Wednesday, July 8, 2026
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मुंबई एयरपोर्ट में रनवे पर आमने-सामने आए प्लेन: एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद खड़ा था, एअर इंडिया प्लेन ने टेक-ऑफ रन शुरू कर दिया


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मुंबई23 मिनट पहले

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मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार रात को हादसा टल गया। एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। यह घटना रात करीब 10 बजे हुई। एअर इंडिया के विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के निर्देश पर टेक-ऑफ रोक दी, जिससे एक संभावित हादसा टल गया।

सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद रनवे से हटा नहीं था, तभी दिल्ली जाने वाला एयर इंडिया का विमान उसी रनवे से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के निर्देश के बाद टेक-ऑफ रोक दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक सिलिगुड़ी से आई एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट रनवे खाली कर ही रही थी, तभी दिल्ली जाने वाली एअर इंडिया की फ्लाइट उसी रनवे से टेकऑफ की तैयारी में थी।

ATC के निर्देश पर रोका टेक-ऑफ रन

एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि मुंबई से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट AI816 के क्रू ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश मिलते ही टेकऑफ रन तत्काल रोक दिया और विमान को वापस बे (पार्किंग एरिया) में ले जाया गया।

एयरलाइन के मुताबिक, विमान की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत जांच की जाएगी। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

आम तौर पर, टेक-ऑफ रन का मतलब है टेक-ऑफ की रफ्तार पकड़ने से पहले विमान का जमीन पर दौड़ना।

यात्रियों की संख्या का खुलासा नहीं

फिलहाल दोनों विमानों में कितने यात्री सवार थे, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक जांच पूरी होने के बाद ही विमान को दोबारा परिचालन में लाया जाएगा।

पिछले महीने अहमदाबाद में हुई थी ऐसी ही घटना

इससे पहले जून में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भी ऐसी ही घटना हुई थी, जब एअर इंडिया और इंडिगो के दो विमान एक ही टैक्सीवे (रनवे का एक हिस्सा) पर आमने-सामने आ गए थे हालांकि दोनों विमानों को समय रहते रोक लिया गया था।

दोनों विमानों के बीच करीब 200 मीटर की दूरी रह गई थी। बाद में एअर इंडिया विमान को टो करके सही पार्किंग बे तक ले जाया गया। इसके बाद इंडिगो विमान रनवे पर पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर…

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मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया, आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने पुनः आदेश पारित करने का निर्देश दिया – Prayagraj (Allahabad) News




इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना ने कन्नौज की तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा भारती के 20 सितंबर 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने नवाब सिंह यादव व अन्य के खिलाफ पुलिस द्वारा दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। कन्नौज का मामला यह मामला कन्नौज कोतवाली थाने में दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। दरअसल यह घटना एक पॉक्सो मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई थी, जब गवाह डॉ. स्वास्तिका शालिनी को सत्र न्यायालय में गवाही देने के दौरान धमकाया गया और आरोपी के पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाया गया। अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने 31 पन्नों का आदेश लिखते हुए सबूतों की विस्तृत समीक्षा की, मानो कोई “मिनी ट्रायल” चल रहा हो, जबकि संज्ञान लेने के चरण में मजिस्ट्रेट को केवल प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, यह देखना होता है, सबूतों की गुणवत्ता परखना नहीं। हाईकोर्ट ने कमल शिवाजी पोकरनेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य , रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भाड़ा और भगवंत सिंह बनाम पुलिस आयुक्त जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को संज्ञान के चरण पर साक्ष्यों की सत्यता परखने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को सुना, लेकिन पीड़िता को नोटिस दिए बिना ही संज्ञान से इन्कार कर दिया, जो कि विधिक रूप से अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने 20 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामला पुनः मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कन्नौज की अदालत को भेज दिया है, ताकि पुलिस रिपोर्ट पर नए सिरे से, इस फैसले में दी गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, आदेश पारित किया जा सके।



