Sunday, May 10, 2026
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IIT छात्र से लेकर IAS ऑफिसर तक…. कौन हैं CM सुवेंदु अधिकारी के एडवाइजर सुब्रत गुप्ता?


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IIT छात्र से लेकर IAS ऑफिसर तक… कौन हैं CM सुवेंदु के एडवाइजर सुब्रत गुप्ता

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चुनाव के दौरान सुब्रत गुप्ता ने अपना मॉडर्न दिमाग चलाया था. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कई काम किए. एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल उनके द्वारा किया गया था. इससे फर्जी वोटरों को लिस्ट से बाहर करने में मदद मिली. चुनाव में गड़बड़ी रोकने में उनका यह एक्शन सफल रहा था.

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सुब्रत गुप्ता सीएम सुवेंदु अधिकारी के सलाहकार नियुक्त किए गए हैं. (एएनआई)

कोलकाता. रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी सुब्रत गुप्ता को शनिवार को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सलाहकार नियुक्त किया गया. सुब्रत गुप्ता की भूमिका को हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त विशेष चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर सराहना मिली थी. सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को ही दिन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.

ईसीआई ने सात मई को सुब्रत गुप्ता के साथ-साथ विशेष पुलिस पर्यवेक्षक को भी उनके संबंधित कर्तव्यों से मुक्त कर दिया था. सुवेंदु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद, राज्य सरकार द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें सुब्रत गुप्ता को नए मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की गई.

सुब्रत गुप्ता पश्चिम बंगाल कैडर के 1990 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, एक टेक्नोक्रेट और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खड़गपुर) के पूर्व छात्र रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन की बर्मिंघम यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन भी किया है. सुब्रत गुप्ता दिल्ली में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के सचिव भी रह चुके हैं.

उन्हें विशेष चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में, प्रौद्योगिकी के उचित उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अनुप्रयोग के माध्यम से मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाने के ईसीआई के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने का श्रेय दिया गया.

चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चरण के दौरान, प्रौद्योगिकी और एआई अनुप्रयोगों के इस व्यापक उपयोग ने ईसीआई को संदिग्ध मतदाताओं की पहचान करने और फर्जी मतदाताओं को सफलतापूर्वक हटाने में मदद की. इसके अलावा, मतदान चरणों के दौरान भी, इसी तकनीकी अनुप्रयोग और एआई ने आयोग को चुनाव से संबंधित अनियमितताओं और कदाचारों को समाप्त करने में मदद की.

इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल सरकार ने पश्चिम बंगाल कैडर के 2017 बैच के आईएएस अधिकारी सुब्रत बाला को मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव नियुक्त करने की घोषणा की. इससे पहले वह दक्षिण 24 परगना जिले के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यभार संभाल रहे थे.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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इंदौर पहुंचा महाराष्ट्र का ये बेशकीमती आम, खास स्वाद और अनोखी खुशबू


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इंदौर में आम प्रेमियों के लिए इंतजार खत्म हो चुका है, जहां 8 मई से ‘मैंगो जत्रा’ उत्सव शुरू हो चुका है, जो 10 मई तक चलेगा. आम की अलग-अलग वैरायटी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं. इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में यह उत्सव पिछले 14 सालों से आयोजित हो रहा है. मैंगो जत्रा में रत्नागिरी के हापुस आम की भारी डिमांड है. आइए जानते हैं, इसके बारे में.

‘मैंगो जत्रा’ में रत्नागिरी का हापुस आम (अल्फांसो) मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं. इनकी कीमत साइज के अनुसार है और 500 से लेकर 1500 दर्जन तक बिक रहे हैं. कम फसल होने की वजह से आम के दाम पिछले साल के मुकाबले कुछ ज्यादा हैं. लेकिन फिर भी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. छोटे साइज के हापुस 500 के दो दर्जन तक में भी उपलब्ध हैं.

रत्नागिरी और देवगढ़ के हापुस आम देखने में गोल होते हैं और खाने में बहुत ही ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं. इंदौर के लोगों को यह आम बहुत ही ज्यादा पसंद आते हैं. दुकानदार ने बताया है कि इस आम में कोई केमिकल का उपयोग नहीं हुआ है. यह पेड़ से पका हुआ आम है. इसके ऊपर पैकिंग डेट है. इसका स्वाद बहुत मीठा रहता है.

hapus mango

महाराष्ट्र के रत्नागिरी क्षेत्र में पैदा होने वाला हापुस आम, जिसे अल्फांसो आम भी कहा जाता है. अपने खास स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है. यही वजह है कि इसे आमों का राजा भी कहा जाता है. इसका गूदा बेहद मुलायम और क्रीमी होता है, जबकि इसकी खुशबू इतनी खास होती है कि दूर से ही इसकी पहचान हो जाती है.

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रत्नागिरी का हापुस आम पकने के बाद सुनहरा पीला और हल्का केसरिया रंग का दिखाई देता है, जो इसे और आकर्षक बनाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक रत्नागिरी की लाल मिट्टी, समुद्री हवाएं और तटीय जलवायु इस आम को खास स्वाद प्रदान करती हैं. यही कारण है कि यहां पैदा होने वाला हापुस दूसरे क्षेत्रों के आमों से अलग माना जाता है. इस आम में गुठली छोटी और गूदा अधिक होता है, जिससे खाने योग्य हिस्सा ज्यादा मिलता है.

हापुस आम की विदेशों में भी खूब मांग होती है. इसे अमेरिका, जापान, दुबई और यूरोप सहित कई देशों में इसका निर्यात किया जाता है. हापुस आम का मौसम सीमित होता है और यह मुख्य रूप से मार्च से जून के बीच बाजार में उपलब्ध रहता है. कम समय तक उपलब्ध रहने की वजह से इसकी कीमत ज्यादा होती है.

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर की लोकप्रिय और आम के अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव आम जत्रा पहुंचे. इस दौरान आम उत्पादकों से उन्होंने आम की विशेषताओं के बारे में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष बना रही है. पूरे देश और दुनिया में जिस आम की धाक है. उसका मालवा में होना अच्छी बात है. सीएम ने खुद कार्यक्रम में हापुस आम खाने की इच्छा भी जताई.

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‘अकेलेपन का फायदा उठाया’, विजय के साथ अफेयर के बीच तृषा कृष्णन पर सिंगर का बड़ा बयान


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थलापति विजय एक तरफ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को तैयार हैं, तो दूसरी ओर तृषा कृष्णन के साथ उनकी डेटिंग की अफवाहें जोर पकड़ रही हैं. कुछ सेलेब्स उन्हें शादी करने तक की सलाह दे रहे हैं. इस बीच, मशहूर सिंगर ने विजय और तृषा के अफेयर और उनके घर के क्लेश पर बेबाक बयान देकर फैंस का ध्यान खींचा है. सिंगर सुचित्रा का आरोप है कि तृषा कृष्णन सिर्फ विजय की राजनीतिक सफलता के कारण उनके करीब हैं. सिंगर ने विजय के अपने परिवार से अलगाव पर भी चिंता जताई और कहा कि राजनीति में उन्हें अपने पिता के मार्गदर्शन की जरूरत है. विजय और तृषा की ऑन-स्क्रीन जोड़ी सालों से पॉपुलर रही है, लेकिन निजी जीवन में उनके रिश्तों पर विवाद गहराता जा रहा है.

नई दिल्ली: साउथ फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों हलचल तेज है. थलापति विजय जहां मुख्यमंत्री पद संभालने के करीब हैं, तो दूसरी ओर उनकी निजी जिंदगी में भूचाल आया हुआ है. तृषा कृष्णन संग उनके अफेयर की चर्चाएं तेज हैं. अब सिंगर सुचित्रा ने एक्ट्रेस तृषा कृष्णन संग विजय के अफेयर पर आपत्तिजनक बयान दिया है. सुचित्रा ने साफ-साफ कह दिया है कि उन्हें तृषा बिल्कुल पसंद नहीं हैं. यह बयान ऐसे समय में आया है जब तृषा और सुपरस्टार थलपति विजय के बीच डेटिंग की खबरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं.

Thalapathy vijay Trisha

सिंगर सुचित्रा ने एक इंटरव्यू में विजय की तो तारीफ की, लेकिन तृषा कृष्णन को लेकर उनके सुर काफी तल्ख थे. उन्होंने कहा कि वह विजय को बहुत पसंद करती हैं, लेकिन तृषा को लेकर उनकी राय एकदम अलग है. हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी पुरानी दुश्मनी का जिक्र नहीं किया, पर उनकी बातों से कड़वाहट साफ झलक रही थी.

Thalapathy vijay Trisha

सुचित्रा ने तृषा को एक ‘परजीवी’ (पैरासाइट) की तरह बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि तृषा सिर्फ विजय की कामयाबी और हाल में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की जीत की वजह से उनके करीब हैं. सुचित्रा का मानना है कि जब कोई सफल इंसान अकेला पड़ जाता है, तो ऐसे लोग उनकी जिंदगी में जगह बना लेते हैं. वे बोलीं, ‘जब सफल लोग अकेले पड़ जाते हैं, तब उनकी जिंदगी में पैरासाइट की एंट्री होती है.’

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Thalapathy vijay

सिंगर ने विजय की पर्सनल लाइफ पर भी कमेंट किया. उन्होंने कहा कि विजय ने अपने माता-पिता और पत्नी से दूरी बना ली है और वह फिलहाल अकेले पड़ गए हैं. सुचित्रा की मानें, तो विजय ने अब तक इस अकेलेपन पर गहराई से विचार नहीं किया है और राजनीति में सफल होने के लिए उन्हें अपने पिता चंद्रशेखर के मार्गदर्शन की सख्त जरूरत है.

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अगर विजय और तृषा के फिल्मी सफर की बात करें, तो यह जोड़ी तमिल सिनेमा की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक रही है. ‘घिल्ली’, ‘थिरुपाची’ और ‘कुरुवी’ जैसी हिट फिल्मों में उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा. साल 2008 के आसपास से ही इन दोनों के ऑफ-स्क्रीन रिश्तों को लेकर गॉसिप शुरू हो गई थी.

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दिलचस्प बात यह है कि ‘कुरुवी’ के बाद विजय और तृषा ने अचानक साथ काम करना बंद कर दिया था. उस वक्त ऐसी अफवाहें उड़ी थीं कि विजय के परिवार ने उन्हें तृषा से दूरी बनाने की सलाह दी है. हालांकि, उस समय दोनों सितारों ने इन खबरों को गलत बताया था और कहा था कि वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.

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कपल ने करीब 15 सालों के लंबे इंतजार के बाद साल 2023 में फिल्म ‘लियो’ से पर्दे पर वापस लौटी, जिससे फैंस काफी रोमांचित दिखे. लेकिन इसी साल जब विजय की पत्नी ने तलाक की अर्जी दी, तो उन्होंने विजय पर किसी दूसरी एक्ट्रेस के साथ रिश्ते में होने का आरोप लगाया. इसके बाद, लोगों ने एक बार फिर तृषा का नाम लेना शुरू कर दिया. (फोटो साभार: IMDb)

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सुचित्रा का ताजा इंटरव्यू आग में घी डालने जैसा काम कर रहा है. विजय के राजनीति में कदम रखने के बाद इस तरह के निजी विवाद उनकी इमेज पर क्या असर डालेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा. फिलहाल, सुचित्रा के इन गंभीर आरोपों पर तृषा कृष्णन की ओर से कोई रिएक्शन नहीं आया है.

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ललितपुर में दो पक्षों में चले लाठी-डंडे: पथराव में तीन महिलाओं सहित 14 लोग घायल, पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया – Lalitpur News




ललितपुर के कोतवाली सदर अंतर्गत ग्राम अमरपुर में शनिवार शाम दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। यह विवाद लाठी-डंडों और पथराव में बदल गया, जिसमें कुल 14 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी घायलों को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा है और मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। यह घटना शनिवार शाम को 25 वर्षीय संजू राजा पुत्र भगवानसिंह और दूसरे पक्ष के तिलकराम के परिजनों के बीच किसी बात को लेकर हुए विवाद से शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला करने के साथ-साथ पथराव भी किया।
इस संघर्ष में एक पक्ष से नौ लोग घायल हुए हैं। इनमें देवकीनंदन पुत्र शिवचरन (30), अभिषेक यादव पुत्र बाबूलाल (21), बादाम पुत्र शाकुलाल (26), ऊदल सिंह पुत्र तिलकराम (25), कमलेश पत्नी टीकाराम (50), पुष्पा पत्नी तिलकराम (50), तिलकराम पुत्र हल्कू (55), अंजो पत्नी रेवाशंकर (38) और किरन पत्नी जीतू (38) शामिल हैं। इन सभी को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। वहीं, दूसरे पक्ष से पांच लोग घायल हुए हैं। इनमें संजू राजा पुत्र भगवान सिंह (25), रामसिंह बुंदेला पुत्र रामराजा (55), मानसिंह पुत्र बाबूलाल (42), ब्रजेश राजा पत्नी भगवान सिंह (50) और जगदीश बुंदेला पुत्र रामराजा (50) शामिल हैं। इन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनुराग अवस्थी ने बताया कि ग्राम अमरपुर में हुए इस विवाद के बाद दोनों पक्षों के घायलों को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि तहरीर मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज की जाएगी।



