Thursday, June 11, 2026
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तेल के लिए अंडमान के बाद यहां होगी ड्रिलिंग, समंदर में उतरी OIL, पताल लोक में छिपा है खजान


Oil India Ultra Deepwater Drilling: देश में तेल की कमी दूर करने के लिए अब देसी संसाधनों पर फोकस किया जा रहा है. इस दिशा में देसी कंपनियां कमर कसकर उतर चुकी हैं. इसमें सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है. दरअसल, समंदर की गहराइयों में नए हाइड्रोकार्बन भंडारों की तलाश तेज कर दी गई है. अंडमान सागर में चल रहे खोज अभियानों के बीच अब ऑयल इंडिया की नजर देश के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों पर है. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ऑयल इंडिया 2027 से इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोजी ड्रिलिंग अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और तकनीकी ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

2027 से शुरू होगी नई खोज

ऑयल इंडिया को ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP)-IX के तहत चार अपतटीय ब्लॉक आवंटित किए गए हैं. इनमें महानदी बेसिन के दो और कृष्णा-गोदावरी बेसिन के दो अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉक शामिल हैं. कंपनी फरवरी 2027 से इन ब्लॉकों में खोजी ड्रिलिंग शुरू करने की योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक महानदी बेसिन में पहला स्ट्रेटिग्राफिक कुआं अप्रैल 2027 के आसपास ड्रिल किया जा सकता है. इस तरह की ड्रिलिंग का उद्देश्य सीधे उत्पादन शुरू करना नहीं होता, बल्कि समुद्र के नीचे मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन करना और तेल-गैस की संभावनाओं का आकलन करना होता है.

अंडमान बेसिन में पहले से जारी है अभियान

पूर्वी तट पर विस्तार की तैयारी के साथ-साथ ऑयल इंडिया अंडमान और निकोबार क्षेत्र में भी अपने खोज अभियान को आगे बढ़ा रही है. कंपनी वर्तमान में अंडमान सागर के दो अपतटीय ब्लॉकों में काम कर रही है. दस्तावेजों के अनुसार, यहां अब तक तीन खोजी कुओं की ड्रिलिंग पूरी की जा चुकी है, जबकि दो और कुएं ड्रिल करने की तैयारी चल रही है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अंडमान बेसिन भारत के लिए भविष्य का बड़ा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र साबित हो सकता है.

दरअसल, इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के उन इलाकों से काफी मिलती-जुलती है, जहां तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद हैं. यदि यहां व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस की खोज सफल होती है, तो यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है.

क्यों महत्वपूर्ण हैं कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन?

भारत के पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन पहले भी देश को कई बड़े गैस भंडार दे चुका है. इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण अपतटीय ऊर्जा क्षेत्रों में गिना जाता है. वहीं, इसके उत्तर में स्थित महानदी बेसिन अभी अपेक्षाकृत कम खोजा गया क्षेत्र है. विशेषज्ञों का मानना है कि महानदी बेसिन में बड़े ऊर्जा संसाधनों की संभावना मौजूद है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता का आकलन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है. ऐसे में ऑयल इंडिया का आगामी अभियान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

समुद्र के बीच संचालन के लिए हेलीकॉप्टर सेवा

अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग आसान काम नहीं है. ड्रिलिंग यूनिट्स अक्सर तट से सैकड़ों समुद्री मील दूर स्थित होती हैं. ऐसे में कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ऑयल इंडिया ने समर्पित हेलीकॉप्टर सेवाएं लेने की प्रक्रिया शुरू की है. इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग तटीय बेस और समुद्र में मौजूद ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म के बीच कर्मियों और आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए किया जाएगा.

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

ऑयल इंडिया की यह दोहरी रणनीति- एक ओर अंडमान सागर में फ्रंटियर एक्सप्लोरेशन और दूसरी ओर पूर्वी तट के अल्ट्रा-डीपवॉटर क्षेत्रों में नई खोज कंपनी के इतिहास के सबसे महत्वाकांक्षी विस्तार अभियानों में से एक मानी जा रही है. भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में घरेलू भंडारों की खोज और उत्पादन बढ़ाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. यदि अंडमान, कृष्णा-गोदावरी और महानदी बेसिन में ऑयल इंडिया को सफलता मिलती है, तो इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. समुद्र की गहराइयों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की यह खोज आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के और करीब ले जा सकती है.



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