शिवहर में पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने आम लोगों की शिकायतें सुनीं और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के सख्त निर्देश दिए। जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए फरियादियों ने भूमि विवाद, पारिवारिक कलह, मारपीट, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित शिकायतें सीधे एसपी के समक्ष रखीं। अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
पुलिस अधीक्षक ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना और संबंधित थानाध्यक्षों व पुलिस पदाधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी तथा समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों का शीघ्र निष्पादन पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसपी ने चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का भरोसा
जनता दरबार में अपनी बात सीधे पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखने का अवसर मिलने पर लोगों ने संतोष व्यक्त किया। उनका मानना था कि इस व्यवस्था से उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जनता दरबार पुलिस और आमजन के बीच विश्वास व संवाद को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। इसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का भरोसा और बढ़े।
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बड़नगर मोहर्रम जुलूस ब्लास्ट मामला हाईकोर्ट पहुंचा: एनआईए जांच और धार्मिक जुलूसों के लिए एसओपी बनाने की मांग; राज्य सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब – Ujjain News
उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से करीब 40 फीट ऊंचाई पर टाटा मैजिक वैन लटकाकर उसमें विस्फोटक पटाखे फोड़ने के मामले में अब इंदौर हाईकोर्ट में बुधवार को जनहित याचिका दायर की गई है।
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याचिका में पूरे घटनाक्रम की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या सीबीआई से कराने और भविष्य में धार्मिक जुलूसों के दौरान ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश प्राप्त कर जवाब पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
मोहर्रम जुलूस के दौरान हुआ था विस्फोट
23-24 जून की दरमियानी रात बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले मोहर्रम जुलूस के दौरान जय स्तंभ चौक पर क्रेन की मदद से एक कबाड़ टाटा मैजिक वैन को हवा में लटकाया गया था। वैन के ऊपर चढ़े जाहिद और तस्लीम लाल झंडे लहरा रहे थे।
इसी दौरान वाहन के भीतर रखे बड़ी मात्रा में रॉकेट और सुतली बमों में आग लगा दी गई, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद कांच और लोहे के टुकड़े नीचे मौजूद हजारों लोगों के बीच गिरे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया।
इस तरह क्रेन से लटकाया गया था मैजिक वैन को।
तीन आरोपियों पर रासुका
घटना के बाद पुलिस ने शोएब उर्फ गब्बू खान, जाहिद खान और तपसील उर्फ तस्लीम, सभी निवासी अडान मोहल्ला, को गिरफ्तार किया। बाद में तीनों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें कड़ी सुरक्षा में केंद्रीय जेल भेरूगढ़ (उज्जैन) भेज दिया गया।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका
सामाजिक कार्यकर्ता एवं हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने पैरवी की। याचिका में घटना की जांच एनआईए अथवा सीबीआई से कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा धार्मिक जुलूसों के लिए व्यापक एसओपी तैयार करने की मांग की गई है।

एनआईए जांच की दलील
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने तर्क दिया कि यदि इस मामले में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध बनता है, तो यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) की श्रेणी में आएगा। ऐसी स्थिति में मामले की जांच एनआईए द्वारा कराई जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता सुमित हार्डिया ने यह मांग भी उठाई कि यह भी जांच का विषय है कि कहीं यह घटना किसी तरह की ‘ब्लास्ट मॉक ड्रिल’ तो नहीं थी।
एक सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य शासन से निर्देश प्राप्त कर जवाब प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी सप्ताह निर्धारित की गई है।
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मुहर्रम के जुलूस में हमले का प्रदर्शन, VIDEO

उज्जैन के पास बड़नगर में मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक वैन (टाटा मैजिक) में किए गए विस्फोट का वीडियो सामने आया है। घटना 23 जून की रात की बताई जा रही है। बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे। जुलूस में एक वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया।पूरी खबर पढ़ें
IMF ने भारत को लेकर कही 2 तरह की बातें, क्या है इसका मतलब?
नई दिल्ली. जब कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताए और उसी समय उसकी विकास दर का अनुमान भी घटा दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर दोनों बातें एक साथ कैसे सही हो सकती हैं. भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ है. IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.5 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. हालांकि, इसके बावजूद संस्था का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी बढ़त बनाए रखेगा. यानी ग्रोथ रेट में मामूली कमी का मतलब यह नहीं है कि भारत की रफ्तार दूसरे बड़े देशों से कम हो गई है.
IMF का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ ऐसे जोखिम हैं, जो आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं. सबसे बड़ा जोखिम मानसून को लेकर है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है, तो खरीफ फसल पर असर पड़ सकता है. इससे ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर होने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे हालात का असर अर्थव्यवस्था की कुल वृद्धि पर भी पड़ सकता है.
दुनिया की सुस्ती का भी पड़ेगा असर
भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर काफी हद तक निर्भर है, लेकिन निर्यात भी अहम भूमिका निभाता है. IMF का कहना है कि अमेरिका, चीन और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती का असर भारत के निर्यात पर पड़ सकता है. अगर वैश्विक मांग कमजोर रहती है, तो भारतीय कंपनियों के ऑर्डर और उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है. यही वजह है कि संस्था ने वैश्विक हालात को भी ग्रोथ अनुमान में कटौती का एक कारण माना है.
घरेलू चुनौतियां भी बनी हुई हैं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश में अभी उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई है. इसके अलावा उपभोक्ता मांग में भी कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती बरकरार है.
अच्छी खबर भी दी IMF ने
जहां FY27 के लिए अनुमान थोड़ा घटाया गया है, वहीं IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है. यानी मौजूदा वित्त वर्ष के प्रदर्शन को लेकर संस्था पहले से ज्यादा आशावादी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबी अवधि में भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की मजबूत संभावना है. इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और लगातार किए जा रहे संरचनात्मक सुधारों को अहम वजह माना गया है.
सरकार और IMF के अनुमान में कितना अंतर?
भारत सरकार ने FY27 के लिए 6.5 से 7 फीसदी के बीच आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है. इसके मुकाबले IMF का 6.4 फीसदी का अनुमान थोड़ा कम है. हालांकि, दोनों अनुमानों के बीच बड़ा अंतर नहीं है और दोनों ही मानते हैं कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाले देशों में शामिल रहेगा.
IMF ने क्या सलाह दी?
रिपोर्ट में IMF ने सुझाव दिया है कि अगर मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य आपूर्ति बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निजी निवेश बढ़ाने के लिए सुधारों की रफ्तार बनाए रखने की भी सलाह दी गई है. कुल मिलाकर, IMF की रिपोर्ट भारत की विकास कहानी पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह बताती है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद के बावजूद कुछ अल्पकालिक चुनौतियां मौजूद हैं. इन्हीं जोखिमों को देखते हुए FY27 के ग्रोथ अनुमान में मामूली कटौती की गई है, जबकि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को लेकर संस्था अब भी सकारात्मक बनी हुई है.
बारिश आते ही बदल जाता है कर्नाटक का बाजार! यहां मिलते हैं ऐसे स्वाद, लोग सालभर करते इंतजार
Karnataka Monsoon Food: बारिश का मौसम सिर्फ ठंडी हवाओं और हरियाली का ही नहीं, बल्कि नए स्वादों का भी मौसम होता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून अपने साथ कई खास मौसमी व्यंजन लेकर आता है, लेकिन उत्तर कर्नाटक की बात कुछ अलग है. यहां पहली अच्छी बारिश के बाद स्थानीय बाजारों का रंग-रूप पूरी तरह बदल जाता है. साधारण दिखने वाली गलियां अचानक ऐसे बाजारों में बदल जाती हैं, जहां मिट्टी की खुशबू, ताजे मसालों की महक और पारंपरिक व्यंजनों की भाप हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है. इन बाजारों में मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ साल के बाकी महीनों में दिखाई ही नहीं देते.
यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक भी इन मौसमी स्वादों का इंतजार करते हैं, अगर आप खाने के शौकीन हैं और अलग-अलग जगहों की पारंपरिक डिशेज़ चखना पसंद करते हैं, तो उत्तर कर्नाटक के मानसून बाजार आपके लिए किसी फूड फेस्टिवल से कम नहीं हैं.
मानसून के साथ बदल जाती है बाजारों की पहचान
उत्तर कर्नाटक में बारिश शुरू होते ही स्थानीय किसान, जंगलों से जुड़े समुदाय और छोटे व्यापारी अपने-अपने खास उत्पाद लेकर बाजार पहुंचने लगते हैं. सुबह से शाम तक इन बाजारों में लोगों की भीड़ बनी रहती है. यहां मिलने वाले ज्यादातर खाद्य पदार्थ सीधे खेतों, जंगलों और नदियों से आते हैं, इसलिए इनमें ताजगी का अलग ही स्वाद महसूस होता है.
1. जंगली मशरूम की बढ़ जाती है मांग
मानसून के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा जंगली मशरूम की होती है. पहली तेज बारिश के कुछ ही दिनों बाद जंगलों की जमीन पर कई तरह के मशरूम उग आते हैं. इन्हें स्थानीय लोग बेहद सावधानी से इकट्ठा करते हैं और बाजार में बेचते हैं. इन मशरूम से बनने वाली कुम्मू पल्य नाम की पारंपरिक करी उत्तर कर्नाटक की पहचान मानी जाती है. ताजे पिसे मसालों और देसी तरीके से पकाई गई यह करी अपने मिट्टी जैसे गहरे स्वाद के लिए जानी जाती है.
2. आलंदी कुम्मु की खास पहचान
जंगली मशरूम की कई किस्मों में आलंदी कुम्मु सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. यह सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, इसलिए इसकी मांग भी काफी रहती है. स्थानीय परिवार इसे खास अवसरों पर बनाते हैं और इसे मानसून की सबसे अनमोल सौगात मानते हैं.
3. नदियों से बाजार तक पहुंचते ताजे केकड़े
बारिश के दिनों में नदियां और मौसमी नाले पानी से भर जाते हैं. इसी समय बड़ी संख्या में ताजे केकड़े भी मिलने लगते हैं. स्थानीय बाजारों में इनकी अच्छी खासी बिक्री होती है.
4. मसालेदार केकड़े का स्वाद
सड़क किनारे लगे ठेलों और छोटे भोजनालयों में इन केकड़ों को पारंपरिक मसालों के साथ पकाया जाता है. कहीं इन्हें खुली आंच पर भुना जाता है तो कहीं गाढ़ी ग्रेवी में तैयार किया जाता है. बारिश की ठंडी शाम में यह व्यंजन स्थानीय लोगों की पहली पसंद माना जाता है.
5. केम्बु सुली भी मानसून की खास पहचान
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ने वाले छोटे अरबी यानी टारो के अंकुरों से बनने वाली केम्बु सुली भी काफी लोकप्रिय है. इसके कोमल डंठलों को काटकर खट्टे और मसालेदार स्वाद वाली करी में पकाया जाता है. यह व्यंजन ग्रामीण इलाकों के घरों में लंबे समय से बनाया जाता रहा है और आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है.
6. हल्दी की पत्तियों में बनता है खुशबूदार कदुबु
मानसून के दौरान हल्दी के पौधे तेजी से बढ़ते हैं. उनकी बड़ी और सुगंधित पत्तियों का इस्तेमाल कदुबु बनाने में किया जाता है.
7. मौसमी भरावन से बढ़ता है स्वाद
कदुबु के अंदर खीरा, कद्दू, कटहल जैसी मौसमी सामग्री भरी जाती है. इसके बाद इसे हल्दी की पत्तियों में लपेटकर भाप में पकाया जाता है. पत्तियों की प्राकृतिक खुशबू इस व्यंजन का स्वाद और भी खास बना देती है. इसे अक्सर मसालेदार चटनी के साथ परोसा जाता है.
8. जोलड़ा रोटी के बिना अधूरा है भोजन
उत्तर कर्नाटक के पारंपरिक भोजन की बात हो और जोलड़ा रोटी का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. ज्वार के आटे से बनने वाली यह पतली रोटी बिना तेल के तैयार की जाती है. गर्मागर्म रोटी को मसालेदार करी, दाल और चटनियों के साथ परोसा जाता है. इसके साथ परोसी जाने वाली बादनकेई एन्नेगई, झुणका और शेंगा चटनी पुड़ी जैसे व्यंजन इस क्षेत्र की समृद्ध पाक परंपरा को दर्शाते हैं. हर व्यंजन में स्थानीय मसालों का ऐसा संतुलन होता है जो स्वाद को लंबे समय तक यादगार बना देता है.
टटीरी ओवरब्रिज पर रास्ता बंद करने का विरोध: भाकियू ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा – Baghpat News
बागपत की अग्रवाल मंडी टटीरी में निर्माणाधीन ओवरब्रिज को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। भाकियू ने बागपत की ओर ओवरब्रिज समाप्त होने के बाद दीवार और ग्रिल लगाए जाने की योजना का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों और किसानों को भारी परेशानी होगी। यह ज्ञापन भाकियू के जिला प्रवक्ता चौधरी हिम्मत सिंह के नेतृत्व में दिया गया। ज्ञापन में बताया गया है कि जिस मार्ग को बंद करने की आशंका है, वह नौ गांवों की सहकारी समिति के गोदाम और कार्यालय तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है। इसी मार्ग से दुर्गा अतिथि धर्मशाला, डीएवी इंटर कॉलेज और नगर पंचायत कार्यालय भी जुड़े हुए हैं। किसानों के लिए यूरिया खाद ट्रकों द्वारा गोदाम तक लाई जाती है, जिसे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली से अपने खेतों और घरों तक ले जाते हैं। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थान पर दीवार और ग्रिल लगाई जाती है, तो ट्रैक्टर, ट्रॉली और अन्य बड़े वाहनों का आवागमन बाधित हो जाएगा। इससे किसानों के साथ-साथ विद्यालय, धर्मशाला और अन्य संस्थानों के दैनिक कार्य भी प्रभावित होंगे। संगठन ने अधिकारियों से मांग की है कि इस मार्ग को पहले की तरह खुला रखा जाए, ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो। भारतीय किसान यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों और स्थानीय लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो संगठन अपना विरोध जारी रखेगा। किसानों ने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जनहित में उचित निर्णय लेने की अपील की है।
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1971 में अमिताभ बच्चन ने लिया था सबसे बड़ा रिस्क, हीरो छोड़ बन बैठे विलेन
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यूं तो अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हर तरह की जॉनर की फिल्म में काम किया. कभी वह एक्शन करते दिखाई दिए तो कभी रोमांस. लेकिन 1971 में उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाया. जिस फिल्म को संजीव कुमार ने ठुकरा दिया था. उन्होंने इसे करने का फैसला लिया.
दरअसल बात ये थी कि अमिताभ बच्चन साल 1971 में करियर में बड़ा जोखिम उठाते हुए नेगेटिव रोल को स्वीकार किया. वह फिल्म में विलेन बनने का फैसला लेते हैं. तो चलिए बताते हैं आखिर इस फिल्म को करने का रिस्क बिग बी को कितना महंगा पड़ा था.

हम बात कर रहे हैं साल 1971 में आई अमिताब बच्चन की फिल्म ‘परवाना’ की जिसे एक महिला डायरेक्टर ज्योति स्वरूप ने डायरेक्ट किया था. ज्योति 60-70 के दशक की इकलौती कमान संभालने वाली महिला निर्देशक थीं.

‘परवाना’ फिल्म एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन के अलावा नवीन निश्चल, मिथुन चक्रवर्ती की पत्नी योगिता बाली से लेकर ओम प्रकाश जैसे सितारे थे. वहीं शत्रुघ्न सिन्हा का स्पेशल अपीरियंस भी था.
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‘परवाना’ में अमिताभ बच्चन ने पहली बार नेगेटिव रोल निभाया था. जहां वह एक ऐसे लवर का रोल प्ले करते हैं जो बाद में प्रेमी से हत्यारा बन जाता है. यह फिल्म साल 2007 की जॉनी गद्दार से प्रेरित थी.

फिल्म में अमिताभ बच्चन ने कुमार सेन का तो नवीन निश्चल ने राजेश्वर और योगिता बाली ने आशा का किरदार निभाया था. फिल्म में मदन मोहन ने म्यूजिक दिया था तो कैफी आजमी ने लिरिक्स लिखे थे.

फिल्म की कहानी का बात करें तो कुमार सेन (अमिताभ बच्चन) आशा (योगिता बाली) से बेतहाशा मोहब्बत करता है और शादी करना चाहता है. मगर आशा को अमीर चाय बागान मालिक राजेश्वर से प्यार हो जाता है.

अब प्रेमिका को किसी और का होता कुमार देख नहीं पाता और वह जलन में आशा के चाचा की हत्या कर देता है. कुमार इस हत्या का इल्जाम राजेश्वर पर लगा देता है. इस तरह अमिताभ बच्चन का किरदार प्रेमी से हत्यारा बन जाता है.

‘परवाना’ फिल्म अंत में दर्दनाक मोड़ लेती है. जब कुमार को अपनी गलती का एहसास होता है तो वह सच कबूल करता है और आत्महत्या कर लेता है. परवाना फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.
क्या है BharatFS AI सिस्टम? 24 घंटे मिलेगा भारी बारिश का अलर्ट, जानें कैसे करता है काम
महाराष्ट्र ने हाल ही में AI बेस्ड BharatFS सिस्टम लागू किया है। यह स्वदेशी सिस्टम 24 घंटे पहले बारिश और खराब मौसम की जानकारी देता है। देश के अन्य राज्यों में भी इस सिस्टम को आने वाले दिनों में अपनाया जा सकता है। इस सिस्टम की मदद से बारिश का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम की वजह से महाराष्ट्र के नासिक में बादल फटने से होने वाली तबाही से बचा जा सका है।
लगा सकता है सटीक अनुमान
BharatFS AI यानी भारत फोरकास्ट सिस्टम को देश के दो सबसे हाई-परफॉर्मेंस सुपर कम्प्यूटर्स Arka-IITM पुणे और अरुणिका (NCMRWF नोएडा) की मदद से चलाया जाता है। यही कारण है कि भारत का यह घरेलू फोरकास्ट सिस्टम बेहद सटीक अनुमान लगा सकता है। इसकी खास बात ये है कि यह रियल टाइम में फोरकास्ट को समय-समय पर अपडेट करता है। एआई फीचर होने की वजह से इस सिस्टम के जरिए कम रेंज में भी बेहतर सटीकता के साथ मौसम का अनुमान लगाया जा सकता है।
क्या है खास?
BharatFS AI सिस्टम को IITM पुणे ने डेवलप किया है। इस सिस्टम में मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए एआई बेस्ड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और सुपर कम्प्यूटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम 6 किलोमीटर के एरिया में होने वाले मौसम में बदलाव को बारीकी को समझ सकता है। यही नहीं, बहुत कम एरिया में होने वाली घटनाओं को बारीकी से समझ सकता है। इसकी मदद से खराब मौसम की वजह से होने वाली घटनाओं जैसे कि कलाउड ब्रस्ट, फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइट आदि का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
BharatFS AI सिस्टम को महाराष्ट्र ने मई में अपनाया था। इसे राज्य आपदा प्रबंधन सिस्टम में शामिल किया गया है। जुलाई में हुई भारी बारिश को लेकर इस सिस्टम ने अपनी उपयोगिता साबित की, जिसकी वजह से नासिक में बादल फटने का अलर्ट 24 घंटे पहले मिल गया। आपदा विभाग ने इसकी वजह से पहले ही लोगों को अलर्ट कर दिया। इसकी वजह से प्रशासन को इसे लेकर तैयारी करने का मौका मिल गया। केरल के वायनाड में हुए भयंकर लैंडस्लाइड को भी इस सिस्टम की मदद से रोका जा सकता था। हालांकि, अन्य राज्यों में भी इस सिस्टम को जल्द लगाया जा सकता है।
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भारत में टीचर्स की संख्या अब 1 करोड़ के हुई पार, वहीं छात्रों के Dropout रेट में भी आई कमी, सरकार ने जारी किए आंकड़े
अब देश भर के लगभग 14.66 लाख (14,66,682) स्कूलों में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके साथ देश में लगभग 24.72 करोड़ स्टूडेंट हैं। वहीं बात अगर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों यानी Dropout की करें तो उनका दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत था जो घटकर अब यानी 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की UDISE रिपोर्ट में दी गई है।
जारी रिपोर्ट में और क्या बताया है?
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी रिपोर्ट की मानें तो देश भर के सभी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों की संख्या 2022-23 में 94.8 लाख थी जो 2023-24 में बढ़कर 98 लाख हो गई और 2024-25 में 1.01 करोड़ के साथ एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। अगर 2025-26 की बात करें तो इस वर्ष में शिक्षकों की यह संख्या 1.02 करोड़ हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इसे ‘भारत में स्कूली शिक्षा के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि’ बताया है और इस उपलब्धि का श्रेय समग्र शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 जैसी योजनाओं को दिया है।
स्कूल छोड़ने वालों की दर में आई कमी
उसी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राइमरी और सेकेंडरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘प्रिपरेटरी लेवल पर स्कूल छोड़ने वालों की दर 2024-25 में 2.3 प्रतिशत थी जो घटकर 2025-26 में 1.8 प्रतिशत हो गई। वहीं सेकेंडरी लेवल पर यह 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो गई।’
स्कूलों में एडमिशन भी बढ़े
ड्रापआउट कम होने के साथ ही साथ स्कूलों में कुल दाखिले भी बढ़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में 24.6 लाख से बढ़कर 24.72 लाख हो गए हैं, हालांकि सरकारी संस्थानों में दाखिले 26.8 लाख कम हुए हैं, जो 2024-25 में 12.1 करोड़ से घटकर इस साल 11.8 करोड़ हो गए। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों में दाखिले में लगभग 30 लाख छात्रों की बढ़ोतरी देखी गई।
इसके अलावा, अलग-अलग स्तरों पर दाखिले के पैटर्न में भी बदलाव आया है। 2023-24 और 2025-26 के बीच सेकेंडरी स्कूल में दाखिले लगभग 31.5 लाख बढ़े, जबकि प्रीपरेटरी स्तर पर दाखिले 42 लाख कम हुए। सेकेंडरी स्तर पर GRE 2023-24 में 68.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 71.7 प्रतिशत हो गया।
ज़ीरो एनरोलमेंट और सिंगल टीचर वाले स्कूल
यह रिपोर्ट ज़ीरो एनरोलमेंट (बिना दाखिले वाले) स्कूलों और सिंगल टीचर (एक शिक्षक) वाले स्कूलों की संख्या में कमी को भी दिखाती है। पिछले सालों की तुलना में इस साल सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 3% की कमी आई है। इसी तरह, ज़ीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या में भी लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई है।
बेहतर ट्रांज़िशन रेट भी दिखा
जारी रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा एकेडमिक ईयर में शिक्षा के अलग-अलग चरणों के बीच ट्रांज़िशन रेट (एक चरण से दूसरे चरण में जाने की दर) में भी सुधार देखा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह सुधार शिक्षा प्रणाली में छात्रों की बेहतर प्रगति को दर्शाता है और यह भी बताता है कि ज्यादा छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़े बिना अपनी पढ़ाई जारी रखी। वहीं फाउंडेशनल से प्रीपरेटरी लेवल तक ट्रांज़िशन रेट 2024-25 में 98.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 99.2 प्रतिशत हो गया।
शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी डेटा से यह भी पता चलता है कि मिडिल और सेकेंडरी चरणों में भी ट्रांज़िशन रेट बढ़ा है। प्रीपरेटरी से मिडिल लेवल में 92.2 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत और मिडिल से सेकेंडरी चरण में 2024-25 में 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 88.3 प्रतिशत हो गया है।
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‘स्टिंग’ एनर्जी ड्रिंक की 92 हजार बोतलें और केन सीज: अलवर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई; पैकिंग पर भ्रामक जानकारी की शिकायत – Alwar News
अलवर के एमआईए में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की 92 हजार बोतल व केन सीज की हैं।
अलवर जिले में ‘स्टिंग’ (Sting) एनर्जी ड्रिंक की करीब 92 हजार बोतलें और केन सीज की गईं। सीएमएचओ अलवर की फूड सेफ्टी टीम ने मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (MIA) स्थित पेप्सी बनाने वाली कंपनी ‘वरुण बेवरेजेस लिमिटेड’ के गोदाम (प्लॉट नंबर 208) पर छापा मारा। गोदाम
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अलवर में पहली बार किसी एनर्जी ड्रिंक ब्रांड पर इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। टीम ने मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवाए हैं। इसकी रिपोर्ट 14 दिनों में आएगी।
विभाग के अनुसार- एनर्जी ड्रिंक पर लिखी जानकारी भ्रामक है।
डिब्बे और बोतल पर लिखी जानकारी गुमराह करने वाली
फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता ने बताया- विभाग को शिकायत मिली थी कि इस एनर्जी ड्रिंक की पैकिंग पर केफेनेटेड बेवरेज स्टिंग एनर्जी लिखा है। इस पर स्टीमूलेट्स माइंड, एर्नजाइजेस बॉडी, सेम ग्रेट टेस्ट आदि भ्रामक सूचनाओं की शिकायत है। इसी शिकायत के आधार पर तुरंत एक्शन लेते हुए गोदाम में मौजूद स्टॉक को सीज किया गया। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
मेवात क्षेत्र में सबसे ज्यादा खपत, रोजाना हजारों की बिक्री
अलवर जिले और खासकर मेवात क्षेत्र में इन दिनों एनर्जी ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ी है। युवाओं के बीच इसके बढ़ते क्रेज के कारण रोजाना हजारों की संख्या में इसकी खपत हो रही है। बाजार में कई कंपनियों की एनर्जी ड्रिंक धड़ल्ले से बिक रही हैं। इसके चलते अब विभाग अलर्ट मोड पर है।
कार्रवाई में यह टीम रही शामिल
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में फूड सेफ्टी ऑफिसर विश्वबंधु गुप्ता, जयसिंह यादव और अशोक लखेरा सहित विभाग के अन्य सदस्य मौजूद थे। टीम ने कहा- मिलावटखोरों और भ्रामक जानकारी देकर सामान बेचने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

