Friday, May 8, 2026
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जांच में खुलासा-हर महीने अवैध वसूली, फिर भी बहाल: भोपाल की फिनिक्स गैस एजेंसी पर मेहरबान अफसर; 9 दिन में भी सप्लाई नहीं – Bhopal News




भोपाल के मीनाल रेसिडेंसी स्थित फिनिक्स गैस एजेंसी की जांच में अवैध वसूली का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट की माने तो घरों में सिलेंडर की सप्लाई के नाम पर हर महीने 2 लाख रुपए की वसूली की जा रही है। वहीं, सुरक्षा राशि के नाम पर 10 लाख रुपए ग्राहकों से ले लिए गए। बावजूद जिम्मेदार अफसर मेहरबान है। एजेंसी बहाल तो हो गई, लेकिन लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहे। इसी एजेंसी से ग्राहक मनोज ने 28 अप्रैल को सिलेंडर के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन 7 मई तक सिलेंडर घर नहीं पहुंचा। ऐसे मनोज ही नहीं सैकड़ों ग्राहक है, जो हर रोज परेशान हो रहे हैं। बावजूद जिम्मेदार समस्या दूर नहीं कर पा रहे। इसी बीच एजेंसी से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, खाद्य विभाग ने 15, 17 और 18 अप्रैल ने इस एजेंसी की जांच की थी। इसके बाद कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी गई थी। यहां मिली अनियमितताओं के बाद एजेंसी को सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन 12 दिन बाद ही 6 मई को इसे बहाल कर दिया गया। फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि इस मामले में प्रकरण एडीएम कोर्ट में लंबित है। जिनके यहां सिलेंडर नहीं पहुंच रहे, वहां पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं। ये मिली थीं गड़बड़ी



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Recipe Video- टाइम नहीं ज्यादा, झटपट कम सामग्री के साथ बनाएं नाश्ता, सूजी की 3 मजेदार रेसिपी


 

इस वीडियो में मास्टरशेफ पंकज भदौरिया में सूजी से तैयार की जाने वाली 3 आसान नाश्ते की रेसिपी शेयर की है. इन 3 नाश्ते की रेसिपी में सबसे पहले हैं लाजवाब स्टफ्ड सूजी रोल्स, सूजी बॉल्स और रवा अप्पे.ढक्कन और जार लॉक मैकेनिज्म की मदद से आप बिना हाथ लगाए काम कर सकते हैं और किचन में एक साथ कई काम कर सकते हैं. आखिरी रेसिपी है सूजी बॉल्स! यह मुंह में पानी ला देने वाली रेसिपी पोषण और लाजवाब स्वाद का बेहतरीन मेल है. सुबह को परफेक्ट बनाने के लिए इन 3 लाजवाब नाश्ते की रेसिपी जरूर ट्राई करें.

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शूटिंग तक पहुंची 5 फिल्में, 8 स्टार ने जमकर पसीना भी बहाया, फिर भी थिएटर तक नहीं पहुंचीं


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आपको हम बॉलीवुड की उन 5 बड़ी फिल्मों के बारे में बताते हैं, जो शूटिंग के बावजूद कभी रिलीज नहीं हो सकीं. इनमें शाहरुख खान की ‘शिखर’, गोविंदा की ‘बंदा ये बिंदास है’ और आमिर खान की ‘टाइम मशीन’ शामिल हैं. साथ ही, अमिताभ बच्चन की ‘शूबाइट’ और ‘मुन्ना भाई चले अमेरिका’ भी प्रोडक्शन हाउस के झगड़ों और निजी कारणों से ठंडे बस्ते में चली गईं.

नई दिल्ली: बॉलीवुड में हर साल सैकड़ों फिल्में बनती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई ऐसी फिल्में भी थीं जिनका शोर तो बहुत हुआ पर वो कभी पर्दे तक पहुँच ही नहीं पाईं? इन ‘अधूरी कहानियों’ में बड़े-बड़े सुपरस्टार्स का नाम जुड़ा था, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. चलिए, आज बात करते हैं उन 5 बड़ी फिल्मों की जो अनाउंस तो हुईं, शूट भी हुईं, लेकिन रिलीज के मामले में ‘डब्बा बंद’ होकर रह गईं.

Shah Rukh khan Shekhar

सबसे पहले बात करते हैं सुभाष घई की फिल्म ‘शिखर’ की. 1990 के दौर में इस फिल्म का ऐलान हुआ था, जिसमें शाहरुख खान और जैकी श्रॉफ लीड रोल में थे. इस फिल्म की कहानी वॉर पर बनी थी और इसके कुछ गाने भी रिकॉर्ड कर लिए गए थे. लेकिन अफसोस, सुभाष घई की फिल्म ‘त्रिमूर्ति’ फ्लॉप हो गई, जिससे बजट का संकट खड़ा हो गया और ‘शिखर’ को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा. इसी फिल्म की जगह बाद में ‘परदेस’ बनाई गई.

Banda Yeh Bindaas Hai: Ravi Chopra’s directorial starred Govinda, Tabu, Lara Dutta and Boman Irani. The film was shot completely but never released as it got caught in legal issues. 20th Century Fox said that it is "too similar" to the classic Hollywood film, 'My Cousin Vinny.'

गोविंदा की फिल्म ‘बंदा ये बिंदास है’ भी थियेटर का मुंह नहीं देख पाई. रवि चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गोविंदा के साथ तब्बू और लारा दत्ता जैसे कलाकार थे. हैरानी की बात यह है कि फिल्म पूरी तरह शूट हो चुकी थी, लेकिन यह कानूनी पचड़ों में ऐसी फंसी कि बाहर ही नहीं आ पाई. हॉलीवुड प्रोडक्शन हाउस 20वीं सेंचुरी फॉक्स ने दावा किया कि इसकी कहानी उनकी फिल्म ‘माई कजिन विन्नी’ से काफी मिलती-जुलती है.

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Aamir khan Movie

90 के दशक में आमिर खान और रवीना टंडन की जोड़ी भी एक अनोखी फिल्म के साथ आने वाली थी, जिसका नाम था ‘टाइम मशीन’. शेखर कपूर जैसे दिग्गज डायरेक्टर इसे बना रहे थे और फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और रेखा जैसे मंझे हुए कलाकार भी थे. यह भारत की शुरुआती साइंस-फिक्शन फिल्मों में से एक होने वाली थी, लेकिन पैसों की भारी तंगी और बजट बिगड़ने की वजह से बीच में ही इसका काम रुक गया और यह कभी पूरी नहीं हो सकी.

Shoebite: Amitabh Bachchan's film Shoebite never released as it got stuck in legal issues. Directed by Shoojit Sircar, the film was completed around 2012. In 2019, the actor once again requested makers to sort their differences and release the film. The superstar tweeted, "please please please .. its a great story.” Shoebite' is based on M Night Shyamalan's 1992 script 'Labor of Love'. It revolves around Amitab Bachchan’s character of John Pereira, a sexagenarian who sets out on a journey of self-discovery after his wife falls into a coma.

अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘शूबाइट’ तो आज भी चर्चा में रहती है. शूजित सरकार के निर्देशन में बनी यह फिल्म 2012 के आसपास ही पूरी हो गई थी, लेकिन प्रोडक्शन हाउस के आपसी विवादों ने इसे रिलीज नहीं होने दिया. बिग बी ने कई बार सोशल मीडिया पर मेकर्स से गुहार लगाई है कि इस बेहतरीन कहानी को दुनिया के सामने लाया जाए. फिल्म की कहानी एक बुजुर्ग शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी कोमा में गई पत्नी के लिए एक इमोशनल सफर पर निकलता है.

Munna Bhai Chale America: After the success of Lage Raho Munna Bhai, the makers announced its sequel. But it was shelved due to Sanjay Dutt's legal issues and script challenges. Rajkumar Hirani moved on to other projects, and this sequel became a dream.

मुन्ना भाई और सर्किट की जोड़ी को भला कौन भूल सकता है? ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ की जबरदस्त सफलता के बाद मेकर्स ने ‘मुन्ना भाई चले अमेरिका’ का टीजर तक जारी कर दिया था. लोग बेसब्री से इसका इंतजार कर रहे थे, लेकिन संजय दत्त के कानूनी मामलों और स्क्रिप्ट में आ रही दिक्कतों की वजह से फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई. बाद में राजकुमार हिरानी दूसरे प्रोजेक्ट्स में बिजी हो गए और फैंस का यह सपना अधूरा ही रह गया.

Munna bhai chale

अधूरी फिल्में आज भी सिने प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं. सोचिए, अगर शाहरुख की ‘शिखर’ या आमिर की ‘टाइम मशीन’ उस दौर में रिलीज हो जाती, तो शायद आज बॉलीवुड का इतिहास कुछ और ही होता. बजट, कानूनी लड़ाई या निजी समस्याएं अक्सर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को रोक देती हैं, लेकिन इन फिल्मों की चर्चा इन्हें हमेशा जिंदा रखती है.

फिल्म बनाना सिर्फ क्रिएटिविटी का काम नहीं, बल्कि मैनेजमेंट और किस्मत का खेल भी है. इन पांचों फिल्मों की लिस्ट देखकर समझ आता है कि बड़े नाम और अच्छी कहानी होने के बावजूद कभी-कभी चीजें हमारे हाथ में नहीं होतीं. आज ये फिल्में भले ही रिलीज न हुई हों, लेकिन बॉलीवुड की यादों के गलियारों में इनका नाम हमेशा दर्ज रहेगा.

कहना गलत नहीं होगा कि ‘शो मस्ट गो ऑन’ के मंत्र पर चलने वाला बॉलीवुड भले ही आगे बढ़ गया हो, पर ‘शूबाइट’ या ‘मुन्ना भाई’ के अगले पार्ट जैसी फिल्मों के लिए आज भी दर्शकों के दिल में एक छोटी सी उम्मीद बाकी है. क्या पता, कभी कोई कानूनी मसला सुलझ जाए और इनमें से कोई फिल्म ओटीटी पर ही देखने को मिल जाए! फिलहाल तो ये सिर्फ बॉलीवुड की भूली-बिसरी कहानियों का हिस्सा बनकर रह गई हैं.

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गंगा एक्सप्रेस-वे पर ट्रक ने DCM में मारी टक्कर: ड्राइवर की मौत, मेरठ से प्रयागराज जाते समय हुआ हादसा – Sambhal News




संभल में गंगा एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसे में एक डीसीएम ड्राइवर की मौत हो गई। हादसा बहजोई थाना क्षेत्र के बंजरपुरी अंडरपास के पास हुआ, जहां मेरठ से प्रयागराज जा रही डीसीएम पीछे खड़े ट्रक में जा घुसी। मृतक की पहचान आगरा निवासी किशनवीर (31) पुत्र पातीराम के रूप में हुई है। घटना गुरुवार शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। टक्कर इतनी जोरदार थी कि डीसीएम का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची और घायल चालक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहजोई में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान उसकी हालत गंभीर बनी रही और करीब तीन घंटे बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस को चालक की मौत की जानकारी गुरुवार सुबह करीब 9 बजे मिली। वाहन के नंबर के आधार पर पुलिस ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिवार के लोग अस्पताल पहुंचे और किशनवीर की पहचान की। हादसे में ट्रक को भी नुकसान पहुंचा है। थाना प्रभारी राजीव कुमार मलिक ने बताया- सड़क हादसे में डीसीएम चालक की मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस ने ट्रक और डीसीएम को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।



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WhatsApp पर सरकार बनाने का न्योता! विजय की चाल देख लेफ्ट नेताओं का चकराया सिर


चेन्नई: तमिलनाडु में सरकार बनाने की जद्दोजहद के बीच थलापति विजय की पार्टी तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने संभावित सहयोगियों तक पहुंचने के लिए डिजिटल रास्ता अपनाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके ने इंडिया ब्लॉक की छोटी पार्टियों जैसे सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके को औपचारिक मुलाकात के बजाय व्हाट्सएप मैसेज भेजकर समर्थन मांगा है. इस अनौपचारिक तरीके ने पुराने और अनुभवी राजनेताओं को हैरान कर दिया है. एक लेफ्ट नेता ने चुटकी लेते हुए कहा कि शायद यह नई पीढ़ी की राजनीति है, जहां सरकार बनाने जैसे गंभीर मुद्दे भी मैसेजिंग ऐप पर तय किए जा रहे हैं. तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इस पर गहरा सस्पेंस बना हुआ है.

गवर्नर की शर्त और विजय का मिशन 118

टीवीके के पास फिलहाल 108 सीटें हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से 10 कम हैं. हालांकि कांग्रेस के 5 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का वादा किया है, लेकिन इसके बावजूद विजय के पास केवल 113 का आंकड़ा ही पहुंच पा रहा है.

विजय से TN गवर्नर की दो-टूक: ‘फोन पर नहीं, कागज पर दिखाओ बहुमत’. (File Photo : ANI)

लेफ्ट पार्टियों की नाराजगी और ‘डिजिटल’ दूरियां

टीवीके के व्हाट्सएप आउटरीच ने लेफ्ट पार्टियों के भीतर काफी असहजता पैदा कर दी है. नेताओं का कहना है कि गठबंधन बनाने के लिए आमतौर पर औपचारिक चर्चा, सम्मान और वैचारिक स्पष्टता की जरूरत होती है.

एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, ‘जो पार्टी सरकार बनाना चाहती है और जिसके पास बहुमत नहीं है, वह हमारे ऑफिस तक नहीं आई. उन्होंने सिर्फ व्हाट्सएप पर निमंत्रण भेज दिया, इसे हम क्या समझें?’

इसके पीछे एक गहरी चिंता यह भी है कि कांग्रेस ने डीएमके के साथ अपना दशकों पुराना रिश्ता तोड़कर टीवीके का हाथ थाम लिया है. लेफ्ट पार्टियों को डर है कि कहीं टीवीके का यह डिजिटल जाल उनके गठबंधन को भी न तोड़ दे. फिलहाल सीपीआई और वीसीके जैसी पार्टियों ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और वे अपनी आंतरिक बैठकों का इंतजार कर रही हैं.

क्या डीएमके और एआईएडीएमके आएंगे साथ?

मौजूदा राजनीतिक गतिरोध के बीच तमिलनाडु में एक ऐसी संभावना की चर्चा भी तेज हो गई है, जो पहले अकल्पनीय थी. राजनीतिक गलियारों में खबर है कि अगर टीवीके बहुमत साबित करने में विफल रहती है, तो डीएमके और एआईएडीएमके के बीच एक गुप्त समझौता हो सकता है.

उधर, एमके स्टालिन ने भी आंतरिक रूप से संकेत दिए हैं कि वे टीवीके को सरकार बनाने का मौका देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनकी नजर इस बात पर है कि क्या विजय 118 का आंकड़ा जुटा पाएंगे.

तमिलनाडु में आगे क्या होने वाला है?

16वीं तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है. इसका मतलब है कि विजय के पास बहुमत जुटाने के लिए बहुत कम समय बचा है. अगर 10 मई तक कोई भी दल सरकार बनाने का स्पष्ट दावा पेश नहीं कर पाता, तो राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने या नए चुनाव कराने का विकल्प होगा.

टीवीके के लिए चुनौती यह है कि वह उन 5-10 विधायकों का समर्थन कहां से लाए, जो उन्हें सीएम की कुर्सी तक पहुंचा सकें. क्या व्हाट्सएप वाला यह ‘जेन-जी’ अंदाज काम आएगा या फिर तमिलनाडु की पुरानी राजनीतिक परंपराएं विजय पर भारी पड़ेंगी, इसका फैसला अगले 48 घंटों में हो सकता है. फिलहाल, चेन्नई से लेकर पुडुचेरी तक राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है.



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चाय पीकर घर के लिए निकले थे: बीजेपी कार्यकर्ता ने बताया- सुवेंदु अधिकारी की यात्राओं का पूरा अरेंजमेंट वे ही करते थे


सूरत3 घंटे पहले

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पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम में बुधवार, 6 मई की रात को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्या से ठीक दो घंटे पहले मृतक चंद्रनाथ रथ सूरत के भाजपा कार्यकर्ता डॉ. प्रकाश चंद्र के साथ थे।

प्रकाश चंद्र ने बताया कि मुझे भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसलिए सुवेंदुजी से बातचीत करने के लिए चंद्रनाथ के लगातार संपर्क में रहता था। कई रैलियां और सभाओं में भी हम साथ रहे। बुधवार की शाम एक सम्मेलन के बाद हमने साथ ही चाय पी थी।

इसके बाद रात को वे यह कहकर विदा हुए कि मैं खाने के लिए घर जा रहा हूं। इसी दौरान हमलावरों ने कार रोककर उनको गोली मार दी। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है। हमलावरों ने पहले से ही रेकी की होगी और उनका पीछा किया होगा।

गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं।

गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं।

चंद्रनाथ ही सुवेंदु की यात्राओं का अरेंजमेंट करते थे: डॉ. प्रकाश चंद्र डॉ. प्रकाश चंद्र पिछले 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं और पूरे समय चंद्रनाथ रथ के सीधे संपर्क में रहे। भवानीपुर विधानसभा के कामकाज के दौरान दोनों ने मिलकर कई जनसभाएं और रणनीतियां तैयार की थीं। प्रकाश चंद्र कहते हैं- चंद्रनाथ बहुत जिम्मेदार व्यक्ति थे।

चुनाव में चंद्रनाथ नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों का कामकाज संभाल रहे थे। डॉ. प्रकाश चंद्र बताते हैं कि जब भी सुवेंदु यात्रा पर होते थे, चंद्रनाथ ही उनके सभी अरेंजमेंट करते थे।

CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है।

CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है।

किसी भी विवाद में नहीं थे चंद्रनाथ: डॉ. प्रकाश चंद्र सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंद्रनाथ रथ कभी मंच पर नहीं आए और न ही उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में भाषण दिए। वे कार्यालय के कामकाज को संभालते थे और सुवेंदु अधिकारी के साये में रहकर प्रबंधन करते थे। वे नेताओं की तरह सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं निकले और न ही विवादों में फंसे।

ऐसे सीधे-सादे और अनुशासित व्यक्ति को निशाना क्यों बनाया गया, यह एक बड़ा सवाल है। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक ईर्ष्या और सुवेंदु अधिकारी की शक्ति को कमजोर करने की साजिश हो सकती है।

सूरत के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए सूरत के अन्य कार्यकर्ताओं में भी डर का माहौल है। डॉ. प्रकाश चंद्र, चंद्रनाथ रथ के बेहद करीबी थे और हत्या से कुछ घंटे पहले तक उनके साथ थे, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

फिलहाल डॉ. प्रकाश चंद्र बंगाल में ही हैं और उन्होंने कहा है कि वे हिम्मत न हारते हुए अपना काम जारी रखेंगे, लेकिन चंद्रनाथ जी को छोड़ना उनके लिए गहरा सदमा है। ————–

चंद्रनाथ हत्याकांड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

हमलावरों ने 7 किमी तक पीछा किया:फिर गोली मारी; सुवेंदु अधिकारी बोले- मैंने ममता को हराया, इसलिए पीए की हत्या

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनके पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने ममता को हराया है। सुवेंदु ने कहा- इस हत्या को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसकी जितनी भी निंदा करें वह कम है। पूरी खबर पढ़ें…

आखिरी 90 मिनट:हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। पूरी खबर पढ़ें…

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चाय पीकर घर के लिए निकले थे: बीजेपी कार्यकर्ता ने बताया- सुवेंदु अधिकारी की यात्राओं का पूरा अरेंजमेंट वे ही करते थे


सूरत19 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम में बुधवार, 6 मई की रात को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस हत्या से ठीक दो घंटे पहले मृतक चंद्रनाथ रथ सूरत के भाजपा कार्यकर्ता डॉ. प्रकाश चंद्र के साथ थे।

प्रकाश चंद्र ने बताया कि मुझे भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसलिए सुवेंदुजी से बातचीत करने के लिए चंद्रनाथ के लगातार संपर्क में रहता था। कई रैलियां और सभाओं में भी हम साथ रहे। बुधवार की शाम एक सम्मेलन के बाद हमने साथ ही चाय पी थी।

इसके बाद रात को वे यह कहकर विदा हुए कि मैं खाने के लिए घर जा रहा हूं। इसी दौरान हमलावरों ने कार रोककर उनको गोली मार दी। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश है। हमलावरों ने पहले से ही रेकी की होगी और उनका पीछा किया होगा।

गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं।

गुजरात के सूरत में रहने वाले डॉ. प्रकाश चंद्र 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं।

चंद्रनाथ ही सुवेंदु की यात्राओं का अरेंजमेंट करते थे: डॉ. प्रकाश चंद्र डॉ. प्रकाश चंद्र पिछले 110 दिनों से पश्चिम बंगाल में हैं और पूरे समय चंद्रनाथ रथ के सीधे संपर्क में रहे। भवानीपुर विधानसभा के कामकाज के दौरान दोनों ने मिलकर कई जनसभाएं और रणनीतियां तैयार की थीं। प्रकाश चंद्र कहते हैं- चंद्रनाथ बहुत जिम्मेदार व्यक्ति थे।

चुनाव में चंद्रनाथ नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी महत्वपूर्ण सीटों का कामकाज संभाल रहे थे। डॉ. प्रकाश चंद्र बताते हैं कि जब भी सुवेंदु यात्रा पर होते थे, चंद्रनाथ ही उनके सभी अरेंजमेंट करते थे।

CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है।

CCTV फुटेज में सुवेंदु के PA चंद्रनाथ रथ की गाड़ी गुजरती नजर आ रही है।

किसी भी विवाद में नहीं थे चंद्रनाथ: डॉ. प्रकाश चंद्र सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चंद्रनाथ रथ कभी मंच पर नहीं आए और न ही उन्होंने सार्वजनिक सभाओं में भाषण दिए। वे कार्यालय के कामकाज को संभालते थे और सुवेंदु अधिकारी के साये में रहकर प्रबंधन करते थे। वे नेताओं की तरह सार्वजनिक रूप से बाहर नहीं निकले और न ही विवादों में फंसे।

