Wednesday, May 13, 2026
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अफ्रीकन बोमा पद्धति से होगा रेस्क्यू: नरवर में फसल चौपट करने वाली नीलगायों को जिले से बाहर छोड़ेंगे – Ujjain News




फसलों को बर्बाद करने वाली नीलगाय (रोजड़े) को अब जिले से बाहर करेंगे। वन विभाग ने प्लानिंग कर चंदेसरा से लेकर नरवर तक के क्षेत्र को चुना है। ​सर्वे करवाकर नीलगायों को ट्रैक करना भी शुरू कर दिया है। 8-10 और इससे ज्यादा के झुंड में दिखाई देने वाले मवेशियों के रास्ते चिह्नित हो गए हैं। डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार रेस्क्यू के लिए सेटअप मंगवा लिया है। चिह्नित पाइंट पर फीट करते हुए जल्द ही नीलगायों को पकड़ने के लिए रेस्क्यू शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए अफ्रीकन बोमा पद्धति का प्रयोग होगा। रेस्क्यू नीलगायों को जिले से बाहर सु​रक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इनके कारण किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए रेस्क्यू टीम को प्रशिक्षित करते हुए उन्हें तैयार कर दिया है। मंदसौर और शाजापुर के बाद उज्जैन में होगा रेस्क्यू: नीलगायों के रेस्क्यू के लिए करीब 7-8 साल पहले मंदसौर में बोमा पद्धति से पहला रेस्क्यू हुआ था। इसके बाद इसी साल शाजापुर जिले में बोमा पद्धति से हिरणों का रेस्क्यू किया गया। इसमें कुछ नीलगाय भी पकड़ाई थी। इनसे जान का भी जोखिम, चार लोगों की मौत हो चुकी सिलारखेड़ी निवासी दिलीपसिंह सिसौदिया ने बताया नीलगायों के कारण फसलों के नष्ट होने का खतरा तो है ​ही, अब जान का जोखिम भी खड़ा हो गया। खासकर देवास-बदनावर हाइवे पर तेज स्पीड से निकलने वाले वाहन चालक इन नीलगायों के कारण हादसे का शिकार हो रहे हैं। खासकर रात के समय ये जानवर सड़क पार करने के लिए अचानक दौड़ लगाते हैं। इस दौरान बाइक व कार से भी टकरा जाने से आए दिन इस तरह के हादसे होने लगे हैं। चंदेसरा से नरवर के बीच ही इस तरह के हादसों में 4 लोग जान तक गंवा चुके हैं। चुनौती : चारों तरफ खुली जगह उज्जैन में नीलगायों का रेस्क्यू चुनौती रहेगा, क्योंकि जिस क्षेत्र में रेस्क्यू होना है वहां चारों तरफ खुली जगह है। इस कारण बोमा सेटअप लगाना और वहां तक जानवरों को लाने में परेशानी होगी, क्योंकि नीलगाय एक पॉवरफुल अफ्रीकन जानवर है, जो ग्रुप में तो रहता है। महंगे रेस्क्यू के कारण बदलाव वैसे बोमा ​सेटअप (पिंजरेनुमा सिस्टम) लगाकर हेलीकॉप्टर से मवेशियों को हांका जाता है, लेकिन यह बहुत मंहगा रेस्क्यू है। इस कारण उज्जैन में बोमा सेटअप लगाकर ढोल आदि बचाते हुए शोर मचाते हुए नीलगायों को हांकते हुए टारगेट तक पहुंचाएंगे।



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नाबालिग लड़की के चेहरे-बॉडी पर नोचने-खरोंचने के निशान: हत्या कर मंत्री आवास के पास फेंकी बॉडी, जिस स्कूटी से लाई गई उसकी तलाश कर रही पुलिस – Patna News




3 मई 2026- बिहार सरकार में मंत्री जमा खान के आवास की चहारदीवारी के पास कचरे के ढेर में एक 15 साल की नाबालिग की लाश मिली थी। पहले दिन से आशंका जताई गई कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। इसके बाद उसकी हत्या कर किसी ने बॉडी को सड़क किनारे फेंक दी। हालांकि, पक्के सबूत नहीं होने की वजह से पुलिस रेप की बात से साफ इनकार कर रही, लेकिन लड़की के चेहरे और शरीर पर चोट-खरोंच के निशान हैं। जिस तरीके के मार्क्स नोचने खरोंचने जैसे मिले हैं, इससे आशंका जताई जा रही है कि लड़की के साथ रेप की कोशिश की गई है। हालांकि रेप की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस हर बिंदुओं पर जांच कर रही है। नाबालिग की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है। इसमें सेक्सुअल एसॉल्ट या रेप जैसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। कॉज ऑफ़ डेथ भी डॉक्टर ने रिजर्व रखा है। जिस स्कूटी से लाई गई बॉडी, उसे खोज रही पुलिस पुलिस सूत्रों की माने, तो घटनास्थल के पास एक स्कूटी देखी गई है। संदिग्ध स्कूटी की तलाश जारी है। पुलिस स्कूटी के नंबर के जरिए ट्रेस करके आरोपी तक पहुंचाने की कोशिश में है। बहुत हद तक पुलिस पता भी लगा चुकी है। युवती पटना जंक्शन से बेली रोड कैसे पहुंची, कौन उसे डंप करके भागा, वहां फेकने के पीछे के राज क्या हैं, इन सब चीजों के बारे में पता लगाया जा रहा है। देखें घटना वाले दिन की तस्वीरें… जब लाश मिली उस वक्त नाबालिग ने सलवार सूट पहना था। हाथों में मेहंदी और चूड़ी भी थी। घटना के करीब 7 दिन बाद लड़की की पहचान भी कर ली गई थी। परिवारवालों ने भी उसे सुपुर्दे खाक कर दिया था। ये पूरी वारदात मामला शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के ललित भवन के पीछे की थी। पुलिस लड़की के मूवमेंट को ट्रेस करने में जुटी लड़की के माता पिता ने अपना स्टेटमेंट पुलिस के सामने रिकॉर्ड कराया है। दोनों ने बताया कि 27 तारीख को आलमगंज मे रिश्तेदार के यहां शादी में गई थी। 28 को शादी में शिरकत की। 29 को बगल में रिश्तेदार के यहां ठहर गए। 30 तारीख तक सभी यहीं रुके। 1 मई को वापस घर फुलवारी शरीफ लौट रहे थे। इसी बीच पटना जंक्शन के पास बेटी उतर गई। मां से बोली कि तुमलोग जाओ, मैं बाद में आऊंगी। पहले भी वह घर से एक-एक महीने गायब रहती थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पटना जंक्शन के आसपास घूमती रहती थी और सुलेशन पीने की आदि बन चुकी थी। जंक्शन के पास का एक फुटेज भी मिला है, जिसमें वह एक्सीलेटर पर सुलेशन पीते नजर आ रही है। कॉज ऑफ डेथ रिजर्व एसीडीपीओ 2 साकेत कुमार ने बताया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेक्सुअल एसॉल्ट या रेप जैसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। कॉज ऑफ डेथ भी डॉक्टर ने रिजर्व रखा है। हर एंगल से छानबीन हो रही है। डायल 100 के जरिए फुटेज देखा जा रहा है। अब जानिए किसने सबसे पहले देखी थी लड़की की लाश दरअसल, 3 मई की सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों ने सड़क किनारे लड़की का शव देखा था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने बताया था, लड़की के चेहरे और गर्दन पर चोट के निशान थे। उन्होंने आशंका जताई थी कि हत्या के बाद शव को कहीं और से लाकर यहां फेंका गया है। उन्होंने कहा था- जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। जांच के दौरान डायल-100 की मदद से लिंक रोड और आसपास के मुख्य मार्गों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई है। कचरे के बीच पड़ी थी डेड बॉडी जहां लड़की की डेड बॉडी पड़ी थी, वहां कचरा पड़ा हुआ था। वहां पर बहुत सारे सूखे फूल पड़े थे और गिफ्ट के रैपर भी पड़े मिले थे। नाबालिग का आधा चेहरा फूलों के नीचे दबा था। कपड़े और बॉडी को देखकर आशंका जताई गई थी कि उसे घसीटकर यहां फेंका गया है। डॉग स्क्वायड ने 1 किमी तक सर्च किया था घटना वाले दिन 3 मई को जांच के लिए डॉग स्क्वायड की टीम भी पहुंची थी। टीम में लिली (खोजी कुत्ता) था। जिसने 1 किमी तक सर्च किया और फिर घटनास्थल पर वापस आ गया। शुरुआत में लिली मेन रोड के आसपास भटकता रहा। सड़क किनारे उसने सर्च किया। एक गली में भी गया। गली के दोनों ओर झाड़ियां थी। डॉग स्क्वायड की टीम को लगा कि इसी गली में कुछ न कुछ जरूर मिलेगा, पर कुत्ता जिस रास्ते से गली में गया था, उसी रास्ते से घटनास्थल के पास पहुंच गया। टीम ने दो बार सर्च किया, लेकिन कुछ खास नहीं मिला था। IGIMS में हुआ पोस्टमार्टम पुलिस ने उसी दिन लड़की के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए IGIMS भेज दिया था। रिपोर्ट को 8 मई को ही शास्त्री नगर थाना को सौंप दिया गया है। लड़की की पहचान होने के बाद उसके परिजन को बुलाकर शव सौंप दिया गया था। परिवार वालों का स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड कराया गया था। इसके बाद 8 मई को ही नाबालिग लड़की को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया था।



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CM बनते ही थलापति विजय का बड़ा एक्शन, नई सरकार ने बदल डाले कई विभागों के अफसर


चेन्नई: तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज होते ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी कार्यशैली के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं. रविवार को शपथ ग्रहण के बाद, मंगलवार को मुख्यमंत्री ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए. इसे विजय सरकार का ‘ब्यूरोक्रेटिक क्लीनअप’ माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य शासन में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाना है.

मुख्य सचिव एम. साई कुमार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह बदलाव वित्त, राजस्व प्रशासन, पर्यटन और तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभागों में किए गए हैं.

  1. राजस्व और आपदा प्रबंधन: छुट्टी से लौटे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एन. मुरुगानंदम को अतिरिक्त मुख्य सचिव और राजस्व प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन आयुक्त नियुक्त किया गया है. उन्होंने पी. अमुधा का स्थान लिया है. मुरुगानंदम की नियुक्ति को आपदा प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है.
  2. वित्त विभाग की कमान: चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एमए सिद्दीकी को अब वित्त विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया है. उन्होंने टी. उदयचंद्रन की जगह ली है. राज्य की वित्तीय स्थिति को सुधारना विजय सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है, और सिद्दीकी का अनुभव इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
  3. पर्यटन और संस्कृति: डॉ. एस. स्वर्णा को पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक बंदोबस्ती विभाग की प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है. इससे पहले वह राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान की कमान संभाल रही थीं.

शराब बिक्री नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई

राज्य के राजस्व का मुख्य स्रोत माने जाने वाले तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) में भी बड़ा बदलाव हुआ है. के. नंथकुमार को इस विभाग का नया प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है. वह टी. क्रिस्टुराज का स्थान लेंगे. विजय अपनी रैलियों में शराब नीति और भ्रष्टाचार पर कड़े रुख का संकेत दे चुके हैं, ऐसे में TASMAC के प्रमुख का बदला जाना काफी अहम है.

विजय का विजन: ‘एक्शन ही पहचान’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तबादलों के जरिए थलापति विजय ने यह संदेश दिया है कि उनकी सरकार में केवल परिणाम देने वाले अधिकारियों को ही महत्वपूर्ण पद दिए जाएंगे. रविवार को सत्ता संभालने के बाद से ही विजय ने फाइलों पर काम शुरू कर दिया था और महज दो दिनों के भीतर इन नियुक्तियों ने विपक्ष और नौकरशाही दोनों को चौंका दिया है. अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां और शर्तें पुराने सरकारी नियमों (1994 के आदेश संख्या 167) के तहत की गई हैं, लेकिन इसके पीछे की मंशा पूरी तरह ‘नई’ है.

मुख्यमंत्री विजय ने कार्यभार संभालते ही पहला बड़ा कदम क्या उठाया है?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शपथ लेने के 48 घंटों के भीतर तमिलनाडु में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों का एक व्यापक तबादला और प्रशासनिक फेरबदल किया है, जिसमें वित्त और राजस्व जैसे प्रमुख विभाग शामिल हैं.

राजस्व प्रशासन और आपदा प्रबंधन का नया आयुक्त किसे नियुक्त किया गया है?
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एन. मुरुगानंदम को अतिरिक्त मुख्य सचिव और राजस्व प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन आयुक्त नियुक्त किया गया है.

वित्त विभाग में हुए बदलाव के तहत टी. उदयचंद्रन की जगह किसे नियुक्त किया गया है?
वित्त विभाग की जिम्मेदारी अब एमए सिद्दीकी को सौंपी गई है, जो पहले चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे.

तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) का नया प्रबंध निदेशक कौन बना है?
सहकारी समितियों के पूर्व रजिस्ट्रार के. नंथकुमार को TASMAC का नया प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, जहां वे टी. क्रिस्टुराज की जगह लेंगे.

क्या यह तबादले किसी खास नीति के तहत किए गए हैं?
हां, ये आदेश मुख्य सचिव एम. साई कुमार द्वारा राज्यपाल के नाम पर जारी किए गए हैं और इन्हें टीवीके (TVK) सरकार की नई प्रशासनिक नीति और कार्यकुशलता बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

(IANS इनपुट्स)



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जज के खिलाफ अवमानना की अर्जी खारिज: हाईकोर्ट ने कहा-अदालत और वकील में तीखी बहस आपराधिक अवमानना नहीं – Prayagraj (Allahabad) News




​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता द्वारा एक न्यायाधीश के विरुद्ध दाखिल आपराधिक अवमानना की अर्जी को पोषणीय न मानते हुए खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय एवं न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत और वकील के बीच होने वाली तीखी बहस आपराधिक अवमानना की श्रेणी में नहीं आती। केस को किसी और पीठ में ट्रांसफर किया अधिवक्ता अरुण मिश्रा ने अर्जी में आरोप लगाया था कि 26 नवंबर 2025 को एक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने संबंधित न्यायाधीश से केस को किसी अन्य कोर्ट में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था क्योंकि उन्हें उस पीठ पर विश्वास नहीं था। अरुण मिश्र के अनुसार इस पर न्यायाधीश ने उन्हें अपमानित किया, याचिका खारिज कर दी और बार कौंसिल को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर दी। तीखी बहस का रिकॉड नहीं दिया ​हाईकोर्ट ने पाया कि याची ने अपने हलफनामे में उन विशिष्ट शब्दों या बयानों का उल्लेख नहीं किया है जो न्यायाधीश द्वारा कथित तौर पर उपयोग किए गए थे। कोर्ट ने कहा कि यदि न्यायाधीश और वकील के बीच कोई तीखी बहस हुई भी है, तो वह अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(सी) के तहत आपराधिक अवमानना नहीं मानी जा सकती।
ऐसी बहस न तो न्यायालय की गरिमा को कम करती है और न ही न्याय प्रशासन में बाधा डालती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश के गलत आदेश को अवमानना की कार्यवाही का आधार नहीं बनाया जा सकता। ऐसे आदेशों को सक्षम उच्च या उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जानी चाहिए। अरुण मिश्र ने संविधान के अनुच्छेद 134(ए) के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए प्रमाण पत्र मांगा तो कोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस मामले में कानून का कोई ऐसा महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल नहीं है जिसे उच्चतम न्यायालय द्वारा तय किया जाना आवश्यक हो।



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3.21 मिनट का हिट गाना, सनी लियोनी को रातोंरात बना दिया था सेंसेशन, लटके-झटके देख लोगों का खुला रह गया था मुंह


 

3 मिनट 21 सेकेंड का एक ऐसा गाना, जिसने रिलीज होते ही सोशल मीडिया से लेकर पार्टीज़ और क्लब्स तक हर जगह तहलका मचा दिया था. इसके कैची म्यूजिक, बोल और सनी लियोनी के ग्लैमरस डांस मूव्स ने लोगों की धड़कनें बढ़ा दी थीं और हर कोई बस इसी गाने की बात कर रहा था. हम किसी और नहीं, बल्कि सनी लियोनी के सुपरहिट गाने ‘बेबी डॉल’ की बात कर रहे हैं, जिसने उन्हें रातोंरात जबरदस्त पहचान दिला दी थी. इस गाने ने ना सिर्फ पार्टी सॉन्ग्स का ट्रेंड बदल दिया, बल्कि सनी लियोनी को बॉलीवुड की सबसे चर्चित स्टार्स में भी शामिल कर दिया. आज भी लोग उन्हें सबसे ज्यादा ‘बेबी डॉल’ गाने से ही याद करते हैं.

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जयपुर में 55 लाख की कोकीन और मेथामफेटामाइन बरामद: नाइजीरियन नागरिक गिरफ्तार; यहां पढ़े जयपुर क्राइम की खबरें – Jaipur News




जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की सी.एस.टी. टीम ने ऑपरेशन “क्लीन स्वीप” के तहत वाणिज्यिक मात्रा में अवैध मादक पदार्थ बरामद कर एक नाइजीरियन नागरिक को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को ये कार्रवाई पुलिस थाना शिप्रापथ क्षेत्र में की गई। पुलिस के अनुसार सी.एस.टी. और शिप्रापथ थाना पुलिस की संयुक्त टीम को सूचना मिली थी कि होटल गंगा श्रेय इन, एस.एफ.एस. मानसरोवर के बाहर एक संदिग्ध नाइजीरियन व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ के साथ मौजूद है। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी TOCHUKWU DAVID (44) निवासी अनाम्ब्रा स्टेट, नाइजीरिया को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 102 ग्राम कोकीन और 17 ग्राम मेथामफेटामाइन (एमडी) बरामद की गई। बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी जयपुर में किस नेटवर्क के माध्यम से मादक पदार्थों की सप्लाई कर रहा था तथा इसके पीछे और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।



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घर से निकलने से पहले पी लें ये देसी ड्रिंक, दिनभर रहेंगे कूल और एनर्जी से भरपूर


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Sattu Sharbat: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी, कमजोरी, चक्कर आना और पेट से जुड़ी परेशानियां आम हो जाती हैं. ऐसे में अगर आप घर से निकलने से पहले एक खास देसी ड्रिंक पी लें, तो इन सभी दिक्कतों से काफी हद तक बच सकते हैं. (रिपोर्ट: सावन पाटिल/खंडवा)

गर्मी में सबसे फायदेमंद माना जाता है सत्तू का शरबत, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ भरपूर ऊर्जा भी देता है. यही कारण है कि निमाड़ सहित कई इलाकों में इसे गर्मी का ‘देसी टॉनिक’ कहा जाता है. इसमें ढेरों पोषक तत्व होते हैं. इसे गरीबों का प्रोटीन भी कहा जाता है. साथ ही ये फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन से भरपूर होता है जो गर्मी में पाचन को फिट रखने के लिए बेस्ट चीज है.

sattu (AI image)

Local 18 से बातचीत में डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि सत्तू एक ऐसा पारंपरिक पेय है, जो न सिर्फ शरीर को अंदर से ठंडा रखता है, बल्कि लू से बचाव में भी बेहद कारगर साबित होता है. सत्तू भुने हुए चने, जौ या मक्का को पीसकर बनाया जाता है. इसे पानी में घोलकर शरबत के रूप में पिया जाता है, जो गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देता है.

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अगर बात करें इसे पीने के तरीके की, तो सत्तू को नमकीन और मीठे दोनों रूप में लिया जा सकता है. नमकीन शरबत बनाने के लिए सत्तू में ठंडा पानी, काला नमक, भुना जीरा और नींबू मिलाया जाता है. वहीं मीठा सत्तू बनाने के लिए इसमें गुड़ या शहद मिलाकर पिया जाता है. एक्सपर्ट के अनुसार सुबह घर से निकलने से पहले सत्तू पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है.

