पुलिस थाना फलोदी में नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) लगाया गया है। इस अत्याधुनिक प्रणाली के माध्यम से अब घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट के आधार पर संदिग्धों और पुराने अपराधियों की पहचान तेजी और सटीकता से की जा सकेगी।
.
थाना परिसर में स्थापित इस विशेष प्रणाली के जरिए चोरी, लूट, हत्या और सेंधमारी जैसी गंभीर वारदातों में घटनास्थल से मिले उंगलियों के निशानों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इससे अपराधियों की पहचान कम समय में संभव होगी और जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
पुलिस थाना फलोदी में नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) लगाया गया
धारा 151 के आरोपियों का भी हो रहा डेटा संग्रह
NAFIS सेंटर में कार्यरत हेड कांस्टेबल बेबी सुथार ने बताया- वर्तमान में धारा 151 के तहत गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट सहित अन्य मामलों में दर्ज आरोपियों के फिंगरप्रिंट, आंखों और पूरे शरीर की डिजिटल स्क्रीनिंग की जा रही है। यह डेटा सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि जिले के अन्य पुलिस थानों से ऑफलाइन प्राप्त फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड को भी ऑनलाइन सिस्टम में अपलोड किया जा रहा है, जिससे प्रिंट मिलान में सुविधा होती है और अपराधियों का पुराना रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध हो जाता है।
अनसुलझे मामलों के खुलासे में मिलेगी मदद
जिला पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह ने बताया- NAFIS के माध्यम से घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट का डिजिटल मिलान तेजी से किया जा सकेगा। इससे आदतन और अंतरराज्यीय अपराधियों की पहचान आसान होगी तथा पुराने अनसुलझे मामलों के खुलासे में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह प्रणाली संदिग्धों के सत्यापन और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी। मैनुअल रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होने से जांच में समय की बचत होगी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।

