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India-America Trade Deal : भारत और अमेरिका एक बार फिर बातचीत की मेज पर बैठने वाले हैं. ट्रंप की ओर से शुरू किए गए व्यापार युद्ध ने पहले ही भारतीय कारोबारियों को काफी नुकसान पहुंचाया है, अब इस बातचीत के जरिये उसकी भरपाई करने की कवायद शुरू होगी. अप्रैल के आखिर में होने वाली इस मुलाकात से दोनों देशों को क्या उम्मीदें हैं और इसका क्या परिणाम निकल सकता है.
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत फिर शुरू होने वाली है.
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान युद्ध रोककर शांति की मेज पर बैठने को तैयार हो गए हैं. इससे इतर बातचीत की एक और मेज भारत के लिए भी सजाई जा रही है. यहां भी ‘युद्ध’ रोककर फायदे पर चर्चा की जाएगी, लेकिन यह युद्ध बारूद का नहीं बिजनेस का है. अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने एक दिन पहले जानकारी दी है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर व्यापार समझौते पर बातचीत करने अप्रैल के आखिर तक अमेरिका आएगा. इससे पहले फरवरी में इस पर लगभग सहमति बन गई थी, लेकिन अब इसे अंतिम रूप दिए जाने को लेकर दोनों देश साथ आएंगे. इससे पहले पिछले घटनाक्रमों पर एक नजर डालते हैं कि अब तक दोनों देशों ने व्यापार समझौतों पर क्या सहमति जताई और किन बातों पर विरोधाभास है.
अभी दो महीने पहले की ही तो बात है, जब फरवरी में भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा पेश किया था. इस फ्रेमवर्क को मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद दी गई थी. हालांकि, इससे पहले कि इस फ्रेमवर्क को पूरी तरह मंजूरी दी जाती, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के फैसले को ही रद्द कर दिया था. ऐसे में कयास लगाए जाने लगे कि अब भारत अपनी शर्तों में बदलाव की मांग कर सकता है. हालांकि, असल में इस पर क्या बदलाव आएगा यह तो अप्रैल के आखिर में दोनों देशों के बीच होने वाली अंतिम बातचीत के बाद ही पता चलेगा.
भारत के लिए कितनी लाभकारी थी बातचीत
भारत के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत के बाद अमेरिका ने 25 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया था. इतना ही नहीं, रूस से तेल खरीदने पर जो 25 फीसदी की पेनाल्टी लगाई थी, उसे भी ट्रंप ने खत्म कर दिया था. इस तरह, 50 फीसदी का टैरिफ घटकर महज 18 फीसदी रह गया था. कई भारतीय उत्पादों पर तो अमेरिकी टैरिफ शून्य भी कर दिया गया था. इस फैसले से भारत के तमाम उत्पादों के लिए अमेरिका बाजार सस्ते हो गए और निर्यात बढ़ने की उम्मीद भी जाग गई थी.
अमेरिका को क्या फायदा मिला
अमेरिका ने जब भारत को टैरिफ पर 32 फीसदी तक राहत दी तो भारत ने भी अमेरिका के औद्योगिक सामान और कृषि उत्पादों (दूध व मांस को छोड़कर) पर टैरिफ कम करने और बाजार खोलने पर सहमति दे दी थी. हालांकि, यह सारी बातें अंतरिम तौर पर थी और इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है. दोनों देशों ने बातचीत के सिलसिले को आगे भी जारी रखने और द्विपक्षीय व्यापारिक समझौतों पर बढ़ने को लेकर सहमति जताई. इसमें सप्लाई चेन, तकनीक और डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. दोनों देशों ने आपसी व्यापार को आने वाले 5 साल में 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा है.
क्यों हुई समझौते में देरी
अभी दोनों देश एक-दूसरे की बातों और शर्तों पर मंथन कर ही रहे थे कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में टैरिफ पर ट्रंप के फैसले को रद्द कर दिया. हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने हार नहीं मानी और टैरिफ को नए सेक्शन 301 के जरिये नए सिरे से लगाने का फैसला किया. उन्होंने भारत सहित कई देशों के खिलाफ जांच का आदेश भी दे दिया. फिलहाल समझौता अभी फाइनल नहीं हुआ है और सिर्फ इसका फ्रेमवर्क ही बनाया गया है. यही वजह है कि दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर साथ बैठने वाले हैं.
अब कैसे तय हुई बातचीत की डेट
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बाकायदा ऐलान कर दिया है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल अप्रैल के आखिर में वॉशिंगटन जाएगा और व्यापार समझौते पर बातचीत करेगा. गोर ने यह ऐलान भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी की हालिया अमेरिका यात्रा के बाद किया है. भारतीय डेलिगेशन की हालिया यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने और डील को फाइनल करने के लिए होगी. इस प्रतिनिधिमंडल ने वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी भी होंगे.
बातचीत से भारत की उम्मीदें
- दोनों देश फरवरी वाले अंतरिम समझौते को कानूनी रूप देने पर जोर डालेंगे और टैरिफ पर पूरी स्पष्टता भी चाहेंगे.
- भारत का जोर इस बात पर होगा कि उसके कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, दवा और कृषि उत्पादों को अमेरिका का तरजीही बाजार मिले.
- डेयरी, पोल्ट्री और एग्रीकल्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा पर अमेरिका से गारंटी.
- भारत और अमेरिका के बीच सप्लाई चेन, तकनीक ट्रांसफर और निवेश बढ़ाने पर फोकस रहेगा.
- कुल मिलाकर भारत एक बेहतर डील की गुंजाइश लेकर जाएगा, जो उसके उत्पादों को अमेरिकी बाजार में ज्यादा मौके दिलाएं.
क्या चाहता है अमेरिका
- अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस बात पर जोर देगा कि उसके इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को भारतीय बाजार में बिना किसी बाधा के प्रवेश मिल सके .
- अमेरिका की सबसे कठिन और बड़ी शर्त यह हो सकती है कि भारत हमेशा के लिए रूस से तेल की खरीद बंद कर दे.
- गूगल, फेसबुक जैसी अमेरिकी टेक कंपनियों से डिजिटल सर्विस टैक्स और डाटा लोकलाइजेशन जैसे मुद्दों पर भी भारत से छूट की दरकार रहेगी.
- अगर यह बातचीत सफल रही और दोनों देश कुछ शर्तों के साथ डील पर सहमति जताते हैं तो इसका फायदा व्यापार और सहयोग को मिलेगा.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

