कानपुर में परमट प्राथमिक विद्यालय में अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाने के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने अपनी चुप्पी तोड़ी।
कहा कि मैं क्षेत्र का विधायक हूं। किसी भी स्कूल, अस्पताल और सरकारी संस्थान में जाकर औचक निरीक्षण कर सकता हूं। इसके लिए मुझे किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। खुशी बांटना अपराध नहीं है। जो भी किया, सरकारी नियम और अधिकार के तहत किया है। बुधवार शाम 7ः30 बजे दैनिक भास्कर से बातचीत में विधायक ने एफआईआर को राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि निलंबित हेडमास्टर से दबाव में शिकायत कराई गई है। अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि वह क्षेत्र के विधायक हैं और किसी भी सरकारी स्कूल या संस्थान का निरीक्षण कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि जो भी किया, वह शासन की गाइडलाइन और अपने अधिकारों के तहत किया है। अब पढ़िए पूरी बातचीत…. सवाल: आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, क्या कहेंगे?
जवाब: सत्ता के नेताओं ने अपने अहंकार की पुष्टि के लिए एफआईआर कराई है। शिकायत तो मैंने भी की थी, जब मुझे चप्पल दिखाई गई और गालियां दी गई थी। उस मामले में तो आज तक सिर्फ जांच ही चल रही है। एफआईआर तब हुई, जब प्रिंसिपल को सस्पेंड कर दबाव बनाया गया कि जाओ शिकायत करो, बहाल करके अच्छा स्कूल दे दिया जाएगा। वह भी बेचारा क्या करता, शिकायत कर दी। लेकिन उसमें एक शब्द लिखा गया ‘जबरिया’। आखिर कैसे जबरिया? क्या कोई फोटो है, कोई वीडियो है, जिसमें जबरदस्ती करते हुए दिखाया गया हो? विपक्ष पर मुकदमा लिखने के लिए कोई एविडेंस नहीं चाहिए। बड़े नेता अधिकारियों की बैठक में कहते हैं कि अगर किसी भाजपा नेता के खिलाफ तहरीर आए तो जिलाध्यक्ष से पूछकर एफआईआर लिखना। ये कौन-सा कानून चल रहा है? क्या किसी का जन्मदिन मनाना पाप है? पीएम पोषण योजना के तहत ‘तिथि भोजन’ की व्यवस्था है। इसके अंतर्गत पार्षद, प्रधान, विधायक या सांसद किसी भी अवसर पर सरकारी स्कूल में बच्चों को भोजन करा सकता है। बैग, ड्रेस और अन्य उपयोगी सामग्री भी वितरित कर सकता है। इसका अधिकार है। बीएसए का पत्र भी मौजूद है। इसमें हमने क्या गलत कर दिया? बस सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया कि ‘अ से आनंदेश्वर बाबा, अ से आर्यनगर, अ से अखिलेश और अ से अमिताभ’, तो लोगों को बुरा लग गया। प्रिंसिपल को बुलाकर नगद पैसे क्यों दिए गए? क्या इसका कोई कानून है? जब मैं उस स्कूल में काम करा रहा हूं, तो हर काम में टांग अड़ाने का क्या मतलब है? क्या इसे विकास कहते हैं? शहर में कई और स्कूल हैं, उन्हें बनवा देते। या फिर इस स्कूल का काम पूरा होने के बाद बनवा लेते। लेकिन शायद किसी का ईगो हर्ट हो गया। अपनी ताकत दिखाने के लिए मुकदमा लिखवा दिया गया, लेकिन हम लोग मजबूत हैं। सवाल: आरोप है कि आपने स्कूल में कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं ली थी?
जवाब: मैं इस क्षेत्र का विधायक हूं। किसी भी स्कूल, अस्पताल और सरकारी संस्थान में कभी भी औचक निरीक्षण कर सकता हूं। कहीं भी जा सकता हूं। इसके लिए मुझे किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। मुझे खुशी बांटने के लिए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। खुशी बांटना अपराध नहीं है। जो भी किया, शासन की गाइडलाइन और कानून के तहत किया। अगर आपको लगता है कि मैंने अपनी विधानसभा में छह स्कूल बनवा दिए हैं, तो आप भी हर विधानसभा में छह स्कूल बनवा दीजिए। सवाल: हेडमास्टर के लिए आपने कार्रवाई न करने का पत्र लिखा था, फिर उन्होंने ही आपके खिलाफ शिकायत कर दी?
जवाब: वह कर्मचारी हैं। सत्ता के दबाव में हैं। उनकी नौकरी दांव पर लगी है। अगर मैं चाहूं तो उनका पूरा चिट्ठा निकाल सकता हूं। उनके पिता कहां नौकरी करते हैं, उनके भाई कहां नौकरी कर रहे हैं, सब जानकारी मेरे पास है। लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता। सभी शिक्षक मेरे परिवार का हिस्सा हैं। उन पर दबाव बनाया गया है। मुझे उम्मीद है कि जब मामला कोर्ट में जाएगा तो वे सच बोलेंगे। उस समय गीता पर हाथ रखकर बयान देंगे और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं होगा।
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‘मैं विधायक, किसी भी स्कूल का निरीक्षण कर सकता हूं’: कानपुर में FIR दर्ज होने के बाद सपा MLA बोले- हेडमास्टर पर दबाव बनाया गया – Kanpur News
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