Saturday, July 18, 2026
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सहरसा में व्यापार संघ अध्यक्ष के स्टाफ के साथ लूट: बदमाशों ने हवाई फायरिंग कर फैलाई दहशत, जांच जारी – Saharsa News




सहरसा के सदर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को जिला व्यापार संघ के अध्यक्ष अर्जुन चौधरी के स्टाफ से मोबाइल छीनने की वारदात हुई। बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने मोबाइल झपटने के बाद दहशत फैलाने के उद्देश्य से हवा में दो राउंड फायरिंग की और मौके से फरार हो गए। नकदी लूटने का प्रयास, विरोध पर छीना मोबाइल जानकारी के अनुसार, जिला व्यापार संघ अध्यक्ष अर्जुन चौधरी के स्टाफ श्याम कुमार बटराहा की ओर जा रहे थे। रास्ते में बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें रोककर पहले नकदी छीनने का प्रयास किया। विरोध करने पर बदमाश नकदी नहीं ले सके और उनका मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। फायरिंग से मची दहशत भागते समय बदमाशों ने लोगों में दहशत फैलाने के लिए हवा में दो राउंड फायरिंग की। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक दोनों आरोपी फरार हो चुके थे। घटना के बाद इलाके के व्यवसायियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है तथा स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है। सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने बताया कि घटना की सूचना मिली है, लेकिन पीड़ित की ओर से अभी तक लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।



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AI ने बदली इंप्लांटोलॉजी की तस्वीर: कम हड्डी में भी संभव हुआ स्थायी दांत लगाना; इंदौर में ISOI मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस में नई तकनीकों पर चर्चा – Indore News


दंत चिकित्सा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसंऔर डिजिटल तकनीकें नई संभावनाओं के द्वार खोल रही हैं। अब जबड़े की हड्डी कम होने पर भी मरीजों को स्थायी दांत लगाने की प्रक्रिया पहले से अधिक सुरक्षित, सटीक और सफल हो गई है। इंदौर में शुक्रवार से शुरू ह

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होटल एसेंशियल में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में देशभर से करीब 500 डेंटल विशेषज्ञ, चिकित्सक और पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थी शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन आयोजित वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल प्लानिंग, एआई आधारित विश्लेषण और सर्जिकल गाइड जैसी तकनीकों ने इंप्लांट उपचार की सफलता दर को काफी बढ़ा दिया है।

40 वर्षों के शोध ने इंप्लांट को बनाया अधिक भरोसेमंद

इंप्लांटोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. मयूर खेरनार और डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने बताया कि इंप्लांटोलॉजी कोई नई चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि चार दशकों से अधिक समय से विकसित और प्रमाणित विज्ञान है। आधुनिक शोध और तकनीकी नवाचारों के चलते अब कम हड्डी वाले मरीजों में भी उपलब्ध हड्डी का प्रभावी उपयोग कर सफलतापूर्वक इंप्लांट लगाए जा रहे हैं।

वर्कशॉप में AI और डिजिटल तकनीक से इम्प्लांट की जानकारी देते एक्सपर्टस।

डायबिटीज और बीपी मरीज भी करा सकते हैं इंप्लांट

एक्सपर्टस के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ जबड़े की हड्डी का कम होना सामान्य प्रक्रिया है, न कि कोई बीमारी। नई तकनीकों की मदद से ऐसी स्थिति में भी इंप्लांट संभव है। उन्होंने बताया कि यदि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित स्थिति में हों, तो ऐसे मरीज भी सुरक्षित रूप से इंप्लांट उपचार करा सकते हैं। बेहतर चबाने की क्षमता और संतुलित पोषण के लिए स्वस्थ दांत विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

युवा मरीजों के लिए भी कारगर विकल्प

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि इंप्लांट केवल बुजुर्गों के लिए नहीं हैं। 16 से 18 वर्ष की आयु के बाद किसी दुर्घटना या अन्य कारण से स्थायी दांत खोने वाले युवाओं के लिए भी इंप्लांट एक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान है। हालांकि दूध के दांतों की जगह इंप्लांट नहीं लगाए जाते।

