दिवाली तक कहां जाएगा सोना? अभी खरीदें या करें इंतजार, क्या कह रहें जानकार
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को सोने की कीमतों में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. इससे बाजार में महंगाई बढ़ने की चिंता फिर से गहरा गई है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर ग्लोबल बाजार का रुख बदल दिया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर सोने की कीमतों पर भी पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिर करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया है. वहीं घरेलू बाजार में सोना करीब 1.40 लाख रुपये से 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर रहा है.

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अब सोने में बड़ी गिरावट की संभावना काफी कम है. उनके मुताबिक, मौजूदा स्तर पर सोना लगभग अपना निचला स्तर बना चुका है और यहां से अधिकतम 5 फीसदी तक ही गिरावट आ सकती है.

सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?: विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें चढ़ गई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका फिर से बढ़ गई है. इसके अलावा निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर भी नजर बनाए हुए हैं. अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. बाजार में डर धीरे धीरे कम हो रहा है और सोना फिलहाल स्थिर दायरे में कारोबार कर रहा है.
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घरेलू खरीदारों के लिए क्या सलाह है?: विशेषज्ञों का कहना है कि अभी खरीदारी के लिए अच्छा समय हो सकता है. उनके मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने का मजबूत सपोर्ट करीब 1.35 लाख रुपये पर है. जो लोग सिर्फ इस उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं कि सोना और सस्ता होगा, उन्हें ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि मौजूदा स्तर से बड़ी गिरावट की संभावना कम है.

ज्वेलरी की मांग में सुधार: सोने की कीमतों में गिरावट के बाद ज्वेलरी बाजार में मांग बढ़ने लगी है. हाल के महीनों में ऊंची कीमतों और अनिश्चितता की वजह से ज्वेलर्स की बिक्री काफी प्रभावित हुई थी. विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जहां ज्वेलरी की मांग में 75 से 80 फीसदी तक गिरावट आई थी, अब यह घटकर करीब 40 से 45 फीसदी रह गई है. यानी बाजार धीरे धीरे सामान्य हो रहा है. अगस्त और सितंबर से त्योहारी सीजन की खरीदारी शुरू होने की उम्मीद है. ऐसे में दिवाली तक मांग पिछले साल के बराबर या उससे बेहतर रह सकती है.

भारत से ज्वेलरी एक्सपोर्ट क्यों बढ़ रहा है: विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय ज्वेलरी के निर्यात में बढ़ोतरी का सीधा संबंध डोनाल्ड ट्रंप के बयान से नहीं है. भारत में आयात शुल्क बढ़ने के बाद खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय वहां से ही ज्वेलरी खरीदना पसंद कर रहे हैं. यही वजह है कि दुबई और आसपास के देशों में भारतीय ज्वेलरी की मांग बढ़ी है. टैक्स के अंतर का फायदा आगे भी निर्यात को मिल सकता है.

दिवाली तक सोना कहां पहुंच सकता है: विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो जाता है और हालात सामान्य हो जाते हैं, तो दिवाली तक घरेलू बाजार में सोने की कीमत करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं अगर तनाव जारी रहता है, तो सोना 1.35 लाख रुपये से 1.45 लाख रुपये के दायरे में रह सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 3,800 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि आगे 5,100 डॉलर का स्तर अहम रहेगा.

चांदी में भी तेजी की उम्मीद: विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के साथ साथ चांदी में भी सुधार देखने को मिल सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 60 डॉलर के आसपास मजबूत कारोबार कर सकती है. वहीं घरेलू बाजार में चांदी के लिए 2.20 लाख रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2.28 लाख रुपये तक जाने की संभावना जताई गई है.

निवेशकों के लिए क्या रणनीति होनी चाहिए: विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश किया जा सकता है. मौजूदा स्तर पर धीरे धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है. हालांकि, निवेशकों को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर से जुड़े फैसलों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. आने वाले महीनों में यही कारक सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगे.

नोट: यहां दी गई निवेश संबंधी जानकारी बाजार विशेषज्ञों की व्यक्तिगत राय पर आधारित है. किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.

