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12 मिनट पहले
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सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 12वीं के छात्रों के लिए स्कैन की गई आंसर शीट लेने की लास्ट डेट सोमवार 25 मई रात तक बढ़ा दी है। पहले यह तारीख 24 मई थी।
बोर्ड ने यह भी कहा कि जिन छात्रों से तकनीकी गड़बड़ी के कारण ज्यादा फीस कट गई थी, उन्हें पैसे वापस किए जाएंगे। री-इवैल्यूएशन की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
आज की अन्य बड़ी खबरें…
PM मोदी के दौरे से पहले विस्फोटक मिलने पर 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड
बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले जिलेटिन स्टिक और टाइमर मिलने के मामले में 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें एक सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और चार कांस्टेबल शामिल हैं।
यह विस्फोटक सामग्री आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर के पास मिली थी। मामले की जांच में अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) भी शामिल हो गई है।
भोपाल सिटी बसों से अब राजनीतिक दखल खत्म होने वाला है। यह सेवा अब मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अधीन हो गई है। इसका प्रभार अब महापौर या एमआईसी की जगह स्मार्ट सिटी सीईओ के पास रहेगा। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड(बीसीएलएल) राज्य सरकार की नई ‘मुख्यमंत्री सुगमपरिवहन सेवा’ का हिस्सा बन गई है। इसका आधिकारिक पत्र भोपाल नगर निगम को सौंप दिया गया है। अब तक बीसीएलएल में महापौरऔर एमआईसी (मेयर इन काउंसिल) सदस्यों (पार्षदों) का सीधा दखल होता था, लेकिन अब कमान पूरी तरह प्रशासनिक अफसरों के हाथ में होगी। जब तक नया कार्यकारी बोर्ड पूरी तरह आकार नहीं ले लेता, तब तक वर्तमान व्यवस्था के तहत सीईओ के पद पर अंजू अरुण ही प्रभारी बनी रहेंगी। नई नीति में प्रदेश को सात जोन में बांटा नई नीति के तहत पूरे प्रदेश को 7 जोन में बांटा गया है। इसमें भोपाल क्षेत्र के साथ नर्मदापुरम संभाग को भी जोड़ा गया है।दोनों संभागों के कलेक्टर इसके बोर्ड में होंगे, जो बस सेवा को नियंत्रित करेंगे।
सिफारिशें नहीं चलेंगी जानकारी के अनुसार, रूट्स तय करने, बसों के स्टॉपेज यानई बसें चलाने में अब पार्षदों या एमआईसी की सिफारिशें नहीं चलेंगी। पूरा नियंत्रण क्षेत्रीय कंपनी के पास होगा। इससे सेवा के संबंध में फैसले तेजी से और व्यावहारिक आधार पर लिए जाएंगे। भोपाल क्षेत्रीय कंपनी ही अब तय करेगी कि शहर और उप नगरीय इलाकों में कौन से रूट पर कितनी बसें चलेंगी। किराया निर्धारण और परमिट की पूरी व्यवस्था भी यही कंपनी संभालेगी। जिससे नगर निगमपर निर्भरता खत्म होगी। बीसीएलएल की बसों में अक्सर आने वाली शिकायतों (जैसे चालकों कीमनमानी, समय पर बस न मिलना) कोदूर करने के लिए इसे टेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस किया जाएगा। इससे बसों की लाइव ट्रैकिंग और सुचारू मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय से होगी। कार्रवाई भी समय पर हो सकेगी। भोपाल क्लस्टर में चलेंगी 398 बसें
योजना के पहले चरण में भोपाल क्षेत्र के 104 मार्गों पर कुल 398 बसें चलाने का खाका तैयार किया गया है। ये बसें भोपाल शहर के मुख्य मार्गों से लेकर उपनगरीय क्षेत्रों और नर्मदापुरम संभाग के प्रमुख रूट्स को आपस में जोड़ेंगी। सरकार खुद बसें खरीदने के बजाय निजी ऑपरेटरों के जरिए इन 398 बसों का संचालन पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडलपर कराएगी। जिससे बीसीएलएल की तरह नगर निगम पर वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा। बता दें कि पहले साढ़े तीन सौ से ज्यादा सिटी बसें भोपाल शहर में दौड़ती थी, लेकिन इनकी संख्या लगातार घटती गई। वर्तमान में करीब 70 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही है। इस वजह से टैक्सी, ऑटो पर यात्रियों की निर्भरता बढ़ गई है।
केरल का कडुमंगा अचार एक पारंपरिक और बेहद खास स्वाद वाला अचार है जो कच्चे आम और देसी मसालों से तैयार किया जाता है. इसमें नारियल तेल, सरसों और करी पत्ते जैसे साउथ इंडियन फ्लेवर इसे बाकी आम के अचारों से बिल्कुल अलग बना देते हैं. इसका खट्टा-तीखा स्वाद गरम चावल के साथ खाने पर और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगने लगता है.
केरल की रसोई में कई ऐसे पारंपरिक स्वाद मिलते हैं जो साधारण होकर भी बेहद खास होते हैं. उन्हीं में से एक है कच्चे आम से बनने वाला “कडुमंगा अचार”. यह अचार देखने में जितना सिंपल है, स्वाद में उतना ही दमदार. खास बात यह है कि यह अचार केरल के लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में जरूर बनाया जाता है और गरम चावल के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. इस अचार की सबसे बड़ी खासियत इसका देसी और ऑथेंटिक फ्लेवर है, जो नारियल तेल और पारंपरिक मसालों से आता है. आइए इसे बनाने का आसान तरीका जानते हैं.
कडुमंगा अचार बनाने की आसान रेसिपी
छोटे कच्चे आम (कडुमंगा) – 5 से 6 सरसों के दाने – 1 छोटा चम्मच सूखी लाल मिर्च – 4 से 5 हल्दी – 1/2 छोटा चम्मच हींग – एक चुटकी करी पत्ता – 8 से 10 पत्ते नमक – स्वाद अनुसार नारियल तेल – 3 से 4 बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटा चम्मच
बनाने की विधि: सबसे पहले कच्चे आम को अच्छे से धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें एक पैन में नारियल तेल गर्म करें उसमें सरसों के दाने डालकर चटकने दें फिर सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते डालें अब इसमें हल्दी और हींग डालकर हल्का भून लें इसके बाद कटे हुए आम डाल दें और अच्छे से मिला दें नमक और लाल मिर्च पाउडर डालकर धीमी आंच पर 5–7 मिनट पकाएं जब आम थोड़ा नरम हो जाए और मसाले अच्छे से मिल जाएं, तो गैस बंद कर दें इसे ठंडा होने दें और फिर किसी साफ जार में भरकर रख दें
स्वाद कैसा होता है? कडुमंगा अचार का स्वाद एक साथ खट्टा, तीखा और हल्का मसालेदार होता है. जब इसे गरम-गरम चावल के साथ खाया जाता है, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. केरल के ज्यादातर घरों में यह रोज़ के खाने का हिस्सा होता है और लोग इसे बहुत पसंद करते हैं.
विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें
मधुबनी शहर के सिंघानिया चौक पर रविवार शाम करीब 4 बजे बिजली के करंट की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान सिंघानिया चौक निवासी बुधन मोची के पुत्र विक्की कुमार के रूप में हुई है। हादसे के बाद परिजन उसे आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल मधुबनी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में भड़का आक्रोश, हुई तोड़फोड़ युवक की मौत की खबर मिलते ही सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि 10 से 20 की संख्या में पहुंचे कुछ लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और इमरजेंसी वार्ड में तोड़फोड़ भी की। पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया सूचना मिलने पर सदर अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद मौके पर पहुंचे और नगर थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मौके से एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मृतक के शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप मृतक के भाई निशु कुमार ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले सिंघानिया चौक इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बिजली का तार टूटकर सड़क किनारे गिरा हुआ था। उन्होंने कहा कि विक्की कुमार ओम प्रकाश नामक दुकानदार की दुकान में मरम्मत का काम कर रहा था, तभी वह टूटे हुए तार की चपेट में आ गया। जांच के आदेश, कार्रवाई का आश्वासन सदर अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने बताया कि अस्पताल में हुई तोड़फोड़ की लिखित शिकायत अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के माध्यम से नगर थाना को दे दी गई है। वहीं नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं पर कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ में साइबर ठगों ने एक इंजीनियर को ऑनलाइन बिजनेस में भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 19 लाख रुपये की ठगी की है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक युवती ने इंजीनियर से दोस्ती कर उसे एक फर्जी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में निवेश करने के लिए राजी किया। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी, तो उसका अकाउंट बंद कर दिया गया। कंकरखेड़ा क्षेत्र निवासी इंजीनियर अनुज कुमार ने बताया कि कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर उसकी एक युवती से बातचीत शुरू हुई थी। बातचीत बढ़ने पर युवती ने उसे ऑनलाइन स्टोर के माध्यम से कमाई करने की एक योजना बताई। उसने दावा किया कि वेबसाइट पर पंजीकरण कर सस्ते दामों पर सामान खरीदकर ऑनलाइन बेचने से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। युवती के झांसे में आकर अनुज ने उस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बना लिया। इसके बाद, अलग-अलग ऑर्डर और निवेश के नाम पर उससे लगातार पैसे जमा कराए जाते रहे। मार्च से मई के बीच, अनुज ने कई बैंक खातों में कुल 18 लाख 88 हजार रुपये ट्रांसफर किए। पीड़ित के अनुसार, जब उसने अपना अकाउंट बंद करने और निवेश की गई रकम वापस लेने की बात कही, तो उससे अतिरिक्त पैसे जमा करने की मांग की गई। अनुज के इनकार करने पर उसका ऑनलाइन स्टोर सस्पेंड कर दिया गया और बाद में अकाउंट पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके बाद, फोन और ईमेल के माध्यम से संपर्क करने के सभी प्रयास विफल रहे। इस मामले में पीड़ित इंजीनियर ने थाना साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और साइबर ठगों के बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों की जांच शुरू कर दी है।
Sonia Gandhi House is Bigger than PM Modi Residence: दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित आलीशान सरकारी बंगलों को लेकर सियासत का गरमाया हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के विस्तार पर रविवार को कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सवाल खड़े किए. हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जैसे ही उनके सवाल पर पलटवार किया, कांग्रेस खुद के सवालों में उलझ कर रह गई. भाजपा ने एक आरटीआई के हवाला दे कर डेटा वॉर छेड़ दिया है. इस डेटा से निशाने पर आ गया 10, जनपथ पर स्थित सोनिया गांधी का बंगला. भाजपा ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि सोनिया गांधी का बंगला क्षेत्रफल के मामले में देश के प्रधानमंत्री के घर से काफी बड़ा है.
बीजेपी ने आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी का बंगला देश के प्रधानमंत्री के रहने की जगह से बड़ा है. आखिर, क्या है पूरा माजरा? क्या सच में कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी के बंगले का क्षेत्रफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास से ज्यादा है? अगर, ज्यादा है तो कितना? क्या है भाजपा के दावे का सच?
पीएम मोदी का अवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है.
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत से विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद को हवा दी कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत के एक बयान ने. राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब के हिस्से को खाली कराने के मुद्दे पर सरकार को घेरा. सुरेंद्र राजपूत ने सवालिया लहजे में कहा, ‘प्रधानमंत्री को रहने के लिए आखिर कितनी जगह चाहिए? बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री का निवास पहले से ही इतने बड़े परिसर में स्थित है. अब, आप जिमखाना क्लब का हवाला देकर उसे भी खाली कराना चाहते हैं.’ राजपूत का सीधा इशारा लुटियंस दिल्ली में पीएम आवास परिसर के कथित विस्तार और उसके लिए आसपास की प्रतिष्ठित जगहों के इस्तेमाल की ओर था.
सोनिया गांधी का आवास पीएम मोदी के आवास से आकार में बड़ा है.
अमित मालवीय ने ‘नाप’ दिया बंगला
कांग्रेस के इस हमले पर बीजेपी ने ज्यादा देर नहीं लगाई. मोर्चा संभाला बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने. मालवीय ने सीधे तौर पर आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय, सीधे तौर पर क्षेत्रफल का डेटा सामने रख दिया. भाजपा के निशाने आया सोनिया गांधी गांधी का 10, जनपथ का बांगला. अमित मालवीय ने सुरेंद्र राजपूत के बयान का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘शायद सोनिया गांधी ने सुरेंद्र राजपूत को एक नोट भेजा है. सोनिया गांधी, जो 10 जनपथ में रहती हैं, वह 15,181 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. यह 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) से बड़ा है, जो 14,101 वर्ग मीटर में है.’
प्रधानमंत्री आवास परिसर में पूजा करते पीएम मोदी.
आपको पता है 10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग की लंबाई-चौड़ाई?
अब आते हैं उस सवाल पर, जिसे अब देश की जनता जानना चाहती है. क्या वाकई सोनिया गांधी का घर पीएम मोदी के घर से बड़ा है? सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आई जानकारी के आधार पर अमित मालवीय का दावा सही प्रतीत हो रहा है.
समझते हैं पूरा गणित
सोनिया गांधी का आवास (10, जनपथ): सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लुटियंस दिल्ली स्थित यह बंगला लगभग 15,181 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. सोनिया गांधी दशकों से इसी पते पर रह रही हैं. वहीं, प्रधानमंत्री का आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है. इसे पहले 7 रेसकोर्स रोड कहा जाता था, क्षेत्रफल के मामले में 10 जनपथ से छोटा है. इसका क्षेत्रफल लगभग 14,101 वर्ग मीटर है. दोनों की क्षेत्रफल की तुलना की जाए जिसे ‘आधिकारिक निवास’ के रूप में चिन्हित किया गया है, तो सोनिया गांधी का 10, जनपथ बंगला पीएम मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित निवास से बड़ा है.
‘परिसर’ बनाम ‘आवास’
लेकिन, इस आंकड़ों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू भी है. जहां एक ओर प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में छोटा हो सकता है, वहीं प्रधानमंत्री निवास परिसर एक विशाल क्षेत्र है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 7, लोक कल्याण मार्ग केवल एक बंगला नहीं है, बल्कि यह 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) के विशाल परिसर में फैला हुआ है. लेकिन, आधिकारिक आवास को निवास परिसर मत जोड़ दीजिएगा. प्रधानमंत्री निवास परिसर में तमाम तरह के सरकारी दफ्तर हैं.
प्रधानमंत्री निवास परिसर में क्या-क्या है?
प्रधानमंत्री के रहने की जगह के अलावा, इस 12 एकड़ के परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं:
प्रधानमंत्री का कार्यालय (Office).
सुरक्षा व्यवस्था के लिए विस्तृत बुनियादी ढांचा (SPG के लिए जगह).
अतिथियों के लिए अलग बंगले.
हेलीपैड और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं.
सवाल उठा कर कांग्रेस खुद फंस गई
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इसी 12 एकड़ के ‘विशाल परिसर’ और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत हो रहे नए निर्माणों की ओर इशारा किया था. वहीं, अमित मालवीय ने तुलना के लिए केवल उस विशिष्ट बंगले के क्षेत्रफल को चुना जहां पीएम रहते हैं. जब कांग्रेस पीएम के ‘विशाल परिसर’ पर सवाल उठाती है, तो वह जनता के पैसे और फिजूलखर्ची का मुद्दा बनाने की कोशिश करती है. इसके विपरीत, जब बीजेपी सोनिया गांधी के 10 जनपथ के 15,181 वर्ग मीटर का नाप बताती है, तो वह कांग्रेस पर हिपोक्रेसी का आरोप लगाती है.
किस कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री आवास के क्षेत्रफल पर सवाल उठाए थे? कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब को खाली कराने के मुद्दे पर सवाल उठाए थे.
अमित मालवीय ने आवास के क्षेत्रफल के बारे में क्या दावा किया? अमित मालवीय ने दावा किया कि सोनिया गांधी का 10 जनपथ आवास 15,181 वर्ग मीटर में है, जो प्रधानमंत्री मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास (14,101 वर्ग मीटर) से क्षेत्रफल में बड़ा है.
आरटीआई (RTI) के आंकड़ों के अनुसार, किसका आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में बड़ा है? आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी का 10, जनपथ आवास क्षेत्रफल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास से बड़ा है.
