Wednesday, July 15, 2026
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विवेक कुमार ने संभाला रानीपतरा थाना प्रभारी का पदभार: विधि-व्यवस्था सुदृढ़ करने, अपराध पर अंकुश लगाने पर जोर – Purnia News




पुलिस अवर निरीक्षक विवेक कुमार ने गुरुवार को मुफस्सिल थाना रानीपतरा के नए थानाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने पदभार संभालते ही थाना क्षेत्र में विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अपराध पर अंकुश लगाने का संकल्प लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद, श्री कुमार ने थाना में एक बैठक आयोजित की और पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित निवारण, महिला सुरक्षा सुनिश्चित करना, साइबर अपराधों पर निगरानी रखना और नशा तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना उनकी प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “थाना क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना हमारी पहली जिम्मेदारी है।” उन्होंने आगे कहा कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय से ही अपराध मुक्त समाज की कल्पना को साकार किया जा सकता है। स्थानीय लोगों ने नए थाना प्रभारी के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की और उम्मीद जताई कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र में पुलिसिंग और अधिक सक्रिय होगी। इस अवसर पर थाना के अन्य पदाधिकारी और कर्मी भी उपस्थित थे।



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जलावर्धन योजना पर घिरा निगम, बजट सत्र में हंगामा: गंदे पानी, अधूरे काम और निजी कंपनी पर बरसे पार्षद; महिला पार्षद धरने पर बैठीं – Burhanpur (MP) News




बुरहानपुर नगर निगम का बजट सत्र बुधवार को परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में हंगामे के बीच शुरू हुआ। जलावर्धन योजना में कथित अनियमितताओं, गंदे पानी की आपूर्ति और अधूरे विकास कार्यों को लेकर कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों ने निगम प्रशासन को घेर लिया। पार्षदों ने निजी कंपनी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की, लेकिन प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि पार्षदों की आपत्तियों से एमपीयूडीसी को अवगत कराया जाएगा। कांग्रेस पार्षद एवं अधिवक्ता उबैद शेख ने आरोप लगाया कि चार साल के कार्यकाल में जनप्रतिनिधियों के वार्डों में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हुए। उन्होंने कहा कि महापौर द्वारा प्रत्येक पार्षद को पांच लाख रुपए की निधि और वार्डों में 15-20 लाख रुपए के विकास कार्य कराने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। योजनाएं बनीं, टेंडर जारी हुए, लेकिन बाद में निरस्त कर दिए गए। उन्होंने कहा कि खराब सड़कें, नालियां और जलभराव आज भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। यदि हालात नहीं सुधरे तो अगले चुनाव में जनता के बीच जाना मुश्किल होगा। जलावर्धन योजना पर उठे सवाल पार्षद अजय उदासीन ने कहा कि जलावर्धन योजना के तहत अब तक सभी वार्डों में नल कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। आधे शहर में नई लाइनें पूरी नहीं हुईं, जबकि पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था बंद कर दी गई और ट्यूबवेल की मोटरें भी निकाल ली गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि निगम प्रशासन निजी कंपनी का बचाव क्यों कर रहा है। पार्षद गौरव शुक्ला ने भी लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जल विभाग पर सबसे अधिक खर्च होने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने जनहित में शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की मांग भी की। बहसबाजी, धरना और निंदा प्रस्ताव की मांग बैठक के दौरान निर्दलीय पार्षद अमित नवलखे और आयुक्त संदीप श्रीवास्तव के बीच जलावर्धन योजना को लेकर तीखी बहस हुई। डिप्टी स्पीकर फहीम हाशमी ने मांग की कि जब तक हर घर तक नई जलापूर्ति नहीं पहुंचती, तब तक पुरानी पानी सप्लाई व्यवस्था जारी रखी जाए। इसी दौरान भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। सांसद प्रतिनिधि आदित्य प्रजापति पहली बार बैठक में शामिल हुए, जबकि विधायक प्रतिनिधि के रूप में चिंतामन महाजन मौजूद रहे। महाजन ने निजी कंपनी के खिलाफ निर्णय लेने में जल्दबाजी नहीं करने की बात कही, जिस पर उबैद शेख ने कहा कि कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना सरकार की नीति का विरोध नहीं है। महिला पार्षद जमीन पर बैठीं वार्ड में सफाई व्यवस्था से नाराज पार्षद मीना मोरे अध्यक्ष की आसंदी के सामने जमीन पर बैठ गईं। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारी स्वर्णिका वर्मा पर फोन नहीं उठाने और सफाई व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की। निर्दलीय पार्षद अमित नवलखे भी सदन में जमीन पर बैठ गए और जलावर्धन योजना से जुड़े वीडियो को सदन में चलाने की मांग की। बाद में वीडियो प्रस्तुत किया गया। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना की दो-तीन साल से लंबित किश्तों का मुद्दा भी उठाया गया। महापौर बोलीं- नागरिकों का स्वास्थ्य सर्वोपरि महापौर माधुरी पटेल ने कहा कि गर्मी के दौरान भी पानी की समस्या रही है। लीकेज के कारण कई जगह गंदा पानी सप्लाई हुआ। उन्होंने कहा कि जलावर्धन योजना पूरी होने तक शहर की पांचों पुरानी पानी टंकियां चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बिजली खर्च बढ़ेगा, लेकिन नागरिकों का स्वास्थ्य अधिक महत्वपूर्ण है। आयुक्त बोले- एमपीयूडीसी को भेजेंगे आपत्तियां नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि बैठक में जलावर्धन योजना पर सार्थक चर्चा हुई। जहां नई पाइपलाइन नहीं बिछी है, वहां पुरानी व्यवस्था से जलापूर्ति जारी है। पार्षदों की सभी शिकायतें और निजी कंपनी के संबंध में उठे मुद्दे एमपीयूडीसी को भेजे जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए कार्रवाई की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के नल कनेक्शन काटे जा सकते हैं।



