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Potato-free samosa recipe : बलिया अब केवल अपने बागी इतिहास तक सीमित नहीं, बल्कि एक नए और अनोखे स्वाद की खुशबू से लुभा रहा है. यहां ऐसा समोसा बन रहा है, जिसमें आलू नहीं, बल्कि दूध, काजू और मखाने का प्रयोग किया जाता है. यही अनोखेपन ने इसे लोगों की पहली पसंद बना दिया है. दुकानदार संजय कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि जब सीक्रेट मसाले को समोसे की कुरकुरी परत में भरकर तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है.
बलिया में तैयार होने वाला यह समोसा पारंपरिक समोसे से बिल्कुल अलग है. जहां अधिकांश समोसों की जान आलू होता है, इसमें आलू का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया जाता है. इसकी जगह दूध, मखाना और खास मसालों से मिश्रण तैयार कर समोसे में भरा जाता है. इसी के कारण पहली बार इसे खाने वाला हर व्यक्ति इसके स्वाद और बनावट की तारीफ करता है.

इस अनोखे और स्पेशल समोसे की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है. प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलो ताजा दूध बड़े भगोनों में उबाला जाता है. लगभग दो किलो मखाना दूध में डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. जब मखाना पूरी तरह दूध में घुल-मिल जाए, तब इससे एक विशेष प्रकार का पनीर तैयार किया जाता है, जो इस समोसे की बड़ी खासियत है.

दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक, पनीर बनने के बाद उसमें इस्तेमाल किए जा रहे खास मसालों का मिश्रण गोपनीय रखा गया है, ताकि कोई इसका नकल न कर सके. इसमें स्वाद को बेहतर बनाने के लिए बारीक कटे काजू भी डाले जाते हैं. यह मिश्रण जब समोसे की कुरकुरी परत में भरकर सुनहरा तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है.
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अपने खासियत के चलते ही यह समोसा सुर्खियां बटोर रहा है. जनपद बलिया शहर और आसपास के कई इलाकों से लोग केवल इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं. बलिया रेलवे स्टेशन के पास दुकान होने से बाहर से आने वाले यात्री भी यहां रुककर इस खास समोसे का आनंद लेते हैं और कई लोग पैक कराकर अपने घर भी ले जाते हैं. इस समोसे के स्वाद का जलवा दूर-दूर तक फैल चुका है.

पहले यह दुकान जिले के सिकंदरपुर में थी, जो सिकंदरपुर वाले मशहूर हो गई, बढ़ती मांग को देखते हुए यह स्वाद अब बलिया शहर तक पहुंच गया है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है, जो मुख्य शहर में स्थित है. इससे शहर के लोगों को अब सिकंदरपुर तक जाने की जरूरत नहीं है.

बगैर आलू के इस समोसे की खासियत न केवल इसका अलग भरावन से है, बल्कि इसकी गुणवत्ता बेहतर है. ताजा दूध, मखाना, पनीर, काजू और चुने हुए मसालों का संतुलित मिश्रण ही इसको शाही स्वाद प्रदान करता है. इसी के चलते ग्राहक एक बार इसे चखता है, तो वह दोबारा आने को मजबूर हो जाता हैं. इसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों लाजवाब है.

बलिया की पहचान अब न केवल ऐतिहासिक तक सीमित है, बल्कि यहां के स्थानीय व्यंजन भी नई पहचान बना रहे हैं. स्वाद का आनंद ले रही सिमरन बताती हैं कि दूध और मखाने से तैयार यह समोसा स्थानीय उद्यम और नवाचार का बेहतरीन उदाहरण है. पारंपरिक व्यंजन में नए प्रयोग ने इसे अलग ही पहचान दे दिया है और यह जिले में आकर्षण बनता जा रहा है.

अगर आप भी बलिया आने का प्लान बना रहे हैं और कुछ ऐसा चखना चाह रहे हैं, जो आम समोसे से बिल्कुल अलग हो, तो यह दूध-मखाना समोसा जरूर ट्राई करें. यकीन मानिए, इसका अनोखा स्वाद, खास बनाने की विधि और देसी अंदाज हर निवाले को यादगार बना देता है. इसी के कारण यह समोसा आज बलिया में नई स्वाद बनकर दूर-दूर तक अपनी खुशबू फैला रहा है.

