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टुन टुन हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन थीं. सबको हंसाने वाली कलाकार का बचपन त्रासदी से भरा था. वे जब छोटी थीं, तब उनके माता-पिता की हत्या हो गई. वे सिंगर बनने मुंबई आईं और नौशाद के संगीत में ‘अफसाना लिख रही हूं’ जैसे सुपरहिट गाने गाए. जब नौशाद ने उन्हें एक्टिंग की सलाह दी, तो उन्होंने पहली फिल्म दिलीप कुमार के साथ करने की अनूठी शर्त रखी. साल 1950 में फिल्म ‘बाबुल’ से उनका नाम टुन टुन पड़ा. उन्होंने 5 दशक लंबे करियर में ‘प्यासा’ और ‘नमक हलाल’ जैसी 200 फिल्मों में दिलचस्प रोल निभाए.
टुनटुन ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी पहली महिला कॉमेडियन का जिक्र होता है, तो उमा देवी खत्री यानी ‘टुन टुन’ का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. पर्दे पर उनका आना ही दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी था. 11 जुलाई 1923 को यूपी के अमरोहा में जन्मीं टुन टुन का बचपन दुखों के पहाड़ जैसा था. जमीन के विवाद में उनके माता-पिता और फिर भाई की हत्या कर दी गई थी. अनाथ होने के बाद वे रिश्तेदारों के साथ रहीं, जहां वे ताने, रेडियो पर गाने सुन-सुनकर बड़ी हुईं. उनका असली सपना एक मशहूर प्लेबैक सिंगर बनने का था. इसी जिद के साथ वे मुंबई भाग आईं. संगीतकार नौशाद ने उनके टैलेंट को पहचाना. साल 1947 में आई फिल्म ‘दर्द’ का उनका गाया गाना ‘अफसाना लिख रही हूं’ सुपरहिट हुआ कि उनकी आवाज घर-घर में गूंजने लगी.
सिंगिंग में नाम कमाने के बाद जब इंडस्ट्री का दौर बदलने लगा, तो नौशाद साहब ने टुन टुन को एक्टिंग में किस्मत आजमाने की सलाह दी. वे इसके लिए मान तो गईं, लेकिन उन्होंने नौशाद के सामने एक अनोखी शर्त रख दी. दरअसल, वे गुजरे जमाने के सुपरस्टार दिलीप कुमार की दीवानी थीं कि उन्होंने साफ कह दिया कि वे एक्टिंग तभी करेंगी, जब उनकी पहली फिल्म दिलीप कुमार के साथ होगी. नौशाद और दिलीप कुमार की दोस्ती बहुत गहरी थी, इसलिए यह शर्त तुरंत मान ली गई. साल 1950 में आई फिल्म ‘बाबुल’ में उन्हें दिलीप कुमार और नरगिस के साथ काम करने का मौका मिला. फिल्म के सेट पर उनका नाम ‘उमा देवी’ से बदलकर हमेशा के लिए ‘टुन टुन’ रख दिया गया.
‘बाबुल’ से शुरू किया अभिनय
‘बाबुल’ से अभिनय की शुरुआत करने के बाद टुन टुन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अपने भारी-भरकम शरीर, मजेदार चेहरे के हाव-भाव और कमाल की कॉमिक टाइमिंग के दम पर वे उस दौर के हर बड़े डायरेक्टर की पहली पसंद बन गईं. उन्होंने गुरु दत्त की क्लासिक फिल्मों ‘आर-पार’, ‘मिस्टर एंड मिसेज 55’ और ‘प्यासा’ में यादगार रोल किए जो आज भी लोगों को याद हैं. इसके अलावा, ‘नमक हलाल’ और ‘कोहिनूर’ जैसी फिल्मों में भी उनकी कॉमेडी का जलवा देखने को मिला. आलम यह था कि उस दौर के लेखक फिल्मों में खास तौर पर टुन टुन को ध्यान में रखकर कॉमेडी किरदार लिखा करते थे, जो किसी भी महिला कलाकार के लिए बहुत बड़ी बात थी.
200 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
टुन टुन ने लगभग पांच दशक लंबे करिय में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. निजी जिंदगी की बात करें, तो वे पति अख्तर अब्बास काजी के गुजर जाने के बाद अंदर से टूट गई थीं. उन्होंने धीरे-धीरे चकाचौंध भरी दुनिया से दूरी बना ली. साल 1990 में आई फिल्म ‘कसम धंधे की’ उनके करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई. वे लंबी बीमारी से जूझती रहीं और आखिरकार 23 नवंबर 2003 को 80 साल की उम्र में आखिरी सांस ली.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें

