Monday, July 20, 2026
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सिंधिया राजपरिवार में संपत्ति विवाद, सुनवाई आज: जयविलास पैलेस, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिल सकती हैं दिल्ली व शिवपुरी की संपत्ति – Gwalior News


देश के चर्चित राजघरानों में शुमार ग्वालियर के सिंधिया राजवंश मे पारिवारिक संपत्ति बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार (20 जुलाई) को महा-समझौता हो सकता है।

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केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया है। समझौता प्रस्ताव में सिंधिया राजघराने के मुखिया व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, मप्र की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा व अन्य) के बीच अरबों-खरबों रुपये की शाही विरासतों के बंटवारे पर अंतिम सहमति बन चुकी है।

परिवार के किस सदस्य के पास क्या संपत्ति रहेगी यह भी तय होगा है। 08 जुलाई को समझौता आवेदन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन संपत्तियों का रिकॉर्ड न आ पाने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी।

अब सोमवार (20) जुलाई को जिला न्यायालय में मामले की सुनवाई होगी। इस ऐतिहासिक महा-समझौते के लागू होते ही दिल्ली, मुंबई, पुणे और ग्वालियर की अदालतों में वर्षों से लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का हमेशा के लिए पटाक्षेप हो जाएगा।

यह रहेगा समझौते का मसौदा

कब्जा ही मालिकाना हक: सूत्रों का दावा है कि आपसी सहमति में तय हुआ है कि ‘जो पक्ष जिस संपत्ति पर वर्तमान में काबिज (रह रहा) है, वह संपत्ति पूरी तरह उसी की हो जाएगी। इस आधार पर ग्वालियर का जयविलास पैलेस, शिवपुरी की संपत्तियां केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर आती दिख रही हैं।

कागजी उलझनें होंगी खत्म: भले ही कागजों में या पूर्व के रिकॉर्ड में उस संपत्ति का मालिकाना हक किसी भी पक्ष, ट्रस्ट या कंपनी के अधीन रहा हो, लेकिन अब वर्तमान कब्जे को ही अंतिम मालिकाना हक मानकर कोर्ट में डिक्री (डीड) कराई जाएगी।

जानकारी स्रोतः सिंधिया परिवार द्वारा पूर्व में जिला न्यायालय में पेश किए गए दावे से

जानकारी स्रोतः सिंधिया परिवार द्वारा पूर्व में जिला न्यायालय में पेश किए गए दावे से

ट्रस्ट और कंपनियों में बंटी है पूरी रियासत

सिंधिया राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे किसी व्यक्ति के नाम न होकर 1970 के दशक से ‘सर जयाजीराव ट्रस्ट’ और ‘कृष्ण माधव ट्रस्ट’ जैसी संस्थाओं के अधीन हैं। वहीं, दिल्ली की ‘सिंधिया पॉटरीज’ की जमीन पर बनी तीन आलीशान कोठियों में तीनों बुआएं (वसुंधरा, यशोधरा और ऊषा राजे) निवास करती हैं।

पूर्व के पारिवारिक बंटवारे में माधवराव सिंधिया को मिली ‘सिंधिया इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (SIPL)’ की कमान वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया संभाल रहे हैं।

इनके बीच है सीधा विवाद

ग्वालियर जिला न्यायालय में पेश दावों के अनुसार, यह महा-समझौता मुख्य रूप से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे सिंधिया, ऊषा राजे राणा, यशोधरा राजे सिंधिया, कनिका देवी, प्रतिमा देवी और चित्रांगदा राजे के बीच होने जा रहा है।

बुआओं की ओर से अगले सप्ताह कोर्ट में आवेदन दाखिल होने की संभावना है, जिसके बाद कोर्ट इस पर अपनी अंतिम सील लगा देगा। सबसे ज्यादा मुकदमे मुंबई की अदालतों में लंबित हैं, जबकि ग्वालियर में भी 5 केस चल रहे हैं, जो अब वापस ले लिए जाएंगे।

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सिंधिया राजपरिवार का महा-समझौता, सुनवाई टली

ग्वालियर में देश के चर्चित व रॉयल राजघरानों में शुमार सिंधिया राजघराने का दशकों पुराना संपत्ति विवाद अब महा-समझौता की ओर बढ़ रहा है। हाल ही में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जिला न्यायालय में एक समझौता आवेदन पेश किया गया है। हालांकि रिकॉर्ड रूम से फाइल नहीं आने के कारण केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए गए समझौता आवेदन पर बुधवार को सुनवाई नहीं हो सकी और टल गई।पूरी खबर पढ़ें



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विजेता दहिया बोले-वॉलंटियर्स पीटे, अब मेरी अरेस्टिंग कभी भी: सोनम वांगचुक सर को किडनैप कर ले गए पुलिस वाले, मैं हरियाणवी हूं, डरता नहीं – Sonipat News




पुलिस के यहां बहुत सारे लोग आए, वो प्लेन क्लोथ्स (सादी वर्दी) में थे। उन्होंने आते ही वॉलंटियर्स के साथ धक्का-मुक्की की। एक के पैर पे चोट लगी तो दूसरे की टीशर्ट्स फट गई। हमारे वॉलंटियर्स बेचारे कुछ कर नहीं सके, उनको घूंसे और लातें भी मारे पुलिस वालों ने, और फिर वो सर (सोनम वांगचुक) तक पहुंचे और उनको एक वाइट चद्दर में लपेट के पहले थोड़ा घसीटा, फिर उठाकर ले गए। एक तरीके से उनकी किडनैपिंग हुई। ये कहना है CJP के प्रवक्ता विजेता दहिया का। उन्होंने बताया 21 दिन से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के सुबह जबरन उठा लिया। हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गई। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज हरियाणा के सोनीपत के विजेता दहिया ने इसे ‘लोकतंत्र के लिए काला दिन’ करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने गुंडों की तरह बर्ताव किया और वांगचुक को किडनैप कर ले गई। जंतर-मंतर पर दैनिक भास्कर टीम से हुई बातचीत में विजेता दहिया ने आशंका जताई कि अब पुलिस उन्हें और अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को कभी भी अरेस्ट कर सकती है। मगर, हरियाणवी डरते नहीं हैं। पढ़िए पूरी बातचीत… भास्कर टीम: शनिवार को जंतर-मंतर पर क्या हुआ?
विजेता दहिया: NEET पेपर लीक और शिक्षा तंत्र की खामियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का प्रोटेस्ट चल रहा है। शनिवार को जो हुआ, वो भारत के लोकतंत्र के लिए काला दिन था। सुबह पुलिस वालों ने निहत्थे वॉलंटियर्स के साथ धक्का-मुक्की की और लात-घूंसे मारे। जब सोनम जी अपना अनशन नहीं तोड़ना चाहते थे, तो क्यों जबरदस्ती की जा रही है। भास्कर टीम: अभी वांगचुक कहां है और उनकी मांग क्या?
विजेता दहिया: उनको सफदरजंग हॉस्पिटल में जबरदस्ती डिटेन किया हुआ है। जब वो भूख हड़ताल नहीं तोड़ना चाहते, तो आप क्यों फालतू कोशिश कर रहे हैं? अगर सरकार को इतनी ही चिंता है उनकी, तो जो चीज डिमांड कर रहे हैं आप उनकी बात सुन लीजिए। वो यही तो कह रहे थे कि आप एक बार बात तो कर लो। वह अपने लिए नहीं देश की जनता और युवाओं के लिए लड़ रहे हैं। भास्कर टीम: वांगचुक को यहां से हटाने के बाद आगे क्या होगा? विजेता दहिया: अभी ये आशंका बनी हुई है या यू कहे कि यह कभी भी हो सकता है कि हमें डिटेन कर लिया जाए। हम गिरफ्तारी से नहीं डरते। हमें गिरफ्तार करना है तो आओ गिरफ्तार कर लो। भास्कर टीम: अभी कौन-कौन अनशन पर बैठे हैं? विजेता दहिया: बाकी पहले से जो लोग थे… नेहा, मनीष, आमिन ये तो हैं ही। एक बहादुर सिंह हैं वहां पर और आज अभिजीत दीपके ने भी जॉइन कर लिया हैं। भास्कर टीम: दुष्यंत-दिग्विजय चौटाला भी आए थे यहां? विजेता दहिया: संसद मार्च के लिए हरियाणा से भी काफी लोग आ रहे हैं, क्योंकि अगर उसूलों पर आंच आएगी तो बोलना जरूरी है। हरियाणा में तो हम ऐसे कहते हैं कि भाई वीरों की भूमि है, हम किसी से डरते नहीं हैं। पेपर लीक के विरोध में हम सभी को एक साथ खड़ा होना होगा। यहां पर देखिए उन बच्चों की फोटो लगी हुई है जिन्होंने पेपर लीक के बाद सुसाइड कर लिया। मगर सरकार को कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी विदेश में जाकर मेलोडी- मेलोडी कर रहे थे। भास्कर टीम: लोगों की भीड़ बढ़ी है या इसमें कमी आई है? विजेता दहिया: जब हम 20 जून को यहां पर आए तब पहले कुछ दिनों तक काफी भीड़ थी, फिर थोड़ी कम हुई, फिर सोनम सर आए तो भीड़ बढ़ गई, फिर थोड़ी कम हुई, तो ऐसे ऊपर नीचे चलता रहता है। पिछले तीन-चार दिन से ही काफी ज्यादा मोमेंटम ये पकड़ रहा था और आज तो मतलब एकदम से बहुत ज्यादा ऊपर चला गया। भास्कर टीम: हरियाणा में मोदी जी ने हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन किया? विजेता दहिया: ये कभी कहते हैं स्पेस टेक्नोलॉजी से रोड बनाएंगे, कभी वो नाले की गैस से चाय बनाएंगे। कभी बादलों से रडार को रोक देंगे। मगर जमीनी हकीकत ये है कि हरियाणा में कितने सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, ओवरऑल पूरे देश में ही हो रहे हैं। पिछले 10 साल में 94,000 के आसपास स्कूल्स बंद हो चुके। सरकार को सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था पर जोर देना चाहिए और इसे बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए। ऐसी-ऐसी सिचुएशन हमने सुनी है कि डेड बॉडी को चूहों ने कुतर दिया, सरकार को बेसिक चीजों पर ध्यान देना चाहिए। क्या है पूरा मामला? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहे जाने के विरोध में 16 मई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी की डिजिटल शुरुआत हुई थी। 6 जून 2026 से इसका जमीनी प्रदर्शन शुरू हुआ, जो मुख्य रूप से NEET-UG पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। शिक्षाविद और साइंटिस्ट सोनम वांगचुक भी छात्रों के अधिकारों के समर्थन में खुद को “मानद कॉकरोच” बताकर 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। 21 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक का स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ा और 9.5 किलो वजन घट गया। इसके बाद 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। उनकी पत्नी ने इसे ‘अवैध हिरासत’ बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। हरियाणा के रहने वाले हैं विजेता दहिया विजेता दहिया हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले हैं। इंजीनियरिंग के बाद विदेश मंत्रालय में एसएससी-सीजीएल (SSC-CGL) के जरिये नौकरी की। सिस्टम से मोहभंग होने पर सरकारी नौकरी छोड़ दी और ‘भाड़ में जाए वो नौकरी’ नाम की चर्चित किताब लिखी। वे यूट्यूबर ध्रुव राठी के लिए रिसर्च और स्क्रिप्ट राइटिंग का काम भी कर चुके हैं और अब CJP मूवमेंट का प्रमुख चेहरा हैं। बोले- डर गए तो समझो मर गए
भास्कर टीम से बातचीत के अंत दहिया ने तीखे तेवर में कहा कि आज देश में हर इंसान असुरक्षित है, चाहे वो अस्पताल हो, सड़क हो या ट्रेन। उन्होंने दो टूक कहा, “हम डरने वाले नहीं हैं, अगर मुझे भी गिरफ्तार करना है तो कर लें। मैं यहीं जंतर-मंतर पर बैठा हूं”। अपनी बात के अंत में उन्होंने मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म – “बोल के लब आज़ाद हैं तेरे….” का जिक्र करते हुए युवाओं से हक की आवाज बुलंद करने की अपील की। ———————— ये खबर भी पढ़ें… यूट्यूबर ध्रुव राठी का साथी कॉकरोच जनता पार्टी का प्रवक्ता:विदेश मंत्रालय में नौकरी की, फिल्में बना चुके; पढ़िए सोनीपत के विजेता दहिया की कहानी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पार्टी की कोर टीम में शामिल सोनीपत के विजेता दहिया की कहानी भी काफी दिलचस्प है। विजेता CJP के तीन प्रवक्ताओं में से एक हैं। उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की, विदेश मंत्रालय में नौकरी की, फिर उसे छोड़कर हरियाणवी फिल्में, लेखन और कंटेंट क्रिएशन की राह चुनी। (पूरी खबर पढ़ें)



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‘प्रधानमंत्री की कार भी नहीं बख्शी’: कानपुर में डॉ. किरण बेदी ने सुनाया इंदिरा गांधी का चालान वाला किस्सा – Kanpur News




रोटरी क्लब ऑफ कानपुर ग्रेटर का 31वां अधिष्ठापन समारोह रविवार को आयोजित किया गया। रात 9 बजे शुरू हुए समारोह में साल 2026-27 के लिए नई कार्यकारिणी ने शपथ ग्रहण की। क्लब के नए अध्यक्ष के रूप में रोटेरियन विकास जायसवाल, सचिव के रूप में रोटेरियन अनुप केसरवानी और उनकी पूरी कार्यकारिणी ने पद संभाला। कार्यक्रम में देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। नवनिर्वाचित अध्यक्ष विकास जायसवाल ने कहा कि क्लब समाज सेवा की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जनहित के ऐतिहासिक और प्रभावी कार्यक्रम आयोजित करेगा। उन्होंने सभी सदस्यों से सेवा, सहयोग और समर्पण की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। समारोह के मुख्य अतिथि रोटेरियन सीए जसबीर सिंह भाटिया रहे। कानपुर आने के लिए अच्छी हो गई कनेक्टिविटी पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने रोटरी क्लब के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ईमानदार नेतृत्व, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि रोटरी जैसे संगठन समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डॉ. किरण बेदी ने कहा कि अब कानपुर आने के लिए कनेक्टिविटी अच्छी हो गई है। दिल्ली से सीधे कानपुर आई हूं और कानपुर का ट्रैफिक भी अच्छा हो गया है। पहले लखनऊ से कार से आना पड़ता था। उन्होंने आईपीएस रहते हुए अपने कार्यकाल के दौरान किए गए सराहनीय कार्यों को याद किया। इंदिरा गांधी के चालान वाला किस्सा सुनाया एक रोटेरियन के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कार का चालान काटने की घटना के सवाल पर उन्होंने कहा कि दिल्ली की डीसीपी (ट्रैफिक) रहते हुए वह सुबह 8 बजे ही सड़क पर निकल जाती थीं। ताकि वह यातायात नियमों को सख्ती से लागू करवा सके। उन्होंने कहा कि एक दिन कनॉट प्लेस के ऑउटर सर्किल के पास इंदिरा गांधी की कार आई। देखा गया कि वह कार नियमों का पालन नहीं कर रही थी। उन्होंने कहा कि मेरे साथ एक सब इंस्पेक्टर थे। वह तुरंत इंदिरा गांधी की कार के पास गए और ड्राइवर से कहा कि इस गाड़ी को हटाओ। अगर आप चेतावनी नहीं मानेंगे तो क्रेन लग जाएगी, लेकिन उसके बाद भी ड्राइवर ने कार नहीं हटाई। फिर प्रधानमंत्री की कार क्रेन से हटाई गई। इसके अलावा गाड़ी का चालान भी किया गया। कार्यक्रम में यह लोग रहे मौजूद कार्यक्रम का संचालन रोटेरियन रोकेश कपूर और संगीता कपूर ने किया। समारोह में रोटेरियन संदीप गुप्ता, अतुल कपूर, रवि कपूर, आलोक लोढिया, श्रीराम अग्रवाल, भरत चंद्र सेठ, विपुल जैन, अनिल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में क्लब के सदस्य मौजूद रहे।



