Thursday, June 4, 2026
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चीन की ह‍िमाकत पर अरुणाचल के सीएम बोले- यह 1962 वाला दौर नहीं


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अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने चीन के दावों को खारिज कर कहा, हमारी सीमा तो चीन से लगती ही नहीं. हमारी सीमा तो तिब्बत से लगती है. उन्‍हें याद रखना चाह‍िए क‍ि यह 1962 का दौर नहीं. मोदी सरकार में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है.

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अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू.

चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश को अपना ह‍िस्‍सा बताता है. यहां तक क‍ि अरुणाचल प्रदेश के कई जगहों के नाम भी खुद बदलता रहता है. एक बार फ‍िर जब उसने यह ह‍िमाकत की तो अरुणाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पेमा खांडू ने उसे जवाब द‍िया है. पेमा खांडू ने कहा क‍ि चीन कौन होता है, हमारे बारे में बात करने वाला. हमारा बॉर्डर तो चीन नहीं लगता. हमारा र्बॉर्डर तो त‍ि ब्‍बत से लगता है. सीएम पेमा खांडू ने चीन को 1962 का वक्‍त याद द‍िलाया.

अरुणाचल प्रदेश के सीएम ने कहा, अरुणाचल प्रदेश बेहद सुरक्षित है, और हमारी सीमा चीन से नहीं, बल्कि तिब्बत से लगती है. हमारा बॉर्डर केवल त‍िब्‍बत से लगता है. यह 1962 वाला दौर नहीं है. उस दौर के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की तुलना आज के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से करना सरासर गलत है. यह 2026 का युग है – नए भारत और विकसित भारत का युग. आजकल, हमारे सभी बॉर्डर इलाकों में कश्मीर क्षेत्र से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, मैं विशेष रूप से सभी उत्तरी सीमाओं की बात कर रहा हूं, जबरदस्‍त काम हुआ है.

चीन के दावों को हम गंभीरता से नहीं लेते

पेमा खांडू ने बॉर्डर इलाकों में हुए काम की तारीफ करते हुए कहा क‍ि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विकास को जिस तरह से बढ़ावा दिया है, उससे ये क्षेत्र अत्यधिक सुलभ हो गए हैं. अब ऐसी सुव‍िधाएं हो गई हैं, जब हमारी फौज को तुरंत मदद म‍िल सकती है. फौज तुरंत एक्‍शन ले सकती है. रही बात चीन के दावे क‍ी तो यह हमारे ल‍िए कोई नई बात नहीं है और हम इस तरह के दावों की परवाह नहीं करते. हम इसे गंभीरता से नहीं लेते…

चीन की ह‍िमाकत को भारत ने बताया शरारत

हाल ही में चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा दोहराते हुए वहां के कई स्थानों के नाम बदलने की सूची जारी की थी. बीजिंग अरुणाचल प्रदेश को जांगनान यानी दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है और दावा करता है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से तिब्बत से जुड़ा रहा है. अप्रैल 2026 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के भीतर स्थित कई पहाड़ों, दर्रों, नदियों और बस्तियों को नए चीनी नाम दिए. भारत ने इस कदम को शरारतपूर्ण और काल्पनिक दावों पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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बिना गलती के भी पिटती थीं तृप्ति डिमरी, ‘मां बहन’ के प्रमोशन में खोला खोला घर का ये राज!


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“बचपन में बिना गलती के भी पिट जाती थीं तृप्ति डिमरी! नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘मां बहन’ के प्रमोशन के दौरान एक्ट्रेस ने खोले अपने बचपन के वो मजेदार राज, जिन्हें सुन आपको भी अपने दिन याद आ जाएंगे, नीचे पढ़ें पूरी खबर.

