रायसेन में गुरुवार शाम करीब 7 बजे तेज आंधी और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हुई। लगभग डेढ़ घंटे तक लगातार हुई इस बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया। महामाया चौक पर करीब 2 फीट तक पानी भर गया, जिससे वाहन ड्राइवरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ ही देर में सड़कें पानी से लबालब हो गईं। रामलीला मैदान और महामाया चौक जैसे निचले इलाकों में भी पानी भर गया। तेज हवाओं के कारण शहर की बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई, जिससे कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित हो गई। 10 दिन देरी से पहुंचा है मानसून
जिले में बुधवार से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक भी भारी बारिश हुई थी, जिसके बाद गुरुवार शाम 7 बजे से फिर बारिश का दौर शुरू हो गया। इस लगातार बारिश से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का मौसम पूरी तरह बदल गया है। रायसेन जिले में 1 जून से अब तक कुल 77.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। इस बार मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा था, लेकिन अब यह पूरी तरह सक्रिय हो गया है और लगातार बारिश हो रही है। लगातार हो रही इस बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है। खरीफ सीजन की बुआई ने अब गति पकड़ ली है। रायसेन जिले में धान का रकबा अधिक होने के कारण किसान धान की खेती की तैयारियों में जुट गए हैं। खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से बुआई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है, जिससे किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद है।
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डेढ़ घंटे की बारिश से रायसेन के निचले इलाके डूबे: महामाया चौक पर दो फीट पानी भरा, आंधी से बिजली गुल – Raisen News
पत्रकारों से सवालों पर भड़के सांसद संजय पाटिल: कहा- दोबारा आए तो मार डालूंगा, डिप्टी सीएम शिंदे बोले- मीडिया से माफी मांगे
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मुंबई56 मिनट पहले
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दीना पाटिल ने पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकी दी।
हाल ही में शिवसेना (UBT) छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से सांसद संजय दीना पाटिल पर पत्रकारों को धमकाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा है।
पत्रकार संजय दीना पाटिल से शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत द्वारा मुंबई पुलिस आयुक्त को लिखे गए पत्र और उनकी पार्षद बेटी राजुल पाटिल के उद्धव ठाकरे के साथ बने रहने के फैसले पर प्रतिक्रिया लेने पहुंचे थे। इसी दौरान पाटिल कथित तौर पर भड़क गए और पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकी दी।
पाटिल ने पत्रकारों से कहा- मेरे मामलों में दखल क्यों देते हो? दोबारा आए तो मार डालूंगा। इस बातचीत का वीडियो भी सामने आया है।
मामला इतना बढ़ गया कि खुद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सामने आकर कहना पड़ा-
मैंने संजय दीना पाटिल को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि यदि आपने कोई अनुचित टिप्पणी की है, तो आपको खेद व्यक्त करना चाहिए।


इन दो सवालों पर भड़क गए पाटिल
महाराष्ट्र में जारी राजनीति गर्माहट के बीच पत्रकार अपना काम कर रहे थें। उनका काम सवाल पूछना है, जो वो करेंगे ही। इसी क्रम में पत्रकारों ने उनसे उनकी बेटी (कॉरपोरेटर) राजुल पाटिल के स्टैंड पर सवाल पूछा, जिन्होंने साफ कहा है कि वह अपने पिता के पाला बदलने के बाद भी उद्धव ठाकरे की पार्टी (UBT) के साथ ही रहेंगी।
इसके अलावा दूसरा सवाल यह था कि उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने मुंबई पुलिस को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में मांग की गई है कि पाटिल के उस पुराने बयान पर कार्रवाई हो, जिसमें उन्होंने कहा था कि दल-बदल का विरोध करने वालों पर वह बम फेंकेंगे और उनके घरों में घुसकर मार डालेंगे।
अब पत्रकारों ने जैसे ही ये दो सवाल पूछे, शिवसेना सांसद भड़क उठे। सांसद पाटिल ने पत्रकारों को गाली देते हुए कहा कि तुम लोग मेरे मामलों में अपनी नाक क्यों घुसा रहे हो? अगर दोबारा आए, तो जान से मार डालूंगा।

शिंदे ने कहा कि मैंने उनसे साफ कह दिया है कि आपको माफी मांगनी चाहिए।
बैकफुट पर आए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
इस पूरे विवाद के बाद जब राज्य विधानसभा परिसर के बाहर मीडिया ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को घेरा, तो उन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की। शिंदे ने हा कि संजय दीना पाटिल का इरादा पत्रकारों का अपमान करने का नहीं था। अगर उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो उन्होंने माफी मांगने की इच्छा जताई है। शिंदे ने कहा कि मैंने उनसे साफ कह दिया है कि अगर आपके मुंह से कोई गलत बात निकली है, तो आपको माफी मांगनी चाहिए।
शिंदे ने कहा कि उन्होंने पाटिल से स्पष्ट कहा है कि यदि उनसे कोई अनुचित टिप्पणी हुई है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि 2022 से लगातार व्यक्तिगत टिप्पणियों और परिवारों पर हमलों की राजनीति हो रही है, जिससे पाटिल नाराज थे, लेकिन उनका गुस्सा मीडिया के खिलाफ नहीं था।

संजय राउत ने कमिश्नर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी गुरुवार को मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती को पत्र लिखकर सांसद संजय दिना पाटिल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पाटिल हाल ही में सत्ताधारी शिवसेना में शामिल हुए हैं और उन पर प्रदर्शनकारियों पर बम फेंकने की कथित टिप्पणी करने का आरोप है। राउत ने आरोप लगाया कि पाटिल ने कहा था कि अगर कोई उनके खिलाफ विरोध करता है, तो वह उन पर बम फेंकेंगे, उनके घरों में घुसेंगे और उन्हें मार डालेंगे।
गौरतलब है कि सोमवार को शिंदे गुट में शामिल होने के बाद भी संजय दीना पाटिल के बयान विवादों में रहे थे। उस समय उन्होंने अपने पिता पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि हमने पांच लोगों को मार दिया था। हालांकि, उन्होंने इस बयान का कोई विस्तृत संदर्भ नहीं दिया था।
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उद्धव के 6 सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल:4 साल में दूसरी टूट, शिंदे बोले- छक्का लगाया

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सोमवार को फिर बगावत हो गई। लोकसभा के कुल 9 में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। लोकसभा में अब शिंदे के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। पूरी खबर पढ़ें…
कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया: 41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे
ओटावा52 मिनट पहले
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कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है।
23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा,
आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई।

इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे।

कनिष्क विमान का मलबा इकठ्ठा करते आयरिश नेवल अथॉरिटी के जवान।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि
23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।”
जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ।
कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया।
एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है।

इस तस्वीर में आयरलैंड में एयर इंडिया बॉम्बिंग के बाद शवों को निकालते हुए रेस्क्यू वर्कर्स को देखा जा सकता है।
कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए?
भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं।
1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी
2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया।
सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया।
2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी
कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा।
3. हमले को भारत का मामला समझा गया
जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली।
4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया
मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया।
5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही
2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा।

धमाके से करीब 2 हफ्ते पहले एअर इंडिया के कनिष्क विमान की तस्वीर
अब हालात कैसे बदले
हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है।
इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं।
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कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें…
जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा

23 जून 1985 की सुबह
एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
क्या आप भी बिरयानी और पुलाव को एक मानते हैं? शेफ कुणाल कपूर ने बताया दोनों में असली अंतर
Biryani VS Pulao: आप खाने के शौकीन हैं, तो यकीनन आपके सामने कभी न कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर बिरयानी और पुलाव में असली अंतर क्या है. कई लोग इन दोनों व्यंजनों को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि कुछ का कहना होता है कि स्वाद, मसालों और पकाने के तरीके में बड़ा फर्क होता है. दिलचस्प बात यह है कि इस सवाल का जवाब हर किसी के पास नहीं होता. हाल ही में सेलिब्रिटी शेफ और मास्टरशेफ इंडिया के जज कुणाल कपूर ने इस बहस को आसान शब्दों में समझाया है.
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कुणाल कपूर ने बताया कि बिरयानी और पुलाव के बीच सबसे बड़ा अंतर चावल नहीं, बल्कि नॉनवेज पकाने के तरीके में छिपा है. उनका कहना है कि अगर इस मूल बात को समझ लिया जाए, तो दोनों व्यंजनों के बीच का भ्रम काफी हद तक दूर हो जाता है.
नाम में ही छिपा है दोनों व्यंजनों का राज
पॉडकास्ट के दौरान जब कुणाल कपूर से बिरयानी और पुलाव के बीच का अंतर पूछा, तो शेफ ने इसकी शुरुआत दोनों नामों के अर्थ से की. कुणाल कपूर के मुताबिक, पुलाव का संबंध “यखनी” से है. यखनी यानी मसालों के साथ उबाला गया शोरबा, जिसमें नॉनवेज पकाया जाता है. दूसरी तरफ, बिरयानी शब्द फारसी मूल के शब्द “बिरियां” से निकला है, जिसका मतलब होता है “भूनना” या “तलना”. यही वजह है कि बिरयानी और पुलाव की असली पहचान उनके पकाने के तरीके से तय होती है.
बिरयानी और पुलाव में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
नॉनवेज पकाने का तरीका बदल देता है पूरा स्वाद
कुणाल कपूर बताते हैं कि पुलाव में नॉनवेज को आमतौर पर उबालकर तैयार किया जाता है. मटन, चिकन या किसी भी दूसरे नॉनवेज को पहले यखनी में पकाया जाता है और फिर उसी शोरबे में चावल डाले जाते हैं. वहीं, बिरयानी में नॉनवेज को मसालों और तेल के साथ अच्छी तरह भुना जाता है. इस प्रक्रिया में मसालों का स्वाद नॉनवेज के भीतर तक समा जाता है. इसके बाद चावल और नॉनवेज को परतों में पकाया जाता है या एक साथ दम पर रखा जाता है. यही वजह है कि बिरयानी का स्वाद ज्यादा गहरा और मसालेदार महसूस होता है, जबकि पुलाव हल्का, संतुलित और सुगंधित लगता है. हालांकि, शेफ का यह भी कहना है कि भारतीय खानपान की कई रेसिपियां समय के साथ बदली हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में पुलाव और बिरयानी बनाने के तरीके भी अलग हो सकते हैं. कुछ जगहों पर पुलाव में भी नॉनवेज को हल्का भून लिया जाता है, लेकिन पारंपरिक तौर पर दोनों की पहचान यही है.
मुरादाबादी चिकन बिरयानी: आसान और स्वाद से भरपूर
घर पर ऐसे बनाएं कुणाल कपूर की स्पेशल रेसिपी कुणाल कपूर की मुरादाबादी चिकन बिरयानी उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो कम मसालों में भी दमदार स्वाद चाहते हैं. इस रेसिपी के लिए 1 किलो हड्डी वाला चिकन लें और उसमें नमक, नींबू का रस, अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च पेस्ट, दही, सौंफ पाउडर, धनिया पाउडर, जावित्री, दालचीनी, तेज पत्ता, काली मिर्च, लौंग, इलायची और थोड़ा जायफल मिलाकर करीब 30 मिनट के लिए मैरीनेट करें. अब एक गहरी हांडी में घी या तेल गर्म करें और कटा हुआ प्याज सुनहरा होने तक भूनें. थोड़ा प्याज सजावट के लिए अलग निकाल लें. बाकी प्याज में हरी मिर्च डालें और फिर मैरीनेट किया हुआ चिकन डालकर तेज आंच पर दो मिनट तक पकाएं.
इसके बाद आंच धीमी कर दें और चिकन को ढककर लगभग 80 फीसदी पकने तक छोड़ दें. ध्यान रखें कि इसमें अलग से पानी न डालें. जब चिकन मसालों के साथ अच्छी तरह पक जाए और तेल छोड़ने लगे, तब जरूरत के अनुसार पानी डालें. उबाल आने पर भीगे हुए बासमती चावल डालें और नमक जांच लें. अब हांडी को ढककर धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक चावल सारा पानी सोख न लें. आखिर में तले हुए प्याज, केसर, घी और केवड़ा जल से सजाकर गर्मागर्म परोसें.
स्वाद से आगे, परंपरा की भी कहानी
बिरयानी और पुलाव सिर्फ चावल के व्यंजन नहीं हैं, बल्कि भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा का हिस्सा हैं. अलग-अलग राज्यों और शहरों में इनके स्वाद, मसाले और पकाने के तरीके बदल जाते हैं. कहीं लखनऊ की दम बिरयानी मशहूर है, तो कहीं कश्मीरी यखनी पुलाव लोगों की पहली पसंद है. ऐसे में अगली बार जब आपके सामने बिरयानी और पुलाव में से किसी एक को चुनने का मौका आए, तो आप सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी पाक कला को भी समझ पाएंगे.
ऑनलाइन रेलवे टिकट बुक करते समय भर दी गलत जानकारी? जानें कैसे कर सकते हैं सुधार
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले एक यात्री ने ऑनलाइन टिकट बुक करते समय अपनी उम्र गलत लिख दी, जिसके बाद TTE ने जांच के दौरान 7000 रुपये का चालान काट दिया। यात्री का दावा है कि गलती से उसने अपना उम्र 1 साल रख दिया था। IRCTC से ऑनलाइन टिकट बुक करते समय अगर आपसे भी ऐसी गलती होती है तो क्या आप इसे सुधार सकते हैं?
ऑनलाइन टिकट में कैसे करें सुधार?
IRCTC की वेबसाइट और Railone ऐप में टिकट बुक होने के बाद हुई किसी भी गलती की सुधार करने का कोई विकल्प मौजूद नहीं होता है। ऐसे में यात्री अगर अपने टिकट में ऑनलाइन कोई सुधार करना चाहते हैं तो उसे कैंसिल करके दोबारा टिकट बुक कर सकते हैं। हालांकि, रेलवे के नियमों के मुताबिक, यात्री नजदीकी रेलवे रिजर्वेशन सेंटर पर जाकर अपने टिकट में कुछ बदलाव कर सकते हैं।
बोर्डिंग स्टेशन कैसे बदलें?
रेलवे के नियम के मुताबिक, यात्री ऑनलाइन बुक किए गए टिकट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकते हैं। हालांकि, बुक किए गए टिकट में कुछ सीमित बदलाव संभव है, जिसमें यात्री का नाम, बोर्डिंग स्टेशन आदि शामिल हैं। आप बुक किए गए टिकट का बोर्डिंग स्टेशन ऑनलाइन बदल सकते हैं। इसके लिए आपको IRCTC की वेबसाइट या Railone ऐप पर जाना होगा। बुक किए गए टिकट हिस्ट्री में जाकर आप जर्नी का बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं।
बोर्डिंग स्टेशन कैसे बदले?
जर्नी डेट नहीं बदलेगी
नियम के मुताबिक, आप जर्नी डेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकते हैं। अगर, आपको जर्नी डेट बदलनी है तो भी आपको बुक किए गए टिकट को कैंसिल करना होगा और नया टिकट ही बुक करना होगा। वहीं, पैसेंजर का नाम और अन्य डिटेल बदलने के लिए आपको रेलवे रिजर्वेशन सेंटर पर जाना होगा। वहां, आपको बुक किए गए टिकट के साथ-साथ वैलिड आईडीप्रूफ आदि देना होगा। इसके बाद ही टिकट में किसी तरह का बदलाव संभव है।
केवल पैसेंजर डिटेल बदलने की सुविधा
टिकट में पैसेंजर का नाम आदि बदलने के लिए भी आपको रिजर्वेशन काउंटर पर जाना होगा। ऑनलाइन बुक हुए टिकट के प्रिंट आउट के साथ अपना आईडी प्रूफ और नए यात्रा करने वाले यात्री का आईडी प्रूफ और उसके साथ आपके रिलेशन की डिटेल का प्रूफ देना होगा। इस बात का ध्यान रखें कि टिकट में किसी भी तरह का बदलाव ट्रेन के डिपार्चर से 24 घंटे पहले ही किया जा सकता है। इसके बाद टिकट में किसी भी तरह का बदलाव करना संभव नहीं है।
यह भी पढ़ें – ट्रेन टिकट बुकिंग के लिए कौन-सा ऐप है बेस्ट? प्लानिंग करने से पहले पढ़ लें यह रिपोर्ट
वो एक्शन फिल्म, विलेन के नाम पर था टाइटल, स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाए दर्शक, तोड़े रिकॉर्ड
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ये कहानी है बॉलीवुड फिल्म की जिसने हिंदी सिनेमा के सभी समीकरण बदल दिए. यह बॉलीवुड की ऐसी पहली फिल्म थी जिसने 100 करोड़ का नेट कलेक्शन किया. फिल्म रिलीज होने से पहले डायरेक्टर गिरफ्तार हो गया था. फिल्म का नाम विलेन के नाम पर था. इसी फिल्म ने 6 पैक एब्स का चलन शुरू किया. कमाई के हर रिकॉर्ड को तोड़ा. इस फिल्म ने दर्शकों को सिनेमाघर तक जाने के लिए मजबूर कर दिया. स्क्रीन से दर्शक नजरें नहीं हटा पाए.
कुछ फिल्में ऐसी होती है जिनका जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ता है. ऐसी ही एक फिल्म 2008 में सिनेमाघरों में आई जिसने युवाओं को अपनी फिजिक बनाने के लिए इंस्पायर्ड किया. इसी फिल्म ने सिक्स पैक एब्स का चलन शुरू किया. फिल्म साउथ मूवी का रीमेक थी लेकिन जब यह फिल्म रिलीज हुई तो तहलका मच गया. विलेन के नाम पर इस फिल्म का टाइटल रखा गया. इसी मूवी ने बॉलीवुड में 100 करोड़ का क्लब शुरू किया. एक्शन से भरपूर इस फिल्म का नाम ‘गजनी’ था जिसमें आमिर खान-असिन लीड रोल में थे. फिल्म 25 दिसंबर 2008 को रिलीज हुई थी.

‘गजनी’ फिल्म ने बॉलीवुड के कई समीकरण बदल दिए. इसी फिल्म ने आमिर खान को सही मायने में मिस्टर परफेक्टनिस्ट का टैग दिया. इस फिल्म की तैयारी के लिए आमिर खान ने दो साल का समय लिया था. फिल्म में एक भी अश्लील सीन नहीं था, फिर भी इसमें दिखाई गई हिंसा के चलते मूवी को यूए सर्टिफिकेट दिया गया.

‘गजनी’ साउथ में इसी नाम से बनी फिल्म का रीमेक थी. इसका डायरेक्शन एआर मुर्गदास ने किया था. तमिल की ‘गजनी’ फिल्म में सूर्या, असिन और नयनतारा नजर आई थीं. फिल्म सफल रही तो डायरेक्टर एआर मुर्गदास ने इसका हिंदी वर्जन बनाने का फैसला किया. वो हिंदी में इस फिल्म को सलमान खान के साथ बनाना चाहते थे. ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा का रोल निभाने वाले प्रदीप रावत से मुर्गदास ने बात की. प्रदीप रावत ने उन्हें आमिर खान के साथ फिल्म बनाने का सुझाव दिया.
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मुर्गदास की आमिर खान से मुलाकात हुई. आमिर खान ने साउथ की गजनी फिल्म देखी. फिल्म देखते ही उन्होंने हामी भर दी. हिंदी वर्जन में क्लाइमैक्स सीन बदला गया. मजेदार बात यह है कि क्लाइमैक्स सीन आमिर खान ने लिखा था. ओरिजनल वर्जन के क्लाइमैक्स में विलेन के डबल रोल देखने को मिलते हैं जबकि हिंदी में ऐसा नहीं है.

‘गजनी’ का म्यूजिक एआर रहमान ने कंपोज किया था. गीतकार प्रसून जोशी ने लिखे थे. डायरेक्टर एआर मुर्गदास ने ओरिजनल तमिल फिल्म के राइट्स नहीं खरीदे थे. ऐसे में फिल्म के रिलीज होने से पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. बाद में दोनों में समझौता हुआ था. फिल्म में आमिर खान ने एक अमीर बिजनेसमैन संजय सिंघानिया का किरदार निभाया था.

‘गजनी’ जैसी एक्शन से भरपूर फिल्म पहले कभी बॉलीवुड में नहीं बनी थी. फिल्म में आमिर खान ने अपने सिक्स पैक दिखाए. इसके लिए उन्होंने सात माह तक ट्रेनिंग ली थी. आमिर खान ने ‘दस का दम’ शो में कहा था, ‘मेरी बॉडी सलमान जैसी नहीं है लेकिन मैंने एक कोशिश की है. आमिर खान ने एक्शन अवतार को देखकर दर्शक हैरान रह गए थे.

‘गजनी’ फिल्म में दिखाया गया कि लीड हीरो हर 15 मिनट चीजों को भूल जाता है. फिल्म का कोर प्लॉट हॉलीवुड मूवी ‘मोमेंटो’ और ‘हैप्पी गो लवली’ से इंस्पायर्ड था. फिल्म का पहला हॉफ 1969 की ‘साजन’ और दूसरा हॉफ 1983 की फिल्म ‘पसंद अपनी अपनी’ से प्रेरित था. हिंदे दर्शकों को ध्यान में रखते हुए फिल्म में कई बदलाव किए गए.

फिल्म की शुरुआत में टाइटल कजरी रखा गया था. गजनी फिल्म पहली ऐसी हिंदी फिल्म थी जिससे बॉलीवुड में 100 करोड़ के क्लब का ट्रेंड शुरू हुआ. गजनी फिल्म का बजट करीब 52 करोड़ रुपये था. मूवी ने 194 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा को बदलकर रख दिया. इसी फिल्म के बाद साउथ की एक्शन फिल्मों के रीमेक बनाए गए. एक्शन फिल्मों का दौर फिर से शुरू हुआ.
किसान ने अफसरों को ही कर दी जमीन दान: नामांतरण के लिए रिश्वत मांगने का आरोप, शिकायतें अनसुनी होने पर उठाया कदम – Pilibhit News
पीलीभीत में एक किसान ने नामांतरण प्रकरण में लापरवाही और रिश्वत मांगने के आरोपों से परेशान होकर अपनी जमीन अधिकारियों के नाम दर्ज करने की मांग कर दी। किसान ने इस संबंध में जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए न्याय की गुहार लगाई है। ग्राम उमरसड़ निवासी किसान संजीव कुमार का कहना है कि गाटा संख्या 151 में उनकी हिस्सेदारी के अंश संशोधन एवं नामांतरण का मामला पिछले नौ महीनों से लंबित पड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि संबंधित लेखपाल अमित कुमार सक्सेना ने नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत न देने पर उनके प्रकरण को आगे नहीं बढ़ाया गया। किसान का कहना है कि उन्होंने मामले के समाधान के लिए कई बार अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने जिलाधिकारी से पांच बार मुलाकात की और मंडलायुक्त के समक्ष भी अपनी शिकायत रखी। इसके अलावा मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। संजीव कुमार ने अपने प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया है कि गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार द्वारा भी इस मामले में कई बार सिफारिशी पत्र लिखे गए। इसके बावजूद नामांतरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। किसान का आरोप है कि एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह और राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लगातार उपेक्षा और सुनवाई न होने से क्षुब्ध होकर उन्होंने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में किसान ने लिखा है कि यदि उनकी जमीन का नामांतरण नहीं किया जा सकता, तो उनकी हिस्सेदारी वाली भूमि एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह और लेखपाल अमित कुमार सक्सेना के नाम ही दर्ज कर दी जाए। किसान के इस कदम की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। वहीं, मामले को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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जमीन विवाद में हत्या के 2 दोषियों को आजीवन कारावास: 10-10 हजार रुपए जुर्माना लगाया, 5 आरोपी संदेह का लाभ देते हुए किए बरी – Bundi News
नैनवां थाना क्षेत्र के ग्राम पाई में जमीन विवाद को लेकर हुई संजू पत्नी प्रहलाद मीणा की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, नैनवां ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी जोधराज और संतराम को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले में पुलिस ने 25 जुलाई 2023 को मृतका के देवर मनीष की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद 21 अक्टूबर 2023 को न्यायालय में सात आरोपी लक्ष्मीपुरा निवासी शोपाल, जोधराज, डिप्टी, गुजरियाखेड़ा निवासी संतराम, जनशी उर्फ हंसराज, प्रधान तथा पाई निवासी मनराज के खिलाफ चालान पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से राजेंद्र सिंह सोलंकी ने पैरवी करते हुए अदालत में 36 गवाहों के बयान, 74 दस्तावेज तथा 5 आर्टिकल्स प्रस्तुत किए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने जोधराज और संतराम को दोषी ठहराया, जबकि शेष पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई 2023 को ग्राम पाई में जमीन विवाद के चलते संजू मीणा की हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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निशांत का पहला एक्शन- PMCH के प्रिंसिपल को हटाया: निरीक्षण के दौरान गायब मिले-फोन भी नहीं उठाया; अपने प्राइवेट क्लिनिक में बैठे थे – Patna News
पटनाकुछ ही क्षण पहले
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PMCH के प्रिंसिपल डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाया गया।
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से उनके पद के अतिरिक्त प्रभार से हटा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद निशांत कुमार ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह की जगह डॉ. गीता सिन्हा को PMCH का नया प्रिंसिपल बनाया गया है।
दरअसल, 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार निरीक्षण के लिए PMCH पहुंचे थे। इस दौरान अस्पताल की ड्यूटी के समय डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अनुपस्थित पाए गए। मंत्री ने बैठक के लिए उन्हें फोन भी किया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बताया गया कि वे बिना छुट्टी लिए ड्यूटी से गैरहाजिर थे।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि ड्यूटी के दौरान डॉ. सिंह अपने निजी क्लीनिक में मौजूद थे। जांच के दौरान उनके क्लीनिक के बाहर विभाग की सरकारी गाड़ी भी खड़ी मिली। इसे सरकारी संसाधनों के निजी उपयोग के रूप में देखा गया है।

डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को PMCH में प्रिंसिपल के रूप में अतिरक्त प्रभार मिला था। 23 जून को वे बिना बताए ड्यूटी से गायब थे, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की।
48 घंटे बाद सवास्थ्य विभाग का एक्शन
निरीक्षण के बाद निशांत कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अस्पताल में कई खामियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा था कि प्राचार्य अपने पद पर मौजूद नहीं थे और उनकी जगह कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी उपलब्ध नहीं था।
फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। उनके एबसेंस के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। जांच में पाया गया कि 23 जून 2026 को PMCH में आयोजित एक पहले से निर्धारित कार्यक्रम के दौरान वे बिना किसी जानकारी के अनुपस्थित थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डॉ. सिंह ने न तो अवकाश का कोई आवेदन दिया था और न ही किसी अन्य अधिकारी को प्रभार सौंपा था। उस दौरान उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन भी रिसीव नहीं किया। उनकी अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
निरीक्षण के करीब 48 घंटे बाद सरकार ने यह कार्रवाई करते हुए उन्हें अतिरिक्त प्रभार से हटा दिया। स्वास्थ्य विभाग ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और अनधिकृत अनुपस्थिति का मामला मानते हुए कार्रवाई की है।
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को PMCH के प्रभारी प्राचार्य पद के अतिरिक्त प्रभार से हटाकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग के प्राध्यापक पद पर पदस्थापित कर दिया गया है।
देखें निरीक्षण के दिन की तस्वीरें…

स्वास्थ्य मंत्री के आने के पहले का विजुअल, एरिया में कई मरीज लेते हुए थे।

उनके आने के बाद का विजुअल, रस्ते से सभी मरीजों को जल्दी जल्दी हटा दिया गया।

अस्पताल में निरीक्षण करने पहुंचे निशांत कुमार।
प्रिंसिपल PMCH से गायब मिले थे
दरअसल, 23 जून PMCH में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान PMCH के प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह भी अनुपस्थित मिले।
इसपर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा था- प्रिंसिपल फोन भी नहीं उठ रहे हैं और उन्होंने अपने स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को चार्ज भी नहीं दिया है।
आगे निशांत ने कहा, मामले में गंभीर लापरवाही दिख रही है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

प्रिंसिपल ने कहा था- तबीयत खराब थी
PMCH के प्रिंसिपल डॉ नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया था- ‘मैं अस्वस्थ हूं। अचानक गर्म पानी पेट पर गिर गया। इसका प्रमाण हैं। स्वस्थ होते ही स्वास्थ मंत्री निशांत कुमार और स्वास्थ्य सचिव को इस आकस्मिक घटना की पूरी जानकारी दूंगा और अपना पक्ष रखूंगा’।
निरीक्षण में कई गड़बड़ियां सामने आई थीं
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था, निरीक्षण में कई गड़बड़ियां सामने आई, जिनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि भी मौजूद रहे। इसके बाद अस्पताल के अधीक्षक प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारियों के साथ अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।