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भोपाल निगम में अब ₹14.69 लाख टैक्स घोटाला: जिम्मेदारों ने चार महीने तक दबाए रखा मामला; आरोपी कर्मचारियों की सेवा समाप्त नहीं – Bhopal News




भोपाल नगर निगम में अब 14.69 लाख रुपए का प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स घोटाला सामने आया है। ताज्जुब की बात ये है कि इस मामले को जिम्मेदारों ने चार महीने तक दबाए रखा। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घोटाला नेशनल लोक अदालत के दौरान किया गया था। इस दौरान 106 फर्जी रसीदें काटकर लाखों रुपए हड़प लिए गए। जिम्मेदार अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी मार्च में ही मिल गई थी। उस दौरान दो अस्थायी कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आ गई थी। इसके बावजूद मामला चार महीने तक फाइलों में दबा रहा। 5 जुलाई को एफआईआर दर्ज हुई। दोनों आरोपी जेल पहुंच चुके हैं, लेकिन नगर निगम ने अब तक उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की हैं। एफआईआर के अनुसार 14 मार्च 2026 को वार्ड-33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी से 106 फर्जी प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर रसीदें जारी की गईं। इनमें 14 लाख 69 हजार 798 रुपए टैक्स जमा होना दर्शाया गया, जबकि बैंक खाते के मिलान में गड़बड़ी सामने आई थी। आधे टैक्स में रसीद का झांसा जांच में सामने आया कि वार्ड-24 के कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उलहक और योजना शाखा में पदस्थ मोहम्मद समीर खान ने पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। दोनों संपत्ति मालिकों को आधी राशि में टैक्स जमा कराने का झांसा देते थे। वार्ड-24 की ऑपरेटर नाहिदा के माध्यम से उन्होंने वार्ड-33 के प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए, फर्जी रसीदें जारी कीं और लोगों से वसूली गई रकम हड़प ली। ऑनलाइन टैक्स सिस्टम भी कठघरे में इस मामले ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वार्ड की यूजर आईडी का इस्तेमाल दूसरे वार्ड में कर 106 फर्जी रसीदें जारी हो गईं। ऐसे में पूरे सिस्टम का तकनीकी ऑडिट और अन्य वार्डों के रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। टैक्स भरने वालों को ही फिर बकायादार बना दिया जिन भवन स्वामियों ने आरोपियों को टैक्स की राशि देकर रसीदें प्राप्त कर ली थीं, उनके खातों में दोबारा वही टैक्स बकाया दर्ज कर दिया गया। यानी, जिन लोगों ने भुगतान किया, उन्हें ही फिर से बकायादार बना दिया गया। दूसरी ओर, गबन की राशि आरोपियों से वसूलने की कार्रवाई अब तक शुरू नहीं हुई है। मामले में अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार ने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



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‘रिलीज से पहले फैसला करो’, ‘सतलुज’ पर छिड़े विवाद के बीच कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान


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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी है. इस बीच फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता कंवलजीत सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म पूरी बन जाती है, उस पर करोड़ों रुपये और कई लोगों की मेहनत लग चुकी होती है, तब उसे रोकना पूरी टीम के साथ अन्याय है.

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दिलजीत की फिल्म को लेकर किए सवाल

नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस विवाद के बीच ही जाने माने एक्टर कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान सामने आया है. उनका कहना है कि रिलीज के बाद फिल्म को रोकना टीम के साथ अन्याय है.

आईएएनएस से बातचीत में कंवलजीत सिंह ने बताया कि ‘सतलुज’ उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक है. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें इतने बेरहम इंसान का किरदार निभाने का मौका मिला. यही वजह थी कि यह रोल उन्हें बेहद दिलचस्प लगा. उन्होंने कहा कि यह कहानी इतिहास से जुड़ी है, लेकिन इस पर पहले कभी ज्यादा बात नहीं हुई थी.