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नई दिल्ली: तृप्ति डिमरी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर बेहद खुश और एक्साइटेड हैं. यह फिल्म आज यानी 4 जून को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म के प्रमोशन के दौरान तृप्ति ने अपने बचपन के दिनों को याद किया और कुछ ऐसे मजेदार किस्से सुनाए, जिन्हें सुनकर हर किसी को अपना बचपन याद आ जाएगा. आईएनएस के दिए इंटरव्यू में तृप्ति ने हंसते हुए बताया कि बचपन में उन्हें अपने माता-पिता से खूब मार पड़ती थी.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बचपन में माता-पिता की मार से कोई नहीं बचा होगा, सबने कभी न कभी तो मार खाई ही होगी. जब मैं बड़ी हो रही थी, तब तो मेरी बहुत ज्यादा कुटाई होती थी.”

जब बिना बात के ही पड़ जाती थी डांट

तृप्ति ने आगे बड़े ही मजाकिया अंदाज में एक किस्सा शेयर किया. उन्होंने कहा, “कभी-कभी तो ऐसा होता था कि जिस दिन मेरी कोई गलती नहीं होती थी, उस दिन भी मुझे मार पड़ जाती थी. मैं जब बाहर से घर लौटती थी और बहुत खुश दिखती थी, तो घरवाले पूछते थे, क्या बात है, आज इतनी खुश क्यों हो? और बस इसी बात पर डांट या मार पड़ जाती थी.” तृप्ति का कहना है कि बचपन में सजा पाना उनके लिए बहुत आम बात थी, लेकिन आज जब वो उन दिनों को याद करती हैं, तो उन्हें चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.

फिल्म के किरदारों में दिखेगा दम

अपनी फिल्म ‘मां बहन’ के बारे में बात करते हुए तृप्ति ने बताया कि इस फिल्म की कहानी बहुत अलग है. फिल्म में तीन मुख्य किरदार हैं और तीनों ही अपने-अपने तरीके से बहुत मजबूत हैं. कहानी में जब भी कोई परेशानी या हंगामा होता है, तो तीनों के हिस्से में बराबर की मुश्किलें आती हैं.

एक बिखरा हुआ पर प्यारा परिवार

तृप्ति के मुताबिक, फिल्म में जिस परिवार को दिखाया गया है, वह बहुत बिखरा हुआ और अजीब सा है, लेकिन यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती भी है. कहानी में ये तीनों किरदार एक ऐसी मुसीबत में फंस जाते हैं, जहां से निकलने के लिए उन्हें हर पल नए-नए जुगाड़ और तरीके लगाने पड़ते हैं.

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होर्मुज स्‍ट्रेट में टंटा के बीच आई खुशखबरी, LPG और तेल की कमी के बीच राहत


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होर्मुज स्‍ट्रेट में टंटा के बीच आई खुशखबरी, LPG और तेल की कमी के बीच राहत

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India Solar Energy Generation: ईरान जंग के बीच एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर मशहूर होर्मुज स्‍ट्रेट से LPG और तेल से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इससे एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. बुरे वक्‍त में भारत ने सौर ऊर्जा के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है.

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होमुर्ज स्‍ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित होने से ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो गई है. इस बीच, भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. (फाइल फोटो/Reuters)

India Solar Energy Generation: ईरान जंग के चलते एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभाावित हुई है. इससे एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. भारत पर भी इसका असर पड़ा है. अब ऊर्जा संकट के बीच बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन के मामले में उल्‍लेखनीय सफलता हासिल की है. यह किसी राहत से कम नहीं है. भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में वार्षिक सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया है.

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल एक्स पर पोस्‍ट शेयर कर बताया कि भारत की सौर ऊर्जा विकास गाथा वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत ने वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है. जोशी के अनुसार, मजबूत सरकारी नीतियों, टेक्‍नोलॉजिकल इनोवेशन और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की बदौलत भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है. अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय रिन्‍यूवेबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत ने 37 गीगावाट (GW) से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने 34 गीगावाट सौर क्षमता का विस्तार किया. इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका से आगे पहुंचा दिया.

दुनिया का दूसरा बड़ा सोलर एनर्जी मार्केट

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है और इससे अधिक भरोसेमंद, कुशल तथा टिकाऊ सौर ऊर्जा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के निर्माण को बल मिलेगा. भारत की रिन्‍यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी में लगातार हो रही वृद्धि का असर वैश्विक रैंकिंग में भी दिखाई दे रहा है. अप्रैल 2026 में जारी आईआरईएनए के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. इस सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है. भारत ने इस मामले में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है.

दुनिया के अन्‍य देशों का क्‍या हाल

दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास 2,258.02 गीगावाट रिन्‍यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी है, जबकि अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है. भारत 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है. इसके बाद ब्राजील 228.20 गीगावाट और जर्मनी 199.92 गीगावाट क्षमता के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 55.3 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड कैपेसिटी जोड़ी है.

बड़ी उपलब्धि

जुलाई 2025 में देश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की जब कुल 203 गीगावाट बिजली मांग में से 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में तेजी से बढ़ता निवेश भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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काजू कतली और गुलाब जामुन नहीं! घर पर ऐसे बनाएं ‘ऑरेंज-कोकोनट बर्फी’


Orange Coconut Barfi Recipe : अगर आप हर बार काजू कतली, रसगुल्ला या गुलाब जामुन जैसी पारंपरिक मिठाइयां खाकर ऊब गए हैं, तो इस बार घर पर कुछ नया ट्राई करें. ऑरेंज-कोकोनट बर्फी एक फ़्यूज़न मिठाई है, जिसमें नारियल की मिठास और संतरे की ताज़गी का एक बेहतरीन मेल मिलता है. इस बर्फी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने में न तो ज़्यादा समय लगता है और न ही ज़्यादा मेहनत. सिर्फ़ 15 मिनट में तैयार होने वाली यह मिठाई बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी को ज़रूर पसंद आएगी. आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी…

बनाने के लिए सामग्री
2 कप ताज़ा या सूखा कसा हुआ नारियल, 1 कप कंडेंस्ड मिल्क, 1 बड़ा संतरा (रस और थोड़ा सा कसा हुआ छिलका), 1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 1 बड़ा चम्मच घी, सजावट के लिए कटे हुए पिस्ता या बादाम.

बनाने की विधि

स्टेप 1: सबसे पहले, स्टोव पर एक नॉन-स्टिक पैन रखें और उसमें घी डालें। अब, नारियल को 1–2 मिनट के लिए हल्का सा भून लें. इससे नारियल की खुशबू और स्वाद, दोनों ही बढ़ जाते हैं.

स्टेप 2: अब, एक पैन में कंडेंस्ड मिल्क डालें और लगातार चलाते रहें। इसके बाद, इसमें ताज़ा संतरे का रस और थोड़ा-सा कसा हुआ संतरे का छिलका मिलाएं. इससे बर्फी में एक अनोखा खट्टा-मीठा स्वाद आ जाएगा.

स्टेप 3: मिश्रण में इलायची पाउडर डालें और इसे धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाते रहें. लगभग 8–10 मिनट में, मिश्रण गाढ़ा हो जाएगा और पैन के किनारों से अलग होने लगेगा.

स्टेप 4: एक प्लेट या ट्रे पर थोड़ा-सा घी लगा लें. तैयार मिश्रण को पिघली हुई अवस्था में ही इसमें डाल दें, और ऊपर से पिस्ता या बादाम छिड़क दें. अब, इसे 10–15 मिनट तक ठंडा होने दें.

स्टेप 5: जब मिश्रण पूरी तरह से जम जाए, तो इसे अपनी पसंद के आकार में काट लें. आपकी स्वादिष्ट ऑरेंज-कोकोनट बर्फी तैयार है.

