Sunday, July 19, 2026
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कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा को कला जगत ने किया याद: परंपरा और आधुनिकता पर हुआ सार्थक संवाद, पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें – Jaipur News




कलावृत्त एवं राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व प्राचार्य, प्रख्यात चित्रकार एवं कलावृत्त संस्था के संस्थापक कलागुरु डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की कला यात्रा, व्यक्तित्व और उनके रचनात्मक योगदान पर आधारित विशेष व्याख्यान का आयोजन राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के मीटिंग हॉल में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ कलाकारों, कला समीक्षकों, शिक्षाविदों, पूर्व विद्यार्थियों और युवा कलाकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर डॉ. सुमहेन्द्र के कला-संसार और उनके व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विनोद भारद्वाज ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र ने राजस्थानी लघु चित्रकला और आधुनिक कला के बीच एक अद्भुत सेतु का निर्माण किया। उनकी कला विशुद्ध राजस्थानी परंपराओं से जुड़ी होने के बावजूद आधुनिक संवेदनाओं से समृद्ध थी, जिसने उन्हें समकालीन भारतीय कला में विशिष्ट पहचान दिलाई। वरिष्ठ पारंपरिक चित्रकार समदर सिंह खंगारोत ‘सागर’ ने कहा कि डॉ. सुमहेन्द्र केवल एक महान चित्रकार ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ शिल्पी, कुशल प्रशासक और प्रभावशाली लेखक भी थे। उन्होंने कहा कि उनकी प्रत्येक कृति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी और उनका सान्निध्य हर कलाकार के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने बताया कि डॉ. सुमहेन्द्र ने लघु चित्रकला को परंपरागत सीमाओं से बाहर निकालकर समकालीन अभिव्यक्ति प्रदान की। वरिष्ठ चित्रकार प्रो. भवानी शंकर शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि परंपरा और आधुनिकता के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार की सृजनात्मकता समय के साथ विकसित होती है और यही विकास भविष्य की नई परंपरा बनता है। उन्होंने डॉ. सुमहेन्द्र को इस विचारधारा का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके चित्रों में भारतीय परंपरा का आधुनिक रूप स्पष्ट दिखाई देता है। साथ ही उन्होंने राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थियों से प्रकृति, संस्कृति और समकालीन विषयों को अपनी कला में स्थान देने का आह्वान किया। चित्रकार एवं कवि अमित कल्ला ने कहा कि कलाकार केवल चित्र बनाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि समाज को नई दृष्टि देने वाला संवेदनशील नेतृत्वकर्ता होता है। उन्होंने भारतीय कला दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में रंग, रेखा और रूप केवल दृश्य तत्व नहीं, बल्कि चेतना, भाव और ऊर्जा के प्रतीक हैं। डॉ. सुमहेन्द्र की कला इसी भारतीय दर्शन की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति थी। कलावृत्त के अध्यक्ष संदीप सुमहेन्द्र ने युवा कलाकारों से अपने चित्रों में समसामयिक विषयों को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी है। उन्होंने कहा कि युवा कलाकारों को तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक सरोकारों को भी अपनी रचनाओं में स्थान देना चाहिए। राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के पूर्व छात्र एवं मूर्तिकार महावीर भारती ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से चित्रकला के विद्यार्थी थे, लेकिन वर्ष 1996-97 में कलावृत्त द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मूर्तिकला शिविर में डॉ. सुमहेन्द्र की प्रेरणा से उन्होंने पहली बार पत्थर पर काम किया। उन्होंने कहा कि आज वे दो दशकों से मूर्तिकला के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं और इसका सबसे बड़ा श्रेय अपने गुरु डॉ. सुमहेन्द्र को देते हैं। कार्यक्रम में डॉ. सुमहेन्द्र शर्मा की धर्मपत्नी सुमन शर्मा, उनके भाई ओमदत्त शर्मा, परिवार के सदस्य, वरिष्ठ कलाकार, शिक्षक, पूर्व छात्र और बड़ी संख्या में वर्तमान विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह के अंत में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के प्राचार्य अनिल खंडेलवाल ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।



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पटना मेट्रो रुकनपुरा स्टेशन पर काम में लायी गयी तेजी: अंडरग्राउंड साइट पर ग्रिड 15-16 हो रहा मजबूत, विकास भवन स्टेशन पर गाइड वॉल की कंक्रीटिंग – Patna News




पटना मेट्रो के मलाही पकड़ी स्टेशन तक शुरू होने के बाद अब आगे के स्टेशन के कामों में तेजी लाई जा रही है। रुकनपुरा के अंडरग्राउंड साइट पर ग्रिड 15 और 16 के बीच गाइड वॉल को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं, पास में स्थित विकास भवन स्टेशन पर गाइड वॉल की कंक्रीटिंग की जा रही है, ताकि स्टेशन की संरचना और एलाइनमेंट को मजबूत किया जा सके। दूसरी ओर, एलिवेटेड सेक्शन में प्री- इंजीनियर बिल्डिंग (PEB) रूफ के पर्लिन लगाने का काम जारी है। बेली रोड पर नवंबर से अंडरग्राउंड टनल बनेगी दूसरी ओर बेली रोड पर नवंबर से मेट्रो टनल की खुदाई होगी। इसके लिए अभी चिड़ियाघर के पास लॉन्चिंग शॉफ्ट बन रहा है, जिसका काम अगले तीन महीने में पूरा होगा। इसके बाद यहीं से जमीन के भीतर टनल बोरिंग मशीन को उतारा जाएगा। खुदाई का काम दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में चिड़ियाघर के पास से दो टीबीएम पश्चिम की तरफ बढ़ेंगी, जो राजा बाजार और रुकनपुरा तक टनल का निर्माण करेंगी। दूसरे चरण में चिड़ियाघर से ही दो अन्य टीबीएम पूरब की दिशा में चलेंगी, जो विकास भवन और विद्युत भवन तक टनल की खुदाई करेंगी। रुकनपुरा से आगे एक रैंप को पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन से जोड़ा जाएगा कॉरिडोर-1 के तहत मीठापुर से पाटलिपुत्र जंक्शन तक 10.54 किमी लंबी अंडरग्राउंड टनल बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक, मीठापुर में मेट्रो का एलिवेटेड स्टेशन बनेगा। यहां से एक रैंप बनाकर लाइन को अंडरग्राउंड किया जाएगा, जो आगे चलकर रेलवे लाइन को पार करते हुए पटना जंक्शन पहुंचेगी। पटना जंक्शन से यह बेली रोड स्थित विद्युत भवन, विकास भवन, चिड़ियाघर, राजाबाजार और रुकनपुरा तक जाएगी। रुकनपुरा से आगे फिर एक रैंप बनाकर इसे पाटलिपुत्र एलिवेटेड स्टेशन से जोड़ दिया जाएगा। बेली रोड पर एक ही लेन से दोनों ओर की गाड़ियां गुजरेंगी बेली रोड पर पांच अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे। इनमें विद्युत भवन, विकास भवन, पटना जू, राजा बाजार और रुकनपुरा है। जमीन के अंदर लगभग 16 मीटर गहरा गड्डा होगा। निर्माण के दौरान बेली रोड की एक ही लेन से दोनों ओर की निजी गाड़ियां गुजरेंगी। दोनों ओर की गाड़ियों को वाहनों को 15 मीटर का ही रास्ता मिलेगा। व्यावसायिक गाड़ियां डायवर्ट होंगी। बेली रोड पश्चिमी पटना और मध्य पटना को जोड़ने वाली सबसे प्रमुख सड़क है। पीक ऑवर्स के दौरान इस पर प्रति घंटे 12-13 हजार पैसेंजर कार यूनिट का भारी दबाव रहता है। इस ट्रैफिक के लिए सामान्य दिनों में छह लेन की सड़क भी छोटी पड़ जाती है। अब इसके आधे में ही गाड़ियां चलेंगी।



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बारिश आते ही बदल गया मारवाड़ का स्वाद! ताजी सब्जियां हुईं कम, दाल-बाटी और कढ़ी


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बारिश आते ही बदल गया मारवाड़ का स्वाद! ताजी सब्जियां हुईं कम, दाल-बाटी और कढ़ी

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Jalore News: मानसून के मौसम में राजस्थान, खासकर मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों की रसोई का स्वाद बदल जाता है. खेतों में ताजी सब्जियों की उपलब्धता कम होने पर लोग फिर से पारंपरिक देसी व्यंजनों की ओर लौटते हैं. दाल-बाटी, राजस्थानी कढ़ी, गट्टे की सब्जी, बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी और अन्य पारंपरिक पकवान इस मौसम में खास पसंद किए जाते हैं. ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि मौसम के अनुरूप पौष्टिक और ऊर्जा देने वाले भी माने जाते हैं. मानसून के दौरान ग्रामीण रसोई में लौटता यह पारंपरिक जायका राजस्थान की समृद्ध खानपान संस्कृति और लोकजीवन की अनूठी पहचान को दर्शाता है.

दाल-बाटी मारवाड़ की रसोई में दाल-बाटी का खास स्थान है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में मानसून के दिनों में इसका स्वाद और बढ़ जाता है. यहां दाल-बाटी कई अंदाज में बनाई जाती है,साधारण बाटी,खे वाली बाटी जिसे चूल्हे या छान व ओवन में सेंककर तैयार किया जाता है, बाफला बाटी, जिसमें बाटी को पहले उबालकर फिर घी में सेंका जाता है, और इंदौरी बाटे, जो अब मारवाड़ के कई घरों में पसंद किए जाने लगे हैं. पंचमेल दाल और देसी घी के साथ परोसी जाने वाली ये बाटियां स्वाद के साथ पारंपरिक पहचान भी हैं.

ढोकली मारवाड़ की रसोई में ढोकली मानसून के दिनों का खास पारंपरिक व्यंजन है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में इसे आमतौर पर मूंग दाल और चने की दाल को मिलाकर तैयार किया जाता है, जिसमें आटे की ढोकली डालकर पकाई जाती है. इसके अलावा यहां ग्वार फली की ढोकली और कुल्थ की ढोकली भी बनाई जाती है, जो देसी स्वाद और स्थानीय सामग्री से जुड़ी खास पहचान रखती हैं. गर्मागर्म ढोकली बारिश के मौसम में स्वाद के साथ शरीर को गर्माहट भी देती है.

ढोकला मारवाड़ की रसोई में मानसून के मौसम में ढोकला भी खूब पसंद किया जाता है. राजस्थान में ढोकले की कई देसी वैरायटी देखने को मिलती हैं. जालोर के ग्रामीण इलाकों में गेहूं के आटे के ढोकले, मक्की के आटे के ढोकले, बाजरे के ढोकले और मैदे के ढोकले भी बनाए जाते हैं. अलग-अलग अनाज से तैयार होने वाले ये ढोकले स्वाद के साथ स्थानीय खान-पान और मौसम के अनुसार बदलती ग्रामीण रसोई की परंपरा को बताते हैं.

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घेरिया मारवाड़ की पारंपरिक रसोई में घेरिया मानसून के मौसम का खास व्यंजन माना जाता है. यह गेहूं के आटे से तैयार होने वाला ऐसा स्वादिष्ट पकवान है, जिसे कम समय और कम सामग्री में आसानी से बनाया जा सकता है. जालोर के ग्रामीण इलाकों में बारिश के दिनों में घेरिया को बड़े चाव से खाया जाता है. देसी घी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है और यह पारंपरिक देसी खान-पान की एक खास पहचान है.

कढ़ी मारवाड़ की रसोई में कढ़ी एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है, जिसे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से खाया जाता है. जालोर में भी मानसून के मौसम में कढ़ी की मांग बढ़ जाती है. इसे खासतौर पर चावल, ढोकला और बाजरे की रोटी के साथ पसंद किया जाता है. कढ़ी की भी कई वैरायटी बनाई जाती हैं,कहीं पकौड़े वाली कढ़ी, तो कहीं प्याज वाली कढ़ी और कुमटिया कढ़ी अलग-अलग मसालों के साथ तैयार की गई देसी कढ़ियां. दही और बेसन से बनने वाली यह कढ़ी स्वाद के साथ मानसून के मौसम का खास जायका बन जाती है.

