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आमिर खान को बॉलीवुड में ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन निर्देशक विक्रम भट्ट इस टैग से पूरी तरह सहमत नहीं हैं. हाल ही में उन्होंने आमिर के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आमिर खुद को परफेक्ट नहीं मानते, बल्कि हमेशा अपने काम को बेहतर बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में आमिर खान को अक्सर ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ कहा जाता है. उनकी फिल्मों और काम करने के तरीके को देखकर फैंस ने उन्हें यह पहचान दी है. लेकिन फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट इस टैग को थोड़ा अलग नजरिए से देखते हैं. उनका मानना है कि आमिर खान परफेक्शनिस्ट नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार हैं जो हमेशा अपने काम को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते हैं.

आमिर खान ने भी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. उन्होंने मुंबई के नरसी कॉलेज से 12वीं पास की है. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ थिएटर कंपनी में काम करना शुरू किया. फिल्म कयामत से कयामत तक फिल्म से उन्होंने अपना करियर शुरू किया और आज वह सुपरस्टार हैं.

हाल ही में विक्रम भट्ट ने अपनी बातचीत में कहा कि वह आमिर को परफेक्शनिस्ट कहे जाने से पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उनके मुताबिक, एक सच्चा परफेक्शनिस्ट वह होता है जो मान ले कि उसने सबसे बेहतरीन काम कर लिया है और अब उससे आगे कुछ नहीं हो सकता.
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लेकिन आमिर खान की सोच इससे बिल्कुल अलग है. आमिर कभी यह नहीं मानते कि उनका काम पूरी तरह परफेक्ट हो गया है. वह हमेशा सोचते हैं कि इसे और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है. यही बात उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है. वह अपने काम से जल्दी संतुष्ट नहीं होते और लगातार सुधार की कोशिश करते रहते हैं.’

अपनी बात आगे रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि अपना बेस्ट देने की कोशिश करना और खुद को परफेक्ट मान लेना, दोनों अलग बातें हैं. आमिर हमेशा मानते हैं कि अभी और मेहनत की जा सकती है. वह अपने हर प्रोजेक्ट में समय और ऊर्जा लगाते हैं, जिसका असर उनकी फिल्मों की गुणवत्ता में साफ दिखाई देता है.

बातचीत के दौरान विक्रम भट्ट ने फिल्म ‘गुलाम’ के दिनों को भी याद किया, जिसमें उन्होंने आमिर खान के साथ काम किया था. उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार दोनों के बीच किसी सीन या फैसले को लेकर मतभेद भी होते थे. हालांकि इन बहसों का मकसद एक-दूसरे को गलत साबित करना नहीं, बल्कि फिल्म को बेहतर बनाना होता था.

बता दें कि विक्रम भट्ट के मुताबिक, आमिर हर चीज को गहराई से समझना चाहते हैं. अगर उन्हें लगता है कि किसी सीन में और सुधार की गुंजाइश है, तो वह उस पर खुलकर चर्चा करते हैं. वह उन कलाकारों में से नहीं हैं जो सिर्फ अपना काम खत्म करके आगे बढ़ जाएं.

निर्देशक ने आखिर में कहा कि यह उनकी निजी राय है और जरूरी नहीं कि आमिर खुद भी अपने बारे में ऐसा ही सोचते हों. लेकिन इतने सालों तक उनके साथ काम करने और उन्हें करीब से देखने के बाद उनकी यही समझ बनी है कि आमिर खान एक ऐसे कलाकार हैं, जो लगातार सीखने, खुद को बेहतर बनाने और आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं.