AI बताएगा इंप्लांट के लिए सबसे उपयुक्त स्थान

डिजिटल इंप्लांट एक्सपर्च सुदीप पॉल ने बताया कि आधुनिक एआई टूल्स और कंप्यूटर आधारित प्लानिंग अब जबड़े की हड्डी का विस्तृत विश्लेषण कर यह निर्धारित कर सकते हैं कि इंप्लांट लगाने के लिए कौन-सा स्थान सबसे उपयुक्त और मजबूत है। इसके आधार पर तैयार सर्जिकल गाइड डॉक्टरों को इंप्लांट को बिल्कुल सही स्थान पर लगाने में मदद करती है, जिससे उपचार की सटीकता और सुरक्षा दोनों बढ़ती हैं।

दो दिन तक होंगे वैज्ञानिक सत्र और लाइव डेमोंस्ट्रेशन

ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. गगन जायसवाल ने बताया कि क़ॉन्फ्रेंस के आगामी सत्रों में अत्याधुनिक इंप्लांट तकनीकों पर वैज्ञानिक व्याख्यान, केस स्टडी चर्चा, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और पोस्टर प्रेजेंटेशन आयोजित किए जाएंगे। ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मनीष वर्मा के अनुसार आयोजन का उद्देश्य दंत चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों और वैश्विक मानकों से जोड़ना है।

कॉन्फ्रेंस में ISOI के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शरद शेट्टी, इंटरनेशनल स्पीकप डॉ. कोमल मजूमदार सहित 14 एक्सपर्ट्स अपने अनुभव साझा करेंगे। आयोजन से प्रदेश के दंत चिकित्सकों और पीजी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से सीखने और नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा।



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हरदोई में पति ने पत्नी की हत्या की: मामूली विवाद के बाद सिलबट्टे से वार कर ली जान, आरोपी फरार – Hardoi News




हरदोई के कासिमपुर थाना क्षेत्र के गौरी दायमपुर गांव में शुक्रवार देर शाम करीब 7 बजे एक पति ने पत्नी की सिलबट्टे से वार कर हत्या कर दी। सिर पर गंभीर चोटें लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पति मौके से फरार हो गया। वारदात के बाद गांव में सनसनी फैल गई। गांव में चर्चा रही कि आरोपी पति अपनी पत्नी को शराब पीकर अक्सर पीटता था। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। गौरी दायमपुर निवासी कुंज बिहारी दिहाड़ी मजदूरी करता है। उसका अपनी 35 वर्षीय पत्नी मोनी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। कुंज बिहारी शराब पीने का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था। नशे की हालत में हुए इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दंपती का तीन साल का बेटा युवराज है। महिला ने आए दिन होने वाले झगड़ों से परेशान होकर उसे पांच दिन पहले ही अपने जेठ भगवान के पुत्र सचिन के साथ दिल्ली भेज दिया था, इसलिए घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं था। बताया गया कि कुंज बिहारी और मोनी की शादी वर्ष 2017 में लखनऊ में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुई थी। मृतका का मायका लखनऊ के चौक क्षेत्र में है। हाल ही में आरोपी ने केसीसी के माध्यम से 60 हजार रुपये बैंक से रुपये भी निकाले थे। वारदात की सूचना मिलते ही सीओ संडीला संतोष कुमार सिंह, कासिमपुर थानाध्यक्ष धनश्याम राम पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सीओ ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। आरोपी की तलाश में टीम लगाई गई है।



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फिल्मों से कम नहीं है डिलीवरी ब्वॉय से एआई स्टार्टअप का फाउंडर बनने की कहानी


Mainak Debnath, Nadia (West Bengal)

नई दिल्ली. सफलता एक दिन में नहीं मिलती है, लेकिन जज्बा और जुनून है तो एक दिन जरूर मिलती है. इस बात को पश्चिम बंगाल के एक युवक ने बखूबी साबित कर दिखाया है. यह कहानी है पश्चिम बंगाल के चकदहा में रहने वाले सूरज विश्वास की. उनका संघर्ष और सफलता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. गंगा की बाढ़ में उनका घर बह गया तो पूरे परिवार ने मामा के घर में शरण ली. शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूरी हुई तो पेट पालने के लिए डिलीवरी पार्टनर तक बनना पड़ा. लेकिन, उनकी मेहनत और जिद ने सूरज के सितारे बुलंद कर दिए और आज वह एक एआई स्टार्टअप के मालिक हैं.

सूरज का जन्म रानाघाट के एक सामान्य परिवार में हुआ था. गंगा की बाढ़ में उनका घर बह गया तो पूरे परिवार ने बालागढ़ स्थित उनके मामा के घर में शरण ली. यहीं पर सूरज की शुरुआती पढ़ाई हुई और बिना बिजली वाले गांव में रहकर उन्होंने स्कूली शिक्षा पूरी की. बाद में चकदहा स्थित बापूजी विद्यामंदिर से 9वीं तक पढ़ाई की, जहां उनके मामा शिक्षक थे. हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए सूरज बंगाल के मेदिनीपुर स्थित स्कूल में आ गए. हालांकि, सूरज स्कूली पढ़ाई नहीं करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पता था कि आगे बढ़ने के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है. हालांकि, बाद में वह बापूजी विद्यामंदिर वापस आकर अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की.

सूरज ने अपने दोस्त के साथ मिलकर एआई स्टार्टअप बनाया.

2017 से ही मिल गया रास्ता
कहते हैं जिंदगी में दबलाव अक्सर हादसे ही लाते हैं. सूरज के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. साल 2017 में उनके छोटे चचेरे भाई को सिस्टिक फाइब्रोसिस नामक एक जेनेटिक बीमारी हो गई और महज 3 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई. इस घटना ने सूरज पर गहरा असर डाला और तभी उन्होंने मेडिकल साइंस, खासकर जेनेटिक्स में रिसर्च करने का मन बना लिया. बस, यहीं से सूरज के जीवन का संघर्ष और सफलता दोनों रास्ता शुरू हो गया.

नीट में आए 601 नंबर
सूरज को पता था कि मेडिकल क्षेत्र का रास्ता नीट के जिरये ही गुजरता है. उन्होंने साल 2019 में राजस्थान के कोटा शहर में जाकर नीट की तैयारी की और साल 2020 में 601 नंबर के साथ परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली. हालांकि, उनके पास प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे. साथ ही उनका सपना भी डॉक्टर बनने का नहीं था. लिहाजा उन्होंने डॉक्टर बनने के बजाय रिसर्च की तरफ जाने का रास्ता चुना.

पहले ही बना चुके थे खुद का एनजीओ
सूरज ने नीट क्लीयर करने से पहले अपने दोस्त के साथ मिलकर एक गैर-लाभकारी संगठन यानी एनजीओ बना चुके थे. अर्नब फाउंडेशन के नाम से चलने वाले इस एनजीओ के तहत माइग्रेंट होकर आए बच्चों की पढ़ाई में मदद की जाती थी. हालांकि, सूरज को यह आभास हो गया था कि सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है. यही वजह रही कि उन्होंने सोदेपुर के गुरु नानक इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एडमिशन ले लिया.

सूरज का एआई स्टार्टअप स्कूली बच्चों को रिसर्च में मदद करता है.

कोरोनाकाल ने दिलाया बड़ा अवसर
कोविड महामारी सभी के लिए तो आपदा लेकर आई लेकिन सूरज ने इसमें अपने लिए अवसर खोज लिया. सारी क्लासेज ऑनलाइन होने लगी तो सूरज बैंगलुरु जा पहुंचे. वहां अपने खर्चे उठाने के लिए जोमैटो के साथ डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम किया. सूरज ने बैंगलुरु के एक स्कूल में दाखिला भी लिया और जब लॉकडाउन खत्म हो गया तो सूरज साल 2022 में वापस कोलकाता लौट गए. यहां आकर अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर स्टार्टअप शुरू किया. बस यहीं से सूरज के कारोबारी जीवन की शुरुआत हो गई.

एआई से लैस स्टार्टअप बनाया
सूरज ने शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और तकनीक के जिरये रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए दो ब्रांड बनाए. Assessli and Dotsin—with के जिरये उन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों को रिसर्च की तरफ बढ़ाने में मदद करना शुरू कर दिया. इस स्टार्टअप को रूस में भारत की ओर से प्रदर्शित किया गया और इसे पेटेंट भी मिल गया. उनके स्टार्टअप को भारत सरकार की ओर से भी निधि प्रयास प्रोग्राम के जरिये सपोर्ट किया जा रहा है.

30 हजार छात्रों को मिल रही मदद
सूरज की एआई कंपनी में आज 25 से ज्यादा प्रोफेशनल काम करते हैं और इसके जिरये सरकारी स्कूलों के 30 हजार से ज्यादा बच्चों को मदद दी जा रही है. उनका स्टार्टअप Assessli एक एआई प्लेटफॉर्म है जो हाईपर-पर्सनलाइज्ड इंटेलीजेंट से बना है. इस एआई प्लेटफॉर्म को एलबीएम से लैस किया गया है, जो बिना भाषाई बाधा के इंटीग्रेटेड जीनोमिक, न्यूरोसाइकोलॉजिकल, साइकोलॉजिकल और बिहैवरल आंकड़ों को जुटाता है और इस पर शोध के लिए छात्रों की मदद करता है. यह हर यूजर को रियल टाइम में जानकारी उपलब्ध कराता है. एक डिलीवरी ब्वॉय से एआई स्टार्टअप के फाउंडर बनने तक का सफर सूरज के लिए आसान नहीं था, लेकिन उनके निरंतर प्रयासों और लक्ष्य पर फोकस ने आखिरकार सफलता दिला ही दी.



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भाजपा बोली- महाराष्ट्र में NCP के दोनों गुट मिल जाएं: फिर एनडीए में शामिल हों; केंद्रीय कैबिनेट में दो पद का भी ऑफर


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मुंबई1 मिनट पहले

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महाराष्ट्र में एनसीपी के दो गुट (सुनेत्रा पवार गुट और शरद पवार गुट) आपस में विलय कर सकते हैं। उन्हें साथ आने का ऑफर NDA की तरफ से मिला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद में इस बार महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने वाली है।

इसीलिए एनडीए के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं।

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने NCP के दोनों गुटों के बीच सत्ता का संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने का भी ऑफर दिया है।

हाल ही में NCP के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुंबई में CM देवेंद्र फडणवीस के घर पर मुलाकात हुई थी।

हाल ही में NCP के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुंबई में CM देवेंद्र फडणवीस के घर पर मुलाकात हुई थी।

शरद पवार गुट और सुनेत्रा पवार गुट के एक साथ आने में 5 चैलेंज…

  • एनसीपी के भीतर ही मतभेद: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में सत्ता बंटवारे को लेकर एक राय नहीं है।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग: सुनेत्रा के बड़े बेटे और सांसद पार्थ पवार चाहते हैं कि विलय के बाद सुनेत्रा पवार एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें और महाराष्ट्र का वित्त विभाग उन्हें मिले।
  • सीनियर लीडर्स की आपत्ति: सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल का कहना है कि सत्ता और पदों का बंटवारा सभी नेताओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
  • अड़े रहे तो मुश्किल: यदि सुनेत्रा गुट राष्ट्रीय अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय और अहम कैबिनेट विभाग पर अड़ा रहता है, तो समझौता कठिन हो सकता है।
  • शरद गुट की सहमति पर सवाल: एनसीपी (शरद पवार) के इन सभी मांगों को स्वीकार करने की संभावना कम मानी जा रही है।
मुंबई में 8 जुलाई को शरद पवार और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।

मुंबई में 8 जुलाई को शरद पवार और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।

उधर शरद गुट की भाजपा-कांग्रेस दोनों से बातचीत

उधर महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट) पार्टी कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों से बातचीत को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 8 लोकसभा सांसद और 10 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं।

दावा है कि कुछ सांसद और विधायक NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ विलय चाहते हैं। शरद पवार कांग्रेस में विलय के लिए तभी तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पवार समर्थक, सुप्रिया सुले को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं।

दूसरी ओर, एक अन्य सूत्र का दावा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा भाजपा और NDA के साथ जाने का समर्थक है। बातचीत में सुप्रिया सुले के लिए केंद्रीय मंत्री पद और पवार समर्थकों के लिए दो मंत्री पद की चर्चा भी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कांग्रेस से अलग होकर बनाई थी NCP

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना 10 जून 1999 को शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने की थी। तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद तीनों ने NCP का गठन किया।

क्या है संख्या बल का गणित?

