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Bollywood Timeless Movie : रिश्तों की संवेदनाएं मासूम होती है. संवेदनाओं के हर आगे हर कोई मासूम ही है. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र और मिथुन चक्रवर्ती के स्टारडम के बीच एक ऐसे ही फिल्म रिलीज हुई थी जिसका फ्लॉप होना तय था. रिलीज के शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में इस फिल्म को दर्शक नहीं मिले. डायरेक्टर समेत फिल्म के सभी कलाकार उम्मीदें छोड़ चुके थे. सब कोई मान गया था कि इसे फ्लॉप होने से कोई बचा नहीं सकता. दिन-प्रतिदिन गहरी होती निराशा के बीच चमत्कार हुआ. कुछ ऐसा ही करिश्मा कभी शोले के साथ हुआ था. फिल्म मैसिव हिट निकली. गाने इतने कालजयी कि सुनते ही परेशान दिल को सुकून मिलता है.
कई बार जिंदगी में मासूम से सवालों का जवाब ढूंढना मुश्किल हो जाता है. एक शख्स के अतीत के रिश्ते से एक नाजायज औलाद उसकी शादीशुदा जिंदगी में आ जाती है. उसे अब अतीत पर पछतावा है, पिता की जिम्मेदारी भी निभानी है. अपने टूटते हुए घर को भी बचाना है. अब उसके सामने मासूम सा सवाल है कि वो करे तो क्या करे. उसकी पत्नी यह सब देखकर भरोसा खो चुकी है. गहरे मानसिक संताप से गुजर रही है. वो बच्चे को अपनाना चाहती है लेकिन अपना नहीं पाती. इन सबके वो मासूम बच्चा जो अपनी मां को खो चुका है, नए घर में खुद को कैसे एडजस्ट करे, अपनी जगह कैसे बनाए, उसके सामने भी मासूम सवाल है जिसका जवाब वो ढूंढने की कोशिश करता है. इन सभी मासूम सवालों का जवाब 1983 में आई एक फिल्म खूबसूरती से देती है. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की चुनिंदा फिल्मों में शुमार है. फिल्म में स्वीकार्यता और क्षमादान दो ऐसे एलिमेंट है जो सभी सवालों का जवाब बन जाते हैं.

43 साल पहले प्यार, जिम्मेदारी, नैतिकता और स्वीकार्यता का मेल कराती एक बेहतरीन फिल्म आई थी जिसका नाम था : मासूम. फिल्म 21 अक्टूबर 1983 को रिलीज हुई थी. निर्देशन शेखर कपूर ने किया था. नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी स्टारर यह फिल्म ना केवल अपने समय की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है बल्कि इसका प्रभाव हिंदी सिनेमा पर बहुत ज्यादा पड़ा. सईद जाफरी भी अहम भूमिका में थे. फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. फिल्म एरिक सहगल के 1980 के नॉवेल मैन वुमेन एंड चाइल्ड पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले गुलजार ने लिखा था. चंदन दत्त-देवी दत्त ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. चंदन दत्त बॉलीवुड लीजेंड गुरु दत्त के भाई थे. उनके प्रोडक्शन में बनी यह पहली फिल्म थी. बाद में उन्होंने ‘भावना’ फिल्म बनाई थी.

फिल्म की कहानी डीके मल्होत्रा की है जो अपनी पत्नी इंदु और दो बेटियों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. इस खुशहाल परिवार को समय की नजर लग जाती है. डीके को पता चलता है कि अतीत के एक रिश्ते से उनका एक बेटा राहुल है. राहुल की मां का निधन हो चुका है, अब वो अकेला है. डीके अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उसे घर ले आते हैं. फिल्म की कहानी इस नाजुक स्थिति को बहुत ही सटीकता के साथ दिखाती है. फिल्म दिखाती है कि कैसे डीके और इंदु जीवन की कड़वी सच्चाई का सामने करते हैं. कैसे अपने रिश्ते को संभालते हैं. कैसे छोटा बच्चा राहुल नए घर में खुद की जगह बना पाता है.
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सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसी साल आई ‘बंधन कच्चे धागों का’ में भी सेम स्टोरी लाइन थी. ‘मासूम’ टाइटल से अब तक तीन फिल्में बन चुकी हैं. 1960, 1983 और 1996 में ‘मासूम’ फिल्म आ चुकी है लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1983 में आई ‘मासूम’ फिल्म को मिली. 1960 में आई ‘मासूम’ फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था. अशोक कुमार लीड रोल में थे. सरोस ईरानी और हनी ईरानी ने बतौर चाइल्ड एक्टर काम किया था. फिल्म मैसिव हिट रही थी. इसी तरह 1996 में भी ‘मासूम’ टाइटल से फिल्म आई. महेश कोठारे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में इंदर कुमार, आयशा जुल्का लीड रोल में थे. 1.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म मे करीब 9 करोड़ का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म भी हिट रही थी. ‘मासूम’ 1996 का एक गाना ‘काले लिबास में बदन’ खूब पॉप्युलर हुआ था. इंडस्ट्री के कई दिग्गजों ने इस फिल्म को ना बनाने की सलाह शेखर कपूर को दी थी. उनका कहना था कि ना तो फिल्म में विलेन है और ना कोई एक्शन है. कहा जाता है कि शेखर कपूर प्रोड्यूसर को किसी और फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने पहुंचे थे. 5 मिनट में प्रोड्यूसर को बोरियत फील होने लगी. शेखर कपूर ने देखा कि प्रोड्यूसर के ऑफिस में ‘मैन वुमेन एंड चाइल्ड’ नॉवेल रखा हुआ है. उन्होंने नॉवेल की स्टोरी सुना दी. प्रोड्यूसर को कहानी बहुत अच्छी लगी और वो फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए.

