क का अब तक एक भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। जैसे ही किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है, एटीएस की तकनीकी टीम तुरंत सक्रिय होकर इनपुट की पुष्टि करती है और समय रहते कार्रवाई करती है। इस पूरे नेटवर्क पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और पंजाब पुलिस भी लगातार नजर रखे हुए हैं। कुछ लोगों को समझाइश, सक्रिय लोगों पर मुकदमा उन्होंने बताया कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग केवल संपर्क में पाए जाते हैं, जिन्हें समझाइश देकर पाबंद किया जाता है। वहीं जो लोग सक्रिय रूप से देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाती है। हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि कई लोगों को समझाइश कर निगरानी में रखा गया है। आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के साथ संयुक्त पूछताछ दिनेश एमएन ने बताया कि महत्वपूर्ण मामलों में एटीएस, आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ करते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी लालच या बहकावे में आकर देशविरोधी गतिविधियों का हिस्सा न बनें। यदि कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर गिरफ्तार किया जाएगा। एक साल में एटीएस की बड़ी कार्रवाई एडीजी ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच एटीएस ने आतंकवाद, अवैध हथियार, विस्फोटक, मादक पदार्थ तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के खिलाफ भी बड़ा अभियान रोहित गोदारा और वीरेंद्र चारण की गिरफ्तारी के सवाल पर एडीजी ने कहा कि दोनों राजस्थान सहित कई राज्यों में वांछित हैं। विदेश में मौजूद अपराधियों तक पहुंचने के लिए इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। एजीटीएफ और पुलिस लगातार उनके स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में पांच से छह मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं और अलग-अलग जिलों से करीब 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का प्रयास है कि फायरिंग, हत्या और रंगदारी जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जाए। जिन लोगों को धमकियां मिलती हैं, उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। लोकल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार दिनेश एमएन ने कहा कि रंगदारी और सुपारी से जुड़े अधिकांश मामलों में स्थानीय बदमाश विदेश में बैठे गैंगस्टर्स की मदद करते हैं। यही लोग टारगेट की रेकी करते हैं और अपराधियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देते हैं। ऐसे सभी स्थानीय सहयोगियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कुचामन सिटी के कारोबारी हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मामले में स्थानीय नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं तेलंगाना में भी गैंगस्टर्स की मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के लोकल नेटवर्क को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और फरार अपराधियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। यूएपीए के तहत कार्रवाई अवैध विस्फोटक पर कार्रवाई हथियार तस्करी पर कार्रवाई मादक पदार्थ तस्करी पर कार्रवाई फर्जी आधार गिरोह पर कार्रवाई सोशल मीडिया निगरानी और डी-रेडिकलाइजेशन



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अंशुला ने शेयर की शादी की फोटोज, लहंगे में अप्सरा सी दिखीं, जाह्नवी-खूशी ने लूटी महफिल


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बोनी कपूर की बड़ी बेटी और अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर शादी के बंधन में बंध गई हैं. थोड़ी देर पहले ही उन्होंने अपनी शादी की खूबसूरत फोटोज भी शेयर की है. इन फोटोज में वह पति रोहन ठक्कर संग पोज देती नजर आ रही हैं. अंशुला की शादी की फोटोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं.

नई दिल्ली. बोनी कपूर की बेटी अंशुला कपूर ने आखिरकार अपने लॉन्ग टाइम बॉयफ्रेंड रोहन ठक्कर संग शादी रचा ली है. शादी के बाद अब अंशुला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वेडिंग सेरेमनी की कई खूबसूरत फोटोज भी शेयर की हैं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं. इन तस्वीरों में दोनों का प्यार, सादगी और परिवार के बीच बिताए गए खास पल साफ नजर आ रहे हैं.

अंशुला की शादी में उनके करीबी, फैंस और बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुई हैं. शादी की फोटोज सामने आने के बाद लोग अंशुला को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए बधाइयां दे रहे हैं.इन फोटोज में अंशुला दुल्हन बनी बेहद खूबसूरत लग रही हैं.

फिल्ममेकर बोनी कपूर की बेटी और एक्टर अर्जुन कपूर की बहन अंशुला कपूर की 6 जुलाई को शादी हो गई. ब्राइडल जोड़े में अंशुला बेहद गॉर्जियस लग रही हैं. वहीं सौतेली बहनें जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर भी कहर ढा रही हैं.फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

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अंशुला ने पीच कलर का ब्राइडल लहंगा पहना. उन्होंने मैचिंग चूड़ियां, मांग टीका, बाजूबंद, हैवी ईयररिंग्स और नेकलेस पहना. उन्होंने अपने इस लुक के साथ ग्लोइंग मेकअप कैरी किया. इस ब्राइडल लुक में अंशुला बेहद गॉर्जियस लग रही हैं.फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

वायरल हो रही एक फोटोज में अंशुला रोहन का हाथ थामे नजर आ रही हैं. इस फोटो में दोनों साथ रहने की कसमें खाते नजर आ रहे हैं.उनकी इन फोटोज में फैंस भी उन्हें दिल खोलकर शुभकमनाएं दे रहे हैं. फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

वहीं एक फोटो में दोनों को प्यार भरी नजरों से देखते नजर आ रहे हैं. दोनों के चेहरे पर शादी की खुशी साफ दिखाई दे रही है. यह तस्वीर उनके मजबूत रिश्ते और नए सफर की खूबसूरत शुरुआत को बयां करती है. फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

एक और फोटो है, जिसमें रोहन ठक्कर अंशुला की मांग में सिंदूर भरते नजर आ रहे हैं. यह पल शादी की सबसे भावुक और खास रस्मों में से एक माना जाता है. तस्वीर में दोनों पूरी तरह इस पल में खोए दिखाई दे रहे हैं. इस फोटो ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है. इस फोटो में जाह्नवी कपूर और खूशी कपूर ने तो महफिल ही लूट ली है. फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

अंशुला की शादी की फोटोज सामने आते ही वायरल हो रही हैं. फैंस के अलावा कई बॉलीवुड सितारों ने भी कमेंट कर इस नए जोड़े को शुभकामनाएं दी हैं. कपूर परिवार के लिए भी यह बेहद खास मौका है. यही वजह है कि अंशुला और रोहन की वेडिंग फोटोज इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही हैं. फोटो साभार: Instagram@anshulakapoor

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हथियार के साथ फोटो पोस्ट करने पर युवक अरेस्ट: कैमूर में सोशल मीडिया पर वायरल फोटो पर पुलिस की कार्रवाई, देवर्जीकला से आरोपी को भेजा जेल – Kaimur News




कैमूर के भभुआ में सोशल मीडिया पर अवैध हथियार के साथ फोटो पोस्ट कर रौब झाड़ना एक युवक को महंगा पड़ गया। वायरल तस्वीर का संज्ञान लेते हुए भभुआ थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वायरल फोटो के बाद हुई कार्रवाई भभुआ थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार युवक की पहचान देवर्जीकला गांव निवासी नरेश राम के 20 वर्षीय पुत्र बल्लू राम के रूप में हुई है। सोशल मीडिया पर हथियार के साथ उसकी तस्वीर वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी जांच के बाद दबोचा गया आरोपी गठित टीम में तकनीकी शाखा और भभुआ थाना के पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने पहले वायरल तस्वीर की सत्यता और आरोपी की पहचान की पुष्टि की। इसके बाद उसके ठिकाने पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट एवं अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल तस्वीर में दिख रहा हथियार अवैध था या नहीं और उसे कहां से प्राप्त किया गया। पुलिस की चेतावनी पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों का प्रदर्शन कर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों पर पुलिस लगातार नजर रख रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।



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इस मिठाई को खाने के लिए लोग घंटों लाइन में लगते हैं, देश-विदेश में है मशहूर


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भारत में मिठाइयों की भरमार है, लेकिन कुछ मिठाइयों का स्वाद ऐसा होता है कि लोग उन्हें खरीदने के लिए घंटों तक इंतजार करने से भी नहीं हिचकिचाते. ऐसी ही एक खास मिठाई है, जिसे चखने के लिए लोग दूर-दूर से कोलकाता पहुंचते हैं. इसका स्वाद इतना अलग और लाजवाब है कि एक बार खाने वाला इसे दोबारा जरूर खाना चाहता है.

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बेक्ड रसगुल्ले

कोलकाता को भारत की मिठाइयों की राजधानी भी कहा जाता है. यहां रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई और चमचम जैसी कई पारंपरिक मिठाइयां मशहूर हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बेक्ड रसगुल्ला ने अपनी अलग पहचान बना ली है. यह मिठाई अब सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भी पहली पसंद बन चुकी है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मशहूर मिठाई की दुकानों के बाहर इसे खरीदने के लिए अक्सर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.

बेक्ड रसगुल्ला पारंपरिक रसगुल्ले का ही एक नया और स्वादिष्ट रूप है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले ताजे छेना से मुलायम रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं. इसके बाद इन्हें खास क्रीमी मिश्रण के साथ ओवन में बेक किया जाता है. बेक होने के बाद इसकी ऊपरी परत हल्की सुनहरी हो जाती है, जबकि अंदर का हिस्सा रसदार और मुलायम बना रहता है. यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य रसगुल्ले से काफी अलग और रिच महसूस होता है.

क्यों लगती है लोगों की भीड़?
कोलकाता की प्रसिद्ध मिठाई की दुकान बलराम मलिक एंड राधारमण मलिक को बेक्ड रसगुल्ले को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक इस मिठाई को खरीदने पहुंचते हैं. त्योहारों, वीकेंड और छुट्टियों के दौरान दुकानों के बाहर लंबी लाइन लगना आम बात है. कई लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए इसे पैक करवाकर दूसरे शहरों में भी लेकर जाते हैं.

क्या है इसके स्वाद का राज?
बेक्ड रसगुल्ले का सबसे बड़ा राज इसकी बेकिंग प्रक्रिया है. बेक होने के बाद इसकी ऊपरी परत हल्की कैरेमलाइज हो जाती है, जिससे इसमें अलग तरह की मिठास और फ्लेवर आता है. वहीं अंदर का रसगुल्ला पहले की तरह नरम और रस से भरा रहता है. इसे ठंडा परोसने पर इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. यही वजह है कि इसे खाने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते.

देशभर में बढ़ रही है लोकप्रियता
सोशल मीडिया, फूड ब्लॉग्स और ट्रैवल व्लॉग्स की वजह से बेक्ड रसगुल्ले की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. अब कई ऑनलाइन मिठाई ब्रांड भी इसे अलग-अलग शहरों तक पहुंचा रहे हैं. हालांकि, फूड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका असली स्वाद कोलकाता में ताजा तैयार किए गए बेक्ड रसगुल्ले में ही मिलता है.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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‘दिलजीत दोसांझ ऐसी विवादित फिल्में करते ही क्यों हैं?’ ‘सतलुज’ विवाद पर FWICE का बड़ा हमला


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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार को सिर्फ पैसे कमाने के लिए फिल्में नहीं करनी चाहिए. फिल्म चुनते समय उसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, पब्लिक इमेज और देशहित का भी ध्यान रखना चाहिए.

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दिलजीत को लेकर अध्यक्ष ने कही बड़ी बात

नई दिल्ली. फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भारत में जी5 से ‘सतलुज’ हटाए जाने पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर किसी फिल्म या कंटेंट से समाज में विवाद पैदा होने की आशंका हो, तो उसकी पूरी सावधानी के साथ समीक्षा की जानी चाहिए. सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना भी होता है. अगर सरकार या सेंसर बोर्ड को किसी फिल्म पर बार-बार दखल देना पड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसमें कुछ ऐसी बातें हो सकती हैं, जिन्हें लेकर चिंता जताई गई है.

उन्होंने कहा कि अगर सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, लेकिन बाद में सरकार को लगता है कि उससे गलत संदेश फैल सकता है, सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है या कुछ लोग उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, तो ऐसे मामलों पर पहले ही फैसला हो जाना चाहिए. उनके मुताबिक, सेंसर बोर्ड को रिलीज से पहले ही सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

सेंसर के दौरान ही करवा देने थे बदलाव

बीएन तिवारी ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि कहा कि जब एक फिल्म सेंसर की पूरी प्रक्रिया से गुजरकर पास हो जाती है, तब उसके बाद उसे रोकना सही नहीं है. इससे निर्माता को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. अगर फिल्म में बदलाव की जरूरत थी, तो वह सेंसर के दौरान ही करवा दिए जाने चाहिए थे. या तो फिल्म को शुरुआत में ही मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए थी, या फिर मंजूरी मिलने के बाद उसे बिना किसी रुकावट के रिलीज किया जाना चाहिए.

दिलजीत पर उठाए सवाल

दिलजीत दोसांझ का नाम लेते हुए बीएन तिवारी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि दिलजीत बार-बार विवादों में रहने वाली फिल्मों का हिस्सा क्यों बनते हैं. उन्होंने कहा कि दिलजीत पंजाब के बड़े कलाकार हैं और दुनियाभर में उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग है. ऐसे में उन्हें हर प्रोजेक्ट सोच-समझकर चुनना चाहिए, ताकि उनकी छवि पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.उन्होंने आगे कहा कि एक कलाकार का फर्ज सिर्फ अभिनय करना नहीं होता. उसे यह भी सोचना चाहिए कि उसका काम समाज और देश पर क्या असर डालेगा. सिर्फ पैसे या दूसरे कारणों से किसी फिल्म को स्वीकार नहीं करना चाहिए. ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना हर कलाकार के फैसलों में दिखाई देनी चाहिए.

दूसरे फिल्ममेकर को भी सता रहा डर

दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रिलीज के महज 2 दिन बाद ही भारत में जी5 से हटा दी गई. इसके बाद से ही इंडस्ट्री में नई बहस शुरू हो गई है. इसी बीच काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की अपकमिंग फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ के निर्देशक चेतन डीके ने भी अपना डर जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में संवेदनशील विषयों पर फिल्म बनाना और उसे रिलीज करना बहुत चैलेंजिंग हो गया है. चेतन डीके ने कहा कि उनकी फिल्म अभी भी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की मंजूरी का इंतजार कर रही है. लेकिन’सतलुज’ के साथ जो हुआ, उसे देखकर डर भी बढ़ गया है. उन्हें उम्मीद है कि उनकी फिल्म को जल्द ही सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल जाएगी.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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डॉ. मुखर्जी की जयंती पर सिविक सेंटर में युवा सम्मेलन: गडकरी बोले-उनके विचार अमर हैं, सीएम ने कहा-सपनों का भारत तेजी से आगे बढ़ रहा – New Delhi News




डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार अमर हैं: नितिन गडकरी – 125वीं जयंती पर युवा सम्मेलन में बोले केंद्रीय मंत्री; – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में युवा सम्मेलन एवं व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में नितिन गडकरी ने कहा कि भले ही आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा, “सत्ता किसी व्यक्ति या व्यवस्था को समाप्त कर सकती है, लेकिन विचारों को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में व्यक्ति का मूल्य उसके गुणों से तय होता है। ‘डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत निरंतर आगे बढ़ रहा’ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 125 वर्ष बाद भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की दिशा और स्वरूप को लेकर डॉ. मुखर्जी की स्पष्ट सोच थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर डॉ. मुखर्जी के योगदान का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी को पुष्पांजलि अर्पित की। इनमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, संगठन महामंत्री पवन राणा, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चांदोलिया, बांसुरी स्वराज, महापौर प्रवेश वाही और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।



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चीनी मिल के लिए 30 हजार एकड़ में गन्ना खेती: लक्ष्य पूरा करने के लिए जागरूकता अभियान चलेगा, डीएम ने की अधिकारियों के साथ बैठक – Darbhanga News


दरभंगा समाहरणालय स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में डीएम ने जिला अभियान समिति की बैठक की। जिसमें गन्ना क्षेत्र विस्तार, किसानों के पंजीकरण और जागरूकता अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में सहायक निदेशक (ईख विकास) ने बताया कि एक चीनी

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डीएम ने प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों से कहा कि वे अधिक से अधिक किसानों को गन्ना किसान के रूप में पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 जुलाई तय है। गन्ना एक नकदी फसल (कैश क्रॉप) है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर लाभ और बिक्री के बाद तत्काल नकद आय प्राप्त होती है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ की बैठक।

गांवों की जल्द पहचान पहचान करने के निर्देश

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गन्ना उत्पादन के लिए संभावित गांवों की जल्द पहचान की जाए और हर पंचायत में किसानों के साथ नियमित बैठक कर उन्हें गन्ना खेती के आर्थिक लाभ, सरकारी योजनाओं और तकनीकी सहायता की जानकारी दी जाए।

उन्होंने पंचायत स्तर पर अभियान समिति एवं जीविका दीदियों के सहयोग से हर सप्ताह और प्रखंड स्तर पर नियमित रूप से अभियान समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश

अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को गन्ना किसान पंजीकरण, सहकारी समिति की सदस्यता, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और अन्य उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान गन्ना खेती अपनाने के लिए प्रेरित हों।

साथ ही सभी संबंधित विभागों को समन्वय स्थापित कर पोर्टल के माध्यम से किसानों का आवेदन और पंजीकरण समय से हो। बैठक में बताया गया कि अभियान समिति के सदस्य रोज गांवों और पंचायतों में जाकर किसानों को गन्ना खेती के लिए प्रेरित करेंगे और सरकार की विभिन्न योजनाओं-प्रोत्साहन प्रावधानों का प्रचार-प्रसार करेंगे।

बैठक में ये रहे मौजूद

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे सीसीएस बिहार पोर्टल पर अपनी डीबीटी आईडी के माध्यम से समय पर पंजीकरण कराएं, ताकि गन्ना विकास से संबंधित सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। बैठक में उप निदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद, जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ, सहायक निदेशक (ईख विकास) अभिनय प्रियदर्शी, जिला ईंख पदाधिकारी पुष्कर राज, ईंख प्रसार पदाधिकारी राहुल देव, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।



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