Wednesday, June 10, 2026
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न चिकन-मटन, न ही कोई पाउडर, सिर्फ 3 चीजों से दिनभर में मिलेगा 120 ग्राम शुद्ध प्रोटीन


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Vegetarian Muscle-Building Diet: अगर आप चिकन-मटन और प्रोटीन पाउडर के बिना मसल्स बनाना चाहते हैं, तो पनीर, सोया और दालें आपकी मदद कर सकती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इन 3 शाकाहारी फूड्स को सही मात्रा में डाइट में शामिल करके रोज 120 ग्राम तक प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है, जो मसल्स ग्रोथ और फिटनेस के लिए फायदेमंद है.

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पनीर, टोफू, सोया चंक्स और दालों में भरपूर प्रोटीन होता है. ये चिकन-मटन के बेस्ट वेज ऑप्शंस हैं.

Most Powerful High Protein Foods: आजकल मसल्स बिल्डिंग के लिए लोग सबसे ज्यादा प्रोटीन पर ध्यान देते हैं. जिम जॉइन करने के बाद लोगों का दूसरा टारगेट ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन इनटेक होता है. प्रोटीन के लिए अक्सर लोग चिकन, मटन और अंडा खाते हैं. इन चीजों में अच्छी खासी मात्रा में प्रोटीन होता है. कुछ लोग प्रोटीन पाउडर का भी सेवन करते हैं, ताकि मसल्स में नई जान आ सके. कई लोग नॉनवेज नहीं खाते और प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहते हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन कैसे मिलेगा.

बेंगलुरु केएस्टर सीएमआई हॉस्पिटल की क्लीनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की हेड एडविना राज ने Indian Express को बताया कि सभी लोगों को 0.8 से 1.2 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम बॉडी वेट के अनुसार लेना चाहिए. आसान भाषा में समझें, तो अगर आपका वजन 70 किलोग्राम है, तो आपको रोज 56 से 84 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. अगर आप बॉडी बिल्डिंग करते हैं या आप एथलीट हैं, तो आपको रोज 100 ग्राम से ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है. कई लोगों को शरीर के वजन के अनुसार 120 ग्राम प्रोटीन की जरूरत भी हो सकती है. इसके लिए आपको 3 चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना होगा.

प्रोटीन के लिए ये हैं बेस्ट फूड्स

पनीर और दूध : दूध और इससे बने प्रोडक्ट प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स हैं. दो गिलास दूध से करीब 16 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है, जबकि 100 ग्राम पनीर में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है. इसके अलावा दही और हंग कर्ड भी प्रोटीन बढ़ाने में मदद करते हैं. इन चीजों का आप नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं.

सोया चंक्स और टोफू : शाकाहारियों के लिए सोया सबसे ताकतवर प्रोटीन सोर्स माना जाता है. एक कप पके हुए सोया चंक्स से करीब 25 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है. वहीं 100 ग्राम टोफू में 12 से 15 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है. नियमित रूप से सोया खाने से प्रोटीन की जरूरत आसानी से पूरी हो सकती है. इन चीजों को सब्जी में डालकर भी आसानी से खाया जा सकता है.

दालें और चना : राजमा, चना, मूंग, उड़द और विभिन्न दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं. एक कटोरी दाल में लगभग 7 से 10 ग्राम प्रोटीन मिलता है. अगर दाल को चावल या रोटी के साथ खाया जाए तो शरीर को बेहतर गुणवत्ता वाला प्रोटीन मिलता है. अंकुरित अनाज यानी स्प्राउट्स भी प्रोटीन का शानदार विकल्प हैं.

इस तरह पाएं भरपूर प्रोटीन

डाइटिशियन के अनुसार एक बार में ज्यादा प्रोटीन खाने की बजाय इसे पूरे दिन 4 से 5 भोजन में बांटना चाहिए. सुबह दूध और स्प्राउट्स, दोपहर में दाल और दही, शाम को ड्राई फ्रूट्स और रात में पनीर या टोफू शामिल करके आसानी से 120 ग्राम प्रोटीन के लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है. मसल्स बनाने के लिए सिर्फ प्रोटीन खाना काफी नहीं है. नियमित वर्कआउट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त कैलोरी लेना भी जरूरी है. तभी शरीर प्रोटीन का सही इस्तेमाल कर पाएगा और मसल्स की ग्रोथ बेहतर होगी.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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आधी-अधूरी स्टोरी पर बनी वो फिल्म, रिलीज होते ही निकली सुपरहिट, मूवी में थे कालजयी गाने


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Bollywood superhit film 1982 : जिस फिल्म की कहानी पूरी यूनिट को पसंद ना आए, कहानी भी आधी-अधूरी हो, उसी स्टोरी पर बनी मूवी सुपरहिट साबित हो जाए तो इसे चमत्कार ही कहा जाएगा. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर और राइटर की मेहनत के चलते ही यह संभव हुआ. सबने मिलकर फिल्म को संपूर्णता दी. यह फिल्म ना केवल कामयाब रही, बल्कि उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मूवी बनी. 41 साल पहले ऐसी ही एक फिल्म सिनेमाघर में आई थी जिसका एक-एक गाना आज भी सुपरहिट है. एक-एक सीन लोगों के जेहन में बसा हुआ है. फिल्म आज कल्ट क्लासिक मूवी का दर्जा रखती है. इस फिल्म को चाहे कितनी भी बार देखें, मन नहीं भरता है. फिल्म की कहानी इतना लगाव पैदा कर देती है कि एक मिनट के लिए भी स्क्रीन से दर्शक नजरें नहीं हटा पाते.

जिस फिल्म की कहानी आधी-अधूरी हो और पूरी यूनिट को कहानी पसंद ना आए लेकिन वही स्टोरी डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के मन में ऐसी बसी कि उन्होंने सबके विरोध के बावजूद मूवी बनाने का फैसला लिया. फैसला कितना चुनौतीपूर्ण रहा होगा, इसका अंदाजा लगा पाना आसान नहीं है. राइटर की मदद से फिल्म को की कहानी को पूरा किया. बाद में कहानी को इस अंदाज में दर्शकों के सामने पेश किया जरा भी अहसास नहीं हुआ कि फिल्म अधूरी है. फिल्म की सफलता में सबसे बड़ा हाथ म्यूजिक ने निभाया. म्यूजिक सदाबहार संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. ऐसा म्यूजिक जिसका असर पिछले 41 साल से बरकरार है. सिने प्रेमियों के दिल में म्यूजिक रच-बस गया. यह फिल्म थी प्रेम रोग जिसका डायरेक्शन-प्रोडक्शन राज कपूर ने किया था.

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ऋषि कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे स्टारर ‘प्रेम रोग’ एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जो कि 30 जुलाई 1982 को रिलीज हुई थी. स्क्रीनप्ले जैनेंद्र जैन और कामना चंद्रा ने मिलकर लिखा था. वैसे यह मूवी लेखिका कामना चंद्र की पहली फिल्म थी. कामना चंद्र ने अपनी मां से एक रियल लाइफ कहानी सुनी थी. उन्होंने यह कहानी राज कपूर को सुनाने का फैसला किया. उन दिनों राज कपूर ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ बना रहे थे. जब कामना चंद्रा ने यह कहानी राज कपूर को सुनाई तो वहां पर मौजूद किसी भी शख्स को यह कहानी पसंद नहीं आई थी. कामना चंद्रा कहानी सुनाते समय फॉक सॉन्ग भी गाकर सुनाती थी. राज कपूर को फॉक सॉन्ग पसंद आए. उन्होंने फिल्म बनाने का फैसला किया. कामना चंद्रा की कहानी अधूरी थी. फिल्म के इंटरवल के बाद जो कुछ भी दिखाया जाता है, उसे राज साहब ने अपने से जोड़ा था.

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ऋषि कपूर उन दिनों बहुत बिजी थे. यह पहला मौका था जब राज साहब को ऋषि कपूर से डेट्स एडजस्ट करनी पड़ीं. राज कपूर चाहते थे कि ऋषि ही फिल्म का निर्देशन करें लेकिन वो बहुत व्यस्त थे. फिर तय हुआ कि स्क्रीनप्ले-डायलॉग राइटर जैनेंद्र जैन फिल्म का डायरेक्शन करेंगे. जब डिस्ट्रीब्यूटर्स को पता चला तो उन्होंने राज कपूर से ऐसा ना करने के लिए कहा. उनका कहना था कि फिल्में राज कपूर के नाम से चलती है. अंत में राज कपूर ने ही इस मूवी का डायरेक्शन किया. राज साहब ने ऋषि कपूर से कहा था कि मुझे फिल्म में तुम्हारे चेहरे पर दिलीप कुमार जैसा सीरियस इंटेंस लुक चाहिए. यह दूसरा मौका था जब ऋषि कपूर ने राज कपूर के निर्देशन में काम किया. पहले मधु कपूर यह फिल्म करने वाली थीं. फिर पद्मिनी कोल्हापुरे इस फिल्म की नायिका बनी. राज कपूर ने एक विधवा के रूप में उनका स्क्रीन टेस्ट भी लिया था. पद्मिनी तब 20 साल की भी नहीं थीं.

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‘प्रेम रोग’ में राज कपूर के तीनों बेटे काम कर रहे थे. रणधीर कपूर प्रोडक्शन मैनेजर थे. राजीव कपूर असिस्टेंट डायरेक्टर थे. ऋषि कपूर हीरो थे. कहा जाता है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान राजीव कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे के बीच बढ़ी नजदीकियों से राज कपूर परेशान हो गए थे. ऐसे में दोनों की वार्निंग भी थी. पद्मिनी कोल्हापुरे की ऑनस्क्रीन मां का रोल नंदा ने निभाया था.

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‘प्रेम रोग’ फिल्म का सदाबहार म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. गीतकार संतोष आनंद, पंडित नारायण शर्मा और अमीर ककलबाश थे. गीतकार पंडित नारायण शर्मा ने भंवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राजकुमार’ लिखा था. गाना एम्स्टर्डम में फिल्माया गया था. जून महीने में वहां पर ट्यूलिप के पौधे लगा दिए जाते हैं. एम्स्टर्डम में दिन में बहुत देर से अंधेरा होता है, इसलिए क्रू ने काफी लंबे समय तक शूटिंग की. गाना पूरे नौ दिन में फिल्माया गया था. गाना कितना शानदार शूट हुआ, बताने की जरूरत नहीं. गाना कई कारणों से खास है. लंबे-लंबे तीन अंतरे हैं. एक-एक लाइन को खास तरीके से कंपोज किया गया है. लता मंगेशकर-सुरेश वाडकर ने उतनी ही खूबसूरती से इसे गाया है. इस गाने में लता दीदी की हंसी-खिलखिलाहट भी सुनाई देती है. गाने का फिल्मांकन असाधारण है.

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फिल्म का हर गाना सिचुएशन और कहानी के अनुरूप था. बैकग्राउंड म्यूजिक कमाल का था. फिल्म के अन्य पॉप्युलर गाने थे : ये प्यार था या कुछ और था (सुधा मल्होत्रा-अनवर) मैं हूं प्रेमरोगी (सुरेश वाडकर), मोहब्बत है क्या चीज हमको बताओ (लता मंगेशकर-सुरेश वाडकर) और ये गलियां ये चौबारा (लता मंगेशकर). लता मंगेशकर की आवाज प्रेम रोग के गानों में स्पेशल है. एक गाने में अलाप तो दूसरे गाने में उनकी हंसी मंत्रमुग्ध कर देती है. अमीर कजलबाश ने यादगार गाना ‘मेरी किस्मत में तू नहीं शायद’ लिखा था.

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शम्मी कपूर ने फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे के ताऊ का रोल निभाया था. यह पहला और आखिरी मौका था जब उन्होंने राज कपूर के निर्देशन में काम किया. फिल्म में रजा मुराद ने पद्मिनी कोल्हपुरे के जेठ का किरदार निभाया था. फिल्म जब शुरू होती है तो कलरफुल रहती है लेकिन जब पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ हादसा हो जाता है तो पूरे सीन सफेद रंग के बेजान नजर आते हैं. यह इस बात का प्रतीक था कि सबकुछ बेरंग हो गया है. मनोरमा की जिंदगी उदास है. पद्मिनी जब हंसती हैं तो फूल खिलते नजर आते हैं. उसी समय गाना
‘भंवरे ने खिलाया फूल फूल को ले गया राजकुमार’ शुरू होता है. गाने के जरिये यह दिखाने की कोशिश की गई जैसे मनोरमा की जिंदगी में रंग भर जाएंगे. फिल्म का एक और यादगार गाना ‘ये गलियां ये चौबारा’ था. गाना आज तक सुपरहिट है.

