Sunday, May 24, 2026
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कांग्रेस नेता ने ऐसा क्‍या कहा, बीजेपी ने नाप द‍िया सोन‍िया गांधी का बंगला


Sonia Gandhi House is Bigger than PM Modi Residence: दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित आलीशान सरकारी बंगलों को लेकर सियासत का गरमाया हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के विस्तार पर रविवार को कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सवाल खड़े किए. हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जैसे ही उनके सवाल पर पलटवार किया, कांग्रेस खुद के सवालों में उलझ कर रह गई. भाजपा ने एक आरटीआई के हवाला दे कर डेटा वॉर छेड़ दिया है. इस डेटा से निशाने पर आ गया 10, जनपथ पर स्थित सोनिया गांधी का बंगला. भाजपा ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि सोनिया गांधी का बंगला क्षेत्रफल के मामले में देश के प्रधानमंत्री के घर से काफी बड़ा है.

बीजेपी ने आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी का बंगला देश के प्रधानमंत्री के रहने की जगह से बड़ा है. आखिर, क्या है पूरा माजरा? क्या सच में कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी के बंगले का क्षेत्रफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास से ज्यादा है? अगर, ज्यादा है तो कितना? क्या है भाजपा के दावे का सच?

पीएम मोदी का अवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है.

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत से विवाद की शुरुआत

इस पूरे विवाद को हवा दी कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत के एक बयान ने. राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब के हिस्से को खाली कराने के मुद्दे पर सरकार को घेरा. सुरेंद्र राजपूत ने सवालिया लहजे में कहा, ‘प्रधानमंत्री को रहने के लिए आखिर कितनी जगह चाहिए? बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा.’ उन्होंने आगे कहा कि ‘प्रधानमंत्री का निवास पहले से ही इतने बड़े परिसर में स्थित है. अब, आप जिमखाना क्लब का हवाला देकर उसे भी खाली कराना चाहते हैं.’ राजपूत का सीधा इशारा लुटियंस दिल्ली में पीएम आवास परिसर के कथित विस्तार और उसके लिए आसपास की प्रतिष्ठित जगहों के इस्तेमाल की ओर था.

सोनिया गांधी का आवास पीएम मोदी के आवास से आकार में बड़ा है.

अमित मालवीय ने ‘नाप’ दिया बंगला

कांग्रेस के इस हमले पर बीजेपी ने ज्यादा देर नहीं लगाई. मोर्चा संभाला बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने. मालवीय ने सीधे तौर पर आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय, सीधे तौर पर क्षेत्रफल का डेटा सामने रख दिया. भाजपा के निशाने आया सोनिया गांधी गांधी का 10, जनपथ का बांगला. अमित मालवीय ने सुरेंद्र राजपूत के बयान का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘शायद सोनिया गांधी ने सुरेंद्र राजपूत को एक नोट भेजा है. सोनिया गांधी, जो 10 जनपथ में रहती हैं, वह 15,181 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. यह 7 लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) से बड़ा है, जो 14,101 वर्ग मीटर में है.’

प्रधानमंत्री आवास परिसर में पूजा करते पीएम मोदी.

आपको पता है 10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग की लंबाई-चौड़ाई?

अब आते हैं उस सवाल पर, जिसे अब देश की जनता जानना चाहती है. क्या वाकई सोनिया गांधी का घर पीएम मोदी के घर से बड़ा है? सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आई जानकारी के आधार पर अमित मालवीय का दावा सही प्रतीत हो रहा है.

समझते हैं पूरा गणित

सोनिया गांधी का आवास (10, जनपथ): सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लुटियंस दिल्ली स्थित यह बंगला लगभग 15,181 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. सोनिया गांधी दशकों से इसी पते पर रह रही हैं. वहीं, प्रधानमंत्री का आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास है. इसे पहले 7 रेसकोर्स रोड कहा जाता था, क्षेत्रफल के मामले में 10 जनपथ से छोटा है. इसका क्षेत्रफल लगभग 14,101 वर्ग मीटर है. दोनों की क्षेत्रफल की तुलना की जाए जिसे ‘आधिकारिक निवास’ के रूप में चिन्हित किया गया है, तो सोनिया गांधी का 10, जनपथ बंगला पीएम मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित निवास से बड़ा है.

‘परिसर’ बनाम ‘आवास’

लेकिन, इस आंकड़ों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू भी है. जहां एक ओर प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में छोटा हो सकता है, वहीं प्रधानमंत्री निवास परिसर एक विशाल क्षेत्र है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 7, लोक कल्याण मार्ग केवल एक बंगला नहीं है, बल्कि यह 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) के विशाल परिसर में फैला हुआ है. लेकिन, आधिकारिक आवास को निवास परिसर मत जोड़ दीजिएगा. प्रधानमंत्री निवास परिसर में तमाम तरह के सरकारी दफ्तर हैं.

प्रधानमंत्री निवास परिसर में क्या-क्या है?

प्रधानमंत्री के रहने की जगह के अलावा, इस 12 एकड़ के परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण चीजें शामिल हैं:

  1. प्रधानमंत्री का कार्यालय (Office).
  2. सुरक्षा व्यवस्था के लिए विस्तृत बुनियादी ढांचा (SPG के लिए जगह).
  3. अतिथियों के लिए अलग बंगले.
  4. हेलीपैड और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं.

सवाल उठा कर कांग्रेस खुद फंस गई

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इसी 12 एकड़ के ‘विशाल परिसर’ और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत हो रहे नए निर्माणों की ओर इशारा किया था. वहीं, अमित मालवीय ने तुलना के लिए केवल उस विशिष्ट बंगले के क्षेत्रफल को चुना जहां पीएम रहते हैं. जब कांग्रेस पीएम के ‘विशाल परिसर’ पर सवाल उठाती है, तो वह जनता के पैसे और फिजूलखर्ची का मुद्दा बनाने की कोशिश करती है. इसके विपरीत, जब बीजेपी सोनिया गांधी के 10 जनपथ के 15,181 वर्ग मीटर का नाप बताती है, तो वह कांग्रेस पर हिपोक्रेसी का आरोप लगाती है.

किस कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री आवास के क्षेत्रफल पर सवाल उठाए थे?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास के विशाल परिसर और कथित तौर पर जिमखाना क्लब को खाली कराने के मुद्दे पर सवाल उठाए थे.

अमित मालवीय ने आवास के क्षेत्रफल के बारे में क्या दावा किया?
अमित मालवीय ने दावा किया कि सोनिया गांधी का 10 जनपथ आवास 15,181 वर्ग मीटर में है, जो प्रधानमंत्री मोदी के 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास (14,101 वर्ग मीटर) से क्षेत्रफल में बड़ा है.

आरटीआई (RTI) के आंकड़ों के अनुसार, किसका आधिकारिक आवास क्षेत्रफल में बड़ा है?
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी का 10, जनपथ आवास क्षेत्रफल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास से बड़ा है.

प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर (Complex) कुल कितने क्षेत्र में फैला है?
मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे टाइम्स ऑफ इंडिया) के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास का संपूर्ण परिसर लगभग 12 एकड़ (लगभग 48,562 वर्ग मीटर) में फैला है, जिसमें कार्यालय, सुरक्षा बुनियादी ढांचा और अतिथि बंगले शामिल हैं.

10 जनपथ और 7 लोक कल्याण मार्ग के क्षेत्रफल में तकनीकी अंतर क्या है?
10, जनपथ और 7 LKM की तुलना उनके Designated आधिकारिक निवास स्थान के क्षेत्रफल (वर्ग मीटर) के आधार पर की गई है. हालांकि, पीएम जिस संपूर्ण परिसर का उपयोग करते हैं वह सेंट्रल विस्टा की योजनाओं के कारण बहुत विशाल है.



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2 आवाजें, 1 गाना, 19 साल पहले आई वो फिल्म, आशिकों में जगाई पहली मुहब्बत


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‘मेरा दिल भी कितना पागल है, जो प्यार ये तुमसे करता है’, ‘पहली पहली बार मुहब्बत की है, कुछ ना समझ में आए मैं क्या करूं’ और ‘तुझे ना देखूं तो चैन मुझे आता नहीं है’ जैसे गाने आज भी आशिकों की पहली पसंद है. दिल की बात को होठों तक लाते हैं. प्यार के इजहार का जरिया बनते हैं. 90 के दशक में ऐसे ही रोमांटिक गाने फिल्मों को पहचान देते थे. आशिकों के दिल में उतर जाते थे. 19 साल पहले ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसका एक गाना दो सिंगर ने गाया था. इस फिल्म में जूही चावला सिर्फ एक सीन में सलमान खान के साथ नजर आई थीं. यह मूवी संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की आखिरी फिल्म थी.

‘ओ मम्मी मम्मी, ओ डैडी, ओ मम्मी-डैडी, हो जाओ रेडी, जिसमे मेरी शादी होगी, आज मैंने वो लड़की ढूंढ ली है’ गाना भूले-बिसरे गीत में शामिल है. उदित नारायण की खनकती में यह गाना आज भी जब सुनने को मिल जाता है तो 90 की यादों को ताजा कर देता है. इस गाने में गोविंदा ने जबर्दस्त डांस किया था. फिल्म का एक और गाना ‘तेरे बिना दिल लगता नहीं’ उदित नारायण, विनोद राठौर और अलका याज्ञनिक ने गाया था. यह गाना फिल्म के बिल्कुल लास्ट में था. यानी एक ही गाना 3 आवाजों में था.  गाना 23 सितंबर 1997 को रिलीज हुई फिल्म ‘दीवाना मस्ताना’ का है जिसे डेविड धवन ने डायरेक्ट किया था. इसी फिल्म के लास्ट सीन जूही चावला-सलमान खान ने सिर्फ एक सीन साथ में किया था. फिल्म मैसिव हिट रही. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट…………

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‘दीवाना मस्ताना’ एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म थी जिसमें गोविंदा-अनिल कपूर और जूही चावाला लीड रोल में थे. जॉनी लीवर, अनुपम खेर, रीमा लागू, शक्ति कपूर, सईद जाफरी और कादर खान अहम भूमिकाओं में थे. सलमान खान का स्पेशल अपीयरेंस था. इस फिल्म के बा गोविंदा-जूही चावला ने आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया में काम किया. फिल्म में जूही चावला को पाने के लिए गोविंदा-अनिल कपूर के बीच एक रेस लगी होती है.

