Thursday, June 18, 2026
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घर पर बनाएं सोया चाप, बनाने के लिए सिर्फ 4 चीजों की जरूरत, जानें विधि


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Homemade Soyachaap Recipe: बाजार में मिलने वाला सोया चाप गंदगी और मिलावट से तैयार बना हुआ हो सकता है. ऐसे में इसे घर पर बनाना बेहतरीन विकल्प होता है. इस लेख में आप घर पर सोया चाप बनाने के आसान तरीके के बारे में जान सकते हैं.

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सोया चाप शाकाहारी थाली में चिकन-मटन के स्वाद को जोड़ने का काम करता है. हालांकि इसमें किसी तरह का नॉनवेज नहीं मिला होता है, लेकिन इसका टेक्सचर और स्वाद बिल्कुल बोनलेस चिकन की तरह लगता है. सेहत के नजरिए से भी सोया चाप फायदेमंद माना जाता है. सोयाबिन से तैयार किए जाने के कारण इसमें हाई प्रोटीन और फाइबर होता है. इसके अलावा इसमें फैट की मात्रा भी कम होती है, जो इसे जिम जाने वालों के लिए एक बेहतरीन फूड साबित होता है.

हालांकि, सोया चाप आसानी से मार्केट से खरीदे जा सकते हैं, लेकिन मिलावट और गंदगी से बनाने के ऐसे कई वीडियो सामने आ चुके हैं, जिसे देखने के बाद खा पाना मुश्किल है. इसलिए आज हम आपको यहां बहुत ही आसान तरीके से घर पर सोयाचाप बनाने का तरीका बता रहे हैं.

घर पर सोयाचाप बनाने का तरीका

सामाग्री
सोयाबीन दाल- आधा कप
सोया चंक्स- 1 कप
मैदा-1 कप बाइंडिंग के लिए
नमक
आइसक्रीम स्टिक्स- 8-10

विधि

  • सोयाचाप बनाने के लिए एक रात पहले सोयाबीन दाल को पानी में भिगोकर छोड़ दें. सुबह साफ पानी से इसे धोकर मिक्सर में कम पानी के साथ स्मूथ पीस लें.
  • फिर सोया चंक्स को उबलते पानी में लगभग 5 मिनट तक पकाएं. इसके बाद इन्हें ठंडा होने दें और अच्छी तरह दबाकर सारा पानी निकाल दें. अब सोया चंक्स को मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें.
  • एक बड़े बाउल में पिसी हुई सोया दाल, दरदरे सोया चंक्स, मैदा और नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. बिना पानी या जरूरत हो तो सिर्फ कुछ बूंद पानी डालकर इसे सख्त आटे की तरह गूंध लें. आटे को 10 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए.
  • अब आटे की एक बड़ी लोई बनाकर पतली रोटी बेल लें. रोटी को चाकू से लंबी और पतली स्ट्रिप्स में काट लें. एक आइसक्रीम स्टिक लें और एक-एक स्ट्रिप को स्टिक पर घुमाते हुए लपेट दें.
  • दूसरी तरफ एक गहरे बर्तन में पानी उबालें. जब पानी अच्छे से उबलने लगे, तब तैयार स्टिक्स को उसमें डाल दें. इन्हें 10-12 मिनट तक तेज आंच पर पकाएं. पकने के बाद सोया चाप पानी की सतह पर तैरने लगेगी. इन्हें तुरंत निकालकर बर्फ वाले ठंडे पानी में डाल दें, जिससे चाप मुलायम, स्पंजी और जूसी बनेगी.

ऐसे करें स्टोर
ठंडा होने पर चाप को सुखाकर जिपलॉक बैग में भरें और फ्रीजर में रख दें. ऐसे चाप को 2-3 महीने तक स्टोर करके खाया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर निकालें, काटें और अपनी पसंदीदा ग्रेवी में बनाकर स्वादिष्ट सोया चाप का आनंद लें.

About the Author

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



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‘शिवसेना-UBT में कोई टूट नहीं’, संजय राउत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को हवा में उड़ाया


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Uddhav Thackery Shiv Sena Crisis LIVE: उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक और टूट के कगार पर पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि 9 में से 6-7 सांसद पार्टी से अलग हो सकते हैं. इन सभी के ए‍कनाथ शिंदे के खेमे में जाने की संभावन…और पढ़ें

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उद्धव ठाकरे की शिवसेना एक और टूट के कगार पर है, वहीं पार्टी के टॉप लीडर ने बड़ा दावा किया है. (फाइल फोटो/Reuters)

Uddhav Thackery Shiv Sena Crisis LIVE: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट और सांसदों के दल-बदल की अटकलों के बीच पार्टी के लोकसभा सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह से पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ हैं और भविष्य में भी उनके साथ ही बने रहेंगे. वाजे ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है. मैंने पार्टी की बैठक में भी अपना रुख साफ कर दिया है कि मैं उद्धव ठाकरे के साथ हूं और हमेशा रहूंगा.’ वहीं, पार्टी के एक और सांसद अरविंद सावंत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को खारिज करते हुए दावा किया कि 14 जून को उद्धव ठाकरे की अध्‍यक्षता में संपन्‍न हुई बैठक में पार्टी के सभी सांसद शामिल हुए थे.

राजाभाऊ वाजे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब महाराष्ट्र में कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसदों में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और वे सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं. इस बीच, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि भाजपा का शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों या विधायकों के संभावित दल-बदल से कोई संबंध नहीं है. बावनकुले ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे को यह समझना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक उनसे क्यों दूर जा रहे हैं. यदि वे एकनाथ शिंदे के साथ जा रहे हैं तो यह उनका आंतरिक मामला है. भाजपा या उसके किसी नेता का इससे कोई लेना-देना नहीं है.’ उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय राउत के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें दावा किया गया था कि सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है. बावनकुले ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और यह सांसदों एवं विधायकों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है.

अरविंद सावंत का बड़ा दावा

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के एक और सीनियर सांसद अरविंद सावंत ने भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं को मीडिया द्वारा पैदा किया गया माहौल बताया. उन्होंने कहा कि 14 जून को उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे, जिनमें कुछ सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे. सावंत ने दो टूक कहा कि पार्टी बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा पर चल रही है और जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, उसे पहले इस्तीफा देकर जनता के बीच जाना चाहिए. उधर, संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की. राउत ने किसी भी संभावित बगावत के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी अभी तक किसी आधिकारिक टूट की पुष्टि नहीं करती है. गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए बड़े राजनीतिक विद्रोह ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था. अब ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है, हालांकि उद्धव ठाकरे गुट के नेता लगातार एकजुटता का दावा कर रहे हैं.

Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: उद्धव को अब सताने लगा विधायकों के टूटने का डर

उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच अब पार्टी नेतृत्व की नजरें महाराष्ट्र विधानसभा में अपने विधायकों पर टिक गई हैं. सूत्रों के अनुसार, सांसदों से जुड़े घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे को अपने 20 विधायकों की एकजुटता बनाए रखने की चिंता सताने लगी है. इसी को देखते हुए ठाकरे खुद विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साध रहे हैं और उन्हें फोन कर पार्टी के साथ बने रहने का संदेश दे रहे हैं. उद्धव गुट के पास फिलहाल आदित्य ठाकरे समेत कुल 20 विधायक हैं. राजनीतिक हलकों में जारी अटकलों के बीच पार्टी नेतृत्व संगठन और विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशों में जुट गया है. हालांकि, अब तक किसी विधायक के पार्टी छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: 14 जून को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए – अरविंद सावंत

उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने पार्टी में संभावित टूट और कथित ऑपरेशन टाइगर की अटकलों को खारिज करते हुए इसे मीडिया द्वारा पैदा किया गया प्रचार बताया है. सावंत ने कहा कि यह सवाल ही गलत है कि टाइगर कौन है? देश के महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर अनावश्यक राजनीतिक चर्चाओं को तूल दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 14 जून को पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी सांसद शामिल हुए थे. सावंत के अनुसार, चार सांसद बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि अन्य सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे. उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) पूरी तरह से बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध है. सावंत ने ईवीएम से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े गंभीर सवालों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए.

Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: शिवसेना-यूबीटी की आज अहम बैठक

उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाई है. सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट अगले दो दिनों में स्थिति की समीक्षा कर यह तय करेगा कि शिवसेना (यूबीटी) की ओर से उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर उसका क्या रुख रहेगा. बताया जा रहा है कि शिंदे गुट कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर रहा है और विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. पार्टी नेतृत्व जल्द ही अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकता है.

Shiv Sena-UBT Crisis LIVE: शिवसेना-यूबीटी में टूट की खबरें गलत – संजय राउत

उद्धव ठाकरे शिवसेना संकट लाइव: शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने पार्टी के छह सांसदों के टूटकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. उन्होंने कहा कि कुछ सांसद प्रयास कर सकते हैं, लेकिन उनकी संख्या छह नहीं है, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है. राउत ने स्पष्ट किया कि लोकसभा सचिवालय की ओर से भी शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों के दूसरी शिवसेना में शामिल होने संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि आज पार्टी की बैठक बुलाई गई है, जिसके बाद आगे की रणनीति और निर्णय पर विचार किया जाएगा. राउत ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.



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‘कॉकटेल 2’ ने रिलीज से पहले पकड़ी रफ्तार, एडवांस बुकिंग में बंपर उछाल


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Cocktail 2 Advance Booking: शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर ‘कॉकटेल 2’ रिलीज से पहले बॉक्स ऑफिस पर अच्छी पकड़ बनाती नजर आ रही है. 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म की एडवांस बुकिंग में बड़ा उछाल देखने को मिला है. फिल्म रिलीज से पहले ही करोड़ों कमा चुकी है. किसी बड़ी बॉलीवुड फिल्म से टक्कर न होने का फायदा भी ‘कॉकटेल 2’ को और भी फायदा मिल सकता है.

नई दिल्ली. शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर ‘कॉकटेल 2’ की रिलीज को अब 24 घंटे से भी कम का समय बचा है. फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है . मेकर्स और स्टार कास्ट लगातार फिल्म का प्रमोशन भी कर रहे हैं. इस रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी रिलीज से पहले ही जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है. शुरुआती दिनों में टिकट बिक्री की रफ्तार भले ही धीमी रही हो, लेकिन रिलीज डेट नजदीक आते-आते फिल्म ने जोरदार पकड़ बना ली है. एडवांस बुकिंग में बंपर उछाल देख मेकर्स भी काफी खुश हैं.

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ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कॉकटेल 2’ ने ओपनिंग डे के लिए 57,000 से ज्यादा टिकटों की बिक्री कर ली है. बिना ब्लॉक सीट्स के फिल्म की एडवांस बुकिंग से करीब 1.97 करोड़ रुपये की कमाई हुई है. वहीं, ब्लॉक सीट्स को शामिल करने पर यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 3.67 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है.

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रिलीज से पहले अभी एक दिन का समय बाकी है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि फिल्म की एडवांस बुकिंग में और इजाफा देखने को मिल सकता है. फिल्म की एडवांस बुकिंग रविवार को शुरू हुई थी. शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया कुछ खास नहीं रही. मेकर्स भी ये देख हैरान थे लेकिन जैसे-जैसे रिलीज का दिन करीब आने लगे, टिकट बिक्री में तेजी देखने को मिली.

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हालांकि, यह साल की सबसे बड़ी प्री-सेल फिल्मों में शामिल नहीं है, लेकिन मौजूदा आंकड़े इसे एक मजबूत शुरुआत की ओर इशारा करते हैं. अब इंडस्ट्री की नजर इस बात पर रहेगी कि एडवांस बुकिंग का यह एक्साइटमेंट पहले दिन की कमाई में कितना बदल पाता है.

फिल्म के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि 19 जून को बॉक्स ऑफिस पर इसके सामने कोई भी बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं हो रही है. पिछले हफ्ते रिलीज हुई फिल्में ‘मैं वापस आऊंगा’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ बॉक्स ऑफिस पर शांत पड़ चुकी हैं. इससे ‘कॉक्टेल 2’ को दर्शकों को आकर्षित करने का पूरा मौका मिलेगा.  

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वहीं, दूसरे हफ्ते में चल रही हॉरर फिल्म ‘हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ द पास्ट’ भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई है, जिसका सीधा फायदा शाहिद कपूर की फिल्म को मिलेगा.

फिल्म की चर्चा को बनाए रखने के लिए मेकर्स ने हाल ही में इसका नया गाना ‘बंधु 2.0’ रिलीज किया है. यह गाना साल 2012 में आई मूल फिल्म ‘कॉकटेल’ के सुपरहिट ट्रैक ‘तुम्ही हो बंधु’ का रीक्रिएटेड वर्जन है. प्रीतम के संगीत, कविता सेठ और नीरज श्रीधर की आवाज और इरशाद कामिल के लिखे इस गाने को सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है. कुछ लोग पुरानी यादों के ताजा होने से बेहद खुश हैं तो कुछ इसकी तुलना ओरिजिनल गाने से कर रहे हैं.

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जानलेवा हमले का मुख्य आरोपी गिरफ्तार: देवरिया में खेत बंटवारे के विवाद में धारदार हथियार से किया था हमला – Deoria News




देवरिया के मईल थाना क्षेत्र में खेत बंटवारे को लेकर हुए हमले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में अन्य नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है। मईल गांव निवासी कृष्ण बुझारत चौधरी और राकेश चौधरी के बीच कृषि भूमि के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। 14 जून को थाना परिसर में समाधान दिवस के दौरान पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था। समझौते के बाद पीड़ित पक्ष अपनी भूमि की जुताई करने पहुंचा था। आरोप है कि जुताई के बाद चेतन चौधरी अपने पिता कृष्ण बुझारत चौधरी और माता के साथ मईल चौराहे के पास एक दुकान पर बैठे थे। तभी राकेश चौधरी, विजय बहादुर चौधरी, सुनील सिंह, सुरेंद्र प्रसाद, अभिषेक पांडेय सहित अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने धारदार हथियार, ईंट और डंडों से कृष्ण बुझारत चौधरी को घायल कर दिया। बीच-बचाव करने आए चेतन चौधरी और उनकी माता को भी चोटें आईं। घायलों को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज देवरिया रेफर कर दिया गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मईल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी राकेश चौधरी पुत्र बागेश्वरी चौधरी, निवासी मईल को गिरफ्तार किया। चिकित्सीय परीक्षण के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। थानाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस ने शेष आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है। पीड़ित पक्ष ने सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।



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नौकरी पाने रिश्तों का घोटाला…: शादी के कार्ड में जिसे दादा बताया, उन्हें ही पिता बताकर निगम में ली अनुकंपा नियुक्ति – Gwalior News




सरकारी नौकरी पाने के लिए रिकॉर्ड में रिश्ते बदल दिए गए। नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति दिनांक के नाम पर ऐसा ही फर्जीवाड़ा हुआ है। देवानंद बरैया को मृत कर्मचारी नारायण सिंह बरैया का बेटा बताकर नौकरी दी गई, वह वास्तव में उनका पोता है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी कर रिश्तों को बदला गया और नियमों को दरकिनार कर सरकारी नौकरी दिला दी गई। 5 नवंबर 2007 को मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने देवानंद सहित तत्कालीन निगमायुक्त, अपर आयुक्त और कार्यालय अधीक्षक पर एफआईआर के निर्देश दिए हैं। आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति: जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। ऑडिट विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मृत कर्मचारी नारायण सिंह को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया था। उनके निधन के बाद आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। यानी जिस सेवा रिकॉर्ड के आधार पर बाद में अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया गया, उस रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े हो चुके थे। भास्कर के पास सबूत… जानें पोते देवानंद ने किन-किन दस्तावेज में दादा से रिश्ता बदला शादी कार्ड: सुप्रौत्र नारायण सिंह थे, सुपुत्र लालता प्रसाद
आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2000 का विवाह कार्ड में देवानंद बरैया को लालता प्रसाद का सुपुत्र और नारायण सिंह का सुप्रौत्र बताया था। रजिस्टर्ड वसीयत में भी पोता बताया गया है। यहीं से सवाल खड़ा हुआ कि देवानंद पोता था तो फिर वह अनुकंपा नियुक्ति का पात्र कैसे बन गया? 1996 की दो मार्कशीट: एक में पिता नारायण, दूसरी में लालता
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त पांचवीं की अंकसूची में देवानंद के पिता लालता प्रसाद दर्ज है। लेकिन नौकरी के लिए प्रस्तुत मार्कशीट में पिता का नाम बदलकर नारायण सिंह कर दिया। दोनों में जन्मतिथि में भी बदलाव पाया गया। जांच में दोनों मार्कशीट में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। रजिस्टर्ड वसीयत: देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया
जांच में मिली रजिस्टर्ड वसीयत में भी देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया गया है। इससे यह दावा और मजबूत हो गया कि वह नारायण सिंह का बेटा नहीं, बल्कि पोता था। रजिस्ट्री में पिता लालता प्रसाद और मां काशी बाई
28 दिसंबर 2012 को हुए एक विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) में देवानंद उर्फ देव आनंद ने अपनी मां काशी बाई के साथ संपत्ति बेची थी। इस दस्तावेज में देवानंद के पिता का नाम स्व. लालता प्रसाद बरैया दर्ज है। वहीं काशी बाई को भी स्व. लालता प्रसाद की पत्नी बताया गया। वोटर लिस्ट में भी पिता का नाम नारायण सिंह दर्ज
2024 की मतदाता सूची में बड़ा विरोधाभास सामने आया। इसमें काशी बाई के पति का नाम लालता प्रसाद दर्ज है, जबकि उसी परिवार में देवानंद के पिता का नाम नारायण सिंह लिखा गया है। एक ही परिवार के सरकारी रिकॉर्ड में अंतर है। ऐसे समझें पूरा मामला कमलसिंह का बाग निवासी देवानंद बरैया के दादा 17 फरवरी 1999 में निगम कर्मचारी नारायण सिंह ने 60 वर्ष की आयु पूरी की। नारायण सिंह को नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया। नारायण का निधन 31 मार्च 2001 को हुआ। 2007 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर देवानंद को अनुकंपा नियुक्ति मिली। अटक गई जांच नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने वालों पर FIR कराने नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय भोपाल तक शिकायत पहुंची। भोपाल से 6 मार्च 2026 को जारी आदेश में 10 दिन में जांच कर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन अमल नहीं हुआ। देवानंद बरैया सहित तत्कालीन निगमायुक्त पवन शर्मा, तत्कालीन अपर आयुक्त राजेश बाथम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ये बोले जिम्मेदार देवानंद की अंकसूची की जांच के लिए डीईओ को लिखा पत्र
देवानंद की अनुकंपा नियुक्ति मामले की शिकायत पहले भी हुई थी, जिसकी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अब नई शिकायत मिलने पर फिर से जांच शुरू की गई है। देवानंद की अंकसूची का सत्यापन कराने के लिए डीईओ को पत्र भेजा है। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि ग्वालियर



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शिवसेना उद्धव की संसदीय समिति की बैठक आज: सभी 9 लोकसभा सांसदों को आने का निर्देश, 6 के बागी होने की खबर


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मुंबई1 घंटे पहले

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शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल के कार्यालय में होगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा

यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी।

राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए।

शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।

6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत

  • लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है।
  • यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं।
  • इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
  • जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा।
  • आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके।

कांग्रेस बोली- शाह लोकसभा में अपनी बेइज्जती की भरपाई कर रहे

कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्षी दलों के सांसदों को भाजपा में शामिल कराने की कोशिश करने और भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने X पर कहा- शाह यह सब 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में हुई अपनी बेइज्जती की भरपाई के लिए कर रहे हैं, जब वे परिसीमन विधेयकों को पास नहीं करवा पाए थे।

रमेश ने कहा- शाह के प्रलोभन ऐसे कई लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, जो सिर्फ दो साल पहले मजबूत भाजपा-विरोधी एजेंडे पर चुने गए थे और अब भाजपा में शामिल हो रहे हैं। …………………………

