Tuesday, July 7, 2026
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जेल में बंदियों के विवाद की गोपनीय जांच शुरु: एसएसपी की तरफ से किया गया टीम का गठन, रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई – Meerut News




चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंदियों के दो गुटों में टकराव के बाद एसएसपी अविनाश पांडेय ने गोपनीय जांच बैठा दी है। उन्होंने एक टीम का गठन कर दिया है जो पूरे मामले की तह तक जाकर हकीकत को उजागर करेगी ताकि आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके। फिलहाल रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। विगत शुक्रवार को जिला कारागार में बंदियों के दो गुट आपस में भिड़ गए थे। बंदियों के बीच जमकर कट्टन चलीं, जिसके चलते बंदी मौजा को गंभीर चोट आई और उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ गया। बताया जाता है कि अधिक खून बहने के कारण मौजा की हालत चिंताजनक बनी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जेल प्रशासन पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठा हुआ है। चार दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं
यह स्पष्ट हो चुका है कि बंदियों के दो गुटों में विवाद हुआ और एक बंदी को गंभीर चोटें आई। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने किसी के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। चौकाने वाली बात तो यह है कि उच्चाधिकारियों को भी जेल प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट देना गवारा नहीं समझा। यही वजह है कि चार दिन बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। जेल में टकराव की संभावना बढ़ी
बंदी मौजा के बाद जेल के भीतर टकराव के हालात और बढ़ गए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही इसी तरह के एक विवाद के चलते चार बंदियों को प्रदेश की अलग अलग जेलों में शिफ्ट करदिया गया था लेकिन इस मामले में जेल प्रशासन कोई एक्शन लेने को तैयार नहीं है। आरोप तो यहां तक है कि मामले को मैनेज करने का प्रयास किया जा रहा है। गोपनीय टीम ने जांच शुरु की
इस विवाद को लेकर एसएसपी मेरठ अविनांश पांडेय गंभीर हैं। उन्होंने जेल प्रशासन की लापरवाही उजागर होने के बाद अपने स्तर से एक टीम का गठन कर दिया है। यह टीम पूरी तरह गोपनीय तरीके से जांच कर अपनी रिपोर्ट एसएसपी को देगी। रिपोर्ट के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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शहजाद भट्टी को मुखौटा बनाकर नेटवर्क फैलाना चाहती है पाकिस्तानी-इंटेलिजेंस: एडीजी दिनेश एमएन बोले- सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को फंसाने, जासूसी और हथियार सप्लाई कराने की साजिश – Jaipur News




राजस्थान आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क और विदेशी गैंगस्टर्स को लेकर बड़ा खुलासा किया है। एटीएस के एडीजी (ऑपरेशंस) दिनेश एमएन ने सोमवार को बताया कि पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी को पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ऑफिसर (पीआईओ) एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रभाव में लेकर उनसे जासूसी करवाना, संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाना और हथियारों की सप्लाई कराना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए शहजाद भट्टी को आगे रखकर काम करती है। हालांकि राजस्थान एटीएस, आईबी और अन्य एजेंसियों की सतर्कता के चलते अब तक इस नेटवर्क का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। भट्टी का नेटवर्क सक्रिय होने के मिले थे इनपुट दिनेश एमएन ने बताया कि पिछले कुछ समय से शहजाद भट्टी के नेटवर्क के सक्रिय होने की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑफिसर सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने, उन्हें पैसों और अन्य प्रलोभनों का लालच देने और संवेदनशील स्थानों के फोटो और वीडियो मंगवाने की कोशिश की जाती है। साथ ही सीमापार से हथियार भेजने के भी प्रयास किए जाते हैं। तकनीकी निगरानी से हर बार नाकाम हुई साजिश एडीजी ने दावा किया कि शहजाद भट्टी और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क का अब तक एक भी प्रयास सफल नहीं हो पाया है। जैसे ही किसी गतिविधि की जानकारी मिलती है, एटीएस की तकनीकी टीम तुरंत सक्रिय होकर इनपुट की पुष्टि करती है और समय रहते कार्रवाई करती है। इस पूरे नेटवर्क पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और पंजाब पुलिस भी लगातार नजर रखे हुए हैं। कुछ लोगों को समझाइश, सक्रिय लोगों पर मुकदमा उन्होंने बताया कि नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग केवल संपर्क में पाए जाते हैं, जिन्हें समझाइश देकर पाबंद किया जाता है। वहीं जो लोग सक्रिय रूप से देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाती है। हाल ही में की गई छापेमारी के दौरान दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि कई लोगों को समझाइश कर निगरानी में रखा गया है। आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के साथ संयुक्त पूछताछ दिनेश एमएन ने बताया कि महत्वपूर्ण मामलों में एटीएस, आईबी और राजस्थान इंटेलिजेंस के अधिकारी संयुक्त रूप से पूछताछ करते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी लालच या बहकावे में आकर देशविरोधी गतिविधियों का हिस्सा न बनें। यदि कोई व्यक्ति ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर गिरफ्तार किया जाएगा। एक साल में एटीएस की बड़ी कार्रवाई एडीजी ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 के बीच एटीएस ने आतंकवाद, अवैध हथियार, विस्फोटक, मादक पदार्थ तस्करी और साइबर अपराध के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के खिलाफ भी बड़ा अभियान रोहित गोदारा और वीरेंद्र चारण की गिरफ्तारी के सवाल पर एडीजी ने कहा कि दोनों राजस्थान सहित कई राज्यों में वांछित हैं। विदेश में मौजूद अपराधियों तक पहुंचने के लिए इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों की मदद ली जा रही है। एजीटीएफ और पुलिस लगातार उनके स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में पांच से छह मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं और अलग-अलग जिलों से करीब 80 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का प्रयास है कि फायरिंग, हत्या और रंगदारी जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जाए। जिन लोगों को धमकियां मिलती हैं, उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। लोकल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार दिनेश एमएन ने कहा कि रंगदारी और सुपारी से जुड़े अधिकांश मामलों में स्थानीय बदमाश विदेश में बैठे गैंगस्टर्स की मदद करते हैं। यही लोग टारगेट की रेकी करते हैं और अपराधियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देते हैं। ऐसे सभी स्थानीय सहयोगियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कुचामन सिटी के कारोबारी हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मामले में स्थानीय नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं तेलंगाना में भी गैंगस्टर्स की मदद करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विदेश में बैठे गैंगस्टर्स के लोकल नेटवर्क को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और फरार अपराधियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। यूएपीए के तहत कार्रवाई अवैध विस्फोटक पर कार्रवाई हथियार तस्करी पर कार्रवाई मादक पदार्थ तस्करी पर कार्रवाई फर्जी आधार गिरोह पर कार्रवाई सोशल मीडिया निगरानी और डी-रेडिकलाइजेशन



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‘दिलजीत दोसांझ ऐसी विवादित फिल्में करते ही क्यों हैं?’ ‘सतलुज’ विवाद पर FWICE का बड़ा हमला


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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार को सिर्फ पैसे कमाने के लिए फिल्में नहीं करनी चाहिए. फिल्म चुनते समय उसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी, पब्लिक इमेज और देशहित का भी ध्यान रखना चाहिए.

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दिलजीत को लेकर अध्यक्ष ने कही बड़ी बात

नई दिल्ली. फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भारत में जी5 से ‘सतलुज’ हटाए जाने पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर किसी फिल्म या कंटेंट से समाज में विवाद पैदा होने की आशंका हो, तो उसकी पूरी सावधानी के साथ समीक्षा की जानी चाहिए. सिनेमा का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना भी होता है. अगर सरकार या सेंसर बोर्ड को किसी फिल्म पर बार-बार दखल देना पड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसमें कुछ ऐसी बातें हो सकती हैं, जिन्हें लेकर चिंता जताई गई है.

उन्होंने कहा कि अगर सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी दे दी है, लेकिन बाद में सरकार को लगता है कि उससे गलत संदेश फैल सकता है, सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है या कुछ लोग उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, तो ऐसे मामलों पर पहले ही फैसला हो जाना चाहिए. उनके मुताबिक, सेंसर बोर्ड को रिलीज से पहले ही सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

सेंसर के दौरान ही करवा देने थे बदलाव

बीएन तिवारी ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि कहा कि जब एक फिल्म सेंसर की पूरी प्रक्रिया से गुजरकर पास हो जाती है, तब उसके बाद उसे रोकना सही नहीं है. इससे निर्माता को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. अगर फिल्म में बदलाव की जरूरत थी, तो वह सेंसर के दौरान ही करवा दिए जाने चाहिए थे. या तो फिल्म को शुरुआत में ही मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए थी, या फिर मंजूरी मिलने के बाद उसे बिना किसी रुकावट के रिलीज किया जाना चाहिए.

दिलजीत पर उठाए सवाल

दिलजीत दोसांझ का नाम लेते हुए बीएन तिवारी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि दिलजीत बार-बार विवादों में रहने वाली फिल्मों का हिस्सा क्यों बनते हैं. उन्होंने कहा कि दिलजीत पंजाब के बड़े कलाकार हैं और दुनियाभर में उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग है. ऐसे में उन्हें हर प्रोजेक्ट सोच-समझकर चुनना चाहिए, ताकि उनकी छवि पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.उन्होंने आगे कहा कि एक कलाकार का फर्ज सिर्फ अभिनय करना नहीं होता. उसे यह भी सोचना चाहिए कि उसका काम समाज और देश पर क्या असर डालेगा. सिर्फ पैसे या दूसरे कारणों से किसी फिल्म को स्वीकार नहीं करना चाहिए. ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना हर कलाकार के फैसलों में दिखाई देनी चाहिए.

दूसरे फिल्ममेकर को भी सता रहा डर

दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रिलीज के महज 2 दिन बाद ही भारत में जी5 से हटा दी गई. इसके बाद से ही इंडस्ट्री में नई बहस शुरू हो गई है. इसी बीच काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की अपकमिंग फिल्म ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ के निर्देशक चेतन डीके ने भी अपना डर जाहिर किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में संवेदनशील विषयों पर फिल्म बनाना और उसे रिलीज करना बहुत चैलेंजिंग हो गया है. चेतन डीके ने कहा कि उनकी फिल्म अभी भी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की मंजूरी का इंतजार कर रही है. लेकिन’सतलुज’ के साथ जो हुआ, उसे देखकर डर भी बढ़ गया है. उन्हें उम्मीद है कि उनकी फिल्म को जल्द ही सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिल जाएगी.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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चीनी मिल के लिए 30 हजार एकड़ में गन्ना खेती: लक्ष्य पूरा करने के लिए जागरूकता अभियान चलेगा, डीएम ने की अधिकारियों के साथ बैठक – Darbhanga News


दरभंगा समाहरणालय स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में डीएम ने जिला अभियान समिति की बैठक की। जिसमें गन्ना क्षेत्र विस्तार, किसानों के पंजीकरण और जागरूकता अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में सहायक निदेशक (ईख विकास) ने बताया कि एक चीनी

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डीएम ने प्रखंड सहकारिता पदाधिकारियों से कहा कि वे अधिक से अधिक किसानों को गन्ना किसान के रूप में पंजीकरण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 जुलाई तय है। गन्ना एक नकदी फसल (कैश क्रॉप) है, जिससे किसानों को कम लागत में बेहतर लाभ और बिक्री के बाद तत्काल नकद आय प्राप्त होती है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ की बैठक।

गांवों की जल्द पहचान पहचान करने के निर्देश

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गन्ना उत्पादन के लिए संभावित गांवों की जल्द पहचान की जाए और हर पंचायत में किसानों के साथ नियमित बैठक कर उन्हें गन्ना खेती के आर्थिक लाभ, सरकारी योजनाओं और तकनीकी सहायता की जानकारी दी जाए।

उन्होंने पंचायत स्तर पर अभियान समिति एवं जीविका दीदियों के सहयोग से हर सप्ताह और प्रखंड स्तर पर नियमित रूप से अभियान समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश

अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को गन्ना किसान पंजीकरण, सहकारी समिति की सदस्यता, सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और अन्य उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान गन्ना खेती अपनाने के लिए प्रेरित हों।

साथ ही सभी संबंधित विभागों को समन्वय स्थापित कर पोर्टल के माध्यम से किसानों का आवेदन और पंजीकरण समय से हो। बैठक में बताया गया कि अभियान समिति के सदस्य रोज गांवों और पंचायतों में जाकर किसानों को गन्ना खेती के लिए प्रेरित करेंगे और सरकार की विभिन्न योजनाओं-प्रोत्साहन प्रावधानों का प्रचार-प्रसार करेंगे।

बैठक में ये रहे मौजूद

जिलाधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे सीसीएस बिहार पोर्टल पर अपनी डीबीटी आईडी के माध्यम से समय पर पंजीकरण कराएं, ताकि गन्ना विकास से संबंधित सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। बैठक में उप निदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद, जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ, सहायक निदेशक (ईख विकास) अभिनय प्रियदर्शी, जिला ईंख पदाधिकारी पुष्कर राज, ईंख प्रसार पदाधिकारी राहुल देव, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।



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JCB को बना लिया ‘कार’, 6 युवक घूमने निकले: नर्मदापुरम में ट्रैफिक पुलिस ने 3 हजार का चालान काटा, लाइसेंस होगा सस्पेंड – narmadapuram (hoshangabad) News




नर्मदापुरम जिला मुख्यालय में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां कुछ युवक निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली जेसीबी में सवार होकर शहर में घूमने निकल पड़े। वीडियो वायरल होने के बाद ट्रैफिक पुलिस ने जेसीबी को रोककर कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, शाम के समय जेसीबी मालाखेड़ी क्षेत्र स्थित कलेक्टर बंगले के सामने से मीनाक्षी चौक की ओर जा रही थी। जेसीबी में कुल छह लोग सवार थे। एक युवक जेसीबी चला रहा था, जबकि अन्य युवक केबिन और बकेट के पास बैठे थे। किसी ने हेलमेट नहीं पहन रखा था और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था थी। राहगीरों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। मामला ट्रैफिक विभाग तक पहुंचा। जैसे ही जेसीबी यातायात थाने के सामने पहुंची, पुलिस ने उसे रोक लिया और थाने ले गई। जांच में पता चला कि जेसीबी किसी निर्माण कार्य के लिए नहीं, बल्कि घूमने के लिए निकाली गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई ट्रैफिक डीएसपी संतोष मिश्रा ने बताया कि जेसीबी का उपयोग केवल निर्माण कार्य के लिए किया जाता है। युवक जिस तरह से बाजार की ओर जा रहे थे, उससे साफ था कि वे तफरी करने निकले थे। उन्होंने बताया कि जेसीबी क्रमांक UP 81 DT 3861 लक्फर कंस्ट्रक्शन, अलीगढ़ के नाम पर पंजीकृत है। इसे आमिर पिता इंतजार (20), निवासी मुजफ्फरपुर चला रहा था। चालक के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत 3 हजार रुपये का चालान किया गया है। साथ ही उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने के लिए आरटीओ को पत्र भेजा जाएगा। इन नियमों का हुआ उल्लंघन पुलिस के अनुसार, इस मामले में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया गया। जेसीबी का निर्माण कार्य के बजाय घूमने के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा खुले बकेट और केबिन में लोगों को बैठाकर वाहन चलाना सुरक्षा नियमों का भी उल्लंघन है। डीएसपी संतोष मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने या शौक के लिए इस तरह की हरकत न करें। ऐसा करने पर वाहन जब्त करने सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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अनलिस्टेड स्टॉक के बदले कैश देगी ये कंपनी, 100 शेयर भी हुए थे बन गए ₹71000