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ट्रेन की चपेट आया, 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत: घटनास्थल पर बाइक-मोबाइल मिले; बहन के घर जा रहा था, सुसाइड की आशंका – Harda News




हरदा जिले के छीपाबड़ थाना क्षेत्र में भिरंगी स्टेशन के पास रविवार सुबह एक 40 वर्षीय व्यक्ति का शव रेलवे ट्रैक पर मिला। मृतक की पहचान सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम सुखरास निवासी संतोष पिता नर्मदा प्रसाद अटले के रूप में हुई है। संतोष के दो बेटे और दो बेटियां हैं। वह शनिवार को अपने गांव से बहन के गांव धनवाड़ा जाने के लिए निकला था। रात को घर नहीं लौटने पर रविवार सुबह उसका शव ट्रेन की पटरियों के बीच मिला। घटनास्थल से कुछ दूरी पर संतोष की बाइक और मोबाइल भी बरामद हुआ है। छीपाबड़ थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, प्रथमदृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत के सही कारणों का खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो पाएगा। पुलिस को सुबह करीब सात बजे रेलवे ट्रैक पर शव पड़े होने की सूचना मिली थी। इस बीच, पोस्टमार्टम प्रक्रिया में लापरवाही का मामला भी सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता योगेश अटले ने बताया कि शव को घटनास्थल से खिरकिया पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, लेकिन उसे दोपहर एक बजे तक शव वाहन में ही रखा गया। अटले के अनुसार, जब इस संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई, तब आनन-फानन में शव को पोस्टमार्टम रूम में रखकर प्रक्रिया पूरी की गई। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शव को चार घंटे से अधिक समय तक वाहन से नीचे नहीं उतारा गया।



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OMR शीट विवाद पर केजरीवाल का NTA पर हमला: बोले-छात्रों को धमकी नहीं समाधान चाहिए, तुमने पूरे NEET का बेड़ा गर्क कर दिया – New Delhi News



दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की ओर से OMR शीट विवाद को लेकर जारी चेतावनी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एजेंसी से छात्रों और अभिभावकों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील करते हुए कहा कि श

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दरअसल, NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि OMR शीट से जुड़ी शिकायतों की जांच की जा रही है। एजेंसी ने दावा किया कि कुछ शिकायतों में भेजी गई OMR शीट फर्जी या AI से तैयार की गई पाई गई हैं और ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। इस पर केजरीवाल ने प्रतिक्रिया देते हुए परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताओं को उठाया।

धमकी मत दो, तुमने पूरे NEET का बेड़ा गर्क कर दिया

NTA की इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने x पर लिखा, “धमकी मत दो। बच्चों ने इतनी मेहनत की। तुमने पूरे NEET का बेड़ा गर्क कर दिया।” केजरीवाल ने आरोप लगाया कि परीक्षा से जुड़े विवादों के बीच एजेंसी को छात्रों की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि उन्हें कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देनी चाहिए।

हालांकि, NTA का कहना है कि OMR शीट की जांच प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से की जा रही है और किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज या AI-जनित सामग्री जमा करने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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गोरखपुर से बाबा धाम की यात्रा होगी आसान: 28 जुलाई से देवघर के लिए चलेगी स्पेशल ट्रेन, जानें शेड्यूल – Gorakhpur News




गोरखपुर से सावन मेले में बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है। पूर्वोत्तर रेलवे ने बढ़नी-देवघर मेला स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। यह स्पेशल ट्रेन कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग के रास्ते 28 जुलाई से 30 अगस्त तक रोजाना चलेगी और कुल 33 ट्रिप लगाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह ट्रेन गोरखपुर होकर गुजरेगी, जिससे यात्रियों को देवघर जाने के लिए बेहतर और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। गोरखपुर होकर मिलेगा सीधा कनेक्शन रेलवे के शेड्यूल के मुताबिक ट्रेन दोपहर 3:20 बजे बढ़नी से रवाना होगी और शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर, आनंदनगर होते हुए गोरखपुर पहुंचेगी। इसके बाद शाम 6:45 बजे कप्तानगंज से आगे रामकोला, पडरौना, तमकुही रोड, थावे, गोपालगंज, छपरा, सोनपुर, बरौनी, सुल्तानगंज और बांका के रास्ते अगले दिन दोपहर 1 बजे देवघर पहुंचेगी। इससे गोरखपुर के श्रद्धालुओं को बार-बार ट्रेन बदलने की परेशानी नहीं होगी। वापसी में भी रोज मिलेगी सुविधा देवघर से यह मेला स्पेशल ट्रेन रोज शाम 6:45 बजे रवाना होगी और उसी रूट से होते हुए अगले दिन गोरखपुर पहुंचकर बढ़नी तक जाएगी। इससे सावन मेले के दौरान आने-जाने वाले यात्रियों को दोनों तरफ आसान, आरामदायक और सुविधाजनक सफर मिलेगा। रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए यह फैसला लिया है। इससे बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले हजारों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।



