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हर मानसून में शहरों की सड़कें तालाब बन जाती हैं और लाखों की कारें पानी में डूबकर खराब हो जाती हैं. घरों में घुसता बारिश का पानी लोगों के लिए हर साल बड़ी मुसीबत बनता रहा है. लेकिन अब ‘स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम’ और अर्बन फ्लड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स शहरों को जलभराव से बचाने की नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं. नई तकनीक वाले ये हाईटेक सिस्टम भारी बारिश का पानी मिनटों में निकालकर सड़कों और कॉलोनियों को सुरक्षित रखने का दावा कर रहे हैं.
अब बारिश में नहीं डूबेंगी कारें! स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम बदल देगा शहरों की तस्वीर. (Representative Image:AI)
नई दिल्ली. हर साल मानसून आते ही बड़े शहरों में जलभराव लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है. थोड़ी देर की बारिश में सड़कें तालाब जैसी दिखने लगती हैं, महंगी कारें पानी में फंस जाती हैं और घरों में गंदा पानी भरने लगता है. लेकिन अब देश के कई शहरों में शुरू हुए ‘अर्बन फ्लड मैनेजमेंट’ और स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम प्रोजेक्ट्स इस समस्या का स्थायी समाधान बनने की उम्मीद जगा रहे हैं. नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नई तकनीक से ऐसे सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं जो भारी बारिश के पानी को कुछ ही मिनटों में निकाल सकेंगे.
आखिर क्यों डूब जाते हैं शहर?
विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में बढ़ते कंक्रीट निर्माण और अव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम जलभराव की सबसे बड़ी वजह हैं. पहले बारिश का पानी जमीन में आसानी से चला जाता था, लेकिन अब सड़कों, पार्किंग और इमारतों के कारण पानी के प्राकृतिक रास्ते बंद हो गए हैं. दूसरी तरफ पुराने नाले और सीवर सिस्टम बढ़ती आबादी के हिसाब से छोटे पड़ चुके हैं. यही कारण है कि हल्की बारिश में भी सड़कें पानी से भर जाती हैं. कई बार घंटों तक पानी नहीं निकलता और वाहन बंद हो जाते हैं. इससे लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है.
क्या है स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम?
नई पीढ़ी के स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम को खासतौर पर शहरी बाढ़ रोकने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. इसमें बड़े अंडरग्राउंड पाइप, हाई-कैपेसिटी पंप, सेंसर आधारित मॉनिटरिंग और रेनवॉटर स्टोरेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे ही बारिश शुरू होती है, सेंसर पानी का स्तर मापते हैं और कंट्रोल सिस्टम तुरंत अतिरिक्त पानी को दूसरी लाइन या स्टोरेज टैंक की ओर भेज देता है. कई शहरों में ऐसे ड्रेनेज सिस्टम बनाए जा रहे हैं जो एक घंटे में हुई भारी बारिश का पानी भी तेजी से निकाल सकें. इससे सड़क पर पानी जमा होने की संभावना काफी कम हो जाती है.
कार और घर बचाने में कैसे मिलेगा फायदा
बारिश के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान कारों और घरों को होता है. पानी भरने से कार का इंजन खराब हो सकता है और मरम्मत पर भारी खर्च आता है. वहीं घरों में पानी घुसने से फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और जरूरी सामान खराब हो जाते हैं. स्मार्ट ड्रेनेज प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि बारिश का पानी तेजी से निकलेगा और जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी. इससे पार्किंग एरिया, बेसमेंट और कॉलोनियों में पानी जमा होने का खतरा कम होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह सिस्टम शहरी लोगों के आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक कम कर सकता है.
नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन की बड़ी तैयारी
देश के कई बड़े शहरों में नगर निगम और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नई ड्रेनेज लाइनें बिछाई जा रही हैं. कई जगह पुराने नालों को चौड़ा किया जा रहा है, जबकि कुछ शहरों में भूमिगत वाटर टनल बनाने का काम चल रहा है. इसके अलावा AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं ताकि बारिश शुरू होते ही संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा सके. कुछ नगर निगम मोबाइल ऐप और कंट्रोल रूम के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग की तैयारी भी कर रहे हैं. इससे प्रशासन को पहले से पता चल सकेगा कि किस इलाके में जलभराव का खतरा ज्यादा है.
मानसून में बदल सकती है शहरों की तस्वीर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ये प्रोजेक्ट सही तरीके से लागू हुए तो आने वाले समय में शहरों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है. लोगों को हर मानसून में सड़क बंद होने, ट्रैफिक जाम और घरों में पानी भरने जैसी परेशानियों से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही व्यापार, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की जिंदगी भी कम प्रभावित होगी. हालांकि इसके लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिम्मेदारी भी जरूरी है. अगर लोग नालों में कचरा फेंकना बंद करें और जल निकासी व्यवस्था को साफ रखें, तो स्मार्ट ड्रेनेज सिस्टम और ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है. आने वाले वर्षों में यही तकनीक शहरों को सुरक्षित, आधुनिक और मानसून-फ्रेंडली बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

