Sunday, June 21, 2026
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1 ही जगह बनाई गई वो 8 फिल्में, एक में अमिताभ बच्चन की एक्टिंग ने मचाया तहलका


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फिल्में जब शूट की जाती है, तो सबसे पहले जहन में रखी जाती है लोकशन. तमाशा जैसी फिल्म भले ही फ्लॉप हो, लेकिन उसकी शूटिंग लोकेशंस की वजह से वो फिल्म आज भी याद की जाती है. इसी तरह बॉलीवुड की 8 फिल्में हैं, जो एक ही लोकेशंस पर शूट की गई है. वो है बंगाल. इनमें अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित जैसी एक्ट्रेसेस की फिल्में शामिल हैं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर अलग-अलग शहरों और राज्यों की संस्कृति को दिखाया जाता है. ठीक इसी तरह बॉलीवुड की 8 फिल्मों में बंगाल की संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, खूबसूरत गलियां, साहित्यिक माहौल दिखाया गया है. जैसे विद्या बालन की फिल्म कहानी में दुर्गा पूजा की भव्यता फिल्मकारों ने बड़ी ही खूसबूरती से दिखाई है. साल 2012 में आई इस फिल्म को लोग अब भी भूल नहीं पाए हैं. थ्रिलर फिल्म में कोलकाता सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि कहानी का अहम किरदार के तौर पर दिखाया गया है.

दूसरी है साल 2002 में आई संजय लीला भंसाली की देवदास. फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित लीड रोल में नजर आए थे. फिल्म का लव ट्रांयगल फिल्म की जान साबित हुआ था. मेकर्स ने फिल्म में बंगाल की शान और वैभव को बड़े स्तर पर दिखाए. विशाल हवेलियां, लाल बॉर्डर वाली साड़ियां और दुर्गा पूजा के भव्य सीन देख लोग हैरान थे. माधुरी दीक्षित के ठुमकों ने तो फिल्म को हिट बना दिया था.

Lootera (2013): Set in historic Manikpur, this tragic romance captures the aristocratic elegance of rural Bengal. The cinematography emphasizes decaying zamindari mansions, vast pastoral fields, and rich cultural traditions, wrapping the tragic love story in a deeply melancholic, poetic visual atmosphere.

फिर आती है, साल 2013 में आई ‘लूटेरा’.फिल्म में रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा लीड रोल में नजर आए थे. ग्रामीण बंगाल की खूबसूरती को मेकर्स ने फिल्म की कहानी में बड़ी खूबसूरती से पिरोया. जमींदारों की हवेलियां, खुले खेत और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति सब कुछ फिल्म में देखने लायक है.

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इनमें अमिताभ की साल 2015 में आई ‘पीकू’भी शामिल हैं. फिल्म में अमिताभ बच्चन के अलावा दीपिका पादुकोण और इरफान खान भी नजर आए थे. फिल्म में उत्तर कोलकाता की पुरानी इमारतें, संकरी गलियां, बंगाली मिठाइयां और हुगली नदी के घाटों पर ही शूटिंग की गई है. फिल्म में अमिताभ की एक्टिंग के लोग मुरीद हो गए थे.

तीसरी है साल 2012 में आई प्रियंका चोपड़ा की बर्फी! फिल्म में रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा लीड रोल में नजर आए थे. इस फिल्म में बंगाल के दो अलग-अलग रंगों को दिखाया गया है. एक दार्जिलिंग के चाय बागान और टॉय ट्रेन हैं, दूसरी तरफ पुराने कोलकाता की बारिश से भीगी सड़के.

फिर आती है, साल 2013 में आई ‘लूटेरा’.फिल्म में रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा लीड रोल में नजर आए थे. ग्रामीण बंगाल की खूबसूरती को मेकर्स ने फिल्म की कहानी में बड़ी खूबसूरती से पिरोया. जमींदारों की हवेलियां, खुले खेत और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति सब कुछ फिल्म में देखने लायक है.

साल 2005 में आई परिणीता में भी बंगाल की खूबसूरती दिखाई गई थी. फिल्म में विद्या बालन और सैफ अली खान की नजर आए थे. फिल्म की कहानी में 60 के दशक का बंगाल जीवंत हो उठता है. बड़े-बड़े आंगन, पारंपरिक बंगाली परिवार,फिल्म की लोकेशंस आजतक लोग भूल नहीं पाए हैं.

साल 2004 में आई युवा को तो लोग आज तक भुला नहीं पाए हैं. मणिरत्नम की इस फिल्म में कोलकाता का युवा और राजनीतिक रूप देखने को मिलता है. हावड़ा ब्रिज, मैदान और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे प्रतिष्ठित स्थानों को खूबसूरती से फिल्माया गया है.

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लो वोल्टेज से परेशान लोगों ने उपकेंद्र पर किया हंगामा: रोडलाइट बंद कर मैनेज किया वोल्टेज; 300 घर थे प्रभावित – Gorakhpur News




भीषण गर्मी के बीच बिजली विभाग की लापरवाही से लोगों की समस्या और बढ़ गई है। रमदत्तपुर के लगभग 300 घरों के लोगों के यहां वोल्टेज इतना कम हो गया कि पंखा तक नहीं चल रहा था। लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ा। भीषण गर्मी से परेशान लोगों का सब्र टूट गया और उन्होंने सूरजकुंड उपकेंद्र पर पहुंचकर हंगामा किया। कल्याणपुर वार्ड के पार्षद शिवेंद्र मिश्र भी मौके पर पहुंच गए और बिजली निगम के अधिकारियों से वार्ता की। रात 1 बजे के बाद वोल्टेज को ठीक किया गया। लोड कम करने के लिए ट्रांसफार्मर से जुड़ी रोड लाइटों को बंद कर दिया गया।
रमदत्तपुर में शुक्रवार को ही ट्रांसफार्मर का ऑयल लीक होने के कारण बिजली कट गई थी। लगभग 5 घंटे तक लोग परेशान रहे। रात में कोई सो नहीं पाया। सबके इंवर्टर भी जवाब दे गए थे। इस बात की जानकारी बिजली निगम के अधिकारियों को दी गई। किसी अल्टरनेट ट्रांसफार्मर की व्यवस्था करने की बजाय बिजली निगम ने उस ट्रांसफार्मर का लोड कम करने के लिए इस मोहल्ले के लगभग 300 घरों का लोग अलवापुर के ट्रांसफार्मर पर शिफ्ट कर दिया। जिससे लोगों के घरों में वोल्टेज काफी कम हो गया। कोई भी इलेक्ट्रिक उपकरण काम नहीं कर रहा था। लोगों का धैर्य जवाब दे गया गर्मी से परेशान लोगों ने बिजली निगम के अधिकारियों को फोन किया तो रात पर मैनेज करने को कहा गया। उन्होंने अपने पार्षद को फोन किया। पार्षद की ओर से भी कई बार एक्सईएन, जेई व लाइनमैन से बात की गई लेकिन रात में व्यवस्था ठीक करने को लेकर सभी ने हाथ खड़े कर दिए। यह जानकारी मिलने के बाद आक्रोशित लगभग 150 लोग उपकेंद्र पहुंच गए और नारेबाजी की। बिजली निगम के अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई। लोगों ने कहा कि हम समय से बिजली का बिल देते हैं। स्मार्ट मीटर लगाकर बिल बढ़ा दिया, उसे भी देते हैं। आप लोग सर्विस नहीं दे पा रहे हैं। इस बात का बिजली निगम के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।
लोगों ने कहा कि उनके घरों में पानी नहीं है। पीने के पानी की भी समस्या हो रही है। किसी के यहां मोटर तो छोड़िए, पंखा भी नहीं चल पा रहा है। घर के सारे सदस्य जागकर रात बिताने को मजबूर हैं। पार्षद ने बताया कि इसके चलते 3 लोगों के मोटर जल गए। लगभग 25 लोगों के पंखे जल गए। बिजली निगम के अधिकारी कम घरों को प्रभावित बता रहे
पार्षद व स्थानीय लोगों के मुताबिक लगभग 300 घर इससे प्रभावित हुए थे लेकिन बिजली निगम के अधिकारी सप्लाई के आधार पर घरों की संख्या 60 से 70 बता रहे थे। हालांकि हंगामा करने वालों में 150 से अधिक लोग शामिल थे। शहर से बाहर रहे पार्षद भी इस समस्या की सूचना मिलने के बाद उपकेंद्र पहुंच गए। लोगों के प्रदर्शन के बाद अलवापुर ट्रांसफार्मर पर शिफ्ट किया गया लोड वापस रमदत्तपुर के ट्रांसफार्मर से दिया गया। उसके बाद वोल्टेज देर रात सही हो गया लेकिन लोग काफी देर तक वहां जमा रहे। पार्षद ने अपने सामने लोड शिफ्ट करवाया। लगाया जाएगा अल्टरनेट ट्रांसफार्मर
वार्ता के दौरान बिजली निगम के अधिकारियों ने ट्राली पर अल्टरनेट ट्रांसफार्मर लगाने की जानकारी दी। इसके लिए रविवार का दिन तय किया गया है। उन्होंने पार्षद से जगह मांगी। पार्षद की ओर से कुछ विकल्प दिए गए हैं।



