Sunday, July 5, 2026
Homeबिज़नेसPF कटने का बदला पूरा गणित, जानिए आपकी टेक-होम सैलरी बढ़ेगी या...

PF कटने का बदला पूरा गणित, जानिए आपकी टेक-होम सैलरी बढ़ेगी या घटेगी


Last Updated:

EPF Scheme 2026: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना-2026 29 जून से लागू हो चुकी है. नई व्‍यवस्‍था में पीएफ कटौती का गणित पूरी तरह बदल चुका है. अब पीएफ अकाउंट में कर्मचारी और नियोक्‍ता के लिए हर महीने 1800-1800 रुपये जमा कराना अनिवार्य कर दिया है. पहले बेसिक सैलरी और महंगाई भत्‍ते का 12-12 फीसदी जमा कराना दोनों के लिए अनिवार्य था.

ख़बरें फटाफट

Zoom

अब हर महीने ईपीएफ में सिर्फ ₹1,800-₹1,800 का ही अनिवार्य योगदान तय कर दिया गया है. (Photo : AI)

नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना-2026 को नोटिफाई कर दिया है. 29 जून 2026 से लागू हुए इस नए नियम ने पीएफ कटौती के दशकों पुराने नियम को बदल दिया है. पीएफ कटौती के इस नए गणित के आने के बाद अब हर सैलरीड क्लास के मन में यही सवाल है कि हर महीने उनके हाथ में आने वाली सैलरी (Take-Home Salary) बढ़ेगी या घट जाएगी?

अब तक पीएफ का नियम यह था कि कर्मचारी और कंपनी (Employer) दोनों को कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 12-12% हिस्सा पीएफ खाते में जमा करना होता था. इस वजह से जिसकी सैलरी ज्यादा होती थी उसका पीएफ भी ज्‍यादा कटता था. लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना-2026 में अब हर महीने ईपीएफ में सिर्फ ₹1,800-₹1,800 का ही अनिवार्य योगदान तय कर दिया गया है. अगर कोई कर्मचारी या कंपनी अपनी मर्जी से इससे ज्यादा पैसा पीएफ में डालना चाहते हैं, तो वो डाल सकते हैं.

आपकी टेक-होम सैलरी पर क्‍या होगा असर?

लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसडी सिंह एंड एसोसिएट्स के संस्थापक चार्टर्ड अकाउंटेंट सूरज सिंह का कहना है कि अगर आप पहले हर महीने पीएफ में ₹1,800 से ज्यादा की कटौती करवा रहे थे और अब यह अनिवार्य सीमा घटकर सिर्फ ₹1,800 रह जाती है, तो आपकी सैलरी से होने वाली कटौती कम हो जाएगी. ऐसी स्थिति में यदि आप अपनी तरफ से एक्स्ट्रा वॉलंटरी पीएफ नहीं कटवाते हैं तो आपकी इन-हैंड सैलरी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका सीटीसी स्ट्रक्चर कैसा है.

मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹50,000 प्रति माह है. पहले कर्मचारी और कंपनी दोनों 12-12% के हिसाब से ₹6,000-₹6,000 जमा करते थे. यानी हर महीने खाते में कुल ₹12,000 जमा होते थे. अब अनिवार्य योगदान केवल ₹1,800-₹1,800 होगा. यानी हर महीने खाते में सिर्फ ₹3,600 ही जमा होंगे. सैलरी के लिहाज से देखें तो कर्मचारी के हिस्से के जो ₹4,200 (₹6,000 – ₹1,800) पहले पीएफ में कट जाते थे, वे अब बचेंगे और उसकी टेक-होम सैलरी को बढ़ा सकते हैं.

किन कर्मचारियों पर होगा इसका ज्यादा असर?

इस नए नियम का सबसे बड़ा असर हाई-सैलरी वाले कर्मचारियों पर पड़ने वाला है, जिनकी बेसिक सैलरी ज्यादा है. उनका एक बड़ा पीएफ हिस्सा अब अनिवार्य से हटकर स्वैच्छिक श्रेणी में आ जाएगा. दूसरी तरफ, जिन कर्मचारियों की सैलरी पहले से ही कम है और उनका पीएफ योगदान ₹1,800 के आसपास ही बनता था, उन पर इस नई व्यवस्था का कोई खास या बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा.

फायदा या नुकसान?

भले ही हर महीने हाथ में ज्यादा कैश आना सुनने में अच्छा लग रहा हो, लेकिन कई लोगों का मानना है कि इसके लॉन्‍ग टर्म में नुकसान होंगे. विशेषज्ञ प्रणव साई एस ने आगाह किया कि यदि EPF में जाने वाली राशि कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन के रूप में मिलने लगे, तो इससे भविष्य में उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स प्रभावित हो सकती हैं. कम EPF योगदान और कंपाउंडिंग का लाभ घटने से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाला फंड काफी छोटा हो सकता है.



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments