बालाघाट जिले में मानसून की देरी से किसान चिंतित हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 25 जून तक मानसून नहीं आता है, तो धान की बुवाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस वर्ष पिछले दो सालों की तुलना में कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे उमस भरी गर्मी भी बढ़ गई है। बालाघाट एक प्रमुख धान उत्पादक जिला है, जहाँ बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। किसान अपनी बोवनी शुरू करने के लिए बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक उत्तम बिसेन ने बताया कि बालाघाट में मानसून आमतौर पर 10 से 20 जून के बीच आता है। किसान अपने खेत तैयार कर चुके हैं और बीज-खाद भी खरीद लिए हैं, लेकिन बारिश के अभाव में बुवाई रुकी हुई है। जिले में इस साल बारिश की स्थिति पिछले दो वर्षों से कमजोर है। 1 जून से 18 जून के बीच हुई बारिश के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 13.6 मिलीमीटर और वर्ष 2023 में 17.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, इस वर्ष इसी अवधि में केवल 10.3 मिलीमीटर ही वर्षा हुई है। हालांकि, मौसम विज्ञान केंद्र बड़गांव के कृषि वैज्ञानिक धर्मेंद्र अगासे ने 21 जून तक हल्की वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। उन्होंने भारत मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त पांच दिवसीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान के आधार पर यह जानकारी दी। उनके अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हल्के बादल छाए रहने, हल्की वर्षा होने, आकाशीय बिजली गिरने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी-तूफान के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है। अगासे ने जिले के किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अपने कृषि कार्यों की योजना बनाएं। धान की बुवाई, बीज उपचार और अन्य खरीफ फसलों से संबंधित कार्य मौसम की स्थिति को देखकर ही करें।
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मानसून में देरी से खरीफ की फसल पर पड़ेगा असर: कृषि वैज्ञानिक बोले: 25 जून तक नहीं आया तो बुवाई प्रभावित होगी – Balaghat (Madhya Pradesh) News
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