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फिल्म की कहानी अनीस बज्मी-प्रयागराज ने लिखी थी. फिल्म केतन देसाई प्रोड्यूसर थे जिनके पिता मनमोहन देसाई 70-80 के दशक के जाने-माने निर्माता निर्देशक थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म में कुल 6 गाने थे. इसमें ‘ओ मम्मी मम्मी, ओ डैडी डैडी’ सबसे ज्यादा पॉप्युलर हुआ था.

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‘दीवाना-मस्ताना’ एक डिले फिल्म थी. फिल्म का मुहुर्त क्लैप 1994 में अमिताभ बच्चन ने दिया था. पहले यह फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ नाम से बननी थी. अनिल कपूर, सनी देओल और जेबा बख्तियार लीड रोल में थे. जेबा को वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण भारत छोड़ना पड़ा. ऐसे में स्क्रिप्ट बदलकर कॉमेडी कर दी गई. ऐसे में सनी देओल ने भी फिल्म छोड़ दी. फिर शाहरुख खान को फिल्म ऑफर की गई. नाम बदलकर ‘डम डम डिगा डिगा’ कर दिया गया. शाहरुख खान ने भी व्यस्तता के चलते फिल्म छोड़ दी. ऐसे में डेविड धवन ने गोविंदा को साइन किया. फिल्म आखिरकार 1997 में रिलीज हुई. गोविंदा-अनिल कपूर के लुक में भी बदलाव देखने को साफ तौर पर मिलता है.

यह लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जोड़ी की अंतिम मूवी मानी जाती है. इस मूवी के बाद लक्ष्मीकांत का निधन हो गया था और 35 साल से बॉलीवुड में राज कर रही यह संगीतकार जोड़ी टूट गई. 2024 में भारत सरकार ने प्यारेलाल जी को पद्मभूषण अवॉर्ड से नवाजा था.

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सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी (1997) के साथ रिलीज की गई थी. यानी दीवाना मस्ताना और मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी एक ही दिन रिलीज हुई थीं. दोनों फिल्मों का डायरेक्शन डेविड धवन ने किया था. यह दूसरा मौका था जब डेविड धवन की दो फिल्में एकसाथ एक ही दिन रिलीज हुईं. इससे पहले 29 दिसंबर 1989 को उनकी दो फिल्में ‘जुर्रत’ और ‘आग का गोला’ सेम डे रिलीज हुई थीं.

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‘दीवाना मस्ताना’ से पहले गोविंदा-अनिल कपूर ने 1990 में महेश भट्ट की फिल्म’आवारगी’ में एकसाथ काम किया था. दीवाना मस्ताना के बाद दोनों ने फिर कभी साथ में काम नहीं किया. फिल्म के टाइटल को लेकर भी खासा डेविड धवन को बहुत परेशानियों से गुजरना पड़ा था. दरअसल, यह टाइटल शबनम कपूर के पास था. डेविड धवन-गोविंदा ने उन्हें खूब मनाया तब जाकर उन्होंने यह टाइटल दिया था. फिल्म मनमोहन देसाई को डेडिकेट की गई थी. जॉनी लीवर को बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. फिल्म का 2012 में तेलुगू में रीमेक भी बनाया गया.

फिल्म में सतीश कौशिक ने पप्पू पेजर का यादगार रोल निभाया था. मजेदार बात यह भी है कि 1997 में ही गोविंदा-डेविड धवन ने ‘हीरो नंबर वन’ फिल्म में काम किया था. ‘दीवाना-मस्तना’ का बजट 7 करोड़ रुपये के करीब था. फिल्म ने 24 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म मैसिव हिट रही थी. पैसे कमाने के मामले में ‘दीवाना-मस्ताना’ 10वें नंबर पर रही थी. पहले नंबर पर इस साल ‘बॉर्डर’ मूवी रही थी.

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गोल्ड में करना चाहते हैं निवेश? जानिए Gold ETF, EGR और डिजिटल गोल्ड का फर्क


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Gold ETF vs EGR vs Digital Gold: आजकल सोना केवल गहनों तक सीमित नहीं रह गया है. आज के समय में आपके पास 3 अहम ऑप्शन हैं- गोल्ड ETF, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स और डिजिटल गोल्ड. आइए समझते हैं कि आपके लिए इनमें से कौन सा ऑप्शन सबसे बेस्ट है?

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Gold ETF, EGR और Digital Gold में से कौन बनाएगा आपको अमीर! (फोटो- एआई)

Gold ETF vs EGR vs Digital Gold: हर महीने की सैलरी से थोड़ा-थोड़ा पैसा सोने में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन समझ नहीं आ रहा कि Gold ETF, EGR और Digital Gold में कौन बेहतर है? आजकल बिना ज्वेलरी खरीदे भी डिजिटल तरीके से गोल्ड में निवेश करना बेहद आसान हो गया है. कोई 10 रुपये से शुरुआत कर रहा है, तो कोई SIP की तरह Gold ETF खरीद रहा है. लेकिन हर ऑप्शन के अपने फायदे-नुकसान हैं. ऐसे में निवेश से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि आपकी कमाई और जरूरत के हिसाब से सबसे स्मार्ट ऑप्शन कौन सा है?

गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF)
गोल्ड ईटीएफ एक ऐसा फंड है जो सोने की कीमत को ट्रैक करता है। यह शेयर बाजार में शेयरों की तरह खरीदा और बेचा जाता है. इसमें चोरी होने, लॉकर का किराया देने या प्योरिटी की कोई टेंशन नहीं होती. नौकरीपेशा लोग हर महीने एक छोटी रकम के जरिए इसमें SIP भी कर सकते हैं. यह पूरी तरह सेबी की ओर से रेगुलेटेड होता है.

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs)
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) शेयर बाजार पर ट्रेड होने वाला निवेश ऑप्शन है. इसमें असली सोना सेबी-अप्रूव्ड वॉल्ट में रखा जाता है. इसमें आप सोने को डिजिटल रसीद के रूप में खरीदते हैं. इसकी शुरुआत मात्र 100 मिलीग्राम से हो सकती है. सबसे खास बात यह है कि आप जब चाहें इस डिजिटल रसीद को असली फिजिकल सोने (सिक्के या बार) में बदल सकते हैं. पूरे देश में इसकी कीमत एक समान रहती है.

डिजिटल गोल्ड (Digital Gold)
अगर आप बिना किसी डीमैट अकाउंट के बेहद आसान तरीके से सोना खरीदना चाहते हैं, तो डिजिटल गोल्ड आपके लिए है. आप Paytm या PhonePe जैसे ऐप्स के जरिए घर बैठे 24 कैरेट प्योर सोना खरीद सकते हैं. इसमें आप मात्र 10 रुपये जैसी बेहद छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं. यह उनके लिए बेस्ट है जो बहुत कम पैसों से निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि यह सेबी या आरबीआई की ओर से रेगुलेटेड नहीं होता है.

नौकरीपेशा लोगों के लिए कौन सा ऑप्शन है बेहतर?
अगर आप हर महीने रेगुलर निवेश करना चाहते हैं और सुरक्षित, पारदर्शी तथा कम झंझट वाला ऑप्शन चाहते हैं, तो Gold ETF सबसे बेहतर माना जा सकता है. अगर भविष्य में फिजिकल गोल्ड लेने की योजना है, तो EGR उपयोगी हो सकता है. वहीं छोटे निवेश और सुविधा के लिए Digital Gold अच्छा विकल्प है, लेकिन इसमें रेगुलेशन की कमी और अतिरिक्त चार्ज का ध्यान रखना जरूरी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय के निवेश के लिए Gold ETF फिलहाल सबसे बेहतर ऑप्शन है.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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जोधपुर में 19 केंद्रों पर हुई सिविल सेवा प्री परीक्षा: कैंडिडेट्स ने पेपर को बताया कठिन, कटऑफ कम होने की जताई उम्मीद; 4529 अभ्यर्थी थे रजिस्टर्ड – Jodhpur News




संघ लोक सेवा आयोग की तरफ से सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 रविवार को शहर के 19 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई। जोधपुर में इस परीक्षा में 4529 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। पहली पारी सुबह 9:30 बजे से आयोजित की गई, जबकि दूसरी पारी दोपहर 2:30 बजे से 4.30 तक हुई होगी। परीक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम किए गए। जोधपुर सहित आसपास के कई जिलों से अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे। पहली पारी में सामान्य अध्ययन-1 का पेपर हुआ। वहीं दूसरी पारी में रीजनिंग और एप्टीट्यूड आधारित पेपर आयोजित किया गया। परीक्षा देकर बाहर निकले कई अभ्यर्थियों ने पेपर को पिछले पेरो की तुलना में अपेक्षाकृत कठिन बताया। पेपर पहले के मुकाबले कठिन ब्यावर जिले से परीक्षा देने आए करण चौधरी ने बताया कि दोनों पेपर पिछले साल की तुलना में कठिन थे। सामान्य अध्ययन के पेपर में प्रश्नों का पैटर्न चेंज किया गया है जिसके लिए यूपीएससी जानी भी जाती है। पेपर फेक्चुअल था और कई चीजों का इसमें मिश्रण देखने को मिला। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि कट ऑफ पिछले बार की तुलना में कम जाएगी। कट ऑफ कम रहने की जताई उम्मीद जोधपुर के रहने वाली शिवानी ने बताया कि प्रश्नों का स्तर चुनौतीपूर्ण रहा। दोनों पेपर में पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है जिससे इस बार कटऑफ कम रहने की संभावना है। वहीं, कुणाल परिहार ने बताया कि उन्हें सामान्य अध्ययन का पेपर थोड़ा आसान लगा, लेकिन दूसरी पारी वाला पेपर कठिन था। कुणाल के अनुसार, सामान्य अध्ययन का पेपर आसान होने से कट ऑफ बढ़ भी सकती है। वहीं जोधपुर में परीक्षा में किसी प्रकार की नकल या पेपर लीक जैसी शिकायत सामने नहीं आई है।



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औरंगाबाद में गड्ढे में बेकाबू होकर पलटा टोटो: एक ही परिवार के छह लोग घायल, रेलवे स्टेशन जा रहे थे सभी – Aurangabad (Bihar) News




औरंगाबाद के सदर प्रखंड अंतर्गत फेसर थाना क्षेत्र में आज सड़क हादसा हो गया। उन्थू से राष्ट्रीय राजमार्ग-139 को जोड़ने वाली नहर रोड पर सड़क में बने गहरे गड्ढे में पड़कर एक इलेक्ट्रॉनिक ऑटो पलट गई। हादसे में ऑटो पर सवार एक ही परिवार के छह लोग घायल हो गए। आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। घायलों की पहचान बरवाडीह गांव निवासी संतोष कुमार, उनकी पत्नी गुड़िया देवी, संगीता कुमारी और परिवार के तीन बच्चों के रूप में हुई है। सभी को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया गया। हादसे में कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं। ट्रेन पकड़ने अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन जा रहे थे यात्री घायलों के परिजनों ने बताया कि संतोष कुमार छत्तीसगढ़ की एक निजी कंपनी में काम करते हैं। वह अपने परिवार के साथ गांव से इलेक्ट्रॉनिक ऑटो रिजर्व कर अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकले थे। परिवार को ट्रेन पकड़नी थी, इसलिए वे उन्थू नहर रोड के रास्ते स्टेशन जा रहे थे। इसी दौरान सड़क पर बने बड़े गड्ढे में ऑटो का संतुलन बिगड़ गया और गाड़ी पलट गई। ऑटो पलटते ही उसमें सवार सभी लोग सड़क पर गिर पड़े और चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंचे और सभी घायलों को उठाकर इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि नहर रोड की स्थिति लंबे समय से खराब है। सड़क पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिससे आए दिन हादसे होते रहते हैं। खासकर बरसात के दिनों में यह सड़क और भी खतरनाक हो जाती है। परिजनों और ग्रामीणों ने सड़क निर्माण और उसके रखरखाव को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सरकार सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में सड़कें जल्द ही जर्जर हो जाती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि उन्थू नहर रोड के गड्ढों को अविलंब भरवाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके। घटना के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और खराब सड़कों को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है।



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CPR देने पर भी नहीं बची कोबरा सांप की जान: सर्पमित्र का प्रयास विफल; बड़वानी में भीषण गर्मी से तोड़ा दम – Barwani News




बड़वानी में भीषण गर्मी का प्रकोप अब वन्य जीवों पर भी भारी पड़ रहा है। रविवार दोपहर ग्राम दवाना में तेज गर्मी और पानी की कमी से एक कोबरा सांप की मौत हो गई। गांव में सड़क किनारे मूर्छित अवस्था में सांप दिखने पर ग्रामीणों ने तलवाड़ा डेब के सर्पमित्र निलेश उपाध्याय को बुलाया। निलेश जब मौके पर पहुंचे तो सांप की हालत गंभीर थी। गर्मी से कमजोर हो चुके सांप को बचाने के लिए उन्होंने सीपीआर (CPR) दिया और पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तेज गर्मी में शरीर का तापमान संतुलित न रख पाने के कारण सांप ने दम तोड़ दिया। हीटवेव से खतरा सर्पमित्र निलेश उपाध्याय ने बताया कि सांप जैसे सरीसृप ठंडे खून वाले जीव होते हैं, जो बाहरी तापमान पर निर्भर रहते हैं। हीटवेव और पानी के स्रोत सूखने से उनके लिए खतरा बढ़ गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि गर्मी के मौसम में घरों के आसपास, खेतों और जंगल किनारे मिट्टी के बर्तनों में पानी भरकर रखें। कोई घायल या बीमार वन्य जीव दिखे तो तुरंत वन विभाग या सर्पमित्र को सूचना दें। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान अब इंसानों के साथ बेजुबान जीवों के लिए भी खतरे की घंटी है। प्रकृति और जीव-जंतुओं की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना जरूरी है।



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फाल्टा में ढह गया TMC का डायमंड हार्बर मॉडल! 109021 वोटों से जीते BJP कैंडिडेट


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फाल्टा में ढह गया TMC का डायमंड हार्बर मॉडल! 109021 वोटों से जीते BJP कैंडिडेट

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Falta Repoll Result: पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान (Repoll) के नतीजे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आए हैं. मतगणना के रुझानों में बीजेपी ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. भाजपा उम्मीदवार देबांशु पांडा (Debangshu Panda) लगभग 1 लाख वोटों के विशाल अंतर से प्रचंड जीत की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने सीपीआई(एम), टीएमसी और कांग्रेस के उम्मीदवारों को पूरी तरह से पछाड़ दिया है. इस एकतरफा जीत पर बीजेपी गदगद है. बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने इसे ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ का पतन और बंगाल में पीएम मोदी के विजन की ऐतिहासिक जीत बताया है.

