मध्य प्रदेश में अब कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे एक कीमो का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा लगेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन के दाम बढ़ा दिए हैं। एक्सपर्ट की माने तो यह दोनों दवाएं ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं। कई मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, ऐसे में पूरे इलाज पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, कंपनियों ने दवाओं का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, लेकिन करीब एक महीने मांग अनुरूप सप्लाई करने में लगेगा। दूसरी ओर, शहर के कैंसर अस्पतालों में कीमो की दवाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। युद्ध के चलते सप्लाई चैन बाधित हुई थी। घाटे के चलते दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया था। 7 प्रकारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हुई
पेट्रोल-डीजल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी खबरें इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत में कैंसर के इलाज को भी मुश्किल बना दिया है। स्थिति ऐसी है कि कैंसर के 7 प्रमुख प्रकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी से हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं। अब डॉक्टरों का इलाज के तरीकों में बदलाव पर फोकस
दवाओं की कीमतें बढ़ने और इनकी कमी की बात विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं। हाल ही में भास्कर से चर्चा में मुंबई स्थित कामा और एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे ने बताया था कि प्लैटिनम-बेस्ड कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी से कैंसर के मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी जरूरी दवाओं की सप्लाई में रुकावट के कारण डॉक्टरों को इलाज के स्टैंडर्ड तरीकों में बदलाव करना पड़ रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर भी इस कमी का असर पड़ा है। हालांकि, प्लैटिनम वाली दवाओं की कमी तो है, लेकिन दूसरी कीमोथेरेपी दवाएं मिल रही हैं। इसलिए, भले ही सभी इलाज पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन इससे कुछ खास मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। घरेलू दवा कंपनियों को भी इन दवाओं की सप्लाई बढ़ानी चाहिए, ताकि कमी खत्म हो और मरीजों के इलाज में आने वाली रुकावटें कम हों। पहले ही दवाओं के दाम में 50% तक वृद्धि की संभावना थी
केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दो महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत बढ़ाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। देशभर में इन दवाओं की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी हो गई। फार्मा कंपनियों की मांग और उत्पादन लागत के आकलन के बाद सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। रिपोर्टों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10% से 50% तक वृद्धि की गई है। ताकि इनकी उपलब्धता बनी रहे और उत्पादन फिर से सामान्य हो सके। दरअसल, युद्ध और सप्लाई बाधाओं के कारण प्लैटिनम-बेस्ड कीमो दवाओं की सप्लाई में लगभग 50% तक कमी आने का अनुमान है। इसका असर सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर देखने को मिल रहा है। 30 साल से सबसे सस्ती और भरोसेमंद दवा है सिस्प्लैटिन
भोपाल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू के अनुसार, रेडियोथेरेपी के साथ इलाज का असर बढ़ाने के लिए सिस्प्लैटिन पिछले 20-30 साल से सबसे भरोसेमंद दवा मानी जाती है। इसका उपयोग लंबे समय से स्थापित इलाज पद्धति का हिस्सा रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सिस्प्लैटिन जैसी दवा जहां हजारों रुपए में इलाज पूरा कर देती है, वहीं इसका विकल्प इम्यूनोथेरेपी लाखों रुपए तक पहुंच जाता है, जो आम मरीजों की पहुंच से बाहर है। इस कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह दवा बेहद अहम मानी जाती है। अब इसके रेट में भी वृद्धि होने जा रही है। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कई प्रमुख कैंसर के इलाज की ‘बैकबोन’
सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन को दुनिया भर में कीमोथेरेपी की सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में माना जाता है। इनका उपयोग फेफड़ों, मुंह, सर्वाइकल, ओवरी, स्तन, अंडकोष, गॉलब्लैडर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। ऑन्कोलॉजिस्ट इन्हें कई कैंसरों की फर्स्ट-लाइन थेरेपी का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। ये दोनों दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) और डीपीसीओ के तहत मूल्य नियंत्रण में हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के बावजूद कंपनियां दवाओं के दाम नहीं बढ़ा पा रही थीं। उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत और निर्धारित बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर आ गया, जिसके कारण कई कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया या बंद कर दिया। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
