बाड़मेर की एक महिला अभ्यर्थी, जिसने बच्चे को जन्म देने के महज 15 दिन बाद पुलिस कांस्टेबल की दौड़ में हिस्सा लिया और असफल रही, उसे राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की कोर्ट ने बाड़मेर निवासी सुशीला की याचिका पर सुनवाई करते हुए
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कोर्ट ने माना कि गर्भवती या हाल ही में प्रसव वाली महिलाओं को नियमों के अनुसार फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) में बाद की तारीख पर शामिल होने की छूट दी जानी चाहिए। इसके लिए बाड़मेर जिले में कांस्टेबल ड्राइवर (महिला) का एक पद रिक्त रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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29 नवंबर को डिलीवरी, 14 दिसंबर को PET
याचिकाकर्ता सुशीला ने कांस्टेबल ड्राइवर पद के लिए आवेदन कर इसकी लिखित परीक्षा पास कर ली थी। उसका फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) 14 दिसंबर 2025 को होना था। इससे ठीक पहले 29 नवंबर 2025 को सुशीला ने बच्चे को जन्म दिया। उसने उसी दिन विभाग को पत्र लिखकर अपनी स्थिति बताई और विज्ञापन की शर्तों के तहत फिजिकल टेस्ट की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी।
लेकिन विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इस डर से कि कहीं वह भर्ती प्रक्रिया से बाहर न हो जाए, सुशीला डिलीवरी के महज 15 दिन बाद 14 दिसंबर को ग्राउंड पर पहुंची और दौड़ में हिस्सा लिया। शारीरिक कमजोरी के कारण वह दौड़ पूरी नहीं कर सकी और उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।
क्या नियम कहता है?
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में विज्ञापन की शर्त संख्या 10 का हवाला दिया। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि –
- नियमों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे दौड़ में हिस्सा न लें।
- उन्हें फिजिकल टेस्ट के दिन उपस्थित होकर बोर्ड को प्रार्थना पत्र देना होता है।
- डिलीवरी के बाद अधिकतम 6 महीने की अवधि में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देने पर उनका टेस्ट बाद में लिया जा सकता है।

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कोर्ट ने कहा – महिला की मजबूरी समझें
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने समय पर विभाग को सूचना दे दी थी। चूंकि उसे कोई छूट नहीं मिली, इसलिए वह मजबूरी में दौड़ में शामिल हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा-
“याचिकाकर्ता की मेडिकल और शारीरिक स्थिति, डिलीवरी की तारीख और फिजिकल टेस्ट की तारीख को देखते हुए, यह कोर्ट का मत है कि उसे विज्ञापन की शर्तों के तहत छूट देते हुए एक और मौका दिया जाना चाहिए।”
सहानुभूतिपूर्वक विचार करें
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें। उसे 6 महीने के भीतर राजकीय चिकित्सा अधिकारी से फिटनेस सर्टिफिकेट पेश करने पर भविष्य में होने वाले फिजिकल टेस्ट में शामिल होने का मौका दिया जाए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सुशीला को यह मौका नहीं मिल जाता, तब तक रिस्पोंडेंट्स (विभाग) कांस्टेबल-ड्राइवर महिला (बाड़मेर) का एक पद रिक्त रखा जाए।

