Thursday, May 7, 2026
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4 पौधों की क्रॉस ब्रीडिंग से तैयार आम का पेड़: सीवान के किसान अशोक सिंह ने इसके लिए नहीं ली ट्रेनिंग,बागवानी में करते कई तरह के नवाचार – Siwan News



आमतौर पर एक पेड़ एक ही किस्म का फल देता है, लेकिन सीवान के अशोक सिंह ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो बागवानी के क्षेत्र में एक नजीर बन सकती है। उन्होंने आम की एक ऐसी प्रजाति विकसित की है, जिसमें एक ही पेड़ पर चार अलग-अलग किस्मों के आम लगते हैं।

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न ट्रेनिंग, न वैज्ञानिक मदद, फिर भी बना डाला चमत्कारी पेड़

बसंतपुर प्रखंड के नगौली गांव निवासी अशोक सिंह ने बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण या वैज्ञानिक मदद के यह कमाल कर दिखाया है। उन्होंने आम्रपाली, ऑल टाइम, दशहरी और मल्लिका किस्मों की क्रॉस ब्रीडिंग कर एक नई हाइब्रिड प्रजाति तैयार की है। इस पेड़ पर हर किस्म के आम का रंग, स्वाद और आकार अलग-अलग होता है।

4 साल पहले शुरू किया था प्रयोग

अशोक सिंह ने बताया कि उन्होंने चार साल पहले यह प्रयोग शुरू किया था। आज उनके पास ऐसे 10 पेड़ तैयार हैं, जिनसे वे आम की अच्छी फसल भी ले चुके हैं। इस प्रजाति को उन्होंने अब तक कोई नाम नहीं दिया है, लेकिन इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

दो साल में फल देने लगता है पेड़

अशोक सिंह ने बताया कि यह नया पौधा सिर्फ दो साल में फल देना शुरू कर देता है, जबकि पारंपरिक आम के पौधों में यह प्रक्रिया 4–5 साल लेती है। इस वजह से कई किसान अब उनसे पौधे खरीद रहे हैं।

नर्सरी में 500 से ज्यादा फलों और फूलों की प्रजातियां

अशोक सिंह ने अपने आठ एकड़ पुश्तैनी जमीन को हार्टिकल्चर जोन में तब्दील कर दिया है। यहां वे 500 से ज्यादा प्रजातियों के पौधे उगा रहे हैं। बंगाल से लाकर वे थाइलैंड का ह्वाइट वाटर एपल, मियां जाकी आम और दुर्लभ मसालों के पौधे भी उगा रहे हैं।

बागवानी को बनाया करियर और कारोबार

अशोक सिंह भूगोल में एमए पास हैं। उन्होंने पढ़ाई के दौरान मिट्टी और जलवायु पर विशेष ध्यान दिया। कोलकाता की उन्नत नर्सरियों से प्रेरणा लेकर उन्होंने बागवानी को ही अपना करियर बना लिया। अब उनकी आमदनी भी अच्छी हो रही है और गांव के दूसरे किसान भी उनसे प्रेरित हो रहे हैं।

जलवायु की सीमाएं तोड़ने वाला बागवान

अशोक सिंह पहाड़ी फलों की खेती भी मैदानी इलाके में कर रहे हैं। उन्होंने आडू (सतालू), सेब और सफेद जामुन की खेती कर यह साबित किया है कि मेहनत और प्रयोग से जलवायु की सीमाएं भी बेमानी हो सकती हैं।

अशोक सिंह आज सीवान ही नहीं, पूरे बिहार के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने जो कर दिखाया है, वह साबित करता है कि इच्छाशक्ति, अध्ययन और लगातार प्रयोग से खेती को भी नवाचार का क्षेत्र बनाया जा सकता है।

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