नई दिल्ली: नीट यूजी पेपर लीक को लेकर एक तरफ जहां सीबीआई ने अपनी जांच शुरू कर दी है, विपक्षी राजनीतिक दलों ने राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुट गए हैं. आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के नेता नीट पेपर लीक पर केंद्र सरकार को घेरते हुए दिख रहे हैं. इन तमाम राजनीतिक बयानबाजी के बीच तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री जोसेफ विजय उर्फ थलापति विजय की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके पार्टी बनाकर पहली बार उतरे विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में युवा वोटरों का बड़ा योगदान रहा है. तमिलनाडु चुनाव में टीवीके को 108 सीटें जीतने के बाद थलापति विजय को Gen-Z का महानायक तक कहा जा रहा है. नीट पूरी तरह से युवाओं से जुड़ा मुद्दा है, लेकिन थलापति विजय ने इसपर अभी तक कुछ भी नहीं कहा है. गौर करने वाली बात यह है कि नीट पेपर लीक पर कांग्रेस सबसे ज्यादा अग्रेसिव नजर आ रही है, लेकिन सरकार में सहयोगी विजय पूरी तरह चुप्प हैं.
गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले तमिलनाडु में सत्ता चलाने वाली डीएमके पेपर लीक के मुद्दे पर अग्रेसिव दिखती रही है. पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालनि ने इस बार भी नीट पेपर लीक पर बीजेपी पर जोरदार हमले किए हैं.
ईसाई हैं विजय, लेकिन मंदिरों में भी करते हैं पूजा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ईसाई धर्म को मानते हैं, लेकिन हिंदू धर्म में भी उनकी आस्था कई मौकों पर देखने को मिली है. थलापति विजय ने करीब चार साल पहले एक इंटरव्यू में अपनी आस्था को लेकर कहा था कि ईश्वर पर उन्हें पूरा भरोसा है. उन्हें चर्च के साथ मंदिर और दरगाह जैसे पवित्र स्थान पर जाना अच्छा लगता है. थलापति के पिता ईसाई और मां हिंदू धर्म को मानती रहीं. विजय ने बताया था कि उनकी मां और उनके पिता ने उन्हें कभी भी मंदिर या चर्च जाने के लिए कभी भी दबाव नहीं बनाया. विजय की मां शोबा चंद्रशेखर शिरडी वाले साईं बाबा के भक्त थे. इसी वजह से विजय भी कई मौकों पर शिरडी में हाजिरी लगाते देखे गए हैं. विजय पिता के लिए तिरुकाडैयूर अमृतेश्वर मंदिर में शांति पूजा भी करते दिखे थे.
केजरीवाल ने जेन जेड को रोड पर उतरने की अपील की
केजरीवाल ने कहा कि परीक्षा पत्र बार-बार लीक होने की घटनाओं ने उम्मीदवारों का आत्मविश्वास हिला कर रख दिया है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अतीत में की गई जांचों के परिणामस्वरूप दोषियों को कड़ी सजा मिली है. उन्होंने कहा, ‘अगर बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में जेन जेड सरकारें बदल सकती है, तो भारतीय युवा भी पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं.’ ‘जेन जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है. यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है. इन्हें डिजिटल नेटिव्स भी कहा जाता है क्योंकि इनका जीवन स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ा माना गया है. केजरीवाल ने 2014 से अब तक परीक्षा पत्र लीक होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इसने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं.
अशोक गहलोत ने नीट पेपर लीक पर बीजेपी को निशाने पर लिया
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नीत राज्य सरकार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 में गड़बड़ी को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया. गहलोत ने परीक्षा रद्द करने के राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के फैसले को साहसिक बताया.
बीजेपी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने दावा किया कि प्रश्नपत्र राजस्थान में लीक नहीं हुआ और आरोप लगाया कि लीक की शुरुआत केरल से हुई थी. राजस्थान पुलिस के विशेष आपरेशन समूह (एसओजी) ने इस प्रकरण में आरोपियों को कथित तौर पर हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने सहित मामले से जुड़े घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी. एनटीए ने तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने की घोषणा करते हुए मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार ने इसमें अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का आदेश दिया है. गहलोत ने कहा, ‘नीट (यूजी) प्रवेश परीक्षा का रद्द होना यह दर्शाता है कि इस प्रश्नपत्र में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई थी. राजस्थान की भाजपा सरकार ने जानबूझकर दो सप्ताह तक इसे छिपाने की कोशिश की और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया.’