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फिल्म में हर कलाकार का काम बहुत अच्छा था. फिल्म को चार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड राज कपूर, बेस्ट एक्ट्रेस पद्मिनी कोल्हापुरे, बेस्ट लिरिसिस्ट संतोष आनंद ((मोहब्बत है क्या चीज), बेस्ट एडिटिंग राज कपूर. इन सबके बावजूद ‘प्रेम रोग’ फिल्म कम प्राइस पर बेचनी पड़ी थी. दरअसल, इस फिल्म के रिलीज से पहले ऋषि कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे की फिल्म ‘जमाने को दिखाना है’ फ्लॉप हो गई थी. फिल्म को 85% ओपनिंग मिली थी. फिल्म का बजट पौने तीन करोड़ था. नेट कलेक्शन 6.5 करोड़ था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. यह 1982 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म की लिस्ट में दूसरे नंबर पर थी. पहले नंबर पर सुभाष घई की फिल्म ‘विधाता’ थी.

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हांसी में मोबाइल हैक कर अकाउंट से 80 हजार निकाले: स्क्रीन पर दिखा अपडेटिंग का मैसेज, साइबर सेल ने मेरठ का ठग पकड़ा – Hansi News




हांसी साइबर अपराध थाना पुलिस ने मोबाइल हैक कर बैंक खाते से 80 हजार रुपए की ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को उत्तर प्रदेश के मेरठ से पकड़ा गया है। पुलिस ने उसके पास से ठगी गई राशि में से 11 हजार रुपए भी बरामद किए हैं। मुख्य सिपाही प्रमोद कुमार ने बताया कि थाना सदर क्षेत्र निवासी विकास ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उसकी मां के भारतीय स्टेट बैंक खाते से 80 हजार रुपए धोखाधड़ी से निकाल लिए गए थे। विकास ने बताया कि 3 जून 2026 को उसका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया और स्क्रीन पर अपडेटिंग का संदेश दिखने लगा। इसके बाद, बिना किसी कॉल, ओटीपी या संदिग्ध लिंक पर क्लिक किए, उसके बैंक खाते से 80 हजार रुपए निकाल लिए गए। पीड़ित ने घटना के बाद राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर साइबर अपराध थाना हांसी में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। मेरठ में दबिश देकर अरेस्ट किय आरोपी जांच के दौरान, साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन का गहन विश्लेषण किया। जांच में आरोपी की पहचान उदय निवासी शिव सरोवर कॉलोनी, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस टीम ने मेरठ में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य सिपाही प्रमोद कुमार ने बताया कि पूछताछ में आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि हुई है। आरोपी के कब्जे से ठगी गई रकम में से 11 हजार रुपए बरामद किए गए हैं। पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और शेष राशि की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि मोबाइल फोन में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सतर्क रहें। बैंक खाते से संबंधित किसी भी अनधिकृत लेनदेन की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।



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उज्जैन मंडी में किसानों को बड़ी सौगात, 2 करोड़ के हाईटेक प्लांट से फसल होगी मुफ्त साफ


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Ujjain News: उज्जैन कृषि उपज मंडी में किसानों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक सारटेक्स क्लीनिंग और ग्रेडिंग प्लांट तैयार किया जा रहा है. इस प्लांट में किसानों की फसल की निशुल्क सफाई और ग्रेडिंग होगी, जिससे उपज की गुणवत्ता बढ़ेगी और बेहतर दाम मिलेंगे. निर्माण अंतिम चरण में है, जल्द सुविधा शुरू होगी.

मध्यप्रदेश के उज्जैन के किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. अब कृषि उपज मंडी में किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम दिलाने के लिए अत्याधुनिक सारटेक्स क्लीनिंग और ग्रेडिंग प्लांट की सुविधा मिलने जा रही है. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह हाईटेक प्लांट किसानों की उपज को निशुल्क साफ और ग्रेड करेगा. दरअसल, आगर रोड स्थित कृषि उपज मंडी में रोजाना बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं. खेतों से आने वाली उपज में अक्सर धूल, मिट्टी और अन्य अशुद्धियां मिली होती हैं. जिसके कारण मंडी में किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिल पाता. विशेषज्ञों के अनुसार, खराब गुणवत्ता के कारण किसानों को प्रति क्विंटल 100 से 150 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ता है.

इसी समस्या को दूर करने के लिए मध्यप्रदेश एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड ने यह आधुनिक पहल की है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों की फसल की मुफ्त सफाई और वैज्ञानिक तरीके से ग्रेडिंग की जाएगी. इससे उपज की गुणवत्ता बेहतर होगी, खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और किसानों को अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल सकेगा. यह सुविधा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

जल्द शुरू होगा प्लांट
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने निर्माणाधीन प्लांट का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों से प्लांट की प्रगति और संचालन व्यवस्था की जानकारी ली. साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने और मंडी परिसर में बेहतर साफ-सफाई रखने के निर्देश दिए. इस सम्बन्ध में अधिकारियों का कहना है कि प्लांट का निर्माण अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे किसानों के लिए शुरू कर दिया जाएगा. प्लांट शुरू होने पर यह मंडी प्रदेश की प्रमुख गेहूं और सोयाबीन मंडियों में शामिल हो जाएगी.

किसानों को होगा फायदा
मंडी सचिव राजेश गोयल ने बताया “इस प्लांट में पूरी प्रक्रिया मशीनों के माध्यम से होगी. इसलिए उपज की गुणवत्ता में सुधार होगा. साफ और ग्रेडेड उपज को व्यापारियों और निर्यातकों द्वारा अधिक पसंद किया जाता है. उज्जैन मंडी की यह पहल प्रदेश की अन्य मंडियों के लिए भी मॉडल बन सकती है.

किसानों के खिले चेहरे 
किसान जगदीश ने कहा, किसानों के लिए यह एक बड़ी राहत और सौगात साबित होने जा रही है. अब तक फसलों में धूल, मिट्टी, भूसी, टूटे दाने, कंकड़ और अन्य अशुद्धियों के कारण व्यापारियों द्वारा गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाते थे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था. लेकिन अब अत्याधुनिक क्लीनिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग सुविधा मिलने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और बाजार में उसकी मांग भी बढ़ेगी. किसानों को सफाई और पैकेजिंग पर अलग से खर्च नहीं करना पड़ेगा. जिससे उनकी आय में सीधा फायदा होगा. किसानो को गेहूं में 150 से 200 रु क्विंटल अधिक भाव व सोयाबीन में 400 से 500 रु अधिक भाव मिलने की इस प्रोसेस के बाद किसानों के लिए संभावना रहेगी.



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कांग्रेस के वरिष्ठ-नेता का 91 साल की उम्र में निधन: कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब – Jalore News




कांग्रेस के वरिष्ठ नेता छोगालाल सुथार का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे, जिसके बाद मंगलवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष पुखराज पाराशर और जालोर नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष मोहन पाराशर के पिता छोगालाल सुथार के निधन की खबर से जिलेभर के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार दोपहर को उनके शास्त्री नगर कॉलोनी स्थित निवास स्थान से अंतिम यात्रा निकाली गई। इस अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और स्थानीय शहरवासी शामिल हुए। अंतिम यात्रा में उमड़े अपार जनसैलाब ने नम आंखों से स्व. सुथार को श्रद्धांजलि अर्पित की।



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समस्तीपुर में एक्सप्रेस-वे के बदले रूट के विरोध में ABVP: डीएम को सौंपा ज्ञापन, कहा- KSR महाविद्यालय के अस्तित्व पर खतरा – Samastipur News




अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की समस्तीपुर इकाई ने केदार संत रामाश्रय (केएसआर) महाविद्यालय, सरायरंजन के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। यह संकट प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के निर्माण के कारण उत्पन्न हुआ है। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने आज जिला समाहर्ता (डीएम) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और एक्सप्रेस-वे का निर्माण मूल एलाइनमेंट और गजट में प्रकाशित रूट के अनुसार कराने की मांग की। केएसआर महाविद्यालय का अस्तित्व खतरे में एबीवीपी के उत्तर बिहार प्रांत सहमंत्री अनुपम कुमार झा ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के लिए जारी एलाइनमेंट और गजट में समस्तीपुर जिले के सरायरंजन से करिहरा तक 48 से 53 किलोमीटर के बीच का रूट निर्धारित था। हालांकि, वर्तमान में इस रूट को वास्तविक एलाइनमेंट से हटाकर दूसरी दिशा में मोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे क्षेत्र के सबसे पुराने शिक्षण संस्थानों में से एक केएसआर महाविद्यालय का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। झा ने बताया कि लगभग 50 साल पुराने इस डिग्री कॉलेज में हर साल हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। सरायरंजन प्रखंड सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह महाविद्यालय शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। इसकी भौगोलिक स्थिति जिले के मध्य में होने के कारण विश्वविद्यालय द्वारा इसे कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं का केंद्र भी बनाया जाता रहा है, जिससे जिले के हजारों विद्यार्थियों को सुविधा मिलती है। एबीवीपी नेताओं का आरोप है कि प्रस्तावित डायवर्टेड एलाइनमेंट के कारण महाविद्यालय परिसर के एक बड़े हिस्से का अधिग्रहण किया जा रहा है। इसके साथ ही कॉलेज भवन के कई हिस्सों को तोड़ने का प्रस्ताव भी सामने आया है। यदि ऐसा होता है तो न केवल संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। विद्यार्थी परिषद ने दी आंदेलन की चेतावनी अनुपम कुमार झा ने कहा कि महाविद्यालय के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट से छात्रों में गहरी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। विद्यार्थी परिषद छात्र हित और शिक्षा संस्थान की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और प्रशासन से मांग करती है कि एक्सप्रेस-वे का निर्माण मूल प्रकाशित एलाइनमेंट के अनुसार किया जाए, ताकि कॉलेज को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मांग पर सकारात्मक पहल नहीं करते हैं, तो विद्यार्थी परिषद चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी। इसके तहत धरना, प्रदर्शन, जनजागरण अभियान और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जिला संयोजक केशव माधव ने किया। मौके पर प्रांत सहमंत्री अनुपम कुमार झा, जिला सह संयोजक शुभम कुमार, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य निक्कू आर्या, नगर सह मंत्री प्रिंस कुमार, अमृत झा, मनीष कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। परिषद ने प्रशासन से जल्द उचित निर्णय लेकर महाविद्यालय के अस्तित्व की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसकी जांच कराई जाएगी।



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दिल्ली में 39 मलेरिया और डेंगू के 152 केस: 3,547 लोगों पर केस दर्ज, 32 हजार 558 घरों में पाई गई मच्छरों की ब्रीडिंग – New Delhi News


नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मानसून से पहले ही मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 6 जून तक की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अब तक मलेरिया के 39 और डेंगू के 152 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, चिकनगुनिया के भी

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हालांकि पिछले साल इसी अवधि में मलेरिया के 66 मामले थे, लेकिन निगम किसी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। मच्छरों की रोकथाम के लिए एमसीडी ने व्यापक अभियान शुरू किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मच्छरजनित परिस्थितियां पाए जाने पर अब तक 30 हजार 948 कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले 3547 लोगों के खिलाफ अभियोग भी दर्ज किए गए हैं।

1.62 करोड़ घरों का सर्वे

निगम ने मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान के लिए 1.62 करोड़ से अधिक घरों का सर्वे किया। इनमें 32 हजार 558 घरों में मच्छरों की ब्रीडिंग पाई गई। इसके अलावा 1 लाख 72 हजार 174 घरों में दवा का छिड़काव कर लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई की गई है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, मानसून से पहले मच्छरों के ब्रीडिंग पॉइंट खत्म करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिन घरों में मच्छर पनपते मिले हैं, वहां छिड़काव के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।



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सबसे ज्‍यादा रिटर्न देने वाले म्‍यूचुअल फंड से मुंह मोड़ रहे लोग! 40% घटा निवेश


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Mutual Fund Investment : म्‍यूचुअल फंड में सबसे ज्‍यादा पसंद की जाने वाली कैटेगरी इक्विटी में भी मई में गिरावट देखी गई है. एम्‍फी की ओर से जारी आंकड़ों में दिख रहा है कि इक्विटी फंड में निवेश 12 महीने में सबसे कम रहा है, जबकि अप्रैल में इसमें तगड़ा निवेश आया था. ईरान युद्ध की वजह से मई में शेयर बाजार के साथ म्‍यूचुअल फंड उद्योग पर भी दबाव दिखा है.

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इक्विटी और डेट म्‍यूचुअल फंड में मई में कम रहा निवेश.

नई दिल्‍ली. निवेशकों के बीच सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय फिलहाल म्‍यूचुअल फंड ही दिख रहा है और उसमें भी इक्विटी सेक्‍शन पर तो खास नजर रहती है. यही वजह कैटेगरी है, जो अपने ग्राहकों को सबसे ज्‍यादा रिटर्न देता है. इक्विटी का सीधा संबंध बाजार से और जैसे-जैसे शेयर बाजार में तेजी आती है, यहां भी पैसा बढ़ता जाता है. लेकिन, पिछले कुछ महीनों का आंकड़ा देखें तो निवेशकों का इसी कैटेगरी से मोहभंग होता नजर आ रहा है. इसकी वजह बिलकुल साफ है कि ईरान संकट की वजह से बाजार में लगातार गिरावट जारी है.

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड उद्योग में मई में कुल मिलाकर 64,131 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज हुई. इससे पहले अप्रैल में 3.22 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था. इसकी मुख्य वजह डेट स्‍कीम्‍स से 96,948 करोड़ रुपये की निकासी रही. साथ ही अस्थिर बाजार परिस्थितियों के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश मई में एक साल के सबसे निचले स्तर 22,908 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह इसी साल अप्रैल में दर्ज 38,440 करोड़ रुपये से 40 फीसदी कम रहा है.

एयूएम में भी आई गिरावट
एम्‍फी ने बताया कि निकासी की वजह से म्‍यूचुअल फंड उद्योग का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) मई के अंत में घटकर 81.6 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो एक महीने पहले 81.92 लाख करोड़ रुपये था. मई में इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश 22,908 करोड़ रुपये रहा. यह अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये, मार्च में 40,450 करोड़ रुपये, फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,028 करोड़ रुपये रहा था. इसका मतलब है कि इक्विटी में अप्रैल के मुकाबले मई में सबसे ज्‍यादा गिरावट दिखी है. अभी तक निवेशकों की पसंदीदा कैटेगरी इक्विटी ही रहती थी. ताजा निवेश मई 2025 के बाद सबसे कम है जब इक्विटी म्यूचुअल फंड में 19,013 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था.

तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे निवेशक
इक्विटी योजनाओं में ‘फ्लेक्सी-कैप’ फंड में सबसे अधिक 5,175 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, इसके बाद ‘स्मॉल कैप’ फंड में 4,945 करोड़ रुपये और मिड कैप फंड में 4,385 करोड़ रुपये का निवेश हुआ. लार्ज कैप फंड में तुलनात्मक रूप से कम 1,593 करोड़ रुपये का निवेश आया. यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक अभी म्‍यूचुअल फंड के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं.

ईएलएसएस में भी हुई निकासी
निवेशकों ने टैक्‍स बचत वाली इक्विटी योजनाओं (ईएलएसएस) में भी मई में पैसे निकाले हैं. इसके अलावा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में मई में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई जबकि अप्रैल में इसमें 3,040 करोड़ रुपये का निवेश आया था. यह इस परिसंपत्ति वर्ग में निवेशकों की कम होती रुचि को दर्शाता है. एम्‍फी का कहना है कि ईरान संकट की वजह से अभी शेयर बाजार पर दबाव दिख रहा है, जो निवेशकों पर भी महसूस किया जा रहा है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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जब माधुरी दीक्षित को देखते ही डायरेक्टर ने कर लिया था तय-‘यही मेरी हीरोइन होगी’


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फिल्म ‘तेजाब’ की ‘मोहिनी’ आज भी माधुरी दीक्षित के सबसे यादगार किरदारों में गिनी जाती है. लेकिन कम लोग जानते हैं कि निर्देशक एन. चंद्रा ने इस भूमिका के लिए कभी किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में सोचा ही नहीं था. ‘इंडियाज बेस्ट डांसर 5’ में उन्होंने खुलासा किया कि पहली मुलाकात में ही उन्हें एहसास हो गया था कि माधुरी में कुछ खास है. यही वजह थी कि ‘मोहिनी’ के किरदार के लिए उनकी पहली और आखिरी पसंद सिर्फ माधुरी दीक्षित थीं. 1988 में रिलीज हुई ‘तेजाब’ ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया.

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माधुरी दीक्षित ने कई हिट फिल्में दी हैं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में कई किरदार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ फिल्मों का हिस्सा नहीं रहते, बल्कि कलाकार की पहचान बन जाते हैं. माधुरी दीक्षित के लिए ‘तेजाब’ की ‘मोहिनी’ ऐसा ही एक किरदार साबित हुआ. साल 1988 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ उन्हें स्टारडम की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि हिंदी सिनेमा को उसके सबसे यादगार किरदारों में से एक भी दिया. दिलचस्प बात यह है कि निर्देशक एन. चंद्रा के लिए इस भूमिका के लिए कभी कोई दूसरा नाम था ही नहीं.

हाल ही में डांस रियलिटी शो ‘इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5’ में पहुंचे एन. चंद्रा ने उन दिनों की यादें साझा कीं और बताया कि माधुरी को लेकर उनका भरोसा पहली मुलाकात में ही बन गया था. उन्होंने बताया कि उस समय वह ‘बजरंगी’ नाम की एक फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे. इसी दौरान एक दिन सेट पर उनकी मुलाकात युवा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से हुई. पहली ही मुलाकात में उन्हें महसूस हो गया था कि इस लड़की में कुछ खास है और एक दिन वह जरूर बड़ी स्टार बनेगी.

डायरेक्टर ने किया खुलासा

समय बीता और जब एन. चंद्रा ने ‘तेजाब’ की कहानी पर काम शुरू किया, तो ‘मोहिनी’ के किरदार को लेकर उनके मन में कोई दुविधा नहीं थी. उनके मुताबिक, इस भूमिका के लिए उनकी पहली पसंद भी माधुरी थीं और आखिरी पसंद भी. उन्होंने किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में कभी विचार तक नहीं किया, क्योंकि उन्हें पूरा यकीन था कि इस किरदार के साथ न्याय सिर्फ माधुरी ही कर सकती हैं.

‘तेजाब’ की ‘मोहिनी’

दिलचस्प बात यह भी रही कि उस समय फिल्म के हीरो अनिल कपूर थे और उनके सेक्रेटरी राकेश नाथ ही माधुरी के कामकाज को भी संभालते थे. ऐसे में दोनों कलाकारों की तारीखों और शूटिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं को तय करना आसान हो गया. एन. चंद्रा का मानना है कि मेहनत के साथ किस्मत का साथ भी कई बार बड़े फैसलों को आसान बना देता है.

ब्लॉकबस्टर निकली फिल्म

11 नवंबर 1988 को सिनेमाघरों में पहुंची ‘तेजाब’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार सफलता हासिल की. फिल्म में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की जोड़ी को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया, जबकि अनुपम खेर, चंकी पांडे, किरण कुमार और सुरेश ओबेरॉय जैसे कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं से फिल्म को मजबूती दी.

‘तेजाब’ की सफलता के कई कारण रहे, लेकिन ‘एक दो तीन’ पर थिरकती ‘मोहिनी’ ने माधुरी दीक्षित को उस मुकाम तक पहुंचा दिया, जहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज भी ‘मोहिनी’ का जिक्र होते ही सबसे पहले माधुरी दीक्षित का चेहरा ही आंखों के सामने उभर आता है.

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Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें



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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन: बुरहानपुर में काली पट्टी बांधकर रखा उपवास, लोकतंत्र बचाओ का लगाया नारा – Burhanpur (MP) News




बुरहानपुर में बुधवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के विरोध में एक दिवसीय उपवास रखा। यह विरोध प्रदर्शन सुबह 11 बजे गांधी चौक स्थित गांधी प्रतिमा के पास काली पट्टी बांधकर किया गया, जिसे ‘लोकतंत्र बचाओ उपवास’ नाम दिया गया। इस अवसर पर कांग्रेस के इंदौर ग्रामीण प्रभारी अजय सिंह रघुवंशी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है और संविधान को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बिना किसी ठोस वजह के मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म स्वीकार नहीं किया और उन्हें पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। रघुवंशी ने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को चुनाव प्रक्रिया से रोकने को ‘हठधर्मिता’ बताया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष रिंकू टाक ने भाजपा पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले सरकारें गिराई गईं, फिर एसआईआर के माध्यम से ‘वोट चोरी’ का काम किया गया और अब ‘सीट चोरी’ का प्रयास किया जा रहा है। टाक ने यह भी बताया कि कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन के मामले को संज्ञान में नहीं लिया, इसके बावजूद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व निगमाध्यक्ष गौरी दिनेश शर्मा, सलीम कॉटनवाला, उबैद शेख, अकील औलिया, अमर यादव, फहीम हाशमी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने काफी देर तक नारेबाजी भी की।



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