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Shivpuri News: पति की मौत के बाद ससुराल से निकाले जाने और आर्थिक संकट झेलने के बावजूद विनीता ने हिम्मत नहीं हारी. एनआरएलएम से जुड़कर उन्हें ट्रेनिंग सेंटर में मैनेजर की नौकरी मिली. आज वह आत्मनिर्भर हैं और सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं. उनके बच्चे भी अच्छी शिक्षा हासिल कर रहे हैं.
रिपोर्टर आशीष पांडेय शिवपुरी
Vinita Jadaun Inspiring Story: शिवपुरी जीवन में जब परेशानियां एक साथ आती हैं, तो इंसान अंदर से टूट जाता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन मुश्किलों से लड़कर समाज के सामने एक मिसाल पेश करते हैं. संघर्ष की ऐसी ही प्रेरक कहानी है विनीता जादौन की. पति की मौत के बाद जिस महिला को अपनों ने ही बेसहारा छोड़ दिया और जो कभी खुदकुशी करने की कगार पर थीं, आज वह न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं बल्कि सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं. ‘लोकल 18’ से विनीता जी से उनके इस चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायी सफर पर सीधी बातचीत की.
पति की मौत के बाद सास-ससुर ने घर से निकाला
विनीता जादौन मूल रूप से राजा की मुड़ेरी की रहने वाली हैं. उन्होंने बताया कि उनके चार बच्चे (तीन बेटियां और एक बेटा) हैं. पति के अचानक निधन के बाद उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दुख की इस घड़ी में सहारा देने के बजाय उनके सास-ससुर ने उन्हें बच्चों समेत घर से बाहर निकाल दिया और उनका सारा सामान बाहर फेंक दिया.
विनीता जी बताती हैं कि पति के जाने के बाद मुझे ससुराल की तरफ से कुछ भी नहीं दिया गया. हालात इतने बुरे थे कि मुझे दो वक्त की रोटी तक नसीब नहीं थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं नन्हे-नन्हे बच्चों को कैसे पालूंगी. उस वक्त हताशा में मुझे सिर्फ एक ही रास्ता सूझ रहा था- खुदकुशी करना.
एनआरएलएम समूह बना संकटमोचक, मिली प्रबंधक की नौकरी
जब विनीता जी हर तरफ से निराश हो चुकी थीं, तब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) उनके लिए नई उम्मीद बनकर आया. वह पहले से ही आजीविका समूह से जुड़ी हुई थीं. इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि 26 नंबर पर विभाग का नया ट्रेनिंग सेंटर शुरू हो रहा है.
वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से उनकी मुलाकात डीपीएम से हुई। जब उनकी शैक्षणिक योग्यता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह 12वीं पास हैं. उनकी योग्यता को देखते हुए आजीविका मिशन के तहत उन्हें ट्रेनिंग सेंटर में प्रबंधक (मैनेजर) के पद पर नियुक्त किया गया.
ट्रेनिंग सेंटर का संभालती हैं पूरा मैनेजमेंट
विनीता जी आज इस ट्रेनिंग सेंटर में अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं. वह केंद्र की पूरी कागजी कार्यवाही संभालती हैं. साथ ही प्रशिक्षण लेने आने वाली ग्रामीण महिलाओं के आने, ठहरने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं का पूरा प्रबंधन भी देखती हैं. इसके अलावा वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रशिक्षण भी देती हैं.
सरकारी स्कूल में पढ़कर बच्चे छू रहे हैं आसमान
आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद विनीता जी के बच्चों की शिक्षा को नई दिशा मिली. उनके चारों बच्चों ने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई की और आज उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं.
बड़ी बेटी: इंदौर में रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रही है.
दूसरी बेटी: कोटा के सरकारी कॉलेज में पढ़ाई कर रही है.
बेटा: साइंस कॉलेज में अध्ययनरत है.
छोटी बेटी: सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रही है.
एनआरएलएम को दिया धन्यवाद
आज विनीता जी न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं. वह कहती हैं कि भगवान की कृपा से मुझे एनआरएलएम जैसा प्लेटफॉर्म मिला, जिसकी बदौलत मेरे बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ रहे हैं और मैं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकी हूं. इसके लिए मैं एनआरएलएम का दिल से धन्यवाद करती हूं
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें