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फ्लिपकार्ट ने अपने हजारों को कर्मचारियों को खुशी मनाने का मौका दिया है. जिन भी कर्मचारियों के पास कंपनी की ओर से दिए गए ईएसओपी हैं, वह उन्हें कैश कर सकते हैं. हर अनलिस्टेड शेयर के लिए कंपनी की ओर से उन्हें 713 रुपये दिए जाएंगे. हालांकि, यह फायदा केवल 15 जुलाई तक कंपनी के कर्मचारी के तौर पर चिह्नित लोगों को ही दिया जाएगा.

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ईएसओपी को कैश वही कर्मचारी करा पाएंगे जो 15 जुलाई तक कंपनी के कर्मचारी हैं. (AI)

नई दिल्ली. फ्लिपकार्ट भारत के सबसे बड़े ई-मार्केटप्लेसेज में से एक है. अमेरिका की वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली इस कंपनी ने एक ऐसा ऐलान किया है जिसे सुनकर इसके कर्मचारी खुशी से फूले नहीं समाएंगे. कंपनी ने कहा है कि वह ESOP यानी इम्पॉलई स्टॉक ऑप्शन प्लान को कैश में बदलने का मौका दे रही है. फ्लिपकार्ट लिस्टेड कंपनी नहीं हैं इसलिए कंपनी खुद ही अपने पास से यह पैसा कर्मचारियों को देगी. कंपनी ने कहा है कि वह हर ऑप्शन (आसान भाषा में अनलिस्टेड शेयर) के लिए 713.4 रुपये देगी. यानी किसी के पास 100 शेयर भी हैं तो उसे 71000 रुपये से ज्यादा मिलेंगे.

लेकिन कंपनी ने एक शर्त रखी है. कर्मचारी अपने पास मौजूद ऑप्शन का केवल 5 फीसदी ही कैश करा सकते हैं. यह ऑप्शन भी केवल 16 जुलाई 2023 से 15 जुलाई 2026 के बीच के ही होने चाहिए. इसके अलावा कंपनी ने कर्मचारियों के लिए एक कट ऑफ डेट भी तय की है. फ्लिपकार्ट के अनुसार, ईएसओपी को कैश वही कर्मचारी करा पाएंगे जो 15 जुलाई तक कंपनी के कर्मचारी हैं. इसका भुगतान अगस्त में किया जाएगा. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लिपकार्ट ने इस प्रोग्राम का ऐलान पिछले साल ही किया था. इसके तहत कुल 5 करोड़ डॉलर के ईएसओपी को लिक्विडेट किया जाना था. प्रोग्राम का लाभ कुल 7000 कर्मचारियों को मिलने का अनुमान है.

सीईओ ने दिया था दोबारा मौका देने का भरोसा

कंपनी के चीफ एग्जीक्यूटिव कल्याण कृष्णमूर्ति ने पहले ही कर्मचारियों को भरोसा दिया था कि अगर कंपनी अपने जरूरी लक्ष्यों को हासिल कर लेती है, तो इस साल दोबारा लिक्विडिटी का मौका देने पर विचार किया जाएगा. बोर्ड ने अब इस ईएसओपी को कैश में बदलने की मंजूरी दे दी है. फ्लिपकार्ट समय-समय पर बायबैक के जरिए अपने कर्मचारियों को ऐसे मौके देती रही है. इसका सबसे बड़ा प्रोग्राम साल 2023 में आया था, जब फोनपे के अलग होने पर कंपनी ने 70 करोड़ डॉलर के ईएसओपी भुगतान का ऐलान किया था. उससे करीब 19,000 मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों को फायदा हुआ था.

आईपीओ टलने के बाद लिक्विडिटी प्रोग्राम का महत्व बढ़ा

यह नया बायबैक प्रोग्राम ऐसे समय में आया है जब फ्लिपकार्ट ने अपनी लिस्टिंग यानी आईपीओ की योजनाओं को कुछ समय के लिए टाल दिया है. कंपनी ने मुनाफे को प्राथमिकता देने के लिए अपनी पब्लिक लिस्टिंग को आगे बढ़ाया है, और पैरेंट कंपनी वॉलमार्ट का पूरा ध्यान अभी मुनाफे (EBITDA ब्रेकइवन) को हासिल करने पर है. आईपीओ में हो रही इस देरी के कारण निजी कंपनी रहते हुए भी कर्मचारियों को इनाम देने और उनके स्टॉक को कैश में बदलने के लिए यह समय-बद्ध ईएसओपी प्रोग्राम एक बहुत बड़ा जरिया बन गया है.

स्टार्टअप्स में बढ़ रहा है समय-समय पर कैश देने का चलन

मैच्योर स्टार्टअप्स में आजकल कर्मचारियों को लिक्विडिटी देने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है. इक्विटी मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म कैपिटा के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में स्टार्टअप्स के ईएसओपी लिक्विडिटी प्रोग्राम कुल 423 मिलियन डॉलर (27 प्रोग्राम के जरिए) तक पहुंच गए, जो पिछले वित्त वर्ष के 248 मिलियन डॉलर (31 प्रोग्राम) के मुकाबले 70 परसेंट ज्यादा है. अब कंपनियां किसी एक बड़े मौके के इंतजार में बैठने के बजाय, टैलेंट को अपने साथ जोड़े रखने और उनके लिए वेल्थ क्रिएशन करने के मकसद से समय-समय पर ऐसे स्ट्रक्चर्ड बायबैक और प्री-आईपीओ लिक्विडिटी विंडो का इस्तेमाल कर रही हैं.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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दिल्ली में मनाई श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती: विधानसभा अध्यक्ष ने दी श्रद्धांजलि, बोले-राष्ट्रनिर्माताओं को उनका उचित स्थान दिलाना हमारी जिम्मेदारी – New Delhi News




दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा इतिहास में कई ऐसे व्यक्तत्व हैं, जिन्होंने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने काह कि लेकिन समय के साथ उनका योगदान जनमानस की स्मृति से धूमिल हो गया। ऐसे राष्ट्रनिर्माताओं को उनका उचित स्थान दिलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इतिहास के गुमनाम राष्ट्रनिर्माताओं को मिलना चाहिए सम्मान विजेंद्र गुप्ता सोमवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा चांदनी चौक स्थित मुख्यालय में आयोजित स्मृति समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यथास्थिति को चुनौती देने वाले व्यक्तित्व’ विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दक्षिण दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ. सुमीत भसीन, लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य, शिक्षाविद्, विद्वान और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। विजेंद्र गुप्ता ने बताई दिल्ली विधानसभा की योजना अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा ने ऐसे लगभग 45 विशिष्ट लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन और योगदान का दस्तावेजीकरण एवं प्रकाशन शुरू किया है। उनका कहना था कि यह पहल भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के आदर्शों और मूल्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।



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चटपटा और स्वादिष्ट, बरसात के मौसम में देशी तरीके से बनाए चिकन, 35 मिनट में हो जाएगा तैयार


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चटपटा और स्वादिष्ट, देशी तरीके से बनाए चिकन, 35 मिनट में हो जाएगा तैयार

 

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जैसे ही बरसात का सीजन शुरू होता है तो लोग चटपटा भोजन और स्वादिष्ट व्यंजन पसंद करते हैं यदि आप भी आपके घर पर देसी तरीके से चिकन बनाना चाहते हैं तो 35 मिनट में बनकर तैयार हो जाएगा. उसको बनाना बहुत ही आसान है इसको आप कुकर में भी बना सकते हैं आज हम आपको एक्सपर्ट के अनुसार विदेशी चिकन बनाने की रेसिपी बता रहे है. बरसात के मौसम में स्वादिष्ट देसी चिकन बनाने के लिए एक्सपर्ट फूलाबाई ने आसान रेसिपी साझा की है. यह देसी स्टाइल चिकन स्वादिष्ट होने के साथ घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और मानसून के मौसम में खाने का बेहतरीन विकल्प है.

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5 आतंकियों को उनके गांव लेकर पहुंची गुजरात ATS: मध्यप्रदेश-गुजरात से गिरफ्तार किए गए थे 8 आतंकी, टेररिस्ट नेटवर्क फैलाने का काम कर रहे थे


पालनपुर43 मिनट पहले

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पकड़े गए 8 में से 5 आतंकी पालनपुर तालुका के भागल गांव के रहने वाले हैं।

गुजरात ATS ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आठ आतंकियों को गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़ा था। जांच में पता चला है कि ये सभी गुजरात के रहने वाले हैं। इनमें से 5 तो पालनपुर तालुका के भागल गांव के ही रहने वाले हैं। सोमवार को एटीएस इन पांचों को लेकर भागल गांव में इनके घर पहुंची।

क्योंकि, गिरफ्तार किए गए 8 में से 5 आतंकी इसी गांव के रहने वाले हैं। मुदाशिर गाजीवाला और अहमद गाजीवाला चचेरे भाई हैं। एटीएस सभी संबंधित लोगों को साथ लेकर जांच कर रही है और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आतंकियों के घर से साहित्य और अन्य सामान जब्त पालनपुर तालुका के भागल गांव में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकवादियों के घर पर तलाशी अभियान के दौरान, गुजरात एटीएस टीम ने आतंकवादी संगठन से संबंधित आपत्तिजनक साहित्य जब्त किया है। एटीएस अधिकारियों ने आतंकवादियों में से एक के घर से सामग्री से भरे दो बड़े बैग भी जब्त किए हैं।

गुजरात ATS आतंकियों को लेकर पालनपुर के भागल गांव पहुंची।

गुजरात ATS आतंकियों को लेकर पालनपुर के भागल गांव पहुंची।

पांचों आतंकियों को एक-एककर उनके घर ले जाया गया।

पांचों आतंकियों को एक-एककर उनके घर ले जाया गया।

आतंकियों में से एक के घर से आपत्तिजनक साहित्य से भरे दो बड़े बैग भी जब्त किए गए।

आतंकियों में से एक के घर से आपत्तिजनक साहित्य से भरे दो बड़े बैग भी जब्त किए गए।

3 जुलाई को गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़े गए थे आतंकी

गुजरात ATS ने आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आठ आतंकियों को 3 जुलाई को गुजरात और मध्य प्रदेश से पकड़ा है। सभी को अलग अलग जिलों से पकड़ा गया है। इनमें से दो की उम्र 18 और 19 साल है।

ये सभी गुजरात में JeM का एक एक्टिव नेटवर्क बनाने के लिए काम कर रहे थे, ताकि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया सके। एटीएस ने इनसे पूछताछ शुरू कर दी है।

सूचना मिलने के बाद, एटीएस ने 5 अलग-अलग टीमें बनाकर एक बड़ा अभियान चलाया। एटीएस की टीमों ने गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, नवसारी, पाटण और मध्य प्रदेश के देवास से 8 लोगों को गिरफ्तार किया।

जांच में पता चला है कि ये सभी गुजरात के ही रहने वाले हैं और एक पाकिस्तानी हैंडलर के इशारों पर काम कर रहे थे।

पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था: डीआईजी

गुजरात के एटीएस डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और बाद में छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से काफी साहित्य और झंडे भी बरामद हुए। आरोपियों से जब्त मोबाइल फोन से काफी जानकारियां मिली हैं।

पाकिस्तान के अब्दुल्ला साहब नाम के हैंडलर के संपर्क में थे: डीआईजी

डीआईजी सुनील जोशी ने आगे बताया कि सभी सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान के अब्दुल्ला साहब नाम के एक हैंडलर के संपर्क में थे। हैंडलर के इशारे पर ही गुजरात में मजबूत नेटवर्क खड़ा करने कोशिशों में लगे हुए थे। इन्हें एक शख्स के जरिए 3 लाख रुपए भी मिले थे। ये गुजरात में पाटण के एक मदरसे में रह रहे थे। मदरसे से साहित्य और कुछ पर्चे भी जब्त किए गए हैं।

सदस्यों की भर्ती के लिए तंजीम नाम का संगठन बनाया था

डीआईजी सुनील जोशी ने कहा- आरोपियों ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के लिए गुजरात में एक तंजीम नाम का संगठन बनाया था। वर्तमान में, तंजीम में 8 सदस्य शामिल हो चुके थे और अपने क्षेत्र में अन्य सदस्यों को शामिल करने के लिए उनका ब्रेनवॉश कर रहे थे। जांच में यह भी पता चला है कि ये जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी साहित्य का गुजराती में अनुवाद करके स्थानीय स्तर पर इसकी विचारधारा का प्रचार भी कर रहे थे।

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गुजरात से 4 अलकायदा आतंकी गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर देश विरोधी और भड़काऊ पोस्ट

गुजरात एटीएस ने बताया कि उसने अल-कायदा से जुड़े 4 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। दो आतंकी गुजरात, एक दिल्ली और एक नोएडा से पकड़ा गया है। ये चारों नकली नोटों के रैकेट और आतंकी संगठन से लोगों को जोड़ने का काम कर रहे थे। ये ऐसे एप्स का उपयोग कर रहे थे जिसमें कंटेंट अपने आप डिलीट हो जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

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फिरोजाबाद में डायलिसिस के दौरान युवती की मौत: परिजनों का आरोप- 108 एंबुलेंस कर्मियों ने नहीं की मदद; अस्पताल प्रशासन से कार्रवाई की मांग – Firozabad News




फिरोजाबाद जिला अस्पताल में सोमवार शाम डायलिसिस के दौरान 20 वर्षीय युवती की तबीयत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उसे तत्काल ट्रॉमा सेंटर रेफर किया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में मौजूद 108 एंबुलेंस कर्मियों पर समय पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई। जानकारी के अनुसार, मदनपुर थाना क्षेत्र निवासी 20 वर्षीय कीर्ति, स्वर्गीय मान सिंह की पुत्री थी। वह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी और नियमित रूप से जिला अस्पताल में डायलिसिस करा रही थी। सोमवार शाम करीब चार बजे डायलिसिस के दौरान अचानक उसका ब्लड प्रेशर बढ़ गया और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। एंबुलेंस से मदद नहीं मिलने का आरोप डॉक्टरों ने हालत गंभीर होने पर कीर्ति को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल परिसर में मौजूद 108 एंबुलेंस से मरीज को ले जाने के लिए मदद मांगी, लेकिन एंबुलेंस कर्मियों ने सहयोग नहीं किया। इसके बाद अस्पताल कर्मचारियों और परिजनों ने स्ट्रेचर पर ही युवती को ट्रॉमा सेंटर ले जाना शुरू किया। रास्ते में तोड़ा दम परिजनों के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर पहुंचने से पहले ही रास्ते में कीर्ति की मौत हो गई। उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मामले में अस्पताल प्रशासन और 108 एंबुलेंस सेवा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।



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