Monday, May 11, 2026
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LPG सिलेंडर से लेकर दवाई तक सब महंगा! जिनका बजट पहले से बिगड़ा, वो मिस न करें


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LPG सिलेंडर से लेकर दवाई तक सब महंगा! जिनका बजट पहले से बिगड़ा, वो मिस न करें

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई को हिलाकर रख दिया है. एलपीजी गैस, पेट्रोल, डीजल और खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में 300% तक के उछाल ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी महंगा कर दिया है. फिलहाल दिक्कत ये है कि न तो अमेरिका ही मान रहा है और न ही ईरान. दोनों के बीच चल रही ये लड़ाई न जाने कब रुकेगी. तो ऐसे में क्या आम आदमी की थाली से दाल और सब्जी कम होने वाली है? क्या पेट्रोकैमिकल प्रोडक्ट्स की बढ़ती कीमतें आपके बजट को पूरी तरह बिगाड़ देंगी? चलिए समझते हैं कि अब तक क्या-क्या महंगा हुआ है और आगे क्या होने वाला है.

पश्चिम एशिया में गहराता तनाव अब केवल समाचारों की सुर्खी नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे आपकी रसोई और बटुए पर हमला कर रहा है. जब भी दुनिया के उस हिस्से में हलचल होती है, तो भारत जैसे देश में उसकी गूंज पेट्रोल पंप से लेकर सब्जी मंडी तक सुनाई देती है. वर्तमान संकट ने सप्लाई चेन के लिए ऐसा व्यावधान खड़ा किया है कि आम आदमी के लिए अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण रास्तों के बंद होने से आयात-निर्यात का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर अब हमारी डेली लाइफ की चीजों के दाम पर दिखने लगा है. (Image – AI)

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सबसे तगड़ा और पहला झटका रसोई गैस के रूप में लगा है. भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी (LPG) बाहर से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा उसी समुद्री रास्ते से आता है जो अभी तनाव की वजह से बंद है. इसकी वजह से साप्ताहिक आयात में भारी कमी आई है और घरेलू सिलेंडर के दाम ₹60 तक बढ़ गए हैं. कमर्शियल सिलेंडर की हालत तो और भी खराब है, जहां 1 मई 2026 से ₹993 की भारी बढ़ोतरी देखी गई है. दिल्ली में अब यह ₹3,071 और कोलकाता में ₹3,355 तक जा पहुंचा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप बाहर खाना खाने के शौकीन हैं, तो रेस्तरां और ढाबों के बढ़े हुए बिल आपकी जेब ढीली करने के लिए तैयार हैं.

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घर में खाने-पीने की थाली भी इस महंगाई से अछूती नहीं रही. दालों और खाद्य तेल की कीमतें मार्च के महीने से ही ऊपर चढ़ना शुरू हो गई हैं. अरहर और मूंग जैसी जरूरी दालों के भाव बढ़ रहे हैं, वहीं पाम ऑयल भी करीब 5% महंगा हो गया है. समझने वाली बात ये है कि कभी-कभी कंपनियां दाम नहीं बढ़ातीं, बल्कि पैकेट का वजन कम कर देती हैं. जैसे पार्ले-जी का ₹5 वाला पैकेट अब 50 ग्राम के बजाय 45 ग्राम का रह गया है. इसके अलावा, क्रूड ऑयल महंगा होने से चीनी की कीमतों में भी उछाल आया है क्योंकि अब गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में ज्यादा हो रहा है. (Image – AI)

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ईंधन की बात करें तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी का काला साया मंडरा रहा है. भारत का कच्चे तेल का आयात बिल 190-210 मिलियन डॉलर बढ़ चुका है. जब डीजल महंगा होता है, तो सामान ढोने वाले ट्रक अपना किराया बढ़ा देते हैं, जिससे मंडी में आने वाली हर सब्जी और फल महंगा हो जाता है. जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में औसत महंगाई दर 4.8% तक जा सकती है, जो पहले के अनुमान से लगभग दोगुनी है.

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हवाई सफर करने वालों के लिए भी बुरी खबर है. जेट फ्यूल (ATF) की कीमतें 80 से बढ़कर 190 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. एयर इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां अपनी रोजाना की उड़ानों में कटौती कर रही हैं. खासकर खाड़ी देशों (Gulf countries) में काम करने वाले लाखों भारतीय मजदूरों के लिए अपने घर आना-जाना अब एक सपना जैसा होता जा रहा है क्योंकि उड़ानों की कमी और भारी किराए ने उनकी मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है.

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच क्‍या भारत में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं? आइए एक्‍सपर्ट से जानते हैं.

बीमारी के वक्त काम आने वाली दवाइयां भी अब महंगी हो रही हैं. दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल यानी API और पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें महज दो हफ्तों में 200% से 300% तक बढ़ गई हैं. पेरासिटामोल का कच्चा माल जो पहले ₹250 में मिलता था, अब ₹450 प्रति किलो हो गया है. हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार अब जरूरी दवाओं की कीमतों में कुछ रियायत देने पर विचार कर रही है ताकि फैक्ट्रियां दवाओं का उत्पादन बंद न कर दें. आम आदमी के लिए अस्पताल का खर्च और दवाओं का बिल अब बजट बिगाड़ने वाला साबित हो रहा है.

रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें जैसे साबुन, शैम्पू और डिटर्जेंट भी इस संकट की चपेट में हैं. इन चीजों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का सीधा संबंध कच्चे तेल (Crude Oil) से होता है. पैकेजिंग की लागत बढ़ने और कच्चे माल की कमी की वजह से कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम 8% से 15% तक बढ़ाने की तैयारी में हैं. वहीं, प्लास्टिक से बनी चीजें जैसे बाल्टी, मग, खिलौने और यहां तक कि मेडिकल में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज और आईवी बैग की कीमतें भी बढ़ सकती हैं क्योंकि प्लास्टिक बनाने वाला नेफ्था और पॉलिमर अब लगभग ₹1,51,200 प्रति टन के पार जा चुका है. (Image – AI)

कपड़ा उद्योग और खेती पर भी इस संकट की दोहरी मार पड़ी है. कपड़े बनाने के लिए जरूरी धागा और फाइबर सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से आता है, जहां से सप्लाई रुक गई है. वहीं किसानों के लिए यूरिया की वैश्विक कीमत 500 से बढ़कर 700 डॉलर (लगभग ₹42,000 से ₹58,800) प्रति टन हो गई है. हालांकि सरकार सब्सिडी देकर किसानों को राहत देने की कोशिश कर रही है, लेकिन अगर खाद की कमी हुई तो आने वाले समय में अनाज की कीमतें आसमान छू सकती हैं. इसके साथ ही घर बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए स्टील और सरिया महंगा होने से कंस्ट्रक्शन की लागत भी काफी बढ़ गई है.

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कांग्रेस से डील में गजब झुके थलापति विजय, 5 विधायकों वाली पार्टी के 2 मंत्री


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कांग्रेस से डील में गजब झुके थलापति विजय, 5 विधायकों वाली पार्टी के 2 मंत्री

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TVK-Congress Alliance: तमिलनाडु में तमाम तरह की कानूनी और संवैधानिक अड़चनों के बाद एक्‍टर से पॉलिटिशयन बने थलापति विजय ने मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ले ली है. अब कैबिनेट में मंत्री पद के बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है. दशकों के बाद कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्‍ता में हिस्‍सेदारी हो सकती है.

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तमिलनाडु की थलापति विजय सरकार की कैबिनेट में कांग्रेस के दो कैबिनेट मंत्री हो सकते हैं. (राहुल गांधी के X अकाउंट से साभार)

TVK-Congress Alliance: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेट्टी कझगम (टीवीके) सरकार के गठन के बाद कांग्रेस पार्टी 55 वर्षों से अधिक समय बाद तमिलनाडु सरकार में वापसी करने के लिए तैयार है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु जनादेश के बाद सत्‍ता में साझेदारी को लेकर हुए समझौते के तहत TVK ने कांग्रेस को दो कैबिनेट मंत्री पद आवंटित करने का फैसला किया है. चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान थला‍पति विजय की अगुआई में नई सरकार ने शपथ ली, जहां विजय ने तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया.

थलापति विजय साथ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने 9 मंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. विजय के नेतृत्व में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही TVK पार्टी 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, पार्टी बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गई, जिसके चलते विजय को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों का समर्थन मांगना पड़ा. डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) के तहत 28 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को केवल पांच सीटें ही मिल सकीं. सीटों की कम संख्या के बावजूद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नेतृत्व द्वारा आयोजित कई विचार-विमर्शों के बाद टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया.

कांग्रेस के ये नेता बन सकते हैं मंत्री

तमिलनाडु के लिए एआईसीसी के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक गिरीश चोडंकर ने पुष्टि की कि कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर चर्चा अभी जारी है. उन्होंने कहा कि हम इस बात पर जोर नहीं दे रहे हैं कि कांग्रेस के मंत्री तुरंत शपथ लें. मंत्रिमंडल में किन विधायकों को शामिल किया जाएगा, इस पर चर्चा चल रही है. अंतिम निर्णय दिल्ली में नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, मेलूर विधायक पी. विश्वनाथन और किल्लियूर विधायक एस. राजेश कुमार मंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं.

दशकों के बाद सत्‍ता में होगी कांग्रेस

कांग्रेस दशकों बाद तमिलनाडु सरकार में शामिल हो सकती है. बताया जा रहा है कि विजय कैबिनेट में कांग्रेस के दो मंत्री हो सकते हैं. डीएमके ने कांग्रेस की सत्ता में हिस्सेदारी की मांग ठुकरा दी थी. चेन्नई में सीएम विजय ने राहुल गांधी को सत्ता की हिस्सेदारी का ऑफर दिया था, जिसपर राहुल ने सकारात्मक रुख अपनाने की बात कही थी. बता दें कि कांग्रेस के पांच विधायकों ने विजय सरकार को अपना समर्थन दिया है. इनमें से दो मंत्री बन सकते हैं.

TVK सरकार में कौन-कौन पार्टी?

टीवीके सरकार को सीपीआई, सीपीआई (एम), आईयूएमएल और वीसीके का भी समर्थन प्राप्त हुआ, जिससे विजय आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सरकार बनाने का दावा कर सके. तमिलनाडु में कांग्रेस का मंत्रिमंडल में प्रवेश राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण क्षण है, जहां कई सरकारों में डीएमके की लंबे समय से सहयोगी होने के बावजूद पार्टी दशकों तक मंत्री पद से वंचित रही. साल 2006 में जब डीएमके ने कांग्रेस और पीएमके के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई, तो कांग्रेस को 34 सीटें जीतने के बावजूद राज्य मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया.

(इनपुट: IANS)

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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घटिया जोक्स और बकवास कहानियां, ये हैं बॉलीवुड की 7 फ्लॉप कॉमेडी फिल्में


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बॉलीवुड में कॉमेडी के नाम पर कई बार ऐसी फिल्में परोसी गई हैं, जिन्हें देख दर्शकों ने अपना सिर पकड़ लिया. बड़े सितारों की मौजूदगी और करोड़ों के बजट के बावजूद ये फिल्में अपनी कमजोर कहानी और घटिया जोक्स की वजह से सिनेमाघरों में पानी मांगती नजर आईं. हंसाने के चक्कर में मेकर्स ने जब लॉजिक को किनारे कर दिया, तो जनता का गुस्सा बॉक्स ऑफिस पर साफ दिखा और ये मूवीज बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गईं.

नई दिल्ली. सिनेमा की दुनिया में कॉमेडी एक ऐसा जॉनर है जिसे अगर सही तरीके से न परोसा जाए, तो वो मजाक नहीं बल्कि मजाक बन जाता है. अक्सर बड़े सितारे और भारी-भरकम बजट भी फिल्म को डूबने से नहीं बचा पाते, अगर स्क्रिप्ट में दम न हो. दर्शकों को हंसाने के नाम पर जब फूहड़ता, बिना सिर-पैर का लॉजिक और ओवर-एक्टिंग परोसी गई, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ा. ऐसी कई फिल्में आईं जिनका ह्यूमर दर्शकों के सिर के ऊपर से निकल गया और ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरीं.

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पागलपंती: अनीस बज्मी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनिल कपूर, जॉन अब्राहम, अरशद वारसी और इलियाना डिक्रूज जैसे बड़े नाम शामिल थे. इतनी बड़ी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म की कहानी इतनी कमजोर थी कि दर्शकों को हंसी की जगह झुंझलाहट हुई. बॉक्स ऑफिस पर यह बुरी तरह फ्लॉप हुई क्योंकि इसमें कॉमेडी के नाम पर सिर्फ शोर-शराबा था. दर्शकों ने फिल्म के फीके जोक्स और बिना किसी तुक वाली स्क्रिप्ट को सिरे से नकार दिया. (फोटो साभार: IMDb)

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हिम्मतवाला: साजिद खान की इस फिल्म में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया लीड किरदारों में थे. 80 के दशक की सुपरहिट फिल्म का रीमेक बनाने के चक्कर में मेकर्स ने एक ऐसी फिल्म पेश की, जिसमें न तो ओरिजिनल का जादू था और न ही कोई मॉडर्न अपील. अजय देवगन जैसे दमदार स्टार का लाउड कॉमेडी करना फैंस को रास नहीं आया. फिल्म का निर्देशन इतना खराब था कि यह फिल्म डिजास्टर साबित हुई. (फोटो साभार: IMDb)

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सर्कस: रोहित शेट्टी और रणवीर सिंह की जोड़ी से दर्शकों को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन ‘सर्कस’ ने सबको निराश किया. फिल्म में वरुण शर्मा, जैकलीन फर्नांडिस और पूजा हेगड़े भी थे. संजय मिश्रा और जॉनी लीवर जैसे दिग्गजों के बावजूद फिल्म का जादू नहीं चला. 60 के दशक के बैकड्रॉप पर बनी इस फिल्म का ह्यूमर काफी पुराना और फीका लगा. रोहित शेट्टी के सिग्नेचर एक्शन और कॉमेडी की कमी के कारण दर्शकों ने इसे पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया और यह बड़े बजट की फिल्म फ्लॉप रही. (फोटो साभार: IMDb)

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हमशकल्स: सैफ अली खान, रितेश देशमुख और राम कपूर के ट्रिपल रोल वाली यह फिल्म साजिद खान की सबसे बड़ी नाकामियों में से एक है. फिल्म में लॉजिक नाम की कोई चीज नहीं थी और जोक्स इतने बचकाने थे कि खुद एक्टर्स ने बाद में इस फिल्म का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी जताई. दर्शकों के लिए तीन-तीन हमशकल को झेलना नामुमकिन हो गया, जिसके चलते यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई. (फोटो साभार: IMDb)

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ग्रेट ग्रैंड मस्ती: रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदासानी की इस एडल्ट कॉमेडी ने अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी थीं. हालांकि, फिल्म ने शुरुआती बिजनेस किया था, लेकिन क्रिटिक्स और एक बड़े वर्ग के दर्शकों ने इसे फूहड़ करार दिया. फिल्म की कहानी सिर्फ डबल मीनिंग जोक्स पर आधारित थी, जिसमें कोई नयापन नहीं था. लंबे समय में यह फिल्म अपनी घटिया क्वालिटी की वजह से मजाक बनकर रह गई. इस मूवी को आप परिवार के साथ देख नहीं सकते हैं. (फोटो साभार: IMDb)

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क्या कूल हैं हम 3: तुषार कपूर और आफताब शिवदासानी स्टारर इस फिल्म को भारत की पहली पॉर्न-कॉम के रूप में प्रमोट किया गया था. फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी बकवास थी कि इसमें कॉमेडी के नाम पर सिर्फ वल्गर सीन भरे हुए थे. दर्शकों को फिल्म में न तो कहानी दिखी और न ही हंसी. कमजोर अभिनय और खराब स्क्रीनप्ले की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर अपना प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रही. ये मूवी भी फैमिली के साथ देखने लायक नहीं है. (फोटो साभार: IMDb)

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तीस मार खां: अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की इस फिल्म का निर्देशन फराह खान ने किया था. शीला की जवानी गाना सुपरहिट होने के बावजूद फिल्म का प्लॉट बहुत ही बचकाना था. अक्षय कुमार की ओवर-द-टॉप एक्टिंग दर्शकों को पसंद नहीं आई. फिल्म में जिस तरह की स्लैपस्टिक कॉमेडी की कोशिश की गई, उसने लोगों को हंसाने के बजाय निराश किया, जिसके कारण यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. (फोटो साभार: IMDb)

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पीएम आज सोमनाथ मंदिर जाएंगे: भगवान का अभिषेक करेंगे, फिर ध्वज पूजा और आरती; जनसभा और रोडशो भी करेंगे


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जामनगर54 मिनट पहले

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सोमनाथ के 100 साल पूरे होने पर पीएम सोमनाथ पहुंचे थे। तस्वीर 11 जनवरी, 2026 की है।

पीएम मोदी आज सोमनाथ मंदिर जाएंगे। वे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 11 तीर्थों के जल से भगवान का अभिषेक करेंगे। फिर कलश और ध्वज पूजा में हिस्सा लेंगे। कलश को 90 मीटर ऊंची क्रेन के जरिए मंदिर के शिखर पर पहुंचाया जाएगा।

मंदिर के दोबारा बनने के 75 साल पूरे होने पर सोमनाथ अमृत पर्व मनाया जा रहा है। पीएम रविवार रात ही गुजरात के जामनगर पहुंच गए थे। वे सोमनाथ हेलीपैड से वीर गोहिल जी के स्टैच्यू तक करीब दो किमी का रोड शो निकालेंगे।

वायुसेना की टीम सोमनाथ मंदिर के ऊपर 15 मिनट का एरोबैटिक प्रदर्शन करेगी। चेतक हेलिकॉप्टर के जरिए मंदिर के ऊपर फूल बरसाए जाएंगे। पूजा-अर्चना के बाद पीएम मोदी सोमनाथ में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

साल 2026 गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए 2 वजहों से अहम है। साल 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके 1000 साल पूरे हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 साल हो गए हैं।

मंदिर के ध्वस्त होने से बनने तक की तारीखें…

वडोदरा में सरदार धाम-3 का उद्घाटन करेंगे

इसके बाद दोपहर करीब साढ़े 3 बजे पीएम वडोदरा के लिए रवाना होंगे। वडोदरा में रोड शो के बाद 150 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सरदार धाम-3 का उद्घाटन करेंगे।

शैक्षणिक और आवासीय परिसर ‘सरदारधाम-3’ वडोदरा के बाहरी इलाके में पाटीदार समुदाय द्वारा निर्मित करवाया गया है। पूरा कैंपस 4,75,000 वर्ग फीट में फैला है। इसे पाटीदार समुदाय के 2,000 छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है।

इसमें 1,000 लड़कों और 1,000 लड़कियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल की भी व्यवस्था। इस परिसर में 278 कमरे, 400 सीटों वाली ई-लाइब्रेरी, 1,000 लोगों की कैपेसिटी वाला सभागार और जीपीएससी और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ रक्षा और न्यायिक सेवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र हैं। आउटडोर और इनडोर गेम्स की भी सुविधा है।

वडोदरा के बाहरी इलाके में पाटीदार समुदाय द्वारा निर्मित 'सरदारधाम-3'।

वडोदरा के बाहरी इलाके में पाटीदार समुदाय द्वारा निर्मित ‘सरदारधाम-3’।

सरदारधाम-3 में बनी विशाल डिजिटल लायब्रेरी।

सरदारधाम-3 में बनी विशाल डिजिटल लायब्रेरी।

कैंपस में इनडोर खेल सुविधाएं भी मुहैया करवाई गई हैं।

कैंपस में इनडोर खेल सुविधाएं भी मुहैया करवाई गई हैं।

दो दिनों में पीएम का तीसरे राज्य का दौरा पिछले दो दिनों में पीएम के दौरे का गुजरात तीसरा राज्य है। इससे रविवार सुबह करीब 11 बजे वे कर्टानक के बेंगलुरु पहुंचे थे। यहां ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे तेलंगाना के हैदराबाद पहुंचे। यहां उन्होंने 9,400 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसके बाद रात करीब 9 बजे गुजरात के जामनगर पहुंचे। वडोदरा में कार्यक्रम के पीएम शाम को दिल्ली रवाना हो जाएंगे।

बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में नव-निर्मित मंदिर में पूजा करते हुए पीएम मोदी

बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में नव-निर्मित मंदिर में पूजा करते हुए पीएम मोदी

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पीएम मोदी के रविवार दौरे के ये खबर भी पढ़ें…

मोदी बोले- कांग्रेस ने DMK की पीठ में छुरा घोंपा:कर्नाटक में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के प्रोग्राम में कहा- सत्ता बदलते ही कांग्रेस पलटी

बेंगलुरु में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- कांग्रेस और DMK के बीच पिछले 25-30 साल से करीबी संबंध रहे हैं। DMK ने कई बार कांग्रेस को संकट से बाहर निकाला। 2014 से पहले केंद्र में 10 साल तक चली कांग्रेस सरकार भी DMK के समर्थन की वजह से ही टिकी रही। पूरी खबर पढ़ें…

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गैर-ब्राह्मणवाद पर विजय की परीक्षा शुरू, हैरान कर देगा तमिलनाडु का सियासी खेल!


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गैर-ब्राह्मणवाद पर विजय की परीक्षा शुरू, हैरान कर देगा तमिलनाडु का सियासी खेल!

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तमिलनाडु की राजनीति भारत के सबसे अनोखे राजनीतिक इतिहासों में गिनी जाती है. इसकी शुरुआत गैर-ब्राह्मण आंदोलन और जस्टिस पार्टी से हुई, जिसने सामाजिक न्याय और आरक्षण की नींव रखी. बाद में पेरियार के द्रविड़ आंदोलन, डीएमके के उदय, हिंदी विरोधी आंदोलन और एआईएडीएमके के गठन ने राज्य की राजनीति को नई दिशा द. करुणानिधि और जयललिता के दशकों लंबे सत्ता संघर्ष ने तमिलनाडु को द्विध्रुवीय राजनीति का केंद्र बना दिया. अब थलापति विजय की टीवीके पार्टी नई राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है, जिससे राज्य की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है.

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क्‍या तमिलनाडु के नए सीएम थलापति विजय पुरानी द्रविडियन पॉलिटिक्‍स पर आगे बढ़ेंगे या फिर विकास की नई राजनीति को बढ़ावा देंगे?

Tamil Nadu, Anti-Brahmin Dravidian Politics & Thalapathy Vijay: आखिरकार एक लंबे सस्‍पेंस के बाद तमिलनाडु के 13वें मुख्‍यमंत्री के तौर पर अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने शपथ ले ली है. थलापति के शपथ ग्रहण के साथ तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरूआत की बात कही जा रही है. हालांकि, लोगों की जिज्ञासा अभी भी यह जानने को लेकर है कि थलापति का नया युग तमिलनाडु के साथ द्रविडियन पॉलिटिक्‍स को किस दिशा में लेकर जाएगा.

दरअसल यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्‍यों कि बीते कई दशकों से तमिलनाडु में द्रविडियन पॉलिटिक्‍स का बोलबाला रहा है. 1916 में ब्राह्मणों के विरोध से जन्‍मी द्रविडियन पॉलिटिक्‍स की बदलौत डीएमके और एआईएडीएमके ने बीते 1967 के बाद लेकर अब तक तमिलनाडु पर राज किया है. 2026 के विधानसभा चुनाव में जनादेश काफी हद तक डीएमके और एआईएडीएमके के खिलाफ रहा. शायद इसी वजह से भी लोगों की निगाह थलापति की तरफ है कि वह फिर जातिगत राजनीति को बढ़ावा देंगे या फिर विकास को प्राथमिकता.

तमिलनाडु का हैरान करने वाला सियासी खेल!

