नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) और संभावित ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ के आरोपों के घेरे में आ गए हैं. हाल ही में सामने आई जानकारियों से पता चला है कि साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ट्रंप या उनके वित्तीय सलाहकारों ने 3,700 से अधिक स्टॉक ट्रेड को अंजाम दिया. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन ट्रेड्स में उन दिग्गज कंपनियों के शेयर भी शामिल हैं, जिनके भाग्य का फैसला खुद अमेरिकी सरकार की नीतियों और राष्ट्रपति के नियामकीय फैसलों से होता है. हालांकि, व्हाइट हाउस ने किसी भी प्रकार के गलत काम के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल और केवल अमेरिकी जनता के सर्वोत्तम और सर्वोच्च हित में काम करते हैं. उनके फैसलों में किसी भी प्रकार का कोई निजी हित या हितों का टकराव शामिल नहीं है और ये आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं.
अमेरिकी मीडिया और विपक्षी दल सीधे सवाल उठा रहे हैं कि क्या दुनिया के सबसे बड़े बाजार को प्रभावित करने वाली गोपनीय नीतियों की जानकारी का इस्तेमाल निजी पोर्टफोलियो को चमकाने के लिए किया गया? ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन हजारों ट्रेड्स के दायरे में अमेरिका की कई टॉप टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, एयरोस्पेस, डिफेंस और मीडिया कंपनियां थीं. एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा और बोइंग जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में करोड़ों डॉलर के बड़े लेन-देन किए गए. खास बात है कि ट्रंप के पोर्टफोलियो से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय खुलासे संघीय सरकार की निर्धारित रिपोर्टिंग समयसीमा (Federal Reporting Deadlines) के बहुत बाद और देरी से जमा किए गए.
हर दिन औसतन 40 से अधिक बड़े ट्रेड
वित्तीय फाइलिंग के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप या उनके सलाहकारों ने जनवरी से मार्च 2026 के बीच औसतन प्रतिदिन 40 से अधिक स्टॉक ट्रेड किए. शेयर बाजार के इतिहास में किसी भी मौजूदा राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान ऐसी आक्रामक ट्रेडिंग एक्टिविटी कभी नहीं देखी गई है. यह वॉल स्ट्रीट के इतिहास की सबसे असाधारण घटनाओं में से एक है. यह उछाल कोई सामान्य घटना नहीं है क्योंकि साल 2025 की अंतिम तिमाही में ट्रंप के पोर्टफोलियो में केवल 380 ट्रेड्स का खुलासा हुआ था.
इन कंपनियों के शेयरों की ज्यादा खरीद-फरोख्त
डोनाल्ड ट्रंप के खातों से पहली तिमाही के दौरान जिन कंपनियों में सबसे बड़े दांव लगाए गए, उनमें एनवीडिया, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, बोइंग और कोस्टको शामिल हैं. इसके अलावा अमेजन, मेटा, उबर, ईबे, अबॉट लैबोरेटरी और डॉलर ट्री के शेयरों में भी ट्रंप ने ट्रेड किया. 10 फरवरी को एक ही झटके में ट्रंप के पोर्टफोलियो से माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन के बड़ी संख्या में शेयर बेचे गए और बाजार से 50 लाख डॉलर से लेकर 2.5 करोड़ डॉलर तक की रकम निकाली गई.
हितों का टकराव या इनसाइडर ट्रेडिंग?
यहीं से यह पूरा मामला केवल एक वित्तीय लेनदेन न रहकर एक गंभीर राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले लेता है. जिन सेक्टर्स की कंपनियों में यह आक्रामक ट्रेडिंग की गई, वे सभी सेक्टर्स सीधे तौर पर अमेरिकी सरकार की विदेश नीति, रक्षा बजट, टैक्स नियमों और भू-राजनीतिक फैसलों के इशारे पर चलते हैं. उदाहरण के लिए एनवीडिया को चीन को एडवांस AI चिप्स एक्सपोर्ट करने के लिए अमेरिकी सरकार की मंजूरी चाहिए होती है, जबकि बोइंग का कारोबार अमेरिकी रक्षा और एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्ट्स से गहराई से जुड़ा हुआ है. इसी तरह ही माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और मेटा जैसी कंपनियां एंटीट्रस्ट जांच, AI रेगुलेशन और फेडरल पॉलिसी फैसलों से लगातार प्रभावित होती रहती हैं.
आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का साफ कहना है कि भले ही तकनीकी रूप से कागजों पर कोई मौजूदा अमेरिकी कानून सीधे तौर पर न टूटा हो, लेकिन राष्ट्रपति द्वारा इतनी आक्रामक ट्रेडिंग गतिविधि संभावित हितों के टकराव और ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ को लेकर बेहद गंभीर और डराने वाली चिंताएं पैदा करती है.
पूर्व राष्ट्रपतियों की परंपरा को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा
अमेरिका में परंपरा रही है कि जब भी कोई व्यक्ति राष्ट्रपति बनता है तो वह अपने तमाम कारोबारी हितों, कंपनियों और पोर्टफोलियो से खुद को पूरी तरह अलग कर लेता है. इसके लिए अमरीकी राष्ट्रपति अपने पूरे वित्तीय साम्राज्य को एक पारंपरिक ‘ब्लाइंड ट्रस्ट’ (Blind Trust) में डाल देते हैं, जिसे एक स्वतंत्र वित्तीय संस्था या ट्रस्टी मैनेज करता है और राष्ट्रपति को यह भनक भी नहीं होती कि उनका पैसा कहां लग रहा है. लेकिन ट्रंप ने इस परंपरा को पूरी तरह से नकार दिया. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के दोनों बेटे आज भी ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन के बड़े हिस्सों और वित्तीय फैसलों की खुद देखरेख कर रहे हैं, जिससे यह आशंका हमेशा बनी रहती है कि व्हाइट हाउस की गुप्त सूचनाएं उनके बिजनेस रूम तक आसानी से पहुंच सकती हैं.
वॉल स्ट्रीट के दिग्गज हैरान
शेयर बाजार और वॉल स्ट्रीट के बड़े-बड़े मार्केट एक्सपर्ट्स केवल इन ट्रेड्स की अविश्वसनीय संख्या को देखकर ही पूरी तरह सन्न हैं. टटल कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ मैथ्यू टटल ने कहा कि यह ट्रेड्स की एक पागलपन भरी संख्या है. इसे देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यह किसी व्यक्ति का सामान्य पोर्टफोलियो है. ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कोई बड़ा हेज फंड (Hedge Fund) कंप्यूटर सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर एल्गोरिदमिक ट्रेड कर रहा हो.
द वेल्थ अलायंस के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर एरिक डिटन ने कहा कि वित्तीय बाजार में अपने 40 से अधिक वर्षों के लंबे करियर और अनुभव में मैंने किसी भी मानक से इतनी भारी और आक्रामक ट्रेडिंग एक्टिविटी कभी नहीं देखी है, वो भी देश के सर्वोच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति के खाते में.
वहीं, 50 पार्क इन्वेस्टमेंट के संस्थापक एडम सरहान ने भी इस पर बड़ा सवाल उठाया कि इतनी भारी ट्रेडिंग के पीछे का वास्तविक मकसद क्या था और क्या इतने खरबों के लेन-देन के बाद पोर्टफोलियो ने वास्तव में कोई बड़ा नेट प्रॉफिट कमाया भी है या यह सिर्फ पैसों को इधर-उधर घुमाने का खेल था.
ईरान संकट और तेल बाजार के संदिग्ध दांव ने बढ़ाई जांच की मांग
ट्रंप के ये नए वित्तीय खुलासे एक ऐसे समय पर सार्वजनिक हुए हैं जब कुछ ही महीने पहले ग्लोबल ऑयल मार्केट और स्टॉक फ्यूचर्स मार्केट में देखी गई बेहद असामान्य और संदिग्ध ट्रेडिंग एक्टिविटी ने भी अमेरिका के वित्तीय नियामकों (SEC) के कान खड़े कर दिए थे. इस साल की शुरुआत में, कुछ बड़े ट्रेडर्स ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट और अमेरिकी शेयर बाजार में अचानक आने वाली तेजी पर करोड़ों डॉलर के बड़े दांव लगाए थे.
हैरानी की बात यह रही कि इन ट्रेड्स के ठीक बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण वार्ताओं में एक बड़ी प्रगति और शांति समझौते का संकेत देने वाला सार्वजनिक बयान जारी कर दिया. ट्रंप के उस बयान के आते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें धड़ाम से गिर गईं, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया. इस सटीक टाइमिंग की वजह से सोशल मीडिया और वॉल स्ट्रीट पर यह अटकलें तेज हो गईं कि कुछ खास लोगों को इस बयान की जानकारी पहले से ही थी.