किरदार के लिए की थी पूरी तैयारी

कंवलजीत सिंह ने बताया कि उनका किरदार पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी से प्रेरित था. भूमिका की तैयारी के लिए उन्होंने उस अधिकारी के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पढ़ी, उनके भाषण देखे और उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की. हालांकि निर्देशक ने साफ कहा था कि किसी की नकल नहीं करनी है, बल्कि अपने अभिनय से किरदार को जीवंत बनाना है. उन्होंने कहा कि मेकअप की वजह से कई लोगों को लगा कि वह बिल्कुल उसी अधिकारी जैसे दिख रहे हैं.

रिलीज रुकने के पीछे सिर्फ विवाद नहीं होते

फिल्म की रिलीज में आई दिक्कतों पर कंवलजीत सिंह ने कहा कि हर बार विवाद ही वजह नहीं होता. कई बार आर्थिक, तकनीकी और दूसरे व्यावहारिक कारण भी सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म सालों की मेहनत के बाद भी रिलीज नहीं हो पाती, तो पूरी टीम को दुख होता है. इसकी तुलना उन्होंने उस लेखक से की, जिसकी किताब सालों की मेहनत के बाद भी प्रकाशित नहीं हो पाती.

‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी

कंवलजीत सिंह ने भरोसा जताया कि ‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी. उन्होंने कहा कि इस फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया है. चाहे वह स्पॉट बॉय हो, तकनीशियन हो, अभिनेता हो या निर्देशक. सभी चाहते हैं कि दर्शक उनकी मेहनत को बड़े पर्दे पर देखें.फिल्म से जुड़े विवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला करीब ढाई से तीन साल तक अलग-अलग स्तर पर चलता रहा. इसके बावजूद फिल्म के निर्माता और निर्देशक अपने फैसले पर डटे रहे. उन्होंने किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी बात रखी. कंवलजीत ने बताया कि एक समय फिल्म में बड़े पैमाने पर कट लगाने की बात भी हुई थी और बाद में इसे कनाडा के एक फिल्म फेस्टिवल से भी वापस ले लिया गया था.

बता दें कि कंवलजीत सिंह का कहना है कि अगर किसी फिल्म के विषय को लेकर किसी तरह की आपत्ति या आशंका है, तो उसका समाधान फिल्म बनने से पहले ही कर लेना चाहिए. जरूरी मंजूरियां और चर्चा पहले होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी बनने, पैसा खर्च होने और पूरी टीम की मेहनत लगने के बाद उस पर रोक लगाना या बड़े बदलाव की मांग करना सही नहीं है.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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बिहार- SH पर प्राइवेट गाड़ियों को नहीं देना होगा टोल: बैकफुट पर बिहार सरकार, 24 घंटे में बदला फैसला; कॉमर्शियल वाहनों से वसूली की रेट तय – Patna News




बिहार सरकार ने स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स को लेकर बड़ा यू टर्न लिया है। कैबिनेट की बैठक में स्टेट हाईवे और राज्य के पुलों पर सभी श्रेणी के वाहनों से यूजर फीस टोल वसूलने के नियमों को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद आम लोगों में यह संदेश गया कि अब निजी कार, जीप और अन्य प्राइवेट वाहनों को भी स्टेट हाईवे पर चलने के लिए टोल देना होगा। हालांकि, फैसले के 24 घंटे के भीतर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि निजी वाहनों से कोई यूजर फीस नहीं ली जाएगी। अब यह शुल्क केवल व्यावसायिक वाहनों पर ही लागू होगा। प्राइवेट वाहनों को मिली पूरी छूट सरकार के स्पष्टीकरण के बाद लाखों निजी वाहन मालिकों को राहत मिली है। सरकार ने साफ किया है कि निजी उपयोग के लिए चलने वाली कार, जीप, बाइक और अन्य व्यक्तिगत वाहन इस व्यवस्था से पूरी तरह बाहर रहेंगे। यानी बिहार के किसी भी स्टेट हाईवे पर निजी वाहनों को टोल टैक्स नहीं देना होगा। बिना फास्टैग वाले वाहनों से अधिक शुल्क और ओवरलोड वाहनों पर अतिरिक्त जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया था। अब इन दरों का प्रभाव केवल कॉमर्शियल वाहनों पर ही रहेगा। लाई गई नई व्यवस्था का बड़ा कारण सरकार का कहना है कि बिहार में स्टेट हाईवे, बड़े पुल, बाइपास और अन्य सड़क परियोजनाओं के रखरखाव, मरम्मत और भविष्य में नई सड़कों के निर्माण के लिए लगातार पैसे की जरूरत होती है। इसी उद्देश्य से व्यावसायिक वाहनों से यूजर फीस लेने का निर्णय लिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे सड़कों की गुणवत्ता बेहतर होगी और रखरखाव के लिए स्थायी संसाधन उपलब्ध होंगे। किन सड़कों पर लगेगा टोल बाद में घोषणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी स्टेट हाईवे पर एक साथ टोल वसूली शुरू नहीं होगी। पहले ट्रैफिक सर्वे, सड़क की स्थिति और अन्य तकनीकी मानकों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद अधिसूचना जारी कर उन स्टेट हाईवे और पुलों की सूची घोषित की जाएगी जहां व्यावसायिक वाहनों से यूजर फीस वसूली जाएगी। विपक्ष के सवालों के बीच सरकार का यू-टर्न कैबिनेट के फैसले के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार आम लोगों पर नया आर्थिक बोझ डाल रही है। सोशल मीडिया पर भी निजी वाहनों पर टोल लगाने को लेकर व्यापक चर्चा और आलोचना हुई। इसके बाद सरकार ने 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण जारी कर साफ कर दिया कि निजी वाहनों पर किसी तरह का टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा। सरकार के इस कदम को आम लोगों की चिंता और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद लिया गया बड़ा निर्णय माना जा रहा है।



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एआई तकनीक से पता चलेगा आग के बाद इमारत कितनी-सुरक्षित: आईआईटी जोधपुर ने की नई रिसर्च; फायर सेफ्टी सिस्टम किया विकसित – Jodhpur News




भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के शोधकर्ता ने अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा तकनीक बनाई है। संस्थान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो लिमिटेड सेंसर डेटा के आधार पर आग लगने के दौरान और आग बुझाने के बाद भी इमारत की बढ़ोतरी का आकलन कर सकता है। देशभर में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों, ऊंची आवासीय इमारतों और औद्योगिक इकाइयों में लगातार भीषण आग लगने की घटनाओं के बीच यह प्रयास किया गया है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने अग्नि प्रतिरोधक क्षमता, निर्माण गुणवत्ता प्रबंधन, स्थायित्व मूल्यांकन (Sustainability Assessment), भवनों और आधारभूत संरचनाओं (Buildings Infrastructure) के बुद्धिमान जीवनचक्र प्रबंधन (Intelligent Lifecycle Management) के लिए उन्नत संगणकीय तकनीकों और ओपन स्रोत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Computational Technologies and Open-Source Digital Platforms) का डवलप किया है। शोध में सामने आया कि कई इमारतों को सबसे ज्यादा संरचनात्मक नुकसान कूलिंग फेज के दौरान होता है। इस तकनीक को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन और डिजास्टर मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी बन सकेंगे। आग लगने के बाद बिल्डिंग की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आईआईटी जोधपुर के सिविल एवं आधारभूत संरचना अभियांत्रिकी विभाग (Department of Civil and Infrastructure Engineering) के सहायक प्रोफेसर डॉ. पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में चल रहे इस शोध का उद्देश्य भवनों को आग से अधिक सुरक्षित बनाना और आग लगने के बाद उनकी संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। यह रिसर्च पारंपरिक अग्नि सुरक्षा मानकों से आगे बढ़कर यह विश्लेषण करता है कि भीषण आग के दौरान पूरी इमारत किस प्रकार व्यवहार करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार- पारंपरिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली मुख्य रूप से आग का पता लगाने और उसे नियंत्रित करने तक सीमित हैं, जबकि वास्तविक खतरा आग के कारण भवन की संरचना को होने वाली क्षति से पैदा होता है। कई मामलों में आग बुझने के बाद भी इमारत के ढहने का जोखिम बना रहता है। एआई आधारित तकनीक देगी समय रहते चेतावनी आईआईटी जोधपुर की टीम ने ऐसे मॉडल विकसित किए हैं, जो भवन के भीतर आग फैलने की प्रक्रिया का अनुकरण (Simulation) करते हैं, विभिन्न अग्नि परिस्थितियों में संरचनात्मक हिस्सों के व्यवहार का विश्लेषण करते हैं तथा आग के बाद भवन को हुई वास्तविक क्षति का वैज्ञानिक आकलन करने में सक्षम हैं। शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित समाधान भी विकसित किए हैं, जो सीमित सेंसर आंकड़ों के आधार पर भवन की फायर रिपॉन्स का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन्हें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के साथ जोड़ा गया है, जिससे अग्निशमन एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। यह तकनीक आपदा प्रबंधन एजेंसियों, संरचनात्मक अभियंताओं, बीमा कंपनियों, शहरी योजनाकारों और आपातकालीन राहत दलों के लिए उपयोगी साबित होगी। डिजिटल तकनीकों से होगा भवनों का स्मार्ट प्रबंधन अग्नि अभियांत्रिकी के अलावा आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ता भवन सूचना मॉडलिंग, डिजिटल प्रतिरूप, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (स्मार्ट उपकरणों का नेटवर्क) तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए भवनों के स्मार्ट डिजाइन और प्रबंधन पर भी काम कर रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से भवन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी, स्थायित्व मूल्यांकन, जीवनचक्र प्रदर्शन का विश्लेषण, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव तथा आपदा तैयारी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ऐसे स्वचालित डिजिटल प्लेफॉर्म भी विकसित किए हैं, जो संरचनात्मक डिजाइन (Structural Engineers ), स्थायित्व मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता प्रबंधन को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करते हैं। आग प्रितिरोधक डिजाइन बनेगी अहम हिस्सा डॉ. पी. रवि प्रकाश ने कहा- हर बड़ी आग की घटना यह याद दिलाती है कि केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है। मानव जीवन की सुरक्षा के लिए यह समझना आवश्यक है कि आग लगने से पहले, आग के दौरान और आग बुझने के बाद भवन किस प्रकार व्यवहार करता है। यह शोध अभियंताओं, नीति-निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को ऐसे उन्नत वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध कराने का प्रयास है, जिनकी सहायता से संरचनात्मक विफलताओं का पूर्वानुमान लगाया जा सके, आग से प्रभावित भवनों का तेजी से वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके तथा भवन निर्माण के शुरुआती चरण से ही अग्नि प्रतिरोधक क्षमता को डिजाइन का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके।



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30 साल में आई 2 फिल्में, 1 ही नाम से हुई रिलीज, एक की टिकट मिलना मुश्किल, दूसरी डिजास्टर


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साल 1983 में एक ऐसी फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दी थी, जिसने रिलीज होते ही तहलका मचा दिया था.फिल्म की लीड हीरोइन के करियर के लिए तो ये फिल्म वरदान साबित हुई थी. लेकिन 30 साल बाद इसी नाम से एक और फिल्म बनी, जो कि सुपरस्टार के होते हुए भी डिजास्टर साबित हुई थी.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में एक ही नाम से बनी कई फिल्मों का सिलसिला काफी पुराना है. लेकिन साल 1983 में भी जितेंद्र की एक ऐसी फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दी थी,जिसकी कहानी और गाने दोनों ही धमाल साबित हुई. फिर इसी नाम से 30 साल बाद फिर फिल्म बनी. हिट की गारंटी वाले सुपरस्टार की ये फिल्म बुरी तरह ढेर हो गई थी.

