Thursday, June 18, 2026
Homeराज्यमध्यप्रदेशनौकरी पाने रिश्तों का घोटाला...: शादी के कार्ड में जिसे दादा...

नौकरी पाने रिश्तों का घोटाला…: शादी के कार्ड में जिसे दादा बताया, उन्हें ही पिता बताकर निगम में ली अनुकंपा नियुक्ति – Gwalior News




सरकारी नौकरी पाने के लिए रिकॉर्ड में रिश्ते बदल दिए गए। नगर निगम में अनुकंपा नियुक्ति दिनांक के नाम पर ऐसा ही फर्जीवाड़ा हुआ है। देवानंद बरैया को मृत कर्मचारी नारायण सिंह बरैया का बेटा बताकर नौकरी दी गई, वह वास्तव में उनका पोता है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी कर रिश्तों को बदला गया और नियमों को दरकिनार कर सरकारी नौकरी दिला दी गई। 5 नवंबर 2007 को मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने देवानंद सहित तत्कालीन निगमायुक्त, अपर आयुक्त और कार्यालय अधीक्षक पर एफआईआर के निर्देश दिए हैं। आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति: जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। ऑडिट विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मृत कर्मचारी नारायण सिंह को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद भी नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया था। उनके निधन के बाद आश्रितों को किए गए भुगतान पर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। यानी जिस सेवा रिकॉर्ड के आधार पर बाद में अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया गया, उस रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े हो चुके थे। भास्कर के पास सबूत… जानें पोते देवानंद ने किन-किन दस्तावेज में दादा से रिश्ता बदला शादी कार्ड: सुप्रौत्र नारायण सिंह थे, सुपुत्र लालता प्रसाद
आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2000 का विवाह कार्ड में देवानंद बरैया को लालता प्रसाद का सुपुत्र और नारायण सिंह का सुप्रौत्र बताया था। रजिस्टर्ड वसीयत में भी पोता बताया गया है। यहीं से सवाल खड़ा हुआ कि देवानंद पोता था तो फिर वह अनुकंपा नियुक्ति का पात्र कैसे बन गया? 1996 की दो मार्कशीट: एक में पिता नारायण, दूसरी में लालता
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त पांचवीं की अंकसूची में देवानंद के पिता लालता प्रसाद दर्ज है। लेकिन नौकरी के लिए प्रस्तुत मार्कशीट में पिता का नाम बदलकर नारायण सिंह कर दिया। दोनों में जन्मतिथि में भी बदलाव पाया गया। जांच में दोनों मार्कशीट में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। रजिस्टर्ड वसीयत: देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया
जांच में मिली रजिस्टर्ड वसीयत में भी देवानंद को नारायण सिंह का पोता बताया गया है। इससे यह दावा और मजबूत हो गया कि वह नारायण सिंह का बेटा नहीं, बल्कि पोता था। रजिस्ट्री में पिता लालता प्रसाद और मां काशी बाई
28 दिसंबर 2012 को हुए एक विक्रय पत्र (रजिस्ट्री) में देवानंद उर्फ देव आनंद ने अपनी मां काशी बाई के साथ संपत्ति बेची थी। इस दस्तावेज में देवानंद के पिता का नाम स्व. लालता प्रसाद बरैया दर्ज है। वहीं काशी बाई को भी स्व. लालता प्रसाद की पत्नी बताया गया। वोटर लिस्ट में भी पिता का नाम नारायण सिंह दर्ज
2024 की मतदाता सूची में बड़ा विरोधाभास सामने आया। इसमें काशी बाई के पति का नाम लालता प्रसाद दर्ज है, जबकि उसी परिवार में देवानंद के पिता का नाम नारायण सिंह लिखा गया है। एक ही परिवार के सरकारी रिकॉर्ड में अंतर है। ऐसे समझें पूरा मामला कमलसिंह का बाग निवासी देवानंद बरैया के दादा 17 फरवरी 1999 में निगम कर्मचारी नारायण सिंह ने 60 वर्ष की आयु पूरी की। नारायण सिंह को नियमों के विपरीत सेवा में बनाए रखा गया। नारायण का निधन 31 मार्च 2001 को हुआ। 2007 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर देवानंद को अनुकंपा नियुक्ति मिली। अटक गई जांच नियुक्ति में फर्जीवाड़ा करने वालों पर FIR कराने नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय भोपाल तक शिकायत पहुंची। भोपाल से 6 मार्च 2026 को जारी आदेश में 10 दिन में जांच कर कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन अमल नहीं हुआ। देवानंद बरैया सहित तत्कालीन निगमायुक्त पवन शर्मा, तत्कालीन अपर आयुक्त राजेश बाथम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ये बोले जिम्मेदार देवानंद की अंकसूची की जांच के लिए डीईओ को लिखा पत्र
देवानंद की अनुकंपा नियुक्ति मामले की शिकायत पहले भी हुई थी, जिसकी जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। अब नई शिकायत मिलने पर फिर से जांच शुरू की गई है। देवानंद की अंकसूची का सत्यापन कराने के लिए डीईओ को पत्र भेजा है। -संघ प्रिय, आयुक्त ननि ग्वालियर



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments