Monday, June 22, 2026
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फिजिक्स ने निकाला दम, केमिस्ट्री ने चकराया सिर, क्या कठिन था री-नीट का पेपर?


नई दिल्ली (NEET UG 2026 Paper Analysis). कल यानी 21 जून 2026 को नीट यूजी का री-टेस्ट था. 5 हजार से ज्यादा सेंटर्स पर 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने नीट यूजी परीक्षा दी थी. इस बार का पेपर वैसा बिल्कुल नहीं था, जैसा परीक्षार्थियों ने सोचा था या जैसा 3 मई वाले रेगुलर सेशन में आया था. परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिक्स्ड रिएक्शन थे. 3 मई के पेपर में एनसीईआरटी से डायरेक्ट सवाल थे, वहीं री-टेस्ट ने सब्र, स्पीड और कॉन्सेप्ट्स की गहराई का इम्तिहान लिया.

आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (AESL) के नेशनल एकेडमिक डायरेक्टर (मेडिकल) नबीन कार्की के मुताबिक, नीट यूजी री-नीट परीक्षा ने कॉम्पिटिशन का मोमेंटम बदल दिया है. इसे ‘मॉडरेट से डिफिकल्ट’ यानी मध्यम से कठिन श्रेणी में रखा जाएगा. पेपर में रटने से ज्यादा एनालिसिस और कैलकुलेशन पर फोकस किया गया. इस फेरबदल का असर नीट यूजी रिजल्ट पर पड़ेगा. एक्सपर्ट का दावा है कि मुश्किल सवालों की वजह से ऑल इंडिया कोटा का कट-ऑफ पिछले अनुमानों के मुकाबले काफी नीचे खिसक सकता है.

Re-NEET 2026 Analysis: 3 मई से कहीं ज्यादा भारी रहा यह सफर

नबीन कार्की (AESL) के अनुसार, 21 जून को हुआ री-नीट का पेपर 3 मई को हुए शुरुआती सेशन के मुकाबले काफी कठिन और थका देने वाला था. जहां पिछला पेपर सीधा और आसान था, वहीं इस पेपर ने छात्रों के कॉन्सेप्ट्स को गहराई से खंगाला.

फिजिक्स: सबसे लंबा और पसीने छुड़ाने वाला सेक्शन

पूरे पेपर में फिजिक्स का हिस्सा सबसे ज्यादा कठिन और टाइम-कंज्यूमिंग साबित हुआ. पेपर मैकेनिक्स, इलेक्ट्रोडायनामिक्स, मॉडर्न फिजिक्स और थर्मोडायनामिक्स जैसे कोर टॉपिक्स के इर्द-गिर्द घूमता रहा. एप्लिकेशन-बेस्ड और भारी-भरकम न्यूमेरिकल की वजह से छात्रों पर समय का भारी दबाव बन गया और कई बच्चे पूरा सेक्शन समय पर हल भी नहीं कर पाए.

केमिस्ट्री: सिर्फ याद रखने से बात नहीं बनी

केमिस्ट्री का सेक्शन भी 3 मई के पेपर से काफी अलग और मुश्किल था. फिजिकल केमिस्ट्री में काफी लंबे और पेचीदा कैलकुलेशंस थे, जिसमें कई कॉन्सेप्ट्स एक साथ मिक्स थे. वहीं, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में सीधे सवाल पूछने के बजाय रिएक्शन मैकेनिज्म की गहरी समझ की परीक्षा ली गई. जिसने गहराई से नहीं पढ़ा था, उसे ऑप्शंस ने खूब कन्फ्यूज किया.

बायोलॉजी: आसान रही राह, पर जूलॉजी में रहा थोड़ा पेंच

बायोलॉजी का सेक्शन हमेशा की तरह सबसे बड़ा सहारा और सबसे ज्यादा स्कोरिंग जोन रहा. पेपर कोर एनसीईआरटी सिलेबस से मैच कर रहा था. इसमें जेनेटिक्स, फिजियोलॉजी, रिप्रोडक्शन और इकोलॉजी जैसे चैप्टर्स का दबदबा रहा. हालांकि, जूलॉजी के कुछ ऑप्शंस काफी घुमावदार और विवादास्पद थे, जहां एक से ज्यादा सही विकल्प होने की वजह से छात्रों में कन्फ्यूजन दिखा.

नीट यूजी एक्सपेक्टेड कट-ऑफ: 600 के नीचे जाने के आसार

नीट यूजी के मुश्किल पेपर, लंबे कैलकुलेशन और सवालों के कन्फ्यूजन का सबसे बड़ा असर कट-ऑफ पर दिखेगा. एक्सपर्ट नबीन कार्की का अनुमान है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों के लिए ऑल इंडिया कोटा (AIQ) जनरल कैटेगरी का कट-ऑफ इस बार नीचे गिरेगा और यह 590 से 600 मार्क्स के बीच सेटल हो सकता है.

डॉक्टर बनने के लिए कांसेप्ट ही किंग है

री-नीट परीक्षा ने साबित कर दिया है कि अगर आपको टॉप रैंक चाहिए तो सिर्फ रट्टा मारने से काम नहीं चलेगा. बायोलॉजी में रटकर नंबर लाए जा सकते हैं, लेकिन सरकारी कॉलेज की सीट पक्की करने के लिए फिजिक्स और केमिस्ट्री में न्यूमेरिकल सॉल्व करने का स्टैमिना और कॉन्सेप्ट्स का क्लियर होना ही असली गेम-चेंजर साबित होता है.



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