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फाल्टा में बीजेपी प्रचंड जीत की ओर

Falta BJP Massive Win: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट (Falta Election Result Live) पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी के कैंडिडेट तगड़ी जीत दर्ज करने जा रहे हैं. 19 राउंड तक की काउंटिंग तक भाजपा के देबांग्शु पांडा लगभग एक लाख वोटों से आगे चल रहे हैं. रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई मतगणना में भाजपा रिकॉर्ड तोड़ जीत की ओर अग्रसर है. फाल्टा की जनता ने एकतरफा रूप से भगवा दल पर अपना भरोसा जताया है.

चुनाव आयोग के ताजा रिपोर्ट में देबांशु पांडा ने 148994 वोट हासिल कर लिए हैं. वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 109021 वोटों के मार्जिन से जीत चुके हैं. आगे चल रहे हैं. दूसरे नंबर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के शंभू नाथ कुर्मी हैं, जिन्हें अब तक 40627 वोट मिले हैं. वहीं, राज्य की सत्ताधारी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है; वह महज 7756 वोट मिले हैं. कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला को भी मात्र 9,763 वोट ही हासिल हुए हैं. यह आंकड़े फाल्टा में ‘कमल’ की निर्विवाद आंधी की गवाही दे रहे हैं.





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गुजरात में बैंक से 8.70 करोड़ चुराने वाला कर्मचारी अरेस्ट: कचरा बताकर 9 बक्सों में भरकर ले गया था, 2 करोड़ का घर, 1 करोड़ की दुकान खरीदी


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अहमदाबाद19 मिनट पहले

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बैंक का सीसीटीवी फुटेज, जिसमें आरोपी दो लोगों की मदद से बक्सों में नोट भरकर ले जाते नजर आ रहा है।

अहमदाबाद में आरबीआई के करेंसी चेस्ट बैंक से 8.70 करोड़ रुपए चुराने वाले कस्टोडियन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 13 जनवरी की रात 9:12 बैंक का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें कस्टोडियन और उसके दो साथी बक्सों में भरकर रुपए ले जाते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने आरोपी के दो साथियों को भी हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने चोरी के पैसों से अहमदाबाद में 2 करोड़ का बंगला और 1.40 करोड़ रुपए की दुकान भी खरीद ली है। पुलिस ने उसकी कार से 2.20 करोड़ रुपए नकद भी बरामद किए हैं।

कर्मचारियों से कहा कि बक्सों में कचरा है

मामले का खुलासा हाल ही में तब हुआ, जब ऑडिट और नए कस्टोडियनों द्वारा की गई जांच में 500 रुपए के नोटों की 174 रीलें कम पाई गईं, जिनकी कुल कीमत 8.70 करोड़ रुपए थी। बैंक अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पाया कि 13 जनवरी को आरोपी हर्षसिद्ध कादियार कुछ बक्से लेकर बैंक से बाहर जा रहा था। उस समय उसने अन्य कर्मचारियों से कहा था कि बक्सों में कचरा भरा है और वह इन्हें फिंकवाने जा रहा है।

अहमदाबाद के गांधी रोड स्थित इस बैंक में आरबीआई का करेंसी चेस्ट संचालित होता है, जहां से जरूरत के अनुसार अन्य बैंकों को नकदी भेजी जाती है। चोरी के दौरान संजय शर्मा मुख्य कस्टोडियन और हरसिद्ध कडियार संयुक्त कस्टोडियन के रूप में बैंक में पदस्थ थे।

90 दिनों बाद फुटेज डिलीट हो जाने का भरोसा था

आरोपी को भरोसा था कि 90 दिन बाद सीसीटीवी फुटेज डिलीट हो जाएगी। इसी वजह से वह चोरी के बाद भी करीब 3 महीने तक नियमित रूप से नौकरी करता रहा। इसके तीन महीनों बाद 13 अप्रैल को उसने मुख्य प्रबंधक को संदेश भेजकर अपनी तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर एक दिन की छुट्टी ली। इसके बाद उसने 5 दिन की मेडिकल छुट्टी ली थी। इसके बाद से ही लापता था।

शिकायत दर्ज होने के दौरान मनाली में था आरोपी

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की तो पता चला कि आरोपी परिवार के साथ मनाली घूमने गया था। उसके लौटने से पहले ही पुलिस ने उसके घर के नीचे खड़ी कार से 2.20 करोड़ रुपए नकद जब्त कर लिए थे। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसने बताया कि इन पैसों से में उसने करीब चार करोड़ खर्च भी कर दिए हैं। उसने कुछ रकम क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेश की थी।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी एक सहकर्मी को घर खरीदने के लिए 28 लाख रुपए दिए थे। चोरी में उसकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कैश ट्रांसफर से जुड़े दो अन्य लोगों सुल्तान और जुल्फिकार को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस हिरासत में आरोपी हर्षसिद्ध कादियार।

पुलिस हिरासत में आरोपी हर्षसिद्ध कादियार।

15 सालों से बैंक में काम कर रहा था पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि 15 सालों की मेहनत के बाद अब वह आरामदेह जीवन जीना चाहता थी। इसीलिए उसने चोरी की। संदेह है कि अन्य लोग भी आरोपी के साथ शामिल हैं, जिसकी जांच की जा रही है। इस बात की जांच चल रही है कि क्या उसकी पत्नी भी मिलीभगत में थी। आरोपी की पत्नी रेलवे पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात है।

