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Byju Un-Success Story : सफलता की कहानियां तो आपने बहुत पढ़ी होंगी, लेकिन यह कहानी एक ऐसी अलसफ कंपनी की है जो कभी देश की सबसे सफल कंपनी मानी जाती थी और कोरोनाकाल में जब दूसरी कंपनियां अपने कारोबार के लिए तरस रहीं थी, तब इस कंपनी ने अपना कारोबार 22 गुना बढ़ा लिया था.
बायजू ने अंधाधुंध कर्ज लिया और डिफॉल्ट करने पर पूरी तरह डूब गई.
नई दिल्ली. किसी ने सच ही कहा है, ‘सफल होना उतना मुश्किल नहीं, जितना सफल बने रहना है.’ यह कहावत कभी देश के सबसे बड़े एडुटेक स्टार्टअप बायजू (Byju’s) के फाउंडर रवींद्रन पर सोलह टका सच बैठती है. रवींद्रन ने जब साल 2015 में अपना स्टार्टअप शुरू किया था, तो उन्हें तनिक भी अनुमान नहीं था कि एक दिन उनके पीछे दुनिया के कई मुल्कों की पुलिस पड़ जाएगी. अदालतें दनादन जेल में डालने वाले फैसले सुनाएंगी और बैंकर्स व निवेशक अपना पैसा वसूलने के लिए उनकी जान के पीछे पड़ जाएंगे. लेकिन, शिक्षा का सबक सिखाने वाले रवींद्रन ने खुद यहछोटा सा सबक नहीं सीखा कि लालच बुरी बला है. इसी बला ने आज उनके पीछे अमेरिका, भारत, सिंगापुर सहित कई देशों की पुलिस को लगा रखा है.
साल 2015 वह दौर था, जब भारत स्टार्टअप के फील्ड में नए-नए आयाम रच रहा था. इसी दौर में रवींद्रन ने किंडरगार्टन यानी नर्सरी से लेकर 12वीं तक के बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए एडुटेक प्लेटफॉर्म बायजू की नींव रखी. इस फील्ड में ज्यादा प्रतिस्पर्धा थी नहीं और उनका टार्गेट यूजर बेस काफी बड़ा था. लिहाजा जल्द ही इस स्टार्टअप को सफलता मिलनी शुरू हो गई और साल 2019 आते-आते तो यह देश का पहला यूनीकॉर्न एडुटेक बन गया. बायजू की वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर यानी आज के हिसाब से देखें तो 9,600 करोड़ रुपये को पार कर चुकी थी.
कोरोनाकाल में मिला आपदा में अवसर
साल 2020 में जब कोविड ने भारत सहित पूरी दुनिया को घरों में कैद कर दिया, तब बायजू ने बेहद तेजी से अपना कारोबार बढ़ाया. यह वह दौर था, जब भारत ऑनलाइन एजुकेशन की तरफ मुड़ रहा था और इसका सबसे ज्यादा लाभ बायजू को ही मिला. आंकड़े खुद इसकी बानगी देते हैं, क्योंकि साल 2022 में इस स्टार्टअप का वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर यानी आज के हिसाब से देखा जाए तो 2.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया था. लेकिन, अब बस. यहीं से रवींद्रन के मन में यह ख्याल आ गया कि अपुन इच भगवान है. फिर उन्होंने गलती पर गलती करनी शुरू कर दी है और बायजू के पतन की कहानी भी शुरू हो गई.
एक गलती सबसे भारी
रवींद्रन ने नवंबर, 2021 में अपने करियर की सबसे बड़ी गलती कर दी और यही उनके पतन का कारण भी बनी. उन्होंने सेल्स और मार्केटिंग पर बड़ा दांव खेलते हुए मोटी पूंजी खर्च करनी शुरू कर दी, क्योंकि अब देश में बायजू को टक्कर देने के लिए नए-नए एडुटेक स्टार्टअप्स उभरने लगे थे. इसमें अनएकाडमी और फिजिक्सवाला ने सबसे कड़ी टक्कर दी. इसी डर में रवींद्रन ने विदेशी कर्जदाताओं से 1.2 अरब डॉलर यानी करीब 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज उठा लिया. कंपनी का खर्चा बढ़ गया और बाजार प्रतिस्पर्धा की वजह से रिटर्न आया नहीं. हुआ ये कि बायजू अपने कर्ज नहीं लौटा पाई और विदेशी कर्जदाताओं ने उसके खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में मुकदमा कर दिया.
भारत में भी बढ़ गई मुश्किल
सिर्फ अमेरिकी अदालत ने ही नहीं, भारत में भी बायजू पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया. कंपनी ने अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट लटकाने शुरू किए तो कॉरपोरेट मंत्रालय ने नोटिस जारी कर दिया. इससे निवेशकों में शंका गहराने लगी और बिजनेस पर भी असर पड़ना शुरू हो गया. कंपनी ने जब वित्तवर्ष 2020-21 के आंकड़े सार्वजनिक किए तो उसे 4,588 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान दिखा. कंपनी में ऑडिट का कामकाज देखने वाले डेलॉय के ऑडिटर ने भी इस्तीफा दे दिया और आरोप लगाया कि कंपनी उनसे जानकारियां छुपाती है.
रवींद्रन ने भी मानी गलती
बायजू के फाउंडर रवींद्रन ने भी बाद में खुद अपनी गलती स्वीकार की और कहा कि 1.2 अरब डॉलर का लोन लेना उन्हें भारी पड़ गया. हालांकि, यह फैसला कंपनी के बोर्ड ने मिलकर लिया था, जिसमें निवेशक और निदेशक सभी शामिल थे. यह एक कारोबारी गलती थी. उन्होंने कहा कि WhiteHat Jr का अधिग्रहण न कर पाना एक बड़े अवसर को खोने जैसा था, क्योंकि इसके जरिये उनकी कंपनी ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत बना सकती थी.
कितने देशों में वांटेड हैं रवींद्रन
- सिंगापुर : बायजू के लगातार घाटे और लोन डिफॉल्ट की वजह से रवींद्रन आज कई देशों में वांटेड बन चुके हैं. सिंगापुर की अदालत ने उन्हें 6 महीने की जेल और 70,500 डॉलर जुर्माना चुकाने का आदेश दिया है. हालांकि, यह क्लीयर नहीं है कि वे सिंगापुर में हैं या भारत अथवा किसी अन्य देश में.
- अमेरिका : पिछले साल अमेरिका की डेलवेयर कोर्ट ने बायजू पर 1 अरब डॉलर के कर्ज नहीं लौटाने को लेकर रवींद्रन के खिलाफ आदेश जारी किया था. कोर्ट ने इस चूक के लिए रवींद्रन को ही व्यक्तिगत तौर पर दोषी माना था. कोर्ट ने दो अलग-अलग आदेश में 53.3 करोड़ डॉलर और 54 करोड़ डॉलर का भुगतान नहीं करने को लेकर रवींद्रन को नोटिस जारी किया था.
- भारत : प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने रवींद्रन के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है, जिसका मतलब है कि वे देश के लिए फिलहाल भगोड़ा घोषित हैं. उनकी कंपनी बाजयू पर दिवालिया एवं ऋणशोधन कानून यानी आईबीसी के तहत एनसीएलटी में केस चल रहा है. कंपनी पर 9,000 करोड़ की अवैध विदेशी फंडिंग का भी मामला दर्ज है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

