Thursday, June 25, 2026
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कूड़े के पहाड़ से 23 एकड़ जमीन हुई खाली: दिसंबर 2026 तक साइट खत्म करने का दावा, मेयर प्रवेश शाही ने लिया जायजा – New Delhi News


ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त और मेयर।

नई दिल्ली। राजधानी को लैंडफिल साइटों के बोझ से मुक्त करने की दिशा में ओखला लैंडफिल से बड़ी प्रगति की खबर सामने आई है। दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने बुधवार को एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण कर बाय

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दिल्ली नगर निगम के अनुसार, अब तक ओखला लैंडफिल क्षेत्र की 23 एकड़ जमीन को कचरे से मुक्त कराया जा चुका है। लंबे समय से कूड़े के ढेर के नीचे दबी यह भूमि भविष्य में हरित क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य शहरी विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग में लाई जा सकेगी।

ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त और मेयर।

बायो-माइनिंग कार्यों में तेजी आई

अधिकारियों ने बताया कि लगातार निगरानी और मशीनों की क्षमता बढ़ाने के कारण बायो-माइनिंग कार्यों में तेजी आई है। निगम का दावा है कि वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट को हटाने का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब इसका अंतिम चरण चल रहा है।

मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि दिसंबर 2026 तक पूरी ओखला लैंडफिल साइट को समतल और कूड़ा-मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि पुराना कचरा लगभग समाप्त हो चुका है और अब शहर से प्रतिदिन आने वाले नए कचरे के पृथक्करण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस दौरान एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार ने मानसून के मद्देनजर अधिकारियों को सतर्क रहने और पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त और मेयर।

ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त और मेयर।

ओखला लैंडफिल परियोजना की मुख्य उपलब्धियां

  • 23 एकड़ जमीन कचरे से मुक्त कराई गई।
  • लेगेसी वेस्ट हटाने का काम अंतिम चरण में।
  • दिसंबर 2026 तक पूरी साइट खाली करने का लक्ष्य।
  • बायो-माइनिंग कार्यों में तेजी।
  • खाली हुई जमीन का उपयोग हरित क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए संभव।
नगर निगम अफसरों के साथ मीटिंग करते मेयर प्रवेश शाही।

नगर निगम अफसरों के साथ मीटिंग करते मेयर प्रवेश शाही।

मानसून को लेकर विशेष निर्देश

  1. लीचेट (प्रदूषित तरल) के सुरक्षित निस्तारण पर जोर।
  2. पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन।
  3. मानसून के दौरान निगरानी बढ़ाने के निर्देश।
  4. नई कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर फोकस।
  5. ताजा कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और निस्तारण को प्राथमिकता।



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