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ये कोई नई बात नहीं है, एक ही नाम से बनी फिल्में कई बार खूब नाम कमाती है. जितेंद्र की एक फिल्म ने भी खूब नाम कमाया. लेकिन अगली बार जब 30 साल बाद दोबारा इस नाम से फिल्म बनी तो फायदे के बजाय मेकर्स को भारी नुकसान हुआ. उस फिल्म का नाम है, हिम्मतवाला.

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जितेंद्र और श्रीदेवी की हिम्मतवाला 25 फरवरी, 1983 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली. फिल्म में जितेंद्र और श्रीदेवी की जोड़ी को भी काफी पसंद किया गया. कमाई के मामले में भी फिल्म चर्चा में रही थी.

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यह श्रीदेवी की पहली बड़ी हिंदी फिल्म थी. फिल्म में श्रीदेवी ने अपने रोल से सभी को चौंका दिया था. ये फिल्म उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई थी. इस फिल्म के बाद श्रीदेवी को कई बड़ी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे थे.

यह फिल्म जितेंद्र और श्रीदेवी दोनों के करियर चमका गई थी. क्योंकि इससे पहले साल 1982 में जितेंद्र की फिल्म ‘ दीदार-ए-यार’ बुरी तरह फ्लॉप हुई थी. इसके बाद जितेंद्र भी काफी डर गए थे. लेकिन अगले ही साल ‘हिम्मतवाला’ से उन्हें वो सफलता मिली कि उनका करियर को नई उड़ान मिल गई थी. इसके बाद उन्होंने श्रीदेवी के साथ दस से ज्यादा हिट फिल्मों में काम किया था.

साल 1983 में आई जितेंद्र और श्रीदेवी की इस फिल्म ने उस दौर में मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी. ये फिल्म साल 1980 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक साबित हुई थी.

फिर 30 साल बाद इसी नाम से साल 2013 में अजय देवगन की फिल्म हिम्मतवाला आई. फिल्म में अजय देवगन के साथ तमन्ना भाटिया लीड रोल में नजर आई थी. फिल्म से उम्मीद की जा रही थी कि ये फिल्म पुरानी हिम्मतवाला जैसी ब्लॉकबस्टर साबित होगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

साजिद खान के डायरेक्शन में बनी जितेंद्र की फिल्म के रीमेक हिम्मतवाला बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. फिल्म में अजय और तमन्ना भाटिया के अलावा परेश रावल और महेश मांजरेकर भी अहम भूमिका में नजर आए थे. फिल्म ने भारत में 58.34 करोड़ रुपये और दुनिया भर में 65.79 करोड़ रुपये की कमाई की थी.

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DM-SP ने कामेश्वर नाथ मंदिर का किया इंस्पेक्शन: श्रावणी मेला सुरक्षा में पुलिस को 24 घंटे मुस्तैद रहने का निर्देश – Sheikhpura News




शेखपुरा में श्रावणी मेला की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार शाम जिला पदाधिकारी शेखर आनंद और एसपी हिमांशु ने गिरिहिन्डा पहाड़ का संयुक्त दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पहाड़ पर स्थित महाभारत कालीन बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर का भ्रमण किया और शिवलिंग के दर्शन किए। जिला पदाधिकारी ने सावन महीने में लगने वाले इस प्रसिद्ध मेले की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। हर साल हजारों श्रद्धालु बाबा कामेश्वर नाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं, जिसके कारण सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस बल 24 घंटे मुस्तैद रहे ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए, एसपी हिमांशु ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान चप्पे-चप्पे पर पर्याप्त पुलिस बल, कैमरे और दंडाधिकारियों की तैनाती की जाए। भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि महिला और पुरुष श्रद्धालु कतारबद्ध होकर सुलभ दर्शन कर सकें। एसपी ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी आपातकालीन या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल 24 घंटे मुस्तैद रहे ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा निरीक्षण के दौरान, जिला पदाधिकारी शेखर आनंद ने नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, साफ-सफाई, लाइटिंग और रास्तों की मरम्मत का काम तुरंत पूरा किया जाए। गिरिहिन्डा पहाड़ पर स्थित बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। सावन के महीने में इस स्थान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, जिसके कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी शिवभक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इस मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कई अन्य वरीय अधिकारी व स्थानीय कर्मी भी उपस्थित थे।



