यूके और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आज 15 जुलाई से लागू हुआ है. इससे भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इस समझौते के तहत भारत के 1,143 टेक्सटाइल और कपड़े के प्रोडक्ट्स अब ब्रिटेन के मार्केट में बिना किसी ड्यूटी के पहुंच सकेंगे. पहले भारतीय निर्यातकों को 12% तक ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को पहले से ही ड्यूटी-फ्री का फायदा मिल रहा थी. अब भारत को भी वही फायदा मिलने से मार्केट कॉम्टिशन बदल सकता है.
कई मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समझौते का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के निर्यात पर भी पड़ सकता है. खासकर टेक्सटाइल, होम टेक्सटाइल और चावल जैसे क्षेत्रों में भारत की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने की संभावना है.
अब भारत को मिला बराबरी का मौका
BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक भारत को ब्रिटेन में कपड़े भेजने पर 12% तक ड्यूटी देनी पड़ती थी. दूसरी ओर पाकिस्तान और बांग्लादेश को Developing Countries Trading Scheme (DCTS) के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा मिलती थी. इसी वजह से भारतीय कंपनियां कीमत के मामले में पीछे रह जाती थीं. अब FTA लागू होने के बाद यह अंतर खत्म हो गया है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ होम टेक्सटाइल की बात करें तो UK के आयात में पाकिस्तान की हिस्सेदारी करीब 55% है, जबकि भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 6-7% है. उनका मानना है कि अब भारत के पास इस अंतर को धीरे-धीरे कम करने का अच्छा मौका है.
पाकिस्तान पर कितना असर पड़ सकता है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के करीब 38.5 मिलियन डॉलर के ऐसे निर्यात पर दबाव आ सकता है, जहां भारत को अब टैरिफ का फायदा मिलेगा. हालांकि, सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश पर पड़ने का अनुमान है. साथ ही, पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जिन्हें भारत से कड़े कॉम्टिशन का सामना करना पड़ सकता है.
टेक्सटाइल पाकिस्तान की इकोनॉमी का अहम हिस्सा है. अगर ब्रिटिश खरीदार भारतीय टी-शर्ट, शर्ट, बेडशीट, तौलिए और अन्य होम टेक्सटाइल प्रोडक्शन कम कीमत पर खरीदने लगते हैं, तो पाकिस्तान के निर्यातकों के सामने चुनौती बढ़ सकती है. ऐसे में उन्हें लागत कम करने और नए बाजार तलाशने की जरूरत पड़ सकती है.
चावल और दूसरे सेक्टर में भी मुकाबला
इस समझौते का असर केवल कपड़ा इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा. चावल, प्रोसेस्ड फूड, दवाइयां, केमिकल, प्लास्टिक और दूसरे इंडस्ट्रियल उत्पादों में भी भारत की स्थिति मजबूत हो सकती है. भारत पहले से ही ब्रिटेन को पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक चावल निर्यात करता है. FTA के बाद भारत की हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना है. वहीं दवा उद्योग में भी भारत पहले से मजबूत स्थिति में है और कम टैरिफ का फायदा इस सेक्टर को भी मिल सकता है.
भारत के टेक्सटाइल क्लस्टर्स को मिलेगा फायदा
FTA से तिरुप्पुर, सूरत, लुधियाना, भदोही, मुरादाबाद और पानीपत जैसे टेक्सटाइल क्लस्टर्स में उत्पादन और निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. इससे MSME, छोटे उद्योगों, बुनकरों, महिला कामगारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को ज्यादा काम मिल सकता है.
ब्रिटेन का टेक्सटाइल और कपड़ों का बाजार करीब 28.8 अरब डॉलर का है, जबकि भारत का वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात लगभग 37 अरब डॉलर का है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारतीय कंपनियां अच्छी क्वालिटी, समय पर सप्लाई और कॉम्टिटेटिव कीमत बनाए रखती हैं, तो भारत ब्रिटेन के बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है.

