बाड़मेर में मानसून कमजोर पड़ गया है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। इन दिनों आंधी का दौर चल रहा है। आसमान में धुल के गुबार छाए हुए है। वहीं, किसान और बाड़मेर के लोग इंद्रदेव को मनाने के लिए यज्ञ कर आहूतियां दे रहे है। वहीं विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने की मांग की है। विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र बाड़मेर में अब तक सिर्फ 10 फीसदी ही बारिश हुई है। जिलेभर में 90 फीसदी हिस्सा पूरी तरह से सूखा पड़ा है। कई किसानों ने खेत में बुवाई कर दी थी। किसान बारिश के इंतजार में बैठे है। किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने से पशुओं के चारे का भी संकट हो जाएगा। इसको लेकर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जिला कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है। कमजोर पड़ा मानसून दरअसल, बाड़मेर जिले में प्री-मानसून में जून माह में एक बारिश हुई थी। इसके बाद मानसून की पश्चिमी राजस्थान में एंट्री हो गई थी, लेकिन मानसून की बेरुखी के चलते बारिश नहीं हुई। मानसून कमजोर होने की वजह से आगामी कुछ दिनों में बारिश होने के आसार नहीं है। शनिवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री दर्ज किया गया है। रविवार को न्यूनतम तापमान 28.6 डिग्री दर्ज किया गया। पशु चारा शिविर शुरू करने की मांग रविवार को सुबह से आसमान में धूल छाई हुई है। ग्रामीणों इलाकों में धूल भरी आंधी चल रही है। इससे रेत सड़कों पर जमा हो गई। वहीं हाईवे पर रेत चल रही है। मानों जैसे नदी बह रही है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जिले में संभावित चारा संकट को लेकर जिला कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने संकटग्रस्त गांवों और ढाणियों में तुरंत पशु चारा शिविर शुरू करने की मांग की है। भाटी ने कहा- पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराया जाए। दिनभर चली आधी, रेत ने बढ़ाई समस्या रविवार को जिले भर में सुबह से ही धुलभरी आंधी चली। इससे जिले के कुछ इलाकों में, जहां बारिश के बाद बुवाई हुई थी। वहां अंकुरित हो रही फसलों को नुकसान पहुंचा है। आगामी कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही रहने की संभावना है। इस बार सबसे कमजोर मानसून इस बार मानसून बेहद कमजोर है। 10 जुलाई तक जिले में औसत 10 एमएम बारिश भी नहीं हुई है। 2025 में 10 जुलाई तक 55 एमएम बारिश हो चुकी थी। 2024 में भी 10 जुलाई तक 50 एमएम से ज्यादा बारिश हुई। 2024 में मानसून देरी से आया था। 2023 में 60 एमएम तक बारिश हुई थी। 2022 में सर्वाधिक 80 एमएम बारिश हुई थी।
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