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साल 2003 की एक कल्ट फिल्म का बेहद दिलचस्प किस्सा इन दिनों चर्चा में है. डायरेक्टर ने खुलासा किया कि ट्रायल शो के दौरान फिल्म को डिजास्टर घोषित कर दिया था. उन्हें सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि मेकर्स ने एक एक्शन हीरो को अस्पताल की यूनिफॉर्म पहनाकर डॉक्टर क्यों बना दिया. इतना ही नहीं, रिलीज के पहले दिन सुबह का शो सिर्फ आधा भरा था, जिसे देखकर पूरी टीम घबरा गई थी. हालांकि, शाम होते-होते दर्शकों ने फिल्म पर ऐसा प्यार बरसाया कि सिनेमाघरों के बाहर हाउसफुल के बोर्ड लग गए थे.
नई दिल्ली. संजय दत्त और अरशद वारसी की ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ बॉलीवुड की कल्ट फिल्मों में से एक है. इसका डायरेक्शन राजकुमार हिरानी ने किया था. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म को शुरुआत में ही डिजास्टर घोषित कर दिया गया था. रिलीज के बाद फिल्म के मॉर्निंग शोज को खास रिस्पॉन्स नहीं मिला, लेकिन शाम होते-होते सिनेमाघर हाउसफुल हो गए थे. यह खुलासा राजकुमार हिरानी ने खुद अपने एक इंटरव्यू में किया है.

राजकुमार हिरानी ने बताया कि उनकी फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ के पहले ट्रायल शो को देखने के बाद इंडस्ट्री के एक जाने-माने डायरेक्टर ने इसे डिजास्टर बता दिया था, जिससे वह काफी परेशान हो गए थे. संजय अरोड़ा के साथ बातचीत में राजकुमार हिरानी ने बताया कि उस डायरेक्टर ने संजय दत्त जैसे बड़े एक्शन हीरो को अस्पताल में रखने और यूनिफॉर्म पहनाने के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए थे.

हिरानी ने उस दौर को याद करते हुए बताया, ‘मुझे अच्छी तरह याद है, जब फिल्म पूरी हो गई थी और हमने एक ट्रायल शो रखा था. फिल्म देखने आए कुछ लोगों में एक डायरेक्टर भी शामिल थे. फिल्म खत्म होते ही उन्होंने मुझसे कहा कि ये तुमने क्या बना दिया है? ये तो डिजास्टर फिल्म है.’
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उन्होंने बताया, ‘डायरेक्टर ने आगे कहा कि संजय दत्त एक एक्शन हीरो हैं और तुम उन्हें लेकर अस्पताल के बैकग्राउंड पर फिल्म बना रहे हो? हद तो ये है कि तुमने गाने भी वहीं शूट कर लिए. कम से कम एक गाना तो किसी विदेशी लोकेशन पर फिल्माना चाहिए था. उनका मानना था कि फिल्म थोड़ी कलरफुल होनी चाहिए थी, जिसमें किरदारों के कपड़े रंग-बिरंगे होते. वह बोले कि ये क्या बकवास है? तुमने तो सबको अस्पताल की यूनिफॉर्म पहना दी है.’

‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर काफी ठंडी रही थी. हिरानी ने बताया कि रिलीज के पहले दिन दर्शकों का रिएक्शन देखने के लिए वह मुंबई के मशहूर गेटी गैलेक्सी सिनेमाहॉल गए थे. वहां पहुंचते ही थियेटर के गेटकीपर ने उन्हें नीचे की तरफ अंगूठा दिखाकर इशारा किया, जिसे देखकर हिरानी का दिल बैठ गया और उन्हें लगा कि फिल्म पिट गई.

राजकुमार हिरानी ने आगे बताया, ‘लेकिन जब मैं अंदर गया, तो देखा कि थियेटर सिर्फ 50 परसेंट ही भरा था. तब मुझे समझ आया कि गेटकीपर के उस इशारे का मतलब फिल्म का खराब होना नहीं, बल्कि शो का हाउसफुल न होना था. एक टिकट बेचने वाले के नजरिए से उसके लिए सिर्फ भीड़ मायने रखती थी.’

डायरेक्टर ने आगे कहा, ‘राहत की बात यह थी कि थियेटर के अंदर मौजूद वो आधी ऑडियंस भी फिल्म का भरपूर मजा ले रही थी और जमकर ठहाके लगा रही थी.’ हिरानी ने कहा कि सुबह का शो भले ही ठंडा था, लेकिन शाम होते-होते नजारा बदल गया और कई थियेटर्स के बाहर हाउसफुल के बोर्ड लटक गए थे.’

संजय दत्त की इस फिल्म से राजकुमार हिरानी ने डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था. यह फिल्म इस मायने में भी बेहद खास थी क्योंकि यह सुनील दत्त के करियर की आखिरी फिल्म साबित हुई, जिसमें उन्होंने पर्दे पर भी अपने रियल लाइफ बेटे संजय दत्त के पिता का ही किरदार निभाया था. अरशद वारसी, बोमन ईरानी और ग्रेसी सिंह जैसे सितारों से सजी यह फिल्म क्रिटिक्स की कसौटी पर तो खरी उतरी ही, साथ ही बॉक्स ऑफिस पर हिट होने के साथ कल्ट भी कहलाई.