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बारिश की पहली फुहार पड़ते ही दिल्ली वाले सबसे पहले क्या खाते हैं?


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Best Delhi Monsoon Food: दिल्ली में बारिश सिर्फ मौसम नहीं बदलती, बल्कि लोगों की खाने की आदतें भी बदल देती है. जैसे ही तपती सड़कों पर पहली फुहार गिरती है और हवा में भीगी मिट्टी की खुशबू घुलती है, राजधानी की गलियां एक बार फिर अपने मशहूर स्ट्रीट फूड की महक से भर उठती हैं. कोई चांदनी चौक की कचौड़ी की ओर निकल पड़ता है तो कोई करोल बाग के गरमा-गरम पकौड़ों के लिए लाइन में लग जाता है. लाजपत नगर के राम लड्डू, कमला नगर का भुट्टा, पहाड़गंज के छोले-भटूरे और मजनू का टीला के मोमोज़ भी मानसून के साथ लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं. यही वजह है कि दिल्ली का मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्वाद, यादों और पुराने ठिकानों तक लौटने का भी मौसम माना जाता है.

बारिश आते ही क्यों बदल जाता है दिल्ली का स्वाद? दिल्ली की पहचान उसकी ऐतिहासिक इमारतों से जितनी है, उतनी ही उसकी स्ट्रीट फूड संस्कृति से भी है. मानसून के दौरान यह संस्कृति और जीवंत हो जाती है. हल्की बारिश, ठंडी हवा और गर्मागर्म स्नैक्स का मेल ऐसा होता है जिसे दिल्लीवाले हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं. यही कारण है कि मौसम बदलते ही शहर के मशहूर फूड स्पॉट पर भीड़ बढ़ने लगती है. (Image-AI generated)

चांदनी चौक की कचौड़ी आज भी लोगों की पहली पसंद पुरानी दिल्ली की गलियों में बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा रौनक कचौड़ी की दुकानों पर दिखाई देती है. कई दशकों से चल रही पुरानी दुकानों पर सुबह से ही लोगों की कतारें लग जाती हैं. यहां आने वाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उन यादों के लिए भी लौटते हैं जो बचपन से इस जगह से जुड़ी रही हैं. ग्रेटर कैलाश की रहने वाली मीना बताती हैं कि वह करीब चार दशक से बारिश के मौसम में यहां कचौड़ी खाने जरूर आती हैं. उनके मुताबिक, “बारिश होते ही सबसे पहले यही स्वाद याद आता है.” (Image-AI generated)

राम लड्डू और छोले-भटूरे का भी रहता है जलवा लाजपत नगर का नाम आते ही राम लड्डू याद आ जाते हैं. मूंग दाल से बने इन गर्मागर्म लड्डुओं पर कद्दूकस की हुई मूली और तीखी हरी चटनी का स्वाद बारिश में और भी खास लगने लगता है. वहीं छोले-भटूरे के बिना दिल्ली का फूड कल्चर अधूरा माना जाता है. करोल बाग, पहाड़गंज, सरोजिनी नगर और चांदनी चौक की कई दुकानें मानसून में पहले से ज्यादा व्यस्त दिखाई देती हैं. लोगों का मानना है कि बारिश के दिन मसालेदार छोले और फूले हुए भटूरे खाने का मजा ही अलग होता है. (Image-AI generated)

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भुट्टा, जो हर बारिश का स्थायी साथी है सड़क किनारे अंगारों पर सिकता हुआ भुट्टा शायद मानसून की सबसे खूबसूरत तस्वीरों में से एक है. कमला नगर, इंडिया गेट और विश्वविद्यालय क्षेत्र में बारिश के दौरान भुट्टे के ठेले खूब नजर आते हैं. नींबू, नमक और मसाले के साथ परोसा गया भुट्टा लोगों को मौसम का अलग ही आनंद देता है. (Image-AI generated)

मजनू का टीला में तिब्बती स्वाद भी खींचता है भीड़ अगर पारंपरिक स्ट्रीट फूड से अलग कुछ खाने का मन हो तो बारिश में मजनू का टीला भी लोगों की पसंदीदा जगह बन जाता है. यहां गर्मागर्म मोमोज़, थुकपा और अन्य तिब्बती व्यंजन ठंडे मौसम में अलग ही सुकून देते हैं. शाम होते-होते यहां युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. (Image-AI generated)

पकौड़े और चाय, मानसून की सबसे पुरानी जोड़ी अगर किसी से पूछा जाए कि बारिश का पहला स्वाद क्या है, तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा पकौड़े और चाय. करोल बाग, राजौरी गार्डन और कई पुराने बाजारों में मानसून शुरू होते ही पकौड़ों की बिक्री तेजी से बढ़ जाती है. दुकानदारों का कहना है कि गर्मियों के मुकाबले बारिश में ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. आलू, प्याज, पनीर, पालक और हरी मिर्च के पकौड़े सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. कई जगहों पर करेला पकौड़ा भी लोगों की पसंद बन चुका है. (Image-AI generated)

आखिर में एक कप चाय सबको जोड़ देती है दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में लोगों की पसंद भले अलग हो, लेकिन एक चीज लगभग हर जगह समान मिलती है चाय. बारिश में दोस्तों के साथ सड़क किनारे चाय पीना, परिवार के साथ पकौड़े खाना या ऑफिस के बाद किसी ठेले पर रुक जाना, यही छोटे-छोटे पल मानसून को खास बना देते हैं. दिल्ली का मानसून केवल खाने का मौसम नहीं, बल्कि उन यादों का हिस्सा है जो हर साल पहली बारिश के साथ लौट आती हैं. शायद यही वजह है कि राजधानी में बारिश का मतलब सिर्फ भीगना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा स्वादों तक फिर से पहुंच जाना भी है. (Image-AI generated)

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बहराइच में यातायात पुलिस ने 786 वाहनों का चालान किया: नियम उल्लंघन करने पर 9.58 लाख का जुर्माना लगाया – Bahraich News




बहराइच में यातायात पुलिस ने बुधवार को सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 786 वाहनों का चालान कर उन पर जुर्माना लगाया गया। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देश पर यह अभियान नगर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में चलाया गया। यातायात प्रभारी राम प्रसाद यादव के नेतृत्व में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिसमें कुल 9 लाख 58 हजार 100 रुपये का जुर्माना वसूला गया। यातायात प्रभारी ने बताया कि अभियान के दौरान मुख्य रूप से दोपहिया वाहनों पर तीन सवारी बैठाने और गलत या अस्पष्ट नंबर प्लेट लगाने वालों पर कार्रवाई की गई। इस दौरान चार वाहनों को सीज भी किया गया। पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने आम जनता से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को रोका जा सकेगा।



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भारत की नई ‘चिप’ क्रांति, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को सरकार की मंजूरी, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम भी हुआ अपग्रेड


भारत में नई चिप क्रांति का आगाज हो गया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंजूरी दे दी है। यह भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने घरेलू मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी अपग्रेड करने का फैसला किया है। मोदी सरकार का यह कदम भारत में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा।

क्या है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0?

मोदी सरकार ने 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी, जिसके पहले फेज में चिप मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट्स को आकर्षित करने पर फोकस किया गया। अब सरकार ने इसके दूसरे चरण की घोषणा की है, जिसमें केवल चिप मैन्युफैक्चरिंग पर ही फोकस नहीं किया जाएगा, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्तिथि को मजबूत करने का काम किया जाएगा। MeitY ने इस मिशन के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस साल बजट में ही सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान कर दिया था।

ISM 2.0 में सरकार का फोकस भारत में फुल स्टैक सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तैयार करने पर है। यह भारत में चिप निर्माण के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करेगा, जिसमें चिप डिजाइनिंग और फेब्रिकेशन से लेकर एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर जोर दिया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से सेमीकंडक्टर मिशन के लिए यह फंडिंग प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने से लेकर ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करने का काम करेगा।

Image Source : PIBइंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

सरकार का अनुमान है कि ISM 2.0 के जरिए भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक 100 से 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के पहले चरण में भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 45 से 50 बिलियन डॉलर के करीब तक पहुंच गया है। ऐसे में अगले 5 साल में यह मार्केट दोगुना होने की संभावना है।

ISM 2.0 से क्या होगा फायदा?

भारत की सेमीकंडक्टर मार्केट में पैठ बढ़ने का फायदा खास तौर पर उन स्टार्ट-अप्स को मिलेगा, जो चिप डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर डिवाइस, ऑटोमेशन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। खास तौर पर तेजी से बढ़ रहे स्मार्टफोन की डिमांड, इलेक्ट्रिक वीकल्स, डेटा सेंटर, एआई, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट को सीधे तौर पर फायदा पहुंचने वाला है। इसे भारत में नई चिप क्रांति के तौर पर देखा जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा-

मैं आपके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) द्वारा लिए गए सात प्रमुख फैसले रख रहा हूं। पहले दो फैसले वाराणसी (काशी) में बिल्कुल नए तरीके से बुनियादी ढांचा विकसित करने के कार्यक्रम से जुड़े हैं। तीसरा, चौथा और पांचवां फैसला सेमीकॉन 2.0 मिशन (Semiconductor 2.0 Mission) से जुड़ा है, जिसे आज मंजूरी दी गई।

 

 





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BFF आकांक्षा रंजन की शादी में इमोशनल हुईं आलिया भट्ट, कही ऐसी बात, सबकी आंखें हो गईं नम


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Alia Bhatt Emotional Speech At BFF Akansha Ranjan Wedding: आलिया भट्ट का एक वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपनी बेस्ट फ्रेंड आकांक्षा रंजन कपूर की शादी में बेहद इमोशनल नजर आ रही हैं. दोस्तों और परिवार के बीच आलिया ने ऐसी दिल छू लेने वाली बात कही कि वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं. वीडियो में उनके जज्बात और दोस्ती की गहराई साफ दिखाई दी. आखिर आलिया ने ऐसा क्या कहा, जिसने इस पल को इतना खास बना दिया? यही वीडियो अब फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

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आलिया भट्ट का ये वीडियो वायरल हो रहा है.

नई दिल्ली. एक्ट्रेस आकांक्षा रंजन कपूर और ‘मिस्टर एंड मिसेज माही’ फेम डायरेक्टर शरण शर्मा ने 11 जुलाई को शादी के बंधन में बंध गए. मुंबई में अपने परिवार और इंडस्ट्री के कुछ खास दोस्तों की मौजूदगी में दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा और हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए. अब इस ड्रीमी वेडिंग का एक इनसाइड वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दुल्हन आकांक्षा की बचपन की सबसे अच्छी दोस्त और सुपरस्टार आलिया भट्ट की इमोशनल स्पीच ने हर किसी का दिल जीत लिया है.

आकांक्षा रंजन कपूर ने इस शादी का एक प्यारा सा वीडियो शेयर किया है. इस वेडिंग वीडियो में शादी के कई खास और निजी पल देखने को मिले. वीडियो में परिवार और करीबी दोस्तों की स्पीच भी इसमें शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा आलिया भट्ट की स्पीच की हो रही है.

आलिया ने इमोशनल हो कर कही ये बात

आलिया की बारी आई तो बारी मन से उन्होंने अपनी दोस्त के बारे में बात की. उन्होंने कहा- ‘यह लड़की (आकांक्षा) हमारे पूरे ग्रुप को एक साथ जोड़कर रखने वाली ग्लू है. ग्रुप की हर लड़की के साथ उसका एक बेहद खास और व्यक्तिगत रिश्ता है.वह हमेशा हर किसी के सुख-दुख में खड़ी रहती है.’

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सोनम वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई: कोर्ट ने केंद्र-दिल्ली सरकार से जवाब मांगा; वांगचुक 18 दिन से भूख हड़ताल पर, सेहत बिगड़ी


नई दिल्ली22 मिनट पहले

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सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को बहुत जरूरी माना। केंद्र और दिल्ली सरकार से गुरुवार सुबह तक जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर की। इसमें वांगचुक को तुरंत मेडिकल सुविधा और इलाज देने की मांग की गई है।

वांगचुक NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी हालत लगातार गिरती जा रही है। 8:50 किग्रा तक वजन गिर गया है।

वांगचुक की भूख हड़ताल की 3 तस्वीरें…

वांगचुक का वजन 8.5 kg कम हो गया है और मंगलवार को उनका ब्लड प्रेशर 109/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया।

वांगचुक का वजन 8.5 kg कम हो गया है और मंगलवार को उनका ब्लड प्रेशर 109/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया।

उनकी तबीयत बिगड़ने पर आंदोलन कर रहे साथियों ने उन्हें पकड़कर चलवाया।

उनकी तबीयत बिगड़ने पर आंदोलन कर रहे साथियों ने उन्हें पकड़कर चलवाया।

जंतर-मंतर पर मेडिकल टीम समय-समय पर वांगचुक का चेकअप किया जा रहा है।

जंतर-मंतर पर मेडिकल टीम समय-समय पर वांगचुक का चेकअप किया जा रहा है।

याचिका में इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने की मांग

  • सरकार सोनम वांगचुक को तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट, जीवनरक्षक उपचार और जरूरी पोषण उपलब्ध कराए। साथ ही सरकार उनके आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत भी शुरू करे।
  • भूख हड़ताल के बाद से सोनम वांगचुक का करीब 8.25 किलो वजन घट गया है। उन्हें लो ब्लड शुगर, चक्कर, ज्यादा कमजोरी और मांसपेशियां कमजोर होने जैसी दिक्कतें हो रही हैं।
  • किसी की जान खतरे में होने पर सरकार चुप नहीं रह सकती। भूख हड़ताल शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिक की जान बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक भी उनके आंदोलन में शामिल हैं। CJP चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने के बाद बनी थी।

थरूर ने वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा- सोनम वांगचुक जी से मेरी भावनात्मक अपील है कि वे अपना अनशन समाप्त करें। आपने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और किसी भी अनशन का यही उद्देश्य होता है। देश को आगे की लंबी लड़ाई के लिए आपकी आवाज की जरूरत है।

सोमवार से संसद का सत्र शुरू हो रहा है। हमें लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच पर छात्रों के मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इन समस्याओं का समाधान संसद में होना चाहिए, न कि किसी की जान जोखिम में डालने वाले अनशन से। कृपया मेरी अपील स्वीकार करें।

लद्दाख को राज्य की मांग को लेकर वांगचुक 170 दिन जेल में रहे

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए।

सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

इरोम शर्मिला करीब 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं

वांगचुक को भूख हड़ताल करते हुए 18 दिन हो गए हैं। महात्मा गांधी से लेकर जीडी अग्रवाल तक कई नेता-सामाजिक कार्यकर्ता अलग-अलग मांगों को लेकर भूख हड़ताल करते रहे हैं। इरोम शर्मिला मणिपुर से AFSPA हटाने की मांग को लेकर 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं।

3 हफ्ते से ज्यादा भूखा रहने पर दूसरे बॉडी पार्ट्स पर असर

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ये खबरें भी पढ़ें…

वांगचुक 17 दिन से अनशन पर, 8.5kg वजन घटा, उद्धव-महुआ और अखिलेश की भूख हड़ताल खत्म करने की अपील

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं। उनका वजन 8.5kg कम हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, राइटर अरुंधति रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…

कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े, जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी

नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। पूरी खबर पढ़ें…

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भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर




अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित बिल पेश किया गया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया जा रहा है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। भारत ने पिछले महीने आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है। यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। ट्रम्प को मिलेगी छूट देने की शक्ति संशोधित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर उन्हें लगे कि यह अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे इन प्रतिबंधों या टैरिफ में छूट दे सकते हैं। यह बिल अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। ट्रम्प ने कहा कि इस बिल को आगे बढ़ाना ग्राहम की प्राथमिकता थी और इसे उनकी याद में आगे बढ़ाया जा रहा है। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। पहले नोटिफिकेशन से लग जाता था टैरिफ, अब संसद से पास क्यों करा रहे? पहले राष्ट्रपति ट्रम्प अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA), 1977 के तहत नेशनल इमरजेंसी घोषित कर नोटिफिकेशन जारी कर सीधे टैरिफ लगा देते थे। लेकिन 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ एक तरह का आयात शुल्क है और अमेरिकी संविधान के आर्टिकल-1 के अनुसार इसे लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस (संसद) के पास है। इसी वजह से अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% सेकेंडरी टैरिफ लगाने के लिए अलग विधेयक कांग्रेस में लाया गया है, ताकि राष्ट्रपति को स्पष्ट कानूनी अधिकार मिल सके और इस फैसले को अदालत में चुनौती देना या भविष्य में आसानी से बदलना मुश्किल हो। 100% टैरिफ से भारत पर 3 बड़े असर होंगे भारतीय सामान दोगुने महंगे हो जाएंगे: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार है, जहां भारत सालाना करीब 6.5 लाख करोड़ रुपए का सामान निर्यात करता है। 100% टैक्स लगने से भारतीय सामान वहां दोगुने महंगे हो जाएंगे और बिक्री ठप हो जाएगी। बचत से 10 गुना बड़ा घाटा: रूसी तेल से भारत सालाना करीब 60,000 करोड़ रुपए बचाता है, लेकिन अमेरिकी बाजार खोने से होने वाला नुकसान इस बचत से 10 गुना ज्यादा होगा। नौकरियां जाएंगी और रुपया कमजोर होगा: 100% टैरिफ से अमेरिका को होने वाला ₹2.1 लाख करोड़ का कपड़ा, हीरा और दवा निर्यात ठप हो जाएगा। इससे इन उद्योगों में काम करने वाले करीब 15 से 20 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं। निर्यात घटने से देश में डॉलर की कमी होगी, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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UK संग भारत का बड़ा दांव! पाकिस्तान के $38 मिलियन एक्सपोर्ट पर छाया खतरा


यूके और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज 15 जुलाई से लागू हुआ है. इससे भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इस समझौते के तहत भारत के 1,143 टेक्सटाइल और कपड़े के प्रोडक्ट्स अब ब्रिटेन के मार्केट में बिना किसी ड्यूटी के पहुंच सकेंगे. पहले भारतीय निर्यातकों को 12% तक ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को पहले से ही ड्यूटी-फ्री का फायदा मिल रहा थी. अब भारत को भी वही फायदा मिलने से मार्केट कॉम्टिशन बदल सकता है.

कई मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समझौते का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के निर्यात पर भी पड़ सकता है. खासकर टेक्सटाइल, होम टेक्सटाइल और चावल जैसे क्षेत्रों में भारत की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने की संभावना है.

अब भारत को मिला बराबरी का मौका

BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक भारत को ब्रिटेन में कपड़े भेजने पर 12% तक ड्यूटी देनी पड़ती थी. दूसरी ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश को Developing Countries Trading Scheme (DCTS) के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा मिलती थी. इसी वजह से भारतीय कंपनियां कीमत के मामले में पीछे रह जाती थीं. अब FTA लागू होने के बाद यह अंतर खत्म हो गया है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ होम टेक्सटाइल की बात करें तो UK के आयात में पाकिस्तान की हिस्सेदारी करीब 55% है, जबकि भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 6-7% है. उनका मानना है कि अब भारत के पास इस अंतर को धीरे-धीरे कम करने का अच्छा मौका है.

पाकिस्तान पर कितना असर पड़ सकता है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के करीब 38.5 मिलियन डॉलर के ऐसे निर्यात पर दबाव आ सकता है, जहां भारत को अब टैरिफ का फायदा मिलेगा. हालांकि, सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश पर पड़ने का अनुमान है. साथ ही, पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जिन्हें भारत से कड़े कॉम्टिशन का सामना करना पड़ सकता है.

टेक्सटाइल पाकिस्तान की इकोनॉमी का अहम हिस्सा है. अगर ब्रिटिश खरीदार भारतीय टी-शर्ट, शर्ट, बेडशीट, तौलिए और अन्य होम टेक्सटाइल प्रोडक्शन कम कीमत पर खरीदने लगते हैं, तो पाकिस्तान के निर्यातकों के सामने चुनौती बढ़ सकती है. ऐसे में उन्हें लागत कम करने और नए बाजार तलाशने की जरूरत पड़ सकती है.

चावल और दूसरे सेक्टर में भी मुकाबला

इस समझौते का असर केवल कपड़ा इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा. चावल, प्रोसेस्ड फूड, दवाइयां, केमिकल, प्लास्टिक और दूसरे इंडस्ट्रियल उत्पादों में भी भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है. भारत पहले से ही ब्रिटेन को पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक चावल निर्यात करता है. FTA के बाद भारत की हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना है. वहीं दवा उद्योग में भी भारत पहले से मजबूत स्थिति में है और कम टैरिफ का फायदा इस सेक्टर को भी मिल सकता है.

भारत के टेक्सटाइल क्लस्टर्स को मिलेगा फायदा

FTA से तिरुप्पुर, सूरत, लुधियाना, भदोही, मुरादाबाद और पानीपत जैसे टेक्सटाइल क्लस्टर्स में उत्पादन और निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. इससे MSME, छोटे उद्योगों, बुनकरों, महिला कामगारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को ज्यादा काम मिल सकता है.

ब्रिटेन का टेक्सटाइल और कपड़ों का बाजार करीब 28.8 अरब डॉलर का है, जबकि भारत का वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात लगभग 37 अरब डॉलर का है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारतीय कंपनियां अच्छी क्वालिटी, समय पर सप्लाई और कॉम्टिटेटिव कीमत बनाए रखती हैं, तो भारत ब्रिटेन के बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है.



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कटनी में चुनावी रंजिश में लाठी-डंडे चले: 3 लोग गंभीर घायल, गांव में पुलिस तैनात; 6 आरोपियों पर केस दर्ज – Katni News




कटनी जिले के बाकल थाना क्षेत्र के ग्राम कूड़ा में पुरानी चुनावी रंजिश को लेकर मंगलवार देर रात दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। लाठी-डंडों से हुए हमले में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई, जिसे देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गाली-गलौज का विरोध करने पर किया हमला पुलिस के अनुसार, 71 वर्षीय राजकुमार लोधी ने बाकल थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि गांव के श्रीकृष्ण गेट के पास शिव कुमार शर्मा, गिरजा बाई शर्मा और उनके छह अन्य साथी पुरानी चुनावी रंजिश के चलते गाली-गलौज कर रहे थे। जब इंद्रपाल सिंह लोधी, अनार सिंह लोधी और जागेश्वर लोधी ने विरोध किया तो आरोपियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने तीनों के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर लगातार वार किए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गांव में तनाव, भारी पुलिस बल पहुंचा घटना के बाद गांव में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलते ही बाकल और बहोरीबंद थाना पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। फिलहाल हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। बाकल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इनमें धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), धारा 191(2) एवं 191(3) (बलवा), धारा 296ए (गाली-गलौज) और धारा 190 (गैरकानूनी जमाव) सहित अन्य धाराएं शामिल हैं। तीनों घायलों का इलाज जारी गंभीर रूप से घायल इंद्रपाल, अनार सिंह और जागेश्वर लोधी को बहोरीबंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, अधिक रक्तस्राव के कारण उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



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