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वर्ल्ड अपडेट्स: UNGA से पहले बयान: नेतन्याहू की संभावित यात्रा पर न्यूयॉर्क मेयर और इजराइल आमने-सामने


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1 घंटे पहले

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न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए शहर आने वाले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गिरफ्तारी की कानूनी संभावना पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में शहर के विधि विभाग के साथ बातचीत चल रही है।

ममदानी ने कहा कि वे वही करेंगे, जिसकी कानून इजाजत देगा। उन्होंने दोहराया कि उनके मुताबिक नेतन्याहू का स्थान द हेग में है, जहां अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोपियों पर मुकदमा चलता है।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में गाजा में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

ममदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स के पॉडकास्ट द इंटरव्यू में कहा कि नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपी हैं और कई लोग यही मानते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डैनन ने ममदानी पर यहूदी विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममदानी बढ़ते यहूदी विरोध का सामना करने के बजाय इजराइल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।

डैनन ने पुष्टि की कि नेतन्याहू 22 से 28 सितंबर के बीच होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक में संबोधन करेंगे। उन्होंने कहा कि मेयर का रुख इससे कोई फर्क नहीं डालेगा। उन्होंने X पर लिखा कि अगर किसी को गिरफ्तार किया जाना चाहिए तो वह न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी हैं।

हाल ही में एक रेडियो इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा था कि उन्हें ममदानी की गिरफ्तारी संबंधी धमकियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यूयॉर्क के मेयर हमास का समर्थन करते हैं और अमेरिका से नफरत करते हैं।

अमेरिका और इजराइल, दोनों ICC के सदस्य नहीं हैं। अमेरिकी संघीय कानून राज्य और स्थानीय प्रशासन को ICC के अनुरोधों पर सहयोग करने से रोकता है। पिछले साल न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल भी कह चुकी हैं कि मेयर के पास नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है।

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कनाडा के जंगलों में आग से टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन की हवा दुनिया में सबसे खराब

कनाडा में जंगलों में लगी भीषण आग का धुआं अमेरिका तक पहुंच गया है। शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। खराब एयर क्वालिटी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को बाहर कम निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दी है।

कनाडा में इस समय 955 जगहों पर जंगलों में आग लगी हुई है। इनमें से करीब 200 आग केवल ओंटारियो प्रांत में हैं। कई जगह आग अब भी नियंत्रण से बाहर है।

अमेरिका के मिनेसोटा राज्य की उत्तरी सीमा पर भी एक दर्जन से ज्यादा जंगलों में आग लगी है। ये 73 हजार एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली है। अधिकारियों ने इसे अभूतपूर्व स्थिति बताते हुए आपातकाल घोषित किया है।

अमेरिका के नेशनल इंटरएजेंसी फायर सेंटर और नेचुरल रिसोर्सेज कनाडा के अनुसार, जून के आखिर में लगातार गर्म मौसम और सामान्य से कम बारिश के कारण आग तेजी से फैली।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा कि हवा धुएं को ओंटारियो से टोरंटो, न्यूयॉर्क राज्य और बोस्टन तक ले गई। एयर क्वालिटी मॉनिटर करने वाली संस्था IQAir के अनुसार शनिवार को टोरंटो, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन DC दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर रहे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कनाडा पर जंगलों की आग रोकने में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धुएं से अमेरिका को भारी नुकसान हो रहा है और इसकी भरपाई के लिए कनाडा पर नए टैरिफ लगाने पर विचार किया जा सकता है।

ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने अमेरिकी नेताओं की आलोचना को गलत बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल कैलिफोर्निया में लगी आग बुझाने में टोरंटो ने अमेरिका की मदद की थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की आग के धुएं के लिए सिर्फ कनाडा को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के विशेषज्ञ पैट्रिक जेम्स के मुताबिक, धुआं सीमाएं नहीं मानता। हवा उसे जहां ले जाती है, वह वहीं पहुंच जाता है। पहले भी अमेरिका में लगी बड़ी आग का धुआं कनाडा तक पहुंच चुका है।

ताइवानी राष्ट्रपति बोले- लोकतांत्रिक ताइवान को कभी ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देंगे

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने रविवार को कहा कि देश को अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट रहना होगा और किसी भी कीमत पर ‘लोकतांत्रिक ताइवान’ को ‘चीन का ताइवान’ नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बीजिंग के “रेड टेरर” का मिलकर मुकाबला करने की अपील की।

