नई दिल्ली: मशहूर एक्ट्रेस जीनत अमान को ‘न्यूज18 इंडिया’ ने ‘अमृत रत्न सम्मान’ से नवाजा. उन्होंने सम्मान के लिए न्यूज18 इंडिया का आभार जताया और अपनी जिंदगी और फिल्मी सफर पर तमाम बातें कीं, जिससे लोग ज्यादा वाकिफ नहीं हैं. उन्होंने जब हिंदी सिनेमा में कदम रखा, तो हीरोइन की परिभाषा बदल दी. उन्होंने निजी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव झेले.
जब जीनत अमान से पूछा गया कि वे अपने निर्णयों और परिणामों को कैसे देखती हैं, तो वे बोलीं, ‘जब आप कोई निर्णय लेते हैं, तो आपको उसके लिए तैयार रहना पड़ता है. फिर वह निजी है या पेशेवर, आपको बहाव के साथ बढ़ना पड़ता है. वे अपने दौर की ग्लैमरस हीरोइन थीं. उन्होंने एक्टिंग से पहले जर्नलिज्म की, फिर सौंदर्य प्रतियोगिता से देश का मान बढ़ाया. जीनत अमान अपनी ग्लैमरस इमेज के लिए मशहूर हैं, मगर वह पढ़ाई में भी अच्छी थीं. वे अपनी हीरोइन बनने के निर्णय पर कहा, ‘जब मेरी प्रिंसिपल को पता चला, तो वह रोईं. वह बोलीं कि राजनीति में जा सकती थी, हमारे देश को रीप्रेजेंट कर सकती थीं. इत्तेफाक की बात है कि मैं फिल्म में आ गई. मेरे पिता मशहूर लेखक थे. वे मुस्लिम थे और मां हिंदू थीं. मां की तरह से मेरा नाम ललितेश्वरी है.’
मुस्लिम पिता-हिंदू मां की बेटी हैं जीनत अमान
जीनत आगे कहती हैं, ‘मेरी मां हिंदू महिला थीं. मेरी परवरिश उन्हीं के साथ हुई. मैं धार्मिक नहीं हूं. कैथोलिक स्कूल से पढ़ी हूं. मेरा एक्सपोजर पूरी दुनिया का है. मैं किसी एक धर्म से नहीं जुड़ी. सब धर्म अच्छे हैं. कोई धर्म नहीं कहता है कि आप बुरा करें.’ उन्होंने इंसानियत को अपना धर्म बताया. जब जीनत से पूछा गया कि अगर कोई लड़की हीरोइन बनना चाहती है, तो उसे आप क्या सलाह देंगी? वे बोलीं, ‘किसी का डुप्लीकेट मत बनो, अपनी मौलिकता पेश करो.’
जीनत अमान ने जिंदगी को लेकर अपना नजरिया जाहिर किया.
जीनत अमान ने अपनी जिंदगी की मुश्किलों को लेकर कहा, ‘कुछ भी हुआ है आपकी जिंदगी में, आपको बढ़ते रहना पड़ता है. यह विकास के बारे में है. उतार-चढ़ाव है, उससे आप सीखते हैं. जीनत अमान ने फिल्में चुनने का अपना नजरिया पेश किया. वे बोलीं, ‘हरे रामा हरे कृष्ण के बाद लोगों ने मुझे गुड-बैड गर्ल के किरदारों में चुनना पसंद किया . वे सती-सावित्री जैसे किरदार नहीं हैं. उनके ग्रे शेड्स हैं. मैं देखती थी कि कौन अच्छी फिल्म बनाएगा. कौन फिल्म को लेकर जुनूनी है. उस वक्त के सभी बड़े फिल्ममेकर्स के साथ काम करने के बारे में सोचती थी. मनमोहन देसाई, फिरोज खान, राज कुमार, शम्मी कपूर थे. लोग पूछते हैं कि कौन पसंदीदा हीरो है, जबकि पूछना चाहिए कि कौन है फेरवरेट डायेरक्टर? देव आनंद, राज कपूर, फिरोज खान के साथ काम करके बहुत अच्छा अनुभव मिला.
‘सुंदरता का फायदा मिलता है’
जीनत अमान के गाने भी खूब मशहूर हुए. उनमें से एक गाना है- ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को.’ जिसे 50 साल बाद भी दोहराया जा रहा है. वे बोलीं, ‘मैंने कुछ साल पहले पढ़ा कि यह हिंदी का सबसे मशहूर गाना है. जीनत को हमेशा अव्वल आना पसंद था, क्योंकि वह हमेशा चाहती कि उनकी मां उनसे खुश रहें. जीनत ने सिनेमा पर कहा, ‘फिल्म मेकिंग एक बिजनेस हैं. अगर ऑडियंस ने किसी को खास रूप में स्वीकार कर लिया है, तो वह उसके साथ जाते हैं. अगर कोई झरने के नीचे देखना चाहता है, तो वह बार-बार आएगा. जब उनसे पूछा गया कि सुंदरता क्या बर्डन है, तो वे बोलीं, ‘नहीं, सुंदरता का फायदा मिलता है. मैंने नहीं, प्रोड्यूसर ने इसका फायदा उठाया.
अफवाहों पर जीनत अमान की दो टूक
जब जीनत अमान से उनकी जिंदगी से जुड़े अफवाहों पर बात हुई, तो वे बोलीं, ‘मुझ पर किसी ने चार पेज का आर्टिकल लिखा था. जिस शख्स के साथ कभी मुलाकात नहीं हुई, लोगों ने उसके साथ मेरा रिश्ता जोड़ दिया. आप किस-किस को जवाब देंगे? अब इंस्टाग्राम पर अपनी अपनी बात कहती हूं.’ गौरतलब है कि एक्ट्रेस को शुरुआती कुछ फिल्मों के बाद असली कामयाबी देव आनंद की फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ से मिली, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था. उन्हें इसके लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. उन्होंने 1970 के दशक में ‘यादों की बारात’, ‘धर्मवीर’, ‘द ग्रेट गैम्बलर’ और ‘डॉन’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, जबकि ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में उनके अभिनय की खूब चर्चा हुई.

