Wednesday, July 15, 2026
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बारिश की पहली फुहार पड़ते ही दिल्ली वाले सबसे पहले क्या खाते हैं?


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Best Delhi Monsoon Food: दिल्ली में बारिश सिर्फ मौसम नहीं बदलती, बल्कि लोगों की खाने की आदतें भी बदल देती है. जैसे ही तपती सड़कों पर पहली फुहार गिरती है और हवा में भीगी मिट्टी की खुशबू घुलती है, राजधानी की गलियां एक बार फिर अपने मशहूर स्ट्रीट फूड की महक से भर उठती हैं. कोई चांदनी चौक की कचौड़ी की ओर निकल पड़ता है तो कोई करोल बाग के गरमा-गरम पकौड़ों के लिए लाइन में लग जाता है. लाजपत नगर के राम लड्डू, कमला नगर का भुट्टा, पहाड़गंज के छोले-भटूरे और मजनू का टीला के मोमोज़ भी मानसून के साथ लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं. यही वजह है कि दिल्ली का मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्वाद, यादों और पुराने ठिकानों तक लौटने का भी मौसम माना जाता है.

बारिश आते ही क्यों बदल जाता है दिल्ली का स्वाद? दिल्ली की पहचान उसकी ऐतिहासिक इमारतों से जितनी है, उतनी ही उसकी स्ट्रीट फूड संस्कृति से भी है. मानसून के दौरान यह संस्कृति और जीवंत हो जाती है. हल्की बारिश, ठंडी हवा और गर्मागर्म स्नैक्स का मेल ऐसा होता है जिसे दिल्लीवाले हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं. यही कारण है कि मौसम बदलते ही शहर के मशहूर फूड स्पॉट पर भीड़ बढ़ने लगती है. (Image-AI generated)

चांदनी चौक की कचौड़ी आज भी लोगों की पहली पसंद पुरानी दिल्ली की गलियों में बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा रौनक कचौड़ी की दुकानों पर दिखाई देती है. कई दशकों से चल रही पुरानी दुकानों पर सुबह से ही लोगों की कतारें लग जाती हैं. यहां आने वाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उन यादों के लिए भी लौटते हैं जो बचपन से इस जगह से जुड़ी रही हैं. ग्रेटर कैलाश की रहने वाली मीना बताती हैं कि वह करीब चार दशक से बारिश के मौसम में यहां कचौड़ी खाने जरूर आती हैं. उनके मुताबिक, “बारिश होते ही सबसे पहले यही स्वाद याद आता है.” (Image-AI generated)

राम लड्डू और छोले-भटूरे का भी रहता है जलवा लाजपत नगर का नाम आते ही राम लड्डू याद आ जाते हैं. मूंग दाल से बने इन गर्मागर्म लड्डुओं पर कद्दूकस की हुई मूली और तीखी हरी चटनी का स्वाद बारिश में और भी खास लगने लगता है. वहीं छोले-भटूरे के बिना दिल्ली का फूड कल्चर अधूरा माना जाता है. करोल बाग, पहाड़गंज, सरोजिनी नगर और चांदनी चौक की कई दुकानें मानसून में पहले से ज्यादा व्यस्त दिखाई देती हैं. लोगों का मानना है कि बारिश के दिन मसालेदार छोले और फूले हुए भटूरे खाने का मजा ही अलग होता है. (Image-AI generated)

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भुट्टा, जो हर बारिश का स्थायी साथी है सड़क किनारे अंगारों पर सिकता हुआ भुट्टा शायद मानसून की सबसे खूबसूरत तस्वीरों में से एक है. कमला नगर, इंडिया गेट और विश्वविद्यालय क्षेत्र में बारिश के दौरान भुट्टे के ठेले खूब नजर आते हैं. नींबू, नमक और मसाले के साथ परोसा गया भुट्टा लोगों को मौसम का अलग ही आनंद देता है. (Image-AI generated)

मजनू का टीला में तिब्बती स्वाद भी खींचता है भीड़ अगर पारंपरिक स्ट्रीट फूड से अलग कुछ खाने का मन हो तो बारिश में मजनू का टीला भी लोगों की पसंदीदा जगह बन जाता है. यहां गर्मागर्म मोमोज़, थुकपा और अन्य तिब्बती व्यंजन ठंडे मौसम में अलग ही सुकून देते हैं. शाम होते-होते यहां युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. (Image-AI generated)

पकौड़े और चाय, मानसून की सबसे पुरानी जोड़ी अगर किसी से पूछा जाए कि बारिश का पहला स्वाद क्या है, तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा पकौड़े और चाय. करोल बाग, राजौरी गार्डन और कई पुराने बाजारों में मानसून शुरू होते ही पकौड़ों की बिक्री तेजी से बढ़ जाती है. दुकानदारों का कहना है कि गर्मियों के मुकाबले बारिश में ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. आलू, प्याज, पनीर, पालक और हरी मिर्च के पकौड़े सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. कई जगहों पर करेला पकौड़ा भी लोगों की पसंद बन चुका है. (Image-AI generated)

आखिर में एक कप चाय सबको जोड़ देती है दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में लोगों की पसंद भले अलग हो, लेकिन एक चीज लगभग हर जगह समान मिलती है चाय. बारिश में दोस्तों के साथ सड़क किनारे चाय पीना, परिवार के साथ पकौड़े खाना या ऑफिस के बाद किसी ठेले पर रुक जाना, यही छोटे-छोटे पल मानसून को खास बना देते हैं. दिल्ली का मानसून केवल खाने का मौसम नहीं, बल्कि उन यादों का हिस्सा है जो हर साल पहली बारिश के साथ लौट आती हैं. शायद यही वजह है कि राजधानी में बारिश का मतलब सिर्फ भीगना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा स्वादों तक फिर से पहुंच जाना भी है. (Image-AI generated)

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