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हर महीने छोटी-छोटी बचत भविष्य में बड़ा फंड बना सकती है, लेकिन सही निवेश विकल्प चुनना सबसे अहम होता है. PPF और SIP दोनों ही लोकप्रिय निवेश साधन हैं, मगर रिटर्न और जोखिम के मामले में इनके बीच बड़ा अंतर है. अगर आप 15 साल तक हर महीने 7,500 रुपये निवेश करते हैं, तो दोनों योजनाओं में मिलने वाला अंतिम फंड काफी अलग हो सकता है. आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि लंबी अवधि में आपकी मेहनत की कमाई को कौन-सा विकल्प ज्यादा तेजी से बढ़ा सकता है.
₹7,500 की मासिक बचत से कितना बनेगा फंड? SIP और PPF का पूरा गणित समझिए. (Representative Image:AI)
नई दिल्ली. बढ़ती महंगाई के दौर में सिर्फ कमाई करना ही नहीं, बल्कि सही जगह निवेश करना भी बेहद जरूरी हो गया है. हर व्यक्ति चाहता है कि उसकी बचत भविष्य में बड़ा फंड बन जाए, लेकिन इसके लिए सही निवेश विकल्प चुनना सबसे बड़ी चुनौती होती है. भारत में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) दो ऐसे विकल्प हैं, जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है. अगर कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 7,500 रुपये निवेश करता है, तो आखिर किस विकल्प में उसे ज्यादा फायदा मिलेगा? आंकड़े इस सवाल का दिलचस्प जवाब देते हैं.
नियमित निवेश से बनती है मजबूत वित्तीय नींव
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी की जाए, उतना बेहतर होता है. यदि कोई व्यक्ति हर महीने 7,500 रुपये बचाकर निवेश करता है, तो एक साल में उसकी कुल बचत 90,000 रुपये हो जाती है. 15 साल में यह राशि बढ़कर 13.5 लाख रुपये हो जाती है. यही रकम यदि सही निवेश विकल्प में लगाई जाए तो समय के साथ बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है. हालांकि रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा किस योजना में लगाया गया है.
PPF में कितना बन सकता है फंड?
पीपीएफ को देश की सबसे सुरक्षित निवेश योजनाओं में गिना जाता है क्योंकि इसे सरकार का समर्थन प्राप्त होता है. इसमें निवेश करने पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता. यदि कोई निवेशक 15 वर्षों तक हर साल 90,000 रुपये पीपीएफ में जमा करता है और वर्तमान 7.1 प्रतिशत ब्याज दर को आधार माना जाए, तो मैच्योरिटी पर लगभग 24.4 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है. यानी 13.5 लाख रुपये के निवेश पर करीब 10.9 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. सुरक्षा पसंद निवेशकों के लिए यह एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है.
SIP में दिखता है कंपाउंडिंग का दम
दूसरी ओर, म्यूचुअल फंड SIP बाजार से जुड़ा निवेश विकल्प है. इसमें जोखिम जरूर होता है, लेकिन लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना भी रहती है. यदि कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 7,500 रुपये की SIP करता है और औसतन 12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न प्राप्त होता है, तो उसका कुल फंड लगभग 37.8 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. यह आंकड़ा PPF की तुलना में काफी अधिक है. इसका सबसे बड़ा कारण कंपाउंडिंग की ताकत है, जिसमें रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता रहता है.
दोनों विकल्पों में क्या है सबसे बड़ा अंतर?
PPF और SIP दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं. PPF में पूंजी की सुरक्षा अधिक होती है और निवेशक को निश्चित ब्याज मिलता है. वहीं SIP में रिटर्न तय नहीं होता, क्योंकि यह शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. हालांकि लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार का रिकॉर्ड मजबूत रहा है, जिसके कारण SIP निवेशकों को अक्सर बेहतर रिटर्न मिला है. यही वजह है कि जो लोग जोखिम उठाने की क्षमता रखते हैं, वे लंबे समय के लिए SIP को प्राथमिकता देते हैं.
निवेश से पहले समझें अपनी जरूरत
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी निवेश का चुनाव केवल रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए. यदि आपकी प्राथमिकता सुरक्षा है और आप बिना जोखिम के निवेश करना चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि में अधिक संपत्ति बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव को स्वीकार कर सकते हैं, तो SIP ज्यादा लाभदायक साबित हो सकती है. 15 वर्षों के इस गणित में जहां PPF करीब 24.4 लाख रुपये का फंड तैयार करता है, वहीं SIP लगभग 37.8 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसलिए निवेश का फैसला करते समय अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समयावधि को ध्यान में रखना सबसे जरूरी है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

