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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील कर देश में नई आर्थिक बहस छेड़ दी है. भारत हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ता है. सरकार का मानना है कि अगर लोग सोने के बजाय बैंक योजनाओं, शेयर बाजार या दूसरे निवेश विकल्पों की तरफ जाएं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोगों से अपील की कि वे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक साल तक सोना न खरीदें. भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक है और त्योहारों और शादियों के मौसम में विदेशों से टन सोना आता है. नतीजतन, देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है और रुपये के मूल्य पर बहुत दबाव डाल रहा है. इसी पृष्ठभूमि में मोदी ने देश की आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए यह पहल की है. (AI)

भारत को सोना आयात करने के लिए हर साल लाखों करोड़ रुपये विदेशी कंपनियों को देने पड़ते हैं. इससे देश का चालू खाता घाटा बढ़ेगा. सरकार का हिसाब है कि अगर लोग सोने में निवेश करने के बजाय बैंक योजनाओं या शेयर बाजार में निवेश करेंगे तो उस पैसे का इस्तेमाल देश के विकास के लिए होगा. (AI)

जैसे ही हम सोने की खरीद कम करते हैं, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत मजबूत हो जाती है. जब बाजार में डॉलर की मांग घटेगी तो रुपये का अवमूल्यन होगा और आयातित पेट्रोल और गैस की कीमतों में भी गिरावट आएगी. इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ता है. (AI)
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बाजार के जानकारों के मुताबिक, अगर भारतीय मोदी की सलाह पर ध्यान देते हैं और एक साल के लिए सोना खरीदना बंद कर देते हैं तो मांग में गिरावट आ सकती है और कीमतों में अस्थायी गिरावट आ सकती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए 2027 तक 10 ग्राम सोने की कीमत 85,000 रुपये से 95,000 रुपये के दायरे में पहुंचने की उम्मीद है. (AI)

सरकार चाहती है कि लोग डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का विकल्प चुनें, न कि इसे भौतिक रूप से घर पर रखें. इससे सोने का आयात कम होगा और उपभोक्ताओं को सुरक्षित निवेश के साथ-साथ वार्षिक ब्याज भी मिलेगा. यह देश और निवेशक, दोनों के लिए फायदेमंद होगा. (AI)

पीएम मोदी के आह्वान से ज्वैलर्स में चिंता पैदा हो गई है. यह उन लाखों परिवारों को प्रभावित कर सकता है जिनकी आजीविका शादियों और त्योहारों के दौरान सोने के व्यापार पर निर्भर है. हालांकि, सरकार कह रही है कि यह केवल एक साल का अस्थायी अनुशासन है जो देश को लंबे समय में आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा. (AI)

2027 तक बाजार में सोने की आपूर्ति और मांग का संतुलन लोगों के फैसलों पर निर्भर करेगा. अगर यह एक साल का ‘गोल्ड फास्ट’ सफल होता है तो इसमें कोई शक नहीं है कि भारत आर्थिक रूप से दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. उस समय कीमत चाहे जो भी हो, भारत की क्रय शक्ति अधिक होगी. (AI)

प्रधानमंत्री का संदेश है कि सोने का लालच छोड़कर देश के विकास के लिए हाथ मिलाएं. अगर आप एक साल तक सोना नहीं खरीदते हैं तो इस पैसे का इस्तेमाल देश में सड़क, रेलवे और शिक्षा के लिए किया जा सकता है. 2027 में सोने की कीमत के बारे में चिंता करने के बजाय, अब असली मंत्र यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को कैसे उठाया जाए. (AI)

