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अच्छी सैलरी होने के बावजूद आज कई लोगों को होम लोन मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बैंक अब केवल कमाई नहीं, बल्कि आपके क्रेडिट स्कोर और पुराने भुगतान रिकॉर्ड को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. क्रेडिट कार्ड बिल में देरी या ज्यादा लोन पूछताछ जैसी छोटी गलतियां भी घर खरीदने का सपना महंगा बना सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री अब होम लोन पाने की सबसे बड़ी चाबी बनती जा रही है.
घर खरीदने का सपना पड़ सकता है महंगा, खराब क्रेडिट स्कोर बढ़ा सकता है लोन की लागत. (Representative Image:AI)
नई दिल्ली. घर खरीदना आज भी ज्यादातर लोगों का सबसे बड़ा सपना माना जाता है. लेकिन अब केवल अच्छी सैलरी होना ही होम लोन मिलने की गारंटी नहीं रह गया है. बैंक और वित्तीय संस्थान लोन मंजूर करने से पहले आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री और क्रेडिट स्कोर को पहले से कहीं ज्यादा महत्व देने लगे हैं. कई बार समान वेतन और बचत वाले दो लोगों में से एक को आसानी से कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है, जबकि दूसरे को ज्यादा डाउन पेमेंट या सख्त शर्तों का सामना करना पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह क्रेडिट रिकॉर्ड होता है, जो व्यक्ति की वित्तीय आदतों और भुगतान अनुशासन को दिखाता है.
बैंक क्यों देते हैं क्रेडिट स्कोर को ज्यादा महत्व
होम लोन लंबे समय के लिए दिया जाने वाला वित्तीय उत्पाद होता है. कई मामलों में इसकी अवधि 20 साल या उससे भी ज्यादा होती है. ऐसे में बैंक केवल मौजूदा आय नहीं बल्कि यह भी देखना चाहते हैं कि ग्राहक ने पिछले वर्षों में अपने वित्तीय दायित्वों को किस तरह निभाया है. क्रेडिट कार्ड का बकाया देर से भरना, बार-बार पर्सनल लोन के लिए आवेदन करना या EMI में देरी जैसी बातें बैंक के लिए चेतावनी संकेत बन जाती हैं. भले ही ये घटनाएं पुरानी हों, लेकिन उनका रिकॉर्ड लंबे समय तक क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई देता है. यही वजह है कि अब बैंक जोखिम का आकलन करने में क्रेडिट स्कोर को बेहद अहम मान रहे हैं.
अच्छे क्रेडिट स्कोर से कम हो सकती है लोन की लागत
विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों को कई फायदे मिल सकते हैं. ऐसे लोगों को अक्सर कम ब्याज दर, तेजी से प्रोसेसिंग और लोन चुकाने की अवधि में ज्यादा लचीलापन दिया जाता है. दूसरी तरफ कमजोर क्रेडिट रिकॉर्ड वाले लोगों को ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है. देखने में ब्याज दर का छोटा अंतर मामूली लगता है, लेकिन 20 साल जैसे लंबे समय में यह लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ बन सकता है. यही कारण है कि अब घर खरीदने की तैयारी केवल डाउन पेमेंट जमा करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल बनाना भी जरूरी हो गया है.
क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल का तरीका भी करता है असर
बैंक केवल यह नहीं देखते कि आपने भुगतान समय पर किया या नहीं, बल्कि यह भी जांचते हैं कि आप अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किस तरह करते हैं. अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपनी पूरी क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करता है, तो इसे वित्तीय दबाव का संकेत माना जा सकता है. वहीं सीमित और संतुलित उपयोग के साथ समय पर भुगतान करना बेहतर माना जाता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का 30 प्रतिशत से कम इस्तेमाल करना आदर्श स्थिति मानी जाती है. इसके अलावा पुराने क्रेडिट अकाउंट बंद न करना और सुरक्षित तथा असुरक्षित दोनों तरह के लोन का संतुलन बनाए रखना भी स्कोर सुधारने में मदद करता है.
घर खरीदने से पहले ऐसे मजबूत करें अपनी प्रोफाइल
रियल एस्टेट और वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि घर खरीदने की योजना बनाने से कम से कम 6 से 12 महीने पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांच लेनी चाहिए. रिपोर्ट में अगर कोई गलती या गलत जानकारी हो तो उसे तुरंत ठीक कराना चाहिए. साथ ही लगातार नए लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्कोर पर असर पड़ सकता है. लंबित EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाना सबसे जरूरी कदम माना जाता है. कई फिनटेक कंपनियां अब किराए के नियमित भुगतान को भी क्रेडिट हिस्ट्री का हिस्सा बनाने लगी हैं, जिससे पहली बार लोन लेने वालों को फायदा मिल सकता है.
वित्तीय अनुशासन ही बन रहा सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में होम लोन का फैसला केवल एक मीटिंग में नहीं होता, बल्कि यह कई सालों की वित्तीय आदतों का नतीजा होता है. बैंक अब यह देख रहे हैं कि ग्राहक ने अपने पैसों को कितनी जिम्मेदारी से संभाला है. अच्छी सैलरी निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन मजबूत क्रेडिट स्कोर बैंक के भरोसे को और ज्यादा मजबूत करता है. यही वजह है कि अब वित्तीय अनुशासन, समय पर भुगतान और संतुलित खर्च को भविष्य की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत माना जा रहा है. आने वाले समय में जिन लोगों का क्रेडिट रिकॉर्ड मजबूत होगा, उनके लिए घर खरीदने का सपना पूरा करना ज्यादा आसान हो सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

