राजस्थान में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) को लेकर जारी विवाद के बीच परिवहन विभाग ने ट्रांसपोर्टर्स को अंतरिम राहत देते हुए SOP लागू होने तक अस्थायी परमिट (TP) जारी रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और परिवहन आयुक्त स्तर पर हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि यह राहत नहीं, बल्कि नई परेशानी है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को प्रदेशभर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना देंगे। उनका कहना है कि जब तक VLTD की व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं होती और सभी वाहन मालिकों को आसानी से डिवाइस उपलब्ध नहीं होती, तब तक अस्थायी परमिट का विकल्प व्यावहारिक नहीं है। SOP बनने तक अस्थायी परमिट की व्यवस्था जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने बताया कि परिवहन विभाग ने SOP को मंजूरी मिलने तक अस्थायी परमिट जारी रखने का निर्णय लिया है। SOP का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है, जहां से अगले 5 से 6 दिन में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। परिवहन विभाग ने जयपुर में अस्थायी परमिट जारी करने के लिए डीटीओ आदर्श सिंह राघव, अतुल शर्मा और संदीप शर्मा को अधिकृत किया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम व्यवस्था के दौरान TP से जुड़े चालान निरस्त किए जाएंगे। ट्रांसपोर्टर्स बोले- इससे खर्च कई गुना बढ़ जाएगा ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि अस्थायी परमिट का विकल्प लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रकों के लिए व्यवहारिक नहीं है। उनका कहना है कि यदि कोई ट्रक राजस्थान से केरल, चेन्नई, गुवाहाटी या दूसरे राज्यों में जाता है तो उसे हर राज्य का अलग-अलग टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में कई बार टैक्स और परमिट का खर्च ही ट्रक के पूरे भाड़े के बराबर पहुंच जाता है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इसके अलावा ऑनलाइन टोल और ई-चालान का जोखिम भी बना रहेगा। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम ट्रक मालिकों के लिए इतना अतिरिक्त खर्च उठाना संभव नहीं है। ‘TP नई व्यवस्था नहीं, पहले से मौजूद है’ ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि अस्थायी परमिट कोई नई व्यवस्था नहीं है। इसका उपयोग पहले भी ऐसे मामलों में होता रहा है, जब किसी वाहन को एक बार या सीमित समय के लिए दूसरे राज्य भेजना होता है। उनका कहना है कि रोजाना माल ढुलाई करने वाले नेशनल परमिट वाले ट्रकों के लिए यह व्यवस्था उपयुक्त नहीं है। आज शहीद स्मारक पर जुटेंगे ट्रांसपोर्टर विश्वकर्मा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन समेत विभिन्न ट्रांसपोर्ट संगठनों के आह्वान पर बुधवार को प्रदेशभर से ट्रांसपोर्ट कारोबारी जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना देंगे। संगठनों का कहना है कि हमारी मांग VLTD का विरोध करना नहीं, बल्कि इसकी आसान और पारदर्शी व्यवस्था लागू करना है। यदि सरकार ने जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और तेज किया जाएगा।
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सरकार ने राहत दी, फिर भी ट्रांसपोर्टर्स नाराज: आज जयपुर में करेंगे प्रदर्शन, बोले- अस्थायी परमिट से बढ़ेगा टैक्स और खर्च – Jaipur News
फर्रुखाबाद में मंगलवार रात झमाझम बारिश: आसमान में बादल और ठंडी हवाओं से लुढ़का पारा, भीषण गर्मी से राहत – Farrukhabad News
फर्रुखाबाद में मंगलवार रात झमाझम बारिश हुई। कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बारिश का सिलसिला रात 9 बजे से शुरू होकर देर रात 1 बजे तक रुक-रुक कर जारी रहा। बीते कई दिनों से फर्रुखाबाद में भीषण गर्मी का प्रकोप था। दिन और रात दोनों समय तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ था, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मंगलवार को सुबह से ही मौसम में बदलाव देखा गया। आसमान में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलीं। दोपहर में हल्की बूंदाबांदी भी हुई, लेकिन शाम तक बादल छाए रहे। रात करीब 9 बजे शहर और देहात क्षेत्रों में तेज बारिश शुरू हुई, जो लगभग 30 मिनट तक चली। इसके बाद रात 10 बजे फिर करीब 20 मिनट तक बारिश हुई। रात 11:30 बजे से दोबारा शुरू हुई बारिश देर रात 1 बजे तक रुक-रुक कर होती रही। बारिश के कारण मौसम सुहावना हो गया और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई। मंगलवार रात अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार सुबह भी अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा। शहर के अलावा कायमगंज, अमृतपुर, कम्पिल, नवाबगंज आदि स्थान पर भी बारिश हुई।
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मोदी आज इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे: यह एक हजार साल पुराना; शाम को 3 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रवाना होंगे पीएम
जकार्ता2 मिनट पहले
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पीएम ने मंगलवार को इंडोनेशिया के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र अंगक्लुंग बजाने की कोशिश की। राष्ट्रपति सुबियांतो ताली बजाते दिखे।
पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे का आज तीसरा और आखिरी दिन है। पीएम आज इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। यह मंदिर एक हजार साल पुराना है। इंडोनेशिया से पीएम आज शाम ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न रवाना होंगे। उनका ऑस्ट्रेलिया दौरा 8 से 10 जुलाई तक है।
पीएम ने मंगलवार को इंडोनेशिया यात्रा के दौरान डिफेंस डील का ऐलान किया था। दोनों देशों के बीच पहली बार लगभग साढ़े पांच हजार करोड़ रुपए का अहम रक्षा करार हुआ है। इंडोनेशिया भारत से ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदेगा। भारत मलक्का की खाड़ी में अहम साबांग पोर्ट को डेवलप करेगा।

पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान
पीएम मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान बिन्तांग आदिपूर्णा से नवाजा गया है। पीएम मोदी को यह 35वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुबियांतो ने कहा कि पीएम मोदी ने संबंधों में मजबूती लाने के लिए अहम योगदान दिया है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया।
ऑस्ट्रेलिया में सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे पीएम
पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात करेंगे। दोनों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। मोदी की यह यात्रा पीएम अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। उनका यह तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा है।
पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख कारोबारियों को संबोधित करेंगे। साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
PM के इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अपडेट्स
5 मिनट पहले
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पीएम मोदी बोले- भारत-इंडोनेशिया में कुछ-कुछ होता है
पीएम मोदी ने मंगलवार शाम इंडोनेशिया के जकार्ता में भारतीय लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा- यहां भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ बहुत लोकप्रिय है। जब भारत-इंडोनेशिया साथ मिलकर चलते हैं तो कुछ-कुछ से भी आगे बढ़कर बहुत कुछ होता है।
पीएम बोले- राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा था कि उनके अंदर भारत का DNA है। उनकी इस बात ने भारतीयों के दिलों को छू लिया था। भारत-इंडोनेशिया का DNA म्युचअल ट्रस्ट से बना है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा- मैं पीएम मोदी का फैन हूं। मोदी सरकार की कई योजनाएं सफल रही हैं। मैं उन्हें कॉपी करने की कोशिश करता हूं। अच्छा हुआ इन योजनाओं पर ‘कॉपीराइट’ नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
29 मिनट पहले
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इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर के अंदर कुल 240 मंदिर, शिव मंदिर सबसे ऊंचा

45 मिनट पहले
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मोदी की इंडोनेशिया दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें…

प्रबोवो सुबियांतो ने मंगलवार सुबह जकार्ता में राष्ट्रपति भवन में पीएम का स्वागत किया। उन्हें गले लगाया।

जकार्ता के राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

गार्ड ऑफ सेरेमनी के दौरान मोदी ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के बच्चों से मुलाकात की।

पीएम मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। इंडोनेशिया के एयरस्पेस में एंट्री करते ही वहां की एयरफोर्स ने उसे एस्कॉर्ट किया था।
48 मिनट पहले
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25% ग्लोबल ट्रेड साबांग पोर्ट होकर, यहां भारत की मौजूदगी
25% वर्ल्ड ट्रेड मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। मलक्का के मुहाने पर स्थित साबांग पोर्ट को अब भारत डेवलप करेगा। यहां भारत की मौजूदगी होगी। साबांग पोर्ट भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप से करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर है।
यानी अब भारत बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में अपने ट्रेड और डिफेंस हितों को और ज्यादा सुरक्षित रख सकेगा। बता दें कि चीन पिछले कुछ सालों से अपनी सैन्य और समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। अब भारत साबांग पोर्ट के जरिए बेहतर जियो स्ट्रैटेजिक लोकेशन में होगा। प्रशांत महासागर में भी भारत दबदबा बढ़ा सकेगा।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को लेकर चिंता क्यों है?
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक) में चीन पिछले कुछ सालों से अपनी सैन्य और समुद्री मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। इसी वजह से भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फिलीपींस, वियतनाम और कई अन्य देशों की चिंता बढ़ी है।
चीन लगभग 90% दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। चीन ने समुद्र में कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां हवाई पट्टियां, रडार और मिसाइल सिस्टम तैनात किए हैं। फिलीपींस और वियतनाम के जहाजों के साथ चीनी कोस्ट गार्ड की कई बार झड़प हो चुकी है।

50 मिनट पहले
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भास्कर नॉलेज: इंडोनेशिया 2000 साल से भारतीय संस्कृति से जुड़ा
भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की बात करें, तो ये करीब 2,000 साल पुराने माने जाते हैं। प्राचीन काल से भारतीय व्यापारियों, हिंदू और बौद्ध संस्कृति का इंडोनेशिया पर गहरा प्रभाव रहा है।
आज भी इंडोनेशिया के बाली और जावा में रामायण और महाभारत पर आधारित नृत्य-नाटक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रचलित हैं। वहां 85% मुस्लिम आबादी होने के बाद भी 20 हजार रुपिया के नोट पर भगवान गणेश की फोटो छपी थी। इसके अलावा भी कई ऐसे प्रतीक है, जिसमें भारतीय संस्कृति की छाप मिलती है।

50 मिनट पहले
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भारत का इंडोनेशिया पर कभी शासन नहीं रहा, फिर भी पहुंची संस्कृति

51 मिनट पहले
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PM मोदी का 102वां विदेश दौरा, तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे
पीएम मोदी का यह 102वां विदेश दौरा है। वहीं वह तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे हैं। उनका पहला दौरा मई 2018 में हुआ था। इसके बाद मोदी सितंबर 2023 में जकार्ता में आयोजित 20वीं आसियान (ASEAN)-भारत और 18वीं ईस्ट एशिया समिट में शामिल होने इंडोनेशिया पहुंचे थे।

आम-नींबू नहीं, अब घर पर बनाएं स्वादिष्ट मशरूम का अचार, जानें आसान रेसिपी
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Mushroom Achar Recipe: जहानाबाद में डॉली कुमारी मशरूम का अचार बनाती हैं. वह बटन मशरूम से 2 दिन में तैयार होने वाला यह अचार स्वादिष्ट तैयार कर देती हैं. इसके साथ ही पैकिंग कर दूसरे शहरों में भेजती हैं. आइये जानते हैं उनके अचार की असान रेसिपी.
जहानाबाद: भारतीय किचन में अचार, खान पान का अहम हिस्सा है. देश के अलग -अलग इलाकों में अलग -अलग प्रकार का अचार खाने को मिल सकता है. बिहार की बात करें तो यहां हर प्रकार के अचार आपको खाने को मिल जाते हैं, जिसमें आम का अचार, नींबू का अचार, मिर्च का अचार के साथ अन्य कई तरह के अचार शामिल हैं. हालांकि, मशरूम का अचार का स्वाद आपके चखा है? अगर स्वाद लिया है तो कैसा लगता है? अगर नहीं तो चलिए फिर जानते हैं, मशरूम अचार बनाने की सही और आसान रेसिपी.
जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड स्थित सर्वसिद्धांता FPO में कई महिलाएं अलग -अलग उत्पाद बनाती हैं. वहां कुछ महिलाएं मशरूम का अचार बनाने का कार्य करती हैं. मशरूम का अचार कैसे तैयार होता है, वहां कार्य कर रहीं डॉली से लोकल 18 की टीम ने खास बातचीत की. आइये डॉली से जानते हैं मशरूम के अचार की रेसिपी.
जानें कैसे बनता है मशरूम का अचार
डॉली का कहना है कि सबसे पहले तो मशरूम का चयन जरूरी है. बाजार में कई तरह के मशरूम मिलते हैं, लेकिन बटन मशरूम का अचार सबसे अच्छा लगता है. बटन मशरूम घर ले आएं, उसे फिर किसी बर्तन में पानी डालकर उबाल लेंगे. उसके बाद मशरूम को छोटे -छोटे टुकड़ों में कट करना है. ऐसा करने के बाद थोड़ी देर तक पंखे की हवा में ठंडा होने के लिए छोड़ देना है. करीब 30 मिनट बाद एक गड्ढानुमा बर्तन में रखकर मशरूम अचार को कुछ मसालों के साथ मिक्स करेंगे. हल्दी और नमक डालकर एक दिन धूप में छोड़ना होता है. जब कड़ी धूप लगती है तो फिर अब मशरूम में मसाला मिलाएंगे.
2 दिन में तैयार होगा अचार
डॉली आगे बताती हैं कि इस प्रकार से मशरूम का अचार 2 दिन में तैयार हो जाता है. हम यही सलाह देंगे कि बटन मशरूम का अचार सबसे अच्छा होता है. वैसे डॉली कुमारी, कई सालों से मशरूम का अचार बनाने का कार्य कर रही हैं. वह अलग -अलग प्रकार के अचार तैयार करती हैं. अब मशरूम का अचार भी बना रही हैं और बाजार तक अचार तैयार कर पहुंचा रही हैं. मशरूम का अचार अन्य अचार से काफी स्वादिष्ट होता है. अलग- अलग डिब्बे में पैक कर बाजार में सप्लाई कर कमाई भी कर रही हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
कॉमेडी का जादूगर, गरीबी मिटाने के लिए 3 रुपये में किया था काम
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हिंदी सिनेमा के सबसे चहेते और यादगार कॉमेडियंस में शुमार वो कलाकार जो आज भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं है, लेकिन उनके किरदार आज भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं. दिवंगत एक्टर जगदीप की आज पुण्यतिथि है. उनका नाम लेते ही सबसे पहले जहन में ‘सूरमा भोपाली’ का किरदार आता है. ‘सूरमा भोपाली’ अपने छोटे से रोल से हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए.
जगदीप की आज पुण्यतिथि है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड का वो कलाकार जिसने चंद मिनटों के किरदार से दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई. उनका हर रोल सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास के पन्नों में दर्ज है. ये एक्टर जगदीप हैं जिन्हें ज्यादातर लोग ‘सूरमा भोपाली’ के नाम से जानते हैं. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन स्टारर ‘शोले’ में ‘सूरमा भोपाली’ एक आइकॉनिक रोल है जिसने कुछ ही मिनट में एक्टर जगदीप को अमर बना दिया. फिल्मी दुनिया का रुख करने से पहले एक्टर ने अपना नाम बदल लिया था. वो इश्तियाक अहमद जाफरी से जगदीप बन गए थे.आज 8 जुलाई को ‘सूरमा भोपाली’ के नाम से मशहूर एक्टर जगदीप की पुण्यतिथि है.
‘हमारा नाम सूरमा भोपाली ऐसे ही नहीं है!’… साल 1975 की ऐतिहासिक फिल्म ‘शोले’ का यह डायलॉग सुनते ही आंखों के सामने बड़ी-बड़ी मूंछों, सिर पर टोपी और पान चबाते हुए अनोखे लहजे में बात करने वाले एक ऐसे शख्स की तस्वीर उभर आती है, जिसने अपनी जादुई कॉमिक टाइमिंग से पूरी दुनिया को हंसाया. पर्दे पर लोगों को हंसा-हंसाकर बेहाल करने वाले जगदीप की जिंदगी काफी दुख और दर्द से भरी थी.
बचपन में सिर से उठा पिता का साया
29 मार्च 1939 को जन्मे जगदीप का असली नाम इश्तियाक अहमद जाफरी था. बचपन में ही पिता का असमय साया सिर से उठ गया और कसर 1947 के भारत-विभाजन की उथल-पुथल ने पूरी कर दी. इस ऐतिहासिक ट्रेजेडी ने उनके हंसते-खेलते परिवार की आर्थिक हालत पूरी तरह खराब हो गई थी. हालात इतने बदतर थे कि पेट पालने के लिए उन्हें सड़कों पर काम ढूंढना पड़ता था.
बीआर चोपड़ा ने चमकाई किस्मत
किस्मत का पहिया साल 1951 में घूमा, जब महान निर्देशक बी.आर. चोपड़ा अपनी पहली फिल्म ‘अफसाना’ के लिए कुछ बाल कलाकारों की तलाश कर रहे थे. सड़कों पर काम तलाशते हुए इश्तियाक को एक एजेंट मिला. उसने फिल्म के एक नाटक वाले सीन में सिर्फ ताली बजाने के बदले जगदीप को 3 रुपये की दिहाड़ी की पेशकश की. एक्टर मान गए, लेकिन सेट पर कुछ ऐसा हुआ जिसने इतिहास बदल दिया.
एक्टिंग देख मेकर्स ने दोगुनी की फीस
मुख्य बाल कलाकार कठिन उर्दू डायलॉग्स बोलने में नाकाम हो रहा था. उर्दू जुबान पर अच्छी पकड़ रखने वाले जगदीप ने तुरंत अपनी नकली मूंछ-दाढ़ी लगाई और पूरे आत्मविश्वास के साथ वो डायलॉग्स बोल दिए. बी.आर. चोपड़ा इस बच्चे के हौसले से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनकी फीस दोगुनी यानी 6 रुपये कर दी. यहीं से सिनेमा के एक नायाब हीरे का उदय हुआ.
जब दिलीप कुमार ने दिया पुरस्कार और नेहरू हुए दीवाने
शुरुआती दिनों में जगदीप ने खुद को एक बेहद गंभीर और भावुक बाल कलाकार के रूप में स्थापित किया. साल 1953 में आई फिल्म ‘फुटपाथ’ में उन्होंने ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार के बचपन का किरदार निभाया. फिल्म के एक दृश्य में उन्होंने बिना ग्लिसरीन के इस कदर सजीव अभिनय किया कि दिलीप कुमार भावुक हो उठे और उन्होंने सेट पर ही जगदीप को 100 रुपये का नकद पुरस्कार दिया. उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि 1957 में आई फिल्म ‘हम पंछी एक डाल के’ (जिसमें उन्होंने ‘महमूद’ नाम के छात्र का रोल किया था) की सफलता के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनके मुरीद हो गए थे.
बिमल रॉय ने बदली राह
जगदीप के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब दिग्गज निर्देशक बिमल रॉय ने उनकी प्रतिभा को एक अलग नजरिए से देखा. उन्होंने अपनी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘दो बीघा जमीन’ (1953) में जगदीप को जूता पॉलिश करने वाले ‘लालू उस्ताद’ का कॉमिक रोल दिया. इस किरदार ने जगदीप को समझा दिया कि उनकी असली ताकत रोने में नहीं, बल्कि दुनिया को हंसाने में है.
इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए कॉमेडी की राह चुन ली. साल 1968 की फिल्म ‘ब्रह्मचारी’ ने उन्हें एक मुकम्मल कॉमेडियन बनाया. फिर ‘शोले’ के ‘सूरमा भोपाली’ (1975) और ‘अंदाज अपना अपना’ (1994) के ‘बांकेलाल भोपाली’ जैसे किरदारों ने उन्हें अमर कर दिया. उन्होंने ‘पुराना मंदिर’ के ‘मच्छर सिंह’ से लेकर प्रियदर्शन की ‘मुस्कुराहट’ के ‘बद्रीप्रसाद चौरसिया’ जैसे जटिल और अनूठे किरदारों को जीवंत किया.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें
मुंबई एयरपोर्ट में रनवे पर आमने-सामने आए प्लेन: एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद खड़ा था, एअर इंडिया प्लेन ने टेक-ऑफ रन शुरू कर दिया
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- Mumbai Airport Runway Incident Air India, AI Express Planes Face to face
मुंबई4 घंटे पहले
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मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार रात को हादसा टल गया। एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। घटना रात 10 बजे की बताई गई है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, एअर इंडिया के विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के निर्देश पर टेक-ऑफ रन रोक दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद रनवे से हटा नहीं था, तभी दिल्ली जाने वाला एयर इंडिया का विमान उसी रनवे से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था।
एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि सिलिगुड़ी से आई एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट रनवे खाली कर ही रही थी। जबकि दिल्ली जाने वाली फ्लाइट AI816 के क्रू ने ATC के निर्देश मिलते ही टेकऑफ रन तुरंत रोक दिया और विमान को वापस पार्किंग एरिया में ले जाया गया।
एयरलाइन के मुताबिक, विमान की स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसीजर के तहत जांच की जाएगी। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
आम तौर पर, टेक-ऑफ रन का मतलब है टेक-ऑफ की रफ्तार पकड़ने से पहले विमान का जमीन पर दौड़ना।
यात्रियों की संख्या का खुलासा नहीं
फिलहाल दोनों विमानों में कितने यात्री सवार थे, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक जांच पूरी होने के बाद ही विमान को दोबारा परिचालन में लाया जाएगा।

मुंबई देश का दूसरा सबसे बिजी एयरपोर्ट, यहं एयर ट्रैफिक संभालना चुनौती
मुंबई एयरपोर्ट का पूरा छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। यह दिल्ली के बाद देश का दूसरा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। साथ ही दुनिया के सबसे व्यस्त सिंगल-रनवे ऑपरेशन वाले एयरपोर्ट्स में शामिल है।
सामान्य दिनों में यहां 950 से ज्यादा टेक-ऑफ और लैंडिंग होती हैं। व्यस्त दिनों में यह संख्या 1,000 से भी अधिक पहुंच जाती है। 21 नवंबर 2025 को मुंबई एयरपोर्ट ने 24 घंटे में 1,036 विमान गतिविधियों का रिकॉर्ड बनाया था।
एयरपोर्ट पर दो रनवे (09/27 और 14/32) हैं, लेकिन वे एक-दूसरे को काटते हैं। इसलिए दोनों रनवे पर एक साथ सामान्य संचालन नहीं किया जा सकता। प्रैक्टिकली एयरपोर्ट एक समय में एक ही रनवे की तरह काम करता है।
मुंबई एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) कैसे काम करता है….
हर विमान की टेक-ऑफ और लैंडिंग का समय सेकंडों के अंतर से तय किया जाता है। ATC रनवे, टैक्सीवे और हवा की दिशा पर लगातार नजर रखता है। किसी भी खतरे की स्थिति में टेक-ऑफ रोकने या विमान को दोबारा चक्कर यानी गो-अराउंड का निर्देश दिया जा सकता है।
पिछले महीने अहमदाबाद में हुई थी ऐसी ही घटना

इससे पहले जून में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भी ऐसी ही घटना हुई थी, जब एअर इंडिया और इंडिगो के दो विमान एक ही टैक्सीवे (रनवे का एक हिस्सा) पर आमने-सामने आ गए थे हालांकि दोनों विमानों को समय रहते रोक लिया गया था।
दोनों विमानों के बीच करीब 200 मीटर की दूरी रह गई थी। बाद में एअर इंडिया विमान को टो करके सही पार्किंग बे तक ले जाया गया। इसके बाद इंडिगो विमान रनवे पर पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर…
खबर अपडेट की जा रही है…
मुंबई एयरपोर्ट में रनवे पर आमने-सामने आए प्लेन: एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद खड़ा था, एअर इंडिया प्लेन ने टेक-ऑफ रन शुरू कर दिया
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मुंबई23 मिनट पहले
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मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार रात को हादसा टल गया। एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। यह घटना रात करीब 10 बजे हुई। एअर इंडिया के विमान ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के निर्देश पर टेक-ऑफ रोक दी, जिससे एक संभावित हादसा टल गया।
सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग के बाद रनवे से हटा नहीं था, तभी दिल्ली जाने वाला एयर इंडिया का विमान उसी रनवे से उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के निर्देश के बाद टेक-ऑफ रोक दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक सिलिगुड़ी से आई एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट रनवे खाली कर ही रही थी, तभी दिल्ली जाने वाली एअर इंडिया की फ्लाइट उसी रनवे से टेकऑफ की तैयारी में थी।
ATC के निर्देश पर रोका टेक-ऑफ रन
एयर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि मुंबई से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट AI816 के क्रू ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल के निर्देश मिलते ही टेकऑफ रन तत्काल रोक दिया और विमान को वापस बे (पार्किंग एरिया) में ले जाया गया।
एयरलाइन के मुताबिक, विमान की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत जांच की जाएगी। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।
आम तौर पर, टेक-ऑफ रन का मतलब है टेक-ऑफ की रफ्तार पकड़ने से पहले विमान का जमीन पर दौड़ना।
यात्रियों की संख्या का खुलासा नहीं
फिलहाल दोनों विमानों में कितने यात्री सवार थे, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना के कारणों की जांच की जा रही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक जांच पूरी होने के बाद ही विमान को दोबारा परिचालन में लाया जाएगा।

पिछले महीने अहमदाबाद में हुई थी ऐसी ही घटना

इससे पहले जून में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भी ऐसी ही घटना हुई थी, जब एअर इंडिया और इंडिगो के दो विमान एक ही टैक्सीवे (रनवे का एक हिस्सा) पर आमने-सामने आ गए थे हालांकि दोनों विमानों को समय रहते रोक लिया गया था।
दोनों विमानों के बीच करीब 200 मीटर की दूरी रह गई थी। बाद में एअर इंडिया विमान को टो करके सही पार्किंग बे तक ले जाया गया। इसके बाद इंडिगो विमान रनवे पर पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर…
खबर अपडेट की जा रही है…
मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया, आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने पुनः आदेश पारित करने का निर्देश दिया – Prayagraj (Allahabad) News
इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना ने कन्नौज की तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा भारती के 20 सितंबर 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने नवाब सिंह यादव व अन्य के खिलाफ पुलिस द्वारा दाखिल आरोप-पत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। कन्नौज का मामला यह मामला कन्नौज कोतवाली थाने में दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। दरअसल यह घटना एक पॉक्सो मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई थी, जब गवाह डॉ. स्वास्तिका शालिनी को सत्र न्यायालय में गवाही देने के दौरान धमकाया गया और आरोपी के पक्ष में बयान देने के लिए दबाव बनाया गया। अपर महाधिवक्ता ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने 31 पन्नों का आदेश लिखते हुए सबूतों की विस्तृत समीक्षा की, मानो कोई “मिनी ट्रायल” चल रहा हो, जबकि संज्ञान लेने के चरण में मजिस्ट्रेट को केवल प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, यह देखना होता है, सबूतों की गुणवत्ता परखना नहीं। हाईकोर्ट ने कमल शिवाजी पोकरनेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य , रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भाड़ा और भगवंत सिंह बनाम पुलिस आयुक्त जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट को संज्ञान के चरण पर साक्ष्यों की सत्यता परखने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को सुना, लेकिन पीड़िता को नोटिस दिए बिना ही संज्ञान से इन्कार कर दिया, जो कि विधिक रूप से अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने 20 सितंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए मामला पुनः मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कन्नौज की अदालत को भेज दिया है, ताकि पुलिस रिपोर्ट पर नए सिरे से, इस फैसले में दी गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, आदेश पारित किया जा सके।
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‘रिलीज से पहले फैसला करो’, ‘सतलुज’ पर छिड़े विवाद के बीच कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान
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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद जारी है. इस बीच फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ अभिनेता कंवलजीत सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म पूरी बन जाती है, उस पर करोड़ों रुपये और कई लोगों की मेहनत लग चुकी होती है, तब उसे रोकना पूरी टीम के साथ अन्याय है.
दिलजीत की फिल्म को लेकर किए सवाल
नई दिल्ली. दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस विवाद के बीच ही जाने माने एक्टर कंवलजीत सिंह का बड़ा बयान सामने आया है. उनका कहना है कि रिलीज के बाद फिल्म को रोकना टीम के साथ अन्याय है.
आईएएनएस से बातचीत में कंवलजीत सिंह ने बताया कि ‘सतलुज’ उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण फिल्मों में से एक है. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें इतने बेरहम इंसान का किरदार निभाने का मौका मिला. यही वजह थी कि यह रोल उन्हें बेहद दिलचस्प लगा. उन्होंने कहा कि यह कहानी इतिहास से जुड़ी है, लेकिन इस पर पहले कभी ज्यादा बात नहीं हुई थी.
किरदार के लिए की थी पूरी तैयारी
कंवलजीत सिंह ने बताया कि उनका किरदार पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी से प्रेरित था. भूमिका की तैयारी के लिए उन्होंने उस अधिकारी के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी पढ़ी, उनके भाषण देखे और उनके व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की. हालांकि निर्देशक ने साफ कहा था कि किसी की नकल नहीं करनी है, बल्कि अपने अभिनय से किरदार को जीवंत बनाना है. उन्होंने कहा कि मेकअप की वजह से कई लोगों को लगा कि वह बिल्कुल उसी अधिकारी जैसे दिख रहे हैं.
रिलीज रुकने के पीछे सिर्फ विवाद नहीं होते
फिल्म की रिलीज में आई दिक्कतों पर कंवलजीत सिंह ने कहा कि हर बार विवाद ही वजह नहीं होता. कई बार आर्थिक, तकनीकी और दूसरे व्यावहारिक कारण भी सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई फिल्म सालों की मेहनत के बाद भी रिलीज नहीं हो पाती, तो पूरी टीम को दुख होता है. इसकी तुलना उन्होंने उस लेखक से की, जिसकी किताब सालों की मेहनत के बाद भी प्रकाशित नहीं हो पाती.
‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी
कंवलजीत सिंह ने भरोसा जताया कि ‘सतलुज’ एक दिन जरूर रिलीज होगी. उन्होंने कहा कि इस फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया है. चाहे वह स्पॉट बॉय हो, तकनीशियन हो, अभिनेता हो या निर्देशक. सभी चाहते हैं कि दर्शक उनकी मेहनत को बड़े पर्दे पर देखें.फिल्म से जुड़े विवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला करीब ढाई से तीन साल तक अलग-अलग स्तर पर चलता रहा. इसके बावजूद फिल्म के निर्माता और निर्देशक अपने फैसले पर डटे रहे. उन्होंने किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी बात रखी. कंवलजीत ने बताया कि एक समय फिल्म में बड़े पैमाने पर कट लगाने की बात भी हुई थी और बाद में इसे कनाडा के एक फिल्म फेस्टिवल से भी वापस ले लिया गया था.
बता दें कि कंवलजीत सिंह का कहना है कि अगर किसी फिल्म के विषय को लेकर किसी तरह की आपत्ति या आशंका है, तो उसका समाधान फिल्म बनने से पहले ही कर लेना चाहिए. जरूरी मंजूरियां और चर्चा पहले होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फिल्म पूरी बनने, पैसा खर्च होने और पूरी टीम की मेहनत लगने के बाद उस पर रोक लगाना या बड़े बदलाव की मांग करना सही नहीं है.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें


