Sunday, July 19, 2026
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यूपी-दिल्ली-पंजाब समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट: अमरनाथ-वैष्णो देवी यात्रा रोकी गई; मध्यप्रदेश में बारिश के लिए गधों को गुलाब जामुन खिलाए




देश में मानसून के दूसरी बार एक्टिव होने के साथ ही उत्तर भारत के सभी 14 राज्यों में बारिश का तेज दौर जारी है। इन राज्यों में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं। शनिवार को भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से उत्तराखंड की भी दो प्रमुख तीर्थयात्राएं प्रभावित हुईं। केदारनाथ मार्ग पर घोड़े-खच्चर की सेवाएं रोक दी गईं और कैलाश-मानसरोवर यात्रियों का एक जत्था भी रुक गया, क्योंकि IMD ने राज्य भर में बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी थी। इधर, मौसम विभाग ने अगले 5 दिन उत्तर भारत के मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा अनिश्चितकालीन के लिए रोक दी है। रविवार को भी उत्तराखंड और सिक्किम, बंगाल के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्यप्रदेश में बारिश नहीं हो रही है। एमपी के भोपाल में शनिवार को बारिश के लिए एक अनोखा टोटका किया गया। कुछ लोगों ने गधों को गुलाब जामुन खिलाए। दावा है कि ऐसा करने से इंद्रदेव खुश होंगे और बारिश होगी। 19 जुलाई को देश के ऊपर छाए बादलों की सैटेलाइट इमेज… देशभर के मौसम से जुड़ी तस्वीरें… अरुणाचल में बाढ़ से डेढ़ लाख प्रभावित, केदारनाथ रूट पर लैंड स्लाइड अरुणाचल में बाढ़ और भूस्खलन के इस दौर में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, 29 लोग घायल हुए हैं और 1,49,257 लोग प्रभावित हुए हैं। मानसून की मार से कुल 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं। इधर, पिथौरागढ़ में, कैलाश-मानसरोवर यात्रा का चौथा जत्था, जिसमें 50 तीर्थयात्री शामिल हैं धारचूला बेस कैंप में रोक दिया गया है। बेस कैंप के इंचार्ज धन सिंह बिष्ट ने बताया कि गरबाधार में भूस्खलन के कारण गुंजी जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। अगले 2 दिन के मौसम का हाल 20 जुलाई: 21 जुलाई:



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श्मशान सिद्धि के लिए पति का सिर काटा: अमावस्या के मुहूर्त में हत्या, घटनास्थल से रंगोली-किताबें-लकड़ियां-खोपड़ी मिलने का दावा; किशनगंज की मोमिना का कबूलनामा – Kishanganj (Bihar) News




‘जहां खोपड़ी मिली है, वहीं पर रंगोली, किताबें, लकड़ियां और भोजपत्र भी मिले हैं। इसका मतलब समझते हैं आप? मोमिना 22 दिन पहले कमाख्या में अंबूबाची मेले से लौटी, इसके बाद उसने अमावस्या की रात श्मशान सिद्धि की है। वह पहले हिंदू थी। बाद में मुस्लिम बनी, उसने डेढ़ साल की बेटी और दूसरे पति की बलि दी है। 2022 में उसने पहले पति को बीमार कर खाट पर ही खत्म कर दिया। दूसरी बलि के बाद अब वह क्या करेगी, यह सोचकर पूरे गांव के लोग डरे हुए हैं। पुलिस उसे जेल में ही रखे, यही हम सबके लिए बेहतर होगा। अगर वह बाहर आई तो पूरे गांव का नाश कर देगी।’ ये बातें किशनगंज के उदगारा पंचायत के रहने वाले राज खान ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहीं। राज खान मृतक इमाम का पड़ोसी और करीबी मित्र रहा है। बुधवार दोपहर मोमिना के दूसरे पति का सिर कटा शव बागडोगरा के हंसखुआ चायबगान में जंगल में मिला। पुलिस ने धड़ से करीब 5 किलोमीटर दूर उसका सिर फांसीदेवा से बरामद किया। इस मामले में पश्चिम बंगाल की बागडोगरा पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके कथित बॉयफ्रेंड को गिरफ्तार कर पूछताछ की है। जिसमें दोनों ने हत्या के आरोप कबूल किए हैं, और उसने कई खुलासे भी किए। क्या मोमिना ने तंत्र साधना के लिए पति की हत्या की? घटनास्थल पर साधना से जुड़े क्या-क्या सबूत मिले, उसकी डेढ़ साल की बेटी और पति की मौत कैसे हुई? उसने अब तक कितनी शादियां कीं? तंत्र-मंत्र को लेकर पड़ोसी राज खान और ग्रामीण क्या दावा कर रहे हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सिलसिलेवार पढ़िए, मोमिना की पूरी कहानी
पुलिस पूछताछ में मोमिना ने बताया कि उसका असली नाम तुम्पा घोष है। साल 2004 में वह 17 साल की थी और पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी के खालपाड़ा इलाके में रहती थी। उसने बताया कि जब वह 8-9 साल की थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। पिता सिलिगुड़ी में रिक्शा चलाते थे। आर्थिक तंगी के कारण कुछ समय तक उन्होंने उसे अपने एक दोस्त के घर रखा, लेकिन करीब दो महीने बाद वह वहां से भागकर अपने पैतृक घर खालपाड़ा लौट आई और चाचा के परिवार के साथ रहने लगी। मोमिना के मुताबिक, साल 2005 में वह काम की तलाश में फिर सिलिगुड़ी पहुंची। अगले तीन साल तक उसने अलग-अलग दुकानों और अन्य जगहों पर काम किया। इसी दौरान साल 2008 में उसकी मुलाकात किशनगंज निवासी अख्तर हुसैन से हुई, जो वहां मजदूरी करता था। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। लिव-इन के बाद शादी, फिर तुम्पा से मोमिना बनी
मोमिना ने पुलिस को बताया कि वह और अख्तर करीब दो साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद साल 2011 में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वह किशनगंज आकर अख्तर के घर रहने लगी। यहीं उसका नाम बदलकर तुम्पा से मोमिना कर दिया गया। शादी के एक साल बाद उसने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद घर में सास, ससुर और देवर इमाम थे। इमाम तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटियों से लोगों के इलाज का काम करता था। उसने अपना एक अलग कमरा बना रखा था, जहां अलग-अलग तरह के लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे और इमाम उन्हें जड़ी-बूटियां देता था। घर में रहने के दौरान वह धीरे-धीरे देवर के काम को समझने लगी। इसी दौरान उसे पता चला कि इस काम में तांत्रिक गुरु सुदीप उसकी मदद करता है। यहीं से तंत्र-मंत्र की दुनिया में बढ़ा कदम
इमाम के पड़ोसी और दोस्त राज खान ने बताया कि सुदीप पश्चिम बंगाल के बागडोगरा का रहने वाला था। वह इमाम को तंत्र-विद्या में मदद करता था और बदले में उससे मोटी रकम वसूलता था। राज खान ने बताया कि मोमिना घर में चल रही पूरी तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया को करीब से देख रही थी। देवर इमाम घर बैठे ही अच्छी कमाई कर रहा था, जबकि पति अख्तर सिलिगुड़ी में रहता था और सप्ताह में सिर्फ एक बार घर आता था। बेटे के जन्म के बाद मोमिना और उसके पति पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। पति की कमाई से घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में मोमिना ने देवर के काम में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। वह समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को इमाम के पास लाती थी, जिसके बदले उसे कमीशन मिलता था। इसी दौरान उसकी देवर इमाम से नजदीकियां बढ़ने लगीं। जब इसकी जानकारी पति अख्तर को हुई तो उसने विरोध किया। इसके बाद, राज खान के मुताबिक, साल 2014 में मोमिना और इमाम घर छोड़कर चले गए और दोनों ने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद दोनों तंत्र-मंत्र के जरिए लोगों का इलाज करने लगे और इसी काम से कमाई करने लगे। दोनों करीब 15 साल तक साथ रहे और उनके चार बच्चे हुए। गुरु सुदीप से हुई नई शुरुआत
राज खान के मुताबिक, साल 2018 में मोमिना और इमाम के बीच पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद दोनों के बीच लगातार अनबन होती रही। इमाम के साथ काम करते-करते मोमिना के संपर्क काफी बढ़ गए थे। वह इमाम के पूरे कामकाज और तंत्र-मंत्र की जानकारी रखने लगी थी। उसे यह भी पता चल गया था कि इमाम को यह विद्या कहां से मिली और कौन उसकी मदद करता है। राज खान के अनुसार, मोमिना अब खुद इस काम को करना चाहती थी। इसी वजह से उसने साल 2019 में इमाम के गुरु सुदीप से मुलाकात की। वहां उसने अपना पुराना नाम तुम्पा बताया और अपनी पूरी जीवन यात्रा सुनाई। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। राज खान का दावा है कि यहीं तय हुआ कि सुदीप मोमिना को तंत्र-विद्या की सिद्धि कराएगा और इलाज करने की विद्या भी सिखाएगा। राज खान के मुताबिक, इसके बाद दोनों की मुलाकातें लगातार बढ़ने लगीं। मोमिना पति से छिपकर सुदीप से मिलने लगी और उसके बताए रास्ते पर चलने लगी। तारापीठ से कमाख्या तक तंत्र साधना के लिए पहुंची
राज खान के अनुसार, साल 2020 में मोमिना सुदीप के साथ तारापीठ गई, जहां उसे भीमा नाम के एक तांत्रिक से मिलना था। वहां पहुंचने पर पता चला कि भीमा की दो साल पहले मौत हो चुकी है। उसके बताए पते पर कोई दूसरा व्यक्ति उसी साधना में लगा था, लेकिन उसने मोमिना को विद्या सिखाने से इनकार कर दिया। हालांकि उसने कमाख्या का एक पता दिया। इसके बाद दोनों कमाख्या पहुंचे, जहां हरिशंकर नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई। राज खान का दावा है कि हरिशंकर ने मोमिना को विद्या सिखाने का वादा किया, लेकिन सही मुहूर्त का इंतजार करने को कहा। बाद में तय मुहूर्त पर उसने मोमिना को तंत्र-विद्या सिखाई। हालांकि, राज खान के मुताबिक, यह विद्या पूरी नहीं थी क्योंकि एक बड़ा अनुष्ठान बाकी था। उसका मानना है कि वही अनुष्ठान कथित मानव बलि से जुड़ा था। बेटी की मौत और पहले पति की मौत पर भी सवाल
राज खान के मुताबिक, साल 2020 में हरिशंकर से मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद मोमिना की डेढ़ साल की बेटी की मौत हो गई। उनका दावा है कि आज तक किसी को उसकी मौत की असली वजह पता नहीं चल सकी और पुलिस भी इसकी जांच नहीं कर पाई। बच्ची को जल्दबाजी में दफना दिया गया। राज खान ने बताया कि इसके बाद साल 2022 में मोमिना का पहला पति अख्तर हुसैन बीमार पड़ गया। वह कई महीनों तक बिस्तर पर रहा। राज खान का दावा है कि उसे कोई स्पष्ट बीमारी नहीं थी, लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इलाज के नाम पर बढ़ता नेटवर्क राज खान के मुताबिक, इसके बाद मोमिना अपनी सीखी हुई तंत्र-विद्या के जरिए लोगों का इलाज करने लगी और कमाई के मामले में इमाम से भी आगे निकल गई। हालांकि वह इमाम के साथ ही रहती थी, लेकिन छिपकर सुदीप से मिलती रहती थी और उसी के इशारे पर काम करती थी। राज खान का कहना है कि यह सिलसिला करीब चार साल तक चलता रहा। मनचाही इच्छा के लिए श्मशान साधना की
राज खान के मुताबिक, साल 2026 आते-आते मोमिना अपने रोजमर्रा के काम से ऊब चुकी थी और कुछ बड़ा करना चाहती थी। उसने सुदीप के साथ मिलकर श्मशान साधना करने की योजना बनाई। राज खान का दावा है कि कमाख्या के तांत्रिकों ने उन्हें बताया था कि इस साधना के पूरा होने पर मनचाही इच्छा पूरी होती है और दुश्मनों का नाश होता है। राज खान के अनुसार, हत्या से करीब दो सप्ताह पहले मोमिना कमाख्या में आयोजित अंबूबाची मेले में गई थी। वहां वह तीन दिन तक रुकी और कई पुजारियों व तांत्रिकों से श्मशान साधना की जानकारी ली। इसी दौरान साधना का मुहूर्त तय किया गया, जो 13 जुलाई 2026 की शाम 6:49 बजे से 14 जुलाई 2026 की दोपहर 3:12 बजे तक था। यह समय अमावस्या का था। राज खान के मुताबिक, इस साधना के लिए एकाक्षी नारियल, सियार सिंगी, हत्था जोड़ी, कमलगट्टे की माला, भोजपत्र, श्मशान की भस्म और मानव खोपड़ी जैसी सामग्री जुटाई गई। किशनगंज के पुजारी ने सामाग्रियों के बारे में बताया
श्मशान सिद्धि और समाग्री को लेकर दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने किशनगंज स्थित एक मंदिर के पुजारी से बातचीत की, जिसमें उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि घटनास्थल से जो सामान मिलने का दावा किया गया है वह श्मशान सिद्धि के उपयोग में आते हैं, साथ ही कुछ और भी सामाग्रियां जुटाई जाती है। ऐसे रची गई हत्या की साजिश
हत्या के बारे में मोमिना ने पुलिस को बताया कि सुदीप ने हत्या के दिन जलपाईगुड़ी से अपने बहनोई कौशिक नाथ को बुलाया। कौशिक पेशे से कसाई था, इसलिए वह अपने साथ धारदार हथियार भी लेकर आया। सोमवार दोपहर वह सुदीप के घर पहुंचा, जहां उसे खाना खिलाया गया। इधर, मैंने इमाम को पेट दर्द का बहाना बनाकर बागडोगरा बुलाया और वहां से उसे हसखुआ चाय बागान ले गई। वहां पहले से सारी तैयारियां और लोग मौजूद थे। सभी ने पहले पास की नहर में स्नान किया और फिर भोजन किया। खाना खाने के कुछ देर बाद, जब इमाम एक ओर बैठा था, तब मैंने कौशिक नाथ के हथियार से उस पर पहला वार किया। रात करीब 11 बजे हुए इस हमले में इमाम जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसके गले पर लगातार वार किए और सिर धड़ से अलग कर दिया गया। बाद में सिर को करीब पांच किलोमीटर दूर फांसीदेवा इलाके में ले जाया गया। राज खान का दावा- तंत्र सिद्धि के लिए दी गई बलि
राज खान का दावा है कि तंत्र-विद्या की सिद्धि के लिए ही इमाम की हत्या की गई। उनका कहना है कि जहां सिर बरामद हुआ, वहां तंत्र-मंत्र से जुड़े कई सामान मिले। हालांकि बारिश के कारण काफी सामान इधर-उधर हो गया था, लेकिन रंगोली के निशान, मंत्र लिखे कागज, भोजपत्र और अन्य सामग्री मिली, जिससे उनके अनुसार यह मामला सामान्य हत्या नहीं बल्कि तांत्रिक अनुष्ठान से जुड़ा प्रतीत होता है। पुलिस का क्या कहना है?
पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। हत्या के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। घटनास्थल से बरामद हुए एक-एक सामान को हासिल कर इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, मृतक के कटे हुए सिर और हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।



