शामली के कैराना कोतवाली क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर रात्रि गश्त के दौरान एक हेड कांस्टेबल को तेज रफ्तार अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। इस हादसे में हेड कांस्टेबल पवन कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका पैर दो-तीन जगह से टूट गया। उन्हें उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र पुलिस चौकी कंडेला पर तैनात हेड कांस्टेबल पवन कुमार अपने साथी पुलिसकर्मी पूरण के साथ नेशनल हाईवे-709 एडी पर बाइक से गश्त कर रहे थे। यह घटना देर रात करीब एक बजे हुई। बताया गया कि ऐरटी कट से लगभग पांच सौ मीटर आगे पूर्वी यमुना नहर पुल की ओर सड़क किनारे खड़े कार सवार युवकों से हेड कांस्टेबल पवन पूछताछ कर रहे थे। इसी दौरान कैराना की ओर से आई एक तेज रफ्तार अज्ञात कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। कार के पिछले टायर की चपेट में आने से उनका बायां पैर फ्रैक्चर हो गया। हादसे में सिपाही की बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि पीछे बैठे साथी पुलिसकर्मी पूरण बाल-बाल बच गए। दुर्घटना के बाद आरोपी चालक कार समेत मौके से फरार हो गया। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त कार की लाइटें बंद थीं। मामले की सूचना पर चौकी प्रभारी एसआई बिजेंद्र सिंह और हेड कांस्टेबल हरिओम मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल पुलिसकर्मी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से चिकित्सकों ने पवन कुमार को हायर सेंटर रेफर कर दिया। पुलिस ने आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है।
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हेड कांस्टेबल को कार ने मारी टक्कर: बायां पैर फ्रैक्चर हुआ, शामली में रात्रि गश्त के दौरान नेशनल हाईवे पर हुआ हादसा – Shamli News
खगड़िया-पूर्णिया फोरलेन परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी: सांसद बोले-खुलेगा विकास और रोजगार का द्वार,परिवहन-निवेश को बढ़ावा मिलेगा – Khagaria News
खगड़िया से पूर्णिया तक बनने वाली फोरलेन सड़क परियोजना को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। खगड़िया सांसद राजेश वर्मा ने इसे सीमांचल और खगड़िया के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया। गुरुवार को खगड़िया परिसदन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र में विकास, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। सांसद वर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि पटना से बेगूसराय तक फोरलेन सड़क उपलब्ध थी, लेकिन बेगूसराय से पूर्णिया तक सड़क की स्थिति खराब थी। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आश्वासन दिया था। आर्थिक विकास के लिए नई जीवनरेखा उन्होंने इस परियोजना की मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बिहार सरकार और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का आभार व्यक्त किया। सांसद ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि सीमांचल के आर्थिक विकास के लिए एक नई जीवनरेखा साबित होगी, जिससे व्यापार, परिवहन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। “डबल इंजन सरकार” का सहयोग सांसद राजेश वर्मा ने यह भी बताया कि खगड़िया जिले के सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए के विधायक हैं। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के सहयोग से जिले में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और आने वाले समय में खगड़िया को कई और महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिलेंगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद ने मानसी स्थित प्रिस्टाइन मेगा फूड पार्क से संबंधित जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि प्रिस्टाइन और बुडको के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सुलझ गया है। चिराग के हस्तक्षेप और पहल से मामला सुलझा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के हस्तक्षेप और पहल से मामला सुलझा है, जिसके बाद अब फूड पार्क में जल्द उद्योग स्थापित होने की उम्मीद है। इससे जिले में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि खगड़िया में सड़क, पुल और पुलिया जैसी बुनियादी समस्याओं को समाप्त करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है और आने वाले समय में जिले की तस्वीर बदलेगी।
सांसद ने कहा कि जनता के प्रति जवाबदेही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर भी जनता के सामने रिपोर्ट कार्ड रखा था और अब आगामी 24 जून को दो वर्ष पूरा होने के अवसर पर फिर से अपने कार्यों और उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड जनता मालिक के सामने पेश करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ी संख्या में एनडीए कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
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दिल्ली होटल अग्निकांड, एलजी ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग: संधू बोले- बिना इजाज़त ना हो कंस्ट्रक्शन, एक्शन प्लान बनाने का आदेश – New Delhi News
नई दिल्ली। मालवीय नगर इलाके में बुधवार को ‘फ्लोरिश स्टे बीएंडबी’ रेस्टोरेंट में लगी आग में 21 लोगों की मौत और 35 लोगों को घायल होने के बाद दिल्ली के उप-राज्यपाल तरणजीत संधू ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के कमिश्नर संजीव खिरवार और अन्य अधिकारियों के साथ गुरुवार को हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग की। बैठक में मजबूत शहरी गवर्नेंस, बेहतर सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर और दिल्ली में बेहतर स्ट्रक्चरल सेफ्टी के लिए एक बड़े एक्शन प्लान पर चर्चा हुई। एलजी संधु ने कमिश्नर संजीव खिरवार को बिना नक्शा पास किए अवैध रूप से बन रहे निर्माणों पर सीलिंग, तोड़फोड़ कड़ी कार्रवाई के लिए एक बड़े एक्शन प्लान को लागू करने का आदेश दिया। एलजी बोले- म्युनिसिपल ओवरसाइट ऑफिसर होंगे जिम्मेदार एलजी ने एमसीडी से रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने को कहा जो बिल्डिंग बायलॉज को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित करने, गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन/एक्सपेंशन पर सजा दें और सभी म्युनिसिपल जोन में पूरी तरह से इंस्टीट्यूशनल जवाबदेही तय करें, जिसे जल्द से जल्द उनके सेक्रेटेरिएट को पेश किया जाए। एलजी संधू ने कहा कि एमसीडी अप्रूव्ड बिल्डिंग ब्लूप्रिंट या स्टैंडर्ड सेफ्टी कोड का उल्लंघन करने वाले गैर-कानूनी रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल वर्टिकल एक्सपेंशन की पहचान करने, जोनल अकाउंटेबिलिटी मैकेनिज्म, लोकल इंजीनियर, टेक्निकल स्टाफ और म्युनिसिपल ओवरसाइट ऑफिसर अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में किसी भी अनदेखे गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन या चल रहे अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। बिल्डिंग बायलॉज को सख्ती से करें लागू : संधू एलजी तरनजीत संधू ने गैर-कानूनी स्ट्रक्चरल एक्सपेंशन को रोकने के लिए एमसीडी के कमिश्नर संजीव को बिल्डिंग बायलॉज को सख्ती से लागू करने को कहा। एलजी ने एमसडी को को बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन से निर्णायक रूप से निपटने के लिए एक टाइम-बाउंड स्ट्रैटेजी लागू करने का निर्देश दिया।
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शहडोल में पेट्रोल पंप कर्मियों पर मारपीट का आरोप: एसडीएम से की शिकायत, सीसीटीवी फुटेज जांचने और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग – Shahdol News
शहडोल जिले के ब्यौहारी निवासी दलबीर पटेल ने पेट्रोल पंप कर्मचारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए गुरुवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ब्यौहारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होने का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पेट्रोल भरवाने के दौरान हुआ विवाद ज्ञापन के अनुसार, 30 मई 2026 की रात दलबीर पटेल जनपद पंचायत कार्यालय के सामने स्थित गुप्ता फिलिंग स्टेशन पर पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे। इसी दौरान उनका पेट्रोल पंप के कर्मचारी अरुणोदय द्विवेदी और शक्तिमान तिवारी से विवाद हो गया। दलबीर पटेल का आरोप है कि विवाद के दौरान दोनों कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं। कार्रवाई नहीं होने का आरोप पटेल का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी थी, लेकिन शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान भी पूरी जानकारी दर्ज नहीं की गई और उनकी बातों को सही तरीके से रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज जांचने की मांग ज्ञापन में दलबीर पटेल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पेट्रोल पंप परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखकर उसकी जांच कराने की मांग उठाई है, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल पंप पर तेल वितरण में कथित अनियमितताओं और लापरवाही की भी जांच कराने की मांग की है। आंदोलन की चेतावनी दलबीर पटेल ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अपने समर्थकों के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन प्राप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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चीन की हिमाकत पर अरुणाचल के सीएम बोले- यह 1962 वाला दौर नहीं
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अरुणाचल के सीएम पेमा खांडू ने चीन के दावों को खारिज कर कहा, हमारी सीमा तो चीन से लगती ही नहीं. हमारी सीमा तो तिब्बत से लगती है. उन्हें याद रखना चाहिए कि यह 1962 का दौर नहीं. मोदी सरकार में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ है.
अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू.
चीन बार-बार अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है. यहां तक कि अरुणाचल प्रदेश के कई जगहों के नाम भी खुद बदलता रहता है. एक बार फिर जब उसने यह हिमाकत की तो अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने उसे जवाब दिया है. पेमा खांडू ने कहा कि चीन कौन होता है, हमारे बारे में बात करने वाला. हमारा बॉर्डर तो चीन नहीं लगता. हमारा र्बॉर्डर तो ति ब्बत से लगता है. सीएम पेमा खांडू ने चीन को 1962 का वक्त याद दिलाया.
अरुणाचल प्रदेश के सीएम ने कहा, अरुणाचल प्रदेश बेहद सुरक्षित है, और हमारी सीमा चीन से नहीं, बल्कि तिब्बत से लगती है. हमारा बॉर्डर केवल तिब्बत से लगता है. यह 1962 वाला दौर नहीं है. उस दौर के इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलना आज के इंफ्रास्ट्रक्चर से करना सरासर गलत है. यह 2026 का युग है – नए भारत और विकसित भारत का युग. आजकल, हमारे सभी बॉर्डर इलाकों में कश्मीर क्षेत्र से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, मैं विशेष रूप से सभी उत्तरी सीमाओं की बात कर रहा हूं, जबरदस्त काम हुआ है.
चीन के दावों को हम गंभीरता से नहीं लेते
पेमा खांडू ने बॉर्डर इलाकों में हुए काम की तारीफ करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को जिस तरह से बढ़ावा दिया है, उससे ये क्षेत्र अत्यधिक सुलभ हो गए हैं. अब ऐसी सुविधाएं हो गई हैं, जब हमारी फौज को तुरंत मदद मिल सकती है. फौज तुरंत एक्शन ले सकती है. रही बात चीन के दावे की तो यह हमारे लिए कोई नई बात नहीं है और हम इस तरह के दावों की परवाह नहीं करते. हम इसे गंभीरता से नहीं लेते…
चीन की हिमाकत को भारत ने बताया शरारत
हाल ही में चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा दोहराते हुए वहां के कई स्थानों के नाम बदलने की सूची जारी की थी. बीजिंग अरुणाचल प्रदेश को जांगनान यानी दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है और दावा करता है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से तिब्बत से जुड़ा रहा है. अप्रैल 2026 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के भीतर स्थित कई पहाड़ों, दर्रों, नदियों और बस्तियों को नए चीनी नाम दिए. भारत ने इस कदम को शरारतपूर्ण और काल्पनिक दावों पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा.
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बिना गलती के भी पिटती थीं तृप्ति डिमरी, ‘मां बहन’ के प्रमोशन में खोला खोला घर का ये राज!
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“बचपन में बिना गलती के भी पिट जाती थीं तृप्ति डिमरी! नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई फिल्म ‘मां बहन’ के प्रमोशन के दौरान एक्ट्रेस ने खोले अपने बचपन के वो मजेदार राज, जिन्हें सुन आपको भी अपने दिन याद आ जाएंगे, नीचे पढ़ें पूरी खबर.
नई दिल्ली: तृप्ति डिमरी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर बेहद खुश और एक्साइटेड हैं. यह फिल्म आज यानी 4 जून को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म के प्रमोशन के दौरान तृप्ति ने अपने बचपन के दिनों को याद किया और कुछ ऐसे मजेदार किस्से सुनाए, जिन्हें सुनकर हर किसी को अपना बचपन याद आ जाएगा. आईएनएस के दिए इंटरव्यू में तृप्ति ने हंसते हुए बताया कि बचपन में उन्हें अपने माता-पिता से खूब मार पड़ती थी.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बचपन में माता-पिता की मार से कोई नहीं बचा होगा, सबने कभी न कभी तो मार खाई ही होगी. जब मैं बड़ी हो रही थी, तब तो मेरी बहुत ज्यादा कुटाई होती थी.”
जब बिना बात के ही पड़ जाती थी डांट
तृप्ति ने आगे बड़े ही मजाकिया अंदाज में एक किस्सा शेयर किया. उन्होंने कहा, “कभी-कभी तो ऐसा होता था कि जिस दिन मेरी कोई गलती नहीं होती थी, उस दिन भी मुझे मार पड़ जाती थी. मैं जब बाहर से घर लौटती थी और बहुत खुश दिखती थी, तो घरवाले पूछते थे, क्या बात है, आज इतनी खुश क्यों हो? और बस इसी बात पर डांट या मार पड़ जाती थी.” तृप्ति का कहना है कि बचपन में सजा पाना उनके लिए बहुत आम बात थी, लेकिन आज जब वो उन दिनों को याद करती हैं, तो उन्हें चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.
फिल्म के किरदारों में दिखेगा दम
अपनी फिल्म ‘मां बहन’ के बारे में बात करते हुए तृप्ति ने बताया कि इस फिल्म की कहानी बहुत अलग है. फिल्म में तीन मुख्य किरदार हैं और तीनों ही अपने-अपने तरीके से बहुत मजबूत हैं. कहानी में जब भी कोई परेशानी या हंगामा होता है, तो तीनों के हिस्से में बराबर की मुश्किलें आती हैं.
एक बिखरा हुआ पर प्यारा परिवार
तृप्ति के मुताबिक, फिल्म में जिस परिवार को दिखाया गया है, वह बहुत बिखरा हुआ और अजीब सा है, लेकिन यही इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती भी है. कहानी में ये तीनों किरदार एक ऐसी मुसीबत में फंस जाते हैं, जहां से निकलने के लिए उन्हें हर पल नए-नए जुगाड़ और तरीके लगाने पड़ते हैं.
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होर्मुज स्ट्रेट में टंटा के बीच आई खुशखबरी, LPG और तेल की कमी के बीच राहत
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India Solar Energy Generation: ईरान जंग के बीच एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर मशहूर होर्मुज स्ट्रेट से LPG और तेल से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इससे एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. बुरे वक्त में भारत ने सौर ऊर्जा के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है.
होमुर्ज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित होने से ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो गई है. इस बीच, भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. (फाइल फोटो/Reuters)
India Solar Energy Generation: ईरान जंग के चलते एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभाावित हुई है. इससे एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. भारत पर भी इसका असर पड़ा है. अब ऊर्जा संकट के बीच बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन के मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. यह किसी राहत से कम नहीं है. भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में वार्षिक सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया है.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल एक्स पर पोस्ट शेयर कर बताया कि भारत की सौर ऊर्जा विकास गाथा वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत ने वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है. जोशी के अनुसार, मजबूत सरकारी नीतियों, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की बदौलत भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है. अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय रिन्यूवेबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत ने 37 गीगावाट (GW) से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने 34 गीगावाट सौर क्षमता का विस्तार किया. इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका से आगे पहुंचा दिया.
दुनिया का दूसरा बड़ा सोलर एनर्जी मार्केट
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है और इससे अधिक भरोसेमंद, कुशल तथा टिकाऊ सौर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को बल मिलेगा. भारत की रिन्यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी में लगातार हो रही वृद्धि का असर वैश्विक रैंकिंग में भी दिखाई दे रहा है. अप्रैल 2026 में जारी आईआरईएनए के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. इस सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है. भारत ने इस मामले में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है.
दुनिया के अन्य देशों का क्या हाल
दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास 2,258.02 गीगावाट रिन्यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी है, जबकि अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है. भारत 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है. इसके बाद ब्राजील 228.20 गीगावाट और जर्मनी 199.92 गीगावाट क्षमता के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 55.3 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल बेस्ड कैपेसिटी जोड़ी है.
बड़ी उपलब्धि
जुलाई 2025 में देश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की जब कुल 203 गीगावाट बिजली मांग में से 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में तेजी से बढ़ता निवेश भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
आवारा कुत्ते के लिए भिड़े दो देश: मेक्सिको ने इसे अपना बताया, ब्राजील में नाराजगी; 300 नस्लों से मिलकर बना कैरामेलो डॉग
ब्राजीलिया/मेक्सिको सिटी1 घंटे पहले
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ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कैरामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कैरामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत।
मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कैरामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है।
वैज्ञानिक दृष्टि से कैरामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है।
कैरामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था।

2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला।
ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश
कैरामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को ‘कैरामेलो’ कहा जाता है।
2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कैरामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए।
इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कैरामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है।
इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए।

साल 2025 में कैरामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी।
100 साल में विकसित हुआ कैरामेलो
शोध के अनुसार कैरामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए।
1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए।
शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कैरामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए।
मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते
अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कैरामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है।
मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है।
उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कैरामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है।

ब्राजील में कैरामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कैरामेलो कुत्ते
ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है।
यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं।
कई कैरामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है
कैरामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते।
एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कैरामेलो हैं।
जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कैरामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे।
चीन बॉर्डर पर फटाफट पहुंचेंगे तोप-टैंक, LAC पर अब नहीं चलेगी गुस्ताखी, ड्रैगन को झटका
Jammu-Kashmir to Ladakh Fotu la Tunnel: भारत सरकार ने चीन की सीमा के बेहद करीब लद्दाख तक फटाफट पहुंचने और जम्मू-कश्मीर से कनेक्ट करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जोजिला सुरंग से भी एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 फोटू ला पास के पार दो यूनि-डायरेक्शन सुरंगों के निर्माण की बोली प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये दोनों ही सुरंगे LAC के इस पार चीन की गुस्ताखियों के मद्देनजर भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले दिनों में चीन बॉर्डर के बेहद करीबी इस इलाके में किसी भी मौसम में मिलिट्री हथियारों से लेकर जरूरी सामान तक तुरंत पहुंचाया जा सकेगा.
जोजिला सुरंग का ब्रेकथ्रू समारोह अगले हफ्ते होने जा रहा है जो 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगा. करीब 7000 करोड़ रुपये की जोजिला सुरंग और फोटू ला पास सुरंग मिलकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के राष्ट्रीय राजमार्ग-1 को ऑल-वेदर रणनीतिक कॉरिडोर बना देंगे. गौरतलब है कि इसी साल मई में सरकार ने फोटू ला सुरंग के लिए बजट आवंटित किया था.
फोटू ला सुरंग परियोजना करीब 824.12 करोड़ रुपये की है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इसमें लगभग दो-दो किलोमीटर लंबी दो सुरंगें बनानी हैं, साथ में एप्रोच रोड भी, जिससे कुल परियोजना की लंबाई 2.65 किलोमीटर हो जाएगी. फोटू ला सुरंग का महत्व इसकी जगह के कारण है. फोटू ला, श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर सबसे ऊंचा बिंदु है, जो लगभग 4,108 मीटर की ऊंचाई पर है.
यह पास राष्ट्रीय राजमार्ग-1 का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क है. कई दशकों से यह हिस्सा इस रूट का सबसे मुश्किल हिस्सा रहा है. तेज मौसम, भारी बर्फबारी और खतरनाक ड्राइविंग की स्थिति अक्सर आवाजाही रोक देती है, अधिकारियों ने बताया कि अब इस सुरंग को पूरा करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है.
अब आड़े नहीं आएगी 5-10 फीट मोटी बर्फ की परत
हर सर्दी में फोटू ला पर बर्फ पांच से दस फीट तक जमा हो सकती है, एक दस्तावेज में कहा गया है. सड़क पर बर्फ की परत बनने से ड्राइविंग बहुत खतरनाक हो जाती है, दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और वहां कर्मचारियों को लगातार बर्फ हटाने का काम करना पड़ता है. इतनी ऊंचाई पर पहाड़ी सड़कों के तेज ढलान और तेज मोड़ भी समस्या बढ़ाते हैं. भारी बर्फबारी या खराब मौसम में यहां यातायात पूरी तरह रुक जाता है.
हालांकि अब प्रस्तावित सुरंग इन समस्याओं का जड़ से समाधान करेगी. यह सुरंग यातायात को पहाड़ के ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से लेकर जाएगी. पास के खुले हिस्से को बायपास करके यह सुरंग मौसम पर निर्भरता कम कर देगी और लद्दाख की इस महत्वपूर्ण सड़क को ज्यादा भरोसेमंद बना देगी.
लेह-कारगिल के बीच आसान होगी यात्रा
यह परियोजना पास के पार सड़क की दूरी कम करेगी और लेह-कारगिल के बीच यात्रा को आसान और तेज बनाएगी. इस प्रोजेक्ट का महत्व सिर्फ आम लोगों की सुविधा से काफीद आगे है क्योंकि यह भारत की सबसे जरूरी रणनीतिक सड़कों में से एक बनने जा रही है. इसका इस्तेमाल सैनिकों, उपकरणों, ईंधन, राशन और लद्दाख में आगे तैनात सैनिकों के लिए सामान भेजने के लिए बेहद सुविधाजनक होने जा रहा है.
चीन से सैन्य तनाव में जरूरत हुई महसूस
2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य तनाव के बाद इस इलाके में मजबूत और बिना रुकावट कनेक्टिविटी की जरूरत और भी ज्यादा साफ हो गई है. मौसम से जुड़ी समस्याएं कम करने और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं को अब राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है.
जोजिला सुरंग, जो फिलहाल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच बन रही है, अगले हफ्ते ब्रेकथ्रू देखेगी. इसे 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. सबसे खास बात है कि यह एशिया की सबसे लंबी सुरंग होगी. सरकार का लंबा लक्ष्य साफ है कि श्रीनगर-लेह कॉरिडोर पर मौसम से होने वाली सारी रुकावटों को धीरे-धीरे खत्म किया जाए और एक ऐसी यातायात व्यवस्था बनाई जाए जो साल भर चल सके, जिसमें आम लोगों की आवाजाही, आर्थिक विकास और सेना की जरूरतें सभी पूरी हो सकें.