एनसीपी के एनडीए में शामिल होने से मोदी सरकार संसद में दो तिहाई बहुमत के और करीब आ जाएगी, जो संविधान संशोधन विधेयक पास करने के लिए अहम है। सरकार महिला आरक्षण कानून लागू करने और परिसीमन विधेयक के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटानी की कोशिश कर रही है। अप्रैल में राज्यसभा के विशेष सत्र में सरकार की यह कोशिशें नाकाम हो गई थीं।

इसके बाद से विपक्ष की चार पार्टियों के 37 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। 1985 में दलबदल विरोधी कानून लागू होने के बाद से संसद में विपक्ष से सत्ता में शामिल होने वाले सांसदों का यह सबसे बड़ा बदलाव है।

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NDA का मिशन 360, अब DMK-NCP-सपा में सेंध की तैयारी:लोकसभा में दो-तिहाई का आंकड़ा पाने अब 41 सांसदों की जरूरत

भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सियासी तस्वीर बदलने के लिए ‘मिशन 360’ में जुटे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े बिल पर लोकसभा में झटका लगने के बाद ही भाजपा ने संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति तेज कर दी थी। पूरी खबर पढ़ें…



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मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा: 10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके


कुछ ही क्षण पहले

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मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो शहर में भूकंप के बाद एक इमारत हिलने लगी। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

मेक्सिको के दक्षिणी राज्य चियापास के तट पर शुक्रवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद करीब 10 लाख लोगों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है।

अमेरिकी एजेंसी USGS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो शहर के पास था। यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे आसपास के इलाकों में तेज झटकों की आशंका बढ़ गई है।

US सुनामी वार्निंग सिस्टम ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया है। 7.4 तीव्रता के भूकंप को ‘मेजर’ कैटेगरी में रखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं।

भूकंप के झटके मेक्सिको के पड़ोसी देश ग्वाटेमाला और अल साल्वाडोर में भी महसूस किए गए। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है।

सोशल मीडिया पर भूकंप से जुड़ा यह वीडियो वायरल है…

300 किमी के दायरे में सुनामी का खतरा

अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भूकंप के केंद्र से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं।

सुनामी अलर्ट मुख्य रूप से 3 इलाकों के लिए जारी किया गया है:

चियापास का दक्षिणी प्रशांत तट

ओआक्साका के तटीय इलाके

ग्वाटेमाला से लगे प्रशांत तटीय क्षेत्र

प्रशासन ने लोगों से समुद्र तट और निचले तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। मेक्सिको-ग्वाटेमाला सीमा पर स्थित सुचियाते में समुद्र के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पिछले 30 दिनों में 22 भूकंप दर्ज

भूकंप ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ में आया, जो प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला करीब 40 हजार किलोमीटर लंबा घोड़े की नाल के आकार का इलाका है।

यह दुनिया का सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। यहां दुनिया के करीब 75% सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं और लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं।

पिछले 30 दिनों में इस इलाके में 22 भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें शुक्रवार का 7.4 तीव्रता वाला भूकंप सबसे शक्तिशाली बताया जा रहा है।

भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने कहा कि समुद्र में उठने वाली ऊंची और खतरनाक लहरें तटीय इलाकों में बाढ़ ला सकती हैं। लोगों से संभावित बाढ़, तेज समुद्री धाराओं और ऊंची लहरों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है।

हालांकि, अमेरिका के नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने साफ किया है कि अमेरिका के पश्चिमी तट, ब्रिटिश कोलंबिया और अलास्का के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है।

भूकंप क्यों आते हैं हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

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भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

वेनेजुएला में फिर भूकंप के झटके, अब तक 1430 मौतें:करीब 3300 घायल, 51 हजार लापता; लोग खुद मलबा हटाकर अपनों को तलाश रहे

