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आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है.
आगरा: आगरा में बड़े पैमाने पर तरोई की पैदावार होती है. किसान बताते है कि कम लागत से इस फसल में उन्हें अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है. किसानों ने बताया कि आगरा की तोरई आगरा ही नहीं बल्कि यूपी के कई अलग अलग जिलों तक जाती है.इसके अलावा दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों तक सप्लाई होती है. आगरा में कई क्षेत्रों में तोरई की फ़सल तैयार की जाती है. किसान इसे जैविक खेती से तैयार करते है कोई केमिकल या कितनाशक दवा ना होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होती है. आगरा की तोरई लंबी और चमकदार पतली होती है जिसे देख कर ही पहचान लिया जाता है कि यह आगरा की तोरई है.
45 दिन में तैयार हो जाता है तोरई
आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि वह पिछले कई सालों से तोरई की फ़सल उगा रहे है. उन्होंने कहा कि उनके पुरे खेत में सिर्फ तोरई ही होती है. बड़े स्तर पर उनके यहाँ तोरई की फ़सल की जाती है. तोरई का बीज बोने के बाद करीब 45-50 दिनों बाद तोरई आना शुरू हो जाती है. आगरा की तोरई आस पास के जिलों और राज्यों में काफ़ी मशहूर है. इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी तोरई की खेती बड़े स्तर पर की जाती है. किसान ने कहा कि इस फ़सल में कम लागत आती है और अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि वह आगरा कि बड़ी बड़ी मंडियो में तोरई पंहुचाते है जिसके बाद व्यापारी अलग अलग जिलों और राज्यों मे आगरा की तोरई सप्लाई करते है.
यूपी के दर्जनो जिले में होती है सप्लाई
आगरा में तोरई की खेती करने वाले किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई बहुत ज्यादा मशहूर है. उन्होंने कहा कि यह लखनऊ, इलाहबाद, शहँजाबाद सहित अन्य कई जिलों तक जाती है. इसके अतिरिक्त राजस्थान, दिल्ली सहित कई राज्यों में इनकी सप्लाई होती है. किसान जाकिर ने बताया कि आगरा की तोरई जैविक खेती में उगाई जाती है इसमें कोई केमिकल या इंजेक्शन नहीं लगाया जाता है. जिससे यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो और यही कारण है कि शुद्धता के कारण यह आस पास बेहद मशहूर है. यह देखने में एक दम लंबी और चमकदार हरी हरी होती है और शुद्ध तोरई की यही पहचान होती है. तोरई की खेती से उन्हें अच्छा पैसा मिलता है इसलिए वह कई सालों से इसकी खेती कर रहे हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