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अहमदाबाद में 1.66 करोड़ की ज्वेलरी चुराने वाली सेल्सगर्ल अरेस्ट:ब्वॉयफ्रेंड संग रहने के लिए की थी चोरी

अहमदाबाद में निकोल इलाके की एक ज्वैलरी शोरूम की सेल्स गर्ल हर्षिदा शेट्टी 10 दिनों बाद पुलिस की गिरफ्त में आ गई। हर्षिदा 11 मई 2026 को शोरूम से 1.66 करोड़ रुपए की ज्वेलरी चुराकर फरार हो गई थी। हर्षिदा ने बताया कि उसने ब्वॉयफ्रेंड मयूर माली के साथ मिलकर चोरी का ये प्लान बनाया था। पूरी खबर पढ़ें…

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रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया: यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं




रूस ने रविवार को यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया जिसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और कई दर्जन लोग घायल हैं। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक हमलेमें ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी इस्तेमाल हुआ। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस पर जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि रूसी हमलों में पानी सप्लाई करने वाली एक फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा, एक बाजार जल गया और कई घरों व स्कूलों पर हमला हुआ। जेलेंस्की ने कहा कि रूस के तरफ से दागी ओरेश्निक मिसाइल बिला त्सेरक्वा शहर के पास गिरी। उन्होंने कहा, “वे सचमुच पागल हो चुके हैं। जरूरी है कि रूस को इसकी सजा मिले।” यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। रूस के हमले से जुड़ीं 7 फोटोज रूस ने अब तक सिर्फ 3 बार ओरेश्निक का इस्तेमाल किया अमेरिका ओरेश्निक को मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल मानता है। यह मिसाइल पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी रफ्तार और उड़ान का तरीका ऐसा है कि यूक्रेन के मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना लगभग नामुमकिन माना जाता है। रूस ने अब तक सिर्फ तीसरी बार इस मिसाइल का इस्तेमाल किया है। रूस ने ओरेशनिक मिसाइल का पहली बार इस्तेमाल 21 नवंबर 2024 को किया था। उस समय इस मिसाइल से यूक्रेन के द्नीप्रो शहर में स्थित पिवदेनमाश एयरोस्पेस प्लांट पर हमला किया गया था। उस वक्त शुरुआत में यूक्रेन को लगा था कि रूस ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, लेकिन बाद में पता चला कि वह ओरेशनिक मिसाइल थी। दूसरी बार रूस ने जनवरी 2026 में ओरेशनिक का इस्तेमाल किया। यह हमला पश्चिमी यूक्रेन के ल्वीव क्षेत्र पर किया गया था। रूस ने कहा था कि निशाना ल्वीव स्टेट एविएशन रिपेयर प्लांट था। ओरेश्निक पर डमी वॉरहेड लगाकर दागा यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि ओरेश्निक मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने एक्स पर लिखा कि “ओरेश्निक जैसी परमाणु वारहेड ले जाने वाली मिसाइल का इस्तेमाल राजनीतिक डर पैदा करने और बेहद खतरनाक परमाणु शक्ति प्रदर्शन की कोशिश है।” फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी रूस के रातभर चले हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि ओरेश्निक मिसाइल का इस्तेमाल रूस के “आक्रामक युद्ध” में और बड़ा उकसावा है। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मर्ज ने इसे “बेहद गैरजिम्मेदार बढ़ोतरी” बताया और कहा कि जर्मनी यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। रूस ने रूस पर 700 हमले किए यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक रूस ने रातभर में 600 ड्रोन और 90 मिसाइलें दागीं। एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 604 हथियारों को मार गिराया। विदेश मंत्री सिबिहा ने इसे राजधानी पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक बताया। जेलेंस्की ने कहा, “दुर्भाग्य से सभी बैलिस्टिक मिसाइलें नहीं रोकी जा सकीं। सबसे ज्यादा नुकसान कीव को हुआ और यही इस रूसी हमले का मुख्य निशाना था।” जेलेंस्की ने पुतिन पर निशाना साधते हुए कहा कि “अमेरिका, यूरोप और बाकी देशों को फैसले लेने होंगे ताकि मॉस्को में बैठे बूढ़े व्यक्ति पर इतना दबाव बने कि उन्हें आखिरकार युद्ध रोकने और शांति की बात करनी पड़े। राजधानी पर यह हमला उस समय हुआ जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के एक हमले के जवाब में कार्रवाई का आदेश दिया था। यूक्रेन ने रूस के कब्जे वाले इलाके में हमला किया था, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। पुतिन ने यूक्रेन पर आतंकी हमला करने का आरोप लगाया दूसरी तरफ पुतिन ने यूक्रेन पर आतंकी हमला करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि यूक्रेनी ड्रोन ने शुक्रवार को पूर्वी लुहान्स्क क्षेत्र के रूस-नियंत्रित स्टारोबिल्स्क शहर में एक कॉलेज हॉस्टल को निशाना बनाया। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी टास के मुताबिक इस ड्रोन हमले में मारे गए बच्चों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने कहा कि मलबे के नीचे अभी भी तीन लोगों के फंसे होने की आशंका है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि ओरेशनिक और दूसरी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल रूसी क्षेत्र में नागरिक ठिकानों पर यूक्रेन के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया। हालांकि यूक्रेनी सेना ने पुतिन के आरोपों को खारिज किया। उसने कहा कि वह सिर्फ सैन्य ढांचे और सैन्य इस्तेमाल वाली जगहों को निशाना बनाती है।