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून को आए दो भूकंप के बाद स्थानीय समयानुसार शुक्रवार दोपहर को एक और भूकंप आया। देश के उत्तरी तट के पास आए इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, राजधानी कराकास और माराके में भी झटके महसूस किए गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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दिल्ली- हरियाणा सीमा पर बनेगा नया आरसीसी ड्रेन: जलभराव से मिलेगा छुटकारा, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने किया निरीक्षण; अधिकारियों को दिए निर्देश – New Delhi News


दिल्ली में हरियाणा की सीमा पर स्थित गांव में ग्रामीणों की समस्याएं सुनते पीडब्ल्यूडी एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह।

नई दिल्ली। दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित डेरा मंडी और मंडी गांव के निवासियों को जल्द ही जलभराव की समस्या से राहत मिल सकती है। पीडब्ल्यूडी एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने शुक्रवार को डेरा मंडी क्षेत्र का दौरा कर जलभराव, सीवर और सड़क की स्थिति का निर

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निरीक्षण के दौरान मंत्री ने डेरा मंडी रोड के पास मंडी गांव में भारी जलभराव की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से निचला है, जिसके कारण बारिश का पानी यहां एकत्र हो जाता है। पहले यह पानी प्राकृतिक नालों के जरिए हरियाणा की ओर निकल जाता था, लेकिन शहरीकरण और कंक्रीटीकरण के कारण निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं।

बनाया जाएगा नया आरसीसी ड्रेन : प्रवेश

मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी डेरा मंडी रोड से डेरा भाटी रोड होते हुए बांध रोड तक नया प्रीकास्ट आरसीसी ड्रेन बनाएगा। इसके बाद पंपिंग व्यवस्था के माध्यम से पानी को एसएसएन मार्ग ड्रेन में छोड़ा जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था विकसित करना और भविष्य में जलभराव की समस्या को समाप्त करना है।

प्रवेश वर्मा ने कहा कि सरकार केवल हर बारिश के बाद पानी निकालने पर नहीं, बल्कि मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करने पर काम कर रही है। इसके लिए शहर के संवेदनशील इलाकों का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है और जहां जरूरत होगी, वहां दीर्घकालिक समाधान लागू किए जाएंगे।

दिल्ली में डेरा मंडी में निरीक्षण करने के लिए पहुंचे पीडब्ल्यूडी एवं जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह

उन्होंने अधिकारियों को परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र तैयार करने और सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करने के निर्देश दिए। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया।

परियोजना की मुख्य बातें

  • डेरा मंडी रोड से बांध रोड तक बनेगा नया प्रीकास्ट आरसीसी ड्रेन।
  • पंपिंग के जरिए पानी को एसएसएन मार्ग ड्रेन तक पहुंचाया जाएगा।
  • परियोजना का उद्देश्य जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान करना है।
  • पीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियां मिलकर कार्य करेंगी।

जलभराव की वजह

  • क्षेत्र प्राकृतिक रूप से निचला होने के कारण पानी जमा होता है।
  • पहले प्राकृतिक नालों से पानी हरियाणा की ओर निकल जाता था।
  • तेजी से हुए शहरीकरण और कंक्रीटीकरण से निकासी मार्ग बाधित हुए।
  • हर मानसून में सड़क और आवागमन प्रभावित होता है।



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बारिश में पकौड़ों की जगह खाएं बेसन का चीला, मिनटों में तैयार होगा हेल्दी और टेस्टी नाश्ता


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रसोईया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि बेसन का चीला सुबह के नाश्ते के लिए सबसे आसान और हेल्दी रेसिपी में से एक है. बेसन में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है. शरीर को ऊर्जा भी मिलती है। यही वजह है कि यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पसंदीदा डिश मानी जाती है.

बारिश का मौसम आते ही चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़े और समोसे खाने का मन करता है, लेकिन रोज़ाना तली-भुनी चीज़ें खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. खासकर मानसून में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत धीमा हो जाता है. ऐसे में अगर आप स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन चाहते हैं, तो बेसन का चीला एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यह कम समय में तैयार होने वाला, हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता है.

रसोईया प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि बेसन का चीला सुबह के नाश्ते के लिए सबसे आसान और हेल्दी रेसिपी में से एक है. बेसन में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है. शरीर को ऊर्जा भी मिलती है। यही वजह है कि यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पसंदीदा डिश मानी जाती है.इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में जरूरत के अनुसार बेसन लें. इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर, अजवाइन और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद धीरे-धीरे पानी मिलाते हुए एक स्मूद घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि घोल में गुठलियां न रहें और उसकी कंसिस्टेंसी न ज्यादा पतली हो और न ही बहुत गाढ़ी है.

मिनटों में बनाएं कुरकुरा बेसन का चीला
अब एक नॉनस्टिक तवा या पैन को मीडियम आंच पर गर्म करें. फिर एक कलछी की मदद से बेसन का घोल तवे के बीच में डालें और गोल आकार में फैला दें. चीले को एक तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं, फिर पलटकर दूसरी तरफ भी थोड़ा तेल लगाते हुए अच्छी तरह सेक लें. दोनों तरफ से कुरकुरा और सुनहरा होने पर चीले को प्लेट में निकाल लें.प्रियंका सिंह के मुताबिक, हरी मिर्च चीले के स्वाद को. चटपटा बना देती है। हालांकि, जो लोग तीखा पसंद नहीं करते या बच्चों के लिए बना रहे हैं. वे बिना हरी मिर्च के भी इसे आसानी से तैयार कर सकते हैं. बेसन के चीले को हरे धनिए की चटनी, टमाटर सॉस या ताजे दही के साथ परोसें. यह स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है.अगर आप रोज़ के नाश्ते में कुछ नया, झटपट बनने वाला और हेल्दी विकल्प शामिल करना चाहते हैं, तो बेसन का चीला बेहतरीन चुनाव है.



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गुजरात के स्कूल में 147 छात्राएं बीमार: फूड पॉइजनिंग की आशंका, सभी की हालत स्थिर; खाने के सैंपल जांच के लिए भेजे गए


सुरेंद्रनगर19 मिनट पहले

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गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के एक सरकारी आवासीय स्कूल में शुक्रवार को संदिग्ध फूड पॉइजनिंग से 147 छात्राएं बीमार हो गईं। सभी छात्राओं की हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है। उन्हें पेट दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी बी.जी. गोहिल ने बताया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) की 215 छात्राओं में से 147 की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से 102 छात्राओं का इलाज चूड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है, जबकि 45 छात्राओं को सुरेंद्रनगर के दो अस्पतालों में रेफर किया गया है।

गोहिल ने बताया कि छात्राओं ने गुरुवार रात छात्रावास में सब्जी, भाखरी, खिचड़ी और खीर खाई थी। शुक्रवार सुबह उन्हें पेट दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत शुरू हुई। मामले की जांच के लिए भोजन के नमूने एकत्र कर विश्लेषण के लिए भेज दिए गए हैं।

घटना की 5 तस्वीरें…

102 छात्राओं का इलाज चूड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है

102 छात्राओं का इलाज चूड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है

45 छात्राओं को सुरेंद्रनगर के दो अस्पतालों में रेफर किया गया है।

45 छात्राओं को सुरेंद्रनगर के दो अस्पतालों में रेफर किया गया है।

छात्राओं ने गुरुवार रात छात्रावास में सब्जी, भाखरी, खिचड़ी और खीर खाई थी।

छात्राओं ने गुरुवार रात छात्रावास में सब्जी, भाखरी, खिचड़ी और खीर खाई थी।

शुक्रवार सुबह सभी छात्राओं को पेट दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत शुरू हुई।

शुक्रवार सुबह सभी छात्राओं को पेट दर्द, दस्त और उल्टी की शिकायत शुरू हुई।

स्वास्थ्य अधिकािरियों ने खाने के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं।

स्वास्थ्य अधिकािरियों ने खाने के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं।

मामले पर नजर रखी जा रही है: विधायक

इसी बीच, लिमडी के विधायक कीर्तिसिंह राणा अस्पताल पहुंचे और छात्राओं का हाल जाना। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर और प्रांत अधिकारी से बात हो चुकी है तथा पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि छात्रावास का भोजन तैयार करने वाली एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता सभी छात्राओं का बेहतर इलाज और जल्द स्वस्थ होना है।

वहीं, कुछ अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर नाराजगी जताई। अभिभावक अनसूया गनोतरा ने कहा कि उनकी दो बेटियां KGBV में पढ़ती हैं। उन्हें घटना की जानकारी स्कूल से नहीं, बल्कि रिश्तेदार के जरिए मिली। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन को सभी अभिभावकों को तुरंत सूचना देनी चाहिए थी। —————–

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स्कूल में मिड-डे मील खाने से 30 बच्चे बीमार:उल्टी, पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया

अटरू उपखंड क्षेत्र के केरवालिया देवपुरा गांव के सरकारी स्कूल में शुक्रवार को मिड-डे मील खाने के बाद करीब 30 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल एंबुलेंस और निजी वाहनों की सहायता से अटरू, मोठपुर और कवाई के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पूरी खबर पढ़ें…



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Jio के 1600 LEO सैटेलाइट्स से मिलेगा फास्ट इंटरनेट, जल्द शुरू होगी सर्विस?


Jio की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा जल्द शुरू हो सकती है। देश की नंबर-1 टेलीकॉम कंपनी ने स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की दिशा में अहम कदम बढ़ा दिया है। कंपनी के 1600 LEO यानी लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स को तकनीकी तौर पर अंतरिक्ष में पूरी तरह से सही और एलन मस्क की स्टारलिंक (Starlink) के बराबर दमदार माना गया है। देश में अंतरिक्ष मामलों की देखरेख करने वाली संस्था IN-SPACe ने जियो के इन सैटेलाइट्स को अप्रूवल दे दिया है।

पहला पड़ा हुआ पार

जियो के इन सैटेलाइट्स की जांच सरकार की तीन बड़ी संस्थाओं IN-SPACe, ISRO और DoT के वायरलेस प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन विंग (WPC) ने की है। टेस्ट में जियो के ये सैटेलाइट्स पूरी तरह से सभी मानकों पर खड़े उतरे हैं। ये अंतरिक्ष में जल्द भेजे जा सकते हैं, जिसके बाद जियो की सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस को शुरू की जा सकती है।

रिलायंस जियो के इन LEO सैटेलाइट्स को अप्रूवल मिलने का मतलब है कि जल्द ही भारत का अंतरिक्ष में अपना पहला LEO सैटेलाइट नेटवर्क तैयार हो जाएगा। इसका फायदा देश की सुरक्षा और मिलिट्री की रणनीतिक जरूरतों को मिलेगा। फिलहाल LEO सैटेलाइट्स में एलन मस्क की कंपनी Starlink का दबदबा है। SpaceX के ये सैटेलाइट्स पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवा मुहैया करा रहे हैं। स्वदेशी सैटेलाइट्स के स्थापित होने के बाद भारत की निर्भरता विदेशी सैटेलाइट पर कम हो जाएगी।

सैटेलाइट मार्केट में दबदबे की तैयारी

सब्सक्राइबर्स के मामले में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी का सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट को डिसरप्ट करने का है। जियो के इन सैटेलाइट्स के माध्यम से 4.5 से लेकर 5 टेराबिट प्रति सेकेंड की इंटरनेट स्पीड मिल सकेगी। एलन मस्क की कंपनी को भारत में फिलहाल 600 गीगाबिट प्रति सेकेंड की स्पीड से इंटरनेट सेवा देने का अप्रूवल है। वहीं, अमेजन भी भारत में 3 टेराबि प्रति सेकेंड की स्पीड से इंटरनेट मुहैया कराने की योजना तैयार कर रहा है।

बनाए जाएंगे 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन

रिलायंस जियो सैटेलाइट्स की क्षेत्र में कदम रखने वाला है। कंपनी फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस के साथ-साथ डायरेक्ट-टू-डिवाइस जैसी मोबाइल सैटेलाइट सर्विस पर भी काम कर ही है। इसके लिए देश में 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन तैयार किए जाएंगे।

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