Sunday, July 5, 2026
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मुख्यमंत्री के काफिले को दिखाया काला झंडा: पुलिस ने युवक को हिरासत में लिया; सर्किट हाउस से एयरपोर्ट जा रहा था काफिला – Jodhpur News




जोधपुर में सीएम भजनलाल शर्मा को एक युवक ने काला झंडा दिखाया। रातानाडा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए युवक को हिरासत में ले लिया है। आरोपी की पहचान जितेश्वर चौधरी के रूप में हुई है, जो छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) से जुड़ा बताया जा रहा है। दरअसल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पचपदरा रिफाइनरी और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। सीएम भजनलाल शर्मा जोधपुर दौरे पर आए हुए थे। शनिवार शाम को जब वह वापस जयपुर जाने के लिए जोधपुर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए और उनका काफिला भाटी चौराहे के पास पहुंचा, तो वहां पहले से खड़े युवक ने काफिले को काले झंडे दिखाए। विधायक जोशी से मिलने अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री शर्मा रिफाइनरी के कार्यक्रम के बाद जोधपुर पहुंचे और अस्पताल में भर्ती सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी का हालचाल जानने के लिए अस्पताल गए। इसके बाद उन्होंने भाटी चौराहे पर एक दुकान पर बैठकर चाय पी और वहां मौजूद आम लोगों से संवाद भी किया।

जोधपुर में सीएम भजनलाल शर्मा को युवक ने काल झंडा दिखाया। रातानाडा थाना पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया है। आरोपी की पहचान जितेश्वर चौधरी के रुप हुई है। वह एनएसयूआई से जुड़ा बताया जा रहा है। दरअसल सीएम भजनलाल शर्मा जोधपुर दौर आए हुए है। शनिवार शाम को वो वह वापस जयपुर जाने के लिए जोधपुर एयरपोर्ट के के लिए रवाना हुए। काफिला भाटी चौराहे के आगे पहुंचा तो वहां पहले से खड़े एक युवक ने काफिले को काले झंडे दिखाये। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पचपदरा रिफाइनरी और जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन समारोह में क लिए जोधपुर आए हुए थे।
विधायक जोशी से मिलने अस्पताल गए और भाटी चौराहे पर पी चाय मुख्यमंत्री शर्मा रिफाइनरी के उद्घाटन के बाद जोधपुर एयरपोर्ट पहुंचे और अस्पताल में भर्ती सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी का हालचाल जानने के लिए हॉस्पिटल गए। इसके बाद उन्होंने भाटी चौराहे पर एक दुकान पर बैठकर चाय पी और लोगों से संवाद भी किया।



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रिवेंज पर बनीं 2 थ्रिलर फिल्में, दोनों में सेम था विलेन का नाम, एक सुपरहिट, दूसरी फ्लॉप


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दो फिल्मों में कई बार एक जैसी कहानी देखने को मिल जाती है. 70 के दशक में दो ऐसी फिल्में आई जिनमें बदले की कहानी थी. दोनों एक्शन थ्रिलर फिल्में थीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्मों के विलेन का नाम सेम था. दोनों फिल्मों के विलेन अपने-अपने किरदार में अमर हो गए. दोनों फिल्मों के गाने खूब पॉप्युलर हुए. एक मूवी जहां सुपरहिट साबित हुई तो दूसरी फिल्म आइकॉनिक बन गई. दोनों फिल्में 7 साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं.

70 के दशक में रिवेंज बेस्ड मसाला फिल्मों का चलन शुरू हुआ. इन फिल्मों में एक्शन-रोमांस-म्यूजिक, क्राइम-थ्रिल हर एलिमेंट था.
इसी दशक में 7 साल के अंतराल में दो ऐसी फिल्में आईं जिनमें बदले की कहानी थी. दोनों ही मसाला फिल्में थीं. मजेदार बात यह है कि दोनों फिल्मों में विलेन का नाम एक जैसा था. एक फिल्म में जहां ही मैन धर्मेंद्र थे तो दूसरी में एंग्री यंगमैन अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. दोनों ही फिल्मों के गाने सुपरहिट थे. ये फिल्में थीं : यादों की बारात और शान. मजेदार बात यह है कि दोनों फिल्मों की स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी.

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आमिर खान के ताया नासिर हुसैन ने 70 के दशक में पहली मसाला फिल्म ‘यादों की बारात’ बनाई थी जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. निर्देशन-प्रोडक्शन नासिर हुसैन ने किया था. फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा, तारिक खान, जीनत अमान लीड रोल में थे. फिल्म के मेन विलेन अजीत थे. तारिक खान बॉलीवुड सुपर स्टार आमिर खान के ममेरे भाई हैं. फिल्म में आमिर खान ने तारिक के बचपन का रोल निभाया था.

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फिल्म का सदाबहार म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 6 गाने थे. मजरूह सुल्तानपुरी ने ऐसे गाने लिखे जो अमर हो गए. फिल्म का पॉप्युलर गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ मूवी की पहचान बन गया. आशा भोसले-मोहम्मद रफी ने इस कालजयी गीत को गाया था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल ट्रैक दो लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने गाया था.

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सलीम-जावेद की जोड़ी ने 1965 में आई ‘वक्त’ फिल्म की कहानी को नए अंदाज में लिखा था. इसीलिए ‘वक्त’ और ‘यादों की बारात’ फिल्मों में कई समानताए हैं. दोनों फिल्मों की शुरुआत में ही परिवार के सदस्य बिछुड़ जाते हैं और कहानी के अंत में मिल पाते हैं. दोनों फिल्मों में ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया गया था. ‘यादों की बारात’ की स्टोरी में बदले की भी कहानी थी. धर्मेंद्र अपने पिता का कातिल का चेहरा नहीं देख पाते. वो पूरी जिंदगी पिता के कातिल को खोजते रहते हैं. मेन विलेन अजीत थे. फिल्म में मेन विलेन का नाम ‘शाकाल’ था. आगे चलकर 1980 में आई ‘शान’ फिल्म के विलेन का नाम भी ‘शाकाल’ था. शान फिल्म में ‘शाकाल’ का कालजयी रोल कुलभूषण खरबंदा ने निभाया था.  

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‘यादों की बारात’ ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी. करीब 4.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. 1973 का साल धर्मेंद्र के लिए बहुत ही खास रहा. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल बॉलीवुड को अमिताभ बच्चन के रूप में एंग्रीमैन मिला जिन्होंने बॉलीवुड में एकतरफा राज किया.

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इसी तरह बदले की कहानी पर सलीम-जावेद ने एक और स्क्रिप्ट लिखी. इस स्क्रिप्ट पर बनी फिल्म का नाम ‘शान’ था जिसकी तुलना 1975 की ऑल टाइम ग्रेट फिल्म ‘शोले’ से भी की गई. दोनों फिल्म की स्टार कास्ट, कहानी, विलेन सबकुछ ‘शोले’ जैसा ही था. इस फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक मूवी में होती है. फिल्म ने सुपरहिट मूवी से ज्यादा कमाई की लेकिन फिर भी उसे फ्लॉप करार दिया गया. इस फिल्म के वीडियो कैसेट खरीदने के लिए शहरों में लूट मच गई थी.

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‘शोले’ की अपार सफलता के बाद रमेश सिप्पी से दर्शकों को इसी तरह की फिल्म की उम्मीद थी. रमेश सिप्पी ने सलीम-जावेद से साफ कहा कि ऐसी कहानी लिखिए जो शोले से भी बड़ी हो. हर पहलू से फिल्म ‘शोले’ से बड़ी हो. ‘शान’ फिल्म में सुनील दत्त, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, राखी गुलजार, परवीन बॉबी, बिंदिया गोस्वामी, जॉनी वॉकर और कुलभूषण खरबंदा जैसे सितारे नजर आए. कुलभूषण खरबंदा ने ‘शाकाल’ का रोल निभाया था. इस किरदार को उन्होंने अमर कर दिया. ‘शोले’ गांव की कहानी थी तो ‘शान’ की स्टोरी शहर पर बेस्ड थी.

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शान फिल्म दिसंबर 1980 में रिलीज हुई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन का अंदाज ‘शोले’ जैसा ही था. सबसे बड़े बजट, सबसे बड़े स्टारकास्ट, सबसे बड़ी उम्मीदों के साथ फिल्म सिनेमाघरों में आई. फिल्म की कहानी बदले की थी. बड़े भाई के कत्ल का बदला अमिताभ बच्चन लेते हैं. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. कुल 7 गाने थे. इस’यम्मा यम्मा’, ‘प्यार करने वाले जीते हैं शान से’ और ‘जानू मेरी जान’ जैसे गाने पॉप्युलर हुए. गीतकार आनंद बख्शी थे.

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‘शान’ में शाकाल का जो अड्डा दिखाया गया वो स्टेप होल्म था. यह ब्रिस्टल चैनल में स्थित एक छोटा-निर्जन ब्रिटिश द्वीप है जो समरसेट, इंग्लैंड के तट से दूर है. शान फिल्म की एडिटिंग, कैमरा वर्क, गीत-संगीत सबकुछ बेमिसाल था लेकिन फिल्म में इमोशन नहीं था. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं था जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस करें. यही कमी फिल्म पर भारी पड़ी. पहला हफ्ता हाउसफुल रहा लेकिन दूसरे वीक में कलेक्शन गिर गया. शान फिल्म का बजट करीब 4.25 करोड़ था. मूवी ने इतना की कलेक्शन किया था. ऐसे में फिल्म बेलो एवरेज (औसत से कम) करार दी गई. महंगा सेट, बड़ी स्टारकास्ट दर्शकों को लुभाने में कामयाब नहीं हो सके. हालांकि यह फिल्म रिपीट रन में बहुत कामयाब रही. यह फिल्म 1980 में कमाई के मामले में 5वें नंबर पर रही थी.

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वारंटी के बजाय दूसरे युवक को उठा लाई पुलिस: हमीरपुर में परिजनों ने थाने में बेरहमी से पिटाई का लगाया आरोप, हालत बिगड़ी; कानपुर रेफर – Hamirpur News




हमीरपुर जिले की सदर कोतवाली पुलिस पर वारंटी के बजाय उसके हमनाम युवक को गिरफ्तार कर थर्ड डिग्री देने का आरोप लगा है। परिजनों का आरोप है कि थाने में बेरहमी से पिटाई के बाद युवक की हालत बिगड़ गई। उसे पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर रेफर कर दिया गया। घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के मेरापुर की है। शनिवार शाम करीब सात बजे पुलिस शिवराज नाम के एक वारंटी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। आरोप है कि पुलिस उसी नाम के दूसरे युवक शिवराज सिंह को पकड़कर थाने ले आई। परिजनों का कहना है कि थाने में उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टर बोले- शरीर पर चोट के निशान जिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने बताया कि पुलिस शिवराज सिंह को घायल अवस्था में लेकर आई थी। यह फिजिकल असॉल्ट का मामला प्रतीत होता है। युवक के सिर, चेहरे और छाती पर चोटें मिली हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कानपुर रेफर कर दिया गया। युवक और बहन ने लगाए गंभीर आरोप घायल शिवराज का आरोप है कि पुलिस उसे बिना किसी वजह के पकड़कर थाने ले गई, जहां एसएचओ, एसआई और कांस्टेबलों ने मिलकर उसकी पिटाई की। वहीं, उसकी बहन रूपा ने बताया कि एसआई सुरेंद्र पाल सिंह घर आए थे और कहा था कि उनके भाई के खिलाफ वर्ष 2018 के एक मामले में वारंट है। परिवार के समझाने के बावजूद पुलिस उन्हें थाने ले गई। रूपा का आरोप है कि बाद में पुलिस ने स्वीकार किया कि गलती से दूसरे शिवराज को पकड़ लिया गया था। थाना प्रभारी ने मारपीट से किया इनकार सदर कोतवाली प्रभारी राम आसरे सरोज ने बताया कि जिस शिवराज के नाम वारंट था, उसकी जगह उसी मोहल्ले के दूसरे शिवराज को पुलिस पकड़ लाई थी। उन्होंने कहा कि जब युवक को इस बात की जानकारी हुई तो उसने थाने में हंगामा किया। थाना प्रभारी ने मारपीट के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पकड़े गए युवक के खिलाफ भी पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। मामले में आगे की जांच की जा रही है।



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पालक में छिपे हो सकते हैं लाखों बैक्टीरिया, खाने से पहले जान लें धोने का सही तरीका


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Tips To Wash Palak: बारिश के दिनों में यदि आप पालक खा रहे हैं, तो इसे इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह से साफ जरूर कर लें. इस मौसम में पत्तेदार सब्जियों में बैक्टीरियां और छोटे कीड़े का खतरा बहुत ज्यादा होता है. यहां आप पालक को सही तरह से साफ करने का तरीका जान सकते हैं.

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पालक को सबसे पौष्टिक हरी सब्जियों में गिना जाता है. इसमें आयरन, फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. यही वजह है कि लोग पालक का इस्तेमाल सब्जी, पराठा, सूप, सलाद और स्मूदी जैसी कई डिशेज में करते हैं. हालांकि, पालक का सेवन करने से पहले उसकी सही सफाई करना बेहद जरूरी है.

खासतौर पर बारिश के मौसम में पालक की पत्तियों में मिट्टी, धूल, छोटे कीड़े और बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं. इसलिए जब आप पालक को सलाद या अन्य कच्ची डिश में इस्तेमाल करते हैं, तब उसकी सफाई पर अधिक ध्यान दें. अगर आप भी पालक को सही तरीके से साफ करने का आसान तरीका जानना चाहते हैं, तो यहां बताए गए टिप्स आपके बहुत काम आ सकते हैं.

पालक को सही तरीके से धोने का आसान तरीका
ताजी पालक की पत्तियों में मिट्टी और गंदगी जमा हो सकती है. इसलिए इसे पकाने या खाने से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है. इससे बैक्टीरिया और अन्य अशुद्धियां काफी हद तक हट जाती हैं.

विधि

  • पालक साफ करने के लिए एक बड़े बर्तन में ठंडा पानी भरें. अब पालक की पत्तियों को उसमें डालकर हल्के हाथों से हिलाएं. इससे पत्तियों पर लगी मिट्टी नीचे बैठ जाएगी और पालक साफ हो जाएगी.
  • बर्तन से निकालने के बाद हर पत्ती को बहते हुए साफ पानी में एक बार और धो लें. इससे बची हुई धूल और गंदगी भी निकल जाती है.
  • धोने के बाद पालक को साफ कपड़े या पेपर टॉवल से हल्के हाथों से सुखाएं. ज्यादा दबाव डालने से पत्तियां खराब हो सकती हैं.
  • कुछ पालक की पत्तियां मुड़ी हुई या घुंघराली होती हैं, इनमें मिट्टी और छोटे कीड़े आसानी से फंस सकते हैं. इसलिए ऐसी पत्तियों को धोते समय हर कोने की अच्छी तरह सफाई करें.
  • पालक को स्टोर करने से पहले धोना सही नहीं माना जाता. ज्यादा नमी के कारण पालक जल्दी खराब हो सकती है. बेहतर होगा कि जब इस्तेमाल करना हो तभी उसे धोएं.
  • पालक की मुरझाई हुई, फटी हुई या चिपचिपी पत्तियों को इस्तेमाल न करें. ऐसी पत्तियों में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं और बाकी पत्तियों को भी खराब कर सकते हैं.
  • पालक धोने और काटने से पहले अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें. इससे संक्रमण का खतरा कम होता है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



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पूर्णिया सौरा नदी में डूबने से छात्र की मौत: कोचिंग के बाद नदी में नहाने गए थे तीन दोस्त, गहरे पानी में जाने से हादसा – Purnia News




आईटीआई में दाखिले का सपना लेकर पूर्णिया में रहकर पढ़ाई कर रहे एक छात्र की सौरा नदी में डूबने से मौत हो गई। कोचिंग क्लास खत्म होने के बाद तीन दोस्त नहाने के लिए नदी पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में हंसी-मजाक चीख-पुकार में बदल गया। एक छात्र का पैर फिसला और वह गहरे पानी में समा गया। साथ मौजूद दोनों दोस्तों ने जान जोखिम में डालकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। मृतक की पहचान रूपौली निवासी अरसद छापरी के बेटे मो हड़काप के रूप में हुई है। अरसद पूर्णिया के मधुबनी काली मंदिर के पास किराये के मकान में रहकर आईटीआई प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। आमिर और कुर्बान के साथ कोचिंग में पढ़ता था मृतक के पिता अरसद छापरी ने बताया कि हड़काप अपने दोस्त आमिर और कुर्बान के साथ कोचिंग में पढ़ता था। तीनों की दोस्ती कोचिंग में हुई थी। पढ़ाई खत्म होने के बाद वे सौरा नदी में नहाने पहुंचे। इसी दौरान हड़काप का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। आमिर और कुर्बान ने बिना समय गंवाए उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नदी की गहराई और बहाव के आगे उनकी कोशिश नाकाम रही। देखते ही देखते हड़काप नदी में लापता हो गया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय गोताखोरों ने तत्काल रेस्क्यू शुरू किया और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद छात्र का शव नदी से बाहर निकाला। सूचना पर सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।



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जेएनयू छात्रसंघ संयुक्त सचिव की तबीयत बिगड़ी: अस्पताल में भर्ती कराए गए दानिश अली, प्रदर्शनकारियों ने की शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग – New Delhi News




नई दिल्ली। जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली की तबीयत शनिवार को भूख हड़ताल के सातवें दिन गंभीर रूप से बिगड़ गई। छात्र संगठन आइसा के अनुसार, शाम करीब 5.30 बजे उन्हें डॉ राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया गया। संगठन का दावा है कि लगातार उपवास के कारण उनका ब्लड शुगर स्तर घटकर 46 एमजी/डीएल पहुंच गया, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाना पड़ा और आईवी फ्लूइड चढ़ाया गया। अस्पताल ले जाते समय जंतर-मंतर पर मौजूद बड़ी संख्या में छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। छात्र संगठन का कहना है कि दानिश अली समेत आंदोलन में शामिल छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। 20 से अधिक प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल आइसा के मुताबिक, दानिश अली के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद सोनम वांगचुक सहित 20 से अधिक प्रदर्शनकारी अब भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि आंदोलन को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। आइसा ने कहा, दानिश अली की बिगड़ती तबीयत आंदोलन की गंभीरता को दिखाती है। सरकार को तत्काल छात्रों की मांगों पर संवाद शुरू करना चाहिए।



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बिना जोखिम उठाए कमाना है मुनाफा तो यहां लगाएं पैसा, 14 जुलाई तक सस्ता निवेश


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New Mutual Fund : अगर आप भी किसी ऐसे म्यूचुअल फंड की तलाश में हैं, जो बिना ज्यादा जोखिम के ही बेहतर रिटर्न उपलब्ध करा सके, तो आईसीआईसीआई म्यूचुअल फंड ने एक मौका लॉन्च किया है. 30 जून से शुरू हुए इस एनएफओ में 14 जुलाई तक सस्ता निवेश किया जा सकता है. यह बैलेंस्ड कैटेगरी का फंड है, जिसमें जोखिम को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है.

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आईसीआईसीआई प्रू ने 30 जून को ही बैलेंस्ड म्यूचुअल फंड लॉन्च किया था.

नई दिल्ली. हर निवेशक का यही सपना रहता है कि उसके पैसों पर जमकर रिटर्न मिले और जोखिम बिल्कुल न हो. अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे तो आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का नया म्यूचुअल फंड काफी मददगार साबित हो सकता है. फंड हाउस ने ICICI प्रूडेंशियल बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड बैलेंस्ड स्कीम है जो सिर्फ़ इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती है. इस स्कीम में आर्बिट्राज की अनुमति नहीं होगी. यह न्यू फंड ऑफर (NFO) 30 जून को खुला है और 14 जुलाई को बंद होगा, जिसका मतलब है कि आपको इस अवधि के भीतर सस्ता निवेश करने का मौका मिलेगा.

इस स्कीम का मकसद एक एक्टिव स्ट्रैटेजी के जरिये इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करके कैपिटल एप्रिसिएशन और इनकम देना है. इक्विटी के मामले में फंड अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइजेशन और सेक्टर में निवेश करेगा, जबकि डेट के मामले में यह ड्यूरेशन, एएए/सरकारी प्रतिभूतियों और क्रेडिट के आधार पर मौके तलाशेगा. पोर्टफोलियो का मूल्यांकन समय-समय पर वैल्यूएशन और मार्केट की स्थितियों के आधार पर किया जाएगा और इक्विटी व डेट में एलोकेशन कमाई और बॉन्ड यील्ड के आधार पर तय किया जाएगा.

निवेश को भी बैलेंस रखता है यह फंड
ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शंकरन नरेन ने कहा कि बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड को इक्विटी और डेट एलोकेशन के बीच सही संतुलन बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें मौजूदा बाजार की स्थितियों के आधार पर पोर्टफोलियो का 40-60% हिस्सा दोनों में से प्रत्येक को आवंटित किया जाता है. हमारा मानना ​​है कि यह संतुलित दृष्टिकोण मौजूदा माहौल में बेहतर ढंग से काम करने के साथ-साथ निवेशकों के लिए इनकम जेनरेट करने और लंबे समय में वेल्थ बनाने में भी मदद करेगा.

इक्विटी देता है बेहतर रिटर्न
इक्विटी ने लंबे समय में संपत्ति बनाई है. हालांकि, इस एसेट क्लास में गिरावट और उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं. इसके विपरीत, डेट (डेट-आधारित निवेश) समय के साथ ज़्यादा स्थिर रिटर्न देता है और इक्विटी की तुलना में ज़्यादा स्थिरता प्रदान करता है. चूंकि, ये दोनों एसेट क्लास आमतौर पर एक साथ एक ही दिशा में नहीं चलते हैं, इसलिए इन्हें एक ही पोर्टफोलियो में मिलाने से निवेश का अनुभव बेहतर हो सकता है. ऐतिहासिक रूप से इक्विटी और डेट के मिले-जुले पोर्टफोलियो ने इक्विटी में गिरावट के दौरान कम नुकसान दिखाया है, जबकि सामान्य बाजार स्थितियों में केवल डेट की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है.

500 रुपये से हो सकता है निवेश
इस स्कीम में कम से कम 500 रुपये से निवेश किया जा सकता है. उसके बाद एक रुपये के गुणक में निवेश कर सकते हैं. ICICI प्रूडेंशियल बैलेंस्ड हाइब्रिड फंड के दो विकल्प डायरेक्ट और रेगुलर प्लान हैं. इसका बेंचमार्क CRISIL हाइब्रिड 50+50 – मॉडरेट इंडेक्स है. इस स्कीम के स्ट्रक्चर के तहत इक्विटी और डेट दोनों को 40-60% का एलोकेशन मिलता है और आर्बिट्राज के लिए कोई एलोकेशन नहीं होता है. यही बात सेबी द्वारा तय की गई ‘बैलेंस्ड हाइब्रिड’ कैटेगरी को ‘एग्रेसिव हाइब्रिड’ कैटेगरी (65-80% इक्विटी, 20-35% डेट) और ‘कंजर्वेटिव हाइब्रिड’ कैटेगरी (10-25% इक्विटी, 75-90% डेट) से अलग बनाती है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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एमपी राजस्थान सीमा पर शिबू गैंग का आतंक: कोंदिया गांव के ग्रामीणों ने एसपी ऑफिस पहुंचकर सौंपा ज्ञापन; आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग – Guna News




गुना जिले के फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोंदिया और टकोरिया में अंतरराज्यीय बदमाश शिवू उर्फ शिवचरण गुर्जर और उसकी गैंग के आतंक से ग्रामीण खौफजदा हैं। डकैती, लूटपाट और पुलिस की ढीली कार्रवाई से नाराज होकर शनिवार को भारी संख्या में लामबंद ग्रामीण और पीड़ित परिवार गुना पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने एसपी शिकायत शाखा में आवेदन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराएं लगाने और जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। घटना बीते 30 जून की दोपहर की है। पीड़ित लक्ष्मीनारायण धाकड़ ने बताया कि घटना के समय वे खेत पर बोवनी करने गए थे और घर पर केवल महिलाएं थीं। इसी दौरान राजस्थान के बारां जिले के छतरपुरा निवासी शातिर बदमाश शिवू उर्फ शिवचरण गुर्जर अपने तीन अन्य हथियारबंद साथियों के साथ उनके घर में घुस गया। आरोपियों ने दिनदहाड़े घर में डकैती डालकर जमकर उत्पात मचाया। उन्होंने घर के बाहर खड़ी मोटरसाइकिल, एक फोर-व्हीलर गाड़ी, कूलर और अन्य गृहस्थी के सामान में बेरहमी से तोडफ़ोड़ की। विरोध करने पर महिलाओं के साथ मारपीट की गई और उनके सोने के मंगलसूत्र, नकदी व मोबाइल छीनकर आरोपी फरार हो गए। इस हमले में पीड़ित परिवार का करीब 3 से 4 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। ग्रामीण रविंद्र धाकड़ ने बताया कि शिवू गुर्जर एक आदतन अपराधी है, जिसने मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में दहशत फैला रखी है। वह रोजाना पार्वती नदी के किनारे गुंडागर्दी करता है और अवैध शराब की तस्करी में लिप्त है। उसकी गैंग के डर से ग्रामीण रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने एसपी से मांग की है कि मामले में डकैती की धाराएं बढ़ाई जाएं और पूरी गैंग को गिरफ्तार कर गांव को इस आतंक से मुक्ति दिलाई जाए।



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कैटरीना कैफ को जब जिम में देखकर डरीं परिणीति चोपड़ा, बढ़ा दी थी ट्रेडमिल की स्पीड


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एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा ने शो ‘कॉफी विद करण’ में कैटरीना कैफ की पर्सनैलिटी को लेकर दिलचस्प खुलासा किया था. वे उन्हें देखकर परेशान हो जाती थीं. परिणीति चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने जिम में कैटरीना कैफ के डर से ट्रेडमिल की स्पीड बढ़ा दी थी. एक्ट्रेस ने हाल में अपना नया शिव भजन ‘नमामि शमीशम’ रिलीज किया है. परिणीति ने बताया कि उन्होंने यह गाना अपनी प्रेग्नेंसी के खूबसूरत दौर में रिकॉर्ड किया था.

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परिणीति चोपड़ा, कैटरीना कैफ की बड़ी फैन हैं.

नई दिल्ली: करण जौहर के चैट शो ‘कॉफी विद करण’ में फिल्मी सितारों ने सिनेमा और अपनी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए हैं. परिणीति चोपड़ा ने भी चैट शो में बीते दिनों को याद किया. उन्होंने अपनी कोस्टार कैटरीना कैफ से जुड़ा एक बेहद मजेदार किस्सा बयां किया. वे शो में एक्टर आदित्य रॉय कपूर के साथ पहुंची थीं. उन्होंने माना कि वह कैटरीना कैफ के सामने आते ही बुरी तरह घबरा जाती हैं. उन्होंने खुद को कैटरीना कैफ का फैन बताया. वे कैटरीना की शांत, गंभीर और संयमित पर्सनैलिटी की बड़ी दीवानी हैं. कैटरीना कैफ का औरा ही ऐसा है कि कोई भी उनके सामने सहम जाए.

परिणीति ने जिम का एक मजेदार वाकया याद किया. उन्होंने बताया कि एक दिन जब वह वर्कआउट कर रही थीं, तभी वहां अचानक कैटरीना कैफ आ गईं. कैटरीना को देखते ही परिणीति की घबराहट इतनी बढ़ गई कि उन्होंने अपने ट्रेडमिल की स्पीड तुरंत बढ़ा दी, ताकि वह ज्यादा मेहनती लग सकें. परिणीति को ऐसा करते देख कैटरीना खुद उनके पास आईं और बड़े सख्त लहजे में पूछा, ‘तुम यह क्या कर रही हो? कितने मिनट हुए?’ जब परिणीति ने डरते-डरते जवाब दिया ’20 मिनट’ तो कैटरीना ने कड़क आवाज में ऑर्डर दिया- ‘5 मिनट और करो.’

परिणीति चोपड़ा की जब हुई बोलती बंद
परिणीति चोपड़ा ने हंसते हुए बताया कि कैटरीना के उस कड़क अंदाज के आगे उनकी बोलती बंद हो गई और उन्होंने चुपचाप उनकी बात मान ली. शो के होस्ट करण जौहर ने जब आदित्य रॉय कपूर से पूछा कि क्या उन्हें भी कैटरीना से डर लगता है, तो आदित्य ने भी हंसते हुए हामी भरी. दोनों का कहना था कि कैटरीना का चेहरा ही ऐसा है कि उनके आस-पास कोई भी नर्वस हो सकता है.

प्रेग्नेंसी के दिनों में किया था रिकॉर्ड
परिणीति चोपड़ा ने हाल में अपना एक नया भक्ति गीत ‘नमामि शमीशम’ रिलीज किया, जिसे लेकर उन्होंने एक अहम खुलासा किया. परिणीति ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह खूबसूरत शिव भजन उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के दिनों में रिकॉर्ड किया था. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि प्रेग्नेंसी का वह दौर उनके लिए आस्था, आत्म-चिंतन और भगवान का आभार जताने का खूबसूरत समय था. जब भी वह इस भजन को सुनती हैं, उन्हें अपनी जिंदगी का वह हसीन सफर याद आ जाता है. परिणीति का यह दिल छू लेने वाला गाना अब यूट्यूब और सभी म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर फैंस के लिए मौजूद है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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‘मेरी तबीयत ठीक नहीं है’, बहन आशा से जब मिलने पहुंचीं उषा मंगेशकर, सुनाया यादगार किस्सा


नई दिल्ली: भारतीय संगीत की अनमोल रत्न और सुरों की मलिका आशा भोंसले ने जब भी माइक संभाला, जादू बिखर गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टेज पर सादगी से साड़ी पहने दिखने वाली हमारी प्यारी ‘आशा ताई’ बचपन में कैसी थीं? हाल ही में उनकी बहन उषा मंगेशकर ने आशा भोंसले से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी यादें साझा की हैं, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान है. उषा मंगेशकर ने बताया कि शादी से पहले आशा जी बिल्कुल एक ‘टॉमब्वॉय’ थीं, जो पैंट-शर्ट पहनती थीं और बात-बात पर लोगों से भिड़ जाती थीं.

आइए जानते हैं आशा भोंसले की जिंदगी का वो दौर जब वे घर से भाग गई थीं और सालों बाद जब अपनी बहन से मिलीं, तो नजारा कैसा था.

बात-बात पर हो जाती थी लड़ाई

उषा मंगेशकर ने फिल्मफेयर में उन दिनों को याद किया जब वे और आशा भोंसले साथ रहा करती थीं. उन्होंने बताया, “शादी से पहले मुझे आशा की जो छवि याद थी, वो एक छोटे टॉमब्वॉय जैसी थी. वो सात-आठ साल की उम्र में पैंट, शर्ट और वेस्टकोट पहनती थीं, साइकिल पर घूमती रहती थीं और हमेशा किसी न किसी से लड़ाई करने के लिए तैयार रहती थीं. वो बेहद चुलबुली थीं, सबको चिढ़ाती थीं, हंसती-मजाक करती थीं और लोगों को मारने के लिए उनके पीछे दौड़ती थीं.” उषा को लगा था कि बड़ी होने के बाद भी आशा वैसी ही होंगी, लेकिन वक्त ने सब कुछ बदल दिया था.

14 साल की उम्र में घर से भागकर की थी शादी

आशा भोंसले की निजी जिंदगी बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही. उन्होंने महज 14-15 साल की उम्र में अपने से करीब 20 साल बड़े गणपतराव भोंसले के साथ घर से भागकर शादी कर ली थी. इस फैसले से उनका परिवार, खासकर उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर बेहद नाराज हो गई थीं. लता दीदी ने इस शादी को मंजूरी नहीं दी थी और उन्होंने लंबे समय तक आशा जी से बात भी नहीं की थी. घर छोड़ने के बाद लगभग एक दशक तक आशा भोंसले का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा.

फटी रह गईं बहन की आंखें

उषा मंगेशकर ने बताया कि जब आशा जी ने घर छोड़ा, उसके करीब 10 साल बाद दोनों बहनों की पहली मुलाकात एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई, जहां उन्हें एक साथ युगल गीत गाना था. उषा ने बताया, “शादी के बाद मैं उन्हें पहली बार देख रही थी. वे हाल ही में बेटे हेमंत की मां बनी थीं. जब मैंने उन्हें देखा, तो मैं बस देखती ही रह गई. कहाँ वो पैंट-शर्ट पहनने वाली चुलबुली लड़की और कहाँ सामने खड़ी एक संस्कारी महिला! उनके माथे पर एक बड़ा सा टिक्का था, बाल बंधे हुए थे, उन्होंने एक सादी सफेद साड़ी पहनी हुई थी, हाथों में सोने की चूड़ियाँ और कलाई पर घड़ी थी. वे पूरी तरह बदल चुकी थीं.”

मुलाकात होते ही लगाई थी डांट

उषा मंगेशकर ने हंसते हुए उस पल को याद किया जब आशा जी ने उन्हें देखते ही सबसे पहले डांट लगाई थी. उषा ने बताया, “उन्होंने मुझे देखा और तुरंत टोकते हुए कहा- तुम्हारे बाल इतने बिखरे हुए क्यों हैं? क्या तुम्हारे पास हेयरपिन नहीं है? मेरे पास कोई पिन नहीं थी, तो उन्होंने खुद अपनी एक हेयरपिन निकाली, मुझे दी और कहा- इसे लगाओ और अपने बालों को ठीक से पिन करके आया करो. उनके बात करने का तरीका, उनका लहजा सब कुछ पूरी तरह बदल चुका था.”

पोते के जन्म के बाद पिघला था मां का दिल

घर से भागने की वजह से भले ही परिवार में दूरियां आ गई थीं, लेकिन आशा जी के पहले बेटे हेमंत के जन्म के बाद चीजें बदलने लगीं. उषा ने बताया कि जब उनकी मां को पता चला कि उनका पहला पोता हुआ है, तो वे बेहद खुश हुईं. कुछ दिनों बाद आशा जी ने खुद अपनी मां को फोन किया और कहा, “मेरी तबीयत ठीक नहीं है, प्लीज आ जाओ.” इसके बाद मां के साथ उषा भी उनसे मिलने गईं और धीरे-धीरे परिवार के बीच का मनमुटाव खत्म हो गया और सबका साथ में आना-जाना फिर से शुरू हो गया.

बता दें कि गणपतराव भोंसले से आशा जी का रिश्ता लंबा नहीं चला और 1960 में दोनों अलग हो गए. इसके बाद 1980 में उन्होंने मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन से शादी की थी. आशा भोंसले की जिंदगी की ये कहानियां बयां करती हैं कि एक चुलबुली और बागी लड़की ने किस तरह हालातों का सामना करते हुए खुद को ढाला और संगीत की दुनिया में एक ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.



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