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युद्ध की आंच में भी मजबूत रही भारत की अर्थव्यवस्था, PM मोदी की रणनीति का असर


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युद्ध की आंच में भी मजबूत रही भारत की अर्थव्यवस्था, PM मोदी की रणनीति का असर

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पश्चिम एशिया में मचे भीषण युद्ध और तेल संकट को देखते हुए भारत सरकार ने देश के भीतर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कड़ा स्टैंड लिया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिमी देशों के भारी राजनयिक दबावों के बावजूद भारत ने अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी. भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाया, जिससे देश को बड़े आर्थिक नुकसान और महंगाई की मार से समय रहते बचा लिया गया.

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केंद्र सरकार ने व्यापार समझौतों से लेकर रूस से कच्चे तेल तक बड़े फैसले लिए. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान में लगभग सौ से ज्यादा दिनों तक चले युद्ध के बाद समझौता हो गया. भले ही दोनों देशों ने हमले रोक दिए और होर्मुज फिर से ऑपरेशनल हो चुका है, लेकिन 28 फरवरी से लेकर 18 जून तक दुनिया के तमाम देशों को भी इसके प्रभाव का सामना करना पड़ा. इस दौरान भारत ने देश को नुकसान से बचाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े रणनीतिक कदम उठाए हैं.

युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट की सप्लाई चैन बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी. ऐसे में भारत ने अपने व्यापार का तेजी से विविधीकरण किया. व्यापार में विविधीकरण भारत की रणनीति रही है. अमेरिका के साथ तनाव से भरे संबंध और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया. इसके अलावा, फरवरी 2026 में भारत ने अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक समझौता किया.

फरवरी 2026 में भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) (सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर हस्ताक्षर किए. पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट को देखते हुए भारत ने राजनयिक दबावों के बावजूद अपनी जरूरतों के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया.

इसके साथ ही, अमेरिका-ईरान हमलों के दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत के हितों की रक्षा करने और नए गठबंधनों को मजबूत करने के लिए कई देशों का दौरा किया. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने व्यापार और पाम ऑयल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की.

हमले की शुरुआत से ठीक पहले पीएम मोदी इजरायल पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने पर चर्चा हुई. हालांकि, इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हमला किया.

दोनों पक्षों की तरफ से जारी हमलों के बीच मई 2026 में पीएम मोदी ने एक साथ यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया. यूएई के साथ ऊर्जा आपूर्ति, जबकि यूरोपीय देशों (विशेषकर इटली) के साथ ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस डील की गईं.

अमेरिका और ईरान में समझौता होने से ठीक पहले पीएम मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा किया. नई व्यापारिक साझेदारियों, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और संतुलित कूटनीति के जरिए भारत ने यह संकेत दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसका लक्ष्य केवल नुकसान से बचना नहीं, बल्कि नए अवसरों को साधना भी है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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अब एसी चलाने पर भी कम आएगा बिजली बिल: जयपुर में शुरू हुआ स्मार्ट एसी मिशन, 2 हजार घरों में लगेगी आईओटी डिवाइस, घटेगी बिजली खपत – Jaipur News




बिजली की बढ़ती मांग और ग्रिड पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जयपुर डिस्कॉम ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर के करीब 2 हजार घरेलू उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (एसी) में मुफ्त स्मार्ट आईओटी डिवाइस लगाई जा रही है। इस तकनीक के जरिए पीक ऑवर्स में एसी की बिजली खपत को स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जाएगा, जिससे बिजली की बचत के साथ ग्रिड का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा।
डिस्कॉम ने यह पायलट प्रोजेक्ट प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार देश में पहली बार किसी विद्युत वितरण निगम की ओर से घरेलू उपभोक्ताओं के एसी को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (एडीआर) तकनीक से जोड़कर बिजली की मांग को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी आने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था भी अधिक मजबूत होगी।
पीक ऑवर्स में कम होगा बिजली तंत्र पर दबाव
गर्मी के मौसम में एसी का उपयोग बढ़ने से बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे ग्रिड और विद्युत तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नई एडीआर तकनीक ऐसे समय में एसी की बिजली खपत को नियंत्रित करेगी। इससे बिजली की मांग संतुलित रहेगी और ग्रिड को ओवरलोड होने से बचाया जा सकेगा।
डिस्कॉम अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना राजस्थान विद्युत नियामक प्राधिकरण के डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026 के तहत शुरू की गई है। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। ऐसे काम करेगी स्मार्ट आईओटी डिवाइस
एडीआर डिवाइस दो हिस्सों में काम करती है। इसका एक भाग घर के सामान्य बिजली सॉकेट में लगाया जाता है, जबकि दूसरा भाग एसी यूनिट पर लगाया जाता है। यह डिवाइस घर के वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ग्रिड प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी रहती है।
जब बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचती है, तब यह डिवाइस कमरे के आरामदायक तापमान को बनाए रखते हुए एसी के तापमान में करीब एक डिग्री की बढ़ोतरी कर देती है। इससे उपभोक्ता को किसी बड़े बदलाव का एहसास नहीं होता, लेकिन बिजली की खपत कम हो जाती है।
उपभोक्ताओं को मिलेगा बिजली बिल में फायदा
डिस्कॉम के अनुसार यदि एसी प्रतिदिन 6 से 8 घंटे तक चलाया जाए तो इस तकनीक की मदद से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। इससे सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बचत होगी।
अधिकारियों का मानना है कि 2 हजार उपभोक्ताओं के एसी को इस तकनीक से जोड़ने पर बिजली मांग में करीब 1 मेगावाट तक की कमी लाई जा सकती है। यह बचत पीक ऑवर्स में बिजली व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या भी होगी कम
बिजली की मांग नियंत्रित रहने से ग्रिड और वितरण तंत्र पर दबाव कम होगा। इससे फॉल्ट और ट्रिपिंग की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर वोल्टेज और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली आपूर्ति मिल सकेगी।
डिस्कॉम का मानना है कि यह परियोजना ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, बिजली बचत को प्रोत्साहित करने और भविष्य के स्मार्ट ग्रिड सिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।



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ससुराल से लौटकर पति-पत्नी ने फांसी लगाकर दी जान: स्पॉट पर टूटे मिले मोबाइल, थाली में रखा मिला खाना, झगड़े के बाद मौत को लगाया गले – Gwalior News




ग्वालियर के हस्तिनापुर गांव में शनिवार शाम एक नवविवाहित दंपती के शव कमरे के अंदर एक ही रस्सी से बने फंदे पर लटके मिले। मृतकों की पहचान 22 वर्षीय विनोद प्रजापति और 20 वर्षीय लक्ष्मी प्रजापति के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आत्मघाती कदम उठाने से पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर गंभीर विवाद हुआ था। कमरे में सामान बिखरा पड़ा मिला, दोनों के मोबाइल फोन टूटे हुए थे और एक थाली में परोसा गया खाना बिना खाया रखा हुआ मिला। अप्रैल 2025 में हुई थी शादी, एक दिन पहले ही लौटे थे ससुराल से पुलिस के मुताबिक विनोद और लक्ष्मी की शादी अप्रैल 2025 में हुई थी। दोनों हाल ही में लक्ष्मी के मायके में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने भिंड गए थे। शुक्रवार रात ही वे वापस अपने घर लौटे थे। परिजनों के अनुसार घर आने के बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई थी और वे शनिवार सुबह से ही अपने कमरे में बंद थे। शाम तक नहीं खोला दरवाजा, पुलिस ने तोड़कर खोला कमरा शनिवार शाम विनोद का छोटा भाई हिमांशु घर पहुंचा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला। कई बार आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उसने पिता लाखन सिंह को सूचना दी, जो एक शादी समारोह में गए हुए थे। पिता के घर पहुंचने के बाद हस्तिनापुर थाना पुलिस को सूचना दी गई। उप निरीक्षक लोकेन्द्र सिंह कुशवाह के नेतृत्व में पहुंची पुलिस ने कुल्हाड़ी की मदद से दरवाजा तोड़ा। अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। विनोद और लक्ष्मी एक ही फंदे से लटके हुए थे। कमरे में मिले अहम सुराग पुलिस ने कमरे की तलाशी ली तो पति-पत्नी दोनों के मोबाइल फोन बुरी तरह टूटे हुए मिले। आशंका है कि विवाद के दौरान गुस्से में मोबाइल जमीन पर पटककर तोड़े गए होंगे। कमरे में एक थाली में भोजन परोसा हुआ रखा था, लेकिन उसमें से किसी ने खाना नहीं खाया था। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। विवाद की वजह तलाश रही पुलिस पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ था, जिसके कारण दोनों के बीच इतना बड़ा विवाद हुआ। यह भी जांच की जा रही है कि ससुराल में आयोजित शादी समारोह के दौरान कोई ऐसी घटना तो नहीं हुई, जिसका असर दोनों के रिश्ते पर पड़ा हो। दोनों के क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि कॉल डिटेल, चैट और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल की जा सके। मृतका के मायके पक्ष के लोगों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है। हस्तिनापुर थाना के उप निरीक्षक लोकेन्द्र सिंह कुशवाह ने बताया कि नवविवाहित दंपती के आत्महत्या मामले में घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। कमरे से दोनों के टूटे हुए मोबाइल फोन और बिना खाया हुआ भोजन बरामद हुआ है। इससे प्रतीत होता है कि फांसी लगाने से पहले दोनों के बीच गंभीर विवाद हुआ था। परिजनों और मायके पक्ष के बयान लिए जाएंगे तथा मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, जिससे विवाद की वास्तविक वजह सामने आ सके।



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ज़ॉम्बी सिटी से लेकर स्कैरी एस्केप तक, हैदराबाद में शुरू हुआ देश का सबसे बड़ा हॉरर एडवेंचर


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हैदराबाद का नया स्पॉट: मैजिक डिस्ट्रिक्ट में डर, रहस्य और मनोरंजन सब एक साथ

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हैदराबाद के सरस सिटी मॉल में स्थित मैजिक डिस्ट्रिक्ट एक अनोखा मल्टी-कॉन्सेप्ट एक्सपीरिएंशियल एंटरटेनमेंट ज़ोन है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए रोमांच और मनोरंजन का खास अनुभव देता है. यहां का प्रमुख आकर्षण ज़ॉम्बी सिटी है, जो VFX, लाइव कलाकारों और डरावने सेट्स के साथ एक पोस्ट-एपोकैलिप्टिक दुनिया का एहसास कराता है. इसके अलावा स्केरी एस्केप रूम टीमवर्क और पहेलियों का रोमांचक अनुभव देता है, जबकि जूनियर स्केरी हाउस, हा हा हो हाउस और क्लासिक स्केरी हाउस अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए डर और मज़े का संतुलन पेश करते हैं.

हैदराबाद में इन दिनों मैजिक डिस्ट्रिक्ट नाम का मनोरंजन केंद्र पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह खुद को भारत का पहला मल्टी-कॉन्सेप्ट एक्सपीरिएंशियल एंटरटेनमेंट ज़ोन बताता है. पारंपरिक पार्कों से अलग, यहां एक ही छत के नीचे हॉरर, सस्पेंस, पहेलियां, भ्रम और शानदार कहानियों का ऐसा अनोखा तालमेल तैयार किया गया है, जो बच्चों से लेकर वयस्कों तक, हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच रहा है.

पहेलियां सुलझाने और दिमागी कसरत करने वालों के लिए स्कैरी एस्केप रूम एकदम सही जगह है. यहां अलग-अलग टीमों को एक निश्चित समय के भीतर छिपे हुए सुरागों को ढूंढकर रहस्यों से पर्दा उठाना होता है. भूतिया घर और मर्डर मिस्ट्री जैसे रोमांचक थीम के कारण यह एस्केप रूम कॉर्पोरेट टीमों और दोस्तों के समूहों के बीच टीम-बिल्डिंग और मनोरंजन के लिए काफी लोकप्रिय हो चुका है.

ज्ञान और मनोरंजन का बेहतरीन मिश्रण है मैजिक म्यूजियम. यह एक ऐसा एडुटेनमेंट ज़ोन है जहां विज्ञान, इतिहास और कला को अनोखे डिस्प्ले के माध्यम से सिखाया जाता है. इसी के साथ जुड़ी है मेज़ ऑफ इल्यूजन यानी भ्रम की भूलभुलैया, जो अपनी विजुअल ट्रिक्स, दिमाग चकरा देने वाले रास्तों और ऑप्टिकल इल्यूजन के कारण हर मोड़ पर इंसान के देखने और सोचने के नजरिए को चुनौती देती है.

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मैजिक डिस्ट्रिक्ट हैदराबाद के सरस सिटी माल में खुला है जो सप्ताह के सभी दिन सुबह 10:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है. यहां एंट्री और पैकेज की कीमतें आपके द्वारा चुने गए आकर्षणों के आधार पर तय होती हैं. विजिटर के लिए सिंगल टिकट के साथ-साथ बजट-फ्रेंडली कॉम्बो पास भी उपलब्ध हैं.

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पूर्णिया में आपसी रंजिश में चाकूबाजी, गर्दन पर किया हमला: बकरी के मूंग खाने पर हुआ विवाद, भागलपुर रेफर – Purnia News




पूर्णिया जिले के कामाख्या थाना क्षेत्र में आपसी विवाद के चलते एक नाबालिग पर चाकू से हमला किया गया। घटना में 16 वर्षीय दीपक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया, जीएमसीएच में प्राथमिक उपचार के बाद उसे मायागंज रेफर कर दिया गया है। घायल दीपक कुमार सहारा, मखनाहा पार का निवासी है और सुबोध ततमा का पुत्र है। उसके पिता दैनिक मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दीपक की मां नीलम देवी ने पुलिस को बताया कि पड़ोसी बबलू शर्मा और उसके परिवार के सदस्यों ने उनके घर में घुसकर दीपक की गर्दन पर चाकू से हमला किया। हमले के बाद दीपक खून से लथपथ होकर गिर पड़ा। ग्रामीणों की मदद से उसे तत्काल पूर्णिया शहर के जीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। दीपक के भाई बादल कुमार के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी बकरी ने पड़ोसी बबलू शर्मा के आंगन में रखी मूंग खा ली। इसी बात से नाराज होकर बबलू शर्मा और उसके परिवार के सदस्यों ने उनके घर में घुसकर रॉड, चाकू और दबिया से मारपीट की। पूर्णिया जीएमसीएच के डॉक्टरों ने घंटों इलाज के बाद, घायल दीपक को हायर सेकेंडरी भागलपुर मायागंज रेफर कर दिया है। घटना की सूचना मिलने पर मरंगा थाना पुलिस के विनोद कुमार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घायल परिवार के बयान दर्ज किए और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।



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केमिकल वाली सब्जियां तो नहीं खा रहे हैं? घर पर इन आसान ट्रिक्स से करें पहचान


How to Identify Chemical-Treated Vegetables: हरी-हरी ताजी सब्जियों के बिना खाना अधूरा है. पौष्टिक तत्वों से भरपूर ये ग्रीन वेजिटेबल्स शरीर को आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिंस, एंटीऑक्सीडेंट्स आदि प्रदान करती हैं, लेकिन कई बार केमिकल युक्त सब्जियों के सेवन से आपको कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं. आजकल सब्जी मार्केट में खूब केमिकल युक्त सब्जियों के बेचने का गोरखधंधा चल रहा है. सब्जी विक्रेता सब्जियों को जल्दी बड़ा करने, उन्हें ताजी और चमकदार दिखाने के लिए कई तरह के केमिकल्स, पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल करते हैं. ये शरीर के लिए हानिकारक होते हैं. ऐसे में आप इन्हें फ्रेश समझकर खरीद लेते हैं, लेकिन आप जानना चाहते हैं केमिकल लगी सब्जियों को पहचानने का तरीका, तो यहां बताए गए कुछ टिप्स पर गौर करें…

केमिकल लगी सब्जियों को पहचानने के टिप्स

1.  जब आप ठेले पर से सब्जी लें, तो ध्यान से देखें कि कहीं वह जरूरत से ज्यादा चमकदार तो नजर नहीं आ रही हैं. शिमला मिर्च, टमाटर, बैंगन, खीरा असामान्य रूप से चमकदार दिख रही हैं तो अलर्ट हो जाएं. इन पर वैक्स या अन्य रसायनों की परत लगी हो सकती है.

2. जब कोई सब्जी नेचुरल तरीके से उगाई जाती है तो उनके रंग, आकार में थोड़ा बहुत फर्क होता है. सारे टमाटर, खीरे, बैंगन, शिमला मिर्च एक ही साइज, रंग, आकार के नजर आ रहे हों तो इन्हें ना खरीदें. इनमें रासायनिक उपचार की संभावना हो सकती है.

3. कोई भी सब्जी अपने मौसम के अनुसार ही खाने में अधिक टेस्टी और फ्रेश लगती है. ऑफ-सीजन मिलने वाली सब्जियों को फ्रेश रखने के लिए काफी सब्जी विक्रेता केमिकल का यूज करते हैं. साथ ही इनमें ग्रोथ रेगुलेटर का उपयोग भी काफी सब्जी बेचने वाले करते हैं, ताकि वे अधिक दिनों तक खराब न हों.

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4. असामान्य रूप से बड़ा आकार हो तो भी अलर्ट हो जाएं. ऐसी सब्जियों को खरीदने से बचें. कुछ लौकी, बैंगन या फिर भिंडी काफी बड़े साइज की नजर आती हैं. ऐसा सब्जियों के आकार को बढ़ाने के लिए ग्रोथ हॉर्मोन और अत्यधिक उर्वरकों के इस्तेमाल के कारण भी हो सकता है.

5. नेचुरल तरीके से उगाई गईं सब्जियां कुछ दिनों में मुरझाने लगती हैं, लेकिन जब यही सब्जी कई दिनों तक फ्रेश ही नजर आए तो समझ लें कुछ गड़बड़ है.  इन सब्जियों पर प्रिजर्वेटिव या वैक्स की परत लगी हो सकती है.

6.  कुछ सब्जियां काटने पर हाथों में बैंगनी, लाल, मैरून, हरा रंग लगे तो समझ लें इन्हें फ्रेश दिखाने के लिए नकली रंग लगाया गया है. इन्हें बिल्कुल भी ना खाएं.

केमिकल का असर कम करने के उपाय
– सब्जियों से नकली रंग और केमिकल हटाने के लिए नमक वाले पानी में भिगोकर कुछ देर के लिए छोड़ दें. फिर दो से तीन बार साफ पानी से धो लें. कीटनाशक अवशेष हटाने में मदद मिलती है.

-पानी में थोड़ा सा बेकिंग सोडा डालकर मिक्स करें. इसमें सब्जियों को 15 मिनट भिगोकर छोड़ दें. फिर साफ पानी से सब्जियां साफ कर लें.

– जिन सब्जियों का छिलका हटाना जरूरी है, उन्हें अच्छी तरह से छीलकर ही पकाएं. खीरा, लौकी, गाजर, चुकंदर आदि के छिलके उतार दें.

सब्जी खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

हमेशा ताजी, लोकल और मौसमी सब्जियां खरीदें.
विश्वसनीय सब्जी वाले से सब्जी खरीदें.
ऑर्गेनिक या प्राकृतिक खेती से उगाई गई सब्जियां ही खाएं.
चमकदार और असामान्य रूप से बड़े आकार की सब्जियां ना खरीदें.



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देशभर में NEET-UG री-एग्जाम को लेकर तैयारी पूरी, 22 लाख से अधिक छात्र होंगे शामिल


NEET UG 2026 री-एग्जाम को लेकर तैयारी पूर हो चुकी है। देश भर में अधिकारियों ने परीक्षा आयोजित करने के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स से जुड़े इंतजाम बढ़ा दिए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और CCTV निगरानी से लेकर ट्रांसपोर्ट और मेडिकल सहायता तक, हर तरह की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस परीक्षा में 22.79 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों के शामिल होने की उम्मीद है। यह परीक्षा पेन-और-पेपर मोड में दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे के बीच अपने सेंटर पर पहुंच जाएं, क्योंकि एंट्री गेट दोपहर 1:30 बजे बंद हो जाएंगे।

551 शहरों में होगी परीक्षा

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 21 जून 2026 को होने वाली यह परीक्षा भारत के 551 शहरों में 5,440 केंद्रों और विदेशों में 14 केंद्रों पर आयोजित की जा रही है। परीक्षा अंग्रेजी और 12 भारतीय भाषाओं में आयोजित की जा रही है। परीक्षा के लिए सभी केंद्रों पर कुल 1,38,560 CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी फीड की निगरानी राष्ट्रीय, राज्य और मंत्रालय स्तर पर वर्चुअली की जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी से परीक्षा को सुरक्षित रखने के लिए 51,311 जैमर लगाए गए हैं। 

अभ्यर्थियों की होगी कड़ी निगरानी

परीक्षा के दिन की ड्यूटी के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों को तैनात किया गया है। 95,000 से अधिक परीक्षा कक्षों में से प्रत्येक में दो इनविजिलेटर होंगे, और हर केंद्र पर दस से अधिक अतिरिक्त परीक्षा अधिकारी तैनात होंगे। उम्मीदवार के वेरिफिकेशन को और मजबूत किया गया है; इसके लिए 38,795 फ्रिस्किंग स्टाफ और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए 48,448 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। बायोमेट्रिक मैनपावर को दोगुना किया गया है और फेस ऑथेंटिकेशन का भी सहारा लिया गया है ताकि वेरिफिकेशन अच्छी तरह से हो सके और केंद्रों पर लाइनें कम से कम हों। CCTV फीड की निगरानी करने और किसी भी तकनीकी समस्या को मौके पर ही हल करने के लिए सभी 5,440 केंद्रों पर एक सेंटर सिस्टम ऑफिसर (CSO) तैनात किया गया है।

हर सेंटर पर होंगे 40-50 सुरक्षाकर्मी

राज्य और जिला प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी की है, जिसमें पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स, भारतीय वायु सेना और डाक विभाग की तैनाती शामिल है। औसतन, हर परीक्षा केंद्र पर लगभग 40 से 50 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। गोपनीय सामग्री रखने वाली लगभग 1,500 बैंक शाखाओं में बैंक अधिकारियों को तैनात किया गया है, और डाक विभाग देश भर के लगभग 700 कलेक्शन सेंटरों से OMR शीट इकट्ठा करने के लिए अपनी टीमों के साथ तालमेल बिठाएगा। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें की गई हैं, और जिलों ने केंद्र की व्यवस्थाओं की पुष्टि की है। 

अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुविधाएं

राज्य सरकारों के साथ मिलकर, परीक्षा केंद्रों पर छात्रों के लिए अनुकूल सुविधाएं दी जा रही हैं। इनमें पीने का पानी, ORS, एम्बुलेंस और माता-पिता के लिए छायादार वेटिंग एरिया शामिल हैं। उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त उपायों में हर परीक्षा कक्ष में दीवार घड़ी, रफ़-वर्क के लिए अतिरिक्त पेज (बाएं हाथ से लिखने वाले उम्मीदवारों की सुविधा के लिए बुकलेट की शुरुआत में पेज दिए गए हैं), और एंट्री की औपचारिकताओं में लगने वाले समय की भरपाई के लिए परीक्षा का बढ़ा हुआ समय शामिल है। 

अफवाहों के खिलाफ एक्शन

NTA सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रख रहा है और अफवाह फैलाने वालों और “पेपर लीक” के फर्जी दावों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, जिनसे उम्मीदवारों को बेवजह तनाव होता है। उम्मीदवारों और माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे केवल NTA की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और बिना पुष्टि वाले संदेशों पर ध्यान न दें। NTA सभी संबंधित लोगों से अपील की है कि वे उम्मीदवारों को पूरा सहयोग दें और परीक्षा के दिन तनाव कम करने में मदद करें, ताकि 22 लाख से ज़्यादा उम्मीदवार जो देश के भविष्य के डॉक्टर हैं शांत, सुरक्षित और सहयोगी माहौल में परीक्षा दे सकें।

पेपर लीक के बाद हो रहा री-एग्जाम

दरअसल, 3 मई को हुई परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोपों के बाद NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया था। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) इस मामले की जांच कर रही है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इस विवाद के बाद देश के कई हिस्सों में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन की खबरें भी आई हैं। इसी माहौल को देखते हुए, अलग-अलग राज्यों के अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी करने और तालमेल बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है, ताकि 21 जून को परीक्षा में शामिल होने वाले 22.79 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों के लिए परीक्षा सुचारू और निष्पक्ष रूप से आयोजित की जा सके।

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