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सौतेले भाई आर्य के दावों पर प्रतीक का क्रिप्टिक नोट, गलत जानकारी-सक्सेस पर तंज


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प्रतीक स्मिता पाटिल ने इंस्टाग्राम पर एक क्रिप्टिक नोट शेयर किया है. यह क्रिप्टिक नोट उन्होंने तब लिखा जब उनके सौतेले भाई आर्य बब्बर ने उन पर पिता राज बब्बर का आर्थिक लाभ उठाने का आरोप लगाया. प्रतीक ने किसी के नाम लिए गलत जानकारी होने का दावा किया है.

प्रतीक स्मिता पाटिल और उनके पिता राज बब्बर के बीच काफी समय से रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं. प्रतीक ने पिछले साल फरवरी में गर्लफ्रेंड प्रिया बनर्जी से शादी की. इस शादी में बब्बर फैमिली का एक भी सदस्य मौजूद नहीं था. सिर्फ प्रतीक के मां दिवंगत स्मिता पाटिल की तरफ के रिश्तेदार शामिल हुए थे. राज बब्बर की गैरमौजूदगी ने रिश्ते में खटास को जन्म दिया. तबसे मतभेद बने हुए हैं. अब, प्रतीक ने एक क्रिप्टिक नोट लिखा है. (फाइल फोटो)

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प्रतीक एस पाटिल ने अपने सौतेले भाई आर्य बब्बर के उन पर पिता का आर्थिक फायदा उठाने के आरोप के बाद शेयर किया. प्रतीक के इस पोस्ट ने सबका ध्यान खींचा है. प्रतीक ने इंस्टा पर अपनी पत्नी प्रिया बनर्जी द्वारा शेयर किया गया एक क्रिप्टिक नोट फिर से शेयर किया. (फाइल फोटो)

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इस नोट में लिखा था, “अगर गलत जानकारी से बिल भरते, तो कुछ लोग आखिरकार सफल हो जाते.” इसके साथ ही प्रतीक ने हैशटैग IYKYK भी जोड़ा. हालांकि दोनों ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह नोट आर्य के दावों पर तंज जैसा लग रहा था. (फाइल फोटो)

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इस पोस्ट को डिकोड करें, तो इसका मतबल यह है कि अगर गलत जानकारी को सही मान लेता है, तो वो उसकी वेबकूफी है. दरअसल, विक्की लालवानी से बात करते हुए आर्य ने बताया कि उनके परिवार ने प्रतीक के साथ रिश्ता सुधारने की कोशिश की, लेकिन प्रतीक ने हमेशा राज बब्बर के पूरे परिवार को गलत ठहराया है. (फाइल फोटो)

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आर्य बब्बर ने आगे कहा, “ये ऐसा है कि जब आपका करियर अच्छा नहीं चल रहा हो और आपको जीने के लिए पापा से पॉकेट मनी चाहिए, तब वो आपके पापा हैं. जब आप उस घर में रहना चाहते हैं जो आपके पापा ने स्मिता मां के लिए खरीदा था, तब वो आपके पापा हैं….” (फाइल फोटो)

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आर्य बब्बर ने आगे कहा, “…जब आपको सारे फायदे चाहिए, तब वो आपके पापा हैं. लेकिन जब आपको समाज के सामने उन्हें अपनाना और सम्मान देना हो, तब वो आपके पापा नहीं हैं. ये क्या है? बड़े भाई के तौर पर मैं उसे प्यार करता हूं, लेकिन जब वो गलत है, तो वो गलत है, और इस मामले में वो गलत है.” (फाइल फोटो)

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आर्य ने आगे कहा, “ये कितनी बड़ी ट्रेजेडी है कि जिस स्मिता मां के लिए मेरे पापा ने अपना परिवार छोड़ दिया, आज उसी स्मिता मां का बेटा उन्हें अपना पिता मानने को तैयार नहीं है. इससे बड़ी ट्रेजेडी क्या हो सकती है? बड़े भाई के तौर पर मैं उसके लिए हमेशा रहूंगा, लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए कि क्या मैं उसे पहले जैसा गले लगा सकता हूं और प्यार कर सकता हूं, तो शायद नहीं.” (फाइल फोटो)

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बता दें कि राज बब्बर ने 1975 में नादिरा बब्बर से शादी की थी और उनके दो बच्चे हुए-आर्य बब्बर और जूही बब्बर. हालांकि, शादीशुदा होने के बावजूद राज बब्बर को स्मिता पाटिल से प्यार हो गया. खबरों के मुताबिक, 1982 में उन्होंने नादिरा से तलाक लिया और एक साल बाद स्मिता से शादी कर ली. (फाइल फोटो)

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राज और स्मिता के बेटे प्रतीक का जन्म 1986 में हुआ, लेकिन स्मिता की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई. उनकी मौत के बाद राज बब्बर फिर से नादिरा के साथ रहने लगे. (फाइल फोटो)

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