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RBI Forex Update : रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया बुलेटिन में बताया कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद मार्च में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट दर्ज गई, जिसकी वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में से करीब 94 हजार करोड़ रुपये मूल्य के डॉलर की खुले बाजार में बिक्री करनी पड़ी. इसका मकसद भारतीय रुपये की कमजोरी को थामना था.
रुपया कमजोर होने पर आरबीआई खुले बाजार में डॉलर की बिक्री करता है.
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के सामने ऐसी मुसीबत तो कोरोनाकाल में भी नहीं आई थी. अभी एक तरफ तो कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल और विदेशी मुद्रा के रिजर्व पर दबाव बढ़ रहा है तो दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने इस मुसीबत को और बढ़ा दिया है. यही वजह है कि आरबीआई को अपने खजाने से हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है. मार्च में ही आरबीआई ने करीब 20 अरब डॉलर खुले बाजार में डाले हैं.
आरबीआई ने अपनी मासिक बुलेटिन में बताया कि मार्च में हाजिर मुद्रा बाजार में शुद्ध आधार पर 9.76 अरब डॉलर की बिक्री की गई. इससे पहले केंद्रीय बैंक लगातार दो महीनों तक अमेरिकी डॉलर की खरीद कर रहा था. फरवरी में आरबीआई ने हाजिर बाजार से 7.41 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की थी. लेकिन, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए मार्च में विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर को बेचकर रुपया खरीदना पड़ा.
क्या कहते हैं मार्च के आंकड़े
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, मार्च में केंद्रीय बैंक ने 19.88 अरब डॉलर की खरीद की जबकि 29.64 अरब डॉलर की बिक्री करनी पड़ी. इस तरह शुद्ध बिक्री 9.76 अरब डॉलर (करीब 94 हजार करोड़ रुपये) की रही. अप्रैल में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर हुआ. हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा और आरबीआई के विभिन्न उपायों के चलते पिछले महीने यह गिरावट सीमित रही. इसके बाद रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप रही, जो पश्चिम एशिया की स्थिति को दर्शाती है.
मजबूत है विदेशी मुद्रा भंडार
आरबीआई ने बताया कि वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) के आधार पर भी अप्रैल में रुपये में गिरावट दर्ज की गई. इसका कारण नाममात्र प्रभावी विनिमय दर (एनईईआर) में कमजोरी और देश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की तुलना में अपेक्षाकृत कम मूल्य सूचकांक रहा. बुलेटिन के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में बना हुआ है. इस विदेशी मुद्रा भंडार से भारत लगभग 11 महीने तक आयात का भुगतान कर सकता है जबकि अपने बकाया विदेशी कर्ज का लगभग 90 फीसदी चुका सकता है.
अमेरिकी विदेशी मंत्री ने दिया राहत भरा संकेत
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उस टिप्पणी के बाद मुद्रा बाजार को कुछ राहत मिली, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान से जुड़ी कूटनीतिक वार्ता रचनात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह एक साल पहले की तुलना में कुल और शुद्ध दोनों आधार पर अधिक रहा. मार्च में शुद्ध एफडीआई लगातार दूसरे महीने सकारात्मक रहा जबकि सकल एफडीआई प्रवाह में कुछ सुस्ती दर्ज की गई. इस दौरान भारत से बाहर जाने वाले एफडीआई में कमी आई और इसका आधे से अधिक हिस्सा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और नीदरलैंड में निवेश किया गया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