अगर आप घर पर कोई नई और स्वादिष्ट मिठाई बनाना चाहते हैं जो जल्दी बन जाए, तो ‘ऑरेंज-कोकोनट बर्फी’ ज़रूर आज़माएं. इसका अनोखा स्वाद आपके परिवार और आपकी बिल्लियों, दोनों को ही बहुत पसंद आएगा.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



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आवारा कुत्ते के लिए भिड़े दो देश: मेक्सिको ने इसे अपना बताया, ब्राजील में नाराजगी; 300 नस्लों से मिलकर बना कैरामेलो डॉग


ब्राजीलिया/मेक्सिको सिटी1 घंटे पहले

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ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कैरामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कैरामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत।

मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कैरामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है।

वैज्ञानिक दृष्टि से कैरामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है।

कैरामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था।

2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला।

2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला।

ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश

कैरामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को ‘कैरामेलो’ कहा जाता है।

2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कैरामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए।

इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कैरामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है।

इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए।

साल 2025 में कैरामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी।

साल 2025 में कैरामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी।

100 साल में विकसित हुआ कैरामेलो

शोध के अनुसार कैरामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए।

1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए।

शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कैरामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए।

मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते

अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कैरामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है।

मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है।

उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कैरामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है।

ब्राजील में कैरामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

ब्राजील में कैरामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कैरामेलो कुत्ते

ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है।

यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं।

कई कैरामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है

कैरामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते।

एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कैरामेलो हैं।

जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कैरामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे।

खबरें और भी हैं…



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चीन बॉर्डर पर फटाफट पहुंचेंगे तोप-टैंक, LAC पर अब नहीं चलेगी गुस्ताखी, ड्रैगन को झटका


Jammu-Kashmir to Ladakh Fotu la Tunnel: भारत सरकार ने चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख तक फटाफट पहुंचने और जम्मू-कश्मीर से कनेक्ट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जोजिला सुरंग से भी एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 फोटू ला पास के पार दो यूनि-डायरेक्शन सुरंगों के निर्माण की बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये दोनों ही सुरंगे LAC के इस पार चीन की गुस्ताखियों के मद्देनजर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले दिनों में चीन बॉर्डर के बेहद करीबी इस इलाके में किसी भी मौसम में मिलिट्री हथियारों से लेकर जरूरी सामान तक तुरंत पहुंचाया जा सकेगा.

जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू समारोह अगले हफ्ते होने जा रहा है जो 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. करीब 7000 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग और फोटू ला पास सुरंग मिलकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 को ऑल-वेदर रणनीतिक कॉरिडोर बना देंगे. गौरतलब है कि इसी साल मई में सरकार ने फोटू ला सुरंग के लिए बजट आवंटित किया था.

फोटू ला सुरंग परियोजना करीब 824.12 करोड़ रुपये की है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें लगभग दो-दो किलोमीटर लंबी दो सुरंगें बनानी हैं, साथ में एप्रोच रोड भी, जिससे कुल परियोजना की लंबाई 2.65 किलोमीटर हो जाएगी. फोटू ला सुरंग का महत्व इसकी जगह के कारण है. फोटू ला, श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर सबसे ऊंचा बिंदु है, जो लगभग 4,108 मीटर की ऊंचाई पर है.

यह पास राष्ट्रीय राजमार्ग-1 का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क है. कई दशकों से यह हिस्सा इस रूट का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तेज मौसम, भारी बर्फबारी और खतरनाक ड्राइविंग की स्थिति अक्सर आवाजाही रोक देती है, अधिकारियों ने बताया कि अब इस सुरंग को पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है.

अब आड़े नहीं आएगी 5-10 फीट मोटी बर्फ की परत
हर सर्दी में फोटू ला पर बर्फ पांच से दस फीट तक जमा हो सकती है, एक दस्तावेज में कहा गया है. सड़क पर बर्फ की परत बनने से ड्राइविंग बहुत खतरनाक हो जाती है, दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और वहां कर्मचारियों को लगातार बर्फ हटाने का काम करना पड़ता है. इतनी ऊंचाई पर पहाड़ी सड़कों के तेज ढलान और तेज मोड़ भी समस्या बढ़ाते हैं. भारी बर्फबारी या खराब मौसम में यहां यातायात पूरी तरह रुक जाता है.

हालांकि अब प्रस्तावित सुरंग इन समस्याओं का जड़ से समाधान करेगी. यह सुरंग यातायात को पहाड़ के ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से लेकर जाएगी. पास के खुले हिस्से को बायपास करके यह सुरंग मौसम पर निर्भरता कम कर देगी और लद्दाख की इस महत्वपूर्ण सड़क को ज्यादा भरोसेमंद बना देगी.

लेह-कारगिल के बीच आसान होगी यात्रा
यह परियोजना पास के पार सड़क की दूरी कम करेगी और लेह-कारगिल के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगी. इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ आम लोगों की सुविधा से काफीद आगे है क्योंकि यह भारत की सबसे जरूरी रणनीतिक सड़कों में से एक बनने जा रही है. इसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों, ईंधन, राशन और लद्दाख में आगे तैनात सैनिकों के लिए सामान भेजने के लिए बेहद सुविधाजनक होने जा रहा है.

चीन से सैन्य तनाव में जरूरत हुई महसूस
2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के बाद इस इलाके में मजबूत और बिना रुकावट कनेक्टिविटी की जरूरत और भी ज्यादा साफ हो गई है. मौसम से जुड़ी समस्याएं कम करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है.

जोजिला सुरंग, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही है, अगले हफ्ते ब्रेकथ्रू देखेगी. इसे 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात है कि यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी. सरकार का लंबा लक्ष्य साफ है कि श्रीनगर-लेह कॉरिडोर पर मौसम से होने वाली सारी रुकावटों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और एक ऐसी यातायात व्यवस्था बनाई जाए जो साल भर चल सके, जिसमें आम लोगों की आवाजाही, आर्थिक विकास और सेना की जरूरतें सभी पूरी हो सकें.



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Motorola Edge 70 Pro Plus 5G भारत में लॉन्च, मिलेगी 6500mAh की बैटरी, जानें कीमत


Motorola Edge 70 सीरीज का सबसे तगड़ा फोन भारत में लॉन्च हो गया है। यह पिछले दिनों लॉन्च हुए Edge 70 Fusion, Edge 70 और Edge 70 Pro के बाद इस सीरीज में लॉन्च होने वाला चौथा फोन है। Motorola Edge 70 Pro Plus 5G को भारत में 6,500mAh की बैटरी, 50MP सेल्फी कैमरा, 12GB रैम जैसे फीचर्स के साथ उतारा गया है। इसके अलावा इसमें मीडियाटेक का एक्स्ट्रीम चिपसेट भी दिया गया है।

Motorola Edge 70 Pro Plus 5G की कीमत

मोटोरोला का यह फोन भारत में एक ही स्टोरेज वेरिएंट – 12GB RAM + 256GB में लॉन्च किया गया है। इस फोन की कीमत 47,999 रुपये है। कंपनी ने फोन की खरीद पर 3,000 रुपये का इंस्टैंट डिस्काउंट ऑफर किया है। इसकी पहली सेल 11 जून को ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart पर आयोजित की जाएगी। इस फोन को कंपनी तीन कलर ऑप्शन- Panatone Stromy Sea, Panatone Chicory Coffee और Panatone Zinfandel में खरीद सकते हैं।

Motorola Edge 70 Pro Plus 5G के फीचर्स

डिस्प्ले- इस फोन में 6.8 इंच का कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो सुपर एचडी रेजलूशन को सपोर्ट करता है। इस फोन के डिस्प्ले का रेजलूशन 1.5K पिक्सल है। साथ ही, इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। यह 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है।

प्रोसेसर- मोटोरोला का यह मिड बजट फोन MediaTek Dimensity 8500 Extreme चिपसेट पर काम करता है। यह प्रोसेसर 4nm फेब्रिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करता है।

स्टोरेज- Motorola Edge 70 Pro Plus में 12GB रैम और 256GB तक इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है। 

कैमरा- मोटोरोला के इस फोन के बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है। इसमें 50MP का मेन, 50MP का सेकेंडरी और 50MP का तीसरा कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए भी इस फोन में 50MP का कैमरा मिलेगा।

बैटरी- इस स्मार्टफोन में 6,500mAh की दमदार बैटरी दी गई है। इसके साथ 90W टर्बो चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। इस फोन में 15W वायरलेस चार्जिंग का भी सपोर्ट मिलता है।

मोटोरोला का यह फोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें IP68 और IP69 रेटिंग दी गई है, जिसकी वजह से पानी और धूल-मिट्टी में यह खराब नहीं होगा। इसके अलावा फोन Google Gemini AI फीचर्स से लैस है।

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अमेठी के मुसाफिरखाना में विवाहिता ने लगाई फांसी: पति टीजीटी परीक्षा देने गया था, पंखे से फंदे पर लटकी मिलीं – Amethi District News




अमेठी के मुसाफिरखाना कस्बे के वार्ड नंबर 4 में गुरुवार सुबह एक विवाहिता ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान 32 वर्षीय श्वेता शर्मा, पत्नी दुर्गेश शर्मा के रूप में हुई है। इस घटना से उनके दो बच्चों ने अपनी मां को खो दिया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आत्महत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। परिजनों के अनुसार, गुरुवार सुबह काफी देर तक श्वेता के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, जिससे उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। जब दरवाजा खोलकर देखा गया तो श्वेता पंखे से फंदे पर लटकी मिलीं। बताया जा रहा है कि मृतका के पति दुर्गेश शर्मा विकासखंड क्षेत्र के पलिया चंदापुर विद्यालय में अनुदेशक पद पर कार्यरत हैं। वह बुधवार को टीजीटी परीक्षा देने के लिए घर से बाहर गए हुए थे। घटना के समय घर में श्वेता के साथ उनके दो बच्चे और ससुर मौजूद थे। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से उतरवाकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल सभी संभावित बिंदुओं पर जांच कर रही है।



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Pahlaj Nihalani Death Reason: सामने आई पहलाज निहलानी के निधन की वजह, इस बीमारी से परेशान


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Pahlaj Nihalani Death Reason: आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘रंगीला राजा’ जैसी कई चर्चित फिल्मों का निर्माण करने वाले फिल्ममेकर पहलाज निहलानी नहीं रहे. 76 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनका निधन का कारण क्या है, ये भी सामने आ गया है.

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पहलाज निहलानी काफी वक्त से बीमार थे.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के जाने-माने अनुभवी फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का आज यानी गुरुवार को निधन हो गया. 76 साल की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. निहलानी के निधन की खबर सामने आने के बाद से ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है. इस बीच उनके निधन की असल वजह भी सामने आ गई है.

जानकारी के मुताबिक, पहलाज निहलानी पिछले कुछ समय से लीवर संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे. तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें मुंबई के विले पार्ले स्थित प्रसिद्ध नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में जुटी हुई थी, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार न होने के कारण गुरुवार को उन्होंने अंतिम आखिरी सांस ली.

गोविंदा के करियर को संवारने में निभाई मुख्य भूमिका

पहलाज निहलानी दशकों तक बॉलीवुड का एक बेहद जाना-पहचाना चेहरा रहे. एक निर्माता के रूप में उन्होंने अपने करियर में कई सुपरहिट और यादगार फिल्में दीं. इनमें ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्ज़ाम’, ‘अंदाज़’, ‘तलाश’, ‘रंगीला राजा’ और ‘जूली 2’ जैसी लोकप्रिय फिल्में शामिल हैं. उन्हें विशेष रूप से सुपरस्टार गोविंदा के साथ उनके लंबे जुड़ाव के लिए याद किया जाता है. गोविंदा के शुरुआती करियर को संवारने और उन्हें बैक-टू-बैक ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर इंडस्ट्री में स्थापित करने में पहलाज निहलानी ने सबसे अहम भूमिका निभाई थी.

विवादों और सुर्खियों में रहा सेंसर बोर्ड का कार्यकाल

फिल्म निर्माण के अलावा पहलाज निहलानी साल 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष रहे. उनके इस कार्यकाल ने देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा था. उनके समय में फिल्मों के सर्टिफिकेशन और कट्स को लेकर लिए गए कई फैसलों ने तूल पकड़ा था, जिसके बाद भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप, रचनात्मक स्वतंत्रता और सेंसर बोर्ड की भूमिका को लेकर फिल्म निर्देशकों और उनके बीच लंबी बहस छिड़ गई थी. इसके बावजूद उन्होंने हमेशा अपने नियमों को सख्ती से लागू रखा.

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Shikha Pandey

शिखा पाण्डेय पिछले 15 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक्टिव हैं. शिखा दिसंबर 2019 से न्यूज 18 हिंदी के साथ हैं और बतौर चीफ सब एडिटर के पद काम कर रही हैं. पिछले 6 सालों से वह एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही …और पढ़ें



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CBSE ने 38 लाख पैकेट DoS अटैक नाकाम किए, रिवैल्यूएशन पोर्टल पर 56,000 से ज्यादा आवेदन


सीबीएसई ने बताया है कि रिवैल्यूएशन पोर्टल पर लगातार साइबर हमले हो रहे हैं। हालांकि, इन सब चुनौतियों से निपटते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड रिवैल्यूएशन पोर्टल का संचालन कर रहा है। बुधवार रात 9.30 बजे तक 56,000 से ज्यादा छात्र कॉपियों की दोबारा चेकिंग के लिए अप्लाई कर चुके हैं। छात्रों के पास कॉपी दोबारा चेक करने का आवेदन करने के लिए 6 जून तक का समय है। 6 जून को रात 12 बजे पोर्टल बंद हो जाएगा। छात्र की सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट- cbse.gov.in/newsite_old/rchk.html पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। सीबीएसई की तरफ से बताया गया है कि अब तक 38 लाख पैकेट DoS अटैक नाकाम किए जा चुके हैं।

सीबीएसई ने बुधवार को एक्स पोस्ट पर लिखा, “आज रात 9:30 बजे तक पोर्टल ने वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए 56000 से ज्यादा एप्लीकेशन स्वीकार किए हैं। आज दोपहर वेबसाइट पर 3.8 मिलियन पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस अटैक को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया। हमारी टेक्निकल टीमें स्टुडेंट्स को ज्यादा स्मूथ, तेज और बिना रुकावट वाला एक्सपीरियंस देने के लिए परफॉर्मेंस पर लगातार नजर रख रही हैं और सुधार ला रही हैं।”

क्या है पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस अटैक?

पैकेट डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) हमले में हैकर किसी वेब पोर्टल पर भारी मात्रा में नेटवर्क पैकेट भेजते है। ऐसा करके सर्वर संसाधनों को पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। इससे असली यूजर वेबसाइट को एक्सेस नहीं कर पाते हैं। हैकर अक्सर गलत तरीके से बने पैकेट, फेक ट्रैफिक या लगातार कनेक्शन रिक्वेस्ट भेजकर नेटवर्क की अलग-अलग लेयर को निशाना बनाते हैं। इसका उद्देश्य सर्वर क्रैश करना या बैंडविड्थ ओवरलोड करना होता है।

क्यों हो रहा बवाल?

12वीं कक्षा के कुछ छात्रों का आरोप है कि बोर्ड की तरफ से उनकी जो कॉपी अपलोड की गई है। वह असली कॉपी से अलग है। ऐसे में आशंका पैदा होती है कि बच्चों को गलत नंबर मिले हैं। छात्रों का आरोप है कि अपलोड की गई कॉपियों की हैंडराइटिंग उनकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती है। सीबीएसई ने इस मामले की जांच के लिए समिति का गठन किया है। इसकी अध्यक्ष एश राधा चौहान हैं। जरूरत पड़ने पर वह अन्य विभागों के अधिकारियों से भी मदद ले सकती हैं। यह पैनल एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगा।

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