Monday, June 22, 2026
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भारत के ब्रह्मोस से दुश्मनों के छक्के छुड़ाएगा UAE, ‘सुदर्शन चक्र’ के लिए भी हो रही डील


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भारत के ब्रह्मोस से दुश्मनों के छक्के छुड़ाएगा UAE, सुदर्शन चक्र के लिए भी डील

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ब्रह्मोस मिसाइल पहले ही अपनी सटीकता, मारक क्षमता और सुपरसोनिक गति के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय रही है. वहीं आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम भारत की स्वदेशी सैन्य तकनीक की नई पहचान बनकर उभरा है.

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यूएई ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए भारत से बातचीत कर रहा है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत का रक्षा निर्यात एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच देश के सबसे घातक और चर्चित रक्षा प्लेटफॉर्म्स की संभावित बिक्री को लेकर बातचीत चल रही है. इस सूची में दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम आकाशतीर प्रमुख रूप से शामिल हैं. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है.

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के बाद यूएई अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से मजबूत करने में जुटा है. ऐसे में उसकी नजर भारत के अत्याधुनिक रक्षा सिस्टमों पर टिकी हुई है. अगर यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह सिर्फ एक रक्षा समझौता नहीं बल्कि वैश्विक हथियार बाजार में भारत की बढ़ती ताकत और रणनीतिक प्रभाव का बड़ा संकेत माना जाएगा.

मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक तीसरे सूत्र ने रॉयटर्स से कहा, “UAE ने ब्रह्मोस और आकाशतीर समेत हमारे कई हथियार सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई है. भारत और UAE के बीच बातचीत शुरुआती दौर में है और तेज़ी से आगे बढ़ रही है.” भारतीय अधिकारियों और UAE के विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोधों का कोई जवाब नहीं दिया.

भारत और रूस द्वारा मिलकर बनाई गई ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में से एक है और इसे ज़मीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किया जा सकता है, जबकि आकाशतीर एक पूरी तरह से ऑटोमेटेड एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे भारत की सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारतीय सेना ने मिलकर बनाया है.

युद्ध के दौरान ईरान के भारी हमलों का सामना करने और उभरते खतरों से निपटने की अपनी क्षमता को बढ़ाने के लिए, UAE भारत और अन्य जगहों से डिफेंस इक्विपमेंट खरीदने पर विचार कर रहा है. उसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा भी करनी है, जो उसके एनर्जी एक्सपोर्ट के लिए एक अहम रास्ता है. इस साल की शुरुआत में, UAE ने डिफेंस सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण कोरिया के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन किया था, जिसकी कीमत 35 अरब डॉलर से ज़्यादा होगी.

कॉन्फ्लिक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप ‘आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा’ की साउथ एशिया सीनियर एनालिस्ट पर्ल पांड्या ने कहा, “सप्लायर बेस में विविधता होने से UAE को ज़्यादा रणनीतिक आज़ादी मिलती है. साथ ही, भारत के साथ करीबी रिश्ते होने का एक अतिरिक्त फ़ायदा यह है कि इससे अमेरिका नाराज़ नहीं होता, क्योंकि दोनों देश सहयोगी हैं.” स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के डेटा के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच मध्य पूर्व (Middle East) को हथियार एक्सपोर्ट करने वाला सबसे बड़ा देश अमेरिका था, जिसने कुल इंपोर्ट का 54% हिस्सा सप्लाई किया. इसके बाद इटली (12%) और फ्रांस (11%) का नंबर आता है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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उदयपुर-झाड़ोल नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: बाइक सवार युवक की मौके पर मौत, दो घायल; पूरी रात सड़क किनारे तड़पते रहे – Udaipur News




उदयपुर के झाड़ोल क्षेत्र में देर रात एक सड़क हादसा हो गया। फलासिया थाना इलाके के नेशनल हाईवे 58-ई पर घोड़ीमारी के पास एक तेज रफ्तार बाइक बेकाबू होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बाइक पर सवार दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घायल युवक पूरी रात खून से लथपथ हालत में सड़क किनारे पड़े तड़पते रहे, लेकिन सुनसान इलाका होने के कारण उन्हें रात में कोई मदद नहीं मिल सकी। यह हादसा उस समय हुआ जब तीनों युवक एक जीप चालक को उसके घर छोड़ने के लिए बाइक पर सवार होकर जा रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक घोड़ीमारी के पास पहुंची, अचानक संतुलन बिगड़ गया और बाइक सीधे हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, बाकी के दो युवक गंभीर चोटों के कारण हिल भी नहीं पाए और रातभर मदद का इंतजार करते रहे। सुबह जब उजाला हुआ और वहां से गुजर रहे स्थानीय लोगों की नजर घायलों पर पड़ी, तो इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत इस बात की सूचना फलासिया थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही फलासिया थाने से पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत पास के अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन इनमें से एक युवक की हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए उदयपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर झाड़ोल उपजिला चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया है, जहां परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जाएगी। फलासिया थाना के एएसआई चंदूलाल ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब हादसे के असली कारणों का पता लगाने में जुटी है कि बाइक की टक्कर किसी अज्ञात वाहन से हुई थी या फिर संतुलन बिगड़ने की वजह से यह हादसा हुआ।



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एक महिला, 12 महिलाओं को रोजगार! गोंडा की राधा देवी ने पेश की मिसाल


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उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की राधा देवी प्रजापति ने सीमित शिक्षा और घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने जड़ी-बूटियों और हर्बल उत्पादों का व्यवसाय शुरू किया, जो आज एक सफल उद्यम का रूप ले चुका है. उनकी मेहनत और लगन न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार और प्रेरणा दे रही है.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक महिला ने अपनी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर जिंदगी की पूरी तस्वीर बदल दी है. कभी केवल घरेलू कामकाज और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली राधा देवी प्रजापति आज एक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बेहतरीन हर्बल उत्पाद तैयार कर रही हैं. इस बिजनेस से वह सालाना लाखों रुपये की शानदार आय अर्जित कर रही हैं. उनकी इस अनोखी सफलता की कहानी आज पूरे क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी है.

राधा देवी प्रजापति बताती हैं कि उन्होंने सिर्फ कक्षा 5वीं तक ही पढ़ाई की थी, जिसके बाद काफी कम उम्र में उनकी शादी हो गई और वह एक साधारण हाउसवाइफ बन गईं. उनके ससुराल में पहले से पारंपरिक रूप से जड़ी-बूटियों का थोड़ा-बहुत काम होता था. उसी काम को देखकर और समझकर उन्होंने जड़ी-बूटी के क्षेत्र में एक नई शुरुआत करने की ठानी, जो आज एक बड़े और सफल बिजनेस का रूप ले चुका है. राधा देवी ने बताया कि उनके इस ग्रुप का नाम ‘कलम स्वयं सहायता समूह’ है.

राधा देवी बताती हैं कि कुछ साल पहले तक उनके पास आमदनी का कोई स्थायी जरिया नहीं था. घर की जिम्मेदारियों के बीच वह हमेशा से परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें कोई सही मौका नहीं मिल पा रहा था. इसी दौरान उन्हें स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला और वह उससे जुड़ गईं. समूह का हिस्सा बनने के बाद उन्हें सरकार की तरफ से कई तरह के जरूरी प्रशिक्षण दिए गए, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया.

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राधा देवी ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें औषधीय पौधों की सही पहचान, उनकी वैज्ञानिक खेती, प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग की बारीकियां सिखाई गईं. इसके बाद उन्होंने अपने घर से ही जड़ी-बूटियों और हर्बल उत्पादों को तैयार करने का काम शुरू कर दिया. शुरुआत में यह काम बेहद छोटे स्तर पर था, लेकिन जैसे-जैसे लोगों को उनकी शुद्धता पर भरोसा होता गया, बाजार में उनके प्रोडक्ट की मांग भी तेजी से बढ़ती चली गई.

आज राधा देवी अपने समूह के साथ मिलकर तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, शतावरी, मकोय का अर्क, गुलाब का अर्क और शुद्ध च्यवनप्राश समेत कई औषधीय पौधों से जुड़े बेहतरीन उत्पाद तैयार कर रही हैं. इन जड़ी-बूटियों को खेतों से लाने के बाद पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है, फिर धूप में सुखाकर और कूट-पीसकर अलग-अलग उत्पाद बनाए जाते हैं. इसके बाद इनकी बढ़िया से पैकेजिंग कर इन्हें बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है. राधा देवी का कहना है कि आज के समय में लोग सेहत को लेकर जागरूक हो रहे हैं, इसलिए उनके आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री बहुत अच्छी होती है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत हो गई है.

राधा देवी गर्व से बताती हैं कि आज उनके इस सेंटर पर लगभग 10 से 12 स्थानीय महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं, और सीजन के समय जब काम बढ़ता है, तो यह संख्या और ज्यादा हो जाती है. उन्होंने बताया कि आज जड़ी-बूटी के इसी बिजनेस से उनका पूरा परिवार बेहद सम्मान के साथ चल रहा है. कमाई का मुख्य जरिया यही काम है, जिससे अब उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं और घर के सारे खर्चे आसानी से पूरे हो जाते हैं. उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में खुद को आत्मनिर्भर बना सकती हैं.

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UP में बिजली मांग का रिकॉर्ड टूटा: 21 जून की रात 32,348 मेगावाट बिजली सप्लाई की, महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ा – Uttar Pradesh News



उत्तर प्रदेश में बिजली मांग और सप्लाई का पिछला सभी रिकॉर्ड टूट गया। रविवार यानी 21 जून की रात 10:47 बजे बिजली की मांग 32,348 मेगावाट पहुंची, जो अब तक की सर्वाधिक है। उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ दिया है। अब देश में सबसे अधिक बिजली की मां

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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी बिजली की इस अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए बिजली कर्मियों को बधाई दी है। महाराष्ट्र में 13 मई को अधिकतम बिजली की मांग 32,317 मेगावाट पहुंची थी। अब यूपी ने इसे भी पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश में 21 जून को कुल 67.7 करोड़ यूनिट बिजली की खपत दर्ज हुई। यह भी देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है।



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घर पर आ रहे मेहमान? दावत में शामिल करें छत्तीसगढ़ की फेमस कढ़ी भजिया, मिनटों में होती तैयार


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Recipe: घर में आ रहे मेहमान? दावत में शामिल करें छत्तीसगढ़ की फेमस कढ़ी भजिया

 

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Chhattisgarhi Kadhi Bhajiya Recipe: अगर घर पर वेजिटेरियन मेहमान खाने पर आ रहे हैं और आप परेशान हैं कि दावत में क्या-क्या रखें तो यह आपके काम की खबर है. आप खाने में छत्तीसगढ़ की फेमस कढ़ी भजिया शामिल कर सकते हैं. इसे छत्तीसगढ़ में गांव से लेकर शहर तक बड़े चाव से खाया जाता है. खासकर गर्मी के मौसम में लोग इसे पसंद करते हैं. यह मिनटों में तैयार हो जाती है. हालांकि इसे बनाने का पारंपरिक तरीका है. बालोद की टामिन बाई पटेल पिछले 20 साल से इस रेसिपी को बनाती आ रही हैं. उन्होंने अपनी मां से इस खास रेसिपी को सीखा है. उन्होंने वीडियो में हर एक स्टेप की जानकारी शेयर की है. इसे बनाने के लिए बेसन, दही, जीरा, सरसों चाहिए. आपको बता दें कि मीठे नीम के तड़के का अनोखा स्वाद इस डिश को खास बनाता है. इस डिश को चावल के साथ परोसा जाता है. यह डिश न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि पाचन के लिहाज से भी हल्की मानी जाती है. वीडियो में देखिए इसे बनाने की पूरी विधि…

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2 फिल्मों में थी एक जैसी कहानी, एक जैसा गाना, दोनों ने की बंपर कमाई, मेकर्स हुए मालामाल


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जिस गाने को टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया हो, अगर वही गाना आइकॉनिक बन जाए तो इसे चमत्कार ही कहा जाएगा. गाने की खूबी यही थी कि दर्शकों का ध्यान बैकग्राउंड पर गया ही नहीं. डायरेक्टर ने आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए जैसे-तैसे फिल्म बनाई. फिल्म के हीरो-हीरोइन ने फ्री में काम किया. बहुत मुश्किल से फिल्म रिलीज हुई लेकिन दर्शकों का रिस्पांस ही नहीं मिला. सबको लग रहा था कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया गाना आइकॉनिक सॉन्ग बन गया.