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हल्की बारिश में डूब जाती हैं कारें? स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम से नहीं भरेगा पानी


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हर मानसून में शहरों की सड़कें तालाब बन जाती हैं और लाखों की कारें पानी में डूबकर खराब हो जाती हैं. घरों में घुसता बारिश का पानी लोगों के लिए हर साल बड़ी मुसीबत बनता रहा है. लेकिन अब ‘स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम’ और अर्बन फ्लड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स शहरों को जलभराव से बचाने की नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं. नई तकनीक वाले ये हाईटेक सिस्टम भारी बारिश का पानी मिनटों में निकालकर सड़कों और कॉलोनियों को सुरक्षित रखने का दावा कर रहे हैं.

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अब बारिश में नहीं डूबेंगी कारें! स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम बदल देगा शहरों की तस्वीर. (Representative Image:AI)

नई दिल्ली. हर साल मानसून आते ही बड़े शहरों में जलभराव लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है. थोड़ी देर की बारिश में सड़कें तालाब जैसी दिखने लगती हैं, महंगी कारें पानी में फंस जाती हैं और घरों में गंदा पानी भरने लगता है. लेकिन अब देश के कई शहरों में शुरू हुए ‘अर्बन फ्लड मैनेजमेंट’ और स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स इस समस्या का स्थायी समाधान बनने की उम्मीद जगा रहे हैं. नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नई तकनीक से ऐसे सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं जो भारी बारिश के पानी को कुछ ही मिनटों में निकाल सकेंगे.

आखिर क्यों डूब जाते हैं शहर?
विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में बढ़ते कंक्रीट निर्माण और अव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम जलभराव की सबसे बड़ी वजह हैं. पहले बारिश का पानी जमीन में आसानी से चला जाता था, लेकिन अब सड़कों, पार्किंग और इमारतों के कारण पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद हो गए हैं. दूसरी तरफ पुराने नाले और सीवर सिस्टम बढ़ती आबादी के हिसाब से छोटे पड़ चुके हैं. यही कारण है कि हल्की बारिश में भी सड़कें पानी से भर जाती हैं. कई बार घंटों तक पानी नहीं निकलता और वाहन बंद हो जाते हैं. इससे लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है.

क्या है स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम?
नई पीढ़ी के स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम को खासतौर पर शहरी बाढ़ रोकने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इसमें बड़े अंडरग्राउंड पाइप, हाई-कैपेसिटी पंप, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और रेनवॉटर स्टोरेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे ही बारिश शुरू होती है, सेंसर पानी का स्तर मापते हैं और कंट्रोल सिस्टम तुरंत अतिरिक्त पानी को दूसरी लाइन या स्टोरेज टैंक की ओर भेज देता है. कई शहरों में ऐसे ड्रेनेज सिस्टम बनाए जा रहे हैं जो एक घंटे में हुई भारी बारिश का पानी भी तेजी से निकाल सकें. इससे सड़क पर पानी जमा होने की संभावना काफी कम हो जाती है.

कार और घर बचाने में कैसे मिलेगा फायदा
बारिश के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान कारों और घरों को होता है. पानी भरने से कार का इंजन खराब हो सकता है और मरम्मत पर भारी खर्च आता है. वहीं घरों में पानी घुसने से फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी सामान खराब हो जाते हैं. स्मार्ट ड्रेनेज प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि बारिश का पानी तेजी से निकलेगा और जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी. इससे पार्किंग एरिया, बेसमेंट और कॉलोनियों में पानी जमा होने का खतरा कम होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह सिस्टम शहरी लोगों के आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक कम कर सकता है.

नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन की बड़ी तैयारी
देश के कई बड़े शहरों में नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नई ड्रेनेज लाइनें बिछाई जा रही हैं. कई जगह पुराने नालों को चौड़ा किया जा रहा है, जबकि कुछ शहरों में भूमिगत वाटर टनल बनाने का काम चल रहा है. इसके अलावा AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं ताकि बारिश शुरू होते ही संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा सके. कुछ नगर निगम मोबाइल ऐप और कंट्रोल रूम के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग की तैयारी भी कर रहे हैं. इससे प्रशासन को पहले से पता चल सकेगा कि किस इलाके में जलभराव का खतरा ज्यादा है.

मानसून में बदल सकती है शहरों की तस्वीर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ये प्रोजेक्ट सही तरीके से लागू हुए तो आने वाले समय में शहरों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. लोगों को हर मानसून में सड़क बंद होने, ट्रैफिक जाम और घरों में पानी भरने जैसी परेशानियों से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही व्यापार, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की जिंदगी भी कम प्रभावित होगी. हालांकि इसके लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिम्मेदारी भी जरूरी है. अगर लोग नालों में कचरा फेंकना बंद करें और जल निकासी व्यवस्था को साफ रखें, तो स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम और ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है. आने वाले वर्षों में यही तकनीक शहरों को सुरक्षित, आधुनिक और मानसून-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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बिजावर में वन विभाग- किसानों के बीच भूमि विवाद बढ़ा: पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोप, विधायक बोले- सीमांकन तक रोकें निर्माण कार्य – Chhatarpur (MP) News




छतरपुर जिले के बिजावर विधानसभा क्षेत्र में वन विभाग और किसानों के बीच भूमि विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर उनकी पैतृक कृषि भूमि को वन भूमि बताकर कब्जा करने और वहां नाली व खखरी (पत्थर की दीवार) निर्माण कराने के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। बढ़ते विवाद को देखते हुए विधायक राजेश शुक्ला ‘बबलू’ ने सीमांकन पूरा होने तक सभी निर्माण कार्य रोकने की मांग की है। हाल ही में बड़ी संख्या में किसान विधायक राजेश शुक्ला के पास पहुंचे और अपनी समस्याएं रखीं। किसानों का कहना है कि वे पीढ़ियों से जिन जमीनों पर खेती कर रहे हैं, वन विभाग अब उन्हें अपनी सीमा में बताकर निर्माण कार्य करवा रहा है। इससे गांवों में तनाव का माहौल बन गया है। विधायक ने एसडीएम को लिखा पत्र मामले को गंभीर मानते हुए विधायक ने बिजावर एसडीएम को पत्र लिखकर कहा है कि वन और राजस्व विभाग के संयुक्त सीमांकन के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जाए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट सीमा निर्धारण के बिना की जा रही कार्रवाई भविष्य में अप्रिय स्थिति पैदा कर सकती है। विधायक ने मांग की है कि प्रत्येक गांव में पहले वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सीमांकन कराया जाए। इसके बाद ही नाली, खखरी या अन्य निर्माण कार्य शुरू किए जाएं। साथ ही कृषि भूमि की सीमा पर चल रहे निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोकने की बात भी कही गई है। किसानों ने लगाए मनमानी के आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग बिना राजस्व रिकॉर्ड और किसानों की सहमति के जमीन पर दावा कर रहा है। किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और इस तरह की कार्रवाई से वे आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान हैं। विधायक के हस्तक्षेप के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि वन और राजस्व विभाग के बीच का विवाद अब पारदर्शी तरीके से सुलझाया जाएगा और उनकी पैतृक जमीन सुरक्षित रह सकेगी।



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राष्ट्रीय लोक अदालत में 545 मामलों का निपटारा: जिला जज ने किया उद्घाटन, वाहन जुर्माने पर 50% छूट मिली – Sheikhpura News




शेखपुरा में शनिवार को जिला न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। साल की इस दूसरी लोक अदालत में कुल 545 मामलों का निपटारा किया गया। निपटाए गए मामलों में सर्वाधिक 227 बैंक ऋण से संबंधित थे, जबकि 210 मामले ट्रैफिक चालान के थे। न्यायालय में लंबित 102 मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया और चार टेलीफोन से संबंधित मामले भी निपटाए गए। लोक अदालत का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष संतोष कुमार तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी शेखर आनंद, पुलिस अधीक्षक बलिराम कुमार चौधरी, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, महासचिव विपिन कुमार, बैंक प्रबंधक और न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित थे। जिला जज संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि लोक अदालत बिना किसी खर्च के, कम समय में आपसी सुलह के जरिए न्याय पाने का सबसे आसान तरीका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोक अदालत में सुलझाए गए मामलों को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती। राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों की सुनवाई के लिए कुल सात पीठ गठित की गई थीं। कार्यक्रम का संचालन विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सुशील प्रसाद ने किया। यहां समझौता योग्य आपराधिक मामले, विवाह, बैंक ऋण, श्रम विभाग, भरण-पोषण, मापतौल और राजस्व से संबंधित छोटे मामले आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निपटाए जाते हैं। जिला न्यायालय में एक स्थायी लोक अदालत भी पिछले एक साल से कार्यरत है। इसमें वायु, सड़क, जल सेवा, टेलीग्राम, टेलीफोन सेवा, ऊर्जा, पानी की आपूर्ति, लोक स्वच्छता, अस्पताल या सुविधा, बीमा सेवा, शिक्षा या शिक्षण संस्थान जैसे बिहार राज्य सरकार द्वारा अधिकृत सात विषयों से संबंधित मामले दर्ज कराए जा सकते हैं। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवहन विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी। इसके लिए एक अलग काउंटर भी बनाया गया था, जिससे बड़ी संख्या में वाहन चालकों ने इस छूट का लाभ उठाया।



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लखीमपुर खीरी आग हादसा, रेड क्रॉस सोसाइटी ने 200 पीड़ित परिवारों की मदद


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बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के कांप टांडा व‌ अमरपुर गांव में अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई थी जिस कारण घरों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया था.वहीं करीब 200 पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री वितरण करने के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी की टीम के अग्नि पीड़ितों के गांव पहुंची और उनका हाल-चाल जाना आग लग जाने के कारण कई लोग झुलस भी गए जिन लोगों का इलाज भी किया गया और उन्हें निशुल्क में दवाएं भी उपलब्ध कराई गई और कपड़े भी वितरण किए गए.

लखीमपुरः  जहां एक और जिले में भीषण गर्मी का कहर जारी है तो वहीं दूसरी और जनपद खीरी में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं. जिस कारण लोगों का लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है. बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के कांप टांडा व‌ अमरपुर गांव में अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई थी जिस कारण घरों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया था.वहीं करीब 200 पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री वितरण करने के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी की टीम के अग्नि पीड़ितों के गांव पहुंची और उनका हाल-चाल जाना आग लग जाने के कारण कई लोग झुलस भी गए जिन लोगों का इलाज भी किया गया और उन्हें निशुल्क में दवाएं भी उपलब्ध कराई गई और कपड़े भी वितरण किए गए.

आग की घटनाओं को लेकर किया जागरूक

भीषण आग की घटनाओं के बाद बेघर और परेशान परिवारों के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी किसी राहत दूत से कम साबित नहीं हो रही है. आग से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए रेड क्रॉस सोसाइटी लगातार आगे आकर राहत सामग्री वितरित कर रही है। संस्था की ओर से अग्नि पीड़ितों को दवाइयां, कपड़े, खाद्य सामग्री, तिरपाल और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया, जिससे पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली.

आपदा में लोगों की मदद करती है संस्था

रेड क्रॉस सोसाइटी के पदाधिकारियों ने कहा कि मानव सेवा ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है. किसी भी आपदा या संकट के समय संस्था जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि आग से प्रभावित परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय थी, इसलिए तत्काल राहत सामग्री पहुंचाई गई। आने वाले दिनों में भी जरूरत पड़ने पर संस्था हर संभव मदद करेगी.राहत सामग्री पाकर पीड़ित परिवारों के चेहरे पर राहत दिखाई दी। कई लोगों ने कहा कि आग लगने के बाद उनके पास खाने तक का सामान नहीं बचा था। ऐसे समय में रेड क्रॉस सोसाइटी ने मदद कर मानवता की मिसाल पेश की है. महिलाओं ने बताया कि छोटे बच्चों के लिए कपड़े और खाने-पीने का सामान मिलने से काफी राहत मिली है.