DPP के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए लाइ ने कहा कि शांति के समय भी ताइवान को सतर्क रहने की जरूरत है।

लाइ ने कहा कि चीन का नया ‘एथनिक यूनिटी लॉ’ बीजिंग को अपनी सीमाओं के बाहर रहने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का आधार देता है। ताइवान को आशंका है कि इस कानून का इस्तेमाल उन ताइवानी नागरिकों के खिलाफ किया जा सकता है, जिन्हें चीन अलगाववादी मानता है।

हालांकि, चीन इस कानून को लेकर की गई सभी आलोचनाओं को पहले ही खारिज कर चुका है। ताइवान का कहना है कि चीन की कानूनी व्यवस्था का उसके क्षेत्र पर कोई अधिकार नहीं है।

ताइवानी (होक्कियन) भाषा में भाषण देते हुए लाइ ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे सबसे आगे रहकर समाज पर चीन के “रेड टेरर” के खतरे का मुकाबला करें।

उन्होंने कहा, “हमें अपनी लोकतांत्रिक और स्वतंत्र जीवनशैली की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करना होगा। किसी भी हालत में लोकतांत्रिक ताइवान को फिर से चीन का ताइवान नहीं बनने देंगे।”

लाइ ने एक बार फिर कहा कि ताइवान पहले से ही एक स्वतंत्र देश है, जिसका संवैधानिक नाम ‘रिपब्लिक ऑफ चाइना’ है। उन्होंने कहा कि यह ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के अधीन नहीं है।

लाइ ने कहा कि पिछले एक दशक में DPP सरकार ने चीन के बढ़ते दबाव, दुष्प्रचार, सैन्य धमकियों और कूटनीतिक दबाव के सामने कभी पीछे हटने का रास्ता नहीं चुना।



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जमुई के लोहंडा गांव में एक करोड़ के जेवर चोरी: एक रात में 2 घरों को बनाया निशाना, दूसरे मकान से कैश-चांदी के सिक्के गायब – Jamui News




जमुई के सिकंदरा थाना क्षेत्र के लोहंडा गांव में शनिवार देर रात चोरों ने दो घरों को निशाना बनाया। एक घर से खिड़की तोड़कर करीब एक करोड़ रुपए के सोने-चांदी के जेवरात चुरा लिए गए। वहीं, गांव के एक बंद पड़े मकान से नगदी और चांदी के सिक्के चोरी होने की सूचना है। एक ही रात में हुई इन दो चोरियों से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। लोहंडा गांव निवासी महेश्वर प्रसाद सिंह के घर में परिवार के सदस्य सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने खिड़की तोड़कर उस कमरे में प्रवेश किया, जहां महिलाओं के कीमती जेवरात रखे थे। चोर बक्से समेत अन्य सामान लेकर फरार हो गए। रविवार सुबह जब परिवार के सदस्यों को घटना की जानकारी हुई, तो आसपास खोजबीन शुरू की गई। घर से लगभग 500 मीटर दूर एक खेत में चोरी किया गया बक्सा और कुछ कपड़े पड़े मिले। आशंका है कि चोर कीमती सामान निकालने के बाद बाकी सामान वहीं छोड़कर भाग गए। अंदर से बंद मिला कमरे का दरवाजा पीड़िता किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार रात करीब 10:30 बजे पूरा परिवार सो गया था। सुबह जब कमरे का दरवाजा खोलने पहुंचे तो वह अंदर से बंद मिला। ग्रामीणों ने घर के बाहर कपड़े पड़े होने की सूचना दी, जिसके बाद चोरी का पता चला। उन्होंने बताया कि उनके जेठ राकेश सिंह अपनी पत्नी के साथ पटना गए हुए थे। उन्हीं दोनों के कमरे में चोरी हुई है। मेरी जेठानी सरकारी शिक्षिका है। चोर 40 भर से अधिक सोने के जेवरात और एक किलोग्राम से अधिक चांदी के आभूषण ले गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, चोरी गए जेवरात की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। घटना के बाद घर से 100 फीट दूरी पर समान फेंका मिला,फॉरेंसिक जांच टीम पहुंची मौके पर पहुंच गई है।
दूसरे घर से कैश और चांदी के सिक्के गायब इसी रात चोरों ने गांव के अजय सिंह के बंद पड़े मकान को भी निशाना बनाया। बताया गया कि अजय सिंह का परिवार करीब 15 दिनों से बाहर था। चोर वहां से 50 हजार रुपए नगद और 50 चांदी के सिक्के लेकर फरार हो गए। हालांकि, परिवार के लौटने के बाद ही कुल नुकसान का सही आकलन हो सकेगा। घटना की सूचना पर सिकंदरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर ग्रामीणों से पूछताछ की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वायड टीम की भी मदद ली जा रही है। थानाध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है और जल्द ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।



