नई दिल्ली. देश के 28 राज्यों में से 10 के पास तो अपने खर्चे पूरे करने के बाद भी ठीकठाक राजस्व बचता है, लेकिन बाकी 18 राज्यों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि अपना खर्चा भी पूरा किया जा सके. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मणिपुर सहित 13 राज्यों ने 2024-25 में राजस्व सरप्लस दर्ज किया, जबकि बाकी 15 राज्यों में घाटा रहा.
कैग की ‘राज्य वित्त 2024-25’ रिपोर्ट के अनुसार, 18 राज्यों ने रेवेन्यू सरप्लस का लक्ष्य रखा था, 3 राज्यों ने राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा और 7 राज्यों ने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था. अब रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2024-25 में 15 राज्य राजस्व घाटे में रहे, जबकि बाकी 13 राज्यों में रेवेन्यू सरप्लस रहा. 18 राज्यों में से जिन्होंने रेवेन्यू सरप्लस का लक्ष्य रखा था, 9 राज्य ही इसे हासिल कर पाए. इसके अलावा असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना 2024-25 के दौरान राजस्व घाटे में रहे.
7 राज्यों ने रखा था शून्य घाटे का लक्ष्य
रिपोर्ट में उन 7 राज्यों का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था. इन राज्यों में गोवा, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं. इनमें से चार राज्यों गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने रेवेन्यू सरप्लस हासिल कर लिया, जबकि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु को राजस्व घाटा हुआ. 2024-25 में जिन 15 राज्यों में राजस्व घाटा रहा, उनमें हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, पंजाब और पश्चिम बंगाल को वित्त आयोग से राजस्व घाटा अनुदान मिला.
कितना रहा राजस्व घाटा
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यदि 2024-25 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा राज्यों के लिए निर्धारित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 फीसदी के संकेतक राजकोषीय घाटा लक्ष्य को देखा जाए, तो 18 राज्य इस लक्ष्य से ऊपर रहे. 15 राजस्व घाटे वाले राज्यों का कुल राजस्व घाटा 13 राज्यों के रेवेन्यू सरप्लस को मिलाए बिना ही 3,46,385 करोड़ रुपये रहा, जो उनके संयुक्त GSDP का 1.5 फीसदी है. 13 राज्यों के रेवेन्यू सरप्लस को समायोजित करने के बाद शुद्ध राजस्व घाटा 2,19,041 करोड़ रुपये रहा, जो सभी 28 राज्यों के संयुक्त GSDP का 0.68 फीसदी है.
राज्यों ने कितना पैसा जुटाया
कैग ने अपनी रिपोर्ट में राज्यों के रेवेन्यू की बढ़ती अहमियत को दिखाया, जो 2024-25 में 28 राज्यों की कुल राजस्व प्राप्तियों 40.52 लाख करोड़ रुपये का 50 फीसदी रहा. इस दौरान राज्य जीएसटी राज्यों के अपने कर राजस्व का 43 फीसदी से अधिक रहा है. सभी राज्यों का संयुक्त बजटीय खर्च 2024-25 में 51.20 लाख करोड़ रुपये रहा, जो उनके संयुक्त GSDP का 15.78 फीसदी है. आंकड़े बताते हैं कि वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान अब भी राजस्व खर्च का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं. 31 मार्च 2025 तक राज्यों की कुल देनदारियां 90.51 लाख करोड़ रुपये थीं.