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सीएम के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री: सिंधिया ने ‘हाईकमान’ के लिए खरीदीं चूड़ियां; महिला मंत्री का ‘ड्रिंक’ वाला प्रयोग – Madhya Pradesh News


मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा।

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हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री सीएम डॉ. मोहन यादव के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी। इसका वीडियो सामने आया है। अब लोग इसे चटकारे लेकर शेयर कर रहे हैं।

वाकया टीकमगढ़ का है। यहां आयोजित कार्यक्रम के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव को खजुराहो के लिए रवाना होना था। वे हेलिपैड पर पहुंच चुके थे, लेकिन मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे। उन्हें भी सीएम के साथ जाना था।

सीएम हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे। हेलिकॉप्टर का दरवाजा भी बंद हो गया था और उसके पंखे घूमने लगे थे। हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के लिए तैयार था।

तभी ‘आज कुछ तूफानी करते हैं’ वाले अंदाज में मंत्री दिलीप अहिरवार की एंट्री हुई। वे दौड़ लगाते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और आखिरकार उसमें सवार हो ही गए।

खरी बात ये है कि राजनीति में भी ऊंची उड़ान भरने के लिए ऐसी ही टाइमिंग और रनिंग जरूरी होती है। मंत्री दिलीप अहिरवार ने इसका शानदार डेमो दे दिया।

टीकमगढ़ में सीएम के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी।

सिंधिया ने पत्नी के लिए ली चूड़ियां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक दिलचस्प वीडियो सामने आया है। इसमें वे अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां लेते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चूड़ियां लेते समय उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ये मेरी हाईकमान के लिए। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

दरअसल, सिंधिया अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वहां लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जानकारी ली।

उनकी नजर चूड़ियों के एक स्टॉल पर पड़ी। वे वहां रुके और स्टॉल संचालित कर रहीं महिला सपना से बातचीत की। साथ ही चूड़ियां पसंद आने पर पत्नी के लिए गिफ्ट के रूप में ले ली।

खरी बात ये है कि राजनीति में लंबे समय से रंग जमा चुके सिंधिया अच्छी तरह जानते हैं कि अगर घर की “हाईकमान” खुश रहे, तो हम भी खुश।

अशोकनगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी के लिए चूड़ियां खरीदी।

अशोकनगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी के लिए चूड़ियां खरीदी।

विजयवर्गीय बोले- मैं सठिया गया हूं ‘मैं 70 साल का हो गया हूं। यूं ही सठिया गया हूं।’ इंदौर के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जैसे ही यह बात कही, वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे।

दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय कह रहे थे कि मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं, पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही है। किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है।

अब सवाल यह है कि आखिर उनका यह संदेश किसके लिए था। उनके इस बयान के राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय सरकार में अपनी उपेक्षा का दर्द जाहिर कर चुके हैं।

खरी बात ये है कि विजयवर्गीय के बयान अक्सर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे में उनका यह बेबाक अंदाज एक बार फिर नई अटकलों को जन्म दे गया।

इंदौर में एक कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं सठिया गया हूं।

इंदौर में एक कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं सठिया गया हूं।

मंत्री ने बात समझाने लैब सजा दी नेताओं पर कोई कुछ आरोप लगा दे तो देखने में आता है कि वे भी पलटवार करते हैं, प्रत्यारोप करते हैं, सफाई देते हैं, तथ्य रखते हैं। लेकिन मंत्री प्रतिमा बागरी ने तो पूरी लैब सजा दी। फिर ‘ड्रिंक’ वाला एक्सपेरिमेंट कर जवाब दिया।

मामला उनकी जाति से जुड़े विवाद का है, जिसमें जांच कमेटी ने माना कि मंत्री प्रतिमा बागरी एससी वर्ग से ही आती हैं। उनका जाति प्रमाण पत्र एकदम सही है।

मंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए तीन कप लिए। एक में चाय, दूसरे में कॉफी और तीसरे में ग्रीन टी ली। फिर उन्हें अलग-अलग रॉयल स्टैग के ग्लास में भर दिया। मंत्री ने बताया कि अगर वे नहीं बताएं कि इसमें क्या है, तो ये कोई नहीं बता पाएगा।

मंत्री ने बताया कि क्या इन पेय पदार्थों को दूसरे ग्लास में शिफ्ट करने से इनकी परिभाषा बदल जाएगी। क्या प्रतिमा बागरी पर आरोप लगाने से उनकी परिभाषा बदल जाएगी। मंत्री ने बताया कि उन पर लगे आरोप भी कुछ ऐसे ही हैं।

अब मंत्री का अपनी बात समझाने का ये तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है।

मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक प्रयोग कर बताया कि जाति मामले में उन्हें बेवजह घसीटा गया।

मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक प्रयोग कर बताया कि जाति मामले में उन्हें बेवजह घसीटा गया।

और अब अंदर की बात..

सुपरवाइजर ने करा दिया नुकसान एक सरकारी भवन के सुपरवाइजर की हठधर्मिता की वजह से सरकार को हजारों रुपए का नुकसान हो गया। अब ये नुकसान वन टाइम नहीं है, बल्कि हर बार ही सरकार को हजारों रुपए की चपत लगने वाली है।

दरअसल, राजधानी में एक सरकारी भवन है, जो निजी संस्थाओं को कार्यक्रम के आयोजन के लिए किराए पर दिया जाता है। सत्ता से बेहद नजदीकी रखने वाला एक संगठन हर बार यहां कार्यक्रम का आयोजन करता आ रहा है। इसके लिए ये संगठन बाकायदा किराया देता था और रसीद भी कटवाता था।

कुछ दिनों पहले ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने इस भवन के सुपरवाइजर से मंच पर रखी टेबल हटाने के लिए कहा, तो सुपरवाइजर ने इनकार कर दिया।

फिर क्या था, इसकी शिकायत सरकार से की गई। सरकार ने सरकारी भवन का संचालन करने वाले विभाग के एमडी से कहा। एमडी ने सुपरवाइजर को डांटने के साथ ये भी कहा कि अब इनसे किराया मत लेना।

इनपुट सहयोग – शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़), संजीव यादव (अशोकनगर), संतोष शितोले (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना)

ये भी पढ़ें – भाजपा विधायक की शपथ- मैं नशा करूंगा: कांग्रेस विधायक बोले- गद्दारों का मुंह काला करके भेजूंगा

सिंगरौली में भाजपा विधायक रामनिवास शाह एक कार्यक्रम में नशा मुक्ति की शपथ दिला रहे थे, लेकिन उन्होंने नशा न करने की बजाय नशा करने की शपथ दिला दी। विधायक ने शपथ दिलाते हुए कहा- ‘मैं शपथ लेता हूं कि.. मैं जीवन में.. कभी नशा करूंगा..।’ दरअसल, वे ‘नहीं’ शब्द बोलना भूल गए। पूरी खबर पढ़ें



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बिजली शिकायतों का निस्तारण न होने पर होगी कार्रवाई: लखनऊ में एमडी बोले- बिना समाधान किए बंद नहीं होगी शिकायत, हर महीने लगेगा विशेष समाधान शिविर – Lucknow News




लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक संदीप भागिया ने स्पष्ट निर्देश दिया। बिजली बिल, खराब मीटर, नया कनेक्शन या बिजली चोरी से जुड़ी शिकायतों के समाधान में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ेगी। संदीप भागिया ने निर्देश दिए हैं कि टोल फ्री नंबर 1912 पर दर्ज हर शिकायत का समयबद्ध और वास्तविक निस्तारण अनिवार्य होगा । अगर किसी अधिकारी ने बिना समाधान किए फर्जी तरीके से शिकायत बंद दिखाई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिकायतों को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी मध्यांचल निगम मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एमडी ने बताया कि कुछ मामलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजी गई शिकायतों का भी समाधान नहीं किया गया। ऐसे मामलों की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को गलत बिजली बिल, खराब मीटर और नए कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए विभाग रोजाना समीक्षा कर रहा है। सोलर कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की तकनीकी दिक्कतों का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा। उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जा रही है एमडी ने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते बिजली भार को देखते हुए नए उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जर्जर बिजली तारों और पुराने खंभों को बदलने के लिए जल्द ही विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे फॉल्ट और बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके। हर महीने विशेष समाधान शिविर आयोजित होगा उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एलडीए और नगर निगम की तर्ज पर अब हर महीने मध्यांचल निगम मुख्यालय में विशेष समाधान शिविर आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों में नए कनेक्शन, गलत बिलों का संशोधन, लोड बढ़ाने, खराब मीटर बदलने और अन्य समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया जाएगा। शिविर की तारीख जल्द घोषित की जाएगी। इसके अलावा अमौसी जोन के मोहनलालगंज और मलिहाबाद क्षेत्र में नए कार्यालय खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। चोरी रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा बिजली चोरी रोकने के लिए लेसा और विजिलेंस की संयुक्त टीम शहर के संवेदनशील इलाकों में सघन अभियान चलाएगी। होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, नर्सिंग होम और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भी जांच होगी। कटिया लगाकर अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। एमडी ने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध और पारदर्शी बिजली सेवा उपलब्ध कराना निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है।



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घर पर बनाएं स्वादिष्ट-हेल्दी कुकीज, बच्चों की सेहत और स्वाद दोनों रहेगा फिट, जानें रेसिपी


Last Updated:

कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति ने बच्चों के लिए घर पर बनने वाले हेल्दी कुकीज की आसान रेसिपी साझा की है. इन कुकीज में मैदा और चीनी की जगह दरदरा गेहूं का आटा और गुड़ का उपयोग किया जाता है, जबकि सूखा नारियल और सौंफ स्वाद व पोषण बढ़ाते हैं. बिना प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम रंग और पाम ऑयल के तैयार होने वाले ये कुकीज बच्चों के लिए स्वादिष्ट और बेहतर होते हैं

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कोडरमा: बच्चों को कुकीज और बिस्कुट काफी पसंद होते हैं. बाजार में कई तरह के कुकीज मिलते हैं. हालांकि, बाजार में मिलने वाले अधिकतर कुकीज में मैदा, अधिक मात्रा में चीनी, प्रिजर्वेटिव और पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में बच्चों के साथ ही बड़ों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं. अभिभावक भी बच्चों की जिद के आगे उन्हें बिस्कुट और कुकीज दिलाते तो हैं लेकिन, उनकी सेहत को लेकर चिंतित भी रहते हैं. हालांकि, बहुत से लोग घरों पर सेहतमंद चीजों से बिस्कुट और कुकीज बनाते हैं. कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति भी अपने घर पर गेहूं के आटे और गुड़ से तैयार होने वाले हेल्दी कुकीज बनाती हैं. उन्होंने बाकी लोगों के लिए इसकी रेसिपी भी बताई है.

राधिका प्रजापति ने बताया कि बच्चों को खुश रखने के साथ उनकी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि घर पर आसानी से बनने वाले हेल्दी कुकीज तैयार करने के लिए मैदे की जगह दरदरा पिसा हुआ गेहूं का आटा, चीनी की जगह गुड़, कद्दूकस किए हुए सूखे नारियल और सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है. इससे कुकीज का स्वाद भी बढ़ता है और पोषण भी मिलता है. उन्होंने बताया कि कुकीज बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में दरदरा पिसा हुआ गेहूं का आटा लें. इसमें कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल और सौंफ मिलाएं. इसके बाद थोड़ा सा रिफाइंड या देशी घी डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें गुड़ की चाशनी डालकर नरम आटा गूंथ लें.

बिना किसी प्रिजर्वेटिव और कृत्रिम रंग के कई दिनों तक कर सकते हैं इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि आटा तैयार होने के बाद उसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर गोल आकार दें. चाहें तो किसी सांचे की मदद से कुकीज का आकार बनाया जा सकता है. ऊपर से कांटे या अन्य डिजाइनिंग टूल की सहायता से आकर्षक डिजाइन बनाएं. इसके बाद इन्हें धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक इनका रंग सुनहरा न हो जाए. कुकीज ठंडे होने के बाद इन्हें एयरटाइट कंटेनर में सुरक्षित रखा जा सकता है और कई दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि घर पर बने ये कुकीज न केवल बच्चों को पसंद आते हैं. बल्कि इनमें किसी प्रकार का कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव या पाम ऑयल भी नहीं होता. गुड़ प्राकृतिक मिठास के साथ आयरन सहित कई पोषक तत्वों का स्रोत माना जाता है, जबकि गेहूं का आटा फाइबर प्रदान करता है. नारियल और सौंफ स्वाद के साथ सुगंध भी बढ़ाते हैं.

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Rajneesh Singh

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48 घंटे में ही पकड़ा गया ट्रैक्टर चोर: चोरी करने के बाद जंगल में छुपाया, नाबालिग से रेप का आरोपी भी गिरफ्तार – Sikar News




सीकर की जीणमाता थाना पुलिस ने ट्रैक्टर चोरी के आरोपी को 48 घंटे के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चोरी हुए ट्रैक्टर को जंगल से बरामद कर लिया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जीणमाता थाना SHO राकेश कुमार मीणा ने बताया कि 17 जुलाई को ठेहट गांव निवासी श्रवण कुमार ने मुकदमा दर्ज करवाया कि उनकी रूपगढ़ गांव में ब्लॉक फैक्ट्री है। जहां उन्होंने 16 जुलाई की रात को ट्रैक्टर खड़ा कर दिया था। इसके बाद वह काम के लिए दांतारामगढ़ चले गए थे। वापस आकर देखा तो ट्रैक्टर नहीं मिला। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले आरोपी रणजीत छबरवाल (26) निवासी ठेहट को लोसल में दबिश देकर पकड़ा। जिसने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने ट्रैक्टर को पास ही एक जंगल में छिपाया है। ऐसे में आरोपी की निशानदेही पर ट्रैक्टर भी बरामद कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछता जारी है। नाबालिग से रेप का आरोपी गिरफ्तार सीकर पुलिस ने नाबालिग लड़की से रेप के मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया है। 2023 में जब नाबालिग लड़की की उम्र करीब 15 साल की तब आरोपी उसे अपने साथ बहला-फुसलाकर ले गया था। इसके बाद आरोपी ने नाबालिग लड़की के साथ रेप किया। इस मामले में आरोपी गिरफ्तार होने के बाद जेल गया। जमानत मिलने के बाद एक बार फिर वह नाबालिग लड़की को अपने साथ लेकर चला गया। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ जारी है।



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मसौढ़ी में तेज बारिश, किसानों को मिली राहत: धान रोपनी के कार्य में तेजी आएगी – Patna News




पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र और लखनौर-बिदौली पंचायत में 18 जुलाई को शाम 5:30 बजे से तेज बारिश हो रही है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे बड़ी राहत मिली है, खासकर धान की रोपनी के लिए। बारिश न होने के कारण क्षेत्र में धान की रोपनी जैसे कृषि कार्यों में काफी परेशानी आ रही थी। खेतों में पानी की कमी के चलते किसान बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे। लगातार हो रही बारिश से खेतों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है, जिससे धान की रोपनी का कार्य शुरू हो गया है। किसान अब उत्साहपूर्वक खेती के कार्यों में जुट गए हैं। हालांकि, कुछ ऊंचे इलाकों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में पानी की पूर्ति हो गई है। कुछ स्थानों पर ठनका (बिजली) भी गिरी है, लेकिन किसी खास क्षति की सूचना नहीं है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण भूजल स्तर भी घट गया था। इस बारिश से जमीन के साथ-साथ भूजल स्तर में भी वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। लगातार मोटर पंपों से पानी खींचने के कारण बिजली पर भी दबाव था, जिससे बार-बार बिजली कटौती हो रही थी। अब बिजली की कमी के बावजूद खेती का काम शुरू हो गया है। धान के अलावा मक्का, ज्वार, जिनोरा, बाजरा और सब्जियों की खेती में भी यह बारिश सहायक सिद्ध हो रही है। आज की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है और पेड़-पौधों में भी हरियाली छा गई है, जिससे मौसम खुशनुमा हो गया है।



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गहराया जल संकट, अब दो दिन छोड़कर मिलेगा पानी: मन्दसौर की नगर पालिका ने बदली व्यवस्था, जल स्रोतों का स्तर घटा – Mandsaur News




मंदसौर जिले में पेयजल संकट गहरा गया है। पिछले 10 दिनों से बारिश न होने के कारण जल स्रोतों का स्तर लगातार घट रहा है। इस स्थिति को देखते हुए नगर पालिका के जल कार्य विभाग ने शहर में पेयजल वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। अब शहर के अधिकांश क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर होने वाली जलापूर्ति के बजाय दो दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जाएगी। जल कार्य विभाग की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, नई व्यवस्था 19 जुलाई से लागू होगी। जिन क्षेत्रों में 19 जुलाई को पानी मिलेगा, उन्हें अगली सप्लाई 22 जुलाई को दी जाएगी। इसी प्रकार, 20 जुलाई को पानी प्राप्त करने वाले क्षेत्रों को 23 जुलाई को अगला वितरण मिलेगा। हालांकि, खानपुरा और पुराना शहरी किला क्षेत्र जैसे ऊंचाई पर स्थित इलाकों में पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी। इन क्षेत्रों में पहले की तरह एक दिन छोड़कर 40 मिनट तक पेयजल की सप्लाई की जाएगी। नगर पालिका ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेयजल का अनावश्यक उपयोग न करें और पानी की बर्बादी रोकें। साथ ही, जल वितरण के दौरान विद्युत मोटर का उपयोग न करने की सलाह दी गई है, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से पानी पहुंच सके। जल कार्य विभाग ने यह भी बताया कि शहर में पेयजल उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर स्थिति के अनुसार सप्लाई व्यवस्था में आगे भी बदलाव किया जा सकता है।



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सावन और जन्माष्टमी पर घर में बनाएं मावा और खरबूजे के बीज की शाही बर्फी


Melon Seeds Burfi Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही घरों में पूजा-पाठ, व्रत और स्वादिष्ट पकवानों की रौनक बढ़ जाती है. इसके कुछ समय बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भी आता है, जब घरों में भगवान कृष्ण के लिए खास भोग तैयार किए जाते हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोग बाजार से मिठाई खरीद लेते हैं, लेकिन मिलावट की खबरें सुनकर मन में एक डर बना रहता है, अगर आप भी इस बार अपने परिवार और मेहमानों के लिए घर पर ही शुद्ध, स्वादिष्ट और खास मिठाई बनाना चाहते हैं तो मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी एक शानदार विकल्प है. इस बर्फी की सबसे बड़ी खासियत इसका लाजवाब स्वाद और मुलायम बनावट है. मावा की मलाईदार मिठास और खरबूजे के बीजों का हल्का कुरकुरापन मिलकर ऐसा स्वाद तैयार करता है, जिसे एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी तारीफ करेगा.

इसे बनाना मुश्किल भी नहीं है और बहुत ज्यादा समय भी नहीं लगता. खास बात यह है कि यह मिठाई त्योहारों के साथ-साथ किसी भी खास मौके पर आसानी से बनाई जा सकती है, अगर आप चाहते हैं कि इस बार आपके घर आने वाले मेहमान मिठाई की तारीफ करते न थकें, तो इस आसान रेसिपी को एक बार जरूर आजमाएं.

मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी बनाने के लिए जरूरी सामग्री
1. खरबूजे के बीज (मगज) – 1 कप
2. मावा या खोया – 1.5 कप (करीब 250 ग्राम)
3. चीनी – 1 कप
4. पानी – आधा कप
5. देसी घी – 2 चम्मच
6. हरी इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
7. पिस्ता कतरन – 1 चम्मच

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रेसिपी से जुड़ी जरूरी जानकारी
1. तैयारी का समय: 10 मिनट
2. पकाने का समय: 20 मिनट
3. कुल समय: लगभग 30 मिनट
4. कितने लोगों के लिए: 5 से 6

सबसे पहले खरबूजे के बीज भूनें
एक भारी तले की कढ़ाई को हल्का गर्म करें. इसमें बिना घी डाले खरबूजे के बीज डालें और धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए भूनें. जैसे ही बीज हल्के फूलने लगें और खुशबू आने लगे, उन्हें तुरंत प्लेट में निकाल लें. ध्यान रखें कि ज्यादा भूनने पर उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.

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मावा को सही तरीके से भूनना है जरूरी
उसी कढ़ाई में दो चम्मच देसी घी डालें. अब कद्दूकस किया हुआ मावा डालकर धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भूनें. जब मावा हल्का सुनहरा होने लगे और अच्छी खुशबू आने लगे, तब गैस बंद कर दें. मावा को थोड़ा ठंडा होने दें.

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एक तार की चाशनी बनाएं
एक अलग बर्तन में चीनी और आधा कप पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं. जब चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए, तब उंगली और अंगूठे के बीच चिपकाकर देखें, अगर एक पतला तार बनता है तो समझिए चाशनी तैयार है.

अब तैयार करें बर्फी का मिश्रण
तैयार चाशनी में भुना हुआ मावा, भुने हुए खरबूजे के बीज और इलायची पाउडर डाल दें. अब लगातार चलाते हुए मिश्रण को पकाएं. जब यह कढ़ाई छोड़ने लगे और गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें.

