Wednesday, July 1, 2026
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झांसी में सपेरे की इलाज के दौरान मौत: कोबरा पकड़ कर बच्चों को खेल दिखा रहा था, सांप ने चेहरे पर डस लिया – Jhansi News




झांसी से सटे मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर थाना क्षेत्र के टोडा गांव में जहरीले कोबरा से खिलवाड़ एक सपेरे को भारी पड़ गया। सांप पकड़ने के बाद लोगों को करतब दिखा रहे 72 वर्षीय सपेरे बिच्छू अदिवादी को कोबरा ने चेहरे पर डस लिया। इसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई और मंगलवार को झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के टोडा गांव निवासी बिच्छू आदिवासी (72) वर्षों से सांप पकड़ने का काम करता था। सोमवार शाम इलाके में हुई बारिश के बाद गांव के एक घर में जहरीला कोबरा निकल आया। घरवालों ने सांप पकड़ने के लिए बिच्छू को बुलाया। इसके बाद सांप पकड़ने में एक्सपर्ट बिच्छू ने करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद कोबरा को पकड़ लिया। सांप पकड़े जाने की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों और बच्चों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ के कहने पर बिच्छू सांप का प्रदर्शन करने लगा। इसी दौरान वह कोबरा को अपने चेहरे के पास ले आया। लापरवाही के चलते सांप पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गई और कोबरा ने उसके चेहरे पर डस लिया। सांप के डसते ही बिच्छू जमीन पर गिरकर तड़पने लगा। मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि कोबरा वहां से निकल भागा। परिजन तत्काल उसे इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद मंगलवार को उसकी मौत हो गई। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों के अनुसार, बिच्छू आदिवासी ने अपने जीवन में एक हजार से अधिक सांप और बिच्छू पकड़े थे। कोबरा समेत कई विषैले सांपों को पकड़कर वह उन्हें जंगल में छोड़ देता था। यही उसकी आजीविका का मुख्य साधन भी था। ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे अनुभव के बावजूद उसके साथ पहले कभी सर्पदंश की घटना नहीं हुई थी। विडंबना यह रही कि पहली बार सांप के डसने की घटना ही उसकी मौत का कारण बन गई।



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दिग्गज अभिनेत्री-निर्देशक विजया मेहता का निधन, 92 साल की उम्र में ली अंतिम सांस


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मराठी रंगमंच और भारतीय थिएटर की जानी मानी एक्ट्रेस निर्देशक और निर्माता विजया मेहता का 92 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने अपने घर पर उम्र संबंधी परेशानियों के चलते अंतिम सांस ली. उनके निधन से मराठी फिल्म और थिएटर जगत में शोक की लहर है.

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नई दिल्ली. विजया मेहता का जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था. उनका शुरुआती नाम विजया जयवंत था. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की और मशहूर रंगकर्मी इब्राहिम अल्काजी और आदि मर्जबान से अभिनय और रंगमंच की बारीकियां सीखीं. मराठी थिएटर में उन्हें प्यार और सम्मान से ‘बाई’ कहा जाता था.

1960 के दशक में विजया मेहता ने विजय तेंडुलकर, डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे के साथ मिलकर ‘रंगायन’ थिएटर ग्रुप की स्थापना की. इस संस्था ने मराठी रंगमंच को नई दिशा दी और प्रायोगिक थिएटर को मजबूत पहचान दिलाई.

नाटक और फिल्मों में किया काम

विजया मेहता ने अपने करियर में ‘एक शून्य बाजीराव’, ‘अजब न्याय वर्तुलाचा’, ‘बैरिस्टर’, ‘शाकुंतल’, ‘हमीदाबाईची कोठी’, ‘वाडा चिरेबंदी’, ‘पुरुष’ और ‘हयवदन’ जैसे कई चर्चित नाटकों का निर्देशन किया. सिर्फ थिएटर ही नहीं, उन्होंने फिल्मों में भी अपनी अलग छाप छोड़ी. उन्होंने ‘रावसाहेब’ और ‘पेस्तनजी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जबकि ‘पार्टी’ और ‘कलियुग’ जैसी फिल्मों में अभिनय भी किया. उनकी टीवी सीरियल ‘स्मृतिचित्रे’ और ‘लाइफलाइन’ भी काफी लोकप्रिय रहीं.

नाना पाटेकर की बनीं गुरु

विजया मेहता अपने अनुशासन और काम के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती थीं. उनके मार्गदर्शन में नाना पाटेकर, विक्रम गोखले, नीना कुलकर्णी और अशोक सराफ जैसे कई कलाकारों ने अपने अभिनय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उन्होंने अपना आत्मकथात्मक संस्मरण ‘झिम्मा: आठवणींचा गोफ’ भी लिखा.

बता दें कि भारतीय रंगमंच और सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, कालिदास सम्मान, विष्णुदास भावे सुवर्ण पदक और संगीत नाटक अकादमी टैगोर रत्न जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. उन्हें फिल्म ‘रावसाहेब’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का सम्मान भी मिला.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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लोहानीपुर से 92 बोतल अंग्रेजी शराब जब्त: मुखबिर की सूचना पर कदमकुआं पुलिस ने की कार्रवाई, तस्कर फरार – Patna News




पटना के लोहानीपुर रेलवे हंटर रोड से कदमकुआं थाना पुलिस ने 92 बोतल अंग्रेजी शराब जब्त की है। प्रत्येक बोतल 180 एमएल की थी। यह कार्रवाई आज सुबह 7:40 बजे की गई। पुलिस सुबह 6 बजे इलाके में गश्त कर रही थी, तभी उन्हें शराब की तस्करी के संबंध में गुप्त सूचना मिली। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शराब जब्त की। कदमकुआं थाना के एसआई अनिल कुमार और पीएसआई राजीव रंजन ओझा ने इस बरामदगी की पुष्टि की है। इस संबंध में कदमकुआं थाने में केस नंबर 487/26 दर्ज किया गया है। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने यह शराब रखी थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ लोग शराब लेकर जा रहे थे। लेकिन, पुलिस की भनक लगते ही वे शराब वहीं छोड़कर फरार हो गए। जब्त शराब की कीमत का आकलन अभी नहीं किया जा सका है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।



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फेसबुक फ्रेंडशिप बनी ठगी का जाल: युवक से 3.87 लाख की साइबर धोखाधड़ी, मुनाफे का झांसा देकर ऑनलाइन निवेश कराया, फिर किया ब्लॉक – Gwalior News




ग्वालियर में सोशल मीडिया के जरिए अनजान लोगों से दोस्ती करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। मुरार थाना क्षेत्र के काली माई संतर निवासी 40 वर्षीय अमित शर्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने फेसबुक पर युवती बनकर पहले उनसे दोस्ती की और फिर आकर्षक मुनाफे का लालच देकर करीब 3 लाख 87 हजार 243 रुपए की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे दिया। पुलिस ने मंगलवार को मामले में एफआईआर दर्ज की। पीड़ित अमित शर्मा, जो निजी कंपनी में कार्यरत हैं, ने पुलिस को बताया कि अक्टूबर 2025 में उनके फेसबुक अकाउंट पर रिद्धिमा शाह नाम की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। शुरुआत में उन्होंने अनुरोध स्वीकार नहीं किया, लेकिन बाद में रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। कुछ समय बाद युवती ने खुद को निवेश से अच्छा मुनाफा कमाने वाली बताकर “क्लब 21 मॉल” नामक वेबसाइट पर पैसा लगाने की सलाह दी। विश्वास जीतने के लिए पहले आरोपी ने अमित को एक डेमो प्लेटफॉर्म पर निवेश कराया, जहां उन्हें लाभ भी मिला। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तारीखों में कई किश्तों के जरिए विभिन्न यूपीआई आईडी पर कुल 3,87,243 रुपए ट्रांसफर कर दिए। 11 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 के बीच यह रुपए ट्रांसफर करवाए गए। शुरुआती निवेश पर कुछ रकम वापस मिलने से उनका भरोसा और मजबूत हो गया, लेकिन बाद में लगातार पैसा जमा कराने के बावजूद न तो मुनाफा मिला और न ही मूल राशि वापस लौटी। लेकिन जब अमित ने अपने पैसे निकालने और रिद्धिमा शाह से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद उन्हें अपने साथ साइबर धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ। पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मुरार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल अवश्य करें।



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अमेरिका में जन्मजात नागरिकता कानून बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प का आदेश रद्द किया, कहा- देश में जन्मा हर बच्चा अमेरिकी नागरिक होगा




अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा संवैधानिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर अस्थायी वीजा पर आए हों। अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता देने से इनकार किया गया था। यह फैसला 5-4 के बहुमत से आया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा। अमेरिका में पिछले 158 साल से यह व्यवस्था लागू है कि वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा अपने जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में दिया गया है। शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही जारी किया था आदेश ट्रम्प ने अपने शपथ ग्रहण वाले दिन यानी 20 जनवरी 2025 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर बर्थ राइट सिटीजनशिप पर रोक लगा दी थी। इसके कुछ ही दिन बाद कई संघीय (फेडरल) जिला अदालतों ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी। यानी ट्रम्प का आदेश लागू ही नहीं हो सका। हालांकि उस समय बर्थराइट सिटिजनशिप पर रोक नहीं लगी थी, बल्कि ट्रम्प के आदेश पर रोक लगी थी। इसके बाद फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अब अंतिम फैसला देते हुए कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। इसलिए ट्रम्प का आदेश असंवैधानिक है और उसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्म से नागरिकता के अधिकार का दायरा नहीं बदल सकती। अगर इस व्यवस्था में बदलाव करना है, तो इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा। ट्रम्प खुद भी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे 1 अप्रैल को ट्रम्प इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे। किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति का सुप्रीम कोर्ट में इस तरह सुनवाई के दौरान मौजूद रहना बेहद दुर्लभ माना जाता है। अगर ट्रम्प का यह आदेश लागू हो जाता, तो हर साल अमेरिका में जन्म लेने वाले करीब 2.5 लाख बच्चों की कानूनी स्थिति प्रभावित होती। साथ ही परिवारों को अपने नवजात बच्चे की नागरिकता तय कराने के लिए माता-पिता की नागरिकता और इमिग्रेशन स्थिति के दस्तावेज भी देने पड़ते। यह फैसला ट्रम्प के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इसे खत्म करने का वादा किया था। अमेरिका में 157 साल पहले मिला था जन्मजात नागरिकता का अधिकार 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध खत्म होने के बाद, जुलाई 1868 में अमेरिकी संसद में 14वें संशोधन को मंजूरी दी गई थी। इसमें कहा गया था कि देश में पैदा हुए सभी अमेरिकी नागरिक हैं। इस संशोधन का मकसद गुलामी के शिकार अश्वेत लोगों को अमेरिकी नागरिकता देना था। हालांकि, इस संशोधन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि इसमें अमेरिका में जन्में सभी बच्चों को शामिल किया जाएगा, चाहे उनके माता-पिता का इमिग्रेशन स्टेट्स कुछ भी हो। ट्रम्प और उनके समर्थकों का दावा है कि इस कानून का फायदा उठाकर गरीब और युद्धग्रस्त देशों से आए लोग अमेरिका आकर बच्चों को जन्म देते हैं। ये लोग पढ़ाई, रिसर्च, नौकरी के आधार पर अमेरिका में रुकते हैं। बच्चे का जन्म होते ही उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। नागरिकता के बहाने माता-पिता को अमेरिका में रहने की कानूनी वजह भी मिल जाती है। अमेरिका में यह ट्रेंड काफी लंबे समय से जोरों पर है। आलोचक इसे बर्थ टूरिज्म कहते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक 16 लाख भारतीय बच्चों को अमेरिका में जन्म लेने की वजह से नागरिकता मिली है। ट्रम्प के करीबियों को भी मिला था जन्मजात नागरिकता का लाभ दिलचस्प बात यह है कि ट्रम्प के कई करीबी सहयोगी भी इसी जन्मजात नागरिकता व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, एफबीआई निदेशक काश पटेल और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस के माता-पिता दूसरे देशों से अमेरिका आए थे। इनका जन्म अमेरिका में हुआ, इसलिए इन्हें जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से भारतीयों को राहत क्यों मिली? H-1B वीजा धारकों के लिए गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के नियम नहीं बदलेंगे अमेरिका के इमिग्रेशन कानून या वीजा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो H-1B वीजा या किसी अन्य वैध अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अमेरिका में गर्भधारण करने या बच्चे को जन्म देने से रोकता हो। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसे परिवारों के अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को संविधान के 14वें संशोधन के तहत जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक माना जाएगा। क्या बच्चे की नागरिकता मिलने से माता-पिता को भी नागरिकता मिल जाएगी? जवाब है- नहीं। अगर किसी बच्चे का जन्म अमेरिका में होता है तो उसे जन्म से अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है, लेकिन इसका फायदा उसके माता-पिता को नहीं मिलता। H-1B या किसी अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों को अपने इमिग्रेशन स्टेटस को पहले की तरह अलग से बनाए रखना होगा। मौजूदा अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक बच्चा अपने माता-पिता के लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) की सिफारिश तभी कर सकता है, जब उसकी उम्र 21 वर्ष हो जाए। भारतीय मूल के बच्चों के लिए दोहरी नागरिकता का क्या नियम है? भारत पूरी तरह दोहरी नागरिकता (ड्यूल सिटिजनशिप) की अनुमति नहीं देता। अगर भारतीय माता-पिता के यहां अमेरिका में बच्चा पैदा होता है, तो उसे जन्म के साथ अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है। हालांकि, वह एक साथ पूरी भारतीय नागरिकता नहीं रख सकता। ऐसे बच्चों के लिए माता-पिता ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड बनवा सकते हैं। ओसीआई कार्ड मिलने पर उन्हें भारत आने के लिए आजीवन वीजा की जरूरत नहीं होती। साथ ही भारत में रहने से जुड़े कई अधिकार भी मिलते हैं।



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खूबसूरती, शोहरत और रईसी सब था, फिर भी अमिताभ बच्चन की बहू नहीं बन सकीं ये एक्ट्रेस


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कहते हैं न किस्मत से कम और किस्मत से ज्यादा किसी को नहीं मिलता है. बस ऐसा ही हुआ था 90s की टॉप एक्ट्रेस के साथ. जो कि अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के घर की बहू बनने के सपने संजो रही थी. सब कुछ तय भी हो गया था, मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर है.

ये किस्सा बॉलीवुड के दो सबसे बड़े खानदानों से जुड़ा है. जिसे कई फैंस जानते होंगे तो कई नहीं. जी हां, हम बात कर रहे हैं कपूर खानदान और अमिताभ बच्चन की फैमिली की. दोनों परिवारों के बीच सिर्फ इंडस्ट्री तक ही रिश्ता सीमित नहीं है. बल्कि रिश्तेदारी भी साझा करते हैं.

ಬಾಲಿವುಡ್‌ನ ಪ್ರತಿಷ್ಠಿತ ಕಪೂರ್ ಕುಟುಂಬದಿಂದ ನಾಯಕಿಯಾಗಿ ಚಿತ್ರರಂಗಕ್ಕೆ ಕಾಲಿಟ್ಟ ಮೊದಲ ನಟಿ ಎಂಬ ಹೆಗ್ಗಳಿಕೆಗೆ ಪಾತ್ರರಾದ ಕರಿಷ್ಮಾ ಕಪೂರ್, 1990ರ ದಶಕದ ಅತ್ಯಂತ ಯಶಸ್ವಿ ನಟಿಯರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬರು. ತಮ್ಮ ಸೌಂದರ್ಯ, ಅಭಿನಯ ಮತ್ತು ವಿಭಿನ್ನ ಪಾತ್ರಗಳ ಮೂಲಕ ಅವರು ಕೋಟ್ಯಂತರ ಅಭಿಮಾನಿಗಳ ಮನ ಗೆದ್ದಿದ್ದರು. ವೃತ್ತಿಜೀವನದ ಉತ್ತುಂಗದಲ್ಲಿದ್ದಾಗಲೇ ವೈಯಕ್ತಿಕ ಬದುಕಿನ ಮಹತ್ವದ ನಿರ್ಧಾರ ತೆಗೆದುಕೊಂಡ ಅವರು, ನಂತರ ಹಲವು ಸವಾಲುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸಿ ಹೊಸ ಬದುಕನ್ನು ಕಟ್ಟಿಕೊಂಡರು.

अगर उस दिन बात न बिगड़ी होती तो अमिताभ बच्चन और रणधीर कपूर समधी होते. करीना कपूर, अभिषेक बच्चन की साली साहिबा होती. वैसे तो दोनों ने ही रिफ्यूजी (2000) से साथ में डेब्यू किया था. फिल्म में अभिषेक बच्चन और करीना कपूर प्यार में गिरफ्त होते हैं. मगर असल जिंदगी में अभिषेक और करिश्मा का कनेक्शन था.

1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रेम कैदी’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली करिश्मा कपूर और अभिषेक बच्चन की तो सगाई तक हो गई थी. दोनों ने करीब 5 साल डेट भी किया था. मीडिया के सामने भी बच्चन और कपूर खानदान ने इस रिश्ते का ऐलान कर दिया था.

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पहले बात करते हैं अभिषेक बच्चन और करिश्मा कपूर की लवस्टोरी की. कहते हैं कि दोनों की प्रेम कहानी दोनों के डेब्यू करने से पहले ही शुरू हो गई थी. दरअसल अभिषेक बच्चन की बड़ी बहन श्वेता बच्चन की शादी कपूर खानदान के बेटी ऋतु नंदा के बेटे निखिल नंदा से हुई. इसी शादी में अभिषेक-करिश्मा की नजदीकियां बढ़ी थी.

करिश्मा और अभिषेक की प्रेम कहानी से दोनों परिवार खुश थे. साल 2002 तक आते आते दोनों ने सगाई भी कर ली थी. एक दिन मीडिया के सामने करिश्मा कपूर को अपनी बहू के रूप में मिलवाया भी था.

यही जया बच्चन को अभिषेक-करिश्मा की शादी टूटने की वजह भी माना जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जया बच्चन नहीं चाहती थीं कि उनकी होने वाली बहू फिल्मों में काम करें. ये बात करिश्मा कपूर की मां बबीता को कतई मंजूर नहीं थी. बात इतनी बिगड़ गई की दोनों का रिश्ता टूट गया.

आगे चलकर साल 2003 में करिश्मा कपूर ने बिजनेसमैन संजय कपूर संग शादी कर ली. दोनों को दो बच्चे हुए एक बेटा कियान और एक बेटी समायरा. लेकिन करिश्मा कपूर की किस्मत एक बार फिर मोड़ लेती है. पति से तमाम झगड़ों और परेशानियों के बीच दोनों ने तलाक ले लिया.

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कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर 11वें दिन प्रदर्शन: भूख हड़ताल कर रहे वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, पुलिस पर समर्थकों को रोकने के आरोप


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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 11वें दिन भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। इसी बीच वहां तीन दिनों से भूख हड़ताल कर रहे लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की मंगलवार को तबीयत बिगड़ गई।

आंदोलन के आयोजकों ने बताया कि वांगचुक का ब्लड शुगर स्तर घटकर 66 पर पहुंच गया है, जो सामान्य से कम माना जाता है। वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल कर रहे हैं। वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वहीं CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। समर्थकों और पार्टी के सदस्यों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है। कुछ लोगों को पहचान पत्र नहीं होने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 4 तस्वीरें…

सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन स्तर 96 और पल्स रेट 92 दर्ज किया गया।

सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर 117/60, ऑक्सीजन स्तर 96 और पल्स रेट 92 दर्ज किया गया।

CJP के समर्थक जंतर-मंतर पर कालीन पर सोते हुए।

CJP के समर्थक जंतर-मंतर पर कालीन पर सोते हुए।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में अंदर जाने के लिए कई लोग लाइन लगाकर खड़े हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में अंदर जाने के लिए कई लोग लाइन लगाकर खड़े हैं।

CJP के प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के छह छात्र नेता भी शामिल हैं।

CJP के प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के छह छात्र नेता भी शामिल हैं।

सोनम वांगचुक 170 दिन जोधपुर जेल में रहे

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे। सोनम के अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा हुई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।

दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था।

दीपके का दावा- राजस्थान पैरामेडिकल का पेपर जयपुर में लीक हुआ

  • पेपर लीक सिर्फ NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परीक्षाएं अनियमितताओं का शिकार हो रही हैं। राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल परीक्षा का पेपर भी जयपुर के कॉलेज से लीक हुआ।
  • अगर आज आप आवाज नहीं उठाएंगे तो कल आपका पेपर भी लीक हो सकता है और आपकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है।
  • सरकार और प्रशासन पेपर माफिया पर कार्रवाई करने के बजाय प्रदर्शनकारियों को रोकने पर ध्यान दे रहे हैं। आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।
  • हम वायरस नहीं हैं, बल्कि उस वायरस के खिलाफ वैक्सीन हैं। डबल इंजन वाली सरकार में डबल इंजन-डबल लीक हो रहा। दबाव और रोक-टोक के बावजूद प्रदर्शन जारी रहेगा।

छात्र संगठनों का भी समर्थन

प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के छह छात्र नेता भी शामिल हैं, जो अलग मंच से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। इनमें संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश समेत अन्य छात्र नेता शामिल हैं।

CJP का यह आंदोलन 20 जून से जारी है और इसकी शुरुआत NEET समेत कई परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों और पेपर लीक के विरोध में की गई थी। पार्टी ने कहा कि आने वाले दिनों में शिक्षा के साथ-साथ अन्य जवाबदेही से जुड़े मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा बनाए जाएंगे।

CJP का 8 शहरों में प्रदर्शन

CJI की टिप्पणी के बाद बनी CJP, युवाओं को कॉकरोच कहा था

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुई। 15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं।

इस टिप्पणी के अगले दिन, 16 मई को अमेरिका में रह रहे अभिजीत दीपके ने CJP की शुरुआत की और सोशल मीडिया पर पार्टी के अकाउंट बनाए। 22 मई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, जिसे 8 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया।

10 जून तक CJP ते इंस्टाग्राम पर 2.27 करोड़ फॉलोअर्स थे। अब इसमें दो लाख की गिरावट आई है। फिर भी यह संख्या भाजपा के 94 लाख और कांग्रेस के 1.37 करोड़ फॉलोअर्स से ज्यादा है। एक्स पर CJP के 2.79 लाख फॉलोअर्स हैं।

महाराष्ट्र के रहने वाले अभिजीत AAP से जुड़े थे

30 साल के अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल, अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।

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DMK ने भी दस्तखत किए; बोले- चुनाव आयोग की प्रकिया मनमानी और लोकतंत्र विरोधी

चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को लेटर लिखा। पूरी खबर पढ़ें…

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बुंदेलखंडी तरीके से बनाएं आम का अचार,1 साल तक रहेगा ताजा, स्वाद बरकरार, जानिए खास रेसिपी


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आम के अचार को सही तरीके से बनाने की विधि के बारे में बात की जाए तो सबसे पहले हमें यह कोशिश करना चाहिए. कच्चे आम ताजे खरीदें हम कच्चे अचार के आम बाजार में मिलते हैं या तोड़कर लाते हैं तो सबसे पहले उनको पानी से भरे किसी बर्तन में कम से कम 4 से 6 घंटे के लिए डालकर छोड़ दें.  फिर 6 घंटे बाद उनको वापस निकाल कर सूखे कपड़े से साफ कर लें.

आज के समय में कौन नहीं होगा जो अचार नहीं खाता होगा लगभग हर घर में सीजन के हिसाब से अलग-अलग अचार तैयार किया जाता है. इस समय आम के अचार बनाने का समय चल रहा है. कई बार देखा जाता है कि किसी का अचार बहुत जल्दी खराब हो जाता है किसी का अचार मसाले के साथ ही घुल जाता है. किसी का अचार का टेस्ट बदल जाता है. ऐसे में आज हम आपको बुंदेलखंड की उस रेसिपी के बारे में बताने जा रहे हैं.

जो अचार को 1 साल तक एकदम ताजा और फ्रेश बनाए रखती है. इसके लिए आपको कुछ चीजों को फॉलो करना होगा.आम के अचार को सही तरीके से बनाने की विधि के बारे में बात की जाए तो सबसे पहले हमें यह कोशिश करना चाहिए. कच्चे आम ताजे खरीदें हम कच्चे अचार के आम बाजार में मिलते हैं या तोड़कर लाते हैं तो सबसे पहले उनको पानी से भरे किसी बर्तन में कम से कम 4 से 6 घंटे के लिए डालकर छोड़ दें.  फिर 6 घंटे बाद उनको वापस निकाल कर सूखे कपड़े से साफ कर लें.

आम का अचार तैयार करने की शानदार रेसिपी
इसके बाद कच्चे आम को हम पारंपरिक हथियार आम कटना से काटने की शुरुआत करें इसमें आम की साइज भी निर्भर करेगी की आपको उसके कितने पीस बनाना है एक आम से अधिकतम चार टुकड़े करना ठीक रहता है जब आपके पूरे आम कट कर तैयार हो जाएं तो फिर उनके लिए नमक लगाकर किसी जालीदार बर्तन में अगर लकड़ी से बने टोकरी में रखें तो अच्छा है रख दें शाम के समय रखें. सुबह उनके लिए उठाएं इस दौरान इन आम में जो भी खट्टापन या नुकसानदायक तोड़ रह जाता है वह पूरी तरह से निकल जाता है.

एक साल तक रहेगा ताजा आम का अचार
इसके बाद हम कोपर लेकर कटे हुए आम रख देते हैं. दूसरी तरफ हमने जो मसाला तैयार किया हुआ है जिसमें नमक पीला सरसों भुनी हुई मेथी दालचीनी सौंफ़ मिर्ची और सरसों का तेल होता है उसे मसले को इनमें डालकर अच्छे से मिक्स करते हैं. करीब 30 मिनट के लिए खुला रखने के बाद हमारे पास जो भी कांच का बर्तन है. उसमें यह आचार रख देते हैं. इस तरह से अचार तैयार हो जाता है.इसकी खासियत होती है कि यह काम से कम 1 साल तक एकदम ताजा और फ्रेश बना रहता है ना तो इसमें लिज लिजा पन आता है. वरना ही टेस्ट में कोई बदलाव होता है. यह एकदम हल्का खट्टा और बेहतरीन स्वाद वाला अचार बना रहता है जो हर मौसम ताजे अचार का एहसास कराता रहता है.

मसाला बनाने की रेसिपी 
अगर आपने 10 किलो कच्चे आम का आचार तैयार करना चाहते हैं तो इसमें 2 किलो नमक, एक लीटर सरसों तेल, 500 ग्राम मेथी, 500 ग्राम पीला सरसों, 300 ग्राम कुटी लाल मिर्च, 15 ग्राम हींग, 100 ग्राम सौंफ लेते हैं. इसमें सबसे पहले सरसों के तेल को कढ़ाई में डालकर गर्म करते हैं. फिर उसमें धीरे-धीरे यह सभी मसाले डाल देते हैं. हल्की भुनाई करते हैं. और कुछ समय में शानदार मसाला तैयार हो जाता जिसको कटे हुए आम में मिक्स किया जाता है.



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सोनभद्र में बरसाती नाले में 3 लोग बहे: 1 की मौत, 1 घायल; 6 वर्षीय मासूम लापता, पिकनिक मनाने गए थे युवक – Sonbhadra News




सोनभद्र के मांची थाना क्षेत्र के चरगड़ा गांव में मंगलवार दोपहर पिकनिक मनाने गए तीन लोग बरसाती नाले के तेज बहाव में बह गए। हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक युवक घायल अवस्था में मिला है। छह वर्षीय बालक का देर शाम तक कोई सुराग नहीं लग सका। पुलिस और ग्रामीण उसकी तलाश में जुटे हैं।
जानकारी के अनुसार, चरगड़ा गांव निवासी बबलू (18) पुत्र मुमताज, अलीहसन (6) पुत्र मुमताज और सुकतार (18) पुत्र कैमुद्दीन गांव के पास स्थित परवा नाले में पिकनिक मनाने गए थे। दोपहर करीब दो बजे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और तीनों तेज बहाव में बह गए। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खोजबीन शुरू की। करीब एक घंटे बाद बबलू घायल अवस्था में मिला, जबकि लगभग दो घंटे बाद सुकतार का शव बरामद हुआ। छह वर्षीय अलीहसन का अभी तक पता नहीं चल सका है। ग्राम प्रधान युसुफ अली उर्फ भखडू ने बताया कि बच्चे पिकनिक मनाने गए थे। अचानक तेज बारिश होने से नाले में पानी का बहाव बढ़ गया और तीनों बह गए। पुलिस को सूचना दे दी गई है। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ग्रामीणों के साथ मिलकर लापता बालक की तलाश में जुटी हुई है।



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फर्जी कॉल से लेकर OTP फ्रॉड तक, तेजी से बदला स्कैम करने का तरीका


पिछले कुछ समय में ऑनलाइन स्कैम की घटनाएं भारत में तेजी से बढ़ी हैं। मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग सबसे पहले साइबर क्रिमिनल्स के निशाने पर रहते हैं। साइबर अपराधी फोन फर्जी फोन कॉल्स और मैसेज के साथ-साथ मैसेजिंग ऐप्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ई-मेल का इस्तेमाल करके लोगों के साथ ठगी को अंजाम देते हैं। आम तौर पर वे बैंक, सरकारी एजेंसी, कस्टमर सपोर्ट बनकर लोगों को अपनी जाल में फंसाते हैं। ऐसे में आपको तेजी से बदल रहे साइबर क्राइम के तौर तरीकों से कैसे बचकर रहना चाहिए, आइए जानते हैं…

साइबर क्रिमिनल्स के सबसे कॉमन तरीकों में फर्जी KYC अपडेट, अकाउंट या कार्ड ब्लॉक की चेतावनी आदि शामिल हैं। क्रिमिनल्स लोगों को फर्जी वेबसाइट्स पर रिडायरेक्ट करके बैंकिंग डिटेल्स जैसे कि अकाउंट नंबर, कार्ड नंबर आदि की चोरी करते हैं। फिर OTP या पासवर्ड पता लगाने के तरीके अपनाए जाते हैं। एक बार ये जानकारियां मिल जाती हैं, तो फ्रॉड को अंजाम दे दिया जाता है।

कैसे रूकेगा यह सिलसिला?

साइबर क्राइम की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार, बैंक, रेगुलेटर्स और टेलीकॉम ऑपरेटर्स साथ मिलकर काम कर रही हैं। इन सब के बावजूद साइबर क्राइम की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लोगों को भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स की मानें तो साइबर क्राइम को रोकने के सबसे बढ़िया तरीका सतर्कता है। लोग जितना अलर्ट रहेंगे, उतना ही साइबर क्राइम से बचकर रह सकते हैं।

क्या कर रही हैं ऑथोरिटीज?

पिछले दिनों दूरसंचार विभाग ने संचार साथी ऐप लॉन्च किया है, जिसमें फर्जी कॉल्स और मैसेज को रिपोर्ट किया जा सकता है। यह ऐप उन कॉल्स और मैसेज को रिपोर्ट करने की सहूलियत देता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी लोगों को अपनी जाल में फंसाने के लिए करते हैं। यही नहीं, रिजर्व बैंक और बैंकिंग ऑथोरिटीज लोगों को OTP, पासवर्ड, अकाउंट डिटेल्स जैसी जानकारियां किसी के साथ शेयर नहीं करने की सलाह देते हैं।

सरकारी ऑथोरिटीज के अलावा टेलीकॉम ऑपरेटर्स का भी साइबर क्राइम रोकने में अहम रोल है। एयरटेल, जियो, वोडाफोन-आइडिया और बीएसएनएल का मुख्य फोकस साइबर क्राइम की तेजी से बढ़ रही घटनाओं को रोकना है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स अलग-अलग तरीकों जैसे स्पैम फिल्टरिंग, स्कैम डिटेक्शन और कस्टमर अवेयरनेस जैसे इनिशिएटिव्स का सहारा ले रहे हैं, ताकि फ्रॉड की घटनाओं पर लगाम लगाया जा सके।

क्या है OTP फ्रॉड अलर्ट फीचर?

एयरटेल ने हाल ही में अपने यूजर्स के लिए OTP फ्रॉड अलर्ट फीचर रोल आउट किया है, जो इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जैसे ही कॉल के दौरान उन्हें कोई OTP रिसीव होता है तो स्क्रीन पर अलर्ट मिल जाता है। यह फीचर फर्जी कॉल की पहचान करके लोगों को अलर्ट कर देता है। कंपनी ने इस फीचर के लिए AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल किया है। वहीं, वोडाफोन-आइडिया ने भी नेटवर्क लेवल पर संदिग्ध कॉल्स और मैसेज को ब्लॉक करने के लिए टूल उतारा है। अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स भी ऐसे फीचर्स ला रहे हैं।

साइबर फ्रॉड से कैसे बचें?

तेजी से बढ़ रहे डिजिटल इंफ्रॉस्ट्रक्चर और बदलती टेक्नोलॉजी की वजह से साइबर फ्रॉड से खुद को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। लोगों को कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।

  • किसी भी अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स, मैसेज आदि को इग्नोर करें।
  • अनजान नंबर से आए मैसेज में दिए गए लिंक को भूलकर भी न क्लिक करें।
  • सरकारी अधिकारी या कस्टमर केयर के नाम पर आने वाले कॉल्स को रिपोर्ट करें।
  • कभी भी गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर सर्च न करें।
  • बैंक की वेबसाइट्स को हमेशा सिक्योर्ड नेटवर्क पर ही ओपन करें।
  • वेबसाइट ओपन करने के लिए हमेशा URL को टाइप करें।
  • किसी भी ईनाम, लॉटरी और निवेश पर बढ़िया रिटर्न आदि की लालच में न फंसे।
  • अगर, आपके साथ कोई फ्रॉड हुआ है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
  • नेशनल साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके भी रिपोर्ट कर सकते हैं।

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