जिस स्क्रिप्ट को देवानंद, प्रकाश मेहरा और जीतेंद्र जैसे स्टार अभिनेता ठुकरा चुके हों, जिस गाने को देवानंद की फिल्म से निकाल दिया गया हो, वही फिल्म-गाना इतिहास रच दें तो इसे क्या जाएगा. 48 साल पहले आई एक फिल्म के साथ ऐसा ही हुआ था. रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर प्रोड्यूसर ने रिस्क लिया. फिल्म जब बन रही थी, तब एक हादसे में प्रोड्यूसर का निधन हो गया. डायरेक्टर ने कर्ज लेकर फिल्म को पूरा किया. जब फिल्म रिलीज हुई तो तीन दिन तक थिएटर खाली रहे. फिर कुछ ऐसा हुआ कि यही फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. टूटे-फूटे सेट पर फिल्माया गया आइकॉनिक सॉन्ग बन गया. यह मूवी ‘डॉन’ थी जिसके लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

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‘डॉन’ को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है’ डायलॉग सुनते ही अमिताभ बच्चन का चेहरा आंखों के सामने तैरने लगता है. कुछ फिल्में ही ऐसी होती है जो अपने डायलॉग और गीत-संगीत की वजह से अमर हो जाती हैं. ‘डॉन’ मूवी इसी कैटेगरी की फिल्म है जो कि 12 मई 1978 को रिलीज हुई थी. डॉन फिल्म को चंद्रा बरोट ने डायरेक्ट किया था. प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन-जीनत अमान लीड रोल में थे. इसके अलावा, हेलेन, प्राण, ओम शिवपुरी, इफ्तिखार, कमल कपूर अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी ने कंपोज किया था. स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. गीतकार अनजान और इंदीवर थे. गीतकार इंदीवर ने फिल्म का सिर्फ एक आइकॉनिक गाना ‘ये मेरा दिल, प्यार का दीवाना’ लिखा था. बाकी गाने अनजान ने लिखे थे.

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फिल्म के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी कैमरामैन थे. वो प्रोड्यूसर बने और ‘जिंदगी जिंदगी’ (1972) नाम से एक फिल्म बनाई थी. फिल्म फ्लॉप रही और नरीमन पर 12 लाख का कर्जा हो गया. उन्हीं दिनों वो मनोज कुमार की फिल्म, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में काम कर रहे थे. अमिताभ बच्चन-जीनत अमान-प्राण ने उन्हें एक और फिल्म बनाने का सुझाव दिया. साथ ही फ्री में काम करने का वादा किया.
नरीमन स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी सलीम-जावेद के पास पहुंचे. ‘डॉन’ फिल्म की रेडीमेड स्क्रिप्ट ले आए. इस स्क्रिप्ट को देवानंद, जीतेंद्र और प्रकाश मेहरा ठुकरा चुके थे. स्क्रिप्ट का कोई नाम भी नहीं था. सलीम खान ने उनसे कहा था, ‘हमारे पास एक ब्रेकफास्ट स्क्रिप्ट पड़ी है जो कोई नहीं ले रहा है.’ नरीमन ने कहा चलेगा. इस तरह से ‘डॉन’ फिल्म के बनने का सिलसिला शुरू हुआ.

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चंद्रा बरोट के निर्देशन में फिल्म बन ही रही थी कि नरीमन हादसे का शिकार हो गए. उनका निधन हो गया. चंद्रा बरोट ने अपनी बहन से 40 हजार का कर्जा लेकर जैसे-तैसे फिल्म पूरी की. फिल्म बिना प्रमोशन के रिलीज की गई. पूरे एक हफ्ते तक थिएटर में दर्शक इस फिल्म को देखने नहीं आए. फिर कुछ ऐसा हुआ कि इस मूवी ने इतिहास ही रच दिया. डॉन फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले. किशोर कुमार को ‘खइके पान बनारस वाला’ के लिए जबकि आशा भोसले को ‘ये मेरा दिल प्यार का दीवाना’ गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. अमिताभ बच्चन ने यह अवॉर्ड प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी को फैमिली को दे दिया था.

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‘डॉन’ फिल्म का म्यूजिक सुपर-डुपर हिट था. फिल्म का सबसे आइकॉनिक गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ अमिताभ बच्चन की पहचान बन गया. डायरेक्टर चंद्रा बरोट आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. ऐसे में उन्होंने इस गाने को मुंबई के एक तबेले में शूट किया. अनजान ने गाना लिखा था. वैसे यह गाना देवानंद की फिल्म ‘बनारसी बाबू’ (1973) के लिए लिखा गया था. गाने में तबेला-भैंस-गोबर सब नजर आता है. यह अलग बात है कि दर्शकों इस गाने के पीछे को असलियत को नहीं समझ पाए. पूरा गाना 3-4 दिन में शूट हुआ था. करीब 40-0 शॉट्स लिए गए थे. हर शॉट के 3-4 रीटेक थे. अमिताभ बच्चन पान नहीं खाते. गाने के लिए उन्हें कई पान चबाने पड़े. कत्थे और चूने के चलते उनकी जीभ जल गई थी. पूरे एक माह अमिताभ बच्चन को ठीक होने में लगे थे.

