बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने उत्तर कोयल नहर परियोजना की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई है। सोमवारा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें औरंगाबाद की जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा, अपर समाहर्ता अनुग्रह नारायण सिंह, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उपेंद्र पंडित सहित संबंधित अधिकारी शामिल हुए। परियोजना के विभिन्न पैकेजों के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, भौतिक प्रगति, मशीनरी एवं मानव संसाधन की उपलब्धता, भूमि अधिग्रहण और वितरण प्रणाली से संबंधित लंबित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि परियोजना की कुल प्रगति 51.47 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि भौतिक प्रगति 34.15 प्रतिशत है। पिछले सात दिनों में 1.06 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई। विभिन्न पैकेजों की प्रगति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि पैकेज-3 में 78.43 प्रतिशत, पैकेज-5 में 65.70 प्रतिशत, पैकेज-6 में 70.75 प्रतिशत, पैकेज-8 में 56.32 प्रतिशत, पैकेज-9 में 43.38 प्रतिशत, पैकेज-10 में 45.83 प्रतिशत तथा पैकेज-11 में 61.41 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। 499 स्टाफ कर रहे काम निर्माण एजेंसियों की ओर से उपलब्ध कराई गई मशीनरी एवं मानव संसाधन की भी समीक्षा की गई। प्रतिवेदन के अनुसार 310 मशीनों की आवश्यकता है, लेकिन 164 ही उपलब्ध है। इसके अलावा 1241 लोगों की जगह 499 ही काम कर रहे हैं। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए निर्माण एजेंसियों को संसाधनों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य की समीक्षा के दौरान बताया गया कि औरंगाबाद जिले में कुल 41.251 हेक्टेयर भूमि में से 38.5734 हेक्टेयर का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। शेष प्रक्रिया जून 2026 तक पूर्ण होने की संभावना जताई गई। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का निर्देश दिया, ताकि किसानों को जल्द से जल्द सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सके। गयाजी जिले के किसानों को भी मिलेगा लाल पानी अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कोयल नहर जलाशय परियोजना झारखंड के मोहम्मदगंज बराज से प्रारंभ होकर औरंगाबाद जिले के नवीनगर, कुटुंबा, देव, औरंगाबाद तथा मदनपुर प्रखंडों से होते हुए गयाजी तक पहुंचती है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसके पूरा होने पर बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, लेकिन बरसों से यह योजना अधूरी पड़ी हुई है। कूटकू डैम में फाटक नहीं लगा है। जिसके कारण उत्तर कोयल बरसाती नर बनकर रह गई है। वर्षा के उपरांत कोयल नहर का पानी बराज में स्टॉक होता है और मेन कैनाल में छोड़ा जाता है। अगर कुटकू में फाटक लग जाए तो पानी का स्टॉक जमा रहेगा। फिलहाल नहर के लाइनिंग का कार्य कराया जा रहा है। अगर इस समय रहते पूरा नहीं किया गया तो बरसात के दिनों में नहर के संचालन में किसानों को परेशानी हो सकती है।
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