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सारण में बारातियों से भरी बस पलटी, एक की मौत: 5 घायल, जेसीबी से निकाले गए दबे बाराती, स्पीड ब्रेकर पर ड्राइवर ने खोया कंट्रोल – Chhapra News




सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र में रविवार देर रात बारातियों से भरी एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में एक बाराती की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कई अन्य बारातियों को भी चोटें आई हैं। यह बस वैशाली जिले के लालगंज से जगदीशपुर जा रही बारात का हिस्सा थी। तरैया थाना क्षेत्र में एसएच-73 पर गंडार गांव के पास बने स्पीड ब्रेकर पर चालक ने बस से नियंत्रण खो दिया। तेज रफ्तार बस पहले सड़क किनारे एक सूखे पेड़ से टकराई, फिर बिजली के पोल से भिड़ते हुए पलट गई। दुर्घटना के कारण कई बाराती बस के अंदर फंस गए। घटना से जुड़ी तस्वीरें…
शीशे तोड़कर घायलों को बाहर निकाला
दुर्घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने बस के शीशे तोड़कर और दरवाजे खोलकर घायलों को बाहर निकाला। एक बाराती बस के नीचे दब गया था, जिसे निकालने के लिए जेसीबी मशीन की सहायता लेनी पड़ी। काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकालकर रेफरल अस्पताल तरैया ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान वैशाली जिले के बिशुनपुर अररा गैरोल निवासी मोहम्मद असगर के रूप में हुई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है। अन्य घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है। सड़क से हटाकर यातायात सामान्य कराया गया
घटना की जानकारी मिलने पर तरैया थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से राहत और बचाव अभियान में हिस्सा लिया। दुर्घटनाग्रस्त बस को सड़क से हटाकर यातायात सामान्य कराया गया। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का कारण स्पीड ब्रेकर पर चालक द्वारा बस से नियंत्रण खो देना बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस हादसे के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया है, जबकि घायलों के परिजन अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल ले रहे हैं। घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।



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मॉडिफाइड साइलेंसर/हॉर्न वाली बाइक्स होगी सीज: ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक होगा,शहर में पार्किंग व्यवस्था में भी हो सकता है बदलाव – Sikar News




सीकर में अब बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाने पर बाइक सीज होगी। पुलिस इसके लिए अभियान चलाएगी। इतना ही नहीं शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन भी चेक होगा। इसके साथ ही शहर में कई जगह पार्किंग व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। यह बात सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कही। जो आज शाम को सीकर के कोतवाली थाने में सीएलजी सदस्यों की मीटिंग लेने के लिए पहुंचे थे। मीटिंग के दौरान लोगों ने सुझाव दिया कि शहर में मोडिफाइड साइलेंसर और होने लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई हो। इसके साथ ही शहर में कई जगह सड़क के बीच जो टू व्हीलर पार्किंग की जगह बनाई गई है। उसे भी हटाकर बीच में बैरिकेड लगा दिया जाए। इसके अलावा ऑटो स्टैंड भी फिक्स हो। इसके बाद एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने कहा कि आज की मीटिंग में सामने आया कि शहर में ट्रैफिक का बड़ा इशू है। इसको लेकर जल्द ही शहर में चलने वाले ऑटो का रजिस्ट्रेशन चेक किया जाएगा और उनकी पार्किंग का पॉइंट भी डिसाइड किया जाएगा। इसके अलावा शहर में जो हाथ ठेले लगे हुए हैं उन पर भी प्लान बनाया जाएगा। एसपी ने कहा कि जो लोग शहर में अपनी बाइक्स पर मोडिफाइड साइलेंसर या हॉर्न लगाकर घूमते हैं। उनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर बाइक्स को सीज किया जाएगा। एसपी ने कहा की बावड़ी गेट सहित तबेला बाजार के सामने सड़क के बीच जो बाइक की पार्किंग बनाई गई है लोगों ने सुझाव दिया कि उसे हटाकर बेरिकेड्स लगा दिए जाए। इस पर भी विचार करके सॉल्यूशन निकालेंगे।



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क्या है पे ग्रेड को मिलाने की मांग? सबसे बड़े कर्मचारी संगठन ने क्यों भेजी ये सिफारिश


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आठवें वेतन का इंतजार हर केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनधारक कर रहा है. अभी वेतन आयोग भारत भर में घूमकर डाटा जुटा रहा है. इससे पहले 15 जून तक आयोग ने कर्मचारी संगठनों से सुझाव लिए थे. उन सुझावों में एक पे ग्रेड को मर्ज करने की सिफारिश भी थी. उसका मतलब क्या है और वह सुझाव क्यों भेजा गया, आइए इसे समझते हैं.