ऐसे सीधे-सादे और अनुशासित व्यक्ति को निशाना क्यों बनाया गया, यह एक बड़ा सवाल है। डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार, उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक ईर्ष्या और सुवेंदु अधिकारी की शक्ति को कमजोर करने की साजिश हो सकती है।

सूरत के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए गए सूरत के अन्य कार्यकर्ताओं में भी डर का माहौल है। डॉ. प्रकाश चंद्र, चंद्रनाथ रथ के बेहद करीबी थे और हत्या से कुछ घंटे पहले तक उनके साथ थे, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है।

फिलहाल डॉ. प्रकाश चंद्र बंगाल में ही हैं और उन्होंने कहा है कि वे हिम्मत न हारते हुए अपना काम जारी रखेंगे, लेकिन चंद्रनाथ जी को छोड़ना उनके लिए गहरा सदमा है। ————–

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हमलावरों ने 7 किमी तक पीछा किया:फिर गोली मारी; सुवेंदु अधिकारी बोले- मैंने ममता को हराया, इसलिए पीए की हत्या

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि उनके पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उन्होंने ममता को हराया है। सुवेंदु ने कहा- इस हत्या को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उसकी जितनी भी निंदा करें वह कम है। पूरी खबर पढ़ें…

आखिरी 90 मिनट:हमलावरों ने स्कॉर्पियो के सामने कार लाकर रास्ता रोका; गोलियां मारीं, 2 सीने में, एक पेट में लगी

पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की बुधवार रात 10.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। 42 साल के चंद्रनाथ कोलकाता से मध्यमग्राम जा रहे थे, जहां वे किराए के घर में अकेले रहते थे। पूरी खबर पढ़ें…

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प्यार किया या लव जिहाद? मुस्लिम से शादी के बाद 7 हीरोइनों का जीना हुआ दुश्वार


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मुस्लिम डायरेक्टर से शादी के बाद हीरोइन ने फैंस के साथ अपनी खुशियां बांटी, तो उन्हें बधाइयों के बजाय नफरत मिली. हद तो तब हो गई, जब लोगों ने कहा कि आपके बच्चे आगे चलकर आईएसआईएस ज्वॉइन करेंगे. यानी आतंकवादी बनेंगे. कई हीरोइनों को मुस्लिम पार्टनर से शादी करने पर धमकियां मिली और पतियों पर लव जिहाद का आरोप लगा. लोगों की नफरत ने उनका जीना दूभर कर दिया. आइए, सोनाक्षी सिन्हा सहित उन हीरोइनों के बारे में जानते हैं, जिनकी शादी पर खूब बवाल हुआ था. ट्रोल्स ने भी अपनी सारी हदें पार कर दी थीं.

नई दिल्ली: ‘द केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों ने बताया कि ‘लव जिहाद’ समाज की वह सच्चाई है, जिससे मुंह नहीं फेरा जा सकता. हालांकि, एक तबका फिल्म पर प्रोपेगेंडा करने और मुस्लिमों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा. नतीजतन, आजकल जब भी कोई मशहूर एक्ट्रेस किसी मुस्लिम पार्टनर से शादी करती है, तो उन्हें बधाई संदेशों की जगह लोगों के गुस्से और नफरत का सामना करना पड़ता है. लोग बिना सोचे-समझे उनकी शादी को सीधे ‘लव जिहाद’ से जोड़ देते हैं. सोनाक्षी सिन्हा से जहीर इकबाल की शादी को लोगों ने लव जिहाद का रूप देने की भरपूर कोशिश की. ट्रोल्स ने दावा किया उनके रिश्ते का अंत बेहद दर्दनाक होगा. कई एक्ट्रेस के पार्टनर्स पर भी ‘लव जिहाद’ के आरोप लगते रहे हैं.

