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इलेक्ट्रिक टू व्हीलर बनाने वाली कंपनी एथर को सरकार की ओर से 200 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं. कंपनी 1200 करोड़ रुपये का फंड जुटाने निकली है. इसमें से 900 करोड़ रुपये से ज्यादा उसे उसके मौजूदा शेयरहोल्डर हीरो मोटोकॉर्प से मिलेंगे.
कंपनी ने जून में 2500 करोड़ रुपये जुटाने के प्लान को मंजूरी दी थी.
नई दिल्ली. एथर को सरकार से 200 करोड़ रुपये मिले हैं. ये निवेश सरकार ने भविष्य में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए किया है. कई लोगों को लग सकता है कि सरकार किसी प्राइवेट कंपनी पर इतना क्यों मेहरबान हो रही है. क्यों नहीं इसे पीएलआई के रास्ते फंडिंग दी जा रही है. हम आपको बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए किसी कंपनी में पैसा डाला हो. इससे पहले भी कई कंपनियों को सरकार डायरेक्ट फंडिंग दे चुकी है. इसके बारे में आगे विस्तार से जानेंगे कि कब, किस कंपनी को कितनी फंडिंग दी गई लेकिन उस पहले जान लेते हैं कि आज एथर खबर में क्यों हैं.
एथर टेक्नोलॉजी 1200 करोड़ रुपये का फंड जुटा रही है. यह जानकारी कंपनी ने बीएसई की फाइलिंग में दी. इसमें से 200 करोड़ रुपये सरकार ने दे दिये हैं. सरकार के अलावा इस फंडरेजर में कंपनी के फाउंडर्स और मौजूदा शेयरधारक भी हैं. कंपनी के शेयरहोल्डर्स में एक बड़ा नाम हीरो मोटोकॉर्प का भी है. हीरो इस फंडरेजर में 960 करोड़ रुपये डालेगी. इसके अलावा एथर को को-फाउंडर्स मिलकर 40 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे. इसके अलावा भी कुछ और निवेशक कंपनी में पैसा डालेंगे.
बड़े प्लान का पार्ट
कंपनी ने जून में 2500 करोड़ रुपये जुटाने के प्लान को मंजूरी दी थी. तब प्लान यह किया गया था कि 1500 करोड़ रुपये क्यूआईपी के जरिए जुटाए जाएंगे और बाकी 1000 करोड़ प्रेफेरेंशियल इश्यू के जरिए जुटाए जाएंगे. हालांकि, मनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक अब ये 1200 करोड़ रुपये प्रेफरेंशियल इश्यू के रास्ते उठाए जा रहे हैं.
अब बात सरकारी निवेश की
दरअसल, सरकार 200 करोड़ रुपये इंडिया-जापान फंड से निकाल कर देगी. यह फंड 60 करोड़ डॉलर का है. भारतीय करेंसी में इसकी वैल्यू 4900 करोड़ रुपये है. यह फंड भारत और जापान ने एक द्विपक्षीय समझौते के तहत मिलकर बनाया है. इस फंड को नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड द्वारा मैनेज किया जाता है. ऐसा पहली बार नहीं है जब इस फंड से किसी निजी इलेक्ट्रिक व्हीलकल कंपनी को फंडिंग दी गई हो. इससे पहले भी इन कंपनियों को यहां से पैसा मिला है:
- इकेए मोबिलिटी (कमर्शियल ईवी)- 500 करोड़ रुपये का निवेश
- महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी- 400 करोड़ रुपये का निवेश
- एथर एनर्जी में पहले भी 600 करोड़ रुपये का निवेश सरकार ने किया था.
क्या है इसका मकसद
भारत सरकार 2030 तक इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को प्रमोट करना चाहती है. एथर जैसी कंपनियां 2-व्हीलर मार्केट में लीडर है. सरकार चाहती है कि लोकल ईवी कंपनियां मजबूत हों और चीन पर निर्भरता कम की जाए. इसका एक पक्ष यह भी है कि एथर जैसी कंपनियों को जब फंड मिलता है तो वह अपने इंफ्रा का विस्तार करती हैं जिसकी वजह से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है.
क्यूआईपी से 1300 करोड़
एथर ने इस 1200 करोड़ रुपये के प्रेफरेंशियल इश्यू के 1300 करोड़ रुपये का क्यूआईपी यानी क्वॉलिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट भी लॉन्च कर दिया है. यानी जून में कंपनी को बोर्ड से 2500 करोड़ रुपये जुटाने की जो अनुमति मिली थी वह रकम इस तरह से पूरी होती है. क्यूआईपी के तहत हर शेयर 1,169.70 रुपये का होगा.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

