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डिजिटल गोल्ड आज युवाओं के बीच तेजी से फेमस हो रहा है. इसमें सिर्फ ₹1 या ₹10 से भी निवेश शुरू किया जा सकता है और मोबाइल ऐप के जरिए आसानी से सोना खरीदा-बेचा जा सकता है. इसमें खरीदार के नाम पर 24 कैरेट शुद्ध सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है. छोटे निवेश के लिए यह सुविधाजनक विकल्प हो सकता है, लेकिन बड़े निवेश के लिए Gold ETF या Sovereign Gold Bond जैसे रेगुलेटेड विकल्प ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं.
सोने के जेवर की बजाय अब लोग मोबाइल ऐप के जरिए छोटी-छोटी रकम से सोना खरीद रहे हैं.
आजकल युवा निवेशक तेजी से डिजिटल गोल्ड में निवेश कर रहे हैं. ट्रेडिशनल सोने के जेवर खरीदने की बजाय अब लोग मोबाइल ऐप के जरिए छोटी-छोटी रकम देकर भी सोना खरीद रहे हैं. आप सिर्फ ₹1 या ₹10 से भी डिजिटल गोल्ड में निवेश शुरू कर सकते हैं. इससे SIP जैसी आदत बन जाती है और सोने में लगातार निवेश करना आसान हो जाता है.
पिछले डेढ़ साल में डिजिटल गोल्ड के ट्रांजेक्शन 21 मिलियन से बढ़कर करीब 1 अरब हो गए हैं. अब कुल सोने के निवेश का लगभग 10% हिस्सा डिजिटल गोल्ड का है. लेकिन इस सुविधा के साथ कुछ कमियां भी हैं, जिन्हें समझना बहुत जरूरी है.
डिजिटल गोल्ड क्या है?
डिजिटल गोल्ड कोई काल्पनिक या वर्चुअल चीज नहीं है. जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं तो प्लेटफॉर्म आपके नाम पर असली 24 कैरेट (999.9 शुद्धता) वाला सोना खरीदता है और उसे सुरक्षित इंश्योर्ड वॉल्ट में रखता है.
आपको फिजिकल गोल्ड नहीं मिलता, लेकिन आप उसके मालिक होते हैं. आप चाहें तो इसे किसी भी समय बेच सकते हैं या अतिरिक्त शुल्क देकर फिजिकल गोल्ड (सिक्के या बार) के रूप में भी ले सकते हैं.
क्यों हो रहा है डिजिटल गोल्ड इतना पॉपुलर?
डिजिटल गोल्ड की सबसे बड़ी खूबी इसकी आसानी और कम लागत है. आपको ज्वेलरी शॉप जाने की जरूरत नहीं, लॉकर का खर्च नहीं और चोरी का डर भी नहीं रहता. आप कभी भी खरीद-बिक्री कर सकते हैं और रियल टाइम भाव के हिसाब से ट्रांजेक्शन होता है. युवा निवेशक छोटी रकम से शुरू करके धीरे-धीरे अपना सोने का पोर्टफोलियो बढ़ा रहे हैं. इससे सोने में निवेश करना पहले से कहीं ज्यादा सरल और सुविधाजनक हो गया है.
क्या देना होगा चार्ज?
डिजिटल गोल्ड खरीदते समय कोई मेकिंग चार्ज नहीं लगता, लेकिन 3% GST हर खरीदारी पर लगता है. इसके अलावा प्लेटफॉर्म स्प्रेड या छोटे शुल्क भी लग सकते हैं. अगर आप फिजिकल गोल्ड लेना चाहें तो डिलीवरी और मेकिंग चार्ज अलग से देने पड़ते हैं.
टैक्स के नियम फिजिकल गोल्ड जैसे ही हैं. अगर 24 महीने से कम समय में बेचते हैं तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स आपके इनकम स्लैब के अनुसार लगता है. 24 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर 12.5% टैक्स (प्लस सरचार्ज) लगता है.
क्या है सबसे बड़ा रिस्क?
डिजिटल गोल्ड अभी SEBI या RBI के नियमन के दायरे में नहीं आता है. इसका मतलब है प्लेटफॉर्म पर पूरी निगरानी नहीं है, शिकायत का प्रोसेस कमजोर है और सुरक्षा पूरी तरह प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है. डिजिटल गोल्ड छोटी रकम से सोने में निवेश शुरू करने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन बड़े निवेश के लिए गोल्ड ETF या Sovereign Gold Bond जैसे रेगुलेटेड ऑप्शन ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं. निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता जरूर चेक कर लें और अपनी जरूरत के अनुसार फैसला करें.
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यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें