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सोनाक्षी सिन्हा से जहीर इकबाल की शादी को लोगों ने लव जिहाद का रूप देने की कोशिश की. ट्रोल्स ने दावा किया उनके रिश्ते का अंत खराब होगा, मगर कपल का रिश्ता हर गुजरते साल के साथ मजबूत हो रहा है. सोनाक्षी सिन्हा ने शादी के फैसले में भले माता-पिता को शामिल न किया हो, मगर शत्रुघ्न सिन्हा ने बाद में बेटी का फुल सपोर्ट किया था. (फोटो साभार: Instagram@aslisona)

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टीवी की मशहूर ‘गोपी बहू’ देवोलीना भट्टाचार्जी ने जब अपने जिम ट्रेनर शाहनवाज शेख के साथ शादी की तस्वीरें शेयर कीं, तो लोगों ने उन्हें बधाई देने के बजाय ट्रोल करना शुरू कर दिया था. हद तो तब हो गई, जब कुछ लोगों ने श्रद्धा वाकर केस का जिक्र करते हुए उन पर बेहद भद्दे और डरावने कमेंट्स किए. देवोलीना भट्टाचार्जी को अपने पसंदीदा इंसान से शादी करने पर नफरत झेलनी पड़ी.(फोटो साभार: Instagram@devoleena)

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बॉलीवुड की बेबाक एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा भी इस कड़वे अनुभव से गुजर चुकी हैं. उन्होंने जब अपने पार्टनर और एक्टर अली फजल से शादी की, तो सोशल मीडिया पर उन्हें ‘बुर्का मुबारक’ जैसे ताने मारकर ट्रोल किया. लोगों ने भविष्यवाणी तक कर दी कि उनकी शादी का अंजाम भी बुरा होगा. ऋचा और अली के प्यार को भी धर्म के चश्मे से देखा गया. (फोटो साभार: Instagram@therichachadha)

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एक्ट्रेस करीना कपूर खान ने जब सैफ अली खान से शादी की थी, तब भी हालात कुछ अलग नहीं थे. सैफ पर उस समय भी ‘लव जिहाद’ के आरोप खूब लगे थे. हालांकि, करीना ने हमेशा बड़ी मजबूती से अपना पक्ष रखा और साफ कहा कि वह सिर्फ प्यार में यकीन रखती हैं, किसी एजेंडे में नहीं. उन्होंने सालों तक इस मानसिक दबाव को झेला है, लेकिन अपने रिश्ते को पूरी गरिमा के साथ निभाया. (फोटो साभार: Instagram@kareenakapoorkhan)

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सिर्फ बड़े सितारे ही नहीं, छोटे पर्दे से जुड़े लोग भी ‘लव जिहाद’ का दंश झेल चुके हैं. 2019 की मिस इंडिया अर्थ रही सायली सुर्वे का मामला सामने आया, जिसमें शादी के बाद धर्म परिवर्तन के दबाव की बातें उठीं. वहीं कुंभ मेला फेम मोनालिसा भोसले की शादी पर भी विवाद हुआ.

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एक्ट्रेस प्रियामणि ने जब 2017 में मुस्तफा राज से शादी की थी, तब उन पर और उनके परिवार पर बुरे हमले हुए थे. नफरत जताने वालों ने यहां तक कह दिया था कि उनके बच्चे आगे चलकर आतंकी बनेंगे. ऐसी बातें लोगों का दिल तोड़ देती हैं. (फोटो साभार: Instagram@pillumani)

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प्रियामणि ने बताया कि धर्म और जाति पर बयान मानसिक तौर पर परेशान कर सकते हैं. उन्होंने फैसला किया कि वे इन नफरती लोगों को जवाब देकर उन्हें और अहमियत नहीं देंगी, क्योंकि ऐसे ट्रोल्स सिर्फ अटेंशन पाने के लिए यह सब करते हैं. (फोटो साभार: Instagram@pillumani)

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तुनिषा शर्मा की जब 2022 में अचानक मौत हो गई थी, तब एक मुस्लिम एक्टर के साथ उनके रिश्ते पर खूब विवाद हुआ था. एक्टर पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा था. फिल्म स्टार्स के साथ ट्रोलिंग अब एक खतरनाक पैटर्न बन चुका है. किसी की मौत हो या किसी की शादी, हर चीज को सांप्रदायिक रंग दे दिया जाता है. सोनाक्षी सिन्हा जैसी हीरोइनों को अक्सर अपने फैसले की वजह से घेरा जाता है. नफरत और प्रोपेगेंडा की बुनियाद पर किसी के कैरेक्टर या भविष्य पर सवाल उठाना गलत है.

