Thursday, May 21, 2026
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लखनऊ में बिजली कटौती पर आधी रात को बवाल: गुस्साए लोगों ने कई पावर हाउस घेरा, अफसर-कर्मचारी भागे; पुलिस तैनात – Lucknow News




लखनऊ में बुधवार रात को बिजली कटौती से परेशान लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए लोगों ने आधी रात में कई पावर हाउस का घेराव किया। लोगों के गुस्से को देखकर बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पावर हाउस को छोड़कर भाग गए। पावर हाउसों की भी बत्ती गुल हो गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। लोगों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन लोग बिजली आपूर्ति बहाल होने पर पावर हाउसों से नहीं हटने की जिद पर अड़े रहे। इस पर पावर हाउसों पर पुलिस तैनात रही। उतरेठिया न्यू और ओल्ड पावर हाउस का करीब 400 लोगों ने घेराव किया। बीबीएयू पावर हाउस पर देर रात को लोगों ने हंगामा किया। इसके पहले मंगलवार रात में भी कई पावर हाउसों पर जबरदस्त हंगामा हुआ था। बुधवार दिन में लखनऊ पश्चिम विधानसभा के विधायक अरमान खान तालकटोरा पावर हाउस पर धरने पर बैठ गए थे। देखिए 4 तस्वीरें… 25 हजार आबादी को समस्या पर बवाल केसरी खेड़ा के स्थानीय पार्षद देवेंद्र सिंह यादव जीतू ने बताया कि सूर्य नगर के ट्रांसफार्मर आए दिन खराब हो जाता है। इसकी शिकायत पर बिजली विभाग के लोग सुबह बनाते हैं। रात में फिर बिजली चली जाती है। इसके कारण 25 हजार की आबादी प्रभावित है। आज करीब 1 हजार की संख्या में आक्रोशित लोगों पावर हाउस का घेराव कर लिया। मौके पर बिजली विभाग को लेकर जमकर नारेबाजी की। बिजली विभाग के लोग लोगों का फोन तक नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में समस्या बढ़ गई है। कोई सुनने वाला नहीं है। देर शाम करीब 7 बजे से बिजली कटी। इसके बाद देर रात तक लोग पॉवर हाउस के बाहर प्रदर्शन करते रहे। लोगों के विरोध पर एसएसओ भागा नादरगंज के अंबेडकर पावर पर बिजली कटौती को लेकर जोरदार प्रदर्शन स्थानीय लोगों ने किया है। उनका कहना है कि आए दिन बिजली कटौती से परेशान हो गए हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। लोगों के विरोध के बीच पॉवर हाउस को एसएसओ सहित अन्य अधिकारी छोड़कर भाग गए। काकोरी में भी जोरदार प्रदर्शन
काकोरी थाना क्षेत्र अंतर्गत जनता विहार कॉलोनी में पिछले चार दिनों से गंभीर बिजली संकट बना हुआ है। कॉलोनी में पूरे दिन मात्र 2-3 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लो वोल्टेज और कभी-कभी हाई वोल्टेज की समस्या से परेशान हैं। भीषण गर्मी में पानी की किल्लत भी बढ़ गई है।आक्रोशित उपभोक्ताओं ने मंगलवार रात करीब 8 बजे एफसीआई पावर हाउस पहुंचकर घेराव किया। पावर हाउस का गेट बंद रहा और कोई बिजली कर्मी समस्या सुनने नहीं पहुंचा। प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। कॉलोनी निवासियों अमित कुमार, रमेश राजपूत, शिवम गौतम, आदित्य कश्यप, रोहित गुप्ता समेत कई लोगों ने बताया कि कॉलोनी में सिर्फ एक ट्रांसफार्मर है और तारों की भी समस्या है। द्वारिकापुरी और आदर्श विहार में आधी कॉलोनी में बिजली है तो आधी में अंधेरा है। काकोरी पुलिस मौके पर पहुंची और बिजली अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। पुलिस ने देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया। बिजली के खंभे में लगी भीषण आग त्रिवेणी नगर-3 स्थित त्रिकोणेश्वर मंदिर बांधा के पास खंभे में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना की सूचना तुरंत बिजली विभाग को दी गई, लेकिन विभाग की ओर से फोन तक नहीं उठाया गया। लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की इस बड़ी लापरवाही से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। आग लगने के दौरान आसपास मौजूद लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। राजाजीपुरम में भी बिजली कटौती पर विरोध मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड राजाजीपुरम सी ब्लॉक में बत्ती ना आने पर उत्कर्ष शिकायत करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सेक्टर 12 सेक्टर ए इन सब इलाकों में आज कई दिनों से बत्ती आ रही है जा रही है। कंप्लेंट लिखने पर कहा जाता है कि हमारे पास लाइनमैन नहीं है। कुछ समय लगेगा 7:00 बजे से गई बत्ती रात के 11 बज रहे हैं। अभी तक नहीं आई । फैजुल्लागंज में देर रात ट्रांसफार्मर में लगी आग फैजुल्लागंज में देर रात ट्रांसफार्मर में आग लगने पर लोगों के घरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इससे परेशान लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन किया लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। स्थानीय निवासियों ने बताया कि मामले में तुरंत लेसा अधिकारियों को फोन किया गया। जेई ने फोन नहीं उठाया तो एसडीओ को फोन किया गया। आरोप है इसके बाद स्थानीय लोगों में ही दो पक्षों में विवाद की स्थिति बन गई। सारीपुर में बिजली कटौती से लोग सड़कों पर उतर आए राजाजीपुरम स्थित सारीपुर इलाके में बिजली कटौती से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वह शिकायत लेकर उपकेंद्र पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि लाइनमैन नहीं है, इसलिए फिलहाल फॉल्ट ठीक नहीं हो पाएगा। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती हैं, लेकिन लंबे समय से बिजली नहीं आने के कारण परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटने से नाराज उपभोक्ताओं का हंगामा पार्क रोड स्थित कसमंडा हाउस के सामने ट्रांसफार्मर में आग लग गई। सूचना मिलते ही थाना हजरतगंज पुलिस मौके पर पहुंची और बिजली विभाग व दमकल कर्मियों को जानकारी दी। मौके पर पहुंची दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पा लिया। वहीं तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित अपट्रान उपकेंद्र पर देर रात बिजली कटौती से नाराज उपभोक्ताओं ने हंगामा किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। देर रात तक लोग बिजली संकट से परेशान रहे। उधर जानकीपुरम विस्तार सेक्टर-6 पावर हाउस पर भी उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज लोग उपकेंद्र के अंदर जमीन पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।



