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अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, इंडिया VIX में करीब 10% की बढ़ोतरी, एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेत, रुपये में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड बढ़ने के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 से अधिक अंक और निफ्टी 180 अंक तक फिसल गया. हालांकि, इस कमजोरी के बीच दो सेक्टर्स में खरीदारी देखने को मिली. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है और निवेश का फैसला ग्लोबल घटना व बाजार की दिशा को ध्यान में रखकर करना चाहिए.
शेयर बाजार में आज 13 जुलाई को भारी गिरावट आई है.
यूएस और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के कारण आज शेयर बाजार की बेहद कमजोर शुरुआत हुई है. सुबह 9:16 बजे पर सेंसेक्स 600 से ज्यादा फिसल गया है और 76,943 पर कारोबार कर रहा है. निफ्टी 180 अंक गिरकर 24,025 पर ट्रेड कर रहा है. शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच दो सेक्टर्स ऐसे भी हैं जिनमें खरीदारी देखी जा रही है. ये दो सेक्टर्स आईटी और फार्मा हैं. आईटी सेक्टर्स 0.66 फीसदी और फार्मा सेक्टर 0.16 फीसदी तेजी के साथ कारोबार करते हुए नजर आए.
अब सबसे बड़ा सवाल निवेशकों के मन में ये है कि आखिर शेयर बाजार में शुक्रवार की तेजी के बाद फिर से क्यों गिरावट आई है. असल में इसके पीछे कुछ अहम वजहें शामिल हैं.
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा
बाजार में सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से आया. इस घटना ने ग्लोबल निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला.
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. ताजा तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर शेयर बाजार पर दिखा.
इंडिया VIX में तेज उछाल
बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX करीब 10% चढ़ गया है. VIX बढ़ने का मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका देख रहे हैं. ऐसे समय में ट्रेडर्स और निवेशक अक्सर जोखिम कम करने के लिए बिकवाली बढ़ा देते हैं.
एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेत
एशियाई बाजारों में कमजोरी और ग्लोबल लेवल पर बढ़ी अनिश्चितता का असर भी भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा. इसके साथ ही पिछले कुछ समय में बाजार में आई तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे गिरावट और गहरी हो गई.
रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड बढ़ी
तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय रुपये पर भी दबाव आया. आज भारतीय रुपये 35 पैसे कमजोर खुला है. रुपया 95.33 प्रति डॉलर के मुकाबले 95.71 प्रति डॉलर पर खुला है. सरकारी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी देखने को मिली. कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जबकि बढ़ती यील्ड कंपनियों के लिए कर्ज की लागत बढ़ा सकती है. इन दोनों वजहों से निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दिन की गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है. अगर आपका निवेश लंबी अवधि का है, तो ऐसे उतार-चढ़ाव बाजार का सामान्य हिस्सा हैं. हालांकि, नए निवेश से पहले बाजार की दिशा, ग्लोबल घटना और अपने निवेश टारगेट को ध्यान में रखना जरूरी है. फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और आने वाले कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी, क्योंकि इन्हीं से बाजार की अगली चाल तय हो सकती है.
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यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें

