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Pinky devi success story : पति की मौत के बाद जहां कई लोग जिंदगी से हार मान लेते हैं, वहीं जहानाबाद की पिंकी देवी ने संघर्ष को अपनी ताकत बना लिया. चार छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. शादी में मिले गहनों और मामूली पूंजी से शुरू की गई किराना दुकान को उन्होंने मेहनत के दम पर सफल व्यवसाय में बदल दिया. आज वह किराना दुकान के साथ पोल्ट्री फार्म भी चला रही हैं और हर महीने करीब 35 हजार रुपये की कमाई कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं. उनकी कहानी आत्मनिर्भरता, मेहनत और अटूट हौसले की प्रेरणादायक मिसाल है.
हौसले बुलंद हो, तो इंसान मुश्किल से मुश्किल हालात को मात दे सकता है. जहानाबाद के काको प्रखंड स्थित सैदाबाद गांव की रहने वाली पिंकी देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, वो मुश्किल हालातों से लड़कर बाहर निकली और अब मिसाल पेश कर रही हैं.

12 साल पहले अपने पति को खो दी और उस वक्त कंधों पर 4 छोटे बच्चों की जिम्मेदारी. उस विकट परिस्थिति में भी खुद को संभालते हुए मेहनत की और घर की स्थिति को संवारने का कार्य किया. आज खुद का किराना दुकान और एक पोल्ट्री फार्म भी है.

पिंकी देवी की शादी कम उम्र में हो जाती है. पति भी किसी तरह का कोई बड़ा काम नहीं करते जिससे आमदनी हो सके. ऐसे में शादी में चढ़ा सोने का गहना और बच्चा जन्म लेने के बाद मिला हुआ ₹1400 से किराना दुकान शुरू करते हैं.
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पिंकी देवी बताती हैं कि जिस वक्त दुकान की शुरुआत की थी उस वक्त कोई दूसरी दुकान गांव में नहीं थी, इस कारण बिक्री भी अच्छी खासी हो रही थी. कुछ समय बीता तो बिक्री और बढ़ती चली गई. एक दिन की कमाई ₹5000 तक होने लगी. इन पैसों को बेटी की शादी के लिए बैंक में भी जमा किया.

इसी बीच 2013 में पति की मौत हो जाती है. जिस समय पति की मौत हुई उस वक्त बच्चा गोद में था. ऐसे में सारी पति का दुःख और बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी देखना कंधों पर आ चुका था. एक तरफ ऐसा लगता कि कुछ कर लूं? फिर लगता इन बच्चों का क्या होगा? इस बीच मेहनत और हौसला पस्त न होने का रास्ता तलाश लिया. अब घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा लिया.

इसके बाद लगातार मेहनत की. किराना दुकान से ही अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई और एक बेटी की शादी भी हाल में की है. पिंकी देवी ने Local 18 से कहा कि आज सब कार्य खुद से करती हूं. पति को खोने का गम है, लेकिन दूसरी ओर बच्चों के परिवरिष की जिम्मेदारी. यही कारण है कि हौसला कभी पस्त नहीं होता.

दिन रात मेहनत करती हूं और लगी रहती हूं. सुबह से दोपहर तक घर का किराना दुकान संभालना और फिर 3 बजे से पोल्ट्री फार्म की देखभाल करना. इन दोनों व्यवसाय से हर महीने 35 हजार रुपए तक कमाई कर लेती हैं और इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ खुद का और घर का खर्च चलता है. इसी प्रकार से हमारी जिन्दगी आगे बढ़ रही है.