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हिमाचल के मंदिर में 100 ग्राम सोने का हार चढ़ाया: महाराष्ट्र से आए श्रद्धालु बोले- मां की कृपा से मन्नत पूरी हुई – Kangra News




हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के माता ब्रजेश्वरी मंदिर में एक श्रद्धालु ने 100 ग्राम सोने का हार चढ़ाया। महाराष्ट्र के पुणे से आए श्रद्धालु ने यह हार भेंट किया। इसकी कीमत लगभग 16 लाख रुपए बताई जा रही है। मंदिर अधिकारी शिवाली ठाकुर ने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे निवासी विनोद एन शर्मा ने यह हार चढ़ाया है। विनोद शर्मा अपने परिवार सहित माता के दरबार में दर्शन करने पहुंचे थे। उनके साथ उषा शर्मा, हेमंत, तरुण और मनोज भी मौजूद रहे। मंदिर अधिकारी की मौजूदगी में चढ़ाया हार विनोद शर्मा ने मंदिर अधिकारी शिवाली ठाकुर की उपस्थिति में विधिवत रूप से 100 ग्राम सोने का हार मां वज्रेश्वरी के चरणों में अर्पित किया।विनोद एन शर्मा ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से कांगड़ा स्थित माता वज्रेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए आता रहा है और मां के प्रति उनकी गहरी आस्था है। उन्होंने बताया कि परिवार की एक मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने माता के चरणों में यह सोने का हार अर्पित करने का संकल्प लिया था, जिसे अब पूरा किया गया है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालु परिवार की इस भेंट के लिए आभार व्यक्त किया। वहीं, मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने भी माता के प्रति दिखाई गई इस श्रद्धा और भक्ति की सराहना की।



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औरंगाबाद से झारखंड बॉर्डर तक बनेगा 30KM लंबा बाईपास: सड़क जाम से मिलेगी मुक्ति, ओवर ब्रिज-अंबा बाजार पर जाने में होगी आसानी – Aurangabad (Bihar) News




औरंगाबाद में लगातार लगने वाले जाम की समस्या से लोगों को जल्द राहत मिल सकती है। शहर के ओवर ब्रिज और अंबा बाजार में लगने वाले सड़क जाम के कारण एनएच 139 होते हुए अंबा, हरिहरगंज व नबीनगर की ओर जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों की समस्या को देखते हुए एनएचएआई ने नए बाईपास निर्माण की कवायद शुरू कर दी है। पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने बताया कि एनएच-139 को जाम मुक्त बनाने के लिए औरंगाबाद के खैरी मोड़ से पोला तक एक नए बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिसकी लंबाई लगभग 30 किलोमीटर होगी। इसके लिए विस्तृत डीपीआर तैयार कर विभाग को भेजने की तैयारी चल रही है। पूर्व सांसद ने कहा कि पहले विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण एनएच-139 को फोरलेन बनाने की योजना में काफी देरी हुई। उन्होंने बताया कि दाउदनगर और ओबरा में बाईपास निर्माण को लेकर पहल की गई थी, लेकिन औरंगाबाद और अंबा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया था। बाद में जब इस समस्या की जानकारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को दी गई और रोजाना लगने वाले जाम के फोटो भेजे गए, तब विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने बताया कि अब औरंगाबाद से पोला तक तक एक बड़े बाईपास निर्माण पर सहमति बन चुकी है। इससे शहर और बाजार क्षेत्रों में लगने वाले भारी जाम से लोगों को राहत मिलेगी। पूर्व सांसद ने उम्मीद जताई कि आने वाले तीन से चार महीनों में इस दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है। बता दें कि औरंगाबाद बाईपास और अंबा चौक पर रोजाना भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। आम नागरिकों के साथ-साथ अधिकारी, एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहन घंटों जाम में फंसे रहते हैं। इसका सबसे अधिक असर मरीजों, स्कूली बच्चों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों और दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। बाईपास बनने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी पूर्व सांसद ने कहा कि पहले सरकार का ध्यान इस सड़क के बजाय सासाराम और आमस-गया सड़क परियोजना पर अधिक था। एनएच-139 के विकास का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। लेकिन लगातार प्रयास और पहल के बाद अधिकारियों ने इस सड़क के महत्व को समझा और अब इसके निर्माण को लेकर सहमति बनी है।उन्होंने कहा कि बाईपास बनने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, यात्रा का समय कम होगा और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी। बता दें कि एनएच 139 पटना से अरवल दाउदनगर व औरंगाबाद होते हुए बिहार झारखंड बॉर्डर तक जाती है। यह सड़क डाल्टनगंज होते हुए रांची और छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और यूपी को भी जोड़ती है। आवागमन के लिहाज से यह सड़क अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और लोगों को जान माल का नुकसान झेलना पड़ता है। नए बाईपास के निर्माण से लोगों को सहूलियत होगी।



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