प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर (Complex) कुल कितने क्षेत्र में फैला है? मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे टाइम्स ऑफ इंडिया) के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर लगभग 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) में फैला है, जिसमें कार्यालय, सुरक्षा बुनियादी ढांचा और अतिथि बंगले शामिल हैं.
10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग के क्षेत्रफल में तकनीकी अंतर क्या है? 10, जनपथ और 7 LKM की तुलना उनके Designated आधिकारिक निवास स्थान के क्षेत्रफल (वर्ग मीटर) के आधार पर की गई है. हालांकि, पीएम जिस संपूर्ण परिसर का उपयोग करते हैं वह सेंट्रल विस्टा की योजनाओं के कारण बहुत विशाल है.
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा है कि भारत जब भी चाहे, अमेरिका और वह खुद उसके साथ खड़े रहेंगे।
अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने को लेकर नई दिल्ली में रविवार को भारत मंडपम कन्वेंशन सेंटर में हुए कार्यक्रम को उन्होंने फोन पर संबोधित किया।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ट्रम्प को फोन करके स्पीकर ऑन किया। ट्रम्प ने कहा-
मैं पीएम मोदी का बहुत बड़ा फैन हूं। भारत मुझ पर 100 फीसदी भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो उन्हें पता है कि कहां फोन करना है। वे यहीं फोन करते हैं।
ट्रम्प ने मार्को रूबियो से कहा- मुझे भारत और प्रधानमंत्री से प्यार है। मोदी महान हैं। वह मेरे दोस्त हैं। PM मोदी को मेरी तरफ से नमस्ते कहिए।
ट्रम्प ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा- मार्को सबसे बेहतरीन हैं। वह अमेरिका के इतिहास के सबसे महान विदेश मंत्री के रूप में याद किए जाएंगे।
अमेरिकी राजदूत बोले- ट्रम्प हमेशा मोदी के बारे में पूछते हैं
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि जब भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनसे बात करते हैं, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी के बारे में पूछते हैं। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका का रिश्ता नया नहीं, बल्कि मजबूत भरोसे पर टिका है।
गोर ने कहा कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब सिर्फ अमेरिका नहीं है। दोनों देश मिलकर ऐसे मौके तलाश रहे हैं, जिनसे दोनों को फायदा हो। उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने इस साल रिकॉर्ड 20.5 अरब डॉलर का निवेश अमेरिका में लाने में मदद की है।
अमेरिकी विदेश मंत्री सर्जियो गोर ने रविवार को कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका में सबसे ज्यादा निवेश करने की प्रतिबद्धता दिखाई है और भारतीय दूतावास को इस पर गर्व है।
अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- भारत-अमेरिका में ट्रेड डील जल्द
मार्को रुबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है और दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौता होने की उम्मीद है।
भारत दौरे के दूसरे दिन रूबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की। उन्होंने अब तक के अपने भारत दौरे को शानदार बताया।
रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति है, जिसके तहत कई भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो भारत मंडपम में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए । वे शनिवार को भारत पहुंचे थे। यह उनका अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद पहला आधिकारिक भारत दौरा है।
जयंशकर बोले- आतंकवाद के खिलाफ नरमी नहीं बरती जाए
कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज के समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा तय की है। इससे भारत और अमेरिका दोनों के लोगों को फायदा होगा और दुनिया में भी अच्छा मैसेज जाएगा।
जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर “जीरो टॉलरेंस” यानी बिल्कुल भी नरमी नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग बहुत अहम है।
उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय तेजी से बदल रही है और ऐसे दौर में भारत-अमेरिका रिश्ते और मजबूत होते जा रहे हैं। दोनों देश मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाने और दुनिया को ज्यादा विकल्प देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों की अर्थव्यवस्था खुली है और समाज भी खुले विचारों वाला है। यही समानताएं दोनों देशों को मजबूत रणनीतिक साझेदार बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिकी की आजादी के 250 साल पूरे होने को लेकर नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल हुए।
भारतीय NSA अजित डोभाल से मिले मार्को रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। बैठक में आतंकवाद, रक्षा सहयोग, चीन-पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियों, तेल-गैस और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने आपसी भरोसा बढ़ाने और साझेदारी को आगे ले जाने पर जोर दिया।
भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी पर रूबियो निराश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव के सवाल पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद की घटनाओं पर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा, हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं जो ऑनलाइन या फिर सरेआम आपत्तिजनक बातें करते हैं, लेकिन इससे किसी देश की असली पहचान तय नहीं होती। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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ट्रम्प ने PM मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया:विदेश मंत्री रूबियो दिल्ली में PM से मिले; अमेरिकी मीडिया बोली- यह डैमेज कंट्रोल की कोशिश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेवा तीर्थ में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्योता दिया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
‘मेरा दिल भी कितना पागल है, जो प्यार ये तुमसे करता है’, ‘पहली पहली बार मुहब्बत की है, कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं’ और ‘तुझे ना देखूं तो चैन मुझे आता नहीं है’ जैसे गाने आज भी आशिकों की पहली पसंद है. दिल की बात को होठों तक लाते हैं. प्यार के इजहार का जरिया बनते हैं. 90 के दशक में ऐसे ही रोमांटिक गाने फिल्मों को पहचान देते थे. आशिकों के दिल में उतर जाते थे. 19 साल पहले ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसका एक गाना दो सिंगर ने गाया था. इस फिल्म में जूही चावला सिर्फ एक सीन में सलमान खान के साथ नजर आई थीं. यह मूवी संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की आखिरी फिल्म थी.
‘ओ मम्मी मम्मी, ओ डैडी, ओ मम्मी-डैडी, हो जाओ रेडी, जिसमे मेरी शादी होगी, आज मैंने वो लड़की ढूंढ ली है’ गाना भूले-बिसरे गीत में शामिल है. उदित नारायण की खनकती में यह गाना आज भी जब सुनने को मिल जाता है तो 90 की यादों को ताजा कर देता है. इस गाने में गोविंदा ने जबर्दस्त डांस किया था. फिल्म का एक और गाना ‘तेरे बिना दिल लगता नहीं’ उदित नारायण, विनोद राठौर और अलका याज्ञनिक ने गाया था. यह गाना फिल्म के बिल्कुल लास्ट में था. यानी एक ही गाना 3 आवाजों में था. गाना 23 सितंबर 1997 को रिलीज हुई फिल्म ‘दीवाना मस्ताना’ का है जिसे डेविड धवन ने डायरेक्ट किया था. इसी फिल्म के लास्ट सीन जूही चावला-सलमान खान ने सिर्फ एक सीन साथ में किया था. फिल्म मैसिव हिट रही. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट…………
‘दीवाना मस्ताना’ एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी जिसमें गोविंदा-अनिल कपूर और जूही चावाला लीड रोल में थे. जॉनी लीवर, अनुपम खेर, रीमा लागू, शक्ति कपूर, सईद जाफरी और कादर खान अहम भूमिकाओं में थे. सलमान खान का स्पेशल अपीयरेंस था. इस फिल्म के बा गोविंदा-जूही चावला ने आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया में काम किया. फिल्म में जूही चावला को पाने के लिए गोविंदा-अनिल कपूर के बीच एक रेस लगी होती है.
फिल्म की कहानी अनीस बज्मी-प्रयागराज ने लिखी थी. फिल्म केतन देसाई प्रोड्यूसर थे जिनके पिता मनमोहन देसाई 70-80 के दशक के जाने-माने निर्माता निर्देशक थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में कुल 6 गाने थे. इसमें ‘ओ मम्मी मम्मी, ओ डैडी डैडी’ सबसे ज्यादा पॉप्युलर हुआ था.
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‘दीवाना-मस्ताना’ एक डिले फिल्म थी. फिल्म का मुहुर्त क्लैप 1994 में अमिताभ बच्चन ने दिया था. पहले यह फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ नाम से बननी थी. अनिल कपूर, सनी देओल और जेबा बख्तियार लीड रोल में थे. जेबा को वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण भारत छोड़ना पड़ा. ऐसे में स्क्रिप्ट बदलकर कॉमेडी कर दी गई. ऐसे में सनी देओल ने भी फिल्म छोड़ दी. फिर शाहरुख खान को फिल्म ऑफर की गई. नाम बदलकर ‘डम डम डिगा डिगा’ कर दिया गया. शाहरुख खान ने भी व्यस्तता के चलते फिल्म छोड़ दी. ऐसे में डेविड धवन ने गोविंदा को साइन किया. फिल्म आखिरकार 1997 में रिलीज हुई. गोविंदा-अनिल कपूर के लुक में भी बदलाव देखने को साफ तौर पर मिलता है.
यह लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जोड़ी की अंतिम मूवी मानी जाती है. इस मूवी के बाद लक्ष्मीकांत का निधन हो गया था और 35 साल से बॉलीवुड में राज कर रही यह संगीतकार जोड़ी टूट गई. 2024 में भारत सरकार ने प्यारेलाल जी को पद्मभूषण अवॉर्ड से नवाजा था.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी (1997) के साथ रिलीज की गई थी. यानी दीवाना मस्ताना और मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी एक ही दिन रिलीज हुई थीं. दोनों फिल्मों का डायरेक्शन डेविड धवन ने किया था. यह दूसरा मौका था जब डेविड धवन की दो फिल्में एकसाथ एक ही दिन रिलीज हुईं. इससे पहले 29 दिसंबर 1989 को उनकी दो फिल्में ‘जुर्रत’ और ‘आग का गोला’ सेम डे रिलीज हुई थीं.
‘दीवाना मस्ताना’ से पहले गोविंदा-अनिल कपूर ने 1990 में महेश भट्ट की फिल्म’आवारगी’ में एकसाथ काम किया था. दीवाना मस्ताना के बाद दोनों ने फिर कभी साथ में काम नहीं किया. फिल्म के टाइटल को लेकर भी खासा डेविड धवन को बहुत परेशानियों से गुजरना पड़ा था. दरअसल, यह टाइटल शबनम कपूर के पास था. डेविड धवन-गोविंदा ने उन्हें खूब मनाया तब जाकर उन्होंने यह टाइटल दिया था. फिल्म मनमोहन देसाई को डेडिकेट की गई थी. जॉनी लीवर को बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. फिल्म का 2012 में तेलुगू में रीमेक भी बनाया गया.
फिल्म में सतीश कौशिक ने पप्पू पेजर का यादगार रोल निभाया था. मजेदार बात यह भी है कि 1997 में ही गोविंदा-डेविड धवन ने ‘हीरो नंबर वन’ फिल्म में काम किया था. ‘दीवाना-मस्तना’ का बजट 7 करोड़ रुपये के करीब था. फिल्म ने 24 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म मैसिव हिट रही थी. पैसे कमाने के मामले में ‘दीवाना-मस्ताना’ 10वें नंबर पर रही थी. पहले नंबर पर इस साल ‘बॉर्डर’ मूवी रही थी.
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Gold ETF vs EGR vs Digital Gold: आजकल सोना केवल गहनों तक सीमित नहीं रह गया है. आज के समय में आपके पास 3 अहम ऑप्शन हैं- गोल्ड ETF, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स और डिजिटल गोल्ड. आइए समझते हैं कि आपके लिए इनमें से कौन सा ऑप्शन सबसे बेस्ट है?
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Gold ETF, EGR और Digital Gold में से कौन बनाएगा आपको अमीर! (फोटो- एआई)
Gold ETF vs EGR vs Digital Gold: हर महीने की सैलरी से थोड़ा-थोड़ा पैसा सोने में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि Gold ETF, EGR और Digital Gold में कौन बेहतर है? आजकल बिना ज्वेलरी खरीदे भी डिजिटल तरीके से गोल्ड में निवेश करना बेहद आसान हो गया है. कोई 10 रुपये से शुरुआत कर रहा है, तो कोई SIP की तरह Gold ETF खरीद रहा है. लेकिन हर ऑप्शन के अपने फायदे-नुकसान हैं. ऐसे में निवेश से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि आपकी कमाई और जरूरत के हिसाब से सबसे स्मार्ट ऑप्शन कौन सा है?
गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) गोल्ड ईटीएफ एक ऐसा फंड है जो सोने की कीमत को ट्रैक करता है। यह शेयर बाजार में शेयरों की तरह खरीदा और बेचा जाता है. इसमें चोरी होने, लॉकर का किराया देने या प्योरिटी की कोई टेंशन नहीं होती. नौकरीपेशा लोग हर महीने एक छोटी रकम के जरिए इसमें SIP भी कर सकते हैं. यह पूरी तरह सेबी की ओर से रेगुलेटेड होता है.
