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कहानी भले ही एक ही हो लेकिन अगर फिल्म का ट्रीटमेंट बहुत ही अलग ढंग से किया जाए तो वही मूवी बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन कर जाती है. 66 साल के अंतराल में ऐसी ही चार फिल्में बनीं जिनकी कहानी सेम थी. कहानी में रत्तीभर का बदलाव नहीं था. चारों फिल्मों का लास्ट सीन भी एक जैसा ही था. सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह है कि तीन फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रहीं. एक फिल्म तो ऑस्कर तक नॉमिनेट हुई. ये फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं.
फैमिली ड्रामा से जुड़ी फिल्में हमेशा से दर्शकों की पहली पसंद रही है. इन फिल्मों की कहानी भले ही एक जैसी हो लेकिन ट्रीटमेंट अलग-अलग होने की वजह से कहानी दर्शकों को जोड़ लेती है. 66 साल के अंतराल में ऐसी ही चार फिल्में बनीं जिनकी मूल कहानी एक जैसी थी. सभी कहानियों को फिल्माने का तरीका बहुत ही अलग था. चारों ही फिल्मों ने बड़ा नाम कमाया. तीन ने तो बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डिंग ही तोड़ दिए. एक मूवी तो ऑस्कर के लिए भी नॉमिनेट हुई. ये फिल्में थीं : मदर इंडिया, फर्ज और कानून, शक्ति और जेलर.

इस लिस्ट में पहला नाम ‘मदर इंडिया’ फिल्क का है जिसका निर्देशन महबूब खान ने किया था. फिल्म 14 फरवरी 1957 को रिलीज हुई थी. फिल्म नायिक प्रधान थी. मूवी में नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राजकुमार लीड रोल में नजर आए थे. सुनील दत्त-राजेंद्र कुमार ने नरगिस के बेटे का रोल निभाया था. बहुत कम लोग जानते होंगे कि यह कालजयी फिल्म भी 1940 में आई फिल्म ‘औरत’ का रीमेक थी. पति (राज कुमार) की मौत के बाद गरीबी में जकड़ी राधा (नरगिस) अपने दो बच्चे के कैसे पालती है, कैसे जीवन में संघर्ष करती है. सुक्खी लाला से खुद का दामन कैसे बचाती है, यह सब फिल्म में बहुत ही इमोशनल तरीके से दिखाया गया.

फिल्म के लास्ट सीन में गांव की इज्जत के लिए राधा अपने बेटे बिरजू को गोली मार देती है. फिर फूट-फूटकर रोती है, उसे गले लगाती है. बिरजू उनकी बाहों में दम तोड़ देता है. वो बिलख-बिलखकर कहती है, ‘बिरजू मेरे लाल मत जाओ.’ उस दौर में इस तरह के सीन की कल्पना डायरेक्टर महबूब खान ही कर सकते थे. 60 लाख के बजट में तैयार हुई थी ‘मदर इंडिया’ ने 7 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. इसे हिंदी की बेस्ट फीचर फिल्म के अवॉर्ड से नवाजा गया. 5 फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे. ऑस्कर में नॉमिनेशन पाने वाली यह पहली हिंदी फिल्म थी. सिर्फ एक वोट से यह फिल्म पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो गई थी.
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‘मदर इंडिया’ फिल्म के क्लाइमैक्स को कई फिल्मों में दिखाया गया. 80 के दशक में जीतेंद्र-हेमा मालिनी-रति अग्निहोत्री स्टारर ‘फर्ज और कानून’ मूवी में भी सेम स्टोरी लाइन देखने को मिली थी. ‘फर्ज और कानून’ फिल्म 6 अगस्त 1982 को रिलीज हुई थी. डायरेक्टर के. राघवेंद्र राव थे. यह तेलुगू फिल्म का रीमेक थी. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे.

‘फर्ज और कानून’ के क्लाइमैक्स में पिता अपने बेटे को गोली नहीं मारता. बिगड़ा हुआ बेटा सुधर जाता है. जीतेंद्र का डबल रोल था. जीतेंद्र ने इंस्पेक्टर पिता का रोल भी निभाया था. फिल्म सिर्फ डेढ़ माह में बनकर तैयार हुई थी. फिल्म का पेस बहुत अच्छा था. यह एक मसाला फिल्म थी और एंटरटेनर थी. फिल्म में राज किरन का रोल सराहा गया था. ‘फर्ज और कानून’ सुपरहिट साबित हुई थी.

‘फर्ज और कानून’ से महज दो माह बाद रिलीज हुई अमिताभ बच्चन-दिलीप कुमार की फिल्म ‘शक्ति’ में भी ‘मदर इंडिया’ की कहानी दोहराई गई. ‘शक्ति’ फिल्म 1 अक्टूबर 1982 को रिलीज हुई थी. ‘शक्ति’ फिल्म की कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. डायरेक्टर रमेश सिप्पी थे. वही रमेश सिप्पी जिन्होंने ‘शोले’ फिल्म बनाई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन, राखी गुलजार, दिलीप कुमार, स्मिता पाटिल, कुलभूषण खरबंदा और अमरीश पुरी ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. राखी उन दिनों लीड रोल करती थीं, फिर भी उहोंने दिलीप कुमार की पत्नी का रोल निभाया था. फिल्म में आरडी बर्मन का म्यूजिक था. फिल्म के दो तीन ‘मांगी जो दुआ, वो कुबूल हो गई’, ‘हमने सनम को खत लिखा, खत में लिखा’ और ‘जाने कैसे कब कहां इकरार हो गया’ आज भी हिट हैं.

अमिताभ बच्चन कई बार अपने इंटरव्यू में यह बात दोहरा चुके हैं कि वो दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानते रहे हैं. यह दिलीप कुमार के साथ उनकी पहली फिल्म थी. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो असफल रही लेकिन समय के साथ इसकी गहराई को लोगों ने समझा. जीतेंद्र की ‘फर्ज और कानून’ दो माह पहले रिलीज हुई थी और स्टोरी भी सेम थी, ऐसे में ‘शक्ति’ फिल्म को खासा नुकसान हुआ. इस फिल्म में भी ‘मदर इंडिया’ जैसा लास्ट सीन देखने को मिला था. दिलीप कुमार अपने बेटे अमिताभ बच्चन को गोली मार देते हैं. यह कालजयी फिल्म हिंदी सिनेमा के लिए एक स्कूल साबित हुई. इस फिल्म में सदी के दो दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन ने सीरियस रोल किया है. दिलीप कुमार को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

इस फिल्म में सबसे अंतिम नाम रजनीकांत की फिल्म जेलर का है जो कि 10 अगस्त 2023 को रिलीज हुई थी. जेलर फिल्म का डायरेक्शन नेल्सन ने किया था. प्रोड्यूसर कलानिधि मारन थे. कहानी नेल्सन ने ही लिखी थी. यह एक तमिल मूवी थी जिसे हिंदी में भी डब करके रिलीज किया गया था. यह एक एक्शन-कॉमेडी फिल्म थी. जेलर फिल्म में हमें रजनीकांत, मोहनलाल, शिव राजकुमार, राम्या कृष्णन, विनायकान, तमन्ना भाटिया, जैकी श्रॉफ, वसंत रवि, योगी बाबू अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. जेलर में रजनीकांत एक रिटायर लेकिन सख्त जेलर मुथुवेल पांडियन के किरदार में नजर आए थे. रजनीकांत बेटे अर्जुन को बचाने और मूर्ति तस्कर गिरोह से लड़ने के लिए फिर से मोर्चा संभालते हैं.

फिल्म की कहानी बाप-बेटे के इमोशनल रिश्ते पर भी थी. रजनीकांत के बेटे का किरदार वसंत रवि ने निभाया था. वो एक ईमानदार पुलिस अफसर था. उसे किडनैप कर लिया जाता है और यहीं से स्टोरी ट्विस्ट लेती है. शुरुआत में रजनीकांत शरीफ नजर आते हैं लेकिन जैसे -जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है, उनका खतरनाक स्वरूप दर्शकों के सामने आता है. फिल्म का क्लाइमैक्स भी चौंका देने वाला था. बेटा जिंदा निकलता है. फिल्म का अंत मदर इंडिया मूवी की तरह होता है. यह फिल्म मदर इंडिया का मॉडर्न वर्जन ही थी. फिल्म का बजट करीब 240 करोड़ रुपये था. फिल्म ने 600 करोड़ से ज्यादा का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया थ. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

