Sunday, June 14, 2026
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बिना बॉडी और टैंकर तैयार हुए गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन: RTO जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी, 6 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन निरस्त कर किया मामला दर्ज – Chittorgarh News




चित्तौड़गढ़ में गाड़ी रजिस्ट्रेशन से जुड़ी एक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग की जांच में छह ऐसे वाहन सामने आए हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन कथित रूप से निर्माण पूरा होने से पहले ही कर दिया गया। विभाग का दावा है कि जिन गाड़ियों पर बॉडी या टैंकर का निर्माण होना था, उनका निर्माण पूरा नहीं हुआ था, लेकिन डॉक्यूमेंट्स और फिजिकल इंस्पेक्शन के आधार पर उन्हें पूर्ण निर्मित मानते हुए रजिस्ट्रेशन जारी कर दिया गया। मामले की जांच के बाद जिला परिवहन अधिकारी ने सभी छह गाड़ियों की आरसी निरस्त कर दी है और संबंधित गाड़ी मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए सदर थाना चित्तौड़गढ़ में रिपोर्ट भिजवाई है। जांच में सामने आईं कई गड़बड़ियां, जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ विभाग जिला परिवहन अधिकारी नीरज नवीन शाह ने बताया कि यह कार्रवाई अपर परिवहन आयुक्त (प्रशासन) जयपुर के निर्देश पर की गई जांच के बाद सामने आई है। जांच में पाया गया कि कुछ गाड़ियों का पंजीयन मोटर वाहन अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के प्रावधानों के विपरीत किया गया। विभाग का आरोप है कि बिना बॉडी या टैंकर तैयार हुए गाड़ियों के लिए फॉर्म 22ए पार्ट-द्वितीय प्रस्तुत किया गया और उन्हें पूर्ण निर्मित गाड़ी के रूप में दर्शाया गया। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान संबंधित गाड़ी मालिकों को नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका दिया गया था। विभाग ने उनका पक्ष भी सुना और लिखित जवाब प्राप्त किए, लेकिन अधिकारियों ने उन जवाबों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद जिला परिवहन अधिकारी एवं पंजीयन अधिकारी ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए छह वाहनों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। अजमेर और चित्तौड़गढ़ से जुड़े वाहन मालिकों के नाम शामिल रिपोर्ट में जिन गाड़ियों का उल्लेख किया गया है उनमें गाड़ी संख्या आरजे 09 जीएफ 0673 के मालिक सलीम बैग एण्ड सन्स के प्रोपराइटर सलीम बैग पुत्र मुस्ताक बैग, गाड़ी संख्या आरजे 09 जीएफ 0677 और आरजे 09 जीएफ 0701 से जुड़े युनिक इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर अशोक कुमार चोरडिया पुत्र हुकमी चंद तथा गाड़ी संख्या आरजे 09 जीएफ 0679, आरजे 09 जीएफ 0680 और आरजे 09 जीएफ 0681 के मालिक श्रीकिशन चौधरी पुत्र रामधन चौधरी शामिल हैं। विभाग का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर इन मामलों में प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन की स्थिति बनती है। इसी आधार पर संबंधित गाड़ी के मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जरूरी कानूनी कार्रवाई करना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल इस पूरे मामले ने गाड़ी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर जांच में यह पाया गया कि गाड़ी पूरी तरह तैयार नहीं थे, तो फिर उनका फिजिकल इंस्पेक्शन किस आधार पर किया गया और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कैसे हुई। हालांकि परिवहन विभाग की रिपोर्ट में फिलहाल गाड़ी मालिकों और पेश किए गए डॉक्यूमेंट्स पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन मामला सामने आने के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि ऐसी स्थिति में पूरी प्रक्रिया की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उधर, परिवहन विभाग के सूचना सहायक पियूष व्यास ने 13 जून को सदर थाना चित्तौड़गढ़ पहुंचकर विभाग की ओर से तैयार रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी। अब पुलिस रिपोर्ट के आधार पर आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई करेगी।



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