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खुले पड़े गड्ढा में डूबा 10 साल का बच्चा, मौत: बालाघाट में खेलते समय पैर फिसलने से हादसा, परिवार का छोटा बेटा था – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट में 10 साल का बच्चा खेल-खेल में पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक बच्चे की पहचान लक्ष्य (पिता हंसकुमार बागडे) के रूप में हुई है। लक्ष्य परिवार में सबसे छोटा बेटा था, उसका एक बड़ा भाई भी है। घटना लालबर्रा थाना क्षेत्र के धरपीवाड़ा में मंगलवार शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, धरपीवाड़ा नाले के पास गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत को देखते हुए मकान/भवन निर्माण के काम के लिए जेसीबी मशीन से बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए थे। पिछले कुछ दिनों से इलाके में हो रही लगातार बारिश की वजह से इन खुले गड्ढों में ऊपर तक पानी भर गया था। मंगलवार शाम को मासूम लक्ष्य इन्हीं गड्ढों के पास खेल रहा था, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में समा गया। खुले गड्ढों को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा हादसे की खबर मिलते ही लालबर्रा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे के शव को गड्ढे से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए लालबर्रा अस्पताल भिजवाया। शव का पोस्टमार्टम बुधवार को किया जाएगा। घटना के बाद से ही गांव के लोगों में निर्माण कार्य करने वालों की लापरवाही और इन खुले गड्ढों को लेकर भारी गुस्सा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सख्त मांग की है कि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए, इसके लिए क्षेत्र में खुले पड़े ऐसे सभी जानलेवा गड्ढों को तुरंत मिट्टी डालकर भरा जाए। लालबर्रा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।



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₹36 लाख की पगार का भ्रम! Form 16 ने खोली CTC और इन हैंड सैलरी में अंतर की पोल


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सोशल मीडिया पर एक सरकारी बैंक मैनेजर का Form 16 तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें सालाना CTC करीब 35.25 लाख रुपये दिखाई गई है, जबकि हाथ में मिलने वाली सैलरी इससे काफी कम है. इसने CTC और इन हैंड सैलरी के अंतर को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आखिर इतनी बड़ी सैलरी के बावजूद बैंक अधिकारी के खाते में हर महीने कितनी रकम आती है और दोनों में इतना फर्क क्यों होता है, आइए समझते हैं.

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हर महीने औसतन 2 लाख रुपये सैलरी इस बैंक मैनेजर के खाते में आती है.

नई दिल्ली. सरकारी बैंकों की नौकरी को हमेशा अच्छी सैलरी और मजबूत जॉब सिक्योरिटी के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक सरकारी बैंक मैनेजर के Form 16 ने लोगों की इस धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. वायरल दस्तावेज के मुताबिक, 8 साल के अनुभव वाले एक SBI मैनेजर की सालाना CTC करीब 35.25 लाख रुपये यानी लगभग 2.94 लाख रुपये प्रति माह दिखाई गई है. पहली नजर में यह सैलरी काफी आकर्षक लगती है, लेकिन असल कहानी इससे अलग है.

वायरल Form 16 के मुताबिक, दिखाई गई रकम ग्रॉस सैलरी या CTC है. यह वह राशि होती है जिसमें बेसिक सैलरी के अलावा कई तरह के भत्ते और कंपनी की ओर से किए जाने वाले योगदान भी शामिल होते हैं. असल में कर्मचारी के खाते में आने वाली इन हैंड सैलरी इससे काफी कम होती है. इसकी वजह कई तरह की कटौतियां होती हैं, जिनमें प्रोविडेंट फंड (PF), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), इनकम टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स और दूसरी वैधानिक कटौतियां शामिल हैं.



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