200 लोगों की मदद की

लोकल 18 से बातचीत करते हुए आरती श्रीवास्तव ने बताया कि वह 14 वर्ष से रेड क्रास सोसाइटी से जुड़ी हुई है वही लगातार असहाय लोगों की मदद की जा रही है. जब लोगों को जरूरत पड़ती है तब हमारी पूरी टीम उनके बीच में जाती है और उन लोगों की मदद करती है. रेड क्रास सोसाइटी का उद्देश्य है कि लोगों की मदद करना जब लोगों को ब्लड की जरूरत होती है तो हम ब्लड भी उपलब्ध करवाते हैं वहीं जब कोई आपदा आती है तब हमारी टीम मदद करती है. वही 200 के करीब अग्नि पीड़ितों को राशन सामग्री तिरपाल कपड़े वितरण किए गए हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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90s का वो चाइल्ड स्टार, जिसने बचपन में जीता दिल, बड़े होकर बना शानदार डायरेक्टर, पहचाना ?


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यह वो एक्टर हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अलग पहचान बनाई थी. इस हीरो ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी. जिसमें पहली ही फिल्म से एक्टर को सफलता मिली और वो हिट साबित हुई. हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं, उसका सैफ अली खान के परिवार से भी गहरा नाता है. मासूम सा दिखने वाला ये बच्चा आज डायरेक्टिंग लाइन में भी अपनी किस्मत आजमा चुका है. क्या आप जानते हैं कौन है ये हीरो? चलिए बताते हैं.

सोशल मीडिया पर इस हीरो की काफी ज्यादा चर्चा हो रही है. क्या आप जानते हैं कौन है? तस्वीर में दिखने वाले इस बच्चे ने बचपन में ही एक्टिंग की शुरुआत की थी, जो बॉक्स ऑफिस में हिट साबित हुई है. आज यह हीरो डायरेक्टर के रूप में भी बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बना चुका है. जी हां, हम किसी और की नहीं बल्कि एक्टर और डायरेक्टर कुणाल खेमू की बात कर रहे हैं. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

कुणाल खेमू बॉलीवुड के टैलेंटेड एक्टर्स में से एक हैं. उन्होंने बतौर लीड एक्टर ‘कलयुग’ और ‘ट्रैफिक सिग्नल’ जैसी फिल्में की हैं. एक्टिंग के अलावा कुणाल के डांस की भी काफी तारीफ की जाती है. वहीं एक्टर अब डायरेक्टर भी बन चुके हैं. कुणाल खेमू ने साल 2024 में रिलीज़ हुई कॉमेडी फिल्म ‘मडगांव एक्सप्रेस’ से निर्देशक के रूप में बॉलीवुड में अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट की थी. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

हाल ही में उनका एक सिंगल एल्बम ‘निंदिया’ रिलीज़ हुआ है. जिसे लेकर वह काफी ज्यादा एक्साइटेड हैं. ये गाना खास बच्चों के लिए है. यही वजह है कि कुणाल को अपना बचपन याद आ गया. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

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गाने के पोस्टर के अलावा एक्टर ने इंस्टाग्राम पर कुछ फोटोज पोस्ट की हैं. इन फोटोज में कुणाल बेहद ही क्यूट दिखाई दे रहे हैं. अपने बचपन की फोटोज में कुणाल अपने मम्मी-पापा के साथ दिखाई दे रहे हैं. तस्वीरें पोस्ट कर एक्टर ने कैप्शन में लिखा- लोरी वाली पुरानी यादें, एक मैं बचपन में और एक मैं अपने बच्चे के साथ.
निंदिया.. अब रिलीज़ हो चुका है. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

कुणाल खेमू की इस पोस्ट पर उनकी पत्नी और एक्ट्रेस सोहा अली खान ने लाइक किया है. वहीं सोहा और सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने कमेंट कर एक्टर की पोस्ट पर प्यार लुटाया है. उन्होंने लिखा- सो स्वीट, माशा अल्लाह. इसके साथ उन्होंने रेड हार्ट वाला इमोजी भी बनाया है. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

कुणाल और सोहा अली खान की पहली मुलाकात साल 2009 में फिल्म ‘ढूंढते रह जाओगे’ के सेट पर हुई थी. लंबे समय तक डेटिंग और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने 25 जनवरी 2015 को मुंबई में निजी समारोह में शादी की. आज दोनों अपनी बेटी इनाया के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

कुणाल के वर्क फ्रंट की बात करें तो वह जल्द ही ‘गोलमाल 5’ में दिखाई देंगे. इसके अलावा वह ‘मडगांव एक्सप्रेस 2’ की स्क्रिप्ट भी लिख रहे हैं. 2024 में मिली सफलता के बाद कुणाल अब इस कॉमेडी सीक्वल पर काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि यह फिल्म एक बार फिर दर्शकों को खूब हंसाएगी. (फोटो साभारः Instagram @kunalkemmu)

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कूलिंग क्वॉइल खराब होने पर नया AC खरीदना चाहिए या नहीं? कितना आएगा रिपेयर का खर्च


अप्रैल से सितंबर-अक्टूबर तक पूरे भारत में जबरदस्त गर्मी पड़ती है। इन दिनों बिना एसी के रहना बहुत मुश्किल है। ऐसे में अगर एसी में कोई खराबी आ जाए तो जीना ही दूभर हो जाता है। कई बार मैकेनिक एसी में छोटी-मोटी दिक्कत भी होती है तो आपको नया एसी लेने की सलाह दे देते हैं। खास तौर पर कूलिंग क्वॉइल में खराबी आने के बाद आपको मैकेनिक नए एसी लेने के लिए कहते हैं। क्या आपको ऐसे में नया एसी खरीदना चाहिए?

फॉलो करें 50% का नियम

एसी में किसी तरह की दिक्कत आने पर अगर आफको क्विक फैसला लेना है तो 50% का नियम अपनाना चाहिए यानी अगर एसी की रिपेयरिंग कॉस्ट 40 से 50 प्रतिशत तक आ रहा है, तो नया एसी खरीदने में ही भलाई है। Split AC में इंडोर और आउटडोर दोनों यूनिट्स में कूलिंग क्वॉइल लगे होते हैं। किसी भी यूनिट के कूलिंग क्वॉइल में लीकेज आती है, तो इसे रिपेयर करने में अच्छा-खासा खर्च आ जाता है। हालांकि, यह एसी के एज पर भी निर्भर करता है।

आम तौर पर कूलिंग क्वॉइल लीकेज रिपेयर करने में आपको 1,000 रुपये से 2,500 रुपये तक का खर्च आ जाता है। वहीं, कूलिंग क्वॉइल बदलने में 10,000 रुपये तक का खर्च आ सकता हैं। विंडो एसी में यह खर्च तकरीबन 8,000 रुपये तक का होता है। इसके अलावा गैस रिफिलिंग कॉस्ट करीब 3,000 रुपये तक का आता है। इस तरह से आपको कुल 13,000 रुपये तक का खर्च आ जाता है।

कब लें नया एसी?

अगर, आपका एसी 5 साल या इससे ज्यादा पुराना है तो कूलिंग क्वॉइल बदलवाने में फायदा नहीं है। ऐसे में आपको नया एसी खरीद लेना चाहिए क्योंकि कूलिंग क्वॉइल के अलावा एसी के अन्य कंपोनेंट्स जैसे कि पीसीबी और कंप्रेसर भी पुराने हो जाते हैं। वहीं, अगर एसी नया है तो फिर उसमें कूलिंग क्वॉइल रिपेयर कराने में ही फायदा है।

कई बार छोटी लीकेज बिना कूलिंग क्वॉइल बदले ही ठीक हो जाती है। ऐसे में आपका खर्चा और भी कम आ सकता है। वहीं, एसी अगर बार-बार खराब हो रहा है और उसमें गैस लीकेज की समस्या आती है तो आपको फिर नया एसी लेने में ही फायदा है।

एसी में अगर, किसी भी तरह की दिक्कत आती है तो ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर से ही इसे रिपेयर कराएं। एसी अगर वारंटी में है तो आपके रिपेयर और रिप्लेसमेंट के खर्च बच सकते हैं। लोकल मैकेनिक पर भरोसा करने पर आपको नुकसान भी हो सकता है।

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