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Sebi Ban Action : बाजार नियामक सेबी ने पंप एंड डंप मामले में 221 कंपनियों पर बैन लगा दिया है. बाजार नियामक ने अपनी जांच में पाया कि साजिशकर्ताओं ने इस हेरफेर से करीब 144 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है. सेबी ने इस जांच के बाद एक निवेशक पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
सेबी ने पंप एंड डंप मामले में एक निवेशक पर 10 करोड़ का जुर्माना लगाया है.
नई दिल्ली. बाजार नियामक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ‘पंप-एंड-डंप ऑपरेशन’ यानी प्रतिभूति धोखाधड़ी मामले में 221 इकाइयों पर 7 साल तक के लिए बैन लगा दिया है. इन कंपनियों को अब 7 साल तक न तो शेयर बाजार में एंट्री मिलेगी और न ही ट्रेडिंग की अनुमति. साथ ही व्यक्तिगत निवेशक हनीफ शेख पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है. सेबी ने यह कार्रवाई लंबी जांच और तमाम शिकायतों के बाद की है.
सेबी ने बुधवार को बताया कि ‘पंप-एंड-डंप ऑपरेशन’ शेयर बाजार धोखाधड़ी का एक रूप है. इसमें धोखाधड़ी करने वाले पहले किसी छोटी या कम कारोबार वाली कंपनी के शेयर खरीदते हैं. फिर सोशल मीडिया या बल्क मैसेजिंग के जरिये झूठी अफवाहें फैलाकर शेयर की कीमत को आर्टिफिशियल रूप से बढ़ाते (पंप) हैं और फिर शेयरों को उच्च कीमतों पर बेच देते (डंप) हैं. इससे खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान होता है, क्योंकि वास्तव में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन उसके हालात से मैच नहीं खाते.
इन कंपनियों में हुआ था हेरफेर
सेबी ने बताया कि मॉरिया उद्योग लिमिटेड, 7एनआर रिटेल, दार्जिलिंग रोपवे कंपनी, जीबीएल इंडस्ट्रीज और विशाल फैब्रिक्स लिमिटेड के शेयरों में शेख और उसकी सहयोगी कंपनियों ने हेरफेर किया है. शेख इस मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता है. यह मामला साल 2017 से साल 2020 के बीच पांच शेयरों में बड़े पैमाने पर ‘पंप-एंड-डंप’ से जुड़ा है. सेबी ने 394 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि हनीफ शेख ने एक सुनियोजित धोखाधड़ी वाली साजिश रची, जिसमें 200 से अधिक आपस में जुड़े हुए संस्थान भी शामिल थे.
कई इन्फ्लुएंसर पर भी शिकंजा
सेबी ने अपनी जांच में पाया कि धोखाधड़ी में शामिल संस्थानों को ‘पीवी इन्फ्लुएंसर’, ‘कोलैबोरेटर’ और ‘ऑफलोडर’ जैसी भूमिकाएं दी गई थीं, ताकि अवैध लाभ को विभिन्न माध्यमों से घुमाकर शेख या उसके नियंत्रण वाली कंपनियों तक पहुंचाया जा सके. सेबी के अनुसार, इन इकाइयों ने एकमुश्त लेनदेन के जरिए शेयरों की कीमत और बाजार भाव को आर्टिफिशियल रूप से बढ़ाया और बाद में ऊंचे दाम पर शेयर बेचकर निवेशकों को फंसाया. यह साजिश सुनियोजित, व्यापक और औद्योगिक स्तर पर संचालित थी, जिससे बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ.
144 करोड़ का कमाया मुनाफा
सेबी के अनुसार, इस घोटाले से साजिशकर्ताओं ने करीब 143.79 करोड़ रुपये का अवैध लाभ अर्जित किया. सेबी ने हनीफ शेख को 7 वर्षों के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया. उनसे जुड़ी पांच इकाइयों को 6 साल के लिए बैन करते हुए उन पर दो-दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. सेबी ने सभी दोषियों से 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई 12 फीसदी सालाना ब्याज सहित वसूलने का भी आदेश दिया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

