‘एक बार मेरे पति का असली हत्यारा मेरे सामने आ जाए…..या तो मैं रहूंगी या वो जिंदा रहेगा। जो मारने वाला है, वो कबूल करके ये तो बता दे कि क्या दुश्मनी थी? क्यों उसने मारा? इसके पीछे क्या साजिश थी।’
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ये कहना है 29 जून को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में मारे गए डकैत जगन गुर्जर की दूसरी पत्नी और पूर्व महिला डकैत कोमेश गुर्जर का। पति की हत्या के बाद ब्लड प्रेशर कम होने के चलते कोमेश धौलपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट है। जब भी उसे होश आता है, बार-बार अपने पति की हत्या के बदले की बात करती है।
एक जमाने में चंबल की महिला डकैतों में कोमेश गुर्जर का नाम गूंजता था। वहीं जगन गुर्जर के साथ उसकी लव स्टोरी आगे बढ़ी और दोनों ने शादी कर ली थी। तीन बच्चों के साथ कोमेश एक आम गृहिणी की जिंदगी बिता रही थी। हत्याकांड के बाद भास्कर टीम डकैत जगन के पैतृक गांव बभूतिपुरा पहुंची और कोमेश गुर्जर से बात करने की कोशिश की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट….
जगन गुर्जर के घर चल रही तीये की बैठक में मौजूद लोग।
धौलपुर से 40 किमी दूर बभूतिपुरा गांव में जगन गुर्जर के तीये की शोक बैठक चल रही थी। मध्यप्रदेश और राजस्थान के अलग-अलग शहरों से जगन के कई समर्थक और रिश्तेदारों की भीड़ लगी थी। हत्याकांड की सीबीआई जांच और परिजनों की अन्य मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए पंचायत चल रही थी।
कोमेश गुर्जर बार-बार बेहोश हो रही थी। अचानक बीपी (ब्लड प्रेशर) कम होने के चलते उसे हॉस्पिटल ले जाया गया। कोमेश से बातचीत के लिए हम भी उसी अस्पताल पहुंचे। करीब 3 घंटे ट्रीटमेंट के बाद वहां के डॉक्टर्स ने हमें मिलने की परमिशन दी।

अस्पताल में भर्ती कोमेश गुर्जर बार-बार बेहोश हो रही थी।
हाई सिक्योरिटी जेल में जगन गुर्जर की हत्या पर आपका क्या कहना है… हमारा सवाल पूरा होने से पहले ही कोमेश ने उत्तर देना शुरू किया…
सबसे मेरा तो एक ही निवेदन है, एसपी साहब उसको (हत्या के आरोपी विष्णु जाट को) रिमांड पर लेवें और उससे कुछ कबूल करवा कर हमारे सामने लाएं। वो बस हमें एक बार ये बता दे कि जेल सुपरिटेंडेंट ने मरवाया है या उसने खुद ने दुश्मनी के चलते जगन को मारा है या फिर कोई राजनीतिक वजह से ये मर्डर करवाया गया है। एसपी साहब उसका रिमांड लें और उससे ये पूछताछ करें।
हमें तो न्याय तभी मिलेगा जब मेरे पति जगन गुर्जर की हत्या का पूरा सच सामने आएगा। इसके बाद ही तसल्ली मिलेगी। जेल कर्मचारियों को भी सजा होनी चाहिए कि आखिर हाई सिक्योरिटी जेल में ये हो कैसे गया? मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और दूसरे नेताओं से मेरी यही मांग है कि हमारे असली दुश्मन का बस नाम बता दो, जिसने ये किया और करवाया है।
असल दुश्मन को हमारे सामने ले आओ। जेल सुपरिटेंडेंट है, जेलर है या कोई और, उनको ये एहसास होना चाहिए कि मर्डर क्या होता है? ऐसे तो किसी भी कैदी को कल कोई मार देगा…बहुत पब्लिक भरी हुई है जेल में।
इतने बड़े आदमी जगन को ही धोखा दे दिया और उसके साथ गद्दारी कर दी। छोटे-बड़े आदमी का तो क्या ही होगा अब? सुपरिटेंडेंट और जेलर से मुझे ये जवाब लेना है कि ये घटना हो कैसे गई?

कोमेश ने आरोप लगाए कि पति जगन गुर्जर को जेल में बेहोशी का इंजेक्शन देकर बाद में सुनियोजित तरीके से हत्या की गई है।
देवर ने बताया जेल में बेहोशी के इंजेक्शन देकर मारा
कोमेश गुर्जर ने बताया कि जगन के अंतिम संस्कार में जेल से कुछ घंटों के लिए लाए गए देवर पप्पू गुर्जर ने भी कई राज खोले। कोमेश के अनुसार पप्पू गुर्जर ने बताया कि जगन को नींद की गोली या इंजेक्शन देकर बेहोश किया गया। इसके बाद मारा गया।
कोमेश ने कहा- जब जेल में कुछ भी नहीं जाने देते हैं तो फिर ये गोलियां कहां से आ गई? डॉक्टर ही इस बारे में बता सकता है, वो भी जेलर और सुपरिटेंडेंट से मिला हुआ है।
मैं जब जेल में थी…तब मेरी छोटी सी बच्ची भी मुझसे कभी मिलने आती थी तो उसे कम से कम 50 बार चेक करते थे। आखिर जेल में ये कैसे हो सकता है कि हत्या हो जाए और किसी को कुछ पता ही न चले?

हत्या के आरोपी विष्णु जाट ने पुलिस को बताया कि जगन गुर्जर जेल में उससे बुरा बर्ताव करता था। अपने अंडर गारमेंट्स धुलवाता था। इसके चलते हत्या कर दी।
हत्या वाले दिन ही हुई थी बात
कोमेश गुर्जर ने बताया- उसी दिन (29 जून) सुबह मेरी जगन से जेल की एसटीडी पर बात हुई थी। तब भी बढ़िया प्रेम से बात की थी। जेल में किसी से झगड़े और विवाद की कोई बात नहीं बताई। उसी दिन कोर्ट में उनकी बेल की अर्जी भी लगी हुई थी।
हां, इस दौरान जगन ने ही बताया था जेलर पूछ रहा है कि तुम्हारी बेल कब हो रही है? मैंने बता दिया… आज ही हो जानी चाहिए।
कोमेश आगे कहती हैं- जेल स्टाफ का तो उन्हें मारने का प्री प्लान था, इसीलिए दोनों भाइयों को पहले अलग-अलग कर दिया था। दोनों की सेल बदल दी थी।

1 जुलाई को अंतिम संस्कार के दिन जगन गुर्जर के छोटे भाई पप्पू गुर्जर को कुछ घंटों के लिए गांव लाया गया था।
पहले साथ रहे दोनों भाई, फिर अलग की गई सेल
जगन गुर्जर का भाई पप्पू गुर्जर पहले से ही हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। 29 मार्च 2026 को जगन के अजमेर जेल आने के बाद दोनों भाइयों को शुरुआत में एक ही वार्ड में रखा गया था। बाद में दोनों को अलग-अलग ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया।
जेल प्रशासन का कहना है- दोनों भाइयों के बीच विवाद होने के बाद 16 मई को जगन को अलग ब्लॉक में भेज दिया गया था। फिर 27 जून को ही विष्णु को जगन की सेल में शिफ्ट किया गया था। इसके ठीक 2 दिन बाद 29 जून को उसने जगन की हत्या कर दी।

ब्लॉक का CCTV चालू, लेकिन सेल का कैमरा खराब
जांच में सामने आया कि जिस ब्लॉक में दोनों विष्णु और जगन बंद थे, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में विष्णु का जगन की सेल में जाना, जेल प्रहरी की गश्त, कंपाउंडरों का इंजेक्शन लगाने आना और अन्य गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। हालांकि, जेल प्रशासन का दावा है कि जिस सेल में हत्या हुई, उसका कैमरा कई दिनों से खराब पड़ा था। विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। यही वजह थी कि उसने वारदात वाले दिन सुबह करीब 10 बजे सबूत मिटाने की नीयत से कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा दिया था, ताकि कुछ दिखाई न दे।
अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया है कि जेल में CCTV की देखरेख के लिए कोई टेक्निकल स्टाफ नहीं है। करीब 20 कैमरे समय-समय पर अचानक खराब हो जाते हैं। इन्हें ठीक कराने के लिए 7-8 बार डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (DOIT) को ईमेल भी भेजा गया, लेकिन समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई। कई कैमरे अपने आप कुछ समय के लिए चालू हो जाते हैं और फिर बंद हो जाते हैं।
पिता की मौत का बदला लेने के लिए बनी थी डकैत
कोमेश के पिता छीतरिया गुर्जर की हत्या हो गई थी, वो गांव के सरपंच थे। पिता की हत्या का बदला लेने के लिए कोमेश डकैत बनने बीहड़ों में चली गई। वहीं उसकी पहली बार जगन गुर्जर से मुलाकात हुई। जगन का उसके घर पर पहले से आना-जाना था, तभी से वो उसको पसंद करती थी। बीहड़ में मुलाकात के बाद जगन ने कोमेश को बंदूक थमाई और बदला लेने में मदद की। इसके बाद दोनों ने शादी कर ली।

साल 2000 के आसपास जब कोमेश प्रेग्नेंट थी। पुलिस से बचने के लिए वो बीहड़ों से होते हुए हिंडौन सिटी के एक नर्सिंग होम पहुंची थी। यहां उसने अपने पहले बच्चे लवकुश को जन्म दिया। उसी नर्सिंग होम से कोमेश को पहली बार पुलिस ने पकड़ा था। कोमेश की गिरफ्तारी के बाद जगन ने भी साल 2001 में पहली बार तत्कालीन धौलपुर एसपी बीजू जॉर्ज जोसेफ के सामने सरेंडर कर दिया था।
जमानत पर आने के बाद कोमेश फिर से बीहड़ों में चली गई। साल 2008 में पुलिस ने उसे और उसकी गैंग को घेर लिया था। कई घंटे मुठभेड़ चली। अंत में एक गोली कोमेश को लगी और वो घायल हो गई। इस दौरान कोमेश प्रेग्नेंट थी और गर्भ में ही उसके बच्चे की मौत हो गई थी। गिरफ्तारी के बाद कोमेश फिर जमानत पर बाहर आई और फरार हो गई। बाद में सीधे कोर्ट में ही सरेंडर कर दिया था। साल 2009 में जगन ने कैमरी गांव के जगन्नाथ मेले में दूसरी बार कांग्रेस नेता सचिन पायलट के सामने सरेंडर कर दिया था। जेल से छूटने के बाद करीब 9 साल पहले कोमेश ने बेटी काजल को जन्म दिया था।

साल 2014 में कोमेश के छोटे भाई रामू की हत्या हुई। पुलिस रिकॉर्ड अनुसार साल 2014 में कोमेश अपने पति डकैत जगन गुर्जर के साथ जेल में थी। इसके बाद कोमेश ने अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए अपने रिश्तेदार देवर की मदद से आरोपी संजीत कोली की हत्या करवा दी। इसके बाद से वो बाड़ी में खेती-बाड़ी कर और दो भैंस रखकर उनका दूध बेचकर जीवन गुजार रही है।

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