Sunday, July 19, 2026
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जमुई के लोहंडा गांव में एक करोड़ के जेवर चोरी: एक रात में 2 घरों को बनाया निशाना, दूसरे मकान से कैश-चांदी के सिक्के गायब – Jamui News




जमुई के सिकंदरा थाना क्षेत्र के लोहंडा गांव में शनिवार देर रात चोरों ने दो घरों को निशाना बनाया। एक घर से खिड़की तोड़कर करीब एक करोड़ रुपए के सोने-चांदी के जेवरात चुरा लिए गए। वहीं, गांव के एक बंद पड़े मकान से नगदी और चांदी के सिक्के चोरी होने की सूचना है। एक ही रात में हुई इन दो चोरियों से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। लोहंडा गांव निवासी महेश्वर प्रसाद सिंह के घर में परिवार के सदस्य सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने खिड़की तोड़कर उस कमरे में प्रवेश किया, जहां महिलाओं के कीमती जेवरात रखे थे। चोर बक्से समेत अन्य सामान लेकर फरार हो गए। रविवार सुबह जब परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी हुई, तो आसपास खोजबीन शुरू की गई। घर से लगभग 500 मीटर दूर एक खेत में चोरी किया गया बक्सा और कुछ कपड़े पड़े मिले। आशंका है कि चोर कीमती सामान निकालने के बाद बाकी सामान वहीं छोड़कर भाग गए। अंदर से बंद मिला कमरे का दरवाजा पीड़िता किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार रात करीब 10:30 बजे पूरा परिवार सो गया था। सुबह जब कमरे का दरवाजा खोलने पहुंचे तो वह अंदर से बंद मिला। ग्रामीणों ने घर के बाहर कपड़े पड़े होने की सूचना दी, जिसके बाद चोरी का पता चला। उन्होंने बताया कि उनके जेठ राकेश सिंह अपनी पत्नी के साथ पटना गए हुए थे। उन्हीं दोनों के कमरे में चोरी हुई है। मेरी जेठानी सरकारी शिक्षिका है। चोर 40 भर से अधिक सोने के जेवरात और एक किलोग्राम से अधिक चांदी के आभूषण ले गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, चोरी गए जेवरात की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। घटना के बाद घर से 100 फीट दूरी पर समान फेंका मिला,फॉरेंसिक जांच टीम पहुंची मौके पर पहुंच गई है।
दूसरे घर से कैश और चांदी के सिक्के गायब इसी रात चोरों ने गांव के अजय सिंह के बंद पड़े मकान को भी निशाना बनाया। बताया गया कि अजय सिंह का परिवार करीब 15 दिनों से बाहर था। चोर वहां से 50 हजार रुपए नगद और 50 चांदी के सिक्के लेकर फरार हो गए। हालांकि, परिवार के लौटने के बाद ही कुल नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। घटना की सूचना पर सिकंदरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से पूछताछ की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वायड टीम की भी मदद ली जा रही है। थानाध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।



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दाल या रसम, सेहत के लिए कौन है ज्यादा फायदेमंद? जानिए दोनों में क्या है अंतर!


Dal Vs Rasam: भारतीय खाने में दाल और रसम दोनों का ही खास महत्व है. जहां दाल ताकत का एक ज़रूरी ज़रिया है और उत्तर भारतीय खाने का अहम हिस्सा है, वहीं रसम अपने स्वाद और पाचन में फ़ायदेमंद होने के कारण दक्षिण भारत में बहुत पसंद की जाती है. हालांकि, लोग अक्सर सोचते हैं कि इन दोनों में से सेहत के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद कौन सी है. इसका जवाब आपकी खास पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं इन दोनों के बीच का अंतर…

दाल क्या है?
दाल कई तरह की फलियों (लेग्यूम्स) से बनती है, जैसे मूंग, मसूर, अरहर, उड़द और चना दाल. इसे प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है. दाल खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और यह संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा है.

रसम क्या है?
रसम दक्षिण भारत का एक पारंपरिक व्यंजन है जिसे इमली, टमाटर, काली मिर्च, जीरा, लहसुन, करी पत्ता और रसम पाउडर जैसे मसालों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है. हालांकि रसम के कुछ प्रकारों में थोड़ी मात्रा में दाल होती है, लेकिन यह दाल की तुलना में काफी पतली होती है. इसे अक्सर चावल के साथ परोसा जाता है या सूप की तरह पिया जाता है.

