Last Updated:
उत्तराखंड और लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में बीआरओ द्वारा बनाई जा रही नई सड़कों ने वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे दी है. जो गांव कभी महीनों तक देश से कटे रहते थे, वहां अब पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं. बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा सिर्फ सेना को नहीं बल्कि स्थानीय लोगों को भी मिल रहा है. होमस्टे, ट्रांसपोर्ट, होटल और स्थानीय उत्पादों के कारोबार में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. सीमा से सटे दुर्गम इलाकों में ऑल वेदर रोड और नई कनेक्टिविटी ने किसानों, युवाओं और छोटे कारोबारियों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. अब पहाड़ी उत्पाद बड़े शहरों तक आसानी से पहुंच रहे हैं और एडवेंचर टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है.
बेहतर सड़क संपर्क का असर कृषि और स्थानीय उत्पादों के कारोबार पर भी पड़ा है. (AI)
नई दिल्ली. उत्तराखंड और लद्दाख के सुदूर सीमावर्ती इलाकों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से बदली सड़कों की तस्वीर अब वहां की अर्थव्यवस्था में भी साफ दिखाई देने लगी है. बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन यानी बीआरओ (BRO) द्वारा बनाए जा रहे नए सड़क नेटवर्क ने उन गांवों को भी देश के मुख्य आर्थिक ढांचे से जोड़ दिया है, जो कभी साल के कई महीनों तक दुनिया से कटे रहते थे. इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा मकसद भले ही सीमा सुरक्षा और सेना की आवाजाही को मजबूत करना रहा हो, लेकिन इसका फायदा अब स्थानीय लोगों को भी बड़े पैमाने पर मिलने लगा है. बेहतर कनेक्टिविटी ने सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन, व्यापार, ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यवसायों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं.
नई सड़कों के बनने के बाद उत्तराखंड के माणा (Mana) और नीति जैसे सीमांत गांवों के साथ लद्दाख की नुब्रा घाटी और चांगथांग इलाके में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पहले जहां इन इलाकों तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता था, वहीं अब सड़क मार्ग बेहतर होने से देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं. पर्यटन बढ़ने का सीधा फायदा स्थानीय युवाओं को मिला है. गांवों में होमस्टे, कैफे, टैक्सी सर्विस और गाइडेड टूर जैसे छोटे व्यवसाय तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन की समस्या में भी कमी देखने को मिल रही है.
किसानों को मिला बड़े बाजारों तक सीधा रास्ता
बेहतर सड़क संपर्क का असर कृषि और स्थानीय उत्पादों के कारोबार पर भी पड़ा है. लद्दाख के सेब, खुबानी (Apricot) और सी बकथॉर्न जैसे उत्पाद अब समय पर बड़े शहरों तक पहुंच पा रहे हैं. इसी तरह उत्तराखंड के ऑर्गेनिक और पहाड़ी उत्पादों को भी नई मंडियां मिलने लगी हैं. पहले खराब सड़कों और लंबी दूरी की वजह से किसानों को भारी लॉजिस्टिक्स लागत उठानी पड़ती थी. अब ट्रांसपोर्ट आसान होने से उनकी लागत घटी है और मुनाफा बढ़ा है.
एडवेंचर टूरिज्म का नया केंद्र बन रहे पहाड़ी इलाके
बीआरओ की कई सड़क परियोजनाओं ने एडवेंचर टूरिज्म को भी नई पहचान दी है. उमलिंग ला जैसी दुनिया की सबसे ऊंची मोटर योग्य सड़क अब बाइकर्स और ट्रैवलर्स के लिए बड़ा आकर्षण बन चुकी है. इसके अलावा ऑफबीट डेस्टिनेशंस की लोकप्रियता बढ़ने से स्थानीय होटल कारोबार, ढाबों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है. कई छोटे गांव अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहे हैं.
सालभर जारी रह पा रही हैं व्यापारिक गतिविधियां
पहले भारी बर्फबारी के दौरान कई सीमावर्ती इलाके महीनों तक कट जाते थे, जिससे जरूरी सामान की सप्लाई और स्थानीय कारोबार दोनों प्रभावित होते थे. अब ऑल वेदर कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थिति बदल रही है. नई सड़कें बनने से दवाइयों, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की जरूरतों की सप्लाई पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और तेज हो गई है. इससे स्थानीय व्यापार को सालभर बिना रुकावट चलाने में मदद मिल रही है.
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ रहा निजी निवेश
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के जानकारों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में सड़क और कनेक्टिविटी पर हो रहा निवेश आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा. सुगम रास्तों की वजह से अब निजी निवेशक भी होटल, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में भारत के टूरिज्म सेक्टर और सीमावर्ती अर्थव्यवस्था दोनों को बड़ा फायदा मिल सकता है.
About the Author

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

