देश के चर्चित राजघरानों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजवंश मे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार (20 जुलाई) को महा-समझौता हो सकता है।
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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया है। समझौता प्रस्ताव में सिंधिया राजघराने के मुखिया व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मप्र की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा व अन्य) के बीच अरबों-खरबों रुपये की शाही विरासतों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन चुकी है।
परिवार के किस सदस्य के पास क्या संपत्ति रहेगी यह भी तय होगा है। 08 जुलाई को समझौता आवेदन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन संपत्तियों का रिकॉर्ड न आ पाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी।
अब सोमवार (20) जुलाई को जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई होगी। इस ऐतिहासिक महा-समझौते के लागू होते ही दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो जाएगा।
यह रहेगा समझौते का मसौदा
कब्जा ही मालिकाना हक: सूत्रों का दावा है कि आपसी सहमति में तय हुआ है कि ‘जो पक्ष जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज (रह रहा) है, वह संपत्ति पूरी तरह उसी की हो जाएगी। इस आधार पर ग्वालियर का जयविलास पैलेस, शिवपुरी की संपत्तियां केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर आती दिख रही हैं।
कागजी उलझनें होंगी खत्म: भले ही कागजों में या पूर्व के रिकॉर्ड में उस संपत्ति का मालिकाना हक किसी भी पक्ष, ट्रस्ट या कंपनी के अधीन रहा हो, लेकिन अब वर्तमान कब्जे को ही अंतिम मालिकाना हक मानकर कोर्ट में डिक्री (डीड) कराई जाएगी।

जानकारी स्रोतः सिंधिया परिवार द्वारा पूर्व में जिला न्यायालय में पेश किए गए दावे से
ट्रस्ट और कंपनियों में बंटी है पूरी रियासत
सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम न होकर 1970 के दशक से ‘सर जयाजीराव ट्रस्ट’ और ‘कृष्ण माधव ट्रस्ट’ जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। वहीं, दिल्ली की ‘सिंधिया पॉटरीज’ की जमीन पर बनी तीन आलीशान कोठियों में तीनों बुआएं (वसुंधरा, यशोधरा और ऊषा राजे) निवास करती हैं।
पूर्व के पारिवारिक बंटवारे में माधवराव सिंधिया को मिली ‘सिंधिया इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL)’ की कमान वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया संभाल रहे हैं।
इनके बीच है सीधा विवाद
ग्वालियर जिला न्यायालय में पेश दावों के अनुसार, यह महा-समझौता मुख्य रूप से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा, यशोधरा राजे सिंधिया, कनिका देवी, प्रतिमा देवी और चित्रांगदा राजे के बीच होने जा रहा है।
बुआओं की ओर से अगले सप्ताह कोर्ट में आवेदन दाखिल होने की संभावना है, जिसके बाद कोर्ट इस पर अपनी अंतिम सील लगा देगा। सबसे ज्यादा मुकदमे मुंबई की अदालतों में लंबित हैं, जबकि ग्वालियर में भी 5 केस चल रहे हैं, जो अब वापस ले लिए जाएंगे।
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सिंधिया राजपरिवार का महा-समझौता, सुनवाई टली

ग्वालियर में देश के चर्चित व रॉयल राजघरानों में शुमार सिंधिया राजघराने का दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब महा-समझौता की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया है। हालांकि रिकॉर्ड रूम से फाइल नहीं आने के कारण केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए समझौता आवेदन पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी और टल गई।पूरी खबर पढ़ें



