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हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री सीएम डॉ. मोहन यादव के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी। इसका वीडियो सामने आया है। अब लोग इसे चटकारे लेकर शेयर कर रहे हैं।
वाकया टीकमगढ़ का है। यहां आयोजित कार्यक्रम के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव को खजुराहो के लिए रवाना होना था। वे हेलिपैड पर पहुंच चुके थे, लेकिन मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे। उन्हें भी सीएम के साथ जाना था।
सीएम हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे। हेलिकॉप्टर का दरवाजा भी बंद हो गया था और उसके पंखे घूमने लगे थे। हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के लिए तैयार था।
तभी ‘आज कुछ तूफानी करते हैं’ वाले अंदाज में मंत्री दिलीप अहिरवार की एंट्री हुई। वे दौड़ लगाते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और आखिरकार उसमें सवार हो ही गए।
खरी बात ये है कि राजनीति में भी ऊंची उड़ान भरने के लिए ऐसी ही टाइमिंग और रनिंग जरूरी होती है। मंत्री दिलीप अहिरवार ने इसका शानदार डेमो दे दिया।
टीकमगढ़ में सीएम के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी।
सिंधिया ने पत्नी के लिए ली चूड़ियां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक दिलचस्प वीडियो सामने आया है। इसमें वे अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां लेते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चूड़ियां लेते समय उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ये मेरी हाईकमान के लिए। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।
दरअसल, सिंधिया अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वहां लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जानकारी ली।
उनकी नजर चूड़ियों के एक स्टॉल पर पड़ी। वे वहां रुके और स्टॉल संचालित कर रहीं महिला सपना से बातचीत की। साथ ही चूड़ियां पसंद आने पर पत्नी के लिए गिफ्ट के रूप में ले ली।
खरी बात ये है कि राजनीति में लंबे समय से रंग जमा चुके सिंधिया अच्छी तरह जानते हैं कि अगर घर की “हाईकमान” खुश रहे, तो हम भी खुश।

अशोकनगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी के लिए चूड़ियां खरीदी।
विजयवर्गीय बोले- मैं सठिया गया हूं ‘मैं 70 साल का हो गया हूं। यूं ही सठिया गया हूं।’ इंदौर के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जैसे ही यह बात कही, वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे।
दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय कह रहे थे कि मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं, पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही है। किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है।
अब सवाल यह है कि आखिर उनका यह संदेश किसके लिए था। उनके इस बयान के राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय सरकार में अपनी उपेक्षा का दर्द जाहिर कर चुके हैं।
खरी बात ये है कि विजयवर्गीय के बयान अक्सर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे में उनका यह बेबाक अंदाज एक बार फिर नई अटकलों को जन्म दे गया।

इंदौर में एक कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं सठिया गया हूं।
मंत्री ने बात समझाने लैब सजा दी नेताओं पर कोई कुछ आरोप लगा दे तो देखने में आता है कि वे भी पलटवार करते हैं, प्रत्यारोप करते हैं, सफाई देते हैं, तथ्य रखते हैं। लेकिन मंत्री प्रतिमा बागरी ने तो पूरी लैब सजा दी। फिर ‘ड्रिंक’ वाला एक्सपेरिमेंट कर जवाब दिया।
मामला उनकी जाति से जुड़े विवाद का है, जिसमें जांच कमेटी ने माना कि मंत्री प्रतिमा बागरी एससी वर्ग से ही आती हैं। उनका जाति प्रमाण पत्र एकदम सही है।
मंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए तीन कप लिए। एक में चाय, दूसरे में कॉफी और तीसरे में ग्रीन टी ली। फिर उन्हें अलग-अलग रॉयल स्टैग के ग्लास में भर दिया। मंत्री ने बताया कि अगर वे नहीं बताएं कि इसमें क्या है, तो ये कोई नहीं बता पाएगा।
मंत्री ने बताया कि क्या इन पेय पदार्थों को दूसरे ग्लास में शिफ्ट करने से इनकी परिभाषा बदल जाएगी। क्या प्रतिमा बागरी पर आरोप लगाने से उनकी परिभाषा बदल जाएगी। मंत्री ने बताया कि उन पर लगे आरोप भी कुछ ऐसे ही हैं।
अब मंत्री का अपनी बात समझाने का ये तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है।

मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक प्रयोग कर बताया कि जाति मामले में उन्हें बेवजह घसीटा गया।
और अब अंदर की बात..
सुपरवाइजर ने करा दिया नुकसान एक सरकारी भवन के सुपरवाइजर की हठधर्मिता की वजह से सरकार को हजारों रुपए का नुकसान हो गया। अब ये नुकसान वन टाइम नहीं है, बल्कि हर बार ही सरकार को हजारों रुपए की चपत लगने वाली है।
दरअसल, राजधानी में एक सरकारी भवन है, जो निजी संस्थाओं को कार्यक्रम के आयोजन के लिए किराए पर दिया जाता है। सत्ता से बेहद नजदीकी रखने वाला एक संगठन हर बार यहां कार्यक्रम का आयोजन करता आ रहा है। इसके लिए ये संगठन बाकायदा किराया देता था और रसीद भी कटवाता था।
कुछ दिनों पहले ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने इस भवन के सुपरवाइजर से मंच पर रखी टेबल हटाने के लिए कहा, तो सुपरवाइजर ने इनकार कर दिया।
फिर क्या था, इसकी शिकायत सरकार से की गई। सरकार ने सरकारी भवन का संचालन करने वाले विभाग के एमडी से कहा। एमडी ने सुपरवाइजर को डांटने के साथ ये भी कहा कि अब इनसे किराया मत लेना।
इनपुट सहयोग – शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़), संजीव यादव (अशोकनगर), संतोष शितोले (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना)
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सिंगरौली में भाजपा विधायक रामनिवास शाह एक कार्यक्रम में नशा मुक्ति की शपथ दिला रहे थे, लेकिन उन्होंने नशा न करने की बजाय नशा करने की शपथ दिला दी। विधायक ने शपथ दिलाते हुए कहा- ‘मैं शपथ लेता हूं कि.. मैं जीवन में.. कभी नशा करूंगा..।’ दरअसल, वे ‘नहीं’ शब्द बोलना भूल गए। पूरी खबर पढ़ें