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‘खइके पान बनारस वाला’ गाना 2006 में आई शाहरुख खान की ‘डॉन’ फिल्म में भी रखा गया था. इस गाने को उदित नारायण ने गाया था. मशहूर गीतकार-स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने इस फिल्म का ‘डॉन’ का रीमेक बनाया था. फरहान ने 2001 में ‘दिल चाहता है’ से बतौर डायरेक्टर अपने करियर की शुरुआत की थी. प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी-फरहान अख्तर थे. 2006 में आई डॉन में शाहरुख खान के अलावा, प्रियंका चोपड़ा, अर्जुन रामपाल, ईशा कोप्पिकर, बोमन ईरानी, पवन मल्होत्रा, राजेश खट्टर, करीना कपूर और ओम पुरी नजर आए थे. म्यूजिक शंकर-अहसान-लॉय का था. फिल्म का एक गाना ‘आज की रात’ बहुत फेमस हुआ था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.

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डॉन फिल्म की की शूटिंग 1974 में शुरू हुई थी. 1978 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. मजेदार बात यह है कि डॉन फिल्म की कहानी 1962 में आई फिल्म ‘चाइना टाउन’ से इंस्पायर्ड थी. डॉन फिल्म ने 7.2 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहित मूवी साबित हुई थी.

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OnePlus 13 की कीमत धड़ाम, कम दाम में मिल रहा वनप्लस का तगड़ा फोन


OnePlus के पिछले साल लॉन्च हुए फ्लैगशिप फोन की कीमत में भारी कटौती की गई है। यह फोन लॉन्च प्राइस से हजारों रुपये सस्ते में मिल रहा है। ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन पर फोन की कीमत काफी कम हो गई है। इसके अलावा फोन की खरीद पर बैंक डिस्काउंट और एक्सचेंज ऑफर का भी लाभ मिल रहा है। इस तरह से फोन को लगभग आधी कीमत में घर ला सकते हैं। यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite चिपसेट और 16GB रैम जैसे फीचर्स को सपोर्ट करता है।

OnePlus 13 पर ऑफर

वनप्लस का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 12GB RAM + 256GB और 16GB RAM + 512GB में सेल के लिए उपलब्ध है। इस फोन को 69,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। वहीं, इसका 12GB रैम वाला वेरिएंट 72,999 रुपये में पेश हुआ था। अमेजन पर यह फोन 57,999 रुपये की प्राइस में लिस्ट किया गया है।

इस तरह फोन की कीमत में 15,000 रुपये की कटौती की गई है। इसके अलावा 3,000 रुपये का इंस्टैंट डिस्काउंट मिल रहा है। ऐसे में फोन को 54,999 रुपये की कीमत में घर ला सकते हैं। वहीं, इस फोन की खरीद पर 36,050 रुपये का एक्सचेंज ऑफर दिया जा रहा है।

OnePlus 13 के फीचर्स

वनप्लस का यह स्मार्टफोन 6.82 इंच के QHD+ डिस्प्ले के साथ आता है। चीनी ब्रांड ने अपने इस फोन में LTPO AMOLED डिस्प्ले यूज किया है। यह डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 4,500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। फोन के डिस्प्ले में सिरैमिक गार्ड दिया गया है। इसमें IP68 और IP69 रेटिंग दी गई है, जिसकी वजह से फोन पानी में भींगने और धूल-मिट्टी में खराब नहीं होगा।










OnePlus 13 फीचर्स
डिस्प्ले 6.82 इंच, QHD+, 120Hz
प्रोसेसर Qualcomm Snapdragon 8 Elite
स्टोरेज 16GB, 512GB
कैमरा 50MP + 50MP + 50MP, 32MP
बैटरी 6000mAh, 100W, 50W
OS Android 15, OxygenOS 15

यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite चिपसेट पर काम करता है। फोन में 16GB रैम और 512GB स्टोरेज तक का सपोर्ट मिलता है। इसमें 6000mAh की बैटरी दी गई है। इसके साथ 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग फीचर दिया गया है। यह Android 15 पर बेस्ड OxygenOS 15 पर काम करता है। कैमरे की बात करें तो इसके बैक में 50MP का मेन, 50MP का पेनोरमिक और 50MP का पेरीस्कोप कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 32MP का कैमरा दिया गया है।

