Tuesday, June 23, 2026
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वोडाफोन आइडिया पर बरसे 1100 करोड़, क्या शेयरों में फिर आएगा जबरदस्त उछाल?


नई दिल्ली. टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन आइडिया ने अपनी लिक्विडिटी और वित्तीय स्थिति को सुधारने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. कंपनी के बोर्ड ने सोमवार, 22 जून को हुई बैठक में प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी सूर्याजा इन्वेस्टमेंट्स को ₹11 प्रति वारंट की कीमत पर 430 करोड़ वारंट आवंटित करने की मंजूरी दी है. इस सौदे के तहत कंपनी को कुल रकम का 25 प्रतिशत यानी ₹2.75 प्रति वारंट के हिसाब से ₹1,182.50 करोड़ की शुरुआती राशि प्राप्त हो चुकी है. बाकी बची 75 प्रतिशत रकम का भुगतान प्रमोटर ग्रुप को अगले 18 महीनों के भीतर करना होगा, जिसके बाद प्रत्येक वारंट को ₹10 के फेस वैल्यू और ₹1 के प्रीमियम पर एक फुली पेड-अप इक्विटी शेयर में बदल दिया जाएगा. बिज़नेस और फाइनेंस की भाषा में वारंट एक वित्तीय साधन (Financial Instrument) होता है, जो किसी निवेशक को एक निश्चित समय के भीतर किसी कंपनी के शेयर को एक पहले से तय कीमत पर खरीदने का अधिकार देता है.

वारंट को इस खबर के संदर्भ में समझें तो प्रमोटर (आदित्य बिड़ला ग्रुप) ने आज ही कंपनी के साथ शेयर का भाव ₹11 प्रति शेयर पर लॉक कर दिया है. हालांकि, उन्होंने अभी पूरा पैसा नहीं चुकाया है बल्कि सिर्फ 25% रकम यानी ₹2.75 प्रति वारंट के हिसाब से ₹1,182.50 करोड़ का ‘बयाना’ (डाउन पेमेंट) देकर इन 430 करोड़ वारंट को बुक कर लिया है. अब प्रमोटर के पास अगले 18 महीने का वक्त है, जिसमें वे कभी भी बाकी बचा 75% पैसा कंपनी को चुकाकर इन वारंट को असली शेयरों में बदलवा सकते हैं. इसे बिल्कुल आसान उदाहरण से ऐसे समझें कि जैसे आपने आज ₹11 लाख की जमीन पसंद की और ₹2.75 लाख टोकन मनी देकर रेट लॉक करवा लिया कि अगले 18 महीने में बाकी का पैसा देकर आप रजिस्ट्री अपने नाम करा लेंगे. ठीक इसी तरह कॉरपोरेट जगत में कंपनियां तुरंत कैश जुटाने और बड़े निवेशकों को भविष्य में शेयर देने के लिए वारंट का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अगर 18 महीने की सीमा पार हो गई तो इन वारंट की कोई वैल्यू नहीं रह जाएगी.

कंपनी इस फंड और बैंकों से होने वाली बातचीत के जरिए आने वाले तीन सालों में अपने परिचालन को पूरी तरह बदलने की उम्मीद कर रही है. हालांकि, इस रिलीफ के बावजूद वोडाफोन आइडिया के सामने कर्ज चुकाने और अपनी ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को सुधारने की चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं.

₹1 लाख करोड़ के कैशफ्लो का टार्गेट और कर्ज का भारी बोझ

वोडाफोन आइडिया ने अगले तीन सालों में अपने कैशफ्लो को तीन गुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है ताकि वह अपने भारी-भरकम सरकारी और वित्तीय बकाये को समय पर चुका सके:

  • स्पेक्ट्रम और एजीआर का कुल बकाया: 31 मार्च 2026 तक कंपनी पर स्पेक्ट्रम फीस के रूप में ₹1,27,360 करोड़ और एजीआर (AGR) के रूप में ₹25,254 करोड़ का पुराना बकाया (ब्याज सहित) मौजूद है.
  • तीन साल का रीपेमेंट शेड्यूल: बोफा (BofA) ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को अगले तीन सालों में ₹49,000 करोड़ का स्पेक्ट्रम भुगतान करना है. यह भुगतान पहले साल ₹7,000 करोड़ से शुरू होकर, दूसरे साल ₹15,000 करोड़ और तीसरे साल बढ़कर ₹27,000 करोड़ हो जाएगा. मार्च 2027 तक कंपनी को ₹7,076 करोड़ की किस्त चुकानी है.
  • स्पेक्ट्रम भुगतान में कोई बदलाव नहीं: कंपनी के मैनेजमेंट ने साफ किया है कि फिलहाल वे स्पेक्ट्रम भुगतान की समयसीमा या शर्तों में सरकार से किसी भी तरह के बदलाव या एडजस्टमेंट की मांग नहीं कर रहे हैं. इसके अलावा, कंपनी को ₹5,000 से ₹6,000 करोड़ का बैंक कर्ज भी चुकाना है.

सरकारी राहत से सालों बाद मुनाफे में लौटी कंपनी

शनिवार को घोषित हुए चौथी तिमाही के नतीजों में वोडाफोन आइडिया ने बाजार को चौंकाते हुए ₹51,970 करोड़ का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) दिखाया है. हालांकि, इस आंकड़े के पीछे की जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है.

सरकार ने हाल ही में वोडाफोन आइडिया के एजीआर बकाये को ₹87,695 करोड़ से घटाकर ₹64,046 करोड़ कर दिया है. इस वैधानिक राहत (Statutory Relief) को एक्सेप्शनल आइटम के रूप में बुक करने के कारण ही कंपनी का बैलेंस शीट मुनाफे में नजर आ रहा है, जबकि इसके स्पेक्ट्रम बकाये में कोई बदलाव नहीं हुआ है. अगर इस सरकारी राहत को हटा दिया जाए, तो कंपनी को इस तिमाही में ₹5,515 करोड़ का ऑपरेशनल घाटा हुआ है, और पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल ऑपरेशनल लॉस ₹24,059 करोड़ रहा है. यही कारण है कि कंपनी नेटवर्क अपग्रेडेशन के साथ-साथ फंड जुटाने के लिए सभी बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ लगातार बातचीत कर रही है.

शेयरों की स्थिति

वोडाफोन आइडिया के शेयर पिछले कुछ समय से कई पॉजिटिव खबरों के बल पर लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं. इसमें सरकार की ओर से कर्ज में छूट मिलना और कुमार मंगलम बिड़ला के हाथों में वीआई की कमान आना जैसी खबरें शामिल हैं. अब फिर कंपनी के हाथों में कैश आना शेयरधारकों के मन में विश्वास पैदा कर सकता है. हालांकि, वारंट में शेयरों की कीमत बाजार भाव से कम रखी गई है, इसलिए देखना होगा कि मंगलवार को बाजार इस खबर पर अपना रिएक्शन कैसे देता है. आपको बता दें कि पिछले एक महीने में कंपनी का शेयर पिछले 6 महीने में 22 परसेंट से ज्यादा  बढ़ा है. हालांकि, सोमवार को वीआई के शेयर एनएसई पर 0.67 फीसदी की गिरावट के साथ 14.82 रुपये पर बंद हुए.

(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले एक्सपर्ट से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)



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