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इंदौर हनी ट्रैप मामले में बीजेपी की नेता हिरासत में: वीडियो-ऑडियो रिकवर कर रही पुलिस; श्वेता जैन ने जताई सरकारी गवाह बनने की इच्छा – Indore News


हनी ट्रैप मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक महिला हिरासत में है।

शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर से जुड़े हनी ट्रैप मामले में इंदौर पुलिस ने एक और महिला आरोपी को हिरासत में लिया है। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को सागर से हिरासत में ली गई इस आरोपी का नाम रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी है। इसे ही हनी ट्रैप नेटवर

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इससे पहले क्राइम ब्रांच ने मामले की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी समेत हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में लिया था। श्वेता ने पुलिस के सामने मामले में सरकारी गवाह बनाने की इच्छा जताई है।

क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने कहा- जांच में सामने आया है कि रेशू, अलका और श्वेता के साथ कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क में सक्रिय थी। उसने श्वेता विजय जैन के माध्यम से इंदौर निवासी अलका दीक्षित से संपर्क किया था। इसके बाद तीनों ने मिलकर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाने की योजना बनाई।

अब पुलिस की प्राथमिकता रेशू और अलका के पास मौजूद कथित हनी ट्रैप वीडियो, ऑडियो और अन्य डिजिटल सबूत जब्त करने की है। आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ ऑडियो-वीडियो फाइलें भी रिकवर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

वहीं, हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा से भी देर रात तक पूछताछ की गई। पुलिस को अलका से उसके सीधे संपर्क के संकेत मिले हैं।

निमाड़ के नेता को भी बनाया था निशाना

जांच में यह भी सामने आया है कि रेशू और उसके साथियों ने निमाड़ क्षेत्र के एक प्रभावशाली नेता को भी निशाना बनाया था। इस नेता का इंदौर स्थित मकान अलका दीक्षित के इलाके में ही है।

जब अलका ने चिंटू ठाकुर को ब्लैकमेल करने की कोशिश की, तब उसने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला दिया था। इसके जवाब में अलका ने कथित हनी ट्रैप वीडियो दिखाते हुए कहा कि जिन बड़े लोगों के नाम लिए जा रहे हैं, उनके वीडियो भी उसके पास मौजूद हैं।

जानकारी के मुताबिक, ब्लैकमेलिंग की शिकायत मिलने के 19 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। चिंटू ठाकुर पहले से ही इंदौर के आजाद नगर थाने में हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी है।

पेशी के दौरान बनाई ब्लैकमेलिंग की योजना

सूत्रों के अनुसार, श्वेता विजय जैन की अलका दीक्षित से जेल में दोस्ती हुई थी। कोर्ट में पेशी के लिए जाने के दौरान श्वेता, रेशू को लेकर अलका से मिलने पहुंचती थी। इसी दौरान कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की योजना बनाई गई। रेशू ने अलका को बताया था कि उसके कई नेता, प्रॉपर्टी कारोबारी, फाइनेंसर, शराब कारोबारी और अफसरों से संपर्क हैं, जिन्हें निशाना बनाकर आसानी से रुपए ऐंठे जा सकते हैं।

पुलिस रिमांड के दौरान श्वेता विजय जैन ने बताया कि अलका और रेशू दोनों उसके संपर्क में थीं। उसने अलका को समझाया था कि जिन लोगों को फंसाने की कोशिश की जा रही है, वे बेहद प्रभावशाली हैं। इसके बावजूद अलका नहीं मानी। श्वेता ने सरकारी गवाह बनाने की इच्छा भी जताई है।

मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

जेल में श्वेता-अलका की दोस्ती, बाहर आकर बनाया हनीट्रैप गैंग

इंदौर के हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग कांड में पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह ठाकुर उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने वाले गिरोह की मास्टरमाइंड भोपाल निवासी श्वेता विजय जैन बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि श्वेता और शराब तस्करी से जुड़ी अलका दीक्षित की दोस्ती जिला जेल में हुई थी। वहीं हनीट्रैप नेटवर्क की योजना बनी। पढे़ं पूरी खबर…

शराब कारोबारी को हनी ट्रैप में फंसाया, एक करोड़ मांगे

इंदौर में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह ठाकुर उर्फ चिंटू ठाकुर को हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच ने महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी समेत हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को हिरासत में लिया है। आरोप है कि ये गैंग, कारोबारी के निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर रुपए की डिमांड कर रहा था। पढ़ें पूरी खबर…



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घर पर खत्म हो गयी सब्जियां, तो प्याज से बनाएं ये 3 तरह की सब्जी, शेफ ने की रेसिपी


 


Pyaz Sabji Recipe: अगर आपके घर में सब्जियां न हों तो आप क्या करते हैं? अगर गर्मी के कारण आप रसोई से दूर रहना चाहते हैं तो आप क्या करते हैं? आप इन 3 प्याज की सब्जियों को आजमा सकते हैं, और हर सब्जी 10 मिनट में बन सकती है! ये न केवल झटपट बनने वाली रेसिपी है, बल्कि आसान भी हैं. इतना ही नहीं स्वादिष्ट और स्वाद में भी लाजवाब होती है.पंकज भदौरिया ने इस वीडियो में दही, मलाई और बेसन के साथ प्याज की सब्जी बनाने की रेसिपी शेयर की है. जिसे आप कभी भी बना सकते हैं.

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मेहरानगढ़ का वो शाही कक्ष, दीवारों पर सोना…पहली नजर में ठहर जाती हैं निगाहें


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Jodhpur Famous Palace: जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किला में स्थित फूल महल आज भी राजपूताना वैभव और शाही संस्कृति की अनोखी झलक दिखाता है. सोने की कारीगरी, शीशों की सजावट, भव्य चित्रकारी और बारीक नक्काशी से सजा यह महल पर्यटकों को खास आकर्षित करता है. कभी राजाओं के निजी दरबार और विशेष मेहमानों के स्वागत का केंद्र रहा.

जोधपुर के ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में स्थित फूल महल अपनी भव्यता और शाही सजावट के कारण पर्यटकों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है. यह महल राजसी ठाठ, सुनहरी कलाकारी और पारंपरिक राजपूत स्थापत्य का शानदार उदाहरण माना जाता है. महल के भीतर प्रवेश करते ही दीवारों और छतों पर बनी बारीक नक्काशी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है. सोने की परत और शीशों की सजावट इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. यहां का माहौल आज भी राजघराने के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाता है. यही वजह है कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक इस शाही हॉल को देखने जरूर पहुंचते हैं.

जोधपुर

फूल महल का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराजा अभय सिंह ने करवाया था. उस समय इस महल का उपयोग राजपरिवार के निजी विश्राम और खास मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता था. महल के हर हिस्से में उस दौर की शाही जीवनशैली साफ दिखाई देती है. भव्य दरबार शैली में बने इस कक्ष में कभी संगीत सभाएं और विशेष आयोजन भी आयोजित होते थे. इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान मारवाड़ की विरासत को करीब से महसूस करने का अवसर देता है. आज भी यह हॉल राजपूताना गौरव की अनमोल धरोहर माना जाता है.

जोधपुर

फूल महल की सबसे बड़ी खासियत इसकी आकर्षक कलाकृतियां और रंगीन भित्तिचित्र हैं. दीवारों और छतों पर बने चित्र राजपूत काल की परंपराओं, युद्धों और सांस्कृतिक आयोजनों को दर्शाते हैं. महल में मौजूद बारीक शीशा कार्य और सजावटी डिजाइन पर्यटकों को लंबे समय तक अपनी ओर खींचे रखते हैं. यहां की हर दीवार मानो इतिहास की कोई कहानी सुनाती नजर आती है.

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जोधपुर

महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण पर्यटकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचता है.हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र हुआ करता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. पर्यटक यहां पहुंचकर इसकी नक्काशी और डिजाइन को बेहद करीब से निहारते हैं.कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा मानते हैं. पारंपरिक राजस्थानी कला का यह अद्भुत नमूना फोटोग्राफी प्रेमियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है. शाम की रोशनी में चमकती सुनहरी सजावट इसकी खूबसूरती को और खास बना देती है. कई पर्यटक यहां पहुंचकर लंबे समय तक इसकी कलाकृतियों और नक्काशी को निहारते रहते हैं.

जोधपुर

महल के भीतर रखा चंदन की लकड़ी से बना विशेष शाही आकर्षण भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से सजा यह हिस्सा कभी राजसी मेहमानों के स्वागत का केंद्र माना जाता था. इसकी बारीक कारीगरी उस समय के कलाकारों की अद्भुत कला को दर्शाती है. कई लोग इसे फूल महल का सबसे आकर्षक हिस्सा बताते हैं.

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फूल महल आज जोधपुर आने वाले पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में शामिल हो चुका है. यहां पहुंचने वाले लोग राजसी स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत को करीब से महसूस करते हैं. शाम ढलते ही महल की खूबसूरती और भी ज्यादा निखरकर सामने आती है. सुनहरी रोशनी में चमकती दीवारें, शीशों की सजावट और कलात्मक छतें लोगों को अलग ही अनुभव कराती हैं.

जोधपुर

फूल महल केवल एक शाही कक्ष नहीं, बल्कि मारवाड़ की समृद्ध संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक माना जाता है. इसकी भव्य वास्तुकला और पारंपरिक सजावट आज भी लोगों को राजपूत काल की याद दिलाती है. जोधपुर शहर से मेहरानगढ़ किले तक आसानी से स्थानीय परिवहन उपलब्ध हो जाता है. वहीं शाम के समय किले से दिखाई देने वाला नीले शहर का दृश्य भी पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है. यही वजह है कि फूल महल आज जोधपुर पर्यटन की खास पहचान बन चुका है.

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वो कालजयी धुन, सुनाई दी 5 अलग-अलग फिल्मों में, 2 गानों ने जीते दो फिल्मफेयर अवॉर्ड


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Same Tune songs in 5 Bollywood Movies : रेडियो-टीवी पर जैसे ही कोई मनपसंद गाना आता दिल धड़कने लगता है. गाना के बोल के साथ-साथ फिल्म, उसकी स्टोरी भी दिमाग में घूमने लगती है. ब्लॉकबस्टर सॉन्ग चाहे किसी भी समय के हो, हमेशा कर्णप्रिय लगते हैं. वैसे तो हर गाने की धुन अलग होती है. अर फिल्म का म्यूजिक अलग होता है. फिर भी कई बार हमें एक ही धुन कई फिल्मों में सुनने को मिल जाती है. बॉलीवुड की एक मेलोडियस ट्यून तो पांच फिल्मों में सुनाई दी. चौंकाने वाली बात तो यह है कि पांच गानों में से दो को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

म्यूजिक के बिना बॉलीवुड फिल्मों की कल्पना ही नहीं की जा सकती. म्यूजिक किसी भी फिल्म का आधार है. फिल्म की कहानी के हिसाब से लिखे गए कर्णप्रिय गाने स्टोरी को आगे बढ़ाते हैं. कई बार सुपरहिट गाने ही फिल्म की पहचान बन जाते हैं. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर म्यूजिक पर हमेशा फोकस करते हैं. जितना ज्यादा म्यूजिक हिट होगा, फिल्म की चर्चा उतनी ही ज्यादा होगी. बॉलीवुड में कई बार एक ही धुन को अलग-अलग फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. सेम ट्यून पर अलग-अलग गाने बनाए गए. एक धुन तो पांच फिल्मों में सुनाई दी.

संगीतकार एसडी बर्मन ने 1951 में ऐसी मेलोडियस ट्यून बनाई जिस पर पांच बार गाने बनाए गए. पांचों गाने अलग-अलग फिल्मों में सुनाई दिए लेकिन धुन एक जैसी थी. ये फिल्में थीं : आपकी परछाइयां, ममता, गरम मसाला, अगर तुम ना होते और सागर. एसडी बर्मन के बेटे आरडी ने इस धुन को सबसे ज्यादा कॉपी किया. कई दूसरे संगीतकारों ने भी इस धुन को चुराया.

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एसडी बर्मन साहब ने ‘नौजवान’ फिल्म के लिए एक ट्यून बनाई. गीतकार साहिर लुधियानवी ने इस जो गाना लिखा वो अमर हो गया. गाने के बोल थे : ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं..’. लता मंगेशकर ने इस गाने को आवाज दी थी. डायरेक्शन महेश कौल ने किया था. दिलचस्प बात यह है कि इस धुन में थोड़ा बहुत फेरबदल करके इसे पांच फिल्मों में इस्तेमाल किया गया.

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धर्मेंद्र-शशिकला की एक फिल्म ‘आपकी परछाइयां’ 1964 में रिलीज हुई थी. मोहन कुमार ने डायरेक्शन में बनी इस फिल्म का म्यूजिक मदन मोहन ने कंपोज किया था. मदन मोहन ने भी एसडी बर्मन की उस ट्यून को कॉपी किया. थोड़ा सा हेर-फेर करके धुन बना ली. गाना जो बनकर तैयार हुआ, उसके बोल थे : यही है तमन्ना, तेरे घर के सामने, मेरी जान जाए, मेरी जान जाए….’ मोहम्मद रफी की आवाज में गाना आज भी उतना ही पॉप्युलर है लेकिन सही मायने में देखा जाए तो यह धुन ‘नौजवान’ मूवी से इंस्पायर्ड थी. मजेदार बात यह है कि 1966 में ही संगीतकार रोशन ने इस धुन पर फिल्म ‘ममता’ में एक गाना कंपोज किया. गाने के बोल थे : रहें ना रहें हम, महका करेंगे, बनके कली…’ . असित सेन के डायरेक्शन में बनी धर्मेंद्र-सुचित्रा सेन स्टारर यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही थी. इस तरह से धर्मेंद्र की दो फिल्मों में यह गाना सुनाई दिया.

आरडी बर्मन ने तीन बार इसी धुन पर गाने कंपोज किए. तीनों ही गाने खूब पॉप्युलर हुए. पहली बार पंचम दा ने इस धुन पर एक गाना 1981 में आई फिल्म ‘नरम गरम’ के लिए कंपोज किया. स्वरूप संपत-अमोल पालेकर, शत्रुघ्न सिन्हा, उत्पल दत्त स्टारर इस फिल्म का डायरेक्शन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था. इस फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘हमें रास्तों की जरूरत नहीं है…’ 1951 की नौजवान मूवी के कालजयी गाने ‘ठंडी हवाएं, लहराके आएं’ से इंस्पायर्ड था. इस गाने को आशा भोसले ने बहुत ही खूबसूरती से गाया. ‘नरम-गरम’ फिल्म की गिनती आज कल्ट क्लासिक फिल्मों में होती है. आरडी बर्मन ने अपने एक इंटरव्यू में खुद इसका खुलासा करते हुए बताया था कैसे उनके पिता के गाने की धुन को बार-बार कॉपी किया गया.

पंचम दा ने 1983 में राजेश खन्ना-रेखा और राज बब्बर स्टारर फिल्म ‘अगर तुम न होते’ में एक बार फिर से इसी धुन का इस्तेमाल किया. और एक नया गाना कंपोज कर दिया. गाने के बोल थे ‘हमें और जीने के चाहत ना होती, अगर तुम ना होते….’. यह गाना आज भी टूटे दिल आशिकों की पहचान है. मुहब्बत के अहसास को जताने का जरिया है. प्रेमी अक्सर इस गाने को गुनगुनाते मिल जाते है. किशोर कुमार ने इस गाने को अपनी आवाज में अमर कर दिया. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस गाने के लिए किशोर कुमार को फिल्म फेयर पुरस्कार भी मिला था.

आरडी बर्मन ने 1985 में एक और म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘सागर’ में इसी धुन पर एक सुपरहिट गाना कंपोज किया. डायरेक्टर रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऋषि कपूर, कमल हसन, डिंपल कपाड़िया लीड रोल में नजर आए थे. स्टोरी, गाने, स्क्रीनप्ले जावेद अख्तर ने लिखा था. गाने के बोल थे : सागर किनारे, दिल ये पुकारे… गाना सुपरहिट साबित हुआ. मूवी भी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.

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बेगूसराय का टॉप टेन क्रिमिनल दिलीप सिंह अरेस्ट: एसटीएफ-डीआईयू ने पकड़ा, रंगदारी-लूटपाट के मामले में था फरार; 50 हजार का इनामी हिस्ट्रीशीटर भी अरेस्ट – Begusarai News




बेगूसराय पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने जिला स्तर पर कामयाबी हासिल की है। बेगूसराय पुलिस की डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) और एसटीएफ (STF) SOG-3 की टीम ने संयुक्त विशेष ऑपरेशन चलाकर जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल कुख्यात दिलीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा एक 50 हजार का इनामी हिस्ट्रीशीटर शक्ति सिंह भी अरेस्ट हुआ है। पुलिस ने यह कार्रवाई मटिहानी थाना क्षेत्र के सिहमा दियारा इलाके में घेराबंदी करके की है। जानकारी के अनुसार पुलिस प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि मटिहानी थाना क्षेत्र का मोस्ट वांटेड अपराधी सिहमा गांव के रहने वाले रामचंद्र सिंह का बेटा दिलीप सिंह सिहमा दियारा क्षेत्र में छिपा हुआ है। पुलिस को इनपुट मिली थी कि वह किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में है। सूचना को बेहद गंभीरता से लेते हुए एसपी मनीष के निर्देश पर डीआईयू और एसटीएफ SOG-3 की एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरे सिहमा दियारा इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल था पुलिस की भारी घेराबंदी देखकर अपराधी दिलीप सिंह ने भागने का प्रयास किया। लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तार अपराधी दिलीप सिंह बेगूसराय पुलिस के लिए लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल था। पुलिस को लंबे समय से थी तलाश पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। दिलीप सिंह पर बेगूसराय जिले के विभिन्न थानों में हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूटपाट और आर्म्स एक्ट जैसे आधा दर्जन से अधिक गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। सिहमा और आसपास के दियारा इलाकों में उसका अच्छा-खासा खौफ था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम आरोपी को गुप्त स्थान पर ले जाकर कड़ाई से पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दिलीप सिंह से पूछताछ के आधार पर उसके गैंग के अन्य सदस्यों और उसे पनाह देने वाले सफेदपोशों के संबंध में सुराग जुटाए जा रहे हैं। इसके साथ ही उसके अन्य आपराधिक इतिहास और हाल के दिनों में उसकी गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा। 50 हजार रुपये का इनामी भी अरेस्ट विशेष अभियान के तहत एसटीएफ (STF) और मटिहानी थाना पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने इलाके के कुख्यात अपराधी शक्ति सिंह उर्फ शिवशक्ति सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अपराधी पर पुलिस मुख्यालय की ओर से 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। वह पिछले कई सालों से पुलिस फरार चल रहा था। जिला पुलिस इसे अपनी एक बड़ी उपलब्धि मान रही है, क्योंकि शक्ति सिंह की गिरफ्तारी से क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने में काफी मदद मिलेगी। जानकारी के अनुसार एसटीएफ और मटिहानी थाना पुलिस को विशेष इनपुट मिली थी। जिसमें कहा गया था कि 50 हजार का इनामी शक्ति सिंह बड़ी घटना को अंजाम देने या छिपने के इरादे से आया हुआ है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त टीम ने मटिहानी थाना क्षेत्र के चिन्हित ठिकानों पर छापामारी अभियान चलाया। पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर शक्ति सिंह उर्फ शिवशक्ति सिंह को भागने का कोई मौका नहीं दिया और उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अपराधी शक्ति सिंह मूल रूप से मटिहानी थाना क्षेत्र के सिहमा के रहने वाले रामानंदन सिंह उर्फ खारामू सिंह का बेटा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शक्ति सिंह बरौनी थाना कांड संख्या- 355/10 के तहत दर्ज डकैती के एक बड़े मामले में लंबे समय से वांछित चल रहा था। वह लगातार ठिकाने बदल-बदल कर पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा था। इसके बाद 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। शक्ति सिंह शातिर और हिस्ट्रीशीटर बदमाश गिरफ्तार शक्ति सिंह कोई साधारण बदमाश नहीं है, बल्कि शातिर और हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। बेगूसराय के विभिन्न थानों में इस पर हत्या, डकैती और आर्म्स एक्ट (Arms Act) जैसे जघन्य अपराध के 11 मामले दर्ज हैं। वह पिछले कई सालों से जिले में कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ था। एसपी मनीष ने बताया कि एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शक्ति सिंह की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई है। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया की जा रही है। इससे पहले 2019 में भी हरियाणा के गुरुग्राम चकरपुर से शिव शक्ति सिंह को गिरफ्तार किया था। उस दौरान वह हरियाणा में टैक्सी चलाने का काम करता था। वह कई बार हरियाणा से बेगूसराय आकर घटना को अंजाम देकर हरियाणा चला जाता था। उस समय गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद ही बाहर आ गया था।



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रावतभाटा में चीता पुनर्स्थापन की तैयारी तेज: NTCA टीम ने किया निरीक्षण, 299 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को संभावित चीता आवास के रूप में परखा – Kota News



राजस्थान का रावतभाटा क्षेत्र अब प्रोजेक्ट चीता के तहत चीता पुनर्स्थापन के लिए संभावित नए ठिकाने के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी (National Tiger Conservation Authority)की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति ने बुधवार को रावतभाटा क्

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सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि यह सर्वेक्षण NTCA की 28वीं बैठक में लिए गए फैसले के तहत किया जा रहा है, जिसमें इस क्षेत्र को मेटा-पॉपुलेशन साइट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

समिति में NTCA सदस्य एस. एस. श्रीवास्तव, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कोटा सुगना राम जाट, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बिपिन, गांधी सागर अभयारण्य के वन मंडल अधिकारी संजय रायखेरे और NTCA के एआईजी पवन जेफ शामिल रहे। टीम ने रावतभाटा रेंज के उस वन क्षेत्र का निरीक्षण किया जो राणा प्रताप सागर बांध के पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है।

करीब 299 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह इलाका प्राकृतिक रूप से पर्वतीय श्रेणियों से घिरा हुआ है। इसके उत्तर में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व और दक्षिण में गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी स्थित होने के कारण यह क्षेत्र महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर माना जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान समिति ने वनस्पति, शिकार प्रजातियों की उपलब्धता, मिट्टी की संरचना, जैविक दबाव और अन्य पारिस्थितिकीय पहलुओं का अध्ययन किया।

टीम ने राणा प्रताप सागर बांध, गॉर्ज क्षेत्र और आसपास के जंगलों का दौरा करते हुए एकलिंगपुरा और बरखेड़ा मार्ग से गांधी सागर तक निरीक्षण किया। समिति गुरुवार को कुल्थी, जावदा और भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र का भी दौरा करेगी। यह सर्वे भविष्य में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार और संरक्षण योजनाओं के लिए अहम माना जा रहा है।



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चंबल सेंक्चुरी में अवैध रेत खनन मामले पर सुनवाई पूरी: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, 26 मई को आएगा निर्णय – Bhopal News




चंबल सेंक्चुरी में अवैध रेत खनन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जारी है। रेत माफियाओं पर लगाम कसने को लेकर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया है। 26 मई को फैसला सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुओ मोटो केस की सुनवाई की। 14 मई के आदेश के मुताबिक राजस्थान और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना था। मध्य प्रदेश की ओर से परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह आज सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने उन्हें और राजस्थान के पांच प्रमुख सचिवों की उपस्थिति दर्ज की। कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला अमिकस क्यूरी, सॉलिसिटर जनरल और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया। कोर्ट ने साफ कहा कि आगे इन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जब तक विशेष रूप से न बुलाया जाए। मप्र परिवहन सचिव पर क्यों थी नजर? मप्र के परिवहन सचिव को 14 मई को कोर्ट ने विस्तृत जवाब के साथ पेश होने का आदेश दिया था। मुख्य मुद्दा था बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों से हो रहा अवैध रेत परिवहन। कोर्ट पहले ही मप्र में निगरानी व्यवस्था को प्रारंभिक चरण में बता चुका है। चंबल सेंचुरी का मामला नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य में रेत माफियाओं ने घड़ियालों और दूसरे जलीय जीवों के अस्तित्व पर बनाए रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरा बताया था और माफियाओं को “नए डाकू” करार दिया था। कोर्ट पहले कई बार राजस्थान और मप्र सरकारों की निष्क्रियता पर नाराजगी जता चुका है। कोर्ट के निर्देश हैं — CCTV, GPS ट्रैकिंग, जॉइंट पेट्रोलिंग, सख्त FIR, माफिया पर कार्रवाई और फॉरेस्ट स्टाफ की भर्ती। राजस्थान सरकार ने अपने प्रयासों पर विस्तृत रिपोर्ट दी है, जबकि मप्र पर कोर्ट अभी भी सख्त नजर रखे हुए है। राजस्थान सरकार के प्रयासों की तारीफ हुई कोर्ट ने राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राज्य जो मेकैनिज्म विकसित कर रहा है, वह पूरे देश के लिए रोल मॉडल बन सकता है। एएसजी एश्वर्या भाटी और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत कॉम्प्लाइंस एफिडेविट पेश किए, जिसमें CCTV इंस्टॉलेशन, GPS ट्रैकिंग, जॉइंट पेट्रोलिंग, FIRs, गिरफ्तारियां और फंडिंग (लगभग ₹65 करोड़) आदि शामिल थे। फॉरेस्ट स्टाफ की कमी पर चिंता कोर्ट ने राजस्थान फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में बहुत गंभीर कमी पर चिंता जताई। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण फॉरेस्ट एरिया में स्टाफ की कमी गंभीर समस्या है। कोर्ट ने रिक्रूटमेंट प्रक्रिया तेज करने को कहा (पिछली भर्ती 4 साल पहले हुई थी)। होम गार्ड्स को फॉरेस्ट गार्ड्स का काम करने की बात भी उठी। माइनिंग माफिया और किंगपिन्स अमिकस क्यूरी ने बताया कि सैकड़ों FIR के बावजूद असली माफिया किंगपिन्स पकड़े नहीं जा रहे। कोर्ट ने असली अपराधियों तक पहुंचने और गांव वालों के लिए अल्टरनेटिव लाइवलीहुड देने पर जोर दिया।