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दाल या रसम, सेहत के लिए कौन है ज्यादा फायदेमंद? जानिए दोनों में क्या है अंतर!


Dal Vs Rasam: भारतीय खाने में दाल और रसम दोनों का ही खास महत्व है. जहां दाल ताकत का एक ज़रूरी ज़रिया है और उत्तर भारतीय खाने का अहम हिस्सा है, वहीं रसम अपने स्वाद और पाचन में फ़ायदेमंद होने के कारण दक्षिण भारत में बहुत पसंद की जाती है. हालांकि, लोग अक्सर सोचते हैं कि इन दोनों में से सेहत के लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद कौन सी है. इसका जवाब आपकी खास पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं इन दोनों के बीच का अंतर…

दाल क्या है?
दाल कई तरह की फलियों (लेग्यूम्स) से बनती है, जैसे मूंग, मसूर, अरहर, उड़द और चना दाल. इसे प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कई ज़रूरी विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत माना जाता है. दाल खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और यह संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा है.

रसम क्या है?
रसम दक्षिण भारत का एक पारंपरिक व्यंजन है जिसे इमली, टमाटर, काली मिर्च, जीरा, लहसुन, करी पत्ता और रसम पाउडर जैसे मसालों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है. हालांकि रसम के कुछ प्रकारों में थोड़ी मात्रा में दाल होती है, लेकिन यह दाल की तुलना में काफी पतली होती है. इसे अक्सर चावल के साथ परोसा जाता है या सूप की तरह पिया जाता है.

दाल और रसम में क्या अंतर है?
दाल गाढ़ी होती है और इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. दूसरी ओर, रसम हल्की होती है, और इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ-साथ पाचन में भी मदद कर सकते हैं.

कौन है ज्यादा हेल्दी?
अगर आपका मकसद प्रोटीन और पोषण पाना है, तो दाल बेहतर विकल्प है. वहीं, अगर आप रंग-बिरंगा खाना चाहते हैं या खाने के साथ कोई स्वादिष्ट, गर्म लिक्विड पसंद करते हैं, तो रसम एक अच्छा विकल्प हो सकता है. दोनों के अपने-अपने फायदे हैं और इन्हें अलग-अलग तरह के खान-पान में शामिल किया जा सकता है.

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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



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18 दिन के सूखे इंतजार के बाद रायसेन में बारिश: किसानों की जागी उम्मीदें,20 जुलाई से तीन दिन भारी बारिश का अलर्ट – Raisen News




रायसेन जिले में 18 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को बारिश ने दस्तक दी। दोपहर और रात में हुई बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठे। इस बीच मौसम विभाग ने 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक जिले में भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। 18 दिन बाद बदला मौसम का मिजाज शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद रुक-रुककर बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और ठंडी हवाएं चलने लगीं। बारिश भले ही ज्यादा देर तक नहीं हुई, लेकिन इससे मौसम सुहावना हो गया। धान की फसल को मिली राहत लगातार 18 दिनों तक बारिश नहीं होने से धान की फसल मुरझाने लगी थी। कई खेतों में दरारें पड़ गई थीं और बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा था। शनिवार की बारिश के बाद किसानों को राहत मिली है और अच्छी बारिश की नई उम्मीद जगी है। अब तक सिर्फ 60% धान की बुवाई जिले में अब तक करीब 60 प्रतिशत धान की बुवाई हो सकी है, जबकि शेष किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने और अच्छी बारिश के बाद ही धान की पौध की रोपाई करें, ताकि फसल को नुकसान न हो। तीन दिन भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में एक मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से रायसेन समेत आसपास के जिलों में 20 जुलाई से अगले तीन दिनों तक अच्छी से भारी बारिश होने की संभावना है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों की बारिश खरीफ फसलों के लिए संजीवनी साबित होगी।



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