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यह सुझाव केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन की ओर से दिया गया है.

नई दिल्ली. आठवें वेतन आयोग पर मंथन जारी है. आयोग ने कर्मचारी संगठनों से 15 जून तक उनके सुझाव मांगे थे. आयोग अलग-अलग राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर भी डाटा जुटा रहा है. इन कर्मचारी संगठनों के सुझावों को बहुत गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर आयोग अपनी सिफारिश केंद्र को देता है. इसी क्रम में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कुछ सिफारिशें आयोग को दी हैं. यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों का सबसे बड़ा प्रतिनिधि संगठन माना जाता है. इसमें रेलवे, रक्षा, डाक, केंद्रीय सचिवालय समेत कई विभागों के कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व होता है.

NC-JCM की ओर से भेजे गए सुझावों में एक अहम सिफारिश यह भी कि पे ग्रेड्स को मर्ज कर दिया जाए. यानी जो पे लेवल एक दूसरे के बहुत करीब हैं उन्हें मिला दिया जाए. NC-JCM का कहना है कि कई लेवल में काम लगभग एक जैसा है और सैलरी का अंतर भी बहुत ज्यादा नहीं है. फिर भी अलग पे लेवल होने से प्रमोशन और करियर ग्रोथ में फर्क पड़ता है. इससे पे स्ट्रक्चर आसान होगा और समान काम करने वाले कर्मचारियों के बीच अंतर कम होगा.

उदाहरण से समझें

NC-JCM की मांग यह है कि

  • लेवल 2 और 3 को एक कर दिया जाए.
  • लेवल 4 और 5 को एक कर दिया जाए.
  • लेवल 7 और 8 को एक कर दिया जाए.
  • लेवल 9 और 10 को एक कर दिया जाए.

इसके अलावा लेवल 5 के कर्मचारियों को अलग से राहत देने की भी मांग की गई है. NC-JCM का कहना है कि रेलवे, रक्षा, डाक और केंद्रीय सचिवालय के कई कर्मचारी लंबे समय से लेवल 5 में ही अटके हुए हैं. इसलिए उसने मांग की है कि एक बार के लिए सभी मौजूदा लेवल 5 कर्मचारियों को सीधे लेवल 6 में अपग्रेड कर दिया जाए. इससे हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी सैलरी भी बढ़ जाएगी.

अन्य मांगें क्या हैं?

उपरोक्त मांगों के अलावा संगठन ने न्यूनतम सैलरी 18,000 से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग की है. यह बेसिक पे होगी. इसके ऊपर महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और दूसरे भत्ते अलग से मिलेंगे. सालाना इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग है. NC-JCM यह भी चाहता है कि लेवल 13 तक एक आसान और व्यवस्थित पे मैट्रिक्स बनाया जाए, ताकि कर्मचारियों को यह समझने में आसानी हो कि प्रमोशन के बाद उनकी सैलरी कैसे बढ़ेगी. साथ ही पेंशन फॉर्मूला को नई सैलरी के हिसाब से दोबारा तय करने की मांग भी की गई ताकि रिटायर कर्मचारियों को भी वेतन बढ़ने का फायदा मिल सके.

क्या यह सब लागू होगा?

इसका सीधा जवाब है- नहीं. संगठन ने सिर्फ सुझाव दिए हैं जिसे मांग भी समझा सकता है. अब गेंद वेतन आयोग के पाले में है कि वह इनमें से कितने सुझावों को मानता है और कितनों को नकार देता है. वेतन आयोग द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद भी सरकार यह तय करेगी कि उन सुझावों को मानना है या नहीं.

कौन-कौन है टीम में

8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश कर रही हैं. इसके सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष हैं. यह प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं. इनके अलावा पंकज जैन आयोग के सदस्य सचिव हैं. यह एक पूर्व आईएएस अधिकारी हैं.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण का लिया जायजा: डीएम ने तय समय में काम पूरा करने के दिए निर्देश, 912 करोड़ की लागत से हो रहा काम – Darbhanga News




दरभंगा में 912 करोड़ रुपए की लागत से एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का काम चल रहा है। जिलाधिकारी कौशल कुमार रविवार को निर्माण स्थल पर निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के अंदर गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। नए टर्मिनल के लिए प्रस्तावित अस्थायी एप्रोच रोड (पहुंच मार्ग) के निर्माण में भी तेजी लाई जाए। निरीक्षण के दौरान डीएम ने टर्मिनल भवन के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया और निर्माण एजेंसी से अब तक की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
एप्रोच रोड सबसे बड़ी चुनौती
दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन के निर्माण के साथ-साथ सबसे बड़ी चुनौती एनएच-27 से नए टर्मिनल तक एप्रोच रोड का निर्माण है। इसी मुद्दे को लेकर गत 16 जुलाई को बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत दरभंगा पहुंचे थे। उन्होंने निर्माणाधीन टर्मिनल भवन परिसर में जिला प्रशासन, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग (PWD), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी।
बैठक का मुख्य एजेंडा नए टर्मिनल तक पहुंच मार्ग का निर्माण था। सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि एप्रोच रोड से जुड़ी सभी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने टर्मिनल भवन निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की और कार्य में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने देने के निर्देश दिए थे।
निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद निरीक्षण के दौरान एयरपोर्ट निदेशक डॉ. दिलीप कुमार, सदर अनुमंडल पदाधिकारी कुमार गौरव, पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी रवि कुमार आर्य सहित संबंधित विभागों के अभियंतागण एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन पूरा होने के बाद मिथिलांचल के लाखों यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। व



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अजय सिंह का कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आह्वान: गुटबाजी छोड़ें, तभी 25 साल का सत्ता वनवास खत्म होगा – Vidisha News




पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल भैया’ ने विदिशा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कांग्रेस को 25 साल का सत्ता वनवास खत्म करना है तो नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुटबाजी छोड़नी होगी। रविवार को विदिशा पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में कई स्थानों पर फूल-मालाओं और पुष्पवर्षा से उनका स्वागत किया। जिला कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। यहां एक संगठनात्मक बैठक में उन्होंने जिले के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आगामी रणनीति पर चर्चा की। शहनाई गार्डन में आयोजित कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम में अजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब 25 वर्षों से प्रदेश की सत्ता से बाहर है। उन्होंने जोर दिया कि अब समय आपसी मतभेद भुलाकर जनता के बीच जाने और कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत करने का है। अजय सिंह ने बताया कि वे पिछले कुछ महीनों से पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और अब तक 40 से अधिक जिलों में कार्यकर्ताओं से संवाद कर चुके हैं। इस दौरान वे ऐसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी मिले हैं, जो लंबे समय से संगठन की गतिविधियों से दूर थे। उन्होंने कहा कि कई जिलों में ऐसे कार्यकर्ता दोबारा सक्रिय होकर पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं, जो कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत है। अजय सिंह ने कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत बताया और एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘हम करीब 25 साल से मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर हैं। अगर अब भी हम गुटों में बंटे रहेंगे तो फिर सत्ता से बाहर ही बैठे रहेंगे।’ उन्होंने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत राजनीति छोड़कर संगठन हित में काम करने का आग्रह किया।



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कच्ची दीवार ढही, युवक की मौत: बारिश से बचने के लिए रुका था, मौसी के घर से लौट रहा था – Sonbhadra News




सोनभद्र के राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के पवर गांव में शनिवार की देर शाम बाइक सवार 23 वर्षीय युवक अवधेश की कच्ची दीवार ढहने मौत हो गई। अवधेश अपनी मौसी के घर से वापस अपने गांव डेहरी कला लौट रहे थे, तभी यह घटना हुई। डेहरी कला गांव निवासी अवधेश पुत्र बबलू शनिवार को राबर्ट्सगंज बाजार गए थे। वह धान की नर्सरी में उगी घास को नष्ट करने वाली दवा खरीदने के लिए दुकान पर गए थे। दवा लेने के बाद वह अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्होंने पवर गांव में अपनी मौसी के घर पर कुछ देर के लिए रुकने का फैसला किया।
शाम करीब सात बजे अवधेश मौसी के घर से अपने गांव के लिए निकले। पवर गांव में कुछ ही दूरी आगे बढ़ने पर बरसात होने की वजह से सड़क किनारे स्थित एक कच्ची दीवार के पास जाकर छिप गए, दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। दीवार का मलबा सीधे अवधेश और उनकी बाइक पर आ गिरा, जिससे वह पूरी तरह दब गए। घटना होते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े और तत्काल राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर दीवार का मलबा हटाया और घायल अवस्था में अवधेश को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए। जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर राबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी हाउस भेज दिया। जहां रविवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया रॉबर्ट्सगंज कोतवाली प्रभारी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि मृतक का रविवार को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को शव सौंप दिया गया है, मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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फिश करी से हो गई हैं बोर? ट्राई करें बिहार-बंगाल का मशहूर माछेर झोल


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Machher Jhol Recipe: अगर आप फिश की नई रेसिपी तलाश कर रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए है. यहां आप बिहार और पश्चिम बंगाल की फेमस डिश माछेर झोल बनाने की विधि जान सकते हैं. इसे गरमागरम चावल के साथ खाना होलसम फीलिंग्स होती है.

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अगर आप भी एक जैसी फिश करी या फ्राई मछली खाकर बोर हो गए हैं, तो बिहारी-बंगाली स्टाइल माछेर झोल आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. ये एक पारंपरिक डिश है, जो अपने हल्के लेकिन मसालेदार स्वाद के लिए काफी पसंद की जाती है. बिहार और पश्चिम बंगाल में यह रेसिपी घर-घर में बनाई जाती है और खासतौर पर चावल के साथ इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है.

माछेर झोल की सबसे बड़ी खासियत इसका सरसों के तेल और मसालों से तैयार होने वाला स्वादिष्ट ग्रेवी बेस है. इसमें ज्यादा भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, फिर भी इसका स्वाद बहुत लाजवाब होता है. ताजी मछली, सरसों, लहसुन और जीरे का मेल इस डिश को खास बनाता है. अगर आप घर पर कुछ नया और स्वादिष्ट बनाना चाहती हैं, तो इस आसान रेसिपी को जरूर आजमाएं.

  • माछेर झोल बनाने के लिए सबसे पहले मछली के टुकड़ों को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद उन पर नमक, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर लगाकर लगभग 20 से 25 मिनट के लिए रख दें, ताकि मसाले अच्छी तरह मछली में समा जाएं.
  • अब एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर मछली के टुकड़ों को सुनहरा होने तक हल्का फ्राई कर लें और फिर उन्हें अलग निकालकर रख दें. इसके बाद मिक्सर में पीली सरसों, लहसुन और जीरा डालकर बारीक पेस्ट तैयार कर लें.
  • उसी कड़ाही में थोड़ा तेल बचाकर मेथी दाना, सूखी लाल मिर्च और तेज पत्ता डालकर तड़का लगाएं. फिर इसमें तैयार किया हुआ सरसों का पेस्ट डालें. साथ ही हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च डालकर धीमी आंच पर मसालों को अच्छी तरह भून लें.
  • जब मसाले अच्छी तरह पक जाएं, तब इसमें कटे हुए टमाटर और स्वादानुसार नमक डालें. टमाटर के नरम होने तक पकाएं. इसके बाद अपनी जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें और एक-दो उबाल आने दें.
  • अब इसमें तली हुई मछली डालकर 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं, ताकि मछली में ग्रेवी का स्वाद अच्छी तरह समा जाए. आखिर में ऊपर से कटा हुआ हरा धनिया डालें और गैस बंद कर दें.
  • स्वादिष्ट बिहारी-बंगाली स्टाइल माछेर झोल तैयार है. इसे गरमागरम चावल या रोटी के साथ परोसें और पारंपरिक स्वाद का आनंद लें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें



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