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एक गिलास सत्तू का मीठा या नमकीन शरबत पी लेते हैं तो आपकी भूख मिट जाती है. आधा कप सत्तू लें. इसे एक बाउल या जग में डाल दें. इसमें एक गिलास पानी डालें. इसे आप अच्छी तरह से मिक्स कर लें ताकि गांठ न बन जाए. अब आप और आधा कप पानी डाल दें. आप गाढ़ा या पतला बनाकर पी सकते हैं.

इसमें एक चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर डालेंगे. जीरा आप तवे पर रखकर भूनें और उसे पीस लें. इसमें आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर, एक चौथाई चम्मच काला नमक, स्वादानुसार सादा नमक, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, बारीक कटा प्याज, हरा धनिया और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिक्स करें. इसे गिलास में डालकर सर्व करें. आप चाहें तो इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं.

डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, सत्तू के सेवन से कई फायदे मिलते हैं. यह शरीर को ठंडा रखता है और लू से बचाता है. इसमें मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट तुरंत ऊर्जा देते हैं, जिससे थकान दूर होती है. सत्तू में भरपूर फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है.

इसके अलावा कब्ज, गैस जैसी समस्याओं से राहत देता है. यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है, जिससे वजन नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है. सत्तू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. गर्मी में यह शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है, जिससे डिहाइड्रेशन से बचाव होता है.

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इसके अलावा दोपहर में या ज्यादा मेहनत करने के बाद इसे पीने से शरीर को तुरंत राहत और ऊर्जा मिलती है. सत्तू एक सस्ता, आसान और बेहद असरदार देसी सुपरफूड है, जो गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. अगर आप भी इस गर्मी में खुद को फिट और सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो सत्तू को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें.

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अब फौलादी होगा शरीर, ‘सुपर पावर’ बनेगा जवानों का दिमाग! CISF ने की बड़ी डील


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अब फौलादी होगा शरीर, ‘सुपर पावर’ बनेगा जवानों का दिमाग! CISF ने की बड़ी डील

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देश की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों को अब मानसिक रूप से और मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. सीआईएसएफ ने हार्टफुलनेस संस्थान के साथ पांच साल का समझौता किया है, जिसके तहत जवानों को मेडिटेशन, तनाव प्रबंधन और मानसिक संतुलन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी.

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जवानों के दिगाम को मजबूत बनाने के लिए सीआईएसएफ ने बड़ी डील की है.

CISF News: एयरपोर्ट सहित देश की तमाम संवेदनशील यूनिट्स की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवान अब सिर्फ बंदूक और बुलेटप्रूफ जैकेट के भरोसे नहीं रहेंगे. अब उनके दिमाग को भी ‘सुपर पावर’ बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. तनाव, डर, थकान और मानसिक दबाव से लड़ने के लिए सीआईएसएफ ने ऐसा कदम उठाया है, जो जवानों को अंदर से भी फौलादी बना देगा.

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक संस्था ‘हार्टफुलनेस संस्थान’ के साथ पांच साल की बड़ी डील की है. इस समझौते का मकसद जवानों की मानसिक ताकत बढ़ाना, तनाव को कंट्रोल करना और उन्हें भावनात्मक रूप से इतना मजबूत बनाना है कि मुश्किल हालात भी उनका आत्मविश्वास न तोड़ सकें.

कमांडो की तरह तैयार होगा दिमाग
सीआईएसएफ की वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अब जवानों की ट्रेनिंग में सिर्फ हथियार चलाने, सुरक्षा रणनीति और फिजिकल फिटनेस पर ही फोकस नहीं होगा. पहली बार मेडिटेशन, माइंड कंट्रोल, इमोशनल बैलेंस और मानसिक मजबूती को भी ट्रेनिंग का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है. ट्रेनिंग के दौरान जवानों का शरीर ही नहीं, उनका दिमाग भी कमांडो की तरह तैयार किया जाएगा.

दरअसल, अर्धसैनिक बलों की जिंदगी बेहद कठिन होती है. महीनों तक घर से दूर रहना, हर वक्त अलर्ट मोड में ड्यूटी करना और लगातार खतरे के बीच काम करना जवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है. कई बार यही दबाव तनाव और भावनात्मक थकान की वजह बन जाता है. इस समझौते के तहत देशभर में मेडिटेशन वर्कशॉप, मानसिक मजबूती के ट्रेनिंग कैंप और एक्टिव सेशन आयोजित किए जाएंगे.

जवानों के सिखाई जाएंगी नई तकनीकें
जवानों को ऐसी तकनीकें सिखाई जाएंगी, जिनसे वे तनाव को कंट्रोल कर सकें, फोकस बढ़ा सकें और मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत दिमाग से फैसले ले सकें. इस पूरी योजना की सबसे खास बात यह है कि सिर्फ जवान ही नहीं, उनके परिवार भी इसका हिस्सा होंगे. जवानों के बच्चों के लिए ‘ब्राइटर माइंड्स’ जैसे विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि उनका बौद्धिक विकास बेहतर हो सके.

वहीं ‘वॉयस दैट केयर्स’ हेल्पलाइन के जरिए छह भारतीय भाषाओं में मुफ्त और गोपनीय मानसिक परामर्श भी मिलेगा. वरिष्ठ अधिकारियों के लिए ‘कान्हा शांति वनम’ में खास वेलनेस और लीडरशिप रिट्रीट आयोजित किए जाएंगे. यहां अधिकारियों को मानसिक संतुलन, तनाव प्रबंधन और बेहतर नेतृत्व की ट्रेनिंग दी जाएगी.

ध्यान और मेडिटेशन की सरल तकनीकें दिल और दिमाग के बीच बेहतर तालमेल बनाती हैं. इससे तनाव कम होता है और व्यक्ति मानसिक रूप से रिचार्ज महसूस करता है. यह पहल जवानों को मानसिक तौर पर भी काफी मजबूत बनाएंगी. – प्रवीर रंजन, महानिदेशक, सीआईएसएफ

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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इंदौर के संकटमोचन हनुमान मंदिर में चोरी: दानपेटी का ढक्कन खोलकर कैश ले गया चोर; CCTV खंगाल रही पुलिस – Indore News




इंदौर के तिलक नगर थाना क्षेत्र स्थित एक मंदिर में चोरी की वारदात सामने आई है। बदमाश मंदिर की दानपेटी का ढक्कन खोलकर उसमें रखी नकदी लेकर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मंदिर के पुजारी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। तिलक नगर पुलिस ने विजय त्रिवेदी निवासी पवनपुरी कॉलोनी की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। विजय ने पुलिस को बताया कि वह बृजेश्वरी मेन स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में पुजारी हैं। सोमवार रात वह रोज की तरह मंदिर में ताला लगाकर घर चले गए थे। मंगलवार सुबह उन्हें सुनील मालवीय का फोन आया, जिसमें बताया गया कि किसी अज्ञात बदमाश ने मंदिर की दानपेटी का ढक्कन उठाकर उसमें रखे रुपए निकाल लिए हैं। घटना के बाद मंदिर से जुड़े लोगों में नाराजगी है। पुजारी के अनुसार, दानपेटी पिछले तीन महीने से नहीं खोली गई थी और उसमें करीब 50 हजार रुपए होने का अनुमान है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।



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रूस से भारत का कच्चा तेल आयात घटा, रिफाइनरी बंद होने से कम हुई खरीदारी


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रूस से कच्चे तेल की खरीद में आई गिरावट ने भारत के ऊर्जा बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है. अप्रैल 2026 में भारत का रूसी तेल आयात 15 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 4.5 अरब यूरो पर पहुंच गया. विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह गुजरात की एक प्रमुख रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना रही. हालांकि गिरावट के बावजूद भारत अब भी रूस से सबसे ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों में शामिल बना हुआ है.

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अप्रैल में रूस से तेल खरीद 15% घटी. (Representative Image:AI)

नई दिल्ली. भारत ने अप्रैल 2026 में रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कमी दर्ज की है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से आयात 15 प्रतिशत से ज्यादा घटकर 4.5 अरब यूरो रह गया. इसकी सबसे बड़ी वजह एक प्रमुख रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना बताया जा रहा है. हालांकि गिरावट के बावजूद भारत रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल बना हुआ है.

रूस से तेल आयात में आई बड़ी गिरावट
यूरोपीय शोध संस्था Centre for Research on Energy and Clean Air यानी CREA की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत ने रूस से 5.3 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन अप्रैल में यह घटकर 4.5 अरब यूरो रह गया. यानी एक महीने में ही आयात में 15 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई. रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी 3.7 प्रतिशत की कमी आई. इसमें सबसे बड़ा असर रूस से आने वाले तेल पर पड़ा, जहां मासिक आधार पर करीब 19.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. इसके बावजूद भारत अप्रैल में रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बना रहा.

रिफाइनरी बंद होने से प्रभावित हुई खरीद
विशेषज्ञों के मुताबिक इस गिरावट की मुख्य वजह गुजरात स्थित वाडिनार रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना रही. Nayara Energy की यह रिफाइनरी काफी हद तक रूसी कच्चे तेल पर निर्भर मानी जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आवक करीब 92 प्रतिशत तक गिर गई. वहीं जामनगर रिफाइनरी में भी 38 प्रतिशत की कमी देखी गई. हालांकि दूसरी तरफ इंडियन ऑयल की रिफाइनरी में रूसी तेल आयात 87 प्रतिशत बढ़ गया, जिससे कुछ हद तक संतुलन बना रहा.

कुछ रिफाइनरियों ने फिर शुरू की खरीद
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नया मंगलूर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के बाद रूसी तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया था. लेकिन मार्च 2026 से इन रिफाइनरियों ने दोबारा रूस से तेल खरीद शुरू कर दी. विशाखापत्तनम रिफाइनरी में अप्रैल के दौरान रूसी तेल का आयात 149 प्रतिशत तक बढ़ गया. इससे संकेत मिलता है कि भारत अभी भी सस्ते और वैकल्पिक तेल स्रोतों की तलाश में सक्रिय है. जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियों और कीमतों के आधार पर भारत लगातार अपनी रणनीति बदल रहा है.

अमेरिकी छूट और बढ़ती कीमतों का असर
CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली कुछ छूटों के कारण रूसी तेल की सप्लाई फिर बढ़ी है. यही वजह है कि कई भारतीय कंपनियों ने दोबारा खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई. हालांकि इसी दौरान रूस के यूराल कच्चे तेल की कीमत में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. अप्रैल में इसकी औसत कीमत बढ़कर 112.3 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा तय सीमा से काफी ज्यादा है. बढ़ती कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए नई चिंता पैदा कर सकती हैं.

भारत के लिए क्यों अहम है रूसी तेल?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था. इससे भारत को ऊर्जा जरूरतें पूरी करने और आयात लागत कम रखने में मदद मिली. कुछ ही वर्षों में रूस भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीद की रणनीति अपनाता है. ऐसे में किसी एक रिफाइनरी के बंद होने या वैश्विक कीमतों में बदलाव का सीधा असर आयात आंकड़ों पर दिखाई देता है. आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी प्रतिबंध और वैश्विक तेल कीमतें भारत की आयात नीति को प्रभावित कर सकती हैं.

ऊर्जा सुरक्षा पर बना रहेगा फोकस
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और उसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक ऊर्जा आयात पर निर्भर करती है. इसलिए सरकार और तेल कंपनियां लगातार ऐसे विकल्प तलाशती रहती हैं, जिनसे लागत कम हो और सप्लाई स्थिर बनी रहे. रूस से आयात में आई यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है, लेकिन इससे यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में छोटे बदलाव भी भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों पर बड़ा असर डाल सकते हैं. आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए संतुलित और लचीली रणनीति पर जोर देता रहेगा.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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