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गोपालगंज में दो छात्रों की बाइक गड्ढे में पलटी, मौत: बारात से लौटते समय हुआ हादसा, सुबह खाई में मिले शव – Gopalganj News




गोपालगंज के उचकागांव थाना क्षेत्र के संत मोड़ के पास मंगलवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। शादी समारोह से लौट रहे दो छात्रों की बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में पलट गई। हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान उचकागांव थाना क्षेत्र के हरपुर बाजार गांव निवासी गौरी शंकर मांझी के 17 वर्षीय बेटे और राजकपूर मांझी के 22 वर्षीय बेटे जिम्मी कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बारात से लौटते समय हुआ हादसा, तेज रफ्तार बनी वजह जानकारी के अनुसार, दोनों युवक एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। रात में शादी समारोह खत्म होने के बाद दोनों एक ही बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान संत मोड़ के पास बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। बताया जा रहा है कि बाइक की रफ्तार काफी तेज थी, जिस कारण चालक अपना संतुलन नहीं संभाल सका। देखते ही देखते बाइक सड़क किनारे स्थित गहरे गड्ढे में जा गिरी। हादसा इतना जोरदार था कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दोनों युवकों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। रातभर खाई में पड़े रहे शव, सुबह ग्रामीणों को मिली जानकारी घटना देर रात की होने के कारण आसपास के लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। सुनसान रास्ता होने के कारण दोनों युवक काफी देर तक खाई में पड़े रहे। सुबह जब स्थानीय ग्रामीणों की नजर सड़क किनारे गड्ढे में पड़ी क्षतिग्रस्त बाइक पर गई तो उन्होंने पास जाकर देखा। वहां दोनों युवकों के शव पड़े हुए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही उचकागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को बाहर निकलवाया। पुलिस ने शवों की पहचान कर परिजनों को घटना की जानकारी दी। दोनों थे पढ़ाई करने वाले छात्र, परिवार में छाया मातम परिजनों के अनुसार, दोनों युवक पढ़ाई कर रहे थे। जिम्मी कुमार बीए पार्ट-1 का छात्र था, जबकि दूसरा युवक 10वीं कक्षा में पढ़ता था। दोनों दो भाइयों में सबसे छोटे बताए जा रहे हैं। कम उम्र में दोनों बेटों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना की सूचना मिलने के बाद गांव में बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। पुलिस ने शव भेजा पोस्टमॉर्टम के लिए, जांच जारी उचकागांव थाना पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को भी अपने कब्जे में लिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसे की वजह तेज रफ्तार और बाइक का अनियंत्रित होना सामने आ रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना की पूरी जानकारी जुटा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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दुनिया की पहली ब्रांडेड शराब, 400 सालों से हिट, ज्वालामुखी का पानी और जौ का मेल


उत्तरी आयरलैंड के एंट्रिम काउंटी में अटलांटिक की हवाएं बेसाल्ट की चट्टानों से टकराती हैं. यहीं बश नदी के किनारे बसा है एक छोटा सा कस्बा बशमिल्स. इसी कस्बे से निकली है जौ से बनाई गई दुनिया की सबसे पुरानी लाइसेंसशुदा शराब. 400 सालों से उसकी डिस्टिलरी आज भी काम कर रही है. इसकी भी कहानी रोचक है और इसको बनाने का तरीका बहुत ही गजब का.

इसकी असल कहानी 1276 में शुरू होती है. सर रॉबर्ट सावेज नाम के एक योद्धा ने युद्ध से पहले अपने सैनिकों को एक्वा विते पिलाया, इसे जीवन का जल कहा गया. यहीं एक्वा विते आगे चलकर उस्के बीथा और फिर व्हिस्की बनी. बुशमिल्स की जमीन पर शराब बनाने की परंपरा आधिकारिक दस्तावेजों से भी सैकड़ों साल पुरानी है.

(BUSHMILLS OFFICIAL SITE)

418 साल पहले मिला लाइसेंस

20 अप्रैल 1608 को इंग्लैंड के राजा जेम्स ने इस इलाके के जमींदार सर थामस फिलिप्स बशमिल्स क्षेत्र में शराब बनाने का शाही लाइसेंस दिया. ये लाइसेंस इसलिए दिया गया, क्योंकि उस समय तक यहां शराब बनाना एक छुपा हुआ, गैर-कानूनी धंधा था – छोटे किसानों का पसंदीदा शगल. राजा ने सोचा, अगर लोग बनाते ही हैं, तो सरकारी टैक्स भी आए. ये लाइसेंस अगले सात सालों के लिए था. इसमें सर थामस को एक्वा विते, उस्काबैग और एक्वा कंपोसिता बनाने और बेचने की अनुमति दी गई. वर्ष 1608 की तारीख आज भी हर बशमिल्स की बोतल के लेबल पर छपी होती है.

1784 में ओल्ड बशमिल्स डिस्टिलरी को आधिकारिक रूप से रजिस्टर किया. इसका रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क बनाया. तांबे का पारंपरिक भट्टी जैसा बर्तन, जिसे पॉट स्टिल कहते हैं, 300 सौ सालों से इसका ब्रांड चिह्न बना हुआ है.

हमेशा जौ से बनने वाली शराब

19वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश सरकार ने जब माल्ट टैक्स लगाया तो इस टैक्स से बचने के लिए अधिकांश आयरिश डिस्टिलरियों ने जौ की जगह मकई और दूसरे सस्ते अनाज इस्तेमाल करने शुरू कर दिया. लेकिन बशमिल्स ने अपनी जिद कायम रखी. शुद्ध माल्ट व्हिस्की बनाना जारी रखा. यही उसकी अनूठी पहचान बन गई.

बशमिल्स का लोगो पॉट स्टिल का प्रतीक, जो डिस्टिलरी के लंबे इतिहास को दिखाता है. (BUSHMILLS OFFICIAL SITE)

आग से डिस्टलरी खाक, फिर बनाई

1885 में एक भयंकर आग ने पुरानी बशमिल्स बिल्डिंग को जला कर राख कर दिया लेकिन यह डिस्टिलरी मरने वालों में नहीं थी. मांग इतनी ज़बरदस्त थी कि आग के बाद तुरंत इसे फिर से बनाया गया. पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू हो गया.

इस तरह पूरी दुनिया पीने लगी इसे

1890 में डिस्टिलरी के अपने स्वामित्व वाले स्टीमशिप एसएस बशमिल्स ने अटलांटिक महासागर पार कर अमेरिका की ओर पहली यात्रा की. तब फिलाडेल्फिया और न्यू यॉर्क सिटी में बशमिल्स व्हिस्की पहुंचाई. फिर वहां से ये सिंगापुर, हांगकांग, शंघाई और जापानी शहर योकोहामा तक पहुंची. एक छोटे-से आयरिश कस्बे की शराब अब पूरी दुनिया पीने लगी.

1920 में अमेरिकी प्रतिबंध ने आयरिश व्हिस्की उद्योग पर भारी चोट की, लेकिन बशमिल्स ने किसी तरह खुद को बचाए रखा. डिस्टिलरी के तत्कालीन निदेशक विल्सन बॉयड ने प्रतिबंध जल्दी खत्म होने की भविष्यवाणी की. बड़ी मात्रा में व्हिस्की के भंडार तैयार करने शुरू कर दिए, कि पाबंदी हटते ही अमेरिका में इसे तेजी से भेजा जा सके.

बशमिल्स की पहचान उसकी ट्रिपल डिस्टिलेशन प्रक्रिया है, जो इसे एक हल्का, फलयुक्त और बेहद चिकना स्वाद देती  (BUSHMILLS OFFICIAL SITE)

तीन बार डिस्टिल

बशमिल्स की खासियत सिर्फ उसकी उम्र में नहीं, उसके बनाने के तरीके में है. बशमिल्स का पानी बश नदी से आता है, जो बेसाल्ट की चट्टानों के ऊपर से बहता है. यह ज्वालामुखीय चट्टानें पानी को एक अनोखा खनिज संतुलन देती हैं जो व्हिस्की के स्वाद में घुल जाता है. सभी सिंगल माल्ट व्हिस्की को पारंपरिक के पॉट स्टिल में तीन बार डिस्टिल किया जाता है. दुनिया की अधिकांश स्कॉच व्हिस्की केवल दो बार डिस्टिल होती हैं – ये तीसरी बार की प्रक्रिया बशमिल्स को उसकी प्रसिद्ध स्मूदनेस देती है.

ये सौ फीसदी आइरिस माल्टेड जौ से बनाई जाती है और इसकी डिस्टिलरी एक ही है. अलग-अलग एक्सप्रेशंस के लिए अलग-अलग बैरल के पुराने खोल इस्तेमाल किये जाते हैं. जितने साल बैरल में बीतते हैं, व्हिस्की का रंग उतना गहरा और स्वाद जटिल हो जाता है.

केवल बोतल नहीं बल्कि इतिहास भी

सालाना 90 लाख लीटर उत्पादन क्षमता के साथ बशमिल्स आयरलैंड की दूसरी सबसे बड़ी व्हिस्की डिस्टिलरी है. दोनों वर्ल्ड वार, आग और प्रतिबंध के बाद भी ये व्हिस्की ब्रांड 400 सालों से दौड़ रहा है. बशमिल्स की हर बोतल में सिर्फ व्हिस्की नहीं, पूरा एक इतिहास बंद है.

ये है बशमिल्स की सबसे पुरानी डिस्टलरी, जहां 400 सालों से ये व्हिस्की बनाई जा रही है. (BUSHMILLS OFFICIAL SITE)

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, बेलफास्ट में डिस्टिलरी के मुख्य कार्यालय और गोदामों पर जर्मन बमबारी हुई, जिससे सारे दस्तावेज़ और बड़ी मात्रा में व्हिस्की नष्ट हो गई. इस नुकसान के बावजूद बशमिल्स ने युद्ध प्रयासों में हिस्सा लिया. अमेरिकी सैनिकों को ठहराने के लिए उत्पादन धीमा कर दिया. बशमिल्स का जिक्र फिल्मों, गीतों और टीवी शोज़ में कई बार हुआ है, जो इसकी सांस्कृतिक पहचान को दिखाता है.

आपको ये भी बता दें कि ये भी एक रिकॉर्ड है कि 400 सालों से ये ब्रांड पूरी दुनिया में बिक रहा है और भारत में भी ये बिकती हुई मिल जाएगी.

डिस्टिलरी का भूत – द ग्रे लेडी

बशमिल्स की एक रहस्यमयी कहानी भी है. ऐसा कहा जाता है कि सबसे पुरानी इस डिस्टिलरी में “द ग्रे लेडी” नाम की एक आत्मा घूमती है. कहानी के अनुसार, डिस्टिलरी के सामने रहने वाले जॉर्ज और मार्गरेट नाम के एक बुज़ुर्ग दंपति में जॉर्ज एक दिन अपने कुत्ते को घुमाने निकले. फिर कभी वापस नहीं लौटे. मार्गरेट ने अपनी मृत्यु तक डिस्टिलरी के आस-पास उन्हें खोजा. आज भी आगंतुकों और कर्मचारियों को वहां ठंडक महसूस होने और ताले बंद दरवाज़ों के अपने आप खुलने जैसी अजीब घटनाओं का अनुभव होता है.



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गोहत्या के विरोध में हिंदू संगठनों का चक्काजाम: खंडवा-मूंदी रोड़ पर सिहाड़ा में प्रदर्शन, आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग – Khandwa News




बकरीद के दौरान गोहत्या प्रकरण को लेकर सोमवार को हिंदू संगठनों ने खंडवा-मूंदी रोड स्थित सिहाड़ा गांव में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उनके मकानों को बुलडोजर से तोड़ने की मांग उठाई। करीब दो घंटे तक चले आंदोलन के कारण मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता सिहाड़ा गांव में एकत्रित हुए और सड़क पर बैठकर चक्काजाम शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गोहत्या जैसे गंभीर मामले में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाएं समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, इसलिए प्रशासन को सख्त संदेश देने की आवश्यकता है। दो घंटे तक बाधित रहा यातायात
चक्काजाम के चलते खंडवा से मूंदी, पुनासा और आसपास के क्षेत्रों की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सड़क के दोनों ओर यातायात प्रभावित होने से यात्रियों, विद्यार्थियों और अन्य राहगीरों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। कई वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। भारी पुलिस बल रहा तैनात
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मोघट रोड थाना पुलिस के अलावा जिले के अन्य थानों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर मौके पर तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पूरे आंदोलन के दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। आरोपियों के मकान तोड़ने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने मांग रखी कि गोहत्या प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के मकानों को ध्वस्त किया जाए तथा उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। समझाइश के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
करीब दो घंटे तक चले चक्काजाम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। दोपहर करीब 2 बजे यातायात को पुनः सुचारू कराया गया, जिसके बाद सड़क पर वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकी।



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