Friday, May 22, 2026
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करीब आ रहा 2008 जैसी मंदी का दौर! हॉर्मुज संकट से कांप सकती है ग्लोबल इकोनॉमी


दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमना है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) अस्थाई रूप से बंद होने की स्थिति में दुनिया की अर्थव्यवस्था 2008 की बड़ी मंदी जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर सकती है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रैपिडन एनर्जी ग्रुप ने इसके बारे में चेतावनी देते हुए ये कहा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के बहुत बड़े हिस्से के तेल निर्यात का मुख्य रास्ता है.

तेल की आपूर्ति पर बड़ा असर

रैपिडन एनर्जी ग्रुप के अनुसार, अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अगस्त तक बंद रहा तो तीसरी तिमाही में रोजाना करीब 60 लाख बैरल तेल की कमी हो सकती है. इससे तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ेंगी. कंपनी का बेस केस यह मानता है कि जलडमरूमध्य जुलाई में फिर खुल जाएगा. इस स्थिति में गर्मियों में ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है और तेल की मांग औसतन 26 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो सकती है.

मंदी का खतरा बढ़ा

अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ज्यादा समय सही रूप से नहीं होती है तो 2026 में दुनिया भर में तेल की खपत पहली बार घट सकती है. कई प्रमुख एनालिस्ट्स पहले ही इस साल ग्लोबल तेल मांग में कमी की उम्मीद जता रहे हैं. तेल की कीमतें फरवरी के अंत से अब तक लगभग दोगुनी हो चुकी हैं. इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास धीमा होने का डर पैदा हो गया है.

रैपिडन के एनालिस्ट ने कहा कि मौजूदा आर्थिक स्थिति 1970 के दशक या 2007-08 जितनी गंभीर नहीं है क्योंकि अर्थव्यवस्थाएं अब कम तेल पर निर्भर हैं और मौद्रिक नीतियां ज्यादा भरोसेमंद हैं. लेकिन फिर भी लगातार तेल की कीमतों में उछाल वित्तीय और आर्थिक कमजोरियों को और बढ़ा सकता है.

2008 की मंदी किस वजह से हुई थी?

29 सितंबर 2008 को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी. बाजार खुलते ही डाऊ जोन्स करीब 7 फीसदी, एसएंडपी 500 करीब 8.8 फीसदी और नेस्डेक करीब 9 फीसदी टूट गया. एक ही दिन में निवेशकों के करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर डूब गए. इस बड़ी आर्थिक मंदी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका का बड़ा बैंक लीमैन ब्रदर्स बना. उस समय अमेरिका में होम लोन बहुत सस्ता मिल रहा था, इसलिए लोगों ने बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर घर खरीदने शुरू कर दिए और प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं.

बढ़ती मांग को देखकर लीमैन ब्रदर्स ने कई होम लोन कंपनियां खरीद लीं, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में लोग लोन चुकाने में नाकाम होने लगे. कई लोगों को बिना सही जांच-पड़ताल के ही लोन दे दिया गया था. इससे डिफॉल्ट तेजी से बढ़े और मार्च 2008 में अमेरिका की बड़ी होम लोन कंपनी बेयर स्टर्न्स डूब गई. इसके बाद लीमैन ब्रदर्स के शेयर भी तेजी से टूटे और 15 सितंबर 2008 को बैंक ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया. इसके बाद पूरी दुनिया में आर्थिक संकट फैल गया, जिसका असर कई सालों तक देखा गया था.

क्या होगा अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नहीं खुला?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के अगस्त तक बंद रहने पर मांग को और ज्यादा कम करना पड़ेगा ताकि आपूर्ति की कमी को संतुलित किया जा सके. इससे तेल के भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं. यहां तक कि अगर अगस्त की शुरुआत में फिर से शुरू भी हो जाए तो राहत मिलने में समय लगेगा. सितंबर तक कच्चे तेल के भंडार कम होते रहेंगे.

ग्लोबल इकोनॉमी पर असर

यह स्थिति न सिर्फ तेल बाजार को प्रभावित करेगी बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकती है. महंगाई बढ़ने, विकास रुकने और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आने का खतरा है. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं.

रैपिडन एनर्जी ग्रुप की रिपोर्ट साफ बताती है कि होर्मुज की स्थिति सही होना दुनिया के लिए कितनी जरूरी है. अगर युद्ध के कारण यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो 2008 जैसी मंदी दोहराई जा सकती है. फिलहाल बाजार तेल की आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल से जूझ रहे हैं.



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