दाल और रसम में क्या अंतर है?
दाल गाढ़ी होती है और इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. दूसरी ओर, रसम हल्की होती है, और इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में भी मदद कर सकते हैं.

कौन है ज्यादा हेल्दी?
अगर आपका मकसद प्रोटीन और पोषण पाना है, तो दाल बेहतर विकल्प है. वहीं, अगर आप रंग-बिरंगा खाना चाहते हैं या खाने के साथ कोई स्वादिष्ट, गर्म लिक्विड पसंद करते हैं, तो रसम एक अच्छा विकल्प हो सकता है. दोनों के अपने-अपने फायदे हैं और इन्हें अलग-अलग तरह के खान-पान में शामिल किया जा सकता है.

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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



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18 दिन के सूखे इंतजार के बाद रायसेन में बारिश: किसानों की जागी उम्मीदें,20 जुलाई से तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट – Raisen News




रायसेन जिले में 18 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को बारिश ने दस्तक दी। दोपहर और रात में हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। इस बीच मौसम विभाग ने 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक जिले में भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। 18 दिन बाद बदला मौसम का मिजाज शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद रुक-रुककर बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और ठंडी हवाएं चलने लगीं। बारिश भले ही ज्यादा देर तक नहीं हुई, लेकिन इससे मौसम सुहावना हो गया। धान की फसल को मिली राहत लगातार 18 दिनों तक बारिश नहीं होने से धान की फसल मुरझाने लगी थी। कई खेतों में दरारें पड़ गई थीं और बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा था। शनिवार की बारिश के बाद किसानों को राहत मिली है और अच्छी बारिश की नई उम्मीद जगी है। अब तक सिर्फ 60% धान की बुवाई जिले में अब तक करीब 60 प्रतिशत धान की बुवाई हो सकी है, जबकि शेष किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने और अच्छी बारिश के बाद ही धान की पौध की रोपाई करें, ताकि फसल को नुकसान न हो। तीन दिन भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से रायसेन समेत आसपास के जिलों में 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक अच्छी से भारी बारिश होने की संभावना है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों की बारिश खरीफ फसलों के लिए संजीवनी साबित होगी।



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पैसा रखें तैयार, अगले हफ्ते आएंगे 5 नए IPO, कौन कराएगा बंपर कमाई?


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Upcoming IPO : आप भी शेयर बाजार से कमाई करने का मौका ढूंढ रहे हैं, तो अपने बैंक अकाउंट में पैसे डलवा लीजिए. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि 20 जुलाई से शुरू हो रहे नए हफ्ते में बाजार में 5 आईपीओ दस्‍तक देंगे. इनमें 2 मेनबोर्ड सेगमेंट के इश्‍यू हैं. आपको अगले हफ्ते न केवल नए आईपीओ में पैसा लगाने का मौका मिलेगा, बल्कि पहले से खुले 2 पुराने आईपीओ में भी आप दांव लगा सकते हैं.

हफ्ते के पहले दिन यानी सोमवार यानी 20 जुलाई को ही गल्फ लॉयड्स (Gulf Lloyds) का ₹18.19 करोड़ का इश्‍यू खुलेगा. आईपीओ का प्राइस बैंड ₹100 प्रति शेयर है और एक लॉट में 1200 स्‍टॉक हैं. यह इश्यू 22 जुलाई को बंद होगा. 23 जुलाई को इसका अलॉटमेंट भी फाइनल हो जाएगा. 27 जुलाई को इसकी लिस्टिंग बीएसई एसएमई (BSE SME) प्लेटफॉर्म पर होगी.

21 जुलाई को मेटैलिक टेक्नोफोर्ज (Metalic Technoforge) का ₹49.96 करोड़ का इश्‍यू खुलेगा. इस आईपीओ का प्राइस बैंड ₹72 से ₹77 प्रति शेयर है. 1600 शेयरों के लॉट में बोली लगाई जा सकती है. यह आईपीओ 23 जुलाई को बंद होगा. 24 जुलाई को शेयरों का अलॉटमेंट होगा और लिस्टिंग 28 जुलाई को एनएसई एसएमई (NSE SME) प्लेटफॉर्म पर होगी.

22 जुलाई को हफ्ते का पहला मेनबोर्ड आईपीओ क्यूब हाईवेज ट्रस्ट इनविट (Cube Highways Trust InvIT) का खुलेगा. कंपनी इस इश्‍यू के जरिए ₹5000 करोड़ बाजार से जुटाना चाहती है. क्यूब हाईवेज ट्रस्ट इनविट आईपीओ 24 जुलाई तक खुला रहेगा. इसका प्राइस बैंड ₹151-₹152 प्रति शेयर है. इश्‍यू के शेयरों का अलॉटमेंट 27 जुलाई को होने की उम्मीद है. 29 जुलाई को एनएसई और बीएसई पर शेयरों की लिस्टिंग होगी.

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22 जुलाई को ही एसएमई सेगमेंट का श्री बालाजी माला (Shree Balaji Mala) आईपीओ खुलेगा. इस आईपीओ में ₹66 से ₹70 प्रति शेयर के दायरे में और 2,000 शेयरों के लॉट में 24 जुलाई तक दांव लगाया जा सकता है. कंपनी के शेयरों का अलॉटमेंट 27 जुलाई को फाइनल कर दिया जाएगा. 29 जुलाई को बीएसई एसएमई पर इसकी लिस्टिंग होगी.

23 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट के एक्सट्रैनेट टेक्नोलॉजीज (Xtranet Technologies) का ₹166.80 करोड़ का आईपीओ खुलेगा. इसमें आप 27 जुलाई तक पैसा लगा सकेंगे. कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹120-₹127 प्रति शेयर निर्धारित किया है. एक लॉट में 110 शेयर हैं. शेयर अलॉटमेंट 28 जुलाई को होगा और 30 जुलाई को एनएसई तथा बीएसई पर इसकी लिस्टिंग होगी.

नए आईपीओ के अलावा, जो 2 पुराने इश्यू पहले से खुले हैं, उनमें भी पैसा बनाने का मौका अगले हफ्ते मिलेगा. सोतफिन भारत (Sotefin Bharat) का 16 जुलाई को खुला आईपीओ 20 जुलाई को बंद हो रहा है. इसे अब तक 80% सब्सक्रिप्शन मिल चुका है. कैलिबर माइनिंग (Caliber Mining) का ₹450 करोड़ का मेनबोर्ड इश्यू भी 21 जुलाई तक खुला है. यह अब तक 1.31 गुना भरा है.

अगर बात करें कि कौन सा आईपीओ कमाई कराएगा, तो ग्रे मार्केट तो एक्सट्रैनेट टेक्नोलॉजीज (Xtranet Technologies) आईपीओ की ओर ही इशारा कर रहा है. इस समय इस इश्‍यू के शेयर ग्रे मार्केट में 25 रुपये प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं. श्री बालाजी माला के शेयर 19 रुपये प्रीमियम पर हैं तो गल्‍फ लॉयड्स के शेयर का जीएमपी 15 रुपये है. कैलिबर माइनिंग के शेयर ग्रे मार्केट में 116 रुपये प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं.

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किशनगढ़बास में साइबर ठगी गिरोह के 9 आरोपी गिरफ्तार: मोबाइल-सिम कार्ड से करते थे ठगी, कई राज्यों से जुड़े तार – Khairthal-Tijara News




किशनगढ़बास थाना पुलिस ने साइबर ठगी गिरोह के 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। प्रशिक्षु आरपीएस नेहा मीना और थानाधिकारी बनवारी लाल मीणा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान यह सफलता मिली। पुलिस ने बताया कि बरामद उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है, जिससे साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचा जा सके। गिरफ्तार आरोपियों में खानपुर मेवान निवासी नदीम खान, खातीवास निवासी लादेन, इरशाद, इजरायल, खालिद और अजील शामिल हैं। इसके अलावा मायापुर (टपूकड़ा) निवासी सोयल तथा शेखपुर (थाना किशनगढ़बास) निवासी मोहम्मद खान और रहीम अहमद को भी पकड़ा गया है। कई राज्यों में हुई ठगी से जुड़े हो सकते हैं तार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास मिले मोबाइल फोन और सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी की वारदातों में किया जा रहा था। पुलिस इनसे ठगी के तरीकों, नेटवर्क, साथियों और विभिन्न राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस ने बताया कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर जल्द ही आगे भी कार्रवाई की जाएगी।



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प्रयागराज में चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी: दारागंज में अलाेपीबाग के पास घटना, बगल के ट्रैक पर खड़े थे युवक, वीडियो भी सामने आया – Prayagraj (Allahabad) News




प्रयागराज में चलती ट्रेन पर पत्थरबाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दारागंज के अलोपीबाग के पास रेलवे ट्रैक पर कुछ युवकों ने मालगाड़ी पर पत्थर चलाए। पूरी घटना का वीडियो सामने आने के बाद रेलवे में हड़कंप मच गया है। वीडियो के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।
ट्रैक किनारे खड़े थे कई युवक
बताया जा रहा है कि शनिवार को अलोपीबाग के पास रेलवे ट्रैक के किनारे कुछ युवक खड़े थे। इसी दौरान एक मालगाड़ी वहां से गुजरने लगी। जैसे ही ट्रेन उनके सामने पहुंची, युवकों ने उस पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। घटना के दौरान आसपास मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी वारदात का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।
क्यों की पत्थरबाजी, अभी नहीं चला पता
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवकों ने मालगाड़ी पर पत्थरबाजी किस वजह से की। वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
रेलवे से शिकायत, कार्रवाई की मांग
घटना का वीडियो सामने आने के बाद रेलवे से शिकायत की गई है। रेलवे सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं और घटना स्थल की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
आरपीएफ इंस्पेक्टर ने क्या कहा
इस संबंध में प्रयागराज आरपीएफ इंस्पेक्टर अमित राणा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जिस स्थान की घटना बताई जा रही है, वह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता। वहीं, आरपीएफ प्रयाग के इंस्पेक्टर ने बताया कि दारागंज का क्षेत्र एनईआर में आता है, ऐसे में कार्रवाई संबंधित अफसर ही करेंगे।
डीआरएम को कार्रवाई का आदेश
सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो का रेलवे प्रशासन ने संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है कि मामले में डीआरएम प्रयागराज को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। अब रेलवे सुरक्षा बल और संबंधित अधिकारी वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं।



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संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले: 85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर




अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।



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30 साल बाद घर लौटेगा जवान का शव: माउंट एवरेस्ट पर तूफान में फंसे थे लद्दाख के दोरजे, 26 हजार फीट ऊपर गुफा में शरीर


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लेह5 घंटे पहलेलेखक: शेवांग रिंगजिन

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1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था।

माउंट एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर 26,247 फीट ऊंचे ‘डेथ जोन’ में पिछले 30 सालों से एक पर्वतारोही का शरीर बर्फ में जमा है। पैरों में हरे जूते होने के कारण दुनिया उसे ‘ग्रीन बूट्स’ के नाम से जानती रही।

सालों तक इसे आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल शेवांग पाल्जोर का शव माना गया, लेकिन हाल में हुए डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि यह लांस नायक दोरजे मोरुप का पार्थिव शरीर है। अब 30 साल इंतजार के बाद इस साल अक्टूबर तक लद्दाख में दोरजे के परिवार को उनका शव सौंपा जाएगा।

दोरजे मोरुप, शेवांग पाल्जोर और सूबेदार शेवांग समनला 1996 में तिब्बत के उत्तरी मार्ग से एवरेस्ट फतह करने निकली पहली भारतीय तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। 10 मई 1996 को शिखर के पास तीनों भीषण बर्फीले तूफान में फंस गए थे। यह अभियान बाद में ‘1996 माउंट एवरेस्ट डिजास्टर’ के नाम से जाना गया, जिसमें उस सीजन में 12 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी।

75 वर्षीय पत्नी बोलीं- उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी

भास्कर ने दोरजे के घर पहुंचकर उनकी पत्नी कोनचोक यांगस्किट से मुलाकात की। 75 वर्षीय कोनचोक अब सुन नहीं सकतीं। वह पति की पेंशन पर गुजर-बसर करती हैं। जब से बेटे फुंतसोग दोरजे ने पिता का शव लाने वाले मिशन की सूचना दी, तब से वह रो रही हैं।

उन्होंने बेटे को कागज पर लिखकर दिया है कि उनकी आखिरी इच्छा एक बार पति को देखने की है। उन्होंने लिखा, “उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी।” दोरजे के बेटे फुंतसोग भारतीय सेना में हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी से उन्हें अब तक मिशन की पूरी जानकारी नहीं मिली है। मां ने पिता के इंतजार में पूरी जिंदगी रो-रोकर बिता दी। अब उनकी आंखों में उम्मीद नजर आ रही है।

एवरेस्ट चढ़ने वालों के लिए लैंडमार्क बन गया था ग्रीन बूट्स

1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार बर्फ में फंसे दोरजे मोरुप के शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था। बाद में यह फुटेज ‘समिट फीवर’ डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई गई। पैरों में पहने हरे रंग के जूतों के कारण इस शव को ‘ग्रीन बूट्स’ नाम दिया गया।।

यह शव एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर एक छोटी गुफा में पड़ा था जो ‘ग्रीन बूट्स गुफा’ नाम से मशहूर हुआ। शिखर पर जाने वाले लगभग सभी पर्वतारोही इसी रास्ते से होकर गुजरते थे। उनके लिए यह रास्ते की पहचान (लैंडमार्क) बन गया था।

दोरजे मोरुप का शव एवरेस्ट पर एक छोटी चट्टानी गुफा में पड़ा था।

दोरजे मोरुप का शव एवरेस्ट पर एक छोटी चट्टानी गुफा में पड़ा था।

30 साल तक शव क्यों नहीं निकाला जा सका

दोरजे का शव जिस जगह है, वह 8 हजार मीटर (करीब 26,247 फीट) से ऊपर का ‘डेथ जोन’ है। यहां समुद्र तल की तुलना में सिर्फ करीब 33% ऑक्सीजन होती है। इतनी ऊंचाई पर शरीर तेजी से जवाब देने लगता है। कोशिकाएं मरने लगती हैं।

यहां हेलिकॉप्टर भी नहीं पहुंच सकते। इसलिए यहां से शव वापस लाना दुनिया के सबसे मुश्किल अभियानों में गिना जाता है। यही वजह है कि एवरेस्ट पर मारे गए 340 से ज्यादा पर्वतारोहियों में से अधिकांश के शव आज भी वहीं पड़े हैं।

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भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। पूरी खबर पढ़ें…

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यूपी-दिल्ली-पंजाब समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट: अमरनाथ-वैष्णो देवी यात्रा रोकी गई; मध्यप्रदेश में बारिश के लिए गधों को गुलाब जामुन खिलाए




देश में मानसून के दूसरी बार एक्टिव होने के साथ ही उत्तर भारत के सभी 14 राज्यों में बारिश का तेज दौर जारी है। इन राज्यों में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। शनिवार को भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से उत्तराखंड की भी दो प्रमुख तीर्थयात्राएं प्रभावित हुईं। केदारनाथ मार्ग पर घोड़े-खच्चर की सेवाएं रोक दी गईं और कैलाश-मानसरोवर यात्रियों का एक जत्था भी रुक गया, क्योंकि IMD ने राज्य भर में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी थी। इधर, मौसम विभाग ने अगले 5 दिन उत्तर भारत के मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा अनिश्चितकालीन के लिए रोक दी है। रविवार को भी उत्तराखंड और सिक्किम, बंगाल के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश नहीं हो रही है। एमपी के भोपाल में शनिवार को बारिश के लिए एक अनोखा टोटका किया गया। कुछ लोगों ने गधों को गुलाब जामुन खिलाए। दावा है कि ऐसा करने से इंद्रदेव खुश होंगे और बारिश होगी। 19 जुलाई को देश के ऊपर छाए बादलों की सैटेलाइट इमेज… देशभर के मौसम से जुड़ी तस्वीरें… अरुणाचल में बाढ़ से डेढ़ लाख प्रभावित, केदारनाथ रूट पर लैंड स्लाइड अरुणाचल में बाढ़ और भूस्खलन के इस दौर में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, 29 लोग घायल हुए हैं और 1,49,257 लोग प्रभावित हुए हैं। मानसून की मार से कुल 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं। इधर, पिथौरागढ़ में, कैलाश-मानसरोवर यात्रा का चौथा जत्था, जिसमें 50 तीर्थयात्री शामिल हैं धारचूला बेस कैंप में रोक दिया गया है। बेस कैंप के इंचार्ज धन सिंह बिष्ट ने बताया कि गरबाधार में भूस्खलन के कारण गुंजी जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। अगले 2 दिन के मौसम का हाल 20 जुलाई: 21 जुलाई:



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श्मशान सिद्धि के लिए पति का सिर काटा: अमावस्या के मुहूर्त में हत्या, घटनास्थल से रंगोली-किताबें-लकड़ियां-खोपड़ी मिलने का दावा; किशनगंज की मोमिना का कबूलनामा – Kishanganj (Bihar) News




‘जहां खोपड़ी मिली है, वहीं पर रंगोली, किताबें, लकड़ियां और भोजपत्र भी मिले हैं। इसका मतलब समझते हैं आप? मोमिना 22 दिन पहले कमाख्या में अंबूबाची मेले से लौटी, इसके बाद उसने अमावस्या की रात श्मशान सिद्धि की है। वह पहले हिंदू थी। बाद में मुस्लिम बनी, उसने डेढ़ साल की बेटी और दूसरे पति की बलि दी है। 2022 में उसने पहले पति को बीमार कर खाट पर ही खत्म कर दिया। दूसरी बलि के बाद अब वह क्या करेगी, यह सोचकर पूरे गांव के लोग डरे हुए हैं। पुलिस उसे जेल में ही रखे, यही हम सबके लिए बेहतर होगा। अगर वह बाहर आई तो पूरे गांव का नाश कर देगी।’ ये बातें किशनगंज के उदगारा पंचायत के रहने वाले राज खान ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहीं। राज खान मृतक इमाम का पड़ोसी और करीबी मित्र रहा है। बुधवार दोपहर मोमिना के दूसरे पति का सिर कटा शव बागडोगरा के हंसखुआ चायबगान में जंगल में मिला। पुलिस ने धड़ से करीब 5 किलोमीटर दूर उसका सिर फांसीदेवा से बरामद किया। इस मामले में पश्चिम बंगाल की बागडोगरा पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके कथित बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कर पूछताछ की है। जिसमें दोनों ने हत्या के आरोप कबूल किए हैं, और उसने कई खुलासे भी किए। क्या मोमिना ने तंत्र साधना के लिए पति की हत्या की? घटनास्थल पर साधना से जुड़े क्या-क्या सबूत मिले, उसकी डेढ़ साल की बेटी और पति की मौत कैसे हुई? उसने अब तक कितनी शादियां कीं? तंत्र-मंत्र को लेकर पड़ोसी राज खान और ग्रामीण क्या दावा कर रहे हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सिलसिलेवार पढ़िए, मोमिना की पूरी कहानी
पुलिस पूछताछ में मोमिना ने बताया कि उसका असली नाम तुम्पा घोष है। साल 2004 में वह 17 साल की थी और पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी के खालपाड़ा इलाके में रहती थी। उसने बताया कि जब वह 8-9 साल की थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। पिता सिलिगुड़ी में रिक्शा चलाते थे। आर्थिक तंगी के कारण कुछ समय तक उन्होंने उसे अपने एक दोस्त के घर रखा, लेकिन करीब दो महीने बाद वह वहां से भागकर अपने पैतृक घर खालपाड़ा लौट आई और चाचा के परिवार के साथ रहने लगी। मोमिना के मुताबिक, साल 2005 में वह काम की तलाश में फिर सिलिगुड़ी पहुंची। अगले तीन साल तक उसने अलग-अलग दुकानों और अन्य जगहों पर काम किया। इसी दौरान साल 2008 में उसकी मुलाकात किशनगंज निवासी अख्तर हुसैन से हुई, जो वहां मजदूरी करता था। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। लिव-इन के बाद शादी, फिर तुम्पा से मोमिना बनी
मोमिना ने पुलिस को बताया कि वह और अख्तर करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद साल 2011 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वह किशनगंज आकर अख्तर के घर रहने लगी। यहीं उसका नाम बदलकर तुम्पा से मोमिना कर दिया गया। शादी के एक साल बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद घर में सास, ससुर और देवर इमाम थे। इमाम तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटियों से लोगों के इलाज का काम करता था। उसने अपना एक अलग कमरा बना रखा था, जहां अलग-अलग तरह के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे और इमाम उन्हें जड़ी-बूटियां देता था। घर में रहने के दौरान वह धीरे-धीरे देवर के काम को समझने लगी। इसी दौरान उसे पता चला कि इस काम में तांत्रिक गुरु सुदीप उसकी मदद करता है। यहीं से तंत्र-मंत्र की दुनिया में बढ़ा कदम
इमाम के पड़ोसी और दोस्त राज खान ने बताया कि सुदीप पश्चिम बंगाल के बागडोगरा का रहने वाला था। वह इमाम को तंत्र-विद्या में मदद करता था और बदले में उससे मोटी रकम वसूलता था। राज खान ने बताया कि मोमिना घर में चल रही पूरी तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया को करीब से देख रही थी। देवर इमाम घर बैठे ही अच्छी कमाई कर रहा था, जबकि पति अख्तर सिलिगुड़ी में रहता था और सप्ताह में सिर्फ एक बार घर आता था। बेटे के जन्म के बाद मोमिना और उसके पति पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। पति की कमाई से घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में मोमिना ने देवर के काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। वह समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को इमाम के पास लाती थी, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था। इसी दौरान उसकी देवर इमाम से नजदीकियां बढ़ने लगीं। जब इसकी जानकारी पति अख्तर को हुई तो उसने विरोध किया। इसके बाद, राज खान के मुताबिक, साल 2014 में मोमिना और इमाम घर छोड़कर चले गए और दोनों ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद दोनों तंत्र-मंत्र के जरिए लोगों का इलाज करने लगे और इसी काम से कमाई करने लगे। दोनों करीब 15 साल तक साथ रहे और उनके चार बच्चे हुए। गुरु सुदीप से हुई नई शुरुआत
राज खान के मुताबिक, साल 2018 में मोमिना और इमाम के बीच पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दोनों के बीच लगातार अनबन होती रही। इमाम के साथ काम करते-करते मोमिना के संपर्क काफी बढ़ गए थे। वह इमाम के पूरे कामकाज और तंत्र-मंत्र की जानकारी रखने लगी थी। उसे यह भी पता चल गया था कि इमाम को यह विद्या कहां से मिली और कौन उसकी मदद करता है। राज खान के अनुसार, मोमिना अब खुद इस काम को करना चाहती थी। इसी वजह से उसने साल 2019 में इमाम के गुरु सुदीप से मुलाकात की। वहां उसने अपना पुराना नाम तुम्पा बताया और अपनी पूरी जीवन यात्रा सुनाई। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। राज खान का दावा है कि यहीं तय हुआ कि सुदीप मोमिना को तंत्र-विद्या की सिद्धि कराएगा और इलाज करने की विद्या भी सिखाएगा। राज खान के मुताबिक, इसके बाद दोनों की मुलाकातें लगातार बढ़ने लगीं। मोमिना पति से छिपकर सुदीप से मिलने लगी और उसके बताए रास्ते पर चलने लगी। तारापीठ से कमाख्या तक तंत्र साधना के लिए पहुंची
राज खान के अनुसार, साल 2020 में मोमिना सुदीप के साथ तारापीठ गई, जहां उसे भीमा नाम के एक तांत्रिक से मिलना था। वहां पहुंचने पर पता चला कि भीमा की दो साल पहले मौत हो चुकी है। उसके बताए पते पर कोई दूसरा व्यक्ति उसी साधना में लगा था, लेकिन उसने मोमिना को विद्या सिखाने से इनकार कर दिया। हालांकि उसने कमाख्या का एक पता दिया। इसके बाद दोनों कमाख्या पहुंचे, जहां हरिशंकर नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई। राज खान का दावा है कि हरिशंकर ने मोमिना को विद्या सिखाने का वादा किया, लेकिन सही मुहूर्त का इंतजार करने को कहा। बाद में तय मुहूर्त पर उसने मोमिना को तंत्र-विद्या सिखाई। हालांकि, राज खान के मुताबिक, यह विद्या पूरी नहीं थी क्योंकि एक बड़ा अनुष्ठान बाकी था। उसका मानना है कि वही अनुष्ठान कथित मानव बलि से जुड़ा था। बेटी की मौत और पहले पति की मौत पर भी सवाल
राज खान के मुताबिक, साल 2020 में हरिशंकर से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद मोमिना की डेढ़ साल की बेटी की मौत हो गई। उनका दावा है कि आज तक किसी को उसकी मौत की असली वजह पता नहीं चल सकी और पुलिस भी इसकी जांच नहीं कर पाई। बच्ची को जल्दबाजी में दफना दिया गया। राज खान ने बताया कि इसके बाद साल 2022 में मोमिना का पहला पति अख्तर हुसैन बीमार पड़ गया। वह कई महीनों तक बिस्तर पर रहा। राज खान का दावा है कि उसे कोई स्पष्ट बीमारी नहीं थी, लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इलाज के नाम पर बढ़ता नेटवर्क राज खान के मुताबिक, इसके बाद मोमिना अपनी सीखी हुई तंत्र-विद्या के जरिए लोगों का इलाज करने लगी और कमाई के मामले में इमाम से भी आगे निकल गई। हालांकि वह इमाम के साथ ही रहती थी, लेकिन छिपकर सुदीप से मिलती रहती थी और उसी के इशारे पर काम करती थी। राज खान का कहना है कि यह सिलसिला करीब चार साल तक चलता रहा। मनचाही इच्छा के लिए श्मशान साधना की
राज खान के मुताबिक, साल 2026 आते-आते मोमिना अपने रोजमर्रा के काम से ऊब चुकी थी और कुछ बड़ा करना चाहती थी। उसने सुदीप के साथ मिलकर श्मशान साधना करने की योजना बनाई। राज खान का दावा है कि कमाख्या के तांत्रिकों ने उन्हें बताया था कि इस साधना के पूरा होने पर मनचाही इच्छा पूरी होती है और दुश्मनों का नाश होता है। राज खान के अनुसार, हत्या से करीब दो सप्ताह पहले मोमिना कमाख्या में आयोजित अंबूबाची मेले में गई थी। वहां वह तीन दिन तक रुकी और कई पुजारियों व तांत्रिकों से श्मशान साधना की जानकारी ली। इसी दौरान साधना का मुहूर्त तय किया गया, जो 13 जुलाई 2026 की शाम 6:49 बजे से 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3:12 बजे तक था। यह समय अमावस्या का था। राज खान के मुताबिक, इस साधना के लिए एकाक्षी नारियल, सियार सिंगी, हत्था जोड़ी, कमलगट्टे की माला, भोजपत्र, श्मशान की भस्म और मानव खोपड़ी जैसी सामग्री जुटाई गई। किशनगंज के पुजारी ने सामाग्रियों के बारे में बताया
श्मशान सिद्धि और समाग्री को लेकर दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने किशनगंज स्थित एक मंदिर के पुजारी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि घटनास्थल से जो सामान मिलने का दावा किया गया है वह श्मशान सिद्धि के उपयोग में आते हैं, साथ ही कुछ और भी सामाग्रियां जुटाई जाती है। ऐसे रची गई हत्या की साजिश
हत्या के बारे में मोमिना ने पुलिस को बताया कि सुदीप ने हत्या के दिन जलपाईगुड़ी से अपने बहनोई कौशिक नाथ को बुलाया। कौशिक पेशे से कसाई था, इसलिए वह अपने साथ धारदार हथियार भी लेकर आया। सोमवार दोपहर वह सुदीप के घर पहुंचा, जहां उसे खाना खिलाया गया। इधर, मैंने इमाम को पेट दर्द का बहाना बनाकर बागडोगरा बुलाया और वहां से उसे हसखुआ चाय बागान ले गई। वहां पहले से सारी तैयारियां और लोग मौजूद थे। सभी ने पहले पास की नहर में स्नान किया और फिर भोजन किया। खाना खाने के कुछ देर बाद, जब इमाम एक ओर बैठा था, तब मैंने कौशिक नाथ के हथियार से उस पर पहला वार किया। रात करीब 11 बजे हुए इस हमले में इमाम जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसके गले पर लगातार वार किए और सिर धड़ से अलग कर दिया गया। बाद में सिर को करीब पांच किलोमीटर दूर फांसीदेवा इलाके में ले जाया गया। राज खान का दावा- तंत्र सिद्धि के लिए दी गई बलि
राज खान का दावा है कि तंत्र-विद्या की सिद्धि के लिए ही इमाम की हत्या की गई। उनका कहना है कि जहां सिर बरामद हुआ, वहां तंत्र-मंत्र से जुड़े कई सामान मिले। हालांकि बारिश के कारण काफी सामान इधर-उधर हो गया था, लेकिन रंगोली के निशान, मंत्र लिखे कागज, भोजपत्र और अन्य सामग्री मिली, जिससे उनके अनुसार यह मामला सामान्य हत्या नहीं बल्कि तांत्रिक अनुष्ठान से जुड़ा प्रतीत होता है। पुलिस का क्या कहना है?
पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। हत्या के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल से बरामद हुए एक-एक सामान को हासिल कर इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, मृतक के कटे हुए सिर और हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।



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