Friday, June 5, 2026
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SEBI की चेतावनी के घेरे में ICICI, FPI फंड ट्रांसफर मामले में वार्निंग लेटर


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SEBI की चेतावनी मिलने के बाद ICICI Bank एक बार फिर चर्चा में आ गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बैंक के वित्तीय नतीजे अब भी मजबूत बने हुए हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) से जुड़े एक लेनदेन में नियमों के उल्लंघन पर बाजार नियामक ने बैंक को वार्निंग लेटर जारी किया है. मामला वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत तय अवधि पूरी होने से पहले फंड वापस भेजने की अनुमति से जुड़ा है. हालांकि इस घटनाक्रम के बीच बैंक ने मुनाफे, कर्ज वितरण और एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.

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ICICI Bank को SEBI की फटकार, विदेशी निवेशक लेनदेन नियमों में मिली चूक. (Image:News18)

नई दिल्ली. देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक ICICI Bank को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से एक चेतावनी पत्र मिला है. बैंक ने 4 जून को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि उसे 1 जून 2026 तारीख वाला यह पत्र 2 जून को प्राप्त हुआ. मामला बैंक की कस्टोडियन के रूप में निभाई गई भूमिका से जुड़ा है. SEBI ने बैंक को एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले धन वापस भेजने की अनुमति देने के कारण चेतावनी जारी की है.

FPI लेनदेन से जुड़ा है पूरा मामला
SEBI के अनुसार यह मामला वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत किए गए निवेश से जुड़ा है. नियामक ने पाया कि एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक को उसकी प्रतिबद्ध रिटेंशन अवधि पूरी होने से पहले ही फंड वापस भेजने की अनुमति दी गई. इसी वजह से बैंक को चेतावनी पत्र जारी किया गया. यह कार्रवाई बैंक की कस्टोडियन सेवाओं से संबंधित है, जहां निवेशकों के लेनदेन और निवेश रिकॉर्ड की निगरानी की जिम्मेदारी निभाई जाती है.

मुनाफे में दर्ज हुई मजबूत बढ़ोतरी
एक तरफ SEBI की चेतावनी चर्चा में है, वहीं बैंक के वित्तीय नतीजे मजबूत रहे हैं. ICICI Bank का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 13,701.7 करोड़ रुपये रहा. पिछले वर्ष इसी अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ 12,630 करोड़ रुपये था. यह आंकड़ा बाजार के अनुमान 12,949 करोड़ रुपये से भी अधिक रहा. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी बढ़कर 22,979.2 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो एक साल पहले 21,193 करोड़ रुपये थी.

एसेट क्वालिटी में भी हुआ सुधार
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला. नेट एनपीए घटकर 0.33 प्रतिशत रह गया, जो पिछली तिमाही में 0.37 प्रतिशत था. इसी तरह सकल एनपीए भी 1.53 प्रतिशत से घटकर 1.40 प्रतिशत पर आ गया. खराब ऋणों में कमी आने से बैंक की बैलेंस शीट और मजबूत हुई है. इसके अलावा एनपीए से संबंधित कुल राशि में भी गिरावट दर्ज की गई, जो बैंक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

प्रोविजनिंग घटी, कर्ज वितरण बढ़ा
बैंक की प्रोविजनिंग भी काफी कम हुई है. चौथी तिमाही में यह 96.2 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 2,556 करोड़ रुपये थी. वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में प्रोविजनिंग 890.7 करोड़ रुपये रही थी. दूसरी ओर बैंक का कुल ऋण वितरण सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत बढ़कर 15.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. तिमाही आधार पर इसमें 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो कर्ज कारोबार में मजबूती को दर्शाती है.

शेयर में तेजी के साथ कारोबार समाप्त
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) चौथी तिमाही में 4.32 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही के 4.3 प्रतिशत के मुकाबले लगभग स्थिर रहा. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी NIM 4.32 प्रतिशत पर बना रहा. इस बीच, 4 जून को BSE पर ICICI Bank का शेयर 9.95 रुपये या 0.80 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,252.30 रुपये पर बंद हुआ. SEBI की चेतावनी के बावजूद निवेशकों की नजर बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर बनी रही.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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