नई दिल्ली. जब कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी देश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताए और उसी समय उसकी विकास दर का अनुमान भी घटा दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर दोनों बातें एक साथ कैसे सही हो सकती हैं. भारत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ है. IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.5 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया है. हालांकि, इसके बावजूद संस्था का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी बढ़त बनाए रखेगा. यानी ग्रोथ रेट में मामूली कमी का मतलब यह नहीं है कि भारत की रफ्तार दूसरे बड़े देशों से कम हो गई है.
IMF का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में कुछ ऐसे जोखिम हैं, जो आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं. सबसे बड़ा जोखिम मानसून को लेकर है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है, तो खरीफ फसल पर असर पड़ सकता है. इससे ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर होने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है. ऐसे हालात का असर अर्थव्यवस्था की कुल वृद्धि पर भी पड़ सकता है.
दुनिया की सुस्ती का भी पड़ेगा असर
भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग पर काफी हद तक निर्भर है, लेकिन निर्यात भी अहम भूमिका निभाता है. IMF का कहना है कि अमेरिका, चीन और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती का असर भारत के निर्यात पर पड़ सकता है. अगर वैश्विक मांग कमजोर रहती है, तो भारतीय कंपनियों के ऑर्डर और उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है. यही वजह है कि संस्था ने वैश्विक हालात को भी ग्रोथ अनुमान में कटौती का एक कारण माना है.
घरेलू चुनौतियां भी बनी हुई हैं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी निवेश में अभी उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई है. इसके अलावा उपभोक्ता मांग में भी कुछ नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती बरकरार है.
अच्छी खबर भी दी IMF ने
जहां FY27 के लिए अनुमान थोड़ा घटाया गया है, वहीं IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है. यानी मौजूदा वित्त वर्ष के प्रदर्शन को लेकर संस्था पहले से ज्यादा आशावादी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लंबी अवधि में भारत के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की मजबूत संभावना है. इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता निवेश, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और लगातार किए जा रहे संरचनात्मक सुधारों को अहम वजह माना गया है.
सरकार और IMF के अनुमान में कितना अंतर?
भारत सरकार ने FY27 के लिए 6.5 से 7 फीसदी के बीच आर्थिक वृद्धि का अनुमान जताया है. इसके मुकाबले IMF का 6.4 फीसदी का अनुमान थोड़ा कम है. हालांकि, दोनों अनुमानों के बीच बड़ा अंतर नहीं है और दोनों ही मानते हैं कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाले देशों में शामिल रहेगा.
IMF ने क्या सलाह दी?
रिपोर्ट में IMF ने सुझाव दिया है कि अगर मानसून कमजोर रहता है, तो खाद्य आपूर्ति बनाए रखने के लिए बफर स्टॉक का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और निजी निवेश बढ़ाने के लिए सुधारों की रफ्तार बनाए रखने की भी सलाह दी गई है. कुल मिलाकर, IMF की रिपोर्ट भारत की विकास कहानी पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह बताती है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद के बावजूद कुछ अल्पकालिक चुनौतियां मौजूद हैं. इन्हीं जोखिमों को देखते हुए FY27 के ग्रोथ अनुमान में मामूली कटौती की गई है, जबकि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को लेकर संस्था अब भी सकारात्मक बनी हुई है.