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उद्धव की पार्टी टूटी, राउत ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में गाली दी:9 में से 6 सांसद बागी; 4 साल पहले शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ इसकी पुष्टि नहीं की गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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नालंदा में 2 लड़कों की मॉब लिंचिंग का VIDEO: छोड़ द बाबा… की गुहार लगाता रहा; पुजारी बरसाता रहा डंडा, पैर से पैर कुचलता रहा – Nalanda News




छोड़ द बाबा… अब ऐसा नहीं करूंगा….। जमीन पर लहुलूहान पड़े श्रवण और पिंटू बार-बार भीड़ से खुद को छोड़ देने की गुहार लगा रहे थे। भीड़ ने दोनों की एक नहीं सुनी और ताबड़तोड़ डंडे बरसाते रहे। नालंदा में सोमवार तड़के मॉब लिंचिंग में दीपनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले 24 साल के पिंटू पासवान और 22 साल के श्रवण पासवान की मौत हुई थी। घटना के तीन दिन बाद मॉब लिंचिंग का एक मिनट का वीडियो सामने आया है। नालंदा के ही रहने वाले और दिल्ली में वकालत कर रहे ब्रजेश सिंह ने घटना को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल, इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। राजगीर डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि वीडियो की सत्यता की जांच कर रहे हैं। पुष्टि के बाद वीडियो में दिख रहे लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, वीडियो को देखने के बाद मृतकों के परिजन ने दावा किया है कि वीडियो में मॉब लिंचिंग के शिकार श्रवण और पिंटू ही दिख रहे हैं। सबसे पहले मॉब लिंचिंग से जुड़ी 2 तस्वीरें देखिए अब जानिए 1 मिनट के मॉब लिंचिंग वाले वीडियो में क्या दिख रहा है? मॉब लिंचिंग के एक मिनट के वीडियो में दिख रहा है कि करीब 20 से 25 लोग श्रवण और पिंटू की हाथ बांधकर उनकी पिटाई कर रहे हैं। श्रवण और पिंटू जमीन पर पड़े हुए हैं। दोनों लहुलूहान हैं। इस दौरान भीड़ लगातार दोनों को गालियां दे रही है। सफेद धोती में दिख रहे मंदिर के पुजारी लगातार लाठी से श्रवण और पिंटू पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान श्रवण और पिंटू बाबा से खुद को छोड़ देने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन पुजारी बिना कुछ सुने लगातार डंडे बरसा रहे हैं। वीडियो में आसपास मौजूद लोग पुजारी से दोनों को छोड़ देने की बात कह रहे हैं, लेकिन बाबा उनकी भी नहीं सुनते हैं। वीडियो के आखिर में लोग दोनों से उठकर बैठने को कहते हैं, इसी बीच पुजारी श्रवण के पैर को अपने पैर से कुचलता दिखता है। करीब 30 मिनट तक भीड़ ने पिंटू और श्रवण की पिटाई की थी रविवार की शाम अपने 4 दोस्तों के साथ राजगीर में मलमास मेला देखने गए श्रवण और पिंटू को चोरी के शक में सोमवार तड़के 3 बजे भीड़ ने पकड़ा था। आरोप था कि मंदिर में पंगत चल रहा था, तब दोनों ने मंदिर की दीवार कूदकर चोरी की कोशिश की थी। करीब 20 से अधिक लोगों ने दोनों की लाठी-डंडों और लात-घूंसों से आधे घंटे तक पिटाई की थी। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, श्रवण का एक हाथ टूट गया था। लिंचिंग के दौरान श्रवण और पिंटू को अंदरूनी चोटें आई थी। इंटर्नल ब्लीडिंग की वजह से दोनों की मौत हुई है। हालांकि, मौत की असली वजह की जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही मिल पाएगी। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा मामला रविवार शाम को श्रवण और पिंटू अपने चार दोस्तों के साथ राजगीर थाना क्षेत्र के झुनकिया बाबा मंदिर के पास लगे मलमास मेला में घूमने गए थे। मृतक पिंटू पासवान की मां सरोज देवी और श्रवण की बहन रीता देवी ने बताया कि दोनों घर से निकलते समय कहा था देर रात या सुबह तक जाएंगे। देर रात अचानक रविदास टोली के कुछ लोग शोर मचाते हुए कहा कि मंदिर के पास दो लड़कों को भीड़ ने पकड़ा है और उनकी बुरी तरह पिटाई की जा रही है। लेकिन मैंने कोई जानकारी नहीं ली और सोने चली गई। ‘घर का इकलौता कमाने वाला था, परिवार कैसे चलेगा’ मृतक पिंटू की मां सरोज देवी ने बताया कि मेरा बेटा पेशे से राजमिस्त्री था। पांच भाइयों और तीन बहनों में वो सबसे बड़ा था। घर-परिवार की सारी जिम्मेदारी पिंटू पर ही थी। पिंटू अब नहीं है, ऐसे में घर-परिवार कैसे चलेगा? ये चोरी का मामला नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत मेरे बेटे की हत्या की गई है। मृतक के भाई चिंटू ने कहा कि पिंटू और श्रवण अपने गांव के ही सुभाष, आशिक, कृष्णा और आकाश नाम के लड़कों के साथ मेला घूमने गया था। चारों लड़के रविदास टोली (अली नगर) के रहने वाले हैं। पुलिस ने पहले सड़क हादसा बताया, ताकि मामले को दबाया जा सके चिंटू ने कहा कि सोमवार सुबह दीपनगर थाने की पुलिस की ओर से हम लोगों को फोन कर घटना की सूचना दी गई। हम लोग अस्पताल पहुंचे, तब पता चला कि पिंटू और श्रवण के साथ मारपीट की गई है। दोनों की हालत गंभीर थी। इसलिए डॉक्टरों ने दोनों को पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया था। वहीं, झुनकिया बाबा मंदिर के महंत अंतर्यामी शरण ने कहा था कि मलमास मेले के कारण इन दिनों मंदिर परिसर में चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रविवार की रात को भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु थे और पंगत चल रही थी। इसी बीच तड़के करीब साढ़े तीन बजे मंदिर परिसर में कुछ संदिग्ध हलचल हुई। मंदिर में पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़ी चोरियां हो रही थीं, जिससे श्रद्धालु पहले से ही बेहद आक्रोशित और सतर्क थे। महंत ने बताया कि बीते 8 तारीख को अज्ञात चोरों ने मंदिर से करीब डेढ़ लाख रुपए के सामान और कैश की चोरी की थी। 13 जून को भी एक कीमती मोबाइल और 30 हजार रुपए की चोरी हुई थी। सोमवार तड़के इन युवकों को चोरी की नीयत से घुसते देखा गया, तो मौजूद श्रद्धालुओं ने शोर मचाना शुरू किया। चोर-चोर की आवाज सुनकर दोनों युवक डरकर भागने लगे। भागने के क्रम में वे मंदिर परिसर से बाहर निकलकर मुख्य सड़क पर गिर गए, जहां पीछा कर रही उग्र भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया। सड़क पर ही स्थानीय लोगों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं के साथ आरोपियों की तीखी नोकझोंक और हाथापाई हुई। इसके बाद मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षा कैंप के जवानों को इसकी सूचना मिली तो तत्काल राजगीर थाने की पुलिस को बुलाकर दोनों युवकों को उनके सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने दोनों को भीड़ के चंगुल से सुरक्षित निकाला थाः SP नालंदा SP भारत सोनी ने बताया, पुलिस को सोमवार तड़के 3:30 बजे मारपीट की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की गश्ती टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंची और भीड़ के बीच से दोनों घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस की टीम दोनों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले गई, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। पुलिस बल के विशेष एस्कॉर्ट के साथ दोनों घायलों को पीएमसीएच भेजा गया था, लेकिन इलाज के दौरान वहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।



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महेश जोशी की गिरफ्तारी में ACB जज से चूक हुई: हाईकोर्ट ने कहा- एसीबी और जज को ट्रेनिंग की जरूरत, तथ्यों में हेरफेर की – Jaipur News


हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को अवैध बताने वाली उनके बेटे रोहित जोशी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (हैबियस कॉर्पस) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि इस मामले में ACB और विशेष न्यायाधीश

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इस मामले में जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने 12 जून को याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन मामले में विस्तृत आदेश बुधवार को अपलोड हुआ, जिसमें बेंच ने कहा- मामले में गिरफ्तारी के आधार बताने के नियमों का पालन नहीं हुआ। एसीबी और विशेष न्यायाधीश दोनों के स्तर पर गंभीर चूक हुई है।

कोर्ट ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति न्यायिक आदेशों के तहत हिरासत में हो, तब हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए गिरफ्तारी को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाता है, लेकिन याचिकाकर्ता के पास विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को कानून के अनुसार चुनौती देने का विकल्प खुला है।

एसीबी गिरफ्तारी के आधार और कारण का अंतर नहीं समझ पाई

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा- गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संवैधानिक जरूरत है। ACB रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी, जिससे साबित हो कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के वास्तविक आधार बताए गए थे।

ACB ने केवल अपराध की धाराएं बताईं, जबकि गिरफ्तारी के आधार (ग्राउंड ऑफ अरेस्ट) और गिरफ्तारी के कारण (रीजन ऑफ अरेस्ट) अलग-अलग चीजें हैं। ACB गिरफ्तारी के आधार की मूलभूत अवधारणा को ही नहीं समझ पाई।

ACB के बयानों में विरोधाभास

कोर्ट ने कहा- पहले अपने जवाब में ACB ने कहा कि महेश जोशी को गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे। बाद में कहा कि उनके परिवार को आधार बताए गए थे। ये दोनों बातें विरोधाभासी हैं। कोर्ट ने कहा कि बाद में दाखिल जवाब में कई तथ्य जोड़े गए, जो प्रथम दृष्टया हेरफेर किए गए प्रतीत होते हैं।

विशेष न्यायाधीश पर भी टिप्पणी की

बेंच ने कहा- इस मामले में ACB के साथ-साथ ACB मामलों की विशेष अदालत के जज से भी गंभीर चूक हुई है। महेश जोशी की ओर से 7 मई को ही रिमांड के समय गिरफ्तारी की वैधता पर आपत्ति उठा दी गई थी।

ऐसे में विशेष न्यायाधीश का यह दायित्व था कि वह उसी समय गिरफ्तारी की वैधता को जांचते, लेकिन उन्होंने आवेदन लंबित रखा और लगभग 31 दिन बाद उसे खारिज किया।

पुलिस और जज को ट्रेनिंग की जरूरत

बेंच ने कहा- प्रदेश की पुलिस और न्यायिक अफसरों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बारे में ट्रेनिंग की जरूरत है। इससे शुरुआती स्तर पर ही संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सही ढंग से पालन हो सके। बेंच ने आदेश की कॉपी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी है ताकि वे इसे मुख्य न्यायाधीश के सामने रख सकें। इसके अलावा आदेश की कॉपी एसीएस होम को भी भिजवाने के लिए कहा है जिससे कि निर्देशों का पालन हो सके।

परिजनों को नहीं दी गई गिरफ्तारी की लिखित सूचना

महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि मेरे पिता को 7 मई को जब गिरफ्तार कर कोर्ट में 5 दिन के पुलिस रिमांड के लिए पेश किया गया, तो नियमों की जमकर अनदेखी की गई। याचिका में दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य दिशा-निर्देशों के तहत गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना और उसकी रिसीप्ट परिजनों या उनके वकील को रिमांड मांगने से पहले नहीं दी गई थी।

रोहित जोशी की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि लिखित सूचना के अभाव में यह गिरफ्तारी पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। इसलिए उनके पिता को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।

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महेश जोशी की गिरफ्तारी को एसीबी कोर्ट ने माना सही, पूर्व मंत्री ने लिखित सूचना नहीं देने पर गिरफ्तारी को बताया था अवैध

जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी को एसीबी कोर्ट ने वैध माना है। मंगलवार को एसीबी कोर्ट ने संख्या-2 ने महेश जोशी के उस प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होने परिजनों को लिखित सूचना नहीं देने पर अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार देने की मांग की थी। पढ़ें पूरी खबर



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मानसून 8 जून से अटका: लगातार तीसरे साल जून में मानसून का लंबा ब्रेक, 17 जून तक देश में 46.2mm बारिश




पश्चिमी मानसून 8 जून से अटका हुआ है। लगातार तीसरे साल जून में मानसून ने लंबा ब्रेक लिया है। हालांकि, 2024 और 2025 में मानसून के शुरुआती ब्रेक के बावजूद सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। 2024 में मानसून की पश्चिमी शाखा जून के दूसरे हफ्ते में 8-9 दिनों तक धीमी रही थी। वहीं, 2025 में महाराष्ट्र तट के आसपास इसकी प्रगति करीब तीन हफ्ते रुकी रही थी। ऐसे में, बारिश कम दिनों में और ज्यादा तीव्रता से होती है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4-5 दिनों में मानसून के आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं। 21 से 23 जून के बीच दोबारा प्रगति संभव है। ऐसे में मानसून में 13 से 15 दिन का ब्रेक दर्ज हो सकता है। 17 जून तक देश में 46.2 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 74.3 मिमी होती है। यानी 37.8% वर्षा की कमी दर्ज की गई। बुधवार को देश का बड़ा हिस्सा बारिश के लिहाज से ‘नो वार्निंग’ श्रेणी में था। ‘अल नीनो की परिस्थितियां भी विकसित हो रही’ अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOA) की उपग्रह रिपोर्ट्स के अनुसार इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन पर्याप्त गति से सक्रिय नहीं होने से मानसून की रफ्तार धीमी है। यह सामान्यतः जून के मध्य तक उत्तर की ओर बढ़कर भारत में नमी खींचता है। अल नीनो की परिस्थितियां भी विकसित हो रही हैं। इसके परिणामस्वरूप लंबे सूखे अंतराल और असमान वर्षा देखने को मिल सकती है। उपग्रह के आंकड़े पूर्वी भारत में सक्रिय गरज-चमक का संकेत देते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी भारत में बादलों का घनत्व कम है। मैप में देखिए, कहां तक पहुंचा मानसून MP-UP समेत 6 राज्यों में प्री मानसून बारिश देश में एमपी, यूपी, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्री मानसून के तहत बारिश हो रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर समेत 11 जिलों में बुधवार को तेज बारिश हुई। अररिया में तेज बारिश के दौरान बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। राजस्थान के जयपुर में बुधवार सुबह चली तेज हवा के कारण पेड़ गिर गया। इससे उसके नीचे खड़ी तीन कारें दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। उदयपुर में तेज हवा से स्वागत द्वार चार बाइक पर और एक कार पर गिर गया। जून के तीसरे सप्ताह में भी मानसून देश के बड़े हिस्से को कवर नहीं कर पाया है। 17 जून की सुबह ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के ऊपर मानसूनी बादल नहीं हैं। इन राज्यों में आसमान साफ दिख रहा है। 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद मानसून 14 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। पिछले 7 दिन से यह तेलंगाना के भद्राचलम में अटका हुआ है। इसी वजह से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बारिश में देरी हो गई है। देशभर में प्री-मॉनसून एक्टिव, मौसम की 2 तस्वीरें… 8 राज्यों में गर्मी का असर, पारा 40°C पार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 45°C दर्ज किया गया। वहीं महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी और यूपी के वाराणसी में 42.8°C, ओडिशा के बौध में 42.7°C, झारखंड के डाल्टनगंज में 42.4°C, तेलंगाना के रामागुंडम में 42°C और एमपी के खजुराहो 41.4°C रहा। अगले दो दिन के मौसम का हाल 19 जून: 20 जून: जेट स्ट्रीम कमजोर होने पर आगे बढ़ेगा मानसून मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न कमजोर होने पर मानसूनी हवाएं तेज होंगी। अगले 4-5 दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं। जेट स्ट्रीम वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली अत्यंत तेज हवाएं हैं। ये आमतौर पर पृथ्वी की सतह से करीब 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई होती है। ये मानसूनी बादलों और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ को प्रभावित करती हैं।



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फीफा वर्ल्ड कप के बीच देखें फुटबॉल पर बनी 8 फिल्में, छिपा है भरपूर ड्रामा और इमोशन


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फीफा वर्ल्ड कप का क्रेज दुनिया भर में छाया हुआ है. अगर आप फिल्मों के जरिये फुटबॉल के रोमांच और इतिहास की झलक पाना चाहते हैं, तो आपको ये 8 इंडियन फिल्में जरूर देखनी चाहिए. इन फिल्मों में खेल के प्रति जुनून, संघर्ष और देशप्रेम को बखूबी दिखाया गया है. लिस्ट में ‘मैदान’ और ‘कैप्टन’ जैसी बायोपिक्स हैं, जो भारतीय फुटबॉल के दिग्गजों की कहानी कहती हैं. ‘धन धना धन गोल’, ‘एगारो’ जैसी फिल्में फुटबॉल के जरिए नस्लवाद और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ऐतिहासिक स्ट्रगल को पर्दे पर उतारती हैं.

नई दिल्ली: दुनियाभर में इस समय फुटबॉल का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. हर तरफ फीफा वर्ल्ड कप का खुमार छाया हुआ है और फैंस अपनी पसंदीदा टीमों को चीयर कर रहे हैं. ऐसे में फुटबॉल के इसी जुनून और रोमांच को दोगुना करने के लिए भारतीय सिनेमा ने भी समय-समय पर बेहतरीन फिल्में बनाई हैं, जो खेल प्रेमियों का दिल जीत लेती हैं.

अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘झुंड’ (2022) भी फुटबॉल की ताकत को बयां करती है. विजय बारसे के असल जीवन से प्रेरित यह कहानी एक रिटायर्ड स्पोर्ट्स टीचर की है. वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों की ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए फुटबॉल को जरिया बनाता है. वह खेल से उनकी जिंदगी बदल देता है.

साल 2007 में आई जॉन अब्राहम की फिल्म ‘धन धना धन गोल’ भी फुटबॉल प्रेमियों की पसंदीदा रही है. यह हिंदी फिल्म ब्रिटेन के साउथॉल में रहने वाले एशियाई मूल के खिलाड़ियों के फुटबॉल क्लब की कहानी है, जो नस्लवाद और भारी आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए अपनी पहचान के लिए लड़ता है.

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अजय देवगन स्टारर फिल्म ‘मैदान’ दिग्गज फुटबॉल कोच सैयद अब्दुल रहीम की जिंदगी पर आधारित है. इसमें 1952 से 1962 के बीच भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम युग को दिखाया गया है, जब भारत ने एशियन गेम्स में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.

थलापति विजय की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बिगिल’ में ‘माइकल’ नाम का एक पूर्व फुटबॉलर महिलाओं की फुटबॉल टीम का कोच बनता है. वह न सिर्फ उन्हें खेल की बारीकियां सिखाता है, बल्कि समाज और उनकी निजी चुनौतियों से लड़ना भी सिखाता है.

बंगाली फिल्म ‘एगारो’ भी देखने लायक है. अगर आप फुटबॉल के दीवाने हैं, तो आपको इसे जरूर देखना चाहिए. इसमें दिखाया गया है कि कैसे मोहन बागान 1911 में ब्रिटिश ईस्ट यॉर्कशायर रेजिमेंट को हराकर आईएफए शील्ड जीतता है.

फुटबॉल के इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए ‘कैप्टन’ (2018) जैसी फिल्में बेहतरीन हैं. मलयालम फिल्म ‘कैप्टन’ भारतीय फुटबॉल कप्तान वीपी सत्यन की बायोपिक है.

‘खेलें हम जी जान से’ (2010) और देव अधिकारी की बंगाली फिल्म ‘गोलोंदाज’ (2021) भी राष्ट्रवाद और खेल के इस मेल को आगे बढ़ाती है. फुटबॉल प्रेमियों को ये फिल्में जरूर देखनी चाहिए.

‘गोलोंदाज’ में नागेंद्र प्रसाद सरबाधिकारी की जिंदगी के जरिए यह दिखाया गया है कि कैसे अंग्रेजों के दौर में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि देश के आत्मसम्मान और आजादी की लड़ाई का प्रतीक बन गया था.

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