Wednesday, July 15, 2026
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बिना पहचान-पत्र और वर्दी के चल रहे हैं दवा वितरण: BDK अस्पताल में फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन का उल्लंघन, जवाबदेही तय करने में नाकाम प्रशासन, मरीजों की सुरक्षा दांव पर – Jhunjhunu News




झुंझुनूं के सबसे बड़े जिला अस्पताल (BDK) का दवा वितरण केंद्र, जहां से मरीजों को जीवनरक्षक दवाइयां मिलती हैं, वहां फार्मासिस्ट बिना किसी पहचान के ‘अदृश्य’ बनकर काम कर रहे हैं। न वर्दी, न नेम प्लेट और न ही कोई आधिकारिक पहचान। अस्पताल की इस लापरवाही ने यह साबित कर दिया है कि यहां सरकारी नियमों का पालन सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन का उल्लंघन ​BDK अस्पताल के दवा काउंटर पर रोजाना हजारों लोग अपनी बीमारी का इलाज के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें वहां कौन दवा दे रहा है, यह कोई नहीं जानता। फार्मासिस्टों का सामान्य कैजुअल कपड़ों में ड्यूटी करना न केवल फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन का उल्लंघन है, बल्कि यह मरीजों के लिए असुरक्षित भी है। जब कोई मरीज बिना नेम प्लेट वाले व्यक्ति से उसकी योग्यता या दवा के बारे में सवाल पूछता है, तो विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। अगर दवा वितरण में कोई बड़ी चूक होती है या गलत दवा दी जाती है, तो मरीज शिकायत करने के लिए किसके पास जाए? बिना नाम और पदनाम के, जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर अनुशासित, तो फार्मासिस्ट क्यों मनमर्जी पर ​बीकेडी अस्पताल में एक तरफ अस्पताल के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन पूरी तरह से ड्रेस कोड और नेम प्लेट के साथ अपनी ड्यूटी निभाते दिखते हैं। दूसरी तरफ, दवा काउंटर पर तैनात फार्मासिस्टों की मनमानी को अस्पताल प्रशासन ने खुली छूट दे रखी है। ​पड़ोसी राज्यों से सीखे प्रशासन ​हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों में फार्मासिस्टों के लिए यूनिफॉर्म में होना अनिवार्य है, जो वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी बनाता है। इसके विपरीत, झुंझुनूं का जिला अस्पताल इन मानकों की अनदेखी कर रहा है।
क्या कहता है फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) फार्मासिस्ट के लिए सफेद कोट या एप्रन पहनना अनिवार्य है । ​ सीने पर नेम प्लेट, पदनाम और आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नंबर होना कानूनी आवश्यकता है ताकि मरीज पहचान सके कि वह एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से दवा ले रहा है।
​दवा काउंटर पहले भी रहा विवादों में ​BDK अस्पताल का दवा काउंटर पहले भी विवादों में रहा है। कुछ समय पहले रात के समय गलत दवा देने और मरीजों के साथ बदसलूकी करने जैसी गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।



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