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बर्फी को सेट करने का सही तरीका
एक थाली या बर्फी ट्रे में हल्का घी लगाकर चिकना कर लें. तैयार मिश्रण उसमें डालें और चम्मच या स्पैटुला की मदद से बराबर फैला दें. ऊपर से पिस्ता कतरन डालकर हल्का दबा दें. अब इसे 1 से 2 घंटे तक सेट होने दें. पूरी तरह जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें.

स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स
1. हमेशा ताजा मावा इस्तेमाल करें.
2. चाशनी एक तार से ज्यादा गाढ़ी न होने दें.
3. बीजों को हल्का ही भूनें.
4. चाहें तो थोड़ा केसर डालकर स्वाद और खुशबू बढ़ा सकते हैं.
5. एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह बर्फी 4 से 5 दिन तक ताजा बनी रहती है.

त्योहारों के लिए क्यों है खास?
सावन, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन या किसी भी शुभ मौके पर यह मिठाई शानदार विकल्प बन सकती है. इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग में भी चढ़ाया जा सकता है. घर की बनी होने की वजह से इसमें शुद्धता और ताजगी बनी रहती है. यही कारण है कि यह बाजार की कई मिठाइयों से बेहतर साबित होती है.



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आए कई उतार-चढ़ाव, नहीं हारी हिम्मत! 17 की उम्र में क्रैक की NEET परीक्षा


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Krishna Anand NEET Success Story: सीतामढ़ी के कृष्णा आनंद ने 17 साल की उम्र में NEET परीक्षा में ऑल इंडिया 1500वीं रैंक (ओबीसी में 488वीं) हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया. कोटा में तैयारी कर उन्होंने यह सफलता पाई और अब कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. जानिए जीवन में कई उतार चढ़ाव के बाद भी कैसे सफलता हासिल की.

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सीतामढ़ी: सीतामढ़ी जिला के होनहार छात्र कृष्णा आनंद ने महज 17 साल की उम्र में नीट (NEET) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है. देश भर के करीब 23 लाख 33 हजार छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था. जिसमें लगभग 11 लाख 21 हजार छात्र उत्तीर्ण हुए हैं. इस कड़े मुकाबले के बीच कृष्णा आनंद ने ऑल इंडिया 1500वीं रैंक और अपनी ओबीसी कैटेगरी में 488वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इस शानदार कामयाबी के बाद उनके पूरे परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल बना हुआ है.

यहां से हुई प्रारंभिक शिक्षा
कृष्णा आनंद ने अपनी इस प्रारंभिक और मुख्य सफलता का सफर कोटा से पूरा किया है. उन्होंने कक्षा 8वीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कोटा में ही रहकर की और वहीं से नीट परीक्षा के लिए दिन-रात डटकर तैयारी की. कृष्णा ने अपनी इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई, माता-पिता और उन सभी शिक्षकों को दिया है जिन्होंने कदम-कमद पर उनका मार्गदर्शन किया. उनके बड़े भाई वर्तमान समय में दिल्ली से कंप्यूटर साइंस (CS) ब्रांच में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं, जो उनकी प्रेरणा के मुख्य स्रोतों में से एक रहे हैं.

बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना
कृष्णा के परिवार में पहले से ही चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद हैं, जिससे उन्हें बचपन से ही डॉक्टर बनने की प्रेरणा मिली. उनके अंकल डॉ. अमलेंदु कुमार एक प्रतिष्ठित एमडी रेडियोलॉजिस्ट हैं और उनका आनंद डायग्नोस्टिक सेंटर नाम से एक अस्पताल है, जिसकी पूरी देखरेख और मैनेजमेंट कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार संभालते हैं. अपने चाचा को मरीजों की सेवा करते देख कृष्णा के मन में भी देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों में शामिल होने का सपना जागा, जिसे उन्होंने 12वीं कक्षा के साथ ही अपनी कड़ी मेहनत से साकार कर दिखाया.

आए कई उतार-चढ़ाव, नहीं हारी हिम्मत
अपनी संघर्ष की कहानी बयां करते हुए कृष्णा बताते हैं कि 8वीं से 10वीं तक की पढ़ाई तो सामान्य रही, लेकिन असली और मुख्य तैयारी 11वीं और 12वीं कक्षा से शुरू हुई. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वे कोचिंग से मिलने वाले स्टडी मटेरियल और लेक्चर्स पर पूरा ध्यान देते थे. कृष्णा का मानना है कि परीक्षा पास करने के लिए थ्योरी से ज्यादा जरूरी मॉक टेस्ट और सवालों की प्रैक्टिस करना है. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान ज्यादा से ज्यादा सवालों को हल करने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया.

आया 1500 रैंक, भविष्य में बनना है यह
कृष्णा की इस अद्भुत सफलता पर उनके परिवार के साथ-साथ उनके पारिवारिक सदस्य चाचा डॉ. प्रवीण कुमार ने गहरी खुशी व्यक्त की है. उनका कहना है कि इतने लाख छात्रों के बीच 1500 रैंक लाना सीतामढ़ी जिला के लिए एक बेहद सराहनीय और गर्व की बात है. वहीं कृष्णा के पिता धर्मेंद्र कुमार और आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत उनकी माता रेनू रानी अपने बेटे की लगन और मेहनत को देखकर फूले नहीं समा रहे हैं. कृष्णा का भविष्य में एक बेहतरीन कार्डियोलॉजिस्ट (दिल का डॉक्टर) बनने का लक्ष्य है और वे देश के किसी टॉप मेडिकल कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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