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MP में कैंसर की दवा की 50% बढ़ी कीमतें: एक कीमों का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा; प्लेटिनम बेस्ड दवाएं अब भी मार्केट से ड्राई – Bhopal News
बोचहां प्रमुख-उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा: कोरम के अभाव में बैठक निष्प्रभावी, 18 सदस्य रहे अनुपस्थित – bochaha News
बोचहां प्रखंड प्रमुख साजन कुमार पासवान और उप-प्रमुख के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को कोरम के अभाव में निष्प्रभावी हो गया। प्रखंड मुख्यालय सभागार में बुलाई गई विशेष बैठक में आवश्यक संख्या में पंचायत समिति सदस्य उपस्थित नहीं हुए। बैठक की अध्यक्षता बीडीओ सह कार्यपालक पदाधिकारी प्रिया कुमारी ने की। जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी संजीव कुमार भी इस दौरान मौजूद थे। पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, पंचायत समिति के कुल 28 निर्वाचित सदस्यों में से केवल 10 सदस्य ही बैठक में उपस्थित हुए। 18 सदस्य अनुपस्थित रहे। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 44(3) और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत, अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए कुल निर्वाचित सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है। आवश्यक संख्या पूरी न होने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी और वह स्वतः निष्प्रभावी हो गया। बीडीओ प्रिया कुमारी ने बताया कि निर्धारित समय के बाद भी आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव स्वतः गिर जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक की पूरी कार्यवाही अभिलेख में दर्ज कर ली गई है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह प्रखंड प्रभारी वरीय पदाधिकारी संजीव कुमार ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति न होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रमुख और उप-प्रमुख के समर्थकों द्वारा पटाखे छोड़े जाने की खबरें थीं। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस संबंध में किसी भी जानकारी से इनकार किया। उल्लेखनीय है कि पंचायत समिति के कुछ सदस्यों ने प्रमुख और उप-प्रमुख के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस पर विचार करने के लिए ही यह विशेष बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सदस्यों की आवश्यक संख्या में अनुपस्थिति के कारण यह मामला प्रारंभिक चरण में ही समाप्त हो गया।
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आरपीएससी में प्रो.संतोष आनंद और डॉ. दीपक शर्मा मेंबर नियुक्त: अध्यक्ष यूआर साहू रिटायर, केसरी सिंह को RPSC के कार्यवाहक चेयरमैन का जिम्मा – Jaipur News
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो मेंबर की नियुक्ति की गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ.दीपक कुमार शर्मा को RPSC सदस्य पद पर शुक्रवार देर रात नियुक्ति के आदेश जारी किए। दोनों सदस्यों का कार्यकाल पद संभालने से 6 साल की अवधि या
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RPSC अध्यक्ष यूआर साहू 19 जून को रिटायर हुए। नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीनियर मेंबर लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) केसरी सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। केसरी सिंह की कांग्रेस सरकार के वक्त 2023 में आरपीएससी मेंबर के पद पर नियुक्ति दी गई थी।
उत्कल रंजन साहू।
आरपीएससी अध्यक्ष यूआर साहू हुए रिटायर
राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का शुक्रवार को कार्यकाल पूरा हो गया। वहीं आयोग के एक अन्य सदस्य का भी कार्यकाल अगले महीने पूरा होगा। भाजपा सरकार ने 12 जून 2025 को उत्कल रंजन साहू को अध्यक्ष बनाया था।
24 सितंबर 2025 को अजमेर के प्रो. सुशील बिस्सू सहित तीन सदस्य नियुक्त किए थे। इनमें डॉ. अशोक कलवार और हेमंत प्रियदर्शी भी शामिल हैं। डॉ. कलवार का कार्यकाल 31 जुलाई को पूरा होगा।
कांकाणी की रोटी, रोहट की कचोरी और पाली का गुलाब हलवा, हर स्टॉप पर स्वाद का धमाका!
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Famous Foods Of Marwar: जोधपुर से पाली के बीच का यह सफर सिर्फ दूरी तय करने का नहीं, बल्कि स्वादों की एक पूरी यात्रा है. कांकाणी के देसी ढाबों की सादी लेकिन दिल जीत लेने वाली रोटी-चटनी से लेकर रोहट की मशहूर कचोरी की कुरकुरी परतों तक, हर पड़ाव अपने आप में एक कहानी कहता है. आगे बढ़ते ही बुलेट बाबा धाम की रबड़ी आस्था और स्वाद दोनों का अनोखा मेल पेश करती है, जबकि पाली पहुंचते ही गुलाब हलवे की मिठास इस पूरे सफर को यादगार बना देती है. यह रास्ता हर मुसाफिर के लिए सिर्फ हाईवे नहीं, बल्कि मारवाड़ी जायकों का खुला खजाना है.
जोधपुर से रवाना होकर जब आप पाली की तरफ बढ़ते हैं, तो सफर की पहली परफेक्ट चॉइस बनती है कांकाणी. यदि आप दोपहर या रात के भोजन के समय इस रूट से गुजर रहे हैं, तो कांकाणी में रुककर शुद्ध देसी मारवाड़ी खाने का लुत्फ जरूर उठाएं. यहां के ढाबों और होटलों पर मिलने वाली हाथ की सिकी गरमा-गरम बाजरे की रोटी, देसी घी, लहसुन की तीखी चटनी और कढ़ी-साग का स्वाद आपके सफर की थकान को पल भर में दूर कर देगा. हाईवे पर मारवाड़ी संस्कृति और देसी ठाठ का यह पहला और सबसे मजबूत पड़ाव है.

सफर में थोड़ा और आगे बढ़ने पर आता है ऐतिहासिक कस्बा रोहट, जो अपने खास नाश्ते के लिए पूरे हाईवे पर मशहूर है. अगर आप रोहट से गुजर रहे हैं और यहां की प्रसिद्ध मांगीलाल प्रजापत की कचोरी नहीं खाई, तो आपका सफर अधूरा ही माना जाएगा. कड़क और खस्ता मैदे के आवरण के अंदर मूंग दाल और सीक्रेट मसालों की स्टफिंग से तैयार यह कचोरी जब गरम-गरम कढ़ी या चटनी के साथ परोसी जाती है, तो कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता. शाम की चाय के साथ रोहट की कचोरी का कॉम्बिनेशन इस रूट के मुसाफिरों की पहली पसंद है.

बुलेट बाबा के नाम से प्रसिद्ध चोटिला का वह धाम जहां पर देश विदेश से पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते है. बुलेट बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लेने के साथ-साथ यहां की एक और चीज बेहद प्रसिद्ध है और वो है यहां मिलने वाली केसरिया मलाईदार रबड़ी. दूध को घंटों कढ़ाकर पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली यह गाढ़ी रबड़ी स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि दूर-दूर से लोग सिर्फ इसे खाने यहां आते हैं. आस्था के इस पावन स्थल पर प्रसाद के रूप में और सफर के स्वाद के रूप में यह रबड़ी हर दिल को जीत लेती है.
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सफर के आखिरी पड़ाव पर जैसे ही आप पाली शहर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो यहां आपका स्वागत मरुधरा की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई करती है, जिसे दुनिया ‘गुलाब हलवा’ के नाम से जानती है. मावे को एक विशेष तकनीक से भूनकर तैयार किया जाने वाला यह दानेदार गुलाब हलवा पाली की सबसे बड़ी पहचान है. शुद्ध दूध की मलाई और अपनी खास बनावट के कारण इसका स्वाद देश-विदेश तक मशहूर है. पाली पहुंचते ही इस फेमस गुलाब हलवे का स्वाद चखना और परिवार के लिए पैक करवाना कोई भी मुसाफिर नहीं भूलता.
80 बार रिजेक्ट हुई वो कालजयी गाना, समा गया दर्शकों के दिल में, मूवी ने रचा इतिहास
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कुछ फिल्में बस बन जाती है. चाहकर भी ऐसी फिल्में दोबारा नहीं बन सकतीं. इन फिल्मों के गाने-स्टोरी दिल में बस जाती है. जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, मूवी की यादें दिल में गहरी होती जाती हैं. इन फिल्मों के गाने भी दिल में बस जाते हैं. सुनते ही मन यादों में खो जाता है. 26 साल पहले ही ऐसी ही एक कल्ट मूवी आई थी जिसके 11 गाने थे. हर गाना दिल को छू लेने वाला था. डायरेक्टर ने संगीतकार को सिर्फ एक लाइन की स्टोरी सुनाई थी.
2000 का दशक यादगार फिल्मों के लिए जाना जाता है. लाइफ उतनी फास्ट नहीं थी. स्मार्ट फोन हाथ में नहीं आए थे. ऐसे दौर में रोमांटिक गानों को टीवी और रेडियो पर देख-सुनकर ही लोग मनोरंजन करते थे. इसी दौर में एक ऐसी म्यूजिकल रोमांटिक आई जिसके गाने आज भी दिल में बसे हुए हैं. इस फिल्म के गानों को सुनकर आज भी दिल को सुकून मिलता है. इस फिल्म के गाने की रिकॉर्डिंग के समय डायरेक्टर की आंखों में आंसू आ गए थे. हम 13 जुलाई 2001 को रिलीज ‘तुम बिन’ फिल्म की बात कर रहे हैं जिसकी गिनती आज कल्ट मूवी में होती है.

‘तुम बिन’ में संदली सिन्हा, प्रियांशु चटर्जी, हिमांशु मलिक और राकेश बापट लीड रोल में थे. छोटे से बजट की इस फिल्म ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई. दिल को छू लेने वाला म्यूजिक और नए एक्टर्स की जबरदस्त परफॉर्मेंस मिलकर जादू पैदा किया. 2001 में सनी देओल की ‘गदर’ और आमिर खान की ‘लगान’ की धूम के बीच बहुत ही खूबसूरत फिल्म ‘तुम बिन’ आई थी. टी-सीरीज के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन अनुभव सिन्हा ने किया था. बतौर डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की यह पहली फिल्म थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ बच्चन की ‘अक्स’ फिल्म के साथ ही ‘तुम बिन’ रिलीज हुई थी. ‘अक्स’ फ्लॉप हो गई थी जबकि ‘तुम बिन’ सरप्राइज हिट निकली.

‘तुम बिन’ फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले अनुभव सिन्हा ने ही लिखा था. फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसका म्यूजिक था. फिल्म में कुल 11 गाने थे. म्यूजिक निखिल-विनय, टीएस जरनैल और रवि पवार ने कंपोज किया था. मुख्य रूप से गाने संगीतकार निखिल-विनय के ही थे. निखिल-विनय का पूरा नाम निखिल कामत-विनय राम तिवारी है. दोनों ने 90 के दशक में कई फिल्मों में म्यूजिक दिया. ‘तुम बिन’ फिल्म के चार गाने ‘तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे’, ‘कोई फरियाद’, ‘छोटी-छोटी रातें’ और ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ सॉन्ग बहुत पॉप्युलर हुए. ये सभी गाने निखिल-विनय ने कंपोज किए. ‘कोई फरियाद’ गाना जगजीत सिंह ने गाया था. वहीं ‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना केएस चित्रा की आवाज में था. दोनों गानों की गिनती कल्ट सॉन्ग में होती है.
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अनुभव सिन्हा ने टी-सीरीज के लिए कई म्यूजिक वीडियो बनाए थे. कई टीवी सीरियल्स का डायरेक्शन किया था. वो भूषण कुमार से अक्सर फिल्म बनाने के लिए कहा करते थे. एक दिन भूषण कुमार के घर पर संगीतकार निखिल-विनय मौजूद थे. अनुभव सिन्हा भी आए हुए थे. भूषण कुमार ने सबके सामने अनाउंस किया वो ‘तुम बिन’ नाम से फिल्म बनान चाहते हैं. उस दिन अनुभव सिन्हा ने फिल्म की कहानी एक लाइन में सुनाई.

संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कहानी सीधे पर दिल पर लगी. अनुभव सिन्हा ने फिल्म भी वैसे ही बनाई. दो-तीन गाने जो हमारे बैंक में थे, वो हमने सुनाए. ये गाने थे : छोटी-छोटी रातें, लंबी हो जाती हैं’, तुम्हारे सिवा कुछ ना चाहत करेंगे. भूषण कुमार ने ये गाने अपने पास रखी डायरी में नोट कर लिए थे.’ दूसरे दिन टी-सीरीज के ऑफिस पर में फिल्म का विधिवत अनाउंसमेंट हुआ. अनुभव सिन्हा ने सबको डिटेल में कहानी सुनाई.

फिल्म के दो गाने ‘कोई फरियाद’ और ‘तुम बिन जिया जाए’ कैसे कालजयी सॉन्ग माने जाते हैं. इन गानों के बनने का किस्सा भी दिलचस्प है. संगीतकार निखिल कामत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कोई फरियाद गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान संदली सिन्हा समेत सभी एक्टर आते थे. संदली सिन्हा की आवाज सुनकर हम लोगों को ऐसा लगा कि यह वॉइस केएस चित्रा की आवाज है. चित्रा को साउथ की लता मंगेशकर कहा जाता है. हमने इमेजन किया कि संदली सिन्हा तन्हाई में है. वो अपने प्यार को याद कर रही है. एक और गाना ‘तुम बिन जिया जाए’ बनाया.’

‘तुम बिन जिया जाए कैसे’ गाना तीन दिन में रिकॉर्ड हुआ था. निखिल-विनय और डायरेक्टर अनुभव सिन्हा फ्लाइट से मद्रास पहुंचे थे. एवीएमजी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग हुई थी. केएस चित्रा ने फोन पर गाना सुना था. 15 मिनट रिहर्सल किया. फिर दो घंटे का ब्रेक लिया. गाना तीन टेक में रिकॉर्ड किया था. गाना कितना पॉप्युलर हुआ, पूरी दुनिया जानती है. डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैंने गीतकार फैज अनवर को सिचुएशन बता दी थी. फिर कहा कि गजल लिखो. फोन पर वो मुझे शेर सुनाते थे. मैं रिजेक्ट कर देता था. महीनों यह सिलसिला चलता रहा. मुझे वो लम्हा याद है. मैं कहीं शूटिंग में गया था. मेरा फोन बजा. उन्होंने शेर सुनाया. एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफर, जिंदगी तेज बहुत तेज चली हो जैसे. मैंने कहा डन. बोले कसम खुदा की. 80वां शेर सुनाया है. फिर गजल लिखी गई.’

महज पौने 3 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 7.53 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी. ‘तुम बिन’ रिलीज होते ही संदली सिन्हा रातों-रात स्टार बन गईं. प्यारी सी मुस्कान और मासूम चेहरे पर दर्शक फिदा हो गए. हालांकि बॉलीवुड में उन्हें बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं मिली. 2005 में उन्होंने बिजनेसमैन किरण सालस्कर से शादी कर ली.
स्पेशल कुल्हड़ लस्सी, विरासत को चमका रहे हैं दो भाई, मेवा-रबड़ी से भरपूर
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Agra Mashoor Lassi: उत्तर प्रदेश का आगरा शहर सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब और अनूठे जायके के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है. गर्मियों के इस सीजन में आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित 30 साल पुरानी ‘दीपू की लस्सी दुकान’ लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है. दादा और पिता की विरासत को संभाल रहे दो भाई आज भी 30 साल पुराने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के साथ ग्राहकों को लस्सी परोस रहे हैं. यहाँ मात्र 50 रुपये में मिलने वाली स्पेशल रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स से भरपूर कुल्हड़ वाली लस्सी का क्रेज ऐसा है कि लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं.
Lassi News: उत्तर प्रदेश के आगरा शहर को सिर्फ मोहब्बत की निशानी ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि सुबह, दोपहर और शाम के नाश्ते का स्वाद और वैरायटी बिल्कुल अलग-अलग होती है. यही वजह है कि देश-विदेश से आगरा घूमने आने वाले पर्यटक यहां के स्थानीय खान-पान का लुत्फ उठाना कभी नहीं भूलते. इन दिनों गर्मियों के सीजन में आगरा की ‘स्पेशल कुल्हड़ वाली लस्सी’ की डिमांड सातवें आसमान पर है. वैसे तो लस्सी आपको आगरा के हर नुक्कड़ पर मिल जाएगी, लेकिन शहर में एक ऐसी प्राचीन दुकान है जो पिछले तीन दशकों से स्वाद का सम्राज्य चला रही है. इसे आगरा की सबसे भरोसेमंद और पुरानी लस्सी दुकानों में से एक माना जाता है.
आगरा के बोदला चौराहे पर स्थित इस मशहूर दुकान के वर्तमान संचालक दीपू ने बताया कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से इसी एक स्थान पर लगातार लस्सी बेच रहे हैं. यह उनके लिए सिर्फ एक व्यापार नहीं बल्कि पारिवारिक विरासत है. शुरुआत में उनके दादा और पिता दोनों मिलकर इस दुकान को चलाते थे. उनके जाने के बाद अब दीपू और उनके भाई ने इस पुश्तैनी दुकान की कमान पूरी निष्ठा के साथ संभाली हुई है.
संचालक दीपू का क्या कहना है-
‘हमारे पास दूर-दराज के इलाकों और दूसरे शहरों से लोग लस्सी पीने आते हैं. इसकी एकमात्र खास वजह यह है कि हम क्वालिटी और शुद्धता से कभी कोई समझौता नहीं करते. जैसा शुद्ध स्वाद हमारे दादाजी के जमाने में 30 साल पहले मिलता था, वही शुद्धता और गाढ़ापन हम आज भी बरकरार रखे हुए हैं. हम लस्सी बनाने के लिए केवल पूरी तरह शुद्ध और एकदम ताज़ा दही का ही इस्तेमाल करते हैं.’
₹50 के गिलास में मिलता है भरपूर माल
दुकानदार दीपू ने अपनी दुकान के सफर को याद करते हुए बताया कि जब उनके दादाजी ने यह कार्य शुरू किया था, तब महकती हुई कुल्हड़ लस्सी महज 2 से 3 रुपये के मामूली दाम में मिला करती थी. धीरे-धीरे समय बदला और महंगाई के साथ आज इसकी कीमत 40 और 50 रुपये हो गई है. यहाँ बिना रबड़ी वाली सादा लस्सी की रेट ₹40 है, जबकि ग्राहकों की पहली पसंद ‘स्पेशल रबड़ी वाली लस्सी’ की कीमत मात्र ₹50 है.
क्या है ₹50 वाली स्पेशल लस्सी का गणित?
दीपू का दावा है कि उनकी एक गिलास स्पेशल लस्सी पीने के बाद इंसान पूरे दिन सूरज की तपती धूप में भी पूरी तरह एनर्जेटिक रहेगा और उसे कमजोरी या थकान का अहसास तक नहीं होगा. इस स्पेशल लस्सी को बेहद अनोखे अंदाज में तैयार किया जाता है-
सबसे पहले शुद्ध ताज़ा दही को मथा जाता है. लस्सी के ऊपर दही की मोटी मलाई और लच्छेदार गाढ़ी रबड़ी डाली जाती है, जो इसका स्वाद दोगुना कर देती है. इसके बाद इसमें प्रचुर मात्रा में काजू, बादाम, पिस्ता, किशमिश और चिरौंजी जैसे बेहतरीन ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं. स्वाद और रंगत को बढ़ाने के लिए ऊपर से लाल चेरी और खुशबूदार रूहअफजा का सिरप डाला जाता है. यहां का स्वाद चखने के बाद ग्राहक इतने खुश होते हैं कि वे न सिर्फ खुद पीते हैं बल्कि अपने परिवार के लिए भी पैक करवा कर ले जाते हैं.
शुगर मरीजों का भी खास ख्याल
आमतौर पर लोग लस्सी को सिर्फ गर्मियों का ड्रिंक मानते हैं, लेकिन बोदला चौराहे की यह 30 साल पुरानी दुकान साल के पूरे 12 महीने ग्राहकों के लिए खुली रहती है. दीपू ने बताया कि उनके कई ऐसे पक्के और शौकीन ग्राहक हैं जो कड़कड़ाती सर्दियों में भी लस्सी पीने के लिए विशेष रूप से आते हैं. हालांकि ठंड के दिनों में सीजन की तुलना में काम थोड़ा हल्का जरूर होता है, लेकिन दुकान कभी बंद नहीं होती.
इस दुकान की लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां हर वर्ग के ग्राहक का ख्याल रखा जाता है. दीपू ने बताया कि आजकल कई लोग डायबिटीज (शुगर) की बीमारी से पीड़ित हैं. ऐसे ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखते हुए वे उन्हें सामान्य चीनी वाली लस्सी नहीं देते, बल्कि उनके लिए बिना चीनी वाली स्पेशल ‘शुगर-फ्री लस्सी’ (Sugar-Free Lassi) तैयार करते हैं. इस खास ख्याल और बेमिसाल स्वाद की वजह से ही पिछले 30 वर्षों से दीपू की लस्सी का जादू पूरे आगरा और आसपास के क्षेत्रों में सिर चढ़कर बोल रहा है.
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें
NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर तैयारी पूरी, जानें NTA ने क्या-क्या किए हैं इंतजाम
नई दिल्ली: पिछले महीने हुई NEET (UG) 2026 की परीक्षा कैंसिल होने के बाद अब री-एग्जाम को लेकर एनटीए पूरी तैयारी में है। इस बार परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 21 जून 2026 को होने वाली NEET (UG) 2026 की दोबारा परीक्षा को सुचारू और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने के लिए कई उपाय किए हैं। इसके अलावा देशभर में आज परीक्षा को लेकर मॉक ड्रिल भी की जाएगी। एनटीए ने बताया कि कैंडिडेट, NEET (UG)-2026 री-एग्जाम से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-40759000/011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा neetug2026@nta.ac.in पर ईमेल भी कर सकते हैं।
एनटीए ने क्या-क्या किए उपाय
- शहर-स्तर के कामकाज की देखरेख के लिए 674 सिटी कोऑर्डिनेटर तैनात होंगे
- परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र निगरानी के लिए 6,669 ऑब्जर्वर तैनात होंगे
- हर परीक्षा केंद्र पर सेंटर सुपरिटेंडेंट और इनविजिलेटर तैनात होंगे
- जिला प्रशासन, पुलिस बल और एस्कॉर्ट टीमें, खासकर गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रूप से लाने-ले जाने के लिए तैनात रहेंगी
- NTA ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था लागू की है
- सीलबंद प्रोटोकॉल के तहत तय जगहों तक गोपनीय सामग्री को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पहुंचाना होगा
- परीक्षा सामग्री लाने-ले जाने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट के साथ GPS-इनेबल्ड गाड़ियां होंगी
- सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी होगी, जिसके फीड सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे
- अंदर जाने से पहले हाई-सेंसिटिविटी मेटल डिटेक्टर से अनिवार्य जांच होगी
- हर केंद्र पर ज़्यादा मैनपावर और बेहतर उपकरण होंगे
- किसी और के परीक्षा देने को रोकने के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन होगा
- सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल सिस्टम के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी
छात्रों को सतर्क रहने की सलाह
एनटीए ने इससे पहले एक एडवाइजरी जारी कर छात्रों को सतर्क रहने की सलाह दी। जारी एडवाइजरी में कहा गया, “एनटीए कभी भी कोई पेमेंट नहीं मांगेगा, एग्जाम पेपर, आंसर की, या ‘लीक’ हुआ मटीरियल नहीं भेजेगा, या किसी लिंक के जरिए आपका एडमिट कार्ड शेयर नहीं करेगा। अगर आपको ऐसा कोई मैसेज मिले, तो क्लिक न करें। इसकी रिपोर्ट करें।” इसके अलावा, एनटीए ने बताया कि वह अब री-एग्जामिनेशन के लिए कैंडिडेट्स को सीधे व्हाट्सएप के जरिए एग्जाम अपडेट और सेंटर की जानकारी भेजेगा। कैंडिडेट्स को यह देखना चाहिए कि उन्हें मैसेज भेजने वाले के आगे ब्लू वेरिफाइड टिक और ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ का नाम दिखे। एडवाइजरी में कहा गया है कि बिना ब्लू टिक वाले अकाउंट से कोई भी मैसेज एनटीए का नहीं है, भले ही उसमें उनका नाम इस्तेमाल किया गया हो।
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डाकिये की डाक चोरी करने वाला चोर गिरफ्तार: खुर्जा पुलिस ने 32 रजिस्टर्ड डाक सहित दस्तावेज बरामद किए – Bulandshahar News
बुलंदशहर में खुर्जा नगर पुलिस ने एक चोर को गिरफ्तार किया है, जिसने डाकिया की डाक चोरी की थी। आरोपी के कब्जे से 32 रजिस्टर्ड डाक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। यह गिरफ्तारी 18 जून 2026 की रात को हुई। यह मामला 16 जून 2026 का है, जब मुख्य डाकघर खुर्जा नगर के अर्जुन कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि डाक बांटने गए डाकिया हरकेश की साइकिल और डाक जटिया अस्पताल के सामने से एक अज्ञात चोर ने चुरा ली थी। इस संबंध में थाना खुर्जा नगर में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए 18 जून 2026 की रात को किला मेवई मोड़ नाले के पास से आरोपी रवि कुमार को गिरफ्तार किया। उसके पास से चोरी की गई डाक भी बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रवि कुमार पुत्र देवेंद्र सिंह, निवासी ग्राम सैमडा, थाना खुर्जा देहात, जनपद बुलंदशहर के रूप में हुई है। बरामदगी में कुल 32 रजिस्टर्ड डाक, एसबीएफसी का फटा हुआ पजेशन नोटिस और 04 डिलीवरी मेनिफेस्ट शामिल हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं: इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। ट्रम्प ने इतालवी टीवी चैनल La7 से बातचीत में कहा, “वह मेरे साथ फोटो चाहती थीं। मैं ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे उन पर तरस आ गया।” इस पर मेलोनी ने कहा, मैं हैरान हूं। समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं। एक बात उन्हें याद रखनी चाहिए- न मैं और न ही इटली कभी किसी के सामने गिड़गिड़ाते हैं। विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने अगले हफ्ते का अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प का बयान सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि पूरे इटली का अपमान हैं। G7 में साथ दिखे थे ट्रम्प और मेलोनी हालिया G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रम्प और मेलोनी के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत दिखे थे। फ्रांस में हुई बैठक के दौरान दोनों नेताओं को कई मौकों पर साथ देखा गया। दोनों एक सोफे पर बैठकर लंबी बातचीत करते नजर आए और उनकी तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। उस समय माना जा रहा था कि इस साल की शुरुआत में पैदा हुए मतभेदों के बाद दोनों नेताओं के संबंध फिर सामान्य हो रहे हैं। लेकिन ट्रम्प के ताजा बयान के बाद दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ गया है। मेलोनी की पार्टी ने भी ट्रम्प की आलोचना की मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के सीनेट नेता लूचियो मलान ने कहा कि ट्रम्प पहले भी कई यूरोपीय नेताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर चुके हैं और इससे सबसे ज्यादा नुकसान उनकी अपनी छवि को हो रहा है। उन्होंने कहा कि G7 सम्मेलन के वीडियो ट्रम्प के दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं। उनके मुताबिक ट्रम्प को शायद यह बात परेशान करती है कि जरूरत पड़ने पर मेलोनी अमेरिका को “ना” कहने से नहीं हिचकतीं। राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला ने तुरंत मेलोनी को फोन कर समर्थन जताया। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद फिलिपो सेंसी ने कहा कि किसी को भी इतालवी प्रधानमंत्री से इस तरह अहंकारी लहजे में बात करने का अधिकार नहीं है। इटली की सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी लीग पार्टी के नेता माटेओ साल्विनी ने मेलोनी के समर्थन में उतरते हुए कहा, “जॉर्जिया मेलोनी पर हमला पूरे इटली पर हमला है।” G7 के दौरान ट्रम्प और मेलोनी की बातचीत का वीडियो… ट्रम्प पर यूरोप-अमेरिका रिश्ते बिगाड़ने का आरोप मेलोनी के करीबी सहयोगी और प्रधानमंत्री कार्यालय के अंडरसेक्रेटरी जियोवानबातिस्ता फज्जोलारी ने कहा कि ट्रम्प जानबूझकर या अनजाने में अमेरिका और यूरोप के ऐतिहासिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के ऐसे बयानों ने पूरे यूरोप में अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान खुद अमेरिका को होगा। ट्रम्प की समर्थक रही हैं मेलोनी BBC के मुताबिक ट्रम्प और मेलोनी के रिश्ते पहले काफी करीबी माने जाते थे। 2025 में ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली वह एकमात्र यूरोपीय नेता थीं। उन्हें यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच ब्रिज के तौर पर भी देखा जाता था। हालांकि, अप्रैल में ईरान युद्ध के दौरान दोनों नेताओं के रिश्तों में खटास आ गई थी। पोप लियो 14वें की शांति अपील पर ट्रम्प ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिसका मेलोनी ने विरोध किया था। इसके बाद ट्रम्प ने कहा था कि उन्हें लगा था कि मेलोनी में साहस है, लेकिन वह गलत थे। मोदी और मेलोनी की दोस्ती भी चर्चा में इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के करीबी संबंध भी चर्चा में हैं। दोनों नेता हाल के G7 सम्मेलन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साथ नजर आए हैं। सोशल मीडिया पर उनकी दोस्ती को #Melodi नाम से भी लोकप्रियता मिली है। फ्रांस के एवियां में आयोजित 2026 G7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने मजाक में नरेंद्र मोदी से कहा था कि दोनों इंस्टाग्राम के सबसे चर्चित जोड़े हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की रोम यात्रा के दौरान उन्होंने मेलोनी को भारत की मशहूर मेलोडी टॉफियां भी गिफ्ट की थीं। इस बातचीत से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और इसे 10 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। मेलोनी ने सार्वजनिक तौर पर नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताया है। ————————– मेलोनी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मेलोनी बोलीं- 1 महीने से सिगरेट नहीं पी:नींद भगाने के लिए कॉफी पीती हूं; G7 समिट में माइक पर रिकॉर्ड हुई बातचीत फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं की अनौपचारिक बातचीत माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो गई। इन नेताओं को सिगरेट, फुटबॉल, तोहफों जैसी बातों पर हल्के-फुल्के मजाक करते हुए सुना गया। इन सबमें से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सिगरेट छोड़ देने वाली बातचीत की खूब चर्चा रही। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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शेखपुरा में तेज हवा के साथ बारिश,ढाई डिग्री गिरा टेंपरेचर: अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज,घंटों बिजली आपूर्ति बाधित – Sheikhpura News
शेखपुरा में पिछले एक सप्ताह की भीषण गर्मी के बाद शुक्रवार शाम को हुई झमाझम बारिश से मौसम सुहावना हो गया। इस बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। जिले का अधिकतम तापमान ढाई डिग्री सेल्सियस गिरकर 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में मध्यम दर्जे की बारिश रिकॉर्ड की गई। तेज हवा और गरज-चमक के साथ हुई बारिश के कारण कुछ समय के लिए जनजीवन प्रभावित हुआ। तेज हवा के साथ हुई बारिश से जिले के कई क्षेत्रों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस बारिश से खेती-किसानी से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है, जो मानसून का इंतजार कर रहे थे। बारिश के अभाव में रुके हुए धान के बिचड़े डालने और अरहर व मक्का जैसी शारदीय फसलों की बुवाई के कार्य अब शुरू होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आने वाले दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता और बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। विभाग ने बारिश के दौरान वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे न रहने की सलाह दी है।
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