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एफडी को लोग सुरक्षित निवेश मानकर सालों के लिए पैसा जमा कर देते हैं, लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर यही एफडी समय से पहले तोड़ना भारी पड़ सकता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि बैंक सिर्फ छोटी-मोटी फीस नहीं काटता, बल्कि पूरे ब्याज का हिसाब ही बदल देता है. 5 साल की एफडी अगर 1 साल में तोड़ी जाए तो बैंक लंबी अवधि वाला फायदा खत्म कर देता है और कम अवधि की ब्याज दर लागू कर देता है. इसके बाद पेनल्टी अलग से काटी जाती है, जिससे आपका मुनाफा उम्मीद से काफी कम हो सकता है. इसलिए एफडी तोड़ने से पहले बैंक के नियम और नुकसान का गणित समझना बेहद जरूरी है.
FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक कैसे काटता है पेनल्टी?
नई दिल्ली. अक्सर लोग यह सोचकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाते हैं कि मैच्योरिटी से पहले वे इस पैसे को हाथ नहीं लगाएंगे. लेकिन जिंदगी में कभी भी इमरजेंसी आ सकती है. अचानक मेडिकल खर्च, घर की मरम्मत या किसी बड़े संकट के समय लोगों को अपनी एफडी बीच में ही तोड़नी पड़ जाती है. क्या आप जानते हैं कि अगर आप समय से पहले अपनी एफडी तोड़ते हैं, तो बैंक आप पर कितना जुर्माना लगाता है?
ज्यादातर लोगों को लगता है कि एफडी बीच में तोड़ने पर बैंक सिर्फ एक तय रकम (जैसे 500 या 1000 रुपये) जुर्माने के तौर पर काटेगा और बाकी पैसा दे देगा. लेकिन ऐसा नहीं है। बैंक आपके ब्याज का पूरा गणित ही बदल देते हैं.
जुर्माने की मार
मान लीजिए आपने 5 साल के लिए एफडी कराई थी, लेकिन आप इसे 1 साल में ही तोड़ रहे हैं. ऐसे में बैंक आपको 5 साल वाला भारी-भरकम ब्याज नहीं देगा. बैंक देखेगा कि 1 साल की एफडी पर क्या ब्याज दर थी, वह वही दर लागू करेगा. इसके बाद बैंक उस 1 साल की ब्याज दर में से भी 0.5% से 1% तक की कटौती (पेनल्टी) कर लेगा यानी आपको दोहरी मार पड़ती है. एक तो ब्याज दर कम हो जाती है और ऊपर से पेनल्टी भी कटती है. यही वजह है कि हाथ में आने वाला पैसा उम्मीद से काफी कम होता है.
हर बैंक के नियम हैं अलग
एफडी तोड़ने के नियम सभी बैंकों में एक जैसे नहीं होते हैं. कुछ बैंक सीनियर सिटीजन्स को पेनल्टी में छूट देते हैं. कुछ बैंक ‘नो-पेनल्टी एफडी’ भी ऑफर करते हैं, लेकिन इनमें सामान्य एफडी के मुकाबले शुरू से ही ब्याज थोड़ा कम मिलता है.
टैक्स का भी रखें ध्यान
एफडी भले ही आप समय से पहले तोड़ लें, लेकिन जितने दिन भी आपका पैसा बैंक में रहा और उस पर जो भी ब्याज बना, उस पर आपको टैक्स देना होगा. यह टैक्स आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से कटेगा, जिससे आपका मुनाफा और कम हो जाएगा.
नुकसान से बचने के दो जादुई तरीके
अगर आप चाहते हैं कि इमरजेंसी में आपकी जेब पर डाका न पड़े, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ये दो तरीके अपनाने की सलाह देते हैं:
- लैडरिंग तरीका: एक बड़ी एफडी (जैसे 5 लाख रुपये) कराने के बजाय 1-1 लाख रुपये की 5 अलग-अलग एफडी कराएं. इससे अगर जरूरत पड़ी, तो आप सिर्फ एक एफडी तोड़ेंगे और बाकी 4 सुरक्षित रहेंगी।
- स्वीप-इन सुविधा: अपनी एफडी को सेविंग्स अकाउंट से लिंक कराएं. जरूरत पड़ने पर बैंक सिर्फ उतनी ही रकम एफडी से निकालेगा जितनी आपको चाहिए, बाकी रकम पर ब्याज मिलता रहेगा.
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वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें

