Friday, June 12, 2026
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साइज पर मत जाइए श्रीमान, इन छोटी “Missile Boats” ने कराची को धुआं-धुआं कर दिया था


4 दिसंबर 1971 की रात पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डा कराची सामान्य दिनों की तरह दिख रहा था. बंदरगाह पर जहाज मौजूद थे, तेल भंडारण सुविधाएं काम कर रही थीं और शायद ही किसी को अंदाजा था कि कुछ घंटों बाद यहां ऐसी तबाही मचने वाली है, जिसे पाकिस्तान दशकों तक याद रखेगा.

दिलचस्प बात यह थी कि कराची पर हमला करने के लिए भारत ने कोई विशाल युद्धपोत, विमानवाहक पोत या भारी नौसैनिक बेड़ा नहीं भेजा था. इस मिशन की जिम्मेदारी उन छोटी मात्र 245 टन की “Missile Boats”को दी गई थी, जिन्हें देखकर शायद कोई यह अनुमान भी नहीं लगा सकता था कि वे इतिहास रचने वाली हैं. 4 दिसंबर 1971 की रात इन नावों ने साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में आकार नहीं, मारक क्षमता और रणनीति मायने रखती है.

यही था भारतीय नौसेना का प्रसिद्ध ऑपरेशन ट्राइडेंट!
3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारतीय हवाई अड्डों पर हमला किया और युद्ध औपचारिक रूप से शुरू हो गया. भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल एस. एम. नंदा पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि यदि युद्ध शुरू हुआ तो उसे केवल जमीन और हवा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि समुद्र में भी पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाएगा.

योजना का केंद्र थीं सोवियत मूल की विद्युत श्रेणी (Vidyut Class) की Missile Boats. आकार में छोटी, लेकिन मारक क्षमता में बेहद खतरनाक. इन बोट्स की सबसे बड़ी ताकत थीं उनकी 4 स्टाइक्स (Styx) एंटी-शिप मिसाइलें, जो दुश्मन के बड़े से बड़े जहाज को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती थीं.

4 दिसंबर की शाम भारतीय नौसेना का टास्क फोर्स अरब सागर में आगे बढ़ा. इसमें INS Nipat, INS Nirghat और INS Veer शामिल थीं. इनके साथ दो फ्रिगेट INS Kiltan और INS Katchall तथा फ्लीट टैंकर INS Poshak भी मौजूद थे. पूरे अभियान का नेतृत्व कमांडर बाबरू भान यादव कर रहे थे.

जैसे-जैसे रात गहराती गई, भारतीय Missile Boats कराची के करीब पहुंचती गईं. पाकिस्तान को इस हमले की भनक तक नहीं लगी. अंधेरा, समुद्र और गति भारतीय नौसेना के सबसे बड़े साथी बन चुके थे.

रात लगभग 10:30 बजे भारतीय रडारों ने दुश्मन के जहाजों को पकड़ लिया
सबसे पहले INS Nirghat ने अपना निशाना साधा. उसके सामने पाकिस्तान नौसेना का विध्वंसक PNS Khaiber था. कुछ ही क्षण बाद एक मिसाइल हवा को चीरती हुई अपने लक्ष्य की ओर बढ़ी. मिसाइल सीधे जहाज से टकराई और उसके बॉयलर रूम को तबाह कर दिया. जहाज की गति अचानक कम हो गई. लेकिन हमला यहीं नहीं रुका.

दूसरी मिसाइल भी दागी गई. इस बार नुकसान इतना गंभीर था कि PNS Khaiber पूरी तरह लड़ने में असमर्थ हो गया. कुछ समय बाद वह समुद्र में डूब गया. पाकिस्तान नौसेना को समझ ही नहीं आया कि उस पर हमला कहां से हुआ.

उधर INS Veer ने पाकिस्तान नौसेना के माइंसवीपर PNS Muhafiz को निशाना बनाया. एक मिसाइल ने जहाज को आग की लपटों में घेर लिया. आग इतनी भयानक थी कि वह काफी देर तक जलता रहा और अंततः समुद्र में समा गया.

भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा प्रहार अभी बाकी था
INS Nipat को कराची बंदरगाह के आसपास मौजूद लक्ष्यों पर हमला करने का आदेश मिला. पहले उसने एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाया और फिर अपनी मिसाइलों का रुख कराची के तेल भंडारण क्षेत्र की ओर कर दिया. ठीक आधी रात के आसपास दागी गई मिसाइल ने अपना लक्ष्य साध लिया.

कुछ ही क्षणों में कराची के आसमान में एक विशाल आग का गोला दिखाई दिया. तेल टैंक और ईंधन भंडारण क्षेत्र आग की चपेट में आ गए. आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था. पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह धुएं और आग से भर चुका था. कराची में फैली इस आग ने केवल सैन्य नुकसान ही नहीं पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान की समुद्री आपूर्ति और नौसैनिक गतिविधियों को भी गहरा झटका दिया.

यह भारतीय नौसेना की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक बन गया.
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि यह पूरी कार्रवाई विशाल युद्धपोतों ने नहीं, बल्कि छोटी Missile Boats ने अंजाम दी थी. इन बोट्स का आकार भले ही सीमित था, लेकिन उनकी मिसाइल शक्ति, गति और सटीकता ने साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में केवल जहाज का आकार मायने नहीं रखता. सही रणनीति और सही हथियार किसी भी बड़े दुश्मन को घुटनों पर ला सकते हैं.

ऑपरेशन ट्राइडेंट ने भारतीय नौसेना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई. कराची पर हुए इस हमले को आज भी नौसैनिक इतिहास के सबसे सफल मिसाइल हमलों में गिना जाता है. 4 दिसंबर की वह रात केवल एक सैन्य अभियान नहीं थी. वह वह रात थी जब भारतीय नौसेना की छोटी Missile Boats ने साबित कर दिया कि समुद्र में ताकत हमेशा आकार से नहीं, बल्कि प्रहार की क्षमता से तय होती है.



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Kala Hiran: ‘विश्नोई गैंग के हाथ कुत्ते की मौत नहीं मरूंगा’, लॉइन को बताया दाऊद का बाप


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KALA HIRAN OFFICIAL FIRST LOOK: 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित फिल्म ‘काला हिरण: बैटल फॉर लेगेसी’ का फर्स्ट लुक रिलीज होते ही सुर्खियों में आ गया है. करीब ढाई मिनट के वीडियो में कोर्टरूम ड्रामा, गैंगस्टर एंगल और बिश्नोई समाज की न्याय की लड़ाई की झलक दिखाई गई है. खास बात यह है कि फर्स्ट लुक रिलीज होने के तुरंत बाद सलमान खान ने फिल्म के निर्माण और रिलीज पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. वहीं, मेकर्स इसे बिश्नोई समाज की अनसुनी गाथा बता रहे हैं.

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फिल्म में लीड रोल काशिफ इकबाल खान ने निभाया है.

नई दिल्ली. ‘काला हिरण: बैटल फॉर लेगेसी’ फिल्म का फर्स्ट लुक आज मेकर्स ने रिलीज कर दिया है. 2.32 मिनट का वीडियो देखने के बाद अब ये तो साफ हैं कि इस प्रोजेक्ट की आत्मा साल 1998 में जोधपुर के कांकाणी गांव में हुए कुख्यात ‘काले हिरण शिकार मामले’ से जुड़ी हुई है. यह फिल्म सिर्फ एक पारंपरिक क्राइम या गैंगस्टर थ्रिलर नहीं है, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और जीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बिश्नोई समाज के अटूट संकल्प और उनके सिद्धांतों को समर्पित है. फर्स्ट लुक आते ही सलमान खान दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गए हैं.

ढाई मिनट के वीडियो जारी कर कलाकारों को इंट्रोड्यूस किया गया है. सलमान खान का रोल मूवी में काशिफ इकबाल खान ने निभाया है, जिन्होंने उन्हें पूरी तरह से कॉपी करने की कोशिश की है. मेकर्स के मुताबिक, यह फिल्म बिश्नोई समाज के पूज्य गुरू जम्भेश्वर भगवान और पूरे बिश्नोई समुदाय के प्रति एक सम्मान है. फिल्म को उन प्रामाणिक साहित्यों और दस्तावेजों से रूपांतरित किया गया है, जिन्होंने इस घटना के पीछे के असल सच और रहस्यों को दुनिया के सामने उजागर किया था.

कैसी है मूवी की झलक

टीजर वीडियो शुरू होता है कोर्ट के एक सीन से. जहां अयान खान कठघरे में खड़ा है. वकील ने उसके खिलाफ दलील देते हुए बताया कैसे 2 अक्टूबर 1998 की रात दो काले हिरण को अयान खान ने मार गिराया. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को फिल्म में लॉइन विश्नोई नाम दिया है. वीडियो में कहा गया है कि 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड का बाप दाऊद था. लेकिन आज दाऊद का भी बाप है, लॉयन बिश्नोई है. पुलिस केस में फंसे और लॉयन गैंग के हमलों से घबराए अयान को दिखाया गया है. जेल में रहकर कैसे लॉयन अयान पर हमले और दूसरे आतंक फैला रहा है, इससे पुलिस परेशान हैं. अयान पुलिस को भी धमकाते हुए कहता है ‘अगर तुम लोगों में दम नहीं है तो अभी मुझे क्लियर बता दो, मैं ये देश हमेशा के लिए छोड़कर चला जाऊंगा, लेकिन बिश्नोई गैंग के हाथ सड़कों पर कुत्ते की मौत नहीं मरने वाला. एक सीन में पुलिसकर्मी अपने अफसर को बताते हैं कि विश्नोई को अयान का पैसे नहीं बल्कि अयान की बलि चाहिए.

इसी साल रिलीज होगी फिल्म

फिल्म को भारत एस. श्रीनेत ने डायरेक्ट किया है. अमित जानी ने फिल्म की कहानी को लिखने के साथ-साथ फिल्म को प्रोड्यूस किया है. लीड रोल में काशिफ इकबाल खान के अलावा मुकेश तिवारी, राजेश दहिया, ऋषभ अरोड़ा जैसे सितारे हैं.फिल्म की रिलीज डेट और स्टारकास्ट को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन फर्स्ट लुक ने दर्शकों की उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है. कहा जा रहा है कि फिल्म इसी साल रिलीज होगी. खास बात यह है कि फिल्म खुद को एक ऐसे विषय से जोड़ रही है, जो भारतीय सिनेमा और न्यायिक इतिहास दोनों में लंबे समय से चर्चा का केंद्र रहा है.

कानूनी रस्साकशी के बीच आया फर्स्ट लुक

यह फर्स्ट लुक सामने आने के बाद सलमान खान ने इस फिल्म के निर्माण और रिलीज पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. सलमान खान का आरोप है कि यह फिल्म उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकती है और उनके ‘पर्सनालिटी राइट्स’ का उल्लंघन करती है. हालांकि, मेकर्स का कहना है कि यह फिल्म किसी व्यक्ति विशेष पर कीचड़ उछालने के लिए नहीं, बल्कि बिश्नोई समाज की उस प्रतिज्ञा और न्याय की अनसुनी गाथा को अंतरराष्ट्रीय स्तर के विजुअल्स के साथ दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश है.

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Shikha Pandey

शिखा पाण्डेय पिछले 15 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक्टिव हैं. शिखा दिसंबर 2019 से न्यूज 18 हिंदी के साथ हैं और बतौर चीफ सब एडिटर के पद काम कर रही हैं. पिछले 6 सालों से वह एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही …और पढ़ें



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सौर ऊर्जा-10: 3 KW का सोलर सिस्टम कितनी बिजली देगा, कौन-कौन से उपकरण चलेंगे, कैसे लगवाऊं?


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Solar Energy Series 10th Story: न्‍यूज18हिंदी की सौर ऊर्जा-सोलर पैनल्‍स सीरीज की आखिरी 10वीं स्टोरी में पढ़िए पाठक पी सिंह नेगी के पूछे गए सवाल का जवाब. सीईईडब्‍ल्‍यू की प्रोग्राम लीड भावना त्‍यागी से जानते हैं कि 3 KW का सोलर सिस्टम कितनी बिजली देगा, कौन-कौन से उपकरण चलेंगे, कैसे लगवाएं? पूरी जानकारी…

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. सौर ऊर्जा-10: 3 KW का सोलर सिस्टम कितनी बिजली देगा, कौन-कौन से उपकरण चलेंगे, कैसे लगवाऊं? पूरी जानकारी दें

Solar Energy Series 10th Story: सौर ऊर्जा, सोलर पैनल और सौर बिजली को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रही महासीरीज में आपने बहुत सारी जानकारियां हासिल कर ली होंगी. आपको 9वीं कहानी में बताया था कि केंद्र सरकार पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत 3 किलोवॉट के सोलर पैनल सिस्टम पर सबसे ज्यादा सोलर सब्सिडी दे रही है. इतना बड़ा सिस्टम एक मध्यमवर्गीय परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. इसी क्रम में न्यूज18 हिंदी की इस सीरीज को शुरू से पढ़ रहे पी सिंह नेगी ने अपना सवाल भेजा है, जिस पर इस महासीरीज की आखिरी स्टोरी की जा रही है.

आज सौर ऊर्जा-सोलर पैनल सीरीज की आखिरी और 10वीं स्टोरी में आइए जानते हैं नेगी जी के सवाल ‘मैं अपने घर में 3 किलोवॉट का सिस्टम कैसे लगवा सकता हूं? इसके बारे में पूरी जानकारी दीजिए.. का जवाब सीईईडब्ल्यू की एक्सपर्ट भावना त्यागी के माध्यम से…

भावना त्यागी कहती हैं कि सौर ऊर्जा भविष्य की ऊर्जा है और साफ बिजली का स्त्रोत है. केंद्र और राज्य सरकारें भी इस ऊर्जा को बढ़ावा दे रही हैं और लोगों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बना रही हैं. सोलर पैनल सिस्टम को छत पर लगा सकते हैं जो धूप से बिजली बनाकर आपके घर की जरूरतों को पूरा कर सकता है. एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए 3 किलोवॉट का सोलर पैनल सिस्टम पर्याप्त होता है.

3 किलोवॉट के सिस्टम के लिए कितनी बड़ी छत चाहिए?

भावना त्यागी बताती हैं कि घर में 1 किलोवाट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाने के लिए कम से कम 10 वर्ग मीटर जगह की जरूरत होती है. ऐसे में 3 किलोवॉट के सोलर सिस्टम के लिए करीब 30 वर्ग मीटर जगह की जरूरत पड़ेगी.इस तरह देखें तो एक 100 वर्ग गज के घर की कुल जगह मीटर में 83 वर्ग मीटर होती है लेकिन उसमें सोलर पैनल लगाने के लिए जगह कम बचती है. क्योंकि छत का एक बड़ा हिस्सा पानी की टंकी, सीढ़ी और छाया में चला जाता है.

ऐसे में 83 वर्ग मीटर में से आमतौर पर उपयोग करने लायक छत का क्षेत्रफल सिर्फ 55-58 वर्ग मीटर ही बचता है. हालांकि अगर किसी की छत पर कमरे या अन्य चीजें भी बनी हैं तो यह क्षेत्रफल घट जाता है. ऐसे में बची हुई जगह के हिसाब से ही उतने किलोवॉट का सोलर पैनल सिस्टम लगवाया जा सकता है.

3 किलोवॉट का सिस्टम कितनी बिजली पैदा करता है .

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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टीएडी मंत्री खराड़ी ने शहरी सेवा शिविर का किया शुभारंभ: एक महीने तक 13 से अधिक काम एक ही जगह होंगे – Dungarpur News




डूंगरपुर में राज्य सरकार द्वारा शहरी क्षेत्र के लोगों को राहत देने के उद्देश्य से शुक्रवार से सेवा शिविर शुरू हो गए हैं। ये शिविर एक महीने तक एक ही स्थान पर आयोजित किए जाएंगे, जहां 13 से अधिक प्रकार के कार्य किए जा सकेंगे। इन शिविरों में लोगों की समस्याओं को सुनकर तुरंत समाधान का प्रयास किया जाएगा। नगर परिषद कार्यालय में जिले के प्रभारी एवं टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने इन शिविरों का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कलेक्टर देशलदान, सागवाड़ा विधायक शंकर डेचा, पूर्व सांसद कनकमल कटारा, पूर्व सभापति अमृत कलासुआ, महामंत्री पंकज जैन सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि सरकार लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि पहले ग्रामीण शिविरों के माध्यम से गांवों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनी गईं और उनका समाधान किया गया। अब शहरी क्षेत्र के लोगों की तकलीफें दूर करने के लिए इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। मंत्री ने आगे कहा कि इन शिविरों से एक ही जगह पर लोगों के कई तरह के काम पूरे होंगे। इनमें सड़क, बिजली, पानी से जुड़ी समस्याएं, जमीन का पट्टा, नकल और अन्य प्रकार के कार्य शामिल हैं। सभी कार्यों का निस्तारण शिविर के माध्यम से होगा और लोगों को राहत पहुंचाई जाएगी। नगर परिषद आयुक्त प्रकाश डूडी ने बताया कि डूंगरपुर शहरी क्षेत्र में ये शिविर 15 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। शिविर सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार मध्यम और कमजोर वर्ग को बड़ी छूट मिलेगी, जिसमें छोटे प्लॉट या दुकान पर अधिक छूट प्रदान की जाएगी। शिविरों में जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीकरण, फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस, सीवर कनेक्शन, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, भवन निर्माण स्वीकृति, नामांतरण, फ्रीहोल्ड, लीज मुक्ति, भू-उपयोग परिवर्तन, उप-विभाजन और पुनर्गठन सहित विभिन्न सेवाओं का निस्तारण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त सड़क, नाली, सीवर, स्ट्रीट लाइट, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव, आवारा पशुओं की धरपकड़, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पीएम स्वनिधि, मुख्यमंत्री निशुल्क बिजली योजना, कुसुम योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन लेकर उनका समाधान किया जाएगा।



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पटना साहिब जत्थेदार ने की पूर्व-जत्थेदार पर कार्रवाई की मांग: श्री अकाल तख्त को लिखा लेटर, बोले- सिख सिद्धांतों और मर्यादा का उल्लंघन किया – Amritsar News




पटना साहिब स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी के जत्थेदार ज्ञानी रंजीत सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मांग ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा एक दुनियावी जांच एजेंसी (एसआईटी) के समक्ष बयान देने के बाद की गई है। पत्र में कहा गया है कि विभिन्न समाचार चैनलों की रिपोर्टों के अनुसार, ज्ञानी रघबीर सिंह ने एक दुनियावी जांच एजेंसी के सामने बयान दिए हैं। जत्थेदार रंजीत सिंह के अनुसार, यह कार्य श्री अकाल तख्त साहिब की पवित्र परंपराओं, सिख सिद्धांतों और उसकी मर्यादा का उल्लंघन है। कहा- सिख संगत की भावनाएं आहत हुई ज्ञानी रंजीत सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि श्री अकाल तख्त साहिब दुनियाभर के सिखों के लिए सर्वोच्च धार्मिक संस्था है। यहां से जारी होने वाला प्रत्येक हुक्म और संदेश सिख पंथ के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि इस घटना से दुनियाभर की सिख संगत की भावनाएं आहत हुई हैं और इसे एक गंभीर चूक माना जाना चाहिए। उन्होंने जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज से अपील की है कि ज्ञानी रघबीर सिंह के विरुद्ध पंथक मर्यादा के अनुसार तत्काल उचित कार्रवाई की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को चुनौती देने का दुस्साहस न कर सके। खुद को बताया गुरु पंथ का सेवक पत्र के अंत में, ज्ञानी रंजीत सिंह ने स्वयं को “गुरु पंथ का सेवक” बताते हुए श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानी रघुबीर सिंह को अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल से कोई परेशानी है तो वो उनके खिलाफ पर्सनल केस करें, लेकिन ऐसे पंथ की मर्यादा को भंग नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वो श्री अकाल तख्त साहिब से विनती करते हैं इस मामले में ज्ञानी रघबीर सिंह को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया जाए ओर उन्हें ओर उनके साथियों को पंथ से हमेशा हमेशा के लिये निकाल दिया जाए। वहीं ज्ञानी रघबीर सिंह को बेरी साहिब पर बांध कर सजा दी जाए, ताकि कोई आगे से श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा को भंग न कर सके।



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बहन किनारे पर इंतजार करती रही, भाई नर्मदा में डूबे: नरसिंहपुर के बरमान रेत घाट में हुआ हादसा – Narsinghpur News




नरसिंहपुर जिले के बरमान रेत घाट पर गुरुवार को नर्मदा नदी में डूबने से दो ममेरे भाइयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ऋतिक चड़ार (21) और अभिषेक चड़ार (21) के रूप में हुई है। हादसे के वक्त उनकी बहन तट पर ही मौजूद थी, लेकिन घटना से बेखबर थी। घटनाक्रम के अनुसार, ऋतिक चड़ार अपनी बहन रिया का कॉलेज में दाखिला कराने करेली आया था। वहां उसका ममेरा भाई अभिषेक चड़ार भी उनके साथ हो गया। कॉलेज का काम निपटाने के बाद तीनों बाइक से गुंदरई जाने के लिए निकले थे। रास्ते में वे बरमान में रुके और रेतघाट गए। दीपेश्वर मंदिर के पास अभिषेक और ऋतिक नदी में नहाने उतरे, जबकि रिया किनारे पर बैठ गई। फोन पर परिजनों को बताया नहाने गए पर लौटे नहीं नदी में नहाने उतरे दोनों भाई जब काफी देर तक वापस नहीं आए, तो किनारे बैठी रिया चिंतित होने लगी। इसी बीच अभिषेक के मोबाइल पर परिजनों का फोन आया। रिया ने फोन उठाकर बताया कि भाई नहाने गए हैं और अभी तक लौटे नहीं हैं। यह सुनकर परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। तीन घंटे में परिजनों ने खोजे दोनों शव रिया को खुद भी काफी देर तक भाइयों के डूबने का अंदाजा नहीं था। फोन पर बात होने के बाद उसने स्थानीय निवासियों और नाविकों को सूचित किया। परिजनों के मौके पर पहुंचने के बाद करीब 2-3 घंटे की तलाश के बाद दोनों के शव बरामद किए जा सके। शुक्रवार को जिला अस्पताल में दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद जब दोनों युवकों के शव उनके गृह ग्रामों में पहुंचे, तो पूरे गांव में शोक छा गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।



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भारतीय सेना को मिले 106 कामिकाजे ड्रोन: 180 किमी की रेंज, 450kmph की रफ्तार; न जैमिंग का असर, न टारगेट से भटकेंगे


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नई दिल्ली22 मिनट पहले

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भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने सेना को 106 टर्बोजेट इंजन से चलने वाले ‘कामिकाजे’ ड्रोन सौंप दिए हैं। इन्हें ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ नाम दिया गया है।

यह ड्रोन 180km की रेंज तक हमला कर सकते हैं। साथ ही 450kmph की रफ्तार पकड़ सकते हैं। यानी इसकी रफ्तार दुनिया में सबसे तेज उड़ने वाले पेरेग्रिन फाल्कन पक्षी की रफ्तार 320kmph से भी ज्यादा है।

इतना ही नहीं इन पर न जैमिंग का असर होगा, न कोई स्पूफिंग के जरिए इन्हें टारगेट से भटका सकेगा। कंपनी ने कहा है कि उसने 100 ऑपरेशनल और 6 ट्रेनिंग ड्रोन सेना को सौंप दिए हैं।

यह डिलीवरी भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और अनमैन्ड वारफेयर में उपलब्धि मानी जा रही है। इन्हें बेलारूसी फर्म केबी इंडेला की मदद से तैयार किया गया है।

कंपनी का दावा है कि यह ड्रोन पूरी तरह ऑटोनॉमस प्रिसिजन स्ट्राइक मिशन अंजाम दे सकता है। यानी लक्ष्य निर्धारित होने के बाद यह बिना किसी इंसानी दखल के मिशन पूरा कर देगा।

कामिकाजे ड्रोन्स क्या हैं…

  • कामिकाजे ड्रोन ऐसे ड्रोन होते हैं जो लक्ष्य पर हमला करते समय खुद भी नष्ट हो जाते हैं। इन्हें लॉइटरिंग म्यूनिशन भी कहा जाता है।
  • कामिकाजे नाम सेकेंड वर्ल्ड वार के कामिकाजे अटैक से लिया गया है। जब जापानी पायलट अपने विमानों को दुश्मन के जहाजों से टकराकर आत्मघाती हमला करते थे।
  • जब किसी ड्रोन लॉन्च किया जाता है, तब वह काफी देर तक हवा में मंडराता है। कैमरे और सेंसर से टारगेट खोजता है। उसके मिलने पर उसकी ओर तेजी से बढ़ता है और टकराते ही विस्फोट कर देता है।
  • इन ड्रोन्स का फायदा है कि अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं। सटीक हमला कर सकते हैं। सैनिकों की जान सीधे खतरे में नहीं डालते। टैंक, रडार, तोप और सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

विस्फोट का दायरा केवल 5 मीटर, यानी जानमाल का कम नुकसान

अग्निवेग में अहम मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स हब, कमांड सेंटर, रडार इंस्टॉलेशन और दूसरे रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता है। ट्रायल के दौरान अग्निवेग ने जैमिंग और स्पूफिंग वाले माहौल में काम करते हुए 5 मीटर से कम का सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) हासिल किया।

सरल शब्दों में कहें तो यह ड्रोन अपने टारगेट को बेहद करीब जाकर हमला करने में सक्षम है। इससे किसी सैन्य ठिकाने के केवल एक हिस्से को निशाना बनाया जा सकता है। इससे टारगेट के आसपास मौजूद सिविलियन स्ट्रक्चर का कम नुकसान होता है।

दिल्ली की कंपनी ने 6 महीने में तैयार किए, एडवांस्ड वर्जन भी बनाएगी

SMPP के सीईओ और निदेशक आशीष कंसल ने कहा कि केवल 6 महीने के भीतर भारतीय सेना को ड्रोन की आपूर्ति करना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सटीकता, स्वायत्तता और कॉस्ट इफेक्टिव हो रहे हैं। ऐसे सिस्टम युद्धक्षेत्र में ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित हो रहे हैं।

अग्निवेग में 75% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने सेना को अग्निवेग का एडवांस्ड वर्जन देने की पेशकश भी की है।

खबरें और भी हैं…



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मीठा खाने का है मन? घर पर ऐसे बनाएं बंगाली स्टाइल खीर कदम, जानें आसान रेसिपी


Bengali Style Kheer Kadam: अगर आपको मीठा पसंद है और आप कुछ नया आज़माना चाहते हैं, तो बंगाल की मशहूर ‘खीर कदम’ एक बेहतरीन विकल्प है. यह पारंपरिक बंगाली मिठाई अपने अनोखे स्वाद और आकर्षक बनावट के लिए जानी जाती है. ‘खीर कदम’ के बीच में एक नरम रसगुल्ला होता है, जबकि बाहरी परत मावा (गाढ़ा किया हुआ दूध) और सूखे दूध से बनी होती है. एक बार चखने पर, इसका स्वाद लंबे समय तक याद रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे आसानी से घर पर बना सकते हैं. आइए इसकी आसान, स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी जानते हैं…

ज़रूरी सामग्री
10 छोटे रसगुल्ले, 1 कप मावा (खोया), ½ कप मिल्क पाउडर, 3 बड़े चम्मच पिसी हुई चीनी, 2 बड़े चम्मच दूध, ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर, सजावट के लिए बारीक कटे हुए पिस्ते या बादाम.

स्टेप 1: रसगुल्ले तैयार करें
सबसे पहले, रसगुल्लों को चाशनी से निकालें और हल्के हाथ से दबाकर अतिरिक्त चाशनी निकाल दें. ध्यान रखें कि वे टूटें नहीं. उन्हें एक प्लेट में अलग रख दें.

स्टेप 2: परत तैयार करें
एक कटोरे में मावा (खोया), मिल्क पाउडर, पिसी हुई चीनी और इलायची पाउडर मिलाएं. मिश्रण में धीरे-धीरे थोड़ा दूध डालें और इसे नरम आटे की तरह गूंथ लें. मिश्रण इतना नरम होना चाहिए कि आसानी से गोले बनाए जा सकें.

स्टेप 3: छोटे हिस्से बनाएं
मिश्रण को बराबर हिस्सों में बांट लें. हर हिस्से को हाथों से गोले का आकार दें और फिर उसे थोड़ा चपटा करें ताकि उसके अंदर रसगुल्ला रखा जा सके.

स्टेप 4: रसगुल्ले को अंदर भरें
चपटे किए हुए मावा मिश्रण के बीच में एक रसगुल्ला रखें, इसे चारों तरफ से बंद करें और चिकने गोले का आकार दें. पक्का करें कि रसगुल्ला पूरी तरह से ढका हुआ हो. अब खीर कदम को हल्के से मिल्क पाउडर में लपेटें, इससे मिठाई को पारंपरिक बंगाली लुक मिलता है. ऊपर से कटे हुए पिस्ते या बादाम से सजाएं.

स्टेप 5: ठंडा होने दें
खीर कदम को लगभग 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखें. इससे इसका टेक्सचर और स्वाद दोनों बेहतर हो जाते हैं.

त्योहारों, पार्टियों या खास मौकों पर ठंडी खीर परोसें. यह डेज़र्ट सभी को ज़रूर पसंद आएगा और आपकी डेज़र्ट टेबल की शोभा बढ़ाएगा.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



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इस साल भी सितंबर तक है आईटीआर भरने की डेडलाइन या बदल गई, चूक गए तो क्‍या?


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ITR Deadline : आप भी नौकरीपेशा हैं तो इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. कई टैक्‍सपेयर्स के मन में इस बात को लेकर गफलत चल रही है कि इस बार भी आईटीआर भरने की डेडलाइन सितंबर तक रहेगी. इस चक्‍कर में अगर आप डेडलाइन को चूक गए तो कई तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं.

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आईटीआर भरने की डेडलाइन 2026 में 31 जुलाई रखी गई है.

नई दिल्‍ली. इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की शुरुआत हो चुकी है. आयकर विभाग की ओर से आईटीआर फॉर्म नोटिफाई करने के साथ ही करदाताओं के सामने रिटर्न भरने की मारामारी भी शुरू हो चुकी है. कंपनियों ने तो अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 भी जारी करना शुरू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब रिटर्न भरने की दौड़ पूरी तरह शुरू हो चुकी है. लेकिन, एक सवाल है जो हर बार करदाताओं के मन में जरूर उठता है. अगर वे इनकम टैक्‍स विभाग की ओर से तय की गई डेडलाइन को चूक जाते हैं तो क्‍या परेशानी सामने आ सकती है. दूसरी अहम बात ये है कि इस बार रिटर्न भरने की डेडलाइन क्‍या है.

पिछले साल सरकार ने आईटीआर भरने के लिए सितंबर तक का समय दिया था. यही वजह है कि इस बार भी तमाम करदाताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इस बार भी डेडलाइन वही है या फिर बदल गई है. अगर आप नौकरीपेशा हैं तो एक बात आप गांठ बांध लीजिए कि आपके लिए आईटीआर भरने की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई ही है. इस बार आप सितंबर का सोचकर चूक मत जाइएगा. दूसरी बात ये कि अगर आप डेडलाइन तक आईटीआर नहीं भरते हैं तो इसके कई तरह से नुकसान हो सकते हैं.

क्‍या है आईटीआर भरने की डेडलाइन

  • सामान्‍य करदाताओं, नौकरीपेशा और एचयएफ के लिए रिटर्न भरने की डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 है.
  • ऐसे बिजनेसमैन और प्रोफेशनल्‍स जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए आईटीआर की डेडलाइन 31 अगस्‍त, 2026 है.
  • ऐसे बिजनेसमैन और पेशेवर जिनके खातों को ऑडिट की जरूरत होती है, वे 31 अक्‍टूबर तक रिटर्न भर सकते हैं.
  • ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के तहत आने वाले टैक्‍सपेयर्स 30 नवंबर, 2026 तक अपना रिटर्न भर सकते हैं.
  • अगर आप सामान्‍य डेडलाइन को चूक जाते हैं तो लेट पेमेंट चार्ज के साथ 31 दिसंबर, 2026 तक आईटीआर भर सकते हैं.

डेडलाइन चूक गए तो क्‍या करें
आप सैलरीड पर्सन हैं या फिर एचयूएफ के रूप में आईटीआर दाखिल कर रहे हैं तो 31 जुलाई की डेडलाइन याद रखनी चाहिए. अगर आप इस डेडलाइन को चूक जाते हैं तो इनकम टैक्‍स की धारा 234एफ के तहत आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं. डेडलाइन के बाद रिटर्न भरने के लिए आपको लेट फीस चुकानी पडे़गी. इनकम टैक्‍स विभाग ने 5 लाख तक की सालाना कमाई पर 1,000 रुपये की लेट फीस तय की है, जबकि 5 लाख से ज्‍यादा की कमाई 5 हजार रुपये की लेट फीस लगाई जाती है.

डेडलाइन चूकने पर आपको क्‍या नुकसान
अगर इनकम टैक्‍स रिटर्न भरने की सामान्‍य डेडलाइन आप चूक गए हैं तो सेक्‍शन 234ए के तहत बकाया टैक्‍स पर ब्‍याल लगाया जा सकता है. इनकम टैक्‍स विभाग आपके नुकसान को कैरी फारवर्ड करने से इनकार कर सकता है. इतना ही नहीं आपका रिफंड आने में भी देरी हो सकती है. देरी से रिटर्न भरने पर आपको रिफंड तो मिलेगा, लेकिन आपको इस रिफंड पर मिलने वाले ब्‍याज का नुकसान हो सकता है. 31 दिसंबर के बाद आईटीआर भरते हैं तो रिफंड क्‍लेम करने का अधिकार समाप्‍त हो जाता है. इसके लिए आपको सेक्‍शन 119(2)(b) के तहत कर अधिकारियों से अपनी देरी को माफ किए जाने का आवेदन करना पड़ेगा और यह उनके ऊपर होगा कि वे आपकी बात स्‍वीकार करते हैं या नहीं.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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8000 रुपये सस्ता मिल रहा Realme का 10000mAh बैटरी वाला फोन, नई सेल में ऑफर्स की बारिश


Realme Narzo Power की कीमत में भारी कटौती की गई है। रियलमी का 10,001mAh बैटरी वाला यह फोन लॉन्च प्राइस से काफी सस्ते में मिल रहा है। ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन और कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर शुरू हुई Realme Days Sale में दमदार बैटरी वाला यह फोन 8,000 रुपये तक सस्ते में खरीदा जा सकता है। इसके अलावा कंपनी Realme के कई और नए लॉन्च हुए फोन पर भी दमदार डिस्काउंट ऑफर कर रही है।

Realme Narzo Power पर ऑफर

रियलमी का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 256GB में आता है। यह फोन 27,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लिस्ट किया गया है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 29,999 रुपये में मिल रहा है। Realme Days Sale में यह फोन 25,999 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीदा जा सकता है। इस फोन की MRP 35,999 रुपये से शुरू होती है। ऐसे में फोन को 8,000 रुपये सस्ते में लिस्ट किया गया है।

12 जून से 16 जून के बीच चलने वाले इस सेल में फोन की खरीद पर 2,000 रुपये का एक्सचेंज ऑफर मिल रहा है। इसके अलावा कंपनी फोन की खरीद पर कूपन और कैशबैक डिस्काउंट ऑफर कर रही है। रियलमी का 10,001mAh बैटरी वाला यह मिड बजट फोन इस साल लॉन्च हुआ है।

Realme Narzo Power के फीचर्स

रियलमी का यह फोन 6.8 इंच के कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। इस फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 6,500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। इस स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 7400 Ultra चिपसेट दिया गया है। इसके साथ 8GB रैम और 256GB तक स्टोरेज को सपोर्ट करता है।










Realme Narzo Power फीचर्स
डिस्प्ले 6.8 इंच, 1.5K AMOLED, 144Hz
प्रोसेसर MediaTek Dimensity 7400 Ultra
स्टोरेज 8GB, 256GB
कैमरा 50MP OIS + 8MP, 16MP
बैटरी 10,001mAh. 80W
OS Android 16, Realme UI

चीनी ब्रांड के इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 50MP का मेन OIS कैमरा दिया गया है। इसके अलावा 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 16MP का कैमरा दिया गया है। यह फोन 10,001mAh की दमदार बैटरी के साथ आता है। इसमें 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। यह फोन Android 16 पर बेस्ड Realme UI पर काम करता है। फोन में IP66, IP68, IP69 रेटिंग मिलती है, जो फोन को पानी में गिरने या धूल-मिट्टी से बचाता है।

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डिस्क्लेमर – फोन की कीमत मौजूदा सेल में मिल रहे ऑफर के हिसाब से बताई गई है। इसमें उतार-चढ़ाव और बदलाव संभव है।





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