‘मासूम’ फिल्म का म्यूजिक आरडी बर्मन ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 4 गाने थे. ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं’ गाने के दो वर्जन था. पहला वर्जन अनूप घोषाल और दूसरा वर्जन लता मंगेशकर ने गाया था. ‘दो नैना और एक कहानी’ आरती मुखर्जी ने गाया था. गाना असाधारण है. लीक से हटकर है. उन्हें बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. फिल्म का एक और यादगार गाना ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ आज भी कितना हिट है, आप सभी जानते हैं. सभी गाने गुलजार ने लिखे थे. गुलजार को बेस्ट लिरिसिस्ट का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. लो बजट फिल्म के लिए पंचम दा ने अपने करियर का बेस्ट म्यूजिक तैयार किया उन्हें बेस्ड म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाने से जुड़ा किस्सा दिलचस्प है. दरअसल गीतकार गुलजार अपनी बेटी मेघना गुलजार के लिए हर साल एक फनी कविता लिखा करते थे. ‘लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा’ गाना उसी किताब से लिया गया था. गाने के शुरुआती लाइनें संगीतकार उत्तम सिंह की बेटी गुरुप्रीत कौर ने गाई थीं. वो उस समय सिर्फ चार साल की थीं.

‘मासूम’ मूवी शेखर कपूर की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म थी. शेखर कपूर के मामा देवानंद थे. उनकी मां शीलाकांता एक्ट्रेस-पत्रकार थीं. शेखर कपूर लंदन से सीए की पढ़ाई करके भारत आए. पहले हीरो बनने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाए. फिर निर्देशन में हाथ आजमाया. निर्देशन की दुनिया में उन्होंने बड़ा नाम कमाया. ‘मासूम’ के बाद ‘मिस्टर इंडिया’ से उन्होंने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था. शेखर कपूर ने सतीश कौशिक से दोस्ती निभाई. उन्हें ‘मासूम’ में भी छोटा सा रोल दिया और ‘मिस्टर इंडिया’ में कैलेंडर का रोल दिया. मिस्टर इंडिया से सतीश कौशिक का करियर चमक गया.

नसीरुद्दीन शाह को ‘मासूम’ के लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. यह उनका तीसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड था. इससे पहले उहें पांच बेस्ट एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. नसीरुद्दीन शाह इस फिल्म में सुप्रिया पाठक के अपोजिट नजर आए थे. वो रिश्ते में उनकी साली साहिबा हैं. नसीरुद्दीन साहब को प्रोड्यूसर ने पेमेंट नहीं दिया था, वो बहुत नाराज हुए. उन्होंने ‘भावना’ फिल्म के सेट पर खूब हंगामा किया था जहां पर प्रोड्यूसर देवी दत्त मौजूद थीं. शबाना आजमी सहित पूरी यूनिट यह सब देखकर सन्न रह गई थी.

बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट जुगल हंसराज की यह डेब्यू फिल्म थी. उर्मिला मांतोडकर और आराधना श्रीवास्तव ने भी बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया. जुगल हंसराज-उर्मिला मांतोडकर की 1994 में ‘आ गले लग जा’ में बतौर लीड एक्टर काम किया. मासूम मूवी के बजट की सटीक जानकारी तो उपलब्ध नहीं है लेकिन फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी. उस साल की 14वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