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Jio का 84 दिन चलने वाला सबसे सस्ता प्लान, अनलिमिटेड कॉलिंग समेत मिलेंगे ये बेनिफिट्स


Jio 84 days cheapest Recharge Plan: रिलायंस जियो के पोर्टफोलियो में प्रीपेड और पोस्टपेड यूजर्स के लिए कई सस्ते प्लान हैं। इन प्लान्स में यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग समेत कई सारे बेनिफिट्स मिलते हैं। यूजर्स के मामले में देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी के पास 84 दिन वाला एक सबसे सस्ता प्लान है, जिसमें यूजर्स को कम पैसे में पूरे 12 सप्ताह कॉलिंग का फायदा मिलता है।

84 दिनों वाला सबसे सस्ता प्लान

TRAI के आदेश के बाद पिछले साल टेलीकॉम कंपनियों ने वॉइस ओनली वाले प्लान पेश किए थे, जिसमें यूजर्स को कॉलिंग और SMS का ही बेनिफिट ऑफर किया जाता है। दूरसंचार नियामक के फैसले के बाद लॉन्च हुए इस सस्ते प्लान में यूजर्स को पूरे 84 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इसमें यूजर्स को पूरे भारत में कहीं भी कॉल करने के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ मिलता है। साथ ही, कंपनी यूजर्स को कुल 1,000 फ्री SMS भी ऑफर करती है।

Image Source : JIOजियो 84 दिन वाला प्लान

जियो के इस प्लान में यूजर्स को कॉम्पलिमेंटरी OTT ऐप्स का भी एक्सेस मिलता है। यूजर्स को इसमें Jio AI Cloud और Jio TV का फ्री एक्सेस मिलता है। रिलायंस जियो का यह प्रीपेड रिचार्ज प्लान 448 रुपये में आता है। कंपनी ने इस प्लान को अपनी वेबसाइट पर वैल्यू प्लान की लिस्ट में रखा है। यह प्रीपेड प्लान खास तौर पर उन यूजर्स के लिए है, जो जियो का नंबर सेकेंडरी सिम के तौर पर यूज करते हैं और चाहते हैं कि उनका नंबर बंद भी न हो।

1028 रुपये वाला प्लान

इस प्रीपेड प्लान के अलावा जियो के पास 1,028 रुपये की कीमत में 84 दिनों की वैलिडिटी वाला रिचार्ज प्लान है। इस प्लान में यूजर्स को पूरे 84 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इसमें पूरे भारत में फ्री अनलिमिटेड कॉलिंग, फ्री नेशनल रोमिंग जैसे बेनिफिट्स तो मिलते ही हैं। साथ ही, यूजर्स को डेली 2GB हाई स्पीड डेटा और 100 फ्री SMS का लाभ मिलता है। जियो के इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड 5G डेटा ऑफर किया जाता है।

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तेल-गैस छोड़िए, अब भारत की बड़ी इच्‍छा पूरी करने जा रहा रूस, ताकता रह गया चीन


रूस और भारत के रिश्तों की बात होती है तो सबसे पहले तेल, गैस, मिसाइल और न्‍यूक्‍ल‍ियर एनर्जी का जिक्र आता है. लेकिन अब दोनों देशों की दोस्ती एक ऐसे सेक्टर में प्रवेश कर रही है, जिसे आने वाले दशक की असली आर्थिक ताकत माना जा रहा है- स्टील. ऐसा स्टील, जिससे पुल बनेंगे, बुलेट ट्रेन दौड़ेगी, नई फैक्ट्रियां खड़ी होंगी, रक्षा उपकरण बनेंगे और भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का सपना आगे बढ़ेगा.

लेन‍िनग्राद में रूस और भारत के बीच स्टील सेक्टर में बड़े निवेश, कोकिंग कोल सप्लाई, स्पेशल स्टील, क्रिटिकल मिनरल्स और लो-कार्बन टेक्नोलॉजी पर गंभीर चर्चा हुई है. सोमवार को हुई इस मीटिंग का सबसे बड़ा संकेत यह है कि भारत अब सिर्फ रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदना चाहता, बल्कि अपनी औद्योगिक रीढ़ मजबूत करने के लिए लंबे समय का साझेदार बनाना चाहता है.

आखिर भारत को रूस की जरूरत क्यों पड़ रही है?

  1. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. हाईवे, रेलवे, मेट्रो, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर प्लांट और स्मार्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका सीधा मतलब है स्टील की भारी मांग.
  2. भारत ने 2030 तक अपनी स्टील उत्पादन क्षमता 220 मिलियन टन से बढ़ाकर 300 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती है कोकिंग कोल और हाई-ग्रेड स्टील के लिए आयात पर निर्भरता.
  3. कोकिंग कोल स्टील उद्योग की जान माना जाता है. इसके बिना बड़े पैमाने पर स्टील उत्पादन संभव नहीं. अभी भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों से खरीदता है. ऐसे में रूस एक बड़ा विकल्प बनकर उभर रहा है.
  4. रूस के पास विशाल कोकिंग कोल भंडार हैं. पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद मॉस्को भी नए बाजार तलाश रहा है. भारत को सस्ता और स्थिर सप्लाई चाहिए, जबकि रूस को बड़ा खरीदार. दोनों की जरूरतें यहां एक-दूसरे से मेल खा रही हैं.

चीन क्यों रखेगा नजर?

दुनिया के स्टील बाजार में चीन का दबदबा लंबे समय से रहा है. चीन सिर्फ सबसे बड़ा स्टील उत्पादक ही नहीं, बल्कि सप्लाई चेन, मेटल प्रोसेसिंग और रेयर मिनरल्स में भी बड़ी ताकत है. लेकिन भारत अब इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है.

अगर रूस के साथ भारत का यह सहयोग मजबूत होता है, तो नई सप्लाई चेन तैयार हो सकती है. इसका मतलब होगा कि भारत स्टील और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. यही वजह है कि इस सहयोग को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है.

सिर्फ स्टील नहीं, फ्यूचर इंडस्ट्री पर नजर

  • इस बातचीत में सिर्फ सामान्य स्टील की बात नहीं हुई. स्पेशल स्टील, लो-कार्बन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स पर भी फोकस रहा. स्पेशल स्टील का इस्तेमाल रक्षा उपकरण, युद्धपोत, फाइटर जेट, हाई-स्पीड रेलवे और भारी मशीनरी में होता है. भारत अभी इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है. रूस के साथ सहयोग से इस गैप को कम करने की कोशिश होगी.
  • इसके अलावा दुनिया अब ग्रीन स्टील और लो-कार्बन इंडस्ट्री की तरफ बढ़ रही है. यूरोप और अमेरिका लगातार कार्बन उत्सर्जन पर सख्त नियम ला रहे हैं. अगर भारत को भविष्य में वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करनी है, तो उसे पर्यावरण-अनुकूल स्टील उत्पादन की तरफ जाना ही होगा. रूस के साथ टेक्नोलॉजी और संयुक्त निवेश पर चर्चा इसी दिशा का हिस्सा मानी जा रही है.

बंदरगाह से फैक्ट्री तक, बड़ा खेल

रूस के लेनिनग्राद ओब्लास्ट प्रशासन ने बातचीत में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स सहयोग पर भी जोर दिया. इसका मतलब यह है कि दोनों देश सिर्फ खरीद-बिक्री नहीं, बल्कि एंड-टू-एंड इंडस्ट्रियल नेटवर्क बनाना चाहते हैं. यानी खदान से लेकर शिपिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक पूरा सिस्टम एक साथ विकसित करने की योजना बन सकती है. अगर ऐसा होता है तो भारत के स्टील सेक्टर की लागत कम हो सकती है और सप्लाई ज्यादा सुरक्षित बन सकती है.

पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस की नई रणनीति

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों ने भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाए. यूरोप ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करनी शुरू कर दी. ऐसे में मॉस्को तेजी से एशियाई देशों की तरफ झुक रहा है. भारत पहले ही रूस से रिकॉर्ड मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है. अब स्टील और मिनरल सेक्टर में सहयोग यह दिखाता है कि दोनों देश अपने रिश्तों को सिर्फ ऊर्जा व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहते. रूस के लिए भारत एक भरोसेमंद और विशाल बाजार है. वहीं भारत के लिए रूस ऐसा साझेदार है, जो पश्चिमी दबाव के बावजूद रणनीतिक सहयोग जारी रखता है.

भारत का बड़ा सपना

भारत आने वाले वर्षों में खुद को सिर्फ उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहता है. इसके लिए स्टील सबसे अहम बुनियादी ताकत है. अगर देश को लाखों करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं पूरी करनी हैं, रक्षा उत्पादन बढ़ाना है और दुनिया की फैक्ट्री बनने की दिशा में आगे बढ़ना है, तो मजबूत स्टील सप्लाई जरूरी होगी. यही वजह है कि रूस के साथ यह नई साझेदारी सिर्फ एक कारोबारी समझौता नहीं लगती. यह उस बड़े खेल का हिस्सा दिखाई देती है, जिसमें भारत अपनी औद्योगिक ताकत बढ़ाकर वैश्विक सप्लाई चेन में नई जगह बनाना चाहता है. और अगर यह योजना सफल हुई, तो आने वाले वर्षों में सिर्फ तेल और गैस ही नहीं, बल्कि स्टील की भट्टियों में भी भारत-रूस दोस्ती की गर्मी दिखाई दे सकती है.



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