जालौन तहसील से एसडीएम में पद से हटाए जाने के बाद आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट साझा किए हैं। उनके इन पोस्टों में प्रशासनिक व्यवस्था, व्यक्तिगत सिद्धांतों, सुशासन और सेवा के दौरान मिलने वाले अवसरों को लेकर गंभीर विचार व्यक्त किए गए हैं। उनके संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपने एक पोस्ट में IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने लिखा कि जब वह स्वयं की तुलना उन लोगों से करते हैं जो व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो उन्हें आत्मग्लानि महसूस होती है। उन्होंने कहा कि केवल व्यवस्था में अपनी जगह बनाए रखने के लिए स्वयं को धोखा देना उचित नहीं है। उनका मानना है कि यदि सभी लोग समझौता कर लें तो बदलाव संभव नहीं होगा, इसलिए कम से कम कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिन्हें देखकर अन्य लोग तुलना कर सकें और यह न कहें कि “सब एक जैसे हैं।” उन्होंने अपने समर्थकों का धन्यवाद देते हुए लिखा कि उनकी प्रतिक्रियाओं ने उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया। इसके बाद उन्होंने बताया कि व्यवस्था को जागृत करने के उद्देश्य से उन्होंने एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने अनुरोध किया है कि यदि जनपद जालौन में उन्हें उपजिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात किए जाने की परिस्थितियों में उनसे कोई त्रुटि हुई हो तो उन्हें नियमानुसार दंडित किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि दंड प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अन्य संयुक्त मजिस्ट्रेटों की तरह किसी तहसील, यथासंभव तहसील जालौन, में उपजिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाए, ताकि उन्हें पर्याप्त फील्ड एक्सपोजर और प्रशासनिक क्षमता विकसित करने का अवसर मिल सके। राही ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि यदि जालौन में ऐसी तैनाती संभव न हो तो उत्तर प्रदेश के किसी भी ऐसे जनपद में उन्हें उपजिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाए,
जहां लिखित व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप सुशासन (Basic Governance) लागू करने में किसी प्रकार की प्रशासनिक या राजनीतिक बाधा न हो। यदि यह भी संभव न हो तो उन्होंने अपने कैडर परिवर्तन की अनुमति और संस्तुति देने का अनुरोध किया है।
उन्होंने पोस्ट के माध्यम से कहा कि अंतिम निर्णय होने तक वह 22 जुलाई 2026 से अपने कार्य के अनुरूप आधा वेतन लेने का निर्णय कर रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि इस निर्णय को अनुशासनहीनता न माना जाए बल्कि सद्भावपूर्वक स्वीकार किया जाए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगले सप्ताह “Leadership, Ethics and Organisational Effectiveness” विषय पर होने वाले प्रशिक्षण के बाद उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिल सकता है, इसलिए आधा वेतन लेने की तिथि प्रशिक्षण के बाद से निर्धारित की गई है।
15 जुलाई की अपनी पोस्ट में रिंकू सिंह राही ने लिखा कि उनके मन में हमेशा यह द्वंद्व रहता है कि यदि आमजन का भला करना है तो पद पर बने रहना आवश्यक है, लेकिन पद पर बने रहने के लिए कई बार सिद्धांतों से समझौता करना पड़ता है। उन्होंने आगे लिखा कि उन्हें यह बात याद आती है कि “सदमार्ग में मात्रा से अधिक गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है, जीवन लंबा नहीं बल्कि महान होना चाहिए।”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास कर रहे विद्यार्थियों और आम लोगों को देखकर उन्हें स्वयं पर शर्म आती है, क्योंकि लोग अपना समय निकालकर व्यवस्था में सुधार के लिए आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे लोगों का समर्पण उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।
रिंकू सिंह राही की इन पोस्टों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन पोस्टों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल उनके विचार और मांगें सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।
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