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) शेयर बाजार पर ट्रेड होने वाला निवेश ऑप्शन है. इसमें असली सोना सेबी-अप्रूव्ड वॉल्ट में रखा जाता है. इसमें आप सोने को डिजिटल रसीद के रूप में खरीदते हैं. इसकी शुरुआत मात्र 100 मिलीग्राम से हो सकती है. सबसे खास बात यह है कि आप जब चाहें इस डिजिटल रसीद को असली फिजिकल सोने (सिक्के या बार) में बदल सकते हैं. पूरे देश में इसकी कीमत एक समान रहती है.
डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) अगर आप बिना किसी डीमैट अकाउंट के बेहद आसान तरीके से सोना खरीदना चाहते हैं, तो डिजिटल गोल्ड आपके लिए है. आप Paytm या PhonePe जैसे ऐप्स के जरिए घर बैठे 24 कैरेट प्योर सोना खरीद सकते हैं. इसमें आप मात्र 10 रुपये जैसी बेहद छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं. यह उनके लिए बेस्ट है जो बहुत कम पैसों से निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि यह सेबी या आरबीआई की ओर से रेगुलेटेड नहीं होता है.
नौकरीपेशा लोगों के लिए कौन सा ऑप्शन है बेहतर? अगर आप हर महीने रेगुलर निवेश करना चाहते हैं और सुरक्षित, पारदर्शी तथा कम झंझट वाला ऑप्शन चाहते हैं, तो Gold ETF सबसे बेहतर माना जा सकता है. अगर भविष्य में फिजिकल गोल्ड लेने की योजना है, तो EGR उपयोगी हो सकता है. वहीं छोटे निवेश और सुविधा के लिए Digital Gold अच्छा विकल्प है, लेकिन इसमें रेगुलेशन की कमी और अतिरिक्त चार्ज का ध्यान रखना जरूरी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय के निवेश के लिए Gold ETF फिलहाल सबसे बेहतर ऑप्शन है.
वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें
संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 रविवार को शहर के 19 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई। जोधपुर में इस परीक्षा में 4529 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। पहली पारी सुबह 9:30 बजे से आयोजित की गई, जबकि दूसरी पारी दोपहर 2:30 बजे से 4.30 तक हुई होगी। परीक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम किए गए। जोधपुर सहित आसपास के कई जिलों से अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे। पहली पारी में सामान्य अध्ययन-1 का पेपर हुआ। वहीं दूसरी पारी में रीजनिंग और एप्टीट्यूड आधारित पेपर आयोजित किया गया। परीक्षा देकर बाहर निकले कई अभ्यर्थियों ने पेपर को पिछले पेरो की तुलना में अपेक्षाकृत कठिन बताया। पेपर पहले के मुकाबले कठिन ब्यावर जिले से परीक्षा देने आए करण चौधरी ने बताया कि दोनों पेपर पिछले साल की तुलना में कठिन थे। सामान्य अध्ययन के पेपर में प्रश्नों का पैटर्न चेंज किया गया है जिसके लिए यूपीएससी जानी भी जाती है। पेपर फेक्चुअल था और कई चीजों का इसमें मिश्रण देखने को मिला। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि कट ऑफ पिछले बार की तुलना में कम जाएगी। कट ऑफ कम रहने की जताई उम्मीद जोधपुर के रहने वाली शिवानी ने बताया कि प्रश्नों का स्तर चुनौतीपूर्ण रहा। दोनों पेपर में पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है जिससे इस बार कटऑफ कम रहने की संभावना है। वहीं, कुणाल परिहार ने बताया कि उन्हें सामान्य अध्ययन का पेपर थोड़ा आसान लगा, लेकिन दूसरी पारी वाला पेपर कठिन था। कुणाल के अनुसार, सामान्य अध्ययन का पेपर आसान होने से कट ऑफ बढ़ भी सकती है। वहीं जोधपुर में परीक्षा में किसी प्रकार की नकल या पेपर लीक जैसी शिकायत सामने नहीं आई है।