  1. द्रविडियन राजनीति की नींव: तमिलनाडु की राजनीति की असली नींव 20वीं सदी की शुरुआत में रखी गई थी. उस समय भारत में ब्रिटिश शासन का शासन था. मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों में ब्राह्मणों का दबदबा था. भले ही ब्राह्मण आबादी में अल्पसंख्यक थे, लेकिन वे उच्च पदों पर आसीन थे. इसी असंतोष की वजह से गैर-ब्राह्मण आंदोलन ने जन्‍म लिया.
  2. 1916 में हुआ जस्टिस पार्टी का गठन: तमिलनाडु की द्रविडियन पॉलिटिक्‍स की तरफ पहला और अहम कदम जस्टिस पार्टी का गठन था. डॉ टीएम नायर और पी त्यागराज चेट्टी जैसे दिग्गज नेताओं ने सबसे पहले ‘साउथ इंडियन लिबरल फेडरेशन’ (SILF) की स्थापना की, जिसे जनता के बीच ‘जस्टिस पार्टी’ के नाम से लोकप्रियता मिली. आगे चलकर यह पार्टी गैर-ब्राह्मण आंदोलन का प्रतीक बन गई.
  3. गैर-ब्राह्मण आंदोलन की शुरुआत: कहा जाता है कि डॉ टीएम नायर और पी त्यागराज चेट्टी ने जस्टिस पार्टी बनाकर एक तरह का सामाजिक विद्रोह कर दिया था. इस पार्टी ने मद्रास प्रेसीडेंसी में गैर-ब्राह्मणों के लिए नौकरियों, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण की मांग की थी. यही वो बीज था जो बाद में सामाजिक न्‍याय के सिद्धांत के तौर पर विकसित हुआ.
  4. पेरियार ने आंदोलन को दी नई दिशा: उस समय के बड़े नेताओं में एक नेता ईवी रामास्वामी भी थे, जिन्हें सभी पेरियार के नाम से जानते हैं. उनकी गिनती इस आंदोलन के सबसे कट्टर आलोचकों में होती थी. उनका मानना था कि सामाजिक न्याय के आंदोलन को राजनीति से अलग रहना चाहिए. क्योंकि, राजनीति में भ्रष्टाचार मूल विचारधारा को दूषित कर देता है. उनकी यही विचारधारा ने बाद में आंदोलन को जाति-विरोधी दिशा दी.
  5. हिंदी का शुरू हुआ तमिलनाडु में विरोध: आजादी की लड़ाई के समय कांग्रेस हिंदी को देश की भाषा बनाना चाहती थी. लेकिन तमिलनाडु के लोगों ने इसका विरोध किया. उन्हें लगा कि उन पर उत्तर भारत की संस्कृति और भाषा जबरदस्ती थोपी जा रही है. हिंदी विरोधी आंदोलन से गैर-ब्राह्मण आंदोलन को लोगों का ज्यादा समर्थन मिला. इसके बाद यह आंदोलन सिर्फ जाति की बात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तमिल लोगों की पहचान और सम्मान की लड़ाई बन गया.

डीएमके के उदय से बंटवारे तक का सफर

  1. 1944 में बनी द्रविड़ कड़गम (डीके): जस्टिस पार्टी के पतन के बाद, द्रविड़ आंदोलन ने एक नया आकार लेना शुरू किया, जिसने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया. पेरियार ने जस्टिस पार्टी का पुनर्गठन कर ‘द्रविड़ कड़गम’ का गठन किया. यह एक गैर-राजनीतिक संगठन था, जो समाज सुधार पर केंद्रित था. इसकी प्रमुख मांग एक अलग ‘द्रविड़नाडु’ की थी. वह द्रविड़ों के लिए अगल स्‍वतंत्र राष्‍ट्र चाहते थे. उन्हें लगता था कि भारत में द्रविड़ों की उपेक्षा होगी.
  2. 1949 में हुआ डीएमके का जन्म: सीएन अन्‍नादुराई (अन्‍ना) न ही पेरियार के द्रविड़नाडु की मांग का समर्थन करते थे और ना ही वह संसदीय राजनीति को नकारने के रवैये से सहमत नहीं थे. उनका मानना था कि बदलाव सिर्फ़ सड़क पर नहीं, बल्कि विधानसभा के अंदर बैठकर लाना होगा. इस मतभेद के कारण उन्होंने 1949 में ‘द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम’ (डीएमके) की स्थापना की. डीएमके ने अलग द्रविड़नाडु की मांग को छोड़कर ‘संघीय ढांचे में अधिकारों’ की मांग शुरू कर दी.
  3. 1967 की डीएमके को मिली बड़ी जीत: 1960 के दशक में कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर हिंदी को एकमात्र राजभाषा बनाने का प्रयास शुरू कर दिया. इससे पूरे राज्य में विरोध की भयंकर आग लग गई. इन हिंदी विरोधी दंगों की अगुवाई डीएमके ने अन्‍नादुराई कर रहे थे. उनकी मांग थी कि हिंदी थोपो नहीं, अंग्रेजी बनाए रखो. 1967 के चुनावों में इस हिंदी विरोधी आंदोलन का असर दिखा. डीएमके ने भारी जीत हासिल कर कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया.
  4. अन्‍नादुराई बने डीएमके के पहले सीएम: विधानसभा चुनाव में जबरदस्‍त जीत के बाद डीएमके ने सीएन अन्नादुराई डीएमके को अपने पहले मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी पर बैठाया. दुर्भाग्यवश, 1969 में केवल दो साल बाद उनका निधन हो गया. उनके जाने के बाद, पार्टी की कमान एम करुणानिधि के हाथों में आ गई. लेकिन 1960 के दशक के अंत तक डीएमके के भीतर सत्ता, व्यक्तित्व और विचारधारा को लेकर मतभेद पनपने लगे थे. इसी का नतीजा था कि दो टुकड़ों में बंट गई.
  5. करुणानिधि के लिए एमजीआर बने चुनौती: तब के सुपर स्‍टार अभिनेता एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) की गिनती डीएमके के कद्दावर नेताओं में होने लगी थी. उनकी बढ़ती लोकप्रियता करुणानिधि को भी चुनौती देने लगी थी. करुणानिधि को लगता था कि एमजीआर एक फिल्म स्टार के तौर पर पार्टी को गलत दिशा में ले जा रहे हैं. वहीं, एमजीआर को लगा कि पार्टी में परिवारवाद और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है.

जब डीएमके और एआईएडीएमके में बंटी पार्टी

  1. 1972 में इस वजह से बनी एआईएडीएमके: 1972 तक बात एमजीआर के निष्‍कासन तक पहुंच गई. नतीजतन, एमजीआर ने डीएमके पार्टी छोड़कर नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया. उसी साल उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके-AIADMK)’ का गठन कर दिया. पार्टी के नाम में ‘अन्ना’ को जोड़कर उन्होंने खुद को डीएमके से ज्यादा सीएन अन्नादुराई का सच्चा वारिस बताने की कोशिश की.
  2. सीएम बनने वाले भारत के पहले नेता बने एमजीआर: 1977 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की जनता ने बड़ा बदलाव देखने को मिला. इस चुनाव में एमजीआर ने करुणानिधि को बुरी तरह हराकर मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रच दिया. वे भारत के पहले ऐसे फिल्म अभिनेता थे, जो सूबे के मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने 1977 के साथ-साथ 1980 और 1984 में भी उन्‍होंने करुणानिधि की डीएमके को शिकस्‍त दी और लगातार तीन बार मुख्‍यमंत्री का पद संभाला.
  3. एमजीआर के बाद जयललिता के हाथ आई कमान: जब 1987 में एमजीआर के निधन के बाद ऐसा लगा कि एआईएडीएमके का अस्‍तित्‍व खत्‍म होने के कगार पर पहुंच गया है. लेकिन, इसी बीच उनकी को-एक्‍ट्रेस रहीं जयललिता ने पार्टी की कमान संभाली. इसके बाद, डीएमके के करुणानिधि और जयललिता के बीच पैदा हुई कड़वाहट ने तमिलनाडु की राजनीति को अलग ही ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. इसके बाद समीकरण कुछ ऐसे बने कि अगले पांच दशकों तक डीएमके और एआईएडीएमके के बीच लगातार सत्ता बारी-बारी से बदलती रही.

करुणानिधि-जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में किस तरह का बदलावा आया?
21वीं सदी के दूसरे दशक में तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया. 2016 के चुनाव में जीतने के बाद साल 2016 के अंत में जयललिता का अचानक निधन हो गया. इसके ठीक एक साल बाद, 2017 में नवंबर महीने में करुणानिधि ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया. भले ही वे 2016 में चुनाव हार गए थे, लेकिन उनकी विरासत बरकरार थी. इन दोनों राजनेताओं के जाने के बाद राज्य की राजनीति में नेतृत्व का एक भयंकर संकट पैदा हो गया. एआईएडीएमके टुकड़ों में बंट गई और डीएमके को एमके स्टालिन के नेतृत्व में नई जान मिली, लेकिन जनता के मन में एक शून्य जरूर पैदा हो गया था.

क्‍या टीवीके और विजय थलापति पुरानी द्रव‍िडियन पॉलिटिक्‍स फॉलो करेंगे या नई शुरूआत करेंगे?
इस शून्य को भरते हुए फिल्म अभिनेता थलापति विजय ने राजनीति में कदम रखा. तमिलनाडु में फिल्म सितारों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं थी, लेकिन विजय का तरीका थोड़ा अलग था. उन्होंने सालों तक फैन क्लबों के जरिये सोशल वर्क कर लोगों को खुद से जोड़ा था. थलापति विजय ने 2024 की शुरुआत में अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके)’ की घोषणा की. उन्होंने कहा कि राजनीति कोई सेकेंड हैंड व्यवसाय नहीं है. उनकी यह पार्टी पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से थोड़ी अलग दिख रही थी. वह कट्टर अलगाववादी न होकर एक प्रगतिशील, सामाजिक न्याय और विकास का एजेंडा लेकर चलने की बात कर रहे थे.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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कला की दुनिया का चमकता सितारा, क्लासिकल डांस में फूंक दी थी जान


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मृणालिनी साराभाई डांस की एक महान हस्ती थीं, जिन्होंने भरतनाट्यम और कथकली को ग्लोबल स्टेज पर मशहूर बनाया. केरल में जन्मीं मृणालिनी ने बचपन में स्विट्जरलैंड में वेस्टर्न डांस की ‘डालक्रोज’ तकनीक सीखी, जिसने उनके डांस को एक अनोखी लय और ऊर्जा दी. उन्होंने शांतिनिकेतन में पढ़ाई की और मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई से विवाह किया. उन्होंने अहमदाबाद में ‘दर्पण एकेडमी’ की स्थापना करके 18000 से ज्यादा छात्रों को ट्रेनिंग दी. पद्मभूषण से सम्मानित मृणालिनी न सिर्फ एक बेहतरीन डांसर थीं, बल्कि एक संवेदनशील लेखिका और समाजसेवी भी थीं.

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मृणालिनी साराभाई एक लेखिका और समाज सेविका भी थीं.

नई दिल्ली: भारतीय क्लासिकल डांस की दुनिया में मृणालिनी साराभाई एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने परंपरा और मॉडर्निटी का ऐसा मेल बैठाया कि दुनिया देखती रह गई. 11 मई 1918 को केरल के एक रसूखदार परिवार में जन्मीं मृणालिनी का बचपन स्विट्जरलैंड में बीता, जहां उन्होंने वेस्टर्न डांस की दुर्लभ ‘डालक्रोज’ तकनीक सीखी. यह तकनीक शरीर की लय और संगीत को गहराई से समझने का एक खास जरिया थी, जिसने उनके आगे के डांस सफर में जान फूंक दी. उन्होंने भले ही विदेशों में रहकर पढ़ाई की और वेस्टर्न आर्ट को समझा, लेकिन उनकी रूह हमेशा भारतीय शास्त्रीय नृत्य में ही बसी रही. उन्होंने भारत लौटने के बाद शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की देखरेख में अपनी कला को निखारा और फिर भरतनाट्यम और कथकली जैसे मुश्किल डांस में महारत हासिल की.

मृणालिनी की निजी जिंदगी भी उतनी ही दिलचस्प थी. उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई से शादी की, जिसे कला और विज्ञान का एक अनोखा संगम माना जाता है. उन्होंने केवल अपनी कला का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का बीड़ा भी उठाया. साल 1948 में उन्होंने अहमदाबाद में ‘दर्पण एकेडमी’ की शुरुआत की, जहां उन्होंने करीब 18,000 छात्रों को डांस और संगीत की बारीकियों से रूबरू कराया. उन्होंने 300 से ज्यादा डांस ड्रामा तैयार किए और भारतीय कल्चर को ग्लोबल मंच पर एक नई पहचान और सम्मान दिलाया. उनकी बेटी मल्लिका साराभाई ने भी इसी विरासत को आगे बढ़ाया और आज साराभाई परिवार का नाम डांस जगत में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है.

लेखिका और समाजसेवी भी थीं मृणालिनी
डांस के अलावा मृणालिनी एक बेहतरीन लेखिका और समाजसेवी भी थीं. उन्होंने बच्चों के लिए कहानियां और कविताएं लिखकर साहित्य की दुनिया में भी अपना योगदान दिया. कला के क्षेत्र में उनकी इसी अटूट साधना के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे बड़े नागरिक सम्मानों से नवाजा. उन्होंने 21 जनवरी 2016 को 97 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनकी ‘दर्पण एकेडमी’ और उनके हजारों शिष्य आज भी उनकी कला की खुशबू को पूरी दुनिया में फैला रहे हैं. वे एक ऐसी कलाकार थीं जिन्होंने साबित किया कि अगर आपकी जड़ें मजबूत हों, तो आप पूरी दुनिया के आसमान को अपनी कला से छू सकते हैं.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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राज्यपाल-सीएम विजिट पर वाराणसी की सड़कें डायवर्ट: मैदागिन नहीं जाएंगे वाहन, गोदौलिया तक नो-व्हीकल जोन; CCTV-ड्रोन से निगरानी – Varanasi News




राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज सुबह बनारस पहुंच रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम में ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ कार्यक्रम में शामिल होकर दोनों लोग लौट जाएंगे। सीएम और राज्यपाल लगभग साढ़े तीन घंटे तक यहां रहेंगे। सीएम और राज्यपाल के आगमन को लेकर लगभग 5 घंटे का डायवर्जन एडवाइजरी और रूट प्लान जारी किया गया है। आगमन, भ्रमण एवं प्रस्थान के दौरान मैदागिन और काशी विश्वनाथ मार्ग पर कड़े सुरक्षा इंतजाम रहेंगे। मैदागिन से गोदौलिया मार्ग नो व्हीकल जोन रहेगा। उन्हें सड़क मार्ग से विश्वनाथ धाम जाना है इसलिए 9 बजे से ही रूट डायवर्ट कर दिए जाएंगे। संपूर्णानंद से 3 घंटे पहले ही टेम्पो ट्रेवलर, आर्मेनिया बसें, क्रूजर आदि लहुराबीर, मैदागिन की तरफ नही जाएंगे। इन वाहनो को लकड़ीमण्डी की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा। विशेश्वरगंज तिराहा से 1 घंटे पहले वाहन रोक दिए जाएंगे। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने रविवार रात राज्यपाल और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की। ब्रीफिंग के दौरान वीआईपी मूवमेंट पर रूट डायवर्जन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, निर्बाध यातायात व्यवस्था एवं जाम की स्थिति रोकने की बात कही। कार्यक्रम स्थल एवं वीआईपी मार्ग पर सघन चेकिंग, फ्रिस्किंग एवं प्रत्येक व्यक्ति तथा वाहन की कड़ी जांच सुनिश्चित करने को कहा गया। भीड़ नियंत्रण के दौरान नो टच पॉलिसी के पालन, महिला प्रबंधन महिला पुलिसकर्मियोंकी तैनाती, अस्थायी पार्किंग व्यवस्था का निर्देश दिया। रूफटॉप ड्यूटी, सीसीटीवी एवं ड्रोन कैमरों से निगरानी तथा नो फ्लाई जोन के सख्ती से अनुपालन की गाइडलाइन दोहराई। साथ ही सभी पुलिसकर्मियों को अच्छे टर्न-आउट, सतर्कता, अनुशासन एवं आमजन के साथ विनम्र एवं संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने हेतु निर्देशित किया गया। इस दौरान अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय शिवहरी मीणा, अपर पुलिस आयुक्त अपराध आलोक प्रियदर्शी, डीसीपी काशी, डीसीपी वरुणा और डीसीपी गोमती, सभी एडीसीपी और एसीपी समेत राजपत्रित अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, थाना प्रभारी एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारीगण उपस्थित रहे। वाराणसी में इस ट्रैफिक प्लान को देखकर घर से निकलें – संपूर्णांनंद गेट से 3 घंटे पहले टेम्पो ट्रेवलर, आर्मेनिया बसें, क्रूजर आदि वाहन मैदागिन नही जाएंगे। – विशेश्वरगंज तिराहा से चार पहिया वाहन मैदागिन नही जाएंगे, इन्हें गोलगड्‌डा तिराहा भेजा जाएगा। – गोदौलिया चौराहा से कोई वाहन मैदागिन चौराहा की तरफ नही जाने दिया जायेगा। – मरीमाई तिराहा से तेलियाबाग तिराहा की तरफ वाहन नहीं जाने दिया जायेगा, इन्हें अन्ध्रापुल चौराहा/ मलदहिया चौराहा की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। – मलदहिया चौराहा से वाहन को लहुराबीर चौराहा की तरफ नही जायेगा, मरीमाई तिराहा/साजन तिराहा/इंग्लिशिया लाइन तिराहे डायवर्ट किया जायेगा। – पिशाचमोचन तिराहा से वाहन को लहुराबीर चौराहा नहीं भेजकर मलदहिया चौराहा की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा। – थाना चेतगंज से वाहन को लहुराबीर चौराहा की तरफ नही जाने दिया जायेगा, बेनिया तिराहा डायवर्ट कर दिया जायेगा। – सोनारपुरा तिराहा से चार पहिया वाहन एवं जंगमबाड़ी से दो पहिया वाहन को गोदौलिया चौराहा की तरफ नहीं जाएंगे। – गिलट बाजार से वाहन को भोजूबीर सब्जी मंडी तिराहा नहीं जाएंगे, इन्हें शिवपुर चुंगी तिराहा की तरफ डायवर्ट कर दिया जायेगा।



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आईपीएल ऑनलाइन सट्टेबाजी करते 6 गिरफ्तार: जूम एप्लीकेशन के माध्यम से लगवा रहे थे सट्टा; यहां पढ़े जयपुर क्राइम की खबरें – Jaipur News




पुलिस थाना करणी विहार और डीएसटी टीम जयपुर वेस्ट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आईपीएल टी-20 क्रिकेट मैच पर चल रहे ऑनलाइन सट्टे का भंडाफोड़ कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 4 लैपटॉप, 21 मोबाइल फोन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं सट्टे से संबंधित सामग्री बरामद की है। डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि आईपीएल-2026 के दौरान क्रिकेट मैचों पर सट्टेबाजी की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच पुलिस को सूचना मिली थी कि धावास स्थित श्री बालाजी हाईट्स मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 105 में अवैध रूप से ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित की जा रही है। सूचना पर पुलिस टीम ने सर्च वारंट प्राप्त कर दबिश दी। मौके पर आरोपी राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच चल रहे आईपीएल टी-20 मैच पर ऑनलाइन सट्टा खिलवाते पाए गए। पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल फोन और जूम एप्लीकेशन के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क कर अंकों के जरिए रुपए दांव पर लगवा रहे थे। मौके से लाखों रुपए के हिसाब-किताब से संबंधित 7 नोटबुक भी बरामद की गईं। गिरफ्तार आरोपियों में हेमन्त आचार्य (40), नवीन आचार्य (41), पवन आसवानी (35), सन्नी खटवानी (32), हीरासिंह(32) और संजय शेरा(33) शामिल हैं। सभी आरोपी जोधपुर के विभिन्न क्षेत्रों के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड प्राप्त कर आगे की जांच की जा रही है।



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ग्वालियर में हाईवे से दंपती से गहने लूटे: शादी में जा रहे थे, बदमाशों ने पति पर अड़ाया कट्‌टा, पत्नी से लूटा मंगलसूत्र-झुमके – Gwalior News




ग्वालियर के बिजौली थाना क्षेत्र में बेखौफ बदमाशों ने लूट की एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। रविवार रात एक दंपति को कट्टा (अधिया) अड़ाकर बाइक सवार चार बदमाशों ने मंगलसूत्र और कान की झुमकी लूट ले गए। दंपति शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। बाइक सवारों ने पहले ओवरटेक कर रोका फिर कट्‌टा अड़ाकर कैश निकालने के लिए कहा। इसी समय सामने से कुछ वाहन आते देखे तो बदमाश झपट्‌टा मारकर मंगलसूत्र लूटकर भाग गए। घटना की शिकायत की गई है। पुलिस ने जांच के बाद रविवार रात को लूट का मामला दर्ज कर लिया है। सीने पर रखी अधिया और बोले-‘जो है निकाल दो’
शहर के थाटीपुर स्थित न्यू आनंद नगर कॉलोनी में रहने वाले 42 वर्षीय भूपेंद्र सिंह सोनवार अपनी पत्नी अर्चना के साथ स्कूटी से कृपालपुर में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने जा रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे तोरिया मोड़ के पास पहुंचे, तभी पीछे से आई एक बाइक ने उनका रास्ता रोक लिया। बाइक पर चार युवक सवार थे। एक बदमाश ने उतरते ही भूपेंद्र के सीने पर ‘अधिया’ (315 बोर का कट्टा) अड़ा दी और गोली मारने की धमकी देकर बोला, जो भी है निकाल दो। वाहन आता देख जेवर झपटकर भाग गए
बदमाश जब लूटपाट कर रहे थे, तभी सामने से एक अन्य वाहन की लाइट दिखाई दी। पकड़े जाने के डर से बदमाशों ने जल्दबाजी में अर्चना के गले से सोने का मंगलसूत्र और कानों की झुमकी झपट लीं। झपट्टा इतना तेज था कि अर्चना के कानों में चोट भी आई है। वारदात के बाद बदमाश सुपावली गांव की तरफ फरार हो गए। दहशत में रहा दंपति दूसरे गांव पहुंचकर रोकी स्कूटी
हथियारबंद बदमाशों के हमले से दंपति इस कदर डर गए कि उन्होंने बीच रास्ते में रुकने की हिम्मत नहीं की। उन्होंने अपनी स्कूटी दौड़ाई और काफी दूर दूसरे गांव पहुंचने के बाद ही अपनी जान सुरक्षित समझी और पुलिस को फोन किया। लूटे गए जेवर का वजन करीब सवा तोला बताया जा रहा है। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही बिजौली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने हुलिए के आधार पर घेराबंदी की है और रास्ते के CCTV कैमरों की जांच की जा रही है। पीड़ितों ने बताया कि एक आरोपी मोटा और एक लंबा था, जिसके बाल एक तरफ से छोटे-बड़े कटे हुए थे। थाना प्रभारी बिजौली मिर्जा आसिफ बेग का कहना
“दंपति की शिकायत पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट का मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना की गई हैं। जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”



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लाइफस्टाइल में आएगा बदलाव! बिछड़े प्यार से होगी मुलाकात,धनु वाले ऐसा रहेगा दिन


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Aaj ka Dhanu Rashifal 11 may 2026: धनु राशि के जातकों की सेहत आज अच्छी रहने वाली है. आज आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि आज सोमवार है, ऐसे में आज के दिन आपको भगवान महादेव की पूजा करनी चाहिए. 

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जमुई: 11 मई 2026 के दिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है. आज के दिन अदाल तथा विडाल योग का शुभ संयोग बनने वाला है. इतना ही नहीं आज के दिन शतभिषा नक्षत्र और इंद्र योग का भी संयोग बनेगा. जिसका असर विभिन्न राशि के जातकों पर पड़ेगा. ज्योतिषाचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि आज के दिन चंद्रमा का गोचर होने वाला है जिससे आज कई राशि के जातकों की आमदनी बढ़ने वाली है. उनकी आर्थिक आय में इजाफा होगा और उनके जीवन शैली में परिवर्तन आने वाला है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि धनु राशि के जातकों पर भी आज के दिन बनने वाले इन सभी संयोग का असर देखने को मिलेगा.

लाइफस्टाइल में आएगा बदलाव 
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि आज के दिन धनु राशि के जातकों की लाइफ स्टाइल में बदलाव आएगा. आज परिवार में आपको अपने परिजनों का सहयोग प्राप्त होगा. उन्होंने बताया कि आज आपको किसी बात को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है. संपत्ति से जुड़े किसी मामले में आपको टेंशन हो सकता है. हालांकि आज आपका दिन अच्छा गुजरेगा. आज के दिन आपकी मुलाकात किसी पुराने दोस्त से हो सकती है, जिससे को खुशियां मिलने वाली है. अगर आप व्यापार करते हैं, तो आज का दिन आपके लिए अच्छा रहने वाला है. आज पार्टनरशिप पर व्यापार शुरू करने से आपको फायदा हो सकता है. निवेश करने के लिए भी आज का दिन काफी अच्छा रहने वाला है.

सेहत के मामले में आज करें यह काम 
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धनु राशि के जातकों की सेहत आज अच्छी रहने वाली है. आज आपको किसी तरह की कोई परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी. उन्होंने बताया कि आज सोमवार है, ऐसे में आज के दिन आपको भगवान महादेव की पूजा करनी चाहिए. उनका अभिषेक करना चाहिए और भगवान महादेव को बेलपत्र इत्यादि चढ़ाने से आपके जीवन में शुभता आएगी. उन्होंने बताया कि प्यार के मामले में आज का दिन अच्छा रहने वाला है. आज आपकी मुलाकात आपके बिछड़े हुए प्यार से होने वाली है. धनु राशि के जातकों के लिए आज के दिन का शुभ अंक 7 रहने वाला है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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